Class 12th geography chapter 1 notes In Hindi | मानव भूगोल : प्रकृति एवं विषय-क्षेत्र कक्षा 12 भूगोल अध्याय 1 प्रश्न उत्तर pdf

WhatsApp Group (Join Now) Join Now
Telegram Group (Join Now) Join Now

क्या आप Class 12th geography chapter 1 notes In Hindi में प्रश्न उत्तर की तलाश कर रहे हैं तो यह वेबसाइट आपके लिए हैं |

तो छात्रों, इस लेख को पढ़ने के बाद, आपको इस अध्याय से परीक्षा में बहुत अधिक अंक प्राप्त होंगे, क्योंकि इसमें सभी परीक्षाओं से संबंधित प्रश्नों का वर्णन किया गया है, इसलिए इसे पूरा अवश्य पढ़ें।

मैं खुद 12वीं का टॉपर रहा हूं और मुझे पता है कि 12वीं की परीक्षा में किस तरह के प्रश्न पूछे जाते हैं। वर्तमान में, मैं एक शिक्षक की भूमिका भी निभा रहा हूँ, और अपने छात्रों को कक्षा 12वीं की महत्वपूर्ण जानकारी और विषयों का अभ्यास भी कराता हूँ। मैंने यह लेख 5 वर्षों से अधिक के अपने अनुभव के साथ लिखा है। इस पोस्ट की मदद से आप परीक्षा में इस अध्याय से भूगोल में बहुत अच्छे अंक प्राप्त कर सकेंगे।

Class 12th geography chapter 1 notes In Hindi | मानव भूगोल : प्रकृति एवं विषय-क्षेत्र कक्षा 12 पाठ 1 के प्रश्न उत्तर

कक्षा | Class12th 
अध्याय | Chapter01
अध्याय का नाम | Chapter Nameमानव भूगोल : प्रकृति एवं विषय-क्षेत्र
बोर्ड | Boardसभी हिंदी बोर्ड
किताब | Book एनसीईआरटी | NCERT
विषय | Subjectभूगोल | Geography
मध्यम | Medium हिंदी | HINDI
अध्ययन सामग्री | Study Materialsप्रश्न उत्तर | Question answer

पाठ के मुख्य बिंदु | Main Point of This chapter

★ मानव – मानव वातावरण का क्रियाशील कार्यकर्ता है।

★ भूगोल- पृथ्वी का मानव गृह के रूप में अध्ययन ।

Class 12th geography chapter 1 notes In Hindi | मानव भूगोल : प्रकृति एवं विषय-क्षेत्र कक्षा 12 पाठ 1 के प्रश्न उत्तर
Ncert

★ सामान्य भूगोल—अध्ययन, जिसमें संपूर्ण पृथ्वी को एक इकाई मानकर इसके विवेचन किया गया है।

★ मानव भूगोल- अध्ययन, जिसमें मानव और प्रकृति के बीच सतत व परिवर्तनशील पारस्परिक क्रिया से उत्पन्न सांस्कृतिक लक्षणों की स्थिति एवं वितरण की विशेषताओं को जाना जाता है।

★ मानव पारिस्थितिकी – मानव भूगोल मुख्यतः मानव पारिस्थितिकी है।

★ मानव भूगोल की प्रकृति — मानव भूगोल की प्रकृति का उद्देश्य मानव जीवन की विभिन्नताओं को समझना है। 

★ मानव भूगोल का अध्ययन क्षेत्र- (i) सांस्कृतिक भूदृश्य का अध्ययन, (ii) संसाधन उपयोग, (iii) वातावरण समायोजन । 

★ खोज युग-लगभग पन्द्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध से लेकर अठारहवीं शताब्दी तक की अवधि, जिमसें मानचित्र निर्माण की विधियों का गुणात्मक विकास हुआ।

★ विशिष्ट भूगोल — अध्ययन, जिसमें अलग-अलग प्रदेशों की संरचना के विषय पर बल दिया गया। 

