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Class12th 
Chapter Nameसिले सिलाये वस्त्रों की गुणवत्ता और कारीगरी | Readymade Garments: Quality and Workmanship
Chapter number16
Book NCERT
SubjectHome Science
Medium Hindi
Study MaterialsImportant questions answers
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सिले सिलाये वस्त्रों की गुणवत्ता और कारीगरी | Readymade Garments: Quality and Workmanship

प्रस्तुत अध्याय से सिले सिलाये वस्त्र की गुणवत्ता और उसकी कारीगरी के बारे में विवेचन किया गया है। 

सिले सिलाये कपड़ों को चयन के आधार है-उचित माप, आकर्षक स्टाइल पहने में सुविधाजनक, अच्छी कारीगरी, सरल देखरेख कीमत, रंग, देखने में आकर्षक और टिकाऊ, कार्य में सुविधानजनक । 

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उचित माप के लिए अपने आकार को जानें जैसे-हिप, कमर की पिछली लम्बाई तीरा। गुणवत्ता तीन प्रकार की होती है कपड़ा, कटाई, एक जैसे टाँके, एक-सा नमूना, जोड़, कालर और कफ, चुन्नट और तुरपाई, बटन, काज, जोड़ हिप, कतरन, अस्तर और अन्तर पृष्ठापन कड़ेपन के लिए कालर, गले की पट्टी, कप के अन्दर मुलायम और सुविधाजनक अस्तर लगा होना चाहिए। बुद्धिमान उपभोक्ता बनने के लिए उपभोक्ता को कुशल कारीगरी की जानकारी आवश्यक है।


अति लघु उत्तरीय प्रश्न (VERY SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


Q. 1. कोई ड्रेस खरीदते समय चयन का आधार क्या होना चाहिए ?

Ans. उचित माप, आकर्षक स्टाइल, अच्छी कारीगरी, कीमत, रंग, इत्यादि सिले सिलाये कपड़ों के चयन के आधार हैं ।

Q. 2. उचित माप के लिए कौन-कौन शारीरिक माप आवश्यक हैं ? 

Ans. कद, छाती, हिप, कमर की पिछली लम्बाई तथा तीरा आदि उचित माप के लिए आवश्यक हैं।

Q. 3. उच्च गुणवत्ता का क्या अर्थ है ?

Ans. उच्च गुणवत्ता का अर्थ है-कारीगरी, माल, डिजाइन में श्रेष्ठता ।

Q.4. कुशल कारीगरी की कुछ विशेषताएं बताएँ । 

Ans. कपड़ा, जोड़, चुन्नट, तुरपाई, कटाई इत्यादि कुशल कारीगरी की विशेषताएँ है।

Q.5. सिले सिलाये बस्बों की खरीद से पूर्व क्या देखना चाहिए ? 

Ans. सिले सिलाए वस्त्रों की खरीद से पूर्व इन्हें ध्यान से देखें-अनुप्रस्थ तन्तु, जोड़ चुन्नट, किनारों के मोड़, बटन, काज, बन्धक कॉलर, कफ, अस्तर, पेंडिंग इत्यादि ।

Q.6. मूल्य का गुणवत्ता से सम्बन्ध कैसा होता है ? 

Ans. उच्च मूल्य, मध्यम मूल्य और निम्न मूल्य का सीधा सम्बन्ध गुणवत्ता से है।

Q.7. बंद करने के साधन किसे कहते हैं ?

Ans. सभी परिधानों को विशेष रूप से कसे, चुस्त तथा छोटे गले वालों को पहनने उतारने के लिए उनमें कुछ खुले भाग की व्यवस्था की जाती है जिन्हें पहनने के बाद ब दिया जाता है। बंद के साधनों में है-काज, बटन, जपर, बकल, रिबन, टिज बटन, हुक आई आदि । 

Q.8. परिधानों में विभिन्न प्रकार के डिजाइन कैसे सजाये जाते हैं ?

