Class 12 Hindi Ncert Solutions Vitan Chapter 4 : डायरी के पन्ने सारांश, प्रश्न उत्तर, Easy डायरी के पन्ने Summary

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क्या आप Class 12 के विद्यार्थी हैं और इंटरनेट पर अध्याय Class 12 Hindi Ncert Solutions Vitan Chapter 4 से जुड़ी जानकारियां, गद्यांश, पद्यांश PDF, एवं प्रश्न उत्तर की तलाश कर रहे हैं। तो यह वेबसाइट आपके लिए है |

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मैं खुद class 12 का टॉपर रह चुका हूं और साथ ही साथ वर्तमान में मैं एक शिक्षक भी हूं। वर्तमान मे, मेरे पास कक्षा 12वीं के काफी विद्यार्थी हैं । जिनको मैं  बारहवीं की तैयारी करवाता हूं । यह पोस्ट को मैं अपने अनुभव से लिख रहा हूं । इस लेख को मैंने CBSE, NIOS, CISCE, ICSE और अन्य राज्य के board  को ध्यान में रखते हुए तैयार किया। 


Class 12 Hindi Ncert Solutions Vitan Chapter 4 डायरी के पन्ने


कक्षा | Class12th 
अध्याय का नाम | Chapter Nameडायरी के पन्ने | diary ke panne
लेखक | writerऐन फ्रैंक | Anne frank
अध्याय संख्या | Chapter number04
अध्याय प्रकार | Chapter typeकहानी | Story
किताब | Bookहिंदी कोर | HINDI CORE
पुस्तक का नाम | BOOK Nameहिंदी वितान | Hindi Vitan
बोर्ड | Boardसभी बोर्ड | All India Board
किताब | Book एनसीईआरटी | NCERT
विषय | Subjectहिंदी | HINDI
अध्ययन सामग्री | Study Materialsप्रश्न उत्तर | Question Answer


डायरी के पन्ने पाठ का सारांश | diary ke panne class 12 summary


प्रश्न- ऐन फ्रैंक द्वारा रचित ‘डायरी के पन्ने’ पाठ का सारांश लिखिए। 

उत्तर- डायरी लेखन साहित्य की एक प्रमुख विधा है। यह विधा समाज, साहित्य, जीवन व समकालीन इतिहास पर प्रकाश डालती है।डायरी लेखन में कल्पना कम और यथार्थ अधिक होता है। यह सच्ची घटनाओं पर आधारित होती है। ऐन फ्रैंक की डायरी द्वितीय विश्व युद्ध के इतिहास पर प्रत्यक्ष प्रकाश डालती है। 

द्वितीय विश्व युद्ध के समय हॉलैंड जर्मनी के प्रभाव में था। उस समय जर्मनी व हॉलैंड में रहने वाले यहूदी लोगों पर बहुत अत्याचार ढाए गए थे। उन्हें यंत्रणागृहों में अमानवीय यंत्रणाएँ दी जाती थीं। इस डायरी में हॉलैंड में दो यहूदी परिवारों की आप-बीती है।

उन्होंने दो वर्ष से भी अधिक काल तक गुप्तवास में दिन बिताए। उस गुप्तवास इस पाठ में लिखा गया है। दो यहूदी परिवार गुप्तवास में एक साथ रह रहे थे। वे कुल आठ सदस्य थे। एक था क * अनुभवों को परिवार, जिसमें माता-पिता, तेरह वर्षीय ऐन और उसकी बड़ी वहन मार्गोट थी। 

दूसरा परिवार दान दान का था, जिसमें माता-पिता, सोलह वर्षीय पीटर और मिस्टर डसेल थे। डायरी लेखक तेरह वर्षीय ऐन नामक लड़की है। ये उन दो परिवारों के अज्ञातवास का जीवन्त दस्तावेज है। यह डायरी पत्र के रूप में लिखी गई है। इसमें कई पत्र है। वह इन पत्रों को किट्टी नाम की गुड़िया (खिलीने) को लिखती थी जो कभी उसके अपने जन्मदिन पर उपहार के रूप में मिली थी। वह इस गुड़िया से काफी प्यार करती थी। 

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सम्भवतः वह उसको अपने पूर्व स्थान में छोड़ आई थी। इसलिए वह अपनी आपबीती अपनी गुड़िया किट्टी को लिखती थी। वह बुधवार 8 जुलाई, 1942 के पत्र में किट्टी को लिखती है कि रविवार का दिन था। मो मिस्टर यान दान के घर गई थी। दान दान पापा के बिजनेस पार्टनर हैं। 

तब मार्गोट ने कहा कि पापा को बुलावा आया है। में हैरान थी, चुलाने का मतलब था, यातनागृहों में भेजना। वहाँ की काल कोठरियों का स्मरण करते हुए रूह काँप जाती है। हमने तय किया कि पापा को विल्कुल भी नहीं जाने देंगे। हमें पता था कि नाजी सेना अब हमें नहीं छोड़ेंगी। 

इसलिए हमें कहीं गुप्त `स्थान पर छुप जाना चाहिए। हम कल ही छुपने की जगह जाएँगे। वान दान का परिवार भी हमारे साय जाएगा। उस समय पापा यहूदी अस्पताल में किसी को देखने गए थे। हम सभी चिन्तित । 

वान दान और माँ घर आ गए। तब मालूम हुआ कि बुलाया पापा के लिए नहीं, अपितु माग के लिए था। उस समय सेना को जवान लड़कियों की खास जरूरत पड़ती थी। वे उनका प्रयोग विभिन्न प्रकार से करते थे। मार्गोट तव सोलह साल की है। हमें मालूम नहीं था कि हम छुपने के लिए कहाँ जाएँगे ? यही पता था कि कहीं जाना है। 

इसलिए हमने अपना सामान रखना शुरू कर दिया। हम अज्ञातवास जाने से अत्यन्त भयभीत भी थे। कुछ ईसाई कर्मचारी पापा के साथ काम करते हैं। उनकी हमारे प्रति सहानुभूति थी उनमें से मिएप एक थी। उसके पति जॉन भी पापा के दोस्त थे। 

वे दोनों रात को हमारे घर आए। कुछ सामान उनके बैगों में भरा, जिनको लेकर वे रात को ही चले गए। दूसरे दिन सुबह हम तैयार थे। सुबह मिएप आई। वह मार्गोट को अपने साथ लेकर अज्ञातवास को चली गई। 

