अर्थशास्त्र कक्षा 12वीं अध्याय 3 नोट्स | Economics Class 12 Chapter 3 Questions And Answers In Hindi Easy PDF

WhatsApp Group (Join Now) Join Now
Telegram Group (Join Now) Join Now

अर्थशास्त्र कक्षा 12वीं अध्याय 3 नोट्स | Economics Class 12 Chapter 3 Questions And Answers In Hindi Easy PDF, उत्पादन तथा लागत | PRODUCTION AND COSTS


उत्पादन तथा लागत | PRODUCTION AND COSTS


उत्पादन फलन (Production Function) भौतिक आगतों तथा भौतिक उत्पादन के बीच कार्यात्मक संबंध का अध्ययन करता है। इसमें केवल भौतिक आगतों तथा उत्पादन को ध्यान में रखा जाता है। उनके बाजार मूल्य को नहीं।

प्रमुख स्मरणीय तथ्य

  • कुल उत्पादन (Total Product ) — एक निश्चित समय में उत्पादित की गई वस्तुओं तथा सेवाओं की कुल मात्रा को कुल उत्पादन कहा जाता है। 
  • सीमांत उत्पादन (Marginal Production)—परिवर्ती कारक की एक अतिरिक्त इकाई का प्रयोग करने से कुल उत्पादन में जो परिवर्तन होता है उसे सीमांत उत्पादन कहा जाता है।
  • (यहाँ ATP = कुल उत्पादन में परिवर्तन AL काम पर लगाए गए परिवर्ती कारक की इकाइयों में परिवर्तन)
  • औसत उत्पादन (Average product) परिवर्ती कारक की प्रत्येक इकाई उत्पादन को
  • औसत उत्पादन कहा जाता है। AP= TP/L

कारक के प्रतिफल (Returns to a Factor ) ——— यह वह अवधारणा है जिसमें अन्य कारकों को स्थिर रखकर उत्पादन के केवल एक ही कारक में परिवर्तन के फलस्वरूप उत्पादन के व्यवहार का अध्ययन किया जाता है।

पैमाने के प्रतिफल (Returns to Scale)—यह वह धारणा है जिसमें सभी कारकों में समान अनुपात में परिवर्तनों द्वारा उत्पादन के व्यवहार का अध्ययन किया जाता है। 

परिवर्ती अनुपात का नियम (Law of Variable Proportions ) – परिवर्ती अनुपात का नियम बताता है कि स्थिर कारक के साथ जैसे-जैसे परिवर्ती कारक की अधिक से अधिक इकाइयों का प्रयोग किया जाता है तो एक ऐसी स्थिति अवश्य आ जाती है जब परिवर्ती कारक का अतिरिक्त योगदान अर्थात परिवर्ती कारक का सीमांत उत्पाद कम होने लगता है।

पैमाने के वर्धमान प्रतिफल (Increasing Returns to Scale ) — पैमाने के वर्धमान प्रतिफल उत्पादन की उस स्थिति को प्रकट करते है जिसमें यदि सभी कारकों को एक निश्चित अनुपात में बढ़ाया जाए तो उत्पादन में उससे अधिक अनुपात में वृद्धि होती है। ये आंतरिक किफायतों के कारण लागू होते हैं।



पैमाने के स्थिर / समान प्रतिफल (Constant Returns to Scale) पैमाने के स्थिर प्रतिफल उत्पादन की उस स्थिति को प्रकट करते हैं जिसमें यदि सभी कारकों को निश्चित अनुपात में बढ़ाया जाएगा तो उत्पादन में उसी अनुपात में वृद्धि होगी। 

पैमाने के ह्रासमान प्रतिफल (Diminishing Returns to Scale) – पैमाने के हासमान प्रतिफल उस स्थिति को प्रकट करते हैं जिसमें यदि सभी कारकों को निश्चित अनुपात में बढ़ाया जाएगा तो उत्पादन में उससे कम अनुपात में वृद्धि होगी।


Economics Class 12 Chapter 3 Questions And Answers In Hindi


Class12th 
Chapter Nameउत्पादन तथा लागत
Chapter numberChapter 3
PART A
Book NCERT
Subjectअर्थशास्त्र | Economics
Medium Hindi | हिंदी
Study Materialsनोट्स & question answer
Download PDFClass 12 economics chapter 3 pdf
कक्षा 12वीं अध्याय 3 नोट्स Economics Class 12 Chapter 3 Questions And Answers In Hindi Easy PDF

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (VERY SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


1. सीमान्त लागत का सामान्य आकार कैसा होता है। 

Ans. सीमान्त लागत वन सामान्यतः अंग्रेजी अक्षर U जैसा होता है।

2. उत्पादन का क्या अर्थ है ?

Ans. उत्पादन तकनीक दो प्रकार की होती है-

(i) श्रम प्रधान उत्पादन तकनीक एवं 

(ii) पूँजी प्रधान उत्पादन तकनीक।

3. वास्तविक लागत का अर्थ लिखें।

Ans. साधन आगतों के स्वामी उनकी आपूर्ति करने में त्याग करते हैं, कष्ट उठाते हैं, अर्थ दर्द सहन करते हैं उन्हें वास्तविक लागत कहते हैं।

4. अस्पष्ट लागत का अर्थ उदाहरण सहित बताइए ।

Ans. उत्पादन प्रक्रिया में फर्म के निजी साधनों को प्रयोग करने की लागत को अस्पष्ट लागत कहते हैं। उदाहरण-निजी भूमि का किराया, निजी पूँजी का ब्याज आदि ।

5. निजी लागत की परिभाषा दें। 

Ans. उत्पादन प्रक्रिया में फर्म द्वारा वहन की गई लागतों को निजी लागत कहते हैं।

6. जब कुल भौतिक उत्पाद बढ़ रहा है जो सीमान्त उत्पाद कैसा होता है ? 

