अर्थशास्त्र कक्षा 12वीं अध्याय 4 नोट्स | Economics Class 12 Chapter 4 Questions And Answers In Hindi Easy PDF

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अर्थशास्त्र कक्षा 12वीं अध्याय 4 नोट्स | Economics Class 12 Chapter 4 Questions And Answers In Hindi Easy PDF, पूर्ण प्रतिस्पर्धा की स्थिति में फर्म का सिद्धांत | THEORY OF FIRM UNDER PERFECT COMPETITO


पूर्ण प्रतिस्पर्धा की स्थिति में फर्म का सिद्धांत | THEORY OF FIRM UNDER PERFECT COMPETITO


आप संप्राप्ति (Revenue) सप्राप्ति से अभिप्राय किसी उत्पादक को अपने उत्पादन विकी से प्राप्त मुद्रा से है। • कुल संप्राप्ति (Total Revenue): कुल संप्राप्ति से अभिप्राय है एक उत्पादक को

कुल उत्पादन बेच कर प्राप्त होने वाली मौद्रिक प्राप्तियाँ। औसत संप्राप्ति (Average Revenue): औसत संप्राप्ति से अभिप्राय है उत्पादक प्रति इकाई उत्पादन बेच कर प्राप्त होने वाला मौद्रिक प्राप्ति।

AR = TR/Q

सीमांत संप्राप्ति (Marginal Revenue) : सीमांत संप्राप्ति से अभिप्राय है किसी वस्तु एक इकाई अधिक बेचने से कुल संप्राप्ति में होने वाला परिवर्तन

MR = ∆TR/∆Q = TRn- TRn-1

कुल संप्राप्ति (TR) तथा सीमांत संप्राप्ति (MR) के बीच संबंध (Relationship betwen MR) : MR अतिरिक्त संप्राप्ति है जो उत्पादन की एक अतिरिक्त इकाई के बेचने से प्राप्त होता है। उत्पादन की सभी इकाइयों के MR के जोड़ से TR प्राप्त हो जात है। अतएव

TR= EMR

यह संबंध आगे बतलाता है कि MR वह दर है जिस पर TR में वृद्धि होती है। इसलिए यदि MR बढ़ रहा है तब TR में बढ़ती दर पर वृद्धि होती है। * यदि MR घट रहा है तब TR में घटती दर पर वृद्धि होती है।

यदि MR स्थिर /समान है तब TR में समान दर पर वृद्धि होती है। औसत संप्राप्ति (AR) तथा सीमांत संप्राप्ति (MR) के बीच संबंध (Relationship between AR and MR):

यदि AR समान / स्थिर है तब AR = MR • यदि AR घट रहा है तब-AR> MR

MR ऋणात्मक हो सकता है परंतु AR नहीं। औसत आय या संप्राप्ति (AR) वस्तु

प्रति इकाई कीमत को व्यक्त करती है जो कभी भी ऋणात्मक नहीं हो सकती।

औसत संप्राप्ति वक्र फर्म की माँग वक्र है (Average Revenue Curve is a Firm) Demand Curve) : AR वक्र फर्म के माँग वक्र को प्रदर्शित करता है, क्योंकि AR Y-अक्ष पर दिखाया जाता है। हम जानते हैं कि AR= कीमत, अतएव AR वक्र वस्तु है, कीमत (Y-अक्ष पर) और वस्तु की बिक्री या माँग (X- अक्ष पर) के बीच संबंध को प्रकर करता है।

• पूर्ण प्रतियोगिता में AR वक्र क्षैतिज सीधी रेखा होती है यह इसलिए क्योंकि प्रतियोगिता में एक फर्म कीमत स्वीकारक (Price-taker) होती है। 

एकाधिकार तथा एकाधिकारी प्रतियोगिता की अवस्था में AR वक्र का ढलान नीचे की और होता है यह इसलिए क्योंकि एकाधिकार या एकाधिकारी प्रतियोगिता में वस्तु की अधिक मात्रा केवल कीमत को कम करके ही बेची जा सकती है। 

इसका अभिप्राय यह हुआ कि वस्तु की कीमत तथा फर्म के उत्पादन के लिए माँग के बीच विपरीत संबंध है। इसीलिए फर्म के माँग वक्र का ढलान नीचे की ओर होता है। पूर्ण प्रतियोगी बाजार वह बाजार है जिसमें अधिक क्रेता एवं विक्रेता समांगी वस्तु का क्रय-विक्रय करते हैं। 

