NCERT Solutions Entrepreneurship Class 12 Chapter 14 Hindi Notes PDF

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Entrepreneurship Class 12 Chapter 14 Hindi Notes PDF, NCERT Solutions Entrepreneurship Class 12 Chapter 14 Hindi Notes PDF

Entrepreneurship Class 12 Chapter 14 Hindi Notes PDF

Class12th 
Chapter Nameजीविक / सहारा और विकास को बनाए रखना | MANAGING GROWTH AND SUSTENANCE
Chapter number14
Book NCERT
SubjectEntrepreneurship
Medium Hindi
Study MaterialsImportant questions answers
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जीविक / सहारा और विकास को बनाए रखना | MANAGING GROWTH AND SUSTENANCE

देश की अर्थव्यवस्था को सन्तुलित बनाए रखने के लिए देश में सतत् विकास की गति को बनाए रखना आवश्यक है। सतत् विकास से अर्थव्यवस्था में प्रगति होती है जिसका अनुकूल प्रभाव पड़ता है। सामान्य रूप से विकास का अर्थ संबंजित क्षेत्र में प्रगति को कायम रखना है। वाणिज्य-व्यवसाय, उद्योग-धन्धों की प्रगति के लिए सतत् विकास बहुत आवश्यक है। 

वृहत रूप में विकास का अर्थ संसाधनों की व्यवस्था को ठीक रखना है। साथ ही सतत् विकास का अर्थ प्रगति और विकास की गति को लगातार बनाए रखना है। अर्थव्यवस्था के समुचित विकास के लिए संसाधनों का समुचित प्रयोग होना अत्यन्त आवश्यक है। इससे देश में विकास की गि बढ़ती है और राष्ट्रीय आय में वृद्धि होती है। परिणामस्वरूप देश की अर्थव्यवस्था विकसित और सन्तुलित बनती है। 

भारत में विभिन्न प्रकार के बैंक पाए जाते हैं। इनमें रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया और व्यावसायिक बैंकों का महत्वपूर्ण स्थान है। भारत एक कृषि प्रधान देश होने के कारण और ग्रामीण क्षेत्रों की अधिकता के चलते क्षेत्रीय ग्रामीण बैंको का भी महत्वपूर्ण स्थान है। आर्थिक दृष्टि से पिछड़े क्षेत्रों के विकास के लिए बैंकिंग क्षेत्र के विकसित उद्योग-धन्धों को विकसित किया जा सकता है। रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया की नयी बैंकिंग नीति के अनुसार नयी बैंक की शाखाएँ केवल ग्रामीण क्षेत्रों में खोलने की व्यवस्था की गयी हैं। 

Entrepreneurship Class 12 Chapter 14 Hindi Notes PDF

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के द्वारा पिछड़े औद्योगिक क्षेत्रों का विकास संभव है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों की वित्तीय व्यवस्था में सुधार होता है। औद्योगिक वित्त सुलभ होने के कारण उद्योगों का विकास होता है। क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों का समुचित विकास होता है। विभिन्न तत्व विकास की गति को प्रभावित करते हैं। 

वास्तव में विकास के विभिन्न घटक या तत्व हैं, जैसे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रतियोगिता, तकनीक में परिवर्तन, उपभोक्ता की प्रकृति तथा वस्तुओं के उत्पादन करने की शक्ति और नवीन प्रवर्तन इत्यादि। इन सभी तत्वों का प्रभाव विकास पर पड़ता है।

भारत में अनेक प्रयासों के बाद भी क्षेत्रीय विकास की विषमता बनी हुयी है जो क्षेत्रीय नियोजन की असफलता को प्रकट करते हैं। हमारे देश में कुछ विकासशील क्षेत्रों में भी कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ पर बहुत गरीबी है। इसके विभिन्न कारण हैं, जैसे संसाधनों के हस्तांतरण पर रोक, स्वयं प्रयत्न की भावना की कमी तथा विशिष्ट विकास के क्षेत्र इत्यादि। 

