NCERT Class 12 Business Studies Chapter 11 Notes in Hindi विपणन प्रबंध Pdf

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NCERT Class 12 Business Studies Chapter 11 Notes in Hindi विपणन प्रबंध Pdf

कक्षा | Class12th 
अध्याय | Chapter11
अध्याय का नाम | Chapter Nameविपणन प्रबंध | MARKETING MANAGEMENT
बोर्ड | Boardसभी हिंदी बोर्ड
किताब | Book एनसीईआरटी | NCERT
विषय | Subjectव्यवसाय अध्ययन | business studies
मध्यम | Medium हिंदी | HINDI
अध्ययन सामग्री | Study Materialsप्रश्न उत्तर | Question answer
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विपणन प्रबंध | MARKETING MANAGEMENT

पाठ की प्रमुख बातें – विपणन प्रबंध के अन्तर्गत सबसे पहले ग्राहकों की आवश्यकताओं का पता लगाया जाता है और उसी की अनुरूप उत्पादन क्रियाओं का समायोजन किया जाता है। तत्पश्चात् विपणन कार्यक्रम तैयार किया जाता है जिसके अन्तर्गत उत्पाद, मूल्य, वितरण, विज्ञापन आदि के संबंध में निर्णय लिये जाते हैं। 

ग्राहक संतुष्टि को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। विपणन क्रिया में उत्पादन से पूर्व की क्रियाओं से लेकर विक्रय के उपरान्त सम्पन्न की जाने वाली सेवाओं को भी सम्मिलित किया जाता है। 

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विपणन प्रबंध अवधारणा एक प्रबंधकीय प्रक्रिया है जिसके अन्तर्गत उपभोक्ताओं एवं अन्य ग्राहकों की आवश्यकताओं के अनुसार वस्तुओं का उत्पादन एवं संग्रह किया जाता है तथा उन्हें समुचित सन्तुष्टि प्रदान करके उचित लाभ अर्जित किया जाता है।

एक साधारण व्यक्ति की दृष्टि में विपणन तथा विक्रयण दोनों में कोई अन्तर नहीं है अपितु दोनों मूल रूप में पर्यायवाची हैं। दोनों का ही उद्देश्य विक्रय में वृद्धि करना एवं लाभ कमाना है। किन्तु वास्तविकता यह है कि दोनों में बहुत अन्तर है। विपणन का क्षेत्र विक्रयण की तुलना में व्यापक है। विपणन में विक्रयण को भी सम्मिलित करते हैं। विपणन का कार्य उन समस्त क्रियाओं का निर्देशन करना है जिनके माध्यम से विपणन लक्ष्यों एवं

उद्देश्यों को प्राप्त किया जा सकता है। विपणन कार्य ग्राहक से प्रारंभ होते हैं और ग्राहक तक उत्पाद अथवा वस्तुएँ पहुँच जाने एवं उसे संतुष्टि प्राप्त होने पर समाप्त हो जाते हैं। ‘विपणन मिश्रण’ शब्द का प्रयोग मूल रूप से हार्वर्ड बिजिनस स्कूल (Harvard Business School) के प्रोफेसर नील वोर्डन ने किया था। 

ऐसे समस्त विपणन निर्णय, जोकि विक्रय को प्रेरित या प्रोत्साहित करते हैं, ‘विपणन मिश्रण’ कहलाते हैं। विपणन मिश्रण व्यवसाय के प्रत्येक क्षेत्र के लिये महत्त्वपूर्ण होता है, चाहे वह कीमत क्षेत्र हो या संवर्द्धन क्षेत्र, वितरण क्षेत्र हो या उत्पादन क्षेत्र । 

उत्पाद मिश्रण ( विपणन मिश्रण का प्रमुख तत्त्व / अंग / चर है। इसके अन्तर्गत उत्पाद के रंग, रूप, आकार, डिजाइन, रेखा (पंक्ति), समूह आदि के बार निर्णय लिये जाते हैं। इन्हीं को उत्पादन मिश्रण कहते हैं। व्राण्ड एक पहचान चिन्ह है जिसे सरलता से उपभोक्ता द्वारा पहचाना जा सकता है तथा जो

उत्पादक अथवा निर्माता के उत्पाद को किसी अन्य प्रतियोगी उत्पादों से भेद करता है। लेबलिंग से आशय ऐसी विट या कागज या सील से है जिसके द्वारा उत्पाद के बारे में महत्त्वपूर्ण सूचनायें दी जाती हैं। लेवल पैकिंग का ही एक भाग है और या तो पैकिंग वाले डिब्बे, थैले पर ही ये सूचनाएँ छाप दी जाती हैं या फिर अलग से कोई चिन्ह या कागज लगा दिया जाता है। 

पैकेजिंग उत्पादन नियोजन से संबंधित कला एवं विज्ञान है जो उसके सुरक्षित वितरण एवं उपयोग हेतु आधार पत्र तथा लपेटने के सामान को बनाने एवं उत्पाद को उक्त आधारपत्र में रखने अथवा लपेटने से संबंधित है। सामान्यतः एक विपणनकर्ता के सम्मुख रीति-रिवाज संबंधी दो विकल्प होते हैं। प्रथम तो वह

‘ऊँची ‘ मूल्य रीति-नीति (High Price Strategy) या ‘सार तत्त्व निकालना’ या मलाई उतारना (Skimming the Cream) का प्रयोग कर सकता है और द्वितीय ‘नीची’ मूल्य रीति-नीति (Low Price Strategy) का प्रयोग कर सकता है जिससे बाजार प्रवेश में आसानी रहे। मूल्य से आशय किसी उत्पाद या सेवा के लिये ग्राहक से वसूल की जाने वाली मुद्रा से है।

मात्र वस्तुओं का उत्पादन करना ही पर्याप्त नहीं है अपितु इन्हें उत्पादन के स्थान से उपभोक्ताओं तक पहुँचाना भी आवश्यक है। वस्तुओं (उत्पादों) के उत्पादन अथवा निर्माण के स्थान से उपभोक्ताओं तक पहुँचाने तक की क्रिया को भौतिक वितरण मिश्रण कहते हैं।

वितरण माध्यम वस्तुओं को उत्पादक (निर्माता) से उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का यह मार्ग है जिसमें वे सभी व्यक्ति एवं संस्थाएँ सम्मिलित की जाती है जो बिना किसी परिवर्तन के इनको का कार्य करती है। 

