Class 12 Sociology Important Questions and Answers in Hindi

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Class 12 Sociology Important Questions and Answers in Hindi

Class12th 
ChapterImportant Model Question Paper
BoardAll Hindi boards
Book NCERT
SubjectSociology
Medium Hindi
Study MaterialsFree Study Materials

sociology objective questions and answers pdf in hindi

Class 12 Sociology Important Questions and Answers in Hindi

Q.1. वर्ग व्यवस्था की विशेषता है (The class system contains the feature of)

(a) आनुवंशिक (Hereditary)

(b) प्रतियोगिता (Competition)

(c) खुलापन (Openness)

(d) निर्धारित पेशा (Fixed occupation)

Ans.(a)

Q.2. प्राथमिक समूह की सबसे बड़ी भूमिका है 

(a) भोजन की व्यवस्था करना (providing food) 

(b) स्वास्थ्य की रक्षा करना (protecting health)

(c) विचारों एवं व्यक्तित्व का निर्माण करना (forming the ideas and personality) 

(d) इनमें से कोई नहीं (none of these)

Ans.(d)

Q.3. समिति की विशेषता है (Association contains the feature) 

(a) सीमित हितों की पूर्ति के लिए निर्माण (Formed to fulfil limited interests)

(b) नियमों की व्यवस्था (System of procedures)

(c) व्यक्तियों का समूह (Group of individuals)

(d) गतिहीन प्रकृति (Stagnant in nature) 

Ans.(a)

Q.4. प्रजातंत्र की विशेषता है (Feature of democracy is)

(a) कानून की दृष्टि में समानता (Equality before law) 

(b) सार्वभौमिक मताधिकार (Universal Franchise)

(c) प्रेस की स्वतंत्रता (Freedom of Press)

(d) इनमें से सभी (All of these)

Ans.(d)

Q.5. निम्न में से कौन मंडल आयोग के अध्यक्ष थे? (Who among the following was the Chairman of Mandal Commission ?)

(a) बी.पी. मंडल (B.P. Mandal)

(b) बिन्देश्वरी दूबे (Bindeshwari Dubey)

(c) मंगनीलाल मंडल (Mangnilal Mandal)

(d) इनमें से कोई नहीं (None of them)

Ans.(a)

Q.6. कब वृद्धों के लिए राष्ट्रीय नीति की घोषणा की गई? (When was National Policy for older person announced ?)

(a) 1999 

(b) 1998

(c) 1997 

(d) 2000 

Ans.(a)

Q.7. निम्न में से कौन परिवार की विशेषता है ? (Which among the following is the feature of family)-

(a) सार्वभौमिकता (Universality) 

(b) सीमित आकार (Limited size) 

(c) भावनात्मक आधार (Emotional basis)

(d) इनमें से सभी (All of these) 

Ans.(d)

Q.8. ‘चाचा’ नातेदारी के किस श्रेणी के अन्तर्गत आता है? 

(a) प्राथमिक (Primary)

(b) द्वितीयक (Secondary)

 (c) तृतीयक (Tertiary)

(d) इनमें से कोई नहीं (None of these)

Ans.(b) 

Q.9. ‘सत्य शोधक समाज’ के संस्थापक कौन थे? (Who was the founder of ‘Satya Shodhak Samaj’ ?)

(a) आचार्य रामानुज (Acharya Ramanuj) 

(b) स्वामी विवेकानन्द (Swami Vivakananda)

(c) स्वामी दयानंद (Swami Dayanand)

(d) ज्योतिबा फूले (Jyotiba Phule)

Ans.(d)

Q.10. ‘आदिवासी महासभा’ एक संगठन था (‘Adivasi Mahasabha’ was an organisation of)

(a) उराँव का (Oraon)

(b) मुण्डा का (Munda)

(c) संथाल का (Santhal)

(d) इनमें से कोई नहीं (None of them)

Ans.(b) 

Q.11. ‘परीक्षा विवाह’ किस जनजाति में होता है? (In which tribe is ‘Marriage by Trial’ found?)

(a) मुण्डा (Munda)

(c) नागा (Naga)

(b) संथाल (Santhal)

(d) पील (Bhil)

Ans.(d)

Q.12. निम्न में से कौन जनजातीय धर्म का स्वरूप है? (Which of the following is a type of tribal religion?)

(a) ब्राह्मणवाद (Brahmanism) 

(b) टोटमवाद (Totemism)

(c) ओझागिरी (Ojhagiri)

(d) इनमें से सभी (All of these)

Ans.(b)

Q.13. निम्न में से कौन ग्रामीण समाज की विशेषता है? (Feature of Rural society is)

(a) श्रम विभाजन (Division of labour)

(b) सामाजिक गतिशीलता (Social Mobility)

(c) पनी आबादी (Dense Population)

(d) कृषि व्यवसाय (Farming)

Ans.(d)

Q.14. ‘भारत में जाति एवं वर्ग’ के लेखक हैं (Caste and Class in India’ is written by)

(a) इरावती कार्वे (Iravati Karve)

(b) एस.बी. केतकर (S.V. Ketkar)

(c) जी.एस. पुरिये (GS. Ghurye) 

(d) एम.एन. श्रीनिवास (M.N. Srinivas)

Ans.(c)

Q.15. डॉ. बी.आर. अम्बेडकर का जन्म किस राज्य में हुआ था? (In which state was Dr. B.R. Ambedkar born?)