सुबह साढ़े सात बजे हम भी घर को वैसा ही छोड़ कर चले गए। लेकिन मुझे पता नहीं था कि हम कहाँ जा रहे हैं। घर में एक जीवित प्राणी विल्ली को छोड़कर आए थे। उसी को गुडबाई करके हम घर से निकले थे।

गुरुवार 9 जुलाई, 1942 के पत्र में ऐन किट्टी को लिखती है-पापा, मम्मी और मैं कन्यों पर बड़े-बड़े चैले लिए तेज बरसात में भींगते हुए जा रहे थे। लोग हमें बड़ी दयनीय निगाहों से देख रहे थे। 

जब हम आगे गली में पहुँचे तब पापा ने हमें अपनी सारी योजना बताई। हमारी छिपने की जगह पापा ने कई दिन पहले से तय कर रखी थी। 

पापा ने घर का बहुत सारा सामान थोड़ा-थोड़ा करके पहले से ही वहाँ रखना शुरू कर दिया था, क्योंकि पापा परिस्थितियों को पहले ही समझ चुके थे।

पापा के ऑफिस के सभी कर्मचारी ईसाई थे। वे हमारे अत्यन्त विश्वासपात्र थे। भवन के सहयोग से यह सब कुछ हो रहा था। उस भवन में कई कमरे तथा गोदाम थे। उस भवन के पिछवाड़े एनेक्सी में हमारा गुप्त आवास था, जिसकी किसी को भनक भी नहीं लग सकती। वहाँ पहुँचने के लिए कई प्रकार की सीढ़ियाँ पार करनी पड़ती हैं। 

कई गोदाम, कई ऑफिस के रूम, तंग गलियारे पार करने पड़ते हैं। उसमें कई कमरे हैं। हमने उनका अलग-अलग प्रयोग किया। वान-दान का परिवार भी हमारे साथ के कमरों में हैं। एक बड़ा कमरा कॉमन रूम भी है, जहाँ हम दोनों परिवार बैठते हैं। रहन-सहन की दृष्टि से यह गुप्तवास अच्छा था ।

शुक्रवार, 10 जुलाई, 1942 के पत्र में ऐन ने अपनी गुड़िया किट्टी को लिखा कि हम सब इस गुप्तवास में पहुँच गए। मार्गोट पहले ही पहुँच चुकी थी। कमरों में सब सामान अस्त-व्यस्त पड़ा हुआ था। सब लोग थककर चूर हो गए थे। माँ और मार्गोट लेट गए तथा मैं और पापा सामान ठीक करने लगे। हम सारा दिन पैकिंग खोल कर उन्हें ठिकाने पर लगाते रहे। 

यहाँ से जिन्दगी का एक नया आयाम शुरू हो गया था। शनिवार, 28 नवम्बर, 1942 के पत्र में ऐन लिखती है कि हम इन दिनों अधिक बिजली वर्च कर रहे थे, जो राशन से अधिक हो गया था। इसीलिए एक पपवाड़े तक बिना बिजली के काटते रहे। 

हमारे साथ एक मिस्टर डसेल हैं, जो अधिकांश बच्चों के साथ बैठना पसन्द करते थे। मैं उन्हें पसन्द नहीं करती। वे बहुत पुराने जमाने की बातें करते हैं। हमें अकल देने के लिए लम्वा अनुशासनप्रद भाषण झाड़ते हैं। वे प्रायः मेरी शिकायत माँ से कर देते थे, फिर माँ भी मुझे अनुशासन का पाठ पढ़ाती। 

जब में रात को बिस्तरे पर होती हूँ तो अपने दिनभर की खामियों के बारे में सोचती हूँ। वे इतनी अधिक होती हैं, जिसका हिसाव लगाना मुश्किल है। मैं सोचती हूँ कि मैं जो कुछ हूँ उससे अलग होना चाहती हूँ। ऐसी कोशिश भी करती हूँ। 

शुक्रवार, 19 मार्च, 1943 के पत्र में ऐन लिखती है कि आज के अखवार में खबर है कि टर्की, जो अभी तक तटस्थ था, अब इंग्लैंड के पक्ष में आ गया है। यह खवर उत्साहवर्धक तो थी, परन्तु एक खबर यह भी थी कि हजार गिल्डर का नोट अब अवैध घोषित कर दिया गया है। यह हम लोगों के लिए बहुत बड़ा झटका था। 

यदि यह नोट लेकर बाजार गए तो यह भी बताना होगा कि यह नोट कहाँ से और कैसे आया ? हमने रेडियो पर हिटलर को घायल सैनिकों से बात करते हुए सुना। सैनिक उनसे बात करते हुए गर्व का अनुभव कर रहे थे। 

शुक्रवार, 23 जनवरी, 1944 के पत्र में ऐन लिखती है कि जब मेरे स्कूल के काम की पात आती है तो में बहुत मेहनत करती हूँ। 

परन्तु आजकल में खाली समय में अपने प्रिय फिल्मी कलाकारों की तस्वीरें अलग करने और देखने में गुजारती हूँ, मेरा यह संग्रह अच्छा-खासा हो गया है। मिस्टर कुगलर मेरे लिए सिनेमा पत्रिका लाते है। 

जिसे में बड़े चाव से पढ़ती हूँ। मुझे फिल्मी नायक-नायिकाओं व कहानियों का अच्छा ज्ञान है। जब में नई केश सज्जा बनाकर बाहर आती हूँ तो सब मुझसे चिढ़ते हैं। इस पर लोग टिप्पणियाँ भी करते हैं, जिससे में फिर अपने पुराने स्टाइल पर आ जाती हूँ। 

बुधवार, 28 जनवरी, 1944 की डायरी में ऐन लिखती है कि हम सभी आपस में बातें करते रहते हैं। हमारे पास कहने-सुनने के लिए बचा ही क्या है ? मम्मी और मिसेज वान दान अपने बचपन की उन बातों को कहती हैं जिन्हें हम हज़ार बार सुन चुके हैं। मिस्टर डसेल के लतीफे तो हर समय उबाऊ होते हैं। 

