अर्थशास्त्र-II कक्षा 12वीं अध्याय 3 नोट्स | Economics-II Class 12 Chapter 3 Questions And Answers In Hindi Easy PDF

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अर्थशास्त्र-II कक्षा 12वीं अध्याय 3 नोट्स | Economics-II Class 12 Chapter 3 Questions And Answers In Hindi Easy PDF, 12 वीं अर्थशास्त्र अध्याय 3 Question Answer, Class 12 economics chapter 3 question answer assamese medium


मुद्रा एवं बैंकिंग | MONEY AND BANKING


मुद्रा की परिभाषा- मुद्रा का विकास – आवश्यकताओं तथा विनिमय की अधिक आवश्यकता के कारण मुद्रा का विकास हुआ। मुद्रा के प्राथमिक कार्य – मुद्रा के विकास से वस्तु विनिमय प्रणाली की सभी सीमाएँ दूर   हो गई हैं।

(i) कानूनी परिभाषा – मुद्रा वह कोई भी वस्तु है जिसे कानून द्वारा मुद्रा घोषित किया जाता है।

(ii) कार्यात्मक परिभाषा – मुद्रा वह कोई भी वस्तु है जो विनिमय के माध्यम, मूल्य के माप, मूल्य के संचय तथा स्थगित भुगतान के मान का कार्य करती है।

मुद्रा के कार्य इस प्रकार हैं :

(i) यह एक विनिमय का माध्यम है, 

(ii) मुद्रा मूल्य का माप है,

(iii) यह स्थगित भुगतानों का माप है, 

(iv) यह मूल्य का संचय है।

आदेश मुद्रा (Flat Money) – उस मुद्रा को कहते हैं जो सरकार के आदेश के आधार पर जारी की जाती है।

न्यास मुद्रा (Fiduciary Money) – वह मुद्रा जिसका आधार प्राप्तकर्ता तथा के बीच परस्पर विश्वास होता है। पूर्ण कार्य मुद्रा- वह मुद्रा जिसका मौद्रिक मूल्य = वस्तु मूल्य ।

साख-मुद्रा- मौद्रिक मूल्य वस्तु मूल्य से अधिक होता है। भारतीय मौद्रिक प्रणाली- पत्र मुद्रा पर आधारित है।

मुद्रा की पूर्ति मुद्रा की पूर्ति एक स्टॉक अवधारणा है। किसी समय बिंदु पर जनता के पास उपलब्ध मुद्रा का स्टॉक ही मुद्रा की पूर्ति कहलाता है। मुद्रा का अर्थ- वह वस्तु किसका उपयोग सामान्य विनिमय माध्यम के रूप में किया जाए, उसे मुद्रा कहते हैं।

मुद्रा पूर्ति – मुद्रा पूर्ति या मुद्रा की पूर्ति का तात्पर्य एक अर्थव्यवस्था में उपलब्ध मुद्रा की राशि है। 



भारतीय मुद्रा- भारत की प्रमुख मुद्रा पत्र मुद्रा है। भारत में पत्र निर्गमन का अधिकार भारतीय रिजर्व बैंक को है। एक रुपए के नोट को छोड़कर अन्य सभी पत्र मुद्रा का निर्गमन रिजर्व बैंक द्वारा किया जाता है।

वाणिज्य बैंक- मुद्रा की प्राप्ति तथा ग्राहकों की माँग पर राशि का भुगतान करने वाली संस्थाएँ वाणिज्य बैंक कहलाती हैं। 

केंद्रीय बैंक- केंद्रीय बैंक वह बैंक है जो एक देश में साख नियंत्रण तथा करंसी नोट के निर्गमन के लिए स्थापित किया जाता है।

केंद्रीय बैंक की परिभाषा – केंद्रीय बैंक वह बैंक है जो पूरे राष्ट्र की अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करता है तथा नोट के निर्गमन व बैंकों के लिए ब्याज दर के निर्धारण में इसका एकाधिकार होता है।


Economics-II Class 12 Chapter 3 Questions And Answers In Hindi


Class12th 
Chapter Nameमुद्रा एवं बैंकिंग
Chapter numberChapter 3
PART B
Book NCERT
Subjectअर्थशास्त्र | Economics
Medium Hindi | हिंदी
Study Materialsनोट्स & question answer
Download PDFClass 12 economics-II Chapter 3 pdf
II कक्षा 12वीं अध्याय 3 नोट्स Economics II Class 12 Chapter 3 Questions And Answers In Hindi Easy PDF

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (VERY SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


1. मुद्रा का एक प्रमुख कार्य लिखो।

Ans. मुद्रा का प्रमुख कार्य विनिमय का माध्यम है। विनिमय माध्यम के रूप में प्रयोग से समय एवं श्रम दोनों की बचत होती है। मुद्रा के

2. वैधानिक या कानूनी मुद्रा क्या होती है ? 

Ans. वह मुद्रा जो सरकार के आदेश पर जारी की जाती है उसे वैधानिक या कानूनी मुद्रा कहते हैं । कानूनी मुद्रा की स्वीकार्यता के बारे में किसी को कोई संदेह नहीं होता है ।

3. ‘मूल्य संग्रह के रूप में मुद्रा’ के आशय को स्पष्ट करो। 

Ans. मुद्रा की धारक कहीं भी किसी भी समय वांछित वस्तु अथवा सेवा का क्रय कर सकता है क्योंकि मुद्रा में कानूनी स्वीकार्यता गुण विद्यमान होता है। इसलिए मुद्रा में मूल्य संग्रह की क्षमता धारणीयता होती है।

4. बैंक दर क्या होती है ? 

