Class 12th Geography-II Chapter 6 Notes In Hindi | जल-संसाधन कक्षा 12 पाठ 6 के प्रश्न उत्तर

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मैं खुद 12वीं का टॉपर रहा हूं और मुझे पता है कि 12वीं की परीक्षा में किस तरह के प्रश्न पूछे जाते हैं। वर्तमान में, मैं एक शिक्षक की भूमिका भी निभा रहा हूँ, और अपने छात्रों को कक्षा 12वीं की महत्वपूर्ण जानकारी और विषयों का अभ्यास भी कराता हूँ। मैंने यह लेख 5 वर्षों से अधिक के अपने अनुभव के साथ लिखा है। इस पोस्ट की मदद से आप परीक्षा में इस अध्याय से भूगोल में बहुत अच्छे अंक प्राप्त कर सकेंगे।

Class 12th Geography-II Chapter 6 Notes In Hindi | जल-संसाधन कक्षा 12 पाठ 6 के प्रश्न उत्तर

कक्षा | Class12th 
अध्याय | Chapter06
भाग | Part II
अध्याय का नाम | Chapter Nameजल-संसाधन
बोर्ड | Boardसभी हिंदी बोर्ड
किताब | Book एनसीईआरटी | NCERT
विषय | Subjectभूगोल | Geography
मध्यम | Medium हिंदी | HINDI
अध्ययन सामग्री | Study Materialsप्रश्न उत्तर | Question answer

पाठ के मुख्य बिंदु | Main Point of This Chapter

★ घन मीटर जल यदि एक वर्ग मीटर समतल भूमि पर एक मीटर ऊंचाई तक जा भरा रहे तो उसे एक घन मीटर कहते हैं। 

* हैक्टेयर मीटर एक हेक्टेयर समतल भूमि पर एक मीटर की ऊँचाई तक जल को स्थिर रखा जाए तो आयतन एक हेक्टेयर मीटर होगा। 

★ वर्षा जल संग्रहण वर्मा के जल को भविष्य में उपयोग के लिए इकट्ठा करना ही वर्षा जल संग्रहण कहलाता है। 

* जल संभर-जल संभर प्राकृतिक दृष्टि से एक सुनिश्चित क्षेत्र होता है जिसका गल एक बिंदु की ओर प्रवाहित होता है। यह जाला संभार कहलाता है। 

★ सिंचाई वर्षा के अभाव में कृत्रिम रूप से खेतों तक जल पहुंचाने की क्रिया को सिचाई क हैं। 

★ नित्यवाही नहरें जिन नहरों में जल सदा प्रवाहित होता उन्हें नित्यवादी न करते हैं। 

★ अनित्यवाही नहरें जिन नहरों में बाढ़ के समय जल उप होता है उन्हें मानसूनी कहते हैं।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न | VERY SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS

Class 12th geography
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Q. 1. भारत की सभी नदियों में वार्षिक जल की कुल मात्रा कितनी है? 

Ans. 1869 अरब घनमीटर। 

Q.2. भारत में भूमिगत जल की कितनी क्षमता उपलब्ध है?

Ans. 433 अरब घनमीटर।

Q.3. शक्ति उत्पादन में कितने प्रतिशत जल का उपयोग होता है?

Ans. कुल उपलब्ध जल का 3.6% । 

Q.4. भारत में सिंचाई की आवश्यकता के कोई तीन कारण बताइए।

Ans. 1. अनिश्चित वर्षा, 2. असमान वितरण, 3. वर्षा का कुछ महीनों में 

class 12th NotesMCQ
HistoryPolitical Science
EnglishHindi

Q.5. नवीं पंचवर्षीय योजना में सिंचित क्षेत्र कितना था ?

Ans. लगभग 10 करोड़ हैक्टेयर । 

Q.6. भारत में किस साधन से अधिक सिंचाई होती है ?

Ans. कुएँ और नलकूप ।

Q.7. सिंचाई की सबसे अधिक गहनता किन राज्यों में है ? 

