VVI Class 12 PART B Sociology Chapter 1 Notes In Hindi भारत में सामाजिक परिवर्तन एवं विकास

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Class 12 PART B Sociology Chapter 1 Notes In Hindi भारत में सामाजिक परिवर्तन एवं विकास

Class12th 
Chapter Nameभारत में सामाजिक परिवर्तन एवं विकास
Chapter numberChapter 1
PART B
Book NCERT
SubjectSociology
Medium Hindi
Study MaterialsNotes & Questions answer
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भारत में सामाजिक परिवर्तन एवं विकास


मनुष्य के समूह को समाज कहा जाता है। मनुष्य समाज में रहकर अपना जीवन-यापन करता है। अतः मनुष्य और समाज में घनिष्ठ संबंध है। मनुष्य के जीवन में निरंतर परिवर्तन आते रहते हैं। 

अतः परिवर्तन जीवन का नियम है। समाज में भी परिवर्तन होते रहते हैं। जिससे मनुष्य के जीवन में भी परिवर्तन होते रहते हैं। सामाजिक परिवर्तनों से सामाजिक ढाँचे में परिवर्तन आते रहते हैं। आज समाज के अधिकतर व्यक्ति ऐसे कार्यों को करने में लगे हैं जो कि पहले के लोगों में कार्यों से भिन्न हैं। 

समाज मानवीय संबंधों का जाल है जब मानव व्यवहारों या मानवीय संबंधों के संशोधन होने लगता है तो इसे हम सामाजिक परिवर्तन कहते हैं। भारत में यदि हम देखें तो एक बड़ा परिवर्तन होता रहा है। प्राचीन भारतीय समाज और वर्तमान भारतीय समाज में एक बड़ा परिवर्तन देखने को मिलता है। 

समाजशास्त्रियों ने सामाजिक परिवर्तन को दो श्रेणियों में विभाजित किया है संरचनात्मक प्रक्रियाएँ और सांस्कृतिक प्रक्रियाएँ। जाति, नातेदारी, परिवार और व्यावसायिक समूह संरचनात्मक परिवर्तन के कुछ विशिष्ट पक्ष हैं।

उपनिवेशवाद ने राजनीतिक, आर्थिक एवं सामाजिक संरचना में नवीन परिवर्तन उत्पन्न किया है। संरचनात्मक परिवर्तन के अंतर्गत औद्योगीकरण एवं नगरीकरण जैसे विषय-वस्तु में समय के परिवर्तन के साथ-साथ इनमें भी सदा परिवर्तन होते रहे हैं। 

VVI Class 12 PART B Sociology Chapter 1 Notes In Hindi भारत में सामाजिक परिवर्तन एवं विकास

औद्योगीकरण और नगरीकरण का अर्थ केवल उत्पादन व्यवस्था, तकनीकी नवीनीकरण तथा आबादी की सघनता ही नहीं है बल्कि यह हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। विज्ञान मानव विरासत का एक महत्वपूर्ण तत्व है जो प्रकृति को व्यवस्थित ज्ञान प्रदान करता है। प्रौद्योगिकी इस ज्ञान को व्यावहारिक रूप प्रदान करती है। 

प्रौद्योगिकी का एक व्यावहारिक लक्ष्य होता है। इसका विकास सामान्य मानव को लाभ पहुँचाने की इच्छा से ही हुआ है। यह लक्ष्य कृषि, यातायात, संचार आदि में अनुभव किया गया है। हमारे जीवन में जो तेजी से परिवर्तन होते हैं वे नयी तकनीकी, नए आविष्कर और उत्पादन के तरीकों से संबंधित होते हैं।

औपनिवेशीकरण के चलते भारत में इंगलैंड का उपनिवेश स्थापित हुआ। क्योंकि भारत में अंग्रेजी हुकूमत स्थापित हुई। इसके कारण भारत में विभिन्न प्रकार के परिवर्तन हुए जिनमें औद्योगीकरण तथा नगरीकरण में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए। 

औद्योगीकरण शब्द आर्थिक, सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया को व्यक्त करता है। भारत में औद्योगीकरण की गति स्वतंत्रता से पूर्व बहुत धीमी थी। स्वतंत्रता के पश्चात् सरकार ने पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से तेजी से औद्योगीकरण की गति को बढ़ाया। 

CLASS 12 NCERT SOLUTION IN ENGLISHCLASS12 NCERT SOLUTION IN HINDI
Historyइतिहास
Geography भूगोल
Political science राजनीति विज्ञान
English SubjectResult
Hindi SubjectHistory answer keys

सार्वजनिक क्षेत्र में उपक्रमों का तेजी से विकास हुआ। नगरीकरण दह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से नगरीय तत्वों या शहरीकरण का विकास होता है। 

सामान्य रूप से जनसंख्या के घनत्व एवं आकार में वृद्धि, सामाजिक संबंधों में विषमता एवं औपचारिकता का आधिक्य, सामाजिक गतिशीलता एवं परिवर्तनशीलता में वृद्धि, व्यक्तिवादी जीवन-दर्शन का बोलबाला तथा सांस्कृतिक विविधता को नगरीय तत्व माना जाता है। इन तत्वों

में वृद्धि एवं प्रसार ही नगरीकरण है। वास्तव में, वर्तमान समय में भारत में औद्योगीकरण तथा नगरीकरण के क्षेत्र में बहुत विकास हुआ है।


sociology class 12 chapter 1 questions and answers in hindi


1. उपनिवेशवाद का हमारे जीवन पर किस प्रकार का प्रभाव पड़ा है। आप या तो किसी एक पक्ष जैसे संस्कृति और राजनीति को केन्द्र में रखकर या पक्षों को जोड़कर विश्लेषण कर सकते हैं ?

