Class 12 Economics Most Important Questions In Hindi With PDF Download

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Class 12 Economics Most Important Questions In Hindi With PDF Download, class 12 Economics Most Important objective questions in Hindi, class 12 Economics Most important MCQs questions in Hindi

Class 12 Economics Most Important Questions In Hindi

Class12th 
ChapterImportant Model Question Paper
BoardHidi Board
Book NCERT
SubjectEconomics
Medium Hindi
Study MaterialsFree Study Materials

class 12 economics most important objective questions in Hindi

Class 12 Economics Most Important Questions In Hindi With PDF Download

Q. 1. किसने अर्थशास्त्र को धन के विज्ञान के रूप में परिभाषित किया है? (Who has defined Economics as a wealth of science?) 

Ans. एडम स्मिथ ने अर्थशास्त्र को धन के विज्ञान के रूप में परिभाषित किया है।

Q. 2. व्यष्टि अर्थशास्त्र से आप क्या समझाते हैं? (What do you mean by Micro Economics?)

Ans. व्यष्टि अर्थशास्त्र, अर्थशास्त्र की यह शाखा है जो व्यक्तिगत आर्थिक इकाइयों, जैसे एक उपभोक्ता अथवा एक उत्पादक से संबंधित आर्थिक समस्याओं (या आर्थिक मुद्दों) का अध्ययन करती है। संसाधन आवंटन की समस्या व्यष्टि अर्थशास्त्र का प्रमुख तत्व है। 

Q. 3. माँग का अर्थ बताइए। (Give the meaning of demand.) 

Ans. किसी वस्तु की माँग वह मात्रा है जो एक निश्चित समय में दी गई मूल्य पर क्रेता को प्राप्त होती है।

Q. 4. उत्पादन फलन क्या है? (What is production function?) 

Ans. उत्पादन फलन से अभिप्राय एक वस्तु के भौतिक कारकों तथा भौतिक उत्पादन के बीच पाये जाने वाले फलनात्मक संबंध से है। अन्य शब्दों में, उत्पादन फलन किसी फर्म के उत्पादन तथा उत्पादन के भौतिक कारकों के बीच तकनीकी संबंध को व्यक्त करता है।

Q. 5. बाजार को परिभाषित कीजिए। (Define market?) 

Ans. बाजार की परिभाषा इस प्रकार दी जा सकती है-व्यवस्थाओं का कोई भी समुच्चय जिससे लोगों के आर्थिक क्रियाओं को मुक्त रूप से संचालित करने की आजादी होती है, उसे बाजार कहते हैं। एक बाजार में एक व्यक्ति अपने अधिशेष उत्पादन को उन लोगों को बेच सकता है जिन्हें उसकी वस्तुओं की आवश्यकता होती है। विक्रय से प्राप्त मुद्रा का उपयोग वह व्यक्ति उन वस्तुओं एवं सेवाओं का क्रय करने के लिए कर सकते है, जिसकी उसे आवश्यकता होती है। वास्तव में, बाजार एक ऐसा स्थान है जहाँ पर वस्तुओं एवं सेवाओं की खरीद-बिक्री की जाती है।

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Q. 6. प्रतिस्थापक एवं पूरक वस्तुओं के उदाहरण दें। 

Ans. प्रतिस्थापक वस्तु – गुड़ और चीनी पूरक वस्तु पेन और स्याही।

Q. 7. स्थिर लागत एवं परिवर्तनशील लागत के बीच अन्तर बतायें।

Ans. स्वयं करे

Q. 8. किसी अर्थव्यवस्था की किन्हीं तीन केन्द्रीय समस्याओं को लिखें। (Write any three central problems of an economy.)

Ans. स्वयं करे

Q. 9. उपयोगिता से आप क्या समझते हैं? (What do you mean by utility?)

Ans. अर्थशास्त्र में उपयोगिता का अर्थ किसी वस्तु के उपयोग से उपभोक्ता को जो संतुष्टि प्राप्त होती है उसे उपयोगिता कहते हैं। दूसरे शब्दों में उपयोगिता का अर्थ उस संतुष्टि या आनंद या लाभ से है, जो किसी व्यक्ति को धन या संपत्ति के उपभोग से प्राप्त होता है। यह आवश्यकता की तीव्रता पर निर्भर करती है।

