Class 12 Hindi Book Antral-II Chapter 2 Question Answer आरोहण Summary

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मैं खुद 12वीं का टॉपर रहा हूं और मुझे पता है कि 12वीं की परीक्षा में किस तरह के प्रश्न पूछे जाते हैं। वर्तमान में, मैं एक शिक्षक की भूमिका भी निभा रहा हूँ, और अपने छात्रों को कक्षा 12वीं की महत्वपूर्ण जानकारी और विषयों का अभ्यास भी कराता हूँ। मैंने यह लेख 5 वर्षों से अधिक के अपने अनुभव के साथ लिखा है। इस पोस्ट की मदद से आप परीक्षा में इस अध्याय से भूगोल में बहुत अच्छे अंक प्राप्त कर सकेंगे।

NCERT Solutions for Humanities Class 12 Hindi Book Antral-II Chapter 2 Question Answer आरोहण Summary

कक्षा | Class12th 
अध्याय | Chapter02
अध्याय का नाम | Chapter Nameआरोहण
लेखक का नाम | Author Nameसंजीव
किताब | Bookअंतराल भाग 2 ऐच्छिक | Antral-II Hindi Elective
बोर्ड | Boardसभी हिंदी बोर्ड
किताब | Book एनसीईआरटी | NCERT
विषय | Subjectहिंदी | HINDI
अध्ययन सामग्री | Study Materialsप्रश्न उत्तर | Question answer


आरोहण पाठ का आधार | aarohan class 12 hindi summary

गद्य विद्या के प्रख्यात रचनाकार श्री संजीव ने प्रस्तुत पाठ का आधार पर्वतारोहण से जुड़ी समस्याओं और उपयोगिताओं को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से किया है। पर्वतीय क्षेत्र के सौंदर्य, संसाधन और प्रभाव का चित्रण करके पाठकों को व्यक्तिगत मंथन के लिए बाध्य किया है।

class 12th NotesMCQ
HistoryPolitical Science
EnglishHindi

आरोहण पाठ का सारांश | aarohan summary class 12

रूप सिंह जो एक पहाड़ी युवक है, ग्यारह साल बाद अपने गाँव लौटता है। उसके साथ उसे नौकरी पर लगवाने वाले कपूर साहब का लड़का शेखर कपूर भी है। गाँव की धरती पर कदम रखते ही रूप सिंह को अपनत्व और झिझक दोनों का अहसास होता है। वह देखता है कि इतने सालों बाद भी यहाँ ज्यादा परिवर्तन नहीं हुए हैं। रूप सिंह अपने साथ आए शेखर बाबू को पैदल नहीं ले जाना चाहता था। इसलिए वह एक चाय की दुकान पर गए। 

Class 12 Hindi Book Antral-II Chapter 2 Question Answer
image credit: Social media

वहाँ पीने के लिए चाय लेकर उसने सवारी के लिए घोड़ा मिलने की बात पूछी। चाय वाले ने पास बैठे एक लड़के को पुकारा और उन्हें माही छोड़ आने को कहा। लड़का चुपचाप गया और दो घोड़े ले आया। दोनों घोड़ों का मेहनताना सौ रुपए तय हुआ। रूप सिंह और शेखर घोड़ों पर बैठ गए और वह लड़का महीप घोड़ों के आगे पैदल चलने लगा। पहले पहाड़ का रास्ता ठीक-ठाक था। चारों ओर सुनहरी धूप खिली थी। रास्ते में पेड़, लताएँ और ऊंची-नीची ढलाने आ-जा रही थीं। सामने वाले पहाड़ पर बादल उमड़ रहे थे। 

उसके तल में से किसी अदृश्य नारी की आवाज में दर्द भरा गीत सुनाई दे रहा था। इस गीत में घोड़े के पैरों की टापों का संगम एक अद्भुत संगीत का निर्माण कर रहा था। शेखर गीत के विषय में रूप सिंह से पूछता है जिसे बताते हुए रूप की आवाज भर उठती है। ये दुःख अपने घर, पिता तथा भाई को छोड़ कर चले जाने का था। 

घोड़े चलते जा रह हैं, तभी एक जगह पहुँचकर रूप अपने बचपन की घटना शेखर को बताता है कि मैंने अपने भूप दादा को यहाँ से गिरा दिया था। लेकिन खुद भी गिर गया, तब भूप दादा ने बड़ी कठिनाई और बहादुरी से मुझे बचाया था। शेखर उससे प्रश्न करता है कि ‘मान लो, आज तुम्हें इस पर चढ़ना हो, तो कैसे चढ़ोगे?’