Ans. एक स्तर पर, एक देश के दूसरे देश पर शासन को उपनिवेशवाद माना जाता है। आधुनिक काल में पश्चिमी उपनिवेशवाद का सबसे ज्यादा प्रभाव रहा है। 

भारत के इतिहास से यह स्पष्ट होता है कि यहाँ काल और स्थान के अनुसार विभिन्न प्रकार के समूहों का उन विभिन्न क्षेत्रों पर शासन रहा जो आज के आधुनिक भारत को निर्मित करते हैं, लेकिन औपनिवेशिक

शासन किसी अन्य शासन से अलग और प्रभावशाली रहा। इसके कारण जो परिवर्तन आए वह अत्यधिक गहरे और भेदभावपूर्ण रहे हैं।

ये परिवर्तन या प्रभाव निम्न हैं- राजनीतिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में प्रभाव – हमारे देश में स्थापित संसदीय विधि एवं शिक्षा व्यवस्था ब्रिटिश प्रारूप व प्रतिमानों पर आधारित है। यहाँ तक कि हमारा सड़कों पर बाएँ चलना भी ब्रिटिश नियमों का अनुकरण ही है। 

सड़क के किनारे रेहड़ी व गाड़ियों पर हमें ‘ब्रेड-ऑमलेट’ और ‘कटलेट’ जैसी खाने की चीजें आमतौर पर मिलती हैं। और तो और एक प्रसिद्ध बिस्कुट निर्माता कंपनी का नाम भी ‘ब्रिटेन’ से संबद्ध है। 

अनेक स्कूलों में ‘नेक-टाई’ पोशाक का एक अनिवार्य हिस्सा बन गई है। कितनी पाश्चात्यता है हमारे दैनिक जीवन में उपयोग में आने वाली इन चीजों में हम प्रायः पश्चिम की प्रशंसा करते हैं, लेकिन अक्सर विरोध भी करते हैं। 

ऐसे बहुत-से उदाहरण हमें अपने दैनिक जीवन में देखने को मिलते हैं। इन उदाहरणों से पता चलता है कि ब्रिटिश उपनिवेशवाद अब भी हमारे जीवन का एक जटिल अंग है।

हम अंग्रेजी भाषा का उदाहरण भी ले सकते हैं, जिसके बहुआयामी और विरोधात्मक प्रभाव से हम सभी परिचित हैं। उपयोग में आने वाली अंग्रेजी भाषा नहीं है बल्कि हम देखते हैं कि बहुत-से भारतीयों ने अंग्रेजी भाषा में उत्कृष्ट साहित्यिक रचनाएँ भी लिखी हैं। 

अंग्रेजी के ज्ञान के कारण भारत को भूमंडलीकृत अंतर्राष्ट्रीय बाजार में एक विशेष स्थान प्राप्त हुआ है। लेकिन यह भी नहीं भूला जा सकता है कि अंग्रेजी आज भी विशेषाधिकारों का प्रतीक है। जिसे अंग्रेजी का ज्ञान नहीं होता है उसे रोजगार के क्षेत्र में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 

लेकिन दूसरी ओर अंग्रेजी भाषा का ज्ञान अनेक वंचित समूहों के लिए लाभकारी सिद्ध हुआ है। दलितों के संदर्भ में ये बातें उपयुक्त हैं। परंपरागत व्यवस्था में दलितों को औपचारिक शिक्षा से वंचित रहना पड़ा था। अंग्रेजी के ज्ञान से अब दलितों के लिए भी अवसरों के द्वार खुल गए हैं। 

2. औद्योगीकरण और नगरीकरण का क्या परस्पर संबंध है ? विचार करें।

Ans. नगरीकरण एवं औद्योगीकरण में पाए जाने वाला पारस्परिक संबंध सदैव विवाद का विषय रहा है। अधिकतर विद्वानों का मत है कि नगरीकरण के लिए औद्योगीकरण आवश्यक है। 

औद्योगीकरण में उद्योगों का विकास होता है और उसके लिए कच्चा माल, शक्ति के साधन, श्रमिकों के आने-जाने के लिए परिवहन और यातायात के साधन आवश्यक हैं। औद्योगीकरण के कारण ये सुविधाएँ छोटे नगरों को बड़े नगरों में बदल देती हैं। कभी-कभी औद्योगीकरण नए सिरों से नगरों को विकसित करने में भी सहायक है। 

ऐसे नगरों को औद्योगिक नगर कहा जाता है। अतः हम कह सकते हैं कि नगरीकरण के लिए औद्योगीकरण आवश्यक है। जहाँ उद्योगों का विकास होता है वहाँ नगरों का भी विकास होता है। किसी एक स्थान पर जनसंख्या के केंद्रीभूत होने के लिए तकनीकी विकास आवश्यक है जिसका संबंध औद्योगीकरण की प्रक्रिया से संबंधित है। औद्योगीकरण तथा नगरीकरण दोनों प्रक्रियाएँ परस्पर संबंधित हैं।


अति लघु उत्तरीय प्रश्न (VERY SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


1. परिवर्तन से क्या तात्पर्य है ? 

Ans. वर्तमान स्थिति में बदलाव परिवर्तन कहलाता है।

2. सामाजिक परिवर्तन से क्या अभिप्राय है ?

Ans. समाज के सदस्य जब निश्चित तरीकों से हटकर कुछ सोचते हैं और काम करते हैं उसे सामाजिक परिवर्तन कहते हैं।

3. संरचनात्मक परिवर्तन से क्या तात्पर्य है ? 

