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Home Science Class 12 Chapter 17 Notes In Hindi PDF

Class12th 
Chapter Nameकपड़ों की देख-रेख | care of Clothes
Chapter number17
Book NCERT
SubjectHome Science
Medium Hindi
Study MaterialsImportant questions answers
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कपड़ों की देख-रेख | care of Clothes

प्रस्तुत अध्याय में वस्त्रों की देखरेख और उसकी धुलाई के बारे में अध्ययन किया गया है। वस्त्रों की उचित देख-रेख से उनको अधिक समय तक पहनने योग्य बनाया जा सकता है जिससे हमें नये वस्त्रों का निर्माण जल्दी-जल्दी न करना पड़े । लांडी को मुख्यता दो भागों में बाँटा जा सकता है-गंदगी निकालना और उन्हें सुन्दरता देने के लिए परिसज्जित करना । 

कोई भी निशान जो कपड़े को खराब करे उसे दांग कहते हैं। ये दाग विभिन्न रेशे पर विभिन्न प्रभाव छोड़ते हैं। इनका विभाजन इस प्रकार किया जाता है-प्राणिज दाग, वानस्पतिक दाग, चिकनाई युक्त दाग, खनिज युक्त दाग, रंग के धब्बे, अन्य धब्बे ।

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 दाग मिटाने के लिए अभिकर्मक विभिन्न प्रकार के होते हैं, जैसे-विरंजन अभिकर्मक, अम्लीय अभिकर्मक, क्षारीय अभिकर्मक, चिकने घुलनशील द्रव्य, चिकनाई सोखने वाले पदार्थ ।

दाग मिटाने की विधियाँ- डुबोकर, स्पंज, ड्रोप विधि तथा भाप है। साबुन और डिटरजेन्ट में अंतर से स्पष्ट है कि साबुन कठोर जल में निष्क्रिय रहते हैं तथा इनकी खपत बहुत ज्यादा होती है, परन्तु अपमार्जक कठोर जल में सक्रिय रहते हैं। कपड़ों का मौसमी संरक्षण प्रायः स्थान, संरक्षण के पात्र कपड़ों को सुरक्षित रखने के लिए तैयार करना, धोने वाले कपड़े, न धुलने वाले कपड़ों पर निर्भर करता है ।

गर्म कपड़ों को पॉलिथिन बैग अथवा अखबार में लपेटकर रखना चाहिए। अखबार की स्याही भी कीड़ों को दूर भगाती है। यदि रसायनों का प्रयोग किया गया हो तो उन्हें वस्त्रों के ऊपर रखना चाहिए क्योंकि उनका वाष्प वायु से भारी रहता है। बहुत लम्बे समय के लिए संरक्षित किये गये वस्त्रों को यदा-कदा धूप दिखा देना आवश्यक है ।


अति लघु उत्तरीय प्रश्न (VERY SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


Q. 1. सूती साड़ियों को संग्रह करने के दो सुझाव दीजिए ।

Ans. 1. सूती साड़ियों का संग्रह करने से पहले यह अच्छी तरह देख लें कि साड़ियों में बिल्कुल नमी न हो । 2. साड़ियों को हैंगर में टाँगकर आलमारी में लटकाएँ । 

Q.2. सम्भाल कर रखे हुए गर्म कपड़ों में कीड़े लगने के दो कारण बताइए। 

Ans. (1) उनके रेशे जन्तुओं के बाल होते हैं जिनकी संरचना प्रोटोनयुक्त होती है। ये प्रोटीन कोड़ों के लिए पौष्टिक हैं

(2) अधिक अवधि तक ऊनी रेशे मुलायम पड़ जाते हैं तथा नम हो जाते हैं जिससे कीड़ों को इन्हें चबाने में आसानी होती है । 

Q. 3. चरख चढ़ाना या दबाना से क्या अर्थ है ?

Ans. चरख परिसज्जा का एक और ढंग है जिसे साड़ियों या दुपट्टों पर प्रयोग किया जाता है। इसमें उनमें चमक आती है और मिट्टी कम लगती है । 

Q. 4. दाग मिटाने की विभिन्न विधियाँ कौन-सी हैं ?

Ans. (1) डुबोकर । (2) स्पंज । (3) ड्रोप विधि । (4) भाप ।

Q.5. कपड़ों की साप्ताहिक देख-रेख का क्या अर्थ है ?

