Class 12 Hindi Elective Important Questions PDF Download

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Class 12 Hindi elective important questions

Class12th 
Chapter Important Model Question Paper
Book NCERT
SubjectEnglish Elective
Medium Hindi
Study MaterialsFree Study Materials

class 12 hindi elective passage questions and answers

Class 12 Hindi Elective Important Questions PDF Download

Q. 1. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़ें तथा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दें-

मनुष्य को उसकी योग्यता के अनुसार ही ईश्वर शरीर, स्वास्थ्य, विचार और बुद्धि देता है। वास्तव में यह सारी चीजें ईश्वर द्वारा दानस्वरूप नहीं बल्कि व्यक्ति को उसकी योग्यता द्वारा प्राप्त इच्छा के अनुसार ही मिलती हैं।

समय व्यर्थ करना, विकृत मानसिकता के गुलाम होकर अपने जीवन को नष्ट करना, जिस वाद-विवाद में कोई अर्थ न हो उसे कह कर अपनी पंडिताई बताने की अपेक्षा स्क एक, सत्य बोलना अधिक कीमती और सम्मानजनक होता है। सभा मंच पर खड़े होकर सफाईदार व्यर्थ की लंबी-चौड़ी बातें कर शेखी बघारने की अपेक्षा अपने घर की साफ-सफाई करके अधिक लोग शिक्षा ग्रहण करेंगे। ऐसा विश्वास है।

प्रश्न :

(i) गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक दें।

(ii) मनुष्य के लिए सम्मानजनक बातें क्या-क्या हैं?

(iii) कौन-कौन सी बातें मनुष्य को भलाई से दूर करती हैं?

(iv) लेखक को किस बात का विश्वास है?

Ans. 

(i) शीर्षक- सच्चरित्रता एवं सत्य 

(ii) मनुष्य के लिए सच बोलना अधिक कीमती और सम्मानजनक बात है।

(iii) मनुष्य को ईर्ष्या भलाई से दूर करती है।

(iv) लेखक को इस बात का विश्वास है कि अगर नेता मंच पर खड़े होकर सफाईदार व्यर्थ की लम्बी-चौड़ी बातें कर शेखी बहारने की अपेक्षा अपने घर की साफ-सफाई करके अधिक लोग शिक्षा ग्रहण करेंगे।

(v) मनुष्य को उसकी योग्यता के द्वारा प्राप्त इच्छा के आधार पर ईश्वर का उपहार मिलता है। हम दे चुके लहू हैं, तू देवता विभा दे,

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Q. 2. निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखें 

जो राह हो हमारी उस पर दिया जला दे, गति में प्रभंजनों का आवेग फिर सबल दे, इस जाँच की घड़ी में निष्ठा कड़ी अचल दे,

अपने अनल विशिख से आकाश जगमगा दे। प्यारे स्वदेश के हित बरदान माँगता है तेरी दया विपद में भगवान माँगता हूँ।

प्रश्न : 

(1) कवि कहाँ जलता दीया चाहता है?

(ii) कवि किस प्रेम की बात करता है?

(iii) कवि वरदान क्यों मांगता है?

(iv) कवि भगवान से क्या-क्या माँगता है? 

(v) पद्यांश से उपसर्ग युक्त दो शब्दों का चयन करें।

Ans. 

(i) कवि अच्छी राह पर जलता दीपा चाहता है।

(ii) कवि स्वदेश प्रेम की बात करता है।

(iii) कवि भगवान से स्वदेश के हित के लिए वरदान माँगता है। 

(iv) कवि भगवान से अपने देश के प्रति हित के लिए वरदान माँगता है और संकट की पड़ी में भगवान से दया मांगता है। साथ ही कवि भगवान से यह माँगता है कि मेरी राहों में प्रकाश जता दे तथा अच्छे कामों की सिद्धि करने में सस्लता प्रदान कर दे। कवि, भगवान से यह भी मांगता है कि कठिन परीक्षा की घड़ी में कदम नहीं डगमगाए इसकी भी प्रार्थना करता है। कवि भगवान से यह भी माँगता है कि अनंत शिखा से आकाश जगमगा दे। स्वदेश के हित के लिए बरदान माँगने की इच्छा कवि को है जिससे कि देश का कल्याण हो सके।

(v) आवेग, अचल।

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Q. 3. निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर निबंध लिखेंः 

(क) मेरी पहली विदेश यात्रा

(ख) राष्ट्र निर्माण में छात्रों की भूमिका

(ग) मेरे प्रिय कवि  

(घ) पर्यावरण और हम 

Ans. 