इस बाजार में एक फर्म कीमत स्वीकारक होती है। पूर्ण प्रतियोगी बाजार में उत्पादक अविभेदीकृत एवं समांगी वस्तु का उत्पादन करते हैं। क्रेता एवं विक्रेताओं को एक समय में दी गई वस्तुओं एवं कीमत के बारे में पूर्ण जानकारी होती है। कुल आगम से अभिप्राय प्रति इकाई कीमत व उत्पाद की मात्रा के गुणनफल से है।

टीआर = पीएक्सक्यू

प्रति इकाई उत्पाद कुल आगम को औसत आगम कहते हैं। गणितीय रूप में औसत आगम को लिखा जाता है-

AR= TR/Q

विक्रय को निश्चित समय अवधि में कुल आगम तथा कुल लागत के अन्तर को लाभ कहते हैं। गणितीय रूप में लाभ को इस प्रकार लिखा जाता है- 



लाभ = कुल आगम – कुल लागत

कीमत में परिवर्तन के कारण पूर्ति की गई मात्रा में प्रतिशत परिवर्तन तथा कीमत में प्रतिशत परिवर्तन के अनुपात को पूर्ति की सोच कहते हैं। 

पूर्ति की लोच = पूर्ति की गई मात्रा में प्रतिशत परिवर्तन

/ कीमत में प्रतिशत परिवर्तन


Economics Class 12 Chapter 4 Questions And Answers In Hindi


Class12th 
Chapter Nameपूर्ण प्रतिस्पर्धा की स्थिति में फर्म का सिद्धांत
Chapter numberChapter 4
PART A
Book NCERT
Subjectअर्थशास्त्र | Economics
Medium Hindi | हिंदी
Study Materialsनोट्स & question answer
Download PDFClass 12 economics chapter 4 pdf
अर्थशास्त्र कक्षा 12वीं अध्याय 4 नोट्स | Economics Class 12 Chapter 4 Questions And Answers In Hindi Easy PDF

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (VERY SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


1. लाभ की परिभाषा लिखें।

Ans. कुल आगम तथा कुल लागत के अन्तर को लाभ कहते हैं। दूसरे शब्दों में, लागत ऊपर अर्जित कुल आगम को लाभ कहते हैं।

2. लागत फलन को परिभाषित करें।

Ans. उत्पादन की निश्चित मात्रा का उत्पादन करने पर जो लागत आती है उसे लागत तन कहते हैं। अथवा उत्पादन मात्रा एवं लागत के संबंध को लागत फलन कहते हैं।

3. बाजार का अर्थ लिखिए । 

Ans. बाजार शब्द से अभिप्राय उस सम्पूर्ण क्षेत्र से है जिसमें क्रेता एवं विक्रेता फैले होते और वस्तु विनिमय का व्यापार करते हैं। 

4. स्थिर लागत का अर्थ लिखें।

Ans. वह उत्पादन लागत जो उत्पादन स्तर में परिवर्तन के साथ परिवर्तित नहीं होती है। पर लागत कहलाती है। जैसे इमारत का किराया, स्थायी कर्मचारियों का वेतन आदि।

5. कुल आगम का अर्थ लिखिए।

Ans. कुल उत्पाद तथा इकाई कीमत के गुणनफल को कुल आगम कहते हैं। कुल आगम उत्पाद मात्रा x प्रति इकाई कीमत 

6. परिवर्तनशील लागत का अर्थ उदाहरण सहित लिखें। 

Ans. वह लागत जो उत्पादन स्तर में परिवर्तन के साथ परिवर्तित होती रहती है परिवर्तनशील लागत कहलाती है। जैसे कच्चे माल का मूल्य, अस्थायी कर्मचारियों का वेतन आदि।

7. परिवर्तनशील औसत लागत का अर्थ लिखें। 

Ans. प्रति इकाई उत्पाद की परिवर्तनशील लागत को औसत परिवर्तनशील लागत कहते हैं। 

8. सीमान्त लागत की परिभाषा लिखें।

Ans. उत्पाद की एक अतिरिक्त इकाई का उत्पादन बढ़ाने पर कुल लागत या कुल परिवर्तनशील लागत में जो वृद्धि होती है उसे सीमान्त लागत कहते हैं।