निर्माताओं अथवा उत्पादकों को अपनी वस्तुओं को अन्तिम उपभोक्ताओं क पहुंचाने के लिये वितरण के किसी उपयुक्त माध्यम का चुनाव करना पड़ता है। उपयुक्त सम्यम वह है जो मितव्ययी हो तथा अधिकतम लाभप्रद हो।

“संबर्द्धन से आशय उन सभी क्रियाओं से है जोकि ग्राहकों को उत्पाद या सेवा के संबंध में सूचना “देने और उन्हें क्रय करने के लिये प्रोत्साहित करने हेतु सम्पन्न की जाती है। इन सभी का मूलभूत उद्देश्य उत्पाद अथवा सेवा की बिक्री में वृद्धि करना है। 

विक्रय संवर्द्धन से आशय उन समस्त क्रियाओं से लगाया जाता है जिनमें विज्ञापन, व्यक्तिगत विक्रय तथा उन सभी प्रयासों को सम्मिलित किया जाता है जिनसे विक्रय में वृद्धि होती है। विज्ञापन से आशय सम्भावित ग्राहकों को अपने उत्पाद अथवा सेवा की जानकारी देना तथा उन्हें क्रय करने के लिये प्रेरित करना है।

व्यक्तिगत विक्रय विक्रय की यह विधि है जिसमें क्रेता एवं विक्रेता दोनों आमने-सामने होते हैं। विक्रेता द्वारा क्रेता के सम्मुख वस्तुएँ प्रस्तुत की जाती हैं और क्रेता को संतुष्ट करते हुये वस्तुओं के विक्रय का प्रयास एवं विक्रय किया जाता है। इसका उद्देश्य उत्पाद के प्रति जानकारी उत्पन्न करना, रुचि पैदा करना, व्राण्ड प्राथमिकता का विकास करना, कीमतों के संबंध में बातचीत करना आदि होता है।

जन सम्पर्क अवधारणा व्यावसायिक संस्था तथा जन साधारण के मध्य संचार संबंधों की स्थापना है। इसके अन्तर्गत जन साधारण में व्यावसायिक संस्था की ख्याति तथा पारस्परिक समझदारी त्यापित करने एवं उसे बनाये रखने का प्रयास किया जाता है। 

जन साधारण में अमुक व्यावसायिक संस्था और उसके उत्पादों के बारे में क्या धारणा है, इस बात से व्यावसायिक संगठन को अवगत कराया जाता है। यदि जन साधारण में उसके प्रति शंकाएँ, भ्रान्तियाँ अथवा अफवाहें फैली हुई हैं तो उसके उन्मूलन के संबंध में तर्क प्रस्तुत किये जाते हैं एवं प्रभावी ढंग से सच्चाई को उजागर किया जाता है।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (VERY SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)

Q. 1. विपणन का क्या अर्थ है ? (What is the meaning of marketing )

Ans. विपणन का अर्थ (Meaning of Marketing ) —— पुरानी विपणन अवधारणा के अनुसार, वस्तुओं के क्रय-विक्रय को ही विपणन कहते हैं किन्तु आधुनिक विपणन अवधारणा के अनुसार, विपणन एक व्यापक शब्द है जिसमें वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन से पूर्व की जाने बाली क्रियाओं से लेकर उनके विक्रय, वितरण और आवश्यक विक्रयोपरान्त सेवाओं तक को सम्मिलित किया जाता है।

Q. 2. विपणन के उद्देश्य का वर्णन करें। (Discuss the objectives of marketing.)

Ans. विपणन के उद्देश्य (Objectives of Marketing)—

(i) माँग का सृजन करना, (ii) उपभोक्ता सन्तुष्टि, (iii) बाजार हिस्सेदारी, (iv) साख एवं छवि, (v) लाभ सृजन तथा (vi) समाज सेवा ।

Q.3. विपणन के कार्य को लिखें। (Write the functions of marketing)

Ans. विपणन के कार्य (Functions of Marketing) — विपणन के कार्य निम्नलिखित हैं-

I. विनिमय कार्य (Exchange Functions) (i) क्रय करना, (ii) एकत्रीकरण तथा विक्रयण। (iii) II. उत्पादन नियोजन (Product Planning ) (i) विक्रय योग्य उत्पाद की किस्म, मात्रा तथा भार का निर्धारण, (ii) ब्राण्ड एवं ट्रेडमार्क का निर्धारण, (iii) लेबल का निर्धारण, (iv) पैकेजिंग का निर्धारण, (v) विक्रय शर्तों का निर्धारण तथा (vi) विक्रय उपरान्त सेवाएँ।

11. मूल्य निर्धारण (Pricing) (i) मूल्य निर्धारण घटक, (ii) लाभ की मात्रा (1) ट की मात्रा (2) सरकारी नियन्त्रण तथा (v) प्रतियोगिता का स्तर [Vi] भौतिक वितरण (Physical Distribution) भौतिक वितरण से आम समय पर सही स्थान पर मात्रा में एवं साथ में उत्पाद को पहुंचाना है।

Q4. विपणन प्रबन्ध का महत्व बतायें। (Discuss the importance of marketing management.)

Ans. विपणन विपणन प्रशन्स का महत्व (Importance of Marketing/Marketing Management)-

1. समाज के लिए महत्त्व (Importance for Society) (i) रोजगार प्रदान करना, (ii) रहन-सहन का उच्च स्तर प्रदान करना, (iii) वितरण लागतों में कमी, (iv) मन्दी से (v) ग्राहकों के ज्ञान में वृद्धि, (vi) चपन की सुविधा, (vii) जीवन स्तर में वृद्धि, (viii) ग्राहक सन्तुष्टि

II. फर्म निर्माता के लिए महत्त्व (Importance to the Firm / Manufacturer) (i) व्यावसायिक नियोजन तथा निर्णयन में सहायक, (ii) आय-सृजन में सहायक, (iii) समाज और फर्म के मध्य सम्प्रेषण में सहायक।

Q5. विपणन प्रबन्ध द्वारा उपयोगिता के सृजन को समझायें। (Explain the creating of utility by marketing management.)