Ans. परिधानों को विभिन्न प्रकार के नमूनों से सजाया जाता है। ये छपाई, कशीदाकारी तथा अन्य साजो-समान की मदद से बनाये जाते हैं । बुनावट,

Q.9. एक सिले सिलाये वस्त्र के लेवल पर विभिन्न मापों को अंकित करने के विमन तरीकों का वर्णन करें । 

Ans. सिले-सिलाये वस्त्र पर लेबल लगे होते हैं-इन लेबलों पर विभिन्न तरह से जानकारी की जाती है। वे किन प्रकार के व्यक्तियों के लिए उपयुक्त है आँका जा सकता है। साईज-2 – यह चार प्रकार की श्रेणियों में अंकित किया जाता है- (अ) छोटा (ब) मध्यम (स) बड़ा (द) अतिरिक्त बढ़ा ।

Q. 10. एक फ्रॉक के लेबल पर नाप दर्शाने के दो तरीके बताइए ।

Ans.1. छाती की नाप उदाहरण-20″, 22″, 24″, 2. नाप – S. M.L

Q. 11. मर्दों की सिली कमीज पर लगे लेवल पर उसकी नाप को किन दो तरीकों में दर्शाया जाता है ?

Ans. 1. कमीज के लेबल पर नाप लिखकर । 2. लेबल के साथ एक और छोटा टैग लगाकर नाप को दर्शाया जा सकता है

Q. 12. सिली- सिलाई स्कर्ट की प्लैक्ट (बटन की पट्टी) से सीमा संतुष्ट नहीं है। चार संभावित कारण क्या हो सकते हैं ?

Ans. सीमा के असंतुष्ट होने के चार संभावित कारण निम्न हैं-

(i) बटन की पट्टी वस्त्र के अनुरूप नहीं लगायी गयी है ।

(ii) कपड़ा बचाने के लिए बटन पट्टी छोटी लगा दी गयी है। 

(iii) बटन सही तरह से नहीं लगाये गये हैं।

(iv) बटन पट्टी इस तरह से लगायी गयी है कि स्कर्ट में झोल पड़ जाता है।


लघु उत्तरीय प्रश्न (SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


Q. 1. एक अच्छी-सी स्कर्ट खरीदते समय आप कारीगरी सम्बन्धी किन छः बातों का ध्यान रखेंगी ?

Ans. गुणवत्ता की दृष्टि से स्कर्ट खरीदने से पहले निम्नलिखित छः बातों का ध्यान है- 

1. स्कर्ट की झालर पट्टी ठीक से जोड़ी गयी है या नहीं तथा अस्तर अच्छी तरह सिला गया है

2. क्या जिप ठीक से लगायी गयी तथा ठीक से कार्य करती है तथा तुरपाई सीधी और से दिखायी देती है।

3. क्या पट्टी, कतरनें और बड़े नमूनों को कपड़े के साथ अच्छी तरह मिलाया गया है।

4. क्या बटन अच्छी तरह सिले गये हैं तथा बटन लगाने के स्थान पर कपड़े को मजबूती मे सिला गया है।

5. क्या कपड़े पर ‘वाश एण्ड बीयर’ का लेबल लगा हैं तथा झालर अस्तर आदि भी वाश एण्ड वियर हैं ? 

6. क्या वस्त्र के टुकड़े उसको अनुप्रस्थ तन्तुओं के अनुसार काटे गये हैं तथा कपड़े की मात्रा उचित है।

7. उन पर कढ़ाई, पाइपिंग, लेस आदि सफाई तथा पक्केपन से लगायी गयी है या नहीं।

Q. 2. रंगों के उचित चयन से क्या समझते हैं ?

Ans. रंगों के उचित चयन के लिए निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखना चाहिए।

1. छपाई में प्रयुक्त सभी रंग पक्के होने चाहिए ।

2. अलंकरणों के साजो-सामान, जैसे- रिबन, पाइपिंग, लेस आदि के रंग पक्के होने चाहिए परिधान पहनने वाले के रंग के अनुरूप होने चाहिए।

3. परिधान में प्रयोग किये गये सभी रंग एक-दूसरे से मेल खाते होने चाहिए ।

4. रंग के शेड या टिन्ट का पता सूर्य की रोशनी से चलता है। 

Q. 3. अपनी दो वर्षीय भतीजी के लिए सिला-सिलाया परिधान खरीदते समय आप किन चार बातों का ध्यान रखेंगे ?

Ans. वर्तमान युग सिले-सिलाए परिधानों का युग है। छोटे बच्चों को उनकी आयु के अनुसार अपने व्यक्तित्व को निखारने वाले वस्त्र के संबंध में निम्न चार बातों को ध्यान में रखना चाहिए- 