Ans. कश्मीर घाटी, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तरी बिहार, गोदावरी-कृष्णा-कावेरी के डेल्टा प्रदेश तथा उत्तर-पूर्वी असम

Q.8. जल संरक्षण के कोई तीन उपाय बताइए । 

Ans. 1. नदियों पर बाँध, 2. प्रदूषित जल का पुनश्चक्रण, 3. सक्षम पद्धतियाँ, 4. सिंचाई के लिए पाईप, 5. जत अंतणी अंतरण, 6. वर्षा जल संग्रहण।

Q. 9. राष्ट्रीय जल संसाधन नीति कब अपनाई गई थी ? 

ANS: 1987 

Q. 10. “जल जीवन का आधार है। अतः इसका संरक्षण जीवन का संरक्षण है। व्याख्या कीजिए।

Ans. पृथ्वी के परातल पर दो-तिहाई जल है। जल समस्त वनस्पतियों, पशुओं तथा मानद जीवन का आधार है। जल का उपयोग कृषि, उद्योगों, यातायात, ऊर्जा तथा घरेलू उपयोग के संसाधन के रूप में किया जाता है। जल शरीर के पाँच तत्वों में से एक है। पेय जल के बिना मनुष्य जीवित नहीं रह सकता। इसीलिए कहा जाता है कि जल जीवन का आधार है और इसक संरक्षण जीवन का संरक्षण है।

लघु उत्तरीय प्रश्न | SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS

Class 12th geography
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Q. 1. वर्षा जल किसे कहते हैं ? वर्षा जल संग्रहण के किन्हीं चार उद्देश्यों का उल्लेख कीजिए।

Ans. वर्षा जल संग्रहण जल के पुनर्भरण को बढ़ाने की एक विधि है। इसके प्रमुख उद्देश निम्नलिखित है-

  • 1. जल की निरंतर माँग को पूरा करना। 
  • 2. नालियों को रोकने वाले सतही जल प्रवाह के कम करना। 
  • 3. भौम जल में वृद्धि करना तथा जल स्तर को ऊँचा उठाना। 
  • 4. भौम जल प्रदूषण को रोकना। 
  • 5. भीम जल की गुणवत्ता को सुधारना। 
  • 6. मृदा अपरदन को कम करना।
  • 7. सड़क पर जल फैलाव को रोकना। 
  • 8. ग्रीष्मकाल में जल की घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करना। 

Q. 2. सुखोमाजरी गाँव (हरियाणा) में जल संसाधनों के विकास की चर्चा कीजिए। 

Ans. सुखोमाजरी गाँव हरियाणा के अम्बाला जिले में स्थित है। इस गाँव के लोगों ने अपने गाँव के विकास के लिए वन और जल संसाधनों का पूर्ण रूप से विकास किया है। इसी कार यह गाँव देश भर में प्रसिद्ध हो गया है। चंडीगढ़ के निकट सुखना झील के गाद से भर जा के कारण इस गाँव में पानी की कमी रहने लगी थी। झील के जल संग्रहण क्षेत्र में चार बाँध बनाए गए तथा अनेक पेड़-पौधे लगाए गए। इन कार्यों से गाँव का जलस्तर ऊपर उठ गया भावड़ घास की कटाई और मंसूरी या चारे की घास से आमदनी ने गाँव की काया पलट क दी है।

Q.3. एक हेक्टेयर मीटर तथा एक घनमीटर जल से क्या अभिप्राय है ? 

