NCERT Solutions Entrepreneurship Class 12 Chapter 11 Hindi Notes PDF

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Entrepreneurship Class 12 Chapter 11 Hindi Notes PDF, NCERT Solutions Entrepreneurship Class 12 Chapter 11 Hindi Notes PDF

Entrepreneurship Class 12 Chapter 11 Hindi Notes PDF

Class12th 
Chapter Nameविज्ञापन और विक्रय संवर्धन | ADVERTISEMENT AND SALES PROMOTION
Chapter number11
Book NCERT
SubjectEntrepreneurship
Medium Hindi
Study MaterialsImportant questions answers
Download PDFEntrepreneurship Class 12 Chapter 11 Hindi Notes PDF

विज्ञापन और विक्रय संवर्धन | ADVERTISEMENT AND SALES PROMOTION

आजकल व्यापार संस्थाओं में विज्ञापन एक आवश्यक अंग बन गया है। अंग्रेजी शब्द Advertise यूनानी भाषा के शब्द Adverte यानी Add उधार और verte अर्थात् वास्तव में मोड़ना। इसका अर्थ है लोगों का ध्यान किसी वस्तु विशेष की ओर मोड़ना। 

विलियम जे. स्टेन्टन के अनुसार, “विज्ञापन में वे सभी गतिविधियाँ शामिल होती हैं जिसमें एक वर्ग को अव्यक्तिगत जबानी या दिखाकर, खुल्लम-खुल्ला एक संदेश जो उत्पादन अथवा सेवाओं के विषय में होता है, दिया जाता है।” वास्तव में वस्तुओं के बिक्री को बढ़ाने के लिए ग्राहकों को अपनी ओर आकृष्ट करना ही विज्ञापन कहलाता है। विज्ञापन के माध्यम से वस्तुओं की बिक्री बढ़ती है। जिससे व्यापारी को लाभ होता है।

विज्ञापन से ग्राहकों का ज्ञान विस्तृत होता है और उपभोक्ता को बिना समय नष्ट किए आवश्यक वस्तुएँ मिल जाती हैं। विज्ञापन से उत्पादकों को विभिन्न लाभों की प्राप्ति होती है, जैसे-बिक्री में वृद्धि, नयी-नयी वस्तुओं की जानकारी होना। 

Entrepreneurship Class 12 Chapter 11 Hindi Notes PDF

साख में वृद्धि होना, स्थिरता, उत्पादन में परिवर्तन की जानकारी होना, अधिक लाभ की प्राप्ति होना तथा विशिष्टीकरण होने के लाभ प्राप्त होना। साथ ही उपभोक्ताओं को भी विज्ञापन से लाभ होता है, जैसे- ज्ञान में वृद्धि होना, वस्तुओं का चुनाव आसानी से होना, का मूल्य पर उत्तम किस्म की वस्तुओं की प्राप्ति, मूल्य की जानकारी होना, गुणवत्ता में सुधार होना, जीवन स्तर में सुधार होना, मध्यस्थों से छुटकारा होना इत्यादि। 

इसके अतिरिक्त मध्यस्थों के लिए भी विज्ञापन का महत्व या विभिन्न लाभ प्राप्त होते हैं, जैसे-बिक्री की सुविधा होना, बिक्री बढ़ने से अधिक रोजगार की प्राप्ति, विक्रेता को प्रेरणा, जोखिम का कम होना, विक्री और मूल्यों में स्थिरता होना इत्यादि समाज को

भी विज्ञापन से लाभ प्राप्त होते हैं। विज्ञापन के विभिन्न उद्देश्य और कार्य हैं। विज्ञापन का मुख्य उद्देश्य ग्राहकों और उत्पादकों के बीच सम्प्रेषण का होना है। लेकिन कुछ लोग विज्ञापन को अपव्यय मानते हैं। वे तर्क देते हैं कि विज्ञापन से खर्च में वृद्धि होती है। 

परिणामस्वरूप वस्तु का मूल्य बढ़ जाता है और ग्राहकों को महंगी वस्तुएँ प्राप्त होती हैं। विज्ञापन के विभिन्न साधन हैं, जैसे- समाचार पत्र, पत्र-पत्रिका, सिनेमा स्लाइड, पम्पलेट, विज्ञापन बोर्ड, प्रदर्शनी इत्यादि के माध्यम से विज्ञापन कार्य होता है। इसी प्रकार आजकल रेडियो और टेलीविजन द्वारा विज्ञापन का कार्य अधिक हो रहा है।

संवर्धन का अर्थ उत्पादन और सेवा के प्रति ग्राहकों की रुचि बढ़ाना होता है और उत्पादन के विषय में जानकारी देना होता है। विक्रय सम्वर्धन से व्यक्तिगत बिक्री और विज्ञापन के अतिरिक्त अन्य सभी बातें शामिल होती हैं। इससे उपभोक्ता प्रभावित होते हैं और मध्यस्थों तथा व्यापारियों का प्रभाव बढ़ता है। 

इसमें मुफ्त उपहार, नमूने, मेले, नुमाईश, प्रतिस्पर्द्धाएँ और प्रदर्शन शामिल हैं। वास्तव में, विक्रय संवर्धन का अर्थ वे सारे कदम उठाना है जो बिक्री बढ़ाने के लिए उठाए जाते हैं। बिक्री संवर्धन विभिन्न तरीकों से की जा सकती है। जैसे-बिक्री के समय कूपन देना, मुफ्त नमूने प्रदान करना, मूल्य कम करके बिक्री करना, मुफ्त सेवा और विशेष छूट की व्यवस्था करना, उपहार देना, मेले एवं प्रदर्शनी लगाना इत्यादि । 

विक्रयकला एक ऐसी कला है जिसमें विचार और उत्पाद उपभोक्ता के समक्ष रखे जाते हैं जिन्हें वह खरीदने के लिये तैयार हो जाता है। विक्रय कला के आधार पर उपभोक्ता का विश्वास जीतने का प्रयास किया जाता है। विक्रय कला के माध्यम से वस्तुओं की बिक्री में वृद्धि होती है जिससे व्यापारी को लाभ होता है। 

एक सफल विक्रेता के विभिन्न गुण होते हैं, जैसे

आकर्षक व्यक्तित्व, काम के प्रति जागरुकता, अच्छा व्यवहार, काम करने का लगन ईमानदार और परिश्रमी होना, अच्छा व्यवहार होना, धैर्य और आत्मविश्वास होना तथा दूरदर्शिता होना इत्यादि । का गुण

