NCERT Solutions Entrepreneurship Class 12 Chapter 5 Hindi Notes PDF

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NCERT Solutions Entrepreneurship Class 12 Chapter 5 Hindi Notes PDF

Class12th 
Chapter Nameउद्यम नियोजन एवं स्रोत | Enterprise Planning and Resourcing
Chapter number05
Book NCERT
SubjectEntrepreneurship
Medium Hindi
Study MaterialsImportant questions answers
Download PDFव्यावसायिक अध्ययन 5 हिंदी माध्यम में 12 वीं नोट्स pdf

उद्यम नियोजन एवं स्रोत | Enterprise Planning and Resourcing


उद्यमी या साहसी साहस करके किसी भी व्यापार या उद्योग की स्थापना करता है। उसका उद्देश्य लाभ कमाना है और व्यवसाय या उद्योग में सफलता प्राप्त करना है। किसी भी व्यवसाय या उद्योग की स्थापना करते समय नियोजन बनाना पड़ता है जिसे योजना क्रिया कहा जाता है। 

किसी भी व्यवसाय की स्थापना करते समय योजना बनाते समय विभिन्न बातों पर साहसी ध्यान रखता है, जैसे—उत्पाद का चयन, व्यवसाय के स्वरूप का चयन, स्थान का चयन, पूँजी का प्रबंध कच्चे माल की व्यवस्था, उत्पादन तकनीक की व्यवस्था, शक्ति के साधनों की व्यवस्था, विपणन क्रियाओं की व्यवस्था, लाइसेंस प्राप्त करने की व्यवस्था तथा परियोजना की प्रतिवेदन को तैयार करना इत्यादि ।

NCERT Solutions Entrepreneurship Class 12 Chapter 5 Hindi Notes PDF

परियोजना प्रतिवेदन तैयार करना आवश्यक है। एक उद्यमी के लिए यह जानकारी प्राप्त करना भी आवश्यक है कि परियोजना प्रतिवेदन की विषय-सामग्री या तत्व का है और ये किस प्रकार व्यवसाय के लिए अनुकूल बन सकते हैं। 

एक परियोजना प्रतिवेदन के प्रमुख तत्व होते हैं, जैसे- प्रवर्तकों का विवरण, उपक्रम का विवरण, आर्थिक जीवन योग्यता, तकनीकी और वित्तीय सुविधाएँ, लाभदायकता विश्लेषण तथा संबंधित प्रपत्र इत्यादि ।

एक परियोजना प्रतिवेदन की विभिन्न विशेषताएँ होती हैं, जैसे-परियोजना के तकनीकी पहलू, बाजार की संभावनाएं व्यावसायिक इकाई का स्थान, मशीन और संयंत्र का विवरण, उपकरणों की जाँच, व्यवसाय की लाभदायकता, सीमान्त लागत बिंदु तथा परियोजना लागत इत्यादि।

परियोजना प्रतिवेदन के मार्गदर्शन में विभिन्न बातों का समावेश होना चाहिए, जैसे-प्रस्तावना तथा परियोजना प्रतिवेदन इत्यादि परियोजना प्रतिवेदन मूल्यांकन अंतिम स्वरूप होता है जिसे साहसी या उद्यमी बहुत-से तत्वों को समझने के बाद शुरू करता है, जैसे- वित्तीय और तकनीकी तत्व, प्रबंध और क्रियात्मक तत्व, व्यापारिक व्यवहार से संबंधित तत्व तथा कमजोर बिन्दुओं पर ध्यान देने की आवश्यकता इत्यादि परियोजना मूल्यांकन का प्रमुख उद्देश्य लाभदायकता के स्तर का पता लगाना है। 

उसके माध्यम से किसी उपक्रम की लागत और प्राप्त लाभ की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। परियोजना का विस्तृत मूल्यांकन विभिन्न पहलुओं के आधार पर की जा सकती है, जैसे—वित्तीय और तकनीकी मूल्यांकन, प्रबंधकीय और आर्थिक मूल्यांकन, उद्यम संबंधी मूल्यांकन तथा संगठन मूल्यांकन परियोजना का निर्माण सोच-समझ कर करने से उद्यम अपने उद्योग या व्यवसाय में सफल होता है।

किसी भी उपक्रम या उथम की स्थापना और उसके चलाने के लिए वित्त की व्यवस्था करन पड़ता है। इस संबंध में पर्याप्त पूँजी की व्यवस्था किया जाता है। क्योंकि उपक्रम का कारोबार स्वरूप से चलाने के लिए पूंजी का होना अत्यन्त आवश्यक है। 

वित्त और पूंजी का प्रबंध आर्थिक स्रोतों से की जा सकती है। आर्थिक स्रोत विभिन्न प्रकार के होते हैं, जैसे- भौतिक साधन तकनीकी साधन, वित्तीय साधन, मानव संसाधन और विपणन साधन ।

पूँजी प्रमुख रूप से दो प्रकार की होती है— स्थिर पूँजी तथा कार्यशील पूँजी। इन दोनों प्रकार की पूँजी के लक्षण अलग-अलग है। कुल जमा पूँजी से कोष का निर्माण होता है यह कोष व्यवसाय के कार्यों को करने के लिए बहुत उपयोगी होता है। परियोजना प्रतिवेदन उद्यमी के साथ-साथ वित्तीय संस्थाओं और सरकार सभी के लिए उपयोगी है।


अति लघु उत्तरीय प्रश्न (VERY SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


1. व्यावसायिक नियोजन की प्रमुख पाँच क्रियाओं को लिखें।

Ans. व्यावसायिक योजना बनाते समय उद्यमी जो पाँच क्रियाएँ पूरी करता है वे इस प्रकार हैं— (i) उत्पाद चयन, (ii) स्वामित्व चयन, (iii) पूँजी का प्रबंध, (iv) स्थान का चुनाव, (v) आवश्यक लाइसेंस की प्राप्ति ।

Q. 2. व्यावसायिक संगठन के तीन प्रमुख स्वरूप कौन-कौन हैं ?

Ans. व्यावसायिक संगठन के तीन प्रमुख स्वरूप इस प्रकार हैं- (i) एकाकी व्यापार, (ii) साझेदारी व्यवसाय, (iii) संयुक्त पूँजी कम्पनी।

Q. 3. एकाकी व्यापार क्या है ?

Ans. एकाकी व्यापार व्यावसायिक संगठन का एक ऐसा स्वरूप है जिसकी स्थापना एक ही व्यक्ति द्वारा पूँजी लगाकर की जाती है। एकाकी व्यापारी ही अपने व्यापार का अकेला मालिक होता है और वह अपने व्यवसाय का प्रबंध और संचालन करता है। वह स्वयं ही अपने व्यापार के लाभ-हानियों को ग्रहण करता है।

Q.4. साझेदारी क्या है ?

