Class 12 Hindi Previous Year Question Paper With Solution (Hindi Core)

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आज हम Class 12 Hindi Previous Year Question Paper With Solution (Hindi Core) को कवर करने जा रहे हैं। ये कक्षा 12 वीं के छात्रों के लिए आगामी परीक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न हैं।


Class 12 Hindi Previous Year Question Paper With Solution


Class12th 
Book NCERT
SubjectEnglish core
Medium English
Study MaterialsImportant questions answers
Download PDFImportant Questions for Class 12 English Core

समूह अ | खंडक’ (अप्पथित बोध) | समय: 1 घंटा 30 मिनट।


Class 12 Hindi Previous Year Question Paper With Solution (Hindi Core)

निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न संख्या 01 से 04 के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए-

कलम आज उनकी जय बोल पीकर जिनकी लाल सिखाएँ

उगल रही लू लपट दिशाएँ

जिनके सिंहनाद से सहमी धरती रही अभी तक डोल।

कलम आज उनकी जय बोल

अंपा चकाचौंध का मारा क्या जाने इतिहास विचारा

साखी है उसकी महिमा के सूर्य, चंद्र, भूगोल, खगोल कलम आज उनकी जय बोल।

1. कवि किसकी जय बोलने की बात कर रहा है ?

(1) स्वयं की

(2) स्वाधीनता के शहीदों की

(3) सूर्य चंद्र की

(4) इतिहास की

उत्तर. (2)

2. अंधा चकाचौंध का मारा किसे कहा गया है ?

(1) इतिहास

(2) भूगोल

(3) खगोल

(4) कलम 

Ans. (1)

3. सूरज और चाँद को कवि ने किस रूप में प्रस्तुत किया है ?

(1) ऊर्जापिण्ड

(2) शीतलता स्रोत

(3) अटल सत्य

(4) साक्षी

उत्तर. (4)

4.’चन्द्रमा’ का पर्यायवाची है

(1) निशा

(2) रजनी

(3) राकेश

(4) निशि 

Ans. (3)

निम्नलिखित विकल्प का चयन कीजिए: गद्यांश को ध्यानपूर्वक प्रश्न संख्या 5 से 8 के लिए सही

आज हम असमंजस में पड़े हैं और यह निश्चय नहीं कर पाए हैं कि हम किस ओर चलेंगे और हमारा ध्येय क्या है ? स्वभावतः ऐसी अवस्था में हमारे पेर लड़खड़ाते हैं। हमारे विचार में भारत के लिए और सारे संसार के लिए सुख और शांति का एक ही रास्ता है और वह है-अहिंसा और आत्मवाद का अपनी दुर्बलता के कारण हम उसे ग्रहण न कर सके, पर उसके सिद्धांतों को तो हमें

स्वीकार कर ही लेना चाहिए और उसके प्रवर्तन का इंतजार करना चाहिए। यदि हम सिद्धांत ही न मानेंगे तो उसके प्रवर्तन की आशा कैसे की जा सकती है।

जहाँ तक मैंने महात्मा गाँधी के सिद्धांत को समझा है, वह इसी आत्मवाद और अहिंसा के, जिसे वे सत्य भी कहा करते थे, मानने वाले और प्रवर्तक थे। उसे नमस्ते

कुछ लोग आज गाँधीवाद का नाम भी दे रहे हैं।

5. असमंजस में पड़कर हम क्या तय नहीं कर पा रहे हैं ?

(1)अपना लक्ष्य

(2) अपना सुख

(3) अपनी दुर्बलता

((4) अपना सिद्धांत

उत्तर. (1)

6. विश्व में सुख-शांति और समृद्धि के लिए क्या आवश्यक है ?

(1) मन से अहिंसा का पालन 

(2) वचन से अहिंसा का पालन

(3) कर्म से अहिंसा का पालन 

(4) इनमें से सभी

उत्तर. (4)

7. गाँधीवाद से मेल न खाने वाला सिद्धांत कौन-सा है ?

(1) भौतिकवाद 

(2) अहिंसावाद 

(3) आत्मवाद 

(4) सत्यवादिता 

उत्तर. (1)

8. ‘दुर्बलता’ शब्द में उपसर्ग और प्रत्यय हैं

(I) उपसर्ग आ 

(2) उपसर्ग – दुरा, प्रत्यय ता – दुः, प्रत्यय

(3) उपसर्ग – ता 

(4) उपसर्ग – दुरप्रत्यय दुर, प्रत्यय लता 

Ans. (3)


समूह-बी खण्ड- ‘ख’ (अभिव्यक्ति और माध्यम)


9. जनसंचार के आधुनिक माध्यमों में सबसे पुराना माध्यम कौन-सा है ? 

(1) समाचार-पत्र 

(2) रेडियो 

(3) टेलीविजन 

(4) इंटरनेट 

Ans. (1)

10. भारत में पहला छापाखाना कहाँ खुला था ?

(1) बम्बई

(2) कलकत्ता

(3) मद्रास 

(4) गोदा 

Ans. (4)

11. जनसंचार माध्यमों के अन्तर्गत रेडियो कौन-सा माध्यम है ?

(1) श्रव्य

(2) दृश्य

(3) श्रव्य-दृश्य

(4) पठनीय 

Ans. (1)

12. आलेख-लेखन की भाषा कैसी होनी चाहिए ?

(1) सरल

(2) सुगम 

(3) प्रभावी 

(4) इनमें से सभी 

Ans. (4)

13. भारत में पत्रकारिता की शुरुआत कब हुई ?

(1) 1853 ई.

(2)1780

(3) 1767.