आजकल की परिस्थितियों में व्यक्तिगत बिक्री वस्तु की बिक्री बढ़ाने के लिये एक आवश्यक उपकरण होता है। इसमें बिक्री करने वाले और खरीददार के बीच व्यक्तिगत तौर पर सम्पर्क रहता है और आपस में बातचीत के माध्यम से खरीद-बिक्री का काम होता है। आजकल व्यापार के विकास के दृष्टिकोण से व्यक्तिगत बिक्री का बहुत अधिक महत्व है।

विक्रय सम्बर्द्धन और विज्ञापन दोनों ही बिक्री बढ़ाने का साधन है। फिर भी कुछ विशेष आधार पर इनमें अन्तर है। इस अन्तर के होने के बावजूद विक्रय सम्वर्द्धन और विज्ञापन कर मुख्य उद्देश्य बिक्री में वृद्धि करना है और अधिक से अधिक लाभ कमाना है जिससे कि व्यापार का विकास हो सके।


अति लघु उत्तरीय प्रश्न (VERY SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


1. विज्ञापन क्या है ?

Ans. विज्ञापन एक ऐसी विधि है जिसके अनुसार लोगों का ध्यान किसी वस्तु को ओर आकृष्ट करना है। लोग विज्ञापन पढ़ या सुनकर अपनी मनपसंद की वस्तुयें खरीदने के लिये तैयार हो जाते हैं। अतः विज्ञापन के द्वारा बिक्री में वृद्धि होती है।

2. उत्पादकों को प्राप्त होनेवाले विज्ञापन के दो लाभों को लिखें। 

Ans. उत्पादकों को विज्ञापन से प्राप्त होने वाले दो लाभ इस प्रकार हैं- 

(i) विक्री की मात्रा में वृद्धि – विज्ञापन द्वारा वस्तु की बिक्री की मात्रा में वृद्धि होती है क्योंकि लोग विज्ञापन से आकृष्ट होकर वस्तुओं को खरीदते हैं। 

(ii) माँग में वृद्धि – विज्ञापन से वस्तुओं की माँग में वृद्धि होती है क्योंकि विज्ञापन का मुख्य उद्देश्य विक्री बढ़ाने के लिये सही वातावरण उत्पन्न करना है। 

3. विज्ञापन से उपभोक्ता को होनेवाले दो लाभों को लिखें ।

Ans. विज्ञापन से उपभोक्ता को मिलनेवाले दो लाभ इस प्रकार हैं- 

(i) ज्ञान में वृद्धि – विज्ञापन के माध्यम से उपभोक्ताओं के ज्ञान में वृद्धि होती है क्योंकि वे विज्ञापन के आधार पर वस्तुओं के सम्बन्ध में भी आवश्यक जानकारी प्राप्त करते हैं।

(ii) कम दाम में उत्तम उत्पाद – विज्ञापन के माध्यम से माँग बढ़ती है, उत्पादन बढ़ता है। जिससे उत्पादक अपनी वस्तुओं को वाजिब मूल्य पर बेचते हैं। इसके कारण उपभोक्ताओं को कम मूल्य पर अच्छी वस्तु प्राप्त हो जाती हैं। 

4. विज्ञापन के दो उद्देश्यों को लिखें ।

Ans. विज्ञापन के दो उद्देश्य इस प्रकार हैं-

(i) नये उत्पादों की जानकारी विज्ञापन के माध्यम से लोगों को नये उत्पादों की जानकारी प्राप्त होती है। लोग विज्ञापन देखकर किसी नई वस्तु को खरीदने के लिये तैयार हो जाते हैं। 

(ii) माँग उत्पन्न होना — विज्ञापन के माध्यम से किसी विशेष वस्तु के सम्बन्ध में माँग उत्पन्न की जाती है। 

5. विज्ञापन के साधनों के नाम लिखें ।

Ans. विज्ञापन के विभिन्न साधन हैं जो ये हैं- 

(i) समाचार पत्र द्वारा विज्ञापन, (ii) पत्र-पत्रिकाओं द्वारा विज्ञापन, (ii) प्रसारण विज्ञापन, (iv) सिनेमा विज्ञापन, (v) विज्ञापन बोर्ड द्वारा विज्ञापन, (vi) सिनेमा स्लाइड द्वारा विज्ञापन, (vii) मेले प्रदर्शनी द्वारा विज्ञापन, (viii) पम्पलेट या हैण्डबिल द्वारा विज्ञापन एवं लाउडस्पीकर द्वारा विज्ञापन इत्यादि ।

6. संवर्धन क्या है ?

Ans. संवर्धन का अर्थ उत्पादन और सेवा के प्रति ग्राहक की रुचि बढ़ाना है और उत्पादन के विषय में जानकारी देना है।

7. विक्रय संवर्धन से आप क्या समझते हैं ?

Ans. विक्रय संवर्धन एक ऐसी क्रिया है जिसके आधार पर माल की बिक्री बढ़ाने का प्रयत्न किया जाता है। इसमें व्यक्तिगत बिक्री और विज्ञापन के अतिरिक्त सभी बातें शामिल हैं जिससे उपभोक्ता प्रभावित होते हैं और वे वस्तुओं को खरीदने के लिए तैयार हो जाते हैं। विक्रय संवर्धन मैं मुफ्त उपहार, वस्तु के नमूने, मेले, नुमाईश और प्रदर्शन शामिल हैं।

8. विक्रय कला का क्या अर्थ है ?

Ans. विक्रय कला एक ऐसी कला है जिसके आधार पर विक्रेता वस्तुओं की बिक्री करते हैं। इस कला के माध्यम से विक्रेता ग्राहकों को वस्तुएँ खरीदने के लिए तैयार कर लेते हैं। इसमें ग्राहकों का दिल और विश्वास जीता जाता है।


लघु उत्तरीय प्रश्न (SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


1. विक्रय संवर्द्धन की विभिन्न परिभाषा दें। (Define Sales Promotion.) 