मेरी पहली विदेश यात्रा 


2011 में में अपनी अग्रेजी भाषा का अध्ययन और सुधार करने के लिए सिंगापुर गया। लेकिन इससे पहले कि में हवाई अड्डे पर पहुंचता मैं एक छोटे बच्चे की तरह रोमांचित था जो एक नया खिलौना खरीदने जा रहा था। वहाँ मेरी बादी और मेरे पिता मुझे देखने आए और इसलिए में मंगोलियाई दोस्तों के साथ चला गया।

सिंगापुर जाते समय मेरी पहली फ्लाइट थी। यह एक पूरी दूसरी चीज थी जिसकी मैंने कल्पना की थी। मैंने कभी नहीं महसूस किया कि मेरे शरीर के वजन को कुर्सी पर वापस इतने हल्के ढंग से मजबूर किया गया। जनमाय खूबसूरत था। उड़ान में लम्बा समय नहीं लगा।

हम अंततः सुबह 4 बजे हवाई अड्डे पर सिंगापुर पहुंचे तो हम सिर्फ गर्मियों की गर्मी पर विश्वास नहीं कर सके। यह सब नम था और बहुत गर्म था। पहली बार में साँस लेना थोड़ा मुश्किल था। लेकिन हम सभी इससे उबर गए। जिस हॉस्टल में हम रहने वाले थे वह वैन ठीक समय पर आ गई और हम सभी

वैन में सवार हो गये और हॉस्टल चले गये। मेरे लिये सबसे सुखद स्वान ‘यूनिवर्सल स्टूडियों का पार्क’ था। यह एक शानदार जगह थी। में रोलर कोस्टर की सवारी कभी नहीं भूलूँगा। एक चीज जो मुझे बहुत अच्छी लगी, वह सभी विदेशी दोस्त थे जिनसे मैंने दोस्ती की थी। 

हम जिस एकमात्र भाषा में बात करते थे वह अंग्रेजी थी और कुछ नहीं। मेरे ज्यादातर दोस्त सभी वियतनामी थे। लेकिन 2 अन्य फ्रांसीसी लड़के थे जिनके साथ घनिष्ठ मित्रता हो गई। उनकी अंग्रेजी थोड़ी खराब थी, लेकिन एक हफ्ते रुकने के बाद अंग्रेजी में उनके बोलने में बहुत सुधार हुआ।

मेरे लिए अच्छा अनुभव था कि एक दिन मैं सिर्फ विदेश में पढ़ाई कर था। इसलिए मुझे इस बात को जानने का अवसर मिला कि एक युवा सकता विदेशी छात्र का जीवन कैसा होगा और यह बहुत अच्छा होगा अगर मैं कभी किसी अन्य विदेशी स्थान में जा सकता हूँ। क्योंकि मुझे पता था कि दुनिया के पास हमारे लिये युवाओं की पेशकश करने के लिए बहुत कुछ है और हमारे दिमाग खाली पेट की तरह है जिन्हें भरने की आवश्यकता है। राष्ट्र-निर्माण में छात्रों की भूमिका

(ख)


राष्ट्र निर्माण में छात्रों की भूमिका


राष्ट्र-निर्माण में छात्रों की महत्त्वपूर्ण भूमिका रहती है। छात्र उसे कहा जाता है जो शिक्षा प्राप्त करते हैं। वे स्कूलों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों तथा अन्य सभी शैक्षणिक संस्थाओं में शिक्षा प्राप्त करते हैं। जबकि राष्ट्र को देश कहा जाता है और निर्माण का अर्थ होता है देश को अच्छे आदर्श के अनुसार बनाना। 

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि राष्ट्र का निर्माण अच्छी तरह से करना और ऊँचे आदर्शों के अनुसार देश का ढाँचा तैयार करना ही राष्ट्र निर्माण कहलाता है। देश के अंतर्गत समाज में विभिन्न प्रकार के लोग रहते हैं और अपना सामाजिक और राष्ट्रीय जीवन बिताते हैं जिनमें छात्र या विद्यार्थी समाज और देश में भी अपना जीवन व्यतीत करते हैं। 

छात्रों का मुख्य उद्देश्य अच्छी शिक्षा और आदर्श शिक्षा प्राप्त करना है। ये छात्र राष्ट्र के निर्माण में अपना योगदान देते हैं जिससे कि विश्व में देश का नाम रौशन हो सके। इस सिलसिले में छात्र अपना महत्त्वपूर्ण योगदान देते हैं।

भारत जैसे विकासशील देश के लिए छात्रों की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। जब छात्र योग्य और आदर्श होते हैं उनका आचरण अच्छा रहता है और वे अपने देश के हित के लिए दिल से सोचते है तो राष्ट्र निर्माण करने में छात्र अपने कर्तव्यों को निभाते हैं। 

अभी देश में बहुत-सी समस्याएँ है जिनका समाधान करके के ही आदर्श भारत का निर्माण किया जा सकता है। इस सिलसिले में छात्रों की महत्त्वपूर्ण भूमिका रहती है। जब छात्र राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका अच्छी तरह से निभाते है तभी भारत एक आदर्श राष्ट्र बन सकता है। परिणामस्वरूप विश्व में भारत का स्थान ऊँचा हो सकता है।



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Q. 4. अपने क्षेत्र में मलेरिया फैलने की सम्भावना को देखते हुए जिले स्वास्थ्य अधिकारी को पत्र लिखें।

Ans. 