सभी के लतीफे समय काटने के लिए होते हैं, जो पहले भी कई बार सुने होते हैं। जॉन और मिस्टर क्लीमेन अज्ञातवास में छुपे लोगों के बारे में सुनने को उत्सुक रहते हैं। इन दिनों ऐसे लोगों की जानकारी आम बात है। गिरफ्तार हुए लोगों के प्रति उन लोगों को हमदर्दी है। इन दिनों फ्री नीदरलैंड्स जैसे प्रतिरोधी दल भी हैं, जो भूमिगत लोगों को वित्तीय सहायता पहुँचाते हैं। 

हमलोग भी उन्हीं की मदद से जी रहे हैं। ऐसे लोग अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों की मदद करते हैं। वे लोग जन्मदिन और दूसरे मौकों पर फूल और उपहार लाते हैं। वे हर सम्भव मदद करते हैं। वे लोग हमारे लिए नकली राशन कार्ड बनाकर हमें राशन पहुँचाते हैं। इस सबके साथ उन्हें ये भी ख्याल रखना पड़ता है कि उनके कारनामों की हवा जर्मनों को न लगे।

बुधवार, 29 मार्च, 1944 को ऐन अपनी डायरी में लिखती है कि कैबिनेट मंत्री बोल्के स्टीन ने लंदन से डच प्रसारण में कहा कि युद्ध के बाद इस बारे में लिखे गए डायरियों व पत्रों का संग्रह किया जाएगा। मैं सोचती हूँ कि युद्ध के दस साल बाद जब लोगों को पता चलेगा कि हमलोग कैसे रहते थे, यहूदियों के रूप में अज्ञातवास में हमारी दशा क्या थी, तो वे कितना चकित होंगे ?

अब देखो ना, पिछले रविवार जब 350 ब्रिटिश वायुयानों ने 550 टन गोला-बारूद बरसाया तो हमारे घर ऐसे काँप रहे थे, जैसे हवा में घास की पत्तियाँ। समाज में चोरी-चकारी इस कदर बढ़ गई है कि लोग पाँच मिनट के लिए घर खाली नहीं छोड़ सकते दे। 

इस कारण डच लोगों में अँगूठी पहनने का रिवाज खत्म हो गया है। आठ साल के बच्चे घर की खिड़कियाँ तोड़कर अंदर घुस जाते हैं जो भी हाथ लगा, उठा ले जाते हैं। हालत यह है कि पुरुषों को जर्मनी भेजा जा रहा है। बच्चे बीमार या भूख से बेहाल हैं। सब लोग फटे-पुराने कपड़े व जूते पहनते हैं।

मंगलवार, 11 अप्रैल, 1994 के डायरी लेख में ऐन कहती है कि दो दिन इसी तरह हँसने-खेलने में बीते कल दो बजे तेज गोलाबारी शुरू हो गई। मशीनगनें चल रही थीं। आज रविवार के दिन मेरा अधिकांश समय पीर के साथ बीता। शाम को पीटर ने पिताजी को बताया कि संधमारी बढ़ रही है। 

चारों ओर खतरा है। हम सब डर रहे थे। दान दान ने कहा कि बत्तियाँ बंद कर दो और दबे पाँव ऊपर वाली मंजिल में चले जाओ, पुलिस के आने की आशंका है। भवन में बार-बार से मार घुस रहे थे। पुरुष लोग उनका विरोध कर रहे थे और कई सामान चोरी हो रहे थे।

मंगलवार, 13 जून, 1944 को डायरी में ऐन लिखती हैं कि मेरा जन्मदिन गुजर गया। अब मैं 15 वर्ष की हो गई हूँ। मेरे लिए कई उपहार भी आए, लेकिन सीने में डर व्याप्त था। ब्रिटिश सैनिक लड़ रहे हैं। वे हॉलैंड को जर्मनी के कब्जे से छुड़ाना चाहते हैं। 

यदि ब्रिटेन ऐसा नहीं करता, तो हॉलैंड जर्मनी बन गया होता। मैं पीटर को बहुत चाहती हूँ। वह भी मुझसे बहुत प्यार करता है। में जब उसको एक दिन नहीं देखती हूँ तो मेरी हालत बहुत बुरी हो जाती है। मैंने और पीटर ने अपने महत्त्वपूर्ण दिन एनेक्सी में बिताए। 

में बाहर प्रकृति के बीच जाने के लिए लालयित रहती हूँ। आसमान चाँद बादलों व तारों को देखना मुझे शान्ति प्रदान करता है। एक प्रश्न मुझे अक्सर परेशान करता है। पुरुष सब जगह आ-जा सकते हैं और औरतें कमरे में बँधी रहती है। यह स्त्रियों के प्रति अन्याय है। 

औरतों में सबसे अधिक सहनशक्ति है। इस बात की कोई परवाह नहीं करता है। सैनिकों को सम्मान दिया जाता है लेकिन औरतों को नहीं, बल्कि उनका त्याग सैनिकों से कम नहीं है। लेकिन मेरा विश्वास है कि भविष्य में औरतें ज्यादा सम्मान का हकदार बनेंगी।


डायरी के पन्ने कठिन शब्दों के अर्थ


अलसाई—– आलस्य से प्रभावित। बिजनेस पार्टनर – व्यापारिक साथी। नज़ारे — दृश्य। हर्गिज विल्कुल अज्ञातवास छिपकर रहना। कुलबुलाना ऊहापोह, उथल-पुथल। आतंकित भयभीत। अजीबोगरीब— आश्चर्यजनक अफ़सोस— पछतावा, मलाल, दुख। स्मृतियाँ – यादें । तुलना समानता | 

मायने — महत्त्व, अर्थ सन्नाटा — पोर शांति । अजनबी — अपरिचित । गुज़ारने— व्यतीत करने, बिताने परवाह— चिंता। दिलचस्पी – रुचि । अल्लम- गल्लम उल्टी-सीधी, बिना सोची-समझी। बेचारगी—– लाचारी निगाह — दृष्टि। वाहन सवारी उपलब्ध- देना, प्राप्त करना । दास्तान–विवरण | दौरान मध्य रौशनी – प्रकाश। गलियारा – संकरा रास्ता । 

दमघोंटू—साँस लेने की परेशानी। पैसेज — गलियारा । ज़रिये द्वारा, माध्यम आसानी— सरलता। उत्तम दरजा- बहुत बढ़िया सपाट — साधारण, सामान्य बेडरूम – सोने का कमरा। स्टडीरूम पढ़ने का कमरा। गुसलखाना स्नानघर । हैरान आश्चर्यचकित। गरीबखाना-आवासीय भवन। बखान- वर्णन। राह देखना- प्रतीक्षा करना। अटा पड़ा— भरा हुआ । 

