अर्थशास्त्र कक्षा 12वीं अध्याय 6 नोट्स | Economics Class 12 Chapter 6 Questions And Answers In Hindi Easy PDF

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प्रतिस्पर्धारहित बाजार | NON-COMPETITIVE MARKET, अर्थशास्त्र कक्षा 12वीं अध्याय 6 नोट्स | Economics Class 12 Chapter 6 Questions And Answers In Hindi Easy PDF, Economics Class 12 Chapter 6


प्रतिस्पर्धारहित बाजार | NON-COMPETITIVE MARKET


‘अर्थशास्त्री बाजार शब्द का अर्थ किसी उस स्थान विशेष से नहीं लेते हैं जहाँ पर वस्तुओं का क्रम व विक्रय होता है, बल्कि उस समस्त क्षेत्र से लेते हैं जिसमें क्रेताओं तथा विक्रेताओं के बीच इस प्रकार स्वतंत्र पारस्परिक संपर्क होता है कि एक ही वस्तु के मूल्यों में सुगमता

तथा शीघ्रता से समान होने की प्रवृति पाई जाती है।” बाजार से तात्पर्य उस संपूर्ण क्षेत्र व व्यवस्था से है जिसमें क्रेताओं और विक्रेताओं के बीच संबंध स्थापित होता है। बाजार का संबंध किसी वस्तु विशेष व स्थान विशेष से होता है। यही कारण है कि विभिन्न वस्तुओं के बाजार इन दिनों अलग-अलग होते जा रहे हैं। बाजार को स्थान, वस्तु, प्रतियोगिता एवं समयावधि के आधार पर बाँटा जा सकता है।

पूर्ण प्रतियोगिता (Perfect Competition) : उस बाजार को कहते हैं जिसमें असंख्य क्रेता तथा समरूप वस्तु के असंख्य विक्रेता होते हैं और वस्तु की कीमत का निर्धारण उद्योग द्वारा किया जाता है। बाजार में केवल एक ही कीमत प्रचलित होती है और सभी फर्मा को अपनी वस्तु इसी प्रचलित कीमत पर बेचनी होती है।

पूर्ण प्रतियोगिता की विशेषताएँ (Features of Perfect Competition) : 

  • (i) क्रेताओं तथा विक्रेताओं की अधिक संख्या 
  • (ii) समरूप वस्तुएँ 
  • (iii) पूर्ण ज्ञान 
  • (iv) फर्मों का स्वतंत्र प्रवेश व छोड़ना 
  • (v) स्वतंत्र निर्णय 
  • (vi) पूर्ण गतिशीलता 
  • (vi) यातायात लागत का अभाव। 

एकाधिकार (Monopoly) : उस बाजार को कहते हैं जिसमें वस्तु का केवल एक विक्रेता होता है और उसका वस्तु की कीमत पर पूर्ण नियंत्रण होता है।

एकाधिकारी प्रतियोगिता (Monopolistic Competition)) बाजार की उस स्थिति को कहते हैं जिसमें विक्रेताओं की बड़ी संख्या विधेदीकृत वस्तुओं का क्रेताओं की बड़ी संख्या में विक्रय करती है। प्रत्येक फर्म का वस्तु की कीमत पर आंशिक नियंत्रण होता है।

विभिन्न बाजारों में फर्म के माँग वक्र का आकार (Shape of Firm’s Demand Curve Under Different Markets): पूर्ण प्रतियोगिता में यह पड़ी सीधी रेखा होती है। यह माँग की ०० लोच को व्यक्त करती है।

 एकाधिकार में इसका उलान नीचे की ओर होता है परंतु अधिक लोचदार नहीं क्योंकि वस्तु की कीमत में परिवर्तन के फलस्वरूप माँग में अधिक परिवर्तन नहीं होता। इसके साथ-साथ बाजार में एकाधिकारी वस्तु का कोई भी निकट स्थानापन्न नहीं होता। 

