Class 12 Hindi Book Antral-II Chapter 1 Question Answer सूरदास की झोंपड़ी Summary

WhatsApp Group (Join Now) Join Now
Telegram Group (Join Now) Join Now

क्या आप NCERT Solutions Class 12 Hindi Book Antral-II Chapter 1 Question Answer का समाधान खोज रहे हैं? ताकि अपने class 12 Hindi के परीक्षा में काफी अच्छे अंक प्राप्त कर सकें | तो यह वेबसाइट आपके लिए है | यहां पर आपको class 12 की तैयारी के लिए अति आवश्यक समाधान उपलब्ध कराया जाता है |

तो छात्रों, इस लेख को पढ़ने के बाद, आपको इस अध्याय से परीक्षा में बहुत अधिक अंक प्राप्त होंगे, क्योंकि इसमें सभी परीक्षाओं से संबंधित प्रश्नों का वर्णन किया गया है, इसलिए इसे पूरा अवश्य पढ़ें।

मैं खुद 12वीं का टॉपर रहा हूं और मुझे पता है कि 12वीं की परीक्षा में किस तरह के प्रश्न पूछे जाते हैं। वर्तमान में, मैं एक शिक्षक की भूमिका भी निभा रहा हूँ, और अपने छात्रों को कक्षा 12वीं की महत्वपूर्ण जानकारी और विषयों का अभ्यास भी कराता हूँ। मैंने यह लेख 5 वर्षों से अधिक के अपने अनुभव के साथ लिखा है। इस पोस्ट की मदद से आप परीक्षा में इस अध्याय से भूगोल में बहुत अच्छे अंक प्राप्त कर सकेंगे।

NCERT Solutions for Humanities Class 12 Hindi Book Antral-II Chapter 1 Question Answer सूरदास की झोंपड़ी Summary

कक्षा | Class12th 
अध्याय | Chapter01
अध्याय का नाम | Chapter Nameसूरदास की झोंपड़ी
लेखक का नाम | Author Nameप्रेमचंद
किताब | Bookअंतराल भाग 2 ऐच्छिक | Antral-II Hindi Elective
बोर्ड | Boardसभी हिंदी बोर्ड
किताब | Book एनसीईआरटी | NCERT
विषय | Subjectहिंदी | HINDI
अध्ययन सामग्री | Study Materialsप्रश्न उत्तर | Question answer


सूरदास की झोंपड़ी पाठ का आधार | class 12 surdas ki jhopdi

प्रेमचन्द साहित्य को सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम मानते थे। उन्होंने कई उपन्यासों की रचना की जिसमें ‘रंगभूमि’ नामक उपन्यास अपना विशिष्ट स्थान रखता है। ‘सूरदास की झोंपड़ी’ ‘रंगभूमि’ उपन्यास का एक प्रमुख अंश है। इस अंश में सूरदास के चरित्र का उद्घाटन हुआ है। एक दृष्टिहीन व्यक्ति जितना पीड़ित तथा लाचार जीवन जीने को अभिशप्त होता है, सूरदास का चरित्र इसके ठीक विपरीत है। वह अपनी पीड़ा, बेवसी तथा लाचारी से हार नहीं मानता, अपितु पुनर्निर्माण में विश्वास रखता है। उसमें आत्मविश्वास तथा आत्मबल की कोई कमी नहीं है।

class 12th NotesMCQ
HistoryPolitical Science
EnglishHindi

सूरदास की झोंपड़ी पाठ का सारांश | surdas ki jhopdi summary

किसी गाँव में एक अशिक्षित गरीब परिवार था जिसमें मुख्य सदस्य भैरों और उसकी पत्नी सुभागी रहती थी। गाँव में मैरों और उसकी पत्नी सुभागी के बीच झगड़ा होता है। सुभागी भैरों की मार से बचने के लिए सूरदास की झोंपड़ी में छिप जाती है, भैरों भी उसे मारने के लिए झोंपड़ी में घुस जाता है। 

लेकिन सूरदास के हस्तक्षेप के कारण वह उसे मार नहीं पाता है। इस घटना के बाद पूरे मुहल्ले में सूरदास की बदनामी होती है। सभी लोग उसके चरित्र पर प्रश्न उठाते हैं। सूरदास और सुभागो के संबंधों की चर्चा से हुई बदनामी के कारण भैरों ने अपने अपमान का बदला लेने की ठान ली। उसने प्रण कर लिया कि जब तक सूरदास को बरबाद न कर देगा, चैन से नहीं बैठेगा। भैरों सूरदास पर नजर रखने लगा। अंततः उसने सूरदास की झोंपड़ी से रुपयों की थैली चुरा ली और झोंपड़ी में आग लगा दी।

