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Home Science Class 12 Chapter 11 Notes In Hindi PDF

Class12th 
Chapter Nameबचत तथा विनियोग | Saving and Investmen
Chapter number11
Book NCERT
SubjectHome Science
Medium Hindi
Study MaterialsImportant questions answers
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बचत तथा विनियोग | Saving and Investmen


प्रस्तुत अध्याय में बचत और विनियोग के बारे में विवेचन किया गया है । इसके अन्तर बचत के अर्थ और महत्त्व तथा विनियोग के साधनों के संबंध में जानकारी की आवश्यक दी गयी हैं। साथ ही बचत के पैसों का विनियोग करते समय इसकी सुरक्षा और लाभ के बाद में भी अध्ययन किया गया है। बचत पारिवारिक आय का वह अंश है जो वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति के बाद भा आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु बचाकर देश के विकास के लिए विभिन्न उत्पादन कार्यों में लगाय जाता है ।

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प्रत्येक परिवार का बचत करने का उद्देश्य- अल्पकालीन स्थितियों के लिए, सुर भविष्य के लिए अन्य आकस्मिक खर्चों के लिए व्यय पर नियंत्रण इत्यादि ।

बचत को प्रभावित करने वाले तत्व-योग्यता – पारिवारिक आय आकार, सहयोग, बच करने की इच्छा (व्यक्तिगत स्वभाव, पारिवारिक स्नेह, दूरदर्शिता, समाज में प्रतिष्ठा, सामाजि परम्पराएँ), बचत करने की पर्याप्त सुविधाएँ, बचत माध्यमों की जानकारी देश में बचत के लिए अनुकूल वातावरण ।

बचत के माध्यम — बैंक, डाकघर, बचत बँक, जीवन बीमा, भविष्य योजना, यूनिट्स राष्ट्रीय बचत, सर्टीफिकेट, उपहार, कूपन्स, दसवर्षीय रक्षा जमा बॉण्ड, प्रीमियम स्थायी बॉण्ड विनियोग के साधन के चयन का आधार – लाभ, आयकर की छूट, राशि पर खतरा त धनराशि की सुरक्षा है ।

Q. 1. प्रत्येक महीने धन की बचत करना क्यों आवश्यक है ? बचत के चार लाभ लिखिए ।

Ans. बचत के चार लाभ निन्नलिखित हैं-

1. परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में, जैसे- स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, बच्चों की शादी इत्यादि ।

2. आपातकालीन स्थितियों के लिए जो असामाजिक व आकस्मिक होती हैं धन की या बचत की आवश्यकता है।

3. सुरक्षित भविष्य के लिए विशेषकर नौकरी से निवृत्ति तथा वृद्धावस्था में सुखद जीवनयापन के लिए अधिकतर लोग बचत करते हैं।

4. जीवन का स्तर ऊँचा रखने के लिए, जैसे-कार, कम्प्यूटर, एअर कण्डीशनर इत्यादि । लगातार बचत करके ये वस्तुएँ खरीदी जा सकती है ।

Q. 2. हमें अपने व्यय का हिसाब रखना क्यों आवश्यक है ? 

Ans. व्यय का हिसाब रखने से लाभ-महीने के आखिर में विभिन्न मदों पर किए दैनिक खर्च के अतिरिक्त मासिक खर्च निकाला जा सकता है। इससे पता लग सकता है कि वास्ताविक खर्च कितना हुआ और यह बजट के वास्तविक व्यय से अधिक है या कम। इस ज्ञान से आगामी मास के बजट में सुधार किए जा सकते हैं।

दैनिक हिसाब लिखा हुआ है तो भुगतान की परेशानी नहीं होती । नियमित रूप से हिसाब लिखा हो तो उधार लेन-देन में झगड़े नहीं होते ।

Q. 3. बैंक के चार तरह के खातों की सूची बनाइए ।

Ans. 1. बचत खाता (Saving Account ) 

2. आवर्ती खाता (Recurring Account)।

3. निश्चित अवधि जमा खाता (Fixed Deposits)। 

4. चालू खाता (Current Account) 

Q.4. बचत की परिभाषा दें ।

Ans. परिवार की कुल आय का वह भाग जो ‘वर्तमान’ की (Present) आवश्यकताओं पूरा को करने के बाद आने वाले कल (Future) की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बचा कर रखा जाये, और दश के विकास हेतु उत्पाद कार्यों में लगा दिया जाये, उसे बचत कहते हैं । बचत अर्थात् आवश्यकताएँ पूरी करने के बाद बचा हुआ आय का भाग ।