Ans. समय से पहले ही अपने कपड़ों को पहनने के लिए तैयार रखना तथा पूरे सप्ताह और हर अवसर पर पहनने वाले कपड़ों को देखने का पहले से हो प्रबन्ध साप्ताहिक देख-रेख कहलाती है। 

Q.6. साबुन बनाने के लिए कौन-कौन से दो मुख्य पदार्थों का प्रयोग होता है ?

Ans. 1. वसा (घी अथवा तेल में रूप में )

2. कास्टिक सोडा (सोडियम होइड्रोक्साइड) का 40% विलयन । 

Q.7. कपड़ों की दैनिक देखरेख से आप क्या समझते हैं ?

Ans. उचित ढंग से तैयार हुआ एक व्यक्ति अपने कपड़ों को पहनने के समय से लेकर उतारने के समय तक देखभाल करता है। वह कपड़ों की दैनिक देख-रेख कहलाती है।

Q.8. डिटरजेन्ट बनाने के लिए प्रयोग किये जाने वाले दो पदार्थों के नाम बताइए ।

1. Ans. (1) सर्फेक्टैन्ट, (2) झाग अभिकर्मक ।

Q.9. जरी की साड़ियों को संभालते समय ली जाने वाली दो विशेषताओं का उल्लेख कारण सहित करें ।

Ans. जरी के कपड़े जैसे साड़ियों आदि को भी बहुत सावधानी से संग्रह करना चाहिए क्योंकि ढंग से न रखने पर इनकी जरी काली पड़ जाती है। इनमें फिनाइल आदि नहीं डालनी चाहिए क्योंकि इससे जरी काली हो जाती है। इन कपड़ों को भी समय-समय पर धूप लगवाते रहना चाहिए जिससे इनमें नमी न रहे और कोड़ों को पनपने का अवसर प्राप्त न हो ।

Q. 10. कपड़ों को धोते समय दबाव किस प्रकार दिया जा सकता है 

Ans. (1) रगड़ने से । (2) हल्के दबाव से । (3) सोखने के सिद्धान्त से । (4) धुलाई की मशीनों से ।  

Q11. दाग मिटाने के अभिकर्मक कौन-से हैं ?

Ans. (क) विरंजन अभिकर्मक- 1. आक्सीकरण ब्लीच 1 2. अपचयन ब्लीच । बाइ सल्फाइड ।

(ख) अपचयन ब्लीच सोडियम हाइड्रोसल्फेट, सोडियम

(ग) अम्लीय ब्लीच आक्जैलिक अम्ल, नींबू का रस ।

(घ) क्षारीय अभिकर्मक-एसिटिक अम्ल, सिरका वाशिंग सोडा, बोरेक्स, अमोनिया ।

(ङ) चिकने घुलनशील द्रव्य । (च) चिकनाई सोखने वाले पदार्थ ।

Q. 12. साबुन और डिटरजेन्ट में एक-एक अन्तर अन्तर बताएँ ?

Ans. साबुन वसा और क्षार से बनाये जाते हैं इसमें सोडियम सिलिकेट, मोड, नमक कुछ रेसिन होते हैं। डिटरजेन्ट-किसी भी सिन्थेटिक, जैविक और सफाई के पाउडर को कहते हैं।

Q. 13. कपड़े धोने के अच्छे साबुन के दो गुण लिखिए । 

Ans. 1. सही धुलाई के लिए साबुन से अच्छी झाग बननी चाहिए ।

2. वह पकड़ने में मजबूत होना चाहिए मुलायम या सख्त नहीं इसका रंग एकदम साफ चाहिए ।

Q.14. खून का धब्वा हटाते समय समय ठंडा पानी प्रयोग करने का एक कारण बताइए ।

Ans. खून का धब्बा हटाते समय ठंढा पानी प्रयोग करने से रक्त, जो प्रोटीन का बना है उसका स्कंदन नहीं होता तथा धब्वा आसानी से छूट जाता है।

Q. 15. घुलाई के पश्चात् तुम्हारा ऊनी स्वेटर लम्बा हो गया है। इसका एक कारण बताओ ।

Ans. ऊनी स्वेटर, ऊनी रेशों (बालों) के बने होते हैं । साबुन तथा डिटरजेन्ट के प्रभाव से वे खिंचकर मुलायम व लम्बे हो जाते हैं। इसलिए लाँड्री में धुले ऊनी स्वेटर लम्बा हो जाता है । 