Ans. वह दर जिस पर अर्थव्यवस्था का केन्द्रीय बैंक व्यापारिक बैंकों को ऋण प्रदान करता अथवा अग्रिम प्रदान करता है अथवा उनके बिलों पर कटौती करके उनका निपटारा करता है।

5. संवैधानिक तरलता अनुपात का अर्थ लिखो । 

Ans. वह दर जिस पर व्यापारिक बैंकों की माँग जमाओं की माँग को पूरा करने के लिए न्यूनतम आरक्षित नकद दोष रखना पड़ता है उसे बैंक दर कहते हैं ।

6. नकद जमा अनुपात (CRR) का अर्थ लिखिए ।

Ans. वह दर जिस पर व्यापारिक बैंक अपनी जमाओं का कुछ भाग केन्द्रीय बैंकों के पास जमा करवाना पड़ता है उसे नकद जमा अनुपात (CRR) कहते हैं ।.. 

7. व्यापारिक बैंक का अर्थ लिखो।

Ans. व्यापारिक बैंक से अभिप्राय उस बैंक से है जो लाभ कमाने के उद्देश्य से बैंकिंग हार्य करता है । व्यापारिक जमाएँ स्वीकार करते हैं तथा जनता को उधार देकर साख का सृजन करते हैं ।

8. ओवर ड्रॉफ्ट का अर्थ लिखो।

Ans. वह सुविधा जिसके द्वारा खातेदार जमा करवायी राशि से अधिक निकासी कर सकता है उसे ओवर ड्राफ्ट की सुविधा कहते हैं । 

9. ऋण व अग्रिम का अर्थ लिखिए।

Ans. ऋणी को बैंक द्वारा प्रदत्त ऋण या अग्रिम से अभिप्राय, निश्चित मात्रा में उसके खाते न हस्तांतरित की गई राशि से है जिसे ऋणी अपनी इच्छा अनुसार प्रयोग में ला सकता है। 

10. साख का अर्थ लिखिए। 

Ans. किसी दूसरे व्यक्ति, फर्म, बैंक अथवा संगठन आदि को ऋण या वित्त उपलब्ध कराना साख कहलाता है ।

11. प्राथमिक जमा का अर्थ लिखो। 

Ans. लोगों द्वारा बैंक में जमा करायी गई नकद राशि को प्राथमिक जमा कहते हैं ।

12. द्वितीयक जमा का अर्थ लिखिए।

Ans. जब बैंक ऋणी को नकद ऋण देने के बजाय ग्राहक के खाते में राशि जमा करवाता इसे द्वितीयक जमा कहते हैं।

13. नकद जमा अनुपात व साख गुणक का संबंध लिखिए।

Ans. नकद जमा अनुपात तथा साख गुणक में विपरीत संबंध होता है।

14. क्या वस्तु विनिमय प्रणाली मुद्रा का फलन है ?

Ans. नहीं, वस्तु विनिमय प्रणाली मुद्रा का फलन नहीं है । 

15. मुद्रा के कार्य लिखिए ।

Ans. मुद्रा के निम्नलिखित कार्य हैं- 

(i) मुद्रा विनिमय के माध्यम का काम करती है ।

(ii) मुद्रा मूल्य के माप का कार्य करती है। 

(iii) मुद्रा स्थगित भुगतानों का माप है। 

(iv) मुद्रा मूल्य का संचय होता है। 

16. दोहरे संयोग की आवश्यकता को समझाइए । 

Ans. दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रायः विभिन्न लोग आपस में विभिन्न कार की वस्तुओं का लेन-देन करते हैं। अतः किसी एक व्यक्ति की वस्तु दूसरे व्यक्ति की रूरत को पूरा करती है तथा दूसरे व्यक्ति की वस्तु पहले व्यक्ति की जरूरत को पूरा करती है ।

17. साख मुद्रा को संक्षेप में बताइए । 

Ans. ऐसी मुद्रा का मौद्रिक मूल्य, इसमें निहित वस्तु मूल्य से अधिक होता है अन्य शब्दों इस मुद्रा पर अंकित मूल्य उस वस्तु के मूल्य से अधिक होता है जिससे यह वस्तु बनायी जाती है। साख मुद्रा निम्न प्रकार की होती है- 

(i) सांकेतिक सिक्के, 

(ii) प्रतिनिधि सांकेतिक द्रा, 

(iii) केन्द्रीय बैंक द्वारा जारी/प्रचलित नौट, 

(iv) बैंकों के पास जमाएँ ।


लघु उत्तरीय प्रश्न | SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS


1. वस्तु विनिमय व्यापार की लागतों को समझाइए । 

Ans. वस्तु विनिमय के द्वारा व्यापार करने में अनावश्यक रूप से जो लागत उत्पन्न हो है उन्हें वस्तु विनिमय की व्यापार लागते कहते हैं। ये लागते निम्न प्रकार की होती हैं

(i) तलाश लागतक्रेता अपने उत्पाद के बदले वांछित वस्तु देने वाले व्यक्ति की खो करता है। इस खोज में लगे समय को तलाश लागत कहते हैं। 

(ii) प्रतीक्षा की अनुपयोगिता-व्यापार करने वाला जिस वस्तु को बेचना चाहता है। उ उस व्यक्ति की तलाश में इन्तजार करना पड़ता है जो उसे खरीदना चाहता है। यह काम बहु जटिल और समय लेने वाला होता है क्योंकि बहुत सारे लोगों में उपयुक्त व्यक्ति एवं सं