1. कपड़े व परिधान की सिलाई का टिकाऊ होना—परिधान टिकाऊ तथा अधिकतर देर तक चलने वाले हों। ऐसे परिधान आसानी से घर पर नहीं बनाये जा सकते। इनका आकार दो थोड़ा बड़ा होना चाहिए । 2. स्तर—परिधान की क्वालिटी (स्तर) को भी ध्यान में रखना आवश्यक है। यह सुन्दर या आकर्षक भी होना चाहिए । 

3. मूल्य — अपनी क्रय शक्ति को ध्यान में रखते हुए परिधान के मूल्य को देखना चाहिए।

4. उद्देश्य परिधान का चयन करते समय यह ध्यान में रखना चाहिए कि एक सामान्य रूप से पहनने के लिए है अथवा कभी-कभी पहनने के लिए ।

Q. 4. डिजाइन बनाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ?

Ans. 

1. डिजाइन पहनने वाले व्यक्ति की आयु, लिंग त्वचा के रंग तथा व्यक्तित्व के अनुरूप हो ।

2. डिजाइन फैशन के अनुकूल हो ।

3. परिधान में यदि दो या दो से अधिक डिजाइन हों तो उनमें पर्याप्त सामंजस्य स्थापित होना चाहिए । 

4. डिजाइन देने के लिए प्रयुक्त सामग्री निम्न कोटि की न हो अन्यथा पहली धुलाई के बाद वह बेकार हो जाएगी । 

Q.5. वस्त्र की किस्म से आप क्या समझते हैं ?

Ans. 1. रेशे का प्रकार 2. बनावट का प्रकार, 3. अलंकरण साजो-समान को क्वालिटी, 14. मिश्रित (Preshrik) किया है या नहीं 5. सेनफोरोइज्ड (Sanforized) है या नहीं, वस्त्र की देखरेख की विधि सरल है या कठिन ।

Q.6. राहुल अपनी सिली सिलाई पैंट की सीवनों से संतुष्ट नहीं है। असंतुष्ट होने चार संभावित कारण बताइए ।

Ans. जोड़ (Seams ) — कपड़े को उलट कर देखें कि क्या कपड़े के जोड़ में काफी दबाव है जो समय पड़ने पर खोल कर छोटा किया जा सके। जोड़ें सफाई से तनी होनी चाहिए उनमें जरूरत से ज्यादा दबाव नहीं होना चाहिए । उनकी चौड़ाई एक-सी होनी चाहिए। चौड़ी सिलाई | गुणवत्ता की निशानी है । 

चौड़ी सिलाई पहनने में अच्छी रहती है । तंग सिलाई में फेरबदल कठिन होता है। यदि कपड़े के धागे किनारों से आसानी से ढीले होकर खुल जायें तो उसके को इस प्रकार मोडना चाहिए कि मोड़ सिमटा न दिखे । 

ऊनी कपड़ों में अधिकतर किनारा ‘पिको’ कर दिया जाता है जिससे उनके धागे नहीं निकलते बच्चों के और अन्य उपय के जोड़ सपाट (रम, फैले या फ्रेंच सभी से ) सिलाई से सिले जाते है। सपाट सिलाई खराब नहीं होती । सिले-सिलाये कपड़ों के जोड़ मशीन द्वारा एक-दूसरे से गंधे रहते हैं। शीघ्र बनने वाला सस्ता तरीका है। जिससे कपड़ों के किनारों को फटने से बचाया जा सकता ।

Q.7. गुणवत्ता की दृष्टि से फ्रॉक खरीदने से पहले आप किन छः बातों का निरीक्ष करेंगे ?

