NCERT Solutions Entrepreneurship Class 12 Chapter 9 Hindi Notes PDF

WhatsApp Group (Join Now) Join Now
Telegram Group (Join Now) Join Now

Entrepreneurship Class 12 Chapter 9 Hindi Notes PDF, Entrepreneurship Class 12 in Hindi, NCERT Solutions Entrepreneurship Class 12 Chapter 9 Hindi Notes PDF

Entrepreneurship Class 12 Chapter 9 Hindi Notes PDF

Class12th 
Chapter Nameमाल और सेवाओं का उत्पादन |  PRODUCTION OF GOODS AND SERVICES
Chapter number09
Book NCERT
SubjectEntrepreneurship
Medium Hindi
Study MaterialsImportant questions answers
Download PDFEntrepreneurship Class 12 Chapter 9 Hindi Notes PDF

माल और सेवाओं का उत्पादन |  PRODUCTION OF GOODS AND SERVICES

किसी भी निर्माणी संस्था या औद्योगिक संस्था में माल और सेवाओं का उत्पादन कार्य होता है। व्यासवसायिक उपक्रमों में उत्पादन कार्य का बहुत अधिक महत्व है। उत्पादन का अर्थ है माल और सेवाओं का निर्माण करना। उत्पादन कार्य के आधार पर किसी वस्तु का उत्पादन कार्य किया जाता है और उत्पादित वस्तु को बाजार में बेचकर लाभ के रूप में आय प्राप्त करना है।”

उत्पादन क्रिया बहुत कुशल और प्रभावशाली ढंग से करना चाहिए। तभी उत्पादन कार्य कुशलतापूर्वक किया जा सकता है और कम-से-कम लागत पर उच्च श्रेणी की वस्तुओं का उत्पादन किया जा सकता है। उत्पादन क्रिया के विभिन्न पहलू हैं, जैसे-निर्माण किया, सहायक क्रिया और सलाहकार क्रिया। इन सभी क्रियाओं को पूरा करते हुए उत्पादन क्रियाओं को संपादित किया जा सकता है।

NCERT Solutions Entrepreneurship Class 12 Chapter 9 Hindi Notes PDF

उत्पादन विभिन्न प्रकार के होते हैं, जैसे—कार्य उत्पादन, खेप उत्पादन और प्रवाह उत्पादन। कार्य उत्पादन के तरीके से विशिष्ट या मानक से भिन्न माल का उत्पादन किया जाता है जोकि ग्राहकों के आदेश के अनुसार होता है। खेप उत्पादन में एक ही प्रकार का माल बार-बार बनाया जाता है। 

यह ऐसा माल होता है जिसकी मात्रा की जानकारी पहले से ही होती है। यह वैसा माल होता है जहाँ एक ही प्रकार की माल खेप दर खेप ग्राहकों की माँग या अनुमानित माँग पर बनाया जाता है। प्रवाह उत्पादन में निश्चित स्तर का माल बड़ी मात्रा में लगातार बनाया जाता है। यह ग्राहकों की माँग को ध्यान में रखते हुए बनाया जाता है। निश्चित स्तर पर निर्धारण अनिवार्य होता है।

उत्पादन कार्य में भारत के निर्माण और सेवाओं की उपलब्धि संबंधी सभी गतिविधियाँ आती हैं। एक बड़ी संस्था के उत्पादन विभाग में विभिन्न काम होते हैं, जैसे—उत्पादन प्रशासन, उत्पादन प्रबंधन, उत्पादन डिजाइन और आनुवांशिक उत्पादन इत्यादि। इन सभी के आधार पर उत्पादन प्रबंधन का क्षेत्र निर्धारित रहता है।

उत्पादन योजना को बनाकर उत्पादन कार्य किया जाता है। उत्पादन योजना को विभिन्न बातें प्रभावित करती हैं, जैसे—माल की आपूर्ति, कार्य का समय निर्धारण, रख-रखाव, गुणवत्ता को निश्चित करना, पूरी कार्य- – क्षमता को कार्यरूप में लाना और बिक्री कर पूर्वानुमान लगाना। एक से अधिक उत्पादन के समूह को उत्पादन पंक्ति कहा जाता है। यह विभिन्न मण्डियों में समान आवश्यकताओं की पूर्ति करता है। 