(4)1857 

उत्तर. (2)

14. संपादकीय क्या है ?

(1) संपादक द्वारा किसी प्रमुख घटना और समस्या पर लिखा गया विचारात्मक लेख

(2) सरकार और जनता के बीच संवाद

(3) समस्या की रिपोर्ट 

(4) संवाददाता से प्राप्त जानकारी

उत्तर. (1)

15. रिपोर्टर को हिंदी में क्या कहते हैं ?

(1) कलाकार

(2) संपादक

(3) लेखक

(4) संवाददाता 

Ans. (4)

16. रेडियो अस्तित्व में कब आया ?

(1) 1885 ई.

(2) 1890 ई.

(3) 1895 ई.

(4) 1900 ई. 

Ans. (1)

17. समाचार-लेखन की प्रचलित शैली क्या कहलाती है ?

(1) उल्टा पिरामिड शैली

(2) सीधा पिरामिड शैली 

(3) क्रियात्मक शैली

(4) वर्णनात्मक शैली

उत्तर. (1)

18. जनसंख्या का प्रमुख कार्य है

(1) सूचना देना जनसंचार का प्रमुख कार्य है

(2) शिक्षित करना

(3) मनोरंजन करना

(4) इनमें से सभी

उत्तर. (4)


ग्रुपू-सी खण्ड- ‘ग’ (पाठ्यपुस्तक)


निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न संख्या 19 से 22 के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए:.

हम दूरदर्शन पर बोलेंगे

हम समर्थ शक्तिवान

हम एक दुर्बल को लाएंगे।

एक बंद कमरे में

उससे पूछेंगे तो आप क्या अपाहिज हैं ?

तो आप क्यों अपाहिज हैं ?

19. प्रस्तुत काव्यांश के रचनाकार हैं

(1) कुँवर नारायण

(2) रघुवीर सहायता

(3) गजानन माध्व मुक्तिबोध

(4) शमशेर बहादुर सिंह 

Ans. (2)

20. ‘हम दुरदर्शन पर बोलेंगे’ में आए ‘हम’ शब्द का तात्पर्य है

(1) ताकतवर मीडिया

(2) कमजोर दिव्यांग

(3) कैमरामेन

(4) कवि स्वयं

उत्तर. (1)

21. ‘आप क्यों अपाहिज हैं ?’ – टेलीविजन कैमरे के सामने इस तरह के सकता है ? प्रश्न पूछे जाने का क्या उद्देश्य हो

(1) कार्यक्रम को बंद कराना 

(2) कार्यक्रम को सफल बनाना 

(3) कार्यक्रम को असफल करना 

(4) कार्यक्रम पर रोक लगवाना 

Ans. (2)

22. प्रस्तुत कविता से क्या प्रेरणा मिलती है ?

(1) शारीरिक चुनीति झेलते लोगों के प्रति संवेदनशील नजरिया अपनाने को 

(2) किसी व्यक्ति की पीड़ा को पर्दे पर उभारकर धन कमाने की

(3) कारोबारी दबाव के तहत संवेदनहीन बन जाने की

(4) सपाट तरीके से बयानबाजी करने की

Ans. (1) 

23.हरिवंशराय बच्चन रचित प्रसिद्ध आत्मकथा कौन-सी है ?

(1) नीड़ का निर्माण कर

(2) हेमलेट

(3) जनगीता

(4) मैकबेथ

उत्तर. (1)

24. ‘चुका भी हूँ नहीं में’ किसकी रचना है ?

(1) हरिवंशराय बच्चन

(2) कुँवर नारायण

(3) गजानन माध्य मुक्तिबोध

(4) शमशेर बहादुर सिंह 

Ans. (4)

25. ‘दिन जल्दी-जल्दी ढलता है’ कविता के अनुसार क्या कभी वापस नहीं आता है ?

(1) बीता समय

(2) धन-दौलत

(3) ज्ञान-बुद्धि

(4) सफलता-असफलता

उत्तर. (1)

26. ‘मुस्काता चाँद ज्यों धरती पर रात-भर’ पंक्ति में किस अलंकार का प्रयोग हुआ है ?

(1) उत्प्रेक्षा

(2) यमक

(3) श्लेष

(4)अनुप्राशन। 

Ans: (4)

27. ‘सहर्ष स्वीकार है’ कविता के आधार पर बताइए कि कवि को जो भी जीवन में प्राप्त हुआ है, उसमें से कौन-सा मौलिक नहीं है ?

(1)कवि को गर्व भरी गरीबी

(2) कवि के व्यक्तित्व की दृढ़ता

(3) कवि के मन में बहती भावनाओं की सरिता

(4) जीवन की सुख-सुविधाएँ एवं अमीरी

उत्तर. (1)

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न संख्या 28 से 31 के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए:

भक्तिन का दुर्भाग्य भी उससे कम हठी नहीं था, इसी से किशोरी से युवती होते ही बड़ी लड़की भी विधवा हो गई। भइयहू से पार न पा सकने वाले जेठों और काकी को परास्त करने के लिए कटिबद्ध जिठोतों ने आशा की एक किरण देख पाई। विधवा बहिन के गठबंधन के लिए बड़ा जिठीत अपने तीतर लड़ाने वाले साले को बुला लाया, क्योंकि उसका हो जाने पर सब कुछ उन्हीं के अधिकार में रहता। 

28. भक्तिन के हठी दुर्भाग्य के संबंध में कौन-सी अवधारणा शामिल नहीं है। 

(1) माता-पिता का विछोह

(2) विमाता से मिले कष्ट

(3) पति की असमय मृत्यु

(4) पति के प्रेम के बल पर परिवार से अलगीझा 

Ans. (3) 

29. भक्ति के जेठ और जिठीत किस बात के लिए कटिबद्ध थे ?

