Class 12th Geography Chapter 3 Notes In Hindi | जनसंख्या का संघटन कक्षा 12 पाठ 3 के प्रश्न उत्तर

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मैं खुद 12वीं का टॉपर रहा हूं और मुझे पता है कि 12वीं की परीक्षा में किस तरह के प्रश्न पूछे जाते हैं। वर्तमान में, मैं एक शिक्षक की भूमिका भी निभा रहा हूँ, और अपने छात्रों को कक्षा 12वीं की महत्वपूर्ण जानकारी और विषयों का अभ्यास भी कराता हूँ। मैंने यह लेख 5 वर्षों से अधिक के अपने अनुभव के साथ लिखा है। इस पोस्ट की मदद से आप परीक्षा में इस अध्याय से भूगोल में बहुत अच्छे अंक प्राप्त कर सकेंगे।

Class 12th Geography Chapter 3 Notes In Hindi | जनसंख्या का संघटन कक्षा 12 पाठ 3 के प्रश्न उत्तर

कक्षा | Class12th 
अध्याय | Chapter03
अध्याय का नाम | Chapter Nameजनसंख्या का संघटन
बोर्ड | Boardसभी हिंदी बोर्ड
किताब | Book एनसीईआरटी | NCERT
विषय | Subjectभूगोल | Geography
मध्यम | Medium हिंदी | HINDI
अध्ययन सामग्री | Study Materialsप्रश्न उत्तर | Question answer

पाठ के मुख्य बिंदु | Main Point of This chapter

★ साक्षर – 15 वर्ष अथवा उससे ऊपर की आयु के लोग जो एक छोटे और सरल कथन को समझकर पढ़ तथा लिख सकते हैं, साक्षर कहलाते हैं। 

★ सक्रिय जनसंख्या पारिश्रमिक युक्त व्यवसाय कार्यों से जीविकोपार्जन करने वाली जनसंख्या को आर्थिक रूप से सक्रिय जनसंख्या कहा जाता है। 

★ प्राथमिक व्यवसाय — इसके अन्तर्गत आखेट, कृषि, वानिकी तथा मत्स्य पालन सम्मिलित है। 

★ मानव विकास मानव विकास मनुष्य की आकांक्षाओं एवं उन्हें उपलब्ध जीवन-यापन की सुविधाओं के स्तर को विस्तृत करने की प्रक्रिया है। 

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image credit: webcollection.co.in

★ लिंगानुपात- प्रति हजार पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या । आयु संरचना – जनसंख्या का विभिन्न आयु वर्गों में विभाजन 

★ जनसंख्या पिरामिड – जनसंख्या की आयु और लिंग को पिरामिड के रूप में दर्शाना। * ग्रामीण जनसंख्या — देश की कुल जनसंख्या का भाग जो ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करता हो। * नगरीय जनसंख्या – देश की कुल जनसंख्या का वह भाग, जो बड़े-छोटे नगरों या कस्बों में निवास करता है। 

★ उत्पादक जनसंख्या – देश की कुल जनसंख्या का वह भाग जो कोई काम करके अपनी जीविका अर्जित करता है। आश्रित जनसंख्या — देश की कुल जनसंख्या का वह भाग जिसमें 15 वर्ष से कम आयु के बच्चे तथा 60 वर्ष से अधिक आयु के वृद्ध आते हैं।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न | VERY SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS

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Q. 1. जनसंख्या संघटन, जनसंख्या की कौन-सी विशेषताओं को प्रदर्शित करता है ? 