(a) गुजरात (Gujarat)

(b) उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh)

(c) महाराष्ट्र (Maharashtra)

(d) मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) 

Ans.(d)

Q.16. भारत के किस प्रांत में हिन्दू अल्पसंख्यक हैं? (Hindu minorities are found in which Indian province ?)

(a) हरियाणा (Hariyana)

(b) पंजाब (Punjab)

(c) जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir)

(d) केरल (Kerala)

Ans.(e) 

Q.17. निम्न में से कौन एक संस्था है? (Which of the following is an institution?)

(a) गाँव (Village)

(b) राष्ट्र (Nation)

(c) विवाह (Marriage) 

(d) किसान संघ (Farmer union)

Ans.(c) 

Q.18. बाजार में किसी वस्तु का कीमत निर्धारण का मुख्य आधार है (The main basis of Price fixation of a commodity in the market is

(a) प्रतिस्पर्धा (Competition)

(b) वस्तु की माँग एवं पूर्ति (Demand and supply of goods)

(c) वस्तु की गुणवत्ता (Quality of goods) 

(d) सेवाओं का मूल्य (Value of services)

Ans.(b)

Q.19. भारत में असमानता का आधार है (The base of inequality in India is)-

(a) जाति (Caste)

(c) लिंग (Gender)

(b) समुदाय (Community)

(d) इनमें से सभी (All of these) 

Ans.(d)

Q.20. ‘आकाशवाणी’ का अंग्रेजी में संक्षिप्त रूप है (What is the short form for ‘Akashvani’ in English ?)

(a) एआईआर (AIR)

(b) एनआईआर (NIR)

(c) एआईएम (AIM)

(d) एनआईएम (NIM)

Ans.(a)

Q. 21. जाति के तीन प्रकार्यों को लिखें। (Write three functions of caste.)

Ans. जाति के तीन प्रकार्य निम्नलिखित हैं-

(i) जाति सामाजिक मान्यता प्रदान करती है।

(ii) जाति सामाजिक सुरक्षा प्रदान करता है। 

(iii) जाति आर्थिक समस्या का समाधान करता है।

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Q. 22. नातेदारी की परिभाषा दें। (Give the definition of kinship.) 

Ans. नातेदारी रक्त और विवाह से सम्बन्धित व्यक्तियों के बीच सामाजिक सम्बन्धों और विभिन्न प्रकार के संबंधों की वह व्यवस्था है जो इन सम्बन्धों से जुड़े हुए व्यक्तियों को उनके सामाजिक अधिकारों और कर्तव्यों का बोध कराती है।

Q. 23. नगरीय समुदाय क्या है ? (What is Urban Community?)

Ans. स्वयं करे

Q. 24. औद्योगीकरण के दो कारकों को उजागर करें। (Highlight two factors of Industrialization.)

Ans. औद्योगीकरण के दो प्रमुख कारक निम्नलिखित है- 

(1) संसाधनों की उपलब्धता औद्योगीकरण होने के लिये पर्याप्त मात्रा में संसाधनों का उपलब्य होना आवश्यक है। यह संसाधन विभिन्न प्रकार के हो सकते हैं। जैसे-खनिज पदार्थों में कोयला, लोहा, अबरख, ऐल्युमीनियम, इत्यादि की उपलब्धता जिस क्षेत्र में होती है। यहाँ पर औद्योगीकरण हो सकता है।

(ii) पर्याप्त पूँजी की उपलब्धता औद्योगीकरण होने के लिये पर्याप्त मात्रा मैं पूंजी का उपलब्ध होना आवश्यक है। बिना पूँजी के उद्योगों का बलना असंभव है। जिस क्षेत्र में बिजली की उपलब्धता समुचित रूप में रहती है और कुशल टेक्नीशियन, कारीगर जीर मजदूर उपलब्ध रहते हैं तो उद्योग-धंधों को स्थापित करने और उसे संचालित करने में आसानी होती है। 

Q. 25. धर्म निरपेक्ष राज्य क्या है? (What is secular state?) 

Ans. पर्म निरपेक्ष राज्य एक ऐसा राज्य है जिसमें राज्य का अपना कोई विशेष धर्म नहीं होता है। एक धर्म निरपेक्ष राज्य धर्म निरपेक्ष की एक अवधारणा है, जिसके तहत एक राज्य मा देश धर्म के मामलों में अधिकारिक रूप से तटस्थ होने का समर्थन करता है, न तो पर्म विशेष का समर्थन करता है, और न ही धर्म-विशेष को अप्रासंगिक मानता है। यह कभी भी धर्म के आधार पर लोगों के खिलाफ भेदभाव नहीं करता है। 

