अर्थशास्त्र कक्षा 12वीं अध्याय 1 नोट्स | Class 12 economics chapter 1 question answer in Hindi Easy PDF

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Class 12 economics chapter 1 question answer in Hindi: अर्थशास्त्र वह सामाजिक विज्ञान है जिसका संबंध समाज द्वारा वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन के लिए दुर्लभ और वैकल्पिक उपयोग वाले साधनों के प्रयोग से है । अर्थशास्त्र (Economics) – अर्थशास्त्र उस मानवीय व्यवहार का विज्ञान है जिसका

संबंध सीमित साधनों का बंटवारा इस ढंग से करना है जिससे उपभोक्ता अपनी संतुष्टि को अधिकतम कर सके, उत्पादक अपने लाभ को अधिकतम कर सके और समाज अपने सामाजिक कल्याण को अधिकतम कर सके। (Economics is the science of human behaviour concerned with the allocation of scarce means in such a manner that consumers may maximise their satisfaction. Producers may maximise their profits and the society may maximise its social welfare.)


व्यष्टि अर्थशास्त्र क्या है? what is micro economic?


आधुनिक अर्थशास्त्र से इन समस्याओं का विश्लेषण उत्पादन संभावना वक्र से किया है जिसमें उत्पादन के विभिन्न साधनों का प्रयोग अनेक वैकल्पिक संयोगों में करके भिन्न-भिन्न वस्तुओं के उत्पादन की संभावनाओं का अनुमान लगाया जा सकता है। 

आर्थिक समस्याओं और उनके समाधान के लिए बनाए गए सिद्धान्तों की विधियों को आर्थिक विश्लेषण कहते हैं। आधुनिक अर्थशास्त्रियों में आर्थिक समस्याओं के विश्लेषण के आधार पर अर्थशास्त्र की विषय सामग्री को व्यष्टि अर्थशास्त्र तथा समष्टि अर्थशास्त्र में बाँट दिया है। इन दोनों में संबंध होते हुए, भी इनमें अंतर पाया जाता है ।

अर्थशास्त्र (Economics) – एक मानवीय व्यवहार का विज्ञान है जिसका संबंध दुर्लभ संसाधनों का वैकल्पिक उपयागों में इस प्रकार बंटवारा करना है कि एक उपभोक्ता को अधिकतम संतुष्टि, एक उत्पादन को अधिकतम लाभ तथा संपूर्ण समाज को अधिकतम सामाजिक कल्याण की प्राप्ति हो सके । 

संसाधन / साधन (Resources / Means) मानवीय जरूरतों की तुलना में दुर्लभ है और इनके वैकल्पिक उपयोग हैं। संसाधनों की दुर्लभता (Scarcity of Resources) और इनके वैकल्पिक उपयोगों के

कारण चयन (Choice) की समस्या पैदा होती है । व्यष्टि अर्थशास्त्र (Micro economics) अर्थशास्त्र की वह शाखा है जो व्यक्तिगत आर्थिक इकाइयों, जैसे एक उपभोक्ता अथवा एक उत्पादक, से संबंधित आर्थिक समस्याओं (या आर्थिक मुद्दों) का अध्ययन करती हैं। संसाधन आबंटन की समस्या व्यष्टि अर्थशास्त्र का प्रमुख तत्व है ।

समष्टि अर्थशास्त्र (Macro economics) – अर्थशास्त्र की वह शाखा है जो संपूर्ण अर्थव्यवस्था से संबंधित आर्थिक समस्याओं (या आर्थिक मुद्दों) का अध्ययन करती है; समग्र माँग, समग्र आपूर्ति, राष्ट्रीय आय और राष्ट्रीय उत्पाद और कुछ महत्वपूर्ण समष्टि चर (Macro Variables) है। राष्ट्रीय आय (अथवा राष्ट्रीय उत्पाद) का संतुलन समष्टि अर्थशास्त्र का मुख्य मुद्दा है।



एक बाजार अर्थव्यवस्था में सभी महत्त्वपूर्ण आर्थिक निर्णय बाजार शक्तियों के आधार पर तय होते हैं । इस अर्थव्यवस्था में आर्थिक एजेन्ट मुक्त रूप से उत्पादों का विनिमय करते है। इस प्रकार की व्यवस्था में सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होता है । 


Class 12 economics chapter 1 question answer in hindi

Class12th 
Chapter Nameव्यष्टि अर्थशास्त्र
Chapter numberChapter 1
PART A
Book NCERT
Subjectअर्थशास्त्र | Economics
Medium Hindi | हिंदी
Study Materialsनोट्स & question answer
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Class 12 economics chapter 1 question answer in Hindi

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (VERY SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


1. आर्थिक समस्या किसे कहते हैं ?

Ans. साधन सीमित होने के कारण चयन की समस्या को आर्थिक समस्या कहते हैं।

2. ‘संसाधनों की दुर्लभता’ से क्या अभिप्राय है ? 