Ans. जल को मापने के लिए हेक्टेयर मीटर या घन मीटर की इकाई का प्रयोग किया जाता है। एक मीटर समतल भूमि पर एक मीटर की गहराई तक स्थिर जल के आयतन को एक घन मीटर कहते हैं। एक हेक्टेयर समतल भूमि पर एक मीटर की गहराई तक स्थिर जल के आयतन को एक हेक्टेयर मीटर कहा जाता है । 

Q.4. भारत में सिंचाई के प्रमुख साधनों का उल्लेख कीजिए ।

Ans. सिंचाई के तीन प्रमुख साधन हैं— 

(क) नहरें, (ख) कुएँ और नलकूप, (ग) तालाव । 

(क) नहरें— 1950 तक नहरें सिंचाई का मुख्य साधन थीं। देश के कुल सिंचित क्षेत्र में नहरों की भागीदारी 39.9% थी। नहरों द्वारा सिंचित क्षेत्र में वृद्धि हुई, लेकिन भागीदारी घटकर 1996-97 में केवल 31.1% रह गई।

(ख) कुएँ और नलकूप — डीजल और पपिंग सेटों के उपयोग प्रारंभ होने से कुओं और नलकूपों द्वारा सिंचित क्षेत्रों में वृद्धि हुई।

(ग) तालाब – कुल सिंचित क्षेत्र तथा सिंचित क्षेत्र में प्रतिशत भागीदारी की दृष्टि से तालाबों की महत्ता घटी है।

Q.5. उत्तर तथा दक्षिण भारत में नहरों के वितरण का वर्णन करें। 

Ans. उत्तरी विशाल मैदानों में नहरों का एक विस्तृत जाल फैला है। पंजाब, हरियाणा की मुख्य नहरें अपनवारी दोआब, बिस्ट दोआब, सरहिंद, इंदिरा गाँधी, भाखड़ा और पश्चिमी यमुना नहरें हैं। राजस्थान में नहरों से सिंचित क्षेत्र अधिक है। इस राज्य की प्रमुख नहरें इंदिरा गाँधी नहर, बीकानेर नहर और चंबल परियोजना की नहरें हैं।

उत्तर प्रदेश की प्रमुख नहरें हैं—पूर्वी यमुना नहर, गंगा की ऊपरी मध्य और निचली नहरें, शारदा नहर, रामगंगा नहर और बेतवा नहर। बिहार की मुख्य नहरों में पूर्वी कोसी, पूर्वी गंडक तथा सोन शामिल हैं। प. बंगाल की मुख्य नहरें हैं- दामोदर घाटी, मयूराक्षी तथा कोंग्सबसी । दक्षिणी राज्य आन्ध्र प्रदेश में नहरी सिंचाई बहुत महत्वपूर्ण है।

गोदावरी, कृष्णा और तुंगभद्रा नदियों पर बाँध बनाकर नहरें निकाली गई हैं। उड़ीसा में हीराकुंड बाँध की नहरें तथा महानदी डेल्टा की नहरें उल्लेखनीय हैं। कर्नाटक में तुंगभद्रा, मालप्रभा, घाटप्रभा, भद्रा और ऊपरी कृष्णा परियोजना की नहरों से विस्तृत क्षेत्रों में सिंचाई होती है। ग्रांड एनीकट मैटूर बाँध, निचली भवानी परियोजना, पालार, बेगाई, मणिमुपई और कोडाइयार परियोजनाओं से निकाली गई नहरें महत्वपूर्ण हैं।

Q.6. जल के औद्योगिक उपयोगों की विवेचना कीजिए। 

Ans. औद्योगिक क्षेत्र में जल का महत्वपूर्ण उपयोग है। औद्योगिक विकास के लिए पर्याप्त जल की आपूर्ति पहली आवश्यकता है। द्वितीय सिंचाई आयोग ने अपनी 1972 की रिपोर्ट में औद्योगिक उद्देश्यों के लिए 50 अरब घन मीटर जल के प्रावधान की सिफारिश की थी। लेकिन एक नए आकलन के अनुसार सन् 2000 में उद्योगों को केवल 30 अरब घन मीटर जल की आवश्यकता थी, जिसके सन् 2025 तक बढ़ने का अनुमान है। 

Q.7. राष्ट्रीय जल नीति से क्या अभिप्राय है ?