Ans. जनसंख्या संघटन, जनसंख्या की उन विशेषताओं को प्रदर्शित करता है, जिनकी माप की जा सके तथा जिनकी मदद से दो भिन्न प्रकार के व्यक्तियों के समूहों में अन्तर स्पष्ट किया जा सके।

Q. 2. जनसंख्या के महत्त्वपूर्ण घटक कौन-कौन से हैं ? 

Ans. आयु, लिंग, साक्षरता, आवास का स्थान आदि जनसंख्या को प्रदर्शित करने के महत्त्वपूर्ण घटक हैं।

Q. 3. किसी देश की जनसंख्या को कितने आयु वर्ग में बाँटा जा सकता है ? 

Ans. सामान्यतया किसी देश की जनसंख्या को तीन आयु वर्गों में बाँटा जा सकता है : 1. बाल वर्ग (0-14 वर्ष) 2. प्रौढ़ वर्ग (15-59 वर्ष) 3. वृद्ध (60 वर्ष से अधिक) 

Q. 4. जनसंख्या की आयु-संरचना से क्या अभिप्राय है ?

Ans. विभिन्न आयु वर्गों में लोगों की संख्या को जनसंख्या की आयु-संरचना कहते हैं। आयु-वर्गों का आकार विभिन्न देशों में अलग-अलग हो सकता है और एक देश में भी समय-समय पर यह बदलता रहता है। 

Q.5. ‘मानव संसाधन विकास’ क्या है ?

Ans. संयुक्त राष्ट्र विकास प्रोग्राम (UNDP) द्वारा 1990 में एक मानव संसाधन विकास ब्यौरा प्रस्तुत किया गया जिसमे कहा गया कि ‘विकास’ का अर्थ केवल आय और धन में वृद्धि नहीं है बल्कि यह मनुष्य की उत्पादकता तथा कार्यक्षमता को बढ़ाने की प्रक्रिया होनी चाहिए, क्योंकि लोगों की उत्पादकता व कार्यक्षमता में वृद्धि किसी देश के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। 

किसी भी देश के मानव संसाधनों को अच्छे ढंग से विकसित और प्रशिक्षित करना आवश्यक है, क्योंकि इनके विकास पर ही उस देश के प्राकृतिक संसाधनों का विकास निर्भर है। इसे ही मानव संसाधन विकास (Human Development) कहा जाता है।

Q. 6. उच्चतम जनसंख्या किसे कहते हैं ? 

Ans. जब कुल जनसंख्या और देश के प्राकृतिक साधनों का परस्पर सन्तुलन हो जाता है तो उसे उच्चतम जनसंख्या कहते हैं।

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HistoryPolitical Science
EnglishHindi

Q. 7. जनसंख्या की व्यावसायिक संरचना से क्या अभिप्राय है ? 

Ans. जनसंख्या की व्यावसायिक संरचना का अर्थ है किसी क्षेत्र की विशिष्ट आर्थिक क्रियाओं में जनसंख्या का आनुपातिक वितरण ।

लघु उत्तरीय प्रश्न | SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS

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Q. 1. भारत की जनसंख्या की निम्नलिखित विशेषताओं पर संक्षिप्त चर्चा कीजिए : 

(i) ग्रामीण-नगरीय अनुपात 

(ii) लिंग अनुपात 

(iii) आयु संरचना

  • Ans. (i) ग्रामीण-नगरीय अनुपात (Rural – Urban Ratio)—भारत की कुल जनसंख्या 5 लाख 70 हजार गाँवों तथा 4615 शहरों में बसती है। भारत को सामान्यतः गाँवों का देश समझा जाता है। भारत की कुल जनसंख्या का आधा भाग केवल पाँच राज्यों में रहता है। ये पाँच राज्य हैं- महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, पश्चिमी बंगाल तथा आंध्र प्रदेश। शेष नगरीय जनसंख्या बाकी के 15 राज्यों एवं सात संघशासित क्षेत्रों में रहती है।
  • (ii) लिंग अनुपात ( Sex Ratio) – लिंग अनुपात का अर्थ है किसी क्षेत्र की जनसंख्या में प्रति हजार पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या । भारत की 2001 की जनगणना के अनुसार प्रति एक हजार पुरुषों पर 933 स्त्रियाँ हैं। भारत में लिंग अनुपात प्रतिकूल है।
  • (iii) आयु संरचना (Age Composition)— आयु तथा लिंग पिरामिड लोगों की आयु एवं लिंग के अनुसार जनसंख्या की संरचना दिखाता है। यह जनसंख्या की वृद्धि दर तथा कार्यशील एवं आश्रित जनसंख्या का भी संकेत देता है। आयु संरचना को पिरामिड द्वारा दिखाया जाता है।

