Class 12th Geography-II Chapter 11 Notes In Hindi | अध्याय 11 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कक्षा 12 के प्रश्न उत्तर

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मैं खुद 12वीं का टॉपर रहा हूं और मुझे पता है कि 12वीं की परीक्षा में किस तरह के प्रश्न पूछे जाते हैं। वर्तमान में, मैं एक शिक्षक की भूमिका भी निभा रहा हूँ, और अपने छात्रों को कक्षा 12वीं की महत्वपूर्ण जानकारी और विषयों का अभ्यास भी कराता हूँ। मैंने यह लेख 5 वर्षों से अधिक के अपने अनुभव के साथ लिखा है। इस पोस्ट की मदद से आप परीक्षा में इस अध्याय से भूगोल में बहुत अच्छे अंक प्राप्त कर सकेंगे।

Class 12th Geography-II Chapter 11 Notes In Hindi | अध्याय 11 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कक्षा 12 के प्रश्न उत्तर

कक्षा | Class12th 
अध्याय | Chapter11
भाग | Part II
अध्याय का नाम | Chapter Nameअंतर्राष्ट्रीय व्यापार
बोर्ड | Boardसभी हिंदी बोर्ड
किताब | Book एनसीईआरटी | NCERT
विषय | Subjectभूगोल | Geography
मध्यम | Medium हिंदी | HINDI
अध्ययन सामग्री | Study Materialsप्रश्न उत्तर | Question answer

पाठ के मुख्य बिंदु | Main Point of This Chapter

  • 1. अर्धनिर्मित कच्चा माल ——ऐसी अर्धनिर्मित वस्तुएँ जिन्हें उद्योगों में कच्चे माल के रूप में उपयोग किया जाता है। जैसे प्लास्टिक दाना जिससे उद्योगों में चप्पल आदि बनाई जाती
  • 2. व्यापार संतुलन — निर्यात और आयात के अंतर को व्यापार संतुलन कहते हैं ।
  • 3. पत्तन — वह स्थल क्षेत्र होता है जहाँ गोदी (डॉक), घाट तथा सामान उतारने और चढ़ाने की सुविधाएँ होती हैं। 
  • 4. पोताश्रय समुद्र का अंशतः स्थल भाग से घिरा हुआ क्षेत्र होता है इसमें जहाज सुरक्षित खड़े रहते हैं।
  • 5. अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार—पदार्थों, सेवाओं, कच्चे माल, पूँजी तथा उत्पादित माल आदि का देश की सीमाओं से बाहर विनिमय अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार कहलाता है। 
  • 6. विदेशी मुद्रा विनिमय — वह प्रणाली जिसके अनुसार एक देश की मुद्रा का दूसरे देश की मुद्रा से विनिमय किया जाता है, उसे विदेशी मुद्रा विनिमय कहते हैं।
  • 7. वस्तु विनिमय — किसी पदार्थ को दूसरे पदार्थ से बदलना वस्तु विनिमय कहलाता है। 
  • 8. अनुकूल व्यापार निर्यात का आयात से अधिक होना। 
  • 9. प्रतिकूल व्यापार — आयात का निर्यात से अधिक होना।
  • 10. जलपत्तन —— पोताश्रय का व्यापार करने वाला भाग जहाँ जहाजों पर सामान लादने, उतारने और उसे सुरक्षित रखने तथा यात्रियों के चढ़ने-उतरने और उनके ठहरने के लिए सुविधाएं हो
  • 11. निर्यात- किसी देश से दूसरे देश को भेजी गई वस्तुएँ। 
  • 12. आयात- किसी देश में दूसरे देश से लाई गई वस्तुएँ।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न | VERY SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS

Class 12th geography
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Q. 1. आजकल भारत से कितनी वस्तुओं का निर्यात किया जाता है ?

Ans.9300 वस्तुएँ।

Q. 2. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में भारत की भागीदारी कितनी है ?

उत्तर. 0.5%

Q.3. सन् 2000-01 में हमारे देश का सबसे अधिक निर्यात किस देश को हुआ है ? 

Ans. संयुक्त राज्य अमेरिका.