एकाधिकारी प्रतियोगिता में इसका ढलान नीचे की ओर होता है परंतु एकाधिकार की तुलना में सापेक्षतया यह अधिक लोचदार होता है। यह इसलिए क्योंकि एकाधिकारी प्रतियोगिता में अनेक निकट स्थानापन्न होते हैं।



अपूर्ण प्रतियोगिता बाजार यह बाजार की वह स्थिति है, जिसमें विक्रेताओं एवं क्रेताओं की वस्तु की कीमत के बारे में बाजार की अपूर्ण जानकारी होती है तथा उत्पादक वस्तु विभेद की नीति अपनाते हैं। 

अत्याधिकार अत्यधिकार से तात्पर्य बाजार की उस स्थिति से है, जिसमें वस्तु के विक्रेता दो से अधिक होते हैं, परंतु बहुत अधिक नहीं। बाजार से अभिप्राय उस संरचना से है जिसमें वस्तु के क्रेता व विक्रेता विनिमय करने के लिए निकट सम्पर्क में रहते हैं।


Economics Class 12 Chapter 6 Questions And Answers In Hindi


Class12th 
Chapter Nameप्रतिस्पर्धारहित बाजार
Chapter numberChapter 6
PART A
Book NCERT
Subjectअर्थशास्त्र | Economics
Medium Hindi | हिंदी
Study Materialsनोट्स & question answer
Download PDFClass 12 economics chapter 6 pdf

कक्षा 12वीं अध्याय 6 नोट्स Economics Class 12 Chapter 6 Questions And Answers In Hindi Easy PDF

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (VERY SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


1. किस प्रकार की बाजार संरचना एकाधिकार कहलाती है ? 

Ans. जिस प्रकार की संरचना में केवल एक ही विक्रेता होता है उसे एकाधिकार कहते हैं। 

2. बाजार माँग वक्र क्या दर्शाता है ?

Ans. बाजार माँग वक्र यह दर्शाता है कि विभिन्न कीमतों पर उपभोक्ता कुल मिलाकर कितनी वस्तुएँ खरीदने के लिए इच्छुक है। 

3. द्वि-अधिकार में कितने विक्रेता होते हैं ?

Ans. द्वि-अधिकार में केवल दो विक्रेता होते हैं। 

4. AR तथा MR में लम्बवत् दूरी कितनी होगी जब AR वक्र कम ढाल वाला है?

Ans. AR तथा MR में लम्बवत् दूरी कम होगी।

5. बाजार में फर्मों का प्रवेश तथा बहिर्गमन कब थम जाता है ? 

Ans. जब लाभ सामान्य हो जाता है।

6. उस बाजार को क्या कहते हैं जिसमें एकाधिकार तथा प्रतियोगिता दोनों का अस्तित होता है ?

Ans. एकाधिकारी प्रतियोगिता कहते हैं।

7. उत्पादक के संतुलन की कौन-सी दो विधियाँ हैं ?

Ans. निम्नलिखित दो विधियों हैं

(i) कुल संप्राप्ति कुल लागत,

(ii) सीमांत संप्राप्ति = सीमान्त लागत

8. माँग वक्र किस बिन्दु पर लोचहीन होता है ? 

Ans. माँग वक्र की लोच उस बिन्दु पर लोचहीन होती है जहाँ कीमत लोच इकाई से कम होती है।

9. सीमांत संप्राप्ति का मूल्य ऋणात्मक है, ऐसी अवस्था में माँग की लोच कितनी होगी ? 

Ans. ऐसी अवस्था में माँग की लोच इकाई से कम होगी।

10. बाजार की विशेषताएँ लिखिए।

Ans. बाजार की विशेषताएँ- 

(i) क्षेत्र, 

(ii) क्रेता तथा विक्रेता, 

(iii) वस्तु तथा प्रतियोगिता ।

11. उस बाजार का नाम बताएँ जहाँ फर्म कीमत स्वीकारक होती है ?

