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Class 12 Home Science Important Questions And Answers in Hindi

Class12th 
Chapter Important Model Question Paper
BoardHindi Board
Book NCERT
SubjectHome Science
Medium Hindi
Study MaterialsFree Study Materials

home science class 12 question answers in Hindi

Class 12 Home Science Important Questions And Answers in Hindi PDF

Q. 1. संदूषित पानी से फैलने वाले किन्हीं दो रोगों के नाम बताइए। (Name any two diseases spread by infected water.)

Ans. टायफायड तथा पेचिस

Q. 2. वंशानुक्रम क्या है? (What is heredity?)

Ans. वंशानुक्रम (Heredity) यह जैविक प्रक्रिया है जिसके द्वारा जेनेटिक वि प्रभाव का स्थानान्तरण एक पीढ़ी से दूसरे पीढ़ी को जाता है।

Q. 3. शारीरिक विकास को परिभाषित कीजिए। (Define physical development.)

Ans. शारीरिक आकार में बढ़ोतरी को शारीरिक विकास कहते हैं।

Q. 4. जीवन रक्षक घोल का प्रयोग कब किया जाता है? 

Ans. जीवन रक्षक घोल का प्रयोग निर्जलीकरण की अवस्था को रोकने के लिए दिया जाता है जो कि हैजा, अतिसार तथा खाद्य विषाक्तता के कारण उत्पन्न होती हैं। 

Q. 5. आहार आयोजन की परिभाषा लिखिए। (Define meal planning.)

Ans. संतुलित भोजन को पौष्टिकता के सिद्धान्तों को ध्यान में रखते हुए पाले से किये गये नियोजन कसे आहार-आयोजनाते है। 

Q.6. स्वास्थ्य की परिभाषा लिखिए। (Define health.) 

Ans. शरीर की यह अवस्था जिसमें शारीरिक, मानसिक तथा सामाजिक रोग या दुर्बलता से रहित हो उसे अच्छा स्वास्थ्य कहा जाता है।

Q. 7. वस्त्रों के मुख्य कार्य क्या हैं? (What are the functions of clothes ?)

Ans. वस्त्र के कार्य को दो भागों में बाँटा जाता है- 

(1) मुख्य कार्य- व्यक्तिगत सुरक्षा तथा वातावरण के अनुकूल आरामदेह परिधान।

(ii) गौण कार्य- आत्म-अलंकरण, पहचान, सामाजिक स्तर और प्रतिष्ठा, फैशन, मान्यताएँ, आत्माभिव्यक्ति, रोमांच आदि अपील। 

Q. 8. सामाजिक विकास से आप क्या समझते हैं? (What do you mean by social develpment ?)

Ans. सामाजिक, विकास का अर्थ है जिस समाज में बच्चा रहता है उस समाज के अनुसार अपने व्यवहार को डालने की बच्चे की क्षमता। सामाजिक विकास से ही समाजीकरण आरम्भ होता है। समाजीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें बच्चा, खाना, बोलना और खेलना सीखता है। इसका अर्थ अपने समूह के साथ अच्छा व्यवहार करना भी है।

Q. १. उपभोक्ता समस्या से आप क्या समझते हैं? (What do you mean by consumer problem?) 

Ans. किसी वस्तु या सेवा की खरीदारी से लेकर उपभोग तक के दौरान समस्याएँ उपभोक्ता को सहन करनी पड़ती हैं उसे ही उपभोक्ता समस्या कहते हैं। उपभोक्ता समस्याएँ में शामिल हैं-वस्तु या सेवा की अनुपलब्यता, क्षणिक या कृत्रिक अनुपलब्धता, कालाबाजारी, कीमतों में अस्थिरता, मिलावट, अपूर्ण घोचा देने वाले लेबल, दुकानदारों द्वारा उपभोक्ता को बहकाना, उत्पादको बारा भोक विज्ञापनों का प्रचार, विलम्बित या अपूर्ण उपभोक्ता सेवाएँ, आदि। 

Q.10. रेडीमेड वस्त्रों की खरीदारी करने के कारण बताइए। (Describe the reasons of purchasing readymade garments.) 