(1) भक्तिन की सहायता के लिए

(2) भक्तिन की संपत्ति पर कब्जा करने के लिए 

(3) भक्तिन को मारने के लिए 

(4) इनमें से कोई नहीं

Ans. (2) 

30. भक्तिन की विधवा बेटी का पुनर्विवाह कराने के मूल में जिठीत की कौन-सी मंशा छिपी थी ?

(1) सामाजिक दायित्व का निर्वाह

(2) भक्तिन के साथ अपने रिश्तों का निर्वाह

(3) भक्तिन की जायदाद पर गिद्ध दृष्टि

(4) चचेरी बहन का घर बसाने की शुभेच्छा

उत्तर. (3)

31. प्रस्तुत पद्यांश के रचनाकार का नाम है

(1) महादेवी वर्मा

(2) जैनेन्द्र

(3) धर्मवीर भारती

(4) फणीश्वरनाथ रेणु

उत्तर. (1)

32. भक्तिन को अपने पिता की मृत्यु की पता कब चला था ?

(1) पिता के घर जाने पर

(2) पति के बताने पर

(3) पिता के घर जाने पर

(4) पुत्री के बताने पर

उत्तर. (3)

33. भक्तिन का विवाह किस आयु में हुआ था ?

(1) 5 वर्ष

(2) 8 वर्ष

(3) 12 वर्ष

(4) 15 वर्ष 

Ans. (1)

34. ‘बाजार दर्शन’ किस विधा की रचना है ?

(1) कहानी

(2) संस्मरण

(3) निबंध

(4) रिपोर्ताज 

Ans. (3)

35. निबंधकार जैनेंद्र कुमार के अनुसार पैसे की शक्ति में कौन-सी शक्ति निहित होती है ?

(1) व्यंग्य-शक्ति

(2) उपहास-शक्ति

(3) मातृ-शक्ति

(4) हास्य-शक्ति

उत्तर. (2)

36. बाजार का जादू कब असर करता ?

(1) जब जेब भरा और मन खाली हो 

(2) जब मन खाली हो और जेब खाली हो

(3) जब मन भरा और जेब खाली हो

(4) इनमें से सभी परिस्थितियों में

उत्तर. (1)

37. ‘सिल्वर वैडिंग’ कहानी के रचनाकार हैं

(1) धर्मवीर भारती

(2) मनोहर श्याम जोशी

(3) आनंद यादव

(4) ओम थानवी 

Ans. (2) 

38. ‘सिल्वर वैडिंग’ कहानी के कथानायक का नाम क्या है ?

(1) यशोधर बाबू 

(2) किशन दा 

(3) किशन दा 

(4) चंदा 

Ans. (1)

39. ‘सिल्वर वैडिंग’ पर भूषण ने अपने पिता को क्या उपहार दिया ? 

(1) घड़ी

(2) पैंट

(3) पैंट और कमीज

(4) ऊनी ड्रेसिंग गाउन

उत्तर. (4)

40. ‘सिल्वर वैडिंग’ कहानी की मूल संवेदना क्या है ?

(1) दो पीढ़ियों का अंतराल

(2) बेरोजगारी

(3) अशिक्षा

(4) विस्थापन

उत्तर. (1)


GROUP-A खंड- ‘क’ (अपठित बोध)


1. निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए:

कूड़े के ढेर से कुछ चुनते हुए बच्चे को देख एक चित्रकार ने करुणामय चित्र बना डाला। कवि ने एक मार्मिक रचना रच डाली। एक कहानीकार ने ‘उसी बच्चे’ पर कालजयी कहानी कही।

(क) प्रस्तुत काव्यांश का केन्द्रीय विषय क्या है ?

(ख) बच्चे को देखकर किन-किन लोगों ने क्या-क्या किया ?

(ग) ‘कालजयी’ का क्या अर्थ है ?

उत्तर—(क) प्रस्तुत काव्यांश का केन्द्रीय प्रतिपाद्य विषय कचड़ा चुनकर जीवन यापन करने वाला बच्चा है। काव्यांश के अनुसार इन बच्चों पर कवियों, आदि ने ध्यान दिलाया, लेकिन उसके उत्थान के लिए किसी ने उपाय नहीं किया। उन अबोध बच्चों की यह नियति बन गई है। 

(ख) बच्चों को देखकर चित्रकार ने करुणामय चित्र बनाया, कवि ने मार्मिक कविता की रचना कर डाली तथा कहानीकार ने कालजयी कहानी लिख डाली। 

(ग) कालजयी का अर्थ है प्रत्येक काल के लिए प्रासंगिक अर्थात् हर समय के लिए समान महत्व का ।

अथवा, निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए:

भारत में स्वच्छता परिदृश्य अभी भी निराशाजनक है। ज्यादातर भारतीयों के पास मोबाइल फोन तो हैं, लेकिन घर में शौचालय नहीं है। यह लोगों की स्वच्छता के प्रति जागरूकता, समाज और प्राचलिकता को दर्शाता है। गाँधीजी ने अपने बचपन में ही भारतीयों में स्वच्छता के प्रति उदासीनता की कमी को महसूस कर लिया था।

अस्पृश्यता से घृणा करने वाले गाँधीजी के लिए स्वच्छता एक बड़ा सामाजिक मुद्दा था। बचपन में बालक मोहन के मन में अपनी माँ की उस बात का विरोध किया, जब उनकी माँ ने सफाई करने वाले कर्मचारी को न छूने और उससे दूर रहने के लिए कहा था उन्हें दृढ़ विश्वास था कि स्वच्छता और सफाई

प्रत्येक व्यक्ति का काम है। 

(क) भारत में स्वच्छता परिदृश्य अभी भी निराशाजनक क्यों है ?

