Class 12 Hindi Ncert Solutions Vitan Chapter 1 : सिल्वर वैडिंग, सारांश, प्रश्न उत्तर, Easy silver wedding summary

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मैं खुद class 12 का टॉपर रह चुका हूं और साथ ही साथ वर्तमान में मैं एक शिक्षक भी हूं। वर्तमान मे, मेरे पास कक्षा 12वीं के काफी विद्यार्थी हैं । जिनको मैं  बारहवीं की तैयारी करवाता हूं । यह पोस्ट को मैं अपने अनुभव से लिख रहा हूं । इस लेख को मैंने CBSE, NIOS, CISCE, ICSE और अन्य राज्य के board  को ध्यान में रखते हुए तैयार किया। 


Class 12 Hindi Ncert Solutions Vitan Chapter 1 सिल्वर वैडिंग


कक्षा | Class12th 
अध्याय का नाम | Chapter Nameसिल्वर वैडिंग | silver wedding
लेखक | writerमनोहर श्याम जोशी | Manohar Shyam Joshi
अध्याय संख्या | Chapter number01
अध्याय प्रकार | Chapter typeकहानी | Story
किताब | Bookहिंदी कोर | HINDI CORE
पुस्तक का नाम | BOOK Nameहिंदी वितान | Hindi Vitan
बोर्ड | Boardसभी बोर्ड | All India Board
किताब | Book एनसीईआरटी | NCERT
विषय | Subjectहिंदी | HINDI
अध्ययन सामग्री | Study Materialsप्रश्न उत्तर | Question Answer


सिल्वर वेडिंग पाठ का सारांश | silver wedding summary


प्रश्न – मनोहर श्याम जोशी द्वारा रचित ‘सिल्वर वैडिंग’ नामक पाठ का सारांश लिखिए । 

उत्तर—– हिन्दी के महान साहित्यकार मनोहर श्याम जोशी कृत “विल्वर वैडिंग” एक ऐसे परिवार की कथा है, जो पर्वतीय अंचलों से आकर दिल्ली में आजीविकारत हैं। यशोधर पंत एक सरकारी कार्यालय में सेक्शन ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं। 

वे परम्परागत विचारों के आदमी हैं। दिल्ली में उनके गाँव के ही कृष्णानंद पांडे (किशनदा) सरकारी नौकरी करते थे। उन्हें सरकारी क्वार्टर मिला हुआ था, यशोधर पंत उनके क्वार्टर में ही रहते थे। 

यशोधर जब दिल्ली आए, उस समय उनकी आयु नौकरी के लिए कम थी। इसलिए वे किशनदा की कृपा पर जीवन-यापन करते थे। जब उनकी उम्र सरकारी नौकरी के योग्य हो गई, तब उन्हें किशनदा ने अपने ही नीचे नौकरी दिलबाई और दफ्तरी जीवन में मार्गदर्शन किया।


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मनोहर श्याम जोशी | Manohar Shyam Joshi

यशोधर पंत को भी कुछ दिन बाद दिल्ली के गोल मार्केट क्षेत्र में क्वार्टर मिल गया। वे अब अपने सरकारी आवास में संयुक्त परिवार के साथ रहने लगे। उनके ताऊ जी भी अपने दो विवाहित बेटों के साथ गाँव से आ गए और यशोधर जी के साथ रहने लगे। 

प्रायः परिवार की महिलाओं में परस्पर बनती नहीं थी। यशोधर जी की पत्नी को दूसरों से दब के रहना पड़ता था । यशोधर जी ताऊ जी के भय से कभी कुछ नहीं कहते थे। किशनदा भी उसी क्षेत्र में विड़ला मन्दिर के पास रहा करते थे । 

यशोधर प्रतिदिन प्रातः उनके साथ भ्रमण करने निकलते थे। वे किशनदा का बहुत आदर करते थे। किशनदा जब भी उनके घर आते उनका काफी सम्मान होता था। किशनदा पुराने विचारों के धार्मिक व्यक्ति थे । यशोधर उनके प्रत्येक काम का अनुसरण करने का सतत प्रयास करते थे। 

किशनदा आजीवन कुँवारे रहे। उनके साथियों ने अपने लिए मकान बनाए, लेकिन किशनदा पूरे सरकारी सेवा काल में सरकारी आवास में ही रहे। जीवन भर समाज तथा अपने लोगों के लिए समर्पित रहे। रिटायर होने के बाद वे अपने गाँव चले गए। 

किसी ने उन्हें अपने पास रहने को न कहा। स्वयं यशोधर बाबू भी उनके सामने इस प्रकार का प्रस्ताव नहीं रख सके। गाँव जाकर एक वर्ष के बाद उनकी मृत्यु हो गई। यशोधरा ने उनके गाँव के किसी व्यक्ति से उनकी मृत्यु के बारे में पूछा तो उनको उत्तर मिला, “जो हुआ होगा। यही संसार का नियम है। विपत्ति के समय कोई साथ नहीं देता है ।”

यशोधर बाबू गोल मार्केट क्षेत्र में रहते हैं। वहाँ सरकार पुराने क्वार्टरों को तोड़कर बहुमंजिले क्वार्टर बना रही है। वहाँ रहनेवाले कर्मचारियों को अच्छे क्वार्टरों में स्थानांतरित किया जा रहा है, लेकिन यशोधर बाबू गोल मार्केट क्षेत्र में स्थानांतरित हो गए। 

जबकि उनके बच्चे भी वहाँ से जना चाहते हैं। लेकिन यशोधर बाबू अपने ही विचारों पर अड़े हैं। उन्हें यही क्षेत्र प्रिय है क्योंकि यहाँ से बिड़ला मन्दिर निकट है। उनके किशनदा इसी क्षेत्र में रहते थे। उनके प्रारम्भिक जीवन की कई यादें इस क्षेत्र में दफन हैं। 

यशोधर पंत कई विभागीय प्रोमोशन लेकर अब ऑफिसर हैं। उनके बच्चे अब काफी बड़े हो गए हैं। उनका बड़ा लड़का एक विज्ञापन कम्पनी में ! 500 रु. मासिक वेतन पर नौकरी कर रहा है। जबकि उसके पिता को अफसर होने पर भी उन दिनों लगभग 300 रुपये वेतन मिलता होगा। उन दिनों डेढ़ हजार रुपया वेतन बहुत अधिक था।

उनका दूसरा लड़का आई.ए.एस. की तैयारी कर रहा है। उनकी एकमात्र लड़की डॉक्टरी की उच्चतम शिक्षा के लिए विदेश जाने की तैयारी पर है। उनका तीसरा लड़का स्कॉलरशिप लेकर अमरीका चला गया है। 

इस प्रकार उनके बच्चे आधुनिक विचारों के हैं, जबकि यशोधर बाबू पुराने विचारों के है। अतः प्रायः हर बात पर उनमें मतभेद होता रहता है। उनकी पत्नी बच्चों का साथ देती थी। यशेपर बाबू किशनदा को अपना आदर्श पुरुष मानते थे किशनदा पुराने विचारों के व्यक्ति थे। वे उन्हीं का अनुगमन करते थे। 

उनके बच्चों को यह बिल्कुल भी पसन्द नहीं था। के पहले दफ्तर साइकिल से जाते थे। लेकिन बच्चों के अनुसार साइकिल तो चपरासी चलाते हैं। पिता जी को तो स्कूटर से ऑफिस जाना चाहिए। लेकिन यशोधर बाबू को स्कूटर की सवारी पसंद न थी इसलिए वे पैदल ऑफिस पहुँचते थे।