इन सभी कारणों से विकास में असमानता रहती है। परिणामस्वरूप कुछ क्षेत्र में विकास की गति निरन्तर बनी रहती है जबकि कुछ क्षेत्र गरीब बने रहते हैं। इसका अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। साथ ही विस्तार का अर्थ है कि. एक विशेष उत्पाद को अन्य स्थानों पर भी अतिरिक्त मात्रा में बनाना है।

आज आधुनिकीकरण का युग है। व्यवसाय और उद्योग-धन्धों में आधुनिक तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। आजकल उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण की बात की जाती है। उदारीकरण के अनुसार नयी औद्योगिक नीति 1991 के अन्तर्गत साहसी कोई भी उद्योग स्थापित करके उत्पादन कार्य कर सकता है और लाभ कमा सकता है। निजीकरण के अन्तर्गत सरकार की ओर से उद्योग-धन्धों को निजी क्षेत्र में स्थापित करने की स्वतंत्रता दी गयी है। वैश्वीकरण की नीति के द्वारा भारतीय अर्थव्यवस्था में आमूल परिवर्तन करके उसे विश्वस्तर तक लाने का प्रयास भी किया गया है। 

1991 में तीसरी बार भारतीय रूपए का अवमूल्यन किया गया। साथ ही रुपए को परिवर्तनीय भी बनाया गया है। इससे भुगतान सन्तुलन सही रहता है और विदेशी विनियोग को सीधा प्रवेश मिल जाता है। साथ ही विश्व व्यापार संगठन के सदस्य देशों को भारतीय माल को खरीदने में कोई कठिनाई नहीं होती है। वैश्वीकरण के आधार पर भारत का विदेशी व्यापार बढ़ा है। जिससे हमारे देश में विदेशी मुद्रा की प्राप्ति होती है। आयात-निर्यात व्यापार का संचालन भी कुशलतापूर्वक होता है। 

विविधीकरण की नीति के अन्तर्गत विभिन्न प्रकार के माल को बनाने की नीति अपनायी गयी है। यह नए उत्पाद होते है जो पुराने उत्पाद से सबंधित नहीं होते हैं। विविधीकरण नयी तकनीक पर आधारित है। हमारे देश में इसका अनुकूल प्रभाव कम पड़ा है जबकि भारतीय कम्पनियों को इससे हानि अधिक हुयी है। कुछ भारतीय कम्पनियाँ विविधीकरण के नाम पर असफल रहे हैं। इसलिए इस असफलता से बचने के लिए प्रभावशाली कदम उठाना चाहिए।


अति लघु उत्तरीय प्रश्न (VERY SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


1. विकास से आप क्या समझते हैं ?

Ans. संसाधनों का समुचित उपयोग करके उद्योग-धन्धों और वाणिज्य-व्यवसाय में प्रगति लाना ही विकास कहलाता है। विकास के अन्तर्गत सभी संसाधनों का अनुकूलतम प्रयोग होता है।

2. सतत् विकास से आप क्या समझते हैं ?

Ans. व्यवसाय, उपक्रमों और उद्योग-धन्धों की प्रगति को निरन्तर बनाए रखना ही सतत् विकास कहलाता है। संसाधनों का पूर्ण उपयोग करके सतत् विकास की गति को बनाए रखा जाता है जिससे देश की अर्थव्यवस्था का समुचित विकास होता है। 

3. विकास को प्रभावित करने वाले विभिन्न तत्वों के नाम लिखें।

Ans. विकास को प्रभावित करने वाले विभिन्न तत्वों के नाम इस प्रकार है- (i) प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रतियोगिता (ii) तकनीक में परिवर्तन (iii) उपभोक्ता की प्रवृति (iv) उत्पादन करने की शक्ति तथा नवीन प्रवर्तन।

4. नवीन प्रवर्तन क्या है ?

Ans. यह एक ऐसी प्रक्रिया है जो किसी नए विचार को चलाता रहता है और यही विचार मूलरूप ही देता है। नवीन प्रवर्तन की प्रक्रिया से देश की अर्थव्यवस्था का विकास होता है।

5. उदारीकरण क्या है ?

Ans. उदारीकरण एक ऐसी नीति है जिसके अनुसार साहसी कोई भी उद्योग-धन्धे स्थापित कर सकता है। कोई उत्पाद बना सकता है और लाभ कमा सकता है। इस संबंध में सरकार उदार बनी रहती है और अपना हस्तक्षेप नहीं करती है।

6. निजीकरण क्या है ?