Ans. जब दो या दो से अधिक व्यक्ति आपस में मिलकर समझौता करके जिस व्यवसाय की स्थापना करते हैं उसे साझेदारी व्यवसाय कहा जाता है। यह व्यक्तियों का एक संघ है। साझेदार आपस में मिलकर ही व्यवसाय का संचालन करते हैं। वे आपस में मिलकर लाभालाभ अनुपात में लाभ-हानियों को बाँटते हैं।

Q.5. संयुक्त पूँजी कम्पनी क्या है ?

Ans. संयुक्त पूँजी कम्पनी विधान द्वारा निर्मित एक कृत्रिम व्यक्ति है जिसकी पूँजी अंशों के विभाजित रहती है। अंशधारी कम्पनी के सदस्य होते हैं। लेकिन कम्पनी का अस्तित्व अंशधारियों से अलग रहता है। कम्पनी अपने अंशधारियों के बीच लाभांश के वितरण करती है।

Q.6. परियोजना प्रतिवेदन के विभिन्न तत्व या अंग कौन-कौन से हैं ? 

Ans. परियोजना प्रतिवेदन के विभिन्न तत्व या अंग इस प्रकार है- (i) प्रवर्तकों का विवरण, (ii) उद्यम का विवरण, (iii) आर्थिक जीवन योग्यता, (iv) तकनीकी सुविधाएँ, (v) वित्तीय (vi) लाभदायकता विश्लेषण और (vii) संबंधित प्रपत्र इत्यादि ।

Q.7. परियोजना प्रतिवेदन की पाँच विशेषताएँ कौन-कौन हैं ? 

Ans. परियोजना प्रतिवेदन की पाँच विशेषताएँ इस प्रकार हैं- (1) बाजार की संभावनाएँ, (ii) परियोजना के तकनीकी पहलू, (iii) व्यावसायिक इकाई का स्थान, (iv) मशीन और संयंत्र, (v) उपकरणों की जाँच ।

Q.8. परियोजना प्रतिवेदन के मार्गदर्शन कौन-कौन हैं ?

Ans. एक सामान्य परियोजना के मार्गदर्शन में दो प्रमुख बातें होती हैं— (i) प्रस्तावना- इसमें भवन, कच्चे माल, पूँजी और संगठन का विवरण दिया जाता है। (ii) परियोजना प्रतिवेदन-इसके इकाई का नाम और पता, उत्पाद का नाम, शक्ति की आवश्यकता पूँजी की लागत, विक्री की साना तथा अनुमानित लाभ का विवरण दिया जाता है।

Q.9. परियोजना प्रतिवेदन के मूल्यांकन के विभिन्न घटक कौन-कौन हैं ?

Ans. परियोजना प्रतिवेदन के मूल्यांकन के विभिन्न घटक या तत्व इस प्रकार है- (i) तकनीक पटक, (i) वित्तीय घटक, (iii) व्यापारिक व्यवहार, (iv) प्रबंधकीय पटक (v) चालू करने के घटक, (vi) कमजोर बिन्दुओं पर ध्यान देना इत्यादि । 

Q.10. परियोजना मूल्यांकन के विभिन्न पहलू क्या है ?

Ans. परियोजना मूल्यांकन के विभिन्न पहलू ये है (1) तकनीकी मूल्यांकन, (ii) वित्तीय मूल्यांकन, (ii) आर्थिक मूल्यांकन (iv) प्रबंधकीय मूल्यांकन, (V) उद्यम संबंधी मूल्यांकन,(vi) संगठन मूल्यांकन | 

Q.11. आर्थिक स्रोतों के विभिन्न वर्ग कौन-कौन है?

Ans आर्थिक स्रोतों के विभिन्न वर्ग इस प्रकार है- (0) भौतिक साधन, (II) तकनीकी साधन, (iii) वित्तीय साधन (iv) मानव साधन (v) विपणन साधन। 

Q.12. स्थिर पूँजी क्या है ?

Ans. स्थिर पूँजी एक ऐसी पूंजी है जिससे भवन, फर्नीचर मशीन औजार तथा यातायात के सामन खरीदे जाते है जिन्हें लम्बी अवधि के लिए व्यवसाय में प्रयोग किया जाता है।

Q.13. कार्यशील पूंजी क्या है ?

Ans. कार्यशील पूंजी एक ऐसी पूँजी के जिससे कृष्णा माल को खरीदा जाता है और उत्पादन कार्य में होने वाले पथों को पूरा किया जाता है। यह व्यवसाय के कार्यों को करने के लिए प्रयोग में लाया जाता है। 

Q. 14. परियोजना प्रतिवेदन के क्या लाभ है ?

Ans. परियोजना प्रतिवेदन उपक्रम को सुचारू रूप से बताने के लिए बहुत आवश्यक है। इसके विभिन्न लाभ है, जैसे-यह उद्यमी के साथ-साथ वित्तीय संस्थाओं और सरकार के लिए लाभदायक होती है।

Q. 15. परियोजना मूल्यांकन की क्या कसौटी है ?

Ans. किसी भी उचित परियोजना की कसौटी के लिए विभिन्न तत्व सहायक हैं, जैसे- वित्तीय और तकनीकी तत्थ व्यावसायिक और प्रबंधकीय तत्व तथा परियोजना के कमजोर पर ध्यान देने से संबंधित सत्य इत्यादि।


लघु उत्तरीय प्रश्न (SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


1.व्यवसाय नियोजन क्या है ?

