Class 12 Political Science Notes Ch-15 In Hindi PART-B | लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट कक्षा 12 पाठ 15 के प्रश्न उत्तर भाग-B

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Class 12 Political Science Notes Ch-15 In Hindi में यह अध्याय काफी महत्वपूर्ण है| इस अध्याय से काफी प्रश्न परीक्षा में पूछे जा चुके हैं तथा यह अध्याय विद्यार्थी के लिए अति आवश्यक है क्योंकि इस अध्याय से हमें विश्व की राजनीति समझ में आती है|

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मैं खुद 12वीं का टॉपर रहा हूं और मुझे पता है कि 12वीं की परीक्षा में किस तरह के प्रश्न पूछे जाते हैं। वर्तमान में, मैं एक शिक्षक की भूमिका भी निभा रहा हूँ, और अपने छात्रों को कक्षा 12वीं की महत्वपूर्ण जानकारी और विषयों का अभ्यास भी कराता हूँ। मैंने यहां 5 वर्षों से अधिक के अपने अनुभव के साथ प्रश्न-उत्तर लेख लिखा है। इस पोस्ट की मदद से आप परीक्षा में इस अध्याय से राजनीति विज्ञान में बहुत अच्छे अंक प्राप्त कर सकेंगे।

Class 12 Political Science Notes Ch-14 In Hindi PART-B | काँग्रेस प्रणाली : चुनौतियाँ और पुनर्स्थापना कक्षा 12 पाठ 14 के प्रश्न उत्तर भाग-B

कक्षा | Class12th 
अध्याय | Chapter15
अध्याय का नाम | Chapter Nameलोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट
बोर्ड | Boardसभी हिंदी बोर्ड
किताब | Book एनसीईआरटी | NCERT
विषय | Subjectराजनीति विज्ञान | Political Science
मध्यम | Medium हिंदी | HINDI
अध्ययन सामग्री | Study Materialsप्रश्न उत्तर | Question answer

पाठ के मुख्य बिंदु | Main Point of This chapter

1971 के चुनाव के बाद इंदिरा गाँधी न केवल कांग्रेस की बल्कि देश की बहुत नेता के रूप में उभर कर आयीं क्योंकि 1971 के संसदीय चुनाव में कॉंग्रेस को अप्रत्याशित सफलता प्राप्त हुई। 48.4% वोट प्राप्त करके काँग्रेस ने लोकसभा की 375 सीटों पर कब्जा किया। विरोधी दलों के विशाल गठबन्धन को हार का मुँह देखना पड़ा।

इस सफलता के उपरान्त भी श्रीमती इंदिरा गाँधी के लिए प्रशासन की राह आसान न थी क्योंकि देश के सामने आर्थिक संकट था आधार बनाकर विरोधी दलों ने अनेक राज्यों में आन्दोलन छेड़ रखा था। चुनी हुई सरकारों को हटाने की माँग कर रहे थे। आर्थिक संकट के निम्न प्रमुख कारण थे।

  • (i) 1971 में बंगलादेश युद्ध का आर्थिक भार ।
  • (ii) 8 मिलियन बंगलादेशियों का भार जो बंगलादेश की सीमा पार करके भारत में प्रवेश कर गये थे। 
  • (iii) 1971 के पाक युद्ध में पकड़े गये 1 मिलियन कैदी सैनिक जिन्होंने भारतीय फीजों के आगे आत्मसमर्पण कर दिया था।
  • (iv) मानसून की विफलता।
  • (v) अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में वृद्धि ।
  • (vi) कीमतों में 23% की वृद्धि।
  • (vii) औद्योगिक पैदावार में गिरावट ।
  • (viii) बढ़ती हुई बेरोजगारी।
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उपरोक्त परिस्थितियों के कारण देश गम्भीर आर्थिक संकट से गुजर रहा था। पूरे देश में बढ़ती हुई कीमतों तथा बेरोजगारी के विरुद्ध आन्दोलन प्रारम्भ हो गये थे। बिहार व गुजरात में इस आन्दोलन का नेतृत्व समाजवादी नेता श्री जय प्रकाश नारायण जी कर रहे थे। यहाँ तक कि उनकी प्रेरणा पर इन आन्दोलनों में विद्यार्थी भी शामिल हो गये थे। विभिन्न स्थानों पर हड़ताल हो रही थी। बंद का आयोजन हो रहा था। संसदीय राजनीति में विश्वास न रखने वाले कुछ मार्क्सवादी समूहों की सक्रियता भी इस अवधि में बड़ी कई स्थानों पर इन्होंने हिंसात्मक कार्य भी कि