Q. 16. लाँड्री का दो भागों में विभाजन से क्या अर्थ है ?

Ans. (1) कपड़ों से गंदगी निकालना ।

(2) कपड़ों को सफाई और नयापन होने के लिए परिसज्जित करना ।


लघु उत्तरीय प्रश्न (SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


Q.1. वस्त्रों का संरक्षण विस्तारपूर्वक लिखिए ।

Ans. वस्त्रों का संरक्षण-जितना आवश्यक वस्त्रों को धोना, सुखाना, इस्तरी करना है उतन ही आवश्यक वस्त्रों को संभालना भी है। रखे हुए वस्त्र आवश्यकता पड़ने पर तैयार मिलते है।

अतः सभी वस्त्रों को सहेज कर रखना चाहिए । वस्त्रों को रखने के लिए बाक्स या अलमारी का प्रायः प्रयोग किया जाता है। अलमारी (wardrobe) में वस्त्रों को रखना अधिक उपयुक्त रहता है क्योंकि उसमें अलग-अलग नाप

(size) के रैक बने हुए होते हैं, उनमें वस्त्र रखने से वस्त्रों की इस्तरी खराब नहीं होती और रैक्स (racks) में अलग-अलग पड़े होने के कारण उनको ढूँढने में कठिनाई नहीं पड़ती। अलमारी (wardrobe) में वस्त्रों को टांगने की भी सुविधा होती है। हैंगर (Hangers) बस् को टांगने से उनकी तह नहीं बिगड़ती। 

अलमारी ( wardrobe) में परिधान सम्बन्धी अलंकरण (Dress accessories) को रखने की व्यवस्था भी होती है जिससे उपयुक्त अलंकरण भी वस्त्रों के साथ पहनने के लिए उपयुक्त समय पर मिल सकें । अलमारी में सबसे नीचे का शेल्फ (shelf) जूते (shoes) रखने के लिए प्रयोग किया जा सकता है

| महँगे तथा दैनिक प्रयोग में न आने वाले वस्त्रों को डस्ट-प्रूफ-बैग (Dust-proof-bag) में बंद करके रखना चाहिए जिससे (1) उनको प्रयोग करते झाड़ना न पड़े और (2) श्रम तथ

समय की बचत हो (3) वस्त्रों की शोभा बनी रहे (4) वस्त्रों का जीवन-काल बढ़े । वस्त्रों को बंद करके रखने से पहले उनकी बेल्ट, बो, ब्रोच इत्यादि उतार लेना चाहिए। जैक को खाली कर देना चाहिए, उनकी जिप और बटन बंद करके रखना चाहिए, उनको धूप लगवा लेनी चाहिए ।

गर्म कपड़ों को अलमारी (wardrobe) में रखने से पहले अखबार में कागज के लपेट देव चाहिए । इससे उनमें कीड़ा नहीं लगता । अलमारी में रखे वस्त्रों को कीड़ा न लगे इसके लिए अलमारी में-

(1) कीड़े मारने वाली दवाई डालनी चाहिए ।

(2) पालीथिन बैग में मॉय-प्रूफ पाउडर या नैपथिलीन की गोलियाँ (Napthlene balls) डालकर रखनी चाहिए ।

(3) डी. डी. टी. का स्प्रे अथवा नीम की सूखी पत्तियाँ रखनी चाहिए ।

(4) पाराडाइक्लोरी बेंजीन (Para-dochloro benzene) का प्रयोग भी वस्त्रों की कौड़ों से सुरक्षा करता है।

(5) अलमारी की पूर्ण सफाई होनी चाहिए तथा टूटे-फूटे भागों की मरम्मत होती रहनी चाहिए । अलमारी में जूते, सैंडल्स इत्यादि को पालिश करके ही रखना चाहिए जिससे आवश्यकता के समय वे तैयार मिलें ।

संरक्षित वस्त्रों की समय-समय पर जाँच करते रहनी चाहिए तथा वस्त्रों को रैक्स में रखने का एक निश्चित स्थान बनाये रखना चाहिए ।

Q. 2. गर्म कपड़ों को संगृहीत करके रखते समय कौन-सी चार सावधानियाँ बरतेंगे

Ans. (1) कपड़ों को धोने के उपरान्त उनके ठीक प्रकार से खुश करके रखना चाहिए जिससे उनकी धूल निकल जाए । 

(2) अधिक धूप अथवा प्रकाश के पड़े रहने से वस्त्रों के रंग खराब हो जाते हैं इसलिए,

ऐसे वस्त्रों को अधिक समय तक धूप तथा प्रकाश में नहीं रखना चाहिए । 

(3) गर्म कपड़ों को अलमारी में रखने से पहले अखबार के कागज में लपेट देना चाहिए। इससे उनमें कीड़ा नहीं लगता । 

