Class 12th Geography-III Chapter 5 Notes In Hindi (Practical Work) | अध्याय 5 फील्ड सर्वेक्षण कक्षा 12 के प्रश्न उत्तर

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मैं खुद 12वीं का टॉपर रहा हूं और मुझे पता है कि 12वीं की परीक्षा में किस तरह के प्रश्न पूछे जाते हैं। वर्तमान में, मैं एक शिक्षक की भूमिका भी निभा रहा हूँ, और अपने छात्रों को कक्षा 12वीं की महत्वपूर्ण जानकारी और विषयों का अभ्यास भी कराता हूँ। मैंने यह लेख 5 वर्षों से अधिक के अपने अनुभव के साथ लिखा है। इस पोस्ट की मदद से आप परीक्षा में इस अध्याय से भूगोल में बहुत अच्छे अंक प्राप्त कर सकेंगे।

Class 12th Geography-III Chapter 5 Notes In Hindi (Practical Work) | अध्याय 5 फील्ड सर्वेक्षण कक्षा 12 के प्रश्न उत्तर

कक्षा | Class12th 
अध्याय | Chapter05
भाग | Part III
अध्याय का नाम | Chapter Nameफील्ड सर्वेक्षण
बोर्ड | Boardसभी हिंदी बोर्ड
किताब | Book एनसीईआरटी | NCERT
विषय | Subjectभूगोल | Geography
मध्यम | Medium हिंदी | HINDI
अध्ययन सामग्री | Study Materialsप्रश्न उत्तर | Question answer

क्षेत्रीय अध्ययन का अर्थ

किसी क्षेत्र – विशेष में पहुँचकर वहाँ की स्थिति, विस्तार, भौगोलिक, सामाजिक एवं आर्थिक दशाओं की जानकारी एकत्रित करना तथा उनके आधार पर रिपोर्ट तैयार करना क्षेत्रीय अध्ययन कहलाता है।

भारत विभिन्नताओं का देश है। यहाँ स्थलाकृतिक भिन्नता पायी जाती है जिसमें कहीं पर्वतीय भाग है, कहीं पठारी भाग हैं, कहीं मरुस्थलीय भाग हैं तो कहीं मैदानी भाग हैं। इसी भाँति भू-वैज्ञानिक भिन्नता देखने को मिलती है। भारत का दक्षिणी प्रायद्वीपयी भाग विश्व की प्राचीनतम कठोर चट्टानों से निर्मित भू-भाग है, जबकि हिमालय अति नवीनतम एवं सर्वोच्च है। यहाँ की चट्टानों में जीवाश्म मिलते हैं। 

भारत को जलवायुओं का देश भी कह दिया जाता है क्योंकि यहाँ अनेक प्रकार की जलवायु देखने को मिल जाती हैं। हमारे देश में वनस्पति, मिट्टी, कृषि, उद्योग, परिवहन आदि में पर्याप्त क्षेत्रीय भिन्नता मिलती है। इसी प्रकार यहाँ भाषा, धर्म, रहन-सहन, भोजन, भवन निर्माण सामग्री एवं प्रकार आदि की भिन्नताएँ दृष्टिगोचर होती है।

इन सभी का अध्ययन भूगोल के अन्तर्गत किया जाता है। अनेक ऐसी भौगोलिक दशाएँ हैं जिनका अध्ययन विद्यार्थी पुस्तकों में ही करते हैं, किन्तु उनके वास्तविक एवं यथार्थ स्वरूप के बारे में कुछ भी पता नहीं चलता है। उदाहरण के लिए, यदि छात्रों को ग्रामीण बस्तियों का सर्वेक्षण कराया जाए तो वे वहाँ रोजगार, शिक्षा, कृषि उत्पादन, यातायात, व्यापार आदि के आँकड़ों को एकत्रित करके एक रिपोर्ट तैयार कर सकते हैं जिससे एक अच्छी भौगोलिक जानकारी एकत्रित होगी। इस प्रकार की रिपोर्ट में संकलित किए गए आँकड़ों को रेखाचित्र, दण्डाकृति तथा चक्राकृति द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है।

यदि विद्यार्थियों को पर्वतीय क्षेत्रों में लाया जाए तो वे वहाँ की जलप्रवाह, अधिवास, मार्ग तथा वहाँ की सामाजिक रीति-रिवाज का अवलोकन करेंगे तथा उन्हें पर्वतों को उत्पत्ति, उनमें मिलने वाली चट्टानों के प्रकार, नदियों के उद्गम स्थल, घाटियों तथा पर्वतीय रहन-सहन का व्यापारिक ज्ञान होगा। इस प्रकार उन्हें पर्वतीय क्षेत्रों में वनों के प्रकार उनकी वृद्धि के प्रतिरूपों, वन क्षेत्रों के उपयोग आदि की जानकारी भी मिलेगी।