★ भूआकृतिक विज्ञान –अध्ययन, जिसमें उच्चावच के लक्षणों का अनेक प्रकार से मापन तथा परीक्षण किया गया। 

★ पर्यावरण—वे प्राकृतिक परिस्थितियाँ जिनमें मनुष्य रहता है तथा जिनसे वह प्रभावित होता है।

★ प्रादेशिक भूगोल- यह किसी प्रदेश का विभिन्न स्तरों पर सभी भौगोलिक पक्षों से किया गया अध्ययन है।

★ प्रणालीबद्ध भूगोल- किसी विशेष भौगोलिक कारक को लेकर संपूर्ण संसार अथवा किसी क्षेत्र के बारे में अध्ययन । 

★ नियतिवाद विचारधारा वह विचारधारा जिसके अनुसार मनुष्य के सभी कार्य पर्यावरण द्वारा निर्धारित होते हैं।

★ संभावनावाद विचारधारा वह विचारधारा जिसके अनुसार मनुष्य अपने पर्यावरण में परिवर्तन करने में समर्थ है तथा वह प्रकृतिप्रदत्त अनेक संभावनाओं का इच्छानुसार उपयोग कर सकता है।

★ प्रत्यक्षवाद—वह विचारधारा जिसने मात्रात्मक विधियों के उपयोग पर बल दिया ताकि विभिन्न कारकों के भौगोलिक प्रतिरूपों के अध्ययन के समय विश्लेषण को अधिक वस्तुनिष्ठ बनाया जा सके।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न | VERY SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS

Q.1. भूआकृति विज्ञान का विकास किन कारणों से हुआ ? 

Ans. 19वीं शताब्दी में भूगोल का कार्य क्षेत्र बहुत सीमित था। यह अध्ययन केवल भारतीय लक्षण तक सीमित था। इनका वर्णन करना आसान था। इसलिए एक अलग शाखा का Physiography नाम से विकास हुआ। कालान्तर में यह शाखा भू-आकृति विज्ञान के रूप धारण कर गई।

Q. 2. मानव भूगोल की परिभाषा बताइए । 

Ans. मानव भूगोल वह विज्ञान है जिसमें हम मनुष्य तथा वातावरण के पारस्परिक संबंधों का क्षेत्रीय आधार पर अध्ययन करते हैं।

Q.3. अमेरिकी भूगोलवेत्ता फिंच एवं द्विवार्था ने मानव भूगोल की विषय वस्तु को किन दो भागों में बाँटा है ?

Ans. 1. भौतिक या प्राकृतिक पर्यावरण 2. सांस्कृतिक या मानव निर्मित पर्यावरण। 

Q.4. नवनियतिवाद से क्या अभिप्राय है ?

Ans. प्रकृति ने मानव के विकास के भरपूर अवसर प्रदान किए हैं। परन्तु मानव इनका एक सीमा तक प्रयोग कर सकता है। इसलिए संभावनावाद की कई विद्वानों ने आलोचना की है। ग्रिफथ टेलर ने इस आलोचना द्वारा नव नियतिवाद की विचारधारा प्रस्तुत की। उसके अनुसार एक भूगोलवेत्ता का कार्य एक परामर्शदाता का है न कि प्रकृति की आलोचना करने का। मनुष्य न तो प्रकृति का दास है और न ही उसका स्वामी। मानव पृथ्वी पर रहता है और उस पर निर्भर करता है

Q.5. मानव भूगोल के अध्ययन में स्वीकृत तीन नई विचारधाराओं का उल्लेख करों ।

Ans. मानव भूगोल के स्वीकृत तीन नए सिद्धान्त है–

1. नियतिवाद, 2. सम्भावनावाद, 3. मानवतावाद ।

Q. 6. मानवतावाद विचारधारा क्या है ?

Ans. इस विचारधारा में मानव जागृति, मानव साधन, मानव चेतना और मानव की सृजनात्मक के संदर्भ में मनुष्य की केन्द्रीय एवं क्रियाशील भूमिका पर बल दिया जाता है। यह विचारधारा मनुष्य पर केन्द्रित है।

Q.7. ‘खोज – युग’ से क्या अभिप्राय है? इसे खोज युग क्यों कहा गया ? 