(ख) प्रस्तुत गद्यांश में गाँधीजी के किन व्यक्तिगत विशेषताओं को उभारा गया है ?

(ग) प्रस्तुत गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।

उत्तर- (क) भारत के लोग स्वच्छता के प्रति आज भी जागरूक नहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोग खुले में शौच करने जाते हैं। शहरों में सार्वजनिक शौचालयों की कमी तथा शुल्क लगने के कारण गरीब लोग खुले में शौच करते हैं, इसलिए भारत में स्वच्छता परिदृश्य अभी भी निराशाजनक है।

(ख) प्रस्तुत गद्यांश में गाँधी जी की दो व्यक्तिगत विशेषताएँ उभरी है। पहली स्वच्छता के प्रति जागरूकता तथा अस्पृश्यता के प्रति विरोध। वे स्वच्छता

और सफाई प्रत्येक व्यक्ति का अनिवार्य काम मानते थे।

(ग) स्वच्छता परम कर्तव्य ।


GROUP-B खंड- ‘ख’ (अभिव्यक्ति और माध्यम एवं रचनात्मक लेखन)


निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर दीजिए। 

(क) ‘झारखण्ड की संस्कृति’ अथवा ‘समाचार-पत्र’ पर निबंध लिखिए। 

(ख) अपने क्षेत्र में नियमित साफ-सफाई के लिए संबंधित पदाधिकारी को पत्र लिखिए ।

(ग) अपने क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति की बदलती की ओर सरकार का ध्यान आकृष्ट करने हेतु किसी दैनिक समाचार पत्र के संपादक को पत्र लिखिए ।

(घ) पत्रकारिता किसे कहते हैं ? पत्रकारिता के प्रकारों को लिखिए ।

उत्तर- (क) झारखंड की संस्कृति- झारखंड अपने सांस्कृतिक करतबों के लिए प्रसिद्ध है। इसपर प्रकृति की असीम कृपा रहा है। पर्यटकों के लिए झारखंड स्वर्ग है। दामोदर नदी, मयूराक्षी नदी, कोयल नदी, साँख नदी आदि इस क्षेत्र से होकर बहती है। वनांचल, जैसा कि लोकप्रिय है, अपने खनिज और वन संसाधनों के लिए भी प्रसिद्ध है।

पश्चिम बंगाल, बिहार से स्थानांतरण होने के कारण झारखंड की संस्कृति को समृद्ध करता है। झारखंड की संस्कृति प्रचुर त्योहारों के अपने समृद्ध बनाने के बिना कहीं नहीं है। सरहुल, करमा, सोहराई, क्रिसमस, होली, दशहरा आदि त्योहार झारखंड में मस्ती और उल्लास के साथ मनाया जाता है। लोक संगीत और नृत्य झारखंड की संस्कृति का हिस्सा और पार्सल है। आदिवासी समुदायों के वे लोग सरल और विनम्र होते हैं।

अनेक कठिनाइयों से ग्रस्त होने के बाद भी अपने संस्कृति झारखंड के लोगों के मुख्य खाद्य पदार्थ गेहूँ और चावल हैं। मुख्य रूप से सरसों के तेल का उपयोग खाना पकाने के माध्यम के रूप में किया जाता है। इस क्षेत्र में विभिन्न प्रकार की सब्जियों के पर्याप्त विकास के पोषण मिलता है। 

इस क्षेत्र में बिखरे हुए विभिन्न लोगों की अपनी अलग-अलग खान-पान आदते हैं जो राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग हैं। जनजातियों का खाना पकाने की विधि बाकी आबादी से अलग है। महुआ का आटा, मक्का, बाजरा, कंद आदिवासियों का मुख्य भोजन घटक है।

पर्यटन की दृष्टि से झारखंड अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। यहाँ ऐतिहासिक और भौगोलिक दोनों प्रकार के पर्यटन स्थल हैं। धार्मिक दृष्टिकोण से देवघर और पारसनाथ अत्यन्त महत्त्वपूर्ण हैं। झारखण्ड की भूमि को प्रकृति ने रत्नगर्भा बनाया है। इस क्षेत्र में पाये जाने वाले प्रमुख खनिजों में लौह अयस्क, ताँबा, मैंगनीज, बॉक्साइट, सोना, चाँदी आदि हैं। अतः उपसंहार स्वरूप हम

कह सकते हैं कि झारखंड की संस्कृति अद्वितीय है। पर्यटन, धार्मिक स्थल, खनिज संपदा, झारखण्ड की अनुपम विधि है।

अथवा, करोना वायरस

पहले ही हम इंसानों के अलावा कई जीवों का इस धरती पर वास था। अब एक और नया जीव वास करने आया कोरोना। पर सबसे आश्चर्य की बात यह है कि यह कोरोना जीवित नहीं है। यह एक अजीवित ‘वायरस’ है जो एक व्यति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है जब आप सोचिए कि यह जीवित नहीं है तब इतनी तबाही मचा रहा है, और अगर जीवित होता तो यह क्या करता। खैर ! अब यह वायरस आ तो गया, पर इससे बचे पैसे से एक बड़ा सवाल है। हम बहुत कुछ ऐसा कर सकते है जिससे हम खुद को और दूसरों को बचा सकें।