Ans. अर्थ एवं परिभाषा (Meaning and Definition)- नियोजन का अर्थ यह निर्धारित करना है कि क्या करना है, कैसे और कहाँ करना है, किसे करना है तथा परिणामों काय कैसे किया जा सकता है। नियोजन कार्य को करने से पूर्व विचार करने की प्रक्रिया

है। यह यक्ति परिणामों को प्राप्त करने के लिए कार्य विधि के निर्धारित करने की प्रक्रिया है। इसके माध्यम से संस्था के लिए मुख्य एवं निर्धारित होती हैं। इसकी परिभाषा विभिन्न विद्वानों नि निम्न प्रकार दी है

1. कीलोफ एवं अन्य के अनुसार व्यवसाय नियोजन प्रविवरण के रूप में भी जाना जाता है??

2. डेविड एच. डॉस्ट के अनुसार व्यवसाय नियोजन नये उपक्रम के लिए व्यापक निर्देशों कामू है”

सरल शब्दों में, व्यवसाय नियोजन एक लिखित विवरण है जिसमें यह लिखा होता है कि उद्यमी क्या करने जा रहा है। उद्यमी क्या तथा कैसे प्राप्त करना चाहता है, के सम्बन्ध में निर्देशन ही नियोजन है।

2. व्यवसाय नियोजन के उद्देश्यों का वर्णन करें ।

Ans. व्यवसाय नियोजन योजना बद्ध एवं लचीला होना चाहिए ताकि आवश्यकतानुसार उसमें परिवर्तन लाया जा सके। यह तभी संभव है जब प्रबन्धक व्यवसाय नियोजन तैयार करते समय दल के अन्य सदस्यों से विचार-विमर्श कर ले। व्यवसाय नियोजन के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं-

(i) कार्य का संचालन करने के लिए आधार की व्यवस्था करना तथा योजना में प्रत्येक भाग , लेने वाले के बीच उत्तरदायित्व का निर्धारण करना ।

(ii) नियोजन तैयार करने वाले दल के सदस्यों के बीच सम्प्रेषण एवं समन्वयन की व्यवस्था करना।

(iii) परियोजना में भाग लेने वालों को आगे (भविष्य) देखने के लिए प्रेरित करना। 

(iv) परियोजना में भाग लेने वालों को शीघ्र कार्य-निष्पादन के लिए जागरूक करना जिससे नियोजन का कार्य समय पर पूरा किया जा सके।

(v) परियोजना को लागू करने में उत्पन्न होने वाली अनिश्चितता को दूर करना।

(vi) संचालन की दक्षता में सुधार लाना।

(vii) परियोजना के सम्बन्ध में आवश्यक सूचना प्रदान करना।

(viii) उद्देश्यों को समझने की समुचित व्यवस्था करना।

(ix) कार्य की देख-रेख एवं नियंत्रित करने का आधार तैयार करना, आदि।

3. परियोजना प्रतिवेदन क्या है ?

Ans. अर्थ (Meaning)- उत्पाद एवं संगठन के निर्णय के पश्चात् उद्यमी को अपने विचारों एवं एकत्र की गई सूचनाओं को ठीक से जाँचना पड़ता है। इस कार्य को बहुत कुशलतापूर्वक करना चाहिए ताकि परियोजना से संबंधित समस्त सूचनाएँ प्राप्त की जा सकें। 

व्यवहार्यता अध्ययनों से प्राप्त विस्तृत सूचनाओं को तालिकाओं, विवरणों तथा प्रतिवेदन के रूप में प्रस्तुत किया जाता है तथा इन सभी को मिलाकर एक मॉस्टर प्रतिवेदन तैयार किया जाता है जिसे ‘परियोजना प्रतिवेदन’ कहते हैं। 

इस प्रतिवेदन में परियोजना से संबंधित, उद्योग एवं प्रतिवेदन जमा करने वाली उपक्रम के बारे में पृष्ठभूमि सूचना उपलब्ध होती है। प्रतिवेदन बनाने का मुख्य उद्देश्य परियोजना आकलन के लिए सूचना एकत्र होता है।

परियोजना प्रतिवेदन तैयारी में सूचनाओं को विभिन्न मदों में रखा जाता है। सभी आवश्यक दस्तावेजों, पूछताछों तथा उदाहरणों को दिए गए मदों में अन्य विस्तारों के साथ संलग्न कर परियोजना प्रतिवेदन तैयार किया जाता है। 

परियोजना प्रतिवेदन उद्यमी द्वारा स्वयं तैयार किया जाना चाहिए क्योंकि इससे न केवल धन की बचत होती है बल्कि साथ ही साथ शंकाओं का निवारण होता है तथा उद्यकी परियोजना की सफलता को लेकर सकारात्मक सोच विकसित करने में सक्षम होता है। हालांकि, एक विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार करने में इस क्षेत्र के जानेमाने सलाहकारों की सलाह ली जा सकती है।

4. नेटवर्क विश्लेषण की आवश्यकता का वर्णन करें ।

Ans. परियोजना के प्रभावशाली क्रियान्वयन के लिए नेटवर्क विश्लेषण एक महत्त्वपूर्ण तकनीक है। यह परियोजना के लिए विस्तृत कार्य योजना तथा समय-सारणी तैयार करने में काफी उपयोगी है। 

इसकी सहायता से प्रत्येक गतिविधि को परिभाषित किया जा सकता है तथा सभी गतिविधियों के बीच के आपसी संबंध का भी पता लगाया जा सकता है। साथ ही यह उन सभी घटनाओं के प्रवाह की पहचान भी करता है जिनका होना आवश्यक है ताकि परियोजना उन परिणामों को दिखा सके जिसके लिए उसकी स्थापना की गई है। इससे परियोजना के कार्य तत्वों

