Class 12th Geography-II Chapter 7 Notes In Hindi | खनिज तथा ऊर्जा संसाधन कक्षा 12 पाठ 7 के प्रश्न उत्तर

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मैं खुद 12वीं का टॉपर रहा हूं और मुझे पता है कि 12वीं की परीक्षा में किस तरह के प्रश्न पूछे जाते हैं। वर्तमान में, मैं एक शिक्षक की भूमिका भी निभा रहा हूँ, और अपने छात्रों को कक्षा 12वीं की महत्वपूर्ण जानकारी और विषयों का अभ्यास भी कराता हूँ। मैंने यह लेख 5 वर्षों से अधिक के अपने अनुभव के साथ लिखा है। इस पोस्ट की मदद से आप परीक्षा में इस अध्याय से भूगोल में बहुत अच्छे अंक प्राप्त कर सकेंगे।

Class 12th Geography-II Chapter 7 Notes In Hindi | खनिज तथा ऊर्जा संसाधन कक्षा 12 पाठ 7 के प्रश्न उत्तर

कक्षा | Class12th 
अध्याय | Chapter07
भाग | Part II
अध्याय का नाम | Chapter Nameखनिज तथा ऊर्जा संसाधन
बोर्ड | Boardसभी हिंदी बोर्ड
किताब | Book एनसीईआरटी | NCERT
विषय | Subjectभूगोल | Geography
मध्यम | Medium हिंदी | HINDI
अध्ययन सामग्री | Study Materialsप्रश्न उत्तर | Question answer

पाठ के मुख्य बिंदु | Main Point of This Chapter

  • ★ आघात तन्यता (Malleability ) – पातुओं का वह गुण, जिसके कारण उन्हें दबाकर या हथौड़े से कूट-पीट कर नई आकृति में ढाला जा सकता है। अंग्रेजी भाषा में Mallet का अर्थ है हथौड़ा। इसी से यह शब्द बना है।
  • ★ तन्यता (Ductility) — पातुओं के गुण जिसके कारण उन्हें बिना गर्म किये दबाकर या खींचकर नई आकृति जैसे तारों में ढाला जा सकता है। ताँबा ऐसी ही धातु है।
  • ★ सज्जीकरण (Beautification ) – खनिज अयस्कों से अशुद्धिय निकालने का उपचार या तरीका। 
  • ★ अलौह धातुएँ (Non-Ferrous Metals ) — जिनमें लोहे क अंश नहीं होता। जैसे सोना, चाँदी, तांबा, सीसा, जस्ता आदि। धात्विक खनिज (Metallic Minerals)—इन खनिजों में धातुएँ होती हैं। जैसे लौह-अयस्क, निकल, ताँबा अपालिक खनिजों में धातुएँ नहीं होतीं, जैसे चूना पत्थर, पोटाश, अभ्रक आदि।

याद रखने योग्य बातें | things to remember

Class 12th Geography-II Chapter 7 Notes In Hindi | खनिज तथा ऊर्जा संसाधन कक्षा 12 पाठ 7 के प्रश्न उत्तर
  • 1. खनिज संसाधन-भारत खनिज पदार्थों में निर्भर है।
  • 2. खनिज भंडार भारत में खनिजों के पर्याप्त भण्डार मिलते हैं। 3. खनिजों की संख्या- भारत में लगभग 100 खनिज पाए जाते हैं।
  • 4. खनिजों का मूल्य—भारत में निकाले गए खनिजों का मूल्य 4.80 अरब रुपए है।।
  • 5. खनिजों का वितरण — भारत में अधिकतर खनिश दामोदर घाटी में पाए जाते हैं। 6. खनिज पेटियाँ—भारत में तीन खनिज पेटियाँ हैं— उत्तरी पूर्वी पठार, दक्षिण पश्चिम पठार, उत्तर-पश्चिमी प्रदेश।
  • 7. संसाधन-भारत में कोयला, खनिज तेल, जलविद्युत, गैस तथा अणुशक्ति प्रमुख ऊर्जा संपन हैं। 8. अपारम्परिक ऊर्जा के स्रोत—भारत में सौर ऊर्जा, पवन शक्ति, बायोगैस, ज्वारीय ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा के प्रमुख स्रोत है।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न | VERY SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS

Class 12th geography
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Q. 1. भारत में आजकल कितने प्रकार के खनिज निकाले जाते हैं ? 

Ans. लगभग 100 खनिज ।

Q. 2. एक ऐसे खनिज का नाम बताइए जिसका भारत को सबसे अधिक आयात करना पड़ता है।

Ans. पेट्रोलियम ।

Q. 3. सन् 2000-2001 में निकाले गए कुल खनिजों का कितना मूल्य था ? 

Ans. 48,016.67 करोड़ रुपये। 

Q. 4. एक धात्विक और एक अधात्विक खनिज का नाम बताइए । 

Ans. धात्विक खनिज लौह-अयस्क अधात्विक खनिज – चूना-पत्थर 

class 12th NotesMCQ
HistoryPolitical Science
EnglishHindi

Q.5. सोना खनिजों की किस पट्टी से निकाला जाता है ?