Ans. इसका अभिप्राय है कि संसाधनों की सामूहिक आवश्यकताओं के संदर्भ में दुर्लभता है, न कि किसी एक आवश्यकता के संदर्भ में।

3. उत्पादन संभावना वक्र की परिभाषा दें। 

Ans. दिए गए संसाधनों के भरपूर प्रयोग से दो वस्तुओं की विभिन्न उत्पादन संभावनाओं के आरेखीय प्रस्तुतिकरण को उत्पादन संभावना वक्र कहते हैं। 

4. पूँजीवादी अर्थव्यवस्था में आर्थिक समस्याओं का समाधान कैसे किया जाता है ? 

Ans. ‘कीमत तंत्र’ की सहायता से।

5. किसी अर्थव्यवस्था की किन्हीं दो केंद्रीय समस्याएँ बताइए । 

Ans. (i) क्या उत्पादन किया जाए (ii) कैसे उत्पादन किया जाए ।

6. अवसर लागत की परिभाषा दें। 

Ans. अवसर लागत किसी दी गई वस्तु की वह मात्रा है जिसका दूसरी वस्तु का उत्पादन करने के लिए त्याग करना पड़ता है।

7. उत्पादन संभावना वक्र पर सीमांत अवसर लागत की परिभाषा दें। 

Ans. यह वह दर है जिस पर किसी दी हुई वस्तु की अतिरिक्त इकाई का उत्पादन करने के लिए हमें एक वस्तु को छोड़ना पड़ता है ।

8. उत्पादन संभावना वक्र पर बढ़ती हुई अवसर से क्या अभिप्राय है ?

Ans. इसका अभिप्राय है कि एक वस्तु की अतिरिक्त इकाई के उत्पादन के लिए दूसरी वस्तु के त्याग करने की दर बढ़ती जाती है । 

9. अतिरिक्त उत्पादन का इस्तेमाल क्या होता है ? 

Ans. अतिरिक्त उत्पादन का इस्तेमाल अन्य वस्तुओं एवं सेवाओं का विनिमय करने के लिए किया जाता है।

10. एक व्यक्ति अपने संसाधनों का क्या करता है ?

Ans. संसाधनों का प्रयोग अपनी आवश्यकताओं को सन्तुष्ट करने के लिए किया जाता है।

11. वस्तु का अर्थ लिखें।

Ans. वस्तु से अभिप्राय भौतिक चीजों से होता है जिनका उपयोग अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाता है।

12. सेवा का अर्थ लिखें।

Ans. सेवा से अभिप्राय अभीतिक चीजों से है जिनका उपयोग आवश्यकताओं की सन्तुष्टि के लिए किया जाता है।

13. क्या संसाधन आवश्यकताओं की तुलना में असीमित होते हैं ?

Ans. नहीं, संसाधन आवश्यकताओं की तुलना में सीमित होते हैं।

14. चयन करने का मुख्य कारण क्या है ? 

Ans. दुर्लभता चयन का मुख्य कारण है। 

15. उपभोक्ता का अर्थ लिखें।

Ans. वह व्यक्ति जो सन्तुष्टि पाने के लिए वस्तुओं या सेवाओं का उपभोग करता है,उपभोक्ता कहलाता है।

16. विनिमय की उपयोगिता लिखिए। 

Ans. प्रत्येक व्यक्ति के लिए उत्पादन में विशिष्टता एवं उपभोग में विविधता की खाई को पाटने में विनिमय प्रक्रिया उपयोगी होती है।

17. दुर्लभता की परिभाषा लिखिए।

Ans. ‘एक प्रतिदर्श’ वास्तविकता की आवश्यक विशेषताओं को समाहित करने का प्रयास करता है। Ans. एक व्यक्ति के पास संसाधन, उसकी आवश्यकताओं की तुलना में कम होते हैं, इसे दुर्लभता कहते हैं।

18. एक उत्पादक कब विवेकशील होता है?

Ans. जब एक उत्पादक को इस बात का स्पष्ट आकलन होता है कि उत्पादन के प्रत्येक स्तर पर संभावित बिक्री से उसे कितना लाभ प्राप्त होगा तब उसे विवेकशील कहा जाता है।

19. साम्य कीमत का अर्थ लिखें।

Ans. वह कीमत स्तर जिस पर किसी वस्तु की माँगी गई मात्रा व पूर्ति की गई मात्रा समान होती है, साम्य कीमत कहलाती है।

20. साम्य मात्रा का अर्थ लिखें।

Ans. बाजार में साम्य कीमत पर खरीदी गई व बेची गई मात्रा को साम्य मात्रा कहते हैं। 


लघु उत्तरीय प्रश्न (SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


1. दुर्लभता और चयन का संबंध समझाएँ ।

Ans. दुर्लभता और चयन का अटूट संबंध है। यदि चीजों की कमी नहीं होती तो चयन की समस्या उठने का प्रश्न ही नहीं रहता। यदि जिसे जो कुछ चाहिए वह मिल जाय तो चयन की समस्या का किसी को भी सामना न करना पड़े । 