Q. 5. बचत के विनियोग से आप क्या समझते हैं ?

Ans. आय का वह भाग जो हम प्रतिमाह या प्रतिवर्ष आय में से बचाकर किसी ऐसी सुव्यवस्थित योजना में लगाते हैं जिससे हमें आनेवाले समय में कुछ-न-कुछ कुछ लाभ मिलता रहे, विनियोग या निवेश (Investment) कहलाता है ।

Q. 6. बचत के दो लाभ लिखिए । 

Ans. बचत के दो लाभ हैं-

(क) आकस्मिक घटनाओं का मुकाबला करने में बचत का धन काम लिया जाता है। जैसे-बीमार होने पर, लम्बी अवधि की छुट्टी लेने पर वेतन न मिलने के कारण, चोरी या नुकसान होने पर, विशेष खर्चों हेतु ।

(ख) भविष्य के खर्चों की पूर्ति बचत के धन से ही सम्भव है जैसे विवाह, उच्च शिक्षा, मकान या अन्य विलासिता की वस्तु जैसे कार आदि का क्रय ।

Q. 7. विनियोग से क्या तात्पर्य है ?

Ans. वर्तमान आय का वह भाग, जो हम प्रतिमाह अपनी आय में से बचाकर किसी सुव्यवस्थित धन-योजना में लगाते हैं और परिणामस्वरूप कुछ आय लाभ के रूप में प्राप्त करते है उसे विनियोग या निवेश कहते हैं ।


लघु उत्तरीय प्रश्न (SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


Q. 1. अपने पिताजी को विनियोग के ऐसे दो उपाय सुझाइए जिनसे उन्हें दस वर्ष पश्चात् धन की प्राप्ति हो सके। इन उपायों के तीन अन्य लाभ भी लिखिए ।

Ans. (i) राष्ट्रीय बचत सर्टिफिकेट (National Saving Certificate – भारत सरकार द्वारा चलायी गयी एक महत्त्वपूर्ण वचत योजना है। कोई भी भारतीय अपने इच्छानुसार यह सर्टिफिकेट खरीद सकता है । निश्चित धनराशि अवधि की समाप्ति पर क्रेता ब्याज सहित वापिस मिल जाती है। विनियोग की गई राशि पर आयकर से छूट का लाभ मिलता है (ii) निश्चित अवधि जमा खाता (Fixed Deposit Account ) इसमें धनराशि ए

निश्चित अवधि के लिए जमा की जाती है। यह अवधि 15 दिन से 10 वर्ष तक की हो सकता है। बचत खाते से इसका ब्याज की दर अधिक होती है, जो निश्चित अवधि के अनुसार परिकलित की जाती है इसकी जमाराशि पर यदि समय से पहले जरूरत हो तो ऋण भी मिल सकता है।

धन राशि जमा करने पर जमाकर्त्ता को रसीद भी दी जाती है । 

Q. 2. घर के हिसाब-किताब का ब्योरा रखने के छः लाभ बताइए । 

Ans. घर का रिकार्ड रखने के लाभ (Advantages of Maintaining Household Record )———घर खर्च का रिकार्ड रखने के अनेक लाभ हैं। इससे पारिवारिक आय का अच्छ तरह प्रयोग किया जा सकता है। ऐसे रिकार्ड रखने से निम्नलिखित लाभ हो सकते हैं- 1. इससे अधिक व्यय पर अंकुश लगाया जा सकता है। अपव्यय को कम किया जा सकता है।

2. लाभ का रिकार्ड रखने से परिवार की कुल आय व व्यय को जाना जा सकता है। 

3. विभिन्न वस्तुओं पर कितना व्यय होना चाहिए इसका अनुमान लगाया जा सकता है। 

4. उधार लेने की आदत को रोका जा सकता है । कई बार ऐसा देखा गया है कि उधार लेने के बाद उसकी किश्त चुकाने में कठिनाई आती है ।

5. आय व व्यय में संतुलन बनाये रखना सरल हो जाता है। भविष्य के लिए बचत भी इसका अभिन्न अंग है ।

6. गृह-खर्च के ब्योरे से परिवार के लक्ष्यों की पूर्ति सरल हो जाती है । 

Q. 3. परिवार में की गई बचत को प्रभावित करने वाले चार कारकों की सूची बनाइए

Ans. (i) परिवार का आकार यदि परिवार में अधिक सदस्य हैं तो बचत कम होगी। 

(ii) संयुक्त परिवार — यदि परिवार की संरचना संयुक्त परिवार में है तो किराए की बचत, नौकरों की बचत व बच्चों की देखभाल पर खर्चा नहीं होगा व बचत ज्यादा होगी । 