इस प्रश्न से दोनों में पर्वतारोहण की बातें छिड़ गई, जिसके बाद दोनों को कुछ याद न रहा। शेखर पहाड़ पर चढ़ने के विषय में बताने लगा। बीच-बीच में रूप सिंह भी अपना ज्ञान प्रदर्शित करता रहा था। इस बातचीत में काफी सफर कट जाता है। अब बेहद सैंकरा और खतरनाक रास्ता आ जाता है। 

दोनों के मन में कुछ डर पैदा होता है परन्तु महीप बड़ी कुशलता से घोड़ों को निर्देश देते हुए आगे बढ़ता जाता है। सफर काटने के उद्देश्य से शेखर रूप सिंह से इस बार अपने प्रेम के विषय में प्रश्न करता है। रूप सिंह कुछ न-नुकर के बाद शैला नामक अति सुंदर लड़की से अपने प्यार की बातें बताता है।

 वह शेखर को वह स्थान दिखाना चाहता है, जहाँ उसके प्यार की निशानियाँ थीं। लेकिन वहाँ पहुँचकर वह चौंक जाता है। सब कुछ बदला हुआ था। वह महीप से पूछता है “यहाँ छोटा-सा मैदान हुआ करता था। महीप उन्हें बताता है कि भू-स्खलन में वह हिस्सा दब गया है।”

यह सुनकर रूप सिंह कुछ हताश होता है। शेखर उससे महीप के रोजगार के विषय में बात करता है। वह उसके छोटी-सी उम्र में काम करने की बात से कुछ परेशान भी होता है। उसके घर-परिवार के विषय में जानने की इच्छा प्रकट करता है। लेकिन महीप कुछ न बोलते हुए उनकी बात काट देता है। 

एक झरने पर महीप घोड़ों को पानी पिलाता है और खुद भी पीता है। रूप सिंह को अतीत की याद आ जाती है। वह शेखर को बताता है कि मेरी उम्र भी इतनी ही थी। जब आपके पापा मुझे यहाँ से ले गए थे। वह फिर से महीप के विषय में जानने का प्रयास करता है, पर महीप फिर बात टाल देता है। रास्ते में एक बड़ा पत्थर आता है। महीप उसे अकेले ही हटाने लग जाता है। दोनों से मदद नहीं माँगता। इस पर रूप कहता है ये पहाड़ी लोग बड़े अजीब होते हैं, तभी उसे याद आता है कि वह भी पहाड़ी है।

अब वे गाँव के काफी करीब पहुँच गए थे और रूप सिंह की पुरानी यादें ताजा हो रही थीं। गाँव में उनके आगमन से लोगों की भीड़ एकत्रित हो जाती है। लोगों ने ठंड से बचने के लिए मोटे-मोटे ऊनी वस्त्र पहने हुए थे। उन्हें दोकर सबकी आँखों में भय, संशय और कौतूहल था। रूप सिंह की नजरें भी उन्हें पहचानने में लगी थीं।

महीप अपनी सारी थकान भूलकर वापस जाने की तैयारी कर रहा था। रूप उसे मेहनताने के पैसे देता है और रात को वहीं रुकने को कहता है। लेकिन लड़का कुछ नहीं कहता और रुपए गिनने लगता है। रूप पास बैठे एक बूढ़े के पास जाता है। 

वह टूटी-फूटी गढ़वाली भाषा में उससे अपने घर तथा भाई के विषय में पूछता है। बूढ़ा कहता है कि रूप सिंह तो यहाँ से भाग गया था। तब वह उस बताता है कि मैं ही रूप सिंह हूँ। बूढ़ा इस बात पर विश्वास नहीं करता। वह बूढ़ा दादा तिरलोक सिंह के पाँव छूता है। तभी एक दूसरा आदमी पूछता है कि आप इतने दिन कहाँ रहे? रूप सिंह उन्हें पर्वतारोहण संस्थान की नौकरी के विषय में बताता है। जिसे बूढ़ा मजाक में ले लेता है। रूप सिंह उनसे घर जाने के लिए आज्ञा माँगता है तब उसे पता

चलता है कि उसके माँ-बाप मर चुके हैं और भूप दादा पहाड़ी पर घर बनाकर रहने लगे हैं। एक लड़के ने उन्हे बताया कि जो तुम्हें घोड़ों पर लाया था, वही भूप दादा का लड़का है। रूप सिंह पीछे मुड़कर लड़के को देखना चाहता है, पर वह तो बहुत दूर निकल गया था। फिर बूढ़ा उन्हें कहता है कि शाम होने वाली है। तुम जल्दी से पहाड़ पर चढ़ जाओ।

रूप सिंह कहता है इसके लिए हमारे पास सामान नहीं है। यह सुनकर बूढ़ा और अन्य लोग हँस पड़े। तभी किसी ने कहा- अरे भूप इधर आ रहा है।’ कुछ ही क्षणों में भूप वहाँ आ पहुँचता है उसका चेहरा गोरा-चिट्टा लम्बे आकार का तथा आँखें छोटी-छोटी थी। रूप सिंह ने आगे बढ़कर उसके पाँव हुए तथा अपना परिचय दिया। उसने शेखर के विषय में भी बताया। भूप ने बिना किसी से बात “किए हुए उनके बैग कंधे पर टाँगे और घर चलने को कहा। 