(4) अलमारी को पूर्ण सफाई होनी चाहिए तथा टूटे-फूटे भागों की मरम्मत होती रहनी चाहिए ।

(5) पालिथिन बैग में मॉथ फ्रुक पाउडर (Moth Proof Powder) या नैपथिलिन की लियाँ डालकर रखनी चाहिए ।

Q. 3. अपने बुने हुए स्वेटर को धोने के लिए आप धोने की किस विधि का प्रयोग करेंगे ? उसे कैसे सुखाएंगे और क्यों ?

Ans. बुने हुए अपने स्वेटर को धोने के लिए किसी कोमल द्रव्य अपमार्जक (डिटरजेन्ट का प्रयोग किया जाएगा । रीठे के छिलके के चूरे का प्रयोग भी किया जा सकता है। इसे छा सुखाया जायेगा ताकि उसका रंग न उड़ जाए। उसे हँगर में डालकर नहीं सुखायेंगे ताकि वह लटके नहीं ।

Q.4. मंड व गोंद में अन्तर स्पष्ट कीजिए ।

Ans.

मंड गोंद
1. स्टार्च पौधों में प्रकाश संश्लेषण द्वारा संश्लेषित किया जाता है। यह एक पोली संकेराइट है।गोंद रेजिन की श्रेणे जटिल रसायन है जो तनों की डक्ट (वाहिनियों) द्वारा उत्पन्न किया जाता है। 
2. स्टार्च (मंड) जल में अघुलनशील है।गोंद जल में घुल जाता है ।
3. विभिन्नों स्रोतों से प्राप्त मंड शरीर में पचते हैं तथा उपचयन से ऑक्सीजन उत्पन्न करते हैं। है गोंद का शरीर में पाचन नहीं होता पचते हैं तथा यह श्वसन में भाग नहीं लेता ।

Q.5. कपड़े धोने के लिए डिटरजेन्ट प्रयोग करने के दो लाभ लिखिए।

Aaux (1) डिटरजेन्ट गन्दगी को जल्दी हटाते हैं। ये चिकनाई वाली गंदगी को भी जल्दी करते हैं।

(2) डिटरजेन्ट में उपस्थित विरंजक पदार्थ सिन्थेटिक कपड़ों को भी बिना हानि पहुँचाए द करते हैं। उनमें चमक लाते हैं ।

Q.6. अपनी ऊनी शाल को धोने के लिए आप किस विधि का प्रयोग करेंगे ? अपने चुनाव का कारण लिखिए । उसे सुखाते समय आप किन दो बातों का ध्यान रखे

Ans. अपनी ऊनी शाल को धोने के लिए किसी कोमल द्रव्य अपमार्जक (डिटरजेन्ट) प्रयोग किया जाएगा। रीठे के छिलके के चूरे का प्रयोग भी किया जा सकता है। इस छा सुखाया जायेगा ताकि उसका रंग न उड़े। शाल को लटका कर सुखाना नहीं चाहिए लटकाने से इनका आकार बिगड़ जाता है ।

Q.7. सूती वस्त्रों का संरक्षण करते समय उन्हें फफूंदी से बचाने के लिए आप किन दो महत्त्वपूर्ण बातों का ध्यान रखेंगे ?

Ans. (1) सूती वस्त्रों को रखने के लिए उन्हें धोकर, प्रेस संग्रह किया जाता है कपड़े वाले अलमारी में या बॉक्स में वह करके रखा जाता है।

(2) सूती वस्त्रों को रखने से पहले देख लेना चाहिए कि उनमें नमी बिल्कुल न हो क्योंकि नमी से वस्त्रों में दुर्गंध उत्पन्न हो जाती है तथा फफूंदी लग जाती है । 

Q. 8. साबुन तथा डिटरजेन्ट में अन्तर स्पष्ट करें तथा धुलाई में इनके प्रयोग से होने वाले लाभ और हानियाँ भी बताएँ ।

Ans. रासायनकि रूप से साबुन- वसीय अम्लों के सोडियम लवण होते हैं। यह सोडियम ऐसिटेट, सोडियम ओलिएट, सोडियम पर्शमटेट के रूप में पाये जाते हैं। ये कठोर जल के साथ पर्याप्त झाग नहीं उत्पन्न करते ।

