Class 12 Political Science Notes Ch-10 In Hindi PART-B | राष्ट्र-निर्माण की चुनौतियाँ कक्षा 12 पाठ 10 के प्रश्न उत्तर भाग-B

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Class 12 Political Science Notes Ch-10 In Hindi में यह अध्याय काफी महत्वपूर्ण है| इस अध्याय से काफी प्रश्न परीक्षा में पूछे जा चुके हैं तथा यह अध्याय विद्यार्थी के लिए अति आवश्यक है क्योंकि इस अध्याय से हमें विश्व की राजनीति समझ में आती है|

तो छात्रों, इस लेख को पढ़ने के बाद, आपको इस अध्याय से परीक्षा में बहुत अधिक अंक प्राप्त होंगे, क्योंकि इसमें सभी परीक्षाओं से संबंधित प्रश्नों का वर्णन किया गया है, इसलिए इसे पूरा अवश्य पढ़ें।

मैं खुद 12वीं का टॉपर रहा हूं और मुझे पता है कि 12वीं की परीक्षा में किस तरह के प्रश्न पूछे जाते हैं। वर्तमान में, मैं एक शिक्षक की भूमिका भी निभा रहा हूँ, और अपने छात्रों को कक्षा 12वीं की महत्वपूर्ण जानकारी और विषयों का अभ्यास भी कराता हूँ। मैंने यहां 5 वर्षों से अधिक के अपने अनुभव के साथ प्रश्न-उत्तर लेख लिखा है। इस पोस्ट की मदद से आप परीक्षा में इस अध्याय से राजनीति विज्ञान में बहुत अच्छे अंक प्राप्त कर सकेंगे।

Class 12 Political Science Notes Ch-10 In Hindi PART-B | राष्ट्र-निर्माण की चुनौतियाँ कक्षा 12 पाठ 10 के प्रश्न उत्तर भाग-B

कक्षा | Class12th 
अध्याय | Chapter10
अध्याय का नाम | Chapter Nameराष्ट्र-निर्माण की चुनौतियाँ
बोर्ड | Boardसभी हिंदी बोर्ड
किताब | Book एनसीईआरटी | NCERT
विषय | Subjectराजनीति विज्ञान | Political Science
मध्यम | Medium हिंदी | HINDI
अध्ययन सामग्री | Study Materialsप्रश्न उत्तर | Question answer

पाठ के मुख्य बिंदु | Main Point of This chapter

15 अगस्त, 1947 को भारत आजाद हुआ। परन्तु यह खुशी का अवसर मातम में बदल गया। क्योंकि भारत को आजादी देश के बँटवारे के साथ मिली। यह सब अंग्रेजी शासन की फूट डालो व राज करो की नीति व कुछ महत्त्वाकांक्षी धार्मिक कट्टरवादी नेताओं की हठधर्मी के कारण से हुआ।

Challenges Of Nation Building Political Science Class 12 1
Class 12 Political Science Notes Ch-10 In Hindi PART-B

देश का विभाजन अत्यन्त दर्दनाक था क्योंकि इसमें अभूतपूर्व हिंसा व विस्थापन की प्रासदी शामिल थी। इस विभाजन में न केवल राज्यों व क्षेत्रों की सीमाओं का विभाजन हुआ बल्कि छोटे- छोटे घरेलू सामान, कपड़ों, रेडियो व टी.वी. का भी विभाजन हुआ। इसमें रिस्ते व नातों का विभाजन हुआ। धर्म व मजहब के नाम पर लोग एक-दूसरे की जान के दुश्मन बन गए थे। सभी के सिर पर अमानवीयता छाई हुई थी। ऐसा लगता था मानो इन्सानियत दुनिया से समाप्त हो गयी हो।

पूरा वातावरण शान्त होने में लम्बा समय लगा। इस बीच दोनों देशों के लिए गठित संविधान समाओं ने संविधान लिखे जिसके आधार पर दोनों देशों की शासक प्रणालियों ने अपना-अपना कार्य करना प्रारम्भ किया। भारतीय संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद थे जो देश के प्रथम राष्ट्रपति बने। जिस समिति ने वाद-विवाद व निर्णयों के बाद संविधान को लिखा उसे मसौदा समिति कहा गया। 