Ans. पूर्ण प्रतियोगिता बाजार।

12. अल्पकाल में प्रतियोगी फर्म द्वारा अर्जित लाभ दीर्घकाल में क्यों समाप्त हो जाता है ?

Ans. दूसरी फर्मों के उद्योग में स्वतंत्र प्रवेश के कारण अल्पकाल में अर्जित लाभ दीर्घकाल में समाप्त हो जाता है।

13. औसत आय से क्या अभिप्राय है ?

Ans. किसी वस्तु की बिक्री से प्राप्त होने वाली प्रति इकाई आय अथवा राशि औसत आय कहलाती है।

14. पूर्ण प्रतियोगिता किसे कहते हैं ?

Ans. पूर्ण प्रतियोगिता बाजार की वह स्थिति है जिसके अन्तर्गत विक्रेता अधिक संख्या में हाते हैं।

15. अल्पाधिकार में कितने विक्रेता लाते हैं ? 

Ans. अल्पाधिकार में बहुत कम विक्रेता होते हैं।

16. जब माँग वक्र लोचदार हो तो सीमा संप्राप्ति का मूल्य क्या होगा ? 

Ans. माँग वक्र उस समय लोचदार होता है जब कीमत लोच इकाई से अधिक होती है। जब माँग की कीमत लोच इकाई से अधिक होती है तब सीमांत संप्राप्ति का मूल्य धनात्मक होता है।


लघु उत्तरीय प्रश्न (SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


1. अल्पाधिकार तथा एकाधिकार में अंतर बताएँ।

अल्पाधिकारएकाधिकार
(i) अत्याधिकार में चन्द विक्रेता होते हैं।एकाधिकार में केवल एक ही विक्रेता होता है।
(ii) नई वस्तु का प्रवेश कठिन होता है। इसमें नई फर्म का प्रवेश बहुत ही कठिन होता है।
(iii) फर्म का वस्तु की कीमत पर पर्याप्त नियंत्रण होता है फर्म का कीमत पर लगभग पूर्ण नियंत्रण होता है।
(iv) इसमें निकट स्थानापन्न वस्तु उपलब्ध होती है।इसमें निकट स्थानापन्न वस्तु उपलब्ध नहीं होती।
(v) इसमें बिक्री-लागतें अधिक होती हैं। इसमें बिक्री लागते न के बराबर होती है।

2. पूर्ण प्रतियोगिता तथा एकधिकार में अंतर बताएँ ।

पूर्ण प्रतियोगिताएकाधिकार
(i) इसमें विक्रेता / उत्पादक बहुत बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। इसमें केवल एक ही विक्रेता/ उत्पादक होता है।
(ii) इसमें फर्मों का प्रवेश तथा बहिर्गमन सरल हैं। इसमें नई फर्मों के प्रवेश पर प्रतिबंध होता है।
(iii) बाजार में वस्तु के अनेक निकट प्रतिस्थापन्न उपलब्ध होते हैं। वस्तु का कोई निकट प्रतिस्थापन्न उपलब्ध नहीं होता।
(iv) क्रेताओं को बाजार का पूर्ण ज्ञान होता है।क्रेताओं को बाजार का पूर्ण ज्ञान नहीं होता।

3.एकाधिकार की विशेषताएँ लिखें।

Ans. एकाधिकार की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

(i) एक विक्रेता तथा अधिक क्रेता । 

(ii) एकाधिकारी फर्म और उद्योग में अन्तर नहीं होता।

(iii) एकाधिकारी बाजार में नई फर्मों के प्रवेश पर बाधाएँ होती हैं। 

(iv) वस्तु की कोई निकट प्रतिस्थापन्न वस्तु नहीं होती।

(v) कीमत नियंत्रण एकाधिकारी द्वारा किया जाता है। (vi) एकाधिकार में औसत संप्राप्ति और सीमान्त संप्राप्ति वक्र अलग-अलग होते हैं।

