Class 12 Political Science Notes Ch-9 In Hindi | वैश्वीकरण कक्षा 12 विषय राजनीति विज्ञान पाठ 9 के प्रश्न उत्तर

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Class 12 Political Science Notes Ch-9 In Hindi में यह अध्याय काफी महत्वपूर्ण है| इस अध्याय से काफी प्रश्न परीक्षा में पूछे जा चुके हैं तथा यह अध्याय विद्यार्थी के लिए अति आवश्यक है क्योंकि इस अध्याय से हमें विश्व की राजनीति समझ में आती है|

तो छात्रों, इस लेख को पढ़ने के बाद, आपको इस अध्याय से परीक्षा में बहुत अधिक अंक प्राप्त होंगे, क्योंकि इसमें सभी परीक्षाओं से संबंधित प्रश्नों का वर्णन किया गया है, इसलिए इसे पूरा अवश्य पढ़ें।

मैं खुद 12वीं का टॉपर रहा हूं और मुझे पता है कि 12वीं की परीक्षा में किस तरह के प्रश्न पूछे जाते हैं। वर्तमान में, मैं एक शिक्षक की भूमिका भी निभा रहा हूँ, और अपने छात्रों को कक्षा 12वीं की महत्वपूर्ण जानकारी और विषयों का अभ्यास भी कराता हूँ। मैंने यहां 5 वर्षों से अधिक के अपने अनुभव के साथ प्रश्न-उत्तर लेख लिखा है। इस पोस्ट की मदद से आप परीक्षा में इस अध्याय से राजनीति विज्ञान में बहुत अच्छे अंक प्राप्त कर सकेंगे।

Class 12 Political Science Notes Ch-9 In Hindi | वैश्वीकरण कक्षा 12 विषय राजनीति विज्ञान पाठ 9 के प्रश्न उत्तर

कक्षा | Class12th 
अध्याय | Chapter09
अध्याय का नाम | Chapter Nameवैश्वीकरण
बोर्ड | Boardसभी हिंदी बोर्ड
किताब | Book एनसीईआरटी | NCERT
विषय | Subjectराजनीति विज्ञान | Political Science
मध्यम | Medium हिंदी | HINDI
अध्ययन सामग्री | Study Materialsप्रश्न उत्तर | Question answer

पाठ के मुख्य बिंदु | Main Point of This chapter

20वीं शताब्दी के अंतिम दशक में वैश्वीकरण की प्रक्रिया आरंभ हुई और 10 वर्षों में काफी • प्रसारित हुई तथा 21वीं शताब्दी को वैश्वीकरण का युग माना जाने लगा है। 

साधारण रूप में वैश्वीकरण का अर्थ है विश्व के सभी क्षेत्रों में रहने वाले सभी लोगों में समीपता की भावना का विकसित होना, अपने को एक परिवार के सदस्य के रूप में समझना और व्यक्तियों तथा वस्तुओं का एक स्थान से दूसरे स्थान, एक देश से दूसरे देश में बिना अधिक रोक-टोक के आना जाता तथा दूसरे के सुख-दुख से प्रभावित होना । 

जैसे परिवार के सदस्यों को रहने के लिए अलग-अलग कमरे मिल जाते हैं परंतु सभी सदस्य सभी कमरों में बेरोक-टोक आते जाते हैं, एक सदस्य के बीमार पड़ने पर सभी सदस्य चिंतित तथा प्रभावित होते हैं, एक सदस्य के जन्मदिन को सभी सदस्य मिलजुल कर खुशी से मनाते हैं जैसा कि वह उत्सव उससे ही संबंधित हो, और सभी सदस्य एक-दूसरे के जीवन विकास, व्यापार की उन्नति आदि से सकारात्मक सहयोग देते हैं, इसी प्रकार से दुनिया के विभिन्न देशों में रहने वाले लोग आज एक-दूसरे के इतने निकट आ गए हैं। 

वे अपने को अलग-अलग देशों के नागरिक, अलग-अलग समाजों के सदस्य न समझ कर एक ही समाज या एक ही परिवार के सदस्य समझने लगे हैं और एक-दूसरे की गतिविधियों से प्रभावित होते हैं तथा प्रभावित करते हैं। अब संसार के लोगों द्वारा व्यापार आदि के साझे नियम बनाने की ओर कदम उठने लगे हैं जिसके लिए विश्व व्यापार संगठन स्थापित किया गया है। यही वैश्वीकरण है। 

