Class 12 Political Science Notes Ch-16 In Hindi PART-B | जन आंदोलनों का उदय कक्षा 12 पाठ 16 के प्रश्न उत्तर भाग-B

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Class 12 Political Science Notes Ch-16 In Hindi में यह अध्याय काफी महत्वपूर्ण है| इस अध्याय से काफी प्रश्न परीक्षा में पूछे जा चुके हैं तथा यह अध्याय विद्यार्थी के लिए अति आवश्यक है क्योंकि इस अध्याय से हमें विश्व की राजनीति समझ में आती है|

तो छात्रों, इस लेख को पढ़ने के बाद, आपको इस अध्याय से परीक्षा में बहुत अधिक अंक प्राप्त होंगे, क्योंकि इसमें सभी परीक्षाओं से संबंधित प्रश्नों का वर्णन किया गया है, इसलिए इसे पूरा अवश्य पढ़ें।

मैं खुद 12वीं का टॉपर रहा हूं और मुझे पता है कि 12वीं की परीक्षा में किस तरह के प्रश्न पूछे जाते हैं। वर्तमान में, मैं एक शिक्षक की भूमिका भी निभा रहा हूँ, और अपने छात्रों को कक्षा 12वीं की महत्वपूर्ण जानकारी और विषयों का अभ्यास भी कराता हूँ। मैंने यहां 5 वर्षों से अधिक के अपने अनुभव के साथ प्रश्न-उत्तर लेख लिखा है। इस पोस्ट की मदद से आप परीक्षा में इस अध्याय से राजनीति विज्ञान में बहुत अच्छे अंक प्राप्त कर सकेंगे।

Class 12 Political Science Notes Ch-16 In Hindi PART-B | जन आंदोलनों का उदय कक्षा 12 पाठ 16 के प्रश्न उत्तर भाग-B

कक्षा | Class12th 
अध्याय | Chapter16
अध्याय का नाम | Chapter Nameजन आंदोलनों का उदय
बोर्ड | Boardसभी हिंदी बोर्ड
किताब | Book एनसीईआरटी | NCERT
विषय | Subjectराजनीति विज्ञान | Political Science
मध्यम | Medium हिंदी | HINDI
अध्ययन सामग्री | Study Materialsप्रश्न उत्तर | Question answer

पाठ के मुख्य बिंदु | Main Point of This chapter

भारत एक बहुसंख्यक, बहुसंस्कृति, बहुधर्म, बहुभाषी देश है जिसमें भौगोलिकता व व्यवसायों की विभिन्नता है। भारत का प्रजातन्त्र सभी को अपनी-अपनी संस्कृति, भाषा व पहचान को विकसित करने का अधिकार देता है व सभी नागरिकों को अपने विभिन्न प्रकार के सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक व व्यावसायिक हितों की रक्षा करने व उन्हें विकसित करने का अधिकार देता है। भारत में विभिन्न आधारों पर व विभिन्न उद्देश्यों के लिए नागरिक अपने इन अधिकारों का प्रयोग करते रहे हैं।

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देश के आर्थिक, तकनीकी व राजनीतिक विकास के साथ समाज में जागरूकता का भी विकास हुआ जिसके आधार पर नागरिक अपने हितों के बारे में और भी अधिक सक्रिय हो गये हैं जिसके परिणामस्वरूप देश के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार के आन्दोलनों का पिछले 60 वर्षों में उदय हुआ है। यहाँ पर इन प्रमुख आन्दोलनों के कारण व प्रभावों का अध्ययन किया गया है। चिपको आन्दोलन – चिपको आन्दोलन उत्तराखंड का बहुचर्चित आन्दोलन है जिसकी