Ans. कर्नाटक-तमिलनाडु पट्टी । 

Q.6. वर्ष 2000-01 में कितने करोड़ रुपये मूल्य के खनिजों का आयात किया गया ?

Ans. 1,09,080 करोड़ रुपयों का। 

Q.7. भारत में पाए जाने वाले लौह-अयस्क के दो प्रकारों के नाम बताइए

Ans. हेमेटाइट और मैग्नेटाइट।

Q.8. झारखंड-उड़ीसा की लौह-अयस्क की पट्टी की तीन खानों के नाम बताएँ । 

Ans. गुरुमहिपानी, बादाम पहाड़ और नोआमंडी। 

Q.9. मैंगनीज के कोई दो उपयोग बताइए

Ans. युद्धक टैंक, तोप के गोले, इस्पात के मजबूत चादर तथा चीनी मिट्टी के बर्तन आदि । 

Q. 10. मँगनीज के सबसे अधिक भंडार किस राज्य में हैं ?

Ans. उड़ीसा ।

लघु उत्तरीय प्रश्न | SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS

Class 12th geography
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Q. 1. ऊर्जा के किन्हीं चार अपरम्परागत साधनों के नाम बताइए। ये साधन ऊर्जा के परम्परागत साधनों से अधिक महत्वपूर्ण क्यों हैं ?

Ans. ऊर्जा के अपरम्परागत साधन- (1) सौर ऊर्जा, (ii) ज्वारीय ऊर्जा, (iii) भूतापीय ऊर्जा, (iv) पवनशक्ति, (v) बायोगैस आदि हैं।

ऊर्जा के परम्परागत साधन—कोयला, तेल तथा परमाणु ऊर्जा सभी समाप्य साधन हैं और 50 सालों बाद उनका पृथ्वी पर बना रहना संभव नहीं है। अतः नए अपरम्परागत साधनों का विकास आवश्यक है जो भविष्य की ऊर्जा की माँग की पूर्ति कर सके। यह आशा की जाती है कि कुल ऊर्जा माँग के 20 प्रतिशत भाग की पूर्ति सन् 2010 ई. तक अपरम्परागत ऊर्जा साधनों से हो जाएगी।

Q. 2. तीन ऐसे अपारंपरिक ऊर्जा स्रोतों का नाम लिखिए जिनका भविष्य हमारे देश के लिए उज्ज्वल हो। जल विद्युत को छोड़कर पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों की तुलना में वे किस प्रकार अधिक उपयुक्त हैं ? 

Ans. ऊर्जा के दो प्रकार के साधन हैं— (अ) पारंपरिक ऊर्जा साधन—कोयला, तेल, गैस और जल विद्युत हैं। (ब) अपारंपरिक ऊर्जा के प्रमुख स्रोत सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा तथा भूतापीय ऊर्जा और बायोगैस आदि हैं।

सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, भूतापीय तथा ज्वारीय ऊर्जा आदि अपारंपरिक ऊर्जा स्रोतों का भविष्य हमारे देश के लिए उज्ज्वल है। भारत में सौर ऊर्जा हिमालय के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों को छोड़कर भरपूर मात्रा में प्राप्त होती है। सूर्य से ऊर्जा प्राप्त करने की विधि का देश में भरपूर विकास हो चुका है।

पवन ऊर्जा तमिलनाडु, गुजरात, महाराष्ट्र तथा उत्तर भारत में विकसित की जा रही है। बायोगैस भारत के ग्रामीण क्षेत्र में प्रचलित और विकसित हो रही है। ये सभी अपारम्परिक ऊर्जा स्रोत सदा बने रहने वाले हैं। ये असमाप्य साधन हैं। ये पर्यावरण को प्रदूषित नहीं करते जबकि कोयला तथा तेल पारंपरिक सायन हैं, परन्तु ये समाप्य साधन हैं और पर्यावरण को भारी मात्रा में प्रदूषित करते हैं। अतः ऊर्जा के अपरम्परागत साधन अच्छे हैं। उनका तेजी से विकास देश के लिए लाभकारी है। 

Q.3. भारत में खनिज वितरण की क्या विशेषताएँ हैं ?