Ans. लगभग पन्द्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध से लेकर अठारहवीं शताब्दी तक की अवधि को खोज युग कहा जाता है। इस समय विशेष में मानचित्र निर्माण की विधियों का गुणात्मक विकास हुआ। इसके अतिरिक्त विश्व के विभिन्न भागों में खोज यात्राओं के द्वारा विस्तृत सूचनाएँ भी एकत्रित की गईं। भूगोलविदों द्वारा इन सूचनाओं की वैज्ञानिक तरीके से जाँच की गई तथा उन्हें वर्गीकृत और व्यवस्थित किया गया। 

Q.8. भूगोल की दो मुख्य शाखाएँ कौन-कौन सी हैं ?

Ans. क्रमबद्ध भूगोल तथा प्रादेशिक भूगोल । 

Q.9. मानव भूगोल से क्या अभिप्राय है ? यह भूगोल की कौन-सी शाखा से संबंधित है ?

Ans. मानव भूगोल वह अध्ययन है जिसमें मानव और प्रकृति के बीच सतत् परिवर्तनशील पारस्परिक क्रिया से उत्पन्न सांस्कृतिक लक्षणों की स्थिति एवं वितरण की विशेषताओं का अध्ययन किया जाता है। मानव भूगोल क्रमबद्ध भूगोल की एक शाखा है।

Q.10. आधुनिक मानव भूगोल का जनक किसे कहा जाता है ? 

Ans. फ्रेडरिक रेटजेल को आधुनिक मानव भूगोल का जनक कहा जाता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न | SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS

Q. 1. प्रसिद्ध भूगोलवेत्ता जीन बूंश के मानव भूगोल की प्रकृति एवं क्षेत्र के विषय में क्या विचार थे ? संक्षेप में उत्तर दीजिए ।

Ans. प्रसिद्ध भूगोलवेत्ता जीन बूंश के अनुसार, “जिस प्रकार अर्थशास्त्र का संबंध कीमतों से, भूगर्भशास्त्र का संबंध शैलों से, वनस्पति विज्ञान का संबंध पौधों से, मानवाचार विज्ञान का संबंध जातियों से तथा इतिहास का संबंध समय से है, उसी प्रकार भूगोल का केन्द्रबिन्दु ‘स्थान’ है जिसमें ‘कहाँ और क्यों’ जैसे महत्त्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर देने का प्रयास किया जाता है।” भूगोल की प्रमुख शाखा के रूप में मानव तथा पर्यावरण के पारस्परिक संबंधों का अध्ययन मानव भूगोल के अध्ययन का केन्द्र बिन्दु है, अर्थात मानव भूगोल में पर्यावरण से संबंधित 5 समाज के अध्ययन पर विशेष बल दिया जाता है।

वास्तव में, मानव भूगोल का कार्यक्षेत्र बहुत ही विस्तृत है। उसके अंतर्गत मानव प्रजातियों, विश्व के विभिन्न भागों में जनसंख्या का वितरण, घनत्त्व, विकास, वृद्धि जनसांख्यिकीय के लक्षण, जन-स्थानान्तरण आदि के संबंध में ज्ञान प्राप्त किया जाता है। इसके साथ ही मानव समूहों की आर्थिक क्रियाओं का अध्ययन किया जाता है। इसमें उद्योग-धन्धे, परिवहन एवं संचार व्यवस्था तथा व्यापार आदि आर्थिक क्रियाओं का विकास तथा उसके क्षेत्रीय वितरण का भी अध्ययन किया जाता है।

