Class 12th Geography-II Chapter 3 Notes In Hindi | मानव विकास कक्षा 12 पाठ 3 के प्रश्न उत्तर

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मैं खुद 12वीं का टॉपर रहा हूं और मुझे पता है कि 12वीं की परीक्षा में किस तरह के प्रश्न पूछे जाते हैं। वर्तमान में, मैं एक शिक्षक की भूमिका भी निभा रहा हूँ, और अपने छात्रों को कक्षा 12वीं की महत्वपूर्ण जानकारी और विषयों का अभ्यास भी कराता हूँ। मैंने यह लेख 5 वर्षों से अधिक के अपने अनुभव के साथ लिखा है। इस पोस्ट की मदद से आप परीक्षा में इस अध्याय से भूगोल में बहुत अच्छे अंक प्राप्त कर सकेंगे।

Class 12th Geography-II Chapter 3 Notes In Hindi | मानव विकास कक्षा 12 पाठ 3 के प्रश्न उत्तर

कक्षा | Class12th 
अध्याय | Chapter03
भाग | Part II
अध्याय का नाम | Chapter Nameमानव विकास
बोर्ड | Boardसभी हिंदी बोर्ड
किताब | Book एनसीईआरटी | NCERT
विषय | Subjectभूगोल | Geography
मध्यम | Medium हिंदी | HINDI
अध्ययन सामग्री | Study Materialsप्रश्न उत्तर | Question answer

पाठ के मुख्य बिंदु | Main Point of This Chapter

  • ★ आर्थिक संकेतक मानव विकास तथा प्रगति के लिये
  • * जीवन प्रत्याशा—जीवन की औसत आयु। 
  • * जनगणना-किसी देश की जनसंख्या की तात्पर्य लोगों का आर्थिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक विकास करना है। कार्य। 
  • * सामाजिक संकेतक शिक्षा, साक्षरता आदि। 
  • ★ मानव विकास मानव विकास का एक निश्चित समय में गणना करना। 
Class 12th Geography-II Chapter 3
मानव विकास

याद रखने योग्य बातें | Things to remember

  • 1. मानव विकास—लोगों के कल्याण के लिए लोगों के विकल्पों को अधिक करने की क्रिया को मानव विकास कहते हैं।
  • 2. मानव विकास सूचकांक का उद्देश्य लोगों का कल्याण तथा रहन स्तर ऊँची करना 3. मानव विकास सूचकांक के संकेतक— HDI में निम्नलिखित संकेतक चुने जाते हैं दीर्घ और स्वस्थ जीवन, शिक्षा, उच्च जीवन स्तर, साक्षरता, प्रति व्यक्ति आय। 
  • 4. भारत का मानव विकास सूचकांक विश्व के 162 देशों में भारत का 128वां स्थान है
  • 5. जनांकिकीय संकेतक – भारत में मृत्यु दर 8.7 प्रति एक हजार व्यक्ति, जन्म दर प्रति एक हजार व्यक्ति, शिशु दर 70 प्रति हजार तथा जीवन प्रत्याशा 65 वर्ष है। 
  • 6. सामाजिक संकेतक साक्षरता दर (65.38%) है जबकि केरल राज्य में 90.92% है
  • 7. आर्थिक संकेतक – 1999-2000 में GDP 11485 बिलियन रुपए थी। प्रति व्यक्ति आय 10063 रुपये थी। निर्धनता दर 26.10% थी। 
  • 8. सबसे अधिक मानव विकास सूचकांक- केरल राज्य में सबसे अधिक मानव सूचकाद 0.638 था जबकि बिहार में सबसे कम 0.367 था।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न | VERY SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS

Class 12th geography
Class 12th geography

Q.1. संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम संस्था ने मानव विकास को नापने के लिए पैमाना कब विकसित किया था ? 

Ans. सन् 1990 मेंमें

Q.2. सन् 2002 की मानव विकास की रिपोर्ट के अनुसार मानव विकास की दृष्टि से किस देश को प्रथम स्थान मिला है तथा इसमें भारत देश का कौन-सा स्थान है? 