  • Ans. 1. भारत के अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में चूना पत्थर, जिप्सम तथा लवण जैसे पानी में घुलने वाले खनिजों की कमी है।
  • 2. देश के उत्तरी मैदानों में खनिजों की कमी है, क्योंकि यहाँ आधार शैलों के ऊपर नदियों ने मिट्टी लाकर बिछा दी है।
  • 3. हिमालय के क्षेत्रों में खनिजों की कमी है तथा उनकी मात्रा भी कम है। यहाँ परिवहन की कठिनाई है, जनसंख्या कम है तथा जलवायु भी प्रतिकूल है। 
  • 4. हमारे देश के अधिकतर खनिज प्रायद्वीपीय पठार पर पाए जाते हैं, क्योंकि यहाँ की शैलें प्राचीन और वेदार है। भारत में खनिज संसाधन (1944) के लेखक डॉ. उनके अनुसार यदि एक रेखा दक्षिण में मंगलौर से कानपुर तक और वहाँ से पूर्व में, हिमालय पर्वत के समांतर अरुणाचल प्रदेश तक खींची जाए, तो जो भाग इस रेखा के पूर्व में है, वे सभी खनिजों से संपन्न हैं और पश्चिम की और के कुछ अपवादों की छोड़कर विपन्न हैं।

Q.4. पारंपरिक और अपारंपरिक ऊर्जा के स्रोतों में अंतर बताइए। इनके मध्य तीन भिन्नताएँ बताइए। 

Ans.

ऊर्जा के पारंपरिक स्रोत (Conventional sources of energy)अपारंपरिक ऊर्जा (Non-conventiona l)
1. इनके उपयोग की लंबी परम्परा रही है। जल विद्युत भी पारंपरिक स्रोत है।1. ये कुछ समय से उपयोग में हैं। 
2. ये समाप्य हैं।2. ये असमाप्य साधन हैं।
3. इनके प्रयोग से पारंपरिक स्रोतों पर दबाव उदाहरणतः कोयला, खनिज तेल आदि।3. संसार में इनकी अभी से कभी शुरू हो गई घटेगा। उदाहरणतः सूर्य, पवन, ज्वारीय ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा, बायोगैस

Q.5. चट्टान तथा खनिज अयस्क में क्या अन्तर है ? 

चट्टान अयस्कखनिज अयस्क
1. पृथ्वी के भू-पटल का निर्माण करने वाले सभी प्राकृतिक तथा ठोस पदार्थों को चट्टान कहते हैं 1. खनिज एक अजैव यौगिक है जो प्राकृतिक सभी प्राकृतिक तथा ठोस पदार्थों को चट्टान (अवस्था में पाया जाता है।
2.चट्टान कई प्रकार के खनिजों का समूह होता है2. खनिज अयस्क प्रायः एक प्रकार के खनिज से बने होते हैं, जैसे- लोहा।
3. इनका कोई निश्चित रासायनिक संगठन नहीं होता है।3. इनका एक निश्चित रासायनिक संगठन, होता है।
4.चट्टानें मुख्यतया तीन प्रकार की होती हैं-आग्नेय, तलछटी, रूपान्तरित।4.लगभग 2000 प्रकार के खनिज पाए जाते है।

Q.6. क्या भारत की खनिज संपदा पर्याप्त है ? 

Ans. भारत में समस्त खनिज साधनों के भंडारों का पूरा अनुमान प्राप्त नहीं है, फिर भी हम कह सकते हैं कि खनिज देश की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पर्याप्त हैं। कई खनिज’ पदार्थों में देश आत्मनिर्भर है। 

जैसे—कोयला, लोहा, चूने का पत्थर, बॉक्साइट, अभ्रक, मॅगनीज आदि। इनमें से कुछ खनिज पदार्थ निर्यात भी किए जाते हैं। देश में पेट्रोलियम की कमी है। आशा की जा रही है कि नए क्षेत्रों के विकास के साथ बहुत हद तक यह कमी पूरी हो जाएगी। सोना, चाँदी, सीसा, दिन आदि आवश्यक धातुएँ कम हैं इसलिए इनका आयात किया जाता है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि देश के औद्योगिक विकास के लिए आवश्यक खनिज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।

Q.7. तांबे का क्या महत्व है ? 

Ans. तांबे का उपयोग (Use of Copper)- आज के औद्योगिक विकास में दूसरा स्थान

ताँबे का है। मनुष्य ताँबे का उपयोग बहुत प्राचीन समय से करता आ रहा है। परंतु इसका उपयोग भोजन के बर्तन बनाने तक ही सीमित था। औद्योगिक विकास के साथ-साथ इसका उपयोग भी बढ़ा क्योंकि बिजली के कार्यों में मुख्यतः ताँबे का प्रयोग होता है। यह विद्युत का सबसे अच्छा चालक है। इसीलिए इसका उपयोग विद्युत के कार्यों में अधिकतर होता है। इसके अलावा ताबें

| आधुनिक युग में विद्युत के अधिकाधिक प्रयोग के कारण इसकी माँग निरंतर बढ़ रही है, परन्तु अब के स्थान पर अल्युमीनियम का प्रयोग होने लगा है। ताँबे के मुख्यतः दो गुण आघात वर्धनीयता तथा तन्यता। इस कारण यह बहुत उपयोगी का प्रयोग मोटरकार, टेलीविजन आदि के तारों तथा सभी प्रकार की मशीनों में होता है।

सिद्ध हुआ है। इसके अतिरिक्त ताँबे में संक्षारण नहीं होता। ताँबे के मिश्रण से अन्य धातुएँ बनाए जाती है, जैसे ताँबा और टिन के मिश्रण से काँसा एवं ताँबा और जस्ते के मिश्रण से पीतल बनता है। ताँबे की धातुएँ (Metals of Copper) साँबा शुद्ध धातु के रूप में भी पाया जाता है तथा यौगिक रूप में भी। इसकी प्रमुख धातुएँ हैं— (i) कपराइट, (ii) मैलेकाइट, (iii) कौबेलाइट (iv) केल्कोसाइट। 

Q.8. ताँबा तथा एल्युमिनियम के प्रमुख उपयोग क्या-क्या हैं ?