 Ans. विपणन प्रबन्ध द्वारा उपयोगिता का सृजन (Creating of Utility by Market. |ing Management)—(1) समय उपयोगिता, (ii) स्थान उपयोगिता तथा (iii) अधिकार / स्वामित्व उपयोगिता।

Q.6. विपणन मिश्रण का क्या अर्थ है ? (What is meaning of marketing mix ?)

Ans. विपणन मिश्रण का अर्थ (Meaning of Marketing mix ) ऐसे समस्त विपणन निर्णय, जोकि विक्रम को प्रेरित अथवा प्रोत्साहित करते हैं, विपणन मिश्रण कहलाते हैं।

Q.7. विपणन मिश्रण के तत्त्व का वर्णन करें। (Discuss the elements of marketing mix.).

Ans. विपणन मिश्रण के तत्त्व/अंग/चर (Elements/Components / Variables of Marketing Mix)—(1) उत्पाद, (ii) मूल्य, (iii) स्थान तथा (iv) संवर्द्धन । इन्हें चार ‘पी’ (‘P’) के नाम से भी जाना जाता है।

Q. 8. उत्पाद का क्या अर्थ है ? (What is meaning of product ?)

Ans. उत्पाद का अर्थ (Meaning of Product ) उत्पाद से आशय किसी भौतिक वस्तु अथवा सेवा से है जिससे क्रेता की आवश्यकताओं की सन्तुष्टि होती है।

Q. 9. उत्पाद के आयाम को लिखें। (Write the product dimension.) 

Ans. उत्पाद के आयाम (Product Dimensions) (i) उत्पाद पंक्ति, (ii) उत्पाद आकार, (iii) उत्पाद मात्रा, (iv) उत्पाद विस्तार, (v) उत्पाद भार, (vi) उत्पाद किस्म एवं प्रमाप, (vii) उत्पाद ब्राण्ड, (viii) उत्पाद गहराई, (ix) उत्पाद लेबलिंग / ट्रेडमार्क, (x) उत्पाद पैकेजिंग, (xi) उत्पाद विकास, (xii) उत्पाद परीक्षण तथा (xiii) विक्रय उपरान्त सेवाऐं।

लघु उत्तरीय प्रश्न (SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)

Q. 1. विपणन तथा विक्रय में अन्तर कीजिए । (Distinguish between Marketing and Selling.)

Ans. विपणन व विक्रय में अन्तर (Difference between Marketing and Selling)—इन दोनों शब्दों में काफी अन्तर पाया जाता है जो निम्नलिखित प्रकार से है विपणन (Marketing)

विपणन (Marketing)विक्रय (Selling)
1. विपणन का प्रमुख उद्देश्य मानवीय आवश्यकताओं की सन्तुष्टि करना है। केवल लाभ के लिए बिक्री करना नहीं।1. विक्रय का प्रमुख उद्देश्य केवल लाभ प्राप्ति के लिए वस्तुओं एवं सेवाओं का अधिक- से-अधिक विक्रय करना है।
2. विपणन का क्षेत्र अपेक्षाकृत अधिक विस्तृत होता है क्योंकि इसके अन्तर्गत वस्तु के उत्पादन से पूर्व की क्रियाओं से लेकर विक्रय के बाद तक की सभी क्रियाओं को सम्मिलित किया जाता है।2. विक्रय क्षेत्र संकुचित होता है। क्योंकि इसके C अन्तर्गत केवल विक्रय और विक्रेताओं से C सम्बन्धित क्रियाएँ सम्मिलित की जाती हैं।
3. विपणन की विचारधारा आधुनिक है।3. विक्रय की विचारधारा परम्परागत है।
4. विपणन में ग्राहक सन्तुष्टि पर अधिक ध्यान दिया जाता है।4. विक्रय में वस्तु विक्रय पर अधिक ध्यान क केन्द्रित किया जाता है।
5. विपणन का आशय उपभोक्ता को जन्म देना है।5 विक्रय का अभिप्राय उन उपभोक्ताओं को ग्रा वस्तु बेचना है।

Q.2. विपणन की प्रकृति एवं इसके विभिन्न दृष्टिकोण बतलाइए । (Explain the Nature and Various Approaches of Marketing.) 

Ans. विपणन की प्रकृति एवं विपणन सम्बन्धी विभिन्न दृष्टिकोण (Nature of Marketing and Various Approaches) निम्नलिखित विभिन्न दृष्टिकोणों से विपणन की प्रकृति को स्पष्ट किया जा सकता है-

1. वस्तुओं एवं सेवाओं का वितरण दृष्टिकोण (Distribution of Goods and Services Approach)

2. जीवन स्तर दृष्टिकोण (Standard of living Approach)

3. उपयोगिता का सृजन दृष्टिकोण (Utility creation Approach)

4. आय उत्पत्ति दृष्टिकोण (Revenue Generating Approach)

5. संस्थागत दृष्टिकोण (Institutional Approach)

6. क्रियात्मक दृष्टिकोण (Functional Approach) 7. कला एवं विज्ञान दृष्टिकोण (Art and Science Approach)

8. प्रणालीगत दृष्टिकोण (The System Approach)

9. सामाजिक विपणन दृष्टिकोण (Social Marketing Approach)

Q.3. पैकेजिंग तथा पैकिंग में अन्तर बतलाइए । (Discuss difference between Packings and Plackging.) 

Ans. पैकिंग का अर्थ (Meaning of Packing) — पैकिंग का अर्थ है वस्तुओं को बाँधना

जिससे वस्तुएँ क्षति, क्षय तथा टूट-फूट आदि के जोखिमों से सुरक्षित हो जाएँ वस्तुओं को नुकसान अधिकतर, या तो एक स्थान से दूसरे स्थान पर लाने ले जाने में होता है अथवा उस समय होता है, जब उन्हें स्टोर किया जाये। पैकिंग इन दोनों ही अवस्थाओं में हानि की सम्भावना को कम करता है।

पैकेजिंग का अर्थ (Meaning of Packaging) पैकेजिंग निर्माताओं के द्वारा उत्पादन के समय ही वस्तुओं को अलग-अलग मात्रा में पैकिटों में सील बन्द करना है। इसका आशय वस्तुओं भिन्न-भिन्न नाप-तोल वाले डिब्बों, बोतलों, टिनो, बोरियों, पीपों आदि में भरना है जिससे उन्हें सुविधापूर्वक क्रय कर सकें। 