वैश्वीकरण के कारण राज्यों की सीमाओं पर लगी कड़ी चौकसियाँ शिथिल होने लगी हैं और कई देशों में व्यक्तियों तथा वस्तुओं पर जो कड़े नियम तथा पासपोर्ट और परमिट आदि की बाध्यताएँ लगी हुई थीं, वे शिथिल हुई हैं और उन्होंने मुक्त व्यापार की नीति अपनाई है। आज अपने घर में बैठकर ही एक व्यक्ति संसार के किसी भी भाग की व्यापारिक गतिविधियों में भाग लेता है और सूचनाओं का स्वतंत्रतापूर्वक आदान-प्रदान होता है। 

आज एक देश में घटने वाली घटना चाहे वह राजनीतिक हो, आर्थिक हो या सांस्कृतिक हो, उसके प्रभाव अन्य देशों के लोगों पर पड़ते हैं, उनसे केवल उसी देशों के नागरिक प्रभावित नहीं होते बल्कि सारे संसार के लोग प्रभावित होते हैं। आज एक देश का नागरिक दूसरे देशों में भी कई कंपनियाँ चलाते देखा जा सकता है। एक देश की बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ संसार के दूसरे देशों में बड़े-बड़े नगरों में व्यापारिक गतिविधियाँ चलाती दिखाई देती हैं। देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं की तेज गतिशीलता है। 

भारत में बहुत-सी विदेशी कंपनियाँ विशेषकर बीमा उद्योग, संचार उद्योग, जनसंचार आदि में सक्रिय रूप से व्यापार में लगी हुई हैं। आज विभिन्न संस्कृतियों का मेलजोल भी बढ़ा है और सभी ने एक-दूसरे को प्रभावित किया है। ये सभी उदाहरण वैश्वीकरण के हैं।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न | VERY SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS

Class 12 Political Science Notes
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Q. 1. वैश्वीकरण क्या है ?

Ans. 1. एक अवधारणा के रूप में वैश्वीकरण का बुनियादी अर्थ – ‘प्रवाह’ है । प्रवाह कई प्रकार के हो सकते हैं। 

2. विश्व के एक हिस्से के विचारों का दूसरे हिस्सों में पहुँचना, पूँजी का एक से अधिक जगहों पर जाना, वस्तुओं का कई देशों में पहुँचना, व्यापार तथा बेहतर आजीविका की तलाश में विश्व के विभिन्न हिस्से में लोगों की आवाजाही प्रवाह है। 

Q. 2. क्या वैश्वीकरण एक बहुआयामी अवधारणा है ?

Ans. 1. वैश्वीकरण एक बहुआयामी अवधारणा है और इसके अनेक आयाम – राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक हो सकते हैं।

2. वैश्वीकरण कोई एक परिघटना यथा- राजनीतिक, आर्थिक या सांस्कृतिक नहीं कहा जाता हैं। 

Q.3. संचार साधनों के कारण वैश्वीकरण को कैसे बढ़ावा मिला ? 

Ans. 1. प्रौद्योगिकी के विकास से अनेक संचार साधनों टेलीफोन, टेलीग्राफ और माइक्रोचिप के आविष्कार हुए। इनके कारण संचार की क्रांति दिखाई देती है।

2. संचार साधनों से लोगों का आपसी संबंध बढ़ गया। इसके माध्यम से पूँजी, विचार, वस्तुओं और लोगों की आवाजाही में पर्याप्त उन्नति हुई। इस प्रकार वैश्वीकरण को बढ़ावा मिला। 

Q.4. क्या वैश्वीकरण के कारण कल्याणकारी राज्य के स्वरूप में अंतर आया है ?

Ans. 1. वैश्वीकरण का कल्याणकारी राज्य के स्वरूप पर बुरा असर पड़ा है। अब यह अवधारणा पुरानी पड़ गई है और इसका स्थान न्यूनतम हस्तक्षेपकारी राज्य ने ले लिया है।

2. इसके कार्य सीमित हो गये हैं। यह कानून और व्यवस्था तथा नागरिकों की सुरक्षा का कार्य करता है। सामाजिक और आर्थिक कल्याण का कार्य समाप्त हो गया है।

Q.5. बहुराष्ट्रीय निगमों ने सरकारों को कैसे प्रभावित किया है ? 