Ans. ताँबा (Copper)—प्राचीन धातु है। भारत में ताँबा अयस्क भंडारों का अभाव है। यह बर्तन, आभूषण, सिक्का, बिजली के तार तथा मिश्र धातु के काम आता है। यह प्राचीन सभ्यता का प्रतीक है। अल्युमीनियम (Aluminium) – यह धातु बॉक्साइट खनिज से बनाई जाती है। यह एक

हल्की पातु है जो बर्तन, बिजली के तार तथा वायुयान निर्माण में काम आती है। रसायन उद्योग में इसकी काफी मांग रहती है।

Q. 9. परमाणु ऊर्जा की क्या-क्या कमियाँ हैं ? 

Ans. परमाणु ऊर्जा का भविष्य बहुत उज्ज्वल है। इसके विकास में वैज्ञानिक कुशलता की

बहुत अधिक आवश्यकता होती है। इसका सबसे बड़ा दोष यह है कि एक परमाणु संयंत्र की रचना में बहुत अधिक समय लगाता है तथा इसमें भारी पूँजी लगाने की आवश्यकता पड़ती है। इसमें रिसने से उत्पन्न दुर्घटना का खतरा बराबर बना रहता है, जैसा कि सोवियत रूस के चिरिनोबिल केन्द्र में हुआ था। इसमें यूरेनियम और थोरियम खनिजों का उपयोग किया जाता है। 

Q. 10. भारत में कोयला भंडारों के स्थानिक प्रारूप का वर्णन करें। क्या भारत में कोयले के पर्याप्त भंडार हैं ?

Ans. भारतीय भू-विज्ञान सर्वेक्षण के अनुसार सन् 1992 तक भारत में 19600 करोड़ टन कोयले के भंडार थे। कोयले के सबसे अधिक भंडार झारखंड राज्य में हैं। बिहार, उड़ीसा, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल राज्यों में भारत के कोयला भंडारों का 90% भाग पाया जाता है। भारत में औद्योगिक विकास तथा खपत को देखते हुए ये भंडार अपर्याप्त है तथा अधिक देर नहीं चलेंगे। भारत में कुकिंग कोयले की कमी है, इसलिए कोयले का संरक्षण आवश्यक है।

Q. 11. भारत में खनिज तेल के उत्पादन, उपभोग तथा आयात का वर्णन करें। 

Ans. देश में खनिज तेल का उत्पादन उपभोग को देखते हुए कम है। सन् 1999-2000 में खनिज तेल का उत्पादन 239 लाख टन था। यह हमारी केवल 85% आवश्यकताओं की पूर्ति करता है जबकि उपभोग लगभग 750 लाख टन हो गया है। इस प्रकार पिछले वर्ष 500 लाख टन खनिज तेल तथा पेट्रोलियम का आयात किया गया है। यह आयात लगभग 35 हजार करोड़ के मूल्य का था। इस वृद्धि का मुख्य कारण खपत में वृद्धि, मूल्यों तथा रुपये के मूल्य में गिरावट है। 

Q.12. भारत में प्राकृतिक गैस के क्षेत्र बताएँ तथा एच. बी. जे. पाइप लाइन का वर्णन करें। 

Ans. भारत में प्राकृतिक गैस का उत्पादन 22.000 करोड़ घन मीटर है। इस समय कैम्बे बेसिन, कावेरी तट, जैसलमेर तथा मुंबई हाई से प्राकृतिक गैस प्राप्त की जा रही है। भारत में गैस के परिवहन के लिए हीरा-विजयपुर-मदपुर (HBJ) पाइप लाइन बनाई गई है। यह पाइप लाइन 1700 कि.मी. लंबी है। यह पाइप लाइन गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान तथा उत्तर प्रदेश राज्यों में से गुजरती है। 

इस गैस से बिजयपुर, सवाई माधोपुर, जगदीशपुर, आमला तथा बबराला उर्वरक कारखाने चलाए जा रहे हैं। भारत में Gas Authority of India (GAIL), Oil and Natural Gas Commission (O.N.G.C.), Indian Oil Corporation Hindustan Petroleum Corporation (HPC) नामक संस्थाएँ गैस की खोज तथा तथा प्रबंध का कार्य करही है। 

Q.13. भारत में तापीय शक्ति का महत्व अधिक क्यों है ?