Ans. विक्रय संवर्द्धन से अभिप्राय किसी ऐसी क्रिया, जोकि बिक्री बढ़ाने एवं ग्राहक के लिए माल का मूल्य बढ़ा सके। मूल्य सृजन, थोक अथवा खुदरा व्यापारियों को बट्टा देकर उनका लाभ बढ़ाता है। अतः विक्रय संवर्द्धन विशिष्ट क्रम को प्रत्यक्ष रूप से उत्साहित करता है। यदि उद्यमी थोक विक्रेताओं के माध्यम से बढ़ावा देता है तो उद्यमी को उसके लिए विक्रय संवर्द्धन

के प्रयास करने चाहिए, जिसके लिए उसे उपयुक्त वितरण प्रणाली का चयन करना पड़ता है। विक्रय संवर्द्धन की परिभाषाएँ (Definitions of Sale Promotion) अनेक लेखकों ने विक्रय संवर्द्धन की इस प्रकार परिभाषाएँ दी हैं-

(i) विलियम जे. स्टान्टन (William J. Stanton) के अनुसार, “विक्रय संवर्धन सूचना, सुझाव एवं प्रभावित करने का एक अभ्यास है।”

(ii) फिलिप कोटलर के अनुसार, “संवर्द्धन के अन्तर्गत विपणन मिश्रण के सभी यन्त्रों है जिनका प्रमुख उद्देश्य विश्वास प्रेषण है।”

(iii) अमरीकन विपणन परिषद् के शब्दों में, “व्यक्तिगत विक्रय, विज्ञापन एवं प्रसारण को छोड़ सभी विपणन क्रियाओं तथा प्रस्तुति-शो एवं प्रदर्शनी एवं अन्य विक्रय प्रयास जो साधारणतया न किए जाएँ जिनका उद्देश्य उपभोक्ता क्रय एवं दुकानदार प्रभाविकता को बढ़ावा देना हो, को विक्रय संवर्द्धन कहते हैं।”

उपरोक्त परिभाषाएँ संक्षिप्त करती हैं कि विक्रय एवं संवर्द्धन में सभी क्रियाएँ (विज्ञापन, व्यक्तिगत बिक्री एवं प्रसारण को छोड़) सम्मिलित हैं जिनका उद्देश्य विक्री की मात्रा बढ़ाना हो । विक्रय संवर्द्धन के मुख्य लक्षण निम्नलिखित हैं-

(i) विक्रय संवर्द्धन में विज्ञापन, व्यक्तिगत विक्रय एवं प्रसारण सम्मिलित नहीं हैं। 

(ii) विक्रय संवर्द्धन क्रियाएँ नियिमत क्रियाएँ नहीं हैं। यह बिल्कुल क्षणिक हैं और विशेष अवसरों जैसे, प्रदर्शन, निशुल्क नमूने आदि के द्वारा सम्पन्न की जाती है। 

(iii) यह विज्ञापन एवं व्यक्तिगत विक्रय को अधिक प्रभावी बनाती है।

(iv) विक्रय संवर्द्धन दुकानदारों, वितरकों एवं उपभोक्ताओं को प्रोत्साहित करता है।

2. विक्रय संवर्द्धन के उद्देश्यों को लिखें। (Write sown the objectives of sales promotion.)

Ans. विक्रय संवर्द्धन के प्रमुख उद्देश्य निम्नांकित हैं-

(i) किसी उत्पादन अथवा सेवा के सम्बन्ध में पूछताछ सृजित करना ।

(ii) निःशुल्क सैम्पल एवं अतिरिक्त सामान देकर उत्पाद प्रयास सुनिश्चित करना।

(iii) प्रोत्साहन, कूपन, विशेष बिक्री द्वारा ब्राण्ड वफादारी (Brand loyalty) विकसित करना।

(iv) नये ग्राहकों को फुटकर कूपन एवं प्रीमियम देकर उत्तेजित करना।

(v) फुटकर व्यापारियों को अधिक स्टाक रखने के लिए उन्हें अधिक रियायतें देकर प्रेरित

(vi) व्यापारियों को, बिक्री मुकाबलों, विशेष कैश एवं व्यापारिक बट्टे आदि के माध्यम से संवर्थी सहायता देना।

(vii) फुटकर व्यापारियों को माल के आगम निर्णयों को बढ़ावा देना।

(viii) उत्पादों को सशक्त बनाना एवं उनकी उपयोगिता बढ़ाना।

(ix) प्रतिद्वन्द्वी क्रियाओं को विकसित करना एवं नये माल प्रस्तुत करने से पूर्व, स्टॉक बिक्री अभियान (Clearance Stock Sale) चलाना एवं

(x) बिक्री को उत्साहित करना।

3. विज्ञापन क्या है ? इसकी विभिन्न परिभाषा दें। (What is advertisement ? Define advertisement.)

Ans. विज्ञापन किसी पहचानयुक्त प्रवर्तक द्वारा विचारों, माल अथवा सेवाओं की गैर-व्यक्ति प्रस्तुतीकरण अथवा संवर्द्धनात्मक स्वरूप है। विज्ञापन, उपभोक्ताओं को प्रस्तुत उत्पाद एवं प्रस्तुत सेवाओं के सम्बन्ध में तथा वस्तु निर्माता के विषय में भी तथ्य विज्ञापित करता है। इस प्रकार विज्ञापन सूचना को प्रसारित करता है। प्रस्तुत संदेश को विज्ञापन कहा जाता है।

आजकल के विपणन में, विज्ञापन व्यावसायिक विपणन क्रियाओं का अभिन्न अंग है। विज्ञापन के बिना आधुनिक संसार में किसी व्यवसाय की कल्पना करना असम्भव है। हालांकि विज्ञापन के स्वरूप व्यवसाय के अनुरूप भिन्न होता है।

अनेक विद्वानों द्वारा विज्ञापन को इस प्रकार परिभाषित किया गया है-

(i) व्हीलर (Wheller) के अनुसार, “विज्ञापन विचारों वस्तुओं अथवा सेवाओं का गैर-वैयक्तिक प्रदत्त स्वरूप है, ताकि लोग अधिक क्रय करें।”

(ii) रिकर्ड बिस्कर्क (Ricard Buskirk) के अनुसार, “विज्ञापन एक पहचाने हुए प्रवर्तक द्वारा विचारों, वस्तुओं अथवा सेवाओं के शुल्क सहित प्रस्तुति का स्वरूप है।”

(iii) सी. एल. बोलिंग (C.L. Bolling) के अनुसार, “विज्ञापन किसी वस्तु अथवा सेवा की माँग सृजित करने के कला के रूप में परिभाषित किया जा सकता है।”

उपरोक्त परिभाषाओं की विवेचना करने पर विज्ञापन की निम्नांकित विशेषताएँ उजागर होती हैं-

(i) यह वस्तुओं एवं सेवाओं अथवा विचारों की एक व्यक्तियों के समूह के प्रति गैर-प्रतिहै।

(ii) यह सभी व्यक्तियों के लिए कई संदेश दिये हैं।

(iii) संदेश वस्तु अथवा सेवाओं आदि की किस्म एवं उपयोगिता का होता है।

(iv) विज्ञापन सशुल्क एवं उत्तरदायी होता है।

(v) विज्ञापन के पीछे विज्ञापक के इरादे के अनुसार आचरण करने के लिए प्रतिबद्ध करना है।

4. विज्ञापन के उद्देश्यों का वर्णन करें । (Discuss the objects of advertisement.)