की तलाश बहुत मुश्किल है।

2. मूल्य मान की इकाई के रूप में मुद्रा का कार्य उदाहरण सहित समझाइए ।

Ans. अर्थव्यवस्था में मुद्रा ही वह इकाई होती है जिसके रूप में वस्तुओं और सेवाओं: अंकित किए जाते हैं । इसलिए मुद्रा को लेने की इकाई भी कहा जाता है । अर्थव्यवस्था की मुद्रा के रूप में वस्तु अथवा सेवा का मूल्य उसकी कीमत कहलाता है ।

 वस्तु या सेवा क कीमत से अभिप्राय वस्तु की एक इकाई के बदले प्राप्त होने वाला मौद्रिक इकाइयों की संख्या होती है । उदाहरण के लिए यदि एक कमीज की कीमत 125 रुपये है तो इसका अभिप्राय कि 125 रुपयों के बदले एक कमीज मिल सकती है। 

मौद्रिक इकाइयों में सभी वस्तुओं एवं सेवाओं का मूल्य अभिव्यक्त करने से वस्तुओं एवं सेवाओं के आपस में मूल्य निश्चित करने में मदद मिलती है । जैसे यदि कमीज एवं पैन्ट की कीमत क्रमशः 125 रुपये एवं 250 रुपये है तो एक पेन्ट का मूल्य मान दो कमीज का होगा। इससे लेखांकन का कार्य सरल हो जाता है। मुद्रा का मूल्यमान क्रय शक्ति होती है जो कीमत स्तर के विलोम होती है । 

3. मूल्य के भण्डार के रूप में मुद्रा की भूमिका बताइए ।

Ans. मूल्य की इकाई एवं भुगतान का माध्यम लेने के बाद मुद्रा मूल्य के भण्डार का कार्य भी सहजता से कर सकती है । मुद्रा का धारक इस बात से आश्वस्त होता है कि वस्तुओं एवं सेवाओं के मालिक उनके बदले मुद्रा को स्वीकार कर लेते हैं । अर्थात् मुद्रा में सामान्य स्वीकृति का गुण होने के कारण मुद्रा का धारक उसके बदले कोई भी वांछित चीज खरीद सकता है। इस प्रकार, मुद्रा मूल्य भण्डार के रूप में कार्य करती है। 

मुद्रा के अतिरिक्त स्थायी परिसंपत्तियों जैसे भूमि, भवन एवं वित्तीय परिसंपत्तियों जैसे बचत, ऋण पत्र आदि में भी मूल्य संचय का गुण होता है और इनसे कुछ आय भी प्राप्त होती है। परन्तु इनके स्वामी को इनकी देखभाल एवं रखरखाव की जरूरत होती है, इनमें मुद्रा की तुलना में कम तरलता पायी जाती है और भविष्य में इनका मूल्य कम हो सकता है। अतः मुद्रा मूल्य भण्डार के रूप अन्य चीजों से बेहतर है। 

4. मुदा आपूर्ति की M, अवधारणा को स्पष्ट कीजिए।

Ans. मुद्रा आपूर्ति की M, अवधारणा M, की तुलना में अधिक विस्तृत है । इसका प्रतिपादन मिल्टन फ्रिडमैन ने किया था। M को समग्र मुद्रा साधन भी कहते है। क्योंकि यह अर्थव्यवस्था के समग्र मौद्रिक संसाधन (AMR) को व्यक्त करता है। इसमें M तथा बैंकों की शुद्ध समय अवधि जमाएँ शामिल की जाती हैं। अर्थव्यवस्था में M, मुद्रा की तरलता M से कम परन्तु M, से ज्यादा होती है। जनता द्वारा धारित करेंसी, बैंकों के पास गजमा तथा बैंक जमाओं में नियल परिवर्तन के द्वारा M, में भी परिवर्तन होते हैं। M, M बैंक के पास जमा निबल सावधि जमाएँ । 

3. किसी अर्थव्यवस्था में मुद्रा के मुख्य कार्य क्या होते हैं ? 

Ans. किसी अर्थव्यवस्था में मुद्रा के निम्नलिखित कार्य होते हैं-

(i) मूल्यमान की इकाई या लेखे की इकाई का काम चलाना ।

(ii) मुद्रा विभिन्न प्रकार के लेन-देनों में विनिमय के माध्यम का कार्य करती है ।

(iii) भविष्य में स्थगित भुगतानों के मानक का काम करती है । 

(iv) क्रय शक्ति एवं मूल्य का भण्डार ।

6. वस्तु विनिमय की कठिनाइयाँ क्या हैं ? 

Ans. वस्तु विनिमय की कठिनाइयाँ निम्नलिखित हैं- (i) वस्तुओं एवं सेवाओं के मुख्य के मापन की सर्वमान्य इकाई का अभाव इससे लेखांकन की उपयुक्त व्यवस्था के विकास में बाया उत्पन्न होती है।

(ii) विनिमय का आधार द्विपक्षीय संयोग होता है। व्यवहार में हमेशा और सर्वत्र दो पक्ष के बीच वांछित संयोग का तालमेल होना असंभव होता है। 

(iii) भविष्य में स्थगित भुगतानों के संदर्भ में निम्न कठिनाइयों उत्पन्न हो सकती हैं-

(a) भविष्य में भुगतान के रूप में दी जाने वाली वस्तुओं-सेवाओं के गुणधर्मो को लेकर दोनों पक्षों के बीच झगड़ा हो सकता है ।

(b) भविष्य में भुगतान की वस्तु पर असहमति हो सकती है ।

(c) भुगतान अनुबन्ध के समय अन्तराल में भुगतान की जाने वाली वस्तु का मूल्य में ज्यादा हो सकता है।

(iv) सामान्य क्रय शक्ति के भण्डारण में कठिनाई । 

7. मुद्रा की आपूर्ति क्या होती है ?