Ans. तापीय विद्युत खनिज तेल तथा कोयले से प्राप्त की जाती है। देश में जल विद्युत की तुलना में तापीय विद्युत का प्रयोग बढ़ रहा है। छठी पंचवर्षीय योजना में यह अनुपात 39.7% 66.3% था। सातवीं योजना के अंत तक यह अनुपात 26%-74% हो गया है। विद्युत योजनाओं के विकास में अधिक समय लगता है। इसलिए वर्तमान ऊर्जा संकट को हस करने के उद्देश्य से तापीय विद्युत का प्रयोग अधिक किया जा रहा है। इससे देश में कोयले तथा देत जैसे समाप्त हो जाने वाले साधनों की कमी हो जाएगी। तापीय विद्युत पर खर्च भी अधिक होगा। इसके लिए अधिक मात्रा में तेल आयात करना पड़ेगा। 

Q.14. भारत में अणु शक्ति केन्द्र कहाँ-कहाँ स्थापित हैं ?

Ans देश में अणु शक्ति के विकास के लिए कच्चे माल के रूप में यूरेनियम तथा पोरियम के भंडार पाए जाते हैं। झारखंड, राजस्थान तथा तमिलनाडु में यूरेनियम मिलता है। पोरियम के मंहार झारखंड में छोटानागपुर पठार तथा केरल तट पर मोनाजाइट नामक रेत से प्राप्त होते हैं। भारत में अणु-शक्ति प्राप्त करने के लिए 1948 में अणु-शक्ति आयोग स्थापित किया गया। 

देश में 6 परमाणु बिजली घर कार्य कर रहे हैं- (i) तारापुर (महाराष्ट्र), (i) रावतभाटा (राज में कोटा के समीप), (111) कलपक्कम (चेन्नई के निकट), (iv) नरौरा (उत्तर प्रदेश के दुलन्दशहर के निकट), (v) ककरापारा (गुजरात) तथा, (vi) कैगा (कर्नाटक)।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न | Long Answer Type Questions

Class 12th geography
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Q.1. भारत में लौह अयस्क के वितरण का वर्णन कीजिए। 

Ans. भारत संसार का 50% लोहा उत्पन्न करता है तथा सातवें स्थान पर है। भारतीय लोहे में कम अशुद्धियाँ हैं तथा 65% पातु अंश होता है। झारखंड तथा उड़ीसा भारत का 75% लोहा उत्पन्न करते हैं। इसे भारत का लोहा क्षेत्र भी कहते हैं। इस क्षेत्र में भारत के मुख्य इस्पात कारखाने जमशेदपुर, बोकारो, राऊरकेला में स्थित है। 1999-2000 में कुल उत्पादन 700 लाख टन था।. 

1. झारखण्ड – इस राज्य में सिंहभूम जिले में नोआमण्डी तथा पनसित बुद्ध की प्रसिद्ध खाने हैं। नोआमण्डी खान एशिया में सबसे बड़ी लोहे की खान है।

2. उड़ीसा – इस राज्य में मयूरभंज, क्योंझर तथा बोनाई क्षेत्रों में लोहा मिलता है। 3. छत्तीसगढ़ में पाली, राजहारा पहाड़ियों तथा बस्तर में बैलाडीला क्षेत्र।

4. तमिलनाडु में सेलम तथा मदुरई क्षेत्र। 5. कर्नाटक में बाबा बूदन की पहाड़ियों तथा क्रदैमुख क्षेत्र, आन्ध्र प्रदेश में करनूल, महाराष्ट्र में लोहारा, पीपल गाँव तथा गोदा में लोहे का उत्पादन होता है।

Q.2. भारत में पेट्रोलियम के उत्पादन की प्रवृत्तियों की चर्चा कीजिए । 

Ans. भारत में वह क्षेत्र जिसमें तेल पाया जा सकता है जो 17.2 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल पर फैला हुआ है। इसमें से 3 लाख 20 हजार किलोमीटर क्षेत्र अवसादी अपतट क्षेत्र हैं जो 200 मीटर की गहराई तक मिलता है। तेल-पाटी परत वाले 13 महत्वपूर्ण बेसिन हैं, जो तीन भागों में बांटे गए हैं— (अ) केम्बे बेसिन, (ब) ऊपरी असम क्षेत्र, (स) मुंबई अपतट क्षेत्र।

इन सभी क्षेत्रों में तेल उत्पादन किया जा रहा है। राजस्थान, कावेरी-कृष्णा-गोदावरी बेसिन, अंडमान, बंगाल हिमालय पाद पहाड़ियाँ, गंगा पाटी तथा त्रिपुरा-नागालैंड मेला क्षेत्र में पेट्रोलियमपारी परत पाई जाती है। फिर भी अभी तक इन क्षेत्रों में व्यापारिक स्तर पर उत्पादन प्रारंभ नहीं किया गया है।

कच्छ-सौराष्ट्र, केरल- कोंकण तथा महानदी में ऐसी अनुकूल भू-वैज्ञानिक धारी जाते हैं जहाँ पेट्रोलियम पाया जा सकता है। ये देश के पेट्रोलियम उत्पादन के भावी प्रदेश है। परत भारत में पेट्रोलियम का उत्पादन उपभोग से बहुत कम होता है। 