Ans. सामाजिक संबंधों में होने वाले परिवर्तन को संरचनात्मक परिवर्तन कहते हैं। परिवार, विवाह, नातेदारी और व्यावसायिक समूह संरचनात्मक प्रक्रिया के अंग हैं। इनमें यदि परिवर्तन आता है तो यह संरचनात्मक परिवर्तन कहलाता है।

4. उपनिवेशीकरण क्या है ?

Ans. साम्राज्यवादी देशों द्वारा अपने लाभ के लिए (अविकसित देशों पर कब्जा करना उपनिवेशीकरण कहलाता है।

5. औद्योगीकरण से आप क्या समझते हैं ?

Ans. औद्योगीकरण प्रौद्योगिकी उन्नति की वह प्रक्रिया है, जो सामान्य उपकरणों से चलने वाली घरेलू उत्पादन से लेकर वृहद् स्तरीय कारखानों के उत्पादन तक संपन्न होती है। 

6. नगरीकरण से क्या तात्पर्य है ? 

Ans. नगरीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें गाँव की स्थिति में परिवर्तन होते हुए भी नगर में परिवर्तित हो जाता है और रहन-सहन में शहरीपन आ जाता है।

7. भारत में 10 लाख जनसंख्या वाले नगरों की संख्या बताइए । 

Ans. 10 लाख या अधिक जनसंख्या वाल नगरों की संख्या 1981 में 12 थी जो 2001 में बढ़कर 38 हो गई है।

8. नगरीकरण की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं ? 

Ans. अत्यधिक गतिशीलता, समय की कमी, उन्नत प्रौद्योगिकी पर आधारित जीवन, भाग दोड़, मलिन बस्तियों, परिवहन की समस्या, बिजली-पानी जैसी आवश्यकताओं की कमी, एकाकी परिवार आदि ।

9. आधुनिकीकरण से क्या अभिप्राय है ? 

Ans. आधुनिकीकरण एक बहुआयामी आर्थिक, राजनैतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक प्रक्रिया है जो समाज के सदस्यों के जीवन को एक नया रूप प्रदान करती है। 

10. आधुनिकीकरण के लिए आवश्यक शर्तें क्या हैं ?

Ans. शिक्षा, संचार माध्यम, यातायात के साधनों की वृद्धि, लोकतांत्रिक राजनैतिक संस्थाएँ, गतिशील जनसंख्या, संयुक्त परिवार के स्थान पर एकाकी परिवार आधुनिकीकरण के लिए आवश्यक हैं। 


लघु उत्तरीय प्रश्न (SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


1. सामाजिक परिवर्तन से आप क्या समझते हैं ? 

Ans. सामाजिक परिवर्तन किसी प्रक्रिया का संबंध सामाजिक संबंधों तथा भारत की व्यवस्था में होने वाले परिवर्तन से है। गिलिन और गिलिन के अनुसार, “सामाजिक परिवर्तन जीवन के स्वीकृत प्रकारों में परिवर्तन है। 

भले ही वे परिवर्तन भौगोलिक दशाओं में हुए हों या सांस्कृतिक साधनों पर जनसंख्या की रचना या सिद्धांतों के परिवर्तन से हुए हो, या प्रचार से हुए हो या समूह के अंदर आविष्कार से हुए हो।”

जानसन के अनुसार, “सामाजिक परिवर्तन से तात्पर्य सामाजिक ढाँचे में परिवर्तन से है।” प्रत्येक परिवर्तन सामाजिक परिवर्तन नहीं कहलाता वरन् केवल सामाजिक संबंधों, सामाजिक संस्थाओं और संस्थाओं के परस्पर संबंधों में होने वाला परिवर्तन ही सामाजिक परिवर्तन की श्रेणी में आता है।

2. सामाजिक परिवर्तन में आर्थिक कारकों का प्रभाव बताइये। 

Ans. सामाजिक परिवर्तन सामाजिक संबंधों, सामाजिक संरचना, सामाजिक संस्थाओं अथवा संस्थाओं में परस्पर संबंधों में होने वाला परिवर्तन है। सामाजिक परिवर्तन के अनेक कारक हैं जिनमें जनसंख्यात्मक कारक, जैवकीय कारक, सांस्कृतिक, भौगोलिक और मनोवैज्ञानिक कारक प्रमुख हैं। 

सामाजिक परिवर्तन में आर्थिक कारक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पूँजीवाद का विकास, श्रम विभाजन और विशेषीकरण, जीवन का उच्च स्तर, आर्थिक संकट, बेरोजगारी और निर्धनता प्रमुख आर्थिक कारक हैं। आर्थिक कारकों का समाज पर काफी प्रभाव पड़ता है। 

कार्ल मार्क्स ने सामाजिक परिवर्तन की व्याख्या आर्थिक आधारों पर ही की है। उनके अनुसार उत्पादन के साधनों में परिवर्तन से उत्पादन की शक्तियों और संबंधों में भी परिवर्तन होते रहते हैं जिनसे आर्थिक संरचना प्रभावित होती है। आर्थिक संरचना सभी प्रकार के संबंधों को निर्धारित करती है। 

3. संरचनात्मक परिवर्तन से आप क्या समझते हैं ?