Q. 4. विदेशी व्यापार में कौन-सा देश भारत का सबसे बड़ा भागीदार है ?

Ans. संयुक्त राज्य अमेरिका। 

Q.5. चेन्नई के अंतर्राष्ट्रीय विमान पत्तन का क्या नाम है ?

Ans. मीनांबकम । 

Q. 6. भारत का आयात तथा निर्यात क्या है ?

Ans. भारत में लगभग 7500 से भी अधिक वस्तुओं का निर्यात तथा लगभग 6000 वस्तुओं का आयात किया जाता है।

Q.7. सबसे अधिक किन पदार्थों का आयात होता है ? 

Ans. सबसे अधिक आयात पेट्रोलियम, पेट्रोलियम उत्पाद, उर्वरक, बहुमूल्य और अल्प मूल्य रत्नों और पूँजीगत वस्तुओं का होता है।

Q.8. भारत में आयात और निर्यात के दो समूह कौन-से हैं ? 

Ans. ये दो समूह है : (क) ईंधन (ख) कच्चा माल और खनिज

class 12th NotesMCQ
HistoryPolitical Science
EnglishHindi

Q.9. निर्यात व्यापार में विनिर्मित वस्तुओं की भागीदारी कितनी है ? 

Ans. सन् 2000-01 में विनिर्मित वस्तुओं की कुल भागीदारी 78.0% थी।

Q.10. किन-किन देशों के साथ भारत के व्यापारिक संबंध हैं ? 

Ans. पश्चिमी यूरोप, आंग्ल अमेरिका, ओशिनिया, पूर्वी यूरोप तथा जापान के साथ भारत के व्यापारिक संबंध हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न | SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS

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Q. 1. जवाहरलाल नेहरू पोताश्रय को क्यों विकसित किया गया ? 

Ans. इसे प्रारंभ में न्हावा शेवा का नाम दिया गया था। यह मुंबई से दूर एलीफेंटा गुफाओं के पार न्हावा शेवा द्वीप पर 26 मई, 1989 को खोला गया। यहाँ कंप्यूटर की सहायता से कार्य किया गया है। मुंबई बंदरगाह पर भीड़-भाड़ तथा कार्य को कम करने के लिए बंदरगाह की स्थापना की गई। यहाँ मुंबई की तुलना में जल की गहराई अधिक है। यहाँ बड़े जहाज आ सकते हैं। यह देश की आधुनिक पत्तन है। 

Q. 2. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार आयातक एवं निर्यातक दोनों देशों के लिए लाभदायक होता है । व्याख्या कीजिए।

Ans. यह सही है कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार अर्थात् दो देशों के मध्य व्यापार से दोनों ही देश लाभान्वित होते हैं। यह किसी भी राष्ट्र के आर्थिक विकास का मापदंड है। आयातक देश को वह वस्तुएँ उपभोग के लिए प्राप्त हो जाती हैं जहाँ वह उत्पन्न नहीं होती और निर्यातक देश की आवश्यकता से अधिक वस्तुओं को बाजार उपलब्ध हो जाता है। भारत में तंबाकू, आलू तथा टमाटर की फसलें अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की ही देन है। ये शीतोष्ण कटिबंध की फसलें हैं जो बाहर से लाई गई। भारतीय व्यापारियों ने ही यहाँ की सभ्यता को दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों तथा अन्य क्षेत्रों तक पहुँचाया। इस प्रकार अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से दोनों देशों को आर्थिक एवं सांस्कृतिक लाभ होता है।

Q.3. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से आप क्या समझते हैं ? इसका आर्थिक एवं सांस्कृतिक महत्व बताइए ।

Ans. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार (International Trade ) — विभिन्न देशों के मध्य वस्तुओं सेवाओं के आदान-प्रदान को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कहते हैं। इसका आर्थिक एवं सांस्कृतिक महत्व होता है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में संलग्ने देश एक दूसरे को अपनी सभ्यता एवं उपज तथा अन्य उत्पादों का आदान-प्रदान करते हैं। उदाहरण के लिए भारत में तबाकू, आलू और टमाटर की फसलें अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की देन हैं जो शीतोष्ण कटिबंधीय देशों से भारत में लाई गई थी इसी प्रकार भारतीय व्यापारियों ने अपनी सभ्यता एवं संस्कृति को दक्षिणी-पूर्वी एशिया के देश तथा विश्व के अन्य देशों में पहुँचाया।