तरतीब ढंग से, क्रम से, व्यवस्थित रूप से। जरूरत- आवश्यकता। तुरंत अतिशीघ्र हिम्मत—साहस पस्त-निढाल 1 थकी हुई। ढह गए— लेट गए। परवाह-चिंता। फुर्सत—समय का अभाव। नतीजा — परिणाम। किफायत—कम खर्च। पखवाड़े-पंद्रह दिन का समय अरसा समय गुज़ारना- व्यतीत करना। डिना रात का भोजन। दरअसल वास्तव में शेअर करना सहभागिता । 

खरदिमाग ऊंटपॉंग बोलनेवाला । तुनकमिजाज – शीघ्र क्रोषित होनेवाला। वाकई सचमुच मीन-मेख निकालना कमी खोजना। दुत्कारा—फटकारा। फटकारना —— धमकाना आसान सरल। खामी कमी अजीब आश्चर्य । खयाल- विचार तटस्थता निष्पक्षता । अफवाह झूठी बात । भूमिगत — छिपकर रहना। 

सुबूत — प्रमाण। अदा करना – चुकाना । हफ्ता सप्ताह । अनुमानित- लगभग । अदायगी देना। निपटा दिया- समाप्त किया। फिलहाल इस समय, अब तो। गर्दन पानी के ऊपर खैरियत । कायदे-नियम । करुणाजनक दया उत्पन्न करनेवाला। सिलसिला- क्रम । वंश वृक्ष-परिवार की वंशावली खासी – अधिक महत्त्वपूर्ण। रुचि लगाव, अनुरक्ति ।

अतीत — बीता हुआ समय रोचक —— अच्छी। मेहरबान – दयालु हैरान – आश्चर्य चकित। फटे- तेजी से, बिना झिझक फिकरा कसना – ताना मारना असहमति सहमत न देना। टोक देना बीच में हस्तक्षेप करना। फल-अमुक कान पकना सुनने की इच्छा न होना। लपकना— तेजी से चलना जुगाली-वार-यार चवाना नीरस रूखी, शुष्क, रसविहीन । 

हालत-दशा कल्पना करना—अनुमान लगाना। रोज़ रोज़-प्रतिदिन लतीफे चुटकले । पंच लाइन उत्कर्ष, निष्कर्ष। हिमाकत अशिष्टता। दिवाला पिटना-समाप्त होना। इच्छुक उत्सुक तकलीफ कष्ट, बीमारी हमदर्दी– सहानुभूति प्रतिरोधी दल — मुकाबला करने वाला समूह। वित्तीय-आर्थिक रोजाना—प्रतिदिन मुश्किल – कठिनाई। खुशदिल – प्रसन्न चित्त । 

कोशिश – प्रयास। उपहार भेंट। आग्रह निवेदन, अनुरोध। दिलचस्प —सुरुचिपूर्ण युद्ध- लड़ाई। मोची – जूते की मरम्मत करनेवाला। गलत अनुचित आमंत्रण— न्यौता, निमंत्रण। अटारी-भवन की ऊपरी मंजिल का कमरा। दिव्य अलौकिक सट कर बैठना पास-पास चिपकते हुए बैठना। 

खफा — क्रुद्ध, नाराज़ नीयत — इच्छा घुसेड़ना — रखना, अंदर डालना। प्रहसन—हास्य नाटिका। दाल में कुछ काला— कुछ रहस्यमय बात सेंधमारी— चोरी, कमल करके चोरी करना। आशंका-भय, डर। फटाफट तुरंत, शीघ्र ही ताला जड़ना – ताला लगा देना। बिठाई-पृष्टता। हैरान आश्चर्यचकित। थरथराना काँपना। खूबसूरत—सुंदर । 

उपहार- भेंट जुटा नहीं पाना-व्यवस्था न कर पाना। जन्मजात पैदायशी हकदार – उचित अधिकारी। ब्रिटिश ब्रिटेन की सरकार हिकारत—घृणा खामियाँ कमियाँ वाहियात – वकवास । जड़बुद्धि मूर्ख प्रताड़ित करना कष्ट देना। सांत्वना संतोष उबारना – उद्धार करना, छुटकारा दिलाना। 

बावजूद बाद भी, उपरांत। यकीन विश्वास। बेहद अत्यधिक आत्मीय- अपनापन, अपनत्व। मुहिम— अभियान। इल्ज़ाम आरोप। सलीका कुशलता, तमीज़ घुना चुप रहनेवाला। मुश्किल— कठिनाई उत्कट चाह— तीव्र अभिलाषा अरसा—समय। वक्त- समय । लुकाछिपी दिखाई देना- छिप जाना। नज़ारे — दृश्य। मंत्रमुग्य- वशीभूत। 

साक्षात्कार- इंटरव्यू, भेंट। सराबोर दुबाना, पूर्ण करना। विनम्रता— शालीनता उपहार भेंट। निहार- देखना । सानी- मुकाबला। परेशान—तंग। विराट—विशाल । सक्षम सामर्थ्यवान। प्रथा- परंपरा । वाहियात मूर्खतापूर्ण अलंकृत — सुशोभित। डींग हाँकना-झूटी प्रशंसा करना। कबई- तनिक। मतलब प्रयोजन। जनना पैदा करना। भर्त्सना निंदा, फटकार योगदान देन । मान्यता- विश्वास। बखान वर्णन।


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 प्रश्न 1. “यह साठ लाख लोगों की तरफ से बोलनेवाली एक आवाज है। एक ऐसी आवाज, जो किसी सन्त या कवि की नहीं बल्कि एक साधारण लड़की की है।” इल्या इहरनदुर्ग की इस टिप्पणी के संदर्भ में ऐन फ्रैंक की डायरी के पठित अंशों पर विचार करें। 

उत्तर-साठ लाख लोगों की आवाज — जर्मनी व उसके प्रभावक्षेत्र में साठ लाख यहूदियों पर ढाए गए जुल्मों का दस्तावेज है। एक लड़की की लिखी हुयी डायरी के पन्ने, जो सभी यातनाग्रस्त लोगों की करुण पुकार है। 