पैकेजिंग में भिन्न पैकिंग थोक और फुटकर, दोनों प्रकार के पारो में की जा सकती है। थोक व्यापार में पैकिंग का आकार व स्वरूप प्रचलन तथा सम्हाल की सुविधा, दोनों ही तत्त्वों पर निर्भर करता है। उदाहरणस्वरूप, गेहूं की बोरी, एक बिंवटल वजन के लिए बनाई जाती है, क्योंकि एक मजदूर एक बार में केवल इतना ही वजन उठा सकता है। फुटकर व्यापार में पैकिंग का आकार इस बात पर निर्भर करता है कि उपभोग के लिए कितना वजन सर्वश्रेष्ठ है। 

Q. 4. विपणन एवं विपणन विचार के बीच अन्तर कीजिए । (Differentiate Between Marketing and Marketing Concept.) 

Ans. विपणन तथा विपणन विचार में अन्तर (Difference between Marketing Concept and Marketing )– विपणन (Marketing) और विपणन विचार (Marketing Concept) समान अर्थ वाले शब्द नहीं है। इन दोनों में बहुत अधिक अन्तर है। विलयम जे. स्टेन्टन (William J. Stanton) के अनुसार, “प्रशासकों को विपणन एवं विपणन विचार के बीच महत्त्वपूर्ण अन्तर को समझना चाहिए। 

विपणन विचार एक दर्शन ( Philosophy), एक रियर अकार, व्यवस्था है अथवा एक व्यावसायिक चिन्तन का तरीका है। जबकि विपणन एक प्रक्रिया है या व्यवसाय में कार्य करने का तरीका है। यह स्वाभाविक है कि चिन्तन, सोचने के तरीके से कार्य करने के तरीके का निर्धारण होता है।” जोन ई. वेकफील्ड (John E. Wakefield) के अनुसार, “विपणन विचार एक व्यवसाय दर्शन है।” इस प्रकार विपणन विचार वह व्यवसाय दर्शन है जो ग्राहक की आवश्यकता की सन्तुष्टि पर बल देता है। 

Q.5. विपणन प्रबन्ध के क्या उद्देश्य हैं ? (What are the objectives of marketing management ?)

Ans. 1. ग्राहक सन्तुष्टि को अधिकतम करके न्यायपूर्ण लाभ कमाना। 2. बाजार की कुल माँग में अपने अंश को अधिकतम करना। 3. नये उत्पादों का विकास करना। 4. नये बाजारों में प्रवेश करना। 5. संस्था का विकास करना।

Q.6. उत्पाद में क्या-क्या सम्मिलित हैं ? (What are included in product ? )

Ans. विलियम जे. स्टेन्टन (William J. Stanton) के अनुसार, “उत्पाद गोचर एवं अगोचर (Tangible and intangible) गुणों का वह सम्मिश्रण है जिसमें पैकेजिंग, रंग, कीमत, उत्पाद की ख्याति, फुटकर व्यापारों की प्रतिष्ठा और उत्पादक तथा फुटकर व्यापारी की सेवाएँ सम्मिलित हैं। जिन्हें उपभोक्ता अपनी इच्छाओं अथवा आवश्यकताओं की पूर्ति के रूप में स्वीजर कर सकता है।”

Q.7. विपणन मिश्रण से आप क्या समझते हैं ? विपणन मिश्रण के तत्त्वों का कीजिए ? (What do you understand by marketing mix ? Explain the elements | of marketing mix.)

Ans. अर्थ-विक्रय में सफलता प्राप्त करने के उद्देश्य से विक्रेता विभिन्न नीतियों का मिश्रण (Mix) करता है। यही विपणन मिश्रण कहलाता है।

परिभाषा – विपणन मिश्रण की प्रमुख परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं-

1. डॉ. आर. एस. डावर (Dr. RS. Davar) के अनुसार, “निर्माताओं के द्वारा बाजार में सफलता प्राप्त करने के लिए प्रयोग की जाने वाली नीतियों विपणन मिश्रण (Marketing- Mix) का निर्माण करती हैं।”

2. कीली एवं लेजर (Keeley & Lazar) के अनुसार, “विपणन मिश्रण उस बड़ी बैटरी की युक्तियों से बना है जिसको क्रेताओं को किसी विशेष वस्तु की खरीद करने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से काम में लाया जा सकता है।”

3. फिलिप फोटलर (Philip Kotler) के अनुसार, “एक फर्म का उद्देश्य अपने विपणन चरों के लिए सर्वोत्तम विन्यास (Setting) को खोजना है। यह विन्यास विपणन मिश्रण कहलाता है ।

Q.8. विपणन मिश्रण के तत्त्व बतलाइए। (Give elements of Marketing-Mix.)

Ans. विपणन मिश्रण के तत्त्व (Elements of the Marketing Mix) — मैकार्थी ने विपणन मिश्रण के चार तत्त्व बताए हैं- 1. वस्तु (Product), 2. स्थान (Place), 3. संबर्द्धन (Promotion) व 4. मूल्य (Price) जबकि लिपसन व डार्लिंग (Lipson & Darling) ने भी चार तत्त्व बताएँ हैं— 1. वस्तु, 2. विक्रय, 3. शर्ते, 3. वितरण, 4. संचार ।

Q. 9. विपणन क्षेत्र में प्रबन्ध प्रक्रिया को स्पष्ट कीजिए। (Clarify the Management Process in Management.)

Ans. विपणन क्षेत्र में प्रबन्ध प्रक्रिया (Management Process in Marketing)—

विपणन प्रबन्ध प्रक्रिया का निर्माण सामान्यतः निम्नांकित तत्त्वों अथवा कदमों से होता है- 1. विपणन उद्देश्यों का निर्धारण, 2. विपणन योजनाओं का निर्माण, 3. विपणन क्रियाओं का संगठन एवं समन्वय, 4. स्टाफिंग एवं साधन एकत्रीकरण, 5. विपणन क्रियाओं का संचालन एवं निर्देशन तथा 6. विपणन प्रयासों का विश्लेषण एवं मूल्यांकन 

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (LONG ANSWER TYPE QUESTIONS)