Q. 4. व्यापार संतुलन का क्या अर्थ है ? 

Ans. व्यापार संतुलन (Balance of Trade ) — अमुक देश के एक निश्चित अवधि में

किए गए आयात एवं निर्यात मूल्यों एवं उनके साथ की सेवाओं का अंतर व्यापार संतुलन कहलाता है। जब निर्यात की गई वस्तुओं का मूल्य आयात की गई वस्तुओं से अधिक होता है तो व्यापार संतुलन देश के पक्ष में होता है। इसको धनात्मक कहते हैं। इसके विपरीत, जब आयात की गई वस्तुओं का मूल्य निर्यात की गयी वस्तुओं से अधिक होता है तो व्यापार संतुलन देश के विपक्ष में होता है। इसको ऋणात्मक कहते हैं जब आयात एवं निर्यात की वस्तुओं के मूल्यों में समानता पाई जाती है तब देश का व्यापार संतुलन अनुकूल कहलाता है।

Q.5. “पत्तन अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के द्वार कहलाते हैं।” इस कथन की व्याख्या कीजिए। 

Ans. पत्तन (Port)– समुद्र तट का वह स्थान जहाँ से भारी मात्रा में माल समुद्री मार्गो से स्थलमार्गों द्वारा तथा स्थलमार्गों से समुद्री मार्गों द्वारा भेजा जाता है, पत्तन कहलाता है। पत्तन अपने पृष्ठ प्रदेश के लिए विदेशों से माल आयात करता है तथा अपने पृष्ठ प्रदेश में उत्पादित माल दूसरे देशों को भेजता है। इस प्रकार यह अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए एक द्वार का काम करता है। 

अतः पत्तन को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का द्वार कहते हैं। पत्तन का मुख्य कार्य आयात एवं निर्यात की जाने वाली वस्तुओं को कम समय में सक्षम ढंग से भेजना है। इसकी क्षमता माल के भार तथा जलयानों की संख्या से आँकी जाती है। पत्तन पर अनेक प्रकार की सुविधाएँ उपलब्ध होती हैं, जैसे जहाजों को खड़े होने की सुविधा, मात उतारने और चढ़ाने की सुविधा, माल रखने के लिए गोदामों की सुविधा, नौगम्य चैनल के रख-रखाव की सुविधा तथा बाजारों, टग्स, श्रम आदि का प्रबंध भी करना पड़ता है। 

Q.6. भारत के विदेशी व्यापार संघटन का वर्णन कीजिए।

Ans. भारत एक महत्वपूर्ण व्यापारिक राष्ट्र है। भारत के आर्थिक विकास में विदेशी व्यापार ने निर्णायक भूमिका निभाई है। 7,500 से भी अधिक वस्तुओं का निर्यात तथा लगभग 6,000 वस्तुओं का आयात किया जाता है। कृषि क्षेत्र से लेकर औद्योगिक क्षेत्रों की वस्तुओं के साथ-साथ हथकरघों और कुटीर उद्योगों में निर्मित वस्तुएँ और हस्तशिल्प की वस्तुएँ निर्यात की जाती हैं। कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर के निर्यात में भी असाधारण वृद्धि हुई है। 

सबसे अधिक आयात पेट्रोलियम, पेट्रोलियम उत्पादों, उर्वरकों, बहुमूल्य और अल्प मूल्य रत्नों और पूँजीगत वस्तुओं का होता है। परंपरागत वस्तुओं के स्थान पर अनेक नई वस्तुओं का आयात और निर्यात होने लगा है। 