(vii) एकाधिकारी विभिन्न क्रेताओं से अलग-अलग कीमत वसूल कर सकता है, जिसे कीमत विभेद नीति कहते हैं।

4. एकाधिकारी प्रतियोगिता तथा अल्पाधिकार में अंतर बतायें।

एकाधिकार प्रतियोगिताअल्पाधिकार
(1) इसमें वस्तु के उत्पादक एवं विक्रेता बड़ी संख्या में पाए जाते हैं।इसमें वस्तु के चन्द उत्पादक एवं विक्रेता पाए जाते हैं।
(ii) इसमें विभेदीकृत वस्तुएँ होती हैं। इसमें विभेदीकृत वस्तुएँ व समरूप वस्तुएँ दोनों पाई जाती है।
(iii) इसमें नई फर्म बाजार में प्रवेश कराने में स्वतंत्र होती है।इसमें फर्मों की संख्या सीमित होने के कारण वे अपने सामूहिक व्यवहार से नई फर्म के प्रवेश को रोकने का भरसक प्रयत्न करती है।
(iv) इसमें फर्म के माँग वक्र होता है। इसमें माँग वक्र का स्वरूप अनिश्चित होता है।

5 एकाधिकारी फर्म की कीमत बेची गई मात्रा का घटता हुआ फलन है, संक्षेप में समझाइए ।

Ans. एकाधिकारी फर्म उत्पाद की अधिक मात्रा की बिक्री कीमत घटाकर ही कर सकती एकाधिकारी बाजार कीमत पूर्ति की गई मात्रा पर निर्भर करती है। इसलिए एकाधिकारी के लिए कीमत बेची गई मात्रा का घटता प्रतिफल होता है। 

बाजार माँग वक्र आपूर्ति की गई विभिन्न मात्राओं के लिए उपलब्ध बाजार कीमत को दर्शाता है। एकाधिकारी फर्म के माँग वक्र ही बाजार माँग वक्र होता है।

6 कुल आगम वक्र से औसत आगम ज्ञात करने की विधि लिखो । 

Ans. ज्यामितीय रूप से औसत आगम का मूल्य उत्पाद के किसी भी स्तर पर कुल आगम वक्र से ज्ञात किया जा सकता है। इसकी विधि नीचे लिखी गई है-

(i) कुल आगम वक्र (TR) खींचिए। 

(ii) उत्पाद का कोई भी स्तर लेकर क्षैतिज – अक्ष से लम्ब खींचो।

(iii) क्षैतिज अक्ष से लम्ब कुल आगम वक्र को जिस बिन्दु पर काटता है उसको a लिखो।

(iv) बिन्दु को मूल बिन्दु से मिलाओ। 

(v) किरण Oa का ढाल ही औसत आगम होता है।

7. शून्य लागत की स्थिति में एकाधिकारी फर्म के अल्पकालीन सन्तुलन का समझाइए ।

Ans. एकाधिकारी फर्म स्टॉक नहीं बनाती है। यह फर्म जितना उत्पादन करती है उत ही मात्रा में बाजार में बेच देती है। कुल आगम व कुल लागत के अन्तर को लाभ कहते हैं लाभ कुल आगम कुल लागत लाभ = कुल आगम (कुल लागत = 0) कुल लाभ जब अधिकतम होता है जब फर्म का कुल आगम अधिकतम होता है। जिस उत्पाद स्तर पर कुल आगम अधिकतम होता है उसे साम्य उत्पादन स्तर तथा उस उतपाद स्तर की कीमत को साम्य कीमत कहते हैं।

8.एकाधिकारी बाजार में औसत आगम तथा सीमान्त आगम में क्या संबंध होगा ? 