Ans. गुणवत्ता की दृष्टि से फ्रॉक खरीदने से पहले निम्नलिखित छः बातों का ध्यान रखे 

1. फ्रॉक की झालर पट्टी ठीक से जोड़ी गयी है या नहीं तथा अस्तर अच्छी तरह गया है। 

2. क्या जिप ठीक से लगायी है तथा ठीक से कार्य करती है तथा तुरपाई सीधी और दिखाई देती है ।

3. क्या पट्टी, कतरनें और बड़े नमूनों के साथ अच्छी तरह मिलायी गयी है। 

4. क्या बन्धक अच्छी तरह सिले गये है तथा बटन लगने के स्थान पर कपड़े का सिला गया है।

5. क्या कपड़े पर ‘वाश एण्ड वीयर’ का लेबल लगा है तथा झालर अस्तर आदि भी यह वियर हैं।

6. क्या कपड़े के टुकड़े उसकी अनुप्रस्थ तन्तुओं के अनुसार काटे गये हैं तथा कपड़े को तन्तु मात्रा उचित है।

Q. 8. आप अपनी बहन के लिए सिला-सिलाया कमीज सलवार खरीदना चाहते है। खरीदने से पहले आप किन तीन भागों तथा किन दो-दो चीजों का निरीक्षण करेंगे।

Ans. सिला मिलाया कमीज सलवार खरीदने से पहले निम्न तीन भागों का निरीक्षण को इस प्रकार है-

1. सभी अन्य विस्तार, जैसे-पट्टियाँ, चुन्नट और मोड़ अच्छी तरह मुलायम और साफ होते चाहिए

2. टैग से पता चलना चाहिए कि ड्रेस नहीं सिकुड़ेगी । सभी जोड़ सफाई से और मजबूती से सिले हों ताकि वे निकलें नहीं ।

3. सलवार कमीज की कटाई बराबर और साफ होनी चाहिए, टाँके मुलायम और सफा जुड़े होने चाहिए ।

4. ध्यान रहे कि सभी बटन अच्छी गुणवत्ता वाले हों और मजबूती से टांके गये हो । 

Q. 9. अपने लिए सिली-सिलाई कमीज खरीदने से पूर्व आप उनमें से कौन-सी छ चीजों का निरीक्षण करेंगे व क्यों ?

Ans. अपने लिए सिली कमीज खरीदने से पूर्व आप उनमें से निम्न छः बातों का निरीक्षण करो-

1. कॉलर समान रूप से कटा होना चाहिए ताकि दोनों तरफ अच्छी तरह मिलें। उसे बिन सलवटों के अच्छी तरह सिला होना चाहिए ।

2. कड़ेपन के लिए कॉलर, गले की पट्टी और कफ के लिए अन्दर मुलायम और सुविधाजनक अस्तर लगा होना चाहिए। अस्तर को पहले से ही सिकुड़न नियंत्रित कर लेनी चाहिए ताकि वह धोने के बाद बराबर बनी रहे। 

3. बाजू की कटाई उचित होनी चाहिए ताकि पहनने में आसान हो, कफ सभी ओर से बराबर चाहिए ।

4.काज मजबूती से सिले होने चाहिए ताकि वस्त्र फटे नहीं ।

5. कमीज की कटाई बराबर और सफाई से होनी चाहिए ताकि टाँके मुलायम और सफा मुड़े होने चाहिए। 

6. टैग से पता चलना चाहिए कि शर्ट नहीं सिकुड़ेगी ।


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (LONG ANSWER TYPE QUESTIONS)


Q. 1. रेडीमेड कपड़ों का चयन किस आधार पर किया जाता है ? 

Ans. 1. कपड़ों की किस्म (Quality of fabric )- सबसे पहले परिधान में प्रयोग किये गये कपड़े की किस्म को देखना चाहिए। कपड़ा किन रेशों से बना हुआ है, उसकी संरचना कैसी है, बुनाई कैसी है इत्यादि । क्या कपड़ा सिकुड़ने वाला है, कपड़े की धुलाई तथा देखरेख कैसे करनी होगी। कहीं धोने से कपड़ा लटक तो नहीं जाएगा। परिधान पर लगे अलंकरण, जैसे-गोटा, बटन, लेस इत्यादि क्या कपड़े की किस्म से मिलते-जुलते हैं।

 क्या ये सही लगे हुए है; उदाहरण के लिए कई बार सूती कपड़े पर नायलान की लेस लगा दी जाती है। ऐसे वस्त्र को इस्तरी करने पर नायलोन की लेस जल जाती है जो कपड़े की शोभा को खराब कर देती है। इसके अतिरिक्त वस्त्र में लगे प्रत्येक जोड़ तथा अलंकरण की किस्म एक जैसी हो, इस बात का ध्यान करना चाहिए।

