Class 12 Political Science Notes Ch-18 In Hindi PART-B | भारतीय राजनीति : नए बदलाव कक्षा 12 पाठ 18 के प्रश्न उत्तर भाग-B

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Class 12 Political Science Notes Ch-18 In Hindi में यह अध्याय काफी महत्वपूर्ण है| इस अध्याय से काफी प्रश्न परीक्षा में पूछे जा चुके हैं तथा यह अध्याय विद्यार्थी के लिए अति आवश्यक है क्योंकि इस अध्याय से हमें विश्व की राजनीति समझ में आती है|

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मैं खुद 12वीं का टॉपर रहा हूं और मुझे पता है कि 12वीं की परीक्षा में किस तरह के प्रश्न पूछे जाते हैं। वर्तमान में, मैं एक शिक्षक की भूमिका भी निभा रहा हूँ, और अपने छात्रों को कक्षा 12वीं की महत्वपूर्ण जानकारी और विषयों का अभ्यास भी कराता हूँ। मैंने यहां 5 वर्षों से अधिक के अपने अनुभव के साथ प्रश्न-उत्तर लेख लिखा है। इस पोस्ट की मदद से आप परीक्षा में इस अध्याय से राजनीति विज्ञान में बहुत अच्छे अंक प्राप्त कर सकेंगे।

Class 12 Political Science Notes Ch-18 In Hindi PART-B | भारतीय राजनीति : नए बदला कक्षा 12 पाठ 18 के प्रश्न उत्तर भाग-B

कक्षा | Class12th 
अध्याय | Chapter18
अध्याय का नाम | Chapter Nameभारतीय राजनीति : नए बदला
बोर्ड | Boardसभी हिंदी बोर्ड
किताब | Book एनसीईआरटी | NCERT
विषय | Subjectराजनीति विज्ञान | Political Science
मध्यम | Medium हिंदी | HINDI
अध्ययन सामग्री | Study Materialsप्रश्न उत्तर | Question answer

पाठ के मुख्य बिंदु | Main Point of This chapter

1984 के चुनावों में श्री राजीव गाँधी के नेतृत्व में काँग्रेस को भारी सफलता मिली। इस चुनाव में कॉंग्रेस को लोक सभा की 415 सीटों पर सफलता मिली जो एक रिकार्ड है परन्तु इतने बड़े बहुमत वाली सरकार को अन्तिम वर्षों में अनेक प्रकार के आरोपों के कारण परेशानियों उठानी पड़ीं। 

Class 12 Political Science Notes Ch-18 In Hindi PART-B | भारतीय राजनीति : नए बदला कक्षा 12 पाठ 18 के प्रश्न उत्तर भाग-B
getty images

राजीव गाँधी की सरकार में वित्तमंत्री रहे विश्वनाथ प्रताप सिंह ने सरकार से त्याग पत्र देकर अलग पार्टी बनाई जो बाद में जनता दल के रूप में गठित की गयी। 1989 के लोक सभा के चुनावों में कॉंग्रेस को केवल 197 सीटें ही मिलीं। इस चुनाव के बाद विश्वनाथ प्रताप सिंह के नेतृत्व में राष्ट्रीय मोर्चा की सरकार बनी।

निश्चित परिस्थितियों में राष्ट्रीय मार्चा ने अन्य पिछड़ा वर्गों के लिए मंडल कमीशन की सिफारिशों के आधार पर 27% आरक्षण का आदेश लागू कर दिया जिससे देश में उच्च वर्गों व पिछड़े वर्गों के लोगों में टकराव पैदा हो गया व चारों ओर हिंसा का माहौल पैदा हो गया। मंडल कमीशन की सिफारिशों को लागू करने के आदेश ने भारतीय राजनीति को एक नई दिशा प्रदान की ।।

राष्ट्रीय मोर्चा की सरकार के दौरान भारतीय राजनीति को एक और मुद्दे ने प्रभावित किया वह था बावरी मस्जिद के स्थान पर राम मन्दिर के निर्माण का विषय 6 दिसम्बर, 1992 को बाबरी मस्जिद को गिरा दिया गया जिसमें पूरे देश में तनावपूर्ण घटना से भारतीय राष्ट्रवाद व धर्म निरपेक्षता पर बहस तेज हो गयी।

1989 से ही भारतीय राजनीति में गठबन्धन की सरकारें बनने का युग प्रारम्भ हो गया था। नेशनल फ्रंट भी एक गठबन्धन सरकार थी जो 1991 तक ही चली। 1991 में फिर चुनाव हुए जिसमें काँग्रेस को सरकार बनाने में सफलता तो मिली परन्तु इसका पहले जैसा प्रभुत्व समाप्त हो गया। 