Q. 10. पूर्ति की लोब से आप क्या समझते हैं? (What do you mean by elasticity of supply?)

Ans. पूर्ति की लोथ का अर्थ है कि कीमत में परिवर्तन होने से पूर्ति में कितना परिवर्तन होता है। संक्षेप में, पूर्ति की कीमत लौच में परिवर्तन के कारण पूर्ति में परिवर्तन की डिग्री को व्यक्त करती है। यदि कीमत में परिवर्तन कम जीर पूर्ति में परिवर्तन अधिक है तो पूर्वि लोचदार कठताती है। इसके विपरीत, यदि कीमत में परिवर्तन अधिक और पूर्ति में परिवर्तन कम है तो पूर्ति कम लोचदार कहलाती है। 

पूर्ति की लोच पूर्ति में प्रतिशत परिवर्तन का अनुपात है-

पूर्ति की लोच (E,) पूर्वि में प्रतिशत परिवर्तन कीमत में प्रतिशत परिवर्तन चूंकि कीमत और पूर्ति एक ही दिशा में परिवर्तित होते हैं, इसलिए प्रायः पूर्ति की लोच का गुणांक धनात्मक होता है।

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Q. 11. एकाधिकार को परिभाषित करें। इसकी विशेषताएँ क्या हैं? (Define monopoly. What are its main features ?) 

Ans. स्वयं करे 

Q 12. माँग की रेखा नीचे दाहिनी ओर क्यों झुकती है? (Why does a demand curve slopes downward to the right?) 

Ans. स्वयं करे 

Q. 13. पैमाने के प्रतिफल से आप क्या समझते हैं? (What do you mean by returns to scale ?)

Ans. स्वयं करे

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Q. 14. सीमान्त उपयोगिता ह्रास नियम को बताइये। (State the law diminishing marginal utility.)

Ans. स्वयं करे 

Or, जब कोई वस्तु ₹5 में बिक रही थी तो उसकी माँग 100 इकाइयाँ थी। अब वस्तु का मूल्य बदलकर ₹8 हो जाता है जिसके फलस्वरूप मांग घटकर 50 इकाइयाँ हो जाती है। माँग की मूल्य लोच की गणना करें। 

Ans. मान लिया कि प्रारंभिक मूल्य P, तथा अंतिम मूल्य P, है। प्रारंभिक मूल्य (P.) पर माँगी गयी वस्तु की मात्रा Q, तथा अंतिम मूल्य (P) पर माँगी गई वस्तु की मात्रा Q है।

Q15. पूर्ति की लोच से आप क्या समझते हैं? पूर्ति की लोच के प्रकारों का वर्णन करें। (What do mean by elasticity of supply? Describe the various types of elasticity of supply.)

Ans. पूर्ति की लोच अथवा पूर्ति की कीमत लोच, वस्तु की कीमत में परिवर्तनों के कारण उसकी पूर्ति पता पूर्ति की कीमत सो प्रदर्शित करता है। पूर्ति की कीमत लोच की धारणा हमें यह बताती है कि कीमत में परिवर्तन के फलस्वरूप किसी वस्तु की पूर्ति में किस दर या अनुपात में परिवर्तन होता है। सरल शब्दों में, पूर्ति की लौच वस्तु की कीमत में हुए प्रतिशत परिवर्तन के फलस्वरूप पूर्ति में होनेवाले प्रतिशत परिवर्तन को व्यक्त करता है।

पूर्ति की लोच के विभिन्न प्रकार निम्नलिखित हैं-

(i) पूर्णतया बेलोचदार पूर्ति-जब वस्तु की कीमत में परिवर्तन के फलस्वरूप पूर्ति की मात्रा में कोई परिवर्तन नहीं होता, तो इस प्रकार की पूर्ति बेलोचदार कहलाती है।

(ii) बेलोचदार पूर्ति-जब वस्तु की पूर्ति की मात्रा में कीमत की अपेक्षा प्रतिशत परिवर्तन कम होता है, तो यह कम लोचशील होती है। (iii) इकाई लोचदार पूर्ति-जब वस्तु की पूर्ति में परिवर्तन कीमत में परिवर्तन के बराबर हो, तो इसे लोचदार पूर्ति कहते हैं।

(iv) लोचदार पूर्ति-जव पूर्ति में प्रतिशत परिवर्तन कीमत में प्रतिशत परिवर्तन से अधिक होता है तो पूर्ति मूल्य सापेक्ष अथवा लोचशील होगी। (v) पूर्णतया लोचदार पूर्ति-वस्तु की पूर्ति पूर्णतया लोचदार होती है, जब

कीमत में कोई परिवर्तन न होने पर भी पूर्ति में बहुत अधिक वृद्धि या कमी आ जाती है।

Q.16. अल्पकालीन औसत लागत की रेखा U-आकार की क्यों होती है। संक्षेप में समझाइए। (Why is short run average cost curve U-shaped ? Explain briefly.) 