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गुजरात के आन्दोलन का नेतृत्व स्वयं मोरारजी देसाई ने किया जो कभी श्रीमती इंदिरा गाँधी के मंत्रिमंडल में मंत्री थे। विद्यार्थी इस आन्दोलन में गुजरात में चुनाव की माँग कर रहे थे। 1975 में ‘गुजरात में चुनाव हुए जिसमें कॉंग्रेस हार गई।

बिहार का आन्दोलन विद्यार्थियों के हाथों में आ गया। श्री जयप्रकाश नारायण ने ‘सम्पूर्ण क्रान्ति’ का नारा दिया जिसका अर्थ सम्पूर्ण व्यवस्था अर्थात् सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, प्रशासनिक यहाँ तक कि सैनिक प्रणाली को बदलना था। इसमें आमूल परिवर्तन करना था। 1974 में हुई रेल कर्मचारियों की हड़ताल इसी आन्दोलन व सोच का परिणाम था। अतः इस प्रान्तीय आन्दोलन का प्रभाव राष्ट्रीय राजनीति पर पड़ना स्वाभाविक था जिससे देश के अनेक क्षेत्रों में का काज ठप्प हो गया।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न | VERY SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS

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Q.1. “1967 के बाद देश की कार्यपालिका तथा न्यायपालिका के संबंधों में नावों ने आपातकाल की पृष्ठभूमि तैयार की थी।” इस कथन को संक्षेप में स्पष्ट कीजिये। 

Ans. 1967 के बाद इंदिरा गाँधी एक कद्दावर नेता के रूप में उभरी थी और 1973-74 को उनकी लोकप्रियता अपने चरम पर थी लेकिन इस दौर में दलगत प्रतिस्पर्धा कहीं ज्यादा ती और वीकृत हो चली थी। इस अवधि में न्यायपालिका और सरकार के संबंधों में भी सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार की कई पहलकदमियों को संविधान के विरुद्ध माना। कांग्रेस पार्टी का मानना था कि अदालत का यह रवैया लोकतंत्र के सिद्धांतों और संसद की सर्वोच्चता के विरुद्ध है। कॉंग्रेस ने यह आरोप भी लगाया कि अदालत एक यथास्थितिवादी संस्था है और यह संस्था यों को लाभ पहुंचाने वाले कल्याण कार्यक्रमों को लागू करने की राह में रोड़े अटका 

Q. 2. विरोधी दलों के विरोध तथा कॉंग्रेस की टूट ने आपातकाल की पृष्ठभूमि कैसे तैयार की थी ? 

Ans. देश में सन् 1952 के चुनाव से ही देश एवं अधिकांश प्रांतों में काँग्रेस के सत्ता रही। कुछ ही प्रांतों में विरोधी दलों या संयुक्त विरोधी दलों की सरकारें बनीं ये केंद्र में में आना चाहते थे। कॉंग्रेस के विपक्ष में जो दल थे उन्हें लग रहा था कि सरकारी प्राधिकार क नैजी प्रधेकार मानकर इस्तेमाल किया जा रहा है और राजनीति हद से ज्यादा व्यक्तिगत होते जा रही है।

कॉंग्रेस टूट से इंदिरा गाँधी भी इसका अपवाद नहीं थीं। वे पुरानी कॉंग्रेस को पूर्णतः नर्बल बनाने की इच्छा रखती थीं गुजरात आंदोलन तथा बिहार आंदोलना को विरोधी ने राष्ट्रव्यापी बनाना चाहा। जयप्रकाश नारायण संपूर्ण क्रांति की बात कर रहे थे। ऐसी सभी घटनाओं आपातकाल के लिए पृष्ठभूमि तैयार की। 

