Class 12 Political Science Notes Ch-8 In Hindi | पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन कक्षा 12 विषय राजनीति विज्ञान पाठ 8 के प्रश्न उत्तर

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Class 12 Political Science Notes Ch-8 In Hindi में यह अध्याय काफी महत्वपूर्ण है| इस अध्याय से काफी प्रश्न परीक्षा में पूछे जा चुके हैं तथा यह अध्याय विद्यार्थी के लिए अति आवश्यक है क्योंकि इस अध्याय से हमें विश्व की राजनीति समझ में आती है|

तो छात्रों, इस लेख को पढ़ने के बाद, आपको इस अध्याय से परीक्षा में बहुत अधिक अंक प्राप्त होंगे, क्योंकि इसमें सभी परीक्षाओं से संबंधित प्रश्नों का वर्णन किया गया है, इसलिए इसे पूरा अवश्य पढ़ें।

मैं खुद 12वीं का टॉपर रहा हूं और मुझे पता है कि 12वीं की परीक्षा में किस तरह के प्रश्न पूछे जाते हैं। वर्तमान में, मैं एक शिक्षक की भूमिका भी निभा रहा हूँ, और अपने छात्रों को कक्षा 12वीं की महत्वपूर्ण जानकारी और विषयों का अभ्यास भी कराता हूँ। मैंने यहां 5 वर्षों से अधिक के अपने अनुभव के साथ प्रश्न-उत्तर लेख लिखा है। इस पोस्ट की मदद से आप परीक्षा में इस अध्याय से राजनीति विज्ञान में बहुत अच्छे अंक प्राप्त कर सकेंगे।

Class 12 Political Science Notes Ch-8 In Hindi | पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन कक्षा 12 विषय राजनीति विज्ञान पाठ 8 के प्रश्न उत्तर

कक्षा | Class12th 
अध्याय | Chapter08
अध्याय का नाम | Chapter Nameपर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन
बोर्ड | Boardसभी हिंदी बोर्ड
किताब | Book एनसीईआरटी | NCERT
विषय | Subjectराजनीति विज्ञान | Political Science
मध्यम | Medium हिंदी | HINDI
अध्ययन सामग्री | Study Materialsप्रश्न उत्तर | Question answer

पाठ के मुख्य बिंदु | Main Point of This chapter

आज पर्यावरण का संकट विश्वव्यापी संकट है और इसने विश्व की राजनीति को भी प्रभावित किया है तथा अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं और संसार के नेताओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। मानव समाज तथा विश्व का भविष्य और उसका अस्तित्व भी पर्यावरण से जुड़ा है। 

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image credit; GOOGLE.COM

पर्यावरण के प्रदूषण के साथ प्राकृतिक साधनों के भण्डार समाप्त होते जा रहे हैं और यदि इनकी समाप्ति तथा पर्यावरण की क्षति इसी गति से चलती रही तो आने वाली संतति के लिए कुछ भी न बचेगा यहाँ तक कि अगली संतति को पीने का शुद्ध जल, सांस लेने को शुद्ध हवा भी न मिलेगी इसकी कठिनाई से तो वर्तमान सन्तति भी परेशान है। 

पर्यावरण के प्रदूषण ने भूमि की उत्पादकता शक्ति को भी कम किया है और उसमें जहरीले तत्वों का भी समावेश किया है जिसके कारण खाद्य उत्पाद न तो पौष्टिक रहे हैं और न ही खाने योग्य हैं। पर्यावरण विश्व की साझी संपदा है जो मानव जीवन का आधार है। इसकी क्षति से मानव जीवन की क्षति जुड़ी हुई है। आज सारे संसार में इन प्रश्नों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है कि साझी संपदा को कैसे बचाया जाए। अतः पर्यावरण संरक्षण के उपाय तेजी से किए जा रहे हैं।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न | VERY SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS

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Q. 1. विश्व में खाद्य उत्पादन की कमी के क्या कारण हैं ? 

