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Home Science Class 12 Chapter 15 Notes In Hindi PDF

Class12th 
Chapter Nameकपड़ों का चयन | Selection of Fabrice
Chapter number15
Book NCERT
SubjectHome Science
Medium Hindi
Study MaterialsImportant questions answers
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कपड़ों का चयन | Selection of Fabrice


5.स्तुत अध्याय में कपड़ों के चुनाव से संबंधित बातों का विवेचन किया गया है मानव निर्मित तन्तु, मिश्रित तथा सभी प्रकार के प्राकृतिक तन्तुओं के कारण कपड़ा उद्योग में विभिन्नता आ गयी है। प्रकृति, प्रकार तथा कपड़े के वर्ग आदि से सम्बन्धित श्रेष्ठता की दशा को गुण कहते हैं।

बाहरी रूप, टिकाऊपन, आराम, बनावट तथा परिसज्जा कपड़े के गुण से प्रभावित होते हैं। सूती, रेशमी, ऊनी, नायलॉन टेरेलीन/डेकरान इत्यादि वस्त्रों में वांछनीय तथा अवाँछनीय गुण पाये जाते हैं । 

कपड़े को खरीदने का उद्देश्य है कि वह शरीर पर अच्छा लगे, किस तरह के वस्त्र में कम-से-कम खर्च तथा स्थायी लाभ हो । विशेष कपड़े की आवश्यकता मौसम के हिसाब से होनी चाहिए । मौसम की शुरुआत में आपको ताजा व विभिन्न प्रकार का कपड़ा मिलेगा।

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खरीदारी यदि दोपहर के स्थान पर सुबह की जाये तो आसानी और जल्दी होती है । सफल खरीदारी के अन्तर्गत समझदारी से खरीदना अपने कपड़े के स्तर की जानकारी, समझदार उपभोक्ता होने के नाते अपना दायित्व समझना जरूरी है ।

खरीदारी के लिए विभिन्न प्रकार के स्टोर हैं, जैसे-थोक तथा फुटकर स्टोर्स (Wholesale & retail stores), विभागीय भण्डार (Departmental stores), फुटकर दुकाने (Small shops)। फुटकर दुकानें चार प्रकार की होती है-छूट प्रदान करने वाली दुकानें (Discount stores), पड़ोसी भण्डार (Neighbour stores), डाक आदेश भण्डार (Mail order stores), मार्का वाले भण्डार (Stores with brand names) । 

यदि कपड़े की चौड़ाई कम है तो कपड़े को उपयुक्त जोड़ देने के लिए लम्बाई की अधिक आवश्यकता होती है।


अति लघु उत्तरीय प्रश्न (VERY SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


Q. 1. कपड़े की कितनी मात्रा की आवश्यकता है, किस पर निर्भर करती है ?

Ans. कपड़े की कितनी मात्रा की आवश्यकता है यह कपड़े की चौड़ाई, नमूना, स्टाइल और पहनने वाले की नाप पर निर्भर करती है ।

Q. 2. कपड़ा खरीदते समय किन दो प्रमुख गुणों की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए? 

Ans. कपड़ा खरीदते समय यह देखना चाहिए कि उसकी गुणवत्ता कैसी है, उद्देश्य के अनुकूल है या नहीं। यदि घर पर पहनने के लिये पाजामा चाहिए तो वह सूती आरामदायक है। और सस्ता हो सकता है । निम्न गुणवत्ता का वस्त्र ऊँचे दामों पर बेचा जा रहा है इसलिए

विश्वसनीय दुकान से विश्वसनीय कम्पनी का कपड़ा खरीदना ही बेहतर रहता है । 

Q.3. अधिक कपड़े की आवश्यकता कब पड़ती है ?

Ans. प्रिण्ट को मिलाने, पट्टियाँ बनाने और विकर्णीय रेखाएँ बनाने के लिए अधिक कपड़े की आवश्यकता पड़ती है ।

Q.4. कपड़े की प्रकृति कौन-कौन-सी है ?

Ans. 

1. प्राकृतिक निर्मित तन्तु

2. मानव निर्मित तन्तु

3. मिश्रित तन्तु ।

Q.5. उपयुक्त कपड़े की बनावट से क्या तात्पर्य है ?

Ans. कपड़े की लचक, उसका बेढंगापन आकार में खिचने, रुखेपन या लटकने आदि की Tear अधिकतर उसकी बनावट पर निर्भर करती है । 

Q.6. कपड़े के टिकाऊपन का क्या अर्थ है ?