Q. 7. भारत के आयात व्यापार में किन दो समूहों की प्रधानता है ?

Ans, भारत के आयात व्यापार में वस्तुओं के दो समूहों की प्रधानता है : (क) ईंधन (ख) कच्चा माल और खनिज । देश के कुल आयात में इन दो समूहों की 63% भागीदारी है। सन् 2000-01 में देश के कुल आयात में पेट्रोपिलम और इसके उत्पादों की एक-तिहाई की भागीदारी थी। इसमें कोयले का हिस्सा केवल 2.2% था। दूसरे समूह में मोती बहुमूल्य और अल्प मूल्य रत्न, सोना, चाँदी प्रमुख वस्तुएँ थीं। विविध प्रकार के रसायनों का भी भारी मात्रा में आयात किया जाता है। इसी समूह की अन्य वस्तुएँ हैं—लोहा और इस्पात, अलौह धातुएँ तथा व्यावसायिक उपकरण और प्रकाशिक वस्तुएँ।

Q.8. पश्चिमी यूरोप के साथ भारत के आयात-निर्यात का वर्णन कीजिए । 

Ans. पश्चिमी यूरोप भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक प्रदेश है। सन् 2000-01 की अवधि में कुल आयात 27% तथा कुल निर्यात 25% था। भारत के निर्यात का मुख्य भाग इस प्रदेश के आठ देशों— जर्मनी, इंग्लैंड, बेल्जियम, इटली, फ्रांस, नीदरलैंड, स्पेन और स्विट्ज़रलैंड को जाता है। इन देशों को निर्यात की जाने वाली वस्तुएँ है— रत्न आभूषण, सिले-सिलाए वस्त्र, घमड़ा और चमड़े का सामान, मशीनें, दवाइयाँ, औषधि, हस्तशिल्प, प्लास्टिक उत्पाद, कालीन आदि मुख्य आयात की जाने वाली वस्तुएं- बहुमूल्य और अल्प मूल्य रत्न, चाँदी, सोना, मशीनें, उपकरण, औषधीय उत्पाद आदि ।

Q9. व्यापार संतुलन के घाटे को कम करने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं ?- 

Ans. सरकार ने घाटे को कम करने के लिए तथा निर्यात को बढ़ाने के लिए अनेक कदम उठाए हैं। सौदों की लागत घटाने के लिए कार्य प्रणालियों और औपचारिकताओं का विकेन्द्रीकरण और सरलीकरण किया गया है। बहुपक्षीय और द्विपक्षीय पहल, प्रधान क्षेत्रों की पहचान और विशिष्ट सुविधा प्रदेशों के द्वारा निर्यात को प्रोत्साहित करने की योजनाएँ बनाई गई हैं।

Q.10. भारत के चार अन्तर्राष्ट्रीय वायु पत्तनों के नाम बताइए तथा उन देशों के नाम बताइए जिनको ये वायु पत्तन भारत से मिलते हैं ?

Ans. भारत के चार अंतर्राष्ट्रीय विमान पत्तन निम्नलिखित हैं-

  • 1. दिल्ली – इंदिरा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय विमान पत्तन ।
  • 2. कोलकाता (दमदम), नया नाम सुभाष चन्द्र बोस अंतर्राष्ट्रीय विमान पत्तन । 
  • 3. मुंबई (शांताक्रुज), नया नाम जवाहरलाल नेहरू अंतर्राष्ट्रीय विमान पत्तन ।
  • 4. चेन्नई (मीनाम्बकम), नया नाम अन्ना विमान पत्तन । भारत की अंतर्राष्ट्रीय विमान सेवाओं द्वारा भारत से विदेशों को विमान सेवाओं की व्यवस्था की जाती है। इस समय 44 देशों के साथ भारत के विमान सेवा समझीते हैं। मुख्य देश हैं- अफगानिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, बंग्लादेश, म्यांमार, बेल्जियम, चेकोस्लोवाकिया, मिस्र, इथोपिया, जर्मनी, फ्रांस, घाना, हंगरी, इंडोनेशिया, ईरान इटली, जापान, केन्या, कुवैत, लेबनान, मलेशिया, मॉरीशस, नीदरलैंड, नाइजीरिया, पोलैंड, फिलीपाइन, सऊदी अरब, सिंगापुर, श्रीलंका, स्वीडन, स्विट्जरलैण्ड, सीरिया, थाईलैंड, ब्रिटेन, संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस आदि। इस प्रकर विश्व के महत्वपूर्ण देशों के लिए हमारे देश से वायु परिवहन की सेवाएँ उपलब्ध हैं। 