बाजार में अधिक साझेदारी और बिक्री बढ़ाने के लिए मार्केट मैनेजर अपनी उत्पादन पंक्ति को विस्तृत करने का प्रयास करता रहता है। उत्पादन पंक्ति को प्रगतिशील विचार कहा जा सकता है। उत्पादन संचालन में उत्पादन नियंत्रण का महत्वपूर्ण स्थान है। साथ ही स्कंद का नियंत्रण होना भी जरूरी है। स्कंद का अर्थ है कच्चा या अर्द्ध-निर्मित माल। स्कंद एक ऐसी प्रणाली है जिससे उद्योग, उपक्रम, उत्पादन और माल की गतिविधि के बारे में प्रमुख निर्णय लेने में आसानी होती है। 

स्कंद की मात्रा अनुकूल रखना चाहिए। स्कंद नियंत्रण का बहुत अधिक महत्व है। इससे आर्थिक संसाधनों का पूर्ण उपयोग होता है और उत्पादन में रुकावट नहीं आती है। साथ ही हानियों से पूर्ण सुरक्षा प्राप्त की जाती है। उत्पादन का उचि मूल्य जानना आसान हो जाता है।

स्कंद नियंत्रण विभिन्न तरीकों से की जा सकती है, जैसे- मितव्ययी आदेश की मात्रा, गोदाम के माल का निर्धारण, दो स्थान पर माल रखने की प्रणाली, माल का लगातार लेखा कार्य करना और गोदाम में माल की गिनती समय-समय पर करते रहना इत्यादि ऐसे तरीके हैं जिसके आधार पर स्कंद नियंत्रण किया जा सकता है। 

सामान्य रूप से खरीदारी सामान, मशीनों, औजारों और उपकरणों का पैसा देकर प्राप्ति को कहते हैं। खरीदारी किसी भी कार्यशील संस्था में एक आधारभूत कर्म होती है। आधुनिक समय में खरीदारी का बहुत अधिक महत्व है। खरीदारी विभाग द्वारा क्या, कब, किस प्रकार, कितना, किससे और किस मूल्य पर खरीद करना है, इसका फैसला लिया जाता है। 

खरीद नीति तभी सफल होती है जब खरीद की अच्छे लक्षण उसमें पाए जाते हैं। गुणवत्ता नियंत्रण उपक्रम की सफलता के लिए आवश्यक है। गुण ग्राहक के लिए आवश्यक होते है। वह चाहता है कि कम-से-कम मूल्य पर उत्तम माल की प्राप्ति हो। इसलिए उद्यमी माल की गुणवत्ता के प्रति बहुत ध्यान रखता है। 

उत्पादन प्रबंधक विभिन्न कार्यों को करता है, जैसे—उत्पादन योजना बनाना, उत्पादन और गुणवत्ता नियंत्रण का कार्य करना, यंत्र और मशीन लगाना, उत्पादन तकनीक का विश्लेषण करना इत्यादि अच्छे संगठन से उपक्रम सफल होता है।


अति लघु उत्तरीय प्रश्न (VERY SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


1.उत्पादन का क्या अर्थ है ?

Ans. माल और सेवाओं का निर्माण करना ही उत्पादन कहलाता है। उत्पादन के अन्तर्गत वस्तुओं और सेवाओं का निर्माण होता है। जबकि अर्थशास्त्र के अनुसार किसी पदार्थ की उपयोगिता को बढ़ाना, उत्पादन कहलाता है।

2. उत्पादन क्रिया के तीन पहलू कौन-कौन हैं ? 

Ans. उत्पादन किया के तीन पहलू इस प्रकार हैं- (i) निर्माण क्रिया, (ii) सहायक क्रिया, (iii) सलाहकार किया।

3. उत्पादन के तीन रूप कौन-कौन हैं?