आगे का मार्ग और कठिन था । खड़ी चढ़ाई, झाड़-झंखाड़ और बिना सहारे रूप सिंह और शेखर ज्यादा आगे न जा पाए। ये दोनों हॉफने लगे, जबकि भूप आगे जा चुका था। उनकी यह हालत देखकर वह वापस उनके पास आया। अपने मफलर को कमर में बाँधकर उसने दूसरा कोना रूप सिंह को पकड़ा दिया और सहारा लेकर चढ़ने को कहा। इसके बाद भूप बड़े ही धैर्य, ताकत और कुशलता के साथ ऊपर चढ़ने लगा। 

रूप सिंह को ऊपर पहुँचाकर उसने किसी को आवाज दी और फिर शेखर को लाने के लिए नीचे चला गया। ऊपर कुछ समतल जमीन, मक्का की फसल, सेव तथा देवदार के पेड़ और छप्पर की बनी झोंपड़ी थी। वहीं एक औरत खड़ी थी, जिसका कद छोटा और रंग गोरा था। रूप सिंह ने अनुमान लगाया कि यह भाभी हो सकती है, पर झिझक के मारे कुछ न बोला। वहाँ ठंडी हवा चल रही थी और कोहरा छाने लगा था। इतने में भूप शेखर को लेकर आ गया और रूप सिंह को बताया कि यह तेरी भाभी है। 

रूप सिंह ने उनके पाँव छुए। शेखर के लिए ये अनूठा अनुभव था। लेकिन रूप सिंह को कहीं कोई गड़बड़ लग रही थी। वे दोनों गुफा में बिछे पटरों पर ही सो गए। रात में उन्हें वहीं पर खाने के लिए दे दिया गया क्योंकि बाहर बहुत तेज बारिश हो रही थी। सुबह जब वे सोकर उठे तो आसमान बिल्कुल साफ था। सब एक साथ नाश्ता करने के

लिए चूल्हे के पास बैठे। नाश्ते में चाय, मक्का की रोटी थी जिन्हें वे नमक मिर्च के साथ खा 1 रहे थे। खाते हुए ही रूप सिंह ने भूप दादा से पहाड़ पर नया घर बनाने का कारण पूछा। तब भूप ने बताया कि तुमने सिर पर पहाड़ टूटने की कहावत सुनी होगी, लेकिन मैंने इसे अपने पर झेला है। तेरे जाने के बाद इतनी बर्फ पड़ी कि पहाड़ नीचे धंस गया। खेतं, मकान, माँ, बाबा सब उसमें दब गए। इसके बाद मैं बहुत दिनों तक भटकता रहा। 

फिर मैंने बचपन में बाबा द्वारा सुनाई गई चिड़िया तथा गिद्ध की कहानी से प्रेरणा ली कि जब मरना ही है, तो मौत से दो-दो हाथ करके मरा जाए। यही सोचकर मैं यहाँ आ गया और खेती शुरू कर दी। इसके बाद मैंने शैला से शादी कर ली। हम दोनों मिलकर खेती करने लगे, जिससे खेती अच्छी होने लगी। जब शैला के बच्चा होने वाला था, तब मैंने काम-काज के लिए एक और शादी कर ली।

 शैला से एक बेटा महीप हुआ था। जब यह नौ साल का था तो शैला ने यहीं से कूद कर जान दे दी। महीप इसके लिए मुझे दोषी मानता है। इसलिए वह घर छोड़कर नीचे चला गया। अब रूप को बहुत कुछ समझ आ गया था। वह सोच रहा था कि भूप दादा कितने अकेले रह गए हैं। उसने ‘भूप दादा के कष्टों को सुनकर उनसे कहा- ‘आपने बहुत दुःख झेल लिए हैं। लेकिन अब आपका छोटा भाई आ गया है। आप मेरे साथ चलें और वहाँ आराम से रहें ।’ 

शेखर भी रूप सिंह के प्रस्ताव का समर्थन करता है। लेकिन भूप उन्हें अपना तर्क देकर चुप करा देता है। इतने में बाहर से बैलों की आवाज आती है। दोनों बैल देखकर चौंक जाते हैं। भूप दादा बैलों को बाहर बाँधते हैं और उनकी पत्नी बैलों को चारा देती है। भूप दादा उन्हें बताते हैं कि वे इन बैलों को भी कंधे पर लादकर लाए थे। लेकिन तब ये छोटे थे। जब वे उनके नीचे वापस जाने की बात पूछते हैं तो भूप का जवाब था- ‘ये पहाड़ कभी भी धंस सकता है।’ इस वाक्य में बहुत आतंक था।

रूप सिंह इसे सुनते ही डर के मारे काँप उठता है। वह फिर से भूप को अपने साथ चलने की बात कहता है। लेकिन भूप उसकी बात को सहजतापूर्वक नकार देता है। यह कहता है कि मैं यहाँ अकेला नहीं हूँ माँ, बाबा, शैला सब यहीं सोये हैं। वैसे भी ये बैल हैं, मेरी घरवाली है, खेत हैं, पेड़ है और यह झरना है। यहाँ मेरे पुरखों की आत्माएँ रहती हैं। 

