कक्षा 12वी के महत्वपूर्ण पत्र-लेखन | Important Class 12th Hindi letter writing format

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कक्षा 12वी के महत्वपूर्ण पत्र-लेखन | Class 12th Hindi letter writing format


कक्षा | Class12th 
अध्याय का नाम | Chapter Nameपत्र-लेखन
अध्याय प्रकार | Chapter typeहिंदी व्याकरण | Hindi grammar
किताब | Bookहिंदी कोर | HINDI CORE
बोर्ड | Boardसभी बोर्ड | All India Board
किताब | Book एनसीईआरटी | NCERT
विषय | Subjectहिंदी | HINDI


कक्षा 12वी के महत्वपूर्ण पत्र-लेखन | Important Class 12th Hindi letter writing format

पत्र – लेखन में ध्यान देने योग्य बातें


1. पत्र बातचीत के ढंग पर लिखना चाहिए। लिखनेवाले को ऐसा समझाना चाहिए कि हम जिसके पास पत्र लिखते हैं उससे बातें कर रहे हैं। ऐसे पत्र के पढ़ने से पढ़नेवाले का जी आनंद से भर जाता है। 

2. पत्र उस समय लिखना चाहिए जब मन चंचल न हो। यदि क्रोथ चढ़ा हो तो उस समय पत्र लिखने से पीछे पछताना पड़ता है। यदि किसी के पत्र का उत्तर देना हो तो पत्र को सामने रखकर ठीक उसी के अनुसार उत्तर दें। 

3. पत्र को अच्छी तरह सोच-विचार कर लिखना चाहिए। पत्र में केवल काम की बातें हों, सो भी छोटे-छोटे वाक्यों में और मधुर शब्दों में पत्र की भाषा पढ़नेवाले की योग्यता के अनुसार होनी चाहिए।

4. जान पहचानवाले के पत्र में प्रेम घरेलूपन दिखलाना उचित है, परन्तु अनजान मनुष्यों के पास पत्र भेजने में इसकी आवश्यकता नहीं, क्योंकि उन्हें केवल काम-काज के पत्र जाते हैं।

5. कोई पत्र क्यों न हो, ऐसा न होना चाहिए कि उसमें घमण्ड झलके । 

पत्र के मुख्य 5 अंग होते हैं-


(क) जहाँ से पत्र जाय उस स्थान का नाम और तारीख।

(ख) प्रशस्ति अर्थात् आदर के शब्द और वाक्य ।

(ग) प्रणाम, आशीर्वाद इत्यादि शब्द ।

(घ) काम की बातें (हाल समाचार)।

(ङ) उचित विशेष के साथ लिखनेवाले का नाम ।

आधुनिक पत्रों को प्रशस्ति और समाप्ति के शब्द नीचे दिये जाते हैं-


पिता के लिए- 1. मान्यवर (पूज्यतम) पिताजी या पिताश्री 
2. आपका दास, चरणसेवक।
माता के लिए1. महामान्या माताजी या माता श्री । 
2. आपका दास, चरणसेवक।
अध्यापक के लिए1. महानुभाव।
2. आपका ( भवदीय) सेवक
बड़े भाई के लिए1. पूज्यवर भ्राताजी या भ्राता श्री
2. आपका स्नेह-भाजन।
गुरु के लिए1. श्री मान्यवर, पूज्यतम ।
2. चरणसेवक, आपका दास । 
पति के लिए1. श्री आर्यपुत्र, प्रिय प्राणनाथ।
2. आपकी दासी।
मित्र के लिए1. सुहृदय, प्रियवर, प्रिय मित्र। 
2. आपका प्रिय मित्र ।

पत्रों के प्रकार


पत्रों के कई प्रकार हो सकते हैं, जैसे अनौपचारिक और औपचारिक । अनौपचारिक में व्यक्तिगत, पारिवारिक सामाजिक आदि पत्र आ जाते हैं तथा औपचारिक पत्रों में व्यवसाय अथवा सरकारी कार्यालयों से सम्बन्धित पत्र आ जाते हैं तथा औपचारिक पत्रों में व्यवसाय अवद सरकारी कार्यालयों से सम्बन्धित पत्र आते हैं। इस प्रकार मुख्यतः हम पत्रों को इन चार प्रकार्य में विभाजित कर सकते हैं- 

1. व्यक्तिगत पत्र— ऐसे पत्र, जो माता-पिता, भाई-बहन अथवा किसी अन्य प्रियजन मित्र को लिखे जाते हैं, व्यक्तिगत पत्र कहलाते हैं।

2. सामाजिक पत्र—– सामाजिक स्तर पर विवाह, मृत्यु, जन्म-दिवस, गृह प्रवेश आदि के मांगलिक अथवा संस्कार उत्सव पर लोगों को आमन्त्रित करने के लिए जो पत्र लिखे अथव छपवाये जाते हैं, वे सामाजिक पत्र कहलाते हैं।

3. व्यावसायिक पत्र —– किसी व्यवसायी द्वारा अपने व्यवसाय के सम्बन्ध में दूसरे व्यापारियों, दुकानदारों, ग्राहकों, कारखानेदारों अथवा फर्मों को जो पत्र लिखे जाते हैं, वे व्यावसायिक अथक व्यापारिक पत्र कहलाते हैं।

4. सरकारी पत्र – जो पत्र सरकारी कार्यालयों द्वारा अन्य सरकारी कार्यालयों, विभाग, व्यक्तियों को लिखे जाते हैं, वे सरकारी पत्र कहलाते हैं।

पत्र का कलेवर


अनौपचारिक तथा औपचारिक पत्रों का कलेवर पृथक्-पृथक् होता है। व्यक्तिगत पत्रों क कलेवर अत्यन्त विविधतापूर्ण होता है। इसलिए उसे समझ लेना आवश्यक है। उसके कलेवर के पाँच भागों में बाँटा जा सकता है-

1. प्रेषक का पता एवं तिथि-


पत्र के प्रारम्भ में लेखक को पत्र के दायीं ओर ऊपर पता अंकित करना चाहिए। पते के ऊपर लेखक का नाम भी लिखा रहना चाहिए। पते के ठीक नीचे पत्र लिखने की तिथि भी अंकित होनी चाहिए। उदाहरणतया –

  • संजय 
  • रातू रोड, 
  • राँची 15 अप्रैल, 200

विशेष सूचना परीक्षा में विद्यार्थी को अपना पता या अन्य कोई झूठ-मूठ का पता देना चाहिए। यह परीक्षा के नियमों के विरुद्ध है। इससे उत्तर-पुस्तिका की गोपनीयता भंग होती है। इसलिए परीक्षा में केवल परीक्षा भवन और केन्द्र का उल्लेख करना पर्याप्त रहता है। यथा—

  • परीक्षा भवन, 
  • केन्द्र ।
  • 2 अप्रैल, 20…..