9. सीमान्त लागत वक्र की सामान्य आकृति बतायें। 

Ans. सीमान्त लागत वक्र की सामान्य आकृति अंग्रेजी अक्षर U जैसी होती है। 

10. औसत स्थिर लागत (AFC) वक्र की प्रकृति लिखो। 

Ans. औसत स्थिर लागत (AFC) हमेशा ऋणात्मक ढाल का वक्र होता है। 

11. सीमान्त आगम की परिभाषा लिखें।

Ans. उत्पाद की एक अतिरिक्त इकाई का विक्रय बढ़ाने पर कुल आगम में जितनी वृद्धि होती है उसे सीमान्त आगम कहते हैं।

12. आपूर्ति का अर्थ लिखें। 

Ans. निश्चित कीमत व निश्चित समय पर कोई फर्म किसी वस्तु की जितनी मात्रा में बिक्री करती है उसे आपूर्ति कहते हैं। 

13. आपूर्ति एवं स्टॉक में अन्तर लिखें। 

Ans. किसी निश्चित समय बिन्दु पर एक फर्म के पास उपलब्ध उत्पाद की मात्रा को स्टॉक कहते हैं। एक निश्चित समय में दी गई कीमत पर उत्पादक वस्तु की जितनी मात्रा बेचने को तैयार होता है उसे आपूर्ति कहते हैं।

14. व्यक्तिगत पूर्ति अनुसूची का अर्थ लिखें।

Ans. वह अनुसूची जो विभिन्न कीमत स्तरों पर एक फर्म द्वारा बेची गई विभिन्न मात्राओं को दर्शाती है, व्यक्तिगत पूर्ति अनुसूची कहलाती है। 

15. पूर्ति में वृद्धि का अर्थ लिखें।

Ans. जब किसी वस्तु की मात्रा में उसकी कीमत के अलावा अन्य कारकों के कारण वृद्धि होती है तो इसे पूर्ति में वृद्धि कहते हैं।

16. पूर्ति में संकुचन का अर्थ लिखें।

Ans. अन्य कारक समान रहने पर जब किसी वस्तु की कीमत में कमी होने पर उसकी पूर्ति की गई मात्रा घटती है तो इसे पूर्ति में संकुचन कहते हैं।


लघु उत्तरीय प्रश्न (SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


1. यदि MR का मान MC से कम हो तो क्या यह अधिकतम लाभ की स्थिति हो सकती है ? समझाइए । 

Ans. यदि किसी विशिष्ट उत्पादन स्तर पर MR, MC से कम होता है, इसका मतलब यह होता है कि उस इकाई का उत्पादन करने पर फर्म को उसकी लागत से कम आगम प्राप्त होता है। अतः उस इकाई का उत्पादन फर्म के लिए हानिप्रद है। उत्पादन स्तर में थोड़ी कमी से भी MR, MC से कम रहता है अ

र्थात् फर्म को हानि उठानी पड़ती है लेकिन हानि के स्तर में उत्पादन स्तर में वृद्धि करने पर कमी आती है। फर्म उत्पादन स्तर को कम करती है, जब तक MR, MC से कम होती है और इस प्रकार उत्पादन स्तर कम करके कुल हानि में भी कमी आती है। उत्पादन स्तर घटाने का सिलसिला उस उत्पादन स्तर तक रहता है जब तक MR MC समान नहीं होते हैं। अतः यदि MR का मान MC से कम होता है तो यह अधिकतम लाभ की स्थिति नहीं हो सकती है।

UNQ HIN 10Y QB ECO XII QP E05 009 S01
credit: doubtnut

2. यदि MR का मान MC से अधिक हो तो क्या यह अधिकतम लाभ की स्थिति हो सकती है ? समझाइए ।

Ans. यदि उत्पादन के किसी विशिष्ट स्तर पर फर्म की सीमान्त आगम, सीमान्त लागत से अधिक है तो इसका अभिप्राय यह होता है कि उस उत्पादन इकाई के उत्पादन से फर्म को उस इकाई की लागत से अधिक आगम प्राप्त हो रहा है। अर्थात् उस इकाई का उत्पादन लाभकारी है। 

उत्पादन में थोड़ी अधिक वृद्धि करने पर भी MR, MC से अधिक रहता है। अर्थात् उत्पाद की कुछ और इकाइयों का उत्पादन बढ़ाकर फर्म लाभ को बढ़ा सकती है। अतः जब MR, M से अधिक होता है तो फर्म उत्पादन स्तर को बढ़ाने का प्रयास करती है और जब तक M व MC समान नहीं होते उसके लाभ में भी बढ़ोतरी होती रहती है। 