(iii) खर्च करने की आदत-साधारण आदतें हों तो बचत अधिक होती है । 

(iv) यदि नौकरी करने वाले सदस्यों की संख्या ज्यादा हो तो बचत भी ज्यादा होती हैं।

Q. 4. अपनी बहन को विनियोग के चार ऐसे सुझाव दीजिए जिससे उसे आयकर में छूट मिल सके।

Ans. बचत तथा निवेश की कई योजनाएँ हैं वे आयकरदाता के लिए उपयोगी सिद्ध हुई हैं । यह उस परिवार पर निर्भर करता है कि वह बचत व पूँजी निवेश की किस विधि का चयन करता है । विशेष रूप से आयकर दाता के लिए निम्न दो विधियाँ अपनाई जा सकती हैं-

(i) जीवन बीमा (Life Insurance ) — जीवन बीमा बचत का एक ऐसा साधन है ज व्यक्ति-विशेष या उसके परिवार को आर्थिक संरक्षण प्रदान करता है । इसमें निश्चित अवधि के लिए निश्चित धन का बीमा करवाया जाता है। निश्चित अवधि की समाप्ति पर स्वयं बीमेदार को या बीमेदार की मृत्यु होने पर उसके द्वारा नियुक्त उत्तराधिकारी को वह निश्चित राशि मिल जाती है । भारतीय आयकर अधिनियम के अनुसार बीमेदार को यह सुविधा है कि यदि वह अपनी आय का विशेष भाग जीवन बीमा प्रीमियम के रूप में देता है तो उस पर उसे आयकर नहीं देना पड़ेगा

(ii) भविष्य निधि योजना—यह नौकरी करने वाले व्यक्तियों के लिए अनिवार्य योजना है। इसके अन्तर्गत प्रति मास वेतन में से एक निश्चित राशि भविष्य निधि में जमा करवा दी जाती है । आवयश्कता पड़ने पर विभिन्न उचित कार्य जैसे विवाह, शिक्षा, घूमने आदि के लिए तीन मास के वेतन जितनी राशि ऋण के रूप में मिल सकती है जिसका भुगतान कर्मचारी आसान किस्तों में करता है।

(iii) राष्ट्रीय बचत सर्टिफिकेट (National Saving Certificate ) – यह भारत सरकार द्वारा चलायी गयी एक महत्त्वपूर्ण बचत योजना है। कोई भी भारतीय अपनी इच्छानुसार यह सर्टिफिकेट खरीद सकता है । यह निश्चित धनराशि और निश्चित अवधि की समाप्ति कर क्रेता को ब्याज सहित मूलधन वापस मिल जाता है। विनियोग की गई राशि पर आयकर से छूट का लाभ मिलता है ।

(4) सार्वजनिक भविष्य निधि योजना (Public Provident Fund Seheme PPF)—यह सुविधा राष्ट्रीय बैंकों व डाकघरों द्वारा दी जाती है। इसमें कोई भी व्यक्ति इकट्ठी या छोटी किश्तों में धनराशि जमा करा सकता है। ब्याज 12% वार्षिक दर से प्राप्त होता है। व्यक्ति पाँच वर्ष उपरान्त धन और ब्याज का कुछ प्रतिशत हिस्सा वापसी ले सकता है। इस योजना में कर छूट दी जाती है ऋण की आंशिक राशि जरूरत के समय दी जा सकती है।

Q. 4. आपके पिताजी आयकर छूट का लाभ उठाने के लिए धन का विनियोग करना चाहते हैं। उन्हें ऐसी दो योजनाओं का सुझाव दीजिए जिसमें वह लाभ मिलता है । इन योजनाओं के अन्य लाभ व हानियाँ भी बताइए ।

Ans. बचत तथा निवेश की कई योजनाएँ है वे आयकर दाता के लिए उपयोगी सिद्ध हुई। हैं। यह उस परिवार पर निर्भर करता है कि वह बचत व पूँजी निवेश की किस विधि का चयन करता है। विशेषरूप से आयकर दाता के लिए निम्न दो विधियाँ अपनाई जा सकती हैं-