डिटरजेन्ट की रासायनिक संरचना सोडियम लोच सल्फेट अथवा सल्फोनिक अम्ल के सोडियम लवण होते हैं । ये कठोर जल के साथ भी पर्याप्त झाग देते हैं । इनके लाभ व हानियों निम्नलिखित हैं-

साबुनडिटरजेन्ट (अपमार्जक )
1. रासायनिक रूप में यह वसीय अम्लों के सोडियम लवण होते हैं।1. यह सल्फोनिक अम्ल के सोडियम लवण होते हैं। (सोडियम लाल सल्फेट)
2. यह कठोर जल के साथ पर्याप्त झाग नहीं देते।ये कठोर जल के साथ भी पर्याप्त झाग देते हैं।
3. यह त्वचा को अधिक संक्षारित (प्रभावित) करते हैं।यह त्वचा को कम संकारित ( प्रभावित) करते हैं ।
4. ये वस्त्रों के तानों (रेशे) में जम जाते हैं। ये वस्त्र के रेशों में जमते हैं।
5. ये जैव विघटीय होते हैं।ये जैव विघटीय नहीं होते हैं।

Q. 9. कपड़ों में नील लगाते समय ध्यान रखने योग्य दो सावधानियाँ वातइए । 

Ans. 1. नील को उत्तमुखता देखने के लिए नील वाली पानी को हथेली पर रखकर देखन चाहिए । यदि हथेली नीली दिखाई दे तो नील की मात्रा उचित है। यदि हथेली साफ नहीं दिखाई देती तो नील की मात्रा अधिक है।

2. नील लगाने के लिए धुले हुए गीले वस्त्र को इस नील वाले पानी में डुबोकर अच्छी तरह पानी में हिलाकर पानी से निकालने के पश्चात् निचोड़कर सुखा देना चाहिए ।

Q. 10. रेशमी कपड़ों को संग्रह करते समय आप कौन-सी चार सावधानियाँ बरतेंगे

Ans. (1) वस्त्रों को जिस सन्दूक में रखना हो उसे पहले धूप में रखना चाहिए ताकि उसमें से कीड़े निकल जाएँ । अलमारी में पूर्ण सफाई होनी चाहिए तथा टूटे-फूटे भागों की मरम्मत होती. रहनी चाहिए । 

(2) पॉलिथिन बैग में मॉथ प्रूफ पाउडर (Moth Proof Powder) या नेपालिथिलिन की गोलियाँ डालकर रेशमी कपड़े रखने चाहिए । रैक्स में रखने का निश्चित स्थान बनाये रखना चाहिए ।

(3) संरक्षित रेशमी वस्त्रों की समय-समय पर जाँच करते रहनी चाहिए तथा वस्त्रों को

(4) रेशमी वस्त्रों को नमी युक्त स्थान पर नहीं रखना चाहिए। नमी के कारण वस्त्रों में फफूंदों लग जाती है । फफुंदी के कारण कपड़े गल जाते हैं।” 

(5) जरी की साड़ियाँ बहुत सावधानी से संग्रह करना चाहिए। इनमें फिनाइल आदि नहीं डालनी चाहिए क्योंकि इससे जरी काली पड़ जाती है । 

Q. 11. निम्न में से किन्हीं दो धव्यों को दूर करने की विधि लिखिए- (1) सफेद सूती कपड़े से स्याही का धव्या । (2) रंगीन सूती कपड़े से चाय का धव्या । (3) कृत्रिम कपड़े से खून का थथा । 

Ans. (1) सफेद सूती कपड़े से स्याही का धय्या पानी से प्रभावित धब्बे वाले भाग को गीला करें, थोड़ा नमक छिड़कें तथा नींबू का टुकड़ा कुछ समय के लिए रगड़ें, स्याही के धब्बे गायब हो जाएंगे ।

(2) रंगीन सूती कपड़े से चाय का धया- आक्जैलिक अम्ल के घोल (विलयन) में प्रभावित धब्बे वाला रंगीन सूती कपड़ा दुबोकर रखें। धीरे-धीरे मलने पर खुले पानी में धोने पर धब्बे गायब हो जायेंगे । (3) कृत्रिम कपड़े से खून का धया-इन धब्बों को इस प्रकार छुड़ाया जा सकता है कि

प्रभावित भाग को इरिथाईयोन नामक रसायन में डुबोइये अथवा ब्लीचिंग पाउडर के विलयन में कुछ समय के लिए डुबोने पर धब्बे छूट जाते हैं।


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (LONG ANSWER TYPE QUESTIONS)