शुरुआत उत्तराखंड के दो-तीन गाँवों से हुई थी। इस आन्दोलन के कारण वन विभाग के अधिकारियों का आपत्तिजनक व्यवहार था जिसमें उन्होंने ग्राम वालों को तो कुछ लकड़ी काटने के लिए मना कर दिया जबकि खेल सामग्री के एक निर्माता को इसके लिए अनुमति दे दी। इस निर्णय से ग्राम वालों में रोष उत्पन्न हो गया व उनका आन्दोलन उत्तराखंड के बड़े इलाके में फैल गया।

आन्दोलनकारियों ने माँग की कि क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों पर केवल स्थानीय लोगों का ही नियन्त्रण होना चाहिए व किसी बाहरी व्यक्ति को स्थानीय संसाधनों के सम्बन्ध में कोई ऐसा बाहरी व्यक्ति को नहीं दिया जाना चाहिए। आन्दोलनकारियों में अपने क्षेत्र के प्राकृतिक सन्तुलन के बिगड़ने की आशंका भी थी।

चिपको आन्दोलन में महिलाओं ने सक्रिय भूमिका अदा की क्योंकि उनको इस बात पर रोष था कि जंगल में सक्रिय ठेकेदार स्थानीय लोगों को गैर कानूनी तरीके से शराब भेजते हैं जिससे स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य व परिवार बिगड़ रहे हैं व उनकी अर्थव्यवस्था भी खराब हो रही है। अतः इस आन्दोलन का आधार सामाजिक व आर्थिक हो गया। चिपको आन्दोलन की सफलता इस बात में है कि यह अन्य आन्दोलन के लिए प्रेरणादायक बन गया।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न | VERY SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS

Class 12 Political Science Notes
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Q. 1. जन आंदोलन की प्रकृति पर अति लघु टिप्पणी लिखिए। 

Ans. जन आंदोलन वे आंदोलन होते हैं जो प्रायः समाज के संदर्भ या श्रेणी के क्षेत्रीय अथवा स्थानीय हितों, मांगों और समस्याओं से प्रेरित होकर प्रायः लोकतांत्रिक तरीके से चलाए जाते हैं। 

Q.2. उत्तराखंड में कुछ गाँव में जंगलों की कटाई के विरोध में किस प्रकार एक प्रसिद्ध आंदोलन का रूप ग्रहण किया ? 

Or, चिपको आन्दोलन के बारे में आप क्या जानते हैं ? 

Ans. 1973 में पेड़ों को बचाने के लिए सामूहिक कार्यवाही ने एक असाधारण घटना ने वर्तमान उत्तराखंड राज्य के स्त्री-पुरुषों की एकजुटता ने वनों की व्यावसायिक कटाई का घोर विरोध किया। इस विरोध का मूल कारण था कि सरकार ने जंगलों की कटाई के लिए अनुमति दी थी। 

class 12th NotesMCQ
HistoryPolitical Science
EnglishHindi

Q. 3. जन आन्दोलनों का प्रजातन्त्र में क्या महत्त्व है ? 

Ans. प्रजातंत्र में जन आन्दोलनों का अस्तित्व में आना व विभिन्न आधारों पर इनका उदय ‘होना स्वाभाविक है। प्रजातन्त्रीय प्रक्रिया के दौरान व प्रजातन्त्रीय वातावरण में जनता अपने हितों को समझना प्रारंभ करती है तथा उनके प्राप्त करने व विकसित करने के संगठन बनाते हैं व आवश्यकता पड़ने पर आन्दोलन भी करते हैं। 

Q.4. चिपको आन्दोलनकारियों की मुख्य माँगें क्या थीं? 

Ans. चिपको आन्दोलन मुख्य रूप से जंगल के अधिकारियों के पक्षपाती व्यवहार के खिलाफ था। इसके साथ जंगल के ठेकेदारों द्वारा ग्रामवासियों को नशे की लत डालने के खिलाफ भी यह आन्दोलन था। इन आन्दोलनकारियों का उद्देश्य पर्यावरण की रक्षा के लिए पेड़ों की रक्षा करना भी था। इसके साथ अन्य कई और मुद्दे भी इस आन्दोलन के कार्य क्षेत्र में आ गये जैसे कि स्थानीय लोगों के अधिकार व स्थानीय प्राकृतिक स्रोतों की सुरक्षा । 

Q.5. चिपको आन्दोलन महिलाओं का आन्दोलन क्यों कहा जाता है ?