3. दीर्घकालीन समता विन्दु की अवधारणा समझाइए । 

Ans. दीर्घकाल में फर्म उत्पादन बढ़ाना उस स्तर तक जारी रखती है जब तक की न्यूनतम दीर्घकालीन औसत लागत (LARC) से अधिक रहती है। जब कीमत न्यूनतम LRAC के समान हो जाती है तो फर्म उत्पादन स्तर न बढ़ाने का निर्णय कर सकती है। यदि कोम न्यूनतम LRAC से कम रह जाती है तो फर्म उत्पाद को बेचकर प्राप्त आगम से कुल ला को पूरा नहीं कर सकती है। 

अतः फर्म उत्पादन के उस स्तर पर उत्पादन बढ़ाना बंद करती जहाँ (Min.) LRAC कीमत के बराबर होती है। अतः आपूर्ति वक्र नीचे चला जाता है। अनि कीमत उत्पादन स्तर संयोजन वहाँ प्राप्त होता है जहाँ LRMC वक्र, LRAC वक्र को नीचे काटता है। 

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इस बिन्दु पर कीमत, न्यूनतम LRAC दोनों समान हो जाते हैं इस बिन्दु से उत्पाद स्तर घटाने पर कुल TR, कुल लागत से कम हो जाती है। आगे और फर्म को हानि उठानी है। अतः फर्म को उस बिन्दु से आगे उत्पादन बढ़ाना पसंद नहीं LRAC कीमत के समाप्त जाती है उससे आगे उत्पाद बढ़ाने पर फर्म को उठानी पड़ती है।

4. अवसर लागत की अवधारणा को समझाइए । 

Ans. किसी गति विधि की अन्य सभी वैकल्पिक गतिविधियों के अधिकतम मूल्य अवसर लागत कहते हैं।

माना पारिवारिक व्यापार में निवेश के अलावा वह उक्त धनराशि को शून्य प्रतिफल के लि अपनी तिजोरी में रख सकता है अथवा 10% ब्याज पर बैंक में जमा करवा सकता है। ज वैकल्पिक गतिविधियों में निवेश का अधिकतम प्रतिफल बैंक में धनराशि जमा करवाना जमा करवाना पारिवारिक व्यापार में निवेश की अवसर लागत है। 

एक बार घरेलू व्यापार में निदेश करने के बाद अवसर लागत की अवधारणा खत्म हो जाएगी। परन्तु जब तक पारिवारिक व्याय है। d में निवेश नहीं किया जाता है तब तक बैंक जमा से ब्याज के रूप में प्रतिफल पारिवारिक व्यापार में निवेश की अवसर लागत है। 

5. उत्पादन संतुलन का अर्थ समझाइए ।

Ans. उत्पादन संतुलन उत्पादन की वह स्थिति होती है जब फर्म को अधिकतम लाभ होता है। उत्पादक की साम्य अवस्था में फर्म का कुल आगम, कुल लागत समान होता है।

गणितीय रूप में उत्पादक संतुलन को नीचे लिखा गया है- कुल आगम (TR) = कुल लागत (TC))

दूसरे शब्दों में उत्पादक उस स्थिति में साम्य की अवस्था में होता है जब फर्म उत्पाद के लिए मिलने वाली कीमत सीमान्त लागत के बराबर होती है। साम्य की अवस्था में-

कीमत (AR) = सीमान्त लागत (MC)

साम्य की अवस्था में फर्म को केवल सामान्य लाभ प्राप्त होता है। 

6. वे कारक लिखें जो पूर्ति वक्र को नीचे / दायीं ओर खिसकाते हैं। 

Ans. पूर्ति वक्र को दायीं और खिसकाने के लिए उत्तरदायी कारक- (i) साधन आगतों की कीमत में कमी, (ii) उत्पादक शुल्क में कमी, (iii) उत्पादन तकनीक में प्रगति, (iv) फर्मों की संख्या में वृद्धि।

7. कोई तीन कारक लिखिए जो आपूर्ति वक्र ऊपर बायीं ओर खिसकाते हैं । 

Ans. पूर्ति को ऊपर / बायीं ओर खिसकाने वाले कारक- (i) साधन आगतों की कीमत में वृद्धि, (ii) उत्पाद शुल्क लगाना / उत्पाद शुल्क में वृद्धि, (iii) फर्मों की संख्या में कमी, (iv) प्रतिस्थापक वस्तुओं की कीमत में वृद्धि।