Class 12 Political Science Notes Ch-10 In Hindi PART-B | राष्ट्र-निर्माण की चुनौतियाँ कक्षा 12  पाठ 10 के प्रश्न उत्तर भाग-B
IMAGE CREDIT: GOOGLE.COM

उसके अध्यक्ष डॉ. भीमराव अम्बेडकर थे। इस अवसर पर राष्ट्र के गठन की भी एक प्रमुख समस्या थी। आजादी के समय दो प्रकार के भौगोलिक व प्रशासनिक राज्य थे। एक देशी रियासतें व दूसरे ब्रिटिश राज्य। इन सभी को मिलाकर संघ का निर्माण किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में अर्थात् देशी रियासतों को भारत में मिलाने में भारत के लौह पुरुष कहे जाने वाले सरदार पटेल ने अहम भूमिका निभाई।

आजादी के बाद राज्य निर्माण व राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया प्रारम्भ हुई जिसमें अनेक प्रकार की कठिनाइयाँ सामने आई अनेक समस्याएँ हमें ब्रिटिश शासन से विरासत में मिलीं। गरीबी, बेराजगारी, क्षेत्रीय असन्तुलन तथा कृषि पर आधारित अर्थव्यवस्था हमें विरासत में मिली। राष्ट्र निर्माण व राष्ट्र के विकास में यूँ तो अनेक प्रकार की चुनौतियों थी परन्तु प्रमुख रूप

से तीन चुनीतियों का यहाँ वर्णन करना आवश्यक है- प्रथम चुनौती राष्ट्र निर्माण, द्वितीय चुनौती प्रजातंत्र का विकास और तृतीय चुनौती जन-कल्याण का विकास।

प्रथम चुनौती राष्ट्र निर्माण के रूप में—भारत एक बहुसंख्यक समाज है जिसमें अनेक प्रकार की जाति, धर्म, भाषा, संस्कृति, बोली व भौगोलिकताओं के लोग रहते हैं। अनेक वर्षों के बाद भारत आजादी के बाद एकता के सूत्र में बँधा था। अतः राष्ट्रीय एकता-अखंडता को बनाना व इसे मजबूत करना भारतीय शासन प्रणाली के लिए एक महत्त्वपूर्ण चुनौती थी। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर, संवैधानिक स्तर पर, शैक्षणिक स्तर पर व सांस्कृतिक स्तर पर विभिन्न प्रकार के प्रयास किये गये। 

अति लघु उत्तरीय प्रश्न | VERY SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS

Class 12 Political Science Notes
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Q. 1. राष्ट्र से आप क्या समझते हैं ?

Ans. राष्ट्र ऐसे व्यक्तियों व समुदायों का समूह है जिनकी समान नस्ल, समान जाति, संस्कृति व जिनका समान ऐतिहासिक पृष्ठभूति होती है। इसके साथ-साथ इन लोगों की समीपता व राजनीति स्तर पर समान विश्वास व समान आकांक्षाएँ होती है। ये लोग साथ मिलकर एक समान भाई-चारे के साथ रह कर एक निश्चित क्षेत्र में रहते हैं। 

विश्व के लोगों का बँटवारा राष्ट्रीयता के आधार पर विभिन्न राष्ट्र राज्यों के रूप में हुआ है। राष्ट्र की अपनी एक प्रभुसत्ता सरकार होती हैं। ये लोग समान उद्देश्यों के साथ आपस में जुड़े रहते हैं। भारत भी राष्ट्र राज्य ही है जिसमें विभिन्नता में एकता है। यह एक बहुसंख्यक समाज है जो भारतीयता के साथ जुड़ा हुआ है।

Q.2. राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया समझाइये। 

Ans. राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया एक जटिल व व्यापक प्रक्रिया है जिसमें राज्य की निश्चित सोमा में रहने वाले लोगों को विभिन्न आधार पर उत्पन्न समीपता के आधार पर एक सूत्र में बाँधे जाने का प्रयास किया जाता है। राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में विभिन्न जाति, धर्म, भाषा व क्षेत्र के लोगों को उनके निजी व क्षेत्रीय हितों से ऊपर उठाकर राष्ट्रीय हितों, सामूहिक उद्देश्यों व राष्ट्रीय गरिमा व लक्ष्यों के साथ जोड़ा जाता है। 