यशोधर बाबू दफ्तर से लौटते हुए प्रतिदिन बिड़ला मन्दिर जाते थे। यहाँ वे प्रवचन सुनते तथा भजन करते। यह बात भी उनके बच्चों को बिल्कुल अच्छी नहीं लगती थी। वे कहते हैं कि बब्बा, आप कोई बुड्ढे थोड़े हैं, जो रोज़-रोज़ मन्दिर जाएँ। यशोधर बाबू इस आलोचना की अनसुना कर देते थे। 

बिड़ला मन्दिर से वे पहाड़गंज जाते थे, घर के लिए साग-सब्जी खरीद लाते थे। किसी से मिलना-मिलाना हो, तो वह भी इसी समय कर लेते थे। इस प्रकार दफ्तर से पाँच बजे छुट्टी कर वह प्रतिदिन आठ बजे घर पहुँचते थे, जिसका एक कारण रोज़ का झगड़ा भी था।

उनके बच्चों को शिकायत थी कि पिताजी ने डी.डी.ए. फ्लैट के लिए पैसे न भरकर भयंकर भूल की। लेकिन यशोधर बाबू रिटायर होने के बाद गाँव चले जाना चाहते थे। वे चाहते थे कि उनका एक लड़का सरकारी नौकरी पर लग जाए, तो सरकारी क्वार्टर उनके नाम हो जाए और उनकी जिम्मेदारी भी पूरी हो जाए यशोधर बाबू अपनी बेटी के फैशन से खुश नहीं रहते थे, पर उनकी पत्नी बेटी का पक्ष लेती थी। 

वह भी बेटी के कहने पर बगैर बाँह का ब्लाउज, ऊँची हील वाली सैन्डिल पहनती है। यशोधर बाबू धार्मिक प्रवचन सुनते समय अपने पारिवारिक चिन्तन में डूबे रहते थे कि बच्चे उनका आदर करें, हर बात में उनकी सलाह लें, लेनिक बच्चे सोचते हैं कि जो उन्हें पता ही नहीं, तो उनकी सलाह क्या लें ?

यशोधर बाबू घर का सारा काम करते थे । मण्डी से साग-सब्जी लाना, दूध लाना, राशन लाना, डिस्पेन्सरी से दवा लाना, डीपो से कोयला, मिट्टी का तेल लाना आदि सब काम वे ही करते थे। 

जब वे बच्चों से काम में हाथ बँटाने के लिए कहते हैं तो वे नौकर रखने की बात कहते थे। यशोधर बाबू चाहते हैं कि उनका बेटा अपनी तनख्वाह उनके हाथ में रखे लेकिन वह ऐसा करना उचित नहीं समझता। 

वह घर में अपने शौक के सामान जैसे फ्रिज, गैस, टेलीविजन आदि लाता रहता है। लेकिन यशोधर बाबू को ये सब पसंद नहीं। 

इसके अतिरिक्त उनके बेटे ने घर में कारपेट बिछा दिए, सोफा लगा दिया, कमरों में पर्दे लगा दिए। डनलप वाला बैड, सिंगार मेज आदि साजो-सामान से घर में सभी खुश हैं, लेकिन यशोधर बाबू इन्हें फिजुलखर्ची मानते हैं। 

वे दिखावा पसन्द नहीं करते वे आधुनिकता के लिए अपनी पुरानी संस्कृति खोना नहीं चाहते। वे अपनी सभ्यता और संस्कृति से प्रेम करते हैं।

यशोधर पंत को ज्ञात नहीं है कि आज उनकी शादी की पच्चीसवीं सालगिरह है। वे प्रतिदिन की भाँति आज भी ऑफिस के काम में व्यस्त हैं। पाँच बजे सायं ऑफिस से छुट्टी हो जाती है। 

लेकिन आज उन्हें साढ़े पाँच बज चुके हैं। उनके मातहत कर्मचारी भी उनके कारण अभी तक ऑफिस में रुकने के लिए मजबूर थे। चलते समय परस्पर बातचीत में उनके मातहत कर्मचारियों ने उनसे पूछ लिया कि आपकी शादी कब हुई थी ? उन्होंने उत्तर दिया 6 फरवरी, 1947 को। आज 6 फरवरी का ही दिन है, यह ख्याल यशोधर जी को नहीं रहा। 

सहकर्मियों ने परिहास के लहजे में कहा, आज तो साहब की सिल्वर वैडिंग है। इसलिए दावत हो जानी चाहिए। आज आपकी शादी को पूरे पच्चीस साल हो गए। 

सहकर्मियों द्वारा दावत के लिए आग्रह करने पर यशोधर जी ने कहा, मई से “वेडिंग एनिस” वगैरह सब गोरे साहबों के गोयते है फिर भी साथियों के दबाव में उन्होंने जेब से दस का नोट निकाला, लेकिन सहकर्मी लोग दस रुपये से नहीं माने साथियों के जोर देने पर अन्ततः यशोधर बाबू ने दस दस के दो नोट और दिए। किन्तु साथियों के आग्रह पर भी वे उस दावत में शामिल नहीं हुए।

“वे कभी भी शादी की सालगिरह नहीं मनाते थे। आज भी सहर्मियों के दबाव में आकर दावत दे दी और स्वयं प्रतिदिन की भाँति ऑफिस से घर के लिए चल पड़े। रोज़ की तरह वे बिड़ला मन्दिर गए, वहाँ थोड़ी देर तक प्रवचन सुना, उसके बाद पहाड़गंज से सब्जी लेकर वे सायं 8 बजे घर पहुँचे। 

यही उनका रोज़ाना का नियम था। सब्जी का झोला लेकर यशोधर बाबू खुदी हुई सड़कों और टूटे हुए क्वार्टरों के मलवे पर चलते हुए उस कोने में पहुँचे, जिसमें तीन क्वार्टर अब भी साबुत खड़े हुए थे। उनमें से ही एक क्वटर में यशोधर बाबू रहते हैं।

लेकिन आज वहाँ का नज़ारा ही कुछ और था। पहले तो वे चक्कर में पड़ गए कि कहीं मैं गलत जगत तो नहीं पहुँच गया। फिर होश- हवास संयत करके देखा कि यह अपना ही घर है। 

लेकिन आज यहाँ पर चकाचौंध थी। क्वार्टर के बाहर एक कार कुछ स्कूटर, मोटर साइकिल खड़े थे। कई लोग आ-जा रहे थे। बरामदे में रंगीन झालरें और गुब्बारे लटके थे और रंग-बिरंगी रोशनियाँ जली हुई थीं। यह देखकर यशोधर बाबू आश्चर्यचकित थे। 

उन्होंने थोड़ा ठिठककर देखा कि उनका बड़ा बेटा भूषण किसी को विदा कर रहा है, जो भूषण से अंग्रेजी में कह रहा था, “वि माई वार्म रिगार्ड्स टु युवर फादर !” यशोधर बाबू कुछ समझ नहीं पा रहे थे। वे चुपचाप देख रहे थे कि उनकी पत्नी व बेटी भी कुछ मेमसाहबों को विदा कर रही थीं। आधुनिक लोगों की भीड़ के कारण यशोधर बाबू चुपचाप वहीं खड़े होकर सब कुछ देखने लगे।

जब कार वाले महत्वपूर्ण लोग चले गए, तब यशोधर बाबू क्वार्टर की तरफ बढ़े। भीत्र अब भी पार्टी का दौर चल रहा था। कई मित्र व रिश्तेदार पधारे हुए थे। अन्दर पहुँचकर उन्हें बच्चों की घुड़की सुननी पड़ी, आज आपकी शादी की सालगिरह, रजत जयन्ती (सिल्वर वेडिंग) है और आप समय पर न पहुँचे। 