Ans. जल संसाधन के महत्व को देखते हुए राष्ट्रीय जल संसाधन परिषद् ने 9 सितम्बर, 1987 को एक राष्ट्रीय जल नीति अपनाई। इस नीति के अनुसार जल उपयोग की योजना के लिये बेसिन को एक इकाई मान लेना चाहिये। जल संसाधनों के विकास, संरक्षण तथा उपयोग के लिये समुचित योजना बनाई जाये। इस नीति के अधीन पीने के लिये, जल सिंचाई, जल विद्युत परिवहन तथा औद्योगिक उपयोग के लिये योजनायें बनाई जायें।

Q. 8. भारत के उत्तरी मैदान में कुएँ तथा नलकूप सिंचाई के साधन अधिक प्रचलित क्यों हैं ? तीन कारण दीजिए। 

Ans. भारत के उत्तरी मैदान में सिंचाई के प्रमुख साधन कुएँ तथा नलकूप हैं। इनके अधिक प्रचलित होने के तीन कारण प्रमुख हैं-

1. उत्तरी जलोढ़ मैदान में भौम जल के विपुल भंडार हैं। 2. यहाँ कुएँ और नलकूप बनाना भी आसान है। 3. यह कृषि प्रधान क्षेत्र है। 

Q.9. वर्षा जल संग्रहण क्या है? आजकल यह भारत में क्यों आवश्यक है ? चार कारण दीजिए ।

Ans. वर्षा जल संग्रहण भीम जल के पुनर्भरण को बढ़ाने की तकनीक है। वर्षा जल संग्रहण आजकल भारत में बहुत आवश्यक है। इसके निम्न कारण हैं- 

  • 1. जल की निरंतर माँग को करने के लिए।
  •  2. नालियों को रोकने वाले सतही जल प्रवाह को कम करने के लिए। 
  • 3. सड़कों पर जल के फैलाव को रोकने के लिए। 
  • 4. भीम जल प्रदूषण को रोकने के लिए।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न | Long Answer Type Questions

Class 12th geography
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Q. 1. जल संरक्षण के उपायों का वर्णन करें। 

Ans. जल संरक्षण के निम्नलिखित उपाय हैं :

  • 1. नदियों पर बाँध (Dams across the rivers ) नदियों पर बाँध बनाकर जल संरक्षण की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है।
  • 2. प्रदूषित जल का पुनश्चक्रण (Recycling of polluted water) आज प्रदूषित ज को साफ करके पीने योग्य बनाने की तकनीक मौजूद है। इसे उपयोग में लाना चाहिए। उद्योग में तीन R जरूरी हैं। Reduce, Recycle तथा Reuse अर्थात पानी का उपभोग घटाओ, पुनश्चक्रण करो तथा और पुनः उपयोग करो। 
  • 3. सिंचाई की नई पद्धतियाँ (New Devices of irrigation) सिंचाई के लिए फर और टपकन विधियों का उपयोग करना चाहिए। इन विधियों से मृदा का उपजाऊपन बना है तथा खरपतवार नहीं पैदा होते रहता है। 
  • 4. कम जल चाहने वाली फसलें (Crops depending on less irrigation) – शुष्क कृषि करनी चाहिए।
  • 5. सिंचाई में पाइपों का उपयोग (Use of pipes in irrigation)खुली नालियों के जगह पाइप का प्रयोग करना चाहिए जिससे पानी वाष्प न बन सके। 6. जल का अंतः द्रोणी अंतरण (Interregion Transmission of Water )—उपलब्ध प्रौद्योगिकी के द्वारा कुछ नदियों का अतिरिक्त जल दूसरी नदियों की द्रोणी में मिलाया सकता है। 

Q. 2. जल संसाधन के संरक्षण में सहायक चार तरीकों का संक्षिप्त विवरण दीजिए। 

Ans. प्राकृतिक साधनों का संरक्षण योजनाबद्ध होना चाहिए जिससे वह भविष्य के लिए भी सुरक्षित रह सकें। मृदा तथा खनिज जैसे साधनों का संरक्षण विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। यदि विश्व का औद्योगिक विकास तीव्र गति से होता रहा तो कोयला, तेल, लोहा आदि सभी खनिज पदार्थ शीघ्र समाप्त हो जाएँगे। किसी क्षेत्र के प्राकृतिक साधनों का प्रयोग करते समय वहाँ के लोगों की आवश्यकताओं तथा आकांक्षाओं को ध्यान में रखना चाहिए। सभी साधनों का विकास इस ढंग से होना चाहिए, जिससे पूरे क्षेत्र का संतुलित विकास हो सके। 