Q.3. भारतीय राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया की तीन चुनौतियाँ समझाइये। 

Ans. भारतीय राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में निम्न तीन प्रमुख चुनौतियों 8-

(i) भारतीय एकता अखंडता को बनाये रखना।

(ii) भारत में प्रजातन्त्र को सफल बनाना तथा विकसित करना।। 

(iii) तीसरा प्रमुख दायित्व अथवा चुनौती भारत के नागरिकों का जन-कल्याण करना, उनकी न्यूनतम आवश्यकताओं को पूरा करना व उनका जीवन स्तर उभारना।

Q. 4. भारत के विभाजन के क्या कारण थे ? 

Ans. यों तो भारत के विभाजन के अनेक कारण थे परन्तु निम्नलिखित दो कारणों को प्रमुख माना जा सकता है-

(i) अंग्रेजों की फूट डालो व राज्य करो (Divide and rule) की नीति अंग्रेजों का लम्बे समय तक शासन करने के पीछे कारण यह रहा कि वे भारतीय समाज को साम्प्रदायिकता के आधार पर बाँटने में सफल रहे। 

(ii) दूसरा प्रमुख कारण मोहम्मद अली जिन्ना के द्वारा दी गयी दो राष्ट्र का सिद्धान्त जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि हिंदू व मुसलमान दो अलग-अलग राष्ट्रीयताएँ हैं जो एक साथ नहीं रह सकतीं। जिन्ना की यह हठधर्मी भी भारत के विभाजन का प्रमुख कारण थी। 

Q.5.  भारत के विभाजन की प्रक्रिया समझाइये । 

Ans. भारत को 15 अगस्त, 1947 को आजादी तो प्राप्त हुई परन्तु साथ-साथ वि की त्रासदी भी झेलनी पड़ी। वास्तव में यह अनुभव अत्यन्त दर्दनाक व दुर्भाग्यपूर्ण था। कारण यह था कि ब्रिटिश प्रान्तों में कोई ऐसा क्षेत्र नहीं था जिसमें मुसलमानों का बहुम भारत में केवल दो ही क्षेत्र में मुस्लिम समुदाय का बहुमत था – एक पश्चिम में दूसरा पूर्व में  दोनों ही क्षेत्रों में कोई सीधा सम्पर्क नहीं था। विभाजन के समय ही यह निश्चित गया था कि पाकिस्तान के दो भाग होंगे एक पश्चिम पाकिस्तान व दूसरा पूर्वी पाकिस्तान अन्य विभाजन का पक्ष यह था कि सभी मुसलमान पाकिस्तान नहीं गये। यह पूरी प्रक्रिया हिंस थी व घृणा से भरी थीं।

Q. 6. दो राष्ट्र के सिद्धान्त से आप क्या समझते हैं ?  

Ans. दो राष्ट्र का सिद्धान्त मोहम्मद अली जिन्ना ने दिया जिसके अनुसार उनकी मान्यता थी कि भारत में हिंदू व मुसलमान दो अलग-अलग राष्ट्रीयताएँ हैं जिनमें अपने धा विश्वास है, सामाजिक मूल्य हैं, व राजनीतिक व आकांक्षाएँ हैं अतः ये एक स्थान नहीं रह स अतः भारत का दो राष्ट्रों में विभाजन अनिवार्य रूप से होना चाहिए।

लघु उत्तरीय प्रश्न | SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS

Class 12 Political Science Notes
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Q1. भारत निर्माण प्रक्रिया में तीन प्रमुख बाधाएँ समझाइये ।

Ans. भारत स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में लगा है। इस प्रक्रिया में भारत के सामने तीन प्रमुख चुनौतियाँ हैं जो निम्न हैं- *

(1) भारतीय राष्ट्रीय एकता अखंडता को बनाये रखना जिसके लिए विभिन्न अवसरों पर विभिन्न माध्यमों से प्रयास किये जा रहे हैं कि सभी भारतीयों में राष्ट्रवाद की भावना विकसित हो। 

(ii) दूसरी चुनौती भारतीय प्रजातंत्र को मजबूत करने व इसको सफल बनाने के लिए नागरिकों को तैयार करना। 