रूप सिंह उनसे अपनी बची हुई जिंदगी से इंसाफ करने की बात कहता है। वह उन्हें किसी भी तरह अपने साथ से जाना चाहता था। भूप अपनी भीगी हुई आँखों से उनकी ओर देखता है, जो अंदर से जल रही थीं। वह दृढ़तापूर्वक कहता है मेरे साथ सबने बहुत इंसाफ किया है। मेरी खुद्दारी को मिटाने की कोशिश न करो। जिंदा रहने तक मैं यहाँ से नीचे न जाऊँगा और न ही मेरे बैल।


आरोहण कठिन शब्दों के अर्थ

अपनत्व — अपनापन । खतो किताबत – पत्र-व्यवहार। मुकम्मिल — पूर्ण रूप से। सासमखास—अतिविशिष्ट तौहीन—बेइज्जती। जर्द-पीला पड़ना। धुंधा की फफूंदियाँ धुंध के कण । इम्पोर्टेड — आयातित जाणा छावां-जाना है। दरियाफ्त — जानकारी प्राप्त करना।

तुई वकी जाणा छू-तू वहाँ जाएगा। घाट बढी—-पहाड़ पर जाने का रास्ता । पइसा कमाणा पैसे कमाना मेहनताना — पारिश्रमिक । चंदोव— शामियाना दरकना—फट जाना। पगुराना – जुगाली करना। 1 पैबंद-फटे हुए कपड़े पर लगने वाली चकती। सूपिन-नदी का नाम। कुहेड़ी-कोहरा । अस्फुट – अस्पष्ट ।

घसेरी-घास वाली आगाह करना-सचेत करना। गफलत — गलतफहमी अनुतप्त भाव-पछतावे का भाव एड— एड़ी मारना।उस्तादाना—गुरुआई, प्रवीणता। पर्वतारोहण–पहाड़ पर चढ़ना। सैद्धांतिक— उसूलों के अनुसार। रॉक पिटन—चट्टान में गड्ढा करना। ड्रिल – खड्ढा खोदना । परिपक्व — पूर्णतया

कुशल दुस्साहसिक साहसपूर्ण लाइमस्टोन यूना मुकामात— जगह, क्षण भू-स्खलन — धरती का धँसना।घुन्ना – मन के भावों को गुप्त रखने वाला डांडी-पहाड़। औकात — हैसियत । संभ्रांत — खानदानी, कुलीन। मशगूल—व्यस्त बोलुलूं— बोलूँ। वुई—वही आत्मीयता- अपनापन आत्मसात अपने अधिकार में। के वास्तां – किसलिए। अहमक मूर्ख खिसिया- अप्रसन्न । शिनाख्त – पहचान। प्रतिध्वनि गूँजने वाली आवाज ।

तिरोहित अदृश्य स्ट्रेंज आश्चर्य शख्सिक व्यक्तित्य तिलिस्म जादू स्थित स्थिर बुद्धिवाला, समरस । — अस्तित्व ।भुइला — अनुज । ग्यार—घर डेस्टीनेशन-टिकाना । वजूद गुफानुमा — गुफा के आकार का छानी-छप्पर का झोंपड़ा। संवादहीनता — चर्चा न कर

पाना। रेयर एक्सपीरिएंस अनूठा अनुभव । पनियाई आँखें अपूर्ण आँखें। स्निग्ध-स्नेह युक्त |हयाई—यहीं विषयांतर—विषय में अंतर लाना । निर्विकार अधिकारी सुधि-सुप मेड-दिमाग पराभूत पराजित भकुआ पूर्ण सरासर — पूर्णतया खुद्दारी – स्वाभिमान ।


आरोहण पाठ का प्रश्न उत्तर | Class 12 Hindi Book Antral-II Chapter 2 Question Answer

प्रश्न 1. यूँ तो प्रायः लोग घर छोड़कर कहीं न कहीं जाते हैं, परदेश जाते हैं किंतु घर लौटते समय रूप सिंह को एक अजीब किस्म की लाज, अपनत्व और झिझक क्यों घेरने लगी ?

उत्तर- 

(क) अजीब किस्म की लाज रूप सिंह ग्यारह साल बाद लौटकर अपने गाँव आता है। उसके साथ शेखर कपूर भी हैं, जो उसके गॉड फादर का लड़का है। वह देखता है कि गाँव में कोई पक्की सड़क भी नहीं बनी है। इसलिए उसे लाज आती है।

(ख) अपनत्व — रूप सिंह लम्बे समय तक अपनी मातृभूमि से दूर रहा है। वहाँ उसके सगे-संबंधी, रिश्ते-नाते सभी हैं । यहाँ की हर चीज से उसका अपनत्व का रिश्ता है। 

(ग) झिझक—रूप सिंह घर से भागकर चला गया था और ग्यारह साल के अंतराल के बाद वापस आया था। उसे यह डर था कि लोग उससे पूछेंगे इतने साल कहाँ रहा और इतने दिनों बाद लौटकर क्यों आया ? तो वह क्या जवाब देगा? इसलिए वह झिझक रहा था।

प्रश्न 2. पत्थर की जाति से लेखक का क्या आशय है ? उसके विभिन्न प्रकार के बारे में लिखिए।