तथा उनके अनुक्रमिक संबंध की साफ तस्वीर भी उभरती है, जिसकी सहायता से परियोजना निर्माण दल विभिन्न परियोजना निवेशों की पहचान एवं परिमाणन करते हैं, ताकि परियोजना की वित्तीय एवं लागत लाभ रूपरेखा विकसित की जा सके अतः परियोजना की गतिविधियों के बीच अंतर संबंध होता है जो भौतिक, तकनीकी तथा अन्य कारकों की वजह से उत्पन्न होता है। परियोजना की गतिविधियों के उचित नियोजन,

सूचीकरण तथा नियंत्रण में नेटवर्क विश्लेषण काफी उपयोगी सिद्ध होता है। 

5. परियोजना आकलन के उद्देश्यों का वर्णन करें ।

Ans. परियोजन आकलन एक निर्धारित योजना के विश्लेषण का एक यंत्र है। यह परियोजना के अनुमावित लागत एवं लाभ का अनुमान है। यह एक सावधानीपूर्वक की गयी जाँच-पड़ताल है जो कार्य संचालन की देख-रेख एवं मूल्यांकन में सहायक होती है। 

परियोजना आकलन निम्नलिखित उद्देश्यों से किया जाता है- (i) परियोजना के विशेष एवं पूर्वानुमानित परिणाम पर पहुँचना, (ii) परियोजना की सफलता को निर्धारित करने हेतु आवश्यक सूचना प्राप्तकरना, (iii) परियोजना की अनुमानित लागत एवं लाभ को पहचानना । 

6. परियोजना श्रेणी सूचकांक क्या है ?

Ans. विभिन्न परियोजनाओं का मूल्यांकन करने के बाद कुछ परियोजनाओं को चुनाव हेतु अलग कर देना चाहिए। इस उद्देश्य से प्रारम्भिक जांच को परियोजना श्रेणी निर्धारण सूचकांक में परिवर्तित कर देना चाहिए। परियोजना श्रेणी निर्धारण सूचकांक का निर्धारण करते समय

निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखना आवश्यक है-

(i) परियोजना का मूल्यांकन करने हेतु सम्बन्धित कारकों को पहचानना।

(ii) इन कारकों का भार निर्धारित करना। भार इन कारकों के महत्व पर प्रकाश डालते हैं। 

(iii) समुचित श्रेणी निर्धारण का प्रयोग करते हुए परियोजनाओं की श्रेणी का निर्धारण करना चाहिए। इस उद्देश्य में सामान्यतया 

5 प्वाइट स्केल एवं 7 प्वाइंट स्केल प्रयुक्त होता है।

(iv) कारक श्रेणी का कारक भार से गुणा कर गुणनफल ज्ञात करना एवं (v) सभी गुणनफल का योग ज्ञात कर सभी परियोजना श्रेणी निर्धारण सूचकांक ज्ञात किया जा सकता है।

7. उपक्रम के प्रवर्तन अथवा विन्यास का वर्णन करें। 

Ans. एक उद्यमी वह है जो अपनी कल्पना को कार्यरूप में परिणत करे और वह कार्य व्यावसायिक उपक्रम के प्रवर्तन से सम्बन्धित हो। एक उद्यमी व्यावसायिक अवसरों को ढूंढत है, इसके भविष्य का विश्लेषण करता है, व्यावसायिक विचार का सृजन करता है एवं संसाधनों जैसे- श्रम, मशीन, सामग्री एवं प्रबन्धकीय कौशल आदि में गतिशीलता उत्पन्न कर नये उपक्रम की स्थापना करता है। अतः एक उद्यमी से प्रवर्तक के रूप में कार्य करने की आशा की जाती है। एक नये उपक्रम की स्थापना के सम्बन्ध में उसे साहसिक निर्णय लेने होते हैं। प्रवर्तक के प्रारम्भिक कार्य के

अभाव में नये उपक्रमों के अस्तित्व की कल्पना नहीं की जा सकती। जी. डब्ल्यू, गेस्टनबर्ग के अनुसार, “प्रवर्तन नये व्यवसाय के अवसरों की खोज के में परिभाषित किया जा सकता है और उसके बाद कोष, सम्पत्ति एवं प्रबन्धकीय क्षमता के

संगठित कर व्यवसाय में प्रयुक्त करना ताकि उनसे लाभार्जन हो सके।” इस प्रकार प्रवर्तक क आशय व्यवसाय अथवा उत्पाद के विचार का सृजन करना, व्यावसायिक अवसरों की खोज करना जाँच-पड़ताल, एकत्रीकरण, वित्तीय व्यवस्था एवं उपक्रम को एक गतिमान संस्था के रूप में प्रस्तुत करना आदि से है।

8. परियोजना प्रबन्ध क्या है ?

Ans. आधुनिक समय में परियोजना प्रबन्ध एक जटिल एवं तेजी से विकसित होने वाल धारणा एवं व्यवहार है। परियोजना प्रबन्ध को इस प्रकार परिभाषित किया जा सकता है परियोजन अबन्ध दिए गए समय एवं लागत में निश्चित परिणामों को प्राप्त करने के लिए प्रारम्भ से अंत तक योजना एवं निर्देशन की एक प्रक्रिया है।” इसलिए परियोजना प्रबन्ध आधुनिक समय की माँग है। 

अपने प्रस्तावित विनियोग से अच्छे परिणामों को प्राप्त करने के लिए उद्यमी को एक प्रभावशाली परियोजना प्रबन्ध का अनुसरण करना चाहिए। वास्तविकता में विनियोग की कुशलता दोनों समय एवं लागत व्यवहार के प्रभावशाली प्रबन्ध पर निर्भर करती है। किसी भी उद्यम की सफलता उसमें किए गए विनियोग से सफलतापूर्वक लाभों को बढ़ाने की क्षमता पर निर्भर करती है।

9. परियोजना प्रतिवेदन का मूल्यांकन पर संक्षेप में टिप्पणी लिखें ।

Ans. परियोजना प्रतिवेदन मूल्यांकन का अंतिम स्वरूप होता है जिसे उद्यमी बहुत से घटको समझने के बाद शुरू करता है जैसे-