इस प्रकार 1989 के बाद काँग्रेस का पतन प्रारम्भ हो गया क्योंकि क्षेत्रीय दलों का महत्त्व प्रान्तों में भी व केन्द्र में भी बढ़ने लगा। 1996 के चुनाव में भी गठवन्धन की सरकार बनी जिसमें क्षेत्रीय पार्टियों ने महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की। 1996 के प्रारम्भ में भारतीय जनता पार्टी के नेता श्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में सरकार बनी जो 13 दिन के बाद ही गिर गयी। 

बाद में कॉंग्रेस के समर्थन से यूनाइटेड फ्रंट की सरकार पहले एच. डी. देवगोडा के नेतृत्व में बनी किर श्री इंदर कुमार गुजराल के नेतृत्व में सरकार बनी। कॉंग्रेस के द्वारा समर्थन लेने के कारण 1999 में फिर चुनाव हुए जिसमें एन.डी.ए. को बहुमत मिला व श्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में सरकार बनी।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न | VERY SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS

Class 12 Political Science Notes
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Q. 1. कांग्रेस प्रणाली किसे कहा जाता है ? समझाइए । 

Ans. कॉंग्रेस का जन्म दिसंबर 1885 को हुआ प्रारंभिक वर्षों में एक गठबंधननुगा पार्टी थी। इसमें विभिन्न हित, सामाजिक समूह और वर्ग एक साथ रहते थे। इस परिघटना को ‘काँग्रेस प्रणाली’ कहा गया।

Q. 2. 1960 के दशक में कांग्रेस के पतन के कुछ कारण बताइए। 

Ans. (i) देश की बहुदलीय प्रणाली और गठबंधन राजनीति की बढ़ती लोकप्रियता । 

(ii) ओ. बी. सी. के कारण मंडल और कमंडल की राजनीति कुछ समय तक देश की क्षितिज पर छा गई। (iii) कई प्रांतों और क्षेत्रों में क्षेत्रीय दलों का उदय और अनेक वर्ग समूहों काnहटकर उनका बड़े राजनीतिक दलों से जुड़ना । 

(iv) बहुजन समाज पार्टी का जन्म, उदय एवं विकास ।

(v) कुछ राजनीतिक दलों द्वारा सांप्रदायिकता की राजनीति करने में सफल होना। 

(vi) 1971 के बाद बड़ी संख्या में बंगलादेशियों का आगमन एवं वोट की राजनीति के कारण उनकी वापसी के बारे में टालमटोल की राजनीति । 

(vii) 1984 के सिक्ख दंगे एवं उससे पूर्व हुए अमृतसर में स्वर्ण मंदिर में सैन्य बलों का प्रवेश या ब्लूस्टार की घटना।

Q.3. राष्ट्रीय लोकतंत्रात्मक गठबंधन (NDA) की सबसे बड़ी विशेषता क्या थी? 

Ans. यह सबसे बड़ी विरोधी दल भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में बने लगभग 13 राजनैतिक पार्टियों (या उससे अधिक) का गठबंधन था जिसकी सरकार अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में तीन बार बनी। इसका कुल कार्यकाल लगभग 6 वर्ष रहा। वाजपेयी कुछ ही दिनों तक पहली बार प्रधानमंत्री रहे लेकिन आज तक जितने भी गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने हैं उनका कार्यकाल कुल मिलाकर सर्वाधिक दीर्घ ही रहा है।

Q. 4. गठबंधन सरकार की एक राजनीतिक समस्या का विश्लेषण कीजिए। 

Ans. गठबंधन राजनीति में विचारों की एकरूपता नहीं होती। बार-बार पार्टियों गठबंधन छोड़ती हैं और इसीलिए प्रायः गठबंधन टूटते रहते हैं या बदलते रहते हैं। इससे लोगों का बहुदलीय प्रणाली में विश्वास कम होता है। प्रायः वे दो दलीय या तीन अथवा कभी-कभी एक दलीय प्रणाली के समर्थक भी बन जाते हैं। गठबंधन की सरकारें अस्थायी, कम गतिशील और खतरे की लटकी हुई तलवार के नीचे कार्य करती हैं। 

Q.5. गठबंधन राजनीति से आप क्या समझते हैं ?

Ans. (i) वह राजनीति जिसमें चुनाव के पहले अथवा बाद में आवश्यकतानुसार सरकार गठन या किसी अन्य मामले (जैसे राष्ट्रपति चुनाव) में आपसी सहमति बन जाए और दे सामान्यतः स्वीकृत न्यूनतम साझे कार्यक्रम के अनुसार देश में राजनीति (विरोधी दल के रूप में या सत्ताधारी गुट के रूप में) तो ऐसी राजनीति को गठबंधन की राजनीति कहते हैं।

  • (ii) 1937 के चुनाव के बाद कुछ प्रांतों में कॉंग्रेस ने संयुक्त सरकार बनाई थी। 
  • (iii) वी. पी. सिंह एवं चंद्रशेखर द्वारा संयुक्त मोर्चा सरकारें गठबंधन राजनीति के अर्थ उदाहरण हैं।
  • (iv) अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में राजग राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन अवदा डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में गठित प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की राजनीति को स्पष्ट करते हैं। 