Q. 1. विपणन का क्या अर्थ है ? इसके महत्त्व का विवेचन कीजिए। (What is meant by Marketing ? Explain its importance.)

Ans. विपणन का अर्थ (Meaning of Marketing) विपणन शब्द का प्रयोग दो अव में किया जाता है—

प्राचीन अर्थ (Old Concept)– प्राचीन अर्थ में विपणन के अन्तर्गत वे सभी क्रियाएँ सम्मिलित की जाती हैं जो वस्तुओं को उत्पादन केन्द्रों से उठाकर उनको उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए की जाती है। इसके अन्तर्गत क्रय, विज्ञापन, संग्रह, यातायात, श्रेणीकरण आदि क्रियाएँ आती है। किन्तु यह अर्थ पहले लिया जाता था तथा इसमें उत्पादन विकास, उत्पादन नियोजन, विपणन,

अनुसंधान आदि क्रियाएँ सम्मिलित नहीं थीं। आधुनिक अर्थ (Modern Concept) विपणन कार्य वस्तुओं के उत्पादन आरम्भ करने से पहले ही आरम्भ हो जाता है तथा विक्रय होने के बाद भी निरन्तर चलता है। उत्पादन आरम्भ करने से पहले बाजार का विश्लेषण करके यह देखा जाता है कि उपभोक्ताओं को किस वस्तु की आवश्यकता है, कितनी वस्तु की आवश्यकता है तथा कहाँ और कब आवश्यकता है। यह जान लेने के पश्चात्

उपभोक्ताओं को उनकी रुचि व माँग के अनुरूप वस्तु उपलब्ध कराने के लिए उत्पादन नियोजन किया जाता है। उत्पादन हो जाने तथा विक्रय के प्रारम्भ हो जाने के बाद यह भी देखा जाता है कि ग्राहक उस वस्तु से सन्तुष्ट है या नहीं। अगर नहीं है तो क्यों ? यह कार्य निरन्तर चलता रहता है तथा वस्तु में सुधार कर उसे उपभोक्ता की आवश्यकता के अनुरूप बनाने का प्रयत्न किया जाता है। यह क्रिया विपणन की प्रमुख क्रिया चन गई है। इनके अतिरिक्त उत्पादन से उपभोक्ता तक माल को पहुँचाने की सभी क्रियाएँ इसमें आ जाती हैं। 

विपणन की परिभाषाएँ (Definitions of Marketing) अध्ययन की सुविधा की दृष्टि से परिभाषाओं को दो भागों में वोट दिया गया है-

1. पुरानी या संकीर्ण (Narrow) विचारधारा वाली परिभाषाएँ।

II. नयी, विस्तृत, ग्राहक, अभिमुखी (Customer Oriented) परिभाषाएँ।

I. पुरानी, संकीर्ण या उत्पाद अभिमुखी परिभाषाएँ (Old, Narrow or Product oriented Definitions) – इस विचारधारा से सम्बन्धित निम्नलिखित परिभाषाएँ हैं—

1. प्रो. पाइल (Pyle) के मत में, “विपणन में क्रय एवं विक्रय दोनों ही क्रियाएँ शामिल होती हैं।” 2. टाउसले, क्लार्क एवं क्लार्क (Tousley, Clark and Clark) के अनुसार, “विपणन में वे सभी प्रयत्न शामिल हैं जो वस्तुओं और सेवाओं के स्वामित्व हस्तान्तरण को प्रभात करते हैं। और उनके भौतिक वितरण की व्यवस्था करते हैं।”

3. एडवर्ड एवं डेविड (Edward & David) के अनुसार, “विपणन एक आर्थिक रीति है।

जिसके द्वारा वस्तुओं व सेवाओं को बदला जाता है तथा उनके मूल्य मुद्रा में तय किये जाते हैं।” II. नवी, विस्तृत आधुनिक या ग्राहक अभिमुखी परिभाषाएँ (New, Broad, Modern or Customer-oriented Definitions) – नयी एवं आधुनिक परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं-

1. पीटर एफ. ड्रकर (Peter F. Druker) के शब्दों में, ‘विपणन एक प्रक्रिया है जो किसी साधन (Resource) एवं विशिष्ट ज्ञान को विपणि (market ) स्थान पर आर्थिक मूल्य वाले योगदान में परिणत (Converts) करती है।

2. पॉल मजूर (Paul Mazur) ने विपणन की संक्षिप्त एवं बोधगम्य परिभाषा दी है। किन्तु । यह परिभाषा विपणन के कार्यों एवं प्रकृति को स्पष्ट नहीं करती है-“विपणन समाज को जीवन स्तर प्रदान करता है।”

3. मेल्कन मैकनेयर (Malcom McNair) के अनुसार, “विपणन से अभिप्राय समाज के लिए जीवन स्तर का निर्माण करके उसे समाज को प्रदान करना है।”

4. विलियम जे. स्टेण्टन (William J. Stanton) के अनुसार, “विपणन का आशय उन अन्तर्क्रियाशील ‘व्यावसायिक क्रियाओं की सम्पूर्ण प्रणाली से है जिसका उद्देश्य वर्तमान एवं सम्भावित ग्राहकों की आवश्यकताओं को सन्तुष्ट करने वाले उपाय / वस्तुओं एवं सेवाओं की योजना बनाने, कीमत निर्धारण करने, विकास करने तथा उनका वितरण करने से सम्बन्धित है

उपयुक्त परिभाषा (Appropriate Definition) विपणन एक व्यापक शब्द है। इसके अन्तर्गत उत्पादक से पूर्व और वितरण के बाद क्रियाएँ सेवाएँ सम्मिलित होती हैं। इसमें वस्तुओं और सेवाओं को ग्राहकों/उपभोक्ताओं की आवश्यकतानुसार उत्पादन किया जाता है। परिणामस्वरूप जनसाधारण के रहन-सहन के स्तर में वृद्धि होती है तथा ग्राहकों को सन्तुष्टि देते हुए लाभ प्राप्त किया जाता है।