2. सम्बोधन: 


पता तथा तिथि लिखने के पश्चात् लेखक जिस व्यक्ति अथवा सम्बन्धी को पत्र लिख रहा है, उसे सम्बोधित करना चाहिए। यह सम्बोधन कागज के बाई ओर पते के नीचे लिखा रहना चाहिए। संबोधन व्यक्ति तथा सम्बन्धों की प्रगाढ़ता के आधार पर होना चाहिए। बड़ों को पत्र लिखते समय आदरणीय, सम्मान्य, माननीय, पूजनीय, वन्दनीय, पूज्य, श्रद्धेय आदि लिखना चाहिए। समवयस्कों को प्रिय बन्धु, बन्चुवर, मित्रवर, स्नेहिल आदि तथा छोटों को प्रिय, लेहिल, आयुष्मान्, मेरे प्यारे आदि लिखना चाहिए। जैसे-

  • श्रद्धेय दादा जी,
  • पूज्य पिता जी,
  • प्रिय मित्र अशोक 
  • स्नेहमयी अलका आदि।

3. अभिवादन-


यद्यपि आज धीरे-धीरे पत्रों में अभिवादन लिखने की परम्परा समाप्त होती जा रही है, किन्तु व्यक्तिगत पत्रों में अभिवादन करना हमारे सहज प्रेम सम्मान की अभिव्यक्ति के लिए अनिवार्य है। इसलिए अभिवादन हो तो अच्छा है। अभिवादन भी व्यक्ति और सम्बन्धों के अनुसार बदल जाना चाहिए। 

जैसे—बड़ों के लिए सादर प्रणाम, चरण स्पर्श, नमस्कार आदि; समवयस्कों के लिए सप्रेम नमस्ते, प्रेम आदि तथा छोटों के लिए स्नेह, प्यार, प्रेम, सुखी रहो, चिरंजीवी रहो आदि लिखना चाहिए।

4. मुख्य विषय


पत्र का वास्तविक कथ्य ही मुख्य विषय होता है। हमें अपने विषय को रोचक, सरस शैली में स्पष्ट ढंग से प्रस्तुत करना चाहिए। यदि विषय लम्बा है और विचार के दिन्दु अधिक हैं, तो उन्हें विभिन्न अनुच्छेदों में बाँटकर लिखा जाना चाहिए। 

मुख्य विषय के प्रतिपादन में वे सभी गुण होने चाहिए, जिनका उल्लेख ‘एक श्रेष्ठ पत्र के गुण’ में किया गया है। 

5. उपसंहार —


वर्ण्य विषय पूर्ण हो जाने पर पत्र के अन्त में दायीं ओर लेखक को अपना नाम तथा पत्र प्राप्तकर्त्ता के साथ अपना सम्बन्ध सम्बोधित करना चाहिए। जैसे— आपकी लाडली,

  • मानसी
  • तुम्हारा ही, संजय राज
  • पारिवारिक पत्र
  • आपका प्रिय पुत्र सुमन

प्रश्न 1. एक पत्र अपने पिता को लिखिए, जिसमें पुस्तकें खरीदने के लिए रुपये भेजने की प्रार्थना की गयी हो । 

उत्तर-

परीक्षा भवन,

केन्द्र | 

5 अप्रैल, 200…….

पूज्य पिताजी

सादर प्रणाम। जाता है, आप व घर के अन्य सभी सदस्य सकुशल व सानन्द हैं। इस बार मैं आपको पत्र जल्दी न भेज सका; क्योंकि मेरी योग्यता परीक्षा हो रही थी। उसकी तैयारी में लगा रहा। मेरी गणित और अंग्रेजी की परीक्षा इस बार इसलिए कुछ ढीली रह गई, क्योंकि इन दोनों विषयों से सम्बन्धित अच्छी पुस्तकें मेरे पास नहीं थी। अतः आपसे प्रार्थना है कि इन दोनों विषयों की

बढ़िया पुस्तकें खरीदने के लिए आप मुझे 200/- (दो सौ रुपये भेज दें में अलका गणित गाइर प तथा अलका अंग्रेजी गाइड खरीदना चाहता हूँ। इन दोनों गाइडों की प्रशंसा मेरे अन्य सहपारित ने भी की है। इसलिए इस पुस्तकों के लिए रुपये की आवश्यकता पड़ेगी जो थोड़े रुपये जाएँगे, वह मैं अपने व्यक्तिगत व्यय के लिए रख लूँगा।

मेरी ओर से पूज्या माता जी को सादर चरण चन्दना । मानसी और राहुल को प्यार । मेरे योग्य कोई सेवा हो, तो अवश्य लिखें। पत्रोत्तर शीघ्र दें तथा रुपये भी जल्दी भिजवाएँ। 


प्रश्न 2. अपने मित्र को एक पत्र लिखकर किसी ऐतिहासिक स्थान की यात्रा का वर्णन कीजिए। 

उत्तर-

परीक्षा भवन

अशोक नगर, जमशेदपुर 

26, 200……

हृदयाभिन्न चित्रेश,

सप्रेम नमस्कार। यह मेरे लिए अत्यन्त रोमांचक अनुभूति का विषय है कि ‘ताज’ को देखकर मेरे मन-पटल पर जो मधुर छायांकन हुए, उनका भागीदार अपने सर्वप्रथम मित्र को भी बनाऊँ। मैंने जितने भी ऐतिहासिक स्थान देखे, यह उनमें सर्वोत्तम है। 