Q. 2. महानगर किसे कहते हैं ? संक्षेप में बताइये । 

Ans. दस लाख से अधिक जनसंख्या वाले नगर को महानगर कहते हैं। भारत में महानगरी की संख्या निरंतर बढ़ रही है। 1901 में केवल कोलकाता ही एकमात्र महानगर था। 1941 तक कोलकाता तथा मुम्बई ही दो महानगर थे। परन्तु 1951 में उनकी संख्या 5 हो गई। 1991 23 महानगर थे। 

इनके नाम ग्रेटर मुम्बई, कोलकाता, दिल्ली, चेन्नई, हैदराबाद, बंगलौर अहमदाबाद, पुणे, कानपुर, नागपुर, लखनऊ, सूरत, जयपुर, कोचीन, कोयम्बटूर, बड़ोदरा, इंदौर पटना, मदुरई, भोपाल, विशाखापट्टनम, वाराणसी तथा लुधियाना हैं। इन महानगरों में देश क कुल नगरीय जनसंख्या का 65 प्रतिशत भाग रहता है।

Q. 3. बाल, प्रौढ़ तथा वृद्धि आयु विभिन्नताओं के आधार पर कितने प्रकार है? 

Ans. ऐसी विभिन्नताओं के आधार पर तीन प्रकार की आयु संरचनाएँ पहचानी गई हैं

  • (i) पश्चिमी यूरोपीय प्रकार- इसमें बाल आयु वर्ग, वृद्ध आयु वर्ग में जनसंख्या क्रमश 30 प्रतिशत और 15 प्रतिशत होती है। का अनुपात क्रमश
  • (ii) संयुक्त राज्य प्रकार इस प्रकार की जनसंख्या में बाल तथा वृद्धों 35 से 45 प्रतिशत तथा 10 प्रतिशत होता है।
  • (iii) तृतीय विश्व प्रकार — इस प्रकार की जनसंख्या में बाल आयु वर्ग 55 प्रतिशत तथा वृद्ध 4 से 8 प्रतिशत होते हैं।

Q. 4. विश्व में विभिन्न क्षेत्रों में लिंग अनुपात में विभिन्नताओं के कारण बताओ।

  • Ans. 1. विकासशील देशों में शिशु मृत्यु दर महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में अधिक होती है। 
  • 2. विकसित देशों में पुरुषों की मृत्यु दर अधिक होती है। 
  • 3. महिलाओं तथा पुरुषों का स्थानान्तरण भी लिंग अनुपात पर प्रभाव डालता है। 
  • 4. विकासशील देशों में ग्रामीण क्षेत्र में पुरुषों का नगरों की और प्रवास लिंग अनुपात पर प्रभाव डालता है।

विकसित देशों में उच्च साक्षरता का कारण उच्च शिक्षा-स्तर है। कृषि अर्थव्यवस्था में साक्षरता कम है। विकासशील देशों में शिक्षा क्षेत्रों में क्रांति की आवश्यकता है। 

Q.4. आयु पिरामिड से आपका क्या तात्पर्य है ? संक्षेप में वर्णन करें।

Ans. आयु पिरामिड आयु संरचना का अधिक विस्तृत चित्रण प्रस्तुत करता है। प्रत्येक आयु वर्ग की जनसंख्या को क्षैतिज दंड द्वारा प्रदर्शित करते हैं। दंड की लंबाई उस वर्ग में स्त्रियों तथा पुरुषों के प्रतिशत अनुपात में होती है। पुरुषों को दिखाने वाले दंडों को केन्द्रीय अक्ष के बाई और तथा महिलाओं के दंडों को दाई ओर ऊर्ध्वाधर रूप से व्यवस्थित किया जाता है। अक्ष को एक वर्ष या बहुवर्ष के अंतराल पर विभक्त करते हैं। पिरामिड की तीन अलग-अलग आकृतियों का संबंध जनसंख्या की तीन भिन्न-भिन्न स्थितियों से होता है-