कोरोना वायरस छूने से भी फैलता है, जिसे हाथ न मिलाकर हाथ साबुन से धोकर, सैनिटाइज कर रोका जा सकता है। अगर हम एन-95 या कपड़ों के मास्क पहनें, तो मे हमारे फेफड़ों में जाने में असमर्थ रहेगा। हमें 2 गज की दूरी भी बनानी चाहिए।

सरकार की भी कुछ जिम्मेदारियाँ हैं, जो इस वायरस को बढ़ने से रोक सकती है। उनमें से कुछ निम्न हैं-

(i) जगह-जगह पर वैक्सीनेशन कैंप लगवाना।

((ii) हर स्कूल, ऑफिस, सड़क, मोहल्ला, आदि को सैनिटाइज करवाना।

(iii) उन जगहों में लोकडाउन लगाना, जहाँ कोविड को संभालना थोड़ा कठिन नजर आ रहा है, आदि।

अगर हम सब अपनी-अपनी जिम्मेवारी को अच्छे से समझ लें, तो ये कोविड-19 भी ज्यादा देर तक टिक नहीं पाएगा।

अथवा, समाचार पत्र

भूमिका समाचार-पत्र वह कड़ी है जो हमें शेष दुनिया से जोड़ती है। जब हम समाचार-पत्र में देश-विदेश की खबरें पढ़ते हैं तो हम पूरे विश्व के अंग बन जाते हैं। इससे हमारे हृदय का विस्तार होता है। लोकतंत्र का प्रहरी समाचार-पत्र लोकतंत्र का सच्चा पहरेदार है। । 

उसी के माध्यम से लोग अपनी इच्छा, विरोध और आलोचना प्रकट करते हैं। यही कारण है कि राजनीतिज्ञ समाचार-पत्रों से बहुत डरते हैं। नेपोलियन ने कहा था- “में लाखों विरोधियों की अपेक्षा इन समाचार-पत्रों से अधिक भयभीत रहता हूँ।” 

समाचार-पत्र जनमत तैयार करते हैं उनमें युग का बहाव बदलने की ताकत होती है। राजनेताओं को अपने अच्छे -दुरे कार्यों का पता इन्हीं से चलता है। प्रचार का उत्तम माध्यम आज प्रचार का युग है। यदि आप अपने माल

को, अपने विचार को, अपने कार्यक्रम को या अपनी रचना को देशव्यापी बनाना चाहते हैं तो समाचार पत्र का सहारा लें। उससे आपकी बात शीघ्र सारे देश में फैल जाएगी। समाचार-पत्र के माध्यम से रातों-रात लोग नेता बन जाते हैं

या चर्चित व्यक्ति बन जाते हैं। यदि किसी घटना को अखबार की मोटी सुर्खियों में स्थान मिल जाए तो वह घटना सारे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लेती है। देश के लिए न जाने कितने नवयुवकों ने बलिदान दिया, परन्तु जिस घटना को पत्रों में स्थान मिला, वे घटनाएँ अमर हो गई।

व्यापार में लाभ-समाचार-पत्र व्यापार को बढ़ाने में परम सहायक सिद्ध हुए हैं। विज्ञापन की सहायता से व्यापारियों का माल देश में ही नहीं विदेशों में भी बिकने लगता है। रोजगार पाने के लिए भी अखबार उत्तम साधन है। इस बेरोजगार का सहारा अखवार में निकले नौकरी के विज्ञापन होते हैं। 

इसके अतिरिक्त सरकारी या गैर-सरकारी फर्मों अपने लिए कर्मचारी ढूँढने के लिए अखबारों का सहारा लेती है। व्यापारी नित्य के भाव देखने के लिए तथा शेयरों का मूल्य जानने के लिए अखबार का मुँह जोड़ते हैं।

जे. पार्टन का कहना है-‘समाचार पत्र जनता के लिए विश्वविद्यालय हैं।’ उनमें हमें केवल देश-विदेश की गतिविधियों को जानकारी ही नहीं मिलती, अपितु महान विचारकों के विचार पढ़ने को मिलते हैं। उनसे विभिन्न त्योहारों में महापुरुषों के महत्व का पता चलता है। 

महिलाओं को घर-गृहस्थी सम्हालने के नए-नए नुस्खों का पता चलता है। प्रायः अखबार में ऐसे कई स्थायी स्तम्भ हैं जो हमें विभिन्न जानकारियों देते हैं।

आजकल अखदार मनोरंजन के क्षेत्र में भी आगे बढ़ चले हैं। उनमें नई-नई कहानियों, किस्से, कविताएँ तथा अन्य बालोपयोगी साहित्य छपता है। दरअसल, आजकल समाचार-पत्र बहुमुखी हो गया है। 

उसके द्वारा चलचित्र, खेलकूद, दूरदर्शन, भविष्य कथन, मीसम आदि की अनेक जानकारियों मिलती है।

समाचार-पत्र के माध्यम से आप मनचाहे वर-वधू ढूढ़ सकते हैं। अपना मकान, गाड़ी, वाहन खरीद-बेच सकते हैं। खोए गए बन्धु को बुला सकते हैं। अपना परीक्षा परिणाम जान सकते हैं। इस प्रकार समाचार-पत्रों को महत्त्व बहुत अधिक हो गया है।

(ख)