सरकार किसी भी व्यक्ति को धर्म के प्रचार या रखरखाव के लिये कोई कर देने के लिये बाय्य नहीं कर सकती है। भारत में विभिन्न धर्मों का पालन किया जाता है। इसलिये भारत धर्म निरपेक्षता का एक आदर्श उदाहरण है।

Q. 26. राज्य के नीति निदेशक तत्वों का विवरण प्रस्तुत करें। (Present an account of directive principles of state policy.)

Ans. सुविधा की दृष्टि से नीति निर्देशक सिद्ध्यन्तों को वर्गीकृत किया गया जो निम्नलिखित है-

(1) आर्थिक सुरक्षा सम्बन्धी निर्देशक तत्व- राज्य का दायित्व है कि अपने सभी नागरिकों को चाहे स्त्री हो या पुरुष के

(2) लिए जीविकोपार्जन के पर्याप्त साधन जुटाने का प्रयत्न करेगा। राज्य, देश के भौतिक संसाधनों के स्वामित्व तथा नियंत्रण की ऐसी व्यवस्था करेगा जिससे सबका कल्याण हो। 

(3) अर्थव्यवस्था का संचालन इस प्रकार होना चाहिए कि सम्पत्ति और उत्पादन के साधनों का इस तरह केन्द्रीकरण न हो जो सार्वजनिक हित के खिलाफ हो। 

(4) राज्य, प्रत्येक नागरिक को चाहे स्त्री हो या पुरुष, समान कार्य के लिए समान वेतन प्रदान करेगा।

(5) राज्य, श्रमिक पुरुषों और स्त्रियों के स्वास्थ्य, भक्ति तथा बालकों के किशोरावस्था का आर्थिक परिस्थितियोंवश दुरूपयोग न होने देगा।

राज्य अपने आर्थिक संसाधनों के अनुसार और विकास की सीमाओं के भीतर यह प्रयास करेगा कि सभी नागरिक अपनी योग्यता अनुसार रोजगार पा सके।

राज्य कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक पद्धति पर विशेष जोर देगा।

राज्य इस बात का प्रयत्न करेगा कि कृषि और उद्योग में लगे हुए सभी मजदूरों को अपने जीवन निर्वाह के लिए यथोचित वेतन मिल सके, उनका जीवन स्तर उठ सके।

(ख) सामाजिक हित सम्बन्धी निर्देशक तत्व-राज्य ग्रम पंचायतों के संगठन की ओर कदम उठायेगा और उन्हें इतने अधिकार प्रदान किये जायेंगे कि वे स्वायत्त शासन इकाइयों के रूप में कार्य कर सकें।

2. प्राचीन स्मारकों, कलात्मक महत्व में स्थानों तथा राष्ट्रीय महत्व के भवनों की रक्षा करेगा।

3. पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी तथा प्रदूषण से मुक्ति भी राज्य दिलायेगा। 

4. राज्य अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बनाये रखने का प्रयास करेगा।

5. राज्यों को आपसी व्यवहार अन्तर्राष्ट्रीय कानून एवं सन्धियों को महत्व देगा। 6. राज्य, अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों के शिक्षा तथा अर्थ संबंधी हितों को ध्यान में रखने के साथ-साथ सामाजिक अन्याय तथा सभी प्रकार के शोषण से सरकार रक्षा करेगी।

(ग) न्याय एवं शिक्षा सम्बन्धी नीति निर्देशक तत्व- 

1. राज्य सभी नागरिकों के लिए समान कानून बनायेगा ओर अपनी सेवाओं में न्यायापालिका को कार्यपालिका से अलग करने का प्रयत्ल करेगा।

2. राज्य अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति और सुरक्षा में वृद्धि करेगा। 

Q. 27. संस्कृतिकरण के कारकों पर प्रकाश डालें। (Throw light on the factors of Sanskritization.)

Ans. संस्कृति ऐसे विचारों और भौतिक उत्पादों का समुच्चय है जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक हस्तांतरित होती है। संस्कृति सामाजिक गतिविधियों का नियमन करती है। परिवर्तन की सांस्कृतिक प्रक्रियायें उन विभिन्न तरीकों को दर्शाती है जिनके द्वारा भारतीय संस्कृति में आरंभ हुए विविध परिवर्तनों को प्रभावित करती है। 

संस्कृतिकरण भारत में सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तन की व्याख्या करने की सबसे अधिक प्रभावशाली अवधारणा है जिसके संदर्भ में संस्कृतिकरण के विभिन्न कारक या तत्वों की जानकारी प्राप्त होती है। भारत की सांस्कृतिक संरचना में. परिवर्तन आन्तरिक और बाहरी दोनों प्रकार के स्रोतों से उत्पन्न हुए हैं जो संस्कृतिकरण के विभिन्न कारकों को स्पष्ट करते हैं। 