(i) पिरामिड का ऊपर की ओर का पतला स्वरूप लम्बे समय तक परिवर्तन रहित अपरिवर्तित आधार जन्म तथा मृत्यु दरों को दर्शाता है। 

(ii) पिरामिड का चीड़ा आधार तथा पतला शीर्ष बढ़ते जन्म-दर तथा उच्च मृत्यु दर को प्रदर्शित करता है।

(iii) पिरामिड का पतला आधार और पतला शीर्ष घटते हुए जन्म दर तथा निम्न मृत्युदर को प्रदर्शित करता है ।

Q. 5. लिंग अनुपात का किसी देश के प्रौद्योगिक एवं आर्थिक विकास पर क्या प्रभाव पड़ता है, संक्षेप में बताइए ।

Ans. देश के आंतरिक प्रवास में लिंग चयन की तीव्रता उस देश के प्रौद्योगिक एवं आर्थिक विकास से सीधे जुड़ी होती है। विकासशील देशों में विशेषतः एशिया तथा अफ्रीका में, ग्रामीण क्षेत्रों से नगरीय केन्द्रों की ओर पुरुषों के प्रवास की ही प्रधानता पाई जाती है। भारतीय नगरों में अप्रत्याशित रूप से पुरुषों का प्रवास उच्च अनुपात दृष्टिगत होता है। कोलकाता में प्रति हजार पुरुषों पर 570 स्त्रियों की संख्या का होना इसका ज्वलंत उदाहरण है। खनन तथा भारी उद्योगों के केन्द्रों तथा सैन्य नगरों में प्रवास को छोड़कर यहाँ स्त्रियाँ भी ग्रामीण क्षेत्रों की ओर प्रवास करती हैं।

Q. 6. ग्रामीण-नगरीय संघटन पर चर्चा कीजिए। 

Ans. जनसंख्या को ग्रामीण तथा नगरीय जनसंख्या में विभाजित करना, लोगों के आवास की विशेषता होती है। यह विभाजन इसलिए आवश्यक होता है क्योंकि दोनों ही जीवन-यापन के तरीकों तथा सामाजिक पर्यावरण की दृष्टि से एक-दूसरे से अलग होते हैं। व्यावसायिक संरचना, जनसंख्या का घनत्त्व एवं सामाजिक व आर्थिक विकास के स्तरों में दोनों वर्गों में विशेष अन्तर होता है।

गाँवों में निवास करने वाले तथा कृषि करने वाली जनसंख्या को ग्रामीण वर्ग में रखते हैं। इसके विपरीत, नगरीय जनसंख्या गैर कृषि कार्य करने वाली होती है। प्राकृतिक वृद्धि के साथ ग्रामीण क्षेत्रों से नगरों में प्रवास करने वाली जनसंख्या के कारण नगरीय जनसंख्या में वृद्धि होती रहती है।

Q.7 जनसंख्या की किन्हीं तीन विशेषताओं को संक्षेप में स्पष्ट कीजिए.

Ans. मानव जनसंख्या सदैव परिवर्तित होती रहती है यदि जलवायु, खाद्य आपूर्ति अच्छी हो, प्राकृतिक प्रकोप न हो, तो समय बीतने के साथ-साथ जनसंख्या में वृद्धि होती है। 

1. यदि परिस्थितियों प्रतिकूल हो, खाद्य आपूर्ति भाँग से कम हो, प्राकृतिक प्रकोप, जैसे सूखा, बाढ़ या महामारी बार-बार आते हों, तो जनसंख्या में ह्रास हो सकता है। 

2. मानव बहुत गतिशील है। रोजी-रोटी की तलाश में लोग एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित होते रहते हैं। इससे भी जनसंख्या प्रभावित होती है। 