Q. 11. कोलकाता पत्तन कहाँ पर स्थित है तथा यहाँ से किन वस्तुओं का आयात- निर्यात होता है ? 

Ans. यह हुगली नदी पर स्थित एक नदीय पत्तन है। यह बंगाल की खाड़ी से 128 कि.मी. दूर अंदर की ओर स्थित है। नदी में जल का न्यूनतम स्तर बनाए रखने तथा नौगम्यता सुनिश्चित करने के लिए निरंतर तलमार्जन करना पड़ता है। इस पत्तन से विविध प्रकार की वस्तुओं का आयात-निर्यात किया जाता है। इनमें मुख्य हैं—मशीनें, इंजीनियरी का सामान, पेट्रोलियम और इसके उत्पाद, रसायन, चाय, चीनी, लोहा-इस्पात, जूट और जूट उत्पाद, कपास और सूती पागे। 

Q. 12. विमान पत्तन किसे कहते हैं तथा “मुक्त आकाश नीति” का क्या उद्देश्य है ?

Ans. वायु परिवहन केन्द्रों को विमान पत्तन कहा जाता है। इनका उपयोग मुख्य रूप से यात्री परिवहन के लिए किया जाता है। केवल हल्की और मूल्यवान वस्तुएँ ही मालवाहक वायुयानों द्वारा भेजी जाती हैं। मुक्त आकाश नीति का उद्देश्य भारतीय निर्यातकों की सहायता करना तथा उनके निर्यात को प्रतिस्पर्धात्मक बनाना है। इस नीति के अनुसार कोई विदेशी वायुयान कंपनी या निर्यातकों का संघ माल ले जाने के लिए देश में मालवाहक जहाज ला सकते हैं।

Q. 13. भारत में स्वतंत्रता के पश्चात् निर्यात व्यापार में आए तीन प्रमुख परिवर्तनों को उदाहरण सहित समझाइए । 

Ans. अर्थव्यवस्था की संरचना के साथ भारतीय निर्यात व्यापार में बड़ा परिवर्तन आया है। 1960-61 में पेय पदार्थ और तंबाकू सहित कृषि उत्पाद और खनिज का कुल निर्यात में आधे से अधिक (52.7%) का योगदान था लेकिन 2000-01 में यह घटकर 16% रह गया है। इसके विपरीत निर्मित वस्तुओं का निर्यात 1960-61 में 44% था जो बढ़कर 2000-01 में 78% हो गया। व्यापार संतुलन के घाटे को कम करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। सीदों की लागत घटाने के लिए कार्य-प्रणालियों और औपचारिकताओं का सरलीकरण किया गया है। लौह अयस्क के निर्यात की मात्रा बढ़ाकर 20.2% कर दी गई है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न | Long Answer Type Questions

Class 12th geography
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Q. 1. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के आधार की विवेचना कीजिए ।

Ans. 1. देशों में उत्पादों की विभिन्न मात्रा (Different amount of products in the countries)—– संसार के प्रत्येक देश में एक जैसी प्राकृतिक सम्पदा नहीं पायी जाती। इसका कारण भूमि, जलवायु, मिट्टी आदि की भिन्नता है। कुछ देशों में कई संसाधन उनकी आवश्यकता से अधिक पाए जाते हैं और कुछ देशों में कम। अतः देशों में उत्पादों की विभिन्न मात्रा में उपलब्धि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का आधार बनती है।

2. प्रौद्योगिक दक्षता एवं कुशलता में अंतर (Difference between technique and skill)—कुछ देश अपनी प्रौद्योगिकी दक्षता एवं कुशलता के आधार पर कुछ सामग्रियों का उत्पाद अपनी आवश्यकता से अधिक करते हैं। जैसे जापान तथा पश्चिमी देश मशीनों, दवाओं, वस्त्रों का उत्पादन आवश्यकता से अधिक करते हैं और उन देशों को निर्यात करते हैं जहाँ इनका उत्पादन नहीं होता है और बदले में खनिज तेल, अयस्क, खाद्यान्नों का आयात करते हैं।