2. रंग (Colour ) रेडीमेड वस्त्र खरीदते समय इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि वस्त्र के रंग पक्के हों तथा उनमें उपयोग किये अलंकरणों के रंग भी पक्के हों। उदाहरण के लिए वस्त्र में लगी पाइपिंग कच्चे रंग की होने पर वस्त्र को धोने के बाद उसकी सारी सुंदरता को समाप्त कर देती है।

3. कपड़े की बुनाई तथा कारीगरी (Workmanship ) इसके बाद इस बात का ध्यान दिया जाता है कि परिधान तैयार करने की कौशल कैसा है। इसके अंतर्गत कपड़े को कटाई (cutting), सिलाई’ (seams), नमूने (designs), बंद करने के साधन (plackets) और (fasteners), बाह्य सज्जा तथा अलंकरण (Decoration) का ध्यान किया जाता है ।

(i) कपड़े की कटाई (Cutting) परिधान में लगने वाले विभिन्न टुकड़ों की कटाई

ठीक ढंग से होने पर ही फिटिंग (fitting) ठीक से (Proper) आती है। कपड़ा आदि ग्रेन लाइन (grain line) से न काटा जाए तो उस कपड़े से बने हुए परिधान में सुंदर ‘फाल’ (drape) नहीं आती और ये विचित्र तरह से खिंचे-खिंचे से लगते हैं। 

खिंचे रहने के कारण इनमें लचीलापन (flexibility) नहीं होता और ये जल्दी फट जाते हैं। इसलिए परिधान के खड़े रुख को कपड़े में से तथा आड़े रुख को कपड़े की चौड़ाई में से लिया हुआ होना चाहिए। तभी

परिधान की फाल (Drape) सुंदर आती है और वह आकर्षक लगता है। (ii) कपड़े की सिलाई ( Seams ) – रेडीमेड वस्त्रों का चयन करते समय उनकी सिलाई की ओर भी अवश्य ध्यान देना चाहिए ।

(a) सिलाई पक्की होनी चाहिए अर्थात् सिलाई के टाँके समीप होने चाहिए

(b) जहाँ-जहाँ कपड़ा काटकर आपस में जोड़ा गया है, वहाँ-वहाँ सिलाई इतनी मजबूत होनी चाहिए ताकि कपड़ा खिंचाव – तनाव को सहन कर सके और फटे नहीं ।

(c) रेडीमेड वस्त्रों में नीचे की लम्बाई तथा आस्तीन की लंबाई में किनारा मोड़ने की इतनी गुंजाइश होनी चाहिए ताकि लम्बे वस्त्रों के फैशन आ जाने पर उनको लम्बा किया जा सके ।

(d) प्रत्येक सिलाई स्थान पर पर्याप्त कपड़ा छोड़ा होना चाहिए जिससे यदि कपड़े को ढीला करना पड़े, कोई कठिनाई न हो ।

(e) अस्तर का हर भाग सिलाई से जुड़ा रहना चाहिए । कपड़ा की सिलाई में कई बार हाथों से तुरपाई पाइपिंग लगाने में या घेरे को नीचे से मोड़ने के लिए तुरपाई के टांके समीप समीप छोटे-छोटे होने चाहिए। तुरपाई का अंतिम छोर सही तरीके से बंद होना चाहिए, जिससे वह खुले नहीं । तुरपाई का कुछ धागा वस्त्र के ऊपर की तरफ भी

दिखाई देता है, इसलिए तुरपाई के धागे का रंग वस्त्र के रंग से मिलता हुआ होना चाहिए। (ii) कपड़ों पर नमूने (Design on clothes )

(a) वस्त्रों की सिलाई के समय पर उन बने विभिन्न नमूनों का भी ध्यान करना चाहिए।

कई बार किसी धारियों वाले परिधान में सिलाई वाली जगह से धारियाँ आपस में नहीं मिलतीं वस्त्र की सुंदरता को बिगाड़ देती है, इसलिए रेडीमेड वस्त्र खरीदते समय सिलाई वाले स्थान नमूने आपस में मिल रहे हैं यह नहीं इस बात का ध्यान करना चाहिए ।

(b) नमूनों के लगने वाले विभिन्न टुकड़े कपड़े की सीधी तरफ (Right side of te cloth) से जुड़े हुए हैं या नहीं।