Ans. 1. विश्व के कृषि योग्य भूमि में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हो रही है जबकि मौजूदा उपजाऊ भूमि के एक बड़े हिस्से की उर्वरा शक्ति कम हो रही है। 

2. चरागाह समाप्त होने को हैं, मत्स्य भंडार घट रहा है। जलाशयों में प्रदूषण बढ़ रहा है। इस महादेश में मौजूद है। अंटार्कटिक महादेश का 3 करोड़ 60 लाख वर्ग किलोमीटर तक अतिरिक्त विस्तार समुद्र में है। 

Q. 2 पर्यावरणीय शरणार्थी का क्या अर्थ है ?

Ans. 1. अफ्रीका के कुछ देशों के लोगों को पर्यावरणीय शरणार्थी कहा गया है। खेती के अभाव के कारण उन्हें अपना घरवार छोड़ना पड़ा और उन्होंने दूसरी जगह जाकर शरण ली। 

2. वस्तुतः उस क्षेत्र में 1970 के दशक में भीषण अनावृष्टि हो गयी जिससे वहाँ की भूमि बंजर हो गयी और उसमें दरार पड़ गयी।

Q.3. ग्लोबल वार्मिंग के परिणाम बतायें। 

Ans. 1. ग्लोबल वार्मिंग या वैश्विक तापवृद्धि का अर्थ विश्व के तापमान में वृद्धि। यहकार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और हाइड्रो फ्लोरो कार्बन आदि गैसें इसके कारण हैं। 

2. विश्व का तापमान बढ़ने से धरती के जीवन के लिए खतरा उत्पन्न हो सकता है। विभिन्न देश इस संबंध में वार्तालाप कर रहे हैं। क्योटो प्रोटोकॉल नामक समझौते में विभिन्न देशों की सहमति बन गई है। 

Q4. साझी सम्पदा का क्या अर्थ है ?

Ans. 1. साझी सम्पदा ऐसी सम्पदा होती है जिस पर किसी समूह के प्रत्येक सदस्य का स्वामित्व हो ।

2. इसके पीछे मूल तर्क यह है कि ऐसे संसाधन की प्रकृति, उपयोग के स्तर और रख-रखाव के संदर्भ में समूह के प्रत्येक सदस्य को समान अधिकार प्राप्त होंगे और समान उत्तरदायित्व निभाने होंगे। 

Q.5. ग्रुप-8 की जून 2005 की बैठक में भारत ने किन-किन बातों का उल्लेख किया। 

Ans. 1. भारत ने उल्लेख किया कि विकासशील देशों की प्रां पक्ति ग्रीन हाउस गैस की उत्सर्जन दर विकसित देशों की तुलना में नाममात्र है।

2. साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेवारी के सिद्धांत के अनुरूप भारत का विचार है कि उत्सर्जन दर में कमी करने की सबसे अधिक जिम्मेदारी विकसित देशों की है, क्योंकि इन देशों ने एक लंबी अवधि से बहुत अधिक उत्सर्जन किया है।

Q.6 भारत की ग्रीन हाउस के उत्सर्जन दर का विवरण दीजिए। 

Ans. 1. 2000 तक भारत का प्रति व्यक्ति उत्सर्जन दर 0.9 टन था। अनुमान है कि 2030 तक यह मात्रा बढ़कर 16 टन प्रति व्यक्ति हो जायेगी।

2. भारत का यह उत्सर्जन दर विश्व के वर्तमान (2000) औसत 3.8 टन प्रति व्यक्ति से बहुत कम है। इसलिए भारत क्योटो प्रोटोकॉल के नियमों को मानने के लिए बाध्य नहीं है। 

लघु उत्तरीय प्रश्न | SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS

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Q.1. ऑवर कॉमन फ्यूचर रिपोर्ट (1987) की मुख्य बातें क्या हैं?

Ans. ऑवर कॉमन फ्यूचर रिपोर्ट (1987) की मुख्य बातें-

1. रिपोर्ट में चेताया गया कि आर्थिक विकास के मौजूदा तरीके स्थायी नहीं रहेंगे।

2. विश्व के दक्षिणी देशों में औद्योगिक विकास का माँग अधिक तेज है और रिपोर्ट में इसी हवाले से चेतावनी दी गई थी। 

3. रियो सम्मेलन में यह बात खुलकर सामने आयी कि विश्व के धनी और विकसित देशों तथा गरीब और विकासशील देशों का पर्यावरण के संबंध में अलग-अलग दृष्टिकोण है। 

4. दक्षिणी देश आर्थिक विकास और पर्यावरण प्रबंधन के आपसी रिश्ते को सुलझाने के लिए ज्यादा चिंतित थे।

Q2. अंटार्कटिका पर किसका स्वामित्व है ? 