Q.2. मानव भूगोल की विषय-वस्तु सभी सामाजिक विज्ञानों का एकीकरण करती है। इस विषय पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखों। 

Ans. मानव भूगोल की विषय-वस्तु सभी सामाजिक विज्ञानों का एकीकरण करती है, क्योंकि यह उन विज्ञानों का क्षेत्रीय एवं क्रमबद्धता का दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है, जिनका उनमें अभाव होता है। इसके साथ ही मानव भूगोल अपनी विषय सामग्री के विश्लेषण के लिए अन्य सामाजिक विज्ञानों से संबंध स्थापित करता है। इस प्रक्रिया में मानव भूगोल अन्य सामाजिक विज्ञानों से सहायता प्राप्त करता है और उन्हें सहायता प्रदान भी करता है।

उदाहरणतया, वह जनसंख्या के अध्ययन के लिए जनसांख्यिकी, आर्थिक भूगोल के लिए अर्थशास्त्र, कृषि विज्ञान, नगरीय भूगोल के लिए नगरीय समाज विज्ञान, राजनीति भूगोल के लिए राजनीति विज्ञान, सामाजिक भूगोल के लिए समाजशास्त्र तथा इतिहास पर निर्भर रहता है। बदले में मानव भूगोल इन विज्ञानों को क्षेत्रीय एवं क्रमबद्धता के दृष्टिकोण से अवगत कराता है।

Q.3. मानव भूगोल के उपक्षेत्र आर्थिक भूगोल के विषय में संक्षिप्त टिप्पणी कीजिए। 

Ans. आर्थिक भूगोल, मानव भूगोल की महत्त्वपूर्ण शाखा है। इसमें मनुष्य की आर्थिक क्रियाओं के वितरण और प्राकृतिक परिस्थितियों के साथ उनके संबंधों का अध्ययन किया जाता है। डॉ. एन. जी. पाउण्डस के अनुसार, “आर्थिक भूगोल भू-पृष्ठ पर मानव की उत्पादन क्रियाओं के वितरण का अध्ययन करता है।” मनुष्य की आर्थिक क्रियाओं में उत्पादन, वितरण, उपभोग तथा विनिमय आदि क्रियाएँ सम्मिलित हैं। 

Q4. मानव भूगोल के अध्ययन क्षेत्र के पाँच अंग कौन से हैं?

Ans- मानव भूगोल के अध्ययन क्षेत्र के पाँच अंग निम्न हैं- (i) किसी प्रदेश की जनसंख्या तथा उसकी क्षमता ।

(ii) उस प्रदेश के प्राकृतिक वातावरण द्वारा प्रदान किये गये संसाधन ।

(iii) उस जनसंख्या द्वारा प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग करने से सांस्कृतिक प्रतिरूप ।

(iv) प्राकृतिक तथा सांस्कृतिक वातावरणों के पारस्परिक कार्यों के द्वारा मानव वातावरण समायोजन का रूप, जिसे हम क्षेत्र संगठन का रूप भी कहते हैं। (v) उपरोक्त वातावरण- समायोजन कालिक अनुक्रमण।

सभी पाँच अंगों को निम्न चित्र में प्रदर्शित किया गया है :

  • कालिक अनुक्रमण
  • जनसंख्या
  • मानव वातावरण समायोजन
  • प्रदेश के प्राकृतिक संसाधन
  • सांस्कृतिक प्रतिरूप

Q.5. द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात एक अध्ययन विषय के रूप में भूगोल में आये नवीन परिवर्तन पर टिप्पणी कीजिए। 

