Class 12th Geography Chapter 10 Notes In Hindi | मानव बस्ती कक्षा 12 पाठ 10 के प्रश्न उत्तर

WhatsApp Group (Join Now) Join Now
Telegram Group (Join Now) Join Now

क्या आप Class 12th geography chapter 10 notes In Hindi में प्रश्न उत्तर की तलाश कर रहे हैं तो यह वेबसाइट आपके लिए हैं |

तो छात्रों, इस लेख को पढ़ने के बाद, आपको इस अध्याय से परीक्षा में बहुत अधिक अंक प्राप्त होंगे, क्योंकि इसमें सभी परीक्षाओं से संबंधित प्रश्नों का वर्णन किया गया है, इसलिए इसे पूरा अवश्य पढ़ें।

मैं खुद 12वीं का टॉपर रहा हूं और मुझे पता है कि 12वीं की परीक्षा में किस तरह के प्रश्न पूछे जाते हैं। वर्तमान में, मैं एक शिक्षक की भूमिका भी निभा रहा हूँ, और अपने छात्रों को कक्षा 12वीं की महत्वपूर्ण जानकारी और विषयों का अभ्यास भी कराता हूँ। मैंने यह लेख 5 वर्षों से अधिक के अपने अनुभव के साथ लिखा है। इस पोस्ट की मदद से आप परीक्षा में इस अध्याय से भूगोल में बहुत अच्छे अंक प्राप्त कर सकेंगे।

Class 12th Geography Chapter 10 Notes In Hindi | मानव बस्ती कक्षा 12 पाठ 10 के प्रश्न उत्तर

कक्षा | Class12th 
अध्याय | Chapter10
अध्याय का नाम | Chapter Nameमानव बस्ती
बोर्ड | Boardसभी हिंदी बोर्ड
किताब | Book एनसीईआरटी | NCERT
विषय | Subjectभूगोल | Geography
मध्यम | Medium हिंदी | HINDI
अध्ययन सामग्री | Study Materialsप्रश्न उत्तर | Question answer

पाठ के मुख्य बिंदु | Main Point of This Chapter

★चरित मानव अधिवास जिसमें एक से अधिक मकान हों। ये मुख्यतः दो प्रकार की होत है- गामीण व नगरीय |

★ स्थल- किसी नगर अथवा भवन-बस्ती द्वारा अधिकृत वास्तविक भूमि क्षेत्र । 

★ स्थिति गृहत्तर परिवेश के संदर्भ में किसी ग्राम अथवा नगर की अवस्थिति। 

★ ग्रामीण जनसंख्या जनसंख्या (लोग) जो ग्रामीण क्षेत्र में निवास करती है और जो नगर जनसंख्या से गिल होती है। 

★ नगरीय जनसंख्या किसी नगरीय क्षेत्र में रहने वाले लोग जो ग्रामीण जनसंख्या से भिन्न होते है

Class 12th Geography Chapter 10 Notes In Hindi | मानव बस्ती कक्षा 12 पाठ 10 के प्रश्न उत्तर
image credit: jharkhand pathshala

★ नगर का रूप नगर की आकृति जैसे—गोल, वर्गाकार अथवा लंबवत्।

* नगर की संरचना नगर के भू-उपयोग, जो नगर के विभिन्न भागों में दिखाई पड़ते है 

★ नगरों का प्रकार्यात्मक प्रकार नगरों का कार्य आधार पर विभाजन ।

★हत ग्रामीण चरितयाँ सीमित क्षेत्र पर बसी सघन बस्ती। यह प्रकीर्ण बस्ती के विपरीत है

★ प्रकीर्ण मस्तियाँ- दूर-दूर तक बिखरी हुई मानव बस्ती। यह संहत बस्ती के विपरीत है

★ आयताकार बस्तियाँ बस्तियाँ जिनकी योजना आयताकार होती हैं।

★ रैखिक बस्तियाँ मस्तियों जो सीधी-सरल रेखा में दिखाई पड़ती हैं, क्योंकि ये रेल, सड़क मार्ग या नहर के किनारे-किनारे बसी होती है।

★ त्रिभुजाकार बस्तियाँ बस्तियों जो त्रिभुज रूप में दिखाई देती हैं, क्योंकि ये रेलवे लाइन सड़क या नदियों के मिलन स्थल पर बनी होती हैं।

★ तारक बस्तियाँ मस्तियाँ जिनका प्रतिरूप तारे के समान दिखाई देता है।

★ वृत्ताकार पस्तियाँ बस्तियाँ जिनका प्रतिरूप अर्धवृत्त या वृत्त के समान दिखाई पड़ता है

* प्रशासनिक नगर-नगर जो केन्द्रीय सरकार के प्रशासन केन्द्र होते हैं।

* प्रतिरक्षा नगर-नगर जो सैनिक गतिविधियों के केन्द्र होते हैं।

★ सांस्कृतिक नगर-नगर जो धार्मिक, शैक्षणिक अथवा आमोद-प्रमोद के केन्द्र होते हैं।

★ औद्योगिक नगर-मगर जिनका उद्योगों की स्थापना के कारण हुआ हो । 

★ व्यापारिक नगर-नगर जो पहले व्यापार के केन्द्र थे और आज भी उनका व्यापारिक महत्त्व है