Q. 3. नक्सलवादी आन्दोलन से आप क्या समझते हैं ?

Ans. पश्चिमी बंगाल, बिहार, आन्ध्र प्रदेश में चल रहा नक्सलवादी आन्दोलन उन त का समूह है जो क्रांतिकारी तरीके से यहाँ तक कि हिंसात्मक तरीके से भी सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था में तुरन्त परिवर्तन व सम्पूर्ण परिवर्तन करना चाहते हैं। ये लोग धनी भूमि स्वापि जमीन छीनकर भूमिहीन लोगों में बाँटते हैं। इन राज्यों के ये हिंसक आन्दोलन सरकारों के ने भी समाप्त नहीं हुए अब ये आन्दोलन झारखंड जैसे राज्यों में भी सक्रिय है। फिलहाल विभिन्न धन्यों के 75 जिले नक्सलवादी आन्दोलन से प्रभावित है। नक्सलवादी मार्क्सवादी-लेि विचारधारा से प्रभावित हैं। 

Q.4 श्रीमती इंदिरा गाँधी ने आपात स्थिति की घोषणा किस प्रकार से की ?

Ans: श्रीमती इंदिरा गांधी ने 25 जून, 1975 को देश में आपात स्थिति की घोषणा करने लिए तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद को मौखिक सलाह दी जिसको मानकर उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत देश में आन्तरिक गड़बड़ी के कारण आपातकाल की की घोषणा कर दो श्रीमती गांधी ने इस निर्णय के लिए मंत्रिमंडल की कोई भी औपचारिक क नहीं की। मंत्रिमंडल को भी इसकी सूचना 26 जून की सुबह को दी गई। देश में इस बार आपातकाल की स्थिति की घोषणा प्रथम बार की गई थी। 

Q5. आपातकाल की स्थिति की घोषणा के तुरन्त परिणाम क्या थे ? 

Ans. आपातकालीन स्थिति की घोषणा के तुरन्त परिणाम निम्न –

  • (i) नागरिकों के मौलिक अधिकार स्थगित हो जाते हैं।
  • (ii) देश का संघात्मक स्वरूप समाप्त हो जाता है। 
  • (iii) देश का प्रशासनिक स्वरूप एकात्मक हो जाता है।
  • (iv) सभी प्रकार के आन्दोलनों पर पावन्दियों लगा दी गयी। 
  • (v) निवारक नजरबन्दी कानून का लागू होना ।
  • (vi) सभी विषयों पर संसद को कानून बनाने का अधिकार। 
  • (vii) राष्ट्रपति के हाथों में पूरे देश का शासन आ जाता है।
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Q.6.42 वें संविधान संशोधन की मुख्य विशेषताएं क्या थी?

Ans. 42वें संविधान संशोधन की मुख्य विशेषताएँ अथवा प्रावधान निम्न थे— 

  • (i) संविधान की प्रस्तावना में समाजवाद एवं धर्मनिरपेक्ष शब्द जोड़े गये। 
  • (ii) न्यायपालिका के क्षेत्राधिकार में कटौती की गई। (iii) संसद व विधान सभा के कार्य काल में वृद्धि की गई। 
  • (iv) राज्य की नीति के निर्धारित तत्वों को मौलिक अधिकारों से अधिक वरीयता दी गई। 
  • (v) राष्ट्रपति की स्थिति भी कमजोर की गई क्योंकि उसके लिए मंत्रिमंडल की सलाह को मानना आवश्यक किया गया। 
  • (vi) संसद की शक्तियों में वृद्धि की गई। 
  • (vii) भारतीय संघीय स्वरूप में भी परिवर्तन किया जिसमें सूचियों के विषयों को बदला गया।

लघु उत्तरीय प्रश्न | SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS

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Q.1 आपातकाल स्थिति की घोषणा के कौन-से प्रमुख आर्थिक एवं राजनीतिक कारण है?