यशोधर बाबू हतप्रभ थे कि जिसके जन्मदिन पर कभी चार लड्डू नहीं बँटे, उसकी शादी की पच्चीसवीं वर्षगाँठ पर केक, चार तरह की मिठाई, चार तरह के नमकीन, फल, कोल्ड ड्रिंक, हिस्की सब कुछ मौजूद है। यशोधर बाबू ने अपने बड़े बेटे भूषण से पूछा कि इस पार्टी की क्या जरूरत थी और मुझसे तो पूछा भी नहीं गया। 

ये सुनकर एक कोने में बैठा कोला में डली हिस्की पीता हुआ गिरीश बोला- “सुबह मुझे याद आया कि आज जीजा जी की शादी की पच्चीसवीं वर्षगाँठ (सिल्वर वेडिंग) है। क्यों न इसको धूमधाम से मनाया जाए। मैंने और भूषण ने यह कार्यक्रम अकस्मात बना दिया। आपके ऑफिस में फोन किया पर आप मिले नहीं।”

गिरीश यशोधर जी की पत्नी का चचेरा भाई था। वह एक बड़ी कम्पनी में मार्केटिंग मैनेजर था, उसी की सहायता से भूषण विज्ञापन कम्पनी में नौकरी पर लगा था। यशोधर के अनुसार भूषण को इसी ने बिगाड़ा है और उनकी पत्नी कहती थी “जिन्दगी बना दी तुम्हारे बी. ए. सेकेण्ड क्लास बेटे की ।”

 पार्टी में यशोधर बाबू को केक काटने के लिए कहा गया। वे पहले तो केक काटने के लिए तैयार नहीं हुए, लेकिन बाद में बच्चों के दबाव से उन्हें केक काटना ही पड़ा। पर उन्होंने केक में अंडा होने की बात कहकर केक नहीं खाया और संध्या करने चले गए। अन्य लोगों का कार्यक्रम चल रहा था। 

आज उन्होंने पूजा करने में अन्य दिनों की अपेक्षा अधिक समय लगा दिया था। कई मेहमान चले भी गए थे। कुछ रिश्तेदार व परिवार के लोग यशोधर बाबू की प्रतीक्षा कर रहे थे। 

यशोधर बाबू ध्यानमग्न थे, ध्यान में बैठे हुए उन्हें अपने पूर्व मार्गदर्शक किशनदा की याद आ रही थी, वे मन ही मन उनसे बात कर रहे थे। इतने में उनकी घरवाली झिड़कती हुई आ पहुँची कि आज पूजा में ही बैठे रहोगे, सभी लोग आपका इन्तजार कर रहे हैं। 

वे गमछा पहनकर संख्या में बैठे थे, उसी वेश-भूषा में बाहर आ गए। उन्होंने देखा कि कुछ पैकेट पड़े हैं। उनके बारे में पूछने पर भूषण ने बताया कि ये आपके लिए प्रेजेन्ट है। 

उन्होंने कहा, आप लोग ही इनका इस्तेमाल करें। एक प्रेजेन्ट स्वयं भूषण उनके लिया लाया था। यह एक ऊनी गाउन था, उसको यशोधर बाबू ने स्वीकार कर लिया। उनके बेटे ने कहा इस गाउन को पहनकर आप सुबह दूध लेने जाया करें। 

यह सुनकर उन्हें आन्तरिक दुःख हुआ कि वह यह नहीं कह रहा है कि मैं ला दिया करूँगा। उनको किशनदा की याद आई और आँखों में आँसू आ गए। 


silver wedding class 12 शब्दार्थ


सिल्वर वैडिंग शादी की रजत जयंती (यह उत्सव जो विवाह के पच्चीस वर्ष बाद मनाया जाता है)। निगाह— दृष्टि। दफ्तर—कार्यालय। कलाई घड़ी हाथ में बाँधी जाने वाली घड़ी। मातहत अधीन जूनियर—अधीनस्थ । शुष्क रूखा। 

निराकरण- समाधान परंपरा-प्रथाः। छोकरा लड़का पतलून—पैंट बदतमीज़ी- अशिष्ट व्यवहार। चूनेदानी—पान खानेवालों का चूना रखने का बरतन। धृष्टता— अशिष्टता। अनदेखा करना— ध्यान न देना। करेक्ट सही। बाबा आदम का जमाना—पुराना समय। नहले पर दहला—जैसे को तैशा उत्तर। 

दाद—प्रशंसा। वक्ता—बोलने वाला। श्रोता सुनने वाला। ठठाकर — ज़ोर से हँसकर । रोजी-रोटी की तलाश- जीविका की खोज। ठीक-ठिकाना — उचित व्यवस्था । मार्ग-दर्शन — दिशा-निर्देश। चोचले व्यवहार की बनावटी स्थिति, आडंबरपूर्ण व्यवहार । माया—धन-दौलत । 

इनसिस्ट — आग्रह । चुग्गे भर—पेट भरने लायक। जुगाड़ —–व्यवस्था । नगण्य – जो गिनने योग्य न हो। सेक्रेट्रिएट सचिवालय। आधुनिक युवा — आजकल के जवान। सख्त — अत्यधिक । नागवार—अनुचित । निहायत—एकदम। अफोर्ड— सहन करना। इसरार — आग्रह, निवेदन । प्रभु — ईश्वर। रीत प्रणाली। अनसुना—ध्यान न देना । 

गम — दुख । प्रमुख — महत्त्वपूर्ण । वेतन – तनख्वाह । पेंच- कारण। स्कॉलरशिप—छात्रवृत्ति । प्रस्तावित वर – जिस युवक से विवाह की इच्छा प्रकट की गई हो। खुशहाली—संपन्नता। उपेक्षा — तिरस्कार का भाव दिलासा – सांत्वना । तथापि — तो भी। मातृसुलभ माताओं की स्वाभाविक मनोदशा मॉड आधुनिक गजब— अत्यधिक आश्चर्यजनक | 

जिठानी—पति के बड़े भाई की पत्नी । ताई-पिता के बड़े भाई की पत्नी । ढोंग-ढकोसला आडंबरपूर्ण आचरण । कुल परंपरा — वंश की मान्यताएँ व प्रथाएँ। आचरण—व्यवहार। गहरा निःश्वास- लंबा साँस छोड़ना। डीडीकेट—समर्पित । रिटायर सेवानिवृत्त । उपकृत — जिन पर उपकार किया गया है। 

पेशकश-प्रस्तुत। विचित्र अनोखी बिरादरी जाति-भाई। किनम । — तरह। खुराफात — ऊल-जलूल काम करम — कार्य। विरासत उत्तराधिकार। रीत परंपरा या प्रणाली पुश्तैनी — पैतृक जिम्मेदारी ओढ़ना- उत्तरदायित्व लेना बिरादरी—जाति। लोक— संसार बाध्य मजदूर यत्न-प्रयास कर्मकांडी पूजापाठी मर्यादा पुरुष — परंपराओं एवं आस्थाओं को मानने वाला व्यक्ति । राजपाट – राज सिंहासन। 

बाट—संकरा मार्ग, पगडंडी । जनार्दन — ईश्वर । धारणा-मत, निश्चय, विश्वास। आर्थिक दृष्टि-धन संबंधी सोच या चिंतन। सर्वथा — पूरी तरह से । गम-दुख। क्रुद्ध – नाराज। विधवा – जिस स्त्री का पति मर गया हो। गँवई गाँव के रिवाज परंपरा निभ निर्वाह बुजुर्गयत बड़प्पन बुढ़याकाल वृद्धावस्था एनीवे—किसी भी तरह। प्रवचन—भाषण । 

लहजा — ढंग । भाऊ — बच्चा । अनुरोध- आग्रह, निवेदन। पट्टशिष्य—प्रिय छात्र निष्ठा—आस्था। जन्यो पुन्यूं— जनेऊ बदलने वाली पूर्णिमा । कुमाउँनियों— उत्तरांचल के कुमायूँ क्षेत्र के निवासी। सख्त नापसंद – बिलकुल अच्छा ना लगना । सम्मानित बुजुर्ग आदरणीय वृद्ध हरगिज़ बिलकुल दुराग्रह अनुचित हठ एक्स्पीरिएंस अनुभव। सबस्टीट्यूट — विकल्प। कुहराम – शोर-शराबा । 