Ans. जब निजी क्षेत्र में उपक्रमों और उद्योगों को लगाया जाता है और उत्पादन कार्य किया जाता है तो इसे निजीकरण कहा जाता है। इसमें कोई भी उद्यमिता या उद्योगपति अपना निजी उद्योग लगा सकता है। ऐसे उद्योग सार्वजनिक क्षेत्र में नहीं होते हैं बल्कि निजी क्षेत्र में रहते हैं।

7. वैश्वीकरण क्या है?

Ans. वैश्वीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके अनुसार विश्व स्तर पर विभिन्न देशों का आपस में व्यापारिक और औद्योगिक संबंध बना रहता है। इसमें विश्वस्तर पर विभिन्न देश एक-दूसरे से निकट बने रहते हैं। इसमें विदेशी व्यापार अधिक होता है। विभिन्न देशों के बीच अन्तर्राष्ट्रीय व्यापारिक संबंध स्थापित रहता है। 

8. विविधीकरण का क्या अर्थ है ?

Ans. विविधीकरण का अर्थ है विभिन्न प्रकार के नए उत्पाद बनाना। उदाहरण के लिए टाटा समुदाय मुख्य रूप से लोहा एवं इस्पात उद्योग, रसायन, चाय, खाद, शक्ति, कपड़ा और ट्रक इत्यादि के लिए प्रसिद्ध था, लेकिन इस समुदाय ने अब नए क्षेत्रों में भी कदम रखा है, जैसे मोटरकार, कम्प्यूटर, गृह-निर्माण, वित्त और बीमा इत्यादि ।


लघु उत्तरीय प्रश्न (SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


1. विकास व्यूह-रचना का विवेचन कीजिए।

Ans. शब्द व्यूह-रचना दैनिक भाषा में साधारणतः प्रयोग किया जाता है। यह समझना तो आसान है परन्तु व्याख्या करना कठिन । सरल शब्दों में, व्यूह रचना एक नियोजित कार्यप्रणाली है जो किसी विशिष्ट उद्देश्य की प्राप्ति हेतु तैयार की जाती है। तदनुसार, विकास ब्यूह-रचना का अर्थ सोची हुई रणनीति, व्यावसायिक क्रियाओं का विस्तार करना है। 

अन्य शब्दों में, विकास व्यूह-रचना से तात्पर्य समय अन्तराल में उद्यम को बड़ा करने हेतु नियोजित ढंग से तैयार की गई योजना से है। व्यूह-रचना का उद्देश्य उच्चतर विकास प्राप्ति हेतु विकास यन्त्रावली अपनाना है। 

ऐसी यन्त्रावलियों में नए बाजार में प्रवेश करना, बाजार का ज्यादा हिस्सा पकड़ लेना, उन्नत उत्पाद के माध्यम से नए उत्पाद विकसित करना, नवीनतम प्रौद्योगिकी प्राप्त करना, श्रेष्ठतर साधन प्राप्त करना तथा प्रबन्ध में पेशे, वरीयता लागू करना आदि सम्मिलित है।

2. विकास का अर्थ क्या है ?

Ans. पिछड़े क्षेत्रों में औद्योगिक विकास की गति धीमी होने का प्रमुख कारण वहाँ संसाधनों की कमी होती है। पिछड़े क्षेत्रों के औद्योगिक क्षेत्रों में 1988 में विकास केन्द्रों की स्थापना की गयी परिणाम स्वरूप औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिला। इन विकास केन्द्रों का मुख्य कार्य संसाधनों की व्यवस्था को ठीक करना ही है। 

संसाधनों में पानी, बिजली, यातायात, कच्चा उत्पाद प्रशिक्षित श्रम पूर्ति तथा बैंकिंग सुविधाओं का विकास। 8 वीं योजना में ऐसे विकास केन्द्रों की संख्या 70 थी इन्हें विभिन्न प्रान्तों में बाँट दिया गया है। प्रत्येक केन्द्र के लिए 25 से 30 करोड़ रुपए का प्रावधान किया हैं, इस समय देश में ऐसे केन्द्र 64 हैं। 