Ans. सीमान्त भौतिक उत्पाद धनात्मक होता है। 

7. साधन के प्रतिफल की परिभाषा लिखें।

Ans. उत्पादन के अन्य साधनों को स्थिर रखकर एक साधन की इकाइयों में परिवर्तन करने पर उत्पाद में परिवर्तन के व्यवहार को साधन का प्रतिफल कहते हैं।

8. पैमाने के प्रतिफल की परिभाषा लिखें।

Ans. दीर्घकाल में उत्पादन के दो या अधिक साधनों में अनुपातिक परिवर्तन के परिणामस्वरूप उत्पादन की मात्रा में परिवर्तन के व्यवहार को पैमाने के प्रतिफल कहते हैं।

9. आन्तरिक बचतों का अर्थ लिखें। 

Ans. फर्म द्वारा उत्पादन का आकार बढ़ाने पर जो व्यय प्राप्त होते हैं उन्हें आन्तरिक बचतें कहते हैं।

10. सीमांत उत्पाद क्या है ? 

Ans. परिवर्तनशील साधन की एक अतिरिक्त इकाई के प्रयोग से कुल उत्पाद में आय परिवर्तन सीमांत उत्पाद है, जबकि दूसरे साधन स्थिर रहते हैं। 

11. उत्पादन फलन को परिभाषित कीजिए । 

Ans. उत्पादन फलन दी गई तकनीकी के अंतर्गत साधन आदान तथा उत्पादन में सबंध को व्यक्त करता है।

12. ‘औसत उत्पाद’ पद का अर्थ बताएँ ।

Ans. यह कुल उत्पाद को परिवर्तनशील इकाइयों की संख्या से भाग देकर प्राप्त किय जाता है। 

13. कुल उत्पाद क्या है ? 

Ans. किसी फर्म द्वारा एक समय में स्थिर तथा परिवर्तनशील साधनों के प्रयोग द्वारा उत्पादित वस्तु की मात्रा को कुल उत्पाद कहते हैं। 

14, पैमाने के प्रतिफल क्या है ? 

Ans. जब उत्पादन बढ़ाने के लिए, सभी साधनों को परिवर्तनशील माना जाता है और एक ही अनुपात में बढ़ाया जाता है। 

15. आंतरिक बचतें क्या हैं ?

Ans. वे फायदे जो एक फर्म अपने कार्य की वजह से प्राप्त करती है। 

16. एक फर्म साधन के प्रतिफल की तीसरी अवस्था में क्यों कार्य नहीं कर सकती ? 

Ans. क्योंकि सीमांत उत्पाद ऋणात्मक है, जो कोई भी फर्म आर्थिक रूप से सहन नहीं कर सकती। 

17. परिवर्तनशील अनुपातों का नियम क्या है ?

Ans. यह आदानों और उत्पादन के बीच संबंध को व्यक्त करता है, जब स्थिर तथा परवर्ती आदानों के साधन अनुपात बदल जाते हैं।

18. MP का क्या होता है जब TP गिर रही होती है ? 

Ans. यह ऋणात्मक है। 

19. सीमांत भौतिक उत्पाद तालिका से कुल भौतिक उत्पाद कैसे ज्ञात किया जाता है ? 

Ans. सीमांत भौतिक उत्पाद को जोड़कर कुल भौतिक उत्पाद प्राप्त किया जाता है। 

20. MPP वक्र का सामान्य आकार कैसा होता है ? 

Ans. MPP वक्र का सामान्य आकार अंग्रेजी के अक्षर U के उलटे रूप की तरह का होता है। 

21. श्रम विभाजन का क्या अर्थ है ?

Ans. श्रमिकों को उनको योग्यता तथा अनुभव के आधार पर कार्य सौंपने को श्रम विभाजन कहते हैं। 

22. अधिक खरीदारी पर कटौती क्या होती है ?

Ans. निश्चित मात्रा से अधिक की खरीद में निर्माता द्वारा मूल्यों में कुछ कमी की जा सकती है। इसे ही कटौती कहते हैं।

23. APP वक्र का सामान्य आकार कैसा होता है ?

Ans. APP वक्र का सामान्य आकार भी अंग्रेजी के अक्षर ‘U’ के उल्टै रूप जैसा होता है।

24. स्थिर लागत का अर्थ बताइए ।

Ans. स्थिर साधनों पर व्यय की जाने वाली धनराशि स्थिर लागत कहलाती है। उत्पादन चाहे अधिक हो या कम हो या शून्य हो, यह लागत स्थिर रहती है।

25. सीमान्त लागत किसे कहते हैं ?

Ans. एक अतिरिक्त इकाई का उत्पादन करने से कुल लागत में जो वृद्धि होती है वह सीमान्त लागत कहलाती है।

26. परिवर्तनशील लागतें क्या हैं ? 

Ans. परिवर्तनशील साधनों पर किए गए खर्च परिवर्तनशील लागतें हैं।

27. शून्य उत्पादन स्तर पर कौन-सी लागत शून्य होती है ?

Ans. परिवर्तनशील लागत ।

28. ATC और AVC के बीच अंतर क्या दिखाता है ?

Ans. AFC,

29. शून्य उत्पादन स्तर पर कुल लागत कैसी लागत होती है ?

Ans. यह कुल स्थिर लागत होती है।

30. उत्पादन बढ़ने के साथ ATC और AVC के बीच का अंतर कम क्यों हो जाता है ? 

Ans. अंतर AFC है, और AFC उत्पादन बढ़ने पर घट जाती है।


लघु उत्तरीय प्रश्न (SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


1. ‘साधन के प्रतिफल’ और ‘पैमाने के प्रतिफल’ में अंतर कीजिए।

Ans.