Ans. आपातकाल स्थिति की घोषणा के प्रमुख आर्थिक व राजनीतिक कारण निम्न ये- 

आर्थिक कारण– 

  • (i) 1971 की वांग्लादेश की लड़ाई का आर्थिक बोझ। (ii) बांग्लादेश के हरणार्थियों का आर्थिक बोझ। 
  • (iii) 1971 की लड़ाई में कैदियों पर लम्बे समय तक किये गये का आर्थिक बोझ 
  • (iv) मानसून की विफलता 
  • (v) 1974 का खाद्यान्न संकट 
  • (vi) आवश्यक दस्तुओं की कीमतों में वृद्धि ।

राजनीतिक कारण- 

  • (i) गुजरात आन्दोलन। 
  • (ii) बिहार में विद्यार्थी आन्दोलन। 
  • (iii) चुनी सरकारों के खिलाफ आन्दोलन। 
  • (iv) गुजरात में आन्दोलन का मोरारजी भाई देसाई का नेतृत्व। 
  • (v) जय प्रकाश नारायण का नेतृत्व व उनके द्वारा संसद मार्च 
  • (vi) देश के अनेक हिस्सों कानून व व्यवस्था का खराब होना 
  • (vii) देश की एकता व अखण्डता को खतरा । 

Q. 2. बिहार के आन्दोलन का काँग्रेस के खिलाफ चल रहे आन्दोलन पर क्या प्रभाव पड़ा ? 

Ans. यों तो काँग्रेस की सरकारों के खिलाफ पूरे देश में विरोध पनप रहा था परन्तु बिहार गुजरात में आन्दोलन का रूप अधिक उम्र था। बिहार के आन्दोलन में विद्यार्थी भी शामिल हो ये व श्री जयप्रकाश नारायण इसका नेतृत्व कर रहे थे। इसी प्रकार से गुजरात में भी आन्दोलन एत सक्रिय था जिसका नेतृत्व मोरारजी देसाई कर रहे थे।

श्री जयप्रकाश नारायण मे इस दौरान को अहिंसात्मक तरीके से पूरे देश में चलाने की अपील की जिसका व्यापक प्रभाव पड़ा। आन्दोलनों का प्रमुख उद्देश्य केन्द्र व प्रान्तों की काँग्रेस सरकारों को हटाना था। इस आन्दोलन महंगाई व आर्थिक संकट को मुख्य मुद्दा बनाया गया। श्री जयप्रकाश नारायण ने इस आन्दोलन सम्पूर्ण क्रान्ति का नाम दिया जिसका उद्देश्य सम्पूर्ण व्यवस्था में परिवर्तन करना था। 

Q. 3.देश में आपातकालीन स्थिति का पापण के प्रमुख कारण क्या थे?

Ans. देश में आपातकाल स्थिति की घोषणा के निम्न आधार बताये गये- 

  • (1) आन्तरिक गड़बड़ी 
  • (ii) पुलिस व सैनिकों में बगावत का डर 
  • (iii) देश की एकत अखण्डता को खतरा 
  • (iv) आर्थिक संकट 
  • (v) राजनीतिक अस्थिरता का डर 
  • (vi) राज्यों में क व्यवस्था का खराव होना 
  • (vii) चुनी हुई सरकारों के खिलाफ आन्दोलन 
  • (viii) प्रशासन काउण कानून होना 
  • (ix) अराजकता की स्थिति 
  • (x) हिंसा का माहौल।

Q4. आपात स्थिति लागू होने के क्या परिणाम थे ? 

Ans. देश में 25 जून, 1975 को आपात स्थिति की घोषणा की गई थी स्थिति के निम्न परिणाम सामने आये-

  • (i) मौलिक अधिकारों का हनन होना ( स्थगन होना) । (ii) संविधान का संघीय स्वरूप समाप्त हो जाता है। देश की सभी शक्तियों केन्द्र आ जाती हैं। इस प्रकार से संविधान एकात्मक हो जाता है। 
  • (iii) केन्द्र सरकार की शक्तियों बढ़ जाती हैं।
  • (iv) देश का प्रजातन्त्रीय स्वरूप प्रभावित होता है।
  • (v) प्रेस पर पाबन्दियों लगा दी गयीं। 
  • (vi) सभी दलों के प्रमुख नेताओं को जेल में डाल दिया गया।
  • (vii) न्यायालय की शक्तियाँ कम कर दी गईं। 
  • (viii) संसद कार्यकाल बढ़ा दिया गया।
  • (ix) लोगों की स्वतंत्रता समाप्त हो गई।
  • (x) संविधान में व्यापक संशोधन किये गये।

Q5. आपातकाल की स्थिति में न्यायपालिका की शक्तियों व क्षेत्राधिकार में परिवर्तन किये गये ? 