Ans. विज्ञापन के प्रमुख उद्देश्य निम्नांकित हैं-

(i) स्थिति की सूचना देना (To give Information regarding Existence) विज्ञापन का प्रथम उद्देश्य है ग्राहकों को एक विशिष्ट वस्तु को बाजार में लाने एवं उसके बाजार में उपलब्ध होने की सूचना देना।

(ii) माँग उत्पन्न करना (To create Demand ) — एक अन्य उद्देश्य नयी वस्तु की माँग उत्पन्न करने हेतु लोगों को इसके लिये आकर्षित करना है।

(iii) उत्पन्न माँग को बनाये रखना (To maintain to created demand)—उत्पन्न माँग को निरन्तर प्रचार के माध्यम से बनाये रखना विज्ञापन का अन्य उद्देश्य है।

(iv) माल के प्रयोग करने की शिक्षा देना (To instruct about the use of goods) विज्ञापन न केवल नयी वस्तुओं के सम्बन्ध में लोगों को सूचना देता है अपितु उन्हें उसके उपयोग करने की शिक्षा भी देता है।

(v) प्रतिस्पर्धा हटाना (To remove competition) विज्ञापन द्वारा प्रतिस्पर्धा हटाई जा सकती है। विज्ञापन की सहायता से विशेष वस्तु के गुणों का प्रचार मार्केट में प्रतिद्वन्द्वी वस्तुओं की तुलना में जानकारी देकर (अनावश्यक) प्रतिस्पर्धा दूर कर सकते हैं।

(vi) संशय एवं संकोच हटाना (To remove Doubts and Confusion ) एक वस्तु की लोकप्रियता बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि उस वस्तु के सम्बन्ध में संकोच व संशयों को दूर किया जाये, जिसके लिए विज्ञापन आवश्यक होता है।

(vii) उपभोक्ताओं को उत्साहित रखना (To encourage Consumers ) — विज्ञापन का अभिप्राय वर्तमान उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ाना है। साथ ही, उन्हें वस्तुओं के उपभोग से संतुष्ट कर प्रोत्साहित करना होता है।

(viii) विक्रेताओं को सहायता पहुँचाना (Help to Sellers) विज्ञापन उपभोक्ताओं को विज्ञापनकर्त्ता के निकट लाता है। इस प्रकार विज्ञापन विक्रेताओं के कार्य को सरल बनाता है।

(ix) सावधान करना (To make Caution) विज्ञापन का एक कार्य जनता एवं व्यवसायी को नशीली वस्तुओं एवं प्रतिस्थापकों से सावधान करना होता है।

(x) उन व्यक्तियों तक पहुँचना जिन्हें विक्रेता नहीं मिले (To reach the people whom salesman could not reach) विज्ञापन द्वारा दूरस्य स्थानों तक संदेश पहुँचाना है। इसके अतिरिक्त सूचना विस्तृत क्षेत्र तक प्रस्तावित की जा सकती है। इस प्रकार उन व्यक्तियों तक भी विज्ञापन द्वारा सूचना पहुँचाई जाती है जिनसे विक्रेता नहीं मिल सकता।

(xi) विज्ञापन की प्रतिष्ठा बढ़ाना (To Increase the goodwill of Advertiser) – विज्ञापन का एक उद्देश्य विज्ञापक की ख्याति बढ़ाना है। उदाहरण के तौर पर, “लिपटन का अर्थ अच्छी चाय”, ऐसा विज्ञापन जिसका उद्देश्य विज्ञापनकर्ता, लिपटन चाय कम्पनी की ख्याति बढ़ाना भी है।

(xii) उत्पादन एवं बिक्री लागत कम करना (To reduce the Production and Sales Cost ) —— विज्ञापन का एक उद्देश्य उत्पादन एवं विक्रय लागतों में कमी लाना है। यह इसलिए है क्योंकि विज्ञापन द्वारा माँग की मात्रा बढ़ती है जिसके फलस्वरूप वृहदाकार उत्पादन करने से प्रति इकाई उत्पादन लागत कम होती है।

(xiii) वस्तु का चयन करना सरल (To make the selection of Commodity Easy )- विज्ञापन वस्तुओं की उपयोगिताओं को स्पष्ट करता है जिससे उनकी उपयोगिताओं का तुलनात्मक अध्ययन कर, वस्तु विशेष का चयन सरल हो जाता है।

5. विज्ञापन के महत्त्व का वर्णन करें । (Discuss the importance of advertising.) 

Ans. विज्ञापन ग्राहकों का ज्ञान विस्तृत करता है। विज्ञापन की सहायता से उपभोक्ता बिना समय ये आवश्यक वस्तुएँ डकर कम करते हैं। इससे वस्तुओं की बिक्री तेजी से बढ़ती है। विज्ञापन के मुख्य लाभ निम्न प्रकार हैं-

(i) निर्माताओं को लाभ (Benefits to Manufacturers)— 

(a) यह उत्पाद के प्रति आकर्षण पैदा कर उनकी विक्रय मात्रा बढ़ाता है।

(b) नये उत्पादों को आसानी से बाजार में लाया जा सकता है।

(c) उत्पाद की छवि एवं प्रतिष्ठा बढ़ाते हैं।

(d) निर्माता एवं उपभोक्ता में प्रत्यक्ष सम्बन्ध स्थापित करता है।

(c) उत्पाद की माँग में वृद्धि होती है।

(D) यह एक उत्तरदायी बाजार निर्मित करता है।

(E) बिक्री की मात्रा में वृद्धि कर प्रति इकाई विक्रय लागत को कम करता है।

(F) कार्यकर्मियों एवं श्रमिकों की कार्यकुशलता बढ़ाने की प्रेरणा देता है। 

(i) उत्पादकों को प्रतिस्पर्धा का सामना करने में सहायता देता है।

(ii) धोक एवं फुटकर व्यापारियों को महत्त्व (Importance to Wholesaler and Retailers) 

(a) क्योंकि उपभोक्ता उत्पाद एवं उसकी किस्म को विज्ञापन द्वारा जानते हैं, विक्री आ हो जाती है।