उत्तर- 

(क) पर्वतारोहण के लिए आवश्यक – पर्वतारोहण अत्यन्त खतरनाक कार्य है। इसके लिए अनेक प्रकार की सावधानियाँ बरतनी पड़ती हैं। पहाड़ों पर चढ़ते समय रस्सियाँ बाँधने के लिए उनमें सपोर्ट बनाई जाती है, जिसे बनाते समय पत्थर की जाति का विशेष ध्यान रखा जाता है। पत्थर मजबूत है या कच्चा, इसका खास ख्याल रखना पड़ता है। पहाड़ों में अनेक प्रकार के पत्थर पाए जाते हैं अथवा अनेक जाति के पत्थर मिलते हैं।

(ख) पत्थर के विभिन्न प्रकार लेखक ने पत्थर के निम्नलिखित प्रकार बताए हैं– आग्नेय चट्टान, ग्रेनाइट चट्टान, कायांतरित चट्टान, चूना पत्थर, बलुआ पत्थर तथा सिलिका ।

प्रश्न 3. महीप अपने विषय में बात पूछे जाने पर उसे टाल क्यों देता था ? 

उत्तर—

(क) रूप सिंह से रिश्ता महीप घोड़ों के द्वारा सवारी ढोकर रुपए कमाता है। रूप सिंह और शेखर जब गाँव आते हैं, तो वे उसी के घोड़ों पर बैठकर माही जाते हैं। रास्ते में वे बातचीत करते हैं। जिससे महीप को पता चल जाता है कि रूप सिंह उसका रिश्तेदार है। इसलिए अपने विषय में कुछ नहीं बोलता था।

(ख) घर से भागा हुआ महीप अपने पिता तथा घर को छोड़कर भागा हुआ है। वह अपनी माँ की मौत का कारण अपने पिता भूप को मानता है। इसलिए वह वापस घर नहीं जाना चाहता। इसी कारण वह उपने विषय में कुछ भी पूछे जाने पर उसे टाल देता है। 

प्रश्न 4. बूढ़े तिरलोक सिंह को पहाड़ पर चढ़ना जैसी नौकरी की बात सुनकर क्यों लगा ? अजीब

उत्तर—

(क) बूढ़े का पहाड़ी होना—बूढ़ा तिरलोक सिंह एक पहाड़ी व्यक्ति है। वह बहुत समय से यहीं रह रहा है। उसे पहाड़ों पर चढ़ना-उतरना भली-भाँति आता था। जब रूप सिंह उसे पहाड़ पर चढ़ने की नौकरी के विषय में बताता है तो वह चौंक जाता है। वह सोचता है। कि जो काम हम रोज करते हैं, वह किसी के लिए नौकरी भी हो सकती है।

(ख) पर्वतारोहण पहाड़ी लोगों की जीवनचर्या-पहाड़ी क्षेत्र में रहने वाले लोग अपने प्रतिदिन के कार्य-कलापों के लिए कई बार पहाड़ों पर चढ़ते-उतरते हैं। अर्थात् पर्वतारोहण इन -लागों की जीवनचर्या का हिस्सा है। यह इनके लिए कोई बड़ी बात नहीं है। इसीलिए बड़े को

इस नौकरी की बात सुनकर अजीब लगा । 

प्रश्न 5. रूप सिंह पहाड़ पर चढ़ना सीखने के बावजूद भूप सिंह के सामने बीना क्यों पड़ गया था ?

उत्तर- (क) आधुनिक उपकरणों की कमी रूप सिंह ने पहाड़ों पर चढ़ना तो सीखा था, लेकिन उसके लिए विभिन्न उपकरणों की आश्यकता थी। वह पहाड़ की चढ़ाई बेहद सुरक्षात्मक तरीके से करने का प्रशिक्षण लेकर आया था जिसमें अनेक उपकरणों की सहायता ली जाती है और उस समय उसके पास इनमें से कुछ न था। इसी कारण वह भूप सिंह के सामने बीना पड़ गया।

(ख) पहाड़ीपन की कमी-रूप सिंह लम्बे समय तक अपने गाँव से दूर रहा था। पहाड़ पर चढ़ते समय जब वह थक जाता है, तो भूप सिंह कहता है कि इतना ही पहाड़ीपन बचा है। अर्थात् वह अपनी असलियत को कहीं छोड़ आया था। वह विदेश जाने के बाद कई पुरानी थी भूल गया था।

प्रश्न 6. शैला और भूप ने मिलकर किस तरह पहाड़ पर अपनी मेहनत से नई जिंदगी की कहानी लिखी ?