(i) तकनीकी घटक (Technical Factors),

(ii) वित्तीय घटक (Financial Factors),

(iii) व्यापारिक व्यवहार (Commercial Fealings),

(iv) प्रबंधकीय घटक (Managerial Factors),

(v) चालू करने के घटक (Operational factors), (vi) कमजोर बिन्दुओं पर ध्यान देना (Due care to weak point)।

बैंक तथा वित्तीय संस्थाओं यह अध्ययन करते हैं कि संस्था के आर्थिक सहायता की आवश्यकता होगी अथवा नहीं। ये संस्थाएँ लाभ की प्रतिशत पूँजी विनियोग से अध्ययन करती जिन उद्योगों को अधिक पूंजी की आवश्यकता होती है उन्हें अधिक मात्रा में पूँजी वापस करनी है। होती है। परियोजना की सफलता अथवा असफलता तकनीकी विपणन तथा प्रबंध क्षमता घटकों से जुड़ी होती है।

10. परियोजना मूल्यांकन के उद्देश्यों का वर्णन कीजिए ।

Ans. परियोजना मूल्यांकन एक ऐसी तकनीक है जो यह स्पष्ट करती है कि लाभदायकता का स्तर कितना है? मुख्य उद्देश्य इस प्रकार हैं-

(i) परियोजना मूल्यांकन लागत और लाभ दिखाता है (Project Report is useful to forecast and profits.) 

(ii) परियोजना मूल्यांकन के द्वारा परियोजन की योग्यता का ज्ञान होता है। (It is useful to predict project viability and worthiness of project.) 

(iii) परियोजना मूल्यांकन उसकी सफलता तथा असफलता को स्पष्ट करता है (Project) Report is useful to highlight the success and failure.) 

(iv) परियोजना मूल्यांकन से पूंजी विनियोग पर प्रत्याय की जाय की जानकारी मिलती है।

(Project Report is useful to pinpoint the return on Capital Employed.)

(v) परियोजना मूल्यांकन द्वारा तकनीकी योग्यताओं तथा प्रबंध योग्यताओं का मूल्यांकन करने में सहायता मिलती है। (Project Report is useful to Evaluate technical and managerial abilities.)

(vi) परियोजना मूल्यांकन के शीघ्र कार्यवाही, कठिन सर्वेक्षण तथा शीघ्र अनुकरण संभव है। (Project Appraisal is useful of prompt action, close supervision and follow can be made easily.)

11. परियोजना मूल्यांकन के विभिन्न पहलू की समीक्षा करें।

Ans. परियोजना का विस्तृत मूल्यांकन निम्न के अध्ययन की सरलता से संभव हो सकता है।

(i) तकनीकी मूल्यांकन 

(ii) वित्तीय मूल्यांकन 

(iii) आर्थिक मूल्यांकन

(iv) प्रबंधकीय मूल्यांकन

(vi) संगठन मूल्यांकन

(v) उद्यम सम्बन्धी मूल्यांकन

एक बार परियोजना का चयन होने पर उसके चलाने की कार्य विधि शुरू हो जाती है आवश्यक सूचनाएँ निर्धारित फार्म पर भर कर बैंक को देनी होती है। छोटी परियोजनाओं की सूचनाएँ बड़ी परियोजना की तुलना में काफी कम होती है। 

बैंक तथा वित्तीय संस्थाओं का कार्य उचित मूल्यांकन तथा वित्तीय स्वीकृति के बाद समाप्त नहीं हो जाता वरन् शीघ्र कोपों का बँटवारा, कठोर नियंत्रण तथा संस्था को शुरू करते समय तथा बाद में भी अनुकरण आवश्यक है।

12. आर्थिक स्रोतों के वर्गों का वर्णन कीजिए ।

Ans. आर्थिक स्रोतों के निम्न वर्ग इस प्रकार हैं-

1. भौतिक साधन (Physical Resources) – इस वर्ग में भवन, कच्चे उत्पाद की पूर्ति देने वाले औजार, मशीनें और संयंत्र आदि।

2. तकनीकी साधन (Technical Resources)- इस श्रेणी में तकनीकी ज्ञान, डिजाइन, नमूने तथा तकनीकी प्रशिक्षण ।

3. वित्तीय साधन (Financial Resources) – भौतिक सम्पत्तियों के लिए बन, राकनीकी सुविधाएँ तथा साहसी की योग्यताएँ ।

4. मानव साधन (Human Resources) – इस वर्ग में श्रमिक तथा प्रबंधक आते हैं। 5. विपणन साधन (Marketing Resources) – व्यापारी (Dealer), थोक व्यापार (Wholesale Dealer), स्कन्धथारी, अभिकर्ता, विक्रयकर्ता, विपणन संगठन उपर्युक्त स्रोतों से किसी स्रोत का सहयोग लेने से पहले, यह उत्पादन कर लेना चाहिए कि उसकी आवश्यकता कितनी है?

13. स्रोतों/ कोषों का उपयोग के बारे में बतायें।

Ans. बिना मुद्रा के कोई भी प्रगति संभव नहीं है। कोषों का उपयोग निम्न के लिए किय जाता है- (i) स्थिर पूँजी (Fixed Capital)- स्थिर पूँजी वह मुद्रा है जिससे भवन, फर्नीचर,औजार तथा वाहन आदि खरीदे जाते हैं जिन्हें काफी लम्बी लवधि तक व्यवसाय में उपयोग कर होता है।

(ii) कार्यशील पूँजी (Working Capital) – यह वह मुद्रा है जिससे कच्चा उत्पाद, बनाने, विक्री के व्यय आदि के व्ययों के लिए आवश्यकता होती है।

स्थिर पूँजी तथा कार्यशील पूँजी दोनों का योग कुल कोष को बताता है जिससे व्यापार हु किया जाता है और जिसे निम्न स्रोतों से प्राप्त किया जा सकता है।

  • समता अंशों से (Equity Shares)
  • बाहरी लोगों से ऋण (Loan from outsiders)
  • जोखिम पूँजी (Risk Capital ऋण पत्र )
  • केन्द्रीय और प्रान्तीय सरकारों की सहायता (Grants from Centre and State Goverments) 