साधन के प्रतिफल

पैमाने के प्रतिफल

(i) साधन के प्रतिफल का अध्ययन 

(1) पैमाने के प्रतिफल का अध्ययन दीर्घकाल अल्पकाल के दृष्टिकोण से किया जाता है। 

(ii) साथन के प्रतिफल उस समय लागू होता है जब केवल एक साधन परिवर्तनशील होता है तथा शेष साधन स्थिर रहते हैं। के दृष्टिकोण से किया जाता है। (ii) पैमाने का प्रतिफल उस समय लागू होता है जब उत्पादन के सभी साधन परिवर्तनशील होते हैं।

2. साधन के ह्रासमान प्रतिफल तथा पैमाने के ह्रासमान प्रतिफल में अंतर स्पष्ट करें। 

Ans. साधन के ह्रासमान प्रतिफल के अन्तर्गत साधन की मात्रा में वृद्धि से कुल उत्पादन घटती दर से बढ़ता है अर्थात् सीमान्त उत्पादन कम होने लगता है। इसके विपरीत, पैमाने के ह्रासमान प्रतिफल के अन्तर्गत जिस अनुपात से सभी साधनों को बढ़ाया जाता है, कुल उत्पादन में उस अनुपात से कम वृद्धि होती है। जैसे- यदि सभी साधनों को दुगुना कर दिया जाए तो कुल उत्पादन दुगुने से कम होगा।

4. सीमांत भौतिक उत्पादन में परिवर्तन आने पर कुल भौतिक उत्पादन में कैसे परिवर्तर आते हैं ?

Ans. परिवर्तनशील साधन (श्रम) की एक अतिरिक्त इकाई लगाने से कुल भौतिक उत्पाद में होने वाली वृद्धि ही सीमांत भौतिक उत्पाद होती है। इस प्रकार ये परस्पर संबंधित हैं। जब तक सीमांत भौतिक उत्पाद धनात्मक होता है, कुल भौतिक उत्पाद बढ़ता जाता है। सीमांत भौतिक उत्पाद के ऋणात्मक होने पर कुल भौतिक उत्पाद घटने लगता है। उत्पादन के पहले चरण में सीमांत भौतिक उत्पाद धनात्मक रहता है, दूसरे चरण में इसमें गिरावट आनी शुरू होती है तथा तीसरे चरण में यह ऋणात्मक हो जाती है। फलस्वरूप कुल भौतिक उत्पादन कम हो जाता है।

5. एक फर्म 20 इकाइयों का उत्पादन करता है। उत्पादन के इस स्तर पर, ATC तथा AVC क्रमशः 40 रु. तथा 37 रु. है। फर्म की कुल स्थिर लागत की गणना कीजिए। 

Ans. TFC = ( ATC x20) – (AVCX20)

                = (40×20) (37x 20) 

                =800-740

                =60

6. कुल उत्पादन औसत उत्पाद तथा सीमान्त उत्पाद में संबंध बतायें।

Ans. कुल उत्पाद, औसत उत्पाद तथा सीमान्त उत्पाद में संबंध – 

(i) रोजगार के एक निश्चित स्तर तक कुल उत्पाद, औसत उत्पाद तथा सीमान्त उत्पाद तीनों में वृद्धि होती है। सीमान्त उत्पाद, औसत उत्पाद से अधिक होता है। 

(ii) जब औसत उत्पाद व सीमान्त उत्पाद दोनों होते हैं तो औसत उत्पाद अधिकतम होता है। 

(iii) इसके बाद परिवर्तनशील साधन की इकाइयों का नियोजन बढ़ाने पर कुल उत्पाद कम कर दर से बढ़ता है तथा सीमान्त उत्पाद व औसत उत्पाद दोनों घटते हैं। 

(iv) जब सीमान्त उत्पाद शून्य हो जाता है तो कुल उत्पाद अधिकतम होता है, परन्तु औसत उत्पाद कभी भी शून्य नहीं होता है।

(v) जब सीमान्त उत्पाद ऋणात्मक हो जाता है तो कुल उत्पाद घटने लगता ।

7. साधन के घटते प्रतिफल में कारण लिखें। 

Ans. साधन के घटते प्रतिफल के कारण इस प्रकार हैं- 

(i) अधिक उपयोग-परिवर्तनशील साधन की इकाइयों का नियोजन बढ़ाने पर एक सीमा के उत्पादन साधनों बाद उत्पादन के स्थिर साधनों का अधिक उपयोग होने लगता है जिससे साधन का घटता प्रतिफल लागू होता है। 

(ii) अपूर्ण प्रतिस्थापन- उत्पादन के साधन एक-दूसरे के पूर्ण प्रतिस्थापक नहीं होते हैं। यह फर्म एक साधन का दूसरे साधन से प्रतिस्थापन लाभपूर्वक एक सीमा तक ही कर सकती है। उस सीमा के बाद परिवर्तनशील साधन की इकाइयों को बढ़ाकर प्रतिस्थापन घटते प्रतिफल को जन्म देता है। 

(iii) सहयोग का अभाव – उत्पादन साधनों में आदर्श संयोग के बाद परिवर्ती साधन की इकाइयों को बढ़ाने पर परिवर्ती साधन व स्थिर साधनों में बेहतर तालमेल होने लगता है जो घटते प्रतिफल का कारण होती है।

11. उत्पादन पैमाने की आन्तरिक बचतों को समझायें। 

Ans. वे बचतें जो किसी फर्म को उत्पादन का आकार बढ़ाने पर प्राप्त होती है, उन्हें आन्तरिक बचतें कहते हैं। कुछ आन्तरिक बचतें इस प्रकार से हैं-

(i) श्रम बचतें – उत्पादन का पैमाना बढ़ाने पर एक फर्म जटिल श्रम विभाजन का प्रयोग कर सकती हैं। जटिल श्रम विभाजन से श्रम की दक्षता एवं उत्पादकता में बढ़ोतरी होती है। 

(ii) प्रबन्धकीय बचतें – उत्पादन पैमाने का बड़ा आकार फर्म को कुशल एवं दक्ष प्रबन्धक नियोजित करने की अनुमति प्रदान करता है। कुशल एवं दक्ष प्रबन्धकों के कारण उत्पादन में वृद्धि अधिक दर से होती है। 

(iii) तकनीकी बचतें-उत्पादन का बड़ा आकार होने से उत्पादन की उन्नत एवं विकसित उत्पादन तकनीक का उपयोग करने की संभावना बढ़ जाती है। उन्नत उत्पादन तकनीक से वर्धमान प्रतिफल प्राप्त होता है।