पहले मैं सोचा करता था कि भारत की इस ऐतिहासिक सौन्दर्य-स्थली का जो चित्र प्रायः प्रस्तुत किया जाता है, उसमें पर्याप्त अतिशयोक्ति होगी किन्तु ‘ताज’ को देखकर में स्वयं मुगल कला की इस अनुपम कृति पर विमुग्ध हो गया। सौन्दर्य स्वयं वहाँ बोल रहा था—एक ऐसी भाषा में जो अजानी थी, फिर भी ग्राह्म और मनोहारी। मैं सौन्दर्य के इस रम्यस्थल को देख आश्चर्यान्वित रह गया, जो कला की परिष्कृति की चरम सीमा है। 

जैसा कि तुम स्वयं जानते हो, यह प्रेम का अमर स्मारक है, जिसका निर्माण मुगल राजाधिराज ने अपनी प्राणप्रियतमा की मधुर स्मृति को युगजीबी आयु प्रदान करने के लिए किया था। मुझे उस समय तुरन्त हफीज जालंधरी की वह ‘नज्म’ याद आ गयी, जिसमें उसने महान सम्राटों की इस वैभव विलास लीला की कटु आलोचना की है कि उन्होंने इस प्रकार के स्मारक बना कर निर्धन प्रेमियों के प्रेम का उपहास किया है।

तुम चाहे जो भी समझो, किन्तु मुझे स्वीकार करना ही होगा की एक कलाकृति के रूप में यह निःसंदेह विश्व के आश्चयों में से एक है। इस स्थान का दौरा करने के पूर्व मैंने ऐल्डस हक्स्ले की ताज-सम्बन्धी आलोचना पढ़ी थी और अब इस भव्य इमारत को देखकर मैं यह निश्चयपूर्वक कह सकता हूँ कि उस महान् साहित्यिक की ताज विषयक धारणाएँ गलत हैं। 

उसकी दृष्टि में रंग और रूप का सम्मिश्रण दोषपूर्ण है। मेरा विचार है कि रंगों की भव्यता किसी भी कलाकार की आँखों को अपनी ओर आकर्षित करती है। मेरे विचार में ये मीनारें सौन्दर्य में भी अभिवृद्धि ही करती हैं। बहुमूल्य हीरों के द्वारा की गयी सुन्दर साज-सज्जा इस ‘गौरवपूर्ण द्वीप’ की उच्चता को चार चाँद लगाती है।

जब मैं वहाँ था तो मेरे मन में एक कामना छिपी थी कि यदि तुम मेरे साथ होते तो इससे मुझे ताज को एक ऐसा कलाकार की दृष्टि से देखने का अवसर मिलता जिसके विचारों की मैं कद्र करता हूँ। फिर भी मुझे विश्वास है कि तुम मेरे विचारों से सहमत होगे तथा कला की इस सौन्दर्यपूर्ण कृति के दर्शन करोगे जो मेरी दृष्टि में मानवीय कला, कल्पना तथा विवेक की पूर्णता की प्रतीक है।

मेरी शुभकामनाएँ अपने परिवार के सदस्यों के प्रति स्वीकार करो।

तिथि-

तुम्हारा ही

चन्दन


प्रश्न 3. अपने पिता को एक पत्र लिखकर उसमें अपने छात्रावास जीवन का वर्णन कीजिए 

उत्तर-

परीक्षा भवन

नई कॉलनी, दुमका।

10 अप्रैल, 200……

आदरणीय पिताजी,

अपने छात्रावास जीवन का वर्णन लिखते समय मुझे रोमांच हो आया है। इससे कोई सन्छेद नहीं कि माता-पिता, भाई-बहनों तथा परिवारीय सदस्यों से वियोग की वेदना कई बार मेरे मस्तिष्क में अत्यधिक खिंचाव उत्पन्न कर देती है, किन्तु अब में उन महान उपलब्धियों की कामना करता हूँ। 

जो मुझे इस छात्रावास जीवन में प्राप्त हुई है, तो लगता है कि वास्तविक जीवन का प्रारम्भ अब हुआ है। में अनुभव करता हूँ कि इस उक्ति में पर्याप्त सत्यांश है “कॉलेज की दीवारें योग्य अध्यापकों से भी अधिक पाठ पढ़ाती हैं।” इस उक्ति में यह और जोड़ा जा सकता है कि केवल छात्रावास का जीवन ही व्यक्ति के जीवन को सच्ची बौद्धिकता प्रदान करता है, क्योंकि मैंने देखा है कि विश्वविद्यालयी छात्रों की आत्मा स्वास्थ्य तभी प्राप्त करती है जब वह जीवन के शोरशराबे से बिल्कुल दूर हो।

सहपाठियों, कॉलेज के मित्रों तथा सबसे अधिक समवयस्कों का सहवास, विचार के आदान- प्रदान तथा संस्कृति एवं सभ्यता के ज्ञान का सुअवसर प्रदान करता है। समझता हूँ कि दो मास की इस अल्पावधि में मैंने एक सर्वश्रेष्ठ गुण अर्जित किया है। वह है अपने आपको सामूहिक जीवन के अनुरूप ढालना। 

आप जानते हैं कि एकमात्र पुत्र होने के कारण मैंने यह कभी भी न सोचा था कि मुझे स्वयं को दूसरों के अनुरूप बनना है। जब में शुरू-शुरू में यहाँ पहुँचा तो मैंने सोचा था कि छात्रावास के अन्य छात्र मेरे विरोधी हैं जो मेरे छात्रावासीय जीवन के सुख में व्यवधान उत्पन्न करेंगे। 

किन्तु दूसरे ही दिन यह स्पष्ट हो गया कि सामूहिक जीवन में एक विशिष्ट आनन्द है। यद्यपि ऐसे जीवन में आदान-प्रदान की आवश्यकता होती है, किन्तु फिर भी इसमें प्रसन्नता है कि छात्रावास जीवन में जो आदतें मेरे भीतर विकसित हो रही हैं, उनकी सहायता से समझता हूँ कि मेरा जीवन इस तरह की लोच से परिपूरित हो जायेगा, जो मुझे स्वयं में सीमित न रहने देकर संसार के अन्य अंगों के साथ मेरा तादात्म्य स्थापित करेगा। 

इस जीवन के लाभ इतने अधिक हैं कि मैंने स्वयं को अनेक दिशाओं में सक्रिय कर लिया है। सर्वप्रथम मेरी आदतें बहुत नियमित हो गई हैं और अब में निकम्मेपन का शिकार नहीं हूँ—उस शिशु की तरह जो जीवन की सम्पूर्ण आवश्यकताओं के लिए अपनी माँ पर निर्भर रहता है। 