Ans. द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात शैक्षिक जगत समेत अनेक क्षेत्रों में तेजी से विकास हुआ। भूगोल विषय भी इस विकास से अछूता नहीं रहा। सामान्य रूप से भूगोल और विशेष रूप से मानव भूगोल ने मानव समाज की समकालीन समस्याओं और मुद्दों के समाधान प्रस्तुत किये। इस अवधि में मानव कल्याण से संबंधित नई समस्याएँ जैसे गरीबी, सामाजिक व प्रादेशिक असमानता, समाज कल्याण तथा सशक्तिकरण आदि को समझने में पारंपरिक विधियाँ असमर्थ थीं। फलस्वरूप समय-समय पर नई विधियाँ अपनाई गई। उदाहरण के लिये, पचास के दशक के मध्य में प्रत्यक्षवाद के रूप में नई विचारधारा का जन्म हुआ। इसमें मात्रात्मक विधियों के उपयोग पर बल दिया गया। 

तदन्तर प्रत्यक्षवाद के विरोधस्वरूप मनोविज्ञान से ली गई संकल्पना पर आधारित व्यवहारगत विचारधारा का उदय हुआ जिसमें मानव की ज्ञान शक्ति पर विशेष चल दिया गया। विश्व के विभिन्न प्रदेशों तथा देशों के भीतर तथा पूँजीवाद के प्रभाव से विभिन्न समूहों के भीतर बढ़ती असमानता के कारण मानव भूगोल में कल्याणपरक विचारधारा का जन्म हुआ। 

निर्धनता, विकास में प्रादेशिक असमानता, नगरीय झुग्गी-झोपड़ियों और अभावों जैसे विषय भौगोलिक अध्ययन का केन्द्र बन गये। इनके अतिरिक्त मानवतावाद नामक विचारधारा का भी भूगोल में “जन्म हुआ। यह विचारधारा मानव पर केंद्रित है। जिसमें मानव-जागृति, मानव-साधन, चेतना और मानव की सृजनात्मक एवं क्रियाशील भूमिका पर बल दिया गया। अतः द्वितीय विश्व युद्ध के बाद मानव भूगोल में अनेक नई विचारधाराओं का तेजी से विकास हुआ।

Q.6. क्रमबद्ध तथा प्रादेशिक भूगोल में अन्तर स्पष्ट करें।

  • Ans: इस भूगोल में किसी प्रदेश के एक विशिष्ट है-
  • (i) भौगोलिक तत्त्व का अध्ययन होता है।
  • (ii) यह अध्ययन एकाकी रूप में होता है। 
  • (iii) यह अध्ययन राजनीतिक इकाइयों पर प्रादेशिक भूगोल (Regional Geography) आधारित होता है। (iv) यह अध्ययन खोज व तथ्यों को प्रस्तुत 
  • (iv) यह किसी प्रदेश के भौतिक वातावरण तथा आधारित होता है। मानव के बीच संबंध प्रकट करता है। अध्ययन में एक घटक जैसे जलवायु 
  • (v) इस अध्ययन में प्रदेशों का सीमांकन करता है।
  • (v) इस के आधार पर विभिन्न प्रकार तथा उप सम्मिलित है, जिसे प्रादेशीकरण कहते हैं। प्रकार निश्चित किए जाते हैं।

Q.7. फिंच और दिवार्थी के द्वारा ‘मानव भूगोल’ की विषय-वस्तु को किन दो भागों में बाँटा गया है ? प्रत्येक भाग के दो लक्षण बताइए । 

Ans. अमेरिका भूगोलवेत्ता फिंच और द्विवार्थी ने मानव भूगोल की विषय-वस्तु को दो भागों में विभाजित कर दिया है-

1. भौतिक पर्यावरण अथवा प्राकृतिक पर्यावरण (physical or natural environment)- इसमें हग प्राकृतिक घटनाओं का अध्ययन करते हैं। जैसे—जलवायु का। 

2. मानव निर्मित पर्यावरण (Human Made environment) – इह मानव निर्मित अथवा सांस्कृतिक तत्त्वों का अध्ययन करते हैं। जैसे – जनसंख्या । इसमें दूर, उद्योग आदि का मी अध्ययन करते हैं।