अभावों से मुक्ति की बात सिर्फ कल्पना की वस्तु है, वास्तविक संसार में हमें अभावों से हमेशा दो चार होना पड़ता है। आदमी चाहे कितना ही धनी क्यों न हो, उसे किसी-न-किसी चीज का अभाव रहता है। प्रत्येक व्यक्ति की विभिन्न और बहुत-सी आवश्यकताएँ होती हैं परंतु उन्हें पूरा करने के संसाधन सीमित होते हैं। 

इसलिए हमें अपनी आवश्यकता तथा संसाधनों की उपलब्धता के अनुसार अपनी आवश्यकताओं की प्राथमिकता निर्धारित करनी होती है। इस प्रकार, दुर्लभता तथा चयन साथ-साथ चलते हैं ।

2. “अर्थशास्त्र दुर्लभता की उपस्थिति में चयन करना है।” व्याख्या करें। 

Ans. अर्थशास्त्र का आधार दुर्लभता के कारण, चयन करना आवश्यक है। लगभग प्रत्येक देश में प्राकृतिक तथा मानव-निर्मित दोनों संसाधन भरपूर मात्रा में मौजूद हैं। इन संसाधनों पर निर्भर लोगों की संख्या भी कम नहीं है। 

इसलिए, यह स्वाभाविक है कि संसाधन प्रत्येक व्यक्ति को समान रूप से उपलब्ध नहीं है तथा उन्हें मौजूद सीमित संसाधनों के भरपूर उपयोग के लिए अपनी आवश्यकताओं के अनुसार चुनाव करना पड़ता है। चुनाव व्यक्तिगत या राष्ट्रीय स्तर पर हो सकता है। इस प्रकार, यह स्पष्ट है कि अर्थशास्त्र दुर्लभता की अवस्था में चयन करने से संबंधित है।

3. अर्थव्यवस्था की केन्द्रीय समस्याओं के नाम गिनाइए । 

Ans. प्रत्येक अर्थव्यवस्था को निम्नांकित केन्द्रीय समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

(i) किस वस्तु का उत्पादन किया जाए, यह साधनों के आबंटन की समस्या है। 

(ii) वस्तु का कैसे उत्पादन किया जाए, यह उत्पादन तकनीक के चुनाव की समस्या है । 

(iii) किसके लिए उत्पादन किया जाए, यह उत्पादन के वितरण की समस्या है। उपरोक्त तीन समस्याओं के अतिरिक्त निम्नलिखित तीन समस्याएँ भी केन्द्रीय समस्याएँ मानी जाने लगी हैं-

(iv) साधनों के कुशलतम प्रयोग की समस्या । 

(v) साधनों के पूर्ण प्रयोग की समस्या ।

(vi) आर्थिक विकास की समस्या ।

4. उत्पादन संभावना-वक्र किसे कहते हैं ?

Ans. एक सरल अर्थव्यवस्था में दिए गए साधनों के पूर्ण प्रयोग द्वारा दो वस्तुओं (जैसे-चावल और बन्दूकों) के बहुत से संयोगों का उत्पादन संभव है। इन संयोगों को उत्पादन संभावनाएँ कहते हैं । 

जब इन संयोगों को चित्र के रूप में प्रस्तुत किया जाता है तो बनने वाला वक्र उत्पादन संभावना-वक्र कहलाता है। उत्पादन संभावना वक्र उद्गम की तरफ अवतल होता है। 

जब संसाधन बढ़ते हैं या उत्पादन की तकनीक में सुधार होता है, उत्पादन संभावना वक्र दाहिनी तरफ खिसक जाता है। यदि संसाधनों का भरपूर प्रयोग नहीं हो रहा है, संचालन बिंदु उत्पादन संभावना वक्र के अंदर स्थित

होगा।

5. उत्पादन संभावना वक्र उद्गम की तरफ अवतल क्यों होता है ? 

Ans. उत्पादन संभावना वक्र उद्गम की तरफ अवतल होता है जब सीमांत अवसर लागत बढ़ रही होती है। उत्पादन संभावना वक पर सीमांत अवसर लागत को, किसी दी गई वस्तु का प्रति इकाई उत्पादन बढ़ाने के लिए दूसरी वस्तु के उत्पादन में कमी के रूप में परिभाषित किया जाता है। उत्पादन संभावना वक्र के उद्गम की तरफ अवतल होने के दो कारण हैं

(i) उत्पादन संभावना वक्र ह्रासमान प्रतिफल के नियम पर आधारित है। इसलिए, यदि

किसी वस्तु को अधिक मात्रा में उत्पादित किया जाता है, इसके उत्पादन में प्रयोग की गई साधन इकाइयाँ कम उत्पादक हो जाती है; अर्थात् अतिरिक्त इकाइयों की उत्पादन लागत बढ़ जाती है। 

(ii) दूसरे, अवसर लागत तब आती है जब किसी विशेष वस्तु के उत्पादन में लगे विशिष्टीकृत संसाधनों को दूसरी वस्तु के उत्पादन में लगा दिया जाता है, जिसके लिए दे विशिष्टीकृत नहीं हैं। इस प्रकार, संसाधनों का अधिक उत्पादन से कम उत्पादक प्रयोगों में बदलाव का अप्रत्यक्ष अभिप्राय है उनकी उत्पादकता में गिरावट। परिणामस्वरूप दूसरी वस्तु की अतिरिक्त इकाई के उत्पादन के लिए ऐसे अधिक संसाधनों की आवश्यकता होती है। इस प्रकार, सीमांत. अवसर लागत बढ़ती जाती है, जिससे उत्पादन संभावना वक्र अवतल हो जाता है।