Ans. टिकाकपन का अर्थ है कपड़ा का अधिक दिनों तक चलना। कपड़े में पहनने/फटने धुलाई/सफाई सहने की क्षमता होनी चाहिए । 

Q.7. परिसरजा के लेवल से आप क्या समझते हैं ?

Ans. रासायनिक विधियों, जैसे कोड़ों से बचाव, फफूंदों से रक्षा, आग से बचाव तथा सीलन से बचाव आदि नई विधियाँ अपनाई जा रही है। अतः कपड़े को खरीदने से पहले परिसज्जा का लेवल देखना चाहिए । 

Q.8. आरामदेह कपड़े कौन-से हैं ?

Ans. जो कपड़े ठंडे, वजन में हल्के, देखने में सुन्दर और छूने में अच्छे होते हैं, वे पहनने वाले को बहुत आराम देते हैं। 

Q.9. कपड़े के बाहरी रूप का क्या अर्थ है ?

Ans. बाहरी रूप का अर्थ है कपड़ा देखने में कैसा लगता है, जैसे- तन्तु, धागा, बुनाई तथा परिसज्जा ।


लघु उत्तरीय प्रश्न (SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


Q. 1. वस्त्रों का चुनाव, अवसर दो उदाहरण देकर करें। तथा मौसम पर निर्भर होता है । इस कथन की पुष्टि करे

Ans. अवसर (Occasion ) — अलग-अलग अवसर पर अलग-अलग पोशाक ही अच्छी लगती है। खुशी के मौके पर डाली जाने वाली पोशाक कार्यस्थल पर पहनी जाने वाली पोशाक से भिन्न होती है। वह पोशाक जिसको डालकर योग (Yoga), जोगिंग (Jogging) किया जाता है, वह सदैव डिनर पार्टी पर पहनकर जाने वाली पोशाक से अलग होती है

मौसम (Climate )—–वातावरण का कपड़ों पर धन व्यय का प्रभाव पड़ता है, जैसे दक्षिण में रहने वाले परिवारों के लिए ऊनी वस्त्रों पर कुछ खर्च नहीं करना पड़ता है, परन्तु उत्तर में रहने के लिए ऊनी कपड़े आवश्यक हैं।

Q. 2. वस्त्रों का चयन करते समय मूल्य किस प्रकार प्रभाव डालता है ?

Ans. वस्त्रों का चयन तथा क्रय करते समय पारिवारिक बजट का ध्यान रखना अति आवश्यक है। कुछ अधिक मूल्य देकर यदि अच्छे गुणों वाला वस्त्र प्राप्त हो तो सस्ते, निम्न कोटि के कई वस्त्रों के स्थान पर एक वस्त्र ही खरीदना चाहिए । 

Q. 3. विश्वसनीय दुकान के चयन में कौन-कौन से बिन्दु सहायक हैं ?

Ans. 

1. स्वयं तथा परिचितों के अनुभव । 

2. रजिस्ट्रेशन हुई दुकान ।

3.कंपनी विशेष के शो रूम ।

4.उचित दर की दुकानें (कॉपरेटिव, स्टोर, सुपर बाजार आदि) ।

Q. 4. वस्त्रों को खरीदते समय उद्देश्य का क्या महत्त्व है ? 

Ans. वस्त्रों को खरीदने से पहले उनके प्रयोग को मस्तिष्क में रखना अत्यावश्यक है। यदि वस्त्र विशेष प्रयोजन के लिए खरीदा गया है तथा वह वही कार्य संतोषप्रद ढंग से कर पाता है। तो खरीदारी सार्थक कहलाती है।

Q.5. मौसम तथा ऋतु खरीदे गए वस्तु की उपयोगिता किस प्रकार बढ़ाते हैं ? 

Ans. सर्दियों में गरम रंगों (लाल, पीला, ओरंज, आदि) तथा गर्मियों में शीतल रंगों (नीला, हरा बैंगनी) का प्रयोग वांछनीय है। इसी प्रकार सर्दियों में मोटे तथा गरहमाहट वाले आसानी से सूखने वाले होने चाहिए । गर्मियों में पतले हल्के, अवशोषकता के गुण वाले तथा शीतलता देने वाले वस्त्र उत्तम रहते हैं ।

Q. 6. वस्त्रों की गुणवत्ता को परखने के लिए क्या ध्यान रखेंगे ? 

Ans. 