(iii) तीसरी चुनौती भारत के समान भारतीयों का जन-कल्याण का कार्य करना। लोगों की न्यूनतम आवश्यकताओं को पूरा करना व उनका जीवन स्तर उठाना। इस उद्देश्य के लिए भारत में अनेक योजनाएँ व कार्यक्रम प्रारम्भ किये गये हैं। 

Q. 2. भारत के विभाजन के प्रमुख कारणों को समझाइये ।

A. भारत का विभाजन एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी जिसके अनेक कारण थे। इनमें प्रमुख कारण निम्न थे- 

  • (i) मुस्लिम लीग का साम्प्रदायिक दृष्टिकोण 
  • (ii) मुहम्मद अली जिन्ना की महत्त्वाकांक्षा व 
  • (iii) भारत में रह रहे मुसलमानों में असुरक्षा की भावना (iv) मुसलमानों का सामाजिक, शैक्षणिक व आर्थिक पिछड़ापन 
  • (v) अंग्रेजों की फूट डालो व राज्य करो की नीति 
  • (vi) हिंदू संगठनों की कट्टरवादिता । 
  • (vii) धार्मिक कट्टरवाद। 
  • (viii) कॉंग्रेस की गलत नीतियाँ। 
  • (ix) साम्प्रदायिक झगड़े। 
  • (x) मुहम्मद अली जिन्ना का दो राष्ट्रवादी का सिद्धान्त (xi) मुसलमान का धार्मिक कट्टरवाद। 
  • (xii) अंग्रेजों की फूट डालो व राज करो की नीति । (xiii) ऐतिहासिक कारण।

Q.3. उन परिस्थितियों को समझाइये जिनमें भारत का विभाजन अनिवार्य हो गया। 

Ans. भारत में साम्प्रदायिक भावना की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है। मुस्लिम युग व मुगलों के समय में धार्मिक कट्टरवाद ने भारतीय समाज को प्रभावित किया। अंग्रेजों ने भारत में आकर इस साम्प्रदायिक भावना को भड़का कर भारतीय समाज को लगातार विभाजित किया। यद्यपि भारतीय पुनः जागरण से भारतीय समाज में हिन्दुओं व मुसलमानों में एकता की गवना बढ़ी व सभी ने साथ मिलकर राष्ट्रीय आन्दोलन प्रारम्भ किया। 

परन्तु धीरे-धीरे मोहम्मद अली जिन्ना के नेतृत्व में मुस्लिम लीग का दृष्टिकोण बदला व जिन्ना के दो राष्ट्र के सिद्धान्त पर 1940 में पाकिस्तान की माँग औपचारिक रूप से उठा दी जिसका अंग्रेजों व काँग्रेस ने स्वीकार नहीं किया। कैबिनेट मिशन योजना 1946 में जब पाकिस्तान का कोई जिक्र नहीं पाया तो जिन्ना ने सीथी कार्यवाही (Direct Action) की घोषणा कर दी जिसने सारे देश में हिंदू व मुसलमानों में झगड़े, मारकाट व हिंसा फैल गयी जिससे भारत का विभाजन अनिवार्य बन गया जिससे 1947 में माउंटबेटन योजना के आधार पर भारत का विभाजन हुआ।

Q4. देशी रियासतों के भारत में विलय के समय आई कठिनाइयों को समझाइये। 

Ans. भारत 15 अगस्त, 1947 को आजाद हुआ था। उस समय अर्थात् आजादी से पहले (ब्रिटिश भारत में दो प्रकार के राज्य थे-एक देशी रियासतें व दूसरे ब्रिटिश प्रान्त जिन पर ब्रिटिश सरकार का शासन था। देशी रियासत पर देशी शासकों का शासन था। भारत सरकार अधिनियम, 1947 जो माउंटबेटन योजना पर आधारित था, उसके अनुसार देशी रियासतों को यह अधिकार दिया गया था कि वे चाहे तो पाकिस्तान के साथ विलय हो सकती है अथवा भारत के साथ विलय हो सकते हैं 

इनको स्वतंत्र रहने का अधिकार भी दिया गया। अधिकांश देशी रियासतों ने अपनी इच्छा से ही भारत में विलय को मंजूरी दे दी। परन्तु कुछ देशी रियासतों ने अपने निर्णय लेने में अत्यधिक देरी गाई हैदराबाद, जूनागढ़ व कश्मीर के शासकों ने निर्णय लेने में देर लगाई। तत्कालीन भारत के गृहमन्त्री श्री सरदार पटेल की कुशल प्रशासनिक व कूटनीतिक प्रयासों से इन रियासतों का भारत में विलय संभव हो सका। 