Ans. 1. वैश्वीकरण के विकास में बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का बहुत अधिक योगदान है। ये कम्पनियाँ सभी देशों में अपने पाँव पसार चुकी हैं।

2. विभिन्न देशों में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो गयी है। फलस्वरूप सरकारें स्वयं कोई निर्णय नहीं ले पा रही हैं। अर्थात् सरकारों के निर्णय लेने की क्षमता में कमी आई है।

Q. 6. क्या वैश्वीकरण से राज्य की ताकत में इजाफा हुआ है ? 

Ans. 1. कुछ लोगों का मानना है कि वैश्वीकरण से राज्य की ताकत में इजाफा हुआ है। अब राज्य के अंतर्गत उच्च कोटि की प्रौद्योगिकी मौजूद है। 

2. प्रौद्योगिकी के माध्यम से राज्य अपने नागरिकों के विषय में अधिक सूचनायें एकत्र कर सकता है। इस सूचना के आधार पर राज्य अधिक व्यवस्थित ढंग से काम कर सकता है। इससे उनकी क्षमता बढ़ती है। स्पष्ट है कि राज्य ताकतवर हो गया है।

लघु उत्तरीय प्रश्न | SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS

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Q. 1 प्रौद्योगिकी वैश्वीकरण का एक महत्वपूर्ण कारक है, विवेचना कीजिए । वैश्वीकरण में प्रौद्योगीकरण का क्या योगदान है ?

Ans. वैश्वीकरण की धारणा तथा विकास में सबसे अधिक योगदान प्रौद्योगिकी का है क्योंकि इसने ही सारे संसार के लोगों का पारस्परिक जुड़ाव किया है और विभिन्न देशों तथा क्षेत्रों को आमने-सामने ला खड़ा किया है, उनकी आपसी निर्भरता को बढ़ाया है और साथ ही उन्हें यह महसूस करने पर बाध्य किया है कि वे सब एक ही परिवार के सदस्य हैं। 

निम्नलिखित तथ्य इस कथन की पुष्टि करते है-

1. प्रौद्योगिकी की प्रगति ने सारे संसार में लोगों, वस्तुओं, पूँजी और विचारों आश्चर्यजनक वृद्धि की है। इनकी गतिशीलता बहुत तेज हुई है। 

2. प्रौद्योगिकी की प्रगति के कारण आज संसार के किसी भी भाग में बैठा व्यक्ति हजारों-लाखों मील की दूरी पर घटने वाली घटनाओं से तुरंत ही परिचित हो जाता है और ऐसा महसूस करने लगता है कि वह उसी स्थान पर मौजूद है और उसके आसपास ही घटना घट रही है।

3. टी.वी. पर दिखाए जाने वाले लाइव टेलीकास्ट (Live Telecast) से व्यक्ति हजारों मील दूर घटने वाली घटनाओं तथा मैच आदि के बारे में यह महसूस करता है कि वह उस घटना या मैच को प्रत्यक्ष रूप से उसी स्थान पर बैठा देख रहा है और समय तथा स्थान की दूरी प्रायः समाप्त हो गई है।

4. प्रौद्योगिकी में हुई प्रगति के कारण अपने घर में बैठा व्यक्ति सारे संसार से जुड़ा हुआ महसूस करता है। वह घर बैठा ही विदेशों से व्यापार करता है, यन का भुगतान करता है, आपर में बात चीत करता है, यहाँ तक कि सम्मेलनों तथा बैठकों में भागीदारी भी करता है।

5. प्रौद्योगिकी विभिन्न देशों की संस्कृतियों को टी.वी. तथा इंटरनेट के माध्यम से अंत करने में भूमिका निभाती और वे एक-दूसरे को ऐसे प्रभावित करने लगी है जैसे लोग प्रत्यक्ष से, आमने-सामने आकर बातचीत करके प्रभावित होते हैं। अतः वैश्वीकरण के प्रसार में सर्वाधिक महत्वपूर्ण योगदान प्रौद्योगिकी का है।

Q2. वैश्वीकरण के आर्थिक प्रभावों की चर्चा कीजिए। 

Ans. वैश्वीकरण के आर्थिक प्रभाव – 

1. आर्थिक वैश्वीकरण वह प्रक्रिया है जिसमे विश्व के विभिन्न देशों के बीच आर्थिक प्रवाह तेज हो जाता है। कुछ आर्थिक प्रवाह स्वेच्छा से होते हैं जबकि कुछ अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं और शक्तिशाली देशों द्वारा थोपे जाते हैं।