जीवन में पहली बार में अनुभव कर रहा हूँ कि मेरा भी अपना स्वतंत्र अस्तित्व है और यह मेरा अपना दृष्टिकोण होगा कि मैं स्वयं को उस सामाजिक ढाँचे के साथ किस तरह संलग्न करूँ जिसका कि मैं स्वयं भी एक अंग हूँ।

मैं आपका कृतज्ञ हूँ कि आपने मुझे ‘किताबी कीड़ा’ न बनाकर जीवन का साक्षात् ज्ञान प्राप्त करने का सुअवसर प्रदान किया। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि कभी कोई शक्ति मुझे पथ से विचलित कर उन महान् उद्देश्यों से विमुख न कर सकेगी जो आपने मुझे समझाये हैं। माताजी, भाइयों तथा बहिनों को यथायोग्य कहिएगा।

आपका प्रिय पुत्र

राजीव


4. स्कूल में अध्ययनरत अपने भाई को एक पत्र लिखकर उसे क्रीड़ा-कार्यक्रमों में सक्रिय भाग लेने की प्रेरणा दीजिए।

उत्तर-

टावर चौक, देवघर 

6 जनवरी, 200……

प्रिय गीतम, 

कल ही मुझे पिताजी का एक पत्र प्राप्त हुआ जिसमें उन्होंने तुम्हारे गिरते हुए स्वास्थ्य का बहुत दी दयनीय खाका खींचा था और लिखा था कि आजकल तुम एक किताबी कीड़ा बन गये हो। मैं भी इस बात से सहमत हूँ कि अपने विद्यार्थी जीवन में तुम्हें परिश्रम करना चाहिए, क्योंकि इसके अभाव में शिक्षा के पुण्यदायी फल की प्राप्ति सम्भव नहीं । 

किन्तु यह तथ्य भी विस्मृत न करो बन्धु कि हर समय काम करने और खेल से दूर रहने से जीवन नीरस हो जाता है। जो लोग यह समझते हैं कि केवल उद्योग से ही मनुष्य सफलता प्राप्त करता है, वे भ्रम में हैं। यह एक स्पष्ट सत्य है कि इस प्रकार जो व्यक्ति प्रायः विश्वविद्यालय की परीक्षाओं में उच्चस्थ स्थान तथा विशिष्ट योग्यता प्राप्त करते हैं, वे साधारणतः अपने भावी जीवन में असफल ही रहते हैं।

सर्वाधिक महती मान्यताओं में से एक मेरे विचार में यह है कि मानवीय जीवन में सर्वसुन्दर और सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण मनुष्य का स्वास्थ्य है। मुझे ‘एन अपालाजी टू आइलर्ट’ लेख में कही गयी श्री आर. एल. टीबेंसन की यह बात याद है। ‘मुझे किसी स्वस्थ व्यक्ति के जीवन से ईर्ष्या होती है। 

किताबी कीड़े तो अधिकतर पेट दर्द और दुर्बल दृष्टि के शिकार होते हैं।’ मेरी यह तीव्र कागना है कि तुम जीवन में पूर्णतः विपरीत दृष्टिकोण से विचार करो। किन्तु मेरा यह तात्पर्य कदापि नहीं कि तुम अध्ययन से घृणा करो और ‘एक’ की भेंट ‘दूसरे’ को प्राप्त करो। यह एक सर्वमान्य धारणा है कि एक को जीवन दूसरे का जीवन लेकर नहीं दिया जाना चाहिए। 

इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि अध्ययन तथा अन्य सहकारी गतिविधियों का जीवन में सुन्दर समन्वय हो। तिथि-

तुम्हारा सुहृद विवेक

कार्यालयीय पत्र


प्रश्न 5. खेलों के लिए आवश्यक तैयारी और खेल का सामान उपलब्ध कराने के लिए प्रधानाचार्य को आवेदन-पत्र लिखिए। अथवा, अपने प्रधानाचार्य को एक संक्षिप्त आवेदन पत्र लिखिए, जिसमें खेल का सामान उपलब्ध कराने की प्रार्थना की गयी हो।

उत्तर-

सेवा में,

प्रधानाचार्य महोदय, 

राजकीय उच्च विद्यालय

जामताड़ा।

श्रीमान जी, 

     सविनय निवेदन है कि अगले ही मास अपने विद्यालय बोर्ड की खेल-कूद प्रतियोगिताएँ आयोजिता होने जा रही हैं। इस बार अधिक वर्षा के कारण हमारे क्रीड़ा-स्थल की हालत बुरी हो गयी है। किसी भी खेल की समुचित तैयारी नहीं हो पाई है। मैदान में कई स्थानों पर गड्डे हो गए हैं। क्रिकेट की पिच पर तो काफी परिश्रम की आवश्यकता है।

इस वर्ष अभी तक खेल का नया सामान खरीदा नहीं गया है। इसलिए दस दिन से उसका अभ्यास बन्द है। पिछले वर्ष भी अभ्यास की कमी के कारण हमारी टीमें परास्त हो गई थी। 

आपसे आग्रह है कि शीघ्र ही खेल के सामान और मैदान की समुचित व्यवस्था कराएँ, ताकि हम बेहतर खेल का प्रदर्शन कर सकें।

धन्यवाद सहित

आपका आज्ञाकारी शिष्य

राहुल कक्षा XI-सी,

दिनांक – 2 मार्च, 2004

– अनुक्रमांक 3


प्रश्न 6. प्रधानाचार्य को आर्थिक सहायता देने के लिए प्रार्थना-पत्र लिखिए । 

उत्तर

सेवा में,

प्रधानाचार्य महोदय,

__________स्कूल

__________नगर ।

विषय— आर्थिक सहायता के लिए प्रार्थना पत्र ।

श्रीमान् जी,

निवेदन है कि में आपके विद्यालय में ग्यारहवीं कक्षा का विद्याथी हूँ। गत वर्ष मेरे पिता जी का आकस्मिक देहान्त हो गया था। आर्थिक दृष्टि से सारा परिवार उन्हीं पर निर्भर करता था। उनके देहान्त से हमारी आर्थिक स्थिति बड़ी दयानीय हो गई है। मेरी माताजी दूसरों के घरों में छोटे-छोटे काम करके जैसे-तैसे अपना तथा हम तीन बहन-भाइयों का पेट पालती हैं। ऐसी स्थिति में मेरे लिए अपनी पढ़ाई का खर्चा चलाना असंभव है।