6. संसाधनों के कम उपयोग के दो उदाहरण दीजिए। 

Ans. संसाधनों के कम उपयोग के दो उदाहरण निम्नलिखित हैं-

(i) तकनीकी रूप से पिछड़ापन संसाधनों के कम उपयोग का सबसे महत्त्वपूर्ण उदाहरण है। तकनीकी के अभाव में संसाधनों का पूर्ण दोहन नहीं हो पाता।

(ii) संसाधनों का उचित विभाजन न होना या श्रम विभाजन की समस्या । उचित विभाजन के अभाव में अधिकांश संसाधन या तो बेकार पड़े रहते हैं, या उनका अकुशल प्रयोग होता है। 

7. क्या होगा जब एक गाँव में गेहूं का उत्पादन करने वाली इकाइयाँ गेहूं का जरूरत से ज्यादा उत्पादन करती हैं ?

Ans. यदि गाँव में लोगों को उतनी गेहूं की मात्रा की आवश्यकता नहीं होती है जिनका गाँव की उत्पादन इकाइयाँ गेहूँ का उत्पादन करती है तो या तो गाँव के लोग अतिरिक्त उत्पादन से अन्य वस्तुओं एवं सेवाओं का विनिमय करेंगे अथवा गेहूँ के उत्पादन से कुछ संसाधनों को हटाकर उन वस्तुओं एवं सेवाओं के उत्पादन में लगा सकती है जिनकी गाँव में माँग अधिक होगी।

8. उपभोग एवं उत्पादन वस्तुओं की परिभाषा दीजिए। प्रत्येक के दो-दो उदाहरण लिखिए।

Ans. उपभोक्ता वस्तु वे वस्तुएँ जिनका उपयोग उपभोग के लिए किया जाता है, उपभोक्ता वस्तु कहलाती है। जैसे-भोजन सामग्री, वस्त्र आदि। उत्पादक वस्तु वे वस्तु जिनका उपयोग अन्य वस्तुओं एवं सेवाओं का उत्पादन करने के लिए होता है। जैसे-मशीन, कच्चा माल आदि ।

9. एक व्यक्ति के स्वामित्व में कुछ मात्रा में ही वस्तुएँ होती हैं। समझाइए ।

Ans. एक व्यक्ति को जितनी वस्तुओं की आवश्यकता होती है न तो उतनी मात्रा में उसके पास उपलब्ध होती है और न ही वह उन सबका उत्पादन कर सकता है। वह केवल उपलब्ध साधनों में से कुछ को ही अपने स्वामित्व में रख सकता है अथवा उत्पादन कर सकता है। 

इस प्रकार वस्तुओं के स्वामित्व एवं उत्पादन के मामले में प्रत्येक व्यक्ति विशिष्ट होता है जबकि उपलब्ध एवं उत्पादित सभी वस्तुओं की अर्थव्यवस्था में एक लम्बी श्रृंखला होती है। 


CLASS 12 NCERT SOLUTION IN ENGLISHCLASS12 NCERT SOLUTION IN HINDI
Historyइतिहास
Geography भूगोल
Political science राजनीति विज्ञान
English SubjectResult
Hindi SubjectHistory answer keys
Sociology समाज शास्त्र

10. विशिष्ट उत्पादन एवं व्यापक उपभोग के बीच की खाई को किस तरह भरा जाता है ? 

Ans. संसाधनों की दुर्लभता एवं आवश्यकताओं की असीमितता के कारण उत्पादन विशिष्टता एवं उपभोग की विविधता में काफी अन्तर होता है। इस अन्तर को पूरा करने के लिए विनिमय प्रक्रिया का प्रयोग किया जाता है। आधुनिक अर्थव्यवस्थाओं में उपभोग, उत्पादन एवं विनिमय क्रियाएँ बाजार में सतत् रूप से चलती हैं।

11. उत्पादन साधनों का अर्थ लिखिए। उत्पादन साधनों के प्रकार लिखिए। 

Ans. वे वस्तुएँ एवं सेवाएँ जिनका उपयोग अन्य वस्तुओं एवं सेवाओं का उत्पादन करने के लिए किया जाता है उन्हें जिनका उपयोग अन्य वस्तुओं एवं सेवाओं का उत्पादन करने के लिए किया जाता है उन्हें उत्पादन के साधन कहते हैं। उत्पादन के साधनों को दो वर्गों में बाँटा जाता है- 

(i) साधन आगत / मुख्य साधन / प्राथमिक साधन-भूमि एवं श्रम

(ii) मध्यवर्ती वस्तुएँ गैर साधन आगत / गौण साधन- उत्पादित वस्तु जो अन्य वस्तुओं के उत्पादन में काम आती है। जैसे-मिठाई बनाने में चीनी, टायर के विनिर्माण में रबर आदि।