Ans. आपातकाल की स्थिति में संविधान में व्यापक परिवर्तन किये गये। प्रेस व मीडिया की रातियों न स्वतंत्रता को भी प्रभावित किया। इसके साथ-साथ न्यायपालिका की शक्तिय क्षेत्राधिकार में परिवर्तन कर दिया।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के संदर्भ में आपातकालीन स्थिति के संविधान में संशोधन कर यह व्यवस्था की कि सर्वोच्च न्यायालय प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति व स्पीकर के चुनाव किसी झगड़े को सर्वोच्च न्यायपालिका के क्षेत्राधिकार से बाहर कर दिया। 

Q6. संविधान में 42वाँ संशोधन की मुख्य विशेषताएँ समझाइये।

Ans. संविधान में 42वाँ संशोधन 1976 में किया गया। उस समय देश में आपातकाल की भी इस संविधान संशोधन ने संविधान में बड़े पैमाने पर परिवर्तन कर दिये। अतः इसे संविधान भी कहा जाता है। इसमें निम्न मुख्य प्रावधान थे- 

  • (1) संविधान की प्रस्तावना में संशोधन कर दो नये शब्द जोड़े गये। 
  • (ii) लोकसभा व राज्य विधान सभाओं के कार्यकाल पाँच वर्ष की जगह 6 वर्ष कर दिये गये। 
  • (iii) राज्य की नीति के निर्देशक तत्वों को मौलिक अधिकारों के स्थान पर अधिक प्राथमिकता की व्यवस्था कर दी गयी।
  • (iv) राष्ट्रपति को मंत्रिमंडल की सलाह मानने के लिए बाध्य कर दिया। गई।
  • (v) न्यायपालिका की शक्तियों व क्षेत्राधिकार में कमी कर दी 
  • (vi) नागरिकों की स्वतंत्रताओं में कमी की गई।
  • (vii) समवर्ती सूची में नये विषयों को जोड़ा गया। 
  • (viii) कई राज्यों के विषयों को केन्द्र सूची में शामिल कर दिया।
  • (ix) प्रेस की स्वतंत्रता को प्रभावित किया।
  • (x) केंद्र व प्रान्तों के सम्बन्धों को प्रभावित किया।

Q7 शाह आयोग की नियुक्ति का क्या उद्देश्य था ?

Ans: आपातकाल की स्थिति के समाप्त होने के साथ-साथ लोकसभा के चुनाव भी 1977 में कराये गये जिसमें जनता पार्टी ने चुनाव जीता व सरकार बनाई। काँग्रेस को इस चुनाव में आपातकाल स्थिति की ज्यादतियों की सजा भुगतनी पड़ी। यहाँ तक कि श्रीमती इंदिरा गाँधी व उनके प्रमुख मंत्री चुनाव हार गये।

जनता पार्टी ने सरकार बनाने के बाद आपातकाल में हुई विभिन्न ज्यादतियों को जनता के सामने लाने के लिए जस्टिस जे.सी. शाह की अध्यक्षता में मई 1977 में एक आयोग का गठन किया जिसको शाह आयोग के नाम से जाना जाता है। इसका प्रमुख कार्य 25 जून, 1975 के दिन घोषित आपातकाल के दौरान की गई। कार्यवाही तथा इस दौरान सत्ता के दुरुपयोग, अतिचार और सदाचार के विभिन्न साक्षों की जाँच की, विभिन्न लोगों के बयान दर्ज किये व इस आधार पर अपनी रिपोर्ट दी।

Q8. सह कमीशन रिपोर्ट की प्रमुख विशेषताएँ बताइये।

Ans. 1977 के चुनाव में सफलता प्राप्त करने के बाद आपातकाल में काँग्रेस सरकार द्वारा की गई ज्यादतियों का अध्ययन करने के लिए शाह आयोग की नियुक्ति की गयी। शाह कमीशन रिपोर्ट की प्रमुख विशेषताएँ निम्न हैं-