विपणन का महत्त्व (Importance of Marketing) विपणन का महत्त्व इस प्रकार है- 1. फर्म के लिए विपणन का महत्त्व (Importance of Marketing to the firm ) -आज व्यवसाय ही विपणन संगठन हो गया है। पीटर एफ. ड्रकर (Peter F. Drucker) के अनुसार, “विपणन व्यवसाय का एक विशेष एवं अनूठा कार्य है। व्यवसाय को अन्य मानवीय संगठनों से अलग करने वाला तथ्य यह है कि वह वस्तु एवं सेवाओं का विपणन करता है जबकि चर्च, सेना, स्कूल, राज्य कोई भी ऐसा नहीं कर सकता है। 

व्यवसाय ही एक ऐसा संगठन है जो वस्तुओं और सेवाओं के विपणन से अपने को पूर्ण बनाता है। यदि किसी व्यवसाय में विपणन अनुपस्थित है। अथवा सायोगिक है तो वह व्यवसाय नहीं कहलायेगा और न ही उसे व्यवसाय के रूप में संचालित किया जाना चाहिए।” 

2. समाज के लिए विपणन का महत्त्व (Importance of Markting to scoiety)– (i) रोजगार प्रदान करना समाज से बेरोजगारों को हटाकर रोजगार अवसरों की वृद्धि में

सहयोग देता है। भारत में कुल रोजगार अवसरों का 1/3 भाग विपणन क्रियाओं में लगा हुआ है। 

(ii) वितरण लागतों में कमी कुशल विपणन के द्वारा विपणन लागत में कमी अवश्य हो सकती है परिणामस्वरूप कम कीमतों पर वस्तुएँ उपभोक्ताओं को प्राप्त हो सकेंगी। 

(iii) विपणन सामाजिक मूल्यों, आवश्यकताओं के अनुसार उत्पादन करके समाज के जीवन स्तर को ऊँचा करने में सहयोग देता है।

(iv) क्रयशक्ति में वृद्धि – न्यूनतम कीमत पर ग्राहकों को वस्तुएँ उपलब्ध कराकर विपणन कों की क्रयशक्ति में वृद्धि करता है।

(v) मंदी में सुरक्षा – अर्थव्यवस्था को मंदी से बचाने के लिये नये-नये बाजारों की खोज विपणन करता है जिससे उत्पादकों के पास माल का स्टॉक जमा नहीं होने पाता, परिणामस्वरूप श्री का भय नहीं रहता।

आर्थिक विकास में विपणन का महत्त्व (Importance of Marketing in the Economic Development) विपणन देश के आर्थिक विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका रखता है। अविकसित राष्ट्रों की अर्थव्यवस्थाओं के विकास में विपणन एक विशिष्ट दायित्व निभा रहा है। 

जैसे-जैसे देश में औद्योगीकरण होता जा रहा है, वहाँ पर विपणन का दायित्व भी बढ़ता जा रहा है। करोड़ों की जनसंख्या वाले भारत जैसे देश की मानवीय आवश्यकताएँ असीमित हैं। उनके लिए विपणन बड़े पैमाने पर उत्पादन करके आर्थिक प्रक्रिया में सहयोग दे रहा है।

Q. 2. विपणन के विभिन्न कार्यों को समझाइए। (Explain the various functions of Marketing.)

Ans. विपणन कार्यों को दो भागों में बाँटा जा सकता है-

प्रबन्धकीय कार्य- जो प्रत्येक विपणन प्रबन्धक को करने होते हैं। इनमें दिपणन की विभिन्न क्रियाओं का नियोजन, संगठन, स्टाकिंग, निर्देशन एवं नियंत्रण सम्मिलित किया जाता है। यह कार्य एक प्रबन्धक को प्रत्येक क्रिया में चाहे वह उत्पादन, वित्त, क्रय या विक्रय हो, करने पड़ते है। 

कार्य क्रियात्मक कार्य है, जो एक विपणन प्रबन्धक को वस्तुएँ उत्पादक से उपभोक्ताओं तक पहुँचाने के लिए आवश्यक होते हैं। एक विपणन प्रबन्धक को विभिन्न तरह की क्रियाएँ, जैसे- क्रिय, संग्रह, यातायात, विक्रय, विपणन, श्रेणीकरण तथा प्रमापीकरण आदि करनी पड़ती है। दोनों का संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है-

I. प्रबन्ध सम्बन्धी कार्य (Marketing Managerial Functions) – ये प्रबन्धकीय कार्य है जो प्रत्येक प्रबन्धक को करने होते हैं। एक विपणन प्रबन्धक को निम्नलिखित प्रवन्धकीय कार्य करने होते हैं-

1. विपणन कार्य का नियोजन (Planning of Marketing Functions) विपणन कार्य के नियोजन के अन्तर्गत उत्पादन की जाने वाली वस्तु के रूप, डिजाइन, मूल्यों को ग्राहकों की रुचि के अनुरूप निर्धारण, बाजारों का निर्धारण जिनमें वह वस्तु विक्रय की जाती है तथा विपणन मार्ग का निर्धारण आदि किया जाता है।

2. विपणन कार्यों का संगठन (Organising of Marketing Functions)- प्रत्येक कार्य मनुष्यों के माध्यम से होता है ताकि कार्यकुशलता के लिए एक कार्य में लगे सभी व्यक्तियों में संगठन होना अनिवार्य है ताकि अपव्यय एवं पुनरावृत्ति कम से कम हो।

3. विपणन कार्यों का स्टाफिंग (Staffing of Marketing Functions) विपणन प्रबन्धक का अन्य महत्त्वपूर्ण कार्य विक्रय प्रबन्धकों, विक्रयकर्त्ताओं आदि की नियुक्ति, प्रशिक्षण एवं वेतन आदि का निर्धारण है जिसके लिए मानवीय विभाग के प्रबन्धक की कार्यविधि ही अनायी जाती है।

4. विपणन कार्यों का निर्देशन (Directing of Marketing Functions) – प्रत्येक प्रबन्धक को अपने अधीन कर्मचारियों को समय-समय पर निर्देश देने पड़ते हैं तथा उन्हें कार्य के प्रति प्रोत्साहन देना पड़ता है। विपणन प्रबन्धक को भी अपने अधीन प्रबन्धकों को समय तथा अवस्थानुसार बतलाना पड़ता है कि क्या करना है तथा कैसे करना है? समय-समय पर आने वाली विपणन समस्याओं के समाधान के लिए निर्देश दिये जाते हैं तथा उनकी नित्य देखभाल की जाती है।

5. विपणन कार्यों का नियन्त्रण (Controlling of Marketing Functions) बाजार की अवस्थाओं में परिवर्तन, उपभोक्ता की माँग तथा रूचि में परिवर्तन, देश की आर्थिक व्यवस्था में परिवर्तन आदि विपणन योजना में रुकावट उत्पन्न कर देते हैं। यह रुकावट विपणन क्रियाओं के कुशल नियन्त्रण द्वारा रोकी जा सकती है। 

Q.3. विपणन तथा बिक्री में अन्तर कीजिए। (Distinguish between marketing and selling.)