सन् 1950-51 में कुल तेल 2.5 लाख टन उत्पादन हुआ जबकि पेट्रोलियम उत्पादों का उपभोग 34 लाख टन था। स 1988 में कच्चे तेल का उत्पादन 2.39 करोड़ टन हो गया तथा उपभोग 3.64 करोड़ टन गया। इस प्रकार उत्पादन और उपभोग के मध्य 1.25 करोड़ टन का अन्तर रह गया।

• भारत में 2000-2001 में पेट्रोलियम पदार्थों का कुल उपभोग लगभग 10 करोड़ टन इसका एक तिहाई ही भारत में उत्पादन होता है। शेष का बाहर से करके आयात करना पड़ता है। बहुमूल्य विदेशी भारत में 18 परिष्करण केन्द्र कार्य कर रहे हैं। 

Q. 3. अभ्रक के उत्पादन, वितरण तथा उपयोग के विषय में अपने विचार स्पर कीजिए।

Ans. अभ्रक अपनी लचक, पारदर्शिता तथा विजली एवं गर्मी की कुचालकता के कारण। बिजली के उपकरणों, बेतार के तार, कम्प्यूटर, वायुयान आदि के निर्माण में प्रयोग किया जात है। इसके अतिरिक्त यह लालटेन की चिमनियों, आँखों के चश्मों, मकानों की खिड़कियों, उच्च ताप में काम आने वाली भट्टियों तथा अनेक प्रकार की सजावट के काम में भी आता है। इसके चूरे को स्प्रिंट में मिलाकर किसी भी आकार तथा प्रकार की चादरें बनाई जाती हैं।

उत्पादन तथा वितरण (Production and Distribution) भारत को अभ्रक है। उत्पादन के लिए विश्व में लगातार एकाधिकार प्राप्त है। विश्व का 60% अभ्रक भारत में निकाला जाता है। भारत में अभ्रक के उत्पादन में काफी उतार-चढ़ाव आते हैं। यद्यपि भारत में अभ्रक का उत्पादन पिछले 140 वर्षों से हो रहा है तो भी व्यावसायिक स्तर पर यह उत्पादन स्वतंत्रता के बाद ही शुरू हुआ। 

स्वतंत्रता के समय सन् 1947-48 में भारत में केवल 772 टन अभ्रक का उत्पादन हुआ था जो केवल तीन वर्षों की अल्पावधि में बढ़कर 10 हजार टन हो गया। सन् 1950-51 से 1960-61 के बीच वाले दस वर्षों में भी लगभग तीन गुना वृद्धि हुई। 

सन् 1960-61 तक हमारा अभ्रक का उत्पादन बड़ी तेजी से बढ़ा, परन्तु इसके बाद इस उत्पादन में गिरावट आने लगी। सन् 1970 में अभ्रक का उत्पादन 9,494 टन था जो सन् 1987 में 4,299 टन तथा 1990 में 4,080 टन रह गया। 2000-2001 में इसका उत्पादन घटकर 1.8 हजार टन ही रह गया।

भारत में अभ्रक का वितरण भी असमान है। भारत का 95% अभ्रक केवल झारखंड, आन्ध्र प्रदेश तथा राजस्थान से प्राप्त किया जाता है।

बिहार-झारखंड-बिहार भारत के कुल अभ्रक उत्पादन का 60% पैदा करता है। भारत में ही नहीं बल्कि विश्व में सबसे बड़ा उत्पादक है। बिहार की मुख्य अभ्रक उत्पादक पट्टी पश्चिम में गया जिले से शुरू होकर हजारीबाग व मुंगेर होती हुई पूर्व में भागलपुर जिले तक पहुँचती है। इस पट्टी की लंबाई 150 कि.मी. तथा चौड़ाई 32 कि.मी. है। यहाँ से निकल गया अभ्रक उच्च कोटि का होता है। 

जिसे रूबी अभ्रक (Ruby Mica) कहते हैं। इस प्रकार यह पट्टी अधिक मात्रा में उच्च कोटि का अभ्रक प्रदान करती है जिस कारण इसे विश्व का ‘अभ्रक भण्डार’ कहा जाता है। हजारीबाग झारखंड का सबसे बड़ा अभ्रक उत्पादक जिला है जो इस राज्य का 7.5% अभ्रक पैदा करता है। दूसरे स्थान पर गया जिला है जो बिहार का 209) अभ्रक पैदा करता है। मुंगेर जिले में बिहार का 5% अभ्रक पैदा किया जाता है।

आंध्रप्रदेश – यह राज्य भारत का 25% अभ्रक पैदा करके द्वितीय स्थान पर है। यहाँ की मुख्य अभ्रक पट्टी नेल्लोर जिले में है; जो 97 कि.मी. लंबी और 24 से 30 कि.मी. चौड़ी है। राजस्थान- पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान के अभ्रक उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। राजस्थान की मुख्य अभ्रक पट्टी जयपुर से उदयपुर तक 322 कि.मी. लंबी है। 