3. यदि जन्म से अधिक मृत्यु होती है तथा प्रवास के कारण लोग नहीं आते हैं, तो जनसंख्या में हास होगा।

Q. 10. उत्पादक जनसंख्या तथा आश्रित जनसंख्या में क्या अन्तर है ? 

Ans. अर्जक जनसंख्या (Active population)— जनसंख्या का वह भाग जो कोई कार्य । करके अपना जीविकोपार्जन करता है, उत्पादक या अर्जक जनसंख्या कहलाता है। इस उत्पादक जनसंख्या का विभिन्न व्यवसायों में विभाजन व्यावसायिक संरचना कहलाता है। 

आश्रित जनसंख्या (Dependent population)— जनसंख्या का वह भाग जिसमें बच्चे तथा वृद्ध आते हैं तथा घर में काम करने वाली महिलाऐं सम्मिलित हैं। ये सब लोग जीविकोपार्जन का कार्य नहीं करते। ये लोग दूसरों पर निर्भर होते हैं। अतः ये आश्रित जनसंख्या कहलाते हैं।

किसी देश में आश्रित जनसंख्या का अधिक प्रतिशत उस देश के निम्न जीवन स्तर तथा विकास का परिचायक है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न | Long Answer Type Questions

Class 12th geography
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Q. 1. 1901 के बाद लिंगानुपात सामान्यतया लगातार घटता जा रहा है। इस कथन की विवेचना कीजिए । 

Ans. जनसंख्या का लिंग संयोजन एक अनुपात के द्वारा प्रदर्शित किया जाता है, जिसे लिंगानुपात कहते हैं। भारत में लिंग अनुपात प्रति हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या के रूप में निकाला जाता है। इस प्रकार 1000 का लिंग अनुपात दोनों पुरुष और महिलाओं की संख्या में पूर्ण समानता का परिचायक है। भारत में लिंग अनुपात 933 है, जिससे पता चलता है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या कम है। 

1901 में भारत का लिंगानुपात 972 था, जो निरंतर कम होते-होते 2001 में 933 रह गया। विद्वानों का मत है कि जन्म के समय लिंगानुपात में इतनी भिन्नता नहीं पाई जाती। जन्म के बाद स्त्रियों की संख्या का कम होना हमारी सामाजिक बुराई है। समाज और परिवार में लड़कों को अधिक सुविधा दी जाती है। लड़कियों के पालन-पोषण पर अधिक ध्यान नहीं दिया जाता। महिलाओं के सभी आयु वर्गों में उच्च मृत्यु दर पाई जाती है। विवाहित स्त्रियों में भी मृत्यु दर अधिक है। 

लिंग अनुपात में इतने अंतर का एक कारण प्रवास भी है। अनेक राज्यों में पुरुष रोजगार के लिए प्रवास करते हैं, जहाँ जाते हैं उन राज्यों या नगरों में पुरुष जनसंख्या अधिक हो जाती है। भारत में केवल केरल राज्य ऐसा है, जहाँ लिंगानुपात 1036 है। भारत के 11 राज्य ऐसे हैं जहाँ राष्ट्रीय औसत से अधिक लिंगानुपात है (981-937 के बीच)। अरुणाचल प्रदेश ऐसा राज्य है, जहाँ न्यूनतम लिंगानुपात (859) है।

भारत की नगरीय जनसंख्या का लिंग अनुपात 894 है। हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, पश्चिमी बंगाल, उत्तर प्रदेश, पंजाब, उड़ीसा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा तथा राजस्थान में नगरीय लिंगानुपात में पुरुषों की प्रधानता पाई जाती है। लिंग अनुपात में विभिन्नताएँ देश के असमान आर्थिक विकास के कारण पैदा होती हैं और मानव एक स्थान से दूसरे स्थान पर रोजी-रोटी के लिए प्रवास को मजबूर हो जाता है जिससे लिंग अनुपात प्रभावित होता है।