Ans. स्वयं करे

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Q. 17. मूल्य ह्रास से आप क्या समझते हैं? (What do you mean by depreciation?)

Ans. उत्पादन प्रक्रिया में पूँजीगत वस्तुओं जैसे-इमारत, मशीन, पूँजी, उपकरण आदि के मूल्यों में घिसावट, सामान्य टूट-फूट अप्रचलन (तकनीकी परिवर्तन) आदि के कारण कमी को मूल्य हास कहते हैं। इसे स्थायी पूँजी का उपयोग एवं अचल पूँजी का उपयोग अथवा घिसावट भी कहते हैं।

Q. 18. भारत के केन्द्रीय बैंक का नाम क्या है? (What is the name of central bank of India?)

Ans. भारत के केन्द्रीय बैंक का नाम भारतीय रिजर्व बैंक है।

Q. 19. बचत फलन क्या है? (What is saving function?)

Ans. बचत-प्रक्रिया (फलन) अथवा बचत की प्रवृति बचत एवं आय के बीच सम्बन्ध को व्यक्त करती है। बचत-प्रक्रिया आय के विभिन्न स्तरों पर बचत एवं आय की एक अनुसूची होती है। बचत और आय का सम्बन्ध सकारात्मक अथवा प्रत्यक्ष होता है।

Q. 20. 1936 में प्रकाशित कीन्स के ग्रन्थ का नाम क्या है? (What is the name of Keynes’ book published in 1936 ?)

Ans. 1936 में प्रकाशित कीन्स के ग्रन्थ का नाम ‘जनरल थ्योरी ऑफ इम्प्लॉयमेंट’ है।

Q. 21. हरित GNP किसे कहा जाता है? (What is called green GNP ?)

Ans. हरित GNP की अवधारणा का विकास आर्थिक विकास के मापक के रूप में किया जा रहा है। GNP को मानवीय कुशलता को मापने के लायक बनाने के प्रयास किये जा रहे हैं। इसी संदर्भ में हरित GNP का प्रतिपादन किया गया है। हरित GNP ने आर्थिक संवृद्धि की कसौटी प्राकृतिक संसाधनों के विवेकशील विदोहन और विकास के हित लाभों के समान वितरण पर जोर दिया है। अर्थातू GNP का संबंध प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग, संरक्षण एवं समाज के विभिन्न वर्गों में उनके न्यायोचित बँटवारे से हैं।।

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Q. 22. सकल घरेलू उत्पाद एवं शुद्ध राष्ट्रीय आय में अन्तर बताएँ। (Make distinction between Gross Domestic Product and Net National Income.)

Ans. किसी देश की सीमा में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के सकल मूल्य को सकल घरेलू उत्पाद कहा जाता है। इसमें पिसावट भी शामिल है। राष्ट्रीय आय लेखांकन में शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद में से अप्रत्यक्ष करों को पटाने पर शुद्ध राष्ट्रीय आय प्राप्त होता है। शुद्ध राष्ट्रीय आय घरों की व्यवसायों

की तथा सरकार की आय शामिल है। अतः सकल घरेलू उत्पाद तथा शुद्ध राष्ट्रीय आम के तुलनात्मक अध्ययन करने से इन दोनों में अंतर स्पष्ट होता है। 

Q. 23. राजस्व प्राप्तियों की परिभाषा दें। (Define Revenue Receipts.) 

Ans. सरकार द्वारा वसूले गए सभी प्रकार के कर और शुल्क निवेशों पर प्राप्त ब्याज और लाभांश तथा विभिन्न सेवाओं के बदले प्राप्त रकम को राजस्व प्राप्ति या राजस्व कहा जाता है।

Q. 24. लोचशील विनिमय दर को समझाइए। (Explain flexible rate of exchange.)

Ans. यह यह विनिमय दर होती है जिसका निर्धारण अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में विदेशी मुद्रा की भाँग व पूर्ति की शक्तियों के द्वारा होता है। जिस विनिमय दर पर विदेशी मुद्रा की माँग व पूर्ति समान हो जाती है वही दर साम्य विनिमय दर कहलाती है। आजकल समूचे विश्व में विभिन्न देशों के मध्य आर्थिक लेन-देन का निपटारा लोचशील विनिमय दर के आधार पर होता है। 