★ नगरीकरण- ग्रामीण जनसंख्या की नगरीय जनसंख्या में परिवर्तन की प्रक्रिया।

★ मलिन बस्ती एक घना बसा नगरीय आवास क्षेत्र, जिसमें अस्वच्छ घर होते हैं, तथा समाज के कमजोर वर्गों के लोग रहते हैं और जिनमें सामाजिक विघटन की प्रवृत्तियाँ पाई है

अति लघु उत्तरीय प्रश्न | VERY SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS

Class 12th geography
Class 12th geography

Q. 1. नगरीय बस्तियों से क्या अभिप्राय है ? 

Ans. वे बस्तियाँ जहाँ आर्थिक क्रियाएँ संकेंद्रित होती हैं और जहाँ अधिकतर लोग द्वितीयक तथा तृतीयक व्यवसायों में लगे रहते हैं।

Q. 2. ‘संहत ग्रामीण बस्तियाँ’ किसे कहते हैं ? 

Ans. वे वस्तियाँ जिनमें बहुत-से घर एक साथ बसे होते हैं, संहत ग्रामीण बस्तियाँ कहलाती हैं ।

Q. 3. बिखरी हुई बस्तियों को क्या कहते हैं ?” 

Ans. प्रकीर्ण वस्तियाँ।

Q. 4. नगर एवं ग्राम को एक-दूसरे से किन लक्षणों के आधार पर पृथक् किया गया है ?

Ans. नगर एवं ग्राम को एक-दूसरे से निम्नलिखित लक्षणों के आधार पर पृथक किया गया है- 

  • 1. जनसंख्या का आकार, 
  • 2. आर्थिक आधार, 
  • 3. प्रशासनिक आधार।

Q.5. नगर के रूप का निर्धारण किन तथ्यों द्वारा किया जाता है ? 

Ans. नगर के रूप में निर्धारण निम्नलिखित तथ्यों द्वारा किया जाता है-

  • (1) नगर की आकृति — गोल, वर्गाकार या लंबवत् ।
  • (2) नगर की आकार रेखा जो महत्वपूर्ण भवनों तथा अन्य लक्षणों द्वारा निर्धारित की जाती हैं।
  • (3) नगर की संरचना -नगर का आंतरिक ढाँचा तथा भू-उपयोग।

Q.6. ‘नव नगर’ किसे कहते हैं ? 

Ans. कुछ नगर सरकार द्वारा नियोजित ढंग से बसाए जा रहे हैं, वे नगर हैं जिनकी ऐतिहासिक जड़ें बहुत पुरानी नहीं हैं। उदाहरण- भारत में चंडीगढ़, पाकिस्तान में इस्लामावाद, ब्राजील में ब्रासीलिया आदि । ऐसे अधिकतर नगर या तो देशों की राजधानियाँ हैं या राज्यों की राजधानियों हैं।

class 12th NotesMCQ
HistoryPolitical Science
EnglishHindi

Q.7. ग्रामीण बस्तियाँ कितने प्रकार की होती हैं ? 

Ans. ग्रामीण बस्तियाँ दो प्रकार की हैं संहत ग्रामीण वस्तियाँ तथा प्रकीर्ण बस्तियाँ ।

Q.8. वर्गाकार एवं गोलाकार बस्तियाँ कहाँ विकसित होती है ?

Ans. वर्गाकार एवं गोलाकार वस्तियाँ किसी हरे-भरे मैदान, बाग अथवा तालाब के चारों ओर बसती हैं।

Q.9. रेखिक बस्तियाँ कहाँ बसती है ?

Ans. रेखिक बस्तियाँ सड़कों, नदियों अथवा नहरों के साथ-साथ विकसित होती है। 

Q. 10. ग्रामीण तथा नगरीय बस्तियों में कितने प्रकार के अंतर्संबंध होते हैं ?

Ans. ग्रामीण तथा नगरीय बस्तियों में चार प्रकार के अंतसंबंध होते हैं-

1. व्यापारिक संबंध, 2. सामाजिक संबंध, 3. परिवहनीय संबंध 4. पृषि 

लघु उत्तरीय प्रश्न | SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS

Class 12th geography
Class 12th geography

Q.1. ग्रामीण बस्तियों की परिभाषा दीजिए। नगरीय तथा ग्रामीण बस्तियाँ कहलाने के दो आधार बतलाइये। विश्व के विभिन्न भागों से तीन उदाहरण दीजिए जिससे यह अंतर स्पष्ट हो जाए। 

Ans. वे बस्तियों जो भूमि से सीधी जुड़ी होती है या काफी नजदीक से जुड़ी होती है, बस्तियाँ कहलाती हैं। इन बस्तियों के लोग प्राथमिक व्यवसाय से जुड़े होते हैं। ग्रामीण बस्तियों को नगरीय बस्तियों से अलग करने का कोई सार्वभौम मापदंड नहीं हैं। विभिन्न देशों ने अपनी आवश्यकता के अनुसार अपने अलग-अलग मापदंड बनाये हैं। ग्रामीण बस्तियों मुख्यतः प्राथमिक कार्य जैसे कृषि, खनन, वानिकी आदि से संबंधित होती हैं, नगरीय बस्तियों में केन्द्रीयता का गुण होता है तथा उनमें द्वितीयक तथा तृतीयक करयों की प्रधानता होती है।