बनने के 6 वर्ष के बाद केन्द्रों की बुरी वित्तीय दशा है, कुछ केन्द्रों के लिए जमीन भी खरीद ली गई तथा भवन भी बनने लगे परन्तु धन के अभाव के कारण कार्य अधूरे ही पड़े हैं।

इसी बीच एक नयी एकीकृत विकास योजना बनायी गयी जो तकनीकी वाद की सेवाएँ उद्योगों के स्थान (Location) तथा कृषि और उद्योगों में समन्वय बनाने का कार्य भी करेगी।

3. बैंकिंग नीति को स्पष्ट कीजिए।

Ans. आर्थिक दृष्टि से पिछड़े क्षेत्रों के विकास के लिए बैंकिंग क्षेत्र में विकसित धंधों को विकसित किया जा सकता है। R. B.I. की नयी बैंकिंग नीति के अनुसार नयी बैंक शाखाएँ केवल ग्रामीण क्षेत्रों में खोलने का प्रावधान है। वित्त व्यवस्था को ठीक करके ही पिछड़े औद्योगिक क्षेत्रों का विकास संभव है। क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक को यह प्राथमिकता दी गयी है। जिसके फलस्वरूप ग्रामीण क्षेत्रों की वित्त व्यवस्था ठीक हो जायेगी और औद्योगिक वित्त सुलभ होने के कारण उद्योगों का विकास होगा।

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के विकास (Rural Development Banks) के वित्त के प्रवाह को आर्थिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों के लिए जैसे- उड़ीसा, उत्तर प्रदेश तथा बिहार के विकास को बल मिला।

4. विस्तार का अर्थ समझायें ।

Ans. विकास और विस्तार दोनों का ही समान अर्थ होता है। विस्तार में केवल यही उत्पाद किसी अन्य स्थान पर अतिरिक्त मात्रा में बनाया जाय। उदाहरण के लिए सीमेन्ट का एक प्लान्ट कोटा में और दूसरा अलवर में लगा हो तो इसे सीमेन्ट का विस्तर कहा जायेगा।

5. असफलता को कैसे बचा सकते हैं? स्पष्ट करें।

Ans. असफलता को बचाने के लिए 10 (सेना अध्यक्ष) जैसे आदेश काफी लाभदायक है। जिनके अनुकरण से हानियों से बचा जा सकेगा जो इस प्रकार है-

(i) यदि आप बड़े नहीं है तो विविधीकरण न करें ।

(ii) यदि आप शक्तिशाली नहीं बनना चाहते हैं तो विविधकरण करने से अलग रहें।

(iii) आगे बढ़ने से पहले देखें

(iv) यदि संभव हो तो पहल करें

(v) यदि संभव हो तो नयी कम्पनी ही बनाएँ।

(vi) यह भी निश्चित कर लें कि क्या आपके पास विपणन योग्यता है ? 

(vii) अपनी सीमाओं और समझीतों को स्वीकार करने के लिए तैयार रहें।

(viii) यदि आप छोटे खिलाड़ी (व्यापारी) हैं तो छोटी ही महत्वाकांक्षा रखें।

(ix) कर बचाना ही आवश्यक नहीं है, नये क्षेत्रों में धावा बोलें।

(x) यह कोई शाप नहीं कि विविधीकरण नहीं किया है ?


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (LONG ANSWER TYPE QUESTIONS)


1.विकास को प्रभावित करने वाले घटकों का वर्णन कीजिए। (Discuss the Factors that influence Growth.)