Ans. रेडीमेड वस्त्रों की खरीदारी करने के कारण निम्नलिखित है

(i) समय का अभाव-आज की भागदौड़ की जिंदगी में समय का अभाव रहने के कारण रेडीमेड कपड़ों की खरीदारी की जाती है।

(ii) नये फैशन के कपड़ों हेतु सामान्यतः लोग नये फैशन के कपड़े पहनना चाहते हैं जो दूसरों से अलग हो। रेडीमेड वस्त्रों में नये-नये फैशन के कई कपड़े उपलब्ध होते हैं।

(iii) रेडीमेड कपड़े परम्परागत कपड़ों की अपेक्षा सस्ते होते हैं क्योंकि उत्पादक बड़ी मात्रा में उनका उत्पादन करते हैं।

(iv) ट्रायल की सुविधा रेडीमेड वस्त्रों को ट्रायल अर्थातु पहन कर देखने की भी सुविधा होती है तथा अच्छी फिटिंग या पसंद न हो तो अस्वीकार कर सकते हैं। कपड़े खरीदकर सिलवाने में यह सुविधा नहीं होती।

(v) रेडीमेड कपड़ों की दुकान पर सामान्यतः सभी उम्र के, फैशन के, मौसम के तथा प्रत्येक उत्ताव के कपड़े उपलब्ध होते हैं जिससे चयन में सुविधा होती है तथा खरीददार को पूर्ण संतुष्टि लायक कपड़े मिल जाते हैं।

(vi) रेडीमेड कपड़ों के उत्पादक हर उम्र तथा रुचि के लोगों पर निरंतर शोध तथा शौक का अध्ययन करते हैं तथा उसी आवश्यकता के अनुरूप कपड़ों का निर्माण करते हैं। इससे लोगों को अपनी रुचि के मुताबिक कपड़े मिल जाते हैं।

(vii) रेडीमेड कपड़े पहनने, धोने तथा गुणवत्ता बनाये रखने में टिकाऊ होते हैं।

(viii) उत्सव तथा त्योहारों के मौसम में पूरे परिवार के सदस्यों के लिए उनकी रुचि अनुसार कपड़े खरीदने तथा वस्त्र तैयार करवाना परिवार के मुखिया के लिए बड़ी समस्या होती है। रेडीमेड वस्त्र में तरह-तरह के कपड़ों के विशाल भण्डार होते हैं जिससे खरीदारी में सुविधा होती है। 



Q. 11. उचित विनियोग के मार्गदर्शन के बारे में लिखें। (Write about the guidelines for sound investment.)

Ans. विनियोग को सुरक्षित बनाने के लिए तथा आर्थिक संकट से बचने के लिए कुछ विशेष बातों पर ध्यान देना चाहिए जो निम्न हैं- 

(1) विभिन्न योजनाओं में धन लगाना-विनियोगकर्ता को विभिन्न योजनाओं में धन विनियोजित करना चाहिए जिससे यदि किसी एक योजना से हानि हो भी जाए तो शेष योजनाओं से उसे उसकी आवश्यकता के समय लाभ प्राप्त हो सके। 

(2) नियमित हिसाब- विनियौयकर्ता अपनी धन राशि जिस-जिस योजना में लगाता है उसे उन सबका हिसाब रखना चाहिए जिससे किसी भी योजना की थोड़ी-सी हेर-फेर कर उसे तुरंत पता लग जाता है।

(3) मूल्य के घटने-बढ़ने का ज्ञान-विनियोगकर्ता को समय-समय पर विनियोग के साधनों के मूल्यों की पूर्ण जानकारी लेते रहना चाहिए ।

(4) अनुभवी विनियोगकत्र्ताओं से परामर्श-धन का विनियोग करते समय अनुभवी विनियोगकर्ताओं से परामर्श भी करना चाहिए, जिससे सही योजना में धन विनियोग हो सके ।

Q. 12. मिलावट को परिभाषित कीजिए। खाद्य मिलावट से बचने के उपाय बताइए। 

Ans. स्वयं करे

Q. 13. जल का हमारे शरीर में क्या महत्त्व है? 

Ans. स्वयं करे

Q. 14. परिवार का ढाँचा आहार आयोजन को किस प्रकार प्रभावित करता है? कोई चार कारण बताइए।

Ans. परिवार के ढाँचा का आहार आयोजन में महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। 

(1) सदस्यों की आयु-परिवार का आहार कैसा होगा यह पारिवारिक सदस्यों की आयु पर निर्भर करता है। अगर परिवार में ज्यादातर युवा सदस्य हैं तो अधिक पौष्टिक तथा कैलोरी युक्त आहार की जरूरत होती है। गदि परिवार में वृद्ध सदस्यों की संख्या अधिक हो तो आहार में मुलायम तथा पेय पदार्थों को अधिक शामिल करना होता है। 

(ii) परिवार की आय-परिवार अधिक निम्न वर्गीय हो तो आहार आयोजन में मितव्ययिता करनी पड़ती है तथा सदस्यों की रुचि के साथ समझौता करना पड़ता है। परन्तु यदि परिवार उच्च वर्गीय हो तो जठार-आयोजन में पौष्टिकता के साथ-साथ सदस्यों की रुचि को महत्त्व देना पड़ता है। 

(iii) परिवार का व्यवसाय पदि परिवार के सदस्य शारीरिक श्रम करने वाले हो तो आहार में अधिक कैलोरी बाले खाद्य-पदार्थों को शामिल करना पड़ता