Q.6. संयुक्त मोर्चा की एक महत्त्वपूर्ण विशेषता का विवेचन कीजिए।

Ans. (i) संयुक्त मोर्चा सरकार पहले वी. पी. सिंह के नेतृत्व में बनी और कॉग्रेस को सत्ता से दूर रखने के लिए सी.पी.एम. एवं भारतीय जनता पार्टी उसका समर्थन करते रहे। 

(ii) कुछ समय के बाद चंद्रशेखर के नेतृत्व में संयुक्त मोर्चा की सरकार बनी। उसे देवी लाल का लोकदल और काँग्रेस समर्थन देती रही। वे केवल मात्र 7 महीने तक संयुक्त सरकार का नेतृत्व करते रहे।

class 12th NotesMCQ
HistoryPolitical Science
EnglishHindi

Q.7. राष्ट्रीय मोर्चा का गठन समझाइये।

Ans. 1989 के चुनाव में जनता दल चुनाव से पहले हुए लोकदल, जनमोर्चा, काँग्रेस (एस) व जनता पार्टी के विलय का परिणाम था। जनता दल ने फिर कई अन्य क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर राष्ट्रीय मोर्चा का गठन किया। इन क्षेत्रीय दलों में थे तमिलनाडू की डी.एम. के. पार्टी, आन्ध्र प्रदेश की टी.डी.पी. आदि। राष्ट्रीय मोर्चा ने 1989 में विश्वनाथ प्रताप सिंह के नेतृत्व में वामपंथी दलों व भाजपा के बाहरी समर्थन से सरकार बनायी।

Q. 8. 1989 के चुनाव में मुख्य मुद्दे क्या थे ? 

Ans. 1989 के चुनाव में राजीव गांधी के नेतृत्व में प्रेस की सरकार बनी। कांग्रेस को इस चुनाव में 415 सीटें प्राप्त हुई। परन्तु धीरे-धीरे सरकार का साख गिरता गया। कई प्रकार के स्केन्डल सामने आये। राजीव गाँधी की सरकार में रहे वित्त मंत्री व रक्षा मंत्री श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने विभिन्न रक्षा सौदों में हुई किमबैक यानि रिश्वत चर्चाओं के सन्दर्भ में न केव अपने पद से त्याग पत्र दे दिया बल्कि कॉंग्रेस से त्याग पत्र देकर नया दल जन मोर्चा बना लिया जो बाद में अन्य प्रमुख विरोधी दलों के साथ विलय होकर जनता दल का गठन किया। 

1989 के चुनाव के परिणामों ने भारतीय राजनीति को एक नई दिशा प्रदान की। 1989 के चुनाव मे प्रमुख मुद्दा भ्रष्टाचार था श्री विश्वनाथ प्रसाप सिंह जो पहले ही एक ईमानदार छवि वाले व्यक्ति थे जो मिस्टर कलीन बन कर उभरे। कॉंग्रेस को इस चुनाव में हार का मुँह देखना पड़ा।।

Q. 9. पिछड़े वर्ग की राजनीतिक सत्ता में बढ़तो हुई भागेदारी को समझाइये।

Ans. भारत का पिछड़ा वर्ग परम्परागत रूप से काँग्रेस पार्टी का समर्थक रहा है परन्तु मंडल आयोग की सिफारिशों के आधार पर 27% आरक्षण लागू होने के बाद पिछड़ा वर्ग राजनीतिक रूप में जागरूक हो गया व आरक्षण की राजनीति ने अन्य पिछड़ा वर्ग को चुनाव में महत्त्वपूर्ण बना दिया। 

मंडल आयोग ने सामाजिक व शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग की पहचान कर विभिन्न जातियों को पिछड़ा वर्ग के रूप में अंकित किया। पिछड़ा वर्ग की होड़ लग गयी। इस प्रकार से राजनीतिक सत्ता में पिछड़ा वर्ग के लोगों की भागेदारी बढ़ गयी। अपने हितों को आगे बढ़ाने के लिए अनेक दल अस्तित्व में आये। इसी प्रक्रिया में पिछड़ा वर्ग में नेतृत्व का विकास हुआ। 

Q. 10. भारतीय राजनीति बहुजन समाज पार्टी के उदय को समझाइये ।

Ans. भारतीय राजनीति में बहुजन समाज पार्टी काई राज्यों विशेषकर उत्तर प्रदेश व केन्द्र में भी अहम भूमिका निभा रही है। बहुजन समाज में जागृति का आन्दोलन करने व बहुजन समाज पार्टी बनाने में श्री कांशीराम का अहम योगदान है। बहुजन समाज पार्टी ने कॉंग्रेस की परम्परागत रूप से समर्थन करने वाले वोट बैंक को तोड़ दिया जिनमें प्रमुख रूप से हरिजन, मुस्लिम व पिछड़ा वर्ग शामिल थे। कुमारी मायावती बहुजन समाज पार्टी को नेतृत्व प्रदान कर रही है।

लघु उत्तरीय प्रश्न | SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS

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Q. 1. 1986 से किन नागरिक मसलों ने भारतीय जनता पार्टी को सुदृढ़ता प्रदान की। Or, शाहबानो मामला क्या था ? इस पर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस विरोधी क्या रुख अपनाया ?