(iv) वित्तीय यचतें बड़े आकार वाली फर्म की साख प्रतिष्ठा उच्च स्तर की होती है। बड़े आकार वाली फर्म कम ब्याज दर पर आसानी से बड़े आकार में ले सकती है। 

(v) क्रय-विक्रय की बचतें-एक फर्म जो उत्पादन का आकार बढ़ाती है वह मध्यवर्ती वस्तुओं को विशाल मात्रा में क्रय करती है तथा बड़ी मात्रा में उत्पादन करती है। बड़े आकार में क्रय-विक्रय से फर्म को फायदा होता है।

12. बाह्य बचतें क्या हैं? संक्षेप में बताइए ।

Ans. किसी उद्योग का समग्र में विस्तार होने पर नई बाजारें, नई उत्पादन तकनीक, विकसित व कुशल प्रबन्धन, जटिल श्रम विभाजन नई खोजों के विदोहन की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं। दूसरे शब्दों में उद्योग का समग्र विस्तार सभी फर्मों के लिए लाभकारी होता है चाहे फर्म अपना उत्पादन का पैमाना बढ़ाए या न बढ़ाए। इन्हें बाह्य बचतें कहते हैं। कुछ बाह्य बचते निम्नलिखित हैं-

(i) सघनता की बचते

(ii) सूचनाओं की बचतें

 (iii) विकेन्द्रीयकरण की बचतें ।

13. अल्पकाल एवं दीर्घकाल में अन्तर स्पष्ट करें। 

Ans. अल्पकाल एवं दीर्घकाल में अन्तर

(i) अल्पकाल से अभिप्राय उस समय अवधि से है जो स्थिर साधनों में परिवर्तन के लिए आवश्यक समय अवधि से कम होती है। जबकि दीर्घकाल वह समय अवधि होती है। जिसमें स्थिर साधनों में परिवर्तन के लिए आवश्यक समय अवधि से ज्यादा होती है। 

(ii) अल्पकाल में फर्म उत्पादन के परिवर्तनशील साधन में परिवर्तन करके उत्पादन स्तर को बदल सकती है जबकि दीर्घकाल में फर्म सभी साधनों में परिवर्तन करके उत्पादन का पैमाना बदल सकती है।

(iii) अल्पकाल में एक साधन परिवर्तनशील होता है तथा अन्य साधन स्थिर रहते हैं जबकि दीर्घकाल में फर्म सभी साधनों में परिवर्तन कर सकती है।

14. स्थिर अनुपात उत्पादन फलन को संक्षेप में समझाइए । 

Ans. जब कोई फर्म सभी साधनों में आनुपातिक परिवर्तन करती है तो यह माना जाता है कि फर्म का उत्पादन पैमाना परिवर्तित होता है। वह उत्पादन फलन जो उत्पादन के पैमाने का अध्ययन करता है उसे स्थिर अनुपात उत्पादन फलन कहते हैं। स्थिर अनुपात उत्पादन फलन उस उत्पादन व्यवहार से संबंधित होता है जिसमें सभी साधनों को आनुपातिक रूप में बदला जाता • है। बड़ा उत्पादन पैमाना उत्पादन की अधिकतम क्षमता को व्यक्त करता है तथा छोटा उत्पादन पैमाना उत्पादन की कम क्षमता को व्यक्त करता है। विभिन्न पैमाने पर साधनों का अनुपात स्थिर होता है।

15. परिवर्ती अनुपात उत्पादन फलन को संक्षेप में समझाइए । 

Ans. परिवर्ती अनुपात उत्पादन फलन में उत्पादन के विभिन्न स्तरों पर उत्पादन के विभिन्न साधनों की अनुपात भिन्न-भिन्न होता है। वह साधन जिसकी इकाइयों को बढ़ाया जाता है उसे परिवर्ती साधन कहते हैं और जो साधन स्थिर रहते हैं उन्हें स्थिर साधन कहते हैं। एक साधन में परिवर्तन एवं अन्य साधनों को स्थिर रखने का संबंध केवल अल्पकाल से होता है।

16. स्थिर अनुपात एवं परिवर्ती अनुपात उत्पादन फलन में अन्तर स्पष्ट करें। 

Ans. 

(i) स्थिर अनुपात उत्पादन फलन में उत्पादन की विभिन्न मात्राओं पर विभिन्न साधने का अनुपात एक समान रहता है जबकि परिवर्ती अनुपात उत्पादन फलन में उत्पादन के विभिन्न स्तरों पर विभिन्न साधनों का अनुपात अलग-अलग होता है। 

(ii) उत्पादन के स्थिर अनुपात फलन में सभी उत्पादन साधनों में परिवर्तन के कारण परिवर्तन के कारण होता है। 

(iv) स्थिर अनुपात फलन का संबंध दीर्घकाल से होता है जबकि परिवर्ती अनुपात फतन उत्पादन की मात्रा बदलती है जबकि परिवर्ती अनुपात उत्पादन फलन में उत्पादन की मात्रा उत्पादन के एक साधन में परिवर्तन के कारण बदलती है। 

(iii) स्थिर अनुपात में उत्पादन की मात्रा में परिवर्तन उत्पादन पैमाने में परिवर्तन के कारण होता है जबकि परिवर्ती अनुपात में उत्पादन की मात्रा में परिवर्तन उत्पादन स्तर के का संबंध अल्पकाल से है। 

17. सीमान्त उत्पाद व कुल उत्पाद में संबंध बतायें । 

Ans. सीमान्त उत्पाद व कुल उत्पाद में संबंध- 

(i) जब तक सीमान्त उत्पाद में वृद्धि होती है, कुल उत्पाद में अधिक दर से वृद्धि होती है। 

(ii) जब सीमान्त उत्पाद लगभग स्थिर होने लगता है तो कुल उत्पाद एक समान दर से बढ़ता है। 

(iii) जब सीमान्त उत्पादन घटता है परन्तु धनात्मक होता है तब कुल उत्पाद में कम से वृद्धि होती है।

(iv) जब सीमान्त उत्पाद शून्य होता है तब कुल उत्पाद अधिकतम होता है।

(v) जब सीमान्त उत्पाद ऋणात्मक होता है तब कुल उत्पाद घटने लगता है। 

18. औसत उत्पाद तथा सीमान्त उत्पाद में संबंध लिखें। 

Ans. (i). जब सीमान्त उत्पाद औसत उत्पाद से अधिक होता है, औसत उत्पाद में वृद्धि होती है। 

(ii) जब सीमान्त उत्पाद, औसत उत्पाद के समान होता है, औसत उत्पाद अधिकतर होता है। जब सीमान्त उत्पाद, औसत उत्पाद से कम होता है, औसत उत्पाद में कमी होती है

Economics Class 12 Chapter 3 Questions And Answers In Hindi
Economics Class 12 Chapter 3 Questions And Answers In Hindi

19. सीमान्त उत्पाद वक्र का आकार उल्टे U जैसा क्यों होता है ? 