Q. 2. विश्व जनसंख्या की आयु संरचना पर एक संक्षिप्त नोट लिखिए। 

Ans. आयु संरचना (Age composition) आयु संरचना किसी भी जनसंख्या की एक आधारभूत विशेषता होती है। किसी देश की जनसंख्या में विभिन्न आयु के लोग निवास करते हैं। आयु संरचना की विभिन्नतायें सामाजिक एवं आर्थिक विभिन्नताओं को जन्म देती हैं। महत्त्व (Importance) आयु संरचना किसी भी जनसंख्या की एक आधारभूत विशेषता होती है। यह कई रहस्यों को उजागर करती है। आयु संरचना की विभिन्नता दूरगामी परिणाम रखती है। 

आयु संरचना से किसी क्षेत्र की श्रम शक्ति का पता चलता है। आयु संरचना देश की आवश्यकताओं व कार्यक्षमता व रोजगार पर प्रभाव डालती है। इससे जनसंख्या के आश्रित वर्ग का पता चलता है। इससे देश की भावी जनसंख्या वृद्धि के प्रतिरूप का ज्ञान होता है। आयु संरचना को निर्धारित करने वाले कारक (Factors determining age structure ) — आयु संरचना को प्रमुख रूप से तीन कारकों द्वारा निर्धारित किया जाता है :

1. प्रजनन 2. मृत्युक्रम 3. देशान्तरण ।

  • आयु वर्ग वितरण (Distribution of age group) किसी देश की जनसंख्या को सामान्यता : तीन वर्गों में रखा जाता है। 
  • 1. बाल आयु वर्ग (Young age group)—इस आयु वर्ग में 0-14 वर्ष तक की जनसंख्या सम्मिलित है। विकासशील अथवा पिछड़े राष्ट्रों की 40 प्रतिशत जनसंख्या इसी वर्ग में तथा विकसित राष्ट्रों की 25-30 प्रतिशत जनसंख्या इस वर्ग के अंतर्गत आती है।
  • 2. प्रौढ़ आयु वर्ग (The adult age group)—इस वर्ग में 15 से 59 वर्ष तक की जनसंख्या तथा जैविक रूप से प्रजननकारी होती है। विकसित राष्ट्रों में यह 60 प्रतिशत तक है।
  • 3. वृद्ध आयु वर्ग (Old age group ) इस आयु वर्ग में 60 वर्ष व उससे अधिक उम्र की जनसंख्या सम्मिलित है। विकसित राष्ट्रों की कुल जनसंख्या में इसका प्रतिशत 10 से 20 प्रतिशत तक है। 

Q.3. लिंग अनुपात किसे कहते हैं? संसार में लिंग अनुपात असंतुलित क्यों है ? उपयुक्त उदाहरणों सहित चार कारणों की व्याख्या कीजिए। 

Ans. प्रति एक हजार पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या को लिंग अनुपात कहते हैं। जैसे भारत में 1000 पुरुषों पर 933 स्त्रियों की संख्या ।

संसार में लिंग अनुपात असंतुलित होने के निम्नलिखित कारण :

  • 1. संसार में विकसित तथा विकासशील दोनों ही अर्थव्यवस्थाओं में शिशु बालिका मृत्यु दर बालक मृत्यु दर की अपेक्षा अधिक है।
  • 2. विकसित देशों में 30 वर्ष की आयु के बाद महिलाओं का प्रभाव अधिक होता है। 3. विकासशील देशों में स्त्रियों को दूसरे दर्जे का स्थान दिया जाता है।
  • 4. महिलाओं के सभी आयु वर्गों में उच्च मृत्यु दर पाई जाती है।
  • 5. समाज और परिवार में लड़कों को प्राथमिकता मिलती है जबकि लड़कियों की उपेक्षा की जाती है। 

Q.4. मानव विकास सूचकांक की माप किन आधारों पर की जाती है ? इन आधारों को स्पष्ट करें। 