दूसरा आधार जनसंख्या का होता है। कनाडा में 1000 से कम जनसंख्या वाली बस्तियों को ग्रामीण वर्ग में रखते हैं, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका में ग्रामीण बस्ती के निर्धारण की ऊपरी सीमा 2500 है। भारत में 5000 तक की जनसंख्या वाली वस्ती को ग्रामीण बस्ती कहते हैं। जापान में 30,000 तक की जनसंख्या वाली वस्ती को ग्रामीण बस्ती कहा जाता है।

Q. 2. संहत ग्रामीण बस्ती की व्याख्या कीजिए ।

Ans. संहत ग्रामीण बस्ती में बहुत से घर एक-दूसरे के पास होते हैं। मूलतः ऐसी बस्ती का आरम्भ एक छोटे पुरवे के रूप में दो बस्ती के कटान पर अथवा एक जलाशय के समीप होता है। नये घरों के जुड़ने से इसके पुरवे का आकार बहुत बढ़ जाता है।

Q. 3. व्यापार एवं परिवहन नगर किसे कहते हैं ? 

Ans. प्राचीन काल में अधिकांश नगर व्यापार के केन्द्र के रूप में महत्त्वपूर्ण थे। जर्मनी का डूसेल डार्क, कनाडा का विनीपेग, पाकिस्तान का लाहौर, भारत का आगरा आदि सभी नगर महत्वपूर्ण व्यापारिक केन्द्र रहे हैं। कुछ नगरों का विकास परिवहन नगरों के रूप में हैं। ऐसे हुआ नगरों का आधार दो प्रकार के परिवहन होते हैं। पत्तन नगर समुद्र तट पर स्थित आयात-निर्यात के केन्द्र हैं। जैसे भारत में मुंबई मध्य पूर्व में अदन आदि। मुगलसराय तथा रेलमार्गों के केन्द्र (जंक्शन) आगे चलकर नगर बन जाते हैं। भारत में इटारसी ऐसे नगरों के उदाहरण हैं।

Q.4. नगरों में मलिन बस्तियों की वृद्धि के क्या कारण हैं ? 

Ans. नगरीय वस्तियों की अनियमितता तथा अनियोजितता मलिन बस्तियों की वृद्धि के कारण है। बड़े नगरों में मलिन बस्तियाँ विशेष रूप से बढ़ती हैं। चिंता की बात यह है कि मलिन स्तियाँ बड़ी तेजी से बढ़ रही हैं। भारतीय नगरों की एक-चौथाई जनसंख्या मलिन बस्तियों में रहती है। 2001 की जनगणना के अनुसार भारत के 607 नगरों में मलिन बस्तियाँ हैं जिनमें लगभग चार करोड़ लोग रहते हैं।

Q.5. प्रशासनिक नगर किसे कहते हैं ?

Ans. इस प्रकार के नगर देशों एवं राज्यों की राजधानियों तथा जिले एवं अन्य प्रशासनिक इकाइयों के मुख्यालय होते हैं। ऐसे नगरों में सरकारी भवन, संसद भवन, विधान सभा भवन आदि होते हैं। इन नगरों में मुख्यालय तथा न्यायालय भी होते हैं। इन नगरों में सरकारी कर्मचारी तथा अधिकारी अधिक संख्या में रहते हैं। दिल्ली, लंदन, चंडीगढ़ इसके उदाहरण हैं। 

Q.6. बस्तियों की गोलाकार आकृति से क्या तात्पर्य है ?

Ans. गोलाकार आकृति को वृत्तीय प्रतिरूप भी कहते हैं। जब कभी किसी झील या तालाब के किनारे मकान बन जाते हैं, तो गाँव की गोलाकार आकृति होती हैं। यह प्रतिरूप किसी हरे-भरे मैदान में भी मिलता है। ऐसे प्रदेश में गाँव के निवासी अपना मकान जल के समीप बनाना चाहते। हैं। पश्चिमी बंगाल और उत्तर प्रदेश में इस प्रकार के गाँव बहुत मिलते हैं। 

Q.7. मानव बस्तियों के बसने के कारणों पर प्रकाश डालें।

Ans. मनुष्य ने उस समय से एक स्थान पर स्थायी रूप से रहना प्रारम्भ किया जब से उसने स्थायी कृषि को व्यवसाय बनाया। स्थायी बस्तियों का संबंध मुख्यतः दो तथ्यों से था— 

  • 1. फसलों के उत्पादन के लिए किसान को उनकी देखभाल करनी पड़ती थी। 
  • 2. फसलों के उगने तथा उनके पकते समय बहुत चौकसी रखने की आवश्यकता होती थी, इसलिए उसे स्थायी रूप से खेतों के पास ही बसना पड़ा। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। अतः वह एक समूह बनाकर रहना पसंद करता है।