इसी भाँति अन्य क्षेत्रों का अध्ययन कराने से यहाँ की समस्त पर्यावरणीय एवं सांस्कृतिक जानकारियाँ प्राप्त होती है। यह कहा जाता है कि जो तथ्य हमें पढ़कर प्राप्त नहीं होते, उन्हें देखकर शीघ्रता एवं सरलता से प्राप्त किया जा सकता है। जेम्स फेयरग्रीव का विचार है, “भूगोल का ज्ञान जूतों के तले घिसकर ही प्राप्त किया जा सकता है। 

(Geography comes through the soles of one’s shoes.) ई. ए. फ्रीमैन का मानना है, “भूगोल यात्रा करते का तथा स्वयं अपनी आँखों से देखने का विषय है। (Geography is the matter of travel, a matter of seeing things with our own eyes.)

प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक वातावरण एवं इन दोनों के आपसी सम्बन्धों की जानकारी हेतु विभिन्न क्षेत्रों का अध्ययन अत्यावश्यक है। भू-पत्रक (Topographical Sheets) की रचना भी भौगोलिक सर्वेक्षण करने के बाद ही की जाती है। किसी क्षेत्र का भौगोलिक सर्वेक्षण होता है। करने के बाद छात्रों को भू-मापन, मानचित्रण एवं सांख्यिकीय आँकड़ों को एकत्रित करने का अभ्यास हो जाता है।

क्षेत्रीय अध्ययन हेतु चयन क्षेत्र- प्रायः देखा जाता है कि जो तथ्य हम देखकर समझ सकते हैं, वे पढ़कर नहीं समझ सकते हैं। उदाहरणार्थ, यह कहा जाए कि ज्वार-भाटा सागरों या महासागरों में आते हैं तो विभिन्न प्रकार के प्रश्न मस्तिष्क में उत्पन्न होते हैं कि महासागर कैसे होते हैं? उनका पानी खारा कैसे और क्यों होता है? उनमें वनस्पति व जीव कैसे पाए जाते हैं, उनका रंग कैसा होता है तथा तटवर्ती निवासियों को जीवन किस प्रकार का है? 

इन सारे प्रश्नों का उत्तर तो पुस्तकों में मिल सकता है, किन्तु वास्तविक आनन्द तो तब आएगा जब सागर के किनारे खड़े होकर उसमें उठने वाली लहरों को अपलक देखा जाए। इसी भाँति अन्य क्षेत्रों को देखने की उत्कण्ठा होती है। अतः क्षेत्रीय अध्ययन अथवा भौगोलिक पर्यटन हेतु निम्न क्षेत्रों का चयन करना चाहिए-

(1) पर्वतीय क्षेत्र, (2) पठारी क्षेत्र, (3) मरुस्थली क्षेत्र, (4) ग्रामीण क्षेत्र, (5) नगरीय क्षेत्र, (6) औद्योगिक नगर, (7) सागरीय क्षेत्र, (8) प्राचीन धार्मिक केन्द्र एवं

(9) कोई बहु-उद्देशीय योजना क्षेत्र प्राथमिक कार्य अथवा अध्ययन क्षेत्र का चयन हो आते हैं। जाने के बाद तैयारी करनी पड़ती है। बाहर जाने से पूर्व यह अत्यावश्यक है कि अपने साथ ले जाने वाले सामान की सूची बना ली जाए, ताकि कोई समान छूट न जाए।

प्राय: क्षेत्र तथा मौसम के अनुसार जगदेव रखे जाते हैं। जहाँ तक सम्भव हो, कपड़े कम हो र जाए ताकि अनावश्यक चार से बचा जा सके। अपने साथ कुछ नाश्ता भी रख लेना चाहिए क्योंकि कई बार ऐसा होता है कि रास्ते में कुछ अन्य खाने को नहीं है पाता है। ऐसी स्थिति में कुछ तो राहत मिलेगी। आपने पानी रखने की बोतल तथा एक ख एक बैंक के साथ एक प्रथम उपचार बॉस (First Aid Boox) भी होना चाहिए।

उपयुक्त तैयारी होने के पद से की पर्याप्त जाँग करती चाहिए, ताकि त्रुटिपूर्ण उ साथ न रख लिया जाए। इससे योगा और कार्य में नहीं हो सकेगा। जिस क्षेत्र में कार्य करता है स्थलाकृतिक मानता है कि दिन व्यवस्था हेतु वहाँ की स्थलाकृति को जानना