Q. 25. दोहरी गणना से क्या तात्पर्य है? (What is meant by double counting?)

Ans. दोहरी गणना एक त्रुटि है जो अतार्किक गणना के परिणामस्वरूप हुई है। इस शब्द का उपयोग अर्थशास्व में किसी देश के समान के मूल्य को एक से अधिक बार गिनने की दोषपूर्ण प्रया का उल्लेख करने के लिए किया जाता है। राष्ट्रीय आय की गणना होने में दोहरी गणना की समस्या भी कभी-कभी सामने आती है।

Q. 26. तरलता फाँद क्या है ? (What is liquidity trap ?)

Ans. तरलता पारा या तस्तता पद यह स्थिति है जहाँ सदृट्टा उद्देश्य के लिए मुद्रा की मांग पूर्णतया लोचदार हो जाती है। तरलता पाश की स्थिति में व्याज दर बिना बढ़ाये या घटाये अतिरिक्त अन्तःक्षेपित मुद्रा का प्रयोग कर लिया जाता है।

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Q. 27. भुगतान संतुलन तथा व्यापार संतुलन में अन्तर बताएँ। (Distinguish between Balance of Payment and Balance of Trade.)

Ans. भुगतान संतुलन या भुगतान शेष तथा व्यापार संतुलन या व्यापार शेष का तुलनात्मक अध्ययन करने से इन दोनों में अन्तर स्पष्ट किया जा सकता है। प्रत्येक देश कुछ वस्तुओं को आयात करता है तथा कुछ अन्य वस्तुओं का निर्यात करता है। आयात तथा निर्यात के बीच मूल्यों में अंतर को व्यापार संतुलन कहते हैं।

अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सामान्यतः सभी देश एक-दूसरे के साथ माल का जायात-निर्यात करते है। सेवाओं का आदान-प्रदान करते हैं और राशि का लेन-देन भी करते हैं। इस प्रकार एक निश्चित अवधि के पश्चात् इन सभी मदों पर लेन-देन का यदि हिसाब निकाला जाय तो किसी एक देश को दूसरे से भुगतान लेना शेम होता है और दूसरे देश को किसी तीसरे देश का भुगतान चुकाना शेष रहता है। विभिन्न देशों के बीच इस प्रकार के शेष को भुगतान शेष कहते हैं। के पारस्परिक लेन-देन

Q. 28. मुद्रा के प्राथमिक कार्य समझाइए। (Explain the primary function of money.)

Ans. मुद्रा के प्राथमिक कार्य निम्नलिखित हैं- 

(1) विनिमय का माध्यम (Medium of Exchange) प्रारम्भ से ही मुद्रा ने समाज में विनिमय-माध्यम का आवश्यक कार्य पूरा किया है। विनिमय-माध्यम के रूप में मुद्रा सब वस्तुओं के लेन-देन को संभव बनाती है। उत्पादक अपना माल थोक-विक्रेताओं को मुद्रा के बदले में बेचते है। 

थोक विक्रेता वही माल उपभोक्ताओं को मुद्रा के बदले में बेचते हैं। इसी प्रकार समाज का प्रत्येक वर्ग अपनी सेवाओं के बदले में मुद्रा प्राप्त करता है और उससे अपनी आवश्यकता की वस्तु खरीद लेता है। मुद्रा ने विनिमय-माध्यम का कार्य करके वस्तु-विनिमय की असुविधाओं को दूर कर दिया है।

(ii) मूल्य का सामान्य मापक (Common Measure of Value)-मुद्दा द्वारा अर्थव्यवस्था में उत्पन्न समस्त वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य मापा जाता है। वस्तु-विनिमय में यह निर्णय करना कठिन था कि वस्तु की मात्रा विशेष के बदले दूसरी वस्तु की कितनी मात्रा प्राप्त होनी चाहिए। मुद्रा ने सामान्य मूल्य-मापक का कार्य सम्पन्न करके समाज को इस कठिनाई से मुक्त कर दिया है। अब मुद्रा में ही समस्त वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य ज्ञात किया जाता है और मुद्रा विभिन्न

वस्तुओं और सेवाओं के बीच ऐसा अनुपात निर्धारित करती है जिसके आधार पर वस्तुओं व सेवाओं में परस्पर विनिमय सरतला से हो जाता है। 

(iii) भावी भुगतानों का प्रमाण (Standard of Deferred Payments) आधुनिक आर्थिक ढाँचा साख पर आधारित है और साख मुद्रा के रूप में ही प्रदान की जाती है। वास्तव में साख का महत्व अब इतना अधिक बढ़ गया है कि इसको वर्तमान आर्थिक उन्नति की आधारशिला कहना गलत नहीं होगा। मुद्रा समाज में वर्तमान भुगतानों के अतिरिक्त भावी भुगतानों का भी आधार है। केवल मुद्रा ही एक ऐसी वस्तु है जिसके रूप में भविष्य में होने वाले भुगतानों का हिसाब इस प्रकार से रखा जा सकता है कि ऋणी व ऋणदाता दोनों में से किसी को भी हानि न हो।