8. (i) इकाई लोचदार पूर्ति वक्र एवं (ii) शून्य लोचदार पूर्ति वक्र बनाइए ।

Ans. (i) धनात्मक ढाल वाला पूर्ति वक्र जो मूल बिन्दु से गुजरता है, इकाई लोचदार पूर्ति को दर्शाता है।

(ii) क्षैतिज अक्ष पर लम्बवत पूर्ति विक्र, शून्य लोचदार को दर्शाता है।

9. मांग वक्र पर संचरण तथा मांग वक्र में खिसकाव में अंतर लिखें। 

Ans. यदि अन्य कारकों के समान रहने पर वस्तु की कीमत बढ़ने से पूर्ति की मात्रा बढ़ जाती है। अथवा वस्तु की कीमत कम होने पर पूर्ति की गई मात्रा कम हो जाती है तो इससे पूर्ति वक्र पर संचरण होता है। जबकि वस्तु की कीमत समान रहने पर अन्य कारकों में अनुकूल परिवर्तन से पूर्ति बढ़ जाती है अथवा अन्य कारकों में प्रतिकूल परिवर्तन से पूर्ति कम हो जाती है इससे पूर्ति वक्र में खिसकाव होता है। 

(i) पूर्ति यक पर संवरण पूर्ति में विस्तार या संकुचन की स्थिति में होता है जबकि पूर्ति एक में खिसकाव पूर्ति में वृद्धि या कमी होने पर होता 

(ii) पूर्ति में विस्तार की स्थिति में पूर्ति वक पर नीचे ऊपर तथा पूर्ति में संकुचन की स्थि में ऊपर से नीचे संचरण होता है जबकि पूर्ति में वृद्धि होने पर पूर्ति वक्र में खिसकाव नीचे द ओर होता है व पूर्ति में कमी होने पर पूर्ति वक्र ऊपर/बायीं ओर खिसक जाता है।

10. पूर्ति में विस्तार तथा पूर्ति में वृद्धि में अंतर स्पष्ट करें। 

Ans. यदि अन्य कारकों के समान रहने पर कीमत में वृद्धि होने से वस्तु की पूर्ति द जाती है तो इसे पूर्ति में विस्तार कहते हैं, जबकि वस्तु की कीमत समान रहने पर यदि अन कारकों में अनुकूल परिवर्तन होने से पूर्ति बढ़ जाती है इसे पूर्ति में वृद्धि कहते हैं।

(i) पूर्ति में विस्तार होने पर पूर्ति अनुसूची नहीं बदलती है जबकि पूर्ति में वृद्धि होने पर पूर्ति अनुसूची बदल जाती है। 

(ii) पूर्ति में विस्तार की स्थिति में उसी पूर्ति वक्र पर नीचे से ऊपर संचरण होता है जबकि पूर्ति में वृद्धि की स्थिति में पूर्ति वक नीचे दायीं ओर खिसक जाता है।

11. पूर्ति में संकुचन तथा पूर्ति में कमी में अंतर स्पष्ट करें।

Ans, यदि अन्य कारकों के समान रहने पर कीमत में कमी होने से वस्तु की पूर्ति कम हो जाती है तो इसे पूर्ति में संकुचन कहते हैं जबकि वस्तु की कीमत समान रहने पर यदि अन्य कारकों में प्रति अनुकूल परिवर्तन होने से पूर्ति घट जाती है इसे पूर्ति में कमी कहते हैं। 

(i) पूर्ति में संकुचन होने पर पूर्ति अनुसूची नहीं बदलती है। जबकि पूर्ति में कमी होने से पूर्ति अनुसूची बदल जाती है।

(ii) पूर्ति में संकुचन की स्थिति में उसी पूर्ति वक्र पर ऊपर नीचे संचरण होता है जबकि पूर्ति में कमी की स्थिति में पूर्ति वक्र ऊपर बायीं और खिसक जाता है।

12. पूर्ति में वृद्धि तथा पूर्ति में कमी में अंतर स्पष्ट करें। 

Ans. वस्तु की कीमत समान रहने पर जब अन्य कारकों में अनुकूल परिवर्तन होने पर पूर्ति बढ़ जाती है तो इसे पूर्ति में वृद्धि कहते हैं। वस्तु की कीमत समान रहने पर जब अन्य कारकों में प्रतिकूल परिवर्तन होने पर पूर्ति घट जाती है तो इसे पूर्ति में कमी कहते हैं। पूर्ति में वृद्धि होने पर पूर्ति वक्र नीचे दायीं ओर खिसक जाता है जबकि पूर्ति में कमी होने २ पर पूर्ति वक्र ऊपर की ओर खिसक जाता है।