3. विदेशी मुद्रा की माँग (Demand of Foreign exchange ) कभी-कभी आंतरिक मॉंग होते हुए भी विदेशी मुद्रा कमाने के लिए कुछ वस्तुओं का निर्यात करते हैं, जैसे भारत से चीनी का, फलों आदि का निर्यात ।

4. परिवहन के साधन (Means of Transport ) – अंतर्राष्ट्रीय व्यापार परिवहन के साधनों पर आधारित होता है, परंतु यह भी सत्य है कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से प्रभावित होकर परिवहन के साधनों का विकास होता है। 

5. सामाजिक तथा राजनैतिक कारक (Social and Political factors) अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का आधार शांति तथा राजनैतिक ढाँचे में स्थायित्व है। युद्ध काल में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार छिन्न-भिन्न हो जाता है। सरकारी नीतियाँ भी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित करती हैं। 

Q. 2. भारत के प्रमुख पत्तनों का वर्णन करें। पश्चिमी तट के पत्तनों की विशेषताएँ तथा व्यापार का उल्लेख कीजिए।

Ans. भारत के प्रमुख पत्तन 11 हैं। इनमें से छः पूर्वी तट पर तथा 5 पश्चिमी तट पर स्थित हैं। भारत के पश्चिमी तट पर कांडला, मुंबई, मार्मगाओ तथा कोच्चि प्रमुख पत्तन हैं। पूर्वी तट पर कोलकाता, पारादीप, विशाखापटनम तथा चेन्नई प्रमुख पत्तन हैं। मंगलोर और तूतीकोरन का बड़े पत्तनों के रूप में विस्तार किया जा रहा है। भारत के प्रमुख पत्तनों का उल्लेख इस प्रकार है- पश्चिम तट के पत्तन- (क) कांडला

विशेषताएँ- 

1. यह एक सुरक्षित व प्राकृतिक पतन है। 

2. इसकी पृष्ठभूमि बहुत विशाल तथा संपन्न है, जिसमें समस्त उत्तर-पश्चिमी भारत के उपजाऊ प्रदेश हैं। 

3. समुद्र की गहराई 10 मीटर से अधिक है।

4. यहाँ बड़े-बड़े जहाजों के ठहरने की सुविधाएँ हैं।

Q.3. विगत चालीस वर्षों में भारत के आयात और निर्यात संघटन का वर्णन कीजिए। 

Ans, आयात का संघटन—भारत के आयात व्यापार में वस्तुओं के दो समूहों की प्रधानता है। ये समूह हैं— 

(i) ईंधन और 

(ii) कच्चा माल और खनिज । 

कुल आयात में इन दो समूहों की 63% की भागीदारी है। 2000-01 में देश के कुल आयात में पेट्रोलियम और इसके उत्पादों की एक-तिहाई की भागीदारी थी। इसमें कोयले का हिस्सा केवल 2.2% था। दूसरे समूह में मोती बहुमूल्य और अल्प मूल्य रत्न, (9.6%), सोना चाँदी (9.3%) प्रमुख वस्तुएँ विविध प्रकार के रसायनों का भी भारी मात्रा (6.7%) में आयात किया जाता है। 

समूह के रूप में पूजीगत वस्तुओं का तीसरा स्थान है। इसमें गैर विद्युत मशीनें, मशीनी उपकरणों सहित यंत्र और उपस्कर बहुत महत्वपूर्ण हैं। आयात के कुल मूल्य में इनकी 5.4% की भागीदारी है। अन्य पूँजीगत सामान में परिवहन उपकरण, विद्युत मशीनें और उपकरण तथा योजना से संबंधित वस्तुओं का महत्व है। 