Ans. अर्थव्यवस्था में सभी प्रकार की मुद्राओं के योग को मुद्रा की आपूर्ति कहते हैं । मुद्रा की आपूर्ति में दो बातों का ध्यान रखना आवश्यक है । 

(i) मुद्रा की आपूर्ति एक स्टॉक है। यह किसी समय बिन्दु के उपलब्ध मुद्रा की सारी मात्रा को दर्शाता है ।

(ii) मुद्रा के स्टॉक से अभिप्राय जनता द्वारा धारित स्टॉक से है। जनता द्वारा धारित स्टॉक समस्त स्टॉक से कम होता है।

भारतीय रिजर्व बैंक देश में मुद्रा की आपूर्ति के चार वैकल्पिक मानों के आँकड़े प्रकाशित करता है । ये मान क्रमश: (M, M2, M3, M2 ) है । = जनता के पास करेन्सी + जनता की बैंकों में माँग जमाएँ जहाँ

M2 = M + डाकघरों के बचत बैंकों में बचत जमाएँ। M3 = M2 + बैंकों की निबल समयावधि योजनाएँ

M4 = M3 + डाकघर बचत संगठन की सभी जमाएँ 

8. भारत में किस प्रकार की मौद्रिक व्यवस्था का अनुसरण होता है ?

Ans. भारत में इस समय कागजी मुद्रा मान या प्रबन्धित मुद्रा मान की व्यवस्था का अनुसरण किया जा रहा है। भारत की मानक मुद्रा विधि प्राह्मीय मुद्रा है। इसी के प्रयोग से हमारी सरकारी सभी दायित्वों को निपटाती है। भारतीय रिजर्व बैंक ने कागज से बनी मानक मुद्रा को स्वीकार किया है। 

करेंसी मुद्रा के माध्यम से बड़े लेन-देन किये जाते हैं, परन्तु छोटे-छोटे भुगतानों के लिए सस्ती धातुओं के बने सिक्कों का प्रयोग होता है की 1 कानूनी स्वीकार्य सीमित होती है। 

भारत में एक रुपये के नोट और सिक्कों को छोड़कर सभी करेंसी नोटों का निर्गमन रिजर्व बैंक करता है। एक रुपये के नोट एवं सिक्के भारत सरकार जारी करती है ।

भारत में करेंसी निर्गमन व्यवस्था न्यूनतम सुरक्षित निधि व्यवस्था है । मुद्रा जैसी मूल्यवान धातु में नहीं बदला जा सकता है अर्थात् भारत की करेंसी अपरिवर्तनीय है।

9. व्यावसायिक बैंकों के क्या कार्य हैं ?

Ans. व्यावसायिक बैंकों के निम्नलिखित कार्य है-

(i) आम जनता की जमाएँ स्वीकार करना । 

(ii) ग्राहकों को अग्रिम एवं उधार देना ।

(iii) अधिविकर्ष ।

(iv) हुण्डियों की कटौती ।

(v) जमा राशियों का निवेश । 

(vi) बैंक अभिकर्ता (एजेन्ट) के रूप में भी कार्य करते हैं।

(vii) अन्य कार्य जैसे- 

(a) विदेश मुद्रा का क्रय-विक्रय । 

(b) पर्यटक चैक, उपहार जारी करना । 

(c) कीमती चीजों को लॉकरों में संभालकर रखना । (d) नए शेयरों आदि में निर्गमन पर अविक्रित अंश को खरीदने का आश्वासन देना तथा निजी आधार पर दुनिय

निवेशकों के बीच प्रतिभूतियों की बिक्री की व्यवस्था करना । 

10. मुद्रा स्टॉक (भण्डार) के विभिन्न मापक क्या हैं ?

Ans. भारतीय रिजर्व बैंक ने मुद्रा की माप के लिए संकुचित व व्यापक दोनों दृष्टिको अपनाए हैं। ये निम्नलिखित है-

(i) M, इसमें निम्नलिखित को शामिल करते हैं-

(a) जनता के पास करेंसी नोट एवं सिक्के 

(b) माँग जमाएँ । 

(c) रिजर्व बैंक के पास अन्य जमाएँ ।

(ii) M2 इसमें निम्न को शामिल किया जाता है- 

(a) m1

(b) डाकघरों के पास बचत जमाएँ ।

(iii) M, इसमें निम्न को शामिल किया जाता है-

(b) व्यापारिक एवं सहकारी बैंकों की अवधि जमाएँ। यह मुद्रा का व्यापक दृष्टिकोण है।

(iv) M4 इसमें निम्नलिखित को शामिल करते हैं-

(a) M3

(b) डाकपर बचत संगठन की कुल जमाएँ (NSC) को छोड़कर। 

11. वस्तु विनिमय की कठिनाइयाँ लिखिए।

Ans. वस्तु विनिमय की कठिनाइयाँ – 

(1) इस प्रणाली में वस्तुओं एवं सेवाओं का मूल्य मापने की कोई सर्वमान्य इकाई नहीं होती है। अतः वस्तु विनिमय लेखांकन की उपयुक्त व्यवस्था के विकास में एक बाधा है। 

(ii) आवश्यकताओं का दोहरा संयोग विनिमय का आधार होता है। व्यवहार में दो पक्षों में हमेशा एवं सब जगह परस्पर वांछित संयोग का तालमेल होना बहुत मुश्किल होता है। 