Ans. 1. अंटार्कटिक विश्व का सबसे सुदूर महादेश है। इसका इलाका 1 करोड़ 40 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। 

2. प्रश्न उठता है कि इस पर किसका स्वामित्व है। इस संबंध में दो दावे किये जाते हैं। 

3. कुछ देश जैसे- ब्रिटेन, अर्जेन्टाइना, चिली, नार्वे, फ्रांस, आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने अंटार्कटिक क्षेत्र पर अपने संप्रभु अधिकार का वैधानिक दावा किया है।

4. अन्य अधिकांश देशों ने इससे उल्टा रुख अपनाया कि अंटार्कटिक प्रदेश विश्व की साझी संपदा है और यह किसी भी क्षेत्राधिकार में शामिल नहीं है। इस मतभेद के रहते हुए अंटार्कटिक के पर्यावरण और परिस्थिति तंत्र की सुरक्षा के नियम बनाये गये और उन्हें अपनाया गया। अंटार्कटिक और पृथ्वी के ध्रुवीय क्षेत्र पर्यावरण सुरक्षा के विशेष क्षेत्रीय नियमों के अंतर्गत आते हैं।

Q.3. क्योटो प्रोटोकॉल पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए ।

Ans. क्योटो प्रोटोकॉल 

1. क्योटो प्रोटोकॉल एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है।

2. इसके अंतर्गत औद्योगिक देशों के लिए ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लक्ष्य निर्धारित किये गये हैं। 

3. प्रोटोकॉल में यह भी माना गया है कि कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और हाइड्रो फ्लोरो कार्बन जैसी कुछ गैसों के कारण वैश्विक तापवृद्धि होती है। 

4. यह भी कहा गया है कि वैश्विक तापवृद्धि की परिघटना में विश्व का तापमान और पृथ्वी के जीवन के लिए खतरनाक हो सकती है। 

Q.4. पावन वन प्रांतर से आप क्या समझते हैं ? इसका क्या महत्त्व है ? 

Ans. 1. प्राचीन भारत में प्रकृति को देवता के रूप में स्वीकार किया गया है और उसकी सुरक्षा की प्रथा थी। इस प्रथा के सुंदर उदाहरण पावन वन प्रांतर हैं।

2. कुछ वनों को काटा नहीं जाता था। इन स्थानों पर देवता अथवा किसी पुण्यात्मा को माना जाता है। इसे ही पावन प्रांतर या देवस्थान कहा गया है। 

3. इन पावन वन प्रांतरों का राष्ट्रीय विस्तार है। इसकी पुष्टि विभिन्न भाषाओं के शब्दों से होती है। इन देव स्थानों को राजस्थान में बानी केकड़ी और औरान, झारखंड में जहेरा थाव और सरन, मेघालय में लिंगदोह, उत्तराखंड में पान या देवभूमि आदि नामों से जाना जाता है।

4. पर्यावरण संरक्षण से जुड़े साहित्य में देवस्थान के महावत को स्वीकार किया गया है। 

5. कुछ अनुसंधानकर्ताओं की राय है कि देवस्थान की मान्यता से जैव विविधता, पारिस्थितिक के साथ सांस्कृतिक विविधता में भी सहायता मिल सकती है। *

Q.5. भारत ने पर्यावरण सुरक्षा के संदर्भ में कौन-कौन से ठोस कदम उठाये हैं? 

Ans. भारत द्वारा पर्यावरण सुरक्षा के संदर्भ में उठाये गये ठोस कदम- 

1. भारत ने अपनी नेशनल ऑटो फ्यूडल पॉलिसी के अंतर्गत वाहनों के लिए स्वच्छ ईंधन अनिवार्य कर दिया है। 

2. 2001 में ऊर्जा संरक्षण अधिनियम पारित हुआ। इसमें ऊर्जा के अधिक कारगर इस्तेमाल का प्रयास किया है। 

3. 2003 के बिजली अधिनियम में पुनः नवीनीकरण ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया।