(c) रोएँ और पाइल वाले कपड़ों में इस बात का ध्यान करना चाहिए कि उनकी सि ऐसी हो कि सारे कपड़े के रोएँ तथा पाइल एक ही दिशा में हो अन्यथा उन पर प्रकारा से ये अलग-अलग शेड (Shades) के दिखाई देते हैं ।

(d) रेडीमेड वस्त्रों पर जो भी नमूना लगा हुआ हो वह वस्त्र से हर प्रकार से मैच हो तथा देखने में भद्य न लगे ।

(iv) कपड़े को बंद करने के साधन (Placket and fastners ) प्रत्येक वस्त्र पहनने और उतारने के लिए उसका कुछ अश खुला रखा जाता है। उस अंश को वस्त्र के बाद बंद किया जाता है। वस्त्र में जिस स्थान पर वस्त्र को बंद करने वाले बटन इत्यादि जाते हैं उसे प्लेकेट (Placket) कहते हैं। जैसे-बकल, हुक-आई, फास्टनर्स (fasteners) 1 बंधन (ties or cords) प्रेस बटन सही तरीके से लगे हुए हों और सही तरह से अपना करते हों ।

प्लेकेट (Placket) पर लगे हुए ये उपकरण कपड़े के रंग से मेल खाते हुए हो त कपड़े की सुंदरता को बढ़ाने वाले हों। जहाँ पर जैसे बंद करने वाले उपकरणों की आवश्यकत हो वहाँ पर वैसे ही उपकरणों का प्रयोग किया गया हो । उदाहरण के लिए, जहाँ वस्त्र में बाद से यह न दिखाना हो कि वस्त्र का कटा हुआ अंश यहाँ है वहाँ पर प्रेस बटन्स (Press-buttons) का प्रयोग होना चाहिए । 

(v) कपड़े पर अलंकरण (Decoration ) — रेडीमेड वस्त्रों में उनको सुंदर बनाने के लिए सजावट भी की जाती है, जैस-कढ़ाई (embroidery), पैच का काम (applique work), लेस इत्यादि लगे हुए होते हैं। जो भी अलंकरण लगे हुए हों

(i) वे सब पक्के ल हुए होने चाहिए, (ii) उनका रंग उड़ जाने वाला नहीं होना चाहिए, (iii) वस्त्र के साथ खिल हुए होने चाहिए, (iv) मुख्य वस्त्र की किस्म से मिलते हुए होने चाहिए, (V) इस्तरी क वक्त उन्हें मुख्य वस्त्र से अलग ताप की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए, (vi) अलंकरणों सज्जा संतुलित होनी चाहिए, (vii) सज्जा ऐसी होनी चाहिए जिसको यदि बदलने की इच्छा तो बदला जा सके, जैसे वस्त्र की लम्बाई बढ़ाना । रेडीमेड वस्त्र यदि ऐसे हों जिसमें कॉलर और कफ बनाये गये हों तो उनको खरीदने से पास यह देख लेना चाहिए कि क्या कॉलर और कफ में उनको कड़ा रखने के लिए बकरम का उपयोग किया गया है या नहीं ।

4. फैशन ( Fashion )–—–— वस्त्रों की बुनाई तथा कारीगरी देखते समय इस बात का में ध्यान देना चाहिए कि क्या वह वस्त्र प्रचलित फैशन (fashion) के अनुरूप है। क्या इन क में दी गई सज्जा, लम्बाई, झालर इत्यादि को प्रचलित फैशन के अनुरूप ध्यान में रखा गया है।

5. आरामदायक (Comfortable ) रेडीमेड वस्त्रों का चयन करते समय इस बात क भी ध्यान देना चाहिए कि उन वस्त्रों को पहनकर व्यक्ति स्वयं को आराम अनुभव करेगा या नहीं कहीं ऐसा तो नहीं कि वस्त्र डालने पर उसे कहीं से कसकर खड़ा होगा, कहीं तनाव डालेगा कहीं ऐसा तो नहीं होगा कि वस्त्र में लगा रेशा उपकरण इत्यादि उसे चुभने वाले हों। 