Ans. बाजार के अभाव में कभी-कभी अच्छे उत्पाद भी चलन के बाहर हो जाते हैं। कम्पनी और निगमों का जन्म होता रहता है और पुरानों के सामने अनेक समस्याएँ आ जाती हैं। इसीलिए यह आवश्यक है कि उन घटकों पर ध्यान दिया जाय जो विकास के लिए आवश्यक हैं वे इस प्रकार हैं-

(i) प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रतियोगिता (Direct and Indirect Competition) – आज के प्रतियोगिता बाद में कोई एक ही फर्म नहीं होगी। एक कम्पनी जो वैसे ही उत्पाद बनाती है।

तो अन्य उस कम्पनी से प्रतियोगिता का सामना करना पड़ सकता है। उदाहरण के लिए बाजार में अनेक प्रकार के नहाने के साबुन हैं, प्रत्येक ब्रान्ड के निर्माता को बाजार में अपने पकड़ बढ़ाने के लिए अपने प्रतियोगी के ऊपर पकड़ बनाने का प्रयास करते रहना चाहिए। अप्रत्यक्ष प्रतियोगिता में विभिन्न प्रकार के सस्ते साबुन के प्रतिस्थापन ( Substitutes) करना तथा कपड़े के थैलों की जगह प्लास्टिक के थैले। विकास पर प्रतियोगिता का काफी प्रभाव पड़ता है।

(ii) तकनीक में परिवर्तन (Change in Technology)- पिछले कुछ दशकों में भारतीय किसान कृषि कार्य में पुराने ढंग के उपकरणों का उपयोग करके उत्पादन करते थे लेकिन अब भारतीय कृषक कृषि करने में आधुनिक औजारों का उपयोग कर रहे हैं। हरित क्रान्ति के बाद कृषि में पुराने हल के स्थान पर ट्रैक्टर का उपयोग करके कृषि उत्पादन बढ़ाया गया है।

औद्योगिक क्षेत्र में अनेक प्रकार के उपकरण तथा तकनीक में परिवर्तन के फलस्वरूप काफी उन्नति हुई। है। यदि कोई संगठन आधुनिक तकनीकी परिवर्तनों को नहीं अपनाता है तो संगठन चलन के बाहर (अप्रचलन) हो जायेगा और न ही उत्पादन की लागत को कम कर सकता है।

(iii) उपभोक्ता प्रवृत्ति (Consumer Trend) – एक उद्यम द्वारा लाभ कमाना बिक्री पर निर्भर करता है और ऐसा तभी संभव है जब उत्पाद ग्राहक की संतुष्टि करता हो। उपभोक्ता की पसंद के अनेक तत्व होते हैं जैसे-वस्तु का मूल्य, गुणवत्ता, ढंग, फैशन आदि एक सक्रिय संगठन उपभोक्ता की पसंद को काफी प्राथमिकता देता है।

उदाहरण के लिए जबसे ग्रामीण जवानों ने जीन्स और टी. आर्ट पहनना शुरू किया है तब से इनकी मांग काफी बढ़ी है। साथ ही प्रत्येक संगठन ने इन्हें बनाना शुरू कर दिया है। साथ ही बुजुगों की आवश्यकताओं में डॉक्टरी सुविधाओं की तरफ ध्यान देना आवश्यक है। 

लगातार विकास के लिए उपभोक्ता के साथ सम्पर्क अति आवश्यक होता है। दूसरा एक बहुत बड़ा तत्व जो उपभोक्ता की चयन शक्ति को प्रभावित करता है वह है उस उत्पाद की प्रभावशीलता, प्रमाणित गुणवत्ता तथा बिक्री के बाद की सेवाएँ । यह विशेषकर कार उद्योग- तथा उपभोग की लम्बी अवधि की वस्तुओं पर लागू होता है।

(iv) उत्पन्न करने की शक्ति तथा नवीन प्रवर्तन (Creativity and Innovation) : Creativity का अर्थ है कुछ नयापन यह कोई ब्रान्ड तभी वस्तु भी हो सकती है, नई वस्तु बनाने की प्रक्रिया भी हो सकती है तथा नया बाजार भी हो सकता है।

Creativity में वर्तमान उत्पाद में परिवर्तन भी आता है। नवीन प्रवर्तन ( Innovation) एक प्रक्रिया है जो किसी नये विचार को चलाता रहता है और यही विचार मूल रूप भी देता है। नया विचार तथा नई बनाने की प्रक्रिया ही विकास का नाम है। ऐसे संगठन ही सफल होते हैं जो इन दोनों विचार पर क्रियात्मक रूप से ध्यान देते हैं।

2. क्षेत्रीय नियोजन की असफलता का परीक्षण कीजिए । (Examine the Failure of Regional Planning.)