उत्तर—

(क) खेतों का निर्माण— भूप सिंह का घर, खेत, माँ-बाप सभी भू-स्खलन में दबकर मर गए थे। तब भूप सिंह ने सबसे ऊंचे पहाड़ पर अपना घर बनाने का निश्चय किया। वह शैला नामक लड़की से विवाह करके उसे अपने साथ ले आया। दोनों ने मिलकर मलबा तथा पत्थर हटाए और खेतों का निर्माण किया। खेतों में बर्फ न जम जाए, इसलिए उन्हें ढलानदार बनाया।

(ख) पानी का प्रबंध-खेत बनाने के बाद खेती के लिए पानी की आवश्यकता थी। वे दोनों मिलकर खोज करने लगे और एक दिन उन्हें एक झरना मिल गया। झरना दूसरी तरफ गिर रहा था। दोनों ने बड़ी मेहनत से उसे अपने खेतों की ओर मोड़ लिया। इस प्रकार अपनी मेहनत से सा और भूप ने नई जिंदगी की कहानी लिखी।

प्रश्न 7 सैलानी (शेखर और रूप सिंह) घोड़े पर चलते हुए उस लड़के के रोजगार के बारे में सोच रहे थे जिसने उनको घोड़े पर सवार कर रखा था और स्वयं पैदल चल रहा था। क्या आप भी बाल मजदूरों के बारे में सोचते हैं 

उत्तर – हाँ, हम भी बाल मजदूरों के बारे में सोचते हैं।

(क) बाल मजदूरों की शिक्षा जो बच्चे मजदूरी कर अपना जीवन-यापन करते हैं, उनकी पढ़ाई-लिखाई नहीं हो पाती होगी। वे इस मजदूरी के चक्र में फँसकर शिया से दूर हो जाते हैं जिससे उनका समुचित विकास नहीं हो पाता है।

(ख) विकट जीवन-बाल मजदूरी के लिए विवश बच्चों का जीवन अत्यन्त विकट होता है। उन्हें दो वक्त की रोटी पाने के लिए अनेक कष्टों का सामना करना पड़ता है। बाल मजदूरों से जहाँ दुगुना काम लिया जाता है, वहीं उन्हें मेहनताना बहुत ही कम दिया जाता है। उनका • शोषण खुले आम होता है। वह अपने जीवन में सुख के कुछ क्षण पाने को भी तरसते रहते हैं। यह समाज के लिए एक महत्त्वपूर्ण प्रश्न है कि बाल मजदूरों की स्थिति को कैसे सुधारा जाए। 

प्रश्न 8. पहाड़ों की चढ़ाई में भूप दादा का कोई जवाब नहीं! उनके चरित्र की विशेषताएँ बताइए।

उत्तर-

 (क) धैर्यशाली भूप दादा एक धैर्यशाली व्यक्ति हैं। उन्होंने अनेक विपत्तियों का सामना धैर्यपूर्ण किया है। वे संकटों से डरने वाले नहीं हैं अपितु उनका सामना डटकर करते हैं। 

(ख) आत्मविश्वासी व्यक्तित्व भूप दादा आत्मविश्वास से पूर्ण व्यक्ति है। जब पड़ी पर चढ़ते समय रूप सिंह और शेखर थक जाते हैं, तो वह उन्हें अपनी कमर से बाँधकर ऊपर पहुँचाते हैं। वह अकेले आकर ऊँचे पहाड़ पर खेत तथा घर बनाते हैं, ये उनके आत्मविश्वास का ही प्रतिफलन है।

(ग) शक्तिशाली — शारीरिक दृष्टि से भूप दादा एक ताकतवर पुरुष हैं। वह रूप सिंह और शेखर को अपने बल पर पहाड़ी पर चढ़ाते हैं। वह बैलों को कंधे पर ढोकर पहाड़ पर से गए थे।

(घ) कुशल पर्वतारोही भूप दादा एक पहाड़ी पुरुष है। पर्वतारोहण उन्होंने कहीं से सीखा नहीं है। लेकिन वह एक कुशल पर्वतारोही हैं, जिसके उदाहरण कहानी में कई स्थानों पर हैं। 

प्रश्न 9. इस कहानी को पढ़कर आपके मन में पहाड़ों पर स्त्री की स्थिति की क्या छवि बनती है ? उस पर अपने विचार व्यक्त कीजिए ।

उत्तर—पहाड़ी क्षेत्रों में रहनेवाली स्त्रियों की स्थिति अत्यन्त विकट होती है। ये स्त्रियों जीवनयापन के लिए अपने पति तथा अन्य परिवारजनों के साथ बराबर काम करती हैं। इन क्षेत्रों की स्त्रियाँ खेती, सड़क निर्माण, पुल निर्माण तथा पत्थर तोड़ने जैसे कठोर कार्य भी करती हैं। ये स्त्रियाँ अपने घर-बार की देखभाल भी भली-भाँति करती है। इसने जीवन में मनोरंजन का अभाव रहता है तथा अधिकांश समय काम में ही बीतता है। जिसका कारण इन क्षेत्रों की विकट स्थितियाँ है 

प्रश्न 10. ‘पहाड़ों में जीवन अत्यंत कठिन होता है।’ पाठ के आधार पर उक्त विषय पर एक निबंध लिखिए ।

उत्तर—पहाड़ी क्षेत्र में जीवन अत्यंत कठिन होता है। यहाँ के निवासियों को जीवनयापन के लिए अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इन प्रदेशों में प्राकृतिक आपदा, भूस्खलन, पहाड़ों के खिसकने आदि से लोगों का जीवन तथा समाज नष्ट हो जाता है। यहाँ लोगों को जीविका कमाने के कम साधन उपलब्ध होते हैं। इस कारण इनकी दिनचर्या दिषमताओं से भरी होती है। ये अपना जीवन यापन करने के लिए कृषि का सहारा लेते हैं। 