Ans. उत्पादन प्रक्रिया के आरम्भ में एक फर्म को परिवर्ती साधन का वर्धमान प्रतिफल प्राप्त होता है। अतः परिवर्ती साधन की प्रत्येक अतिरिक्त इकाई का नियोजन बढ़ाने पर कुल उत्पादन में आनुपातिक वृद्धि ज्यादा दर से होती है। अतः सीमान्त उत्पाद वह ऊपर की ओर उठता है। 

इसके बाद जब साधन का समता प्रतिफल लागू होता है तो कुल उत्पादन में आनुपातिक वृद्धि स्थिर हो जाती है या परिवर्ती साधन की अतिरिक्त इकाई का नियोजन बढ़ाने पर कुल उत्पादन में आनुपातिक वृद्धि समान दर से होती है। 

अन्त में जब साधन ह्रासमान प्रतिफल लागू होता है तो परिवर्ती साधन की एक अतिरिक्त इकाई का नियोजन बढ़ाने पर कुल उत्पाद में आनुपातिक वृद्धि कम दर से होती है। अतः सीमान्त उत्पाद वक्र नीचे की ओर गिरता है।

20. औसत उत्पाद वक्र उल्टे U आकार का क्यों होता है ?.

Ans. उत्पादन प्रक्रिया के आरम्भ में परिवर्ती साधन की इकाइयाँ बढ़ाने पर वर्धमान प्रतिफल प्राप्त होता है जिससे प्रति इकाई साधन कुल उत्पादन ज्यादा दर से प्राप्त होता है। अतः औसत उत्पाद वक्र ऊपर की ओर उठता है। इसके बाद समता प्रतिफल लागू होता है तो प्रति इकाई साधन कुल उत्पादन समान दर से प्राप्त होता है।

औसत उत्पाद स्थिर हो जाता है। अन्त में जब सायन का ह्रासमान प्रतिफल लागू होता है तो परिवर्ती साधन की इकाइयों का नियोजन बढ़ाने पर प्रति इकाई साधन कुल उत्पादन कम प्राप्त होता है अर्थात् औसत उत्पाद वक्र नीचे की ओर गिरता है।

21. ह्रासमान प्रतिफल का नियम एवं परिवर्ती अनुपात का नियम में अंतर लिखें। 

Ans. ह्रासमान प्रतिफल, परिवर्ती अनुपात के नियम का परंपरागत रूप है। ह्रासमान प्रतिफल के नियम का प्रतिपाद डेविड रिकार्डो ने किया था। यह नियम कृषि क्षेत्र में परिवर्तनशील साधन की इकाइयाँ बढ़ाने पर कृषि क्षेत्र की उत्पादकता में कमी को स्पष्ट करने के लिए प्रतिपादित किया गया था।

आधुनिक अर्थशास्त्रियों ने इस नियम के उपयोग के क्षेत्र का विकास करने हेतु परिवर्ती अनुपात के नियम का प्रतिपादन किया है। आधुनिक अर्थशास्त्रियों ने वह माना कि ह्रासमान प्रतिफल कृषि क्षेत्र के अलावा उद्योग क्षेत्र में भी लागू होता है। स्थिर साधनों एवं परिवर्ती साधन की इकाइयों के प्रयोग से एक सीमा तक कुल उत्पाद में ज्यादा दर से वृद्धि होती है उसके बाद परिवर्ती साधन की इकाइयाँ बढ़ाने पर साधन का ह्रासमान प्रतिफल प्राप्त होता है।

22. स्थिर लागत तथा परिवर्तनशील लागत में अंतर लिखें। 

Ans. (i) लागत का वह भाग जो उत्पादन स्तर में परिवर्तन होने पर भी नहीं बदलता है स्थिर लागत कहते है जबकि जो लागत उत्पादन स्तर में परिवर्तन होने पर बदल जा है परिवर्तनशील लागत कहलाती है। 

(ii) स्थिर लागत का संबंध उत्पादन स्तर से नहीं होता है यह लागत शून्य उत्पादन स्त एवं अधिकतम उत्पादन स्तर पर एक समान होती है। जबकि परिवर्तनशील लाग शून्य उत्पादन स्तर पर शून्य होती है और जैसे-जैसे उत्पादन स्तर बढ़ता परिवर्तनशील लागत बढ़ती है। 

(iii) उदाहरण—

स्थिर लागत— (1) भूमि का किराया, (2) स्थायी श्रमिकों की मजदूरी आदि

परिवर्तनशील लागत- (i) कच्चे माल का मूल्य,  (2) अस्थायी श्रम की मजदूरी आदि ।

23. आयताकार अति परवलय की विशिष्टता के बारे में लिखें।

Ans. औसत स्थिर लागत वक्र का आकार आयताकार अतिपरवलय के समान होता है।

यदि हम औसत स्थिर लागत पर कोई भी बिन्दु लेते हैं तो उस बिन्दु पर AFC तथा उत्पादन मात्रा का गुणनफल एक समान प्राप्त है। यह इसीलिए होता है क्योंकि AFC तथा उत्पादन मात्रा का गुणनफल कुल स्थिर लागत के समान होता है। कुल स्थिर लागत उत्पादन के प्रत्येक स्तर पर समान रहती है। इस विशिष्टता वाले वक्र को आयताकार अतिपरवलय कहते हैं।