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (LONG ANSWER TYPE QUESTIONS)


1. पूर्ण प्रतियोगिता के अंतर्गत फर्म की संतुलन / साम्य अवस्था को समझाइए । 

Ans. एक पूर्ण प्रतियोगी फर्म संतुलन की अवस्था में उस बिन्दु पर पहुँचती है जहाँ सीमांत लागत बढ़ती हुई स्थिति में कीमत रेखा को काटती है। पूर्ण प्रतियोगी फर्म की साम्य अवस्था को नीचे चित्र की सहायता से समझाया जा सकता है। 

चित्र में बिन्दु E अधिकतम लाभ की दोनों शर्तों को पूरा करता है इस बिन्दु पर वस्तु की – कीमत व सीमान्त लागत समान है तथा सीमांत लागत का ऊपर उठता हुआ भाग कीमत रेखा को काटता है। इस बिन्दु पर कुल लाभ ज्यादा होगा। 

कुल आगम = कीमत रेखा के अंतर्गत क्षेत्रफल  

कुल आगम = क्षेत्रफल OPEQ

कुल लागत = सीमांत लागत वक्र के अंतर्गत क्षेत्रफल • OSREQ का क्षेत्रफल

कुल लाभ = कुल आगम कुल लागत

UNQ HIN 10Y QB ECO XII QP E02 016 S01
credit: doubtnut

2. बाजार पूर्ति को प्रभावित करने वाले कारक समझाइए । 

Ans. बाजार पूर्ति को प्रभावित करने वाले कारक- 

(i) वस्तु की कीमत वस्तु की कीमत उसकी बाजार पूर्ति को प्रभावित करने वाला महत्त्वपूर्ण कारक है। ऊँची कीमत पर बाजार पूर्ति अधिक नीची कीमत पर बाजार पूर्ति होती है। 

(ii) उत्पादन तकनीक बाजार पूर्ति उत्पादन तकनीक से भी प्रभावित होती है। यदि न उन्नत उत्पादन तकनीक से उत्पादन लागत कम हो जाती है तो बाजार पूर्ति अधिक हो दूसरी पिछड़ी एवं लागत बढ़ाने वाली तकनीक का प्रयोग करने पर बाजार पूर्ति कम हो। 

(iii) उत्पादन साधनों की कीमत उत्पादन साधनों की कीमत से उत्पादन लोग निर्धारण होता है। साधनों की कीमत बढ़ने पर उत्पादन लागत बढ़ जाती है इससे बाजा कम हो जाती है। इसके विपरीत उत्पादन साधनों की कीमत बढ़ने से उत्पादन लागत बढ़ है और बाजार पूर्ति कम हो जाती है।

(iv) कर नीति-कर नीति भी बाजार पूर्ति को प्रभावित करती है यदि सरकार उत्पादन की दर बढ़ा देती है या आर्थिक सहायता कम कर देती है उत्पादन लागत में बढ़ोतरी हो है। परिणामतः वस्तु की बाजार पूर्ति कम हो जाती है। इसके विपरीत यदि सरकार उत्पादन की दर घटा देती है अथवा आर्थिक सहायता बढ़ा देती है तो उत्पादन लागत घट जाती है बाजार पूर्ति में वृद्धि हो जाती है।

(v) फर्मों की संख्या- यदि किसी वस्तु के उत्पादन में अधिक संख्या में फर्म संलग् है तो बाजार पूर्ति अधिक होती है इसके विपरीत वस्तु के उत्पादन में जितनी कम संख्या संलग्न होती है वस्तु की बाजार शर्तें उतनी कम होती हैं। 

3. पूर्ति वक्र में खिसकाव के लिए उत्तरदायी कारकों को समझाइए । 

Ans. पूर्ति वक्र में खिसकाव के लिए उत्तरदायी कारक- (i) तकनीकी परिवर्तन- उत्पादन की नई एवं प्रोन्नत तकनीक जो उत्पादन घटाती है पूर्ति में वृद्धि पैदा करती है जिससे पूर्ति वक्र नीचे दायी और खिसक जाता है।

विपरीत पिछड़ी एवं पिसी हुई तकनीक से उत्पादन लागत बढ़ जाती है जो पूर्ति में कमी करती है परिणामतः पूर्ति वक ऊपर / बायी ओर खिसक जाता है।