सेवा में,

स्वास्थ्य अधिकारी,

राँची नगर निगम, राँची।

विषय-मुहल्ले की सफाई कराने हेतु प्रार्थना-पत्र।

श्रीमान्

हम आपका ध्यान मुहल्ले की सफाई सम्बन्धी दुर्व्यवस्था की ओर खींचना चाहते हैं आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि हमारे मुहल्ले की सफाई हेतु नगर निगम का कोई सफाई कर्मचारी गत दस दिनों से काम पर नहीं आ रहा है। घरों की सफाई करने वाले कर्मचारियों ने भी मुहल्ले में स्थान-स्थान पर गन्दगी और कूड़े-फर्कट के ढेर लगा दिए हैं। इसका कारण सम्भवतः यह भी है कि आस-पास कूड़ा-कर्कट तथा गंदगी डालने के लिए कोई निश्चित स्थान नहीं है।

आज स्थिति यह है कि मुहल्ले का वातावरण अत्यन्त दूषित तथा दुर्गन्धमय हो गया है। मुहल्ले में से गुजरते हुए नाक बन्द कर लेनी पड़ती है। चारों ओर मक्खियों की भिनभिनाहट है रोगों के कीटाणु प्रतिदिन बढ़ रहे हैं। नालियों की सफाई न होने के कारण मच्छरों का प्रकोप इस सीमा तक बढ़ गया है कि दिन का चैन और रात की नींद हराम हो गई है।

वर्षा ऋतु पाँच-सात दिनों में प्रारम्भ होने वाली है। यथासमय मुहल्ले की सफाई न होने पर मुहल्ले की दुर्व्यवस्था का अनुमान लगाना कठिन है। श्रीमान् जी, आपसे हम मुहल्ले वालों की सविनय प्रार्थना है कि आप यथाशीघ्र मुहल्ले का निरीक्षण करें तथा सफाई का नियमित प्रबन्ध करें। अन्यथा मुहल्ला निवासियों के स्वास्थ्य पर उसका कुप्रभाव पड़ने की आशंका है।

आपकी ओर से उचित कार्यवाही के लिए हम आपके

आभारी रहेंगे।

प्रार्थी नगर

निवासी।

(ग) सेवा में,

आदरणीय सम्पादक जी,

‘दैनिक जागरण’, राँची ।

महाशय,

मैं आपके दैनिक पत्र ‘जागरण’ में प्रकाशनार्थ प्रेषित इस पत्र के माध्यम से बिहार के विद्युत मंत्री का ध्यान महीनों से विद्युत संकट से आक्रान्त पाकुड़ विगत चार महीनों से जमुई की ओर आकृष्ट करना चाहता हूँ।

में विद्युत की आपूर्ति में घोर अनियमितता है। 24 घंटे में मुश्किल से कुल मिलाकर दो-ढाई घण्टे तक बिजली के दर्शन होते हैं। शेष घण्टों में घोर तबाही, बेचैनी देकर बिजली गायब रहती है। बिजुली की आपूर्ति की इस गड़बड़ी से सामान्य जन जीवन अस्त-व्यस्त है। खेतों में मोटर पम्प से होने वाला सिंचाई कार्य रुका हुआ है जिससे फसलें सूख रही है। 

शहर के भीतर बाहर करीब सता-आठ बड़े औद्योगिक संस्थान हैं जो विद्युत आपूर्ति के अभाव में मृतप्राय हैं। संध् या सात बजे होते ही शहर-बाजार की सारी दुकानें बंद हो जाती हैं। रात्रि के इस भयावह अंधकार में चोरी-डकैती की घटनाएँ होती रहती हैं।

इस संबंध में स्थानीय विद्युत अनुमंडल पदाधिकारी से कई बार सम्पर्क स्थापित कर तथा कई बार लिखित सूचना के आधार पर अपेक्षित कार्य कराने का प्रयास किया गया है, लेकिन परिणामस्वरूप केवल निराशा ही हाथ लगी है।

अतः में इस समस्या और इस उत्पन्न दुर्दशा की ओर माननीय विद्युत मंत्री, झारखण्ड का ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूँ और निवेदन करता हूँ कि इस सम्बन्ध में तत्काल उचित कार्रवाई की जाय। 

तिथि -3 मार्च, 2017

भवदीय

मोहन कुमार पाकुड़, वार्ड नं. 5

(घ) ज्ञान और विचारों का समीक्षात्मक टिप्पणियों के साथ शब्द ध्वनि, तथा चित्रों के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाना ही पत्रकारिता है। पत्रकारिता के निम्नलिखित प्रकार हैं-

(i) खोजपरक या खोजी पत्रकारिता खोजी पत्रकारिता द्वारा सार्वजनिक महत्व के मामलों में भ्रष्टाचार, गड़बड़ी, अनियमितताओं और अनीतिकताओं को उजागर करने का प्रयत्न किया जाता है। खोजी पत्रकारिता का ही नया रूप टेलीविजन में ‘स्टिंग ऑपरेशन के रूप में सामने आया है।

(ii) विशेषीकृत पत्रकारिता-इसके लिए पत्रकार से किसी व्यापक क्षेत्र विशेषज्ञता की अपेक्षा की जाती है। पत्रकारिता के विषयानुसार विशेषज्ञता प्रमुख क्षेत्र है-संसदीय पत्रकारिता’, ‘न्यायालय पत्रकारिता’, ‘आर्थिक पत्रकारिता’ ‘विज्ञान और विकास पत्रकारिता’, ‘अपराध, फैशन तथा फिल्म पत्रकारिता’।

(iii) वाचडॉग पत्रकारिता- ‘भाचहोंग पत्रकारिता का मुख्य काम और जवाबदेही सरकार के कामकाज और गतिविधियों पर पैनी नजर रखनी है जहाँ कहीं भी कोई गड़बड़ी नजर आये वह उसको उद्घाटित करें।