Q. 8. कोई बस्ती नगर क्यों कहलाती है ? 

Ans. किसी बस्ती को नगर कहने के लिए कई आघर हैं—

  • 1. जनसंख्या का आधार (Population Basis ) — नगर की परिभाषा के अंतर्गत किसी बस्ती को बसाने के लिए सभी दशों के जनगणना विभागों ने जनसंख्या को आधर माना है परन्तु हर देश में यह अलग-अलग है। उदाहरण के लिए डेनमार्क, स्वीडन तथा फिनलैंड में कोई स्थान जिसकी जनसंख्या 300 है, कनाडा एवं घेनेजुला में 1000, कोलम्बिया में 5000 है। इसके अतिरिक्त जनसंख्या का घनत्व कम से कम 400 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर होना चाहिए। 
  • 2. आर्थिक आधार (Economic Basis) — भारत में उस अमुक बस्ती में 75% से ” अधिक पुरुष जनसंख्या को कृषि के अतिरिक्त अन्य व्यवसाय में लगा होना चाहिए। 3. प्रशासनिक आधार (Administrative Basis ) — नगरों की परिभाषा देने में यह भी ध्यान रखा गया है कि उनका प्रशासन किस प्रकार किया जाता है। भारत में यह आचा नगरपालिका, केन्टोनमेंट बोर्ड अथवा नोटीफाइड टाउन एरिया कमेटी है। मध्य अमेरिका देशों, ब्राजील तथा बोलीविया में छोटे से छोटा प्रशासनिक केंद्र भी नगर कहलाता है।

Q.9. संहत व प्रकीर्ण बस्तियों में क्या अंतर है ? 

Ans.

संहत बस्तियाँ (Compact Settlements)

  • 1. संहत बस्तियाँ उपजाऊ मैदानों या नदी घाटियों में पाई जाती हैं।
  • 2. संहत वस्तियों में लोगों का मुख्य धंधा कृषि होता है।
  • 3. इन वस्तियों में मकान एक-दूसरे से सटे हुए तथा छोटे होते हैं, जिनमें रहने का स्थान कम होता है। 
  • 4. यहाँ खेत छोटे होते हैं।
  • 5. पानी के निकास की उचित व्यवस्था न होने के कारण गलियाँ गंदी होती हैं।
  • 6. इन बस्तियों के निवासी सुरक्षा तथा खेती का काम मिल-जुलकर करते हैं।

प्रकीर्ण यस्तियाँ (Dispersed Settlements)

  • 1. प्रकीर्ण वस्तियाँ पर्वतीय या उच्च भूमि एवं शुष्क तथा अर्द्ध-शुष्क मरुस्थलों में पाई जाती है। 
  • 2. यहाँ पशुपालन तथा लकड़ी काटना मुख्य व्यवसाय है।
  • 3. इन बस्तियों में मकान एक-दूसरे से तथा खुले होते हैं, जिनमें रहने का स्थान अधिक होता है।
  • 4. यहाँ खेत बड़े होते हैं।
  • 5. ये वस्तियाँ साफ होती हैं, क्योंकि यहाँ पानी के निकास की उचित व्यवस्था होती है 
  • 6. इन बस्तियों में लोग एकाकी जीवन व्यतीत करते हैं।

Q. 10. ग्रामीण तथा नगरीय बस्तियों में क्या अंतर है ? 

Ans. 1. ग्रामीण बस्तियाँ (Rural Settlements) ग्रामीण बस्तियों में रहने वाले लोग प्राथमिक व्यवसाय जैसे कृषि, पशुपालन, मछली पकड़ना, लकड़ी काटना तथा खान खोदना आदि में लगे होते हैं। इनकी बस्तियाँ छोटी-छोटी होती हैं। इनके घर स्थानीय कच्चे माल जैसे मिट्टी, लकड़ी तथा घास-फूस के बने होते हैं। इन वस्तियों में बाजार तथा उद्योगों की कमी होती

है। आवासीय स्थल की अधिकता के कारण मकान प्रायः खुले तथा एक मंजिल के होते हैं। 2. नगरीय बस्तियों (Urban Settlements) — नगरीय बस्तियों में रहने वाले अधिकांश लोग गौण एवं तृतीय व्यवसाय अर्थात् उद्योग, व्यापार, वाणिज्य तथा प्रशासन में लगे होते हैं। आवासीय स्थलों की कमी के कारण लोग कई मंजिलों वाली इमारतों में रहते हैं, छोटे-छोटे कमरों में रहते हैं। इसमें विभिन्न प्रकार की व्यावसायिक संरचना पाई जाती है। इन वस्तियों को नगर या शहर कहते हैं।

Q. 11. प्रतिरक्षा नगर तथा औद्योगिक नगरों में अंतर बताएँ । 

Ans. प्रतिरक्षा नगर (Defence Towns) –— ये नगर सैनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होते हैं। इन नगरों में सेना, नौसेना तथा वायु सेना के सैनिकों के निवास, अभ्यास तथा प्रशिक्षण की व्यवस्था होती है। इन्हें कैन्ट या कैन्टोनमैन्ट कहते हैं। प्लाईमाऊथ, हैलीपफैक्स, जोधपुर, पुणे, देहरादून, अंबाला कँट आदि प्रतिरक्षा नगरों के उदाहरण हैं।

औद्योगिक नगर (Industrial Towns ) — वे नगर जो उद्योगों के विस्तार के परिणामस्वरूप विकसित होते गए तथा जो महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्र हों वे औद्योगिक नगर कहलाते हैं। जमशेदपुर, भिलाई, राउरकेला, अहमदाबाद, सूरत, मैनचेस्टर, लिवरपूल, वर्मिंघम, पिट्सवर्ग आदि इनके उदाहरण हैं। 