कुल आयात में खाद्य वस्तुओं की भागीदारी केवल 3.7% की है। काजू और दालें अन्य महत्वपूर्ण आयातित वस्तुएँ हैं— उर्वरक और अखवारी कागज, गत्ता, लुग्दी और रद्दी कागज, इस समूह की अन्य वस्तुएँ हैं जिनकी भागीदारी क्रमशः 1.5 और 0.9% है। अंतिम समूह विविध वस्तुओं का है। इनमें चिकित्सीय और औषध भेषजीय उत्पाद, कपास, रंगाई, चमड़ा और रंगाई की सामग्री, कच्चा रबड़, ऊन रेशा, कृत्रिम रेशे और कृत्रिम राल आदि उल्लेखनीय वस्तुएँ हैं।

निर्यात संघटन निर्यात व्यापार में विनिर्मित वस्तुओं और कृषीय वस्तुओं की प्रधानता है। सन् 2000-01 में निर्यात के कुल मूल्य में निर्मित वस्तुओं की भागीदारी 78.0% थी, जबकि इसी वर्ष कृषीय उत्पादों का हिस्सा केवल 13.5% का था। इस प्रकार दोनों समूहों की भारत के कुल निर्यात मूल्य में भागीदारी कुल मिलाकर 91.5% थी सूती धागे और वस्त्र, मशीनें, औषध और दवाइयों, सूक्ष्म रसायन और उपकरण, ‘धातुओं के उत्पाद, चमड़ा और चमड़े का सामान, परिवहन उपकरण, बिजली का सामान, हस्तशिल्प, प्राथमिक और अर्धनिर्मित लोहा और इस्पात, निर्यात की अन्य प्रमुख विनिर्मित वस्तुएँ हैं। 

कृषीय उत्पादों में सामुद्रिक उत्पाद, मछलियों और उनके उत्पाद निर्यात की प्रमुख वस्तुएँ हैं। भारत के निर्यात में इनकी कुल मूल्य में भागीदारी 3.1% की है। इसके बाद अनाज, चाय, खली, काजू, मसाले, फल और सब्जियाँ, कहवा और तंबाकू का स्थान है। थोड़ी मात्रा में कपास का भी निर्यात किया जाता है। पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात कुल मूल्य का 4.2% है। अयरकों और खनिजों का कुल निर्यात में 2.6% योगदान है। 

Q.4. उचित उदाहरण देते हुए पृष्ठ प्रदेश और शुष्क पत्तनों की व्याख्या कीजिए ।

Ans. पृष्ठ प्रदेश—ये विदेशों को भेजी जाने वाली वस्तुओं के संकलन केन्द्र हैं तथा दूसरी और भारत आने वाली वस्तुओं को प्राप्त करके, देश के आंतरिक भागों में उनका वितरण करने  वाले केन्द्रों के रूप में कार्य करते हैं। पत्तन पर समुद्री मार्गों से भारी मात्रा में माल आता है, जिसको पृष्ठ प्रदेश में वितरण किया जाता है। इसके विपरीत पृष्ठ प्रदेश का माल यहाँ आता है और विदेशों को भेजा जाता है।

शुष्क पत्तन — इस पत्तन द्वारा मुख्य रूप से पेट्रोलियम उत्पादों और शुष्क माल का व्यापार किया जाता है। मुंबई पत्तन पर दबाव कम करने के लिए यहाँ से कुछ दूरी पर न्हावा शेवा में जवाहरलाल नेहरू नाम का पंजीकृत पत्तन का विकास किया गया है। मुंबई पत्तन ने देश के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

Q.5. भारत के व्यापार के प्रमुख भागीदारों तथा उनके साथ होने वाले व्यापार की प्रमुख वस्तुओं का वर्णन कीजिए। 

Ans. पश्चिमी यूरोप, आंग्ल-अमेरिका और पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन देश के प्रमुख व्यापारिक भागीदार हैं। भारत ने संसार के अधिकतर विकासशील देशों के साथ द्विपक्षीय व्यापार का विस्तार किया है। संयुक्त राज्य अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदारी है। अन्य देश- यूनाइटेड किंगडम, बेल्जियम, जर्मनी, स्विट्जरलैंड और जापान भी व्यापारिक भागीदारी हैं। 