वक्तव्य कथन। कारपेट – फर्श । इंप्रायर – अनुचित | तरफदारी करना—पक्ष लेना । खिजाब – बालों को काला करने वाला द्रव्य । एल.डी.सी.—लोअर डिवीजन क्लर्क । माहवार — महीना । ईर्ष्या —जलन । भव्य — सुंदर एवं विशाल । संपन्न मालदार हरचंद बहुत अधिक कोशिश प्रयत्न कुमाऊँनी उत्तरांचल के कमान क्षेत्र के निवासी। अनमनी —— उदासी भरी। संध्या करना पूजा करना। नानुच करना —आना-कानी करना। शुरू-प्रारंभ। आखिर अंत। रवैया व्यवहारे। आमादा तैयार या प्रस्तुत होना। जरा तनिक, थोड़ा।


सिल्वर वैडिंग प्रश्न उत्तर


प्रश्न 1. यशोधर बाबू की पत्नी समय के साथ ढल सकने में सफल होती है लेकिन यशोधर बाबू असफल रहते हैं। ऐसा क्यों ?

उत्तर- यशोधर बाबू कुमाऊँ संस्कृति में पले-बढ़े थे, वहीं उन्होंने शिक्षा प्राप्त की। इसलिए उनमें कुमाऊँनी संस्कार कूट-कूटकर भरे पड़े थे। दिल्ली आने पर वे कृष्णानंद पांडे के क्वार्टर में रहने लगे। वे उन्हें बड़े भाई होने के नाते ‘किशनदा’ कहते थे। 

किशनदा आजीवन कुँवारे रहे। ऑफिस से आकर बिड़ला मन्दिर जाना, प्रवचन सुनना, पूजा-संध्या उनका प्रतिदिन का नियम था । यही किशनदा, यशोधर बाबू के आदर्श पुरुष “थे। 

इसलिए वे आधुनिकता में नहीं ढले। यद्यपि यशोधर बाबू की पत्नी अपने मूल संस्कारों से आधुनिक नहीं थी क्योंकि वह भी एक कुमाऊँनी महिला थी, तथापि बच्चों की तरफदारी करने की मातृ-सुलभ मजबूरी ने उन्हें आधुनिक बना डाला। 

इसके अतिरिक्त उसे संयुक्त परिवार में सबसे दबकर रहना पड़ता था। इसलिए उन पर कुछ मनोवैज्ञानिक दबाव भी पड़ा। उस पर अपने बच्चों का प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ा। विशेषकर उसकी पुत्री ने उसे आधुनिकता में ढाल दिया। वह आधुनिक वेशभूषा में रहती थी। बच्चों के प्रभाव से वह समय के साथ ढल सकने में सफल हो गई।

प्रश्न 2. पाठ में ‘जो हुआ होगा’ वाक्य की कितनी अर्थ छवियाँ आप खोज सकते/सकती हैं ? 

उत्तर—किशनदा ने जीवन भर कई लोगों पर उपकार किए, लेकिन जब वे रिटायर हुए तो उन्हें किसी ने भी नहीं पूछा। वे अन्ततः अपने गाँव चले गए और साल भर बाद उनकी मृत्यु हो

गई। यशोधर बाबू को इससे बहुत दुःख पहुँचा। जब उन्होंने एक व्यक्ति से उनकी मृत्यु के बारे में पूछा, तो उसने उत्तर दिया, “जो हुआ होगा”। 

इस छोटे से वाक्य में कई अर्थ छवियाँ छुपी हुई है।

अज्ञात की अर्थ छवि – जिस व्यक्ति से यशोधर बाबू ने पूछा हो सकता है कि उसको किशनदा की मृत्यु के बारे में कोई जानकारी न हो और उसने कह दिया ‘जो हुआ होगा’ । 

उपेक्षा की अर्थ छवि-किशनदा जीवन भर दिल्ली में रहे। उनका अधिक सम्बन्ध दिल्ली वासियों के साथ ही रहा। गाँव वाले दिल्ली वालों को पराया-सा समझते हैं। इसलिए उत्तर देनेवाले ने कह दिया “जो हुआ होगा” अर्थात् इस बारे में क्या बता सकता हूँ।

प्रश्न 3. ‘समहाउ इंप्रायर’ वाक्यांश का प्रयोग यशोधर बाबू लगभग हर वाक्य के प्रारंभ में तकिया कलाम की तरह करते हैं। इस वाक्यांश का उनके व्यक्तित्व और कहानी के कथ्य से क्या सम्बन्ध बनता है ? 

उत्तर— वाक्यांश का मूल अर्थ समहाउ का तात्पर्य है—किसी न किसी प्रकार से या रीति से, अर्थात् हर हालात में निश्चित रूप से इंप्रायर का अर्थ है अनुचित, अर्थात् जो बात यशोधर

बाबू को हर हालात में अनुचित या गलत लगती है, उसके लिए वह ‘समहाउ इंप्रायर’ कहते हैं। यशोधर बाबू के व्यक्तित्व से सम्बन्ध – यशोधर बाबू आधुनिकता के विरोधी हैं। विरोधी भाव व्यक्त करने के लिए यह वाक्यांश उनके व्यक्तित्व से भली-भाँति जुड़ गया है। जैसे चौड़ी मोहरी वाली पतलून, ऊँची एड़ी वाले जूते यशोधर बाबू को ‘समहाउ इंप्रायर’ मालूम होते हैं।

कहानी के कथ्य से सम्बन्ध — कहानी में यशोधर बाबू मुख्य पात्र हैं। उन्हें आधुनिक पहनावा, आचार-व्यवहार, रंग-ढंग रुचिकर नहीं लगता। यही कहानी का मूल कथ्य है। इनके प्रति अपना विरोध प्रकट करने के लिए वे बार-बार ‘समहाउ इंप्रायर’ वाक्यांश का प्रयोग करते हैं। अतः यह वाक्यांश उनके व्यक्तित्व व कथ्य से जुड़ गया है। 

प्रश्न 4. यशोधर बाबू की कहानी को दिशा देने में किशनदा की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। आपके जीवन को दिशा देने में किसका महत्त्वपूर्ण योगदान रहा और कैसे ?

उत्तर—यशोधर बाबू के आदर्श पुरुष- किशनदा यशोधर बाबू के आदर्श पुरुष है क्योंकि किशनदा ने उनके जीवन को निश्चित दिशा देने में प्रमुख भूमिका निभाई है। यशोधर पंत हाई स्कूल पास करके एक असहाय व्यक्ति की तरह दिल्ली आए तब उनकी उम्र नौकरी के लायक नहीं थी। उनको किशनदा ने अपने पास शरण दी। बाद में उनकी नौकरी भी लगा दी। 

ऑफिस का सारा काम सिखाया। आचार-व्यवहार, चाल-चलन में किशनदा का उन पर स्पष्ट प्रभाव था। इस प्रकार किशनदा ने हर क्षेत्र में उनके जीवन को दिशा प्रदान की और वे यशोधर बाबू के जादर्श पुरुष बन गए।

मेरे आदर्श पुरुष — मेरे माता-पिता, भ्राता, मित्र, चाचा, ताऊ, मामा आदि मेरे आदर्श हैं। उन्होंने बचपन में मेरा मार्ग-दर्शन किया। मैं समय पर पढ़ाई, खेल, व्यायाम, खाना, सोना, सामाजिक कार्यों में भाग लेना, ये सब उन्हीं के मार्गदर्शन में करता आया हूँ। 

आज मैं अपने समाज व साथियों में अच्छा माना जाता हूँ क्योंकि मेरे आदर्श पुरुष द्वारा मुझे सही दिशा प्रदान की गई। 

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प्रश्न 5. वर्तमान समय में परिवार की संरचना, स्वरूप से जुड़े आपके अनुभव इस कहानी से कहाँ तक सामंजस्य बिठा पाते हैं ?