Ans. समाजशास्त्रियों ने सामाजिक परिवर्तन को दो भागों में विभाजित किया है-संरचनात्मक प्रक्रिया और सांस्कृतिक प्रक्रिया परिवर्तन की प्रक्रिया संरचनात्माक, सामाजिक संबंधों, जाति, नातेदारी, परिवार और पेशेगत समूह के निर्माण से है। इनमें परिवर्तन संरचनात्मक परिवर्तन कहलाता है। 

उदाहरण के लिए कृषि कार्य जिसमें परिवार के सदस्य मिलकर खेती करते हैं, कृषि का परंपरागत तरीका है, परंतु जब तरीका बदलता है तो भाड़े पर श्रमिक लगाकर बाजार में बिक्री के लिए उत्पादन किया जाता है तो इसे हम संरचनात्मक परिवर्तन कहते हैं। संयुक्त परिवार प्रणाली के विघटन और एकाकी परिवार में परिवर्तन होना संरचनात्मक परिवर्तन है। 

संयुक्त परिवार परंपरागत थे। इनमें बच्चों का लालन-पालन, शिक्षा, व्यवसाय, सामाजिक सुरक्षा स्वयं ही प्राप्त हो जाती थी। परंतु एकाकी परिवार के प्रचलन से ये सभी क्रियाएँ विभिन्न संगठनों व संस्थाओं के द्वारा सम्पन्न की जाती हैं। 

स्कूल, आर्थिक संगठन, सरकारी विभाग और अन्य संस्थाएँ इन कार्यों को करती हैं। सामाजिक परिवर्तन लाने में औद्योगीकरण, आधुनिकीकरण और पश्चिमीकरण का विशेष योगदान है।

4. नगरीकरण एवं नगरीयता में अंतर स्पष्ट कीजिए । 

Ans. नगरीकरण नगरीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें लोग गाँवों में रहने के बजाय कस्बों व शहरों में रहना शुरू कर देते हैं। वे ऐसे तरीकों का प्रयोग करते हैं कि कृषि आधारित निवास क्षेत्र गैर-कृषि शहरी विकास क्षेत्र में परिवर्तित हो जाता है। 

शहरी केंद्रों का विकास बढ़ी हुई औद्योगिक व व्यावसायिक गतिविधियों का परिणाम है। कस्बों और नगरों की जनसंख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है और वे गैर-कृषि परिवारों की संख्या में वृद्धि के कारण हैं।

नगरीयता- लुई वर्ष के अनुसार नगरीय परिवेश एक विशिष्ट प्रकार के सामाजिक जीवन का निर्माण करता है जिसे नगरीयता कहते हैं। नगरों में सामाजिक जीवन अधिक औपचारिक । और अवैयक्तिक होता है और आपसी संबंध जटिल श्रम-विभाजन पर आधारित होते हैं और इनकी प्रवृत्ति अनुबंधात्मक होती है। 

5. भारत में नगरीकरण की प्रवृत्ति क्यों बढ़ रही है ? 

Ans. भारत में नगरीकरण की बढ़ती प्रवृत्ति के पीछे नगरों की ओर प्रवसन की भूमिका महत्त्वपूर्ण है। बड़ी संख्या में लोग गाँव को छोड़कर सिर्फ बड़े नगरों में ही नहीं छोटे और मध्यम नगरों में आ रहे हैं। वह प्रवसन उत्पादन व नौकरी से संबंधित है। अकुशल मजदूरी में मौसमी प्रवसन की प्रवृत्ति भी आम हो गई है। मजदूर मौसमी प्रवसन करते हैं और बाद में अपनी पसंद के क्षेत्रों में स्थायी रूप से बस जाते हैं।

6. नगरीय जीवन की मुख्य समस्याएँ क्या हैं ? 

Ans. भारत में नगरीकरण तेज गति से बढ़ रहा है। इसने मानव जीवन को कई प्रकार से प्रभावित किया है। नगरीय केंद्रों के विस्तार ने विविध प्रकार की समस्याओं को भी बढ़ाया है। नगरों में अत्यधिक भीड़भाड़, प्रदूषण, आवास तथा झोपड़ीपट्टी, अपराध, बाल अपराध, नशाखोरी तथा मादक द्रव्यों का सेवन आदि कुछ प्रमुख समस्याएँ हैं। नगरों में अत्यधिक भीड़-भाड़ के कारण इसका प्रभाव आवास, जल आपूर्ति, साफ-सफाई, यातायात, विद्युत आपूर्ति तथा रोजगार के अवसरों में होने वाली गिरावट पर स्पष्ट देख जा सकता है। आवासविहीन लोगों को बढ़ती हुई संख्या, घर के किरायों में अत्यधिक वृद्धि और छोटे-छोटे मकानों में पूरे परिवार के साथ रहना मुख्य समस्याएँ हैं।

7. नगरीकरण से क्या अभिप्राय है ? Or, नगरीकरण की अवधारणा की व्याख्या कीजिए। 

Ans. जब ग्रामीण जनता काम की खोज में नगरों की ओर प्रस्थान करने लगती है तो नगरों की जनसंख्या बढ़ने लगती है। इसे ही नगरीकरण कहते हैं। नगरीकरण का अर्थ नगरों के विकास से लिया जाता है। यह वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से ग्रामीण समाज नगरीय समाज में परिवर्तित होता है। 

इसे औद्योगीकरण का परिणाम और कारण दोनों ही कह सकते हैं। औद्योगीकरण के कारण नगरों का विकास होता है। श्रीनिवास के अनुसार, “नगरीकरण से अभिप्राय केवल संकुचित क्षेत्र में अधिक जनसंख्या से नहीं होता बल्कि सामाजिक-आर्थिक संबंधों में परिवर्तन से भी होता है।”

8. नगरीकरण के मुख्य तत्व कौन-से हैं ?