इसकी औसत चौड़ाई 96 कि.मी. है, यह पट्टी अपने मध्यवर्ती भाग में कुम्बलगढ़ तथा भीलवाड़ा के अधिक चौड़ी है। मुख्य उत्पादक जिले भीलवाड़ा, जयपुर, उदयपुर, टोंक, सीकर, डूंगरपुर तथा अजमेर हैं। अधिकांश अग्रक भीलवाड़ा जिले में निकाला जाता है। भारतीय भूगर्भ सर्वेक्षण के अनुसार राजस्थान में अभ्रक के खनन का भविष्य उज्ज्वल है। 

Q.4. भारत में मैंगनीज के उत्पादन तथा वितरण का वर्णन करें।

Ans. मैंगनीज एक लोह धातु है। इसका प्रयोग लोहा-इस्पात तथा रासायनिक उद्योगों में किया जाता है। उत्पादन (Production)-भारत में मैंगनीज का उत्पादन 30% है यह विश्व में दूसरे नंबर

पर है। देश में 12 करोड़ टन मैंगनीज के भंडार हैं। भारत में मँगनीज का उत्पादन 18 लाख दन है यह उत्पादन विदेशी माँग के अनुसार घटता-बढ़ता है। अधिकतर मँगनीज निर्यात किया जाता है। “उत्पादन क्षेत्र — 

  • (i) मध्य प्रदेश में बालाघाट, छिंदवाड़ा तथा जवलपुर क्षेत्रों में।
  • (ii) महाराष्ट्र में नागपुर तथा भंडारा क्षेत्र । 
  • (iii) उड़ीसा में गंगपुर, कालाहांडी तथा कोरापुट और बोनाई क्षेत्र
  • (iv) कर्नाटक में बेल्लारी, शिमोगा, चीतल दुर्ग क्षेत्र ।
  • (v) आंध्र प्रदेश में विशाखापट्टनम प्रदेश ।
  • (vi) झारखंड में सिंहभूम का चायवाला क्षेत्र ।
  • (vii) राजस्थान में उदयपुर तथा बांसवाड़ा क्षेत्र।

Q.5. भारत में जल-विद्युत शक्ति के लिए पाई जाने वाली अनुकूल दशाओं की चर्चा उपयुक्त उदाहरण सहित कीजिए। 

Ans. (क) जल विद्युत का विकास निम्नलिखित भौगोलिक तथा आर्थिक तत्वों पर निर्भर करता है-

(i) ऊंची-नीची भूमि (Up-low lands) – जल विद्युत के विकास के लिए ऊँची-नीची तथा

ढालू भूमि होनी चाहिए। इस दृष्टि से पर्वतीय तथा पठारी प्रदेश जल-विद्युत के विकास के लिए आदर्श क्षेत्र होते हैं। अधिक ऊँचाई से गिरने वाला जल अधिक मात्रा में जल विद्युत उत्पन्न करता है। 

(ii) अधिक वर्षा (Much rain) जल विद्युत के लिए सारा वर्ष निरंतर जल की मात्रा उपलब्ध होनी चाहिए। इसलिए नदियों के उद्भग क्षेत्रों में वर्षा अधिक तथा वर्ष भर समान रूप से होनी चाहिए। शुष्क क्षेत्रों में तथा मॉनसून खंड में मौसमी वर्षा के कारण जल विद्युत के उत्पादन में कमी हो जाती है।

(iii) विशाल नदियों तथा जलप्रपात का होना (Big rivers and waterfalls) नदियों में जल की मात्रा अधिक होनी चाहिए ताकि वर्ष भर समान रूप से जल प्राप्त हो सके। पर्वतीय प्रदेशों में बनने वाले प्राकृतिक जल प्रपात जल विद्युत विकास में सहायक होते हैं, जैसे—–उत्तरी अमेरिका में नियाग्रा जल प्रपात । 

(iv) मार्ग में झीलों का होना (Availability of lakes) – नदी के मार्ग में झीले अनुकूल होती हैं। यह रेत के कणों को रोककर मशीनों को हानि से बचाती है। शीतकाल में तापमान हिमांक से ऊपर होना चाहिए ताकि पानी जम न जाए।

(v) आर्थिक तत्व (Economic factors) – (क) बाजार की समीपता (Nearness of consumption areas) जल विद्युत का प्रयोग करने वाले क्षेत्र निकट होने चाहिए ताकि मार्ग में जल विद्युत का ह्रास कम हो तथा व्यय भी कम हो ।

(ख) पूँजी की आवश्यकता (Need of capital) नदियों पर बाँध बनाने तथा बिजली घरों के निर्माण के लिए पूँजी चाहिए।