6. नाप (Size ) — रेडीमेड वस्त्र खरीदते समय इस बात का भी ध्यान करना चाहिए कि जो वस्त्र जिस व्यक्ति के लिए खरीद रहे हैं वह वस्त्र उस व्यक्ति को भी आएगा पूरा कई रेडीमेड वस्त्र फ्री साइज (free-size) के मिलते हैं, इसलिए उनको खरीदते समय कोई नहीं होता । स्ट्रेच तथा टेक्सचर्ड यार्न से बनने वाले वस्त्रों की देख-रेख आसान होती है, इनक जीवन और उपयोग लंबे समय तक होता है क्योंकि ये परिधान टिकाऊ होते हैं।

7. व्यक्तित्व के अनुरूप (According to personality ) — वस्त्र व्यक्ति के व्यक्तित्व के अनुरूप ही होना चाहिए। इसके बारे में विस्तार से जानकारी हम पहले ही ग्रहण कर चुके हैं।

8. मूल्य (Cost )– वस्त्र का मूल्य खरीदने वाले की क्षमता के अनुसार होना चाहिए । अत: उपर्युक्त अध्ययन द्वारा स्पष्ट है कि यदि हमें रेडीमेड वस्त्रों (Readymade garments) को खरीदने का ज्ञान हो तो हम उचित मूल्य में सुन्दर व टिकाऊ वस्त्र खरीद सकते हैं। यदि दुकानदार किसी रेडीमेड वस्त्र के लिए अधिक धन निश्चित करता है, तो उससे वस्त्र खरीदते समय हमें किन बातों को आधार मानकर जाना चाहिए जिससे हम अच्छे वस्त्र खरीद सकेँ ।

Q.2. तुम अपनी बहन के लिए सिली-सिलायी कमीज सलवार खरीदना चाहते हो। खरीदने से पहले तुम किन भागों तथा इनमें से किन दो चीजों का निरीक्षण करोगे ? 

Ans. रेडीमेड सिले-सिलाये वस्त्रों का चलन अथवा फैशन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। इस विशाल उद्योग ने प्रत्येक श्रेणी के व्यक्तियों को तथा उनकी आवश्यकताओं तथा मूल्य सम्बन्धी सीमाओं को ध्यान में रखते हुए विभिन्न प्रकार के वस्त्र तैयार किये हैं। अतः आज का और तरीका सब कुछ सिला-सिलाया खरीदने का है। अपनी बहन के लिए सिली-सिलायी कमीज सलवार खरीदने हेतु हम निम्न तीन मुख्य भागों पर विशेष ध्यान देंगे जो परिधान तैयार करने के कौशल को दर्शाते हैं

(i) कटाई (ii) सिलाई (iii) वस्त्र को पूर्ण करने हेतु आवश्यक कारीगरो (1) कपड़े की कटाई— परिधान में कटाई में निम्नलिखित बातों पर ध्यान देंगे ।

(2) कटाई व्यक्ति (बहन) को आकृति के अनुसार हो (b) उसके आकार के अनुरूप हो ताकि फिटिंग अच्छी आये ।

(c) नवीनतम फैशन के अनुरूप हो 

(d) कपड़े के डिजाइन के अनुसार हो।

यदि कपड़ा ग्रेन लाइन के अनुसार न काटा जाये तो उस कपड़े का फॉल या लटकाव अच्छा नहीं आता । (ii) कपड़े की सिलाई (2) सिलाई मजबूत हो और चौड़ी हो, सीवन में कपड़ा अधिक दवा हो ताकि उधेड़ कर नाप का बनाया जा सके-

(b) बटन, काज अच्छे बने हों

(c) पाइपिंग, लेस, झालर आदि मजबूती से सिले हों

(d) तुरपाई और सीवन का छोर मजबूती से बन्द हो ।

(iii) वस्त्र को पूर्ण करने हेतु आवश्यक सामग्री-सिले सिलाये वस्त्र को सजाने के लिए अलंकरणों का प्रयोग किया हो, वे वस्त्र के अनुसार हो अर्थात कढ़ाई में प्रयुक्त रंग, कढ़ाई

जिन का नमूना आदि। कढ़ाई पक्के रंगों के धागे से ही होनी चाहिए ।

लैस उपयुक्त रंग की हो, अच्छी गुणवत्ता की हो और मजबूतों से सिली हुई हो । उपर्युक्त बातों पर गौर से निरीक्षण कर हम सही खरीदारी करने में सफल हो सकते हैं।


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