2. आर्थिक प्रवाह से वस्तुओं, पूँजी और विचारों का प्रवाह होता है। वैश्वीकरण वस्तुओं के व्यापार को लाभ हुआ है। 

3. वस्तुतः वैश्वीकरण के प्रभाव से पूँजी और वस्तुओं के आयात पर विभिन्न देशों द्वारा प्रतिबंध समाप्त कर दिये गये हैं। इसलिए धनी देश अपना निवेश किसी अन्य देश या विशेष रूप से विकासशील देशों में कर सकते हैं, जहाँ उन्हें अधिक लाभ हो सकता है।

4. विचारों की दृष्टि से राष्ट्र की सीमा बाधक नहीं है। इसलिए इंटरनेट और कम्प्यूटर जुड़ी सेवाओं का विस्तार हुआ है। 

5. विकसित देशों ने विकासशील देशों के लिए संरक्षण नीति अपना ली है।

Q.3 श्वीकरण के नकारात्मक प्रभावों की विवेचना कीजिए। 

Ans. वैश्वीकरण के नकारात्मक प्रभाव- 

1. वैश्वीकरण का जनमत पर बहुत प्रभाव पड़ा है और वह पर्याप्त सीमा तक विभाजित हुआ है। 

2. वैश्वीकरण से सरकार के उत्तरदायित्व में कमी आई है जिससे सामाजिक न्याय को भारी लगा है। 

3. नौकरी, शिक्षा, स्वास्थ्य, सफाई आदि सुविधा प्राप्त करने के लिए सरकार पर आश्रित रहने वाले लोगों की स्थिति खराब हो जायेगी। 

4.वैश्वीकरण में सामाजिक सुरक्षा के अभाव के कारण विश्व के कई भागों में आंदोलन हुए है और अकेले सुरक्षा कवच को अपर्याप्त मानते हैं। 

Q4. वैश्वीकरण के लाभदायक पक्षों का उल्लेख कीजिए । 

Ans. वैश्वीकरण के लाभदायक पक्ष – 

1. आर्थिक वैश्वीकरण की प्रक्रियाओं के समर्थकों का कहना है कि इससे समृद्धि बढ़ती है और खुलेपन के कारण अधिक आबादी की खुशहाली बढ़ती है।

2. इससे व्यापार का विकास होता है। फलस्वरूप प्रत्येक देश को अपने को बेहतर करने का अवसर मिलता है।

3. वैश्वीकरण के समर्थकों का कहना है कि आर्थिक वैश्वीकरण अपरिहार्य है और इसको अवरुद्ध करना इतिहास से धारा को रोकना होगा। 

4. मध्यमार्गी समर्थकों का विचार है कि वैश्वीकरण ने चुनौतियाँ पेश की हैं और चैतन्य होकर पूरी बुद्धिमानी से इसका सामना किया जाना चाहिए। 

5. वस्तुतः देशों और नागरिकों का विभिन्न जरूरतों के कारण पारस्परिक निर्भरता में वृद्धि हो रही है। ऐसे में वैश्वीकरण आवश्यक हो जाती है। 

Q5. सांस्कृतिक वैश्वीकरण के हानिकारक पक्ष की चर्चा कीजिए।

Ans. सांस्कृतिक वैश्वीकरण के हानिकारक पक्ष – 

1. इसका प्रभाव हमारे रहन-सहन, वेशभूषा, खान-पान और विचारों पर भी दिखाई देता है।

2. अब हमारी पसंद भी वैश्वीकरण से निर्धारित होती है इस प्रकार पूरा भय बना हुआ है। कि इससे संस्कृति को भी खतरा हो सकता है।

3. वस्तुतः सांस्कृतिक वैश्वीकरण संस्कृतियों में समरूपता लाने का प्रयास करता है। ऐसे में संस्कृति में परिवर्तन सुनिश्चित है।

4. वास्तव में विश्व संस्कृति के नाम पर विभिन्न देशों में पश्चिमी संस्कृति थोपने का प्रयास किया जा रहा है।