ऐन फ्रैंक की डायरी – तेरह वर्षीय लड़की ऐन का परिवार नाजियों से अपनी जान बचाने के लिए किसी गुप्त स्थान पर छुपा हुआ था। उनके वे दिन आतंक के साए में रहते हैं। इसी का सजीव वर्णन ऐन फ्रँक ने अपनी डायरी में किया है। वास्तव में यह अपनी जान बचाने के लिए जगह-जगह छुपे लोगों की आवाज है। 

प्रश्न 2. “काश कोई तो हो, जो मेरी भावनाओं को गंभीरता से समझ पाता । अफसोस, ऐसा व्यक्ति मुझे अब तक नहीं मिला।” क्या आपको लगता है कि ऐन के इस कथन में उसके डायरी लेखन का कारण छिपा है ? ऐन फ्रैंक का स्वभाव—ऐन फ्रैंक तक तरह वर्षीय लड़की है। लोग उसको घमंडी, 

उत्तर– अक्खड दिमाग व तुनक मिजाज समझते हैं। इस कारण वह अक्सर अपने से बड़ों की डाँट भी खाती है। वे लोग उसको हमेशा समझाते रहते हैं। जिसे वह उपदेश मानती है। वास्तव में वह एक स्वाभिमानी लड़की है, जिसे लोग गलत समझते हैं। इसलिए वह अफसोस जाहिर करती है कि काश कोई ऐसा व्यक्ति होता जो मेरे स्वभाव की वास्तविकता को समझता । 

डायरी लिखने का कारण ऐन के आसपास के लोग उसकी बात गंभीरता से नहीं सुनते थे। इसलिए उसने अपने हृदय के उद्गारों को डायरी में लिखना शुरू कर दिया। वह इसके `साथ-साथ सम-सामयिक घटनाओं को भी लिख देती थी। उसकी यह डायरी आज तक ऐतिहासिक दस्तावेज है।

प्रश्न 3. ‘प्रकृति प्रदत्त प्रजनन शक्ति के उपयोग का अधिकार बच्चे पैदा करें या न करें अथवा कितने बच्चे पैदा करें—इसकी स्वतंत्रता स्त्री से छीन कर हमारी विश्व व्यवस्था ने न सिर्फ स्त्री को व्यक्तित्व विकास के अनेक अवसरों से वंचित किया है बल्कि जनाधिक्य की समस्या भी पैदा की है।’ ऐन की डायरी के 13 जून, 1944 के अंश में. व्यक्त विचारों के संदर्भ में इस कथन का औचित्य ढूंढे। 

उत्तर—समाज में स्त्री की स्थिति ऐन फेंक के अनुसार पुरुष प्रधान समाज में पुरुष कमाकर लाता है, बच्चे पालता पोसता है और जो मन आए करता रहता है। पुरुष वर्ग को पूरा सम्मान मिलता है, लेकिन महिलाओं को उनके हिस्से का सम्मान भी नहीं मिल पाता। बच्चे को जन्म देते समय औरत को जो कष्ट सहना पड़ता है, मर्द उसकी कल्पना भी नहीं कर सकता है। 

लेकिन जब उसका शरीर अपना आकर्षण खो देता है, तब उसको एक तरफ धकेल देते हैं। इस प्रकार के कटु व्यवहार से स्त्री को व्यक्तित्व विकास के अनेक अवसरों से वंचित होना पड़ता है। जबकि वह जितना संघर्ष करती है, उतना बड़ी-बड़ी डींग हाँकने वाले ये सिपाही भी नहीं करते। 

जनाधिक्य की समस्या —स्त्री से उसकी स्वतंत्रता छीनने से जनाधिक्य की समस्या पैदा हो गई है। आज स्त्री को बच्चे पैदा करने की मशीन समझा जाता है, जिससे यह समस्या और बढ़ रही है।

प्रश्न 4. “ऐन की डायरी अगर एक ऐतिहासिक दौर का जीवंत दस्तावेज है, तो साथ ही उसके निजी सुख-दुख और भावनात्मक उथल-पुथल का भी इन पृष्ठों में दोनों का फर्क मिट गया है।” इस कथन पर विचार करते हुए अपनी सहमति या असहमति तर्कपूर्वक व्यक्त करें।

उत्तर-ऐतिहासिक दौर का दास्तावेज ऐन बैंक ने ऐतिहासिक घटनाओं पर नहीं, अपितु आप-बीती घटनाओं पर प्रकाश डाला है। उस समय जर्मनी व उसके समर्थक देशों में यहूदियों पर जो अत्याचार हुए, उनको जानने के लिए आज का मानव उत्सुक रहता है। 

ऐन फ्रैंक ने भूमिगत यहूदी परिवारों का जो सजीव वर्णन किया है, वह आज एक ऐतिहासिक दस्तावेज है।

निजी भावनात्मक उथल-पुथल – वास्तव में ऐन फ्रैंक ने अपनी डायरी में अपने सुख-दुख द भावनात्मक उथल-पुथल का ही उल्लेख किया है, उसने कोई इतिहास नहीं लिखा है। 

लेकिन उसका यह उद्गार निजी न रहकर सम्पूर्ण यहूदी समाज के तत्कालीन सुख-दुख पर प्रकाश डालता है, जो आज के लिए इतिहास बन गया है।

प्रश्न 5. ऐन ने अपनी डायरी ‘किट्टी’ (एक निर्जीव गुड़िया) को सम्बोधित चिट्ठी की शक्ल में लिखने की जरूरत क्यों महसूस की होगी ? 

उत्तर-ऐन फ्रैंक की डायरी का सम्बोधन ऐन फ्रैंक ने अपनी डायरी ‘किट्टी’ नामक गुड़िया को सम्बोधित करते हुए लिखी है। यह पत्र विधि डायरी लिखने की शैली में है। किट्टी को पात्र बनाने का कारण-ऐन फ्रैंक एक स्वाभिमानी लड़की थी। 

लेकिन अन्य लोग उसे घमंडी समझते थे। सभी उसे बात-बात पर डाँटते रहते थे। वह अपने दिल की यात किसी से नहीं कह पाती थी। इसलिए उसने अपनी डायरी किट्टी (एक निर्जीव गुड़िया) को सम्बोधित चिट्ठी की शक्ल में लिखी, जिसमें उसने अपने सुख-दुख को ही नहीं समसामयिक घटनाओं व गतिविधियों को भी अभिव्यक्त किया है।