उत्तर—कहानी में परिवार की संरचना — कहानी में जिस परिवार की संरचना को प्रस्तुत किया गया है, उसमें प्राचीन और आधुनिक मानसिकता में द्वन्द्व दिखाया गया है। परिवार का मुखिया यशोपर पंत पुराने विचारों के परम्परावादी व्यक्ति हैं, जबकि उसके बच्चे आधुनिक विचारों के तथाकथित मॉड हैं । 

परिवार में माँ बच्चों के पक्ष में रहती है, जिससे वैचारिक मतभेद के कारण हर समय द्वन्द्व छिड़ा रहता है। यह एक पारिवारिक द्वन्द्व है, जिसमें एक-दूसरे के प्रति नफरत नहीं प्रत्युत लगाव बना रहता है।

कहानी के परिवार से सामंजस्य — प्रस्तुत कहानी पर आधुनिक परिवारों की संरचना का ही प्रभाव दिखाई देता है। माता-पिता दोनों परम्परावादी होते हुए भी माँ हमेशा बच्चों का पक्ष लेती है । यशोधर बाबू जब भी बच्चों की आधुनिकता का विरोध करते हैं, उनकी पत्नी बच्चों के पक्ष में खड़ी हो जाती है। ऐसा वर्तमान परिवारों में भी होता है। आज के बच्चे आधुनिकता चाहते हैं, जबकि बुजुर्ग परम्पराओं की बात करते हैं, जिससे द्वन्द्व पैदा होता है। 

प्रश्न 6. निम्नलिखित में से किसे आप कहानी की मूल संवेदना कहेंगे/ कहेंगी और क्यों ? 

(क) हाशिए से बाहर होते मानवीय मूल्य

(ख) पीढ़ी का अंतराल

(ग) पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव

उत्तर—इस कहानी के माध्यम से लेखक का मुख्य उद्देश्य पीढ़ी का अन्तराल दिखाना है। यह अनंत काल से चला आ रहा है। प्रस्तुत कहानी में एक पीढ़ी यशोधर बाबू की है। दूसरी पीढ़ी उनके बच्चों की है। इन दोनों पीढ़ियों में अंतराल स्पष्ट दिखाई देता है। उनकी पत्नी भी पति की तरह परम्परावादी है, लेकिन मातृ-सुलभ गुण होने के कारण वह बच्चों की तरफदारी करती है, जो प्रायः हर परिवार में होता है। बच्चों पर वर्तमान सभ्यता का प्रभाव पड़ता है, जो नयी पीढ़ी कहलाती है। बुजुर्गों पर पुरानी पीढ़ी का प्रभाव होता है। यही इस कहानी का मूल भाव भी है।

मूल संवेदना—कहानी का मुख्य उद्देश्य ही मूल संवेदना है। नयी व पुरानी पीढ़ी में अन्तर दिखाना लेखक का मूल उद्देश्य है। इसमें पीढ़ी का अन्तराल तो मूल संवेदना है और अन्य प्रसंग उससे प्रभावित हैं। पुरानी पीढ़ी की मानसिक संवेदना बन जाती है कि अब तो मानवीय मूल्य हाशिये पर चले गए हैं। नई पीढ़ी पर पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव है आदि। वास्तव में, नई पीढ़ी पर पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव बढ़ चुका है।

प्रश्न 7. अपने घर और विद्यालय के आस-पास हो रहे उन बदलावों के बारे में लिखें. जो सुविधाजनक और आधुनिक होते हुए भी बुजुर्गों को अच्छे नहीं लगते। अच्छा न लगने के क्या कारण होंगे ? 

उत्तर-घर के आसपास हो रहे बदलाव पर में प्रयोग आने वाले कई प्रकार के साधनों में आज बदलाव आ गया है। पहले लोग अंगीठी व स्टोव पर खाना बनाते थे, अब घर-घर में गैस उपलब्ध है। पानी गरम करने के लिए गीजर आदि हैं। फ्रीज है, जिसमें पका हुआ भोजन, फल, सब्जियाँ आदि रखी जाती है। 

बिजली की चकाचौंध के लिए अनेक साधन हैं। यातायात के लिए कार, मोटर-साइकिल, स्कूटर है, जबकि पहले लोग पैदल या साइकिल से आते-जाते थे। इसके अलावा भी बहुत बदलाव हो गए हैं। विद्यालय के आसपास हो रहे बदलाव — अब विद्यालय में पढ़ाई-लिखाई के अलावा खेद-कूद पर अधिक जोर दिया जाने लगा है। 

विद्यालय में छात्र-छात्राएँ आधुनिक वेशभूषा में आते हैं। आने-जाने के साधन भी बदल गए हैं। विद्यालय में पाठ्यक्रम के साथ अन्य कार्यक्रम भी उसके अंग बन गए हैं। आज टी.वी. व कम्प्यूटर के माध्यम से पढ़ाई हो रही है। बुजुर्गों की रुचि -बुजुर्ग लोगों को आधुनिक बदलाव अच्छे नहीं लगते हैं। वे आधुनिक

साधनों में सुविधाएँ नहीं अपितु कमियाँ ढूँढते हैं। वे आधुनिक वेशभूषा व चाल-चलन को पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव समझकर उसको दूषित संस्कृति की संज्ञा देते हैं। 

प्रश्न 8. यशोधर बाबू के बारे में आपकी क्या धारणा बनती है ? दिए गए तीन कथनों में से आप जिसके समर्थन में हैं, अपने अनुभवों और सोच के आधार पर उसके लिए तर्क दीजिए 

(क) यशोधर बाबू के विचार पूरी तरह से पुराने हैं और वे सहानुभूति के पात्र नहीं हैं।

(ख) यशोधर बाबू में एक तरह का द्वंद्व है जिसके कारण नया उन्हें कभी-कभी खींचता तो है पर पुराना छोड़ता नहीं। इसलिए उन्हें सहानुभूति के साथ देखने की जरूरत है।

(ग) यशोधर बाबू एक आदर्श व्यक्तित्व हैं और नयी पीढ़ी द्वारा उनके विचारों का अपनाना ही उचित है।

उत्तर—(क) यशोधर बाबू के बारे में सोचते हुए पाठक की धारणा बनती है और सहानुभूति के पात्र नहीं हैं। उनके द्वंद्व को देखकर उनके लिए सहानुभूति पैदा होती है। उनका चरित्र एक आदर्श है। नई पीढ़ी उसे अपना नहीं सकती। प्रत्येक व्यक्ति का मत भिन्न होता है। 

अतः इस विषय में मेरा मत यह है कि- यशोधर बाबू में एक तरह का द्वंद्व है जिसके कारण नया उन्हें कभी-कभी खींचता तो है पर पुराना छोड़ता नहीं। इसलिए उन्हें सहानुभूति के साथ देखने की जरूरत है। 

(ख) इस विषय में मेरा अपना अनुभव यह है कि मेरे दादाजी भी नई चीजों की पहले आलोचना करते हैं किंतु जब उन्हें उनका सुख अनुभव होने लगता है तो दबी जबान से बड़ाई भी करते हैं। हमारे घर में जब ए.सी. लगे तो दादा जी के तर्क थे। 

हम तो वृक्षों की छाया में आनंद से रहते थे। अब तुमको पंखा- कूलर से भी संतोष नहीं मिला। किंतु अब वे ए.सी. में बैठकर प्रसन्नता का अनुभव करने लगे हैं।