(iv) एडवोकेसी पत्रकारिता- एडवोकेसी या पक्षधर पत्रकारिता का संबंध विशेष विचारधारा, मान्यता या मुद्दों से होता है। एडवोकेसी पत्रकारिता के संचालक, समाचार संगठन अपने विशेष उद्देश्यो, मुद्दों और विचारधारा को जोर-शोर से उठाते है और उनके पक्ष में जनमत की दिशा मोड़ने की कोशिश करते हैं। कभी-कभी किसी प्रतिक्रिया करने या (निर्णय) “ट मुद्दे पर जनमत बनाकर उसके अनुकूल के लिए दबाव बनाते हैं।

(v) वैकल्पिक पत्रकारिता- पत्रकारिता का जो रूप स्थापित व्यवस्था के विकल्प को समाने लाने और उसकी सोच को अभिव्यक्त करने का प्रयत्न करता है उसे वैकल्पिक पत्रकारिता कहा जाता है। इस तरह की मीडिया को न तो । पूँजीपतियों का वरदहस्त प्राप्त होता है और न ही सरकार का रक्षा करवच हो ।उसे मिलता है। वह तो पाठकों के सहयोग पर ही साँस लेती है।


Group-C खंड ‘ग’ (पाठ्यपुस्तक) निम्नलिखित में से किसी एक का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिये : 


(क) किसवी, किसान, कुल, यनिक, भिखारी, भाट, चाकर, चपल, नट, चोर, चार, चेटकी। 

पेट को पढ़त, गुन गढ़त, चढ़त गिरि, अटत गहन-गन अहन अखेटकी ॥

ऊंचे-नीचे करम, धरम-अधरम करि, पेट ही को पचत, बेचत बेटा-बेटकी।

‘तुलसी’ बुझाह एक राम घनस्याम ही तें,

आगि बड़वागितें बड़ी है आगि पेटकी ॥


(ख) आँगन में तुनक रहा है जिदयाया है।

बालक तो हई चाँद पे ललचाया है

दर्पण उसे दे के कह रही है माँ देख आईने में चाँद उतर आया है।


उत्तर- (क) इन पंक्तियों में पेट के लिए किए जानेवाले सही-गलत कार्यों का है। भाषा क्रम है तथा छंद कवित है। यहाँ अनुप्रास अलंकार का सुंदर प्रयोग है।

(ख) इस रुवाई में कवि ने बालक की जिद एवं माँ की चतुराई का आकर्षक चित्रण किया है। आँगन में खड़े होकर बालक चाँद को देखकर ठुकरने लगता है और चाँद को लेने की जिद कर रहा है। बालक का मन चाँद को देख ललचा गया है और माँ उसे हाथ में आईना पकड़ा कर कहती है कि लो देखो चाँद

4. आईने में उतर आया है। निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर दीजिए। 

(क) ‘बादल-राग’ कविता में कवि ने अट्टालिका को ‘आतंक ‘भवन’ क्यों कहा है?

(ख) ‘लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप’ पाठ के आधार पर लक्ष्मण के प्रति राम के स्नेह-संबंधों पर प्रकश डालिए ।

(ग) ‘रुबाइयाँ’ के आधार पर बताइए कि माँ द्वारा बच्चे को प्रसन्न करने के लिए क्या-क्या उपाय किये जा रहे हैं ? 

उत्तर- (क) बड़े-बड़े महलों में रहने वाले धनी वर्ग के आवास को कवि ने आतंक भवन की संज्ञा दी है। वस्तुतः इन भवनों में रहने वाला धनवान मजदूरों-पीड़ितों का शोषण कर उन्हें आतंकित करता है। दूसरी ओर से धनवान खुद की क्रांति के भय से आतंकित रहते हैं। इसलिए यहाँ आतंक भवन दूयर्थक है तथा पूँजीपतियों की वास्तविकता पर व्यंग्य है।

(ख) श्री राम का लक्ष्मण के प्रति अटूट स्नेह। ये लक्ष्मण के मूर्च्छित होने से व्याकुल हो जाते हैं। वे धन, पुत्र, स्त्री और परिवार के सामने सगे को ज्यादा महत्व देते हैं। राम के व्याकुल वचन को भी सुनकर मूर्च्छित लक्ष्मण नहीं उठ पाते हैं।

(ग) इस रुदाई में कवि ने बालक की जिद एवं माँ की चतुराई का आकर्षक चित्रण किया है। आँगन में खड़ी होकर बालक चाँद को देखकर दुनकने लगता है और चाँद को लेने की जिद कर रहा है। बालक का मन चाँद को देख ललचा गया है और माँ उसे हाथ में आईना पकड़ा कर कहती है कि लो देखो चाँद आईने में उत्तर आया है।

5. निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर दीजिए 

(क) सूखे के कारण कैसी स्थिति हो जाती है ? ‘काले मेघा पानी दे’ के आधार पर बताइए ।

(ख) ढोलक की आवाज का पूरे गाँव पर क्या असर होता था?

(ग) डॉ. अंबेदकर के आदर्श समाज की परिकल्पना कैसी थी ?