Ans. नगरीकरण वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से नगरीय तत्त्वों या शहरीपन का विकास एवं प्रसार होता है। सामान्य रूप से जनसंख्या के घनत्व एवं आकार में वृद्धि, सामाजिक संबंधों में विषमता एवं औपचारिकता का आधिक्य, सामाजिक गतिशीलता एवं परिवर्तनशीलता में वृद्धि, व्यक्तिवादी जीवन-दर्शन का बोलबाला तथा सांस्कृतिक विविधता को नगरीय तत्व माना जाता है। इन तत्त्वों में वृद्धि एवं प्रसार ही नगरीकरण है।

9. क्या नगरीकरण के लिए औद्योगीकरण आवश्यक है ? 

Ans. नगरीकरण एवं औद्योगीकरण में पाए जानेवालों में पारस्परिक संबंध सदैव विवाद का विषय रहा है। अधिकतर विद्वानों का मत है कि नगरीकरण के लिए औद्योगीकरण आवश्यक है।

 ‘औद्योगीकरण में उद्योगों का विकास होता है और उसके लिए कच्चा माल, शक्ति के साधन, श्रमिक के आने-जाने के लिए परिवहन और यातायात के साधन आवश्यक हैं। औद्योगीकरण के कारण ये सुविधाएँ छोटे नगरों को बड़े नगरों में बदल देती हैं।

कभी-कभी औद्योगीकरण नए सिरे से नगरों को विकसित करने में भी सहायक होते हैं। ऐसे नगरों को औद्योगिक नगर कहा जाता है। अतः हम कह सकते हैं कि नगरीकरण के लिए औद्योगीकरण आवश्यक है। जहाँ उद्योगों का विकास होता है वहाँ नगरों का भी विकास होता है। 

किसी एक स्थान पर जनसंख्या को भूत होने के लिए तकनीकी विकास आवश्यक है जिसका संबंध औद्योगीकरण की प्रक्रिया संबंधित है। औद्योगीकरण तथा नगरीकरण दोनों प्रक्रियाएँ परस्पर संबंधित हैं। 

10. “औद्योगीकरण और नगरीकरण में अनिवार्य सह-संबंध नहीं है।” स्पष्ट कीजिए ।

Ans. समाजशास्त्रियों का मत है कि औद्योगीकरण और नगरीकरण की प्रक्रियाएँ यद्यपि परस्पर संबंधित हो सकती हैं फिर भी इनमें अनिवार्य या पूर्ण सहसंबंध नहीं है। दोनों प्रक्रियाएँ एक-दूसरे से स्वतंत्र है। भारत में मोहनजोदड़ो, हड़प्पा, पाटलिपुत्र, नालंदा, बनारस तथा दिल्ली अति प्राचीन नगर हैं। 

इन नगरों का विकास औद्योगीकरण से काफी पहले हुआ था। विकसित देशों में भी ईसा पूर्व नगरों के अस्तित्व के उदाहरण हैं। कुछ ऐसे भी केंद्र हैं जो केवल औद्योगिक केंद्र हैं। 

वहाँ नगरीय जनसंख्या में अधिक वृद्धि नहीं हुई है। यह सत्य है कि औद्योगीकरण की प्रक्रिया प्रारंभ होने पर नगरों का विकास बहुत तेज गति से होता है लेकिन भारत में औद्योगीकरण से पूर्व नगरों का अस्तित्व यह सिद्ध करता है कि ये दोनों स्वतंत्र क्रियाएँ हैं।

11. भारत में नगरीकरण के प्रमुख कारण बताइये। 

Ans. नगरीकरण – यह वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से ग्रामीण समाज नगरीय समाज में परिवर्तित होता है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसी भी देश में नगरीय जनसंख्या में वृद्धि होने लगती है। नगरीकरण सामाजिक परिवर्तन की एक जटिल प्रक्रिया है। नगरीकरण वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से नगरीय तत्त्वों का विकास और प्रसार होता है। भारत में नगरीकरण के कारण :

(i) जनसंख्या में वृद्धि और औद्योगीकरण- भारत में जनसंख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। यह बढ़ती हुई जनसंख्या और आजीविका की खोज में नगरों की ओर गतिशील हो जाती है। 

(ii) औद्योगीकरण – वैज्ञानिक आविष्कारों के कारण उद्योग-धंधों का तेजी से विकास हुआ है। इसके परिणामस्वरूप नगरों का विकास हुआ। जिन स्थानों पर उद्योगों लगे, वहाँ नये नगर विकसित हो गये। 

(iii) यातायात और संदेश वाहन के साधनों का विकास-यातायात के साधनों के विकास के कारण जनसंख्या एक स्थान से दूसरे स्थान पर सरलता से आ सकती है। संदेशवाहन के साधनों के विकास से सामाजिक गतिशीलता और नगरों को प्रोत्साहन मिला है। 

(iv) शिक्षा और मनोरंजन के साधन – आधुनिक युग में शिक्षण संस्थाएँ ज्ञान का केंद्र बनीं और दूर-दूर स्थानों से विद्यार्थी आकर इन शिक्षा संस्थानों में शिक्षा पाने लगे। नगरों में सिनेमा, थियेटर आदि अनेक मनोरंजन के साधनों ने नगरों के विकास में सहयोग दिया। 

(v) व्यापारिक क्षेत्र में उन्नति-व्यापारिक क्षेत्र में उन्नति, राजनीतिक दलों का विकास, प्रजातांत्रिक शासन प्रणाली का विकास, अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के विकास, नये आर्थिक संगठनों का जन्म और अनुकूल भौतिक परिस्थितियों के कारण नगरीकरण की प्रवृत्ति में वृद्धि हो रही है। 


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (LONG ANSWER TYPE QUESTIONS) 