24. अवसर लागत की अवधारणा को स्पष्ट करें।

Ans. दूसरे स्तर के सर्वोत्तम प्रयोग में साधन के मूल्य को उसकी अवसर लागत कहते हैं। प्रत्येक ऐसे साधन की अवसर लागत होती है जिसके वैकल्पिक उपयोग संभव होते हैं। 

उत्पादन में काम आने वाले फर्म के निजी साधनों की भी अवसर लागत होती है। उदाहरण के लिए एक स्वः नियोजित श्रमिक की अवसर लागत, श्रम बाजार में उस श्रमिक की मजदूरी के बराबर होती है यदि वह अपनी सेवाएँ दूसरों को प्रदान करे। 

25. क्या सीमान्त में स्थिर लागत शामिल होती है ? समझाइए । 

Ans. उत्पाद की एक अतिरिक्त इकाई बढ़ाने पर कुल उत्पाद में बढ़ोतरी को सीमान्त लागत कहते हैं। इस प्रकार सीमान्त लागत एक अतिरिक्त लागत होती है। एक अतिरिक्त लागत परिवर्तनशील लागत होती है। अतः सीमान्त लागत स्थिर लागत का भाग नहीं हो सकती है क्योंकि स्थिर लागत उत्पादन के प्रत्येक स्तर पर एक समान रहती है। स्थिर लागत में उत्पादन स्तर में उतार-चढ़ाव होने पर बदलाव नहीं होता है। अतः यह प्रश्न ही नहीं उठता है कि सीमान्त लागत में स्थिर लागत भी शामिल होती है।


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (LONG ANSWER TYPE QUESTIONS)


1. पैमाने के प्रतिफल के नियम समझाइए । 

Ans. पैमाने का प्रतिफल नियम-दीर्घकाल में फार्म उत्पादन के सभी साधनों में परिवर्तन कर सकती है। दीर्घकाल में दो या अधिक साधनों में अनुपातिक वृद्धि और उत्पादन मात्रा के संबंध को पैमाने को प्रतिफल कहते हैं। पैमाने के प्रतिफल के तीन नियम हैं-

(i) पैमाने का वर्षमान प्रतिफल- दो या अधिक साधनों में आनुपातिक वृद्धि करने पर यदि कुल भौतिक उत्पाद में अधिक आनुपातिक वृद्धि होती है तो इसे पैमाने का वर्धमान प्रतिफल कहते हैं।

(ii) पैमाने का समता प्रतिफल- दो या अधिक साधनों में आनुपातिक वृद्धि करने पर यदि भौतिक उत्पाद में समान अनुपात में वृद्धि होती है तो इसे पैमाने का समता प्रतिफल कहते है। 

(iii) पैमाने का ह्रासमान प्रतिफल – दो या अधिक साधनों में आनुपातिक वृद्धि करने पर यदि कुल भौतिक उत्पाद में कम अनुपात में वृद्धि होती है तो इसे पैमाने का ह्रासमान प्रतिफ्त कहते हैं।

2. उत्पादन फलन की व्याख्या कीजिये। Or, अल्पकाल तथा दीर्घकाल उत्पादन फलन की व्याख्या कीजिए। 

Ans. एक उत्पादक किसी वस्तु के उत्पादन में विभिन्न आदानों का प्रयोग करता है। एक दिए हुए उत्पादन स्तर की प्राप्ति सुनिश्चित करने में विभिन्न आदानों का प्रयोग किस अनुपात में किया जाए, इस बात के निर्धारण में सबसे महत्वपूर्ण कारक तकनीकी आवश्यकता है। विभिन्न आदानों की कितनी इकाइयाँ प्रयोग में लाई जाएँ, यह तकनीकी की वर्तमान दशा पर निर्भर करता है।

उत्पादन फलन दी गई तकनीक के अंतर्गत आदानों और उनसे उत्पन्न की गई वस्तु की। मात्रा (उत्पादन) के बीच संबंध को व्यक्त करता है। लिप्से के शब्दों में, “यह (उत्पादन फलन) यह तकनीक संबंध है जो यह दिखता है कि दिए गए तकनीकी ज्ञान पर, एक दिए हुए आदान की मात्रा द्वारा कितना उत्पादन किया जा सकता है।” 

दूसरे शब्दों में, उत्पादन फलन इस बात की व्यवस्था करता है कि दी हुई तकनीकी के अंतर्गत उत्पादन बढ़ाने के लिए विभिन्न आदानो या साधनों का किस मात्रा में प्रयोग किया जाए। संक्षेप में, उत्पादन फलन को उस तकनीकी संबंध के रूप में परिभाषित किया जा सकता है, जो विभिन्न आदानों के प्रयोग से अधिकतम उत्पादन प्राप्त कर सकने के बारे में बताता है।

उपर्युक्त विवेचन से स्पष्ट है कि उत्पादन फलन दिए गए तकनीकी ज्ञान के आधार पर किसी दिए गए समय पर आदानों और उससे होने वाले उत्पादन के बीच भौतिक सम्बन्धों को व्यक्त करता है। यहाँ आदान शब्द का अर्थ विस्तृत सन्दर्भ में किया गया है जिसमें वस्तु के उत्पादन के लिए प्रयोग की जाने वाली सभी वस्तुएँ शामिल है, जैसे- श्रम, भूमि, ईंधन, कच्चा माल आदि।

गणितीय रूप में उत्पादन फलन को निम्नांकित रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।

Q=f(L, K, M, I,V, E) यहाँ, 

Q = उत्पाद

F = फलन है 

L = श्रम आदान 

K = पूँजी आदान

M = भूमि आदान 

I = कच्चा 

V = पैमाने के प्रतिफल 

E= कार्यकुशलता

उत्पादन फलन के कई प्रकार हैं, परंतु निर्धारित पाठ्यक्रम को ध्यान में रखते हुए हम यहाँ निम्नलिखित दो उत्पादन फलनों को ले रहे हैं :