(b) स्टॉक का आवर्तन बढ़ाते हैं।

(c) यह विक्रय क्रियाओं का पूरक है।

(d) फुटकर एवं थोक व्यापारियों को विज्ञापन की आवश्यकता नहीं होती क्योंकि उत्प उत्पादन का विज्ञापन करता है।

(e) इससे अधिक सस्ती विक्री होती है।

(f) इससे सभी को उत्पाद सूचना मिलती रहती है।

(iii) उपभोक्ताओं को महत्त्व (Importance to consumers) – (a) यह उपभोक्ता को कम कीमत पर उच्च किस्म का माल प्रदान करता है। (b) उत्पाद एवं उपभोक्ता में विज्ञापन प्रत्यक्ष सम्बन्ध स्थापित कर मध्यस्थ को निकालता है। (c) यह उनका माल कहाँ और कब उपलब्ध है, की जानकारी देता है।

(d) यह अमुक वस्तुओं एवं उत्पादों का तुलनात्मक अध्ययन करवाता है।

(e) वस्तुओं के नये प्रयोग की जानकारी देता है।

(iv) विक्रेताओं को महत्त्व (Importance to salesmen)—

(a) यह विक्रेता को अपना कार्य प्रभावी रूप से आरम्भ करने में सहायक सिद्ध होता है। (b) नये उत्पादों को सरल एवं सुविधाजनक तरीके से परिचित कराता है।

(c) विक्रेता द्वारा ग्राहकों से बनाये गए सम्बन्ध बने रहते हैं।

(v) समाज को महत्त्व (Importance to Society)— (a) विज्ञापन साधारण रूप से प्रकृति से शैक्षिक है।

(b) इससे उत्पादन वृहदाकार हो जाता है।

(c) यह अनन्त इच्छाओं एवं उनकी सन्तुष्टि कर लोगों का जीवन स्तर ऊँचा करता है।

(d) इससे रोजगार के अवसर बढ़ते हैं।

(c) यह देश की जीवन शैली की झलक प्रदान करता है।

(i) यह निर्माताओं के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का सृजन करता है। 

6. विज्ञापन के साधनों का वर्णन करें ।

Ans. विज्ञापन के दो माध्यम हैं- 

(i)घरेलू विज्ञापन साधन (Indoor Advertising Media) – यह उन संदेशवाहक से सम्बद्ध है जिनके द्वारा विज्ञापनकर्ता लक्ष्य समूहों के घरों तक संदेश पहुँचाते हैं। ये स निम्नलिखित हैं-

(a) समाचार पत्र विज्ञापन (Newspaper Advertising) 

(b) पत्रिकाएँ विज्ञापन (Magazine Advertising)

(c) रेडियो विज्ञापन (Radio Advertising)

(d) टेलीविजन विज्ञापन (Television Advertising)

(c) फिल्म विज्ञापन (Films Advertising)

(ii) बाह्य विज्ञापन माध्यम (Outdoor Advertising Media)—यह उन तकनीकों से जो ग्राहकों को तब सम्पर्क करता है जब वे घर के बाहर होते हैं। ऐसे माध्यम निम्न हैं- सम्ब

(a) पोस्टर विज्ञापन (Poster Advertising)

(b) प्रिण्ट विज्ञापन (Print Display Advertising)

(c) विद्युत् चित्र विज्ञापन (Electric Signs Advertising) 

(d) यात्रा निरूपण विज्ञापन (Travelling Display Advertising)

(e) आकाश लेखन विज्ञापन (Sky Writing Advertising).

7. विज्ञापन के माध्यम का चुनाव करते समय किन-किन बातों का ध्यान रखा जाता है ? 

Ans. विज्ञापन के माध्यम का चुनाव (Selection of Media ) – माध्यम चुनते समय “नीचे दी गई बातें ध्यान में रखी जानी चाहिए-

(i) विज्ञापन की लागत (Cost of Advertising ) महँगा विज्ञापन मालिक का लाभ कम कर देता है इसलिए यह उचित और कम लागत वाला होना चाहिए।

(ii) विज्ञापन की सरलता (Simplicity of Advertisement )— सरल विज्ञापन जल्दी समझ में आ जाते हैं। सिनेमा का विज्ञापन सादा है और सस्ता है।

(iii) तुलनात्मक विज्ञापन (Comparative Advertisement ) — विज्ञापन माध्यम चुन समय यह ध्यान में रखा जाए कि मुकाबले वाला उत्पादक किस माध्यम का प्रयोग कर रहा है। (iv) क्षेत्र (Scope)— यह बात ध्यान में रखी जानी चाहिए कि विज्ञापन कितने लोगों तक पहुँचेगा। स्थानीय होने पर स्थानीय समाचार-पत्र ही उत्तम रहते हैं। अगर क्षेत्र बड़ा हो तो रेडियो और टेलीविजन ठीक रहते हैं।

(v) शिक्षाप्रद (Educative) माध्यम ऐसा हो जो देखने वालों पर असर डाले।

8. क्या विज्ञापन फिजूलखर्ची है ?

Ans. हालांकि विज्ञापन के अनेकों लाभ होते हैं, फिर भी इसकी आलोचना होती है-

(i) विज्ञापन उत्पादनकारी नहीं होता (Advertising is not productive ) — यह सच है कि विज्ञापन से अधिक उत्पादन नहीं होता। इससे उत्पादन की लागत भी बढ़ जाती है।

(ii) विज्ञापन खरीदारी की इच्छा थोपता है (Advertisement forces the desire to buy)—यह सच है कि विज्ञापन उत्पादन खरीदने में रुचि जगाता है जबकि इसकी जरूरत नहीं होती।

(iii) आवश्यकताएँ बढ़ाता है (Multiplies the needs) यह बेकार ही लोगों की इच्छाएँ बढ़ाकर उनके बजट को बिगाड़ता है।

(iv) विज्ञापन से लागत बढ़ती है (Advertising Increases the Cost ) — विज्ञापन का खर्च उत्पादन की लागत में जुड़ जाता है। यह भार ग्राहकों को सहना पड़ता है।

(v) एकाधिकार (Monopoly ) विज्ञापन ब्राण्ड पर बल देता है। इससे उपभोक्ता एक ब्राण्ड का गुलाम बन जाता है। उत्पादक अधिक मूल्य माँगने लगता है। 

(vi) फिजूल खर्ची को बढ़ावा (Encourages Waste ) — लोगों को उत्पाद जल्दी खत्म करने को बाध्य किया जाता है क्योंकि नया उत्पाद शीघ्र ही बाजार में आने वाला है। अतः अनावश्यक उपभोग होता है। 

(vii) मिथ्या वर्णन (Misrepresentation)— अधिकतर विज्ञापन झूठे दावे करते हैं। इसलिए विज्ञापन का पूरा लाभ नहीं होता।

(viii) उपभोक्ताओं को घाटा (Consumer’s Deficit) कुछ लोग जिनकी आय कम होती है वह वस्तु को खरीद नहीं पाते हैं परन्तु विज्ञापन उन्हें ऐसा करने पर मजबूर करता है। इस कारण उन्हें पारिवारिक खर्च में कटौती करनी पड़ती है और विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ता है।


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (LONG ANSWER TYPE QUESTIONS)


1. विज्ञापन की परिभाषा देते हुए इसके महत्त्व को स्पष्ट कीजिए । (Define advertisement. Discuss its importance.) 