कश्मीर के शासक ने तो स्वतंत्र रूप में रहने का निर्णय लिया था परन्तु 1948 में पाकिस्तान के कविलों में आक्रमण के कारण उस समय के महाराजा श्री हरीसिंह ने कुछ शर्तों के आधार पर भारत में विलय स्वीकार किया। इस विलय को आज तक भी चुनौती दी जाती है।

Q.5. मणिपुर रियासत का भारतीय संघ में विलय की प्रक्रिया को समझाइये। 

Ans. आजादी के चंद रोज पहले मणिपुर के महाराजा बोषचंद्र सिंह ने भारत सरकार के साथ भारतीय संघ में अपनी रियासत के विलय के एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। इसकी एवज में उन्हें यह आश्वासन दिया गया था कि मणपुर की आंतरिक स्वायत्तता बरकरार रहेगी। जनमत के दबाव में महाराजा ने 1948 के जून में चुनाव करवाया और इस चुनाव के फलस्वरूप मणिपुर की रियासत में संवैधानिक राजतंत्र कायम हुआ। मणिपुर भारत का पहला भाग है जहाँ सार्वभौम वयस्क मताधिकार के सिद्धांत को अपनाकर चुनाव हुए।

मणिपुर की विधान सभा में विलय के सवाल पर गहरे मतभेद थे। मणिपुर की कॉंग्रेस चाहती थे कि इस रियासत को भारत में मिला दिया जाए जबकि दूसरी राजनीतिक पार्टियों इसके खिलाफ यो मणिपुर की निर्वाचित विधानसभा से परामर्श किए बगैर भारत सरकार ने महाराजा पर दबाव मला कि वे भारतीय संघ में शामिल होने के समझौते पर हस्ताक्षर कर दे। भारत सरकार को इसमें उकलता मिली। मणिपुर में इस कदम को लेकर लोगों में क्रोध और नाराजगी के भाव पैदा हुए। इसका असर आज तक देखा जा सकता है। सितम्बर 1949 को मणिपुर के महाराजा ने मणिपुर हे भारत में विलय के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किये।

class 12th NotesMCQ
HistoryPolitical Science
EnglishHindi

Q6. कश्मीर समस्या पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

Ans. अगस्त 14-15 मध्यरात्रि 1947 में जब ब्रिटिश भारत को भारत तथा पाकिस्तान में विभाजित किया गया, तब उत्कृष्ट रूप में मुसलमान राज्य पर अलोकप्रिय तथा निरंकुश महाराजा हरी सिंह कश्मीर तथा जम्मू पर शासन कर रहा था और इसने शायद इस आशा में कि वह भारत तथा पाकिस्तान से भिन्न एक स्वतंत्र एवं स्वायत्त शासन स्थापित कर सकेगा, दोनों राज्यों में से किसी एक में भी विलय होने के दबाव का प्रतिरोध किया। समय को टालने तथा अपने समझौता किया और ऐसा ही एक समझौता भारत के साथ करने की ठानी। कश्मीर के पश्चिमी भाग में मुसलमानों ने महाराजा के विरुद्ध बगावत की और अपनी ही तंत्र (आजाद) कश्मीर सरकार की स्थापना की। इस अवसर पर लाभ उठाने के लिए तथा कश्मीर के अवशेष राज्य को पाकिस्तान में सम्मिलित कराने के लिए 22 अक्तूबर, 1947 को उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत (NWFP) के सशस्त्र पठान कबीलों ने कश्मीर पर आक्रमण कर दिया। 