  • (i) नजरबन्दी निवारक कानून का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया। 
  • (ii) 676 ‘राजनीतिक नेताओं की गिरफ्तारी हुई।
  • (iii) आपातकाल के दौरान लगभग एक लाख लोगों की गिरफ्तारी की गई।
  • (iv) अखवारों की बिजली पूर्ति को काटने के लिए बिजली आपूर्ति निगम के अधिकारियों को उपराज्यपाल के द्वारा मौखिक आदेश दिये गये। 
  • (v) दो दिन के बाद अखबारों की बिजली जारी की गई।

Q9.जनता पार्टी की सरकार पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए । 

Ans. 1977 के चुनाव के बाद बनी जनता पार्टी की सरकार में कोई ताल-मेल नहीं था। पहले प्रधानमंत्री के पद को लेकर मोरारजी देसाई, चरण सिंह और जगजीवन राम में खींचातानी हुई। अंततः मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने।

जनता पार्टी अनेक राजनैतिक दलों का भाणुमति का कुंभ था। इस दल में निरंतर खींचातानी बनी रही और यह दल कुछ ही महीनों तक अपनी एकता बनाए रख सका। इस पार्टी की सरकार के पास एक निश्चित दिशा या दीर्घकालीन कल्याणकारी बहुजन प्रिय कार्यक्रम या सर्वमान्य नेतृत्व या न्यूनतम साध्य कार्यक्रम नहीं था। मूलतः मोरारजी देसाई गाँधीवादी कांग्रेसी थे और वे उन्हीं नीतियों पर चलते रहे।

18 मास के बाद मोरारजी भाई को त्याग पत्र देना पड़ा और दूसरी सरकार चरण सिंह के नेतृत्व में बनी। उसके साथ कॉंग्रेस ने एक बड़ा राजनैतिक मजाक किया। वह चार महीने के बाद ही प्रधानमंत्री पद से अलग हो गए।

निष्कर्ष – 1980 में नए चुनाव हुए। जनता सरकार की कार्यशैली तथा उनके नेताओं की परस्पर फूट को जनता ने पसंद नहीं किया। परिणामस्वरूप सत्ता पुनः इंदिरा काँग्रेस के पास आ गई।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न | Long Answer Type Questions

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Q1. आपातकाल की स्थिति की घोषणा के कारण एवं इसके परिणामों पर प्रकाश डालिए। 

Ans. आपातकाल की स्थिति की घोषणा के कारण- श्रीमती इंदिरा गाँधी की कांग्रेस सरकार ने देश में 25 जून, 1975 को आपातकाल की स्थिति की घोषणा के निम्न कारण है:- 

  • (i) देश में आन्तरिक गड़बड़ी। 
  • (ii) देश की एकता व अखण्डता को खतरा 
  • (iii) आर्थि संकट 
  • (iv) पूरे देश के विभिन्न राज्यों में राजनीतिक आन्दोलन (v) चुनी हुई सरकारी कार्य न करने देना। 
  • (vi) आन्दोलनकर्मियों के द्वारा पुलिस व सरकारी कर्मचारियों को गाव उकसाना 
  • (vii) प्रशासन का ठप्प हो जाना 
  • (viii) अराजकता की स्थिति का पैदा होना 
  • (ix) कानून-व्यवस्था को लोगों के द्वारा अपने हाथों में सेना 

Q2 जनता पार्टी के बनने व टूटने की प्रक्रिया पर प्रकाश डालिए ।

Ans. सत्तर का दशक भारतीय अर्थव्यवस्था व राजनीति दोनों के लिए दुखद रहा। विभिन्न कारणों से देश आर्थिक संकट से गुजर रहा था। जिसके प्रमुख कारण 1971 के पाकिस्तान है। 

युद्ध का परिणाम व इसका प्रभाव व प्राकृतिक विपदाओं का प्रभाव था, जैसे मानसून का फेल हो जाना व सूख्या पड़ना आदि। इन कारणों से देश में आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बहुत बढ़ गयी। जिसके कारण देश में असन्तोष फैल गया। इससे आर्थिक संकट की राजनीति प्रारम्भ हो गयी व देश के अनेक भागों में आन्दोलन प्रारम्भ हो गये। 