4. हाल में प्राकृतिक गैस के आयात और स्वच्छ कोयले के उपयोग पर आधारित प्रौद्योगिकी को अपनाने की ओर रुझान बढ़ा है।

5. भारत बायोडीजल से संबंधित एक राष्ट्रीय मिशन चलाने के लिए भी तत्पर है। इसके अंतर्गत 2011-12 तक बायोडीजल तैयार होने लगा। 

class 12th NotesMCQ
HistoryPolitical Science
EnglishHindi

Q.6 उत्तरी देशों के वनों और दक्षिणी देशों के वन में अंतर स्पष्ट कीजिए ।

Ans. उत्तरी देशों के वनों और दक्षिणी देशों के वनों में अंतर- 

1. दक्षिणी देशों के वन निर्जन नहीं हैं जबकि उत्तरी देशों के वन जनविहीन हैं। अर्थात् यहाँ के वन को निर्जन प्रांत कहा जाता है।

2. दक्षिणी देशों के लोग मनुष्य को प्रकृति का हिस्सा मानते हैं जबकि उत्तरी देशों के लोग ऐसा नहीं मानते अर्थात् वे पर्यावरण को मनुष्य से दूर की चीज मानते हैं।

3. दक्षिणी देशों में पर्यावरण के अधिकांश मसले इस मान्यता पर आधारित है कि लोग वनों में भी रहते हैं। उत्तरी देशों में नहीं है। 

4. उत्तरी देशों के लोगों का दृष्टिकोण आध्यात्मिक नहीं है जबकि दक्षिणी देशों के लोगों का दृष्टिकोण आध्यात्मिक है।

Q.7. पर्यावरण की दृष्टि से खनिज उद्योग की आलोचना की गई है ? विवेचन कीजिए। 

Ans. पर्यावरण की दृष्टि से खनिज उद्योग की आलोचना के कारण- 

1. वैश्विक अर्थव्यवस्था में उदारीकरण के कारण दक्षिणी गोलार्द्ध के अनेक देशों की अर्थव्यवस्था बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए खुल चुकी हैं।

2. भारत के अधिकांश आदिवासी जीविका के लिए खेती पर निर्भर होते हैं।  

3. संविधान में इनको राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्राप्त हैं इन्हें संवैधानिक सुरक्षा भी मिली हुई है। 

4. देश के विकास का इनको ज्यादा लाभ नहीं मिल सकता है और इनकी स्थिति में विशेष सुधार नहीं हुआ है।

5. विभिन्न परियोजनाओं के चलते इन्हें अपनी भूमि से हाथ धोना पड़ा है और ये विस्थापित हुए हैं।

Q.8. विश्व की ‘साझी विरासत’ का क्या अर्थ है ? इसका दोहन और प्रदूषण कैसे होता है? 

Ans. (i) विश्व की साझी विरासत का अर्थ (Meaning of the Global Com- mons)—साझी संपदा वह संसाधन है जिस पर किसी एक का नहीं बल्कि पूरे समुदाय का हक होता है। यह साझा चूल्हा, साझा चारागाह, साझा मैदान, साझा कुआँ या नदी कुछ है। इसी तरह विश्व के कुछ हिस्से और क्षेत्र किसी एक देश के संप्रभु क्षेत्राधिकार से बाहर होते हैं। इसीलिए उनका प्रबंधन साझे तौर पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा किया जाता है। इन्हें ‘वैश्विक संपदा’ या ‘मानवता की साझी विरासत’ कहा जाता है। इसमें पृथ्वी का वायुमंडल, अंटार्कटिका, समुद्र सतह और बाहरी अंतरिक्ष शामिल हैं।

(ii) दोहन और प्रदूषण (Exploitation and Pollution) – 1. ‘वैश्विक संपदा’ की सुरक्षा के सवाल पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग कायम करना टेढ़ी खीर है। इस दिशा में कुछ महत्त्वपूर्ण समझीते जैसे अंटार्कटिका संधि (1959), मांट्रियल न्यायाचार अथवा प्रोटोकॉल (1987) और अंटार्कटिक पर्यावरणीय न्यायाचार अथवा प्रोटोकॉल (1991) हो चुके हैं। पारिस्थितिकी से जुड़े हर मसले के साथ एक बड़ी समस्या यह जुड़ी है कि अपुष्ट वैज्ञानिक साक्ष्यों और समय-सीमा को लेकर मतभेद पैदा होते हैं। ऐसे में एक सर्व-सामान्य पर्यावरणीय एजेंडा पर सहमति कायम करना मुश्किल होता है।