12. बाजार का अर्थ लिखिए । 

Ans. व्यवस्थाओं का कोई भी समुच्चय जिससे लोगों के आर्थिक क्रियाओं को मुक्त रूप से संचालित करने की आजादी होती है, उसे बाजार कहते हैं। एक बाजार में एक व्यक्ति अपने अधिशेष उत्पादन को उन लोगों को बेच सकता है जिन्हें उसकी वस्तुओं की आवश्यकता होती है। विक्रय से प्राप्त मुद्रा का उपयोग वह व्यक्ति उन वस्तुओं एवं सेवाओं का क्रय करने के लिए कर सकता है, जिनकी उसे आवश्यकता होती है।

13. एक उदाहरण की सहायता से विवेकशीलता को समझाइए । 

Ans. संसाधनों की दुर्लभता के कारण व्यक्ति संसाधनों का बेहतर उपयोग करने का प्रयास करता है। यह माना जाता है कि प्रत्येक उपभोक्ता को वस्तुओं के उपलब्ध समुच्चयों के बारे में अभिरुचियों के बारे में स्पष्ट जानकारी होती है। 

इस अर्थ में उपभोक्ता विवेकशील माना जाता है क्योंकि आवश्यकताओं को सन्तुष्ट करने के लिए वह अपनी रुचियों के अनुसार चयन करता है अतः संसाधनों करने में वह विवेकशील होता है और अपनी अधिकतम आवश्यकताओं को सन्तुष्ट करता है।

14. एक अर्थव्यवस्था सन्तुलन में कब कही जाती है ? 

Ans. कोई अकेली आर्थिक इकाई सन्तुलन प्राप्त नहीं कर सकती है। बाजार अर्थव्यवस्था में विवेकशील व्यक्तिगत आर्थिक इकाइयाँ अपने हित के अनुरूप आर्थिक क्रियाओं का संचालन करके स्वतः ही आर्थिक समस्याओं को हल करती है और सन्तुलन की अवस्था को प्राप्त करती है । 

अदृश्य शक्तियाँ क्रियाशील होकर सन्तुलन की अवस्था को प्राप्त करती है। प्रत्येक आर्थिक इकाई इस प्रकार से कार्य करती है जो दूसरी आर्थिक इकाइयों के साथ मिलान करने लायक हो। संसाधनों के आबंटन एवं उनकी उपलब्धता के आधार पर ही अन्तिम वस्तुओं का आबंटन आधारित होता है। जब अर्थव्यवस्था कोई भी परिवर्तन नहीं चाहती है तब उसे सन्तुलन में माना जाता है।

15. अर्थशास्त्र की दो मुख्य शाखाओं के नाम लिखिए, उनके अर्थ भी लिखिए। 

Ans. (i) अर्थशास्त्र की विषय-वस्तु का मुख्य रूप से दो शाखाओं के अन्तर्गत अध्ययन किया जाता है, जो निम्नवत है-

(i) व्यष्टि अर्थशास्त्र – अर्थशास्त्र की वह शाखा जिसमें व्यक्तिगत आर्थिक इकाइयों के व्यवहार का अध्ययन किया जाता है, उसे व्यष्टि अवशास्त्र कहते हैं। यह शाखा यह प्रदर्शित करती है कि विभिन्न इकाइयाँ आपसी व्यवहार के द्वारा किस प्रकार से वस्तु की मात्रा एवं कीमत का निर्धारण करती है। समष्टि अर्थशास्त्र – अर्थशास्त्र की वह शाखा जिसमें सामूहिक आर्थिक इकाइयों के व्यवहार का अध्ययन किया जाता है, उसे समष्टि अर्थशास्त्र कहते हैं। इस शाखा में सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था को आर्थिक इकाई के रूप में अध्ययन किया जाता है।

16. उन प्रश्नों के उदाहरण दीजिए जिनका समष्टि अर्थशास्त्र में अध्ययन किया जाता है ?

Ans. समष्टि अर्थशास्त्र में अध्ययन किए जाने वाले प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं- 

(i) संसाधनों के बेरोजगार होने के क्या कारण हैं ? 

(ii) सामान्य कीमत स्तर क्यों बढ़ता है ? 

(iii) क्या अर्थव्यवस्था के सभी संसाधनों का पूर्ण विदोहन हो रहा है ? 

(iv) आय का सन्तुलन स्तर कैसे निर्धारित किया जाए ? (v) सामूहिक पूर्ति का निर्धारण कैसे किया जाए ? 

(vi) अर्थव्यवस्था में सामूहिक पूर्ति का स्तर क्या है ? 