1. वस्त्र में प्रयुक्त तंतु 2 तंतुओं की बनावट का प्रकार । 3. परिष्कृति एवं परिसज्जा 4. कार्यात्मकता । 

Q. 7. वस्त्रों के चयन तथा क्रय को प्रभावित करने वाले कारकों के नाम लिखें।

Ans. 1. उद्देश्य (Purpose), 2. गुणवत्ता (Quality), 3. मूल्य (Cost) 4. मौसम या ऋतु (Season), 5. विश्वसनीय दुकान (Reliable shop), 6. आकार ( Size) ।


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (LONG ANSWER TYPE QUESTIONS)


Q. 1. विभिन्न स्तर (Quality) के कपड़े में से अपने लिए कपड़ों का चयन किस प्रकार करेंगे ?

Ans. (i) स्तर (Quality ) आज बाजार में विभिन्न स्तर के कपड़े मिलते हैं और हमें अपनी आवश्यकतानुसार विभिन्न स्तर के कपड़ों में से अपने लिए कपड़ों का चयन करना होता है।

(ii) टिकाऊपन ( Durability ) वहीं कपड़ा अच्छे स्तर का समझा जाता है जो मजबूत एवं अधिक दिन तक चलने वाला होता है। अतः कपड़ा खरीदते समय उसके टिकाऊपन का ध्यान रखना अत्यन्त आवश्यक है। कपड़े का टिकाऊपन कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे वह कपास, लिनन, रेशम, ऊन, टेरेलीन, नाइलोन, ओरलोन, डैक्रोन आदि किस तन्तु से बना है। उसकी बनावट झीनी है अथवा सघन । उसकी परिसज्जा (Finish) स्थायी है अथवा अस्थायी, उस कपड़े का रंग कच्चा है अथवा पक्का ।

(iii) पसीना सोखने की क्षमता- वही कपड़ा अच्छे किस्म का माना जाता है जो आसानी से पसीना सोख सके क्योंकि जो कपड़ा पसीना नहीं सोखते हैं उनसे व्यक्ति में बैचेनी हो जाती है। जहाँ सूती कपड़े आसानी से पसीना सोखते हैं वहाँ कृत्रिम तन्तु से बने कपड़े पसीना नहीं सोख सकते हैं। मिश्रित तन्तुओं से बने कपड़े मजबूत होने के साथ-साथ पसीना भी आसानी से सोख लेते हैं, अतः अच्छे स्तर के माने जाते हैं।

(iv) धोने में सुविधा ( Easy to wash ) — अच्छे स्तर के कपड़ों का धोना आसान होता है। जिन कपड़ों को धोना कठिन हो, उन्हें खरीदने के पश्चात् उपयुक्त बनाये रखने के लिए अधिक व्यय करना पड़ता है। कई बार हम अज्ञानतावश ऐसे कपड़ों को खरीद लेते हैं जिन्हें हम घर पर नहीं धो सकते हैं और बाहर से ड्राईक्लीन वगैरह करवाने से खर्चा अधिक होता है।

(v) रंग का पक्कापन (Colour fastness ) — कपड़े का रंग पक्का होना भी आवश्यक । प्रायः घटिया किस्म के सस्ते कपड़ों का रंग पक्का नहीं होता है और वे एक या दो बार धोने के पश्चात् पहनने योग्य नहीं रहते हैं। इसके विपरीत पक्के रंग के कपड़ों का अधिक समय तक आकर्षण बना रहता है। पक्के रंग के कपड़े यदि कुछ महँगे भी हाँ तो उन पर खर्च किया गया अतिरिक्त पैसा व्यर्थ नहीं जाता है। इसलिए सदैव सस्ते वस्त्रों का चयन करना समझदारी नहीं होती है ।

(vi) विभिन्न प्रकार की परिसज्जा (Different finishes )- प्राय: दुकानदार अपने कपड़ों की गुणात्मकता का बखान करते हैं तथा आजकल बाजार में विभिन्न प्रकार की परिसन्जाओं वाले कपड़े उपलब्ध हैं। कुछ अच्छी कम्पनियाँ तो कपड़े की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए अनेक प्रकार की परिसज्जा करती हैं परन्तु कुछ कम्पनियाँ अधिक परिसज्जा नहीं करतीं। 

Q.2. वस्त्रों को क्रय करने से पूर्व ध्यान देने योग्य बातें कौन-कौन सी हैं ?

Ans, वस्त्रों को क्रय करने से पूर्व ध्यान देने योग्य बातें : (i) खरीदे जाने वाले वस्त्र का प्रयोजन (purpose) क्या है ? क्या वह वस्त्र प्रयोजन के अनुकूल (suitable) है ? जिस प्रयोजन के लिए वस्त्र क्रय किया जा रहा है क्या यह उस आवश्यकता को पूरा करता है ?