सेवा में,

स्वास्थ्य अधिकारी

राँची नगर निगम, राँची।

विषय-क्षेत्र में मलेरिया फैलने की समस्या से अवगत कराने हेतु प्रार्थना-पत्र।

श्रीमान्

हम आपका ध्यान अपने क्षेत्र में तेजी से फैल रही मलेरिया से सम्बन्धित सम्भावना की ओर कराना चाहते हैं। विगत कुछ महीनों से हमारे क्षेत्र में कचरा काफी फैल गया है जिसकी वजह से मलेरिया रोग काफी तेजी से फैलता जा रहा है। कई लोग तो इसकी बपेट में आ भी चुके हैं। कई लोगों की जान भी जा चुकी है। 

धीरे-धीरे यह बीमारी काफी फैलती जा रही है। अतः श्रीमान् महोदय से नम्र निवेदन है कि आप मेरे क्षेत्र का निरीक्षण कर मलेरिया की रोकथाम के लिए बड़े कदम उठाएँ जिससे क्षेत्र के लोगों की जान बच सके और वातावरण स्वच्छ बन सके। इस कार्य हेतु में और हमारे क्षेत्र के सभी वासी आपके आभारी रहेगे।

उमेश यादव 

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Q. 5. ‘जीवन में पर्व-त्योहारों का महत्त्व’ विषय पर आलेख प्रस्तुत करे। 

Ans. आलेख- जीवन में पर्व-त्योहारों का महत्त्व यहाँ पर जीवन का अर्थ मनुष्यों के जीवन से लगाया जाता है जनकि, भारत में रहने वाले विभिन्न धर्मों के लोगों के लिए समय-समय पर विशेष अवसरों पर उत्सव मनाना ही पर्व त्योहार कहलाता है। 

मनुष्य के जीवन में उत्सव का विशेष महत्त्व है जिसे पर्व-त्योहार के रूप में मनाया जाता है। विभिन्न धर्मों के लोग अपने-अपने धार्मिक आस्था के अनुसार पर्व-त्योहार मनाते हैं जिससे जीवन में उल्लास और खुशी रहती है। 

पर्व-त्योहार के अवसर पर लोग कष्ट और दुःख को भुलाकर जीवन में उल्लास और खुशी उत्पन्न करने के लिए पर्व-त्योहार मनाते हैं। ऐसा होने से जीवन पर्व-त्योहारों के दिनों में उल्लासमय बना रहता है। उदासी समाप्त हो जाती है। 

जीवन में नई स्फूर्ति आती है। पर्व-त्योहार के अवसर में मनुष्य का जीवन सुखमय बन जाता है। अतः मनुष्य के जीवन में पर्व-त्योहारों का विशेष महत्त्व है।

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Or, ‘परम्पराओं एवं संस्कृतियों से भागता युवावर्ग’ विषय पर एक संक्षिप्त सम्पादकीय लिखें।

Ans. सम्पादकीय-‘परम्पराओं एवं संस्कृतियों से भागता युवा वर्ग’ समाचार पत्रों के सम्पादकों द्वारा जो अपना व्यक्तिगत विचार समाचार पत्रों में लिखा जाता है उसे सम्पादकीय कहा जाता है। यह सम्पादकीय विभिन्न विषय-वस्तुओं पर लिखा जाता है जिनमें प्रश्न के अनुसार यहाँ पर परम्पराओं एवं संस्कृतियों से भागता युवा वर्ग पर सम्पादकीय का भी प्रमुख स्थान है।

भारत विविधता में एकता वाला देश है। यहाँ पर विभिन्न धर्मो, जातियों, संस्कृतियों तथा परम्पराओं पर विश्वास रखने वाले व्यक्ति निवास करते हैं। इन व्यक्तियों में आजकल युवा वर्ग का भी विशेष योगदान माना जाता है।

नौजवान वर्ग को युवा वर्ग कहा जाता है। आजकल युवा वर्ग परम्पराओं एवं संस्कृतियों से भागता तथा अलग हटता हुआ दिखाई पड़ता है। युवा वर्ग अधिक शिक्षित होते जा रहे हैं। उनके जीवन में आधुनिकता अधिक पायी जाती है। यह वर्ग अपनी पुरानी भारतीय परम्पराओं और संस्कृतियों से दूर हटते जा रहे हैं जो चिंता का विषय है। 

साथ ही यह उचित भी नहीं है। आजकल आवश्यकता इस बात की है कि युवा वर्ग को आधुनिकता के साथ-साथ पुरानी परम्परा और संस्कृतियों के अनुसार अपना जीवन बिताना चाहिए तभी भारतीय युवा वर्ग का जीवन आदर्शमय बन सकता है।

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Q. 6. पानी की कमी को ध्यान में रखते हुए ‘गिरता जल-स्तर’ विषय पर एक फीचर तैयार करें। 

Ans.