मान्यवर, मेरी तीव्र इच्छा है कि मैं अपनी पढ़ाई का क्रम बनाए रखकर एम. ए. की परीक्षा पास करूँ। मैं दसवीं तक सभी श्रेणियों में सदैव अच्छे अंकों से उत्तीर्ण होता रहा हूँ। मैंने अनेक

बार भाषण तथा वाद-विवाद प्रतियोगिता में पुरस्कार जीते हैं। मेरी आपसे प्रार्थना है कि मुझे विद्यालय की ओर से आर्थिक सहायता दिलवाने की कृपा करें, जिससे मेरी पढ़ाई का खर्च चल सके। मैं सदैव आपका आभारी रहूँगा।

आपका आज्ञाकारी शिष्य,

_______________नाम

_______________कक्षा

दिनांक – 20 जून, 2004

अनुक्रमांक___________


प्रश्न 7. अपने विद्यालय के प्रधानाचार्य को एक दिन के अवकाश के लिए प्रार्थना-पत्र लिखिए ।

अथवा अपने विद्यालय के प्रधानाचार्य को एक आवेदन-पत्र लिखिए, जिसमें बीमारी के कारण परीक्षा में शामिल नहीं होने के लिए अवकाश हेतु अनुरोध हो । 

उत्तर—

सेवा में,

प्रधानाचार्य महोदय,

_________स्कूल

_________नगर।

विषय- एक दिन के अवकाश के लिए प्रार्थना-पत्र।

श्रीमान जी,

कल सहसा मेरा स्वास्थ्य खराब हो गया। स्कूल लौटते हुए चिलचिलाती धूप के पड़ने से मुझे जोर का सिर दर्द हुआ, जिससे में बेचैन हो उठा। मुझे अब काफी शारीरिक कमजोरी अनुभव हो रही है। में स्कूल आने की स्थिति में नहीं हूँ। डॉक्टर ने भी मुझे पूर्ण विश्राम का परामर्श दिया है।

कृपया मुझे आज का अवकाश प्रदान कर अनुगृहीत करें।

आपका आज्ञाकारी शिष्य,

______________नाम,

______________कक्षा,

अनुक्रमांक _______

दिनांक – 20 जून, 20……


प्रश्न 8. अपने प्रधानाचार्य को आवेदन-पत्र लिखकर अपना मासिक शुल्क कम करने की प्रार्थना कीजिए।

उत्तर- 

सेवा में,

प्रधानाचार्य महोदय,

______________ स्कूल

______________शहर।

विषय— मासिक शुल्क कम करने के लिए प्रार्थना-पत्र ।

श्रीमान् जी,

सविनय निवेदन है कि में ग्यारहवीं कक्षा का विद्यार्थी हूँ। में एक निर्धन परिवार से सम्बन्ध रखता हूँ। मेरे पिताजी की किताब की एक छोटी-सी दुकान है, जिससे इतनी आमदनी नहीं हो पाती कि परिवार का भरण-पोषण सुचारू रूप से हो सके। मेरे पिताजी मेरी पढ़ाई-लिखाई के बोझ को उठाने में असमर्थ हैं।

मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ कि आप मेरा मासिक शुल्क कम करने की कृपा करें, में अपनी पढ़ाई जारी रख सकूँ। जिससे मैं आपको पूर्ण विश्वास दिलाता हूँ कि अपने आचरण और पठन-पाठन में आपको किसी शिकायत का मौका न दूँगा। धन्यवाद,

आपका आज्ञाकारी शिष्य:-

 ______________नाम

______________कक्षा

दिनांक-28 जून, 2004

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Geography भूगोल
Political science राजनीति विज्ञान
English SubjectResult
Hindi SubjectHistory answer keys

प्रश्न 9. अपने प्राचार्य को छात्रावास में स्थान प्राप्त करने के लिए एक प्रार्थना-पत्र लिखिए।

उत्तर- 

सेवा में,

प्राचार्य महोदय,

______________विद्यालय

______________नगर । 

विषय— छात्रावास में स्थान के लिए प्रार्थना-पत्र |

महोदय,

विनम्र निवेदन है कि में आपके विद्यालय में ग्यारहवीं कक्षा का विद्यार्थी हूँ। मेरा क्रमांक 5 है। मेरा घर विद्यालय से 12 किलोमीटर की दूरी है जिसके कारण मुझे विद्यालय पहुँचने में प्रायः विलम्ब हो जाता है। इसी तरह विद्यालय से घर लौटने में भी काफी विलम्ब हो जाता है। साथ विद्यालय के लौटने पर थकान हो जाती है। इससे मेरी पढ़ाई काफी बाधित होती है। अतः श्रीमान् से प्रार्थना है कि मुझे विद्यालय छात्रावास में स्थान देकर अनुगृहीत करें।

इसके लिए में सदैव आपका आभारी रहूँगा।

आपका आज्ञाकारी शिष्य,

______________नाम

______________कक्षा

अनुक्रमांक______________

दिनांक- 10 मार्च, 2008 


प्रश्न 10. विद्यालय में प्रवेश के लिए आवेदन करने का प्रपत्र (फार्म)।

उत्तर-

सेवा में,

प्रधानाचार्य/प्रधानाचार्या,

______________

______________

मान्यवर,

में आपके विद्यालय में प्रवेश पाने का की इच्छुक हूँ। मेरा परिचय विवरण तथा शैक्षणिक योग्यताएँ निम्नलिखित हैं। आशा है, आप मुझे अपने विद्यालय में प्रवेश देने की अवश्य कृपा करेंगे।

नाम (बड़े अक्षरों में)______________

पिता का नाम (बड़े अक्षरों में) ______________

श्री जन्म-तिथि (शब्दों में)______________

पत्र व्यवहार का पता (दूरभाष यदि हो तो)______________

सम्पादकीय पत्र


प्रश्न 14. किसी लोकप्रिय दैनिक समाचार-पत्र के सम्पादक के नाम एक पत्र लिखें जिसमें संकट के संबंध में विद्युतमंत्री का ध्यान आकृष्ट करें।