Ans. सरकार द्वारा अनेक प्रयासों के बाद भी क्षेत्रीय विकास की विषमता बनी हुई है। कुछ विकासशील प्रान्तों में भी कुछ क्षेत्र हैं जहाँ काफी गरीबी है इसके कारण ढूंढना कठिन नहीं है।

कुछ महत्वपूर्ण कारण इस प्रकार हैं- (i) संसाधन के हस्तांतरण पर रोक (Check on transfer of Resources) आर्थिक विषमता के लिए एक बड़ा कारण अमीर प्रान्तों द्वारा गरीब प्रान्तों के लिए केन्द्रीय सरकार की

सहायता पर रोक है। उदाहरण के लिए पंजाब और हरियाणा में प्रति व्यक्ति विकास खर्च बिहार

की तुलना में 2.5 गुना है। यही कारण है पंजाब और हरियाणा में औद्योगिक विकास अन्य प्रान्तों की तुलना में काफी अधिक है। (ii) स्वयं प्रयत्न की भावना की कमी (Lack of Spirit of self-effort )-गरीब प्रान्त

केन्द्रीय सरकार या प्रान्तीय सरकार की सहायता पर निर्भर रहने के आदि हो जाते हैं अपने प्रय नहीं करते हैं। पिछड़े प्रान्तों में ढीलेपन की प्रवृति हो जाती है और केन्द्रीय सरकार से अप न विकास के लिए विशेष पैकज की मांग करते रहते हैं। इसके अतिरिक्त पिछड़े प्रान्त अपने सीमि साधनों को बरबाद करते रहते हैं और विकास के प्रति उदासीन रहते हैं।

(iii) विकास के विशेष क्षेत्र (Special Areas of Development ) – अधिकांश क्षेत्र जहाँ विकास अधिक किया जाता है वे कुछ क्षेत्र होते हैं जैसे बाढ़ पीड़ित क्षेत्र, पहाड़ी क्षेत्र अनुसूचित और जन जाति क्षेत्र। पिछड़े क्षेत्रों में विकास की सम्भावना सदैव बनानी पड़ती है केवल प्रथम पंचवर्षीय योजना में इस तरह के विकास की ओर ध्यान ही नहीं दिया गया। केवल | 6th Plan में आर्थिक विषमता को दूर करने का प्रयास किया गया है।

3. आधुनिकीकरण से आप क्या समझते हैं ? यह आर्थिक विकास में कैसे उपयोगी होता है ? (What do you mean by modernisation. How it is useful to boost economic growth ?) 

Ans. तकनीक की कमजोर संगठन के आधुनिकीकरण और गुणवत्ता विकास का उद्देश्य निम्न के लिए होता है- 

(i) उत्पादकता सुधार (Improving Productivity)-उत्पादकता बढ़ाने से उत्पादन की प्रति इकाई लागत कम हो जाती है। कम लागत वाली वस्तु के विपणन में कठिनाई नहीं आती है।

(ii) कार्य में कुशलता (Efficiency in the Working) – आधुनिकीकरण का अर्थ यन्त्र की भाँति कार्य करना है। सभी थकाने वाले कार्य मशीन से होते हैं। मशीनों से किये गये कार्य में समय भी कम लगता है और कार्य की गुणवत्ता भी अच्छी होती है। अच्छी वस्तु के विपणन में भी कठिनाई नहीं आती है। 

(iii) लागत में कमी (Reduction in Cost)-मशीनों से उत्पादन करने लागत में कमी हो जाती है। सस्ती वस्तुएँ ग्राहक को काफी पसंद आती हैं। कम कीमत वाले सामान मध्यम आय वर्ग को काफी पसंद आते हैं। पर उत्पादों की

(iv) ऊंचे रहन सहन का स्तर (High Standard of living)- कम लागत का उत्पाद, गुणवत्ता उपभोक्ताओं के रहन सहन को अच्छा बना सकते हैं।

(v) अन्य क्षेत्र (Other areas ) – आधुनिकीकरण की आवश्यकता निम्न के लिए होती है- (1) उदारीकरण (2) निजीकरण (3) वैश्वीकरण तथा स्थायीकरण इन्हें नीचे विस्तार से समझाया जाता है