गिरता जल-स्तर विषय पर एक फीचर लेखन वैश्विक तापमान आजकल बढ़ता जा रहा है जिसके विभिन्न बुरे प्रभाव पड़ रहे हैं जिनमें गिरता हुआ जल-स्तर एक महत्त्वपूर्ण विषय बन चुका है। वैश्विक तापमान के बढ़ने से भूमि में जल-स्तर बहुत नीचे बला गया है जिससे पानी की कमी होती जा रही है। विशेष रूप से गर्मी के मौसम में जल-स्तर नीचे चला जाता है। परिणामस्वरूप पानी की कमी होती जा रही है। इस सिलसिले में यह कहा जा सकता है कि जल ही जीवन है। 

जब धरती पर जल-स्तर गिरता जा रहा है तो मनुष्यरूपी जीवधारी के लिए पानी की कमी होती जा रही है। इसलिए गिरते हुए जल स्तर की समस्या का समाधान करने के लिए विश्व स्तर पर पहल करना चाहिए। साथ ही वैश्विक तापमान को कम करने के लिए समुचित कदम उठाना चाहिए। तभी पूरे जीव-जगत के लिए लाभदायक हो सकता है। 

पानी की कमी होने से विश्व-स्तर पर लोगों के जल की समस्या का सामना करना पड़ता है। यह एक विकट समस्या बन चुकी है, हमें इस समस्या का समाधान करने के लिए सार्थक प्रयास करने की आवश्यकता है। 

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Q. 7. सप्रसंग व्याख्या करें:

तपु सुरपनु से पंख पसारे, शीतल मलय-समीर सहारे,

उड़ते छग जिस और मुँह किए समझ नीड़ निज प्यारा। 

Ans: प्रसंग-प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक अंतग्र भाग-2 में संकलित कविता कार्नेलिया का गीत से उद्धृत है। यह कविता अपशंकर प्रसाद द्वारा रचित है एवं उनके प्रसिद्ध नाटक ‘बंद्रगुप्त’ से ली गयी है।

व्याख्या-इन पंक्तियों की व्याख्या करते हुए यह कहा जा सकता है कि छोटे-छोटे इंद्रधनुषों के समान पंख फैलाए हुए पक्षी मलय पर्वत से आती हुई शीतल हवा के सहारे अपने प्यारे घौसलों की कल्पना करते हुए जिस और उड़ रहे है, यह हमारा प्यारा भारतवर्ष है। अर्थात उमारे देश में नियास करना पशु-पक्षियों तक को भी अत्यधिक प्यारा लगता है।

Or, 

भरत सौगुनी सार करत है, अति प्रिय जानि विहारे। तदपि दिनहिं दिन होत झोंबरे मनहुँ कमल हिममारे ।।

Ans. प्रसंग-प्रस्तुत पथ अंतरा भाग-2 के ‘तुलसीदास’ शीर्षक पाठ से अवतरित है। यह पय ‘गीतावली’ से उद्धृत है।

व्याख्या-भरत राम के घोड़े की व्यथा को हृदय में विचार करके उसकी सौ-गुणी देखभाल करते हैं। फिर भी यह मुड़आता जा रहा है। सुस्त होता जा रहा है। यह ऐसा शिथिल हो गया है मानो कमल पर हिमपात हो गया हो।

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Q. 8. निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर दें:  

(क) प्रगतिवादी कविता ‘यह दीप अकेला’ के आधार पर ‘लघु मानव’ के अस्तित्व और महत्त्व पर प्रकाश डालें।

(ख) हाथ फैलाने वाले व्यक्ति को कवि ने ईमानदार क्यों कहा है? स्पष्ट करें।

(ग) देवी सरस्वती की उदारता का गुणगान क्यों नहीं किया जा सकता? 

(घ) कोयल और भौरों के कलरव का नायिका पर क्या प्रभाव पड़ता है? 

Ans. (क) ‘लघु ‘मानव’ का अस्तित्व और उसका महत्त्व मनुष्य परम सत्ता अर्थात् ब्रह्मा का ही लघु रूप है। 

  • (ii) इसी प्रकार वह वृहत् समाज की भी एक इकाई है।
  • (iii) यद्यपि वह परब्रह्म का अंश है, परंतु बह स्वयं में भी परिपूर्ण है। 
  • (iv) उसका रूप ‘लघु मानव’ का है, फिर भी उसकी एक बृहत् सत्ता है।
  • (v) उसमें ‘स्व’ का भाव है। इस कारण उसका स्वतंत्र अस्तित्व है। 
  • (vi) उसमें समस्त गुण व सारी शक्तियों अन्तर्निहित हैं।
  • (vii) उसकी कुछ अपनी विशिष्टताएँ हैं, जो उसे दूसरों से अलग एकदम अद्वितीय बना देती है।
  • (viii) इस प्रकार लघु मानव का एक स्वतंत्र अस्तित्व है, जो उसके महत्व को प्रतिपादित करता है।

(ख) स्वयं खुद करे।

(ग) स्वयं खुद करे।

(घ) कोमल और भौये कर कलरव सुनकर नायिका अत्यधिक आतुर ही उठती है। यह सत्काल अपने कानों पर हाथ रखकर उस ध्वनि को न सुनने का प्रवास करती है। 

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Q.9. निम्नलिखित में से किन्हीं दो का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट करें।

(क) यह धीरे-धीरे होना, धीरे-धीरे होने की सामूहिक सम वृढ़ता से बांधे है समूचे शहर को, इस तरह कि कुछ भी गिरता नहीं है, कि हिलता नहीं है कुछ भी कि जो, चीज नहीं थी वहीं पर रखी है। 