Q. 8. मानव भूगोल के अध्ययन के संदर्भ में फ्रैंडरिक रैटजेल के योगदान का वर्णन करें । 

Ans. फ्रेडरिक रैटजेल (1844-1904) जर्मनी के एक विद्वान थे। इन्हें मानव भूगोल का जन्मदाता माना जाता है। इन्होंने एन्थ्रोपोज्योग्राफी (Anthropogeography) नामक पुस्तक लिखी। इस पुस्तक में उन्होंने मनुष्य के क्रिया-कलापों का अध्ययन किया। फ्रेडरिक रैटजेल की इस पुस्तक के प्रकाशन को भूगोल में मानव केन्द्रिक विचारधारा को स्थापित करने के कारण युगांतरकारी घटना माना जाता है। फ्रेडरिक रेटजेल के अनुसार, मानव भूगोल, मानव समाजों तथा पृथ्वी तल के बीच संबंधों का संश्लिष्ट अध्ययन है तथा मानव भूगोल के दृश्य सर्वत्र वातावरण से संबंधित होते हैं जो स्वयं भौतिक दशाओं का एक योग होता है।

Q.9 मानव भूगोल के अध्ययन में वाइडल डी ला ब्लाश का क्या योगदान है ? 

Ans. वाइडल डी ला ब्लाश (1848-1918) फ्रांस के एक भूगोलवेत्ता थे। उन्होंने संभावनाबाद की नींव रखी। जब प्रकृति की तुलना में मनुष्य को महत्त्वपूर्ण स्थान प्रदान किया जाए और जब मानव को अकर्मक या निष्क्रिय से सक्रिय शक्ति के रूप में देखा जाए तो यह धारणा संभावनावाद कहलाती है। यद्यपि संभावनाबाद की संकल्पना प्रथम विश्व युद्ध के बाद काफी प्रसिद्ध हुई, लेकिन वाइडल डी ब्लाश ने व्यवस्थित तरीके से इस विचारधारा का प्रचार-प्रसार किया। 

उनके अनुसार मनुष्य की जीवन-शैली उसकी सभ्यता का दर्पण एवं प्रतिफल होता है। यह मनुष्य और उसके निवास स्थान के संबंधों को नियंत्रित करने वाले भीतिक, ऐतिहासिक और सामाजिक, प्रभावों का समन्वित परिणाम है। उन्होंने समान पर्यावरण के भीतर मानव समूहों के अंतर को ‘स्पष्ट करने का प्रयास किया। 

उन्होंने बताया कि ये विभिन्नताएँ भौतिकी पर्यावरण के दबाव के प्रतिफल नहीं अपितु दूसरे कारकों जैसे लोगों की मनोवृत्ति, मानव मूल्य एवं आदतों में परिवर्तन का परिणाम होता है। यही संकल्पना संभावनावादियों के लिए आधारभूत दर्शन बनी। 

वाइडल डी ला व्लाश की प्रसिद्ध पुस्तक प्रिंसिपल डी ज्योग्राफी हूह्यूमेन’ में उन्होंने बताया कि “मानव भूगोल पृथ्वी एवं मनुष्य के बीच पारस्परिक संबंधों को एक नई समझ देता है। इसमें पृथ्वी को नियंत्रित करने वाले भौतिक नियमों तथा पृथ्वी पर निवास करने वाले जीवों के पारस्परिक संबंधों का संयुक्त ज्ञान समाविष्ट होता है।”

Q. 10. मानव भूगोल में नियतिवाद के आलोचक कौन-कौन थे ? दो आधार बताइये जिन पर उसकी आलोचना हुई। 

Ans. मानव भूगोल में नियतिवाद के आलोचक वाइडल डी ला ब्लाश तथा लूसियन फेवने थे। उन्होंने संभावनावाद तथा नव नियतिवाद के आधार पर इसकी आलोचना की।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न | Long Answer Type Questions

1. मानव भूगोल का अध्ययन प्रगतिशील है तथा इसमें मानवीय समाज के अध्ययन पर अधिक बल दिया गया है। समझाइए ।