आंग्ल-अमेरिका — मुख्यतः रत्न और आभूषण, सिले-सिलाए वस्त्र, सूती धागा, वस्त्र, धातु निर्मित वस्तुएँ, हस्तशिल्प आदि का निर्यात करता है तथा इलेक्ट्रॉनिक सामान, मशीनों, व्यावसायिक उपकरणों, रसायनों और बहुमूल्य रत्नों का सं. रा. अमेरिका से आयात करता है। पश्चिमी यूरोप–निर्यात की जाने वाली वस्तुएँ हैं–रत्न और आभूषण, वस्त्र, चमड़ा और चमड़े का सामान, मशीनें, दवाइयाँ, औषधि, हस्तशिल्प, प्लास्टिक उत्पाद, कालीन आदि। 

आयात की जाने वाली वस्तुएँ हैं— अल्प मूल्य रत्न, चाँदी, सोना, मशीनें, उपकरण, औषधियाँ उत्पाद आदि । पश्चिमी एशिया और उत्तरी अफ्रीका – निर्यात की जानेवाली वस्तुएँ प्रसंस्कृत खाद्य-पदार्थ, दवाइयाँ और औषधि तथा रत्न आभूषण । आयात की जाने वाली वस्तुएँ—उर्वरक, शैल, फॉस्फेट, कपास आदि।

पूर्वी एशिया निर्णत की जाने वाली वस्तुएं खाली, रतन-आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक सामान, कपास और सूती वस्त्र, मशीनें और उपकरण, लोहा और इस्पात, दवाइयाँ तथा औषधि, माँस • उत्पाद तथा सामुद्रिक उत्पाद। आयात की जाने वाली वस्तुएँ—कोकिंग कोयला, मशीनें, बिजली की मशीनें, लकड़ी और लकड़ी के उत्पाद, अलीह धातुएँ, ऊन, दालें आदि ।

अफ्रीका –निर्यात की जाने वाली वस्तुएँ—सूती धागे, वस्त्र, दवाइयाँ तथा औषधियाँ, रसायन, धातुओं के उत्पाद, लोहा और इस्पात, प्लास्टिक, पेट्रोलियम उत्पाद, रसायन आदि । लैटिन अमेरिका — निर्यात की जाने वाली वस्तुएँ— वस्त्र और परिधान, दवाइयाँ और औषधियाँ, इंजीनियर का सामान, मोटरवाहन, डीजल इंजन, चमड़े का सामान आदि । आयात की जाने वाली वस्तुएँ— कच्चे खनिज, लोहा और इस्पात तथा अनेक उत्पाद, अलौह धातुएँ, वनस्पति तेल, लुगदी और रद्दी कागज, ऊन आदि का आयात करता है।

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FAQs

Q.1. भारत के छः प्रमुख पत्तनों के नाम बताइये। इनमें से तीन पश्चिमी तट पर तीन पूर्वी तट के होने चाहिए।

Ans. पश्चिमी तट के पत्तन – 1. मुंबई, 2. मंगलोर, 3. कोच्चि । पूर्वी तट के पत्तन – 1. तूतीकोरन, 2. चेन्नई, 3. विशाखापटनम ।

Q. 2. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का महत्वपूर्ण आधार क्या है ?

Ans. देश में उत्पादों की विभिन्न मात्रा में उपलब्धि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का महत्वपूर्ण आधार है।

Q3. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के विभिन्न आधार कौन-कौन से हैं ? 

Ans. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के विभिन्न आधार निम्नलिखित हैं- 1. देशों में उत्पादों की विभिन्न मात्रा । 2. प्रौद्योगिक दक्षता एवं कुशलता में अंतर। 3. विदेशी की माँग। 4. परिवहन के साधन । 5. सामाजिक तथा राजनैतिक कारक। 6. विकसित देशों मुद्रा कच्चे माल की माँग। 7. विकासशील देशों में औद्योगिक उत्पादों की माँग ।

Q.4. नेवी पत्तन के क्या उपयोग हैं ? 

Ans. तेवी पत्तनों का सामरिक महत्व अधिक तथा व्यापारिक महत्त्व कम होता है। यहाँ नी सेना के लड़ाकू जहाज रखे जाते हैं। यहाँ जहाजों को खड़ा करने, उनकी मरम्मत करने तथा लंगर डालने की व्यवस्था होती है।

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