Ans. प्रथम स्थान नार्वे तथा भारत का 124वाँ स्थान।

Q. 3. मानव विकास सूचकांक में विकास के किन कारकों को आधार बनाया गया है? 

Ans. दीर्घायु, शिक्षा तथा आय।

Q. 4. शिक्षा के किन दो पक्षों को मानव विकास का मानदंड माना गया है ?

Ans. (i) साक्षरता दर और (ii) विद्यालयी शिक्षा की अवधि ।

Q.5. सन् 2002 की मानव विकास की रिपोर्ट में किन तीन सूचकों को जोड़ा गया है ? 

Ans. (i) सूचना प्रौद्योगिकी (टेलीफोन, सेल्युलर व इंटरनेट) (ii) जैव प्रौद्योगिकी और (iii) महिलाओं की दशा ।

Q. 6. भारत में सबसे अधिक साक्षरता दर किस राज्य की है ? 

Ans. केरल (90.92%) ।

Q.7. भारत में सबसे कम साक्षरता दर किस राज्य की है ? 

Ans. बिहार (47.53%)।

class 12th NotesMCQ
HistoryPolitical Science
EnglishHindi

Q.8. भारत में जनसंख्या वृद्धि का मुख्य कारण क्या है ? 

Ans. ऊँची जन्मदर और लगातार घटती मृत्युदर ।

Q. 12. किन राज्यों में साक्षरता की दर सर्वाधिक है ? 

Ans. 9 राज्य तथा केन्द्रशासित प्रदेशों में शिक्षा का दर सर्वाधिक है। इनमें केरल सर्वप्रथम स्थान पर है। यहाँ साक्षरता दर 90.92% है। अन्य राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश मिजोरम, लक्षद्वीप, गोआ, दिल्ली, चंडीगढ़, पांडिचेरी, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह तथा दमन व दीव है।

लघु उत्तरीय प्रश्न | SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS

Class 12th geography
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Q. 1. मानव विकास के स्तर के मापन के लिए कौन-कौन से संकेतकों का उपयोग किया जाता है ?

  • Ans. मानव विकास के विविध आयामों के मापन के लिए संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम ने एक मिश्र संकेतक का निर्माण किया है। इसे अब मानव विकास सूचकांक के रूप में जाना जाता है। 
  • इसमें (i) दीर्घ जीविता (ii) ज्ञान आधार और (iii) उच्च जीवन स्तर शामिल हैं। भारत में 2001 का मानव विकास प्रतिवेदन तैयार करने के लिए संकेतको के तीन समूहों का चयन किया गया।
  • (1) मानव संकेतक – यह संपूर्ण मानव समाज को प्रदर्शित करता है। समाज के सुविधा वंचित वर्ग की दशा के मूल्यांकन के लिए मानव निर्धनता सूचकांक बनाया गया है। 
  • (2) स्वास्थ्य संकेतक ——इसमें दीर्घ जीविता से सम्बन्धित जन्मदर, शिशु दर, मृत्यु दर, पोषण तथा जन्म के समज जीवन प्रत्याशा से जुड़े स्वास्थ्य संकेतक शामिल हैं।
  • (3) सामाजिक संकेतक—सामाजिक संकेतकों में साक्षरता, विशेष रूप से स्त्री साक्षरता, स्कूल जाने वाले बच्चों का नामांकन, विरत छात्र अनुपात तथा छात्र अध्यापक अनुपात शामिल है। 
  • (4) आर्थिक संकेतक वेतन, आय और रोजगार से संबंधित है। प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उपाद, गरीबी का विस्तार तथा बेरोजगार के अवसर इस समूह के वांछित संकेतक है।