14. आदमी / कर्मचारीगण तथा उत्पाद के लिए वित्तीय स्रोत क्यों आवश्यक है।

Ans. प्रत्येक व्यवसाय काफी धन कर्मचारियों और सामान (Goods) के बदले मुख लिए चाहिए। कभी-कभी संगठन को चार्ट से कर्मचारियों की संख्या से ज्ञान प्राप्त हो है। निम्न कार्यों के लिए वित्त चाहिए-

  • पूरी व्यवसाय के लिए, (देखें व्यापार का प्रबंध कैसे हो रहा है)
  • क्रय-विक्रय के लिए।
  • निर्माणी व्ययों के लिए।
  • स्कंध के रख-रखाव के लिए।
  • विपणन तथा विज्ञापन
  • लेखा तथा वित्त के लिए
  • कर्मचारियों के वेतन आदि के लिए
  • कानूनी व्यय
  • जन कल्याण व्यय
  • उद्यम के स्वामित्व का निर्णय जो इस प्रकार हो सकता है-
  • एक व्यवसायी (Sole Trader)
  • साझेदारी फर्म (Partnership Firm )
  • कम्पनी (निजी और सार्वजनिक) (Company Private / Public)
  • सहकारी समितियाँ (Co-operative Society)
  • भवन के लिए वित्त (Resourcing for Premises)

ऐसे भवन को देखना चाहिए जो व्यवसाय के लिए उपयुक्त हो। यह भी देख लेना चाहिए। कि स्थान इतना हो जो आज और आगे होने वाले विस्तार के लिए भी पर्याप्त हो।

15. परियोजना मूल्यांकन के उद्देश्य क्या हैं ?

Ans. परियोजना मूल्यांकन एक ऐसा औजार है जिसमें उसकी रूपरेखा, उपयोगिता, सफलता और कमियों की झलक मिलती है। यह ऐसी गहन जाँच है जिसके द्वारा व्यवसाय की प्रगति की प्रत्येक चरण की जानकारी प्राप्त हो सकती है। इस प्रकार परियोजना मूल्यांकन जो वित्तीय संस्थाओं द्वारा की जाती है उसमें निम्न पहलुओं पर ध्यान दिया जाता है-

(i) परियोजना के विशिष्ट तथा भावी परिणाम 

(ii) वे विशिष्ट सूचनाएं जो किसी परियोजना की सफलता तथा असफलता से सम्बन्धित होती हैं।

(iii) वे प्रमाण जिनके द्वारा संगठन की सफलता तथा असफलता की प्रतिशत को जाना जा सकता है।

16. परियोजना मूल्यांकन के पहलू अथवा क्षेत्र क्या हैं ?

Ans. परियोजना मूल्यांकन में निम्नलिखित पहलुओं को भली-भांति समझाया जाता (i) तकनीकी मूल्यांकन, (ii) वित्तीय मूल्यांकन, (iii) प्रबंधकीय मूल्यांकन, (iv) क्रियात्मक मूल्यांकन, (v) संगठनात्मक मूल्यांकन ।

है—

यदि प्रथम द्रष्टया परियोजना मूल्यांकन संतोषजनक पाया जाता है तो उद्यमी को अपने अन्य आवश्यक विस्तृत जानकारी बैंक द्वारा निर्धारित प्रपत्र पर देने की सलाह दी जाती है। छोटे परियोजना वाले उद्यमी को बड़े परियोजना वाले उद्यमी की तुलना में कम सूचनाएँ देनी होती हैं।

17. लागू करने का चरण क्या है ?

Ans. इस चरण में औद्योगिक इकाई को शुरू करने की क्रिया होती है। इसके अन्तर्गत जमीन खरीदना, भवन बनाना, मशीन लगाना, आवश्यक लाइसेंस लेना और उपक्रम का पंजीकरण कराना आता है। लाइसेंस (Licences) उद्यमी को अनेक प्रकार के लाइसेंस लेने होते हैं कुछ इस प्रकार हैं-

(i) पोड़े समय का पंजीकरण (Provisional Registration) इसे जिला उद्योग केन्द्र से कराया जाता है।

(ii) कारखाना अधिनियम पंजीकरण (Registration under factory Act) 

(iii) प्रदूषण प्रमाण पत्र (Certificate of Pollution on Control Board) यदि कारखाना के कुछ बर्बाद पदार्थों से वातावरण प्रदूषित होगा तो ऐसी स्थिति में उसका हल प्रकारण सहित देना होगा। 

18. परियोजना प्रतिवेदन क्यों चाहिए ?

Ans. परियोजना प्रतिवेदन से निम्न की आवश्यक जानकारी मिलती है-

1. उद्यमी को उपयोगी (Useful to Entrepreneur) – वास्तव में परियोजना प्रतिवेदन स्पष्टीकरण का विचार है जो कागज पर दिया जाता है, ऐसा प्रपत्र है जिसमें किसी कार्य विशेष अच्छे बुरे सभी प्रभाव स्पष्ट किये जाते हैं। इसी के आधार पर उद्यमी व्यवसाय का निर्णय सेवा है।

2. वित्तीय प्रबंधकों/बैंक के लिए उपयोगी (Useful to Financial Institution and Bankers)- अधिकांश उद्यम (Enterprise) बैंक तथा वित्तीय संस्थाओं के वित्त से अपना कार्य करते हैं, अतः ये संस्थाएँ बिना परियोजना प्रतिवेदन को देखे वित्त प्रदान नहीं करते हैं।

3. सरकार के लिए उपयोगी (Useful to Government)- उद्यम शुरू करने के लिए अनेक औपचारिकताओं को पूरा करना होता है जैसे यदि आवश्यक है तो सरकार से लाइसेंस जितना तथा विभिन्न प्रपत्र को पूँजीकरण कराना तथा सरकार की स्वीकृति लेना आवश्यक होता है।

19. परियोजना प्रतिवेदन के उद्देश्यों का वर्णन करें । 

Ans. परियोजना प्रतिवेदन के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित है-