भारत में सांस्कृतिक प्रक्रियाओं की व्याख्या करने की विभिन्न कारक हैं जो संस्कृतिकरण, इस्लामीकरण, पश्चिमीकरण और धर्मनिरपेक्षीकरण के माध्यम द्वारा स्पष्ट की जा सकती है। 

संस्कृतिकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें निम्न हिन्दू जाति अपनी परंपरा, रीति-रिवाज, सिद्धांत और जीवन-शैली को उच्च और नीच, जाति के नियमों में परिवर्तित कर देती है। संस्कृतिकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जो विभिन्न जातियों की प्रतिष्ठा में परिवर्तन लाती है। 

Q. 28. दलित आन्दोलन क्या है ? (What is Dalit movement?

Ans. दलित आंदोलन का संबंध अनुसूचित जातियों से है जिसका नेतृत्व ज्योतिबा फूले, तुकाराम, बाबा साहब अम्बेडकर और ई.वी. रामास्वामी पेरियर जैसे नेताओं ने किया। भक्ति आंदोलन ने अस्पृश्यता उन्मूलन में विशेष भूमिका निभाई। दयानंद सरस्वती ने हिन्दू समाज को लोकतांत्रिक आधार प्रदान किया स्वामी विवेकानन्द ने करुणा तथा भाईचारे का पैगाम दिया तथा दलितों में आत्म-विश्वास और आत्म-सम्मान की भावना जगाई। महाराष्ट्र में ज्योतिबा फूले ने साथ शोधक समाज की स्थापना की। हिन्दू समाज की दमनकारी नीतियों एवं ताकतों के खिलाफ संघर्ष किया।

बी.आर. अम्बेडकर ने दलित आंदोलन को अपने विचारों द्वारा आगे चढ़ाया। अम्बेडकर भारतीय संविधान के निर्माता भी थे। अतः दलितों के अधिकार एवं संरक्षण से संबंधित मुद्दों को संवैधानिक प्रावधानों के तहत संस्थागत रूप दिया। महाराष्ट्र में दलितों द्वारा दलित पँथर आंदोलन की शुरुआत हुई जिससे बौद्धिक जगत में एक नयी चेवना विकसित हुई।

Q. 29. चिपको आन्दोलन पर प्रकाश डालें। (Throw light on Chipko movement?) 

Ans. चिपको आंदोलन पर्यावरण सुरक्षा से संबंधित आंदोलन है। इसका नेतृत्व सुन्दरलाल बहुगुणा ने किया। इस आंदोलन के समर्थक पेड़ काटने से लोगों को मना करते थे। नहीं मानने पर वे पेड़ से चिपक जाते थे ताकि पेड़ काटा नहीं जा सके। इसी कारण इस आंदोलन को चिपको आंदोलन कहा जाता है। 

Q. 30. सामाजिक परिवर्तन में दूरसंचार की भूमिका को स्पष्ट करें। (Discuss the role of tele-communication on social change.) 

Ans. स्वयं करे

Q. 31. ग्रामीण एवं नगरीय वर्ग संरचना में परिवर्तन को स्पष्ट करें। (Discuss the changes in rural and urban class structure.)

Ans. ग्रामीण क्षेत्रों में रहनेवाले लोगों की वर्ग संरचना ग्रामीण परिवेश से संबंधित रहता है जबकि नगरीय वर्ग संरचना नगर के क्षेत्रों से संबंधित रहता है। वर्तमान समय में गाँव के क्षेत्रों में रहनेवाले लोग शहरों में रोजी-रोटी कमाने के लिये और अपने जीवन-स्तर और जीवन-शैली में सुधार करने के लिये नगरीय क्षेत्रों में बसते हैं। ऐसा होने से ग्रामीण और नगरीय समुदाय और वर्ग संरचना में परिवर्तन होने लगता है। 

नगरीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें लोग गाँव में रहने के बजाय कस्बों और शहरों में रहना शुरू कर देते हैं। वे ऐसे तरीकों का प्रयोग करते हैं कि कृषि आधारित निवास क्षेत्र गैर-कृषि शहरी निवास क्षेत्र में परिवर्तित के हो जाता है। शहरी केन्द्रों का विकास बढ़ी हुई औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों का परिणाम है। 

कस्बों और नगरों की जनसंख्या में तेजी से वृद्धि हो 

रता है और ये गैर-कृषि परिवारों की संख्या में वृद्धि के कारण हैं। दूसरी और ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामीण जीवन-शैली, खेती-बाड़ी तथा ग्रामीण परिवेश और संस्कार, रीति-रिवाज से संबंधित होते हैं। जब गाँव के लोग शहर आने लगते हैं तो वर्ग संरचना में परिवर्तन होता है।

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Q. 32. परियोजना के स्तरों को विश्लेषित करें। (Analyse the stages of project work.) 