Ans. उत्पादन के तीन रूप इस प्रकार है- (1) कार्य उत्पादन, (ii) खेप उत्पादन, (iii) प्रवाह उत्पादन ।

4. उत्पादन योजना क्या है ?

Ans. उत्पादन के संबंध में योजना बनाना और इसके अनुसार उत्पादन कार्य करना ही उत्पादन योजना कहलाता है। उत्पादन प्रक्रिया के लिए उद्योग उपक्रमी गुणवत्ता, मात्रा, कच्चा माल इत्यादि के संबंध में उत्पादन योजना के अनुसार फैसला लेते हैं। उपक्रमी लक्ष्य प्राप्ति, औजारों के इस्तेमाल और कर्मचारियों के संबंध में निर्णय लेते हैं।

5. उत्पादन पंक्ति क्या है?

Ans. एक से अधिक उत्पादन के समूह को उत्पादन पंक्ति कहा जाता है। यह भिन्न मण्डियों में समान आवश्यकताओं की पूर्ति करता है या एक ही मण्डी में भिन्न लेकिन आपस में संबंधित आवश्यकताओं को पूरा करता है, जैसे—विभिन्न प्रकार का वाशिंग पाउडर एक उत्पादन पंक्ति है क्योंकि बाजार के कई हिस्सों में एक आवश्यकता पूरी करता है। उत्पादन पंक्ति को प्रगतिशील विचार कहा जाता है।

6. स्कंद नियंत्रण से आप क्या समझते हैं?

Ans. स्कंद नियंत्रण उस प्रणाली को कहा जाता है जो उत्पादन के उपयुक्त समय उचित मूल्य पर आवश्यकता के अनुसार तालिकाएँ उपलब्ध कराता है। प्रबंधकों को यह सुनिश्चित करना है कि स्कंद की मात्रा न तो बहुत कम हो जिससे उत्पादन पर बुरा प्रभाव पड़े और न ही इतनी अधिक हो कि पूँजी ब्लॉक हो जाए।

7. ABC विश्लेषण क्या है?

Ans. विभिन्न वर्गों में माल का विश्लेषण ही ABC विश्लेषण कहलाता है। माल पर नियंत्रण की ABC तकनीक को सदा उत्तम नियंत्रण तरीका माना जाता है। A श्रेणी में अधिक उपयोग पाली वस्तुओं को रखा जाता है। जबकि B श्रेणी में मध्यम उपयोग वाली वस्तुओं को रखा जाता है और C श्रेणी में कम उपयोग वाली वस्तुओं को रखा जाता है। 121

8. अच्छे संगठन का क्या योगदान है?

Ans. व्यावसायिक उपक्रम की सफलता अच्छे संगठन पर निर्भर करती है। अच्छा संगठन का योजना बहुत अधिक है। क्योंकि इसके माध्यम से बर्बादी को रोका जाता है और उत्पादन को सुचारु रूप दिया जाता है। अच्छे संगठन के द्वारा माँग और पूर्ति में संतुलन बनाए रखा जाता है। अच्छे संगठन होने से उपक्रम का प्रबंध और संचालन कुशलतापूर्वक होता है।


लघु उत्तरीय प्रश्न (SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


1. उत्पादन का क्या अर्थ है? Or, उत्पादन से आप क्या समझते हैं?

Ans. उत्पादन का अर्थ है माल और सेवाओं का निर्माण। कच्चे माल, मजदूरी, यन्त्र, व्यक्ति और धन के निवेश को कुछ उत्पादन क्रियाओं के द्वारा माल और सेवाओं में बदलना ही इसका काम है। किसी भी संगठन में उत्पादन सबसे महत्वपूर्ण होता है और क्रय-विक्रय, पूँजी निवेश, खरीदना और कर्मचारी आदि सभी इसी के इर्द-गिर्द घूमते हैं। यह कहना अनुचित नहीं होगा कि उत्पादन किया बड़े कुशल और प्रभावशाली ढंग से की जानी चाहिए। तभी संगठनात्मक ध्येय की पूर्ति होगी।