*है। दूसरी तरफ परिवार में मानसिक श्रम करने वाले या बैठ कर कार्य करने वाले सदस्य हों तो उनके स्वास्थ्य के अनुसार खाद्य पदार्थों का चुनाव करना चाहिए।

(iv) परिवार की सामाजिक तथा धार्मिक मान्यताएँ-आहार आयोजन करने वाले को परिवार की सामाजिक तथा धार्मिक स्थिति का भी ध्यान रखना चाहिए कि जिस व्यक्ति के लिए आहार-नियोजन किया जाता है उसकी सामाजिक तथा धार्मिक मान्यताएँ क्या हैं? जैसे कुछ व्यक्ति प्याज नहीं खाते, लहसुन नहीं खाते, अंडा, मांस, मछली इत्यादि नहीं खाते। कुछ रात में मांसाहार तो कुछ दिन में मांसाहार पसंद करते हैं। सभी धर्म के लोगों में उपवास, व्रत रखे जाते हैं। धार्मिक त्योहारों के अवसर पर परम्परा के अनुसार आहार आयोजन करना चाहिए। 

Q. 15. समेकित बाल विकास परियोजना क्या है? इसके लक्ष्य समूह कौन-से हैं? 

Ans. समेकित बाल विकास योजना भारत सरकार का एक कल्याणकारी कार्यक्रम है जो 6 वर्ष के बच्चों (स्कूल जाने के पूर्व के बच्चों) तथा उनकी माताओं के लिए आजर, स्कूल-पूर्व शिक्षा तथा प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा की सुविधाएँ देता है। आज का बच्चा कल का भावी नागरिक है। 

उसके कन्धों पर ही देश का बोझ आने वाला है। इसीलिए बच्चों के स्वस्थ व ऊँचे जीवन स्तर हेतु उन्हें रोगमुक्त रखना आवश्यक हो जाता है। इसके लिए एकीकृत बाल विकास योजना लागू की गई है। इस योजना के निम्न लक्ष्य उद्देश्य है- 

(क) 0-6 वर्ष तक ही आयु के बच्चों के स्वास्थ्य एवं आहार में सुधार।

(ख) बच्चों के शारीरिक, मनोवैज्ञानिक एवं सामाजिक विकास की नींव रखना। 

(ग) कुपोषण, मृत्यु एवं अस्वस्थता एवं स्कूल छोड़कर पढ़ाई न करने की में परिवर्तन लाना।

(घ) बच्चों के सामान्य एवं आहार सम्बन्धी आवश्यकताओं के बारे में सामान्य जानकारी बढ़ाना।

Q. 16. स्तन्यमोचन क्या है? बच्बों के लिए स्तन्यमोचन के महत्त्व का वर्णन करें। (What is weaning? Describe about the importance of weaning for children.)

Ans. स्तन्यमोचन (Weaning)-बच्चे के आहार में स्तनपान या दूध पिलाने की विधियों के स्थान पर अन्य खाद्य पदार्थों को शामिल करने की प्रक्रिया को स्तन्यमोचन कहते हैं। 

स्तन्यपालन एक क्रमिक प्रक्रिया है जिसमें बच्बों के हाव-भाव, व्यवहार का अध्ययन करते हुए उसके आहार में सामान्य खाद्य पदायाँ को शामिल किया जाता है। इस प्रक्रिया को किस उम्र से शुरू किया जाये यह तय करने की जिम्मेदारी माता-पिता पर होती है। 

बच्चों में स्तन्यमोचन की प्रक्रिया उस समय शुरू करनी चाहिए जब बच्चा खुद से कोई वस्तु लेकर उसे मुँह में लेता है और चबाने की कोशिश करता है। 

कई शोधों से यह पता चलता है कि 6 वर्ष की उम्र में स्तन्यमोचन प्रक्रिया आरम्भ करना उत्तम होता है और आहार में दूध बिल्कुल छोड़ नहीं देनी चाहिए क्योंकि दूध सर्वश्रेष्ठ पौष्टिक आहार है।

शिशु के लिए स्तनपान श्रेष्ठ आहार होता है और 6 माह की अवस्था तक सिर्फ स्तनपान ही जरूरी होता है। इसके बाद गाय का दूध बोतल के माध्यम से पिलाना चाहिए। जब शिशु खुद से कोई वस्तु खाने की कोशिश करे तो आहार में तरल खाद्य पदार्थों जैसे-जूस, खीर, गीला भात या खिचड़ी आदि चम्मच या हाथ से खिलाना चाहिए। इस समय से बच्चों को स्तनपान या बोतल से दूध पिलाने की आदत को छुड़ाने की कोशिश करनी चाहिए।