Ans. परियोजना कार्य के चरण निम्नलिखित है- 

(1) समस्या का चुनाव । (ii) प्रोजेक्ट बनाने वाले की रुचि का विषय चुनना । (iii) विषय का साधन सीमा के अंतर्गत होना। (iv) समस्या में निश्चित होना। (v) अध्ययन क्षेत्र का निर्धारण। की उपयोगिता के के बारे

(vi) सूचनाओं का चुनाव।

(vii) अध्ययन की विधियों एवं प्रविधियों का निर्धारण । (viii) तथ्यों का संकलन। 

Q. 33. शिक्षा के प्रति समर्पण education?) क्या है ? 

Ans. पढ़ना-लिखना और जीवन में अनुशासन के तरीके पर काम करना ही शिक्षा कहलाता है। शिक्षित व्यक्ति अनुशासित होता है। उसमें अच्छे और बुरे की पहचान होती है। शिक्षा से ही मनुष्य अपने जीवन में अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। इन सभी बातों को ध्यान में रखकर दिल में भाव रखना ही शिक्षा के प्रति समर्पण कहलाता है। 

जब मनुष्य पूरी तरह अपने आपको शिक्षा के प्रति आकर्षित होता है और अपने जीवन के अस्तित्व को समर्पित कर देता है तो ऐसा मनुष्य अपने जीवन के उद्देश्य को प्राप्त करने में सफल होता है। 

अपने परिवार के साथ-साथ पास-पड़ोस तथा समाज के लोगों में शिक्षित मनुष्य को आदर की निगाह से देखा जाता है। जब मनुष्य शिक्षा के प्रति पूरी तरह समर्पित रहता है तो ऐसा मनुष्य शिक्षक, डॉक्टर, अभियंता, वकील और जज तथा प्रशासनिक अधिकारी के साथ-साथ एक अच्छा राजनेता बनता है।

Q. 34. पितृसत्ता क्या है ? इसकी प्रमुख विशेषताओं को स्पष्ट करें। (What is Patriarchy? Discuss its main features.) 

Ans. पितृसत्ता वह व्यवस्था है जिसमें परंपरा और व्यवहार के नियमों द्वारा स्त्रियों की तुलना में पुरुषों की शक्ति और सत्ता को अधिक महत्व दिया जाता है। विशेषताएँ- 

(i) पितृसत्ता में पुरुषों का प्रभुत्व होता है। 

(ii) इसमें पुरुष पहचान से संबंधित होते हैं जिनमें नियंत्रण, शक्ति, बल, तर्क संगतता, मजबूत कार्य नैतिकता और प्रतिस्पर्धात्मक के गुण शामिल होते हैं। 

(iii) पितृसत्तात्मक व्यवस्था में, गतिविधि और प्रगति का केन्द्र पुरुषों पर होता है और वे समाज को आगे बढ़ाने के केन्द्र होते हैं। 

(iv) इसमें पुरुषों पर पारिवारिक स्थितियों को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी रहती है। 

Q. 35. जातिविहीन राजनीति क्या है? (What is casteless politics?)

Ans. जो राजनीति किसी विशेष जाति से प्रेरित नहीं रहती है उसे जांतिविहीन राजनीति कहा जाता है। इस तरह की राजनीति जाति पर आधारित नहीं होती है बल्कि स्वच्छ नीति और नियम पर आधारित रहती इस तरह की राजनीति से समाज और देश में लोगों के बीच एक अच्छा माहोल बनता है। साथ ही किसी भी जाति के लोगों को हानि नहीं होती है। लेकिन भारत में जातिप्रथा अधिक व्याप्त है। इसीलिए आज जातिविहीन राजनीति की कल्पना करना कोरा आडंबर है।

Q. 36. वर्ग क्या है ? इसकी विशेषताओं की विवेचना करें। 

Ans. वर्ग वैसे व्यक्तियों का समूह है जिनकी समान सामाजिक प्रस्थिति होती हैं। प्रत्येक समाज में अनेक परिस्थितियाँ पायी जाती है। फलस्वरूप उनके अनुसार अनेक वर्ग भी पाये जाते हैं। जब जन्म के अतिरिक्त अन्य किसी आधार पर समाज को विभिन्न समूहों में विभाजित किया जाता है तो प्रत्येक समूहों को वर्ग कहा जाता है।

वर्ग की विशेषताएँ: वर्ग की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं- 

1. स्थिति समूहों, का उतार-चढ़ाव (Hierachy of Status Group) – प्रत्येक समाज में विभिन्न प्रकार के समूह होते हैं जिनकी समान हैसियत नहीं होती है। कुछ समूह उच्चतम सामाजिक स्थिति के होते हैं तो कुछ निम्नतम सामाजिक स्थिति के और कुछ मध्य सामाजिक स्थिति के अर्थात् इन समूहों में उतार-चढ़ाव