Q.2. साक्षरता के महत्व का उल्लेख कीजिए।

Ans. साक्षरता तथा शिक्षा किसी भी समाज के विकास के महत्वपूर्ण सूचक है। आज भी • सभ्यता के विभिन्न पहलुओं जैसे आधुनिकीकरण, औद्योगीकरण, नगरीकरण, संचार व व्यापार आदि के लिए साक्षरता व शिक्षा आधार प्रदान करती है। यह सामाजिक, राजनीतिक तथा सांस्कृतिक पर्यावरण को समझने के लिए मूलभूत निवेश है। शिक्षा तथा साक्षरता के प्रसार से लोगों में जागरूकता बढ़ती है और आर्थिक विकास तेजी से होता है। इससे जनसंख्या, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पर्यावरण और स्त्रियों तथा समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के बारे में संवेदनशीलता इढ़ती है। इसके अतिरिक्त जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में दक्षता प्राप्त करने के लिए भी साक्षरता की आवश्यकता होती है।

Q. 3. भारत में प्राथमिक स्तर पर नामांकन का प्रतिरूप बनाएँ । 

Ans. प्राथमिक स्तर (I-V) कुल नामांकन में भी 5.91 गुनी वृद्धि हुई है। 1950-51 में नामांकन 1.92 करोड़ था, जो बढ़कर 1999-2000 में 11.361 करोड़ हो गया है इसमें बालिकाओं के नामांकन में वृद्धि हुई है। 1950-51 में यह 28.1% था जो बढ़कर 1999-2000 में 43.6% हो गया है। उच्च प्राथमिक स्तरों (VI-VIII) पर कुल नामांकन बढ़ा है, जो इसी अवधि में 31 लाख से बढ़कर 4.2 करोड़ हो गया। नामांकन में राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों में बहुत असमानता है।

Q.5. मानव विकास क्यों आवश्यक है, व्याख्या कीजिए। 

Ans. निम्नलिखित कारणों से मानव विकास आवश्यक है-

  • (1) विकास का उद्देश्य मानदीय दशाओं को सुधारना तथा लोगों के लिए विकल्पों को बढ़ाना है। 
  • (2) मानव विकास उच्चतर उत्पादकता का साधन हैं। सुपुष्ट, स्वस्थ, शिक्षित, कुशल श्रमिक अधिक उत्पादन करने में समर्थ होते हैं। अतः उत्पादकता के आधार पर मानव विकास में विनिवेश न्यायसंगत है। 
  • (3) मानवीय प्रजनन की गति धीमी करके यह परिवार के आकार को छोटा करने में मदद करता है। 
  • (4) मानव विकास भौतिक पर्यावरण हितैषी भी है। गरीबी घटने से निर्वनीकरण, मरुस्थलीकरण और मृदा अपरदन भी कम हो जाता है। 
  • (5) सुथरी मानवीद दशाएँ समाज के कल्याण में योगदान करती हैं। 
  • (6) मानव विकास सामाजिक अशांति को कम करता है तथा राजनीतिक स्थिरता को बढ़ाने में सहायक होता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न | Long Answer Type Questions

Class 12th geography
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Q.1. आर्थिक विकास और मानव विकास किस प्रकार एक-दूसरे से संबंधित हैं? मानव विकास की आवश्यकता क्यों हुई ?