Ans. आधुनिक व्यापार या संसार में कोई भी व्यापार विज्ञापन के बिना जीवित नहीं रह सकता। विज्ञापन के महत्त्व से कोई इन्कार नहीं कर सकता। समस्या यह होती है कि विज्ञापन पर लगाए गए धन से आय कैसे बढ़ाई जाए। यदि विज्ञापन योजनाबद्ध तरीके से हो तभी पह प्रभावशाली होता है। इसे कैसे पूरा किया जाए और कैसे इसका मूल्यांकन किया जाए, यह जरूरी होता है। 

अतः विज्ञापन एक महत्वपूर्ण निर्णय होता है क्योंकि यह सारे विपणन तरीके को प्रभावि करता है और दर्शाता है। आजकल व्यापार संस्थानों में विज्ञापन एक आवश्यक अंग बन गया। है। अंग्रेजी शब्द Advertise यूनानी भाषा के शब्द Adverte यानी Add उधर और Verte अर्थात् वास्तव में मोड़ना। इसका अर्थ है लोगों का ध्यान किसी वस्तु विशेष की ओर मोड़ना। विज्ञापन की परिभाषा ( Definition of Advertisement) विज्ञापन की परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं-

विलियम जे. स्टेन्टन के अनुसार, “विज्ञापन में वे सभी गतिविधियाँ शामिल होती हैं जिनमें एक वर्ग को अव्यक्तिगत जबानी या दिखा कर खुल्लम खुला एक संदेश जो उत्पादन अथवा सेवाओं के विषय में होता है दिया जाता है।” (Advertising consists of all activities involved in presenting to a group a non-personal, oral or visual, openly spon- sored message regarding product, service or idea.)

रिचर्ड बसकिर्क के अनुसार, “किसी जाने पहचाने विज्ञापनकर्ता द्वारा पैसे देकर अव्यक्तिगत प्रस्तुति अथवा बढ़ावा जो विचार, उत्पाद या सेवा विषयक हो को विज्ञापन कहते हैं । ” (Advertising is a paid form of non-personal presentation or promotion of ideas goods or services by an identified sponsor.)

विज्ञापन का महत्त्व और लाभ (Importance and Benefits of Advertisement)— विज्ञापन से ग्राहकों का ज्ञान विस्तृत होता है और उपभोक्ता को बिना समय नष्ट किए आवश्यक उत्पाद मिल जाता है।

विज्ञापन से जिन्हें लाभ मिलता है वे इस प्रकार हैं- उत्पादक को लाभ (Benefits to Producers)

उसे निम्नलिखित लाभ होते हैं- 

(i) विक्रय मात्रा में वृद्धि (Increase in sales Volume) विज्ञापन से उत्पाद के प्रति आकर्षण बढ़ता है, जिससे बिक्री बढ़ती है।

(ii) नए उत्पाद का परिचय (Introduction to new products ) विज्ञापन से एक ही उत्पाद के नए उत्पादन का परिचय मण्डी में कराया जाता है।

(iii) उत्पाद की साख (Increase in Good Will) लगातार विज्ञापन से उत्पाद की साख में वृद्धि होती है। इससे निर्माणकर्ता को भी प्रसिद्धि मिलती है।

(iv) माँग बढ़ना (Creation of Demand ) — विज्ञापन का मुख्य उद्देश्य बिक्री बढ़ाने के लिए सही वातावरण पैदा करना होता है।

(v) प्रतिस्पर्धा का सामना करना (Facing Competition) कई बार विज्ञापन का प्रयोग लोगों को उत्पादन के बारे में बताने के लिए नहीं किया जाता बल्कि लोगों को दूसरे उत्पादन से हटा कर अपनी मांग बढ़ाने के लिए किया जाता है।

(vi) कुशल कर्मचारियों की उपलब्धि (Availability of Efficient Staff) विज्ञापन से कम्पनी के लिए सद्भावना बढ़ाना होता है। ऐसी कम्पनी में कुशल स्टाफ होता है।

(vii) मूल्य स्थिरता (Price Stability )– लगातार विज्ञापन से माँग बनी रहती है जिससे के मूल्य में स्थिरता आती है। उत्पाद

(viii) उत्पादन में परिवर्तन की जानकारी (Information of change in products) विज्ञापन उत्पाद द्वारा उपभोक्ता को उत्पादन के बदलाव, इसके मूल्य, गुण वृद्धि, माप वजन आदि के परिवर्तन की जानकारी देने के लिए किया जाता है।

(ix) अधिक लाभ (Higher Profits) विज्ञापन उत्पाद और सेवाओं के लिए माँग पैदा करता है, उसे बढ़ाता है और बनाए रखता है। इसलिए यह मालिकों की बिक्री और लाभ को बढ़ाता है।

(x) विशिष्टीकरण होने से लाभ (Benefits of specialisation) किसी भी उत्पादन लोकप्रिय बना कर विज्ञापन उत्पादन में विशेषता लाता है। को उपभोक्ता को लाभ/ महत्त्व (Importance/ Benefits to Consumers) यह निम्नलिखित होते हैं-

(i) ज्ञान में वृद्धि (Addition in knowledge)—इसका उपभोक्ता को यह लाभ है कि यह जानकारी देता है कि उत्पाद कहाँ, कब और किस दाम पर उपलब्ध है। इससे खरीदारी में उनका समय बचता है।

(ii) उत्पाद का चुनाव आसान (Easy selection of Product ) ग्राहक को इससे भिन्न-भिन्न मिलने वाले समान उत्पाद के गुण-अवगुण की तुलना करने का अवसर मिलता है जिससे वह सही निर्णय ले सके।