लेकिन पहाड़ी भू-भाग पर कृषि करना भी अत्यन्त कठिन कार्य है। इस क्षेत्र के लोगों पर मौसम की मार भी पड़ती है। यहाँ कभी भीषण बर्फबारी होती है, तो कभी घनघोर वर्षा लोगों को घरों से न निकल पाने 1 को मजबूर कर देती है। अपनी जरूरत की चीजें लेने के लिए लोगों को मीलों पैदल जाना पड़ता है। जरूरी सामानों तथा यातायात के साधनों का अभाव इनके जीवन को और विकट बना देता है। कुल मिलाकर पहाड़ों में जीवन अत्यन्त कठिन होता है। 

प्रश्न 11. पर्वतारोहण की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालिए।

उत्तर – पर्वतारोहण आज कई लोगों की जीविका का साधन बन गया है। वर्तमान समय में इसकी उपयोगिता और अधिक बढ़ गई है। अब यह शिक्षा के पाठ्यक्रमों में शामिल हो चुका है। लोग अनेक संस्थानों के माध्यम से इसका प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। आज अनेक पर्वतारोही ऊँची-ऊँची चोटियों पर पहुँचकर अपना नाम इतिहास में दर्ज करा रहे हैं। 

देश के विभिन्न स्कूलों, कॉलेजों तथ अन्य संस्थानों से कई टीमें पर्वतारोहण के लिए पर्वतीय प्रदेशों में पहुँचती हैं। संभवतः पर्वतारोहण आने वाले समय में रोजगार के मुख्य साधनों के रूप में स्थापित हो सकता है। 

प्रश्न 12. पर्वतारोहण पर्वतीय प्रदेशों की दिनचर्या है, वही दिनचर्या आज जीविका का माध्यम बन गई है। उसके गुण-दोष का विवेचन कीजिए। 

उत्तर- 

(क) पर्वतारोहण के गुण- पर्वतारोहण से पर्वतीय क्षेत्र में रहने वालों लोगों को -रोजगार के अवसर मिल जाते हैं। इससे एक और पर्यटन को बढ़ावा मिलता है, तो वहीं दूसरी और ये मनुष्य को स्वास्थ्य संबंधी लाभ भी पहुँचाता है। पर्वतारोहण का प्रशिक्षण लेकर लोग रोजगार प्राप्त कर रहे हैं।

(ख) पर्वतारोहण के दोष-पर्वतारोहण के समय लोग साफ-सुथरे प्राकृतिक प्रदेशों को गंदा कर देते हैं। उन क्षेत्रों में रहने वाले जीव-जन्तुओं को भी क्षति पहुँचाते हैं। कई बार पर्वतारोहण के दौरान दुर्घटनावश जान-माल की हानि भी हो जाती है।

प्रश्न 13. लेखक ने कहानी में कई प्राकृतिक वस्तुओं का वर्णन किया है। स्पष्ट कीजिए । 

उत्तर- 

(क) पहाड़ों का वर्णन कहानी में अनेक स्थानों पर विशाल पहाड़ों का वर्णन । किया गया है। ये पहाड़ अत्यन्त विशाल, ऊँचे-नीचे तथा दूर-दूर तक फैले थे। पहाड़ों पर पेड़ों, पास तथा उनके ऊपर उड़ते बादल, धुंध और कोहरे का वर्णन भी लेखक ने किया है। 

(ख) खेत-खलिहानों का वर्णन कहानी में लेखक ने खेतों, नदी, फल के पेड़ो आदि का वर्णन भी किया है। जब रूप सिंह अपने भाई की झोंपड़ी में पहुँचता है, तो वहाँ बारिश होने लगती है। साथ ही शाम को बर्फीली हवा भी चलती है। कुल मिलाकर अनेक प्राकृतिक वस्तुओं और क्रियाकलापों को लेखक ने कहानी में प्रस्तुत किया है। 

प्रश्न 14. ग्यारह साल के लम्बे अन्तराल के बाद गाँव लौटते समय रूप सिंह की क्या मनोदशा थी ?

उत्तर- 

(क) मानसिक असमंजस रूप सिंह ग्यारह वर्ष के लम्बे अन्तराल के बाद अपने गाँव लौटता है। वह जैसे ही अपने गाँव की धरती पर पाँव रखता है एक अजीब से मानसिक असमंजस में फँस जाता है। वह सोचता है कि सब उससे तरह-तरह के प्रश्न करेंगे, जैसे वह इतने दिन कहाँ रहा और आज लौटकर क्यों आया ? साथ ही उसे अपने घर लौटने की खुशी भी हो रही थी।

(ख) अपनत्व की भावना रूप सिंह के मन में अपने गाँव, घर-परिवार, माँ-बाप, भाई तथा गाँव वालों के लिए अपनत्व का भाव पैदा हो रहा था। वह इन सबसे मिलने को बेचैन था।