(ख) कत कहाँ ही लागी हियरे। पंच अपार सूझ नहिं नियरे। सौर सुपेती आवे जूड़ी। गानहुँ सेज हिवंचल बूढ़ी।

(ग) सत्य शायद जानना चाहता है कि उसके पीछे हग कितनी दूर तक भटक सकते है कभी दिखता है सत्य और कभी ओझल हो जाता है।

(घ) बहुत दिनान को. अवधि आसपास परे, वरे अश्वरनि भरे है उठि जान को कहि कहि आयन छबीले मनभावन को, गर्दि गहि यखति ही है है सनमान को। 

Ans. (क) काव्य-सौंदर्य-इन पंक्तियों में कवि ने काशी को अपरिवर्तित संस्कृति, आध्यात्मिक विश्वास व प्राचीन परम्पराओं का अत्यंत भावपूर्ण चित्रण किया है। धान्यांत्मकता का गुण दर्शनीय है। ‘धीरे-धीरे में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है। ‘कि कुछ’ में अनुप्रास अलंकार है। धीरे-धीरे की काव्यांश में बार-बार जावृति से भाव में विशेष गहराई आने के साथ ही भाषा का स्वरूप भी निडर गया है। पूरे काव्यांश में विभ्यों का आकर्षक प्रयोग हुआ है। प्रतीकात्मकता दर्शनीय है।

(ख) काव्य-सौंदर्य-कवि ने इस पद में विरहिणी प्रिया की विरह-दशा का भावपूर्ण वर्ष प्रस्तुत किया है। ‘विरह बाढ़ि’, ‘कंत कहाँ’, ‘नहिं नियरे’, ‘सीर सुपेता’, बासर विरह में अनुप्रास अलंकार की छटा दर्शनीय है। भावों में अनुकूल भाषा का प्रयोग उचित रूप से किया गया है। 

(ग) काव्य-सौंदर्य-इन पंक्तियों में कवि ने सत्य को पकड़ने में आ रही कठिनाई का वर्णन किया है। भाषा में सरलता, सजीवता और प्रवाहमयता है। काव्यांश में दृष्टांत अलंकार है। सत्व का मानवीकरण किया गया है। मुक्त-छंद की कविता का अंश है।

(घ) काव्य-सौंदय-इन पंक्तियों में कवि ने अपनी प्रेयसी सुजान से दर्शन की अभिलाषा को प्रकट किया है। इन पंक्तियों में सुमपुर ब्रजभाषा का सुंदर के अनुकूल तथा सरस है। प्रयोग किया गया है। अरबरनि में फारसी का सुंदर प्रयोग देखने योग्य है। 

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Q. 10. सप्रसंग व्याख्या करें :

उसका मुँह पीला था, आँखें सफेद थीं, दृष्टि भूमि से उठती नहीं थी।

प्रश्न पूछे जा रहे थे। उनका यह उत्तर दे रहा था। धर्म के दस लक्षण वह सुना गया, नौ रसों का उदाहरण दे गया।

Ans. प्रस्तुत पंक्तियों की व्याख्या यह है कि लेखक ने यह बताया है कि व्यक्ति का मुँह पीला या और आँखें सफेद थी मानो उसकी दृष्टि भूमि से उठती नहीं थी। उस व्यक्ति से प्रश्न पूछे जा रहे थे और वह उनका सटीक उत्तर दे रहा था। उस व्यक्ति ने अपने उत्तर के माध्यम से दस लक्षणों के बारे में बताया। उसके धर्म के प्रत्युत्तर में मानों नौ रसों का उदाहरण दृष्टिगोचर हुआ। 

Or, दुरंत जीवन-शक्ति है। कठिन उपदेश है। जीना भी एक कला है। लेकिन कला ही नहीं, तपस्या है। जियो तो प्राण ढाल दो जिंदगी में, मन बाल दो जीवन रस के उपकरणों में! ठीक है।

Ans. प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने यह बात प्रस्तुत की है कि जीवन-शक्ति दुरंत की तरह हैं। दुरंत जीवन-शक्ति में मनुष्य के जीवन की सफलता की अपेक्षा है। इसमें कठिन उपदेश भी प्राप्त होता है। मनुष्य का जीवन और उसका जीना भी एक कला है। साथ ही इसमें यह भी बताया गया है कि मनुष्य का जीवन जीना कला के साथ-साथ तपस्या भी है। तपस्या इसलिए है कि मनुष्य को अपना जीवन उद्देश्यपूर्ण जीना है तो उसे अपनी जिन्दगी में प्राण बाल देना चाहिए। साथ ही मनुष्य को जीवन-रस के उपकरणों में मन को ढाल देना चाहिए। तभी मनुष्य का जीवन सार्थक हो सकता है। फलतः मनुष्य का जीवन भी सफल हो सकता है।

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Q. 11. निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर दें: 

(क) वैदिक काल में हिन्दुओं में कैसी लॉटरी चलती थी, जिसका जिक्र लेखक ने किया है? 

(ख) आँखें बंद रखने और आँखें खोलकर देखने के क्या परिणाम निकले?

(ग) औद्योगीकरण ने पर्यावरण का संकट पैदा कर दिया है, क्यों और कैसे? 