(iii) कम दाम में उत्तम उत्पाद (Best product at low cost ) इससे माँग बढ़ती है, उत्पादन बढ़ता है जिससे उत्पादक उत्पाद को कम लागत पर बेच सके।

(iv) जीवन स्तर में सुधार ( Improvement in standard of living) विज्ञापन नया विकसित उत्पाद देता है। अतः उचित मूल्य पर बढ़िया उत्पाद का उपयोग करने से ग्राहक के जीवन का स्तर सुधरता है।

(v) उत्पादनों की उपलब्धि आसान (Easy availability of Products) विज्ञापन से ग्राहक को उत्पाद तलाश करने में आसानी होती है क्योंकि उसे उसके गुण, मूल्य और प्राप्ति के स्थान का पता होता है।

(vi) मूल्य की जानकारी (Knowledge of price)- सामान्यतया विज्ञापन से उत्पाद के मूल्य का पता रहता है और ग्राहक ठगा नहीं जाता। (vii) गुणवत्ता में सुधार (Improvement in Quality)-अपने मुकाबले में दूसरे

उत्पादकों को हराने के लिए सभी उत्पादक अपने ग्राहकों का नया उन्नत प्रकार का उत्पाद देने का प्रयास करते हैं। वे मण्डी का अन्वेषण करते हैं और विकास करते हैं और प्रयास करते हैं कि ग्राहक को नए से नया उत्पाद मिले। 

(viii) कम दाम (Low Price) विज्ञापन से माँग बढ़ती है जिसके लिए उत्पादन बढ़ाना पड़ता है। फलस्वरूप मूल्य में कमी आती है।

(ix) मध्यस्थों से छुटकारा (Elimination of middlemen) विज्ञापन से उत्पाद की बिक्री सीधे ग्राहक को की जा सकती है और मध्यस्थों की जरूरत नहीं रहती। इससे भी ग्राहक को लाभ होता है।

(x) तुलनात्मक अध्ययन (Comparative Study) उपभोक्ता दामों की तुलना कर सकता है, गुणवत्ता, प्राप्ति स्थान की तुलना करता है और यह निर्णय ले सकता है कि कौन-सा उत्पाद उसके लिए उत्तम है।

मध्यस्थों के लिए विज्ञापन का महत्त्व (Importance to Middlemen) मध्यस्थों निम्नलिखित लाभ होते हैं-

(i) जीविका का स्थायी साधन (Permanent source of livelihood) विज्ञापन में उत्पादन की माँग में स्थिरता आती है। बिक्री बढ़ती है और अधिक लोगों को नौकरी

(ii) विक्री सुविधा (Convenient Sale) विज्ञापन से ग्राहक बनते हैं और विक्री स्वतः बढ़ती है। अतः बिचोलियों को इस बारे में चिंता नहीं करनी पड़ती। 

(iii) विक्रेता को प्रेरणा (Stimulation to sellers) इससे मध्यस्थों को हौसला मिलती है।

(iv) बिक्री बढ़ना (Increases Sales) बिक्री बढ़ने से मध्यस्थों को

(v) जोखिम कम होना (Reduction in Risk) विज्ञापन से बिक्री बढ़ने के कारण का स्टॉक करने, फैशन बदलने आदि की चिंता नहीं रहती। लाभ होता है।

(vi) बिक्री और मूल्यों में स्थिरता (Stability in sales and prices) विज्ञापन से मांग बढ़ती है और बनी रहती है। अतः विज्ञापन से स्थिरता आती है। इस तरह इससे बिक्री और कीमतों में स्थिरता आती है जिससे अधिकतम लाभ मध्यस्थों को होता है। समाज को लाभ (Importance to Society) विज्ञापन से समाज को निम्नलिखित लाभ होते हैं-

(i) अनेक लोगों को नौकरी-पेशेवर लोगों और कलाकारों को विज्ञापन से लाभ होता है। इससे वे जीविका कमाते हैं।

(ii) मध्यस्थों में कमी (Reduction in Middlemen) विज्ञापन से मध्यस्थ निकल जाते हैं और ग्राहक का उत्पादक से सीधा सम्पर्क हो जाता है। इससे समाज को लाभ होता है।

(ii) जीवन स्तर में विकास (Increase in standard of living)——इससे वस्तुओं के प्रति इच्छाएँ बढ़ती हैं और उनकी संतुष्टि होती है और जीवन का स्तर ऊँचा होता है।”

विंस्टन चर्चिल के अनुसार, “विज्ञापन से लोगों की उपभोग शक्ति को बल मिलता है। यह अच्छा जीवन जीने की चाह पैदा करता है।”

(iv) स्वस्थ प्रतिस्पर्धा (Healthy Competition ) विज्ञापन से भिन्न-भिन्न उत्पादकों में प्रतिस्पर्धा बढ़ती है। इससे व्यापार को लाभ होता है और अन्त में समाज को लाभ होता है। 

(v) समाचार-पत्रों की आय बढ़ती है (Increases the Income of News papers) – हाल ही में की गई जाँच के अनुसार समाचार पत्रों की 75% आय विज्ञापनों से और केवल 25% आय पाठकों से होती है। इससे समाचार-पत्र का प्रकाशन सस्ता हो जाता है।

(vi) सभ्यता का विकास (Development of Culture) सामान्य विज्ञापन शिक्षाप्रद होते हैं। अमेरिकन राष्ट्रपति रुजवेल्ट ने एक बार कहा था, “विज्ञापन अधिक से अधिक संख्या लोगों तक लाभदायक चीजों को ठीक ठीक जानकारी लाता है। यह मूल रूप में एक प्रकार में की शिक्षा होती है और शिक्षा पर सभ्यता की प्रगति निर्भर करती है।”

(vii) देश का आर्थिक विकास (Economic Development of the Country)—विज्ञापन किसी भी देश के जीवन का दर्शन कराता है। लोगों के रहन-सहन पर विज्ञापन लगातार चलने वाली टिप्पणी के समान होता है। नए उद्योगों में यह लाभकारी होता है। इसके उत्पादन की विज्ञापन के माध्यम से पहचान बनती है।

2. विज्ञापन के कार्य और उद्देश्यों का वर्णन कीजिए ।(Discuss the functions and objectives of advertisement.) 