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प्रश्न 1. मिस्टर डसेल के बारे में ऐन के विचारों का वर्णन कीजिए। 

उत्तर—ऐन मिस्टर डसेल के विषय में लिखती हैं—मिस्टर डसेल जिनके बारे में कहा गया था कि उनकी बच्चों के साथ बहुत पटती है और वे उन्हें खूब प्यार करते हैं, दरअसल बाबा आदम के ज़माने के अनुशासन मास्टर हैं और लंबे-लंबे भाषण देने लगते हैं जिन्हें सुनकर ही नींद आने लगे। मिस्टर डसेल अच्छे-खासे चुगलखोर हैं। 

वे जाकर इन सारी बातों की रिपोर्ट मम्मी को दे आते हैं। अगर मिस्टर डसेल ने मुझे कोई उपदेश पिलाया होता है तो उसे दोबारा से मुझे मम्मी से सुनना पड़ता है। ऐन की शिकायत है कि डसेल भूमिगत आवास के कायदे-कानून नहीं। मानते। जब घर के कायदे-कानून मानने की बात आती है तो मिस्टर डसेल भयंकर रूप से आलस दिखाते हैं। 

न केवल वे चार्लोट से पत्राचार कर रहे हैं, और भी कई दूसरे लोगों के साथ भी चिट्ठी-पत्री बनाए हुए हैं। मार्गोट, जो कि उनकी डच अध्यापिका हैं, उनके ये पत्र ठीक करती हैं। पापा ने उन्हें मना किया है कि वे ये सब कारोबार बंद करें और मार्गोट ने उनके पत्र ठीक करने बंद कर दिए हैं। लेकिन मुझे लगता है, वे फिर से अपनी चिट्ठी-पत्री शुरू कर देंगे। ऐन मिस्टर डसेल को जड़बुद्धि व मूर्खाधिराज तक कहती है।

प्रश्न 2. एक साथ बैठकर ये आठ लोग क्या बात करते हैं ? 

उत्तर- प्रतिदिन की बातचीत के विषय में ऐन लिखती हैं—अगर खाने के वक्त बातचीत: राजनीति या अच्छे खाने के बारे में नहीं हो रही होती तो मम्मी या मिसेज वान दान अपने बचपन की उन कहानियों को लेकर बैठ जाती हैं जो हम हजार बार सुन चुके हैं। 

या फिर इसेल शुरू हो जाते हैं खूबसूरत रेस के घोड़े, उनकी चालॉट का महँगा चॉर्डरोब, लीक करती नावें, चार वरस की उम्र में तैर सकने वाले बच्चे, दर्द करती माँसपेशियाँ और डरे हुए मरीज ये सब किस्से। इन सारी बातों का निचोड़ ये है जब भी हम आठों में से कोई भी अपनी मुँह खोलता है, बाकी सातों उसके लिए कहानी पूरा कर सकते हैं। 

प्रश्न 3. युद्ध काल में सेंधमारों के दुस्साहस के बारे में ऐन क्या लिखती है?

उत्तर- सेंधमारों के कारण जन-जीवन कितना कष्टमय हो गया है, उसके विषय में ऐन लिखती है-डॉक्टर अपने मरीजों को नही देख पाते, क्योंकि उन्होंने पीठ मोड़ी नहीं कि उनकी कारें और मोटर साइकिलें चुरा ली जाती हैं, चोरी-चकारी इतनी बढ़ गई है कि डच लोगों में अंगूठी पहनने का रिवाज तक नहीं रह गया है। 

छोटे-छोटे बच्चे टाठ-आठ, दस-दस बरस के होंगे लेकिन लोगों के घरों की खिड़कियाँ तोड़ कर घुस जाते हैं और जो भी हाथ लगा, उठा ले जाते हैं। लोग पाँच मिनट के लिए भी अपना घर छोड़ने की हिम्मत नहीं कर सकते हैं, क्योंकि लौटने पर उन्हें घर में झाडू फिरी मिलेगी। चोरी गए टाइपराइटरों, ईरानी कालीनों, बिजली से चलने वाली घड़ियों, कपड़ों आदि को लौटाने के लिए अखबारों में इनाम के विज्ञापन आए दिन पढ़ने को मिलते हैं। 

गली-गली नुक्कड़ों पर लगी बिजली से चलने वाली पड़ियाँ लोग उतार ले गए और सार्वजनिक टेलीफोनों का पुर्जा पुर्जा गायब हो चुका है। चमारों में इतना दुस्साहस है कि मालिक के जागने पर भाग जाते हैं किंतु तनिक हटते की पुनः आ जाते हैं। 

गोदामों में सेंधमारी करते पुलिस के आने की आवाज के कारण भाग गए किंतु फाटक अभी लगाया ही था कि पुनः वापस आ गए। दरवाजे पर कुल्हाड़ी के प्रहार के बाद ही वे भागे।

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प्रश्न 4. ऐन को जन्मदिन पर किस-किस ने क्या-क्या उपहार दिए? 

उत्तर- ऐन के पन्द्रह वर्ष पूर्ण होने पर सोलहवाँ जन्मदिन मनाया गया जिसमें उसे ढेर सारे उपहार मिले थे। वह लिखती हैं- 220 मेरा एक और जन्मदिन गुजर गया है। इस हिसाब से में पंद्रह यरस की हो गई हूँ। मुझे

काफी सारे उपहार मिले है–स्प्रिंगर की पाँच खंडों वाली कलात्मक इतिहास पुस्तक, चड्डियों का एक सेट, दो बेल्टे, एक रूमाल, दही के दो कटोरे, जैम की शीशी, शहद वाले दो छोटे बिस्किट, मम्मी-पापा की तरफ से वनस्पति विज्ञान की एक किताब, मागट की तरफ से 

सोने का एक ब्रेसलेट वान दान परिवार की तरफ से स्टिकर एलबम, डसेल की तरफ से बायोमाल्ट और मीठे मटर, मिएप की तरफ से मिठाई, बेप की तरफ से मिठाई और लिखने के लिए कॉपिया और सबसे बड़ी बात मिस्टर कुगलर की तरफ से मारिया तेरेसा नाम की किताव तथा क्रीम से भरे चीज के तीन स्लाइस। 

पीटर ने पीओनी फूलों का खूबसूरत गुलदस्ता दिया। बेचारे को ये उपहार जुटाने में ही अच्छी खासी मेहनत करनी पड़ी। लेकिन यह कुछ और जुटा ही नहीं पाया। 

प्रश्न 5. अपने ऊपर मिसेज वान दान द्वारा लगाए आरोपों के विषय में ऐन मिसेज वान दान का क्या मूल्यांकन करती है ? 