उत्तर- (क) लेखक ने बतलाया है कि इन दिनों भीषण गर्मी से लोग जल-भुनकर त्राहिमाम कर रहे होते हैं। जेठ का दसहरा बीतने तथा आषाढ़ का पहला पखवारा बीतने के बाद कुएँ सूखने लगते हैं तथा नलों में बहुत कम तथा गर्म पानी आता है। खेतों की जुताई नहीं हो पाती और मिट्टी सूखकर पत्थर बन जाती है, पपड़ी फटकर दरार पड़ जाती। लोग लू से रास्ते में गिरने लगते हैं तथा ढोर डंगर प्यासे मरने लगते हैं।

(ख) महामारी की विभीषिका झेल रहे गाँव में जब रात भर सुट्टन पहलवान की ढोलक बजती थी तो औषधि उपचार- पथर विहीन प्राणियों में संजीवनी-शक्ति भरती थी वह आवाज बूढ़े बच्चे जवानों की स्पंदन शून्य स्नायुओं में बिजली भर देती थी, दंगल के दृश्य साकार कर देती थी। वह आवाज गाँव वालों को मृत्यु भय से मुक्त कर देती थी।

(ग) स्वतंत्रता, समता और भ्रातृता पर आधारित समाज ही लेखक का आदर्श समाज है। समाज के बहुविध हितों में सबका भाग तथा सभी की रक्षा के प्रति सजगता को लेखक भाईचारा मानता है और भाईचारा का ही दूसरा नाम लोकतंत्र है। लेखक के अनुसार लोकतंत्र केवल शासन-पद्धति नहीं, समूहिक दिनचर्या की एक रीति तथा सम्मिलित अनुभवों का आदान-प्रदान है। इसमें आवश्यक है कि अपने साथियों के प्रति श्रद्धा एवं सम्मान का भाव हो । 

6. सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ अथवा फणीश्वरनाथ रेणु की किन्हीं दो रचनाओं का नाम लिखिए।

उत्तर-सूर्यकांत त्रिपाठी निरालापरिमल, अनामिका। फणिश्वरनाथ रेणु-मैला आँचल, आदिम रात्रि की महक ।

7. स्वयं कविता रच लेने का आत्मविश्वास लेखक के मन में कैसे पैदा हुआ ? 

उत्तर- मराठी भाषा के अध्यापक श्री सौंदलगेकर के कविता-अध्यापन ने लेखक को कविता के प्रति रुचि जगायी। उनका सरवर, काव्यपाठ, छंद, लय, गति, अलंकार आदि का शिक्षण लेखक की कविता में सहायक होता है। स्वयं श्री

17 सौंदलगेकर की कविता एवं अन्य कवियों के संस्मरण से लेखक को विश्वास हुआ कि कवि किसी दूसरे लोक के नहीं, बल्कि मनुष्य ही होते हैं।

मास्टर जी की ‘मालती की बेल’ कविता से लेखक को लगा कि वह भी अपने आस-पास की चीजों पर कविता रच सकता है। पाठशाला के समारोह में गायन तथा मराठी-अध्यापक के प्रोत्साहन शावाशी से लेखक में आत्मविश्वास पैदा हुआ कि वह भी कविता रच सकता है।

अथवा

ऐन फ्रैंक के परिवार के डर के कारणों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर- ऐन ने अपने अज्ञातवास के दिनों के डर, ऊब तथा एकरसता का उल्लेख किया है। अज्ञातवास में फेंक तथा दान परिवार को लगातार एक इमारत के अंधेरे बंद कमरे में रहना पड़ा। बाहर की दुनिया में झाँकना भी उनके लिए खतरनाक था क्योंकि इससे उनके जर्मन सैनिकों द्वारा पकड़ लिये जाने का खतरा था। उन्हें हर समय गिरफ्तारी का भय सताता रहता था। 

यह जीवन बेहद उबाऊ था। दोनों परिवार इस उबाऊपन को दूर करने का भरसक प्रयत्न करते। वे पहेलियाँ बुझाते थे, अँधेरे में व्यायाम करते, अँगरेजी और फ्रेंच बोलने की कोशिश करते और किताबों की समीक्षा करते।

बिजली के चले जाने पर अँधेरे में ऐन दूरबीन से रोशनी वाले घरों के कमरे में दूरबीन से ताक-झाँक करती। मि. डसेल लम्बे-चौड़े उबाऊ भाषण करते तो ऐन की मम्मी या सिसेज वान दान अपने बचपन की उन कहानियाँ को लेकर बैठ जाती जो सभी कई बार सुन चुके होते हैं वे एक दूसरे को लतीफे सुनाते जो पहले से सुने हुए होते थे।

8. ‘जूझ’ कहानी के माध्यम से लेखक ने क्या सीख दी है?

उत्तर- (ग) ‘जूझ’ का अर्थ होत है युद्ध की लड़ाई। जब व्यक्ति किसी परिस्थिति या समस्याओं से जूझता है तो उस समय या परिस्थिति से उसकी एक प्रकार की सड़ाई होती है, जिसे ‘जूझ’ कहते हैं। इस कहानी के माध्यम से लेखक ने जीवन संघर्ष की सीख दी है। मानव अपने जीवन में सदैव परिस्थितियों द समस्याओं से जूझता रहता है।

अथवा, ‘डायरी के पन्ने’ पाठ के आधार पर बताइए कि अब महिलाओं की स्थिति में किस तरह के बदलाव आ रहे हैं ? 

उत्तर- (ग) 13 जून, 1944 की डायरी में ऐन ने किया है कि भविष्य में औरतें ज्यादा सम्मान की हकदार बनेंगी । अब स्त्रियों ने अपने अस्तित्व को समझा है । अब वे अन्याय सहन नहीं करती हैं । अब जागरूक हो गयी है।



FAQ’s


Q: क्या आप मुझे कक्षा 12 HINDI के पिछले वर्ष के प्रश्न पत्र की पीडीएफ प्रदान कर सकते हैं?

हां, इस पोस्ट में पीडीएफ लिंक दिए गए हैं।

Q: क्या ये पिछले वर्षों के प्रश्न और उत्तर हैं?

हाँ, ये 2024 की परीक्षा के लिए पिछले वर्ष के महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर हैं।

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