विभागीय किस्म के संगठन में उत्पादन संचालन का ध्येय उत्पादन क्रिया ही होता है। किसी भी संगठन के उस भाग, जिसमें यथार्थ में कच्चे माल को तैयार माल में बदलने वाले भाग में उत्पादन संचालन उसे प्रभावशाली ढंग से योजनाबद्ध करने और उसका संचालन करने की प्रक्रिया बन जाता है। 

साधारणतया उत्पादन संचालन का सम्बन्ध कुछ प्रक्रियाओं के बारे में निर्णय लेने जिनका सम्बन्ध माल और सेवाओं के उत्पादन जिन्हें पूर्व निर्धारित ढंग से कम से कम लागत में करने से है ।

2. उत्पादन क्रिया के विभिन्न पहलू कौन-कौन हैं? 

Ans. उत्पादन क्रिया निम्नलिखित शीर्षकों के अन्तर्गत आते हैं-

(i) निर्माण क्रिया (Manufacturing Functions) — इसका सम्बन्ध माल के उत्पादन से या वस्तुओं के बनाने से होता है। फैक्ट्री कहाँ बनाई जाए, क्या डिजाईन हो, क्या नक्शा हो, किस प्रकार की वस्तुएँ बनाई जाएँ, खोज, उत्पादन का डिजाइन और विकास, सब इसी के अन्तर्गत आते हैं।

(ii) अनुषंगी (सहायक) क्रिया (Ancillary Activities) — उत्पादन के काम को समर्थन देना अथवा रास्ते से रुकावटें दूर करना इसमें आता है। उत्पादन की योजना, देखभाल, खरीददारी, गोदाम में रखा जाना और माल को काम में लाना भी इसी में आता है।

(iii) सलाहकार क्रिया (Advisory Functions) इससे उत्पादन क्रिया में सहायता मिलती है। काम को समझना, तरीके को समझना, कार्य प्रणाली सम्बन्धी खोज, निरीक्षण और गुणवत्ता नियंत्रण शामिल है।

3. उत्पादन पंक्ति क्या है ? इसके अर्थ को स्पष्ट कीजिए ।

Ans. उत्पादन उद्देश्यों का एक अंग यह है कि वे इस बात का निर्धारण करें कि संगठन में एक ही उत्पादन हो। एक से अधिक उत्पादन के समूह को उत्पादन पंक्ति कहते हैं। यह भिन्न मंडियों में समान आवश्यकताओं की पूर्ति करता है या फिर एक ही मंडी में भिन्न परन्तु आपस में सम्बन्धित आवश्यकताओं को पूरा करता है। उदाहरण-कई प्रकार का वाशिंग पाउडर एक उत्पादन पंक्ति है क्योंकि बाजार के कई भागों में एक आवश्यकता पूरी करता है। 

ऐसे ही श्रृंगार प्रसाधन भी एक उत्पादन पंक्ति है क्योंकि यह भिन्न-भिन्न परन्तु आपस में संबंधित एक ही वर्ग अर्थात् उच्च वर्ग की महिलाओं की आवश्यकता की पूर्ति करता है। प्रायः बाजार में अधिक साझेदारी और बिक्री बढ़ाने के लिए मार्केट मैनेजर अपनी उत्पादन पंक्ति को विस्तृत करने प्रयास करता रहता है। उत्पादन पंक्ति को प्रगतिशील (परिवर्तनशील) विचार कह सकते हैं क्योंकि एक उत्पादन |

अधिक समय तक नहीं टिका रह सकता। इसीलिए वर्तमान उत्पादन पंक्ति में परिवर्तन की आवश्यकता होती है। इसे निम्न प्रकार से बदला जाता है-

(i) उत्पादन का सायारीकरण (Simplification), (ii) विस्तार (Expansion), (iii) तरीका बदलना (Change Method), (iv) गुणात्मकता बदलना (Style Change)।

4. उत्पादन नियंत्रण का संक्षेप में विवेचन कीजिए ।

Ans. उत्पादन संचालन में उत्पादन नियंत्रण एक और महत्वपूर्ण तत्व है। इसके लिए निम्नलिखित बातें अनिवार्य है-