1. सामाजिक परिवर्तन में प्रौद्योगिकी की भूमिका बताइये ।

Ans. सामाजिक परिवर्तन लाने में प्रौद्योगिकी की विशेष भूमिका रहती है। प्रौद्योगिकी एक व्यवस्थित ज्ञान है जिसमें यंत्रों और उपकरणों का प्रयोग किया जाता है। इसमें वे सभी कुशलताएँ और ज्ञान व क्रियाएँ शामिल हैं जिनके द्वारा सामाजिक समूह अपने भौतिक और सामाजिक ढाँचे में परिवर्तन लाते हैं।

प्रौद्योगिकी और सामजिक परिवर्तन का घनिष्ठ संबंध है। प्रौद्योगिकी परिवर्तनों के साथ-साथ सामाजिक संबंध में भी परिवर्तन होते रहते हैं। नई प्रौद्योगिकी जीवन में नई स्थितियाँ एवं नवीन अवसरों को उत्पन्न करती है। 

जीवन की नई स्थितियाँ बहुत दूर तक जीवन के नये अवसरों के अनूकूल हो जाती हैं। उत्पादन की नई विधियों के प्रयोग से कारखाना पद्धति का उदय हुआ है। समाज में वर्ग भेद का जन्म हुआ। नवीन विचारधाराओं और आंदोलनों का जन्म हुआ, स्त्रियों का कार्यभार कम हुआ है परंतु औद्योगिक केंद्रों में गंदी बस्तियाँ बस गईं और श्रमिकों को नारकीय जीवन जीने के लिए विवश होना पड़ा।

प्रौद्योगिकी ने सामाजिक जीवन को अत्यधिक प्रभावित किया है। प्रौद्योगिकीय कारकों का जीवन के मूल्यों पर बहुत प्रभाव पड़ा है। मनुष्य के विचारों, प्रवृत्तियों और विश्वासों में परिवर्तन आये हैं। भारतीय जाति व्यवस्था, संस्कार और धार्मिक विश्वासों के स्वरूप में उल्लेखनीय परिवर्तन आये हैं। 

परिवार के कार्यों को विभिन्न संस्थाओं और समितियों ने ले लिया है। संयुक्त परिवार का तेजी से विघटन हो रहा है, उसके स्थान पर एकाकी परिवारों का चलन बढ़ गया है। विवाह बंधनों में शिथिलता आई है। राज्य का स्वरूप धर्मनिरपेक्ष होता जा रहा है। 

धार्मिक संकीर्णता समाप्त हो रही है। प्रौद्योगिकी का सबसे अधिक प्रभाव नागरिक जीवन पर पड़ा है। बीमारियाँ बढ़ रही हैं। पारिवारिक नियंत्रण में कमी आई है। नैतिकता का स्तर गिरा है। स्त्री-पुरुषों की जनसंख्या में विषमता आ रही है।

2. भारत में औद्योगीकरण की प्रगति का उल्लेख कीजिए । 

Ans. भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की स्थापना से पूर्व घरेलू और कुटीर उद्योगों का जाल बिठा हुआ था। यूरोप में औद्योगिक क्रांति के पश्चात उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम वर्षों में बड़े पैमाने पर उत्पादन करने वाली औद्योगिक इकाइयों की स्थापना की जाने लगी। लगभग 1850 के आस-पास भारत में बड़ी औद्योगिक इकाइयों की स्थापना की जाने लगी। 

1914 में भारत में जूट की सबसे बड़ी उत्पादन इकाई आरंभ की गई। सूती कपड़ा बनाने के लिए कारखाने खुलते गये तथा रेलवे प्रणाली का विकास हुआ। स्वतंत्रता से पूर्व भारत में लगभग एक सौ वर्ष तक

बड़े पैमाने पर उत्पादन कार्य चलता रहा। इस्पात स्वतंत्रता के पश्चात पंचवर्षीय योजनाओं के अंतर्गत औद्योगीकरण की गति में तेजी आई। 

भारत में जौद्योगिक क्षेत्र का विस्तार और विविधीकरण बड़े पैमाने पर हुआ। 1951 में उत्पादन करने वाली केवल दो इकाइयों थीं। 1980 तक इनकी संख्या बढ़कर 6 हो गई तथा उत्पादन क्षमता बढ़कर 80 लाख टन हो गई। अनेक ऐसे उद्योग स्थापित हुए जो 1951 से पूर्व भारत में नहीं थे। 

कृषि कार्य के लिए ट्रैक्टर, इलेक्ट्रोनिक्स, उर्वरक आदि क्षेत्रों में अनेक उत्पादन इकाइयों आरंभ की गई। अब सूती कपड़ा और जूट उत्पादन के अतिरिक्त सिन्थेटिक कपड़ा बनाने की अनेक इकाइयाँ स्थापित की गई। 

स्वतंत्रता के पश्चात सार्वजनिक क्षेत्र का तेजी से विकास किया गया। सार्वजनिक क्षेत्र में कोयला, भारी और हल्के इंजीनियरिंग पदार्थ, इंजन, हवाई जहाज, पेट्रोलियम उत्पाद और उर्वरक के कारखाने खोले गये। 

स्वतंत्रता के पश्चात देशा में तेजी से औद्योगीकरण हुआ है और भारत संसार के औद्योगिक देशों में गिना जाने लगा है। 

3. औद्योगीकरण के सामाजिक-आर्थिक परिणामों का विश्लेषण करें।

Ans. औद्योगीकरण ने हमारे आर्थिक और सामाजिक जीवन पर गहरा प्रभाव डाला है। औद्योगीकरण के कारण हमारी आर्थिक संरचना में परिवर्तन आया है। औद्योगीकरण ने हमारे घरेलू उत्पादन को पूरी तरह बदल दिया है। 