(ग) मेरी स्वयं की सोच यह है कि यशोधर बाबू का द्वंद्व स्वाभाविक है। वह ग्रामीण परिवेश से आए हैं। अतः पुराने के प्रति लगाव है। अंब दिल्ली में रह रहे हैं। उनके बच्चे आधुनिक परिवेश से प्रभावित हैं। अतः बच्चे घर में कुछ नयापन चाहते हैं। यह नयापन यशोधर बाबू को भी यदा-कदा आकर्षित करता है। 

यथा-गैस व फ्रिज के संबंध में उनकी सोच तथा भूषण के मित्रों से हाथ मिलाना तथा अपना परिचय देना आधुनिक या नयापन लिए हैं। द्वंद्व से ग्रस्त यशोधर बाबू के प्रति समय से घर लौटते पुराने व्यक्तित्व को उपेक्षा से नहीं अनुनय-विनय से चाहिए । अपनी ओर लाना|


कक्षा 12 वितान पाठ 1 के प्रश्न उत्तर


प्रश्न 1. यशोधर बाबू की चारित्रिक विशेषताओं का वर्णन कीजिए। 

उत्तर- यशोधर बाबू कहानी के नायक हैं। कहानी के प्रारंभ से लेकर अंत तक कहानी उनके ही आस-पास घूमती है। इस छोटी-सी रचना में यशोधर बाबू के चरित्र की अनेक विशेषताओं का वर्णन हुआ है। यथा-यशोधर बाबू ऑफिस में अधीनस्थ को कोई ढील नहीं देना चाहते हैं। 

इसीलिए पाँच बजे के ऑफिस के समय से पहले कभी अपनी कुर्सी से नहीं उठते, जिसके कारण अधीनस्थ को भी उतने ही समय तक बैठना पड़ता है। यशोधर बाबू दिनभर के रूखे व्यवहार को शाम को सरस बनाने का प्रयास करते हैं। अतः छाबड़ा जैसे अशिष्ट जूनियर के मुँह नहीं लगते। 

वे अधीनस्थ की इच्छाओं का इतना ध्यान रखते हैं कि सिल्वर वैडिंग की परंपरा में विश्वास न रखते हुए भी स्वयं सम्मिलित न होते हुए भी अपने अधीनस्थ की इच्छाओं का इतना ध्यान रखते हैं कि अधीनस्थ को चाय, लिट्टी व लड्डू के लिए सहर्ष तीस रुपए दे देते हैं।

यशोधर बाबू जिम्मेदार बाप हैं। अतः घर का सारा काम-सब्जी लाना, राशन लाना, कैरोसिन लाना, कोयला लाना, दूध लाना, सी. जी. एच. एस. डिस्पेंसरी से दवा लाना, सदर बाजार जाकर दाल लाना आदि वे स्वयं करते हैं। 

अपनी अवस्था के कारण वे यह चाहते हैं कि उनके बालक इन कामों में सहयोग दें, किंतु वे अपने मुख से कहते नहीं हैं। यशोधर बाबू परंपरागत मूल्यों के विश्वासी हैं। वे मंदिर जाते हैं। 

अपने बहनोई की बीमारी का हाल-चाल जानने के लिए दिल्ली से सुदूर अहमदाबाद जाना चाहते हैं। वे किशनदा के प्रति सदैव कृतज्ञता प्रकट करते हैं। किशनदा की मौत के कारण ‘जो हुआ होगा’ उनको उद्वेलित करता

है। वह सिल्वर वैडिंग जैसी पाश्चात्य परंपरा के विरोधी, शुद्ध शाकाहारी हैं। अतः केक नहीं खाते क्योंकि उसमें अंडे का प्रयोग होता है।

यशोधर बाबू सामान्य जीवन के आदी हैं। ऑफिस पैदल आते-जाते हैं। पद के अनुसार अच्छा मकान उनको मिल सकता है किंतु उसी क्वार्टर में पड़े हैं जो उनके नौकरी के प्रारंभ में मिला था। उनको अपनी पत्नी का आधुनिक रूप अच्छा नहीं लगता। 

वे पुत्री की जीन्स व टाप से दुखी हैं। सरलता व सादगी के लिए किशनदा उनके आदर्श हैं। इसी कारण वे घर में होती गवाते हैं। जनेऊ पून्यों के दिन कुमायूँ वालों को जनेऊ पहनाते हैं। रामलीला वालों को तालीस के लिए कमरा देते हैं। 

यशोधर बाबू भले ही परंपरावादी हैं किंतु प्रगति को मन ही मन स्वीकार करते हैं। घर में

आया फ्रिज व गैस उनके द्वारा मन में ही मान्य है। शांत स्वभाव के यशोधर पत्नी व बच्चों के मनोनुकूल व्यवहार के न होने पर न तो कलह करते हैं और न कभी शब्दों से अपना आक्रोश प्रकट करते हैं।

अतः यह कहा जा सकता है कि यशोधर बाबू के चरित्र में अनेक विशेषताएँ हैं, जो पाठक को प्रभावित करती हैं। 

प्रश्न 2. यशोधर बाबू की अभिलाषा क्या है ?

उत्तर—“यशोधरजी चाहते हैं कि उन्हें समाज का सम्मानित बुजुर्ग माना जाए लेकिन जब समाज ही न हो तो यह पद उन्हें क्यों मिले ? यशोधर जी कहते हैं कि बच्चे मेरा आदर करें और उसी तरह हर बात में मुझसे सलाह लें जिस तरह में किशनदा से लिया करता था। 

यशोधर बाबू डेमोक्रेट बाबू हैं और हरगिज़ यह दुराग्रह नहीं करना चाहते कि बच्चे उनके कहे को पत्थर की लकीर समझें। लेकिन यह भी क्या हुआ कि पूछा न ताछा, जिसके मन में जैसा आया करता रहा। ग्रांटेड तुम्हारी नौलेज ज्यादा होगी लेकिन एक्सपीरिएंस का कोई सबसिट्यूट ठहरा नहीं बेटा। 

मानो न मानो, झूठे मुँह से सही, एक बार पूछ तो लिया करो—ऐसा कहते हैं यशोधर बाबू और बच्चे यही उत्तर देते हैं, “बब्बा, आप तो हद करते हैं, जो बात आप जानते ही नहीं आपसे क्यों पूछें ?”

“यशोधर बाबू को अच्छा लगता अगर उनके बेटे बड़े होने पर अपनी तरफ से यह प्रस्ताव करते हैं कि दूध लाना, राशन लाना, सी.जी.एच.एस. डिस्पेंसरी से दवा लाना, सदर बाजार जाकर दालें लाना, पहाड़गंज से सब्जी लाना, डिपो से कोयला लाना ये सब काम आप छोड़ दें, अब हम कर दिया करेंगे, एकाध बार बेटों से खुद उन्होंने ही कहा, तब वे एक-दूसरे से कहने लगे कि तू किया कर, तू क्यों नहीं करता ?”

यशोधर बाबू चाहते हैं कि उनका बेटा अपना वेतन उनके हाथ में रखे। उन्हें इस बात का मलाल है कि उनके बेटे ने यह नहीं कहा कि पिताजी मैं आपके लिए यह टी. वी. लाया हूँ। उन्हें यह बात चुभ गई कि उनका बेटा यह कह रहा है कि आप सवेरे ड्रेसिंग गाउन पहनकर दूध लाने जाया करें, वह यह नहीं कह रहा कि दूध में ला दिया करूँगा ।

प्रश्न 3. अपने परिवार की किन-किन बातों को यशोधर बाबू अनुचित समझते हैं ? 