Q. 12. ग्रामीण बस्तियाँ किन्हें कहते हैं ? संसार के विभिन्न भागों में पाई जाने वाली ग्रामीण बस्तियों के दो सामान्य प्रतिरूप कौन से हैं? प्रत्येक प्रतिरूप की तीन विशेषताएँ बताइए । 

Ans. ग्रामीण बस्तियाँ (Rural Settlements) — वे बस्तियाँ जो भूमि से सीधी तथा काफी नजदीकी से जुड़ी हैं, ग्रामीण वस्तियाँ कहलाती है। इन बस्तियों में मुख्यतः लोग प्राथमिक व्यवसायों में लगे रहते हैं। संसार में विभिन्न भागों में पाई जाने वाली ग्रामीण यस्तियों के दो सामान्य प्रतिरूप हैं :

1. संहत यस्तियाँ (Compact Settlements ) — इस प्रकार की बस्तियों में घर अधिक पास-पास और तंग गलियों वाले होते हैं। यह बात भूमि की प्रकृति और आस-पास के साधनों पर अवलंबित रहती है। इन गाँवों की जनसंख्या 5000 से 10,000 तक होती है । इस प्रकार के गाँव प्रगतिशील होते हैं।

“2. प्रकीर्ण बस्तियाँ (Dispersed Settlements) – इन बस्तियों में मकान दूर-दूर और बिखरे होते हैं। कभी-कभी वे मकान झोपड़ियों के छोटे-छोटे समुदायों में भी होते हैं। बिखरी वस्तियाँ धरातल की रचना के कारण होती हैं। यदि बसावट के बीच तालाव या पहाड़ी आदि आ जाती है तो उन स्थानों पर मकान नहीं बनते और वे वस्तियों को छितरा देते हैं। किसानों को आस-पास घर बनाने में कठिनाई पड़ती है। इस प्रकार की बस्तियों को विभिन्न देशों में विभिन्न नामों से जानते हैं। जैसे- वेनेजुएला में राँचो, ब्राजील में फावेला आदि। भारत में ये झुग्गी- झोपड़ी आदि के रूप में पाये जाते हैं। ये कर्नाटक तथा हिमाचल प्रदेश आदि में पायी जाती हैं।

Q. 13. सांस्कृतिक नगर पर एक टिप्पणी लिखें । 

Ans. सांस्कृतिक नगर वे नगर होते हैं, जो धार्मिक, शैक्षणिक व आमोद-प्रमोद के केंद्र होते इनमें शिक्षा, मनोरंजन कला तथा धार्मिक की सुविधा होती है। ये निम्नलिखित है- 

  • (क) शिक्षा नगर ( Educational Towns) –— कई नगरों का विकास शिक्षा संबंधी बाओं की उपस्थिति के कारण होता है। इन नगरों में विश्वविद्यालय, महाविद्यालय, विद्यालय, छात्रावास, पुस्तकालय एवं खेल के मैदान होते हैं। हारवर्ड, ऑक्सफोर्ड, केम्ब्रिज आदि प्रसिद्ध शिक्षा नगर हैं। भारत में अलीगढ़, पिलानी, खड्गपुर आदि शिक्षा नगरों के उदाहरण है।
  • (ख) धार्मिक नगर (Religious Towns ) — कई नगर धार्मिक महत्त्व के होते हैं। उनकी महिमा महान गुरुओं के कारण होती है, जैसे वेटिकन सिटी पोप के कारण तथा तिब्बत में ल्हासा दलाई लामा के कारण प्रसिद्ध हो गए हैं। तीर्थ स्थानों में वाराणसी, जेरूसलम, मक्का, हरिद्वार, अलाहाबाद, अमृतसर, मथुरा, अजमेर आदि प्रसिद्ध हैं।
  • (ग) आमोद-प्रमोद के केंद्र-कुछ नगरों में आमोद-प्रमोद की सुविधाएँ होती हैं। जैसे- हॉलीवुड, दार्जिलिंग, लॉस वेगास, शिमला, नैनीताल, मंसूरी आदि। ये नगर सुंदर, आकर्षक, स्वास्थ्यप्रद तथा मनोरंजन सुविधाओं के कारण पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न | Long Answer Type Questions

Class 12th geography
Class 12th geography

Q. 1. एक ग्रामीण बस्ती प्रतिरूप किस प्रकार पर्यावरण दशाओं एवं भौतिक व यतिक प्रभावों को प्रतिबिंबित करता है ? समझाइए । 

Ans. ग्रामीण वस्तियों के प्रारूप पर भौतिक व सांस्कृतिक दशाएँ प्रभाव डालती हैं।

(i) भौतिक कारक (Physical Condition ) – भौतिक कारक जैसे उच्चावच, ऊँचाई, अपवाहतंत्र, भीम जल स्तर तथा जलवायु एवं मृदा इन बस्तियों के प्रारूप का निर्धारण करने वाले महत्वपूर्ण कारक हैं। मैदानी क्षेत्रों में समतल भूमि होने के कारण संहत बस्तियाँ स्थापितः हो जाती है। भूमि यादे उपजाऊ है तो वहाँ संहत वस्तियाँ बनती हैं। यदि आस-पास के क्षेत्रों में प्राकृतिक साधनों की प्रचुरता है तो मकानों की संख्या अधिक और पास-पास होगी। 