Class 12 Hindi Book Antral-II Chapter 1 Question Answer
image credit: Social media

अचानक लगी आग से काफी लोग इकट्ठा हो गए। कुछ लोग आग बुझाने का प्रयास कर रहे थे, कुछ ‘आग-आग’ कहकर शोर मचा रहे थे, तो कुछ निराशापूर्वक चुपचाप खड़े होकर जलती हुई झोंपड़ी को देख रहे थे। सूरदास भी दौड़ता हुआ आता है। सभी उससे आग लगने का कारण पूछते हैं। 

साथ ही एक-दूसरे पर झोंपड़ी जलाने का शक भी करते हैं। देखते-ही-देखते झोंपड़ी जलकर राख का ढेर बन जाती है। लोग सूरदास को दिलासा देकर चले जाते हैं। लेकिन सूरदास अब भी वही बैठा था उसे झोपड़ी के जलने का दुख न था, उसे तो उस पोटली का दुख था, जिसमें उसकी आशाएँ तथा यातनाएं सहकर एकत्रित किया पन था वह यन जो उसने अपने पितरों के उद्धार के लिए एकत्रित किया था।

जब आग पूर्ण रूप से बुझ जाती है तो सूरदास उसकी राख में अपनी पोटली खोजता है। पेटी खोजते खोजते सुबह हो जाती है, पर कुछ भी हाथ नहीं लगता। उसे लगता है कि वह घूस की राख नहीं है, अपितु उसकी अभिलाषाओं की राख है।

सुबह होने पर जगधर सूरदास के पास आता है और उससे पूछता है कि किस पर शक है। लेकिन सुरदास उसे किसी पर भी शक न होने की बात कहता है। जगधर को विश्वास है कि आग भैरों ने लगाई है। यह मैरों के पास जाकर यह बात कहता है। गैरों भी उसे धुलेआम कह देता है कि मैंने ही आग लगाई है। गैरों उसे रुपयों की पोटली दिखाता है। 

जो उसने पी से चुराई थी। जगघर इतने सारे रुपए देखकर ईर्ष्यावश उन्हें लौटाने की बात कहता है। यह उसे पुलिस तथा गरीब की हाय का डर भी दिखाता है। लेकिन गैरों रुपए लौटाने से साफ इनकार कर देता है। जगधर निराश होकर पुनः सूरदास के पास आता है। वह सूरदास को रुपए मेरो के पास होने की बात बताता है। पर सूरदास समाज के डर से वह रुपये किसी और के होने की बात कहता है।

उसी समय सुभागी सूरदास को दिलासा देने आती है। वह जानती थी कि आग गैरों ने ही लगाई है और वह सब मेरे कारण हुआ है। यह जगधर को यहाँ देखकर वापस लौटना चाहती है, लेकिन जगधर उसे देख लेता है। वह उसे बुलाकर उसके पति की करतूत बताता है कि उसने सूरदास के रुपए चुरा लिए हैं। सूरदास इस बात को नकारता है, पर जगघर भी दान कर बैठा। था। सुभागी सूरदास के चेहरे को देखकर जान जाती है कि रुपए सूरदास के हैं। 

वह हर हाल में रुपए वापस दिलाने का फैसला करती है। सूरदास सारे घटनाक्रम को सोचते हुए अपने भाग्य को कोसता है। उसे सुभागी की भी चिंता होती है। तभी मिठुआ रोता हुआ आता है। वह किसी बच्चे से लड़कर आया था। किसी ओर से एक आवाज आई- ‘तुम खेल में रोते हो। 

सूरदास यह सुनकर चौंक पड़ता है। निराशा, चिंता, ग्लानि सभी दूर हो गई। वह सोचने लगा- “सच्चे खिलाड़ी कभी रोते नहीं, “खेल हँसने के लिए, दिल बहलाने के लिए है, रोने के लिए नहीं ।”