Ans. चिपको आन्दोलन को महिला आन्दोलन इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस आन्दोलन में महिलाओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया व पर्यावरण की सुरक्षा व पेड़ों की सुरक्षा के मुद्दों के साथ-साथ महिलाओं से जुड़े अनेक मुद्दों को भी उठाया। 

Q6. ताड़ी आन्दोलन कैसे फैला ? Or, ताड़ी विरोधी आन्दोल किस प्रकार से फैला ?

Ans. ताड़ी की पूर्ति व बेच के खिलाफ ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएँ नेलीर में इकट्ठी हुई व सभी महिलाओं से इस आन्दोलन में शामिल होने की अपील की जिसका पूरे क्षेत्र पर व्यापक प्रभाव एड़ा व महिलाओं का यह आन्दोलन एक विशाल आन्दोलन बन गया व लगभग 5000 ग्रामों में फैल गया। जगह-जगह सभाएँ हुई व ताड़ी के नशे व शराब के नशे के खिलाफ प्रस्ताव पारित किये गये। इस आन्दोलन ने माफिया, अधिकारियों व राजनीतिज्ञों के सम्बन्धों को नंगा कर दिया। 

Q.7 जाड़ी विरोधी आन्दोलन का प्रभाव बताइये।

Ans. ताड़ी विरोधी आंदोलन ग्रामीण क्षेत्र की कुछ महिलाओं ने प्रारम्भ किया था जिनके से यह एक जन-आन्दोलन बन गया जिससे न केवल नशे के खिलाफ जनमत तैयार हुआ प्रयास बल्कि अन्य सामाजिक बुराइयों को दूर करने का संकल्प इस आन्दोलन के कारण लिया जा सका। इस आन्दोलन की सबसे बड़ी सफलता इस बात में है कि महिलाओं के अधिकारों के बारे में बहुत जागरूकता आयी व महिलाओं की स्थिति में एक बड़ा परिवर्तन आया। सरकार की नीतियों व कानूनों में भी परिवर्तन आ गया।

लघु उत्तरीय प्रश्न | SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS

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Q. 1. जन आंदोलन के द्वारा पढ़ाए जाने वाले प्रमुख पाठों या सबकों (Lessons) का संक्षेप में उल्लेख कीजिए।

Ans. जन आंदोलन के सबक (Lesson from popular movement ) ये है:- 

() जन आंदोलनों ने लोगों को लोकतांत्रिक को ज्यादा बढ़िया ढंग से समझने में सहायता छात्र-छात्राएँ, ग्रामीण शहरी, किसान, मजदूर, गैर सरकारी संगठन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता आदि ये भलीभाँति इन आंदोलनों के कारण सीख गए कि लोकतंत्र में अंतिम सत्ता जनता में निष्ठित होती है। 

(ii) हमें जन आंदोलनों के इतिहास से यह भी शिक्षा मिलती है। यह आंदोलनों के इतिहास से यह भी शिक्षा मिलती है। यह आंदोलन अनियमित ढंग से तुरंत खड़े नहीं हो जाते। इसलिए इन्हें समस्या के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

(iii) लोकतंत्र एक ऐसी शासन प्रणाली है जो दलीय प्रणाली पर आधारित होती है लेकिन जन आंदोलनों का आदेश दलीय राजनीति की कमियों और दोषों को दूर करना होता है। इसलिए चाहे सत्ताधारी दल हों या सभी विरोधी दल हो, वे जन आंदोलनों के स्वरूप, विकास, प्रगति से जुड़े समाचारों को प्रेस और दूरदर्शन पर बड़े ध्यान से पढ़ने, सुनते और देखते हैं। इसीलिए मह लोकतंत्र और दलगत राजनिति के अहम हिस्से माने जाते हैं। 