Ans. (i) 1986 में ऐसी दो बातें हुई जो एक हिन्दूवादी पार्टी के रूप में भाज राजनीति के लिहाज से प्रधान हो गई। 

(ii) सर्वोच्च अदालत ने शाहबानो के पक्ष में फैसला सुनाया। पुरातनपंथी मुसलमानों ने अदालत के इस फैसले को अपने ‘पर्सनल लॉ’ में हस्तक्षेप माना। 

(iii) सरकार के इस कदम का कई महिला संगठन, मुस्लिम महिलाओं की जमात तथा अधिकांश बुद्धिजीवियों ने विरोध किया। भाजपा ने कॉंग्रेस सरकार के इस कदम की आलोचना की और इसे अल्पसंख्यक समुदाय को दी गई अनावश्यक रियायत तथा ‘तुष्टिकरीण’ करार दिया। 

Q. 2. जनता दल के शासन काल में ही भारत में एक दूरगामी बदलाव धार्मिक पहचान पर आयराति राजनीति का उदय हुआ। स्पष्ट कीजिए।

Ans. (i) जनता दल 1980 में बना। तब से लेकर 1986 तक देश में एक दूरगामी बदलाव आया। यह परिवर्तन धार्मिक पहचान पर आधारित राजनीति के उदय का था। 

(ii) जनता पार्टी के पतन और बिखराव के बाद भूतपूर्व जनसंघ के समर्थकों ने 1980 में भारतीय पार्टी (भाजपा) बनाई। शुरू-शुरू में भाजपा ने जनसंघ की अपेक्षा कहीं ज्यादा बड़ा राजनीतिक मंद अपनाया। 

(iii) 1986 के बाद इस पार्टी ने अपनी विचारधारा में हिन्दू राष्ट्रवाद के तत्त्वों पर जोर देना शुरू किया। भाजपा ने ‘हिन्दुत्व’ की राजनीति का रास्ता चुना और हिन्दुओं को लामबंद करने की रणनीति अपनायी। 

Q.3. बी. डी. सावरकर कौन थे ? उन्होंने हिंदुत्व के महत्त्व की किन शब्दों में व्याख्या की।

Ans. परिचय दी. डी. सावरकर भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी तथा क्रांतिकारी थे, जिन्होंने देश के भीतर और देश के बाहर क्रांतिकारियों से मिलकर देश की आजादी में भाग लिया। जून, 1909 को उन्हीं के एक घनिष्ठ मित्र और साथी मदन लाल धींगड़ा ने लंदन में उस अंग्रेज अधिकारी (यानी सर विलियम कर्जन) की हत्या कर दी, जो अनेक निदोष लोगों की भारत में हत्याओं के लिए जिम्मेदार था। वी

हिंदुत्व और उसकी व्याख्या— हिन्दुत्व’ अथवा ‘हिन्दूपन’ शब्द को वी. डी. सावरकर ने गढ़ा (coined) था और इसको परिभाषित (defined) करते हुए उन्होंने इसे भारतीय (और उनके शब्दों में हिन्दू) राष्ट्र की बुनियाद (नींव) बताया। उनके कहने का तात्पर्य यह कि भारत राष्ट्र का नागरिक वही हो सकता है जो भारतभूमि को न सिर्फ ‘पितृभूमि’ बल्कि अपनी ‘पुण्यभूमि’ भी स्वीकार करे

(हिन्दुत्व के समर्थकों का तर्क है कि मजबूत राष्ट्र सिर्फ स्वीकृत राष्ट्रीय संस्कृति की बुनियाद पर ही बनाया जा सकता है। वे यह भी मानते हैं कि भारत के सन्दर्भ में राष्ट्रीयता की बुनियाद केवल हिन्दू संस्कृति (जो बहुत उदार एवं जिसकी पाचन शक्ति अद्भुत है) की हो सकती है।

Q.4. अयोध्या विवाद विषय पर संक्षेप में विचार लिखिए। 

Ans. अयोध्या में वर्षों पुरानी एक ऐतिहासिक इमारत थी। संभवतः इसका निर्माण 16वीं शताब्दी में हुआ। प्रायः हिंदू, पंडित, विद्वान आदि यह दावा करते रहे कि वह प्राचीन हिंदू मंदिर था और संभवत: बाबर के आदेश पर उसके शासन काल में यहाँ मस्जिद का निर्माण किया गया। अधिकांश मुसलमानों, विद्वानों का यह दावा था कि यह प्रथम मुगल सम्राट बाबर के काल में ही मस्जिद थी। अधिकांश मुस्लिम अयोध्या स्थित इस मस्जिद को बाबरी मस्जिद कहते थे। इसका निर्माण गोरखाकी (बाबर के अमीर और दरवारी) ने करवाया था। वस्तुतः मीरबाकी मुगल सम्राट वावर का सिपहसलार था।