वह उस राज्य की राजधानी श्रीनगर से पंद्रह मील दूर तक पहुँच गए थे। इस आक्रमण से सावधान होकर हरी सिंह ने भारत से सैनिक सहायता की माँग की परंतु भारत ने तब तक मदद करने से इंकार कर दिया जब तक महाराजा ‘सम्मिलन के दस्तावेज’ (Instrument of Accession) पर हस्ताक्षर नहीं कर देता। यह एक ऐसी मानक प्रक्रिया थी जिसके अंतर्गत अन्य देशी नरेशों के राज्य भारत अथवा पाकिस्तान के साथ सम्मिलित हुए। नेशनल कॉंफ्रेंस दल के धर्म-निरपेक्ष तथा लोकप्रिय नेता शेख अब्दुल्ला से सहमति प्राप्त होने के पश्चात् भारत ने इस सम्मिलन को स्वीकार किया। हरी सिंह ने इस समझौते पर 27 अक्तूबर, 1947 को हस्ताक्षर किए और उसी दिन भारतीय सेना ने छापामारों को पीछे धकेलने के लिए कश्मीर में प्रवेश किया। 

महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उसने पाकिस्तान के साथ 16 अगस्त, 1947 को एक भारतीय सेना को तुरंत जम्मू-कश्मीर भेजा गया। भारत इस मामले को संयुक्त राष्ट्र में भी से गया और पाकिस्तान पर आक्रमण करने का आरोप लगाया। संयुक्त राष्ट्र ने 1 जनवरी, 1949 को युद्ध विराम लागू करवाया पाकिस्तान द्वारा अधिगृहीत कश्मीर को खाली कराने के लिए भारत के आग्रह के बावजूद पाकिस्तान ने इसे खाली नहीं किया। जम्मू और कश्मीर की जनता द्वारा निर्वाचित संविधान सभा ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है

वाइलियों की सहायता से जम्मू-कश्मीर को हड़पने के पाकिस्तान के प्रयास विफल र बाद के वर्षों में पाकिस्तान अलग-अलग समय पर भिन्न-भिन्न तरीकों को अपनाता रहा। इ तरीकों में पाकिस्तान का पश्चिमी सैन्य गुट में शामिल होना, पाकिस्तान अधिकृत भारतीय क्षेत्र क एक भाग चीन को सौंपना, भारत के विरुद्ध खुला आक्रमण, सीमापार आतंकवाद और जम स्वमीर में घुसपैठ सम्मिलित है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न | Long Answer Type Questions

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Q1. भारत में विभाजन के कारण व परिणामों को समझाइये | 

Ans. ब्रिटिश उपनिवेशवाद भारतीय समाज को विभिन्न आधारों पर विभाजित अंग्रेजों ने इस बात को समझ लिया था कि भारत में ऊँच-नीच की भावना व्याप्त है द समाज सामाजिक, आर्थिक व शैक्षणिक स्तर पर पिछड़ा हुआ है। अतः उन्होंने इस बात का उठा कर भारत में शासन करने के लिए ‘फूट डालो व राज करो’ (Divide and Rale) की अपनाई जिसमें वे सफल भी हो गये। अंग्रेजों ने भारत में आपसी द्वेष बढ़ाने के लिए जात को बढ़ावा दिया व साम्प्रदायिकता के बीज बो दिये। 

अंग्रेजी शासन की प्रत्येक नीति के म का यही उद्देश्य था कि नीति को इस प्रकार से बनाया जाये व लागू किया जाये कि भारतीय सामाजिक, धार्मिक व आर्थिक स्तर पर बैटा रहे व उनमें असमानता व दूरी पर के इन्हीं प्रयासों से मुस्लिम लीग जो एक राष्ट्रवादी राजनीतिक दत्ता या बाद में सापद राजनीतिक दल बन गया जिसने अन्ततः पृथक राज्य अर्थात् पाकिस्तान की म प्रकार से मोहम्मद अली जिन्ना जो एक धर्मनिरपेक्ष व राष्ट्रवादी व उदारवादी नेता था, ज उनकी महत्त्वाकांक्षाओं को प्रेरित करके उनमें साम्प्रदायिक व स्वार्थी दृष्टिकोण पैदा का मुसलमानों के ही नेता बन कर रह गये जबकि प्रारम्भ में उनका दृष्टिकोण व्यापक था। की यह साम्प्रदायिक नीति ही भारत के विभाजन का प्रमुख कारण बनी। 

भारत के विभाजन के गम्भीर परिणाम निकले जिनमें निम्न प्रमुख हैं-

  • साम्प्रदायिक भावना का विकास
  • राज्यों के पुनर्गठन में समस्याएँ
  • भारतीय राजनीति का साम्प्रदायीकरण
  • प्रशासन का साम्प्रदायीकरण 
  • भारत व पाकिस्तान में शीतयुद्ध व वास्तविक युद्ध विभाजन के समय दोनों ही पक्षों अर्थात् हिन्दुओं, मुसलमानों को अनेक कष्ट उठाने पड़े।
  • अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण की नीति