(iv) समस्याओं की अभिव्यक्ति :- जन आंदोलन सामाजिक आंदोलनों के रूप में जब प्रगति की सीढ़ियों पर चढ़ते हैं तो उनके द्वारा समाज के उन नए वर्गों की सामाजिक-आर्थिक समस्याओं को अभिव्यक्ति मिलती है जो अपनी दिक्कतों को चुनावी राजनीति के माध्यम से हल नहीं करा पाते। आंदोलनों को उपयोग में लाना ज्यादा आसान है। 

Q.2 जन आंदोलनों की कमियों एवं त्रुटियों को संक्षेप में लिखिए।

Ans. 

(i) जन-आंदोलनों द्वारा लामबंद की जाने वाली जनता सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित तथा अधिकारहीन वर्गों से संबंध रखती है। जन आंदोलनों द्वारा अपनाए गए तौर-तरीकों से मालूम होता है कि रोजमर्रा की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में इन वंचित समूहों को अपनी बात कहने का पर्याप्त मीका नहीं मिलता था। 

(ii) किंतु कुल मिलाकर सार्वजनिक नीतियों पर इन आंदोलनों का कुल असर काफी सीमित रहा है। इसका एक कारण तो यह है कि समकालीन सामाजिक आंदोलन किसी एक मुद्दे के इर्द-गिर्द ही जनता को लामबंद करते हैं। 

Q3.ताड़ी विरोधी आन्दोलन के उदय के कारण व प्रभाव समझाइए । 

Ans. आन्ध्र प्रदेश में नौवें दशक में महिलाओं ने शराब माफियाओं के खिलाफ आन्दोलन छेड़ दिया। शराब माफिया ग्राम के पुरुषों को ताड़ी की आपूर्ति करके उनको नशे की आदत डाल रहे थे जिसका सीधा प्रभाव परिवार पर विशेषकर महिलाओं पर पड़ता था। ताड़ी की आपूर्ति के साथ शराब माफिया शराब की भी आपूर्ति करते थे। ताड़ी भी एक पेय पदार्थ होता है जिसमें शराब की तरह ही नशा होता है। 

महिलाओं ने इन माफियाओं व माफियाओं के गुंडों के खिलाफ मजबूती से व हिम्मत से आन्दोलन चलाया। यहाँ तक सरकार तक भी इस विषय को ले गयी व अन्त में सभी को महिलाओं की माँगों के आगे झुकना पड़ा। महिलाओं के इस आन्दोलन को ताड़ी आन्दोलन के नाम से जाना जाता है। इसका प्रमुख उद्देश्य ताड़ी व शराब की आपूर्ति को रोकने व शराब के माफिया व अधिकारियों की मिली भगत को तोड़ना था ।

Q.4.नर्मदा बचाओ आन्दोलन का प्रभाव समझाइये।

Ans. (i) सरकार द्वारा 2003 में स्वीकृत राष्ट्रीय पुनर्वास नीति को नर्मदा बचाओ जैसे सामाजिक आंदोलन की उपलब्धि के रूप में देखा जा सकता है। परंतु सफलता के साथ ही नर्मदा बचाओ आंदोलन को बाँध के निर्माण पर रोक लगाने की माँग उठाने पर तीखा विरोध भी झेलना पड़ा है।

(ii) आलोचकों का कहना है कि आंदोलन का अड़ियल रवैया विकास की प्रक्रिया, पानी की उपलब्धता और आर्थिक विकास में बाधा उत्पन्न कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सरकार को बाँध का काम आगे बढ़ाने की हिदायत दी है लेकिन साथ ही उसे यह आदेश भी दिया गया है कि प्रभावित लोगों का पुनर्वास सही ढंग से किया जाए।