उत्तर—यशोधर बाबू के परिवार में यों तो छह सदस्य हैं किंतु वर्णन केवल चार का ही विस्तार से है। पत्नी, बड़ा पुत्र भूषण तथा उनकी बेटी का ही यशोधर जी से संलाप है। यशोधर बाबू इन सभी से असंतुष्ट हैं। 

यशोधर बाबू के परिवार से मतभेद के विषय में लेखक लिखता है—सच तो यह है कि पिछले कई वर्षों से यशोधर बाबू का अपनी पत्नी और बच्चों से हर छोटी-बड़ी बात में मतभेद होने लगा है और इसी वजह से वह घर जल्दी लौटना पसंद नहीं करते। 

जब तक बच्चे छोटे थे तब तक वह उनकी पढ़ाई-लिखाई में मदद कर सकते थे। अब बड़ा लड़का एक प्रमुख विज्ञापन संस्था में नौकरी पा गया है। यद्यपि ‘समहाउ’ यशोधर बाबू को अपने साधारण पुत्र को असाधारण वेतन देनेवाली यह नौकरी कुछ समझ में आती नहीं ।

परिवार के शेष सदस्यों के निर्णय से भी यशोधर बाबू प्रसन्न नहीं हैं। लेखक लिखता है— वह कहते हैं कि डेढ़ हजार रुपया तो हमें अब रिटयारमेंट के पास पहुँच कर मिला है, शुरू में ही डेढ़ हज़ार रुपया देनेवाली इस नौकरी में ज़रूर कुछ पेंच होगा। 

यशोधर जी का दूसरा बेटा दूसरी बार आई.ए.एस. देने की तैयारी कर रहा है और यशोधर बाबू के लिए यह समझ सकना असंभव है कि जब यह पिछले साल ‘एलाइड सर्विसेज’ की सूची में, माना काफी नीचे आ गया था, तब इसने ‘ ज्वाइन करने से इंकार क्यों कर दिया ? 

उनका तीसरा बेटा स्कालरशिप लेकर अमरीका चला गया है और उनकी एकमात्र बेटी न केवल तमाम प्रस्तावित वर अस्वीकार करती चली जा रही है बल्कि डॉक्टरी की उच्चतम शिक्षा के लिए स्वयं भी अमरीका चले जाने की धमकी दे रही है। यशोधर बाबू जहाँ बच्चों की इस तरक्की से खुश होते हैं वहाँ ‘समहाउ’ यह भी अनुभव करते हैं कि वह खुशहाली भी कैसी जो अपनों में परायापन पैदा करे। 

अपने बच्चों द्वारा गरीब रिश्तेदारों की उपेक्षा उन्हें ‘समहाउ’ जँचती नहीं।- अपनी पत्नी का परिवर्तित आधुनिक रूप तथा बेटी की जीन व टाप भी यशोधर जी को अच्छा नहीं लगता। बेटी द्वारा घर में लाया गया सामान अपना कहना यशोधर जी को अनुचित लगता है। पुत्र द्वारा अपना वेतन उनके हाथ पर न रखना भी उनकी दृष्टि में अनुचित है। यशोधर जी को यह बात भी खटकती है कि घर के किसी भी काम में परिवार के सदस्य सहयोग नहीं करते।

प्रश्न 4. यशोधर बाबू परिवार में एक पक्ष थे, लेकिन ऑफिस में कर्त्तव्यनिष्ठ थे । इसके कथन को विस्तार से लिखिए।

उत्तर—परिवार में एक पक्ष-पुरानी व नई विचारधाराओं को लेकर प्रायः परिवार में इन्द्र बना रहता था। यशोधर बाबू पुराने विचारों पर अडिग रहते थे। जब घर में कोई नयी वस्तु आती थी तो परिवार में सभी लोग खुश होते, लेकिन यशोधर बाबू उसमें बुराई निकालते थे। 

जिम्मेदारियों से बचने वाले – यशोधर बाबू परिवार की भावी जिम्मेदारियों से सदैव बचने की कोशिश करते थे। उनके बच्चे चाहते थे कि हमारे भविष्य के लिए दिल्ली में कहीं मकान बने या डी.डी.ए. का फ्लैट ले लें। 

लेकिन वे अपने किशनदा की इस उक्ति का पालन करते थे कि “मकान मूरख लोग बनाते हैं और सयाने लोग उनमें रहते हैं।” वे चाहते थे कि उनका कोई लड़का सरकारी नौकरी पर लग जाए तो उनका सरकारी क्वार्टर उसके नाम पर हो जाएगा और

वे मकान बनाने की जिम्मेदारी से बच जाएँगे। पारिवारिक व्यवस्था घर के सारे सामान आदि की व्यवस्था स्वयं यशोधर हालांकि उनके बच्चे घर में नौकर रखना चाहते थे, लेकिन यशोधर बाबू को घर में नौकर रखना बाबू करते थे।

बिल्कुल पसन्द नहीं था। दफ्तर के कार्यों में कर्त्तव्यनिष्ठ— अन्य सभी बातों के सामान्य होने पर भी यशोधर बाबू अपने दफ्तर के कार्यों के प्रति समर्पित थे। वे दफ्तर के कार्यों को तुरंत निपटाने में विश्वास रखते थे। इसके लिए वे निर्धारित समय से अधिक समय लगाते थे। सिल्वर वैडिंग के दिन भी दे अतिरिक्त समय देकर दफ्तर का काम निपटा कर घर गए। इससे दफ्तर के कार्यों में उनकी कर्त्तव्यनिष्ठा का पता चलता है।


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प्रश्न 1. यशोधर बाबू से ऑफिस में बदतमीजी करनेवाले बाबू का स्तर क्या था ? 

उत्तर—यशोयर बाबू से वार्तालाप में थोड़ी बदतमीजी करनेवाला नया लड़का चड्ढा था जो ‘असिस्टेंट ग्रेड’ में काम करता था। 

प्रश्न 2. यशोधर बाबू को सिल्वर वैडिंग की बधाई किस बाबू ने किन शब्दों में दी ?

उत्तर—यशोधर बाबू से यह सुनने पर कि मेरी शादी 6 फरवरी, 1947 में हुई थी, ऑफिस के मेनन बाबू ने कहा—”मैनी हैप्पी रिटर्न्स ऑफ द डे सर ! आज तो आपका ‘सिल्वर वैडिंग’ है। शादी को पूरा पच्चीस साल हो गया।” 

प्रश्न 3. दफ्तर के बाद यशोधर बाबू घर पहुँचने तक क्या-क्या करते थे ?

उत्तर—दफ्तर के बाद यशोधर बाबू बिड़ला मंदिर जाते और वहाँ से निकलकर घर के लिए साग-सब्जी खरीदकर लोगों से मिलते-जुलते हुए रात आठ बजे घर पहुँचते थे । 

प्रश्न 4. यशोधर बाबू का बड़ा बेटा कहाँ नौकरी करता है और उसे कितना वेतन मिलता है ?

उत्तर—यशोधर बाबू का बड़ा पुत्र एक प्रमुख विज्ञापन संस्था में डेढ़ हजार रुपया मासिक पर नौकरी करता है।

प्रश्न 5. यशोधर बाबू के दूसरे बेटे ने ‘एलाइड सर्विसेज’ में ज्वाइन क्यों नहीं किया ? 

उत्तर—यशोधर बाबू का दूसरा पुत्र आई.ए.एस. से नीचे की नौकरी में जाने का इच्छुक नहीं था। 

प्रश्न 6. यशोधर पंत के अधीनस्थ कर्मचारी चड्ढा ने उनसे क्या-क्या घृष्टता की और इस पर उनकी क्या प्रतिक्रिया थी ?