2. इस अर्थ में 1980 के दशक के मध्य में अंटार्कटिक के ऊपर ओजोन परत में छेद को खोज एक आँख खोल देने वाली घटना है।

3. ठीक इसी तरह वैश्विक संपदा के रूप में बाहरी अंतरिक्ष के इतिहास से भी पता चलता है कि इस क्षेत्र के प्रबंधन पर उत्तरी और दक्षिणी गोलार्द्ध के देशों के बीच मौजूद असमानता का असर पड़ा है। 

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न | Long Answer Type Questions

Class 12 Political Science Notes
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Q1. विश्व की राजनीति में पर्यावरण की क्या भूमिका है? 

Ans. पर्यावरण और विश्व राजनीति (Environment and World Politics) -आज विश्व की राजनीति में पर्यावरण से संबंधित कई प्रश्न बड़ा महत्त्वपूर्ण स्थान बनाए हुए हैं। 1960 से पहले पर्यावरण को राजनीति के विषय क्षेत्र से बाहर की बात माना जाता था। परंतु जब इसे विश्वव्यापी गंभीर समस्याओं में गिना जाता है और पर्यावरण की क्षति की सुरक्षा की माँग अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी प्रबल है। साधारण व्यक्ति भी यह सोचता है कि पर्यावरण का विषय तो किसी समाज की राजनीति का विषय भी नहीं बनता, फिर इसे विश्व की राजनीति में क्यों घसीटा जा रहा है।

परंतु वास्तविक स्थिति यह है कि आज पर्यावरण की रक्षा से संबंधित मामले विश्व राजनीति में क्यों घसीटा जा रहा है। परंतु वास्तविक स्थिति यह है कि आज पर्यावरण की रक्षा से संबंधित मामले विश्व राजनीति के गंभीर मामले बने हुए हैं।

नहीं राज्य का दायित्व अपने नागरिकों की बाह्य आक्रमणों तथा आतंरिक संकटों से ही रक्षा करना कल्याण के कदम उठाना भी है। राज्य का दायित्व अपने नागरिकों को भूख, बीमारी, बेकारी, बेरोजगारी आदि से सुरक्षा प्रदान करना भी है। राज्य का कर्तव्य है कि वह अपने नागरिकों के.. लिए रोजगार के अवसरों और अच्छे जीवन स्तर की प्राप्ति के आवश्यक अवसर प्रदान करे। जब निर्धनता, अशिक्षा, बीमारी, साद्य सामग्री की कमी, कुपोषण आदि की समस्याएँ कई देशों में देखने को मिलती हों तो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ही अधिक अच्छी प्रकार से उनका समाधान किया जा सकता है। 

वैसे भी संयुक्त राष्ट्रसंघ के उद्देश्यों में विश्व शांति और सुरक्षा को बनाए रखने के साथ-साथ यह उद्देश्य के साथ-साथ यह उद्देश्य भी अपनाया गया है कि यह संस्था आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं मानवीय ढंग की अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं को हल करने और मानव अधिकारों व आधारभूत स्वतंत्रताओं की प्राप्ति के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को सुनिश्चित करने का प्रयास करेगी। इस प्रकार केवल राजनीतिक समस्याएँ ही विश्व राजनीति का कार्यक्षेत्र नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फैली सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक समस्याओं पर विचार करके उनका समाधान ढूँढना और उन्हें हल करने के लिए राष्ट्रों के आपसी सहयोग को सुनिश्चित करना भी है। 

इस प्रकार पर्यावरण को क्षति से बचाने, पर्यावरण की रक्षा करने से संबंधित माले विश्व राजनीति का अंग बने हुए हैं क्योंकि इन्होंने किसी एक क्षेत्र या देश को प्रभावित नहीं किया बल्कि मानव जीवन के लिए संकट खड़े किए हैं।

Q2. विश्व की साझी संपदा से क्या अभिप्राय है ? इसकी रक्षा का उत्तरदायित्व किस पर है ?