(ग) अन्य तत्व (Other factors)—– जल विद्युत विकास के लिए तकनीकी ज्ञान तथा परिवहन के साधनों का होना आवश्यक है। जिन क्षेत्रों में कोयला तथा पेट्रोलियम की कमी होती है, वहाँ जल विद्युत का विकास आवश्यक हो जाता है। जल विद्युत में प्रयोग होने वाले जल का उपयोग जल सिंचाई के लिए किया जाए ताकि उत्पादन मूल्य को घटाया जा सके।

Q.6. अंतर स्पष्ट कीजिए— 

(i) धात्विक और अधात्विक खनिज 

(ii) ताप और जल विद्युत

(iii) गोंडवाना और टरशरी कोयला

Ans. (i) धात्विक और अधात्विक खनिज में अन्तर

धात्विक अधात्विक खनिज 
(1) धात्विक खनिज ऐसे खनिज पदार्थ हैं जिनको गलाने से विभिन्न धातुओं की प्राप्ति होती है।अधात्विक खनिज ओं को गिरने से किसी धातु की प्राप्ति नहीं होती है
(2) लोहा, तांबा, बॉक्साइट धात्विक खनिज हैं।कोयला ,नमक, संगमरमर ,पोटाश अधात्विक खनिज है
(3) ये खनिज प्रायः आग्नेय चट्टानों में पाए जाते हैं।यह खनिज प्राय तलछटी चट्टानों में पाए जाते हैं |
(4) इन्हें दोबारा पिघला कर भी प्रयोग किया जा सकता है।इन्हें पिघला कर प्रयोग नहीं किया जा सकता।

(ii) ताप और जल विद्युत में अन्तर टैप

ताप विद्युत जल विद्युत
(1) इसमें बिजली बनाने के लिए कोयले, डीजल और प्राकृतिक गेल का उपयोग किया जाता है।नदी ,नहर आदि पर बांध बनाकर जल द्वारा विद्युत बनाई जाती है |
(2) सन् 1975 में राष्ट्रीय ताप बिजली निगम की स्थापना की गई। (2) 1975 में राष्ट्रीय जलविद्युत ऊर्जा निगम की स्थापना की गई।
(3) राष्ट्रीय ताप विद्युत कोयले पर आधारित 13 ताप विद्युत योजनाओं और सात गैस डीजल आदि सहित बिजली घरों का संचालन कर रहा है(3) उत्तरी पश्चिमी और दक्षिणी ग्रिडों में जल ताप विद्युत योजनाओं और सात गैस- विद्युत की उल्लेखनीय भूमिका है। उत्तरी- डीजल आदि चलित बिजली घरों का संचालन कर रहा है।
(4) इसकी विद्युत उत्पादन क्षमता 19435 मेगावाट है जो उत्पादित विद्युत का 27 प्रतिशत है।इन्हें पिघला कर प्रयोग नहीं किया जा सकता।
(5) आजकल तापीय विद्युत 82% है।जल विद्युत की भागीदारी 14.9% रह गई है

(iii) गोंडवाना और टरशरी कोयला में

गोंडवाना कोयलाटरशरी कोयला
(1) कोयले का भण्डार 20 करोड़ वर्ष पुराना है। (1) लगभग 5.5 करोड़ वर्ष पुराना है। 
(2) गोंडवाना कोयला क्षेत्र चार नदी घाटियों में पाए जाते हैं।(2) टरशरी कोयला मेघालय के दारगिरी चेरापूँजी, लेरिंग्यू, माओलांग और लांगरिन क्षेत्रों से निकाला जाता है।
(3) आन्ध्र प्रदेश में सिंगरेली, उड़ीसा में महानदी पाटी में तिलचर, महाराष्ट्र में चांदा दूसरी खानें हैं।(3) यह कोयला असम में भूकम्प क्षेत्र, राजस्थान में बीकानेर क्षेत्र, मेघालय और तमिलनाडु में मिलता है।
(4) भारत का 30% कोयला मिलता है। अधात्विक खनिज (4) कुल उत्पादन 22 लाख टन है।

इस आर्टिकल में किसी भी प्रकार का त्रुटि आपको मिलती है तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं हम उसे जल्द से जल्द ठीक करने की कोशिश करेंगे क्योंकि लिखने समय सबसे गलती हो जाती है 😅😅😅😅😅😅😅😅😅


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FAQs

Q. 1. अभ्रक की प्रमुख विशेषता क्या है ?

Ans. यह विद्युतरोधी है।

Q. 2. बॉक्साइट से कौन-सी धातु तैयार की जाती है ?

Ans. एल्युमीनियम ।

Q. 3. बिजली के उपकरणों में अधिक काम में आने वाली धातु कौन-सी हैं? 

Ans. ताँबा ।

Q. 4. सीसा व जस्ता के उत्पादन में कौन-सा राज्य अग्रणी है ? 

Ans. राजस्थान ।

Q. 5. सेंधा नमक किन दो राज्यों में निकाला जाता है ?

Ans. गुजरात और हिमाचल प्रदेश।

Q. 6. कोयले के सबसे अधिक भंडार किस राज्य में हैं ?

Ans. झारखंड । 

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