(iii) स्थगित भुगतानों को निपटाने में कठिनाई आती है। दो पक्षों के बीच सभी लेन- देनों का निपटारा साथ के साथ होना मुश्किल होता है अतः वस्तु विनिमय प्रणाली में स्थगित भुगतानों के संबंध में वस्तु की किस्म ‘गुणवत्ता’ मात्रा आदि के संबंध में असहमति हो सकती है। 

12. न्याय मुद्रा का अर्थ लिखिए ।

Ans. न्याय मुद्रा से अभिप्राय उस मुद्रा से है जो प्राप्तकर्त्ता एवं अदाकर्ता के बीच परस्पर विश्वास पर आधारित होती है । जैसे-चैक न्यास मुद्रा का उदाहरण है । इसे भुगतान के लिए स्वीकार करना प्राप्तकर्त्ता व अदाकर्त्ता के आपसी विश्वास पर निर्भर करता है । 

13. मुद्रा के अंकित व वस्तु मूल्य का अर्थ लिखिए।

Ans. अंकित मूल्य- किसी पत्र व धातु मुद्रा पर जो मूल्य लिखा होता है, उसे मुद्रा का अंकित मूल्य कहते हैं। जैसे 500 रुपये के नोट का अंकित मूल्य 500 रु. होता है ।

वस्तु मूल्य-उस पदार्थ के मूल्य को वस्तु मूल्य कहते हैं जिससे मुद्रा बनायी जाती है । जैसे-चांदी के सिक्के का धातु मूल्य उस सिक्के के निर्माण में प्रयुक्त धातु के मूल्य के समान होता है

14. साख मुद्रा का अर्थ लिखिए।

Ans. ऐसी मुद्रा जिसका अंकित मूल्य उसके धातु मूल्य से अधिक होता है, साख कहलाती है। जैसे- भारतीय मुद्रा के 100 रु. के नोट का वस्तु मूल्य उसके अंकित मूल्य से.. बहुत कम है।

15. भारत में सिक्के सीमित विधि ग्राह्य हैं जबकि कागजी नोट असीमित विधिग्राह्य है। इस कथन का आशय लिखिए।

Ans. भुगतानों का निपटारा करने के लिए भारत के सिक्कों का प्रयोग केवल एक सीमा तक किया जा सकता है, जबकि भुगतानों का निपटारा करने के लिए नोटो का प्रयोग असीमित मात्रा में किया जा सकता है। 

6. भारत में नोट जारी करने की क्या व्यवस्था है ? 

Ans. भारत में नोट जारी करने की व्यवस्था को न्यूनतम सुरक्षित व्यवस्था कहा जाता है । जारी की गई मुद्रा के लिए न्यूनतम सोना व विदेशी मुद्रा सुरक्षित निधि में रखा जाता है।

17. भारत में न्यूनतम सुरक्षित व्यवस्था के बारे में बताइए।

Ans. भारत में मुद्रा जारी करने के लिए न्यूनतम सुरक्षित व्यवस्था को अपनाया जाता है। सुरक्षित निधि में 115 करोड़ रुपये का सोना तथा 85 करोड़ रुपये की विदेशी प्रतिभूतियों । इस प्रकार कुल 200 करोड़ रुपये की सुरक्षित निधि के बाद भारत का केन्द्रीय बैंक समस्त मुद्रा जारी करता है।

18. भारत में मुद्रा की पूर्ति कौन करता है ? 

Ans. भारत में मुद्रा की पूर्ति करता है-

(i) भारत सरकार। (ii) केन्द्रीय बैंक (iii) व्यापारिक बैंक । 19. बचत खाता क्या होता है ? Ans. इसमें जमा की निष्क्रिय राशियों जमा की जाती हैं। इस खाते में सबसे कम ब्याज प्राप्त होता है क्योंकि जमाकर्त्ता इस खाते में से किसी भी समय रुपया निकाल सकते हैं। सामान्य रूप से जमाकर्त्ता एक वर्ष में 100 बार इस खाते में जमा राशि निकाल सकते हैं।

20. वाणिज्य बैंक कोषों का अन्तरण किस प्रकार करते हैं? 

Ans. वाणिज्य बैंक एक स्थान से दूसरे स्थान पर धन राशि को भेजने में सहायक होते हैं । यह राशि साख पत्रों, जैसे-चेक, ड्राफ्ट, विनिमय बिल आदि की सहायता से एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजी जाती है।

21. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक का आशय स्पष्ट कीजिए। 

Ans. 2 अक्टूबर, 1975 को 5 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक स्थापित किए गए। इनका कार्यक्षेत्र एक राज्य के या दो जिले तक सीमित रखा गया। ये छोटे और सीमित किसानों, खेतीहर मजदूरों, ग्रामीण दस्तकारों, लघु उद्यमियों, छोटे व्यापार में लगे व्यवसायियों को ऋण प्रदान करते हैं । इन बैंकों का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था का विकास करना है। ये बैंक ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि, लघु उद्योगों, वाणिज्य, व्यापार तथा अन्य क्रियाओं के विकास में सहयोग करते हैं


दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर (LONG ANSWER TYPE QUESTIONS)


1. मुदा के प्रयोग से किस प्रकार वस्तु विनिमय की कठिनाइयों का अन्त हो जाता है ? 