(iv) मूल्य संचय का साधन (Store of Value) -अदल-बदल प्रणाली में यन का संचय करना लगभग असम्भव था। मुद्रा के आविष्कार ने इस कठिनाई को दूर कर दिया है। मुद्रा के द्वारा व्यक्ति आवश्यक क्रय-शक्ति को जमा करके

रख सकता है और जब चाहे वह इसका प्रयोग कर सकता है। इसके खराब होने का भी प्रश्न नहीं उठता। पन के संचय को संभव बनाकर मुद्रा वर्तमान युग में पूँजी के संचय का तथा इसके द्वारा बड़े पैमाने की उत्पादन प्रणाली की संगठित रूप का एकमात्र साधन बन गयी है। 

Q. 29. आय के चक्रीय प्रवाह को समझाइए। (Explain the circular flow of income.) 

Ans. स्वयं करे

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Q. 30. सामूहिक माँग की अवधारणा को उचित चित्र द्वारा स्पष्ट कीजिए। (Explain the concept of Aggregate Demand using a suitable diagram.)

Ans. सामूहिक माँग (Aggregate Demand) एक अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं की सम्पूर्ण माँग को ही सामूहिक माँग कहा जाता है और यह अर्थव्यवस्था के कुल व्यय के रूप में व्यक्त की जाती है। इस प्रकार, एक अर्थव्यवस्था में वस्तुओं एवं सेवाओं पर किये गये कुल व्यय में संदर्भ में सामूहिक माँग की माप की जाती है।

दूसरे शब्दों में, सामूहिक माँग, उस कुल व्यय को बताती है जिसे एक देश के निवासी, आय के दिये हुये स्तर पर, वस्तुओं तथा सेवाओं को खरीदने के लिए खर्च करने को तैयार हैं।

Q. 31. विनिमय दर क्या है? इसका निर्धारण कैसे होता है? (What is exchange rate ? How is it determined?)

Ans. विनिमय दर यह दर है जिसपर एक देश की एक मुद्रा इकाई का दूसरे देश की मुद्रा में विनिमय किया जाता है। दूसरे शब्दों में विदेशी विनिमय दर यह बताती है कि किसी देश की मुद्रा की एक इकाई के बदले में दूसरे देश की मुद्रा की कितनी इकाइयों मिल सकती है।

विनिमय दर का निर्धारण जहाँ विदेशी मुद्रा की माँग व पूर्ति समान हो, जाती है, विनिमय दर वहाँ निर्धारित होती है। विदेशी मुद्रा की माँग व पूर्ति का साम्य बिन्दु वह होता है जब मुद्रा का मांग वक तथा पूर्ति एक-दूसरे को काटते है। साम्य बिन्दु पर विनिमय दर को साम्य विनिमय दर तथा माँग व पूर्ति की मात्रा को साम्य मात्रा कहते हैं।


NOTES & QUESTIONS ANSWER



MCQS IN ENGLISH



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कक्षा 12 अर्थशास्त्र एनसीईआरटी नोट्स


  1. व्यष्टि अर्थशास्त्र
  2. उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत
  3. उत्पादन तथा लागत
  4. पूर्ण प्रतिस्पर्धा की स्थिति में फर्म का सिद्धांत
  5. बाजार संतुलन
  6. प्रतिस्पर्धारहित बाजार
  1. परिचय
  2. राष्ट्रीय आय का लेखांकन
  3. मुद्रा एवं बैंकिंग
  4. आय का निर्धारण
  5. सरकार: कार्य और विषय क्षेत्र
  6. खुली अर्थव्यवस्था: समष्टि अर्थशास्त्र

वस्तुनिष्ठ प्रश्न MCQs


  1. व्यष्टि अर्थशास्त्र
  2. उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत
  3. उत्पादन तथा लागत
  4. पूर्ण प्रतिस्पर्धा की स्थिति में फर्म का सिद्धांत
  5. बाजार संतुलन
  6. प्रतिस्पर्धारहित बाजार
  1. परिचय
  2. राष्ट्रीय आय का लेखांकन
  3. मुद्रा एवं बैंकिंग
  4. आय का निर्धारण
  5. सरकार: कार्य और विषय क्षेत्र
  6. खुली अर्थव्यवस्था: समष्टि अर्थशास्त्र

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