(iii) नर्मदा बचाओ आंदोलन, दो से भी ज्यादा दशकों तक चला। आंदोलन ने अपनी माँग खने के लिए हर संभव लोकतांत्रिक रणनीति का इस्तेमाल किया। आंदोलन ने अपनी बात पालिका से लेकर अंतर्राष्ट्रीय मंचों तक से उठायी। आंदोलन की समझ को जनता के सामने खने के लिए नेतृत्व ने सार्वजनिक रैलियों तथा सत्याग्रह जैसे तरीकों का भी प्रयोग किया परंतु दलों सहित मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों के बीच आंदोलन कोई खास जगह नहीं बना

(iv) वास्तव में, नर्मदा आंदोलन की विकास रेखा भारतीय राजनीति में सामाजिक आंदोलन नीति दलों के बीच निरंतर बढ़ती दूरी को बयान करती है। उल्लेखनीय है कि नवे दशक 5 पहुँचते-पहुँचते नर्मदा बचाओ आंदोलन से कई अन्य स्थानीय समूह और आंदोलन * जुड़े। ये सभी आंदोलन अपने-अपने क्षेत्रों में विकास की वृहत् परियोजनाओं का विरोध है। इस समय के आस-पास नर्मदा बचाओ आंदोलन देश के विभिन्न हिस्सों से चल रहे आंदोलनों के गठबंधन का अंग बन गया। मेघा पाठेकर व अन्य कई पर्यावरण से जुड़े इस आन्दोलन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न | Long Answer Type Questions

Class 12 Political Science Notes
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Q.1. राजनीतिक व गैर-राजनीतिक आन्दोलनों का महत्त्व व प्रासंगिकता बताये। 

Ans. प्रजातंत्र सरकार का वह रूप है जिसमें व्यक्ति अधिकतम स्वतन्त्रता प्राप्त होती व्यक्ति अपने को व्यक्त कर सका है। अपने विचार अपनी माँग रख सकता है व अपने हितों रक्षा के लिए संगठित भी हो सकता है। प्रजातन्त्र में व्यक्ति अपने हितों का प्रसार करने के लि संगठन भी बनाते हैं। ये संगठन दो प्रकार के होते हैं-राजनीतिक संगठन व गैर राजनीति संगठन। 

राजनीतिक संगठनों के माध्यमों से विभिन्न हित समूह राजनीति में हिस्सा लेते हैं चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लेते हैं जबकि गैर राजनीतिक संगठन उन व्यक्तियों का समूह होता जो अपने हितों को प्राप्त करने के लिए सीधे राजनीति में भाग नहीं लेते बल्कि राजनीतिक दल व राजनीतिक निर्णय को प्रभावित करते हैं।

आजादी के बाद से भारत में संसदीय लोकतन्त्र काम कर रहा है व चुनावी प्रक्रिया का दौर चल रहा है। विभिन्न प्रकार के दबाव समूह इस बीच अस्तित्व में आये हैं जो अपने हितों की रक्षा के लिए कार्य कर रहे हैं। अनेक हित समूहों ने अपने संगठनात्मक आन्दोलन से चुनावी राजनीति में हिस्सा लेकर अपने हितों को प्राप्त करने का प्रयास किया है। 

इन्हें राजनीतिक आन्दोलन कहते हैं। इसके अलावा किसान यूनियन, महिला संगठन, विद्यार्थी संगठन व अन्य अनेक प्रकार के संगठन हैं जो हित समूह व दबाव समूह के रूप में कार्य कर रहे हैं। इनको गैर राजनीतिक संगठन कहते हैं। वर्तमान अध्ययन में अनेक गैर राजनीतिक आन्दोलनों का वर्णन किया गया है जिनके अध्ययन से न केवल विभिन्न प्रकार के मुद्दों का ज्ञान होता है। 