यदि भूमि की प्रकृति पहाड़ी या पारी है तो प्रकीर्ण बस्तियों का विस्तार उस क्षेत्र में होगा। यदि बसावट के बीच में कोई तालाब, दलदल, झील आदि है तो उन स्थानों पर बस्तियाँ छितरी हुई होंगी। शुष्क क्षेत्रों में पानी अत्यंत महत्वपूर्ण कारक है। यहाँ मकान जलाशय जैसे कुएँ अथवा तालाव के चारों ओर बनाए जाते हैं। राजस्थान के शुष्क मरुस्थल में वस्तियों की संहता काफी हद तक है। जल आपूर्ति से निर्धारित होती है। अफ्रीका तथा एशियाई देशों में जहाँ बागान कृषि होती यहाँ बड़े-बड़े बागानों तथा रेंचों में भी प्रकीर्ण बस्तियाँ पाई जाती हैं।

(ii) सांस्कृतिक कारण (Cultural Condition ) – नृजातीय एवं सांस्कृतिक जैसे जनजातीयता, जाति अथवा सांप्रदायिकता पहचान आदि भी ग्रामीण बस्तियों के अभिन्यास को निर्धारित करते हैं। भारत के गाँवों में भू-स्वामित्व वाली जातियों के मकान इनके चारों और गाँव के समुदाय की सेवा करने वाली जातियों के मकान होते हैं। हरिजनों के मकान गाँवों को सीमा के पास मुख्य बस्ती से दूर पाए जाते हैं। इस प्रकार सांस्कृतिक कारक भी ग्रामीण वस्तियों के प्रारूप को प्रभावित करते हैं। 

Q. 2. नगर की संरचना के विषय में चर्चा कीजिए । 

Ans. प्रत्येक नगर के विभिन्न भागों में विभिन्न प्रकार का भू-उपयोग होता है। कुछ क्षेत्रों वाणिज्य की प्रधानता होती है जैसे दिल्ली में करोल बाग, कनाट प्लेस, चाँदनी चौक, नेहरू उपनगर क्षेत्र उद्योग तथा कामगार क्षेत्र प्लेस, सदर बाजार, कोलकाता में मार्केट तथा बड़ा बाजार चेन्नई में माउण्ट रोड आदि। कुछ क्षेत्रों में उद्योग विकसित होता है तो कुछ क्षेत्र आवास के लिए प्रयोग किये जाते हैं। कुछ अन्य क्षेत्र उपनगरीय लक्षणों के होते हैं।

कुछ विद्वानों का विचार है कि नगर का विकास एक केंद्रीय कोड से बाहर की ओर संकेंद्रीय वृत्तों के रूप में होता है। दूसरे क्षेत्र में थोक व्यापार के अतिरिक्त हल्के उद्योग भी होते हैं। नगर की अधिकांश गंदी बस्तियाँ इसी क्षेत्रों में पाई जाती हैं। तीसरे क्षेत्रों में मजदूर तथा निम्न आय वर्ग के लोग निवास करते हैं। इसका कारण यह है कि दूसरे क्षेत्र में स्थित उद्योगों में काम करने वाले लोग निकटवर्ती तीसरे क्षेत्र में ही रहते हैं।  

Q. 3. नगर की आकृति के विषय में संक्षिप्त चर्चा कीजिए ।

Ans. नगरों की आकृति भिन्न-भिन्न होती है, जैसे-गोल, वर्गाकार, संबंध आदि नगर की आकृति पर उसकी स्थिति का बहुत प्रभाव पड़ता है। मैदानी भागों में बसे हुए नगर पर्वतीय नगरों से भिन्न होते हैं। नियोजित नगर सम आकृति वाले होते हैं जबकि बिना नियोजन वाले नगर विषम आकृति के होते हैं। चंडीगढ़ तथा जयपुर नियोजित नगर हैं और सम आकृति वाले नगर हैं। प्राचीन नगरों में सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाता था और किले सदैव ऊँचे स्थानों पर बनाए जाते थे। 

राजस्थान के अधिकांश नगर किले के चारों ओर विकसित हुए हैं। उत्तर प्रदेश के अधिकांश नगरों का विकास घंटाघर के चारों ओर हुआ। किसी नदी या सड़क के किनारे पर बसने वाले नगर लम्बाकार होते हैं क्योंकि वे किनारे के साथ-साथ रैखिक आकृति में विकसित होते हैं। हरियाणा में फरीदाबाद तथा उत्तर प्रदेश में मोदीनगर लंबाकार नगरों के अच्छे उदाहरण हैं।