कारखानों में बड़े पैमाने पर उत्पादन होने लगा। विशेषज्ञों और औद्योगिक श्रमिकों का एक बड़ा वर्ग विकसित हुआ। औद्योगिक ढाँचे में परिवर्तन आया है। कृषि कार्य करनेवालों के तरीकों में परिवर्तन आने के कारण कृषि कार्य करनेवालों के आपसी संबंधी में भी परिवर्तन आया है। 

महिलाएं खेतों, कारखानों और व्यावसायिक संस्थानों में कार्य करने लगी हैं। परिवार के विभिन्न सदस्य अब भिन्न-भिन्न प्रकार के व्यवसाय करने लगे हैं। संयुक्त परिवार प्रथा जो अब तक आर्थिक, शैक्षिक, समाजीकरण और मनोरंजन जैसे कार्य करती रही है उसका विघटन हो रहा है। 

ये कार्य अब अन्य संस्थाओं ने ले लिए हैं। यातायात और संचार के साधनों का विकास से लोग बड़ी संख्या में ग्रामों से नगरों की ओर पलायन कर रहे हैं जहाँ उन्हें बेहतर अवसर उपलब्ध हैं।

जाति व्यवस्था जो भारतीय सामाजिक व्यवस्था की महत्त्वपूर्ण स्थिति है उसमें भी परिवर्तन आ रहा है। अनेक जातियों ने अपना व्यवसाय छोड़ा है। व्यावसायिक विविधता ने तमाम व्यवसायों को जाति के बंधन से मुक्त कर दिया है। 

ऊँची समझी जाने वाली जातियाँ उन व्यवसायों के लिए आगे आ रही हैं जो पहले अच्छे नहीं समझे जाते थे। छोटी समझी जाने वाली जातियाँ अब उन कार्यों को कर रही हैं जो कि पहले समाज के उच्च वर्ग के लोग करते थे। 

व्यवसाय तथा आय के आधार पर आज भारतीय समाज में पूँजीपति वर्ग, श्रमिक वर्ग और मध्यम वर्ग देखे जो सकते हैं। औद्योगिक विकास ने भारतीय गाँवों में जाति प्रथा, संयुक्त परिवार प्रथा और विवाह प्रथा को प्रभावित किया है। औद्योगीकरण से पुराने ग्रामीण रीति-रिवाजों में तेजी से परिवर्तन आ रहे हैं। यातायात के साधनों के विकास से श्रम की गतिशीलता बढ़ रही है।

 4. भारत में औद्योगीकरण के प्रभावों का उल्लेख कीजिए । 

Ans. भारत में औद्योगीकरण लगभग 100 वर्ष पुराना है। औद्योगीकरण ने भारत के सामाजिक-आर्थिक जीवन में विशेष प्रभाव डाला है। औद्योगीकरण के प्रभावों को हम निम्न आधार पर स्पष्ट कर सकते हैं-

(i) नगरीकरण — औद्योगीकरण के कारण अनेक नये औद्योगिक नगर विकसित हुए हैं। कारखानों में हजारों श्रमिकों को काम मिलने लगा है। गाँवों से असंख्य किसान काम की तलाश में नगरों में आते हैं। 

(ii) समाज में वर्ग-भेद औद्योगीकरण का सबसे बड़ा प्रभाव यह है कि इससे समाज मे वर्ग-भेद उत्पन्न हो जाता है। धनी और निर्धन का बीच अंतर बढ़ जाता है। श्रमिकों और पूँजीपतियों के बीच संघर्ष का कारण यह औद्योगीकरण ही है। 

(iii) नवीन विचारधाराओं का जन्म औद्योगिक वर्ग संघर्ष तथा नगरीकरण से नवीन विचारधाराओं का उदय हुआ है। जिन नगरों में बड़े कारखाने हैं वहाँ साम्यवादी विचारधारा का बोलबाला है। हड़ताल और तालाबंदी की स्थिति देखने को मिलती है!

(iv) गंदी और घनी बस्तियाँ – औद्योगिक नगरों में कारखानों के आस-पास गंदी बस्तियाँ बस जाती हैं। उनका युवक-युवतियों और बच्चों पर गहरा प्रभाव पड़ता है। 

(v) स्वियों के कार्यभार में कमी-मशीनों के उपयोग से स्त्रियों का काम सरल और कम परिश्रम वाला हो गया है। उन्हें भी पुरुषों के समान व्यावसायिक कार्य के लिए पर्याप्त समय मिलने लगा है। 

(vi) यातायात के साधनों का प्रभाव- सामाजिक संबंधों की स्थापना का संदेशवाहन के साधनों का विशेष प्रभाव पड़ता है। विभिन्न उद्योगों में मशीनों के प्रयोग से व्यापार का विकास हुआ है। 

(vii) कारखाना पद्धति का विकास-बड़े कारखानों की स्थापना से कुटीर उद्योगों का पतन हुआ है और उनके स्थान पर बड़े कारखानों की स्थापना हुई जिससे वहाँ कार्य करने वाले लोगों के रहन-सहन पर प्रभाव पड़ा है। कारखानों ने संबंधित व्यक्तियों के आपसी संबंधों को औपचारिक बना दिया है।

5. औद्योगीकरण का सामाजिक जीवन पर प्रभाव बताइये। 

Ans. औद्योगीकरण ने सामाजिक जीवन को बहुत अधिक प्रभावित किया है। इसका सामाजिक संबंधों पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ा है-