Ans. विश्व की साझी संपदा का अर्थ (Meaning of World Common Propoerty)——साझी संपत्ति उसे कहा जाता है जिस पर सभी लोगों का साझा अधिकार हो और जिसे सब प्रयोग में ला सकते हो। गाँवों में साझी चरागाह अथवा साझी भूमि होती है जिस पर गाँव के सभी लोगों को अपने पशु चराने का अधिकार होता है। इसी प्रकार खेल का मैदान, कुआँ नदी आदि सभी साझा संपत्ति के उदाहरण हैं; क्योंकि इन पर किसी एक व्यक्ति का अधिकार नहीं होता बल्कि सारे समुदाय का, सारे समाज का अधिकार होता है।

इसी प्रकार संसार में कुछ भाग तथा प्राकृतिक पदार्थ ऐसे होते हैं जिन पर किसी एक देश का स्वामित्व नहीं होता बल्कि सारे संसार का स्वामित्व होता है और संसार के सभी देश उनका प्रयोग कर सकते हैं। उदाहरणस्वरूप समुद्र के जल को लें। प्रत्येक देश का समुद्र के उस भाग पर तो अपना स्वामित्व माना जाता है जो उसके तट से लगा होता है और वह एक सीमा के अंदर की माना जाता है जिसे अंतर्राष्ट्रीय कानून द्वारा निश्चित किया गया है। 

विश्व की साझी संपदा की देखभाल (Maintenance of Common World Property)—देखभाल के बिना संपत्ति की रक्षा नहीं होती। व्यक्ति अपनी संपत्ति की रक्षा स्वयं करता है तो गाँव की साझी संपत्ति की रक्षा पंचायत द्वारा की जाती है। समाज की साझी संपत्ति की रक्षा पंचायत द्वारा की जाती है। समाज की साझी संपत्ति की रक्षा तथा देखभाल सरकार द्वारा की जाती है। इसी प्रकार संसार की साझी संपत्ति का भी देखभाल की आवश्यकता पड़ती है। यदि ऐसा न किया जाए तो वह नष्ट हो जाती है। 

साझी संपत्ति की देखभाल और रक्षा में कठिनाई (Difficulty in Maintaining and Protecting Common Property ) — साझी संपत्ति की देखभाल तथा रक्षा करना आसान नहीं होता । साझी संपत्ति का प्रयोग बेदर्दी से होता है और देखभाल पर कम ध्यान दिया जाता है। संयुक्त परिवारों में भी देखा जा सकता है कि परिवार के सदस्य अपनी निजी वस्तु की देखभाल अच्छी प्रकार से करते हैं और साझी वस्तु की देखभाल पर कोई ध्यान नहीं देता। सरकार समाज की साझी संपत्ति की देखभाल करती है और उसे क्षति पहुँचाने वाले को दण्ड देती है। इसलिए समाज की साझी संपत्ति की रक्षा होती है।

Q4. पर्यावरण के संरक्षण में भारत की भूमिका की व्याख्या कीजिए। Or, भारत ने पर्यावरण संरक्षण के लिए क्या कदम उठाए हैं ? 

Ans. पर्यावरण संरक्षण में भारत की भूमिका (India’s Role in Conservation of Environment) भारत आरंभ से ही संयुक्त राष्ट्र का सदस्य है और उसका समर्थक है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र की सभी गतिविधियों में सक्रिय भाग लिया है और उसके कानूनों, नियमों तथा प्रस्तावों का पालन करता आया है। 

परंतु वह सभी मुद्दों पर खुले मन से तथा पक्षपात-रहित दृष्टिकोण अपना कर किसी भी घटना तथा विरोध का समर्थन या विरोध भी करता है जैसे कि भारत ने परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि को स्वीकार नहीं किया है। यही दृष्टिकोण भारत ने पर्यावरण संबंधी मुद्दों पर अपनाया है।

पर्यावरण की रक्षा हेतु अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पास किए गए प्रस्तावों तथा सुझावों को भारत ने माना है, परंतु कुछ प्रस्तावों का आंशिक रूप से विरोध भी किया है जो कि उसके अनुसार विकासशील देशों के हित में नहीं समझे जाते तथा पश्चिमी विकसित देशों द्वारा विकासशील देशों पर थोपे जाने के रूप में देखे जाते हैं। 