  • Ans. मानव भूगोल की परिभाषा समय-समय पर बदलती रही है। 
  • 1. प्राचीन विद्वानों अरस्तू, वकल, हम्ब्रोलर तथा रिटर ने इतिहास पर धरातल के प्रभाव का अध्ययन किया।
  • 2. कालान्तर में रैटजेल तथा सेम्पुल ने इसकी आलोचना की।
  • 3. ब्लाश ने पारिस्थतिकी तथा पार्थिव एकता को मानव भूगोल का दो मूल सिद्धान्त माना। 
  • 4. इंटिग्टन ने जलवायु के समाज, सम्पदा तथा इतिहास के प्रभाव पर अधिक बल दिया। 
  • 5. उपरोक्त तथ्य से स्पष्ट है कि मानव भूगोल में मूल रूप से अधिक बल मानवीय समाज के अध्ययन पर दिया गया। सांस्कृतिक वातावरण मानव निर्मित लक्षणों से बना है। जिसमें जनसंख्या तथा मानव बस्तियाँ प्रमुख हैं। इनका संबंध कृषि, निर्माण, उद्योग तथा परिवहन से हैं।

Q.2. भौतिक वातावरण तथा सांस्कृतिक वातावरण में अन्तर स्पष्ट करों । 

Ans. मानव भूगोल का क्षेत्र बहुत व्यापक है। कई क्षेत्रों में इसका जन्म सामाजिक विज्ञान हुआ है तो कई क्षेत्रों में भौतिक विज्ञान इसका आधार है अमरीकी भूगोलवेत्ता फिंच और 8 द्विवार्था ने इस विषय को दो क्षेत्रों में बाँटा है :

1. भौतिक वातावरण (Physical Environment) 

2. सांस्कृतिक वातावरण (Cultural Environment) भौतिक वातावरण प्राकृतिक तत्त्व से बना है। जैसे जलवायु, धरातल, जल प्रवाह, प्राकृतिक संसाधन, खनिज, मुद्रा, जल तथा वन ।

इस आर्टिकल में किसी भी प्रकार का त्रुटि आपको मिलती है तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं हम उसे जल्द से जल्द ठीक करने की कोशिश करेंगे क्योंकि लिखने समय सबसे गलती हो जाती है 😅😅😅😅😅😅😅😅😅


Geography Notes In English



MCQs Geography In English



class12.in

Geography Notes In Hindi



MCQs Geography In Hindi



class12.in

FAQs

Q. 11. रैटजेल के अनुसार मानव भूगोल क्या है ? 

Ans. रेटजेल के अनुसार ‘मानव भूगोल’ मानव समाजों तथा पृथ्वी तल के बीच संबंधो का संश्लिष्ट अध्ययन है।

Q. 12. अमेरिकी भूगोलवेत्ताओं ने मानव भूगोल को विषय-वस्तु के किन दो भागों में बाँटा ? 

Ans. (i) भौतिक व प्राकृतिक पर्यावरण।
(ii) सांस्कृतिक / मानव निर्मित पर्यावरण। 

Q. 13. संभावनावाद विचारधारा क्या है ? 

Ans. जब प्रकृति की तुलना में मनुष्य को महत्त्वपूर्ण स्थान प्रदान किया जाए और जब मानव को अकर्मक या निष्क्रिय से सक्रिय शक्ति के रूप में देखा जाए तो यह धारणा संभावनावाद कहलाती है। वाइडल डी ला ब्लाश ने इस विचारधारा का अनुसरण किया है। 

Q. 14. मानव भूगोल के अध्ययन में स्वीकृत तीन नई विचारधाराओं का वर्णन करें।

Ans. मानव भूगोल के स्वीकृत तीन नए सिद्धांत हैं: 
1. नियतिवाद (Determinism),
2. संभावनावाद (Possibilism), 
3. मानवतावाद (Humanism)।

Leave a Comment