1. जीवन बीमा (Lilfe Insurance ) जीवन बीमा बचत का ऐसा साधन है जो व्यक्ति विशेष या उसके परिवार को आर्थिक संरक्षण प्रदान करता है। इसमें निश्चित अवधि के लिए निश्चित धन का बीमा करवाया जाता है निश्चित अवधि की समाप्ति पर स्वयं बीमेदार को या बीमेदार की मृत्यु होने पर उसके द्वारा नियुक्त उत्तराधिकारी को वह निश्चित राशि मिल जाती है। भारतीय आयकर अधिनियम के अनुसार बीमेदार को यह सुविधा है कि यदि वह अपनी आय का विशेष भाग जीवन बीमा प्रीमियम के रूप में देता है तो उस पर उसे आयकर नहीं देना पड़ेगा ।

2. भविष्य निधि योजना — यह नौकरी करने वाले व्यक्तियों के लिए अनिवार्य योजना है। इसके अन्तर्गत प्रति मास वेतन में से एक निश्चित राशि भविष्य निधि में जमा करवा दी जाती है। आवश्यकता पड़ने पर विभिन्न उचित कार्य जैसे विवाह, शिक्षा, घूमने आदि के लिए तीन मास के वेतन जितनी राशि ऋण के रूप में मिल सकती है जिसका भुगतान कर्मचारी आसान किस्तों में करता है ।


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (LONG ANSWER TYPE QUESTIONS)


Q. 1. जीवन बीमा और डाकघर में निवेश करने के लाभ व हानियों का ब्यारा दीजिए।

Ans. जीवन बीमा (Life Insurance ) — जीवन बीमा अनिवार्य बचत करने का एक उत्तम साधन है। इसके अन्तर्गत बीमादार अपनी आय में से कुछ बचत करके अनिवार्य रूप से एक निश्चित अवधि तक धन विनियोजित करता है। अवधि पूरी होने पर बीमादार को जमा धन और उस पर अर्जित बोनस प्राप्त होता है। इस योजना की प्रमुख विशेषता यह है कि यदि बीमादार की आकस्मिक मृत्यु हो जाए तो बीमादार द्वारा नामांकित व्यक्ति को बीमे की पूरी राशि बोनस सहित मिल जाती । इसलिए यह योजना जोखिम (Risk) उठाती है, अनिश्चितता को निश्चितता में बदल देती है ।

जीवन बीमा के लाभ-बीमादार जीवन बीमा को निम्न लाभों के कारण अपनाता है- 1. परिवार संरक्षण ( Family Protection ) जीवन बीमा का मुख्य उद्देश्य बीमादार के परिवार को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। विशेष तौर पर जब बीमादार की आकस्मिक मृत्यु हो जाए ।

2. वृद्धावस्था में आर्थिक सहायता हेतु (Economic Help in Old Age )—– अवकाश प्राप्ति या वृद्धावस्था में इस योजना से प्राप्त धन का विनियोजन कर ब्याज इत्यादि से बीमादार आर्थिक दृष्टि से से उम हो है। 

3. बच्चों की शिक्षा या विवाह हेतु (For Child Education or Marriage ) इस योजना में लगाया गया धन बच्चों के बड़ा होने पर उनकी शिक्षा एवं विवाह हेतु आर्थिक सहायता के रूप में प्राप्त होता है

4. सम्पत्ति कर की व्यवस्था ( For Propery Tax ) — बीमादार को मृत्यु के बाद संपति कर देने के लिए बीमा योजना द्वारा मिला धन राहत देता है । 

5. आयकर में छूट ( Relief in Income Tax ) – ? – बीमादार अपनी आय का जो अंश योगा योजना पॉलिसी की किश्त चुकाने के लिए देता है उस पर उसे आयकर में छूट मिलती है। डाकघर बचत बैंक (Post Office Saving)—– बैंक की सुविधा देश के प्रत्येक गाँव तक नहीं पहुंची है परन्तु डाकघर की सुविधा देश के प्रत्येक राज्य के गाँव-गाँव में होने के कारण डाकघर वचत खाता चालू किया गया। भारत सरकार ने इसके द्वारा बचत की आदत को प्रोत्साहित किया है । 

दो व्यक्ति परन्तु उनमें से एक बालिग अवश्य संयुक्त रूप से अपना खाता खुलवा सकते हैं। डाकघर बचत खाते का स्थानान्तरण भी करवाया जा सकता है। इस खाते पर ब्याज पर आयकर नहीं देना पड़ता है। डाकघर के नियम सम्पूर्ण भारत में एक समान है। खाते की न्यूनतम रकम 5 रू है। यह कम राशि से खोला जा सकता है ।