Q. 4. ग्रामीण बस्तियों के प्रतिरूप कितने प्रकार के होते हैं ? सविस्तार उल्लेख करें । 

Ans. ग्रामीण बस्तियों के प्रतिरूप पर्यावरण के अनुसार भिन्न-भिन्न होते हैं-

  • 1. आयताकार अथवा वर्गाकार प्रतिरूप (Rectangular or Square pattern) – यह सबसे अधिक पाये जाने वाला नमूना है। इस नमूने की योजना आयताकार अथवा वर्गाकार होती है। इसकी गलियाँ सीधी रेखा में होती हैं और वे समकोण पर मिलती हैं।
  • 2. रैखिक प्रतिरूप (Linear Pattern) — इस नमूने के अंदर मकान किसी प्राकृतिक भू-आकृति, जैसे-समुद्र, झील, नदी अथवा मानव निर्मित साधन जैसे रेल, सड़क या नहर के किनारे-किनारे बने होते हैं । ये बस्तियाँ सीधी सरल रेखा में दिखाई देती हैं। 
  • 3. त्रिभुजाकार प्रतिरूप (Triangular Patterns ) — इस नमूने की बस्तियाँ प्रायः रेलवे लाइन, सड़क या नदियों आदि के मिलन स्थान पर बन जाया करती हैं । इनका प्रतिरूप त्रिभुज के रूप में दिखाई देता है। 
  • 4. तारक प्रतिरूप (Radial or Star like Pattern)- इस नमूने की बस्तियाँ उन स्थानों पर बन जाती हैं जहाँ पर कि सड़कें विभिन्न दिशाओं में साइकिल के पहिए की तीलियों की तरह विभिन्न दिशाओं में जाती हैं। इनका प्रतिरूप तारे के समान दिखाई पड़ता है ।
  • 5. वृत्ताकार प्रतिरूप (Circular Pattern) – इस प्रकार की बस्तियाँ किसी वृत्ताकार भू-आकार जैसे—झील, तालाब या ज्वालामुखी के मुख आदि के किनारे-किनारे बन जाती है। इसमें गाँव का प्रतिरूप अर्द्धवृत्त के आकार में होता है। 

Q.5. ग्रामीण बस्तियों की क्या-क्या समस्याएँ हैं ? संक्षिप्त में चर्चा कीजिए । 

Ans. विकासशील देशों में ग्रामीण बस्तियों की मुख्य समस्याएँ गरीबी, बेरोजगारी तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सेनीटेशन, सफाई आदि जैसी आधुनिक सुविधाओं का अभाव है। विकासशील देशों में बहुत-से ग्रामीण लोग कृषि पर निर्भर करते हैं और यही उनका मुख व्यवसाय है। कृषि एक मौसमी व्यवसाय है। कृपक तथा कृषि मजदूर फसलों की बुआई तथ कटाई के समय ही व्यस्त रहते हैं। वर्ष की शेष अवधि में उन्हें बेरोजगारी का सामना करने पड़ता है। 

अधिकांश कृपकों के पास जमीन का छोटा-सा टुकड़ा होता है, जो प्रायः अधिक उपजाऊ नहीं होता। इससे पैदा होने वाली फसल किसान के परिवार के सदस्यों के पेट की पूर्णि के लिए भी पर्याप्त नहीं होती। खराव मौसम की स्थिति में फसल नष्ट हो जाती है और किसान जल को गरीबी तथा भुखमरी का सामना करना पड़ता है। इससे तंग आकर ग्राम निवासी रोजगार की तलाश में नगरों की ओर प्रवास करते हैं। विकासशील देशों की अधिकांश ग्रामीण वस्तियों में पेयजल की सुविधा नहीं है। ग्रामवासियों के लिए पेयजल के नल अभी भी एक सुनहरे सपने के समान ही है। 

उन्हें प्राकृतिक जलाशयों पर ही निर्भर रहना पड़ता है। इन जलाशयों में प्रायः अशुद्ध होता है। विकासशील देशों की ग्रामीण वस्तियों में सफाई तथा सेनीटेशन की को विशेष व्यवस्था नहीं होती। खुली नालियों में गंदा पानी भरा रहता है और यत्र-तत्र कूड़े के ढेर लगे रहते हैं। इस पर मक्खी तथा मच्छर खूब पनपते हैं जो मलेरिया, हैजा, पीलिया, पेचिश आदि घातक बीमारियाँ फैलाते हैं। शिक्षा, विशेषतया उच्च शिक्षा का पूर्ण अभाव होता है। इसी प्रकार से पर्याप्त स्वास्थ्य सेवा भी उपलब्ध नहीं होती। 

Q. 6. नगर एवं ग्राम के अंतर्संबंधों पर प्रकाश डालिए । 

Ans. नगर-ग्राम अंत: संबंध (Inter-relationship between rural and urban settlements)—अधिकांश नगरों के बारे में यह कहा जाता है कि वे ग्राम जो सफल हुए नगर वन गए”। परन्तु यह सच नहीं है कि प्रत्येक नगर पहले ग्राम था और बाद में नगर बनो। बहु से नगर विनियोजित किए गए और प्रारम्भ से ही नगर हैं। जैसे-चंडीगढ़, जयपुर। नगर तथा ग्राम एक-दूसरे के पूरक हैं। ग्राम नगर को खाद्य सामग्री की आपूर्ति करता है। ग्राम तथा नगर परिवहन के साधनों द्वारा जुड़े होते हैं।