(ii) साधन आगतों की कीमत में परिवर्तन-साधनों आगतों की कीमतें जैसे मजदूरी दर कच्चे माल का मूल्य, किराया आदि सीमांत लागत को प्रभावित करते हैं। सीमांत लागत के परिवर्तित होने से पूर्ति में परिवर्तन हो जाता है। साधन आगतों में वृद्धि (कमी) से सीमांत ज्यादा (कम) हो जाती है। इससे पूर्ति वक्र बाय (दायीं ओर खिसक जाता है।

(iii) करों में परिवर्तन- उत्पादकों की बिक्री पर कर देना पड़ता है। करों की दर में परिवर्तन में सीमांत लागत बढ़ जाती है। इस प्रकार करों में वृद्धि (कमी) से पूर्ति वक्र में बायीं दायीं ओर का उत्पादन किया जा सकता है फर्म उस वस्तु के उत्पादन में ज्यादा प्रयोग करती है जिसका उत्पादन ज्यादा लाभकारी होता है। 

अतः प्रतिस्थापन वस्तु की कीमत में कमी (वृद्धि) से वस्तु की पूर्ति ज्यादा (कम) हो जाती है परिणामतः पूर्ति वक्र दायी (बायीं ओर खिसक जाता है। घ(४) फर्मों की संख्या में परिवर्तन- फर्मों की संख्या में वृद्धि (कमी) होने से वस्तु की पूर्ति वृद्धि (कमी) उत्पन्न हो जाती है। इससे पूर्ति वक्र में दाय (बाय) ओर खिसकाव उत्पन्न होता है। 

(iv) संबंधित वस्तुओं की कीमत में परिवर्तन दिए गए साधनों से एक से अधिक वस्तुओं खिसकाव उत्पन्न होता है।

4. पूर्ति की लोच (Elasticity of Supply) का अर्थ बताएँ। इसकी माप कैसे की जाती है ? 

Ans. पूर्ति की लोच का अभिप्राय पूर्ति की लोच का अवधारणा के अनुरूप है। पूर्ति क नियम यह तो बताता है कि कीमत में परिवर्तन होने से पूर्ति में उसी दिशा में परिवर्तन होता है, परन्तु ये नियम यह नहीं बताता कि कीमत में परिवर्तन होने से पूर्ति में कितना परिवर्तन होता है। यह जानकारी पूर्ति की लोच प्रदान करती है।

पूर्ति की लोच का अर्थ है कि कीमत में परिवर्तन होने से पूर्ति में कितना परिवर्तन होता है। संक्षेप में, पूर्ति की लोच कीमत में परिवर्तन के कारण पूर्ति में परिवर्तन की डिग्री को व्यक्त करती है। 

यदि कीमत में परिवर्तन कम और पूर्ति में परिवर्तन अधिक है तो पूर्ति लोचदार कहलाती है। इसके विपरीत, यदि कीमत में परिवर्तन अधिक और पूर्ति में परिवर्तन कम है तो पूर्ति कम सोचदार कहलाती है। पूर्ति की लोच पूर्ति में प्रतिशत परिवर्तन और कीमत में प्रतिशत परिवर्तन का अनुपात है।

सांकेतिक रूप में-पूर्ति में प्रतिशत परिवर्तन पूर्ति की लोच E, = कीमत में प्रतिशत परिवर्तन

कि कीमत और पूर्ति एक ही दिशा में परिवर्तित होते हैं, इसलिए प्रायः पूर्ति की लोच का गुणांक धनात्मक होता है। पूर्ति की लोच की माप पूर्ति की लोच को निम्नांकित विधि द्वारा मापा जा सकता है, जिसे प्रति विधि या आनुपातिक विधि कहते हैं- पूर्ति में प्रतिक्त परिवर्तन

पूर्ति की लोच E = कीमत में प्रतिशत परिवर्तन

पूर्ति में आनुपातिक परिवर्तन अपणा पूर्ति की लोच E = कीमत में आनुपातिक परिवर्तन

RBSE Solutions for Class 12 Economics Chapter 4 मांग की कीमत लोच 6
credit: doubtnut

5. अल्पकाल तथा दीर्घकाल पूर्ति वक्रों की प्रकृति की व्याख्या करें। 

Ans. अल्पकाल पूर्ति वक्र-हम जानते हैं कि अल्पकाल में AVC की भरपाई होन अन्यथा उत्पादन बंद हो जाएगा। हम यह भी जानते हैं कि अल्पकाल में कीमत, सीमांत स के बराबर होती है। इसलिए MC फर्म का पूर्ति वक्र है। तथापि, MC का केवल उठता है भाग पूर्ति वक है, इसका सारा भाग नहीं। 