(घ) ‘दूसरा देवदास’ कहानी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट करें।

(ङ) कुटज क्या केवल जी रहा है? लेखक ने यह प्रश्न उठाकर किन मानवीय कमजोरियों पर टिप्पणी की है? 

Ans. (क) 1. वैदिक काल में हिन्दुओं में यह लॉटरी चलती थी कि वधू से वर कुछ प्रश्न पूछता था, वपू उत्तर देती थी। वरपक्ष कई स्थानों से लाए हुए मिट्टी के ढेलों को रख देता था और कन्या से उनमें से एक बेले को सुनने को कहा जाता था। अनुरूप अच्छा फल प्राप्त होता था।

2. स्वयं खुद करे।

3. यदि बुरे स्थान की मिट्टी के बेले को उठाती थी, तो उसे उसी के अनुरूप बुरा फल मिलता था। इस प्रकार वैदिक काल के हिन्दू बेले छुआकार स्वयं पत्नी बरण करते थे।

(ख) स्वयं खुद करे।

(ग) औद्योगीकरण का अर्थ है-उद्योग-धंधों और मशीनों का प्रचुर प्रयोग। उद्योगों के कारण शहरों का वातावरण विषाक्त हो गया है। फैक्टरियों से निकला प्रदूषित जल, कचरा, शोर आदि मानव के लिए घातक सिद्ध हुए हैं। भोपाल का गैस-काण्ड, सूरत का प्लेट प्रदूषण के ज्वलंत उदाहरण है। इसके अतिरिका आजकल मुम्बई, कोलकाता, दिल्ली जैसे शहरों में साँस लेना दूभर हो गया है। जब मानव से शुद्ध जल, शुद्ध वायु और शांत वातावरण ही छिन गया है, तो। सुख-समृद्धि का क्या करें।

(घ) स्वयं खुद करे।

(ङ) ‘कूटज क्या केवल जी रहा है-लेखक ने यह प्रश्न उठाकर तिम्नलिखित मानवीय कमजोरियों पर टिप्पणी की है- है।

  • 1. आज का मानव स्वावलम्बन से नहीं, अपितु दूसरों का आश्रय लेकर
  • 2. शक्तिशाली लोगों के आगे घुटने टेक देता है। 3. स्थान-स्थान पर नीति और धर्म का उपदेश देता फिरता है।
  • 4. अपनी उन्नति हेतु अफसरों का जूता चाटता फिरता है।
  • 5. आत्मोन्नति हेतु नीलम धारण करता है, वरह-तरह के नगों की अंगूठियाँ पहनता है। 

Q. 12. कवि केदारनाथ सिंह अथवा लेखक भीष्म साहनी का साहित्यिक परिचय दें। 

Ans. केदारनाथ सिंह 6 का जीवन परिचय-‘तीसरा सप्तक’ के अग्रणी कवि केदारनाथ सिंह का जन्म 7 जुलाई, 1934 ई. को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में ‘चकिया’ नामक गाँव में हुआ। उन्होंने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि ग्रहण की। 

वहीं से इन्होंने ‘आधुनिक हिन्दी कविता में विम्ब विधान’ विषय पर पी-एच.डी. की उपाधि भी प्राप्त की। आप जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में हिन्दी के प्रोफेसर रहे हैं और भारतीय भाषा केन्द्र के अध्यक्ष है। साहित्यिक अभिरुचि प्रारम्भ से ही थी। साम्यवादी विचारधारा ने उनके लेखन पर गहरा प्रभाव डाला। 

आजकल आप जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के भारतीय भाषा-केन्द्र के प्रोफेसर पद से जवकाश ग्रहण कर चुके हैं। रचनाएँ अब तक केदारनाथ सिंह के छह काव्य-संग्रह प्रकाशित हुए हैं: अभी बिल्कुल अभी, जमीन पक रही है, यहाँ से देखो, अकाल में सारस, उत्तर कबीर तथा अन्य कविताएँ, और ‘बाघ’। 

कल्पना और छायावाद’ उनकी आलोचनात्मक पुस्तक है और ‘मेरै समय के शब्द’ निबंध संग्रह है। हाल ही में उनकी चुनी हुई कविताओं का संग्रह ‘प्रतिनिधि कविताएँ’ नाम से प्रकाशित हुआ है।

उनके काव्य-संग्रह ‘अकाल में सारस’ पर उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया तथा सन् 1994 ई. में ‘मैथिलीशरण गुप्त’ राष्ट्रीय सम्मान दिया गया।

साहित्यिक विशेषताएँ-केदारनाथ सिंह मूलतः मानवीय संवेदनाओं के कवि हैं। उन पर साम्यवाद का गहरा रंग है, किन्तु उनकी वाणी में वैसी उथल-पुथल और मिशनरी उबाल नहीं है, जो कि प्रायः नौसिखुए प्रगतिवादियों में पाया जाता है। प्रगतिशील तत्व उनकी जुबान में शांत और संयत स्वर में मुखरित हुए हैं। 