Ans. एकाधिकारी बाजार संरचना में फर्म का माँग वक्र ही बाजार माँग वक्र होता है। एकाधिकारी को वह कीमत स्वीकार करनी पड़ती है जिसे उपभोक्ता चुकाने को तैयार होते हैं। दूसरे शब्दों में, एकाधिकारी फर्म उस कीमत पर आपूर्ति करती है जिस पर उपभोक्ता अधिकतम माँग करते हैं। अतः एकाधिकारी फर्म का माँग वक्र ऋणात्मक ढाल का होता है।

फर्म की औसत आगम सदैव कीमत के समान इसलिए होती है क्योंकि औसत आगम क भी ऋणात्मक ढाल वाला होता है। फर्म वस्तु की कीमत घटाकर ही कुल आगम बढ़ोतरी कर सकती है। अतः प्रत्येक अतिरिक्त इकाई के विक्रय से कुल आगम में बढ़ोतरी घटती दर से होती या सीमान्त आगम भी ऋणात्मक ढाल का होता है। सीमान्त आगम व सदैव औसत आगम वक्र से नीचे रहता है। 

9 पेटेन्ट अधिकारों का अनुमोदन किस ध्येय से किया जाता है ? 

Ans. पेटेन्ट अधिकारों का अनुमोदन निम्नलिखित ध्येयों से किया जाता है-

(i) पेटेन्ट अधिकार का अनुमोदन होने पर पेटेन्ट काल में केवल पेटेन्ट अधिकार प्राप्त फर्म वस्तु का उत्पादन तकनीक के क्षेत्र में फर्म का एकाधिकार हो जाता है। एकाधिकार के कारण फर्म उत्पाद के लिए ऊँची कीमत प्राप्त कर सकती है और उसे असामान्य लाभ प्राप्त हो सकता है।

(ii) पेटेन्ट अधिकार से फर्मों में नए उत्पाद या नई उत्पादन तकनीक खोजने की प्रवृत्ति प्रबल होती है। इससे आर्थिक विकास को गति प्राप्त होती है। (iii) उत्पादन लागत घटाने वाली तकनीक के प्रयोग से क्रेताओं को सस्ती कीमत पर भी वस्तु प्राप्त हो सकती है। 

10. विशुद्ध प्रतियोगिता क्या है ? इसकी विशेषताएँ बताइए ।

Ans. विशुद्ध प्रतियोगिता की अवधारणा पूर्ण प्रतियोगिता की अवधारणा से संकुचित है।वह बाजार संरचना जिसमें असंख्य विक्रेता एवं क्रेता होते हैं, सभी विक्रेता समरूप वस्तु का विक्रय करते हैं तथा फर्मों को उद्योग में प्रवेश करने व छोड़कर जाने की स्वतन्त्रता होती विशुद्ध प्रतियोगिता कहलाती है।

विशुद्ध प्रतियोगिता के लक्षण- 

(i) फर्मों की अधिक संख्या- इस बाजार संरचना में क्रेता व विक्रेताओं की बहुत अधिक संख्या होती है। एक विक्रेता, कुल बाजार पूर्ति की तुलना वस्तु की नगण्य मात्रा की पूर्ति करती है इसलिए एक फर्म वस्तु की बाजार कीमत को प्रभावित नहीं कर सकती है। 

(ii) समरूप – इस प्रतियोगिता में विभिन्न फर्मों द्वारा उत्पादित वस्तु समरूप होती है। दूसरे उद्योग में उत्पादित वस्तु / वस्तुओं से एक उद्योग में उत्पादित वस्तु से प्रतिस्थापन नहीं किया जा सकता है। समरूप वस्तु होने के कारण इस बाजार में वस्तु की कीमत समान होती है।

(iii) फर्मों का उद्योग में प्रवेश व गमन-इस बाजार में लाभ से प्रभावित होकर कोई भी नई फर्म प्रवेश कर सकती है इसी प्रकार हानि उठाने वाली फर्म बाजार छोड़कर जाने के लिए स्वतंत्र होती है।