Ans. मुद्रा के प्रयोग से वस्तु विनिमय की कठिनाइयों का अन्त निम्न प्रकार से होता है—

(i) वस्तु विनिमय में सेवाओं एवं वस्तुओं का मूल्य मापने के लिए सर्वमान्य इकाई नहीं होती है। मुद्रा के प्रयोग से वस्तुओं एवं सेवाओं के मूल्य को मापने के लिए मुद्रा का प्रयोग सर्वमान्य इकाई के रूप में होता है। अतः मुद्रा के प्रयोग से लेखांकन का विकास हुआ है। 

(ii) वस्तु विनिमय में संयोग तलाशने में अनावश्यक रूप से धन एवं समय की हानि होती है। लेन-देन में मुद्रा का प्रयोग करने से विनिमय प्रक्रिया सरल बन जाती है। मुद्रा विनिमय के में संयोग तलाशे बिना प्रत्यक्ष रूप से विनिमय का कार्य कम समय में एवं सरलता से हो जाता है।

(iii) वस्तु विनिमय में भविष्य में स्थगित भुगतानों पर वस्तु के गुण धर्म, वस्तु एवं वस्तु के मूल्य मान के संदर्भ में असहमति उत्पन्न होती है। परन्तु मुद्रा के प्रयोग से स्थगित भुगतानों की माप मुद्रा के द्वारा की जाती है। 

(iv) वस्तु विनिमय में क्रय शक्ति का भण्डारण संभव नही होता है । परन्तु मुद्रा के प्रयोग से मूल्य के भण्डार का काम आसानी से हो जाता है। मुद्रा का प्रयोग कभी भी वस्तुओं एवं सेवाओं को खरीदने के लिए किया जा सकता है। इस प्रकार मुद्रा मूल्य को संचय करने में भन्डारण का काम करती है।

2. मुद्रा का वर्गीकरण कैसे होता है ?

Ans. मुद्रा का वर्गीकरण मुद्रा स्वरूपी नान तथा वस्तु स्वस्थपी मान के आधार पर किया जाता है। ये वर्गीकरण निम्न प्रकार हैं- 

(i) सम्पूर्णं मूर्तिमान मुद्रा-इस प्रकार की मुद्रा का मौदिक मान वस्तु मान के बराबर होता है । इनका गैर-मौद्रिक प्रयोग मान भी मौद्रिक प्रयोग मान के बराबर रहता है जैसे सोने एवं चाँदी के सिक्के, इस प्रकार की मुद्रा का प्रचलन पुराने समय में होता था । 

(ii) प्रतिनिधि पूर्ण मूर्ति मान मुद्दा इस प्रकार की मुद्रा कागजी होती है। यह मुद्रा पूर्ण मूर्तिमान मुद्रा की मात्रा या सोने चाँदी को भण्डार में जमा कराने पर प्रचलन में आती हैं । दूसरे शब्दों में, यह पूर्ण मूर्तिमान मुद्रा की मात्रा अथवा सोने चाँदी जैसे बहुमूल्य धातुओं को भण्डार गृह में जमा कराने की रसीद होती है। 

परन्तु इस मुद्रा पर अंकित राशि उतनी ही मुद्रा का अपना कोई मूल्य नहीं होता है । परन्तु इस मुद्रा पर अंकित राशि उतनी ही मुद्रा को व्यक्त करती है जितना उस मुद्रा का वस्तु मान होता है। इस प्रकार की मुद्रा प्रयोग से बहुमूल्य एवं भारी धातुओं को इधर-उधर ले जाना नहीं पड़ता है। 

(ii) साख मुद्रा-इस प्रकार की मुद्रा का मौद्रिक मूल्य वस्तु मूल्य से ज्यादा होता है । दूसरे शब्दों में जिस चीज का इस्तेमाल करके मुद्रा बनाई जाती है उसका मूल्य अंकित मौद्रिक मूल्य से बहुत कम होता है । साख मुद्रा के निम्नलिखित प्रकार हैं-

(a) सांकेतिक सिक्के,

(b) प्रतिनिधि सांकेतिक मुद्रा,

(c) केन्द्रीय बैंक द्वारा जारी प्रचलित नोट, 

(d) बैंकों के पास जमाएँ ।

3. भारत में केन्द्रीय बैंक के कार्य संक्षेप में समझाइए ।

Ans. भारत में भारतीय रिजर्व बैंक केन्द्रीय बैंक है। इसके निम्नलिखित कार्य हैं-

(i) मुद्रा निर्गमन करना-भारत में मुद्रा जारी करने का अधिकार केवल RBI के पास है । केवल भारत सरकार का वित्त मंत्रालय एक रुपये के नोट जारी करता है बाकी सभी प्रकार के नोटों को जारी करने एवं सिक्कों की ढलाई का काम RBI करता है। सिक्कों एवं सभी प्रकार के नोटों को प्रचलन में लाने का काम RBI को ही करना पड़ता है । न्यूनतम संरक्षित कोष (200 करोड़ रुपये के सोना, चाँदी आदि बहुमूल्य धातुएँ एवं विदेशी मुद्रा के रूप में) रखकर RBI मुद्रा जारी करता है।

(ii) सरकार का बैंकर RBI, केन्द्र एवं सभी राज्य सरकारों का बैंक है। सभी सरकारी चालू खाते के नकद कोष RBI के पास जमा होते हैं। RBI सरकार की ओर से भुगतान भी करता है और भुगतान स्वीकार भी करता है। RBI निपटाता है। RBI जरूरत पड़ने पर सरकार

को अल्पाविषि ऋण भी देता है । ऋण के आकार, व्याज दर, समय एवं अन्य शर्तों के संबंध में यह बैंक सलाहकार के रूप में कार्य करता है । संक्षेप में, केन्द्रीय बैंक बैंकिंग एवं वित्तीय मामलों में सरकार का परामर्शदाता है।