वे प्रकृति के प्रेमी रहे हैं। ‘तीसरा सप्तक’ में उन्होंने लिखा भी है “प्रकृति बहुत शुरू से मेरे भावों का आलंबन रही है। कछार, मक्का के खेत और दूर-दूर तक फैली पगडंडियों की छाप आज भी मेरे मन पर उत्तनी ही स्पष्ट है-“

भाषा-शैली-केदारनाथ सिंह की भाषा में बिम्बमयता, वैचारिकता और सहजता-ये तीनों गुण विशेष रूप से उद्घाटित हुए है। बिम्ब-विधान पर उन्होंने अधिक यल दिया है। उनकी कविताओं की सुंदर चित्रमाला तैयार की जा सकती है। 

उनकी भाषा में प्रत्येक शब्द नपा-तुला है, विचार से परिपूर्ण है। लक्ष्यप्रेरित बाण की तरह कोई शब्द व्यर्थ नहीं है। सभी का अपना संधान है, अपना व्यंग्य है, अपना अर्थ है। चिंतन-प्रधान होते हुए भी कवि का शब्द-प्रयोग अत्यंत सहज एवं

सरल है। यह कवि की विशिष्ट उपलब्धि है। अलंकार-केदारनाथ सिंह की कविताओं में अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है। जैसे- अनुप्रास- ‘अचानक आता’, ‘बैठे बंदरों’, ‘बिल्कुल बेखवर आदि। प्रतीक एवं बिम्ब-इनकी कविताओं में प्रतीकों व बिम्बों का अत्यंत

आकर्षक सृजन हुआ है। इनकी रचनाओं में सम्पूर्ण दृश्य साकार हुआ मिलता है। छन्द योजना-केदारनाथ सिंह की कविताएँ छंद-मुक्त हैं। परन्तु उनमें काव्यात्मक मधुरता सर्वत्र विद्यमान है।

हिन्दी के मूर्धन्य कथाकार भीष्म साहनी का जन्म 8 अगस्त, 1915 ई. को रावलपिंडी (अब पाकिस्तान) में हुआ। प्रारम्भिक शिक्षा कस्बे के स्कूल से प्राप्त

करने के बाद उन्होंने एम.ए. तथा पी-एच.डी. अंग्रेजी विषय में की। तत्पश्चात् दिल्ली के जाकिर हुसेन कॉलेज में कई वर्षों तक अध्यापन कार्य किया। उन्होंने कुछ वर्षों तक विदेशी भाषा प्रकाशन गृह, मास्को में भी कार्य किया। भीष्म साहनी के बड़े भाई चलराज साहनी पूर्णतः फिल्मों से जुड़े हुए थे, परन्तु ये शौकिया तौर

पर दूरदर्शन के कार्यक्रमों तथा अनेक नाटकों में भाग लेते रहे हैं। साहनी जी दिल्ली के जाकिर हुसैन कॉलेज से अंग्रेजी पढ़ाते हुए सेवानिवृत हुए। साहनी जी ने 1942 ई. में भारत छोड़ो आन्दोलन में सक्रिय भाग लिया

था। ये इप्टा से जुड़कर भी देश सेवा करनी चाही। सेवानिवृत्ति के बाद इन्होंने राष्ट्रीय प्रगतिशील लेखक संघ की स्थापना की जिसके महासचिव भी बने थे। नाट्रय संस्था ‘प्रयोग’ के अध्यक्ष तथा धारावाहिक ‘तमस’ में अविस्मरणीय अभिनय के कारण इन्हें बहुत ख्याति मिली। 1957 ई. में ये मास्को में अनुवादक बने।

1965 ई. में नई कहानियाँ पत्रिका के सम्पादक बने।

2001 ई. में इन्हें साहित्य अकादमी की महत्तर फिलोशिप भी दी गई। इसके पहले इन्हें शिरोमणी लेखक पुरस्कार लौट्स पुरस्कार, साहित्य अकादमी

सम्मान भी मिल चुका था।

रचनाएँ-भीष्म साहनी अपनी किशोरावस्था से ही साहित्य रचना कर रहे है। इन्होंने अनेक कहानियाँ, नाटक तथा उपन्यास लिखे हैं। इनके प्रमुख कहानी संग्रह निम्नलिखित है-भाग्य रेखा, भटकती यह, पहला पाठ, पटरियाँ, बाबू तथा झरोखे। उपन्यास-तमस, कड़ियों और बसंती।

नाटक-माध्वी, हानूश कबीरा खड़ा बाजार में, मुआवजे । बालोपयोगी कहानियाँ-गुलेल का खेल। तमस उपन्यास के लिए उन्हें ‘साहित्य अकादमी पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। उनके साहित्यिक अवदान के लिए हिन्दी अकादमी, दिल्ली ने उन्हें ‘श्लाका सम्मान’ से सम्मानित किया।

भाषा-शिल्प की विशेषताएँ-भीष्म साहनी की भाषा-शैली सरल, सहज और बोधगम्य है। भाषा को प्रवाहमयता प्रदान करने के लिए उन्होंने उर्दू, अंग्रेजी तथा फारसी शब्दों का प्रयोग किया है। इसके अतिरिक्त संस्कृतनिष्ठ तत्सम शब् का सुंदर मिश्रण किया गया है। शब्दों का प्रसंगानुकूल प्रयोग उनकी भाषा के विशेषता है।

साहनी जी ने छोटे-छोटे वाक्यों का प्रयोग करके विषय को प्रभावी ए रोचक बना दिया है। संवादों के प्रयोग ने वर्णन में ताजगी ला दी है।

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Q. 13. निम्नलिखित में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर दें:

(क) सूरदास अपनी आर्थिक हानि को गुप्त क्यों रखना चाहता था

(ख) महीप अपने विषय में बात पूछे जाने पर उसे टाल (ग) विसनाथ पर क्या अत्याचार हो गया?