किसी एक या दो प्रकार के ही प्राकृतिक साधनों पर आवश्यक रूप से निर्भर रहने पर, यदि उनका मूल्य और माँग घट जाए या वह समाप्त हो जाए तब यह स्थिति उस क्षेत्र के लिए हानिकारक हो सकती है। प्राकृतिक संसाधनों के अनियोजित विकास से आर्थिक परिस्थितियाँ बदल जाती हैं परन्तु समाप्त हो सकते हैं और मानव का भविष्य अंधकारमय हो सकता है। अतः प्राकृतिक साधनो वे साधन शीघ्र का संरक्षण परम आवश्यक है। वायु, जल, मृदा, खनिज, वन्य पशु तथा वन सभी का संरक्षण होना चाहिए।

1. बड़ी नदियों, बरसाती नदियों पर बाँध बनाकर, विशाल कृत्रिम तालाब बनाकर जल का संरक्षण किया जाना चाहिए जिससे उसका लाभ मानवमात्र को मिल सके।

2. जल बेकार नहीं जाना चाहिए। संपूर्ण जल किसी-न-किसी प्रकार प्रयोग में लाना चाहिए।

 3. सिंचाई, जलविद्युत, औद्योगिक तथा घरेलू उपयोग और पीने के पानी की आपूर्ति के लिए जल का सदुपयोग और संरक्षण आवश्यक है।

 4. नदी-तालाब आदि क्षेत्र को जल प्रदूषण से बचाना चाहिए।-

Q.3.गाजल संभर विकास कार्यक्रम की विवेचना कीजिए। 

Ans. मझगावाँ मध्य प्रदेश के सतना जिले का एक गाँव है। यह गाँव निम्न उत्पादकता, सिंचाई के अभाव, नीचे जाते जलस्तर, पेय जल की कमी और मृदा अपरदन के लिए जाना जाता था। 1996 से पूर्व ही ग्रीष्म ऋतु में जल की बेहद कमी हो जाती थी। कृषि को प्रायः नुकसान हो जाता था। लोग और पशु परेशानी में जीते थे। गाँव में एक भी नलकूप नहीं था। इस गाँव ने जल संभर योजना को अपनाया, खेतों के चारों ओर खाइयाँ खोदीं। बेरोकटोक बहते पानी को रोकने के लिए बाँध बनाकर नियंत्रित किया गया। 

इससे वर्षाजल रिस कर जमीन के अंदर चला गया तथा भीम जल के भंडार बढ़ गए और जल स्तर ऊँचा उठ गया। मिट्टी के बाँधों के पीछे एकत्रित जल अब 1504 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई करता है तथा लोगों को पूरे साल पेयजल मिलता रहता है। धान की फसल की उत्पादकता में 52 से 60% तक की तथा गेहूँ में 40 प्रतिशत तक की वृद्धि हो गई।

Q. 4. भारतवर्ष में बढ़ती कृषि उत्पादकता के लिए सिंचाई क्यों आवश्यक है ? 

Ans. भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए जल सिंचाई अत्यधिक महत्वपूर्ण है। भारतीय कृषि मुख्यतः मानसूनी वर्षा पर ही निर्भर करती है। कम वर्षा की अवस्था में कृषि को सफलतापूर्वक चलाने के लिए कृत्रिम साधनों द्वारा जल सिंचाई की जाती है। अग्रलिखित कारण हमें सिंचाई की सुविधा प्रदान करने के लिए बाध्य करते हैं-

1. मौसमी वर्षा (Seasonal Rain)—भारत में मानसूनी वर्षा अधिकतर ग्रीष्मकाल के चार महीनों में होती है। लंबी शुष्क ऋतु में कृषि के लिए जल सिंचाई आवश्यक है।