ग्रामीण तथा नगरीय वस्तियों में चार प्रकार के अंतसंबंध होते हैं 

  • 1. व्यापारिक संबंध (Trade Relations) – ग्राम से नगर की ओर जाने वाली वस्तुओं में कृषि एवं पशु उत्पाद की अधिकता होती है। इसी प्रकार नगर से ग्राम की ओर औद्योगिक उत्पाद भेजे जाते हैं।
  • 2. सामाजिक संबंध (Social Relations) – नगर में बहुत से सांस्कृतिक संस्थान विकसित हुए हैं। इनका लाभ ग्रामीण उठाते हैं। प्रदर्शनी, मेले, सिनेमा तथा थियेटर आदि ग्रामवासियों के मनोरंजन के साधन होते हैं। 
  • 3. परिवहन संबंध (Transportation Relations)- पृष्ट प्रदेश से लोग नगर की ओर काम करने आते हैं । इस क्रिया में दोनों (नगर व गाँव) लाभान्वित होते हैं। 
  • 4. कृषि संबंध (Agricultural Relations) नगर में कृषि उत्पादों की अनुसार ग्रामवासी अपनी फसलों तथा कृषि उत्पाद पैदा करते हैं। नगर के पास सब्जियों तथा फलों की कृषि इसका ज्वलंत उदाहरण है। इसके अतिरिक्त नगर इन फसलों के लिए खाद, बीज, कृषि यंत्रों की मरम्मत आदि की सुविधा प्रदान करते हैं। इस प्रकार नगर एवं गाँव पारस्परिक निर्भरता के तंत्र में एक-दूसरे से जुड़े होते हैं।

इस आर्टिकल में किसी भी प्रकार का त्रुटि आपको मिलती है तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं हम उसे जल्द से जल्द ठीक करने की कोशिश करेंगे क्योंकि लिखने समय सबसे गलती हो जाती है 😅😅😅😅😅😅😅😅😅

  • अध्याय 1 जनसंख्या: वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन
  • अध्याय 2 प्रवासन: प्रकार, कारण और परिणाम
  • अध्याय 3 मानव विकास
  • अध्याय 4 मानव बस्तियाँ
  • अध्याय 5 भूमि संसाधन और कृषि
  • अध्याय 6 जल संसाधन
  • अध्याय 7 खनिज और ऊर्जा संसाधन
  • अध्याय 8 विनिर्माण उद्योग
  • अध्याय 9 योजना और भारतीय संदर्भ में सतत विकास
  • अध्याय 10 परिवहन और संचार
  • अध्याय 11 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार
  • अध्याय 12 चयनित मुद्दों और समस्याओं पर भौगोलिक परिप्रेक्ष्य
  • अध्याय 1 डेटा – इसका स्रोत और संकलन
  • अध्याय 2 डाटा प्रोसेसिंग
  • अध्याय 3 डेटा का चित्रमय प्रतिनिधित्व
  • अध्याय 4 डाटा प्रोसेसिंग और मैपिंग में कंप्यूटर का उपयोग
  • अध्याय 5 फील्ड सर्वेक्षण
  • अध्याय 6 स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी

class12.in


Geography Notes In English



MCQs Geography In English



class12.in

Geography Notes In Hindi



MCQs Geography In Hindi



class12.in

FAQs

Q. 1. योजना नगर का एक उदाहरण दें।

Ans. चंडीगढ़ (भारत) योजना नगर का एक अनुपम उदाहरण है।

Q.2. नगरों की संरचना से क्या अभिप्राय है ? 

Ans. नगरों की संरचना से अभिप्राय नगर के भू-उपयोग से है। नगर की भूमि का उपयोग विभिन्न कार्यों जैसे-बाजार, शिक्षा, उद्योग, प्रशासनिक कार्यों के लिए होता है। इस आधार पर नगर के विभिन्न क्षेत्रों (केन्द्रीय, बाहरी आदि) का उपयोग विभिन्न कार्यों के लिए किया जाता है।

Q.3. ग्रामीण बस्तियों के कितने प्रतिरूप होते हैं ? 

Ans. ग्रामीण बस्तियों के प्रतिरूप निम्न है-
1. रैखिक प्रतिरूप (Linear pattern) 
2. वृत्ताकार प्रतिरूप (Circular pattern)
3. आयताकार / वर्गाकार प्रतिरूप (Rectangular Square patiern)
4. तारक प्रतिरूप (Radial / Cross shaped) । 

Q.4. नगरीय तथा ग्रामीण बस्तियों के बीच तीन अंतर्संबंध कौन से हैं?

Ans. नगरीय तथा ग्रामीण बस्तियों के बीच तीन अंतर्संबंध निम्न हैं-
1. व्यापारिक संबंध (Trade Relations)। 
2. सामाजिक संबंध (Social 3. कृषि संबंध (Agricultural Relations)।

Q.5.‘मलिन बस्ती’ से क्या अभिप्राय है ? इनके कुछ उदाहरण दें । 

Ans. मलिन बस्ती से अभिप्राय एक ऐसे घने बसे आवासीय क्षेत्र से है, जिसमें अस्वच्छ घर होते हैं, जिनमें समाज के कमजोर वर्गों के लोग रहते हैं तथा जिनमें सामाजिक विघटन की प्रवृत्तियाँ पाई जाती हैं। उदाहरण के लिए रांचो (वेनेजुएला), फावेला (ब्राजील), बस्ती अथवा झुग्गी-झोपड़ी (भारत) ।

Leave a Comment