17. व्यष्टि अर्थशास्त्र की विषय-वस्तु के उदाहरण दीजिए। 

Ans. कुछ महत्त्वपूर्ण व्यष्टि अर्थशास्त्र के विषय निम्नवत हैं- 

(i) एक वस्तु की माँग । 

(ii) एक वस्तु की आपूर्ति। 

(iii) एक वस्तु की कीमत का निर्धारण 

(iv) एक फर्म का साम्य । 

(v) एक वस्तु की उत्पादन लागत 

(vi) एक फर्म को प्राप्त आगम ।


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (LONG ANSWER TYPE QUESTIONS)


1. अर्थशास्त्र की विषय सामग्री का वर्णन कीजिए।

Ans. अर्थशास्त्र की विषय सामग्री: अर्थशास्त्र की विषय सामग्री के अन्तर्गत उन सभी आर्थिक क्रियाओं का अध्ययन किया जाता है जो असीमित आवश्यकताओं तथा सीमित साधनों के कारण की जाती है। 

(a) आर्थिक क्रिया : आर्थिक क्रिया वह है जिसका संबंध उन सभी वस्तुओं के उत्पादन, उपभोग तथा निवेश से है जिनमें उपयोगिता होती है। 

(i) उत्पादन,

(ii) निवेश, 

(ii) उपयोग

(iv) विनिमय

(b) आर्थिक क्रिया का व्यष्टि तथा समष्टि स्तर आर्थिक क्रियाओं का अध्ययन व्यक्तिगत स्तर पर या समस्त अर्थव्यवस्था क स्तर पर किया जा सकता है। अतएव अर्थशास्त्र की विषय सामग्री के मुख्य अंग निम्नलिखित हैं : (i) व्यष्टि अर्थशास्त्र, (ii) समष्टि अर्थशास्त्र

व्यष्टि तथा समष्टि अर्थशास्त्र में अन्तर व्यक्तिगत स्तर पर आर्थिक क्रियाओं का अध्ययन व्यष्टि अर्थशास्त्र में किया जाता है। इसके विपरीत समष्टि अर्थशास्त्र में समस्त अर्थव्यवस्था के स्तर पर आर्थिक क्रियाओं का अध्ययन किया जाता है। 

(c) आर्थिक प्रणालियाँ : आर्थिक प्रणालियों को निम्नलिखित भागों में बाँटा गया है

(i) पूँजीवाद, (ii) समाजवाद, (iii) मिश्रित अर्थव्यवस्था

(d) आर्थिक नीतियाँ आर्थिक प्रणालियों के कार्यकरण में बेरोजगारी, कीमत वृद्धि, B निर्धनता, मंदी आदि समस्याएँ आती हैं, इनके समाधान के लिए नीतियाँ बनाई गई हैं जो निम्न हैं:

(i) मौद्रिक नीति, (ii) राजस्व नीति, (iii) कीमत नीति, (iv) आर्थिक योजना, (v) अन्तर्राष्ट्रीय तरलता ।

2. आर्थिक समस्या क्या है ? यह क्यों उत्पन्न होती है ? Or, आर्थिक समस्या चयन की समस्या है। कथन पर चर्चा करें।

Ans. आर्थिक समस्या मौलिक रूप से साधनों की स्वल्पता की समस्या है जिसके कारण चुनाव की समस्या उत्पन्न होती है। 

मानव-आवश्यकताएँ असीमित हैं, परन्तु साधन सीमित हैं। इसलिए सीमित साधनों से सभी आवश्यकताओं की संतुष्टि नहीं की जा सकती। आवश्यकताओं की तीव्रता में भिन्नता होती है तथा सीमित साधनों के वैकल्पिक प्रयोग होते हैं। 

इस प्रकार की पृष्ठभूमि में प्रत्येक उपभोक्ता का यह प्रयास होता है कि वह सीमित साधनों से अधिक-से-अधिक संतुष्टि प्राप्त करे। इसलिए उसे चुनाव करना पड़ता है कि वह किन वस्तुओं का कितनी मात्रा में उपभोग करे। चुनाव की समस्या उत्पन्न होते ही आर्थिक समस्या का जन्म हो जाता है। 

वास्तव में चुनाव की समस्या ही मौलिक रूप से आर्थिक समस्या है। साधनों की स्वल्पता के कारण जो समस्या एक व्यक्तिगत उपभोक्ता के समक्ष उत्पन्न होती है, वह सामूहिक रूप से एक अर्थव्यवस्था के समक्ष भी उत्पन्न होती है। साधनों के स्वल्प होने के कारण एक अर्थव्यवस्था को निम्नलिखित विषयों का चुनाव करना पड़ता है : 

(i) किस वस्तु का कितनी मात्रा में उत्पादन किया जाए ?

(ii) उत्पादन किस तकनीक द्वारा किया जाए ?

(iii) उत्पादन किसके लिए किया जाए ?