Q. 2. भारत के विभाजन के बाद भारत में राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रिया की प्रमुख दुतियाँ व उद्देश्य समझाइये।

Ans आजादी के बाद भारत के लिए यह आसान नहीं थी। उसके सामने अनेक चुनौतियाँ मुँह खोले खड़ी थीं। आजादी के समय महात्मा गाँधीजी ने कहा था कि, कल हम अंग्रेजी राज की गुलामी से आजाद हो जायेंगे लेकिन आधी रात को भारत का बँटवारा भी होगा। इसलिए कल का दिन हमारे लिए खुशी का दिन होगा और गम का भी इस प्रकार हम कह सकते हैं कि गाँधीजी ने भी आगे आने वाली समय की चुनौतियों की ओर संकेत दिया। हम यहाँ पर आजादी के बाद तीन प्रमुख चुनौतियों का वर्णन कर रहे हैं जो निम्न है-

(i) सबसे महत्त्वपूर्ण चुनौती भारत के सामने भारत जैसे विशाल देश को राष्ट्र के रूप में साना व उसे निश्चित करना कि विभिन्न जाति धर्म, भाषा, संस्कृति व भौगोलिकता वाले लोगों में राष्ट्रीयता अर्थात् भारतीयता के सूत्र में बाँध कर उन्हें एकता के सूत्र में बाँधना था। अतीत के बहुत दुखद अनुभव रहे एकता के अभाव में हमने विदेशी लोगों का शासन पाया था अतः सबसे बड़ी चुनौती है कि भारत को एक राष्ट्र के रूप में एक रखना तथा सभी वर्गों के लोगों में आपसी प्यार बढ़ाना।

(ii) दूसरी चुनौती भारतीय प्रशासकों के लिए भारत में प्रजातंत्रीय प्रणाली के लिए आवश्यक राजनीतिक संस्कृति का विकास करके प्रजातन्त्र को मजबूत करना था जिसमें भारत काफी हद तक सफल रहा है। अब तक 60 वर्ष के प्रजातंत्रीय सफर में भारत में अनेक स्तर पर अनेक चुनाव होते रहे हैं जिससे भारतीय लोकतंत्र परिपक्व हुआ। भारत का नागरिक मतदाता के रूप में भी परिपक्व हुआ है? भारत में प्रजातंत्र की जड़ें मजबूत हुई हैं। ये भी वास्तव में एक बड़ी चुनौती थी।

(iii) तीसरी प्रमुख चुनौती भारतीयों के विकास व जनकल्याण की थी जब देश आजाद हुआ। भारत में गरीबी बेरोजगारी व क्षेत्रीय असंतुलन व अनपढ़ता जैसी अनेक समस्याएँ थीं। उन सभी को दूर करने के लिए आवश्यक प्रयास किये गये हैं व लोगों के जीवन स्तर को उठाया गया है। तौ शहरी अर्थव्यवस्था को मजबूत किया गया है। 

इस आर्टिकल में किसी भी प्रकार का त्रुटि आपको मिलती है तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं हम उसे जल्द से जल्द ठीक करने की कोशिश करेंगे क्योंकि लिखने समय सबसे गलती हो जाती है 😅😅😅😅😅😅😅😅😅


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FAQs

Q1.भारत में राष्ट्र निर्माण क्या है?

राष्ट्र निर्माण राज्य की शक्ति का उपयोग करके एक राष्ट्रीय पहचान का निर्माण या संरचना कर रहा है। राष्ट्र-निर्माण का उद्देश्य राज्य के भीतर लोगों का एकीकरण करना है ताकि यह लंबे समय तक राजनीतिक रूप से स्थिर और व्यवहार्य बना रहे।

Q2.राष्ट्र निर्माण के प्रमुख तत्व कौन-कौन से हैं?

राष्ट्र निर्माण के मुख्य तत्व हैं:-
सामान्य भाषा, संस्कृति और इतिहास की आकांक्षाएँ आम लोगों को राष्ट्रीयता बनाने में मदद करती हैं।

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