भारत ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में निम्नलिखित भूमिका निभाई—

1. भारत की संस्कृति प्राचीन समय से ही पर्यावरण को बनाए रखने और प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने पर जोर देने वाली है। भारत के लगभग सभी भागों में धार्मिक दृष्टिकोण से वनों की कटाई को अच्छा नहीं समझा जाता।

2. भारत ने सन् 2002 में क्योटो संधि पर हस्ताक्षर किए और पर्यावरण की रक्षा हेतु अपना सहयोग देने तथा दायित्व निभाने की वचनबद्धता दी। 3. भारत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरण के संरक्षण के लिस किए जा रहे प्रयासों में अपना योगदान करता है।

4. भारत ने अपनी राष्ट्रीय आटो- फ्यूल नीति (National Auto-Fuel Policy) में वाहनों के लिए स्वच्छ ईंधन (C.N.G) अनिवार्य कर दिया है। कई नगरों में स्वच्छ ईंधन से चलने वाले वाहन ही चलाए जा सकते हैं। वाहनों के लिए प्रदूषण नियंत्रण पत्र (P.U.C.) रखना अनिवार्य-कर दिया गया है।

5. सन् 2001 में ऊर्जा-संरक्षण कानून बनाया गया और ऊर्जा के सही प्रयोग तथा प्रदूषण की रोकथाम के नियम बनाए गए। 

6. भारत ने सन् 2003 के बिजली कानून के अंतर्गत पुनर्नवीकृत ऊर्जा (Renewable Energy) के प्रयोग को प्रोत्साहित करने के कदम उठाए हैं। 

7. भारत में स्वच्छ ईमन, प्राकृतिक गैस तथा प्रदूषण रहित प्रौद्योगिकी तथा उद्योगों पर जोर दिया जा रहा है।

8. भारत में बायो डीजल (bio-diesel) बनाने की योजना आरंभ कर दी है और आशा है कि 2010-2011 तक भारत में यह बनने लगेगा और प्रदूषण में कमी आएगी।

9. संसार के Renewable Energy के सबसे बड़े कार्यक्रमों में एक भारत में चल रहा है जो इस बात का साक्षी है कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति भारत गंभीर है और ठोस कदम उठा

10. भारत ने सार्क सम्मेलनों में इस मुद्दे को उठाया है और संगठन के सभी सदस्य देर्शो संबंध में आपसी सहयोग करने और एक सामान्य नीति निश्चित करने पर जोर दिया है। 

Q.5 मूलवासी से क्या अभिप्राय है ? विश्व राजनीति में इनके अधिकारों के संबंध में क्या ष्टकोण है ?

Ans. मूलवासियों का अर्थ (Meaning of Indegeneous People) हम सभी जनसंख्या का कुछ भाग मूलवासियों का है मूलवासियों के अधिकारों का मुद्दा भी विश्व की राजनीति में सम्मिलित हो गया है और इस बात पर काफी विचार भी है कि इन्हें इसके अधिकार मिलने चाहिए इनके अधिकार क्या है, इन पर तो अभी एकमत नहीं हुआ है परंतु मानवाधिकारों की धारणा के युग में जबकि एक साधारण व्यक्ति के, एक मानव होने के नाते अधिकार की बात कही जाती है, तो उन व्यक्तियों के अधिकारों की माँग का महत्त्व स्वयंमेव बढ़ गता है जो किसी देश के मूल निवासी और एक प्रकार से उस क्षेत्र के मूल स्वामी समझे जाते. हैं। 

मूलवासी किसी देश में ऐसे लोगों को कहा जाता है जो किसी देश में बहुत पहले से रहते आए थे, परंतु बाद में दूसरे देश के लोगों ने आकर वहाँ अपना अधिकार कर लिया और उन्हें जंगलों आदि में शरण लेने तथा वहाँ बसने पर बाध्य कर दिया। 

जंगलों या पर्वतीय क्षेत्रों में धकेले गए इन मूलवासियों ने अपनी भाषा, संस्कृति और रीति-रिवाजों को बनाए रखा। मुख्य जनसंख्या से अलग रहने के कारण ये लोग आधुनिक सभ्यता और संस्कृति के प्रभाव से अछूते रहे और अपने र-तरीकों के अनुसार ही अपना जीवन व्यतीत करते रहे।