यह विचार मन में आते ही सूरदास के चेहरे पर विजय का भाव चमकने लगा। वह अपने दोनों हाथों से झोंपड़ी की राख उठा-उठाकर फेंकने लगा। उसके मुख से एक ही बात निकल रही थी, कि हम दूसरा घर बनाएंगे। चाहे कोई उसे कितनी ही बार जला दें, हम पुनः नया घर बना लेंगे।


सूरदास की झोंपड़ी कठिन शब्दों के अर्थ

उपचेतना नींद में जगते रहने का अहसास। अग्निदाह-आग का दहन । खुटाई — खोट । धरन — पृथ्वी उद्धार – उबारना संचित-संचय किया हुआ । तस्कीन — तसल्ली, दिलासा। पिंडा देना – श्राद्ध आदि करना भूबल – राख के नीचे सुलगती अग्नि। अधीरता धैर्य न रहना। तड़का – सुबह सुभा— शक। अदावत- दुश्मनी। चिता दिया-बताया। परवा परवाह फिक दियासलाई म जरीवाना जुर्माना दंडनाइक-बेल अकारण । भोज-भात — दावत, सहभोज । बल्लमेटेरों-लुटेरों, गुंडे-बदमाश। मसक्कत — मेहनत, परिश्रम हसद ईर्ष्या ।

छाती पर साँप लोटना — ईर्ष्या करना। दमड़ी— पैसे का आठवाँ हिस्सा। छदाम-पैसे का चौथाई भाग टेनी मारना सही तौल न रखना बाट खोटे रखना कम तौलना गुनाह बेलज्जत नहीं रहना – किसी लाभ के बिना गुनाह न करना। पिंडदान कर्मकांड के अनुसार पितरों के पिंड देने का कर्म । झिझकी— संकोच ।

अन्वेषण यो महत-मर्म पर चोट पहुंचा हुआ। मालिन्यमापन विजयपर्व की तरंग जीत की खुशी उद्दिष्ट निश्चित । भस्म स्तूप – ढेर का ढेर ।


सूरदास की झोंपड़ी पाठ का प्रश्न उत्तर | Class 12 Hindi Book Antral-II Chapter 1 Question Answer

प्रश्न 1. ‘चूल्हा ठंडा किया होता, तो दुश्मनों का कलेजा कैसे ठंडा होता ?’ इस कथन के आधार पर सूरदास की मनःस्थिति का वर्णन कीजिए। 

उत्तर- 

(क) निराशा की भावना सूरदास की झोंपड़ी जल जाने पर सभी उसे दिलासा देते हैं। लेकिन वह मनन करते हुए निराश हो जाता है। यह कथन उसकी निराशापूर्ण मनःस्थिति को स्पष्ट करता है।

(ख) शंकापूर्ण स्थिति — झोंपड़ी जल जाने के बाद कई लोगों पर शक की दृष्टि थी। सूरदास हालाँकि किसी का नाम नहीं लेता, परन्तु उसे लगता है कि आग किसी ने दुश्मनी के कारण लगाई है। 

प्रश्न 2. भैरों ने सूरदास की झोंपड़ी क्यों जलाई ?

उत्तर—(क) अपमान का बदला – भैरों का मानना था कि सूरदास ने सुभागी को उसके हाथ बचाकर उसका अपमान किया है। साथ ही बिरादरी में भी उसका अपमान हुआ है। अतः उसने सूरदास से बदला लेने के लिए उसकी झोंपड़ी जलाई।

(ख) रुपयों का लोभ—मैरों ने सूरदास के रुपयों को चुराने का मन बना लिया था। इसलिए रुपए चुराने के बाद झोपड़ी में आग लगा दी। जिससे सब सोचें कि रुपए जल गए। 

प्रश्न 3. ‘यह फूस की राख न थी, उसकी अभिलाषाओं की राख थी।’ संदर्भ सहित विवेचन कीजिए।

उत्तर- 

(क) आशाओं का दमन— सूरदास की झोंपड़ी जलने के साथ उसकी समस्त आशाएँ जल जाती हैं। उसने अपनी कई आशाओं को पूर्ण करने के लिए जो धन एकत्रित किया था, वह झोंपड़ी में ही था, जिसे मैरों चुरा ले जाता है।

(ख) अभिलाषाओं की राख -अपने संचित धन से सूरदास मिठुआ की सगाई, अपने पितरों का पिंडदान आदि कार्य करना चाहता था। लेकिन वह थन अब उसके पास न था। इसलिए उसे लगता है कि यह फूल की राख नहीं, उसकी अभिलाषाओं की राख है।

प्रश्न 4. जगधर के मन में किस तरह का ईर्ष्या भाव जगा और क्यों ? 