(iii) बैंकों का बैंक तथा पर्यवेक्षक बैंकों के बैंक के रूप में RBI सभी बैंकों के नकद कोष के एक अंश को अपने पास सुरक्षित रखता है, बैंकों को कम समय अवधि के लिए नकदी प्रदान करता है, केन्द्रीयकृत समाशोधन और धन विप्रेषण का काम करता है । नकद कोष में जमा राशि का प्रयोग करके RBI अन्तिम आश्रयदाता के रूप में व्यापारिक बैंकों को उधार

देता है। RBI सभी बैंकों के व्यावसायिक कामों का पर्यवेक्षण, नियमन और नियंत्रण करता है । बैंकों को लाइसेंस देना, शाखाओं का विस्तार करना, परिसंपत्तियों की तरलता, प्रबंधन, विलय आदि कार्य भी RBI करता है । 

(iv) मुद्रा की आपूर्ति तथा साख का नियंत्रण RBI भारत में मुद्रा और साख की आपूर्ति को नियंत्रित करता है। इस काम के लिए RBI मौद्रिक नीति की रचना करता है। 

मौद्रिक नीति उपकरणों के रूप में निम्नलिखित उपाय करता है-

(a) बैंक दर नीति-बैंक को उधार देने के लिए ब्याज दर का निर्धारण करना । 

(b) खुले बाजार की क्रियाएँ- सरकारी प्रतिभूतियों को व्यापारिक बैंक के साथ क्रय-विक्रयकरना ।

(c) सुरक्षित कोष अनुपातों में परिवर्तन सुरक्षित कोष अनुपात दो प्रकार के होते हैं-

(i) नकद जमा अनुपात (CRR) । 

(ii) संवैधानिक तरलता अनुपात (SLR ) ।

(iii) साख की राशनिंग अथवा प्रोत्साहन ।

(iv) नैतिक आग्रह ।

4. अर्थव्यवस्था में व्यापारिक बैंकों की भूमिका पर चर्चा कीजिए। 

Ans. बैंकिंग व्यवसाय का मुख्य काम जमा स्वीकार करना एवं उधार देना है। बैंक जनसामान्य के चैक द्वारा आहरणीय जमा भी स्वीकार करते हैं। व्यापारिक बैंकों के निम्नलिखित कार्य हैं- 

(i) जमा स्वीकार करना-व्यापारिक बैंक आम जनता से तीन तरह के खाता में जमाएँ. स्वीकार करता है। ये खाते इस प्रकार हैं-

(a) चालू खाता जमा-इस प्रकार के खाते व्यावसायिक लोगों के लिए होते हैं। इनमें जमा राशि पर बैंक को ब्याज का भुगतान नहीं करना पड़ता है। इन खातों में जमा माँग देय होती है। बैंक इनपर प्रशुल्क लेता है ।

(b) सावधि जमाएँ – इस प्रकार की जमाएँ निश्चित समय अवधि के लिए स्वीकार की जाती हैं । ये माँग जमाएँ नहीं होती हैं। इन जमाओं पर बैंकों को ब्याज का भुगतान करना पड़ता है। 

(c) बचत खाता जमाएँ निश्चित चैकों के साथ में भी माँग जमा होती हैं । इन जमाओं पर ब्याज का भुगतान भी किया जाता है । 

(ii) ऋण देना- व्यापारिक बैंक सुरक्षित कोष के अलावा अन्य जमाओं का प्रयोग उधार देने के लिए करता है। इससे बैंकों को आमदनी प्राप्त होती है। व्यापारिक बैंक निम्न प्रकार के ऋण प्रदान करते हैं-

(a) नकद साख-ग्राहक की सुपात्रता के आधार पर व्यापारिक बैंक अपने ग्राहकों को उधार देने की सीमा तय करते हैं। नकद साख का निर्धारण ग्राहकों की परिसंपत्तियों एवं स्टॉक के आधार पर होता है । ग्राहक प्रयुक्त राशि पर ब्याज का भुगतान करते हैं । ऋण न चुकाए जाने पर बैंक ग्राहक की परिसंपत्ति पर कब्जा कर सकता है।

(b) मांग उधार-ऐसे ऋण बैंक कभी भी वापिस मांग सकता है। ऋण की राशि एकमुश्त उधार लेने वाले के खाते में जमा करा दी जाती है। ब्याज भी तुरन्त लगाया जाता है। इस प्रकार के ऋण प्रायः शेयर दलाल लेते हैं।

(c) अल्पावधि ऋण इस प्रकार के ऋणों में व्यक्तिगत उधार, कामचलाऊ पूजा उधार तथावरीयता प्राप्त क्षेत्रों को प्रदान किए जाते है। इस ऋण की राशि पर खातेदार के खाते में अन्तरण होने के बाद तुरंत ब्याज लगाया जाता है।

(iii) अधिविकर्ष चालू खाते के ग्राहक जमा राशि से निश्चित सीमा तक अधिक राशि का चैक जारी करने की सुविधा प्राप्त करते हैं। इस पर ब्याज दर नकद साख से कम होती है क्योंकि इस कार्य के लिए वित्तीय परिसंपतियों को प्रतिमूर्ति के रूप में स्वीकार किया जाता है जिनका नकदीकरण सरत होता है। 

(iv) हुण्डियों की कटौती प्राप्त हुई वस्तुओं के मूल्य को चुकाने के दायित्व को स्वीकार करने को हुण्डी कहते हैं । बैंक हुण्डी की राशि पर कुछ कमीशन लेकर शेष राशि हुण्डी धारक को अदा कर देता है।

(v) जमा राशियों का निवेश-व्यपारिक बैंक सरकारी प्रतिभूतियों, अनुमोदित प्रतिभूतियों आदि में निवेश करते हैं। ये प्रतिभूतियाँ सरल होती हैं और इनका नकदीकरण आसान होता है। 