1982 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने मूलवासियों को परिभाषित करते हुए कहा है कि मूलवासी ऐसे लोगों के वंशज हैं जो किसी देश में काफी लम्बे समय से रहते चले आ रहे थे। फिर किसी दूसरी संस्कृति तथा वर्तमान संस्थाओं के अनुरूप जीवन व्यतीत करने की बजाय अपनी संस्कृति, अपनी परंपराओं, अपने रीति-रिवाजों तथा अपनी विशिष्ट सामाजिक आर्थिक जीवन शैली को अपनाए हुए हैं।

मूलवासी लोग लगभग सभी देशों में मिलते हैं। भारत में ये लोग आदिवासी और के अनुसार अनुसूचित जनजाति के नाम से पुकारे जाते हैं। ये अधिकतर उत्तर-पूर्व के क्षेत्रों, मध्य प्रदेश के बस्तर जिले और राजस्थान के कुछ क्षेत्रों में बसे हुए हैं। 

भारतीय में इनकी संस्कृति, भाषा, रीति-रिवाजों के संरक्षण की विशेष व्यवस्थाएँ की गई है। जनसंख्या भारत की कुल जनसंख्या का लगभग 8% है और इसीलिए इनके लिए 72% की व्यवस्था की गई है। संसार के विभिन्न भागों में बसे इन मूलवासियों की कुल जनसंख्या 30 करोड़ बताई है। बांग्लादेश के चटगाँव क्षेत्र में 6 लाख मूलवासी रहते हैं। उत्तरी अमेरिका में इनकी संख्या लाख आँकी गई है। 

फिलीपीन्स में, कोरडिलेरा क्षेत्र में 20 लाख मूलवासी रहते हैं। (Chile) में मूलवासियों की संख्या 10 लाख है। पनामा नहर के पूर्व में लगभग 5000 -मूलवासी हैं जिन्हें कुना कहकर पुकारा जाता है। उत्तरी सोवियत रूस में इनकी जनसंख्या 10 लाख है। दक्षिण और मध्य अमेरिका, दक्षिण पूर्व एशिया, अफ्रीका में भी मूलवासी आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैण्ड और असिपाड़ा क्षेत्र के बहुत से द्वीपों में मूलवासी रहते हैं।

इस आर्टिकल में किसी भी प्रकार का त्रुटि आपको मिलती है तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं हम उसे जल्द से जल्द ठीक करने की कोशिश करेंगे क्योंकि लिखने समय सबसे गलती हो जाती है 😅😅😅😅😅😅😅😅😅


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FAQs

Q1. ‘फ्रेमवर्क कन्वेन्शन ऑन क्लाइमेट चेंज’ की मौजूदा प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए भारत की क्या माँग है

Ans. 1. विकासशील देशों को रियायती शर्तों पर नये और अतिरिक्त वित्तीय संसाधन तथा पर्यावरण के संदर्भों में बेहतर साबित होने वाले प्रौद्योगिकी मुहैया कराने की दिशा में कोई सार्थक प्रगति नहीं हुई है। 
2. भारत की माँग है कि विकसित देश विकासशील देशों को वित्तीय संसाधन तथा स्वच्छ प्रौद्योगिकी मुहैया कराने के लिए तुरंत उपाय करें ताकि विकासशील देश फ्रेमवर्क कन्वेन्शन ऑन क्लाइमेट चेंज की मौजूदा प्रतिबद्धताओं को पूरा कर सके।

Q.2 विश्व नेताओं ने भूमि पर्यावरण की चिंता क्यों की है ? कोई दो कारण लिखिए ।

Ans1. दुनिया भर में कृषि योग्य भूमि में अब कोई बढ़ोतरी नहीं हो रही जबकि मौजूदा उपजाऊ जमीन के एक बड़े हिस्से की उर्वरता कम हो रही है । 
2. चारागाहों के चारे खत्म होने को हैं मत्स्य-भंडार घट रहा है।
3. जलाशयों की जलराशि बड़ी तेजी से कम हुई है उसमें प्रदूषण बढ़ रहा है। इससे खाद्य उत्पादन में कमी आ रही है।

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