Ans. इसका लक्ष्य केवल उत्पाद बेचना होता है। यह कोई उत्पादन, सेवा अथवा विचार हो सकता है। विज्ञापन का मुख्य उद्देश्य ग्राहकों और उत्पादकों के बीच संप्रेषण होता है। इसके निम्नलिखित लक्ष्य होते हैं-

(i) नए उत्पादों की जानकारी/परिचय (Introduction of New Products)—– किसी नए उत्पादन को बाजार में उतारने का विज्ञापन ही साधन होता है। नए उत्पादन का परिचय जरूरी होता है क्योंकि ग्राहकों ने उसे कभी प्रयोग में नहीं लिया है, और विज्ञापन उस उत्पाद का आधार’ तैयार करता है।

(ii) माँग पैदा करना (Creation of Demand ) — बिक्री बढ़ाने अथवा बनाए रखने के लिए अच्छा वातावरण तैयार करता है। उत्पाद के गुणों के बारे में जानकारी देकर विज्ञापन उस उत्पाद के लिए नए ग्राहक तैयार करता है और हो सकता है कि ग्राहक अपना व्राण्ड बदल लें।

(iii) मध्यस्थों को उत्पाद बेचने के लिए प्रेरित करना (To force Middlemen to Handle the Products) विज्ञापन से उत्पादन के ब्राण्ड की साख बढ़ती है और उसके प्रति वफादारी पैदा होती है। जब ग्राहक ब्राण्ड के प्रति वफादार हो जाते हैं, तो मध्यस्थों को बदलना पड़ता है और उन्हें उस ब्राण्ड का उत्पाद रखना पड़ता है, क्योंकि ग्राहक उस उत्पाद की माँग करने लगते हैं।

(iv) ग्राहकों को स्मरण करना (To Remind the customers ) — बार-बार किए गए विज्ञापन से ग्राहकों को ब्राण्ड चुनने की याद दिलाई जाती है और वे अपने पसंद का उत्पाद खरीदने लगते हैं। 

(v) सद्भावना या साख बनाना और बढ़ाना (Creation or enhancing good will बड़ी मात्रा में किए जाने वाला विज्ञापन का उद्देश्य विज्ञापनकर्ता कम्पनी के लिए सद्भावना बनाना और उसे बनाए रखना होता है।

(vi) परिवर्तन के बारे में जानकारी देना (To Inform about change)— विज्ञापन ग्राहकों को उत्पाद के मोल, वितरण स्रोत, माप और पैकिंग के बारे में जानकारी देते हैं। 

(vii) प्रतिस्पर्धा वाले विज्ञापनकर्ताओं को नकारना (To Neutralise competitors advertising)—अधिकतर विज्ञापन विक्री बढ़ाने के लिए नहीं बल्कि दूसरों के विज्ञापनों को निरस्त करने के लिए किए जाते हैं।

(viii) खरीद के लिए औचित्य (Rationalisation of Buying) कुछ लोग समझते हैं कि उपभोक्ता सूझ-बूझ वाले होते हैं। विज्ञापन उनकी सूझ-बूझ को बल देता है और वे विज्ञापन के आधार पर सोच समझ कर फैसला करते हैं।

3. विज्ञापन के अवगुणों का विवेचन करें । (Explain the demerits of advertisement.) 

Ans. विज्ञापन के अवगुण निम्नलिखित हैं-

(i) पैसा नष्ट होना (Wastage of Money)- विज्ञापन उपभोक्ता को वे वस्तुएँ खरीदने पर विवश कर देता है जिनकी उन्हें जरूरत नहीं होती। वे केवल ऐश्वर्य का साधन मात्र होती हैं। अतः उन पर खर्च किया गया धन नष्ट होता है।

(ii) विज्ञापन से दाम बढ़ते हैं (Advertisement Increases cost ) विज्ञापन का खर्च उपभोक्ता पर लादा जाता है।

(iii) एकाधिकार मूल्य (Monopoly prices) — गहन विज्ञापन उपभोक्ता को एक विशिष्ट वस्तु खरीदने पर विवश कर देता है। उत्पादक इसे भली-भाँति जानता है और वह अधिकाधिक कीमत माँगने लगता है।

(iv) भ्रमात्मक विज्ञापन (Misleading advertisement )—– अधिकतर विज्ञापन गलत और झूठे होते हैं। तथ्यों को अपने ढंग से पेश किया जाता है और ग्राहक उन्हें नहीं समझ पाता। (v) अश्लील विज्ञापन की हानि (Loss due to Obscenity) कुछ विज्ञापनों में यौन पक्ष दिया जाता है। ऐसे विज्ञापन जनता की भद्रता को प्रभावित करते हैं।

*(vi) अस्थिरता (Instability) कई बार विज्ञापन खरीददारी में रुचि जगाता है। दरअस ऐसी वस्तुओं की उपभोक्ता को जरूरत नहीं होती। 

(vii) सामाजिक बुराइयों की जड़ (Birth of Social Evils) ऐश्वर्य के साधनों से सामाजिक बुराइयों पनपती है। उदाहरणार्थ, एक शराब कम्पनी का विज्ञापन शराब पीने को सामाजिक प्रतिष्ठा से जोड़कर उसे पीने को प्रेरित करता है। लोग इसे सही समझ कर शराब

पीना शुरू कर देते हैं। यह फिजूल खर्चा होती है, स्वास्थ्य को हानि पहुँचाती है और घर को शान्ति को भंग करती है। 

(viii) एकाधिकार का तर्क (Monopoly Argument) विज्ञापन अपने ब्राण्ड को बढ़ावा देते हैं। इससे ग्राहक उस ग्राण्ड का दास बन जाता है। ऐसी हालत में उत्पादक अधिक मूल्य देने लगते हैं।

(ix) राष्ट्रीय संसाधनों की क्षति (Wastage of National Resources ) लोगों को उत्पादन को जल्दी से जल्दी उपभोग करने पर मजबूर किया जाता है, क्योंकि उनसे अच्छे उत्पादन • विकसित होकर जाने वाले होते हैं। फैशन बदल जाने पर स्टॉक में उत्पाद रखने वाले की हानि हो सकती है। उत्पादक और दुकानदार को भी हानि होगी। क्योंकि उत्पाद सस्ता बिकता है। इस प्रकार यह राष्ट्रीय संसाधन नष्ट होते हैं।

(x) निर्णय करने में कठिनाई (Difficulty in decision making) — कई बार उपभोक्ता तर्क संगत फैसला नहीं कर पाता। उदाहरणार्थ बाजार में कई प्रकार के टूथ पेस्ट हैं और सभी के मूल्य भी लगभग समान होते हैं। इनसे उपभोक्ता उलझन में पड़ जाता है कि क्या खरीदे।

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