बिहार व गुजरात में ये आन्दोलन बड़े पैमाने पर हुए जिनका नेतृत्व विद्यार्थी वर्ग कर रहा था। जयप्रकाश नारायण व मोरारजी भाई देसाई भी इस आन्दोलन में विरोधी दल के साथ हो गये।

आन्दोलन से उत्पन्न स्थिति के कारण श्रीमती इंदिरा गाँधी ने देश में आपातकाल की स्थिति की घोषणा कर दी व विरोधी दलों के प्रमुख नेताओं को जेल में डाल दिया गया। 25 जून, 1975 को 18 महीने बाद देश में श्रीमती इंदिरा गाँधी ने संसदीय चुनावों की घोषणा की जेल में ही सभी विरोधी दलों ने यह निर्णय किया कि वे 1977 के चुनाव में इंदिरा गाँधी व काँग्रेस के खिलाफ एक पार्टी के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ेंगे ताकि कांग्रेस की हार को निश्चित किया जा सके। 

इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए श्री जयप्रकाश नारायण व आचार्य कृपलानी की प्रेरणा से प्रमुख विशेष दलों ने मिलकर अपने दलों का एक दल में विलय करके जनता पार्टी का गठन किया ।

1977 के चुनाव में काँग्रेस के खिलाफ एक कार्यक्रम व एक नेता के तहत चुनाव लड़ा। इस चुनाव में कॉंग्रेस को मुँह देखना पड़ा। यहाँ तक कि रायवरेली संसदीय चुनाव क्षेत्र से श्रीमती इंदिरा गाँव चुनाव हार गयीं। जनता पार्टी ने लोकसभा में 213 बहुमत प्राप्त कर केन्द्र में सरकार बनाई परन्तु जनता पार्टी अपनी इस ताकत के बोझ को होल न सकी और बनने के साथ-साथ इसमें पड़ गयी। 

प्रधानमंत्री के पद पर इसके घटक दलों में तनाव पैदा हो गया जो अन्ततः इसके विभाजन व जनता पार्टी की सरकार के पतन का कारण बना। लोकदल के चौधरी चरण अपने घटक के साथ अलग हो गये व श्रीमती इंदिरा गाँधी की कांग्रेस के बाहरी समर्थन से बनाई जो केवल चार महीने चली।

इस आर्टिकल में किसी भी प्रकार का त्रुटि आपको मिलती है तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं हम उसे जल्द से जल्द ठीक करने की कोशिश करेंगे क्योंकि लिखने समय सबसे गलती हो जाती है 😅😅😅😅😅😅😅😅😅



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FAQs

Q.1 तुर्कमान गेट घटना के बारे में समझाइये। 

Ans. आपातकालीन स्थिति के दौरान दिल्ली के गरीब इलाके के निवासियों को बड़े पैमाने पर विस्थापित होना पड़ा। इन गरीब विस्थापित लोगों को यमुना नदी के निर्जन इलाके में बसाया गया। इसी उद्देश्य की एक घटना तुर्कमान गेट इलाके की एक वस्ती की है। आपातकाल स्थिति की यह बहुत ही चर्चित घटना है। 

Q.2 चौधरी चरण सिंह पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। 

Ans. चौधरी चरण सिंह का जन्म 1902 में हुआ। वह महान् स्वतंत्रता सेनानी और प्रारंभ ३ उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहे। वे ग्रामीण एवं कृषि विकास की नीति और कार्यक्रमों के कट्टर समर्थक थे। 1967 में काँग्रेस पार्टी को छोड़कर भारतीय क्रांति दल का गठन किया। वे बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। 

Q3. मोरारजी देसाई पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

Ans. मोरारजी देसाई का जन्म 1897 में हुआ। वे भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी और संधीवादी नेता थे। वे बॉम्बे (अब मुंबई) राज्य के मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने 1966 में कॉंग्रेस संसदीय पर्टी का नेतृत्व संभाला। वे 1967-1969 तक देश के उपप्रधानमंत्री रहे। वे कांग्रेस पार्टी में मिडिकेट गुट के एक सदस्य थे। 

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