Q. 1. घर पर की जाने वाली कपड़ों की धुलाई की प्रक्रिया के चरण लिखिए।

Ans. वस्त्रों की घुलाई के सामान्य चरण (General steps of washing clothes )- (1) मैला होने पर वस्त्रों को शीघ्र धोना चाहिए विशेषकर त्वचा के सम्पर्क में आने वाले वस्त्रों को हर बार पहनने के पश्चात् धोना चाहिए। मैले वस्त्रों को दोबारा पहनने से उनमें उपस्थित मैल कपड़े पर जम जाती है और फिर उसे साफ करना मुश्किल हो जाता है। इसके अतिरिक्त कपड़े द्वारा सोखा पसीना भी उसके रेशों को क्षति पहुँचाता है ।

(2) मैले वस्त्रों को उतार कर किसी एक जगह पर टोकरी अथवा थैले में डालकर रखना चाहिए। मैले वस्त्रों को इधर-उधर फेंकना नहीं चाहिए अन्यथा धोते समय इकट्ठा करने में परेशानी होती है और समय भी लगता है । 

(3) धोने से पूर्व कपड़ों को उनकी प्रकृति के अनुसार अलग-अलग कर लेना चाहिए, जैसे सूती, रेशमी व ऊनी कपड़ों को अलग-अलग विधि द्वारा धोया जाता है इसी प्रकार सफेद व रंगीन कपड़ों को भी अलग-अलग करना आवश्यक है क्योंकि यदि थोड़ा-बहुत रंग भी निकलता हो तो सफेद कपड़े खराब हो जाते हैं।

(4) धोने से पूर्व फटे कपड़ों की मरम्मत कर लेनी चाहिए तथा उन पर लगे धब्बों को दूर कर लेना चाहिए । 

(5) धोने के लिए वस्त्र के कपड़े की प्रकृति के अनुरूप साबुन अथवा डिटरजेन्ट का चयन करना चाहिए । 

(6) वस्त्र को अधिक आकर्षक बनाने के लिए प्रयोग में आने वाली अन्य सामग्री का चयन भी कर लेना चाहिए, जैसे रेशमी वस्त्रों के लिए सिरका, गोंद आदि ।

(7) वस्त्रों को धोने से पूर्व धोने के लिए प्रयोग में आने वाले सभी सामान को एकत्रिका कर लेना चाहिए ।

(8) वस्त्रों की प्रकृति के अनुरूप धोने में सही-सही विधि का प्रयोग करना चाहिए । उदाहरण के लिए कुछ कपड़े जैसे रेशम अधिक रगड़ सहन नहीं कर पाते हैं अतः इन्हें हाथों कोमल दबाव से ही धोना चाहिए ।

(9) वस्त्रों को साफ पानी में भली प्रकार धोकर उनमें से साबुन अथवा डिटरजेन्ट अच्छी तरह निकाल देना चाहिए अन्यथा यह वस्त्रों के तन्तुओं को कमजोर कर देते हैं।

(10) वस्त्रों से भली प्रकार साबुन निकाल लेने के पश्चात् उनमें उपस्थित अतिरिक्त निकाल देना चाहिए । सुखाने के लिए सफेद वस्त्रों को उल्टा करके धूप में

को छाया में सुखना चाहिए अन्यथा उनके रंग खराब होने की सम्भावना रहती है। 

(11) को अधिक समय तक धूप में पड़े रहने से उन पर पीलापन आ जाता है। सुखाना चाहिए तथा रंगीन

(12) वस्त्रों के आकार को बनाए रखने के लिए उन्हें हेंगर पर अथवा इस प्रकारक चाहिए कि उन पर किसी भी प्रकार का अनावश्यक खिंचाव न पड़े। (13) सूखने के पश्चात् उन्हें इस्तरी करके रखना चाहिए ।

Q. 2. घर पर ही सफेद सूती साड़ी की धुलाई का पूर्णतया तैयार करने के चरणों का संक्षेप में वर्णन कीजिए। साथ ही प्रत्येक चरण की आवश्यकता भी स्पष्ट कीजिए।

Ans. सफेद सूती साड़ी की धुलाई-

1. धोना—(क) साबुन के प्रयोग से कपड़े की सतह कोमल हो जाती है। (Soap helps in breaking down the surface tension resistance of fabric) जिससे सादे पानी की अपेक्षा साबुन वाला पानी आसानी से कपड़े के तन्तुओं में पहुँच कर गन्दनी व धूल के कणों को बाहर निकालता है । 