उत्तर- 

(क) भैरों से ईर्ष्या-जगघर को पता चल जाता है कि सूरदास के रुपए भैरों ने चुराए हैं। वह उसे रुपए वापस लौटाने को कहता हैं लेकिन उसके पीछे ईर्ष्या का भाव है। वह मेरों को रुपए मिल जाने के कारण परेशान है।

(ख) रुपयों का लोभ-जगधर को भी रुपयों का लोभ है। वह चाहता था कि भैरों उसे आधे रुपए दे दे। अगर ऐसा होता, तो शायद वह भैरों को कुछ न कहता।

प्रश्न 5. सूरदास जगधर से अपनी आर्थिक हानि को गुप्त क्यों रखना चाहता था ? 

उत्तर– (क) भिखारियों के लिए धन संचय पाप-सूरदास एक अँधा भिखारी है। लेकिन वह भली-भाँति जानता है कि उस जैसे भिखारी के लिए दरिद्रता लज्जा की बात नहीं, अपितु धन एकत्रित करना लज्जा की बात है। इसलिए वह अपनी आर्थिक हानि गुप्त रखना चाहता है। 

(ख) बात को दबाना -सूरदास का मानना है कि जो होना था, हो गया। अब बात बढ़ाने से क्या फायदा। इसलिए वह बात को दबाना चाहता था ताकि कोई और विपदा न आ पड़े। 

प्रश्न 6. ‘सूरदास उठ खड़ा हुआ और विजय गर्व की तरंग में राख के ढेर को दोनों हाथों से उड़ाने लगा।’ इस कथन के संदर्भ में सुरदास की मनोदशा का वर्णन कीजिए। 

उत्तर- 

(क) विजय भाव-झोंपड़ी के जल जाने से सूरदास को नैराश्य, चिंता और क्षोभ आदि भावों ने घेर लिया था लेकिन बच्चों की बातें सुनकर उसमें जीत की भावना जाग उठती प्रतिशोध लेने में विश्वास नहीं करता है बल्कि पुनर्निर्माण में विश्वास करता है। इसीलिए वह मिठुआ के सवाल का “जो कोई सौ लाख बार झोंपड़ी में आग लगा दे” दृढ़तापूर्वक उत्तर देता है तो हम सौ लाख बार बनाएँगे।” 

प्रश्न 7. ‘तो हम सौ लाख बार बनाएंगे।’ इस कथन के संदर्भ में सूरदास के चरित्र का विवेचन कीजिए।

उत्तर—

(क) कर्मशील व्यक्तित्व -सूरदास एक कर्मशील व्यक्तित्व का स्वामी है। उसे अपने कर्म के आधार पर सारी विपदाओं का सामना कर लेने का पूर्ण विश्वास है।

(ख) हार न मानने वाला —सूरदास परिस्थितियों से जूझने वाला व्यक्ति है। वह विकट परिस्थितियों से हार मानने वालों में से नहीं है। 

(ग) सहनशीलता ——यह कथन सूरदास के व्यक्तित्व में सहनशीलता को भी दर्शाता है। वह मुश्किलों का सामना बार-बार करने की बात कहता है। 

प्रश्न 8. सूरदास झोंपड़ी जल जाने के बाद रुपए एकत्रित करने के विषय में क्या • विचार करता है? 

उत्तर- (क) धन-संचय न करता-झोंपड़ी में आग लगने के बाद सूरदास के मन में अनेक विचार आते हैं। वह रुपए किसी और के पास रखने की बात सोचता है फिर वह सोचता है कि इससे अच्छा वह धन संचय ही न करता । अपने ऊपर खर्च करता या खा-पी लेता, तो मन को तसल्ली तो मिल जाती।

(ख) एक-एक काम करता-सूरदास सोचता है कि रुपए एकत्रित करने से अच्छा रहता, जैसे-जैसे रुपए आते, एक-एक काम पूरा करता जाता। यह मेरी ही गलती है कि सारे काम एक साथ निपटाने की सोचता रहा। चादर से बाहर पाँव फैलाने का यही फल होता है। 

प्रश्न 9. झोंपड़ी में लगी आग से सब कुछ जलकर राख हो गया था। लेकिन फिर भी सूरदास राख में रुपए क्यों खोजता है ?