(1) अल्पकाल उत्पादन फलन,

(ii) दीर्घकाल उत्पादन फलन

(i) अल्पकालीन उत्पादन फलन (Short-run Production Function)- इस प्रकार के उत्पादन फलन में एक साधन को परिवर्तनशील और शेष को स्थिर मान लिया जाता है तथा उत्पादन बढ़ाने के लिए परिवर्तनशील साधनों की अतिरिक्त इकाइयों का प्रयोग किया जाता है।

नसे-जैसे उत्पादन में वृद्धि के लिए भूमि और पूँजी को स्थिर मानकर श्रम (परिवर्तनशील) की काइयों का अधिकाधिक प्रयोग किया जाता है। इस प्रकार का उत्पादन फलन अल्पकाल में पाया नाता है। अल्पकाल में समय इतना कम होता है कि सभी साधनों को एक साथ नहीं बढ़ाया ना सकता है। इसलिए उत्पादन वृद्धि के लिए परिवर्तनशील साधन की अधिकाधिक इकाइयों का योग किया जाता है। 

स्पष्ट है, उत्पादन में वृद्धि परिवर्तनशील साधन के अधिक प्रयोग का फल इसलिए, इस स्थिति अथवा उत्पादन फलन को परिवर्तनशील साधन का प्रतिफल (Returns) o variable factor) अथवा साधन का प्रतिफल (Returns to a factor) कहा जाता है। सायन के प्रतिफल के अन्तर्गत स्थिर साधनों के साथ परिवर्तनशील साधन की अतिरिक्त इकाइयों के प्रयोग करने से स्थिर और परिवर्तनशील साधनों का अनुपात परिवर्तित होता रहता है। इसलिए उत्पादन फलन की इस स्थिति का परिवर्ती अनुपात के नियम (Law of Variable Propor Lions) द्वारा स्पष्टीकरण दिया गया है।

(ii) दीर्घकालीन उत्पादन फलन (Long-run Production Function) – इस प्रकार के उत्पादन फलन में सभी साधनों (आदानों) को परिवर्तनशील मान लिया जाता है और उन्हें उसी अनुपात में बढ़ाया जाता है जिस अनुपात में उत्पादन बढ़ाना होता है। 

इसका अभिप्राय है, सभी सापनों को परिवर्तनशील मानकर उत्पादन वृद्धि के लिए एक ही अनुपात में बढ़ाना। इस प्रकार का उत्पादन फलन दीर्घकाल में पाया जाता है। दीर्घकाल में इतना अधिक समय होता है कि सभी साधनों को परिवर्तित किया जा सकता है अर्थात् उत्पादन के पैमाने को बड़ा या छोटा किया जा सकता है। इसलिए, इस स्थिति में उत्पादन में वृद्धि पैमाने में परिवर्तन का फल है और इसे पैमाने के प्रतिफल (Returns to Scale) कहते हैं। 

3. ह्रासमान सीमांत उत्पाद नियम की व्याख्या कीजिए ।

Ans. ह्रासमान सीमांत उत्पाद नियम अर्थशास्त्र का एक आधारभूत नियम है। इस नियम को सबसे पहले मार्शल ने वैज्ञानिक ढंग से प्रस्तुत किया। मार्शल के अनुसार इस नियम का कार्य-क्षेत्र कृषि तक ही सीमित था, परन्तु नियम की आधुनिक व्याख्या के अनुसार यह नियम अर्थशास्त्र के सभी क्षेत्रों में क्रियाशील है। मार्शल द्वारा नियम की व्याख्या मार्शल (Marshall) ने इस नियम की परिभाषा इस

प्रकार की – “जब तक कृषि करने के तरीके में सुधार न हो, साधारणतः भूमि पर श्रम और पूँजी का अधिक उपयोग करने पर उत्पादन में इनकी वृद्धि के अनुपात से कम वृद्धि होती है ।” उपर्युक्त परिभाषा के अनुसार यदि भूमि के एक टुकड़े पर श्रम और पूँजी की अधिकाधिक इकाइयों का प्रयोग किया जाए तो उत्पादन में वृद्धि उस अनुपात में नहीं होती जिस अनुपात में श्रम और पूँजी की इकाइयों में वृद्धि हो रही है। उत्पादन में वृद्धि श्रम और पूँजी की इकाइयों के अनुपात से कम होती है। संक्षेप में, श्रम और पूँजी की अधिक इकाइयों के प्रयोग से उनकी सीमांत भौतिक उत्पादन गिरती जाती है।

नियम की आधुनिक व्याख्या- प्रारंभिक अर्थशास्त्री इस नियम को क्षेत्र में ही कार्यशील मानते थे। प्रो. मार्शल का विचार था कि जिन उद्योगों में प्रकृति की प्रधानता होती है उनमें घटते प्रतिफल का नियम लागू होता है तथा जिनमें मनुष्य की प्रधानता होती है उनमें बढ़ते प्रतिफल का नियम लागू होता है। 

परन्तु आधुनिक अर्थशास्त्रियों का विचार है कि क्रमागत उत्पत्ति नियम का क्षेत्र इतना सीमित नहीं है। इस नियम के लागू होने का कारण उत्पादन में प्रकृति की प्रधानता नहीं है, बल्कि किसी एक साधन का स्थिर होना है। यदि कृषि के अतिरिक्त अ उद्योग में भी कोई साधन स्थिर हो जाए तो क्रमागत उत्पादन हास नियम (घटते प्रतिफल के नियम) लागू हो जाता है।

बेन्डम (Benham) के अनुसार- “साधनों के संयोग में जब किसी एक साधन के अनुपात में वृद्धि हो तो एक समय के पश्चात इस साधन के सीमांत तथा ओसा भौतिक उत्पादन गिरने लगते हैं।” इस नियम के अन्तर्गत कुछ साधन स्थिर होते हैं और कुछ परिवर्तनशील होते है। उत्पादन में वृद्धि के लिए परिवर्तनशील साधन (जैसे-श्रम, पूँजी) की अधिक इकाइयों का प्रयोग किया जात छ।