अनेक हिंदू आज भी मानते हैं कि दावर बहुत उदार शासक नहीं था। उसने भगवान राम की जन्मभूमि (अयोध्या) में बने राम मंदिर को तुड़वाकर उसी स्थान पर एक मस्जिद बनवाई थी। अयोध्या का वह ढाँचा या इमारत मंदिर है या मस्जिद दोनों सम्प्रदाय के लोगों में उठे इस विवाद ने एक अदालती मुकदमे का रूप ग्रहण कर लिया। मुकदमों अनेक दशकों तक चलता रहा। अंततः 1940 के दशक में बाबरी मस्जिद में अदालत के आदेश पर ताला लगा दिया गया और मामला अदालत के हवाले ही रहा।

फैजाबाद जिला न्यायालय द्वारा फरवरी 1986 में सुनाए गए फैसले में सुनाया गया कि बाबरी मस्जिद के अहाते का ताला खोल दिया जाना चाहिए ताकि हिंदू यहाँ पूजा पाठ कर सकें क्योंकिवे इस जगह को पवित्र मानते हैं। 

जैसे ही बाबरी मस्जिद के अहाते का ताला खुला वैसे ही दोनों पक्षों में लामबंदी होने लगी। अनेक हिन्दू और मुसिलम संगठन इस मसले पर अपने-अपने समुदाय को लामबंद करने की कोशिश में जुट गए। भाजपा ने इसे अपना बहुत बड़ा चुनावी और राजनीतिक मुद्दा बनाया। शिवसेना, बजरंग दल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद् जैसे हिन्दूवादी कुछ संगठनों के साथ भाजपाने लगातार प्रतीकात्मक और लामबंदी के कार्यक्रम चलाए। 

Q5. मंडल आयोग की सिफारिशों का भारतीय राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ा ? 

Ans. मंडल आयोग का गठन जनता पार्टी की सरकार ने 1979 में पिछड़े वर्ग के लोगों की पहचान करने व उनके लिए शिक्षण संस्थाओं व सरकारी नौकरियों में आरक्षण निश्चित करने के लिए किया था. जिसमें शैक्षणिक व सामाजिक पिछड़ेपन को आधार माना गया था। मंडल आयोग ने अपनी रिपोर्ट 1980 में ही दे दी थी। परन्तु इसको वी. पी. सिंह की सरकार ने 1989 में लागू किया। इस रिपोर्ट के लागू होने से जिसमें 27% के आरक्षण की व्यवस्था की गयी थी, पूरे देश में हिंसात्मक झगड़े प्रारम्भ हो गये। इस रिपोर्ट के लागू होने के बाद भारत में आरक्षण की राजनीति प्रारम्भ हो गयी जिसने समाज का व राजनीति का ध्रुवीकरण कर दिया। पिछड़ा वर्ग राजनीतिक सत्ता के लिए संघर्षमय हो गया। इससे प्रान्तों व केन्द्र की राजनीति दोनों प्रभावित हुई। थे? v.

Q.6.1989 के चुनाव के बाद काँग्रेस के प्रभाव में कमी के प्रमुख कारण क्या है? 

Ans. 1989 के चुनाव में कॉंग्रेस के प्रभाव में गिरावट आयी जिसके प्रमुख कारण निम्नलिखित थे—

  • (i) काँग्रेस सरकारों में बढ़ता भ्रष्टाचार
  • (ii) करिश्माई नेतृत्व का अभाव 
  • (iii) कांग्रेस में बढ़ती अनुशासनहीनता
  • (iv) विश्वनाथ प्रताप सिंह का एक करिश्माई नेता के रूप में उदय 
  • (v) 1991 में कॉंग्रेस में नेतृत्व का संकट
  • (vi) क्षेत्रीय दलों का विकास
  • (vii) केन्द्र में अनिश्चितता का दौर
  • (viii) केन्द्र की राजनीति में क्षेत्रीय दलों की बढ़ती हुई भूमिका
  • (ix) केन्द्र की काँग्रेस सरकारों के द्वारा संविधान के प्रावधानों का दुरुपयोग
  • (x) कॉंग्रेस की परम्परागत वोट बैंक का इससे दूर
  • (xi) दलित राजनीति का विकास 
  • (xii) अन्य पिछड़ा वर्ग की राजनीति का विकास

Q.7 गठबन्धन की राजनीति से आप क्या समझते हैं ? राष्ट्रीय मोर्चा की सरकार किस प्रकार बनी ? समझाइये।