(ख) वस्त्रों के मैल में धूल के कणों व चिकनाई होती है। साबुन के घोल से मैल बाली चिकनाई छोटे-छोटे कणों (Breaking of sin small particles) में बँट जाती है और पानी के साथ बाहर निकल कर सतह पर तैरने लगती है।

(ग) कपड़े से चिकनाई हटने के कारण, धूल ढीली पड़ जाती है और साबुन के घोल को ओर खींचकर बाहर निकल आती है।

2. सूती कपड़ों को खंगारना ( Rinsing) धोने के पश्चात् कपड़े को पानी में प्रकार खंगारना चाहिए । खंगारने के लिए पानी तब तक बदलते रहना चाहिए जब तक कपात में से साबुन का अंश पूर्णतः न निकल जाए । कपड़ों को ढंग से न खंगारने पर उनमें साबुन व रह जाता है, जो कपड़ों को क्षीण कर देता है। इसके पश्चात् कपड़े को निचोकड़कर अतिरिक्त जलांश निकाल देना चाहिए । 

3. नील व कलफ लगाना (Blueing and starching ) — वस्त्रों को उनकी प्रकृति से व प्रयोग के आधार पर उचित सामग्री व उचित विधि द्वारा नील व कलफ लगाना चाहिए। 

4. अतिरिक्त जलांश निकालना (Removal of excess water ) – वस्त्रों को निचोड़कर उनमें से अतिरिक्त पानी निकाल देना चाहिए । कोमल वस्त्रों को जोर से मोड़कर निचोड़ना न चाहिए क्योंकि ऐसा करने से उनकी बनावट खराब हो सकती है।

5. सूती कपड़ों को सुखाना (Drying ) — वस्त्रों को बाहर खुली हवा या धूप में सुखाना अति उत्तम है क्योंकि इससे वस्त्रों का विसंक्रमण होने के साथ-साथ उनमें चमक भी उत्पन्न होती है तथा जल्दी सूखते हैं। सूखने के बाद धूप में रखने से उनमें पीलापन आ जाता है। रंगीन वस्त्रों को उल्टा करके खुली हवा में छाया में सुखाना चाहिए अन्यथा उनके रंग खराब होने की संभावना होती है

6. सूती वस्त्रों की परिसज्जा ( Finishing ) – सूती वस्त्रों पर इस्तरी करके इनको परिसज्जा की जाती है । इस्तरी किए वस्त्र आकर्षक लगते हैं तथा शीघ्र मैले नहीं होते हैं।

1. सूती वस्त्रों पर कलफ लगाया जाता है, अतः इस्तरी करने से पहले वस्त्र पर पानी छिड़क कर, लपेट कर कुछ समय के लिए रखना चाहिए कि पूरा वस्त्र नम हो जाए । 

2. इस्तरी करने के लिए इस्तरी करने वाले बोर्ड (Ironing board) का प्र चाहिए । इसके अभाव में किसी समतल मेज का मोटा कम्बल और उसके ऊपर चादर बिछाकर इस्तरी करने के लिए तैयार किया जा सकता है ।

3. अपनी बाई ओर एक बर्तन में पानी और गीले कपड़े का टुकड़ा रखें तथा दाई ओर इस् रखें ।

4. सफेद कपड़ों को सीधी तरफ से गर्म इस्तरी करें तथर रंगीन कपड़ों को उल्टी तरफ से इस्तरी करें अन्यथा इनके रंग खराब होने की संभावना होती है ।

5. इस्वरी सदैव कपड़े की बनावट को ध्यान में रखकर सीधी रेखा में दायीं तरफ से बायीं तरफ की ओर करनी चाहिए ।

6. वस्त्र की कढ़ाई वाला भाग, प्लीट्स आदि उल्टी तरफ से इस्तरी करनी चाहिए, वह भाग खराब न हो जाए।

7. वस्त्र पर लगी लेस, झालर आदि अलग से पहले इस्तरी कर लेने चाहिए ।

Q.3. एक नीली रेशमी साड़ी को घर पर ही धोने की विधि का वर्णन कीजिए।

Ans. घर पर नीली रेशमी साड़ी को धोने की विधि-

(1) कभी भी रेशमी साड़ी को न भिंगाएँ ।

(2) हल्का द्रव डिटरजेंट या रीठा द्रव को टब में लेकर पानी के साथ अच्छी तरह झाग लें।