(i) उत्पादन योजना बनाना, (i) हार्डवेयर (यन्त्रादि) सॉफ्टवेयर और कर्मियों की उपलब्धि कराना, (iii) उत्पादन योजना की सभी को सूचना देना, (iv) उत्पादन की पूर्ति करना, (v) उत्पादन की भिन्न-भिन्न स्थितियों में सूचनाएँ एकत्रित करना ( समावेश करना) ।

उत्पादन प्रबन्धक के पास निम्नलिखित प्रकार की योजना होनी चाहिए- (i) उत्पादन का मार्ग निर्धारण, (ii) प्रत्येक मशीन की निश्चित क्षमता का निर्धारण

(iii) कार्य समय सारिणी – क्या, कब और किसके द्वारा किया जाना है। (iv) किस मशीन से कितना काम लेना है, (V) कच्चे माल की उपलब्धि निश्चित करना, (vi) उत्पादन की मात्रा और गोदाम पर निगाह रखना। एक उद्योग उपक्रमी को चाहिये कि सारी प्रक्रिया को प्रतिदिन विश्लेषण करता रहे जिससे बची हुई क्षमता, जहाँ भी हो, उसको काम में लाया जाए। 

5. माल की खरीद के लिए महत्वपूर्ण बातें कौन-कौन हैं ? स्पष्ट करें।

Ans. सही गुण, सही समय, सही मूल्य, सही मात्रा, सही स्रोत ये सभी माल की उपरोक्त उद्देश्यों की पूर्ति के लिए उद्यमी को निम्नलिखित बातें ध्यान में रखनी चाहिए। (i) विक्रेता और खरीदार के मधुर सम्बन्ध, (ii) खरीदारी के लिए पूरा ब्योरा, (iii) मण्डी भाव और भाव के उतार चढ़ाव का पूरा ज्ञान, (iv) माल का सही आंकलन, (v) आर्थिक आवश्यकता से निबटने की क्षमता, (vi) अच्छी साख और उधार का भरोसा, (vii) सप्लाई का अन्य स्रोत होना चाहिए, (viii) एक ही जगह से माल लेने की निर्भरता से बचना, (ix) गुणवत्ता के निर्धारित स्तर से नहीं हटना।


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (LONG ANSWER TYPE QUESTIONS)


1. उत्पादन के विभिन्न प्रकारों का वर्णन कीजिए ।(Discuss the different types of productions.) 

Ans. उत्पादन के अनेक प्रकार होते हैं। अपने उद्यम के लिए उत्पादन प्रबन्धक को सबसे ठीक तरीका चुनना पड़ेगा। तरीकाकीन-सा हो, इस बात पर बहुत निर्भर करता है कि उत्पादन क्या है और कितनी मात्रा में बनना है। उत्पादन के तरीकों का हम निम्न प्रकार से विभाजन कर सकते हैं।

(i) कार्य उत्पादन (Job Production) इस तरीके से विशिष्ट अथवा मानक से भिन्न माल का उत्पादन किया जाता है जोकि ग्राहकों के आदेशानुसार होता है। प्रत्येक उत्पादन स्तरी से माप और प्रकृति में भिन्न होता है। अतः इसके लिए भिन्न प्रकार का काम करना पड़ता है।

मशीनों और सामान को इस ढंग से लगाना पड़ता है जो उस काम के अनुरूप हो। कार्य विशेष के लिए रुक-रुक कर उत्पादन होता है क्योंकि ज्यों-ज्यों आदेश मिलता है तभी काम करना पड़ता है। इसमें माल, पुर्जे आदि को इकट्ठा करना पड़ता है जिससे एक चीज बनाई जा सके। जहाज निर्माण, बाँध निर्माण, पुल निर्माण, पुस्तक छपाई इसके उदाहरण हैं। तीसरा तरीका फैक्ट्री कैसे बनाई जाएगी, उसमें स्थिर सामान का मान चित्रण उचित होता है।