का क्रम बना रहता है।

2. ऊँच-नीच की भावना (Feeling of Superiority and Inferiority) समाज में विभिन्न सामाजिक स्थिति के वर्ग पाये जाते हैं। इन वर्गों के सदस्यों में सामाजिक स्थिति के अनुसार ऊँच-नीच की भावना पायी जाती है। एक वर्ग के सदस्य दूसरे वर्ग के सदस्य को अपने से या तो श्रेष्ठ मानते हैं या निम्न मानते हैं।

3. वर्ग चेतना (Class Consciousness)- प्रत्येक वर्ग में वर्ग घेतना पायी जाती है। वर्ग चेतना ही उसके संगठन का आधार है। वर्ग चेतना ही सदस्यों के व्यवहारों को निश्चित करती है। वर्ग चेतना के कारण ही वर्ग संघर्ष होता है।

4. सीमित सामाजिक सम्बन्ध (Restricted Social Relation)-दो वर्गों के बीच सामाजिक दूरी बनी रहती है क्योंकि दोनों समान स्तर के नीचे होते हैं। उच्च सामाजिक स्थिति (वर्ग) के लोग निम्न वर्ग के लोगों से कम-से-कम सम्पर्क रखते हैं।

5. खुली व्यवस्था (Open System)-वर्ग एक खुली व्यवस्था है। वर्ग की सदस्यता कर्म पर आधारित है। अतः अपने अच्छे कमों, मेहनत, ईमानदारी, कार्यकुशलता आदि के कारण निम्न वर्ग के लोग उच्च वर्ग में चले जाते हैं। इस तरह वर्ग एक खुली व्यवस्था है।

6. जन्म पर आधारित नहीं (Not Based on Birth) -वर्ग का आधार ‘जन्म’ नहीं है। एक वर्ग की सदस्यता इस बात पर निर्भर नहीं करती है कि व्यक्ति का जन्म किस जाति अथवा परिवार में हुआ है। एक व्यक्ति ऊँची जाति

या अच्छे परिवार में जन्म लेने के बाद भी योग्य एवं कुशल नहीं है तो यह निम्न वर्ग में चला जाता है। 7. उपवर्ग (Sub-Class)- प्रत्येक वर्ग में कुछ उपवर्ग होते हैं। जैसे उच्चवर्ग के तीन उपवर्ग हैं-उच्च-उच्च वर्ग उच्च-मध्यम वर्ग तथा उच्च-निम्न वर्ग।

8. जीवन अवसर (Life Opportunity)-प्रत्येक वर्ग के लोगों के जीवन स्तर में समानता पायी जाती है। एक वर्ग विशेष की जीवन शैली दूसरे वर्ग की जीवन शैली से भिन्न होती है। परन्तु एक वर्ग के लोगों की जीवन शैली तथा सुख सुविधाओं का स्तर एक समान होता है। 

9. वर्ग की परिस्थिति (Class situation) – प्रत्येक वर्ग की एक परिस्थिति होती है जिसका आधार आर्थिक होता है। 

Q.37. भारत में जनसंख्या वृद्धि के कारणों पर प्रकाश डालें। 

Ans. स्वयं करे

Q.38. साम्प्रदायिकता को दूर करने के सुझाव दें। (Give suggestions for removal of communalism.)

Ans. साम्प्रदायिकता को दूर करने के सुझाव साम्प्रदायिकता को दूर करने के लिए निम्नलिखित उपाय किये जा सकते हैं-

1. साम्प्रदायिक दलों का उन्मूलन-धार्मिक निष्ठा पर जोर देने वाले सभी राजनीतिक दलों को सरकार द्वारा प्रतिबंधित या समाप्त कर दिया जाना चाहिए। 

2. राष्ट्रवाद को बढ़ावा देना-राष्ट्रवाद की भावनाओं को लोगों के मन में भरा जाना चाहिए ताकि लोगों में राष्ट्र के प्रति समर्पण भाव जाग सके।

3. अंतः धार्मिक विवाह विभिन्न समुदायों के लोगों को एक-दूसरे के करीब आने और एक-दूसरे को जानने का अवसर देने के लिये युवाओं को प्रोत्साहित करना चाहिए जिससे विभिन्न धार्मिक समूहों के सदस्यों के बीच सामाजिक दूरी कम हो जायेगी। सरकार को भी अंतःधार्मिक विवाह के लिये लोगों को उत्साहित करे और जो लोग अंतःधार्मिक विवाह करते हैं उनको पुरस्कार दे और उन्हें सामाजिक एवं आर्थिक प्रोत्साहन दे।

4. लोगों को जागरूक करना अन्य समुदायों के प्रति लोगों के रवैये को बदलने के लिए जनमाध्यमों के माध्यम से प्रयास किये जाने चाहिए। लोगों को इसके सकारात्मक पहलुओं को बताया जाना चाहिए और आपसी संबंध एवं सौहार्द को बरकरार रखने की कोशिश करनी चाहिए।

Q39. ‘स्वतंत्र भारत में महिला आन्दोलन’ पर एक निबन्ध लिखें। (Write an essay on ‘Women movement in independent India’?) 