Ans. वाणिज्यन, विपणन एवं विक्रय में अन्तर (Difference between Merchandiz- ing. Marketing and Selling) अक्सर वाणिज्य, विपणन तथा विक्रय का एक ही अर्थ समझ लिया जाता है। जबकि वास्तव में इन तीनों शब्दों में अन्तर है। विपणन (Marketing) एक विस्तृत शब्द है जिसकी विक्रय (Selling) और वाणिज्ययन दो शाखाएँ हैं।

1. वाणिज्य का अर्थ – विपणन का वह हिस्सा है जिसमें उत्पाद नियोजन (Product Planning), प्रमाणीकरण एवं श्रेणीकरण (Standardisation and Grading) तथा विक्रम (Sales) सम्मिलित होता है।

2. विक्रय का अर्थ-विक्रय विपणन के प्रमुख कार्यों में से एक है। विक्रय का आशय किसी वस्तु के भावी क्रेताओं की खोज करने, उनको वस्तु के बारे में जानकारी कराने और वस्तुओं को खरीदने के लिए तैयार करने से है। विक्रय में ये उपकार्य सम्मिलित है-विक्रय योजना, बाजार अनुसंधान, विक्रय की शर्ते, वस्तु व्राण्ड, पैकिंग, विज्ञापन तथा संग्रहण करना आदि। ‘विक्रय’ वाणिज्य का भाग है।

3. विपणन का अर्थ-विपणन का कार्य वस्तु के उत्पादन से पूर्व समाप्त नहीं हो जाता है और उपभोक्ता के पास वस्तु पहुँचने पर ही विपणन कार्य समाप्त नहीं होता अपितु विपणन का कार्य उस समय तक चलता रहता है जब तक उपभोक्ता को उस वस्तु से पूर्ण सन्तुष्टि नहीं मिल जाती। विक्रय (Selling) और विपणन (Marketting) में निम्नलिखित अन्तर पाया जाता है

1. विपणन का क्षेत्र व्यापक है, विक्रय इसका एक भाग है।

2. विपणन उपभोक्ताओं को वस्तुओं के द्वारा सन्तुष्टि के साथ-साथ उपभोक्ताओं को मूल्य सन्तुष्टि भी प्रदान करता है। जबकि विक्रय वस्तुओं के केवल भौतिक हस्तांतरण से सम्बन्धित है।

3. विपणन की समस्याएँ विशेष संस्था द्वारा हल की जाती हैं जबकि विक्रय की समस्याओं का हल थोक विक्रेता एवं फुटकर विक्रेता के पास होता है।

4. विपणन उपभोक्ताओं की आवश्यकताओं से सम्बन्धित है जबकि विक्रय विक्रय की मात्रा से सम्बन्धित है।

5. विक्रय वस्तु देता है जबकि विपणन सन्तुष्टि प्रदान करता है।

Q. 4. विपणन प्रबन्ध का अर्थ बतलाइए। विपणन प्रबन्ध के उद्देश्यों का वर्णन करें। (Explain the meaning of marketing management. Describe its objectives.)

Ans. विपणन प्रबन्ध का अर्थ (Meaning of Marketing Management ) -आज के युग में विपणन के अन्तर्गत ग्राहकों की आवश्यकता का पता लगाया जाता है और फिर उत्पादन सम्बन्धी क्रियाएँ भी उन्हीं आवश्यकताओं के अनुरूप समायोजित की जाती हैं। इसके बाद विपणन का कार्य किया जाता है। 

इसके लिए विपणन कार्यक्रम बनाए जाते हैं जिनमें वस्तु, मूल्य, विज्ञापन, विक्रय संवर्द्धन, वितरण आदि के सम्बन्ध में निर्णय लिए जाते हैं। इन निर्णयों का लेना व उनके अनुरूप कार्य करना विपणन प्रबन्ध कहलाता है। विपणन प्रबन्ध में उपभोक्ता की आवश्यकता व उसकी सन्तुष्टि पर अधिक जोर दिया गया है और इसमें उत्पादन से लेकर उनके उपभोग तक की क्रियाओं को समन्वित किया जाता है।

परिभाषाएँ ( Definitions)

1. कण्डिफ एवं स्टिल (Cundiff & Still) की राय में, “विपणन प्रबन्ध विपणन लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु उद्देश्यपूर्ण क्रियाओं के संचालन से सम्बन्धित है।” इनके अनुसार विपणन प्रबन्ध में उन क्रियाओं के संचालन के लिए कार्य किया जाता है जो लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए की जाती है। यह क्रियाएँ पूर्ण निर्धारित उद्देश्यों के लिए होती हैं। यह उद्देश्य विक्रय परिणाम (Sales volume), शुद्ध लाभ (net profit) व विक्रय परिणाम एवं लाभों में वृद्धि (growth in sales volumes and in profit) होते हैं। 

2. प्रो. लाजो और कॉरविन (Lazo & Corbin) ने उपभोक्ता की विचारधारा को ध्यान में रखते हुए विपणन प्रबन्ध की परिभाषा इस प्रकार की है। उनकी दृष्टि में “सभी विपणन कार्यों को क्रेता की ओर दिशा देना और फिर सभी प्रबन्धकीय निर्णय ग्राहकों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए करना और उन आवश्यकताओं की सन्तुष्टि के उद्देश्य से न्यूनतम व्यय पर अधिकतम विक्री करना और लाभ प्राप्त करना विपणन प्रबन्ध कहलाता है।”

विपणन प्रबन्ध के उद्देश्य (Objectives of marketing management )—– विपणन प्रबन्ध के उद्देश्य निम्नलिखित हैं- 