Ans. जब चुनाव के बाद किसी एक राजनीतिक दल को सरकार बनाने के लिए पर्याप्त बहुमत न मिले तो कई सारे राजनीतिक दलों में इस प्रकार से समझौता होता है कि न्यूनतम साझा कार्यक्रम की सहमति के आधार पर मिली-जुली सरकार बनाते हैं, ऐसी सरकार को गठबन्धन सरकार कहते हैं । 1989 के चुनाव में काँग्रेस को पर्याप्त बहुमत न मिलने पर राष्ट्रीय मोर्चा की सरकार बनी

जो एक गठबन्धन सरकार थी क्योंकि इसमें जनता दल प्रमुख पार्टी थी व इसके साथ कुछ क्षेत्रीय पार्टियों ने मिलकर राष्ट्रीय मोर्चे में गठन कर भारतीय जनता पार्टी व वामपंथी दलों के बाहरी समर्थन से सरकार बनाई। 1989 से ही भारत में गठबन्धन सरकारों का प्रचलन चला जो आज़ भी चल रहा है। 1996 से 1999 तक यूनाइटेड फ्रंट की सरकार 1999 से 2004 तक एन. डी. ए. की गवबंधन सरकार व अब 2004 से यू.पी.ए. की गठबन्धन सरकार चल रही है।

Q8. बाबरी मस्जिद विवाद ने भारतीय राजनीति को किस प्रकार से प्रभावित किया? 

Ans. साम्प्रदायिकता भारतीय राजनीति की एक नकारात्मक विरासत रही है जो वास्तव में अंग्रेजी शासन की ही देन है। साम्प्रदायिकता आज भी भारतीय समाज व राजनीति को प्रभावित कर रही है। बाबरी मस्जिद व राम मन्दिर विवाद ने भारतीय समाज व राजनीति को विभाजित किया। कुछ एक राजनीतिक दलों ने इस विवाद का राजनीतिकरण किया है। इसका उन्माद इस प्रकार बढ़ा कि 6 नवम्बर, 1992 को कट्टरवादियों ने विवादित ढाँचे को ध्वंस कर दिया जिससे साम्प्रदायिक झगड़ों की झड़ी लग गयी। गोधराकांड व गुजरात में 2002 में हुए साम्प्रदायिक दंगे इसी चिंगारी का परिणाम है। इस विवाद ने समाज को बाँटा है व आपस में नफरत व तनाव को बढ़ाया है जिसका राजनीतिक दलों ने अपने-अपने हित में प्रयोग किया है।

Q.9. भारत की राजनीतिक व्यवस्था पर गठबन्धन की राजनीति का प्रभाव समझाइये। 

Ans. 1989 के बाद देश में गठबन्धन की राजनीति का दौर जारी है। गठवन्धन सरकारें न केवल केन्द्र में चल रही हैं बल्कि अनेक राज्यों में भी गठबन्धन की सरकारें चल रही हैं, जैसे पश्चिम बंगाल, केरल, महाराष्ट्र, जम्मू कश्मीर, पंजाब में गठबंधन की सरकारें चल रही हैं। गठबंधन की सरकारों में क्षेत्रीय दलों की भूमिका अहम रही है। गठबंधन की राजनीति ने भारतीय राजनीति को दोनों तरह से अर्थात् नकारात्मक तरीके से भी व सकारात्मक तरीके से प्रभावित किया है जिसको निम्न क्षेत्रों में समझ सकते हैं-

  • (i) राजनीतिक अस्थिरता
  • (ii) क्षेत्रीय दलों की बढ़ती भूमिका
  • (iii) क्षेत्रीय हितों व आकांक्षाओं की पूर्ति 
  • (iv) केन्द्र व प्रान्तों के संबन्धों पर प्रभाव
  • (v) राज्यों की राजनीति पर प्रभाव
  • (vi) भारतीय संघीय प्रणाली के स्वरूप पर प्रभाव
  • (viii) राजनीतिक संस्थाओं व पदों की स्थिति में परिवर्तन। 

Q.10 गठबंधन की राजनीति के कुछ प्रमुख गुण बताइये।

V Ans. गठबंधन की राजनीति विश्व के अनेक देशों में प्रचलित है। भारत में इसकी उत्पत्ति 1989 के बाद हुई। आज भारत के अनेक राज्यों व केन्द्र में गठबंधन सरकारें चल रही हैं। इसके कुछ अवगुणों के बावजूद कुछ गुण भी अवश्य हैं जो निम्न है- 

  • (i) त्रिशंकु संसद व विधान सभाओं की स्थिति में सरकार बनने की संभावनाएँ निश्चित करता है।
  • (ii) संघीय प्रणाली को मजबूत किया है। 
  • (iii) केन्द्र ने प्रान्तों के सम्बन्धों को एक नया स्वरूप प्रदान किया है।
  • (iv) क्षेत्रीय दलों का विकास व क्षेत्रीय आकांक्षाओं व हितों की पूर्ति में सहायक है। 
  • (v) राज्यों की स्थिति मजबूत हुई है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न | Long Answer Type Questions