सम्बन्धित क्षेत्र के बारे में जानकारी हेतु कम्पास, निम्नतम एवं अधिकतम वर्मामीटर, एलोराइड बैरोमीटर आदि भी सहयोगी होते हैं, अत: इन्हें भी रखना चाहिए। किसी क्षेत्र की वनस्पति, चट्टानों, स्वकृति लोगों की पोशाक अर्थात वेशभूषा जादि की जानकारी सजीव रखने के लिए कैमरा आवश्यक होता है। अत: इसे रखना नहीं भूलना चाहिए। कई बार ऐसा होता है कि कोई भाग अपनी पहुँच से दूर है अर्थात् यहाँ जाया नहीं जा सकता है। अतः ऐसे दुर्गम क्षेत्रों को देखने के लिए दूरबीन अवश्य होनी चाहिए।

उपर्युक्त सारी वस्तुओं के साथ-साथ पुतिक या नोट बुक, पेन्सिल, रबर, कटर, पैमाना, अलति, चाकू, ड्राइंग शीट, ट्रेसिंग पेपर, ग्राफ पेपटी आदि भी रखने चाहिए। इनके अतिरिक्त रास्ते का मानचित्र (Route Map) भी रख लेना चाहिए।

रेखांकन विवरण

 मानचित्र के दिक् विन्यास से तात्पर्य धरातल के सन्दर्भ में अपने मानचित्र पर उत्तर दिशा अंकित करना है। यदि मानचित्र पर उत्तर की दिशा सहीं अंकित की जाती है तो अन्य विवरणों को प्रदर्शित करने में सुविधा रहती है। मानचित्र इस प्रकार रखा जाय कि वह भूतल के दिक् विन्यास के अनुरूप हो। इससे विवरणों को दर्शन में बहुत

दिशा का ज्ञान सूर्य से होता है। इसके अलावा इसकी जानकारी के लिए निम्नांकित साधन हैं- (1) ध्रुव तारा, (2) सूर्य घड़ी, (3) छायाविधि, (4) मस्जिद, (5) शिव मन्दिर, (6) कब्रिस्तान, (7) चर्च, (8) दिक्सूचक।

क्षेत्रीय सर्वेक्षण- चयनित अध्ययन (Field Sur vey: Case Study)

  • चयनित अध्ययन के लिए विषय का चयन सम्बन्धित क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति पर निर्भर करता है। उदाहरणतः कम वर्षा वाले क्षेत्रों में सूखे का सर्वेक्षण तथा अधिक वर्षा वाले क्षेत्र में बाढ़ का सर्वेक्षण, औद्योगिक क्षेत्र में प्रदूषण का सर्वेक्षण, कृषि क्षेत्र में भूमि उपयोग का योजना के अनुसार क्षेत्र में जाकर सर्वेक्षण का काम पूरा सर्वेक्षण विद्यार्थी स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप एक सर्वेक्षण का चुनाव कर सकते हैं।
  • (1) प्रदूषण (Pollution), (2) सतही जल परिवर्तन (Ground Water Change), (3) भूमि उपयोग तथा भूमि उपयोग प्रतिरूप (Land-use and Land-use Pattern), (4) गरीबी (Poverty), (5) ऊर्जा (En- ergy), (6) मृदा अवनयन (Land Degradation), (7) सूखा एवं बाढ़ (Drought and Flood) ।
  • निष्कर्ष-सारणी में दी गयी सूचनाओं को दण्ड आरेख तथा हस्त आरेख द्वारा प्रदर्शित करना चाहिए।
  • स्मरणीय तथ्य (Points to Remember) किसी भी क्षेत्र की चयनित समस्या के सन्दर्भ में सूचनाएँ प्राप्त करने के लिए आधारभूत रूप से क्षेत्रीय सर्वेक्षण आयोजित किया जाता है।
  • • किसी क्षेत्र की जानकारी प्राप्त करने के लिए वहाँ के निवासियों से विभिन्न प्रकार से प्रश्न पूछे जाते हैं। यह साक्षात्कार विधि कहलाती है। • सर्वेक्षण कार्य करने से पहले ही एक रेखाचित्र बना लिया जाता है। इसमें विशेष ध्यान रखने की बात है कि. कोई चीज छूटने न पाए। 
  • ● किसी क्षेत्र की विभिन्न घटनाओं एवं तथ्यों को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए उन्हें आरेखा द्वारा बनाया जाता है। अतः इनके प्रस्तुतीकरण में आरेखों का महत्वपूर्ण योगदान होता है।

एन. सी. ई. आर. टी. कॉर्नर (NCERT CORNER)

प्रश्न 1. मौखिक प्रश्नोत्तर (Vivn Voce) 

1. क्षेत्र अध्ययन से क्या तात्पर्य है?