(ii) खेप उत्पादन (Batch Production)—खेप उत्पादन में एक ही प्रकार का माल बार-बार बनाया जाता है। यह ऐसा माल होता है जिसकी मात्रा पहले ही पता होती है। यह वह ‘माल होता है जहाँ एक ही प्रकार की चीजें खेप दर खेप ग्राहकों की माँग अथवा अनुमानित माँग पर बनाया जाता है। मात्रा के अतिरिक्त यह उत्पादन कार्य (Job) उत्पादन जैसा ही होता है। कार्य उत्पादन में एक ही वस्तु के निर्माण की बजाए इसमें एक ही बार माल की पूरी खेप बनाई जाती है। यह जरूरी नहीं है कि एक खेप का माल दूसरी खेप के माल जैसा ही हो।

(iii) प्रवाह उत्पादन (Flow Production) इस विधि में निश्चित स्तर का माल बड़ी मात्रा में लगातार बनाया जाता है। यह अपेक्षित माँग को ध्यान में रखते हुए बनाया जाता है। निश्चित स्तर निर्धारण इसमें अनिवार्य है। इसमें तरीका और माल भी निर्धारित होते हैं। माल को लगातार बनते रहने के लिए यन्त्रों (मशीनों) को तदनुरूप लगाया जाता है। प्रक्रिया अनुसार प्रबन्धन आवश्यक होता है। 

इसमें क्रमानुसार काम होता है। वस्तु निर्माणोपरान्त एक-एक कदम करके आगे चलती है। एक मशीन एक काम करेगी, दूसरी उससे अगला आदि निर्माण प्रक्रिया को कई भागों में बाँट दिया जाता है। एक काम पूरा होते ही अगले कार्य के लिए वस्तुएँ बढ़ती रहती हैं जब तक की ये पूरी तरह बन नहीं जाती। दो कार्यों के बीच रुकावट या समय विलम्ब नहीं आने दी जाती। काम प्रवाहित ढंग से चलता रहता है।

(iv) उत्पादन प्रबन्धन का क्षेत्र (Scope of Production Management ) उत्पादन कार्य में माल के निर्माण और सेवाओं की उपलब्धि संबंधी सभी गतिविधियाँ आती हैं। बड़े संस्थान के उत्पादन विभाग में निम्नलिखित चार काम होते हैं-

(a) उत्पादन प्रशासन (Production Administration ) किसी भी उद्यम में उत्पादन प्रक्रिया को योजनाबद्ध करना और काम का सही संचालन इसके अन्तर्गत आते हैं। साथ ही उत्पादन इन्जीनीयरिंग, उत्पादन योजना और उत्पादन नियंत्रण भी उसी में शामिल हैं।

(b) उत्पादन प्रबन्धन (Production Management) माल और सेवाओं के उत्पादन के सम्बन्ध में जैसे पहले कहा है, प्रबन्ध का सम्बन्ध माल, व्यक्तियों, तरीकों, मशीनों और धन से होता है। इससे उत्पादन संबंधी योजनाओं और नीतियों को व्यावहारिक आकार मिलता है। उत्पादन का सफल प्रबन्धन एक फोरमैन से लेकर कार्य प्रबन्धक तक इसी बात में होता है कि मानवीय प्रयास को नियमित और संगठित तरीके से किया जाए। उत्पादन के पर्यवेक्षणात्मक इनामी, कार्य क्षमता एवं नियंत्रण भी इसी का भाग है।

(c) उत्पादन डिजाइन (Production Design ) — इसका सम्बन्ध वस्तुओं का स्वरूप, ग्राहकों की आवश्यकतानुरूप होने से होता है। इसका सम्बन्ध आकलन (अनुमान) और दर निर्धारण से भी है जोकि खोज और विकास के लिए होते हैं।

(d) अनुषंगिक उत्पादन (Ancillary Production)— इसमें वे सभी गतिविधियाँ आती हैं जिनसे उत्पादन का मार्ग साफ हो और उसे समर्थन मिले। ये उत्पादन विषयक विशेष सेवाएँ होती हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण कच्चे माल और तैयार माल सम्बन्धी खरीदारी द्वारा उत्पादन प्रकिया में काम आने वाली क्रियाएँ होती हैं। अन्य अनुषंगिक सेवाएँ रख-रखाव, माल को प्रयोग करने, गोदाम में रखना, इन्जीनियरिंग सेवा तथा निरीक्षण कार्य होती हैं।

2. उत्पादन योजना क्या है? उत्पादन योजना को प्रभावित करने वाले तत्वों का कीजिए | (What is production plan? Discuss the factors affecting production plan and scheduling.)