Ans. मानव विकास सूचकांक को आर्थिक विकास का एक विश्वसनीय सूचक माना जाता है। आर्थिक विकास के परम्परागत सिद्धांतों की तुलना में मानव विकास की अवधारणा एक अधिक व्यापक अवधारणा है। मानव विकास वस्तुओं के उत्पादन व वितरण तथा मानवीय क्षमता के विस्तार व उपयोग को एक साथ मिलाकर विचार करता है। यह समाज के प्रत्येक पहलू-आर्थिक संवृद्धि, व्यापार, रोजगार, राजनैतिक स्वतंत्रता, सांस्कृतिक मूल्य आदि को लोगों के परिप्रेक्ष्य में विचार करता है। 

इस सूचकांक का माप तीन आधारों पर किया जाता है— (i) जीवन अवधि, (ii) साक्षरता, (iii) जीवन स्तर ।

  • (i) जीवन अवधि. (Longevity)— जीवन अवधि से आशय प्रसन्न एवं स्वस्थ रहते हुए लम्बे समय तक जीवित रहने की आशा से है। इसकी माप जीवन जीने के आधार पर की जाती है। भारत में 2001 की जनगणना के अनुसार जीवन प्रत्याशा 63 वर्ष है)
  • (ii) ज्ञान अथवा शैक्षिक उपलब्धि (Knowledge or Educational Attainment)— ज्ञान से आशय औसत शैक्षिक योग्यता से है। इसकी माप निम्न दो आधारों पर की जाती है: (a) कुल नामांकन अनुपात (b) प्रौढ़ साक्षरता दर ।
  • (iii) जीवन स्तर अथवा प्रति व्यक्ति वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (Real GDP per Capita or Standard of Living ) —— जीवन स्तर से आशय रहन-सहन के स्तर से है। इसकी माप वास्तविक प्रति व्यक्ति आय के आधार पर की जाती है। यह आय जितनी अधिक होगी, व्यक्ति उतनी ही अधिक सुख-सुविधाओं का उपयोग कर सकेगा और मानव विकास सूचकांक भी उतना ही अधिक होगा।

उपरोक्त तीनों आधार ज्ञात करने के पश्चात् इनका औसत ज्ञात किया जाता है और इस औसत को ही मानव विकास सूचकांक कहा जाता है। मानव विकास सूचकांक = जीवन प्रत्याशा सूचकांक + शैक्षणिक उपलब्धि प्रति व्यक्ति वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद सूचकांक इस प्रकार मानव विकास सूचकांक भी 0-1 के मध्य रहता है। यह सूचकांक जितना अधिक होता है आर्थिक विकास उतना ही अधिक माना जाता है।

इस आर्टिकल में किसी भी प्रकार का त्रुटि आपको मिलती है तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं हम उसे जल्द से जल्द ठीक करने की कोशिश करेंगे क्योंकि लिखने समय सबसे गलती हो जाती है 😅😅😅😅😅😅😅😅😅


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FAQs

Q. 1. साक्षरता दर से क्या अभिप्राय है ? 

Ans. साक्षरता दर (Literacy rate ) – साक्षरता दर से अभिप्राय 15 वर्ष व उससे अधिक आयु वर्ग के उन लोगों के प्रतिशत से है जो अपने दैनिक जीवन में अपनी समझ सरल कथन को लिख और पढ़ सकने में समर्थ हो।

Q. 2. साक्षरता को प्रभावित करने वाले कारक कौन-से हैं ?

Ans. आर्थिक विकास का स्तर, नगरीकरण का स्तर, रहन-सहन का स्तर, समाज में स्त्रियों तथा जातीय वर्गों की स्थिति, शिक्षा सुविधाओं की उपलब्धि तथा सरकार की नीति आदि साक्षरता को प्रभावित करने वाले कारक हैं।

Q. 3. संसार में नगरीकरण की दर में वृद्धि के क्या कारण हैं ? 

Ans. विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं की तकनीकी क्षेत्र में उन्नति, औद्योगीकरण तथा रोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी के परिणामस्वरूप नगरीकरण की दर में वृद्धि हुई है।

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