(i) विपणन, तकनीक, वित्त, कर्मचारी, उत्पादन उपभोक्ता संतोष तथा सामाजिक वृतिदान क्षेत्रों में अनुमानित प्रदर्शन पाने के लिए पूर्व में ही योजना तैयार करना।

(i) यह मूल्यांकन करना की संगठन के उद्देश्यों को किस सीमा तक पूरा किया गया है। इसके लिए उद्यमी से यह उम्मीद की जाती है यह निवेश सूचना को ध्यान में रखे इन सूचनाओं का विश्लेषण करें, परिणामों का अनुमान लगाए सबसे अच्छे विकल्प का चुनाव करे, आवश्यक कदम उठाए, परिणामों को अनुमानों के साथ तुलना करे।

(iii) उद्देश्यों के निर्धारण के लिए प्रयास करना तथा उन्हें परिमेय, मूर्त, सत्यापनीय तथ प्राप्य बनाना। उपकरण, वित्त, तकनीक आदि सम्मिलित है।

(iv) संसाधनों पर प्रतिबंध के प्रभावों का मूल्यांकन करना। 

(v) वित्तीय संसाधनों से वित्तीय सुविधा प्राप्त करना, जैसे कि इसके लिए सुव्यवस्थित प्रतिवेदन की आवश्यकता पड़ती है, जिसके आधार पर परियोजना के वित्त प्रबन्ध की वांछनीयत का मूल्यांकन किया जाता है।

(vi) परियोजना प्रतिवेदन में प्रस्तावित कार्य करने के तरीके का परीक्षण करना। प्रायः किसी भी परियोजना की सफलतापूर्वक क्रियान्वयन परियोजना प्रतिवेदन में दिए गए कार्य करने की विधि से नियंत्रित होती है।


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (LONG ANSWER TYPE QUESTIONS)


1. परियोजना के चरणों का वर्णन करें। (Discuss phases of project.)

Ans. एक परियोजना विभिन्न चरणों से होकर गुजरती है। हालांकि यह जरूरी नहीं है कि एक परियोजना निम्नांकित चरणों से होकर गुजरे। परियोजना के प्रमुख चरणों को नीचे बताया गया है-

1. संकल्पना चरण (Conception Phase)- परियोजना से धरण में संबंधित विचारों का सृजन इ किया जाता है। परियोजना की पहचान के पश्चात् उन्हें प्राथमिकता के आधार व्यवस् किया जाता है। प्राथमिकता के आधार पर ही परियोजनाओं का चुनाव एवं विकास किया जाता है। 

2. परिभाषा चरण (Definition Phase)- दूसरे चरण में प्रारम्भिक विश्लेषण किया जान चाहिए। इस विश्लेषण में मार्केटिंग, तकनीकी, वित्तीय तथा आर्थिक पहलुओं पर ध्यान दिया जाए है। इस विश्लेषण का उद्देश्य यह जानना होता है कि वित्तीय संस्थाओं तथा विनियोगकर्ताओं के लिए परियोजना कितनी आकर्षक है। इसके बाद परियोजनाओं की व्यवहार्यता जानने के लिए साध्यता अध्ययन किया जाता है। इस अध्ययन से गहन विश्लेषण के बाद एक अच्छी परियोजन

प्यार की जा सकती है। इसके परिणाम को साध्यता प्रतिवेदन के रूप में रखा जाता है। परिभाषा रण के बाद परियोजना कार्यान्वयन हेतु तैयार हो जाती है, परन्तु कार्यान्वयन से पहले मुख बजना बनायी जाती है।

3. योजना एवं संगठन का चरण (Planning and Organising Phase)- इस चरण परियोजना से संबंधित विभिन्न पहलुओं जैसे आधारभूत संरचना, अभियांत्रिकी अभिकल्पना, त्यक्रम, बजट, वित्त आदि से सम्बन्धित एक विस्तृत योजना बनायी जानी चाहिए। परियोजना संरचना का सृजन इस प्रकार से करना चाहिए ताकि वह संगठन मानव शक्ति, तकनीक, किया आदि से संबंधित हो या परियोजना इसको आसानी से लागू कर सके।

4. क्रियान्वयन चरण (Implementation Phase)- इस चरण में विस्तृत अभियांत्रिकी, उपकरण, मशीनरी सामग्री एवं निर्माण ठेके के संबंध में आदेश दिए जाते हैं। इसके पश्चात दीवानी एवं अन्य निर्माण कार्य किया जाता है। इसके अलावा प्लांट का पूर्व परीक्षण तथा परीक्षण जाँच किया जाता है। अतः कार्यान्वयन चरण सबसे महत्वपूर्ण चरण है जिस दौरान परियोजना को आकार मिलता है तथा उसे अस्तित्व में लाया जाता है।

5. अंतिम चरण (Clean up Phase)- इस चरण में परियोजना की आधारभूत संरचना की खोज दिया जाता है तथा मशीनों को संचालक श्रमिकों के हवाले कर दिया जाता है अर्थात् उत्पादन प्रारम्भ करने की तैयारी की जाती है।

उपर्युक्त विवरण के आधार पर यह स्पष्ट होता है कि परियोजना के मुख्यतः तीन धरण होते हैं, क्योंकि योजना एवं संगठन चरण तथा अंतिम चरण, क्रियान्वयन चरण के ही भाग है।

2. संसाधनों की सुविधाओं का परीक्षण कीजिए । (Why is the Project Report Required ?)

Ans. 1. भूमि एवं भवन (Land and Building)- बहुत से राज्यों में राज्य लघु उद्योग विकास निगम सभी सुविधाओं से युक्त विकसित भू-खण्ड जिसमें पानी आदि सभी सुविधाएँ

उपलब्ध होती है, उपलब्ध करते हैं। इसके आवंटन के दो तरीके प्रचलन में हैं 

(1) किराने पर 

(ii) नकद भुगतान पर सामान्यतः आयात-निर्यात आधारित कम्पनियों को प्राथमिकता दी जाती है।

निर्माण व्यय और निर्माता (Architect) द्वारा प्रमाणित निर्माण की रूपरेखा (Blueprint)) की छाया प्रति परियोजना प्रतिवेदन (Project Report) के साथ संलग्न करना चाहिए। 

2. संयंत्र और मशीनरी (Plant and Machinery) विभिन्न वित्तीय संस्थान संयंत्र और मशीनरी के लिए सावधि ऋण (Term Loan) की सुविधा उपलब्ध कराते हैं। इनमें प्रमुख राज्य औद्योगिक विकास निगम, राज्य वित्तीय निगम, राष्ट्रीय लघु उद्यग निगम, भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक तथा अन्य.