1. डाकघर में छपे फार्म को भरकर कोई भी व्यक्ति या अधिक व्यक्ति संयुक्त खाता पाँच रुपये जमा कर खोल सकता है ।

2. 18 वर्ष से कम उम्र वालों के लिए अभिभावक यह खाता खोल सकता है । 

3. डाकघर खाते में भी चेक की सुविधा दी जा सकती है। चेक बुक लेते समय जमाकर्ता के खाते में कम-से-कम 100 रुपये होने चाहिए तथा कभी भी खाते में 50 रुपये से कम नहीं होने चाहिए ।

4. खाता खोलने पर एक पास बुक (Pass Book ) दी जाती है जिसमें जमा की गई तथा निकाली गई राशि का पूरा लेखा-जोखा होता है। यदि यह पासबुक खो जाती है तो 5 रुपये देकर पूरी पासबुक लो जा सकती है।

5. डाकघर में पैसा बैंक, मनीऑर्डर, ड्रॉफ्ट तथा नकद के रूप में जमा करवाया जा सकता । इस खाते की एक विशेषता यह है कि मुख्य डाकघर के अधीन जिस डाकघर में खाता खोला गया हो उसके अधीन किसी भी डाकघर में भी पैसा जमा करवाया जा सकता है। 

यदि किसी उप डाकघर में खाता खोला हो तो मुख्य डाकघर में भी पैसा जमा करवाया जा सकता है परन्तु पैसा केवल उसी डाकघर/उप डाकघर से निकलवाया जा सकता है जहाँ पर खाता खोला गया है। 6. डाकघर खाते में वर्तमान ब्याज की दर 5.5% है

7. धन निकलवाते समय निश्चित फार्म भर कर पासबुक के साथ डाकघर में दिया जाता है। लिपिक फार्म पर किए गए हस्ताक्षर नमूने के हस्ताक्षर से मिलान करने पर राशि का भुगतान करता है । यदि हस्ताक्षर नमूने के हस्ताक्षर से भिन्न हो तो राशि का भुगतान नहीं किया जाता जब तक कि कोई व्यक्ति जो डाकघर में जमाकर्त्ता को पहचानता हो, गवाही न दे। 

8. खाता खोलने के तीन मास बाद यह खाता किसी भी डाकघर में स्थानान्तरित किया। जा सकता है।

Q. 3. जीवन बीमा और यूनिट्स में धन का विनियोग करने के लाभ व हानियों को विवेचना कीजिए ।

Ans. जीवन बीमा में विनियोग के लाभ-

(i) बीमेदार की मृत्यु के बाद उसके परिवार को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है । 

(ii) बीमेदार ने यदि किसी से ऋण लिया हुआ हो तब भी उसे निधन के बाद बीमे की राशि उत्तराधिकारी को दी जाती है जो लेनदारों से पूर्ण रूप से सुरक्षित है । 

(iii) बीमेदार के व्यवस्था करने पर उसके निधन के बाद बीमे की धनराशि उत्तराधिकारी को किश्तों में दी जाती है जिससे पूर्ण राशि का एक साथ अपव्यय न हो ।

प्रीमियम के रूप में देता है तो उस पर उसे आयकर नहीं देना पड़ेगा । बीमेदार को यह सुविधा है कि यदि वह अपनी आय का एक विशेष भाग जीवन बीमा के इस योजना में कोई हानि नहीं है ।

युनिट्स में विनियोग के लाभ- यूनिट्स, यूनिट ट्रस्ट ऑफ इण्डिया द्वारा चालू किए जाते हैं। कोई भी व्यक्ति 10 रुपये के मूल्य के कम से कम 100 व अधिक-से-अधिक अपनी इच्छानुसार खरीद सकता है। वार्षिक लाभ का 90 प्रतिशत विनियोगकर्त्ताओं में विभाजित कर दिया जाता है। यूनिट पर लगाई गई धनराशि व उसके लाभांश पर आयकर की छूट है।

यूनिट ट्रस्ट को खराब वित्तीय स्थिति में नियोजक को लाभांश न दिये जाने से हानि हो सकती है। परिपक्वता की अवधि पूरी होने पर भी पैसा मिलने में देरी हो सकती है। यूनिट ट्रस्ट द्वारा पुनः खरीद मूल्य कम करने से भी निवेशक को आर्थिक नुकसान हो सकता है ।