उत्तर- मुझ पर हमेशा आरोपों की बौछार करते रहने वाले दो लोग हैं मिसेज वान दान और डसेल, उनके बारे में सबको पता है कि कितने जड़बुद्धि हैं। मूरख जिसके आगे कोई विशेषण लगाने की जरूरत नहीं। 

मूरख लोग आमतौर पर इस बात को सहन नहीं कर पाते कि कोई उनसे बेहतर काम कर दिखाए और उसका सबसे बढ़िया उदाहरण ये दो जड़मति, मिसेज वान दान और मूर्खपराज डसेल हैं। 

मिसेज बन दान मुझे इसलिए मूर्ख समझती है क्योंकि मैं उनके जितनी यीमारियों की शिकार नहीं हूँ। वे मुझे अक्खड़ समझती हैं क्योंकि वे मुझसे भी ज्यादा अक्खड़ हैं। 

वे समझती हैं कि मेरी पोशाकें छोटी पड़ गयी हैं, क्योंकि उनकी पोशाकें और भी ज्यादा छोटी पड़ गई हैं और वे समझती हैं कि मैं अपने आपको कुछ ज्यादा ही तीसमार खाँ समझती हूँ क्योंकि वे उन विषयों पर मुझसे भी दो गुना ज्यादा बोलती हैं जिनके बारे में ये खाक भी नहीं जानतीं। 

प्रश्न 6. अपने मददगारों के बारे में ऐन क्या कहती हैं ?

उत्तर- अपने मददगारों के विषय में लिखते समय ऐन कहती है कि ये लोग जान जोखिम में डालकर दूसरों के लिए काम करते हैं। ऐन को आशा है कि हमारे मददगार हमें सुरक्षित किनारे तक ले आएंगे। 

मददगारों के विषय में ऐन लिखती है— “उन्होंने कभी नहीं कहा कि हम उनके लिए मुसीबत हैं। वे रोजाना ऊपर आते हैं, पुरुषों से कारोबार और राजनीति की बात करते हैं, महिलाओं से खाने और युद्ध के समय की मुश्किलों की बात करते हैं, बच्चों से किताबों और अंधकारों की बात करते हैं। 

ये हमेशा खुशदित दिखने की कोशिश करते हैं, जन्मदिनों और दूसरे मौकों पर फूल और उपहार लाते हैं। हमेशा हरसंभव मदद करते हैं। हमें ये बात कभी भी नहीं भूलनी चाहिए। ऐसे में जब दूसरे लोग जर्मनों के खिलाफ युद्ध में बहादुरी दिखा रहे हैं, हमारे मददगार रोजाना अपनी बेहतरीन भावनाओं और प्यार से हमारा दिल जीत रहे हैं।” 

प्रश्न 7. ऐन फ्रैंक की डायरी के आधार पर द्वितीय विश्व युद्ध के अवसर की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए एक निबन्ध लिखिए।

उत्तर-यहूदियों पर अत्याचार-द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जर्मनी व उसके समर्थक देशों में यहूदियों पर जाति के आधार पर अत्याचार किए जाते थे। उन्हें यंत्रणा गृहों में पशुओं की तरह रखा जाता था।

अावास की परिस्थितियाँ ऐन फ्रैंक यहूदी परिवार को लड़की थी। जब उन्हें भी तरकारी बुलौवा आया तो वे रातों-रात अज्ञातवास में चले गए अज्ञातवास में जिन परिस्थितियों को उन्होंने भोगा, वह सभी भूमिगत यहूदियों को भोगनी पड़ी थे। इसका वणन ऐन फ्रैंक ने अपनी डायरी में किया, जो आज एक ऐतिहासिक दस्तावेज है।

वहूदियों की करुण गाथा—ऐन लिखती है कि जिस प्रकार अस्पताल के मरीज और जेलों के बन्दी बाहर प्रकृति के साक्षात्कार में आने के लिए आतुर रहते हैं, उसी प्रकार हम भी बाहर. प्रकृति की गोद में आने के लिए छटपटा रहे थे।

प्रश्न 8. ऐन फ्रैंक ने अपनी डायरी में कौन-सी ऐसी घटनाओं का उल्लेख किया जो प्रत्यक्ष इतिहास पर प्रभाव डालती हैं ?

उत्तर—टर्की के बारे में उल्लेख ऐन अपनी डायरी में लिखती है कि 19 मार्च, 1943 को हमने रेडियो पर एक केन्द्रीय मंत्री का वक्तव्य सुना कि टर्की अब तटस्थता छोड़ देगा। हमने डैम चौक पर एक अखबार बेचने वाले को यह चिल्लाते हुए सेना कि “टर्की इंग्लैंड के पक्ष में।” उसके हाथ में अखबार झपटे जा रहे थे। लेकिन बाद में वह अफवाह साबित हुई।

हिटलर से सैनिकों की भेंट—ऐन ने लिखा है कि हमने रेडियो पर सुना, जनाव हिटलर घायल सैनिकों से बातचीत कर रहे थे। सैनिक उन्हें अपने घावों को दिखाते हुए गर्व का अनुभव कर रहे थे। वे हिटलर से हाथ मिलाने के लिए आंतुर हो रहे थे।

ब्रिटिश वायुयानों की बमबारी—ऐन फ्रैंक लिखती है कि पिछली रविवार को 350 ब्रिटिश वायुयानों ने इज्मुईडेन पर 550 टन गोला बारूद गिराया तब हमारे घर ऐसे काँप रहे थे, जैसे हवा में घास की पत्तियाँ डोल रही हो ।


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प्रश्न 1. ऐन फ्रैंक किस दशा की घटनाओं का वर्णन कर रही है ? 

उत्तर—ऐन फ्रैंक हॉलैंड की युद्ध कालीन घटनाओं का वर्णन कर रही है।

प्रश्न 2. यहूदियों पर अत्याचार किसने किए थे ? 

उत्तर—यहूदियों पर जर्मनों ने अत्याचार किए थे।

प्रश्न 3. ऐन की डायरी किस काल की घटनाओं का वर्णन है ? 