 2. अनिश्चित वर्षा (Uncertain Rainfall) मानसूनी वर्षा समय तथा स्थान के अनुसार अनिश्चित है। यह कभी जल्दी शुरू हो जाती है तो कभी देर से यहाँ वर्षा लगातार नहीं होती, परंतु रुक-रुक कर होती है। एक लंबे शुष्क काल के कारण फसलें नष्ट हो जाती हैं। किसी वर्ष वर्षा सामान्य होती है तो किसी वर्ष बहुत कम। संदिग्ध वर्षा वाले क्षेत्रों में अकाल पड़ जाते हैं। इसलिए सिंचाई व्यवस्था आवश्यक हो जाती है। 

3. वर्षा का दोषपूर्ण वितरण (Uneven distribution ) — देश में वर्षा का वितरण समान नहीं है। कई क्षेत्रों में भारी वर्षा होती है तो कई क्षेत्रों में सामान्य से भी कम । इसलिए अपर्याप्त वर्षा वाले क्षेत्रों में जल सिंचाई अति आवश्यक है। 

4. शीतकाल की फसलें (Winter Crops)— भारत में रबी की फसलों के लिए जल सिंचाई आवश्यक है। 

5. विशेष फसलें (Specific Crops ) — भारत में चावल तथा गन्ने की फसलों की उपज के लिए नियमित जल सिंचाई आवश्यक है।

6. खाद्यान्न उत्पादन (Production of much foodgrain ) देश को खाद्यान्न संकट से बचाने के लिए, खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर होने के लिए सिंचाई सुविधाओं का विस्तार आवश्यक है।

भारत में कृषि की सफलता जल सिंचाई साधनों पर निर्भर करती है। यहाँ ऊँचे तापमान के कारण सारा साल फसलें उगाई जा सकती हैं। जिन प्रदेशों में जल सिंचाई की सुविधाओं की उचित व्यवस्था है, वहाँ वर्ष में दो फसलें उगाई जाती हैं। सारे देश में जल सिंचाई के साधन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।

इस आर्टिकल में किसी भी प्रकार का त्रुटि आपको मिलती है तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं हम उसे जल्द से जल्द ठीक करने की कोशिश करेंगे क्योंकि लिखने समय सबसे गलती हो जाती है 😅😅😅😅😅😅😅😅😅


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FAQs

Q. 1. जल मानव के लिये क्यों अनिवार्य है ? 

Ans. क्योंकि मानव जीवन की सभी क्रियायें जल पर निर्भर करती हैं। 

Q. 2. जल संभर क्षेत्र से आप क्या समझते हैं ? 

Ans. जल संभर एक ऐसा क्षेत्र है जिसका जल एक बिन्दु की ओर प्रवाहित होता है। ज इसे मृदा और संरक्षण की आदर्श नियोजन इकाई बना देता है।।

Q. 3. भारत में किस भाग में नहरों द्वारा अधिक भाग पर सिंचाई की जाती है? 

Ans. उत्तर भारत के विशाल मैदानों में नहरों का एक जाल सा बिछा हुआ है। पंजाबराजस्थान, हरियाणा में नहरों द्वारा सिंचित क्षेत्र अधिक है। 

Q. 4. अलवणीय जल किसे कहते हैं ? (What is fresh water ? ) 

Ans. अलवणीय जल प्राकृतिक जल है जिसमें लवण खनिज इत्यादि नहीं पाये जाते। वर्ष का जल अलवणीय जल कहलाता है।

Q. 5. पीने के जल की व्यवस्था के लिए कौन-सी योजनाएँ बनाई गई हैं ? 

Ans. देश के ग्रामीण जनसंख्या के लिए पीने का जल प्रदान करने के लिए त्वरित ग्राम जलापूर्ति योजना बनाई गई है। इसी उद्देश्य से नगरीय जनसंख्या के लिए पीने के जल की व्यवस्य के लिए राष्ट्रीय मिशन नामक योजना बनाई गई है।

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