(i) परिवार संस्था और प्रभाव-औद्योगीकरण के फलस्वरूप परिवार क्षेत्र के बहुत-से कार्यों को विभिन्न संस्थाओं और समितियों ने ले लिया है। आज संयुक्त परिवार प्रणाली का विघटन हो रहा है, उसके स्थान पर एकाकी परिवारों का चलन तेजी से बढ़ रहा है। परिवार का संरचना भी तेजी से बदल रही है। परिवार में अब कर्ता का निरंकुश शासन नहीं रहा है और न ही स्त्रियों की स्थिति इतनी निम्न है।

(ii) विवाह संस्था पर प्रभाव – औद्योगीकरण के फलस्वरूप बड़े नगरों की स्थापना हो रही है। विवाह बंधन अबर शिथिल पड़ गये हैं। विवाह जो एक धार्मिक संस्कार था, अब एक सामाजिक समझौते का रूप ग्रहण कर लिया है। प्रेम विवाहों का महत्त्व बढ़ रहा है। 

(iii) धार्मिक संस्थाओं का प्रभाव-धर्म के प्रति लोगों की भावना कम हो रही है, वैज्ञानिक आविष्कारों ने मनुष्य के प्रकृति पर विजय प्राप्त करने की क्षमता को बढ़ाया है। राज्य भी धर्मनिरपेक्षता का पालन करते हैं। धार्मिक कट्टरता अब धीरे-धीरे कम हो रही है।

(iv) स्त्रियों की सामाजिक स्थिति में परिवर्तन- स्त्रियाँ अब घर की चाहारदीवारी से बाहर निकलकर पुरुषों के समान विभिन्न व्यवसायों को करने लगी हैं। 

(v) नागरिक जीवन पर प्रभाव-प्रौद्योगिकी की उन्नति से सामाजिक जीवन पर विभिन्न प्रकार के प्रभाव पड़ रहे हैं। सामुदायिक भावना की कमी, समय का मूल्य बढ़ जाना, बीमारियों का बढ़ना, पारिवारिक नियंत्रण का अभाव, नैतिकता का निम्न स्तर, स्त्री-पुरुषों की जनसंख्या में विषमता जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं।


FAQs


1. तकनीकी आविष्कारों का आम आदमी के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा है ?

Ans. गैस-चूल्हों, गैस, खेती में मशीनों का प्रयोगों, सड़कों का निर्माण, संचार के साधनों में वृद्धि, रेल व्यवस्था में सुधार, बिजली का प्रयोग आदि ने आम लोगों के जीवन में बहुत अधिक सुधार किया है। लोगों की मानसिकता में परिवर्तन आया है तथा जीवन में गुणात्मक सुधार हुआ है।

2. आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में धर्म पर क्या प्रभाव पड़ रहा है ?

Ans. आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में टेलीविजन धर्म और धार्मिक भावनाओं का विस्तार करने में सहायक हो रहा है। कई पारंपरिक संस्थाएँ और गतिविधियाँ फिर से शुरू हो गई हैं। आस्था, संस्कार, साधना चैनल पूरी तरह धर्म-प्रचार के लिए समर्पित हैं। धर्म-प्रवचन भक्तों को आध्यात्मिकता की ओर प्रेरित कर रहे हैं। योग के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है। 

3. आधुनिकीकरण की प्रक्रिया का ग्रामीण जीवन पर क्या प्रभाव पड़ रहा है ?

Ans. आधुनिकता की प्रक्रिया आज भारतीय ग्रामीण समुदायों में क्रियाशील है। गाँवों में किसान नये वैज्ञानिक तरीकों को प्रयोग में लाकर उन्नत कृषि में लगा है। सिंचाई, बिजली, उन्नत बीज, ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, कीटनाशकों, उर्वरकों का प्रयोग बढ़ रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में स्त्री-शिक्षा और प्रौढ़ शिक्षा का विस्तार किया जा रहा है। पुरानी कुरीतियाँ धीरे-धीरे कम हो रही हैं।

4. भारत में आधुनिकीकरण की प्रक्रिया को संक्षेप में समझाइए । 

Ans. समाजशास्त्री ए. एन. श्रीनिवास का मत है कि भारत में आधुनिकता की उपस्थिति ब्रिटिश काल से समझी जा सकती है। अंग्रेज इस देश में एक व्यापारी की तरह आए लेकिन जब उन्होंने राजसत्ता पर अधिकार कर लिया तो प्रभावी प्रशासन चलाने के लिए उन्होंने आधुनिकता को जन्म दिया। 

NOTES & QUESTIONS ANSWER


  1. Introducing Indian Society
  2. The Demographic Structure of the Indian Society
  3. Social Institutions: Continuity and Change
  4. The Market as a Social Institution
  5. Patterns of Social Inequality and Exclusion
  6. The Challenges of Cultural Diversity
  7. suggestions for projects work
  1. Structural Change
  2. Cultural Change
  3. The Story of Indian Democracy
  4. Change and Development in Rural Society
  5. Change and Development in Industrial Society
  6. Globalisation and Social Change
  7. Mass Media and Communications
  8. Social Movements

MCQS IN ENGLISH


  1. Introducing Indian Society
  2. The Demographic Structure of the Indian Society
  3. Social Institutions: Continuity and Change
  4. The Market as a Social Institution
  5. Patterns of Social Inequality and Exclusion
  6. The Challenges of Cultural Diversity
  1. Structural Change
  2. Cultural Change
  3. The Story of Indian Democracy
  4. Change and Development in Rural Society
  5. Change and Development in Industrial Society
  6. Globalisation and Social Change
  7. Mass Media and Communications
  8. Social Movements

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