उत्तर- ऐन की डायरी में 2 जून, 1942 से लेकर पहली अगस्त 1944 तक की घटनाओं का वर्णन है।

प्रश्न 4. ऐन की मृत्यु कब हुई ?

उत्तर- ऐन की मृत्यु सन् 1945 में हुई। 

प्रश्न 5. ऐन की डायरी किसने कब प्रकाशित कराई ?

उत्तर—ऐन के पिता ओटो फ्रैंक ने सन् 1947 में ऐन की डायरी को प्रकाशित कराय । 

प्रश्न 6. किट्टी कौन थी ?

उत्तर-किट्टी ऐन को जन्मदिन पर उपहार में मिली गुड़िया का नाम है।

प्रश्न 7. फ्रैंक परिवार क्यों डर रहा था ? और उसके बाद उन्होंने किया किया ? 

उत्तर—फ्रैंक परिवार का भय द्वितीय विश्व युद्ध में जर्मनी और उसके समर्थक देशों में यहूदियों के ऊपर बहुत अमानवीय अत्याचार हुए। वहाँ मंत्रणा गृहों में यहूदियों को यातनाएँ दी जा रही थीं। फ्रैंक एक यहूदी परिवार था और उन्हें भी बुलावा आ गया था, इसलिए वह काफी भयभीत था।

गुप्तवास में पलायन — फ्रैंक परिवार के साथ एक और यहूदी दान दान परिवार भी था। जब उन्हें सरकारी बुलावे की भनक पड़ी, तो वे कुछ विश्वासपात्र ईसाई कर्मचारियों की सहायता से रातों-रात एक गुप्त स्थान पर चले गए।

प्रश्न 8. फ्रैंक परिवार का गुप्तवास कहाँ था और उसकी स्थिति कैसी थी ? 

उत्तर—गुप्तवास — उनके छिपने की जगह ऐन के पापा के ऑफिस की इमारत में ही थी, जिसे समझ पाना बाहर वालों के लिए मुश्किल था ।

आवास की स्थिति — उस भवन के तल घर में गोदाम व बड़े-बड़े भंडार घर थे। उस भवन की एनेक्सी में दोनों परिवारों को रहने का प्रबन्ध था उस एनेक्सी में कई कमरे थे। वहाँ पर कई सीढ़ियों व गलियारों को पार करके जाना पड़ता था।

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प्रश्न 9. मिएप से ऐन के पापा की दोस्ती का क्या कारण था ? 

उत्तर—मिएप सन् 1933 से ऐन के पापा की कंपनी में काम करती थी, इसलिए वह ऐन के पापा के करीबी दोस्तों में थीं।

प्रश्न 10. मूर्जे किसका नाम था ?

उत्तर-मूर्जे ऐन की दिल्ली का नाम था। 

प्रश्न 11. टर्की के विषय में अखबार में क्या खबर थी ?

उत्तर—टर्की के बारे में अखबार में खबर थी कि वह तटस्थता छोड़कर इंग्लैंड के पक्ष में आ गया है।

प्रश्न 12. डच मुद्रा का क्या नाम था ?

उत्तर- डच मुद्रा का नाम गिल्डर था।

प्रश्न 13. आपकी पाठ्य-पुस्तक में संकलित डायरी के अंतिम पृष्ठ 13 जून 1944 के लिखते समय ऐन की क्या आयु थी ?

उत्तर— मंगलवार 13 जून, 1944 को ऐन लिखती है कि मैं पंद्रह बरस की हो गयी हूँ। 

प्रश्न 14. फ्रैंक-परिवार की किन लोगों ने सहायता की थी ?

उत्तर- फेंक साहब के ऑफिस में काम करनेवाले ईसाई कर्मचारियों ने फेंक-परिवार की भरपूर मदद की थी।

प्रश्न 15. अवैध मुद्रा किसे घोषित किया गया था ?

उत्तर— हजार गिल्डर के नोट अवैध मुद्रा घोषित की गई थी।

प्रश्न 16. पीटर व ऐन की निकटता कैसे आई ? 

उत्तर—पीटर व ऐन के परिवार एक साथ ही भूमिगत अवस्था में रह गये थे। दोनों लगभग समवयस्क भी थे। निकटता का यही कारण था।


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प्रश्न 1. यहूदियों पर अत्याचार क्यों हुए ?

उत्तर—हिटलर यह समझता था कि ईसाइयों की दुर्दशा का कारण ये यहूदी हैं।

प्रश्न 2. गैस चैम्बर से क्या आशय है ?

उत्तर-हिटलर ने यहूदियों की हत्या के लिए ऐसे भवन बना रखे थे जिनमें यहूदियों को धँसाकर मृत्यु कारक गैस छोड़ दी जाती थी।

प्रश्न 3. फायरिंग स्क्वायड क्या थे ?

उत्तर—यहूदियों को गोली से गारने वाले सैनिकों का समूह फायरिंग स्क्वायड कहलाता था।

प्रश्न 4. इस समय में यहूदियों का कौन-सा देश है ? 

उत्तर—इस समय इजरायल यहूदियों का राष्ट्र है।

प्रश्न 5. ‘तटस्थता’ से क्या आशय है ?

उत्तर— द्वितीय विश्वयुद्ध में जर्मनी, इटली व जापान एक पक्ष था। ब्रिटेन के नेतृत्व में कुछ देश मित्र राष्ट्र कहलाते थे जो देश किसी भी पक्ष में नहीं थे, उनको तटस्य राष्ट्र कहा जाता था। 

प्रश्न 6. युद्ध पीड़ित देशों की स्थिति कैसी थी ?

उत्तर—युद्ध पीड़ित देशों की स्थिति अत्यंत खराब थी। चोरी-डकैती बहुत बढ़ गयी थी। परिणामस्वरूप जन साधारण को अपनी चीजों की सुरक्षा करना अत्यंत कठिन हो गया था।


लेखक के द्वारा


नमस्कार Students, मैंने इस पोस्ट को (class 12 hindi ncert solutions) CBSE, NIOS,  CISCE, ICSE और अन्य राज्य के board के मुताबिक इस पोस्ट को तैयार किया है, तथा भविष्य में जो भी लेटेस्ट अपडेट आएंगी उसके अनुसार यह पोस्ट अपडेट भी होता रहेगा । इसलिए मुझे यह आशा है कि यह पोस्ट आपके लिए काफी जानकारी पूर्ण होगा और आपके परी


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