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न


1. कुल वक्रों की सहायता से एकाधिकारिक फर्म के साम्य को समझाइए । 

Ans. एक एकाधिकारी फर्म उस बिन्दु पर साम्यावस्था को प्राप्त करेगी जहाँ पर कुल संप्राप्ति तथा कुल लागत के बीच की ऊर्ध्वाधर दूरी अधिक होगी। नीचे दिए गए रेखाचित्र में कुल लागत वक्र की आकृति को कुल लागत के द्वारा चित्रित किया गया है। राशि फर्म का लाभ है। रेखाचित्र में हम देख सकते हैं कि मात्रा q का जब उत्पादन होता है तो कुल संप्राप्ति तथा कुल लागत में ऊर्ध्वाधर दूरी AB है।

यह ऊर्थ्याचर दूरी निर्गत के विभिन्न पारों के लिए बदलती रहती है। जब निर्गत उत्तर १, से कम हो जाता है तो कुल लागत संप्राप्ति से अधिक होती है। अतः ताम ऋणात्मक होगा और फर्म को घटाया होगा।

यह स्थिति 9 से अधिक निर्गत स्तर के लिए विद्यमान रहती है। अतः फर्म केवल के बीच निर्गत स्तर पर ही धनात्मक लाभ प्राप्त करती है, जहां कुल सप्राप्ति चक्र फुल वर्क के ऊपर अवस्थित होता है। यह फर्म निर्गत के उस स्तर का चयन करेगी जिस पर उसका लाभ अधिकतम होगा। निर्गत का वह स्तर होगा जिसके लिए कुल संप्राप्ति और कुल लागत वक्र के ऊपर अवस्ि होगा। यदि कुल संप्राप्ति और कुल लागत के अन्तर की गणना की जाए और एक ग्राफ के में दर्शाया जाए तो यह रेखाचित्र में अंकित लाभ के जैसा होगा। 

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2. वे विभिन्न कारक समझाइए जो एकाधिकार को जन्म देते हैं। 

Ans. एकाधिकार के लिए उत्तरदायी कारक-

(i) पेटेन्ट अधिकार- यदि कोई फर्म किसी उत्पाद या उत्पादन तकनीक को खोजने का दाद पेश करती है और उसके दावे की पुष्टि हो जाती है तो उस फर्म को उस उत्पाद या तकनी के लिए पेटेन्ट अधिकार स्वीकृत किया जा सकता है। पेटेन्ट अधिकार मिलने पर कोई अन् फर्म उस उत्पाद या तकनीक का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए नहीं कर सकती है। पेटे अधिकार से फर्मों को अनुसंधान व विकास के कार्यों की प्रेरणा मिलती है। 

(ii) कानूर सरकार द्वारा लाइसेंस (अनुज्ञा पत्र)- यदि सरकार कानून के माध्यम से किसी एक वस्तु के उत्पादन का कार्य एक ही फर्म को सौंप देती है तो अन्य फर्मों उस वस्तु बाजार में की बाध्यता के कारण प्रवेश नहीं कर सकती है। जैसे अन्तर राष्ट्रीय दूरभाष सेवाएँ प्रदान कराने का अधिकार वी.एस.एन.एल. (VSNL) कम्पनी को भारत सरकार ने प्रदान किया हुआ है।

(iii) कारटेल का गठन-यदि कुछ फर्मों का विलय इस प्रकार से हो जाता है कि है। एकाधिकार के लाभ उठायेंगे तो इस गठन को कारटेल कहते हैं। इसके अन्तर्गत अलग-अलग उत्पादन इकाई के रूप में कार्य करती है परन्तु उन सभी का निर्णय एक और सामूहिक होता है। जैसे तेल उत्पादक देशों ने OPEC नामक संगठन बनाया हुआ है एकाधिकारी की तरह कार्य करता है। 