उत्तर-

सेवा में,

आदरणीय सम्पादक जी, 

“दैनिक जागरण” राँची।

महाशय,

मैं आपके दैनिक पत्र “जागरण” में प्रकाशनार्थ प्रेषित इस पत्र के माध्यम से बिहार के विद्युत मंत्री का ध्यान महीनों से विद्युत संकट से आक्रान्त पाकुड़ की ओर आकृष्ट करना चाहता हूँ। विगत चार महीनों से जमुई में विद्युत की आपूर्ति में घोर अनियमितता है। 

24 घंटे में मुश्किल से कुल मिलाकर दो-ढाई घण्टे तक बिजली के दर्शन होते हैं। शेष घण्टों में घोर तबाही, बेचैनी देकर बिजली गायब रहती है। बिजली की आपूर्ति की इस गड़बड़ी से सामान्य जन-जीवन अस्त-व्यस्त है। 

खेतों में मोटर पम्प से होने वाला सिंचाई कार्य रुका हुआ है जिससे फसलें सूख रही हैं। शहर के भीतर-बाहर करीब सात-आठ बड़े औद्योगिक संस्थान हैं जो विद्युत आपूर्ति के अभाव में मृतप्राय है। संध्या सात बजे होते ही शहर-बाजार की सारी दुकानें बन्द हो जाती हैं।

रात्रि के इस भयावह अन्धकार में चोरी-डकैती की घटनाएँ होती रहती हैं।

इस संबंध में स्थानीय विद्युत अनुमंडल पदाधिकारी से कई बार सम्पर्क स्थापित कर तथा कई बार लिखित सूचना के आधार पर अपेक्षित कार्य कराने का प्रयास किया गया है, लेकिन परिणामस्वरूप केवल निराशा ही हाथ लगी है। अतः मैं इस समस्या और इसे उत्पन्न दुर्दशा की ओर माननीय विद्युत मंत्री, झारखण्ड का

ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूँ और निवेदन करता हूँ कि इस सम्बन्ध में तत्काल उचित कार्रवाई की जाए।

तिथि- 26 जुलाई, 2004

भवदीय

मोहन कुमार

पाकुड़, वार्ड नं. 5


प्रश्न 15. किसी दैनिक समाचार-पत्र के सम्पादक के नाम पत्र लिखें, जिसके माध्यम से शहर की समस्या (मुहल्ले में गन्दगी) के सम्बन्ध में नगर विकास मन्त्री का ध्यान आकृष्ट करावें ।

उत्तर-

सेवा में,

सम्पादक,

आज, राँची ।

महाशय,

मैं आपके दैनिक ‘आज’ में प्रेषित इस पत्र के माध्यम से बिहार के नगर विकास मंत्री का ध्यान देवघर शहर की दुर्दशा की ओर आकृष्ट करना चाहता हूँ। देवघर एक पुराना शहर है। इसकी दैनिक समस्याओं की देख-रेख के लिए यहाँ वर्षों से नगरपालिका कार्य कर रही है। 

दुःख के साथ लिखना पड़ रहा है कि इन दिनों इस नगरपालिका का कार्य सुचारु रूप से नहीं चल रहा है। शहर की अधिकांश सड़कें टूट चुकी हैं। लगता है कि वर्षों से उनमें मरम्मत का कार्य नहीं हो पाया है। गलियों की दुर्दशा का तो कुछ पूछना नहीं है। दो चार मुख्य गलियों को छोड़कर अधिकांश गलियाँ कीचड़ और गन्दगी में डूबी रहती हैं।

यही हाल वहाँ की सफाई व्यवस्था का है। सारा शहर लगता है कि कूड़े का शहर है। हर मोड़ और चौराहे पर कूड़े का अम्बार लगा हुआ है। नाले और नलियों की सफाई भी नियमित रूप से नहीं हो पा रही है। 

दुर्गन्ध से भरी नालियों ने समूचे शहर के वातावरण को दूषित कर रखा है। परिणाम यह है कि इस शहर में मलेरिया, हैजा और अनेक बीमारी ने अपना अड्डा बना लिया है। 

एक लाख की आबादी वाले इस शहर में दो ही पानी की टंकियों की व्यवस्था है जिसमें पेयजल की आपूर्ति सन्तोषप्रद ढंग से नहीं हो पाती है। शहर के लोग अभी भी कुएँ का जल ही पीने के लिए बाध्य हैं जिसमें अनेक प्रकार की बीमारियों के कीटाणु पाये जाते हैं।

मेन रोड में बैंक, कपड़े की बड़ी-बड़ी दुकानें, सोना-चाँदी की दुकानें, क्लीनिक, दवा की प्रमुख दुकानें एवं प्रेस स्थित हैं। इस रोड की हालत ऐसी है कि गर्मी और जाड़े के अधिकतर दिनों में रोड से होकर नाली का गन्दा पानी इस सड़क से होकर बहता है। 

नाली का पानी जिसमें मल-मूत्र एवं अन्य प्रकार की गन्दगी से परिपूर्ण सफाई की अव्यवस्था के कारण नाली से उपटकर सड़क से बहता है। वार्ड कमिश्नर मौन हैं, चेयरमैन को फिक्र नहीं है विधायक का ध्यान नहीं है, सांसद को कोई मतलब नहीं है, जनता में दम नहीं है, देवघर डी. एम. के एक दिन की सफाई अभियान को कोई असर नहीं है, परिणाम यहाँ की मूर्ख जनता भोग रही है। रूमाल से नाक

बन्द करके लोग चलते हैं। वह दिन दूर नहीं है जब लोग नाक में रुई ठूस कर चलेंगे। अतः इस पत्र के माध्यम से मैं झारखण्ड के नगर विकास मन्त्री का ध्यान देवघर शहर की दुर्दशा की ओर आकृष्ट कर यह निवेदन करना चाहता हूँ कि इस नगरपालिका को शीघ्र अवक्रमित कर लिया जाए। 

तिथि- 21 फरवरी 2004

भवदीय 

अनिल कुमार

वार्ड नं.-18, देवघर। 


प्रश्न 16. सम्पादक के नाम एक पत्र लिखें जिसमें यह उल्लेख करें कि किन-किन प्रयत्नों से भारत की गरीबी दूर हो सकती है।