Class 12 Political Science Notes
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Q. 1. गठबंधन सरकार से आप क्या समझते हैं? गठबन्धन सरकारों में क्षेत्रीय दलों की भूमिका समझाइये। 

Ans. जब चुनाव के बाद किसी भी राजनीतिक दल को सरकार बनाने के लिए आवश्यक बहुमत न मिले व कई राजनीतिक दल मिलकर अपने विवादित मुद्दों को अलग कर एक न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर सहमति के आधार पर साझा सरकार बनाते हैं तो इसे गठबंधन सरकार कहते हैं। यह स्थिति बहुदलीय प्रणाली में उस समय आ जाती है जब राष्ट्रीय दलों का प्रभाव कम हो जाता है व कई सारे क्षेत्रीय दलों का प्रभाव बढ़ जाता है जिससे वोट अनेक राजनीतिक दलों में विभाजित होने के कारण किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता। 1980 के बाद भारत में क्षेत्रीय दलों की भूमिका बढ़ने लगी है। इससे पहले बहुदलीय प्रणाली होते हुए भी कॉंग्रेस का प्रभुत्व रहा। कुछ राष्ट्रीय दल रहे परन्तु उनकी स्थिति काँगेस के सामने कमजोर ही रही। 

1950 से लेकर 1980 तक के काल में कॉंग्रेस का प्रभुत्व रहा। 1980 के दशक के बाद विभिन्न कारणों से क्षेत्रवाद का विकास हुआ जिसके आधार पर क्षेत्रीय दलों का गठन किया गया। इन क्षेत्रीय दलों की संख्या विभिन्न कारणों से लगातार बढ़ती ही रही कि 1990 के दशक में राष्ट्रीय दल क्षेत्रीय दलों के सामने बौने पड़ गये। क्षेत्रीय दलों ने न केवल अपने राज्यों में सरकारें बनायीं बल्कि केन्द्र में भी सरकार बनाने व चलाने में अहम भूमिका निभायी। निम्न मुद्दे ऐसे रहे जिन्होंने समाज को विभाजित किया जिसके आधार पर लोगों के राजनीतिक व्यवहार में परिवर्तन हुआ व क्षेत्रीय दलों की संख्या में वृद्धि हुई। ये मुद्दे थे—

  • (i) आरक्षण 
  • (ii) मन्दिर-मस्जिद विवाद (बाबरी मस्जिद व राम मन्दिर) 
  • (iii) पिछड़े वर्ग की राजनीति 
  • (iv) महिला राजनीति 
  • (v) अल्पसंख्यकों की राजनीति 
  • (vi) आदिवासी राजनीति 
  • (vii) दलित राजनीति 
  • (viii) क्षेत्रवाद।

Q. 2. भारतीय राजनीति में 1990 से 2004 तक की विभिन्न प्रमुख घटनाओं पर प्रकाश डालिए।

Ans. 1989 के चुनाव के बाद भारत में गठबंधन की राजनीति प्रारम्भ हुई। 1989 से लेकर 2004 में यू. पी. ए. सरकार बनने तक घटना चक्र बड़ी तेजी के साथ चला जिससे भारतीय राजनीति में व्यापक परिवर्तन आये। पिछले 20 वर्षों में भारतीय राजनीति में निम्न प्रमुख विषय छाये रहे हैं।

(i) कांग्रेस के प्रभाव में उतार-चढ़ाव – कॉंग्रेस भारत का एक प्रमुख राजनीतिक दल रहा है जिसके साथ गौरवमय इतिहास रहा है। 1970 के दशक में भारतीय राजनीत पर कॉंग्रेस का प्रभुत्व रहा है। केन्द्र व प्रान्तों में काँग्रेस की सरकारें लगातार रही हैं परन्तु 1970 के बाद कॉंग्रेस प्रभुत्व में कमी आयी है। 1989 से 90 तक कांगेस सत्ता से बाहर रही, परन्तु 1991 में पुनः सत्ता में आ गयी। 1996 से लेकर 2004 तक कॉंग्रेस का जनाधार कम हुआ व 2004 तक सत्ता से बाहर रही। 2004 में पुनः कांग्रेस संसद में सबसे बड़े दल के नेता के रूप में उभर कर आयी व गठबन्धन सरकार का नेतृत्व कर रही है। 

(ii) आरक्षण की राजनीति — 1989 से देश की राजनीति में आरक्षण का मुद्दा छाया रहा। वास्तव में आरक्षण की राजनीति हो रही है जिसने भारतीय राजनीतिक व्यवस्था को अत्यधिक प्रभावित किया है। 1989 में राष्ट्रीय मोर्चा की सरकार ने पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए मंडल आयोग की सिफारिशों के आधार पर 27% आरक्षण की व्यवस्था की जिसका प्रारम्भ में विरोध हुआ व देश में हिंसा हुई परन्तु कुछ समय के बाद इसको सभी ने स्वीकार कर लिया है व पिछड़ा वर्ग में शामिल होने की होड़ में सब लगे हैं। बहुत