  • Ans. (i) आर्थिक विकास और मानव विकास (Economic and Human Develop ment) – मानव विकास के आर्थिक संकेतक वेतन, आय और रोजगार से संबंधित हैं। प्रति व्यक्ति घरेलू उत्पाद, गरीबी का विस्तार तथा रोजगार के अवसर इस समूह के वांछित संकेतक हैं। मानव विकास के समग्र चित्रण के लिए इन्हें मिश्र सूचकांक में परिवर्तित कर लिया गया है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत ने अल्प मानव विकास किया है। मानव विकास सूचकांक में भारत का 162 देशों में 115वां स्थान है। मानव विकास की दृष्टि से न केवल विकसित देश भारत से आगे हैं अपितु श्रीलंका और इंडोनेशिया जैसे विकासशील देश भी भारत से बहुत आगे हैं। आर्थिक विकास में मानव की आय बढ़ाने पर बल दिया जाता है। आय के विस्तार को इसका आवश्यक साधन माना जाता है।
  • (ii) मानव विकास की आवश्यकता (Need of Human Development) अग्रलिखित कारणों से मानव विकास आवश्यक है—
  • (1) विकास का उद्देश्य मानवीय दशाओं को सुधारना तथा लोगों के लिए विकल्पों को बढ़ाना है। 
  • (2) मानव विकास उच्चतर उत्पादकता का साधन है। सुपुष्ट, स्वस्थ, शिक्षित, कुशल और सतर्क श्रमिक अधिक उत्पादन करने में समर्थ होते हैं। अतः उत्पादकता के आधार पर मानव विकास में विनिवेश न्यायसंगत है। 
  • (3) मानवीय प्रजनन की गति धीमी करके यह परिवार के आकार को छोटा करने में मदद करता है। 
  • (4) मानव विकास भौतिक पर्यावरण हितैषी भी है। गरीबी घटने से निर्वनीकरण, मरुस्थलीकरण और मृदा अपरदन भी हो जाता है। 
  • (5) सुधरी मानवीय दशाएँ समाज के कल्याण में योगदान करती हैं। 
  • (6) मानव विकास सामाजिक अशांति को कम करता है तथा राजनीतिक स्थिरता को बढ़ाने में सहायक होता है। 

Q.2. आर्थिक विकास प्राकृतिक पर्यावरण व प्रौद्योगिकी पर निर्भर करता है। व्याख्या करें।

Ans. (i) विकास (Development )—लोगों के विकल्पों के परिवर्धन की प्रक्रिया और जनकल्याण के स्तर को ऊँचा उठाना ही मानव विकास है। प्रादेशिक विकास के संदर्भ में विकास की धारणा है कि लोगों का रहन-सहन ऊँचा हो तथा मानव कल्याण की सामान्य दशाओं में वृद्धि हो। प्रति व्यक्ति आय विकास की महत्वपूर्ण सूचक है। इसलिए लोगों की प्रति व्यक्ति आय बढ़े। आर्थिक उत्पाद तथा राष्ट्रीय आय में वृद्धि हो। इस प्रकार देश के सभी भागों में तथा समाज के सभी वर्गों में समान रूप से उन्नति हो।

प्रबलों का प्रभाव (Impact of Components of Development)

(ii) विकास के प्राचल (Components of Development) किसी भी देश के विकास ३ तीन आधारभूत प्रांचल हैं- 

(क) प्राकृतिक पर्यावरण,(ख) प्रौद्योगिकी, (ग) संस्थाएँ।

  • (क) प्राकृतिक पर्यावरण (Natural Environment) की निधारित करता है। उदाहरण के लिए वनाच्छादित प्रदेशों में लकड़ी काटना व शिकार करना, तटीय भागों में मत्स्यन, नदी घाटियों में कृषि करना लोगों के मुख्य व्यवसाय है। 
  • (ख) प्रौद्योगिकी (Technology) किसी भी देश में उत्पादन का स्तर वहाँ के लोगों को उपलब्ध प्रौद्योगिकी पर निर्भर होता है। प्रौद्योगिकी वह अस्त्र है जिसके माध्यम से मनुष्य अपने प्राकृतिक वातावरण का उपयोग करता है। भारत प्राकृतिक संसाधनों में निर्धन नहीं है, बल्कि प्रौद्योगिकी में निर्धन है। 
  • (ग) संस्थाएँ (Institutions ) आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए संस्थाएँ बनाई जाती हैं। ये संस्थाएँ समाज को सुचारू रूप से संचालित करती हैं। कई बार इन संस्थाओं की आलोचना के कारण आर्थिक विकास रुक जाता है।

Q.3. मानव विकास के आधारभूत कारकों का वर्णन करें। 

Ans. मानव विकास के पैमाने पर अंक प्रदान करते समय तीन संकेतकों को समान महत्ता दी जाती है। जिस देश के नागरिकों की जीवन प्रत्याशा अधिक, शिक्षा उन्नत और उच्च तथा आय अधिक होती है मानव विकास की दृष्टि से उसी राष्ट्र की दशा बहुत अच्छी मानी जाती है। ये संकेतक निम्न हैं-