उत्तर- 

सेवा में,

सम्पादक,

‘दैनिक ‘हिन्दुस्तान’, रांची ।

महाशय, 

आपके लोकप्रिय दैनिक समाचार-पत्र के माध्यम से भारत की गरीबी दूर करने के लिए निम्नलिखित विचार-बिन्दुओं पर सरकार का ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूँ, जिन्हें क्रियान्वित कर देश से गरीबी दूर की जा सकती है–

(i) यहाँ की कृषि पद्धति अत्यन्त दोषपूर्ण है, जिसमें सुधार लाकर उपज में वृद्धि करके समस्या का निदान किया जा सकता है।

(ii) यहाँ की वितरण व्यवस्था भी काफी त्रुटिपूर्ण है। वस्तुओं को एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाने में काफी खर्च होता है और विलम्ब भी होता है, जिसकी व्यवस्था में वृद्धि हो जाती है। इस दोष को दूर करना होगा। 

(iii) उत्पादक के क्षेत्र में कुव्यवस्था है, जिससे आम जनता को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इस कुव्यवस्था को दूर कर गरीबी मिटायी जा सकती है। 

(iv) भारत में नित्य प्रति जनसंख्या में वृद्धि हो रही है, जिससे गरीबी दिनानुदिन बढ़ रही है। जनसंख्या नियंत्रण के लिए कारगर उपाय कर गरीबी में कमी की जा सकती है। 

(v) यहाँ गरीबी का एक कारण अशिक्षा का होना भी है। अतः सरकार को इस ओर ध्यान देना आवश्यक है। 

(vi) रोजगार के अवसर बढ़ाये जाएं। 

(vii) न्याय-व्यवस्था सरल बनाई जाय और लोक अदालतें स्थापित की जायें, ताकि धन शहर ने न जाए। 

(viii) कार्यालय में मशीन का उपयोग न किया जाए। 

(ix) यहाँ सदा बाढ़ और सुखाड़ से फसलें मारी जाती हैं; जिससे कृषक और मजदूरवर्ग सभी प्रभावित होते हैं। इसके लिए भी कारगर उपाय खोजना है। 

(x) हमारे देश में आज अनैतिकता का बोलबाला है। मानव मूल्यों की कमी हो गयी है, लोगों को स्वार्थ ने ग्रस लिया है। सरकार को इस पर कड़ी नजर रखनी है। तभी कुछ हो सकता है। 

22 मार्च, 20…….

भवदीय 

चन्द्र प्रकाश

राँची


शिकायतों के आवेदन-पत्र ( प्रार्थना-पत्र )


प्रश्न 24. अपने मुहल्ले में टूटी हुई सड़क को बनवाने के लिए प्रशासक, नगर निगम, राँची को एक स्मार पत्र लिखिए। अथवा, सड़कों की दशा सुधारने का आग्रह करते हुए प्रशासक, नगर निगम, राँची को

एक स्मार पत्र लिखिए।

उत्तर-

सेवा में,

श्रीमान् प्रशासक,

राँची नगर निगम,

राँची ।

विषय- अशोकपुरी मुहल्ले की टूटी हुई सड़क की मरम्मती के संबंध में।

श्रीमान् 

विनम्रतापूर्वक मैं आपका ध्यान अपने मुहल्ले अशोकपुरी की टूटी हुई सड़क की आकर्षित करना चाहता हूँ, ताकि इनकी मरम्मती हो सके। हमारे मुहल्ले की सड़क विगत तीन वर्षों से टूटी-फूटी अवस्था है। 

इनकी मरम्मती के लिए कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षि कराया गया। इसके लिए मुहल्ले के लोगों ने कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित कराया।

 इस संदर्भ में मुहल्ले के लोगों ने लिखित रूप में आवेदन भी किया, परन्तु अब तक इसकी मरम्मती की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है।

अशोकपुरी नगर की सड़क की दशा अत्यंत ही दयनीय हो गई है। जहाँ-तहाँ गड्ढे हो गये हैं। इन सड़कों पर पैदल तथा वाहन पर दोनों तरीकों से चलना मुश्किल हो गया है। नालियों भी जहाँ-तहाँ टूट गई हैं और इनका गंदा पानी सड़क पर बहता रहता है। 

गड्ढों में गंदा पानी जमा हो गया है जिससे लोगों को इन सड़कों से गुजरते समय प्रायः कपड़े गन्दे हो जाते हैं। सड़क दुर्घटना की भी आशंका बनी रहती है।

अतः आपसे सादर अनुरोध है कि अशोपुरी के नागरिकों की कठिनाइयों को देखते हुए इस तरफ ध्यान दें और टूटी हुई सड़क की मरम्मती के लिए उचित कार्यवाही करें। इसके लिए हम आपके आभारी रहेंगे।

प्रार्थी

______________नगर। 

______________निवासी।

दिनांक – 22 जून, 20……


प्रश्न 25. दूरदर्शन के महानिदेशक को पत्र लिखकर शिक्षाप्रद कार्यक्रमों के प्रसारण की आवश्यकता रेखांकित कीजिए।

उत्तर-

सेवा में,

श्रीमान् महानिदेशक, 

दूरदर्शन केन्द्र,

दिल्ली।

विषय – शिक्षाप्रद कार्यक्रमों के प्रसारण हेतु ।

श्रीमान्,

विनम्रतापूर्वक में आपका ध्यान दूरदर्शन द्वारा प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों की उपयोगिता की ओर दिलाना चाहता हूँ।

महाशय, में धनबाद शहर का निवासी हूँ और दूरदर्शन द्वारा प्रसारित होने कार्यक्रमों को नियमित रूप से देखता हूँ। इधर कुछ महीनों से में अनुभव कर रहा हूँ कि आपके कार्यक्रम पूर्व की तरह शिक्षाप्रद नहीं वाले कुछ रह गए हैं। 

कार्यक्रम में मनोरंजन को प्राथमिकता दी रही है। अतः आपसे आग्रह है कि वैसे कार्यक्रमों के प्रसारण की ध्यान दें जो मनोरंजक होने के साथ-साथ शिक्षाप्रद भी हों। धन्यवाद।

दिनांक-12 फरवरी, 20……

भवदीय

चन्द्र प्रकाश

धनबाद (झारखण्ड) 