Q. 4. विनियोग के लाभ लिखिए ।

Ans. विनियोग के लाभ ( Advantages of Investment ) यदि अनुभवी विनियोगकर्ता द्वारा परामर्श लेकर सही योजना में धन का विनियोग किया जाए तो वह बहुत ही लाभकारी होता है। सही योजना में धन का विनियोग करने से व्यक्ति के लिए आर्थिक रूप से सुरक्षित हो जाता है। उसे भविष्य के आर्थिक मामलों के लिए चिन्तित नहीं होना पड़ता, इसलिए वह वर्तमान में सुख-शांति से रहता है

धन का विनियोजन निरन्तर करते रहने से व्यक्ति को निरन्तर ही कुछ ब्याज तथा मूल राशि इकट्ठी मिलती रहती है जिससे वह अपने जीवन का स्तर समय-सयम पर ऊँचा कर सकता है। किसी भी आकस्मिक घटना पर यदि धन की आवश्यकता हो तो वह जमा राशि में से व्यय

करके विनियोग किए गए धन का लाभ उठा सकता है । कर की बचत ( Tax Saving) – धन की विनियोग की अधिकतर योजनाओं द्वारा जमा

की गई धन राशि पर कर नहीं लगता । यह राशि आयकर से पूर्ण रूप से मुक्त होती है। उदाहरण के लिए बैंक (Bank), डाकघर के बचत बैंक (Saving Bank of Post Office), कैश सर्टिफिकेट्स (Cash Certificates), जीवन बीमा (Life Insurace), यूनिट्स (Units), भविष्य निधि योजना (Provident Fund), जन साधारण भविष्य निधि योजना (Public Provident Fund), नेशनल सेविंस सर्टीफिकेट (National Savings Certifacte) इत्यादि । विनियोग द्वारा प्राप्त की गई राशि आयकर से मुक्त होने के कारण नौकरी वालों के लिए,

व्यापारी वर्ग के लिए तथा जन साधारण के लिए, सभी के लिए उपयुक्त है । इस प्रकार इस अध्याय में हमने जाना कि धन की बचत क्या होती है ?

1. धन की बचत के क्या महत्त्व हैं ? 

2. धन की बचत कैसे की जा सकती है ?

3. विनियोग के कौन-कौन-से माध्यम हैं ?

4. विनियोग द्वारा धन जमा करने पर क्या जोखिम, सुरक्षा, लाभ तथा कर मुक्त होते हैं ।।

Q.5. विनियोग में जोखिम, सुरक्षा, लाभ तथा कर से मुक्ति किस प्रकार मिलती हैं? 

Ans. विनियोग में जोखिम, सुरक्षा, लाभ तथा कर से मुक्ति (Investment-Risk] Security, Profit, Tax Saving ) एक बुद्धिमान विनियोगकर्त्ता धन का विनियोग करते समय अपनी आवश्यकतानुसार ही विभिन्न प्रकार के विनियोगों में से उपयुक्त का चयन करता है। विनियोग की जिस योजना में इसे अपना धन सबसे अधिक सुरक्षित लगता है उसी में वह अपने धन का विनियोग करता है। 

यह आवश्यक नहीं कि विनियोग के प्रत्येक साधन में मूलधन सदैव सुरक्षित ही रहे । विनियोग के साथ अपवादस्वरूप कभी जोखिमपूर्ण भी हो सकते हैं। नीचे कुछ प्रमुख जोखिमों का वर्णन किया गया है- मूलधन की हानि कई बार बैंकों के फेल हो जाने पर या कंपनियों के दिवालिया हो जाने पन विनियोगकर्त्ता को उसके द्वारा निवेशित पूंजी का केवल कुछ प्रतिशत भाग ही वापिस मिलता है जिससे मूलधन की हानि होती है ।

आय की हानि — कंपनियों में कभी-कभी लाभ कम होने की स्थिति में भी लाभांश कम मिलता है । ठीक इसी प्रकार बैंक के ब्याज की दर कम हो जाने से आय की हानि होती है ।

समय पर नकद धन वापस न मिलना व्यक्ति द्वारा विनियोजित धन समय पर न मिलने से उसके अनेक आवश्यक कार्य नहीं हो पाते। इससे विनयोगकर्ता को विनियोग करवाने के बाद भी असुविधा एवं हानि होती है।

विनियोग को सुरक्षित बनाने के लिए तथा आर्थिक संकट से बचने के लिए कुछ विशेष बाते पर ध्यान देना चाहिए जो निम्न हैं-