(i) दीर्घायु (Longevity ) – दीर्घायु जन्म के समय औसत जीवन प्रत्याशा के आधार पर मापी जाती है। ये स्वास्थ्य व सुरक्षा की सबसे अच्छी और सीधी सच्ची माप है। दीर्घ आयु पैष्टिक आहार, अच्छी चिकित्सा सुविधाओं और स्वच्छता का ही परिणाम होती है। इसलिए मानव विकास के मापन के समय देश में शुद्ध पेय जल की व्यवस्था, आवश्यक दवाओं की उपलब्धि, प्रति एक लाख आवादी पर डॉक्टरों की संख्या, कुपोषण, शिशु मृत्यु दर, सकल घरेलू उत्पाद एवं स्वास्थ्य पर व्यय आदि का ध्यान रखा जाता है।

(ii) शिक्षा (Education ) — शिक्षा को प्रौढ़ साक्षरता दर और विद्यालयी शिक्षा के वर्षों की औसत संख्या के आधार पर नापा जाता है। मानव विकास की दृष्टि से प्रथम स्थान वाले नार्वे में प्रौढ़ साक्षरता दर शत प्रतिशत है। नार्वे के सभी स्त्री-पुरुष 16 वर्षों तक विद्यालय में शिक्षा प्राप्त करते हैं। भारत में पुरुषों की साक्षरता दर लगभग 76 तथा स्त्रियों की 54 प्रतिशत है। सियरालियोन की साक्षरता दर पुरुषों की 45 तथा स्त्रियों की 18 प्रतिशत है।

(iii) आय (Income) आय की गणना सकल घरेलू उत्पादन में प्रति व्यक्ति आय के रूप में की जाती है। प्रति व्यक्ति आय को डॉलर में क्रय शक्ति समता के रूप में बदल लिया जाता है। यही नहीं आय को असमान प्रतिफल के अनुकूल बना लिया जाता है। इसका अर्थ हुआ कि किसी देश में किसी व्यक्ति की आय में क्या-क्या खरीदा जा सकता है। हमारे देश में वास्तविक राष्ट्रीय आय की गणना वर्ष 1993-94 की कीमतों के आधार पर की जाती है। इससे राष्ट्रीय आय में कीमतों से होने वाली वृद्धि को हटा दिया जाता है।

सूत्र प्रति व्यक्ति वास्तविक राष्ट्रीय आय = कुल राष्ट्रीय आय (आधार वर्ष की कीमतों पर ) कुल जनसंख्या

स्थिति अच्छी नहीं कही जा सकती। हमारे देश की प्रति व्यक्ति आय (2000) 2,358 डॉलर नार्वे की प्रति व्यक्ति आय 29,918 डॉलर है। प्रति व्यक्ति आय की दृष्टि से भारत की थी तथा आय की दृष्टि से संसार में हमारा स्थान 160वां था।

इस आर्टिकल में किसी भी प्रकार का त्रुटि आपको मिलती है तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं हम उसे जल्द से जल्द ठीक करने की कोशिश करेंगे क्योंकि लिखने समय सबसे गलती हो जाती है 😅😅😅😅😅😅😅😅😅


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FAQs

Q.1 सन् 2001 की जनगणना के अनुसार भारत की जन्मदर और मृत्युदर कितनी है ? 

Ans. जन्म दर 26 प्रति हजार और मृत्यु दर 8 प्रति हजार । 

Q. 2. मानव विकास सूचकांक से आप क्या समझते हैं ?

Ans. मानव विकास के मापन के लिये जिस मापक का प्रयोग किया जाता है उसे मानद विकास सूचकांक कहते हैं।
1. दीर्घजीविता, 2. ज्ञान आधार, 3. उच्च जीवन स्तर मुख्य सूचक है। 

Q. 3. मानव विकास सूचकांक में विश्व में भारत का क्या स्थान है ? 

Ans. संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा 162 देशों के लिये विकसित मानव विकास में भारत का 115वां स्थान है। भारत को मध्यम विकास के देशों में स्थान मिला है।

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