प्रश्न 26. अनियमित डाक-वितरण के सम्बन्ध में पोस्ट मास्टर को एक शिकायती पत्रलिखिए ।

उत्तर-

परीक्षा भवन 

______________”केन्द्र।

सेवा में,

पोस्ट मास्टर महोदय, 

हैड पोस्ट ऑफिस, ______________नगर ।

विषय डाक-वितरण में अनियमितता ।

महोदय, 

मुझे बड़ा खेद है कि मुझे अपने मुहल्ले में डाक-वितरण की अनियमितता के संबंध में आपका ध्यान आकृष्ट करने के लिए विवश होना पड़ रहा है।

गत दो मास से हमारे मुहल्ले में डाक-वितरण की व्यवस्था नियमित नहीं है यह तब से है जब से श्याम नाम का डाकिया मुहल्ले में डाक-वितरण के लिए नियुक्त किया गया है। 

यह कई-कई दिन की डाक एकत्रित हो जाने पर बाँटने के लिए आता है और वह भी अनेक बार मुहल्ले में खेलने वाले बच्चों को दे जाता है। परिणामस्वरूप या तो पत्र मिलते ही नहीं और यदि मिलते हैं तो बहुत समय पश्चात् इससे गली-मुहल्ले के लोक बड़े परेशान है।

मेरी एक रजिस्ट्री जिस पर देवघर डाकखाने की 2 जून की मोहर लगी है, मुझे 5 जून को प्राप्त हुई है। उस रजिस्टर्ड लिफाफे पर लिखा है कि 2, 3 और 4 जून को मेरा दरवाजा बन्द मिला। 

इसमें किंचित् सत्य नहीं है में आपको विश्वास दिलाता हूँ कि इन दिनो में डाक-वितरण के पूरे समय में घर पर ही था। 

इस पत्र में मेरा नियुक्ति पत्र था जिसके अनुसार मुझे 4 जून तक कार्यभार सम्भालने का निर्देश था तिथि के निकल जाने के पश्चात् पत्र मिलने के कारण- मुझे नौकरी से वंचित रह जाना पड़ा। आप मेरी मनः स्थिति का अनुमान लगा सकते हैं।

आपसे प्रार्थना है कि इस क्षेत्र के डाकिए के विरुद्ध आवश्यक कार्यवाही करें तथा डाक वितरण की अनियमितत दूर करने का तुरन्त प्रबन्ध करें।

धन्यवाद सहित।

भवदीय


प्रश्न 27. अपने गली-मुहल्ले की नालियों की समुचित सफाई के लिए नगरपालिका के अध्यक्ष को एक पत्र लिखिए । उत्तर-

सेवा में,

स्वास्थ्य अधिकारी,

राँची नगर निगम,

राँची।

विषय—- मुहल्ले की सफाई कराने हेतु प्रार्थना-पत्र।

श्रीमान्,

हम आपका ध्यान मुहल्ले की सफाई सम्बन्धी दुर्व्यवस्था की ओर खींचना चाहते हैं। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि हमारे मुहल्ले की सफाई हेतु नगर निगम का कोई सफाई- कर्मचारी गत दस दिनों से काम पर नहीं आ रहा है। 

घरों की सफाई करने वाले कर्मचारियों ने भी मुहल्ले में स्थान-स्थान पर गन्दगी और कूड़े-कर्कट के ढेर लगा दिए हैं। इसका कारण संभवतः यह भी है कि आस-पास कूड़ा-कर्कट तथा गंदगी डालने के लिए कोई निश्चित स्थान नहीं है।

आज स्थिति यह है कि मुहल्ले का वातावरण अत्यन्त दूषित तथा दुर्गन्धमय हो गया है। मुहल्ले में से गुजरते हुए नाक बन्द कर लेनी पड़ती है। 

चारों ओर मक्खियों की भिनभिनाहट है। रोगों के कीटाणु प्रतिदिन बढ़ रहे हैं। नालियों की सफाई न होने के कारण मच्छरों का प्रकोप इस सीमा तक बढ़ गया है कि दिन का चैन और रात की नींद हराम हो गई है। 

वर्षा ऋतु पाँच-सात दिनों में प्रारम्भ होने वाली है। यथासमय मुहल्ले की सफाई न होने पर मुहल्ले की दुर्व्यवस्था का अनुमान लगाना कठिन है। 

श्रीमान् जी, आपसे हम मुहल्ले वालों की सविनय प्रार्थना है कि आप यथाशीघ्र मुहल्ले का निरीक्षण करें तथा सफाई का नियमित प्रबन्ध करें। 

अन्यथा मुहल्ला निवासियों के स्वास्थ्य पर उसका कुप्रभाव पड़ने की आशंका है। आपकी ओर से उचित कार्यवाही के लिए हम आपके आभारी रहेंगे।

प्रार्थी

______________नगर। 

______________निवासी।

दिनांक 22 जून, 20…….


प्रश्न 28. पोस्टमास्टर को मनीऑर्डर गुम होने पर शिकायती पत्र लिखिए।

उत्तर- 

सेवा में,

डाकपाल महोदय, 

मुख्य डाकघर

______________नगर।

महोदय,

निवेदन है कि मैंने बीस दिन पहले आपके मुख्य डाकघर से पाँच सौ रुपये का मनीऑर्डर करवाया था। यह पनादेश मैंने अपने माता-पिता के पास श्री रामचन्द्र 408/12 मालरोड, शिमला के पते पर भेजा था। 

बीस दिन हो गए हैं। अभी तक वह धनादेश न पहुँचा है, न ही वापस मुझे मिला है और न ही इस विषय की कोई सूचना मुझे प्राप्त हुई है। इस कारण परेशानी खड़ी हो गयी है।

धनादेश की रसीद का नं. 733 तथा दिनांक 10 मार्च, 2008 है। मैं इसकी एक चित्रलिपि भी आपके पास भेज रहा हूँ। कृपया शीघ्रातिशीघ्र इस लापता धनादेश की जाँच करके उक्त पते पर भिजवा दें अथवा कोई स्थिति होने पर मुझे सूचित करें। आशा है आप शीघ्र कार्यवाही करेंगे। धन्यवाद

भवदीय,

अ. ब. स.

______________मकान का पता

दिनांक – 31 मार्च, 2008



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