(1) विभिन्न योजनाओं में धन लगाना — विनियोगकर्ता को विभिन्न योजनाओं में धन विनियोजित करना चाहिए जिससे यदि किसी एक योजना से हानि हो भी जाए तो शेष योजनाओं से उसे उसकी आवश्यकता के समय लाभ प्राप्त हो सके ।

( 2 ) नियमित हिसाब– विनियोगकर्ता अपनी धन राशि जिस-जिस योजना में लगाता है उसे उन सबका हिसाब रखना चाहिए जिससे किसी भी योजना की थोड़ी-सी हेर-फेर का उसे तुरंत पता लग जाता है।

(3) मूल्य के घटने-बढ़ने का ज्ञान — विनियोगकर्ता को समय-समय पर विनियोग के साधनों के मूल्यों की पूर्ण जानकारी लेते रहना चाहिए । 

(4) अनुभवी विनियोगकर्ताओं से परामर्श-धन का विनियोग करते समय अनुभवी

विनियोगकर्त्ताओं से परामर्श भी करना चाहिए, जिससे सही योजना में धन विनियोग हो सके ।

 Q. 6. आपके भाई अपने धन का विनियोग करना चाहते हैं। उन्हें सार्वजनिक भविष्य निधि योजना के विषय में समझाइए तथा उसके लाभ भी बताइए । सार्वजनिक भविष्य निधि और भविष्य निधि में अन्तर भी स्पष्ट कीजिए ।

Ans. भविष्य निधि योजना (Provident Fund Scheme ) यह योजना नौकरी करने वाले सभी वर्ग के कर्मचारियों के लिए है। प्रत्येक कर्मचारी अपने वेतन में से अनिवार्य रूप से राशि इस योजना में विनियोजित करता है। यह योजना दो प्रकार की होती है- 

1. सामान्य भविष्य निधि योजना (General Provident Fund ) |

2. प्रतिसहायक भविष्य निधि योजना (Contributary Provident Fund) ।

1. सामान्य भविष्य निधि योजना (General Provident Fund ) – यह योजना केवल सरकारी कर्मचारियों के लिए है। इसमें प्रत्येक कर्मचारी अपने मूल वेतन का कम से कम 10% प्रतिमाह जमा कराता है। इस योजना की अधिकतम कोई सीमा नहीं है। यह राशि कर्मचारी के वेतन में से ही काट ली जाती है। कर्मचारी के सेवा निवृत्त होने या निधन होने पर यह राशि व्याज सहित कर्मचारी द्वारा नामांकित व्यक्ति को दे दी जाती है। इस राशि पर आयकर में भी छूट मिलती है। 

2. प्रतिसहायक भविष्य निधि योजना (Contributor Provident Fund ) – यह योजना गैर-सरकारी, अर्द्ध-सरकारी संस्थाओं के कर्मचारियों पर लागू होती है। इस योजना में प्रत्येक कर्मचारी अपने मूल वेतन का कम-से-कम 8% राशि जमा करता है और इसके बराबर राशि संस्था के प्रबन्धक भी कर्मचारी के खाते में जमा करते हैं। कर्मचारी के सेवानिवृत्त होने पर या निधन होने पर यह राशि कर्मचारी अथवा कर्मचारी द्वारा नामांकित व्यक्ति को ब्याज सहित दे दी जाती है। इस योजना में भी कर्मचारी द्वारा जो राशि जमा की जाती है उस पर आयकर

में छूट मिलती है 15 वर्षीय लोक भविष्य निधि ( 15-year Public Provident Found ) कोई भी व्यक्ति स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया में प्रतिवर्ष 100 रु. से 20,000 रु. तक जमा करवा कर लोक

भविष्य निधि खाता खोल सकता है। यह राशि जमाकर्त्ता को 15 वर्ष तक जमा करानी पड़ती है। अवधि समाप्त होने पर जमाकर्त्ता को जमा राशि ब्याज सहित वापस मिल जाती है। इस योजना में जमा की गई राशि पर आयकर में छूट मिलती है तथा ब्याज पर कोई आयकर नहीं लगता ।

Q.7. लोक भविष्य निधि में धन का निवेश करने के लाभ व कमियों की विवेचना कीजिए। 

Ans. लोक भविष्य निधि खाता (Public Provident Fund) – राष्ट्रीय बचत संगठन की यह दीर्घकालीन योजना भारत सरकार द्वारा 1968 में प्रारम्भ की गई तथा आज वह अपनी समकक्ष योजनाओं में शीर्ष पर है। 