(iii) राम मन्दिर व बाबरी मस्जिद विवाद – भारतीय राजनीति को 1990 के बाद बाबरी मस्जिद विवाद ने अत्यधिक प्रभावित किया है तथा साम्प्रदायिक तनाव व द्वेष को जन्म दिया जिसका भारतीय जनता पार्टी ने लाभ उठाया।

Q3. गुजरात के मुस्लिम विरोधी दंगे, 2002 पर एक संक्षिप्त लेख लिखिए । 

Ans. पृष्ठभूमि (Background) कहा जाता है कि गोधरा (गुजरात) रेलवे स्टेशन पर एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी। इस हिंसा का तात्कालिक उकसाना बहुत ही हानिकारक साबित हुआ। अयोध्या (उत्तर प्रदेश) की ओर से आर रही एक रेलगाड़ी की योगी कार सेवकों से भरी हुई थी और न जाने किस कारण से उसमें आग लग गई।

इस आग की दुर्घटना में 57 व्यक्ति जीवित जलकर मर गए। कुछ लोगों ने यह अफवाह फैला दी कि गोधरा के खड़े रेल के डिब्बे में आग मुसलमानों ने लगायी होगी अथवा लगवाई होगी। अफवाहें बड़ी खतरनाक और हानिकारक होती है। गोधरा की दुर्घटना से जुड़ी अफवाह जंगल की आग की तरह संपूर्ण गुजरात में फैल गई। अनेक भागों में मुसलमानों के विरुद्ध बड़े पैमाने पर हिंसा हुई। हिंसा का यह तांडव लगभग एक महीने तक चलता रहा। लगभग 1100 व्यक्ति इस हिंसा में मारे गए।

मुसलमानों के विरुद्ध हुए दंगों को रोकने के लिए राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने पीड़ित भुक्तभोगियों के परिजनों को राहत देने और दोषी दंगाइयों को तुरंत कानून के हवाले करने एवं पर्याप्त दंड देने के लिए कहा गया। आयोग का यह कहना था कि पुलिस और सरकारी मशीनरी ने अपने राजधर्म का निर्वाह नहीं किया है। सरकार ने अनेक लोगों को राहत दी है। अनेक लोगों पर मुकद्दमे चल रहे हैं लेकिन यह मानना पड़ेगा कि आतंकवाद और साम्प्रदायिकता के कारण दंगे करना या कराना हमारे देश के लोकतांत्रिक व्यवस्था (system) के किसी भी तरह से अनुकूल नहीं है। 

इस आर्टिकल में किसी भी प्रकार का त्रुटि आपको मिलती है तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं हम उसे जल्द से जल्द ठीक करने की कोशिश करेंगे क्योंकि लिखने समय सबसे गलती हो जाती है 😅😅😅😅😅😅😅😅😅


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FAQs

Q. 2. बाबरी मस्जिद के 1992 में ध्वंश होने का भारतीय राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ा ? 

Ans. 6 दिसम्बर, 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद के विवादित स्थान को कार सेवकों ने व हिन्दू कट्टरवादियों ने ध्वंश कर दिया जिससे सारे देश में दंगे व साम्प्रदायिक तनाव फैल गया। वहीं राजनीतिक दलों व बुद्धिजीवियों ने इसकी निंदा की, परन्तु इस घटना ने हिन्दू वोटों का ध्रुवीकरण कर दिया जिसका लाभ भारतीय जनता पार्टी को 1996 के चुनाव में मिला जिसमें वह लोकसभा में सबसे बड़े दल के रूप में उभर कर आयी। बाबरी मस्जिद का टूटना भारत के इतिहास में एक काला अध्याय जुड़ गया।

Q. 1. गठबन्धन की राजनीति के कारणों पर प्रकाश डालिए । 

Ans. 1989 से भारत में गठबन्धन सरकारें लगभग निरन्तर चल रही हैं जिसके निम्न प्रमुख कारण हैं—
(i) क्षेत्रीय राजनीतिक दलों की बढ़ती संख्या
(ii) राष्ट्रीय दलों के प्रभाव में गिरावट
(iii) शिंकु संसद व विधान सभाएँ
(iv) समाज का विभिन्न सामाजिक-आर्थिक वर्गों में बँटवारा 
(v) सत्ता की राजनीति का वढ़ता प्रभाव
(vi) न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर सहमति
(vii) राष्ट्रीय दलों के द्वारा क्षेत्रीय दलों के साथ ताल-मेल (viii) क्षेत्रीय दलों की दबाव की राजनीति ।

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