चिपको आन्दोलन व ताड़ी आन्दोलन व नर्मदा बचाओ आन्दोलन ने समाज के न केवल निश्चित मुद्दे भी उठाये गये हैं जिससे समाज को एक नयी दिशा मिली है। इस प्रकार न केवल राजनीतिक संगठनों का आज के प्रजातंत्र में महत्त्व है बल्कि विभिन्न गैर राजनीतिक संगठनों का भी महत्त्व है व इनका अध्ययन व विश्लेषण प्रासंगिक भी है जिससे भारतीय प्रजातन्त्र मजबूत होगा न केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि स्थानीय स्तर पर भी।

Q. 2 ताड़ी आन्दोलन में आन्ध्र प्रदेश के कई सामाजिक विषयों को शामिल किया गया। समझाइये।

Ans. ताड़ी आन्दोलन आन्ध्र प्रदेश का बहुत चर्चित आन्दोलन रहा है जिसमें चितूर जिले के ग्राम गुंडलुर गाँव की महिलाओं ने अपने ग्राम में ताड़ी की बिक्री पर पाबंदी लगाने की माँग करते हुए एकजुट हो गयी तथा ग्राम में ताड़ी की बिक्री का विरोध किया जिसकी सूचना मिलने पर ताड़ी के ठेकेदारों ने महिलाओं पर शारीरिक आक्रमण किया परन्तु इस पर भी महिलाओं का साहस कम नहीं हुआ जिसके आगे ठेकेदारों व उनके गुंडों को हार माननी पड़ी।

इस आन्दोलन में महिला संगठनों के आन्दोलन केवल ताड़ी व शराब की बिक्री के खिलाफ ही नहीं लड़ रहे थे बल्कि उनके सामने अन्य सामाजिक मुद्दे भी थे। महिलाओं ने बड़े ही साहस के साथ शराब के ठेकेदारों व माफिया समूह के बीच के सम्बन्धों को नंगा किया व राजनीतिज्ञों के संबंधों को भी उजागर किया जो एक बड़ा समूह था जिसके माध्यम से ग्राम के पुरुष वर्ग का शोषण हो रहा था जिसका सबसे बुरा प्रभाव महिलाओं पर पड़ रहा था। 

नेलौर जिले की महिलाओं का यह आन्दोलन जल्द ही बड़े भाग में फैल गया। ताड़ी-विरोधी आन्दोलन का नारा बहुत साधारण था ‘ताड़ी की विक्री बंद करो लेकिन इस साधारण नारे के पीछे क्षेत्र के व्यापक सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक मुद्दों तथा महिलाओं के जीवन को गहराई से प्रभावित किया। ताड़ी विरोधी आन्दोलन महिला आन्दोलन बन गया। इस आन्दोलन में मुख्य मुद्दे निम्न थे—

  • (i) नशा वन्दी 
  • (ii) ठेकेदारों व प्रशासन के बीच संबंध
  • (iii) महिलाओं पर हिंसा 
  • (iv) महिलाओं का शारीरिक शोषण
  • (v) आर्थिक संकट
  • (vi) दहेज प्रथा

इस आन्दोलन के कारण महिलाओं के मुद्दों के प्रति समाज में व्यापक जागरूकता पैदा हो गई व महिलाओं की विभिन्न समस्याओं पर विचार-विमर्श करने के लिए एक मंच प्राप्त हुआ। महिला आन्दोलन ने महिलाओं की राजनीति में भागीदारी को भी विकसित किया। 73वें व 74वें संविधान के द्वारा महिलाओं की स्थानीय समस्याओं में 33% भागीदारी निश्चित करना इस आन्दोलन का ही परिणाम है। 

Q3. भारत में स्त्री उत्थान के लिए उठाए गए कदमों का वर्णन कीजिए। 

Ans. स्त्री उत्थान के लिए उठाए गए कदम- स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत में स्त्रियों की दशा में सुधार लाने के लिए बहुत-से कदम उठाए गए हैं।