5. अमरीकी वर्चस्व बढ़ता जा रहा है और अमरीकी वस्तुओं का प्रचलन बढ़ाया जा रहा है। जिससे लोग गहराई तक प्रभावित हो सकें।

class 12th NotesMCQ
HistoryPolitical Science
EnglishHindi

Q.6. सांस्कृतिक वैश्वीकरण के लाभ बताइए ।

Ans. सांस्कृतिक वैश्वीकरण के लाभ वैश्वीकरण का सांस्कृतिक प्रभाव केवल नकारात्मक ही नहीं है बल्कि इसका सकारात्मक प्रभाव भी है-

1. बाहरी संस्कृति से हमारी पसंदगी में कमी आती है परंतु जरूरी नहीं है।

2. इनसे परंपरागत सांस्कृतिक मूल्यों को छोड़े बिना संस्कृति में सुधार होता है। बल्कि इससे हमारी खाने वाली वस्तुओं की पसंद में एक चीज और शामिल हो जाती है। 

3. वैश्वीकरण से संस्कृतियों के मिश्रण से संस्कृति में विशिष्टता आती है। 

4. वैश्वीकरण से प्रत्येक संस्कृति अधिक अलग और विशिष्ट होती जा रही है।

Q.7. भारत में 1991 के बाद वैश्वीकरण के क्षेत्र में क्या कार्य किया गया ? 

Ans. भारत में 1991 के बाद वैश्वीकरण के क्षेत्र में कार्य-1. भारत में 1991 में भारी वित्तीय संकट आया था। इससे उबरने और आर्थिक वृद्धि की ऊँची दर प्राप्त करने की से भारत में आर्थिक सुधारों की योजना शुरू हुई। इच्छा

2. इसके अंतर्गत आयात के विभिन्न क्षेत्रों से अनेक प्रतिबंध हटाये गये। 

3. व्यापार में खुलेपन की नीति अपनाई गई और विदेशी निवेश को निमंत्रित किया गया। 

4. वैश्वीकरण का लाभ निचले तबके तक पहुँचाने का निश्चय किया गया।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न | Long Answer Type Questions

Class 12 Political Science Notes
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Q1. वैश्वीकरण से क्या अभिप्राय है ? उदारीकरण की दिशा में भारत द्वारा अ नीति में किए गए मुख्य परिवर्तनों की विवेचना कीजिए । 

Ans. पहले की तुलना में आर्थिक गतिविधियों का एक बड़ा भाग अब निजी क्षेत्र के अं लाया जा रहा है। इसे ‘निजीकरण’ (Privatisation) अथवा ‘उदारीकरण’ (liberalisati की संज्ञा दी गई है। उदारीकरण के साथ-साथ ‘वैश्वीकरण’ शब्द का प्रयोग अभी पिछले कुछ से ही होने लगा है। वैश्वीकरण से आशय है, ‘व्यापार, पूँजी एवं टैक्नालॉजी के प्रवाहों के मा से घरेलू अर्थव्यवस्था का शेष संसार के साथ एकीकरण एवं समन्वयन ।’

1. वर्ष 1991 में नई औद्योगिक नीति लागू की गई जिसके अंतर्गत सुरक्षा और सामाजिक भारत में वैसे तो अस्सी के दशक से ही वैश्वीकरण की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी थी, किंतु 1991 में आर्थिक सुधारों को अपनाने के बाद से तो यह प्रक्रिया काफी तेज हो गई। 

2. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Foreign Direct Investment) को बढ़ावा दिया गया है। कुछ क्षेत्र में शत-प्रतिशत विदेशी निवेश की इजाजत है, जैसे कि बिजली क्षेत्र और तेल शोधन का क्षेत्र। 

3. विनिवेश (Disinvestment) कार्यक्रम को प्रोत्साहन दिया गया है अर्थात् अनेक सार्वजनिक उद्योगों को निजी क्षेत्र के अंतर्गत लाया जा रहा है।

4. श्रम सुधार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण श्रम कानूनों में संशोधन या गया है ताकि उद्योगपति अलाभप्रद कारखानों को सरकार की अनुमति के बिना भी बंद कर यह आशा की जाती है कि वैश्वीकरण की नीति पर चलकर विश्व व्यापार में भारत का हिस्सा 05 प्रतिशत से बढ़कर एक प्रतिशत हो जाएगा। 

Q.2. वैश्वीकरण के क्या लाभ हैं और क्या हानियाँ हैं ? 