(1) उदारीकरण (Liberalisation) नई उद्योग नीति जो 1991 में शुरू की गई जिसके अनुसार साहसी कोई भी उद्योग शुरू कर सकता है। कोई उत्पाद बना सकता है, और कितना भी लाभ कमा सकता है। उदारीकरण उपाय निम्न के लिए है-

(i) केवल 13 उद्योगों को छोड़कर सभी प्रकार के उद्योगों से लाइसेंसिंग प्रउत्पादी समाप्त कर दी गई।

(ii) विदेशी पूँजी की सीमा 51% तक बढ़ा दी गई है।

(iii) संचार व्यवस्था (Telecommunication) निजी क्षेत्र के लिए खोल दी गई (विदेशी विनियोग भी दिया जा सकता है।)।

(iv) उधार देने की न्यूनतम सीमा 2 लाख रुपये को भी समाप्त कर दिया गया है। 

(v) व्यावसायिक क्षेत्र में S.L.R. को घटाकर 3.5% कर दिया गया है।

(vi) पूँजीगत आयातों का शुल्क घटाकर 15% कर दिया पूँजीगत आयातों को जिसे परियोजना के लिए हो उसे 25% कर दिया गया है।

(vii) मॉडवेट (Modvat) बढ़ाकर पूँजीगत उत्पाद तथा पेट्रोलियम पदार्थों तक किया गया।

(viii) कम्पनी करों में छूट।

(ix) 5 वर्ष तक कर मुक्त उन उद्योगों पर जिन्हें पिछड़े क्षेत्रों में लगाया जायेगा।

(x) उत्पादन करों में भारी सुधार

(xi) आयात शुल्कों में सुधार करना

(xii) रुपये को पूरी तरह से परिवर्तनीय बनाया गया

(xiii) CCI को समाप्त कर दिया और फेरा (Fera) को सरल बनाया गया

(xiv) निजी बैंक की स्थापना की गयी

(xv) शक्ति क्षेत्र में निजी विनियोग को आज्ञा

(xvi) 100% निर्यात करने वाली इकाइयों को निर्यात स्वीकृति (xvii) भुगतान संतुलन ठीक करने के लिए निर्यात बढ़ाने का प्रयास करना ।

उपर्युक्त और अन्य कुछ छूटे जिनको बड़े अधिकारियों के बंधन से मुक्त कर व्यापार क्षेत्र कैसे बढ़ाया जाय- नया उत्पाद कहाँ बेचा जाय आदि प्रश्नों पर विचार के लिए पर्याप्त समय बचेगा।

(2) निजीकरण (Privatisation) – उदारीकरण की दूसरी तख्ताबंदी में निजी क्षेत्र का विस्तार है, अब तक निजी क्षेत्र अनेक प्रशासनिक नियन्त्रण में कार्य करता रहा था। निजी क्षेत्र को बाजार में स्वतंत्र हिस्सा दिया गया। निजीकरण में मालिक और प्रबंध व्यावसायिक क्रियाओं। को करने के लिए काफी समय बचता है। सार्वजनिक क्षेत्र का पुनर्निर्माण करने के लिए निजीकरण को उदार बनाना ही होगा। सार्वजनिक क्षेत्र को 6 ही क्षेत्र दिये गए हैं पहले 17 क्षेत्र थे, धीरे धीरे इस क्षेत्र के अधिकार और क्षेत्र को काफी छोटा कर दिया गया है। 

सरकारी क्षेत्र के उद्योगों को सरकार धीरे-धीरे करके बेच रही है। ऐसा करने से वही सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम जिनमें करोड़ों रुपये की हानि हो रही थी लाभ कमा रहे हैं। निजीकरण के अंतिम चरण में विनियोग को बढ़ा कर 51% तक कर दिया गया है। ऐसा करने से निर्यात के अवसर बढ़ेंगे, विदेशी विनियोग भी बढ़ेगा।