Ans. महिलाओं का आंदोलन-20वीं सदी के प्रारंभ में राष्ट्रीय तथा स्थानीय स्तर पर महिलाओं के संगठनों में वृद्धि देखी गयी। 

विर्नेस इंडिया एसोसिएशन भारतीय महिला एसोसिएशन (भारतीय महिला एसोसिएशन; डब्ल्यू. आई.ए. 1971), ऑल-इंडिया विमेंस कॉन्फ्रेंस (अखिल भारतीय महिला कॉफ्रेंस; ए.आई.डब्ल्यू.सी. 1926), नेशनल काउंसिल फॉर विमेन इन इंडिया (भारत में महिलाओं की राष्ट्रीय काउंसिल, एन.सी.डब्ल्यू.आई.) ऐसे नाम है जिन्हें सभी मानते हैं जबकि इनमें से कई की शुरुआत सीमित कार्यक्षेत्र से हुई है। इनका कार्यक्षेत्र समय के साथ विस्तृत हुआ। 

उदाहरण के लिए प्रारंभ में ए.आई.डब्ल्यू. सी. का मत था कि ‘महिला कल्याण’ तथा ‘राजनीति’ आपस में असंबद्ध है। कुछ वर्ष बाद उसके अध्यक्षीय भाषण में कहा गया, “क्या भारतीय पुरुष अथवा स्त्री स्वतंत्र हो सकते हैं यदि भारत गुलाम रहे? हम अपनी राष्ट्रीय स्वतंत्रता जो कि महान सुधारों का आधार है, के बारे में चुप कैसे रह सकते हैं ?”

यह तर्क दिया जा सकता है कि संक्रियता का यह काल सामाजिक आंदोलन नहीं था। इसका विरोध भी किया जा सकता था।

प्रायः यह माना जाता है कि केवल मध्यमवर्गीय शिक्षित महिलाएँ ही सामाजिक आंदोलन में सहभागिता करती हैं। संघर्ष का एक भाग महिलाओं की सहभागिता के विस्तृत इतिहास को याद करना रहा है। 

औपनिवेशिक काल में जनजातीय तथा ग्रामीण क्षेत्रों में प्रारंभ होने वाले संघर्षों तथा क्रांतियों में महिलाओं ने पुरुषों के साथ भाग लिया। बंगाल में तेभागा आंदोलन, निजाम के पूर्वशासन का तेलंगाना सशस्त्र संघर्ष तथा महाराष्ट्र में वरली जनजाति के बंधुओं दासत्व के विरुद्ध क्रांति आदि ये कुछ उदाहरण हैं।

एक मुद्दा जो हमेशा उठाया जाता है कि यदि सन् 1947 से पहले महिला आंदोलन एक सक्रिय आंदोलन था, तो बाद में उसका क्या हुआ? 

इसकी एक व्याख्या यह दी जाती है कि राष्ट्रीय आंदोलन में भाग लेने वाली बहुत-सी महिला प्रतिभागी प्रतिभागी राष्ट्र निर्माण के कार्य में संलग्न हो गई। दूसरे लोग विभाजन के आघात को इस ठहराव का उत्तरदायी मानते हैं।

सन् 1970 के दशक के मध्य में भारत में महिला आंदोलन का नवीनीकरण हुआ। कुछ लोग इसे भारतीय महिला आंदोलन का दूसरा दौर कहते हैं जबकि अनेक चिंताएँ उसी प्रकार बनी रहीं, फिर भी संगठनात्मक रणनीति तथा विचारधाराओं दोनों में परिवर्तन हुआ है। 

स्वायत्त महिला आंदोलन कहे जाने वाले आंदोलनों में वृद्धि हुई। ‘स्वायत्त’ शब्द इस तथ्य की ओर संकेत था कि उन महिला संगठनों से जिनके राजनीतिक दलों से संबंध थे, से भिन्न यह ‘स्वायत्तशासी’ अथवा राजनीतिक दलों से स्वतंत्र थी। यह अनुभव किया गया है कि राजनीतिक दल महिलाओं के मुद्दों को अलग-अलग रखने की प्रवृत्ति रखते हैं।

संगठनात्मक परिवर्तन के अलावा कुछ नए मुद्दे भी थे जिन पर दिया गया। उदाहरण के लिए महिलाओं के प्रति हिंसा के बारे में वर्षों से अनेक अभियान चलाए गये हैं। आपने देखा होगा कि स्कूल के प्रार्थना-पत्र में पिता तथा माता दोनों के नाम होते हैं। 

यह सदैव सत्य नहीं था। इसी प्रकार महिलाओं के आंदोलनों के कारण महत्वपूर्ण कानूनी परिवर्तन आए हैं। भू-स्वामित्व व रोजगार के मुद्दों की लड़ाई यौन उत्पीड़न तथा दहेज के विरुद्ध अधिकारों की माँग के साथ लड़ी गयी हैं।