1. महिला अपराध प्रकोष्ठ तथा परिवार न्यायपालिका—यह महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों को रोकने के लिए सुनवाई करते हैं। विवाह, तलाक, दहेज, पारिवारिक मुकद्दमे भी सुनते हैं।

2. सरकारी कार्यालयों में महिलाओं की भर्ती लगभग सभी सरकारी कार्यालयों में महिला कर्मचारियों की नियुक्ति की जाती है। अब तो वायुसेना, नीसेना तथा थलसेना और सशस्त्र सेनाओं के तीनों अंगों में अधिकारी पदों पर स्त्रियों की भर्ती पर लगी रोक को हटा लिया है। सभी क्षेत्रों में महिलाएँ कार्य कर रही हैं।

3. स्त्री शिक्षा—स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् भारत में स्त्री शिक्षा का काफी विस्तार हुआ है। 4. राष्ट्रीय महिला आयोग 1990 के एक्ट के अंतर्गत एक राष्ट्रीय महिला आयोग स्थापना की गई है। 

5. महिलाओं को आरक्षण महिलाएँ कुल जनसंख्या की लगभग 50 प्रतिशत हैं परंतु सरकारी कार्यालयों, संसद, राज्य विधान मंडलों आदि में इनकी संख्या बहुत कम है। 1993 के 73 व 74वें संविधान संशोधनों द्वारा पंचायती राज संस्थाओं तथा नगरपालिकाओं में एक-तिहाई स्थान महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिए गए हैं। संसद तथा राज्य विधानमंडलों में भी इसी प्रकार आरक्षण किए जाने की मांग जोर पकड़ रही है।

इस आर्टिकल में किसी भी प्रकार का त्रुटि आपको मिलती है तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं हम उसे जल्द से जल्द ठीक करने की कोशिश करेंगे क्योंकि लिखने समय सबसे गलती हो जाती है 😅😅😅😅😅😅😅😅😅


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FAQs

Q1. नर्मदा बचाओ आन्दोलन के बारे में आप क्या जानते हैं ?

Ans. नर्मदा बचाओ आन्दोलन गुजरात में चलाया गया जिसका प्रभाव देश के अनेक क्षेत्रों में हुआ। इसका उद्देश्य सरदार सरोवर परियोजना के तहत होने वाले बाँध के निर्माण का विरोध करना था। इस आन्दोलन में विकास के नाम पर सरदार सरोवर परियोजना जैसी योजनाओं के औचित्य पर सवाल उठाये। 

Q.2. महिला राष्ट्रीय आयोग का गठन कब हुआ ? इसके अधीन कौन-कौन से उपायों को सम्मिलित किया जिनके द्वारा महिलाओं के अधिकारों की रक्षा हो ? 

Ans. महिलाओं के अधिकार और कानूनी अधिकारों की सुरक्षा के लिए 1990 में संसद ने महिलाओं के लिए राष्ट्रीय आयोग की स्थापना के लिए कानून बनाया जो 31 जनवरी, 1992 को अस्तित्व में आया। इसके अन्तर्गत कानून की समीक्षा, अत्याचारों की विशिष्ट व्यक्तिगत शिकायतों में हस्तक्षेप और जहाँ कहीं भी उपयुक्त और संभव हो महिलाओं के हितों की रक्षा के उपय सम्मिलित हैं।

Q.3. स्वतंत्रता के बाद महिलाओं की स्थिति में क्या-क्या परिवर्तन आया है ? 

Ans. स्वतंत्रता के बाद महिलाओं की स्थिति को असमानता से समानता तक लाने के जागरूक प्रयास होते रहे हैं। वर्तमान काल में महिलाओं को पुरुषों के साथ समानता का दर्जा प्राप्त है। महिलाएं किसी भी प्रकार की शिक्षा या प्रशिक्षण को चुनने के लिए स्वतंत्र है परंतु ग्रामीण ” समाज में अभी भी महिलाओं के साथ भेदभाव किया जाता है जिसे दूर किया जाना चाहिए।


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