उत्तर—दफ्तर में देरी——एक दिन यशोधर पंत दफ्तर में निर्धारित समय से आधा घण्टा दे तक काम करते रहे। उनके अधीनस्थ अन्य कर्मचारी भी मजबूरन रुक्ने हुए थे। उन्होंने यशोधर बाबू से कहा कि “आप लोगों की देखा-देखी सेक्शन की घड़ी भी सुस्त हो गयी है।” नए छोकरे चड्ढा ने मजाक में कहा कि बड़े वाऊ आपकी ‘चूनेदानी’ का क्या हाल है ? 

वक्त सही देती शोर बाबू ने कहा कि मिनट टू मिनट सही चलती है। चड्ढा ने कुछ और पृष्ट होकर उनकी कलाई थाम ली और कहा कि यह तो बाबा आदम के जमाने की है। “यशोधर पंत की प्रतिक्रिया — यशोपर पंत ने चड्ढा की पृष्टता को अनदेखा कर दिया और बात पलट कर माहौल को अपने तरीके से बदल दिया। 

प्रश्न 7. यशोधर बाबू ने अपनी सिल्वर वैडिंग की दावत मातहत कर्मचारियों को देने में आनाकानी क्यों की और फिर क्या किया ? 

उत्तर—शादी की पच्चीसवीं वर्षगांठ जब यशोधर बाबू से उनके मातहत कर्मचारियों ने उनकी शादी की तिथि पूछी तो उन्होंने 6 फरवरी, 1947 बताई। आज पच्चीस वर्ष बाद 6 फरवरी ही थी। यह जानकर ऑफिस वालों ने कहा कि आज तो आपका सिल्वर वैडिंग है। इसलिए दावत दीजिए। इस पर वे आनाकानी करने लगे, लेकिन ऑफिस वालों ने काफी जोर दिया। तब उन्होंने दावत के लिए कुछ रुपए दिए।

मना करने का कारण – यशोधर बाबू ने आज तक कभी भी अपनी शादी की वर्षगांठ नहीं मनाई थी। उन्होंने ऑफिस वालों को मना करते हुए कहा कि यह सब अंग्रेजों के चोचले हैं। हम हिन्दुस्तानी सिल्वर वैडिंग वगैरह नहीं मनाते हैं, मैं ऐसी बातों को महत्त्व नहीं देता हूँ। 

प्रश्न 8. ऑफिस से छुट्टी होने के बाद यशोधर बाबू प्रतिदिन अपने घर देर से क्यों पहुंचते थे ?

उत्तर—यशोधर बाबू की दफ्तर से पाँच बजे छुट्टी होती थी, परन्तु वे प्रतिदिन लगभग 8 बजे सायं घर पहुँचते थे, क्योंकि मंदिर जाना- वे प्रतिदिन ऑफिस से सीधा मंदिर जाते थे। वहाँ पूजा-पाठ करते व प्रवचन सुनते थे। घर के लिए सामान लाना वे घर का समान रास्ते में ही खरीदते थे। यदि कोई जान-पहचान वाला मिल गया तो उससे भी बातचीत कर लेते थे। 

प्रश्न 9. यशोधर बाबू अपनी बेटी के किस व्यवहार से नाखुश थे ?

उत्तर- यशोधर बाबू की बेटी तमाम प्रस्तावित वर अस्वीकार कर डॉक्टरी की उच्चतम शिक्षा के लिए अमरीका जाने की धमकी देती है, जीन्स व टॉप पहनती है जो यशोधर बाबू को मनोनुकूल नहीं लगते। 

प्रश्न 10. किशनदा के प्रति सम्मान रखते हुए भी यशोधर बाबू ने उनके रिटायर होने के बाद अपने साथ रहने का प्रस्ताव क्यों नहीं रखा ? 

उत्तर- यशोधर बाबू किशनदा के सम्मुख अपने साथ रहने का प्रस्ताव इसलिए नहीं रख पाए क्योंकि उस समय तक उनकी शादी हो चुकी थी और उनके दो कमरों के क्वार्टर में तीन परिवार रहा करते थे।

प्रश्न 11. यशोधर बाबू का प्रवचन सुनने में मन क्यों नहीं लगा ?

उत्तर—वस्तुतः यशोधर बाबू भीतर से बहुत ज्यादा धार्मिक अथवा कर्मकांडी नहीं हैं, वह तो अपने आदर्श किशनद्रा की परंपरा का निर्वाह मात्र करते हैं। 

प्रश्न 12. यशोधर ने अपने विवाह का आयोजन किस प्रकार किया था ? 

उत्तर- अनाथ यशोधर ने कोऑपरेटिव से दो-चार हजार रुपए का कर्जा लेकर बगैर किसी खास धूमधाम से अपना विवाह किया था ।


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प्रश्न 1. ‘सिल्वर वैडिंग’ से क्या आशय है ? 

उत्तर – शादी के पच्चीस वर्ष पूरे होने पर मनाया जाने वाला ‘सिल्वर वैडिंग’ कहलाता है ।

प्रश्न 2. ‘बाबा आदम के ज़माने से क्या आशय है ? 

उत्तर – ईसाइयों की मान्यतानुसार आदम सृष्टि के पूर्व पुरुष हैं अतः ‘बाबा आदम के ज़माने से आशय अत्यंत प्राचीन काल से है। 

प्रश्न 3. ‘एलाइड सर्विसेज’ किसे कहते हैं ?

उत्तर—भारत में प्रशासनिक सेवाओं की प्रतियोगिता परीक्षा को आई. ए. एस. परीक्षा कहते हैं। इनमें वरीयता में जो बहुत नीचे होते हैं, उनको आई.ए.एस., आई.एफ.ए., आई.पी.एस. के न मिलने पर ‘एलाइड सर्विसेज’ में जाना होता है । 

प्रश्न 4. पाठ में जनार्दन शब्द का वक्ता व श्रोता क्या अर्थ करते हैं ?

उत्तर—प्रवचन कर्ता जनार्दन शब्द का प्रयोग के लिए करता है किंतु श्रोता यशोधर को इस शब्द से अपने जीजा जर्नादन जोशी का स्मरण आता है। 

प्रश्न 5. ‘भाऊ’ का क्या अर्थ है ? 

उत्तर- ‘भाऊ’ शब्द का अर्थ बच्चा है।

प्रश्न 6. ‘जन्यो पुन्यूं’ से क्या आशय है ?

उत्तर— श्रावण शुक्ल पूर्णिमा अर्थात् रक्षाबंधन को ब्राह्मण अपने पुराने जनेऊ उतारकर नए धारण करते हैं। उत्तरांचल की कुमाऊँ की बोली में इसे ‘जन्यो पुन्यूं’ कहते हैं। 

प्रश्न 7. ‘एक्सपीरिएंस का कोई सबसिट्यूट नहीं’ से क्या आशय है ?

उत्तर—यशोधर बाबू का मत है कि अनुभव का कोई विकल्प नहीं होता अर्थात् अनुभव का मुकाबला शिक्षा की डिग्रियाँ नहीं कर सकतीं। 

प्रश्न 8. यशोधर बाबू ने सिल्वर वैडिंग का केक क्यों नहीं खाया ? 

उत्तर—यशोधर बाबू का कहना था कि मैं केक नहीं खाता क्योंकि इसमें अंडा पड़ा होता है।


लेखक के द्वारा


नमस्कार Students, मैंने इस पोस्ट को (class 12 hindi ncert solutions) CBSE, NIOS,  CISCE, ICSE और अन्य राज्य के board के मुताबिक इस पोस्ट को तैयार किया है, तथा भविष्य में जो भी लेटेस्ट अपडेट आएंगी उसके अनुसार यह पोस्ट अपडेट भी होता रहेगा । इसलिए मुझे यह आशा है कि यह पोस्ट आपके लिए काफी जानकारी पूर्ण होगा और आपके परीक्षा के लिए काफी सहायता प्रदान करेगा । तो मेरा आपसे यही आग्रह है कि आप इस लेख को पूरा अवश्य पढ़ें


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