बच्चों के लिए स्तन्यमोचन का महत्त्व 

(1) शिशु की वृद्धि हेतु-शिशु के वृद्धि के लिए स्तन्यमोचन आवश्यक है। शिशु का भार 6 महीने में दुगुना हो जाता है तथा एक वर्ष में तीन गुना हो जाता है। इसके लिए आहार में सामान्य खाद्य पदार्थों को लेना जरूरी हो जाता है।

(ii) सामान्य खाद्य पदार्थों की आवश्यकता-सामान्य मनुष्य अपने आहार में ठोस खाद्य पदार्थों को लेता है। बच्चों में इस आदत को विकसित करने के लिए स्तन्यमोचन जरूरी होता है। यद्यपि बच्चों में छः महीने के पश्चात् से ही खुद से कोई वस्तु मुँह में लेने और चवाने की प्रवृत्ति पाई जाती है।

(iii) संतुलित भोजन की आवश्यकता-मनुष्य को अपने कार्यकलापों के अनुरूप संतुलित भोजन की आवश्यकता होती है। उसे अपने भोजन में उचित मात्रा में कैलोरी, विटामिन, खनिज पदार्थ, प्रोटीन आदि की जरूरत होती है। संतुलित भोजन के लिए स्तन्यमोचन की प्रक्रिया प्रारम्भ करनी होती है।

(iv) सामान्य भोजन खाने की रुचि वच्चे अपने चारों ओर के वातावरण के प्रति जागरूक होते हैं और कोई भी नई वस्तु को गौर से देखते हैं और उसे लेने की कोशिश करते हैं। दूसरे को कुछ खाते देखकर या मुँह चबाते देखकर वे भी खाने की मांग करते हैं। बच्चों में सामान्य भोजन खाने के प्रति रुचि को देखकर स्तन्यमोचन की प्रक्रिया में इन्हें शामिल करना चाहिए

(v) आहार में विविधता-बच्चों को जन्म लेते ही दूध पिलाया जाता है और बड़े होने पर भी दूध को आहार में हमेशा रखा जाता है। हमेशा दूध पीने से बच्चों में अरुचि पैदा होती है और वे इससे दूर भागते हैं। मनुष्य हमेशा से आहार में विविधता चाहता है। इसके लिए स्तन्यमोचन की प्रक्रिया आवश्यक है।

(vi) विशेष आहार की आवश्यकता-कुछ बच्चों के शारीरिक बनावट, दुबलेपन या अन्य रोगों के कारण आहार में कुछ विशेष खाद्य पदार्थों को प्रमुखता से अधिक मात्रा में लेना होता है। इस आवश्यकता की पूर्ति दूध से नहीं होती है बल्कि सामान्य खाद्य पदार्थों से ही होती है। इसलिए स्तन्यमोचन आवश्यक है।

Q. 17. ज्वर के रोगी को कौन-कौन से चार भोज्य पदार्थ दिए जा सकते हैं? (Write any four foods that can be given to fever – patients.)

Ans. ज्वर के रोगी को निम्न चार भोज्य पदार्थ दिए जा सकते हैं-

(i) फल-जूस तथा ग्लूकोज जल-ज्वर रोगी शारीरिक रूप से कमजोर हो जाता है तथा इस समय इनर्जी की आवश्यकता 50% तक बढ़ जाती है। इसकी पूर्ति हेतु रोगी के आहार में फल-जूस तथा ग्लूकोज जल देना चाहिए। ग्लूकोज ज्वर रोगी के फैद तथा कार्बोहाइड्रेट की जरूरत को पूरी करता है। फलों का जूस

शरीर में विटामिन की कमी की पूर्ति करता है।

(ii) प्रोटीन युक्त आहार जैसे रोटी-ज्वर के समय उत्तकों के टूटने के कारण शरीर को प्रोटीन की अधिक आवश्यकता होती है। इसकी पूर्ति हेतु आहार में रोटी जैसे प्रोटीन प्रचुर खाद्य पदार्थ देने चाहिए। 

(iii) हरी सब्जियाँ-ज्वर रोगी के शरीर में सोडियम तथा नमक की कमी हो जाती है। इसकी पूर्ति के लिए हरी सब्जियाँ तथा दूध को शामिल करना चाहिए। 

(iv) दूध तथा जल-जवर के समय शरीर में भारी मात्रा में जल की कमी हो जाती है। जल शरीर के तापमान को संतुलित करने में मदद करता है। अतः रोगी को जल अधिक मात्रा में पीना चाहिए। पेय पदार्थों में दूध, बिना बर्फ का शरबत, सूप आदि भी शामिल करना चाहिए।

Q. 18. आहार आयोजन को प्रभावित करने वाले कारकों के बारे में लिखें। (Write about the factors affecting meal planning.)

Ans. स्वयं करे

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