इसमें न केवल करों पर भारी छूट मिलती है वरन् यहाँ सभी समूहों (वेतनभोगी, व्यापारी, सेवा निवृत्त लोग आदि ) के लिए एक आकर्षक एवं उपयोगी योजना हैं। खाता मुख्य डाकघरों या भारतीय स्टेट बैंक तथा इसकी शाखाओं तथा कुछ अन्य राष्ट्रीय बैंकों की चुनी हुई शाखाओं में खोला जा सकता है। 

एक वित्तीय वर्ष में न्यूनतम राशि 100/- ० तथा अधिकतम 60,000/- रु० है । यह राशि एक साथ अथवा अधिक-से-अधिक 12 (वर्ष में) किश्तों में जमा कराई जा सकती है। यह 5 रु. के गुणांकों में होनी चाहिए । खाता खोलने की तिथि से सातवें वित्तीय वर्ष से प्रत्येक वर्ष एक बार पैसा निकालने की सुविधा है।

ऋण की सुविधा पहला ऋण खाता खोलने के वित्तीय वर्ष की समाप्ति से तीसरे वित्तीय वर्ष से पहले वित्तीय वर्ष के अन्त में शेष राशि का 25% तक लिया जा सकता है लेकिन यह सुविधा खाता खोले जाने के वर्ष के अन्त से 5 वर्ष की समाप्ति से पहले ही प्राप्त की जा सकती है। ऋण का पुनर्भुगतान एक साथ सुविधाजनक किश्तों में, जो 36 से अधिक न हों किया जा सकता है। यदि ऋण 36 महीने में चुका दिया जा सकता है तो इस पर ब्याज 1% की दर से लगाया जाएगा। पूर्ण व्याज मासिक किश्तों में जो दो से अधिक न हो, अदा किया जाना चाहिए

यदि ऋण को धन राशि 36 महीने में नहीं चुकाई जाती हो उक्त बची हुई राशि पर 6% की दर से ब्याज लगाया जाएगा ।

करों में लाभ – जमा राशि आयकर की धारा 88 के अनुसार अन्य अनुमोदित प्रतिभूतियों के साथ आयकर में छूट पाने में योग्य है।

जमा कराने में हुई चूक लोक भविष्य खाते में यदि किसी कारणवश किसी वर्ष राशि जमा नहीं करायी तो इस चूक के प्रत्येक वर्ष के लिए 100 रुपये की राशि के साथ चूक के प्रत्येक वर्ष 10रु का चूक शुल्क देकर खाते को पुनः चालू किया जा सकता है। नामांकन

की सुविधा — जमाकर्त्ता अधिक व्यक्तियों को अपनी मृत्यु की दशा में अपने खाते में जमा राशि को पाने के लिए नामित कर सकता है किन्तु अवयस्क की ओर से खोले गये खाते में कोई नामांकन नहीं हो सकता है।

Q.8. तुम्हारी बहन पूँजी निवेश करना चाहती है तुमने उसे डाकर का सुझाव दिया । यह सही सुझाव है। इसकी पुष्टि के लिए अपनी दलीलें प्रस्तुत करें । 

Ans. डाकघर बचत बैंक पूँजी निवेश हेतु एक सही सुझाव है। पूंजी निवेश का लक्ष्य अपने धन को सुरक्षित ढंग से बढ़ाना है। डाकघर में पूँजी निवेश के पक्ष में निम्नलिखित दलीलें प्रस्तुत हैं। 

(क) डाकघर के नियम सारे भारत में एक समान हैं और गाँव-गाँव में डाकघर की शाखाऐं हैं।

(ख) डाकघर में न्यून्तम राशि 5/- से खाता खोला जा सकता है।

(ग) डाकघर में बचत का धन पूर्णतया सुरक्षित रहता है। (घ) डाकघर में जमा किये हुए धन पर आयकर की छूट मिलती है ।

(ङ) डाकघर कई ऐसी योजनाऐं उपलब्ध कराता है जिन पर अच्छा व्याज व लाभांश मिलता है। लाटरी भी निकलती जाती है जिस पर कई इनाम भी घोषित किये जाते हैं। इस प्रकार डाकघर में बचत का पैसा जमा करना उत्तम है । 

(च) N.S.C. नेशनल सेविंग्स सार्टिफिकेट पर पैसा लगाने से उनको बैंक में रखने पर उधार भी मिल सकता है ।

(छ) डाकघर नजदीक होते हैं, इन तक पहुँचना बहुत आसान होता है ।


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