MC के बढ़ते हुए भाग का केवल वही हिस्सा किसी फर्म का पूर्ति वक्र है जो AVC के ऊपर स्थित है। इसलिए जैसा कि चित्र में दिखाया गया है, EM फर्म का पूर्ति वक्र है। जैसा कि चित्र में दिखाया गया है, यद्यपि MC, E बिंदु के पहले से ही बढ़ना शुरू कर देती है। 

(AVC का न्यूनतम बिंदु) परंतु पूर्ति वक केवल बिंदु B से आरंभ होता है। अगर, मानो यह बिंदु F से आरंभ हो, MC का FE हिस्सा पूर्ति वक्र का हिस्सा नहीं हो सकता क्योंकि यह AVCf के कम है।

दीर्घकाल पूर्ति वक्र-दीर्घकाल पूर्ति वक्र, अल्पकाल पूर्ति वक्र से अलग होता है। दीर्घकाल में कोई स्थिर लागतें नहीं होतीं। इसलिए सारी लागत परिवर्तनशील है तथा इसकी भरपाई होनी है। 

यदि कीमत AC की भरपाई नहीं करती, उत्पादन बंद हो जाएगा। इसलिए पूर्ति वक्र MC का वह हिस्सा है जो AC के न्यूनतम स्तर से ऊपर है। जैसा कि चित्र में दिखाया गया है, MC का मोटा हिसा दीर्घकाल पूर्ति वक है।


CLASS 12 NCERT SOLUTION IN ENGLISHCLASS12 NCERT SOLUTION IN HINDI
Historyइतिहास
Geography भूगोल
Political science राजनीति विज्ञान
English SubjectResult
Hindi SubjectHistory answer keys
Sociology समाज शास्त्र

FAQs


1. एक पूर्ण प्रतिस्पर्धा बाजार की क्या विशेषताएँ हैं? 

(i) क्रेता-विक्रेताओं का बड़ी संख्या में होना-पूर्ण प्रतियोगिता में वस्तु के क्रेता व विक्रेता बहुत बड़ी संख्या में होते हैं। यहाँ बड़ी संख्या से तात्पर्य किसी निश्चित संख्या से नहीं होता। इसका अर्थ यह है कि संख्या इतनी अधिक है कि कोई भी एक क्रेता या विक्रेता अपनी क्रियाओं द्वारा मूल्य को प्रभावित नहीं कर सकता।

2. एक फर्म के आपूर्ति वक्र पर तकनीकी प्रगति का प्रभाव लिखें।

Ans. तकनीकी प्रगति से एक फर्म का आपूर्ति वक्र नीचे दायीं ओर खिसक जाता है। 

3. फर्मों की संख्या में परिवर्तन होने पर आपूर्ति वक्र पर क्या प्रभाव पड़ेगा ? 

Ans. यदि फर्मों की संख्या में वृद्धि होगी तो पूर्ति वक्र नीचे दायीं ओर खिसक जायेगा। यदि फर्मों की संख्या में कमी होगी तो पूर्ति वक्र ऊपर बायी ओर खिसक जायेगा ।


कक्षा 12 अर्थशास्त्र एनसीईआरटी नोट्स


  1. व्यष्टि अर्थशास्त्र
  2. उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत
  3. उत्पादन तथा लागत
  4. पूर्ण प्रतिस्पर्धा की स्थिति में फर्म का सिद्धांत
  5. बाजार संतुलन
  6. प्रतिस्पर्धारहित बाजार
  1. परिचय
  2. राष्ट्रीय आय का लेखांकन
  3. मुद्रा एवं बैंकिंग
  4. आय का निर्धारण
  5. सरकार: कार्य और विषय क्षेत्र
  6. खुली अर्थव्यवस्था: समष्टि अर्थशास्त्र

वस्तुनिष्ठ प्रश्न MCQs


  1. व्यष्टि अर्थशास्त्र
  2. उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत
  3. उत्पादन तथा लागत
  4. पूर्ण प्रतिस्पर्धा की स्थिति में फर्म का सिद्धांत
  5. बाजार संतुलन
  6. प्रतिस्पर्धारहित बाजार
  1. परिचय
  2. राष्ट्रीय आय का लेखांकन
  3. मुद्रा एवं बैंकिंग
  4. आय का निर्धारण
  5. सरकार: कार्य और विषय क्षेत्र
  6. खुली अर्थव्यवस्था: समष्टि अर्थशास्त्र

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