Ans. भूमण्डलीकरण (Globalisation ) – 20वीं शताब्दी के अंतिम चरण में राष्ट्र-राज्यों की प्रभुसत्ता तथा क्षेत्रीय सीमाएँ लुप्तप्रायः होने लगीं और यह भावना जोर पकड़ने लगी कि विभिन्न राज्य विश्वव्यापी परिवार के सदस्य हैं, उन्हें एक परिवार के सदस्यों के रूप में आपस में मिलजुल कर रहना है, अलग-थलग नहीं तथा एक-दूसरे के सहयोग से समस्याओं का समाधान करके विकास की ओर अग्रसर होना है। 

यह भावना पनपी कि किसी राज्य का अपना विकास ही काफी नहीं बल्कि समस्त संसार के विकास के साथ ही राज्य का विकास सार्थक है। भूमण्डलीकरण ने राष्ट्रों की क्षेत्रीय सीमाओं को समाप्त-सा कर दिया है और बहुत-सी विश्व व्यापी समस्याओं का समाधान वे मिलजुल कर करने लगे हैं। भूमण्डलीकरण के सकारात्मक पहलू भी हैं और नकारात्मक पहलू भी, इसके लाभ भी हैं और हानियाँ भी । 

भूमण्डलीकरण के सकारात्मक पहलू अथवा लाभ (Positive Aspects or Advanc tages of Globalisation ) — भूमण्डलीकरण के निम्नलिखित लाभ हैं—

1. विश्व शांति को बढ़ावा (Encouragement to World Peace ) — भूमण्डलीकरण से विश्व शांति को बढ़ावा मिलता है। जब विभिन्न राज्य अपने को प्रभुसत्ता संपन्न तथा अलग-अलग राज्य न मानकर समस्त संसार रूपी परिवार का एक अंग मानने लगते हैं तो उनमें आपसी वैर-भाव, द्वेष और युद्ध की भावना यदि समाप्त नहीं तो कम अवश्य हो जाती है। यह भावना विश्व शांति को बढ़ा देती है। 

2. विश्वव्यापी समस्याओं का सरलता से समाधान (Easy Solution of World Problems) भूमण्डलीकरण के कारण विश्वव्यापी समस्याओं जैसे कि पर्यावरण की रक्षा तथा पोषण, जन स्वास्थ्य की रक्षा, एड्स की रोकथाम, कुपोषण, मुखमरी, निरक्षरता, आतंकवाद उ का आसानी से समाधान हो जाता है। 

3. सभी राष्ट्रों का संतुलित विकास (Balanced Development of All Nations)– राष्ट्र राज्यों के वातावरण में केवल बड़े-बड़े शक्तिशाली राष्ट्र ही विकास की ओर अग्रसर होने हैं और छोटे, कमजोरि तथा गरीब राष्ट्र अपना सामाजिक विकास आसानी से नहीं कर पाते। आहे भी यही स्थिति है कि विकासशील या तीसरी दुनिया के देशों में सामाजिक-आर्थिक पिछड़ापन है। 

4. यातायात तथा व्यापारिक गतिविधियों में वृद्धि (Increase in Travel and Trade Activities)—भूमण्डलीकरण के वातावरण में एक देश से दूसरे देश में आने-जाने के लिए बहुत-सी सुविधाएँ बढ़ जाती हैं, जैसे- पासपोर्ट की व्यवस्था समाप्त हो जाती है, बहुत-से देशी में एक ही मुद्रा का चलन, वस्तुओं के लाने ले जाने पर प्रतिबंधों का अभाव आदि। 

5. ज्ञान में सबकी भागीदारी (Sharing of All in the Knowledge ) आज विज्ञान और तकनीक का युग है। परंतु इसमें अनुसंधान कार्य तथा ज्ञान में वृद्धि की गतिविधियाँ कुछ ही देशों में हो रही हैं। लेकिन इन कुछ देशों को जो भी ज्ञान प्राप्त होता है उसका लाभ सबको मिलने लगता है। 

6. समानता की भावना (Spirit of Equality ) विश्व के किसी भी भाग में रहने वाले सभी लोग समान हैं, सभी राष्ट्र समान हैं, यह भावना राष्ट्र राज्य के वातावरण में नहीं बल्कि भूमण्डलीकरण के वातावरण में विकसित होती है। भूमण्डलीकरण का वातावरण सब राष्ट्रों को एक परिवार का सदस्य तथा समान समझता है। 