Q. 40. निम्नलिखित अनुच्छेद को पढ़ें एवं दिये गये प्रश्नों के उत्तर दें (Read the following passage and answer the following question)

Ans: ‘रामायण’ धारावाहिक के दर्शकों के बारे में अध्ययन करने से दर्शक वर्ग के सदस्यों एवं उनके प्रिय पात्रों के बीच उच्च कोटि का अन्तःक्रिया का पता चलता है। कई अन्य व्यक्तियों ने बताया कि दूरदर्शन के माध्यम से अपने प्रिय पात्रों से बातचीत करते थे। इस सीरियल को देखनेवालों की संख्या उत्तर भारत में 65 से 90 प्रतिशत और दक्षिण भारत में 30 से 40 प्रतिशत तक थी। 5 करोड़ दर्शक ‘रामायण’ का प्रसारण देखते थे। 

प्रश्न (Question) : Q. आपके विचार में दर्शकों को इस सीरियल में इतनी रुचि क्यों होती थी?

Ans. हमारे विचार से दर्शकों को रामायण नामक सीरियल में इतनी रुचि इसलिये होती थी क्योंकि उस सीरियल के सभी पात्रों के बीच उच्च कोटि के अंतःक्रिया का पता चलता है। इसका अर्थ यह है कि सभी पात्र जो अभिनय करते हैं उन पात्रों के बांच अंतःक्रिया चलती रहती है। 

रामायण ग्रंथ में राम, लक्ष्मण, सीता हरण तथा रावण और लंका दहन की घटनाओं का वर्णन काव्यात्मक रूप में कवि ने किया है। इसे देखकर दर्शकों को बहुत रुचि होती थी। साथ ही – रामायण धारावाहिक हिन्दू धर्म के ग्रन्थ रामायण की सारी घटनाओं और इस ग्रंथ की कथा की परिणति किस प्रकार हुई है इसका भी ज्ञान होता है।


NOTES & QUESTIONS ANSWER SOCIOLOGY


  1. Introducing Indian Society
  2. The Demographic Structure of the Indian Society
  3. Social Institutions: Continuity and Change
  4. The Market as a Social Institution
  5. Patterns of Social Inequality and Exclusion
  6. The Challenges of Cultural Diversity
  7. suggestions for projects work
  1. Structural Change
  2. Cultural Change
  3. The Story of Indian Democracy
  4. Change and Development in Rural Society
  5. Change and Development in Industrial Society
  6. Globalisation and Social Change
  7. Mass Media and Communications
  8. Social Movements

MCQS IN ENGLISH


  1. Introducing Indian Society
  2. The Demographic Structure of the Indian Society
  3. Social Institutions: Continuity and Change
  4. The Market as a Social Institution
  5. Patterns of Social Inequality and Exclusion
  6. The Challenges of Cultural Diversity
  1. Structural Change
  2. Cultural Change
  3. The Story of Indian Democracy
  4. Change and Development in Rural Society
  5. Change and Development in Industrial Society
  6. Globalisation and Social Change
  7. Mass Media and Communications
  8. Social Movements

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कक्षा 12 समाजशास्त्र एनसीईआरटी नोट्स


  1. भारतीय समाज का परिचय
  2. भारतीय समाज की जनसांख्यिकीय संरचना
  3. सामाजिक संस्थाएँ: निरंतरता और परिवर्तन
  4. एक सामाजिक संस्था के रूप में बाजार
  5. सामाजिक विषमता एवं बहिष्कार के स्वरूप
  6. सांस्कृतिक विविधता की चुनौतियाँ
  7. परियोजना कार्य के लिए सुझाव
  1. भारत में सामाजिक परिवर्तन एवं विकास
  2. सांस्कृतिक परिवर्तन
  3. भारतीय लोकतंत्र की कहानी
  4. ग्रामीण समाज में परिवर्तन और विकास
  5. औद्योगिक समाज में परिवर्तन और विकास
  6. भूमण्डलीकरण और सामाजिक परिवर्तन 
  7. जनसंपर्क साधन और जनसंचार
  8. सामाजिक आंदोलन

वस्तुनिष्ठ प्रश्न MCQs


  1. भारतीय समाज का परिचय
  2. भारतीय समाज की जनसांख्यिकीय संरचना
  3. सामाजिक संस्थाएँ: निरंतरता और परिवर्तन
  4. एक सामाजिक संस्था के रूप में बाजार
  5. सामाजिक विषमता एवं बहिष्कार के स्वरूप
  6. सांस्कृतिक विविधता की चुनौतियाँ
  1. भारत में सामाजिक परिवर्तन एवं विकास
  2. सांस्कृतिक परिवर्तन
  3. भारतीय लोकतंत्र की कहानी
  4. ग्रामीण समाज में परिवर्तन और विकास
  5. औद्योगिक समाज में परिवर्तन और विकास
  6. भूमण्डलीकरण और सामाजिक परिवर्तन 
  7. जनसंपर्क साधन और जनसंचार
  8. सामाजिक आंदोलन

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