उत्तर- 

(क) रुपए मिलने की आशा-सूरदास की झोंपड़ी में लगी आग अत्यन्त भीषण थी। इस आग में सब कुछ जलकर राख हो गया था। लेकिन आशा बहुत बड़ी चीज है। को भी आशा थी कि रुपये भले ही जल गए हों, पर चाँदी तो बची होगी। सूरदास

(ख) समस्त अभिलाषाओं का आधार -सूरदास ने ये रुपए विभिन्न कष्ट सहकर तथा अनेक प्रयत्नों के बाद एकत्रित किए थे। इनसे वह अपनी बहुत-सी अभिलाषाओं को पूरा करना चाहता था। ये रुपये उसके समस्त जीवन की पूँजी थे। इस कारण वह राख में भी रुपए खोजता है।

प्रश्न 10. जो कुछ होना था, हो चुका।’ यह कथन सूरदास के चरित्र की किन विशेषताओं को उजागर करता है ?

उत्तर- 

(क) भाग्यवादी सूरदास की झोपड़ी मेरो द्वारा जला दी जाती है। आसपास के लोग इस विषय पर काफी चर्चा करते हैं तथा कुछ लोगों पर ये कार्य करने का शक भी करते हैं। जगधर सूरदास से इस विषय पर बात करता है तब सूरदास के इस कथन से उसके भाग्यवादी होने का पता चलता है। 

(ख) व्यर्थ में बात न बढ़ाना — सूरदास को यह ज्ञात नहीं था कि झोंपड़ी में आग किसने लगाई है। इस कारण वह व्यर्थ में बात को बढ़ाना नहीं चाहता था। वैसे भी वह एक अंधा भिखारी था। अतः जानता था कि उसके लिए बात को बढ़ाना ठीक न रहोग। 



class12.in

VVI Question for VIP Topper Students

प्रश्न 1. ‘अंधापन की क्या थोड़ी विपत थी कि नित ही एक न एक चपत पड़ती रहती है। जिसको जी में आता है, चार खोटी-खरी सुना देता है।’ इस कथन के संदर्भ में सूरदास की मनोदशा का वर्णन कीजिए। 

उत्तर-
(क) हृदयगत पीड़ा-सूरदास की झोंपड़ी जल गई तथा रुपए गायब हो गए। उसने इन रुपयों से बहुत-सी आशाएँ बाँध रखी थीं। उसे लगता है कि धन, घर, इज्जत तो चले भी गए। जमीन बची है, वह भी जाने कब चली जाए। इस विषम परिस्थिति में वह अत्यन्त दु: हो जाता है। यह कथन उसकी हृदयगत पीड़ा को उजागर करता है।
(ख) निर्बल व्यक्ति की विवशता-सूरदास एक नेत्रहीन व्यक्ति है। वह शारीरिक रूप से निर्बल है। किसी तरह भीख माँगकर अपना गुजारा करता है। उसके रुपए चोरी हो गए तथा घर जला दिया गया। लेकिन वह निर्बल होने के कारण विवश है। किसी से टक्कर नहीं ले पाता, अतः विवशतापूर्वक यह बात कहता है। 

प्रश्न 2. दुःख था उस पोटली का, जो उसकी उम्र भर की कमाई थी।’ के आधार पर सूरदास की मनःस्थिति का वर्णन कीजिए।

उत्तर- 
(क) गहरा आघात-सूरदास की झोंपड़ी जलकर राख हो जाती है। झोपड़ी में उसके द्वारा एकत्रित उम्र भर की कमाई उस पोटली में थी जिसे उसने अनेक कष्टों तथा विपत्तियों के बाद इकट्ठा किया था। उन रुपयों के न मिलने से उसे गहरा आघात लगता है। 
(ख) समस्त अभिलाषाओं का दमन-सूरदास ने अपनी उम्र भर की कमाई उस पोटली में एकत्रित की थी। जिसके पीछे अनेक आशाओं तथा इच्छाओं की पूर्ति का उद्देश्य था । उस धन से वह अपने पितरों का पिंडदान, मिठुआ की सगाई और कुछ अन्य कार्य करना चाहता था। लेकिन आग लगने से उसकी समस्त आशाओं का दमन हो गया था।

Leave a Comment