7. विभिन्न संस्कृतियों में अंतःक्रिया में वृद्धि (Increase in Interaction among Various Cultures)—वैश्वीकरण का एक लाभ यह है कि विश्व की विभिन्न संस्कृतियों में अंतःक्रिया तथा मेल-जोल बढ़ा है। लोगों की गतिशीलता में वृद्धि तथा प्रौद्योगिकी के विकास से विभिन्न देशों के लोग प्रत्यक्ष रूप से तथा टी.वी., इन्टरनेट, ई-मेल तथा अन्य आधुनिक विकसित साधनों के माध्यम से एक-दूसरे के अधिक समीप आए हैं। 

वैश्वीकरण के नकारात्मक पक्ष अथवा हानियाँ (Negative Aspects or Disadva tages of Globalisation)—

वैश्वीकरण के केवल लाभ ही नहीं कुछ हानियाँ भी हैं। इसके नकारात्मक पक्षों की आलोचना हुई है, नकारात्मक पक्षों का विरोध हुआ है। ये नकारात्मक पक्ष निम्नलिखित हैं- 

1. राज्यों की प्रभुसत्ता तथा क्षेत्रीय अखण्डता पर प्रभाव (Impact on Sovereignty and Territorial Intergrity of the states ) – भूमण्डलीकरण ने राज्यों की प्रभुसत्ता तथा प्रादेशिक अखंडता अथवा क्षेत्रीय सीमाओं को प्रभावित किया है। इसके कारण राज्यों की सीमाएँ समाप्त होती जा रही हैं और राज्यों की प्रभुसत्ता आंतरिक तथा बाह्य दोनों रूपों में प्रभावित हो रही है। 

2. पिछड़े और गरीब देशों का आर्थिक शोषण (Economic Exploitation of Backward and Poor Countries) – भूमण्डलीकरण से छोटे-छोटे, गरीब, औद्योगिक दृष्टि से पिछड़े तथा सामाजिक दृष्टि से अविकसित देशों का आर्थिक शोषण होने लगता है और हो रहा है। भूमण्डलीकरण के वातावरण में बड़े-बड़े व्यापारिक तथा औद्योगिक संगठन जो संपन्न तथा अमीर देशों द्वारा ही खोले और चलाए जाते हैं। सभी देशों ने अपने पाँव फैला लेते हैं। 

3. बहुराष्ट्रीय निगमों के बुरे प्रभाव (III Effects of Multinational Corpora- tions ) — जिस प्रकार बड़ा वृक्ष अपने आप तो फैलता जाता है परंतु उसकी छाया में छोटे पीधे पनप नहीं पाते और समाप्त हो जाते हैं उसी प्रकार बहुराष्ट्रीय निगम सारे संसार में अपने पाँव फैलाते जा रहे हैं और जहाँ भी जाते हैं 

4. असमानता का वातावरण (Atmosphere of Inequality) संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना इस आधार पर हुई है कि सब राष्ट्र छोटे-बड़े, अमीर-गरीब समान हैं। संयुक्त राष्ट्र की महासभा में भी सबको समान प्रतिनिधित्व दिया गया है। परंतु भूमण्डलीकरण राष्ट्रों की इस समानता को भी प्रभावित करता है। संसार में धन-संपत्ति तथा आर्थिक संसाधनों का बहुत ही त्रुटिपूर्ण तथा असमान वितरण है। 

5. छोटे तथा गरीब राष्ट्रों के हितों की अवहेलना (Interests of Small and Poor Countries remain Ignored ) भूमण्डलीकरण के वातावरण में बड़े-बड़े तिशाली और संपन्न देशों के हितों को बढ़ावा मिलता है और छोटे तथा गरीब देशों की आवाज बहुत कम सुनी जाती है। 

Q.3.विश्वव्यापी स्तर पर वैश्वीकरण के विरोध की चर्चा करें।

Ans. वैश्वीकरण का विश्वव्यापी प्रतिरोध (Global Opposition to Globalisation ) वैश्वीकरण का भारत में ही नहीं बल्कि सभी देशों में विरोध हुआ है। यह एक विवाद योग्य मुद्रा है और आज तो सभी देशों में इसके अच्छे-बुरे पक्षों पर विवाद होता है। निम्नलिखित तथ्य इसके विश्वव्यापी विरोध की पुष्टि करते हैं-