1. कुल विक्रय में अपने अंश को अधिकतम करना (To maximise our market share in total sales)— विपणन प्रबन्ध का उद्देश्य बढ़ते हुए बाजार से अधिक माँग अपनी संस्था के लिए बनाना है। अपने कुल विक्रय में अपने अंश को अधिकतम बनाने के लिए निम्नलिखित उपाय करने चाहिए-

A. विज्ञापन द्वारा अपनी वस्तुओं का प्रचार करना ।

B. विक्रय वर्द्धन के अन्य उपायों को अपनाना।

C. व्यक्तिगत विक्रय ।

2. नये उत्पादों का विकास तथा विक्रय करना (To develop new products and sell them)—समय के बदलने के साथ वस्तुओं की माँग में परिवर्तन होता रहता है। लोगों की रुचियों में परिवर्तन आता रहता है। फैशनों में परिवर्तन होते रहते हैं। अतः बाजार में माँग के परिवर्तनों हो ध्यान में रखकर नए-नए उत्पादन करें, वर्तमान उत्पादों में सुधार करे तब जनता को नए उत्पादों से परिचित करवायें।

3. ग्राहक संतोष को अधिकतम बनाकर न्यायोचित लाभ कमाना (To cam fair: profit by maximising customer satisfaction) विपणन प्रबन्ध का उद्देश्य उन वस्तुओं का उत्पादन करना है जिससे ग्राहक को अधिकतम सन्तुष्टि हो और विक्रय पर उचित लाभ प्राप्त हो । सन्तुष्ट ग्राहक न केवल स्वयं संस्था का स्थायी ग्राहक बन जाता है अपितु अन्य परिचित व्यक्तियों को भी ग्राहक बनाकर लाता है।

4. नई मण्डियों में प्रवेश करना तथा ग्राहक बनाना (To enter new markets and to create new customers ) — विपणन प्रबन्ध का उद्देश्य विपणन शोष तथा बाजार-सर्वेक्षण के द्वारा देश तथा विदेश में नए बाजार ढूंढना तथा नए ग्राहक ढूँढना है। 

5. वर्तमान उत्पाद की अधिक बिक्री के लिए उसके नए उपयोग ढूंढना तथा वर्तमान ग्राहकों को अधिक-से-अधिक सेवाएँ प्रदान करना (To develop new use of existing = products and to provide maximum services to the consumers) — वर्तमान ग्राहकों को अधिक-से-अधिक सेवायें प्रदान की जाएँ तथा वर्तमान उत्पाद के नए उपयोग खोजे जाएं। अतः विपणन प्रबन्ध को विपणन शोष द्वारा इस बात की जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए कि ग्राहक उसके उत्पाद का उपयोग किन कार्यों के लिए कर रहा है या उपभोग कर सकते हैं। 

6. व्यावसायिक संस्था की प्रतिष्ठा को बढ़ाना व ख्याति बनाना (To improve firm’s image and create Goodwill) विपणन प्रबन्ध का उद्देश्य संस्था की प्रतिष्ठा को बढ़ाना तथा ख्याति बनाना है। संस्था की प्रतिष्ठा में वृद्धि होने से तथा ख्याति बनने से कई लाभ होते हैं। कर्मचारियों का सिर स्वाभिमान से ऊँचा उठता है। ग्राहक भी उस संस्था के उत्पाद का क्रय करके गौरव अनुभव करता है। इसके अतिरिक्त जब भी संस्था किसी नए उत्पाद का उत्पादन करती है तो ग्राहक सन्तुष्टि, उत्साह तथा प्रसन्नता से उस वस्तु का क्रय करते हैं।

Q.5. विपणन प्रबन्ध की प्रक्रियाओं का संक्षेप में वर्णन करें। (Describe the process involved in marketing management.)

Ans. विपणन प्रबन्ध की प्रक्रियाएँ (Process involved in marketing management)-

1. व्यावसायिक अवसर खोजने के लिए बाजार की संरचना तथा इसके व्यवहार का विश्लेषण करना ( Analysing market structure and behaviour)—प्रथम प्रक्रिया व्यवसाय के लिए अवसर खोजना है। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए हमें बाजार की संरचना, बाजार के व्यवहार तथा व्यावसायिक संस्था के वातावरण का विश्लेषण करना पड़ता है। हमें इस बात को ज्ञात करना पड़ता है कि अपने उत्पाद के ग्राहक कौन-से लोग हैं। प्रतियोगी व्यापारी कौन-कौन हैं ? 

2. अभीष्ट विपणन पर शोध तथा उसका चुनाव (Researching and selecting target markets) अभीष्ट विपणि पर शोध तथा उसका चुनाव करना है। अपने भावी ग्राहकों के बाद में शोध करना पड़ता है और इस बात की जानकारी प्राप्त करनी पड़ती है कि हमारी वस्तु की कितनी माँग होगी तथा किन उपभोक्ता खण्डों में उत्पाद का विक्रय किया जाएगा।

3. विपणन सम्बन्धी रणनीतियाँ विकसित करना (Developing marketing strate gies) – प्रबन्धक संस्था के विभिन्न उद्देश्यों, विपणन के वातावरण, प्रतियोगिता, स्थिति आदि को ध्यान में रखकर निम्नलिखित रणनीतियों का निर्माण करता है— (क) उत्पाद रणनीति (ख) वितरण रणनीत (ग) प्रवर्तन रणनीति (घ) मूल्य रणनीति ।

4. विपणन सम्बन्धी कार्य योजना तथा बजट बनाना (Planning marketing tactics and budgets)-

1. व्यावसायिक तथा व्यापक योजना बनाना। 2. योजना को लागू करने के लिए मानवीय तथा वित्तीय साधनों का आवंटन करना ।

Very Impotant Questions

Q. 1. उत्पाद मिश्रण क्या है ? (What is product mix ?)

Ans. उत्पाद मिश्रण (Product Mix) उत्पाद मिश्रण से आशय उत्पाद आयामों से है। 

Q.2. ब्राण्ड का क्या अर्थ है ? (What is the meaning of Brand ? )

Ans. ब्राण्ड अथवा छाप का अर्थ (Meaning of Brand) उत्पादकों अथवा निर्माताओं द्वारा अपने उत्पाद की पहचान के लिए जिन व्यापारिक चिन्हों का उपयोग किया जाता है, वह ब्राण्ड कहलाते हैं।

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