प्रश्न 15. भूप दादा ने अपने जीवन में अनेक कष्टों का सामना किया था। स्पष्ट कीजिए। 

उत्तर- 

(क) माँ-बाप तथा बीबी की अकस्मात मृत्यु भूप दादा ने अपने जीवन में अनेक कष्टों का सामना किया था। भाई रूप सिंह के घर से भाग जाने के बाद प्राकृतिक आपदा के कारण उसने अपने माँ-बाप खो दिए। उसकी बीबी ने परिस्थितिवश आत्महत्या कर ली। इन सबके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और नए जीवन की शुरुआत की। 

(ख) घर तथा खेतों की बरबादी — जिस पहाड़ी के धँसाव में भूप दादा ने अपने माँ-बाप को खोया उसी में उनका घर तथा खेत भी नष्ट हो गए। इस कारण उन्हें दर-दर की ठोकरें खानी पड़ीं। उनके पास कोई सहारा न था। लेकिन उसने फिर भी हार न मानी और पुनः घर तथा खेतों का निर्माण किया।

प्रश्न 16. ‘पहाड़ तक हटा लेते दोनों भाई, खेत भी खींचकर निकाल लेते, माँ-बाबा को भी, लेकिन नहीं हो सका, वही पहाड़ कबर बन गया सबका ।’—ऐसा भूप ने किस पीड़ा तथा उद्देश्य से कहा ? 

उत्तर- 

(क) भाई के जाने का दुःख-भूप दादा को कहीं-न-कहीं अपने भाई के घर से भागने का दुःख था, इसलिए वे ऐसा कहते हैं। उनका यह भी मानना था कि अगर दोनों भाई एक साथ होते, तो सभी कठिनाइयों का सामना आराम से कर लेते। 

(ख) गलती का अहसास कराना -भूप दादा शायद रूप सिंह को उसकी गलती का अहसास कराना चाहते थे। वह उसे बताना चाहते थे कि उसने घर से भाग कर अच्छा नही किया था।

प्रश्न 17. ‘ग्यारह साल बाद भी कोई मुकम्मिल सड़क न बन पाई थी।- इस कथन के आधार पर रूप सिंह की मनोदशा का वर्णन कीजिए। 

उत्तर—(क) विकास न होने की पीड़ा-रूप सिंह बहुत लम्बे अन्तराल के बाद अपने गाँव वापस आता है। वह जैसे ही अपने गाँव की धरती पर पाँव रखता है, तो देखता है कि यहाँ आज भी कोई ढंग की सड़क नहीं बनी है। इस कारण उसे अपने क्षेत्र में विकास न होने का दुःख होता है।

(ख) बेइज्जती का भय-रूप सिंह के साथ उसके गॉड फादर का बेटा शेखर भी आया है। वह आई.ए.एस. की ट्रेनिंग कर रहा है। रूप सिंह के लिए वह बहुत की खास आदमी है। अगर वह अकेला होता तो कैसे भी घर पहुँच जाता। लेकिन शेखर के साथ होने से उसे अपनी बेइज्जती होती महसूस हो रही थी। वह सोच रहा था कि शेखर इन टूटे-फूटे रास्तों को देखकर क्या सोचेगा।



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VVI Question for VIP Topper Students

प्रश्न 1. ‘भीत इंसाफ किया तुम सबी ने मेरे साथ-भीत। अब माफ करो भुइला । मेरी खुद्दारी को बखस दो।’ इस कथन के आधार पर भूप सिंह के चरित्र की विशेषताएँ स्पष्ट कीजिए ।

उत्तर- 
(क) कष्टों से पीड़ित भूप सिंह ने अनेक कष्टों का सामना किया है। वह अकेला लड़ते-लड़ते कुछ थक सा गया है। लेकिन वह किसी को दोषी नहीं ठहराता बस इतना कहता है कि मुसे माफ कर दो, जिसमें एक व्यंग्य निहित है। है लेकिन वह
(ख) स्वाभिमानी-रूप सिंह भूप दादा को अपने साथ चलने को कहता मना कर देते हैं। वे एक स्वाभिमानी व्यक्ति हैं और अपनी खुद्दारी को खोना नहीं चाहते। उन्हें अपनी क्षमताओं पर पूर्ण विश्वास है।

प्रश्न 2. ‘मेरी प्रेमिकाएँ, प्यार की निशानियों, वे मुकामात सब के सब दब-ढक गए भू-स्खलन में ! – कथन से रूप सिंह के हृदयगत विचार स्पष्ट कीजिए। 

उत्तर- 
(क) अतीत की स्मृतियाँ – यह कथन रूप सिंह के हृदय में उठने वाली अतीत की स्मृतियों को प्रकट करता है। रूप सिंह को गाँव पहुँचने के बाद अपने पुराने दिन याद आने लगते हैं।
(ख) पीड़ा का भाव-रूप सिंह गाँव छोड़कर भाग गया था और आज जब वह लौटकर आता है, तो उसे कई पुरानी चीजें देखने को नहीं मिलती जिस कारण उसे पीड़ा का अनुभव होता है।

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