परिवर्तनशील साधनों की इकाइयों में वृद्धि के फलस्वरूप कुल उत्पादन में घटती दर से वृद्धि होती है अर्थात् सीमांत भौतिक उत्पादन कम हो जाता है। इस नियमानुसार उत्पादन में वृद्धि परिवर्तनशील साधन की मात्रा में वृद्धि के फलस्वरूप होती है, इसलिए इसे परिवर्तनशील साधन का हासमान प्रतिफल नियम (Law of Decreasing Returns to a Variable Factor) कहते हैं।

4. परिवर्तनशील अनुपातों के नियम (Law of variable proportions) की व्याख्या कीजिए। 

Ans. परिवर्तनशील अनुपातों का नियम एक साधन को स्थिर रखकर दूसरे साधन को परिवर्तनशील बनाकर उत्पादन-फलन का अध्ययन करता है। वास्तव में देखा जाए तो यह नियम उत्पादन हास (पटते प्रतिफल है) नियम का ही परिष्कृत रूप है क्योंकि उत्पादन ह्रास नियम भी यही बताता है कि यदि एक साधन स्थिर हो और दूसरा परिवर्तनशील हो तो उत्पादन किस प्रकार से प्रभावित होता है। 

परिवर्तनशील अनुपातों के नियम के अनुसार यदि एक साधन को स्थिर रखकर अन्य को परिवर्तनशील बनाया जाए तो एक सीमा तक उत्पादन बढ़ता है और उसके बाद गिरने लगता है। इस नियम की विभिन्न अर्थशास्त्रियों ने परिभाषाएँ की है जिनमें विशेष अन्तर नहीं है।

बेन्डम के अनुसार- “यदि साधनों के संयोग में एक साधन का अनुपात बढ़ाया जाए, तो एक सीमा के पश्चात् पहले उस साधन से प्राप्त सीमांत भौतिक उत्पादन और फिर औसत भौतिक उत्पादन गिरने लगेगा।” 

इस नियम को परिवर्तनशील अनुपातों का नियम कहते हैं क्योंकि परिवर्तनशील साधन की प्रत्येक अतिरिक्त इकाई के प्रयोग द्वारा, स्थिर तथा परिवर्तनशील साधनों के बीच साधन अनुपात बदलता रहता है। परिवर्तनशील अनुपातों का नियम हासमान पैमाने का नया नाम है, जिसे मार्शल तथा दूसरे अर्थशास्त्रियों द्वारा प्रतिपादित किया गया था।

मान्यताएँ – परिवर्तनशील अनुपातों का नियम निम्नलिखित मान्यताएँ पूरी होने पर लागू होता है :

(i) तकनीकी दशा को स्थिर मान लिया जाता है। उत्पादन तकनीक में सुधार होने से नियम के क्रियाशील होने को भविष्य के लिए टाला जा सकता है।

(ii) कुछ आदानों (Inputs) की मात्रा स्थिर रहनी चाहिए। यदि सभी आदान परिवर्तनशील (Variable) हो तो यह नियम लागू नहीं होता क्योंकि उत्पादन बढ़ता ही जाता है। आदान केवल अल्पकाल में ही स्थिर होते हैं। अतः यह नियम भी अल्पकाल में ही लागू होता है। 

(iii) यह मान लिया गया है कि साधनों के अनुपात में परिवर्तन संभव है जिन उत्पादनों में विभिन्न आदानों का अनुपात स्थिर होता है उनमें यह नियम क्रियाशील नहीं होता, जैसे-एक टाइप मशीन पर एक ही व्यक्ति काम कर सकता है। अतः हम यहाँ टाइप मशीन को स्थिर व श्रम को परिवर्तनशील नहीं मान सकते।

(iv) यह नियम अल्पकाल में लागू होता है।


CLASS 12 NCERT SOLUTION IN ENGLISHCLASS12 NCERT SOLUTION IN HINDI
Historyइतिहास
Geography भूगोल
Political science राजनीति विज्ञान
English SubjectResult
Hindi SubjectHistory answer keys
Sociology समाज शास्त्र

FAQs


1. परवर्ती लागत का एक उदाहरण दें।

Ans. कच्चे माल की लागत ।

2. क्या ATC और AVC कभी मिलती है ?

Ans. वे कभी नहीं मिलतीं क्योंकि ATC और AVC के बीच का अंतर AFC है, जो कभी शून्य नहीं हो सकता।

3. अप्रत्यक्ष लागतें क्या हैं?

Ans. उत्पादन के साधन तथा आदानों पर किए गए खर्चे अप्रत्यक्ष लागतें हैं।

4. TFC वक्र के आकार की प्रकृति क्या है ? 

Ans. यह X- अक्ष के समानांतर एक सीधी रेखा है। 


कक्षा 12 अर्थशास्त्र एनसीईआरटी नोट्स


  1. व्यष्टि अर्थशास्त्र
  2. उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत
  3. उत्पादन तथा लागत
  4. पूर्ण प्रतिस्पर्धा की स्थिति में फर्म का सिद्धांत
  5. बाजार संतुलन
  6. प्रतिस्पर्धारहित बाजार
  1. परिचय
  2. राष्ट्रीय आय का लेखांकन
  3. मुद्रा एवं बैंकिंग
  4. आय का निर्धारण
  5. सरकार: कार्य और विषय क्षेत्र
  6. खुली अर्थव्यवस्था: समष्टि अर्थशास्त्र

वस्तुनिष्ठ प्रश्न MCQs


  1. व्यष्टि अर्थशास्त्र
  2. उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत
  3. उत्पादन तथा लागत
  4. पूर्ण प्रतिस्पर्धा की स्थिति में फर्म का सिद्धांत
  5. बाजार संतुलन
  6. प्रतिस्पर्धारहित बाजार
  1. परिचय
  2. राष्ट्रीय आय का लेखांकन
  3. मुद्रा एवं बैंकिंग
  4. आय का निर्धारण
  5. सरकार: कार्य और विषय क्षेत्र
  6. खुली अर्थव्यवस्था: समष्टि अर्थशास्त्र

class12.in

Leave a Comment