उत्तर- किसी क्षेत्र विशेष में पहुँचकर वहाँ की स्थिति, विस्तार, भौगोलिक, सामाजिक, आर्थिक दशाओं की जानकारी एकत्रित करना तथा उनके आधार पर रिपोर्ट

2. क्षेत्रीय अध्ययन के प्रमुख तत्व कौन से हैं? 

उत्तर- क्षेत्रीय अध्ययन के प्रमुख तत्व सामान्य परिव अधिवास, आर्थिक क्रियाएँ, जनसंख्या, सामाजिक व सांस्कृतिक तथा क्षेत्रीय समस्याएँ आदि है।

3. क्षेत्रीय अध्ययन से क्या लाभ हैं?

उत्तर- क्षेत्रीय अध्ययन से विद्यार्थियों को किसी न किसी क्षेत्र की विस्तृत भौगोलिक जानकारी मिल जाती है। इसके साथ-साथ आँकड़े एकत्रित करने का ज्ञान हो जाता है।

4. सर्वेक्षण प्रक्रिया के प्रथम चरण में क्या होता है? 

उत्तर-सर्वेक्षण प्रक्रिया के प्रथम चरण में ल की योजना बनाता है तथा क्षेत्र चयन करता है।

5. मानचित्र का दिक्-विन्यास क्या है? 

उत्तर- मानचित्र को ग्लोग के अनुसार सही दिशा में व्यवस्थित करने की प्रक्रिया को मानचित्र का दिक्-विन्यास कहा जाता है। 

6. उद्योगों की चिमनियों से कौन-कौन-सी गैस निकलती हैं?

उत्तर- उद्योगों की चिमनियों से कार्बन डाइ सराइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड आदि जैसे बड़ी मात्रा में निकलती है।

7. प्रदूषण के तीन मुख्य कारक कौन से हैं?

उत्तर- प्रदूषण के तीन मुख्य कारक उद्योगध

8. भूमिगत जल क्यों गिर रहा है? 

उतर-भूमि से लगातार पानी के कार इसका गिर रहा है। 

9.भारत में कितनी गरीबी है?

उत्तर-भारत में गरीबी का राष्ट्रीय प्रतिशत 25 10 है। 

10. पर्यावरण के तीन पातक के नाम बताएं।

उत्तर-(1) वायू (2) (8) भूमि 

11. बाजार सर्वेक्षण का उद्देश्य क्या है? 

Ans:उमरक्षण का सबसे बड़ा उद्देश्य बाजार के प्रभाव कीरत करता है। बाजार में दुका की संख्या विवरण, प्रकार तथा उनको व्यवस्था में जानकारी प्राप्त करना है।

12. घरेलू सर्वेक्षण का क्या उद्देश्य है? 

उत्तर- परेलू सर्वेक्षण का उद्देश्य परिवार के आकार, शिक्षा तथा आय के स्रोतों के ।

प्रश्न (प्रश्न):

  • 1. क्षेत्रीय अध्ययन का क्या महत्व है? क्षेत्रीय अध्ययन हेतु क्षेत्र चयन कैसे किया जायेगा? 
  • 2. किसी क्षेत्रीय अध्ययन की रिपोर्ट कैसे तैयार की जाती है ?
  • 3. अपने आस-पास के किसी भी क्षेत्र का विस्तृत विवरण दीजिये।
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FAQs

Q; क्षेत्र सर्वेक्षण करने से पहले किस प्रकार के कवरेज को परिभाषित करने की आवश्यकता है?

उत्तर: क्षेत्र अध्ययन के दौरान अन्वेषक को यह निर्णय लेना होता है कि सर्वेक्षण सम्पूर्ण जनसंख्या के लिए जनगणना के रूप में किया जायेगा या चयनित प्रतिदर्श पर आधारित होगा। यदि अध्ययन क्षेत्र बहुत बड़ा नहीं है लेकिन विविध तत्वों से बना है तो पूरी आबादी का सर्वेक्षण किया जाना चाहिए। बड़े आकार के क्षेत्र के मामले में, जनसंख्या के सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व करने वाले चयनित नमूनों तक अध्ययन को सीमित किया जा सकता है।

Q. फील्ड सर्वेक्षण में जानकारी कैसे एकत्रित की जाती है?

उत्तर: जानकारी एकत्र करने के स्रोत प्राथमिक या द्वितीयक हो सकते हैं। प्राथमिक स्रोतों में क्षेत्र सर्वेक्षण, साक्षात्कार, प्रत्यक्ष मौखिक जाँच आदि शामिल हैं। द्वितीयक स्रोतों को प्रकाशित या अप्रकाशित किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, विभिन्न सरकारी, अर्ध सरकारी, गैर सरकारी, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियां और इसके अलावा समाचार पत्र, पत्रिकाएं, निजी प्रकाशन और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया अन्य स्रोत हैं।

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