3. वैश्वीकरण (Globalisation) – उदारीकरण का एक अन्य कदम वैश्वीकरण भी है। भारतीय अर्थव्यवस्था में आमुल परिवर्तन करके उसे विश्व स्तर तक लाने का प्रयास भी किया गया है। 1991 में तीसरी बार भारतीय रुपये का अवमूल्य (Devaluation) किया गया। साथ ही रुपये को पूरी तरह से परिवर्तनीय भी बनाया गया इससे भुगतान संतुलन ठीक होगा। विदेशी विनियोगों को सीधा प्रवेश (Direct entry) मिल जाता है। साथ ही W.T.O. के सदस्य देशों को भारतीय उत्पादों को खरीदने में कोई परेशानी नहीं होगी।

4. दृढ़ता (Stabilization ) – अर्थ दृढ़ता का केवल कीमतों में गिरावट है जो इस समय 14% से घटाकर 10 से नीचा लाता है। ऐसा करने के लिए राजकोषीय घाटे G.N.P. को 4% तक लाना होगा।

(ii) उत्पाद की पूर्ति सरल, सुगम बनाने के लिए P.D.S. (Public Distribution System) की सहायता ली जा सकती है।

(iii) आयात को उदार बनाना

(iv) अनावश्यक खर्चों पर रोक लगाना चाहिए।

(v) लाभदायकता को बढ़ावा देना।

सामान्य रूप से अर्थव्यवस्था काफी डराने वाले रूप में हो चुकी थी। पूंजीगत उद्योग भी बहुराष्ट्रीय निगमों से भयभीत होने की स्थिति में नहीं थे। उत्पादकता में प्रगति, उत्पाद तथा उत्पाद और सेवाओं की प्रतियोगिता झेलने की क्षमता में काफी शक्ति हो गयी थी जो अर्थ-व्यवस्था 40 वर्ष तक बंधी थी उसे नई आर्थिक नीति का कोई दबाब अनुभव नहीं हुआ। इसने अनेक खतरों को भी सहा। बड़े अच्छे ढंग से सभी समायोजन ठीक प्रकार से किये, प्रगति के रास्ते से कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। राजनैतिक दलों ने भी आर्थिक नीतियों का कभी विरोध और बदलाव की बात कभी नहीं की। 5. विविधीकरण (Diversification)- आज के व्यवसाय की विशेषता विविधीकरण है।

किसी भी मध्यम और बड़े व्यावसायिक गृहों के लिए कीन-कहाँ है की जानकारी चाहिए। उदाहरण के लिए टाटा समुदाय जो सबसे प्रमुख व्यवसाय गृह जाना जाता है लोहा और इस्पात, खाद, व्यावसायिक ट्रक, शक्ति, रसायन, चाय, कपड़ा आदि। इस समुदाय ने अब नये क्षेत्रों में भी कदम रखा है जैसे – मोटर कार, कम्पयूटर, गृह निर्माण, वित्त, और बीमा। ठीक ऐसा ही जे. के. समुदाय का हाल है। उसके विनियोग भी कपड़ा उद्योग, धातु, इन्जीयरिंग, कम्प्यूटर, कागज, प्लास्टिक, रसायन, टायर्स तथा ट्यूब्स, सौंदर्य के उत्पाद, सूखे सेल, वित्त और आयात-निर्यात आदि। कोई नया उत्पाद यदि ग्राहक मांग की सोचते हैं तो शीघ्र ही उसे टाटा और जे. के. समुदाय बाजार

में लेकर आ जाने की चेष्टा करते हैं। विविधीकरण का अर्थ है-विभिन्न प्रकार के उत्पाद बनाना, जिसमें नये उत्पाद ही होते हैं पुराने से संबंधित नहीं होते हैं।

विविधीकरण और उत्पाद संवृद्धि (Proliferation) प्रतियोगिता को सहन करने के उपाय हैं। भारतीय उदारीकरण को धन्यवाद, भारतीय कई कम्पनियों ने अपने पंख काफी फैला लिए हैं जिसके परिणाम भी काफी भयंकर होते हैं। कई बड़ी कम्पनियों के पंख जल गये हैं। जैसे -D.C.M, Brooke Bond, I.T.C., L&T, Indian Organic Chemicals, Nelco Ranboxy ऐसे उदाहरण हैं जो विविधीकरण के नाम पर असफल रहे हैं।

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