(iv) बाजार का आकार – यदि किसी वस्तु के बाजार का आकार इतना छोटा होता है कि मौजूदा एक फर्म के उत्पादन की भी खपत उसमें नहीं हो पाती है तो अन्य फर्मे उसमें प्रवेश नहीं करती हैं।

(v) घारी निवेश-यदि किसी वस्तु के उत्पादन के लिए भारी निवेश की आवश्यकता पड़ती है तो कम वित्तीय संसाधन वाली फर्मों उस वस्तु बाजार में प्रवेश करने का साहस नहीं जुटा पाती है। आदि।

3. रेखाचित्रों की सहायता से पूर्ण प्रतियोगिता एवं एकाधिकार के औसत आगम वनों का अन्तर समझाइए । 

Ans. पूर्ण प्रतियोगिता के अन्तर्गत

औसत आगम वक्र पूर्ण प्रतियोगिता के अन्तर्गत औसत आगम वक्र क्षैतिज अक्ष के समान्तर एक सीधी रेखा होती है। प्रतियोगी फर्म उद्योग द्वारा निर्धारित की गई कीमत की स्वर है। अर्थात् पूर्ण प्रतियोगी बाजार में वस्तु की कीमत उद्योग तय करता है। दी गई कीमत पर वस्तु की कितनी भी मात्रा फर्म बेच सकती है।

बिक्री के प्रत्येक स्तर पर कीमत समान रहने के कारण प्रति इकाई बिक्री से प्राप्त आगम समान रहता है। इसलिए पूर्ण प्रतियोगिता के अन्तर्गत फर्म का औसत आगम वक्र क्षैतिज अक्ष के समान्तर होता है।

कीमत औसत आगम एकाधिकारी फर्म का औसत आगम वक्र-एकाधिकारी फर्म के औसत आगम वक्र का ढाल ऋणात्मक होता है। एकाधिकारी फर्म केवल कीमत स्तर के हम करके ही वस्तु की अधिक इकाइयों का विक्रय कर सकती है। निकट प्रतिस्थापन वस्तु न होने के कारण एकाधिकारी द्वारा उत्पादित वस्तु की माँग बेलोचदार होती है। इसलिए औसत आगम वक्र भी बेलोचदार या कम ढाल वाला होता है।

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4. एकाधिकारी प्रतियोगिता के लक्षणों को संक्षेप में समझाइए । 

Ans. एकाधिकारी प्रतियोगिता के निम्नलिखित लक्षण हैं- (i) क्रेता तथा विक्रेताओं की संख्या इस बाजार में फर्मों की संख्या अधिक होती है। एक फर्म कुल उत्पादन के एक छोटे भाग का उत्पादन करती है। इस बाजार में क्रेताओं की संख्या भी अधिक होती है। एक क्रेता बाजार माँग का छोटा हिस्सा ही क्रय करता है।

(ii) वस्तु विभेद -एकाधिकारी प्रतियोगी बाजार में सभी फर्म रूप, रंग, आकार, गुणवत्ता आदि गुणों में अलग-अलग वस्तु का उत्पादन करती है। अतः इस बाजार में वस्तु विभेद पाया जाता है। 

(iii) प्रवेश पाने व बाहर जाने की स्वतंत्रता- इस बाजार में नई फर्मों को बाजार में प्रवेश करने व पुरानी फर्मों को उद्योग से बाहर जाने की स्वतंत्रता होती है। यदि इस बाजार में मौजूदा फर्मों को असमान्य लाभ प्राप्त होता है तो नई फर्म इससे आकर्षित होकर बाजार में प्रवेश कर सकती है। दूसरी ओर यदि फर्मों को हानि होती है तो हानि उठाने वाली फर्म बाजार छोड़कर बाहर जाने के लिए स्वतंत्र होती है।