(प) अब मालवा में वैसा पानी नहीं गिरता जैसा गिरता करता था? उसके क्या कारण हैं?

Ans. (क) भिखारियों के लिए धन संचय पाप-सूरदास एक अंधा भिखारी है। लेकिन वह भली-भाँति जानता है कि उस जैसे भिखारी के लिए दखिता लज्जा की बात नहीं, अपितु धन एकत्रित करना लज्जा की बात है। इसलिए यह अपनी आर्थिक हानि गुप्त रखना चाहता है।

बात को दबाना-सूरदास का मानना है कि जो होना था, हो गया। अब वात बढ़ाने से क्या फायदा। इसलिए यह बात को दबाना चाहता था ताकि कोई और विपदा न आ पड़े।

(ख) रूप सिंह से रिश्ता-महीप घोड़ों के द्वारा सवारी ढोकर रुपए कमाता है। रूप सिंह और शेखर जब गाँव आते हैं, तो वे उसी के घोड़ों पर बैठकर माही जाते हैं। रास्ते में वे बातचीत करते हैं जिससे महीप को पता चल जाता है कि रूप सिंह उसका रिश्तेदार है। इसलिए अपने विषय में कुछ नहीं बोलता था। घर से भागा हुआ-महीप अपने पिता तथा घर को छोड़कर भागा हुआ

है। वह अपनी माँ की मौत का कारण अपने पिता भूप को मानता है। इसलिए यह वापस घर नहीं जाना चाहता। इसी कारण वह अपने विषय में कुछ भी पूछे

जाने पर उसे टाल देता है।

(ग) स्वयं खुद करे।

(घ) स्वयं खुद करे।

Q. 14. प्रकृति सजीव नारी बन गई।’ इस कथन के संदर्भ में लेखक की प्रकृति नारी और सौंदर्य सम्बन्धी मान्यताएँ स्पष्ट कीजिए। 

Ans. सौंदर्य आकर्षण-लेखक अपने किसी रिश्तेदार के घर गया था। वहाँ उसने एक औरत को देखा। वह औरत अत्यन्त रूपवती थी। लेखक पर उसके सौंदर्य का आकर्षण इस कदर हावी हुआ कि उसे समस्त प्रकृति में वही औरत नजर आने लगी। वह औरत बिसनाथ को और औरत के रूप में नहीं, बल्कि जूही की लता बन गई, चाँदनी के रूप में लगी जिसके फूलों से खूशबू आ रही थी। उन्हें लगा प्रकृति सजीव नारी बन गई अर्थात् प्रकृति का समस्त सौंदर्य उन्हें उस नारी में समाहित प्रतीत होने लगा।

प्रकृति-प्रेम-बिसनाथ को फूलों, पेड़ों, लताओं तथा प्रकृति की समस्त वस्तुओं से प्रेम था। प्रकृति उनके हृदय में बसी हुई थी। वह प्रकृति को सजीव रूप में देखते थे। वह औरत भी उन्हें प्रकृति की तरह बहुत सुंदर लगी। इसलिए उन्हें लगा कि प्रकृति सजीव नारी बन गई।

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Or, ‘पहाड़ों में जीवन अत्यन्त कठिन होता है।’ ‘आरोहण’ कहानी के आधार पर उक्त विषय पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखें। 

Ans. पहाड़ी क्षेत्र में जीवन अत्यंत कठिन होता है। यहाँ के निवासियों का जीवनयापन के लिए अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इन प्रदेशों में प्राकृतिक आपदा, भूस्खलन, पहाड़ों के खिसकने आदि से लोगों का जीवन तथा समाज नष्ट हो जाता है। 

यहाँ लोगों को जीविका कमाने के कम साधन उपलब्ध होते हैं। इस कारण इनकी दिनचर्या विषमताओं से भरी होती है। ये अपना जीवनयापन करने के लिए कृषि का सहारा लेते हैं। लेकिन पहाड़ी भू-भांग पर कृषि करना भी अत्यन्त कठिन कार्य है। इस क्षेत्र के लोगों पर मौसम की मार भी पड़ती है। यहाँ कभी भीषण बर्फबारी होती है, तो कभी घनघोर वर्षा। लोगों को घरों से न निकल पाने को मजबूर कर देती है। 

अपनी जरूरत की चीजें लेने के लिए लोगों को मीलों पैदल जाना पड़ता है। जरूरी सामानों तथा यातायात के साधनों का अभाव इनके जीवन को और विकट बना देता है। कुल मिलाकर पहाड़ों में जीवन अत्यन्त कठिन होता है।



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