इन तीनों समस्याओं को अर्थव्यवस्था की केंद्रीय समस्याएँ अथवा आधारभूत समस्याएँ कहते हैं। इसका कारण यह है कि सभी अन्य आर्थिक समस्याएँ इन समस्याओं के इर्द-गिर्द घूमती हैं। ये समस्याएँ सभी अर्थव्यवस्थाओं में उत्पन्न होती हैं।

उपर्युक्त विश्लेषण के अनुसार आर्थिक समस्या उत्पन्न होने के निम्नलिखित कारण हैं- 

(i) मानवीय आवश्यकताएँ असीमित हैं- मानवीय आवश्यकताएँ असीमित हैं। एक आवश्यकता के संतुष्ट हो जाने पर नई आवश्यकताएँ उत्पन्न होती रहती हैं। आवश्यकताओं की तीव्रता में भी अन्तर होता है।

(ii) सीमित साधन – आवश्यकताओं को संतुष्ट करने के साधन सीमित होते हैं। साधनों की स्वल्पता एक सापेक्षिक बात है। किसी विशेष आवश्यकता को संतुष्ट करने के लिए साधनों की बाहुल्यता हो सकती है, परन्तु सभी आवश्यकताओं की संतुष्टि के लिए साधन स्वल्प होते हैं। 

(iii) साधनों की वैकल्पिक प्रयोग — सीमित साधनों के अनेक प्रयोग संभव होते हैं, जैसे बिजली का प्रयोग रोशनी के लिए किया जाए अथवा ऊर्जा के साधन के रूप में किया जाए।

(iv) चुनाव की समस्या – मनुष्य की आवश्यकताएँ असीमित और साधन सीमित हैं, इसलिए चुनाव की समस्या उत्पन्न होती है कि क्या, कैसे और किसके लिए उत्पादन किया जाए ? चुनाव की समस्या ही आर्थिक समस्या है। यदि मानवीय आवश्यकताओं की तरह साधन भी असीमित होते तो चुनाव की समस्या उत्पन्न ही नहीं होती और न ही कोई आर्थिक समस्या होती। दूसरे शब्दों में, साधनों की स्वल्पता सभी आर्थिक समस्याओं की जननी है। संक्षेप में, असीमित आवश्यकताएँ एवं सीमित साधन दो आधारभूत स्तम्भ हैं जिन पर सभी आर्थिक समस्याओं का ढाँचा खड़ा है।

13. क्या अर्थशास्त्र एक वास्तविक विज्ञान है या एक आदर्श विज्ञान ? व्याख्या करें। 

Ans. वास्तविक विज्ञान से अभिप्राय उस विज्ञान से है जो कारण तथा प्रभाव के बीच संबंध स्थापित करता है। दूसरे शब्दों में, यह किसी समस्या का वैज्ञानिक ढंग से परीक्षण करता है। उदाहरण के लिए, यदि कीमतें बढ़ गई है तो वे क्यों बढ़ी हैं? संक्षेप में, समस्याओं का तथ्यों के आधार पर विश्लेषण किया जाता है। 

दूसरी तरफ, आदर्श विज्ञान किसी समस्या के मानकीय पहलुओं से संबंधित है, अर्थात् क्या होना चाहिए? मानकीय विज्ञान के अंतर्गत, निष्कर्ष तथा परिणाम तथ्यों पर आधारित नहीं होते, वे मान्यताओं पर आधारित होते हैं, जैसे सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक, धार्मिक आदि संक्षेप में, वास्तविक विज्ञान किस प्रकार तथा क्यों से संबंधित है और आदर्श विज्ञान ‘क्या होना चाहिए’ से। 

दोनों के बीच में अंतर ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी के उदाहरण द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है। निश्चित विज्ञान के अंतर्गत यह पता लगाया जाएगा कि ब्याज दर क्यों बढ़ गई और इसे कैसे घटाया जा सकता है जबकि आदर्श विज्ञान के अंतर्गत यह देखा जाएगा कि यह बढ़ोत्तरी अच्छी है या खराब वास्तविक तथा आदर्श विज्ञान के बारे में तीन कथन यहाँ दिए जा रहे हैं।

वास्तविक विज्ञान 

(1) भारत में मूल्य बढ़ने के मुख्य कारण मुद्रा-पूर्ति में वृद्धि है। 

(ii) भारत में खाद्यान्न उत्पादन में बढ़ोत्तरी मुख्य रूप से सिंचाई सुविधाओं में वृद्धि तथा रासायनिक उर्वरकों की खपत में वृद्धि के फलस्वरूप हुई है। 

(iii) जनसंख्या वृद्धि दर आंशिक रूप से ऊँची जन्म-दर तथा आंशिक रूप से मृत्यु-दर में कमी के कारण ऊँची रही है। आदर्श विज्ञान- 