(vi) अभिकर्ता के रूप में-व्यापारिक बैंक आजकल कमीशन एजेन्ट का काम भी बखूबी निभा रहे है । कमीशन लेकर बैंक अपने ग्राहकों के लिए अनेक सेवाएँ उपलब्ध कराते है। जैसे- नकद कोषों का अन्तरण, नकद संग्रहण, प्रतिभूतियों का क्रय-विक्रय, बिल एवं किश्तों का भुगतान, ट्रस्टी एवं प्रबन्धकीय सलाहकार सेवाएँ आदि । 

(vii) अन्य कार्य- (a) विदेशी मुद्रा का क्रय-विक्रय, (b) पर्यटक एवं उपहार करना, (c) कीमती चीजों को लॉकरों में संभालकर रखना आदि । 

5. साख मुदा क्या है ? साख मुद्रा के विभिन्न प्रकार संक्षेप में समझाइए ।

Ans. साख मुद्रा, मुद्रा का वह प्रकार है जिसका मौद्रिक मूल्य, वस्तु मूल्य से अधिक होता है। जिस चीज से मुद्रा बनायी जाती है उसका मूल्य, साख मुद्रा के मूल्य से कम होता है। साख मुद्रा कई प्रकार की होती है। जैसे- (i) सांकेतिक सिक्के भारत में 25 पैसे, 50 पैसे, 1 रुपये, 2 रुपये एवं 5 रुपये के सिक्के सांकेतिक सिक्के हैं । इन सिक्कों का मौद्रिक मूल्य इनमें लगी धातु के मूल्य से कम होता है। जैसे-2 रुपये के सिक्के को पिघलाकर प्राप्त धातु को बेचकर 2 रुपये प्राप्त करना बहुत मुश्किल है।

(ii) प्रतिनिधि सांकेतिक मुद्रा-यह सांकेतिक सिक्कों या चाँदी के भण्डार की पावती रसीद होती है । सिक्के और चाँदी के भण्डार का वस्तुमान कागज पर लिखे मौद्रिक मान से कम होता है। 

(iii) केन्द्रीय बैंकों द्वारा जारी प्रचलित नोट-आजकल विश्व की सभी अर्थव्यवस्थाओं में इस प्रकार की मुद्रा का चलन ज्यादा है। भारत में करेंसी नोट जारी करने का काम RBI करता है । भारतीय रिजर्व बैंक का गवर्नर धारक को नोट में अंकित राशि अदा करने का वचन अदा करता है।

(iv) बैंकों के पास जमाएँ-सामान्य जनता बैंकों में विभिन्न प्रकार के खातों में जमाएँ कराती हैं । ये जमाएँ बैंकों के लिए दायित्व होते हैं। ग्राहक चैक के माध्यम से परस्पर इनका अन्तरण कर सकते हैं। बैंक चैक वाले जमा खातों के बराबर मुद्रा अपने पास सुरक्षित निधि कोष में नहीं रखते हैं । इस प्रकार चैक जमाओं से बैंक मुद्रा का काम चलाते हैं।


CLASS 12 NCERT SOLUTION IN ENGLISHCLASS12 NCERT SOLUTION IN HINDI
Historyइतिहास
Geography भूगोल
Political science राजनीति विज्ञान
English SubjectResult
Hindi SubjectHistory answer keys
Sociology समाज शास्त्र

FAQs


Q. वस्तु विनिमय में अन्वेषण की लागत लिखिए । 

Ans. वस्तु विनिमय प्रणाली में ऐसे विकल्प की तलाश होती है जिसमें एक व्यक्ति की जरूरत की वस्तु दूसरे व्यक्ति के पास होती है तथा दूसरे व्यक्ति की जरूरत की वस्तु पहले व्यक्ति के पास है । ऐसे विकल्प को तलाशने में समय एवं ऊर्जा दोनों खर्च होते हैं । इसी को अन्वेषण की लागत कहते हैं ।

Q. वाणिज्य बैंक का आशय लिखिए। 

Ans. व्यापारिक बैंक से अभिप्राय उस बैंक से है जो लाभ कमाने के उद्देश्य से वै कार्य करते हैं। इन्हें मिश्रित पूँजी वाले बैंक कहते हैं। ये मुद्रा साख में लेन-देन करते है


कक्षा 12 अर्थशास्त्र एनसीईआरटी नोट्स


  1. व्यष्टि अर्थशास्त्र
  2. उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत
  3. उत्पादन तथा लागत
  4. पूर्ण प्रतिस्पर्धा की स्थिति में फर्म का सिद्धांत
  5. बाजार संतुलन
  6. प्रतिस्पर्धारहित बाजार
  1. परिचय
  2. राष्ट्रीय आय का लेखांकन
  3. मुद्रा एवं बैंकिंग
  4. आय का निर्धारण
  5. सरकार: कार्य और विषय क्षेत्र
  6. खुली अर्थव्यवस्था: समष्टि अर्थशास्त्र

वस्तुनिष्ठ प्रश्न MCQs


  1. व्यष्टि अर्थशास्त्र
  2. उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत
  3. उत्पादन तथा लागत
  4. पूर्ण प्रतिस्पर्धा की स्थिति में फर्म का सिद्धांत
  5. बाजार संतुलन
  6. प्रतिस्पर्धारहित बाजार
  1. परिचय
  2. राष्ट्रीय आय का लेखांकन
  3. मुद्रा एवं बैंकिंग
  4. आय का निर्धारण
  5. सरकार: कार्य और विषय क्षेत्र
  6. खुली अर्थव्यवस्था: समष्टि अर्थशास्त्र

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