(iv) बिक्री लागत-इस बाजार में वस्तु विभेद होने के कारण बिक्री लागतों का बहुत अधिक महत्त्व होता है। इन लागतों की मदद से एक फर्म अधिक संख्या में उपभोक्ताओं को अपनी ओर आकर्षित करके लाभ को बढ़ा सकती है। 

5. पूर्ण प्रतियोगिता तथा एकाधिकारी प्रतियोगिता में अन्तर स्पष्ट करें।

इस बाजार में क्रेताओं व विक्रेताओं की बहुत बड़ी संख्या होती है। अकेला क्रेता या विक्रेता बाजार माँग या पूर्ति को प्रभावित नहीं कर सकता है।

इस बाजार में छोटे विक्रेताओं की संख्या अधिक होती है क्रेता भी अधिक संख्या में होते है एक विक्रेता बाजार पूर्ति को थोड़ा बहुत प्रभावित कर सकता है।

इस बाजार में सभी फर्म समरूप वस्तु का विक्रय करती है। अर्थात् सभी फर्मों की वस्तु रूप, गुण, आकार आदि गुणों में समान होती है।

इस बाजार में वस्तु विभेद पाया जाता है। सभी फर्मों का उत्पाद रूप, रंग, आकार आदि में भिन्न हो सकता है। परन्तु वे एक-दूसरे के लिए निकट प्रतियोगी होती है।

इस बाजार में फर्मों को उद्योग में प्रवेश करने व उद्योग को छोड़कर जाने की पूर्ण स्वतंत्रता होती है। लाभ से आकर्षित होकर नई फर्म स्वतंत्र रूप से प्रवेश कर सकती है तथा हानि उठाने वाली फर्म बाजार छोड़कर बाहर जा सकती है।

इस बाजार में वस्तु की कीमत का निर्धारण उद्योग करता है और फर्म केवल कीमत स्वीकारक होती है। इसलिए विक्री के प्रत्येक स्तर पर कीमत समान रहती है।


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FAQs


Q. माँग वक्र की लोच किस बिन्दु पर होती है ?

Ans. माँग-वक्र की लोच उस बिन्दु पर होती है जहाँ कीमत लोच इकाई से अधिक होती है। 

Q. अल्पाधिकार क्या है ?

Ans. अल्पाधिकार पूर्ण प्रतियोगिता का एक महत्वपूर्ण रूप है। अल्पाधिकार बाजार की वह स्थिति है जिसमें कुछ बड़ी-बड़ी फर्म होती है। 

Q. एकाधिकारी फर्म कब अपना उत्पादन बढ़ाती है ? 

Ans. एकाधिकारी फर्म उस समय अपना उत्पादन बढ़ाती है जब सीमांत संप्राप्ति (आय) सीमांत लागत से अधिक होती है।


कक्षा 12 अर्थशास्त्र एनसीईआरटी नोट्स


  1. व्यष्टि अर्थशास्त्र
  2. उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत
  3. उत्पादन तथा लागत
  4. पूर्ण प्रतिस्पर्धा की स्थिति में फर्म का सिद्धांत
  5. बाजार संतुलन
  6. प्रतिस्पर्धारहित बाजार
  1. परिचय
  2. राष्ट्रीय आय का लेखांकन
  3. मुद्रा एवं बैंकिंग
  4. आय का निर्धारण
  5. सरकार: कार्य और विषय क्षेत्र
  6. खुली अर्थव्यवस्था: समष्टि अर्थशास्त्र

वस्तुनिष्ठ प्रश्न MCQs


  1. व्यष्टि अर्थशास्त्र
  2. उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत
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  6. प्रतिस्पर्धारहित बाजार
  1. परिचय
  2. राष्ट्रीय आय का लेखांकन
  3. मुद्रा एवं बैंकिंग
  4. आय का निर्धारण
  5. सरकार: कार्य और विषय क्षेत्र
  6. खुली अर्थव्यवस्था: समष्टि अर्थशास्त्र

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