(i) मुद्रा-स्फीति अवस्फीति से अच्छी है।

(ii) भारत जैसे देश के लिए विलासिता की वस्तुओं का अधिक उत्पादन अच्छा नहीं है।

(iii) संपत्ति तथा आय के बंटवारे में असमानता को कम किया जाना चाहिए।

6. व्यष्टि अर्थशास्त्र का समष्टि अर्थशास्त्र में अन्तर कीजिए । 

व्यष्टि अर्थशास्त्र (Microeconomics)समष्टि अर्थशास्त्र (Macroeconomics)
(i) व्यष्टि अर्थशास्त्र में व्यक्तिगत स्तर पर आर्थिक संबंधों अथवा आर्थिक समस्याओं का अध्ययन किया जाता है जैसे एक उपभोक्ता, एक फर्म, एक परिवार की आर्थिक समस्याएँ।समष्टि अर्थशास्त्र में संपूर्ण अर्थव्यवस्था के स्तर पर आर्थिक संबंधों अथवा आर्थिक समस्याओं का अध्ययन किया जाता है।
(ii) व्यष्टि अर्थशास्त्र एक व्यक्तिगत फर्म अथवा उद्योग में उत्पादन तथा कीमत के निर्धारण से सम्बन्धित है । तदनुसार, व्यष्टि अर्थशास्त्र को संक्षेप में कीमत कहा जाता है। समष्टि अर्थशास्त्र का संबंध संपूर्ण अर्थव्यवस्था में कुल उत्पादन तथा सामान्य कीमत स्तर के । निर्धारण से है। तदनुसार, समष्टि अर्थशास्त्र को संक्षेप में आय एवं रोजगार का सिद्धांत कहा जाता है।
(iii) व्यष्टि अर्थशास्त्र के अध्ययन की यह धारणा है कि समष्टि चर (Variables) स्थिर रहते हैं। उदाहरणार्थ, जब एक फर्म या उद्योग में उत्पादन तथा कीमत के निर्धारण का अध्ययन किया जाता है तो यह मान लिया जाता है कि कुल उत्पादन स्थिर रहता है।समष्टि अर्थशास्त्र के अध्ययन की यह धारणा है कि व्यष्टि चर (Variables) स्थिर रहते हैं। उदाहरणार्थ, जब हम कुल उत्पादन तथा आय के स्तर के निर्धारण का अध्ययन करते हैं तो यह मान लिया जाता है कि आय का वितरण स्थिर रहता है।
(iv) व्यष्टि अर्थशास्त्र की समस्याओं के संदर्भ में जैसे वस्तुओं कीमत निर्धारण अथवा साधन कीमत निर्धारण की समस्याओं में बाजार प्रणाली की भूमिका का बहुत महत्व होता हैव्यष्टि अर्थशास्त्र की समस्याओं के संदर्भ समष्टि अर्थशास्त्र की समस्याओं के संदर्भ में, जैसे वस्तु कीमत निर्धारण अथवा साधन में जैसे बेरोजगार, निर्धनता तथा मुद्रा स्फीति कीमत निर्धारण की समस्याओं में बाजार आदि की समस्याओं में सरकार की भूमिका प्रणाली की भूमिका का बहुत महत्त्व होता है।

7. सकारात्मक आर्थिक विश्लेषण से आपका क्या अभिप्राय है ? 

Ans. सकारात्मक आर्थिक विश्लेषण से अभिप्राय उस विश्लेषण से है जिसमें हम यह

अध्ययन करते हैं कि विभिन्न तंत्र किस प्रकार से कार्य करते हैं। यह विश्लेषण विभिन्न आर्थिक तंत्र के क्रियाकलापों का मूल्यांकन करता है। 8. आदर्श आर्थिक विश्लेषण से आपका क्या अभिप्राय है ?

Ans. आदर्श आर्थिक विश्लेषण से अभिप्राय उस विश्लेषण से जिसमें हम यह अध्ययन करते हैं कि कोई तंत्र वांछनीय है अथवा नहीं । इसका संबंध इन प्रश्नों से होता है- क्या वांछनीय है ? यह वांछनीय नहीं है? क्या होना चाहिए? क्या नहीं होना चाहिए ?


FAQs

1. एक बाजार कब सन्तुलन में होता है ?

Ans. जब किसी कीमत स्तर पर बाजार में वस्तु की माँगी गई मात्रा, उसकी बाजार में की गई पूर्ति के बराबर होती है तब बाजार सन्तुलन में होता है।

2. एक अर्थव्यवस्था की केन्द्रीय समस्या का अर्थ लिखें। 

Ans. विभिन्न वस्तुओं का उत्पादन करने के लिए दुर्लभ संसाधनों का आवंटन अर्थव्यवस्था की केन्द्रीय समस्या कहलाती है।


कक्षा 12 अर्थशास्त्र एनसीईआरटी नोट्स


  1. व्यष्टि अर्थशास्त्र
  2. उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत
  3. उत्पादन तथा लागत
  4. पूर्ण प्रतिस्पर्धा की स्थिति में फर्म का सिद्धांत
  5. बाजार संतुलन
  6. प्रतिस्पर्धारहित बाजार
  1. परिचय
  2. राष्ट्रीय आय का लेखांकन
  3. मुद्रा एवं बैंकिंग
  4. आय का निर्धारण
  5. सरकार: कार्य और विषय क्षेत्र
  6. खुली अर्थव्यवस्था: समष्टि अर्थशास्त्र

वस्तुनिष्ठ प्रश्न MCQs


  1. व्यष्टि अर्थशास्त्र
  2. उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत
  3. उत्पादन तथा लागत
  4. पूर्ण प्रतिस्पर्धा की स्थिति में फर्म का सिद्धांत
  5. बाजार संतुलन
  6. प्रतिस्पर्धारहित बाजार
  1. परिचय
  2. राष्ट्रीय आय का लेखांकन
  3. मुद्रा एवं बैंकिंग
  4. आय का निर्धारण
  5. सरकार: कार्य और विषय क्षेत्र
  6. खुली अर्थव्यवस्था: समष्टि अर्थशास्त्र

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