Ans. उत्पादन योजना (Production plan ) उत्पादन प्रक्रिया के लिए उद्योग उपक्रम गुणवत्ता, मात्रा, कच्चा माल देने लेने सम्बन्धी फैसला करते हैं। वे लक्ष्य प्राप्ति औजारे (उपकरणों) के इस्तेमाल और कर्मियों सम्बन्धी भी निर्णय लेते हैं। उत्पादन योजना को प्रभावित करने वाली बातें (Factors affecting production plan)

(i) माल की सप्लाई ( Supply of Raw Materials) उत्पादन योजना बनाते समय उद्योग उपक्रमी कच्चे माल की उपलब्धि के स्रोत तलाश करेगा, उत्पादन स्थल तक गाड़ी का प्रबन्ध और माल की प्राप्ति का तरीका खोजेगा।

(ii) कार्य समय निर्धारण (Work Schedule ) — उद्योग उपक्रमी को चाहिए कि काम के समय कार्य सुनियोजित ढंग से करें जिससे माल का उत्पादन सुचारु ढंग से चलता रहे। कौन-स माल पहले बने और कौन-सा बाद में, यह ठीक से निर्णय ले कर किया जाए जिससे काम मे कहीं भी बाधा नहीं आए।

(iii) रख-रखाव (Maintanence ) — अच्छे उद्यम का रख-रखाव एक महत्वपूर्ण पहलू है। मशीन से क्षमतानुसार काम तभी लिया जा सकता है जब रख-रखाव को पूरा महत्व दिया जाए।

(iv) गुणवत्ता निश्चित करना (Quality assurance) उद्योग उपक्रमी को हर स्थिति में गुणवत्ता की ओर ध्यान देना चाहिए। उसे यह निश्चय करना चाहिए कि मण्डी में मुकाबले में माल सर्वश्रेष्ठ रहे।

(v) पूरी क्षमता को काम में लाना (Capacity utilisation) उत्पादन योजना बनाने है। लिए उद्यमी को चाहिए कि सभी कार्य प्रणाली की क्षमता पूरी तरह काम में लाई जाए नहीं हो हानि हो सकती है।

(vi) बिक्री का पूर्वानुमान (Sale forecasting) उत्पादन योजना बनाते समय उद्य को भविष्य में बिक्री का अनुमान होना चाहिए। उसे बिक्री के लक्ष्यों की भविष्यवाणी करन चाहिए।

3. स्कंध का नियंत्रण क्या है ? उन तत्वों का वर्णन कीजिए जो स्कंध नियंत्रण के प्रभावित करते हैं । (What is inventory control ? Discuss the factors which influence the decision with regarded orders in inventory control.) 

Ans. स्कंध का अर्थ है कच्चा या अर्द्ध-निर्मित माल। स्कंध एक ऐसी प्रणाली है जिससे उद्योग, उपक्रमी, उत्पादन और माल की गतिविधि के बारे में महत्वपूर्ण निर्णय लेने आसान हो जाते हैं। अन्तर्राष्ट्रीय लेखा निर्धारक कमेटि ने वस्तु सूची को ठोस सम्पत्ति की संज्ञा दी है।

(i) साधारण व्यापार में बिक्री के लिए

(ii) उत्पादन प्रक्रिया के उपरान्त रखना

(iii) माल उत्पादन या सेवाओं में काम आने के लिए रखना एल्. बी. फाईन ने स्कंप के बारे में बहुत महत्वपूर्ण बात कही है-“स्कंध की योजना बनान उत्पादन में काम आने वाले माल का मँगवाना और उसकी समय सारिणी बनाना कह सकते हैं.

NCERT Solutions for Class 12 Commerce Stream


Leave a Comment