1. मार्क्सवादी विचारधारा के समर्थक इसका विरोध इस आधार पर करते हैं कि यह पूँजीवादी व्यवस्था का समर्थक है। मार्क्सवादी इसे साम्राज्यवादी तथा पूँजीवादी व्यवस्था के विस्तार का साधन मानते हैं। 

2. बहुत-से विचारक वैश्वीकरण को अमीरों और अमीर देशों की रक्षा का साधन मानते हैं और इस वातावरण में गरीब तथा श्रमिकों के हितों की सुरक्षा नहीं होती। 

3. कुछ विचारकों का कहना है कि क्योंकि वैश्वीकरण से राज्य की प्रभुसत्ता तथा सीमाओं पर राज्य के नियंत्रण पर प्रभाव पड़ता है, 

4. वैश्वीकरण से राज्य की समाज कल्याण, सामाजिक न्याय तथा सामाजिक सुरक्षा संबंधी गतिविधियों में कमी आने की संभावना है। ऐसी अवस्था में समाज के कमजोर तथा पिछड़े वर्गों को जो राज्य की सहायता पर निर्भर रहते हैं । 

5. तीसरी दुनिया के देशों का कहना है कि क्योंकि विश्वव्यापी संस्थाओं जैसे विश्व बैंक, अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष, विश्व व्यापार संगठन आदि पर पश्चिमी विकसित तथा धनी देशों का प्रभुत्व है। 

6. ऐसा महसूस किया जा रहा है कि विश्व व्यापार संगठन व्यापार के ऐसे नियम तथा तौर-तरीके अपनाना चाहता है जो सभी देशों के लिए उचित नहीं माने जाते। 

7. वैश्वीकरण का विश्वव्यापी विरोध करने के उद्देश्य से वर्ल्ड सोशल फोरम (World Social Forum) की स्थापना हुई। इसमें मानवाधिकार वादी कार्यकर्ता, पर्यावरणवादी-कार्यकर्ता, श्रमिक, महिला कार्यकर्ता तथा युवा समाजसेवी सम्मिलित हैं। 



इस आर्टिकल में किसी भी प्रकार का त्रुटि आपको मिलती है तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं हम उसे जल्द से जल्द ठीक करने की कोशिश करेंगे क्योंकि लिखने समय सबसे गलती हो जाती है 😅😅😅😅😅😅😅😅😅


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FAQs

Q.1. आर्थिक वैश्वीकरण से आप क्या समझते हैं ?

Ans. 1. आर्थिक वैश्वीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें विश्व के विभिन्न देशों के बीच आर्थिक गतिविधि तेज हो जाती है अर्थात् उनके बीच पूँजी और व्यापार की आवाजाही तेज हो जाती है।
2. कुछ आर्थिक प्रवाह स्वेच्छा से होते हैं जबकि कुछ अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं और ताकतवर देशों द्वारा जबर्दस्ती लादे जाते हैं।

Q. 2. वैश्वीकरण के चलते व्यापारिक गतिविधियों में क्या वृद्धि हुई है ? 

Ans. 1. विभिन्न देशों ने आयात होने वाली वस्तुओं पर से लगभग सभी प्रतिबंध समाप्त कर दिये गये हैं। इसलिए व्यापार तेज हो गया है। प्रारंभ में संरक्षणवाद की नीति के अंतर्गत यह संभव नहीं था। 
2. विश्व के विभिन्न देशों में पूँजी निवेश की छूट मिल गयी है। अब कुछ ही प्रतिबंध हैं। ऐसे में विभिन्न देश आपस में निवेश व्यापार को बढ़ावा दे रहे हैं। 

Q.3. आर्थिक वैश्वीकरण की हानियाँ बताइए।

Ans. 1. आर्थिक वैश्वीकरण के कारण संपूर्ण जनमत कई भागों में विभाजित हो गया और विचारों में अंतर आ गया है। 
2. सरकारें अपनी जिम्मेदारी महसूस नहीं कर रही हैं और इससे सामाजिक न्याय को भारी धक् लगा है। आर्थिक कल्याण के लिए सरकार पर निर्भर रहने वाले लोगों की स्थिति बदतर हो जायेगी।

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