(ii) क्या यही वस्त्र इस प्रयोजन के अतिरिक्त किसी अन्य प्रयोजन के अनुकूल। 

(iii) क्या यह वस्त्र गुणवत्ता तथा टिकाऊपन के दृष्टिकोण से कुछ समय के लिए चले (quality & durability) या जल्दी ही फट जाएगा ?

(iv) क्या धोने से वस्त्र का रंग हल्का तो नहीं पड़ जाएगा ?

(v) क्या यह वस्त्र सिकुड़ (Shrink ) जाएगा ? 

(vi) वस्त्र की संरचना (Texture) कैसी है ?

(vii) वस्त्र का रख-रखाव (Maintenance) आसान है या नहीं ?

(viii) क्या यह उचित कीमत (Cost) का है ? कहीं ऐसा तो नहीं कि अधिक मूल्य देकर हम नकली वस्तु (imitation) खरीद रहे हैं ?

(ix) क्या यह वस्व मौसम (season) के अनुकूल है ? कहाँ यह वस्त्र गर्मियों में गर्म और सर्दियों में ठंडा तो नहीं रहेगा ?

Q.3. वस्त्रों का क्रय करते समय किन बातों की ओर विशेष ध्यान रखना चाहिए

Ans. वस्त्र क्रय करते समय ध्यान देने योग्य बातें (Points to be considered while purchasing fabrics ) कोई भी व्यक्ति वस्त्र खरीदते समय उगा न जाए इसके लिए उसे निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए- 

(1) विश्वसनीय और अच्छी टेक्सटाइल मिल द्वारा निर्मित कपड़ा खरीदना चाहिए ( Buying of fabrics from a reliable & good mill ) — दिन-प्रतिदिन कपड़ा बनाने को

छोटी व बड़ी मिलों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है जिसके कारण उनमें स्पर्धा भी है। मिलें अपना माल अधिक-से-अधिक बेचने के प्रयास में कम मूल्य में निम्न स्तर का वस्त्र बाजार में लाती है। क्रेता को इसके प्रति सावधान रहना चाहिए ।

(2) विश्वसनीय दुकान से खरीदना ( Buying of fabrics from a reliable shop )— वस्त्र सदैव विश्वसनीय दुकान से ही खरीदना चाहिए जिससे धोखा होने की संभावना न हो

(3) सेल (Sale) से वस्त्र खरीदने के लिए वस्त्रों की किस्म की पूरी जानकारी होनी चाहिए (To have complete knowledge of variety of clothes when intended to buy from sales )— सेल में कई बार बहुत निम्न स्तर के वस्त्र भी होते हैं, इसलिए सेल से वस्त्रों को खरीदने के लिए वस्त्रों की किस्मों की सम्पूर्ण जानकारी आवश्यक है ।

(4) कपड़े पर मिल की छपी मुहर का निरीक्षण करना (Check the stamp of the mill before buying)— कपड़े के प्रत्येक मीटर पर मुहर लगी होती है तथा थान के शुरू में कपड़े की अन्य विशेषताओं, जैसे संरचना का प्रतिशत आदि का विवरण भी दिया हुआ होता है। वस्त्रों को खरीदने से पहले इन सभी बातों की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए । 

(5) तैयार वस्त्रों (Readymade clothes) में सिलाई, नाप (size) आदि का निरीक्षण करना-सिले सिलाये वस्त्र खरीदते समय वस्त्रों की सिलाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। कहीं ऐसा न हो कि वे जल्दी ही उघड़ जाएँ या सिलाई के लिए प्रयोग किये गये धागे कच्चे हों। इसके अतिरिक्त वस्त्रों की नाप को भी ध्यान करना आवश्यक है, जिसके लिए वस्त्र खरीदा जा रहा है क्या उसको यह वस्त्र कसा (tight) तो नहीं रहेगा, या बहुत ढीला (loose) तो नहीं रहेगा ।

(6) वस्त्रों की देखरेख का निर्देशन (Direction for care ) — वस्त्रों को कैसे धोना है, कैसे इस्तरी करनी है, इन सब बातों की जानकारी भी वस्त्र खरीदते समय की जानी चाहिए। इतना सब ध्यान रखने के बाद यदि क्रेता को वस्त्र खरीदते समय धोखा हो जाता है तो उसे निम्न पते पर सम्पर्क करना चाहिए तथा अपनी शिकायत भेजनी चाहिए। 

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