3. बिजली (Power) बिजली के दो तरह के उपभोक्ता है- (0) LT उपभोक्ता, (ii) HT उपभोक्ता। ये राज्यानुसार अलग-अलग होते हैं इसलिए इसकी अनुमति संबंधित राज्य बिजली बोर्ड के अधीक्षक से लेना होता है। एक दूरदर्शी उद्यमी संबंधित सहायक कार्यालय से 500 KW से ऊपर के लोड के लिए पंजीकृत हो जाता है।

4. पानी (Water)- जहाँ पानी की आपूर्ति उपलब्ध है वहाँ पानी के लिए आवेदन पत्र पानी आपूर्ति अभियांत्रिक के पास पानी आपूर्ति विभाग द्वारा अनुमोदित पलम्बर के माध्यम से देना होता है तथा जहाँ पानी की आपूर्ति नहीं होती यहाँ पानी नदी, कैनाल के द्वारा लाने के लिए अनुमति निगम, नगरपालिका या तालुका से सेना पड़ता है।

5. श्रमशक्ति (Man Power) – विभिन्न औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान प्रशिक्षित श्रमिकों की आपूर्ति करने के क्षेत्र में कार्यरत है। अगर उद्यमी को एक विशेष क्षेत्र का प्रशिक्षित श्रमिक की आवश्यकता है तो इसकी व्यवस्था उद्यमी को स्वयं करनी पड़ती है। 

6. संयंत्र का शुरू करना (Plant Commission)- यह किसी भी उद्योग को शुरू करने की अंतिम अवस्था है। इस अवस्था में औद्योगिक विकास के कार्य पर ध्यान दिया जाता है।

जैसे विकक्ति का प्रबंध, उत्पाद का बाजार से परिचय कराना, उत्पाद के बारे में उपभोक्ता की राय जानना आदि। 

3. एक उद्योग को शुरू करने से पहले किन सावधानियों की आवश्यकता होती है (What are various precautions that need care write launching an industry Or. व्यवसाय नियोजन का निर्माण करते समय किन-किन बातों पर ध्यान दिया जा है ? वर्णन कीजिए । (Discuss the various points taken at the time of a business planning.) 

Ans. जब किसी कटिन / जटिल वातावरण में जहाँ अधिकांश व्यक्ति बिना रोजगार के यहाँ उद्यमी के सामने धंधों को शुरू करने और उन्हें विकसित करने में अनेक चुनौती होती सबसे अच्छा निर्णय यही है कि ऐसे वातावरण में शुरू में छोटे-छोटे धंधे अथवा उद्योग जाय ऐसे व्यवसायों में व्यवसाय के सामान्य रूप से सभी क्रियाएँ जैसे स्वामित्व, नियंत्रण अप्रबंध सभी साहसी का स्वयं का ही होता है।

ऐसी स्थिति में साहसी छोटे उद्योग लगाने में सभी लेते है और उसके अनुरूप व्यापार की योजनाएं भी बनाते हैं। साहसी / उद्यमी अपनी योज (thoughts) को में बदल देता है उद्यमी की व्यवसाय योजनाएं क्रियाएँ इस प्रकार

1. उत्पाद चयन (Selection of Product)- एक उद्यमी अपनी इच्छा से अपनी उत्पा क्षमता को ध्यान में रखकर किसी भी नये उत्पाद / अथवा वर्तमान उत्पाद में सुधार करके चयन कर सकता है। उसे निम्न पर ध्यान देना चाहिए।

(i) स्थानीय / घरेलू बाजार मांग की मात्रा (Volume of existing demand in the local/domestic market)

(i) निर्यात की मात्रा (Volume of Export)

(iii) सभी बाजारों की कुल वर्तमान माँग (Volume of aggregate of existing demand in all markets) 

(iv) सम्भावित माँग की मात्रा (Volume of Potential demand)

(v) आयात प्रतिस्थापन का स्तर (Import substitution) 

(vi) वर्तमान उत्पाद की प्रतिस्थापन मात्रा (Degree of Substitution of an existin product)

(vii) बड़े उद्योगों की सहायक उत्पादों की मांग units for ancillary products) एजेन्सी, औद्योगिक गूढ सापकाइयों, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों जैसे LTL, HAL (The volume of demand by bir आवश्यक सूचनाएं उपर्युक्त से सम्बन्धित विभिन्न तकनीकी प्रकाशनों से जिन्हें राज्य विका BHEL, O.N.G.C. आदि, ये उत्पाद विकास तथा आवश्यक तकनीकी ज्ञान विदेशों से मंग है। कभी-कभी बाहर से भी विशेषतों की सेवाएं ली जाती है। बाजार सर्वेक्षण से भी का सूचनाएँ प्राप्त होती है।

2. स्वामित्व स्वरूप का चयन (Selection of firm of ownership)- व्यापार संगठन के निम्न स्वरूप होते हैं – (1) एकाकी व्यापारी (Sole Trader) (ii) साझेदारी फर्म (Partnershin Firms), (iii) हिन्दू संयुक्त परिवार व्यवसाय (Joint Hindu Family System), (iv) निज कम्पनी (Private Company), (V) सार्वजनिक लिमिटेड कम्पनी (Public Limited Company) | स्वामित्व के दृष्टिकोण से एकाकी तथा साझेदारी व्यवसाय का उपयोग अधिक किया जाता है। शेष सभी प्रकार के संगठनों के लिए काफी मात्रा में वित्तीय स्रोतों की आवश्यकता होती है।व्यवसाय के स्वस्य का चुनाव उसकी प्रकृति पर निर्भर होता है। 


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