(3) सामान्य कमरे के तापमान का जल ही प्रयोग करें।

(4) हल्का दाब जैसे (Kneading and Saqueezing) तरीके से धोएँ । 

(5) बचा हुआ डिटरजेंट खुले पानी में खंगार कर निकालें ।

(6) सिरके की कुछ बूँदें या नींबू के रस की कुछ बूँदें आखिरी खंगालने में पानी में चमक देने के लिए डालें। 

(7) गोंद का विलयन कड़ापन देने के लिए प्रयोग में लाएँ ।

(8) हल्के दाब से निचोड़े ।

(9) छाया में सुखाएँ । 

Q. 4. कपड़ों के संग्रहीकरण के सामान्य नियम लिखिए ।

Ans. वस्त्रों की उचित देख-रेख एवं संग्रहीकरण के सामान्य नियम-चूँकि आजकल हर प्रकार का कपड़ा, जैसे-सूती, रेशमी टेरीकाट, पालीएस्टर, गर्म ऊनी कपड़े आदि के मूल्य बढ़ते जा रहे हैं और किसी भी परिवार के लिए आये दिन इन्हें खरीदना सम्भव नहीं है। अतः इन विभिन्न वस्त्रों की उचित देख-भाल करना अत्यन्त आवश्यक हो गया है। 

1. विभिन्न अवसरों के लिए उपयुक्त कपड़ों का चुनाव प्रत्येक अवसर के लिए एक विशेष प्रकार के कपड़े उपयुक्त रहते हैं, जैसे प्रतिदिन पहनने के लिए सूवी, टरीकाट, पालीएस्टर के कपड़े उपयुक्त रहते हैं क्योंकि यह मजबूत होते हैं, इन्हें बार-बार बिना विशेष सावधानी के धोया जा सकता है, इन्हें धोने के लिए विशेष साबुन की आवश्यकता नहीं होती है आदि-आदि। टेरीकाट या पॉलीस्टर के कपड़े सूती कपड़ों को अपेक्षा महँगे होते हैं|

तरन्तु इनकी देख-रेख करना आसान होता है और यही कारण है कि यह कृत्रिम तन्तुओं से बने कपड़े अधिक लोकप्रिय होते जा रहे हैं। रेशमी कपड़े बहुत आकर्षक महँगी ताथा नाजुक होते हैं, अतः इनका उपयोग विशेष अवसरों पर उपयुक्त रहता है। 

यदि रेशमी कपड़ों का प्रयोग प्रतिदिन करना आरम्भ कर दिया जाए तो अधिक धुलने के कारण ये शीघ्र ही कट जाएँगे और धन का अपव्यय होगा । अतः वस्त्रों की उचित साज-संभाल के लिए आवश्यक है कि विभिन्न अवसरों के लिए उचित कपड़ों का ही चुनाव किया जाए

2. कपड़ा फटने पर तत्क्षण मरम्मत प्रतिदिन कपड़ा पहनने से या फिर कहीं उलझ जाने से कपड़े फट जाते हैं। इन फटे, उधड़े या खोंच लगे कपड़ों की मरम्मत उसी समय कर देनी चाहिए अन्यथा तनाव पड़ने के कारण उसी जगह से कपड़ा और फट जाता है। बुने हुए कपड़े, जैसे- स्वेटर, कार्डीगन, दस्ताने, मोजे आदि का यदि एक फन्दा खुल जाए और तुरन्त मरम्मत न की जाए तो उसी खुले फन्दे की जगह से और फंदे खुलते जाते हैं।

3. दाग-धब्बे तत्क्षण छुड़ाना कपड़े पहन कर जब विभिन्न प्रकार के काम किये जाते हैं तो स्वाभविक है कि इन पर दाग-धब्बे पड़ जाएँ। दाग-धब्बे को एक दम छुड़ाना चाहिए, अन्यथा वह पक्के हो जाते हैं और उन्हें छुड़ाना कठिन हो जाता है। कपड़ों पर कोई भी चीज जब गिरे तो सर्वप्रथम उसे धो देना चाहिए और उसके पश्चात् धब्बे की प्रकृति के अनुरूप पदार्थों का उपयोग करके धब्बों को छुड़ाना चाहिए।

रेशमी तथा महँगे वस्त्रों पर रासायनिक पदार्थों का प्रयोग सोच-समझ कर करना चाहिए तथा बहुत अधिक नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे कपड़ा कमजोर हो जाता है।

4. कपड़े अधिक मैले न करना- -कपड़ों का प्रयोग करने के तुरन्त बाद ही धो देना चाहिए क्योकि त्वचा के पसीने मेल, धूल आदि के कारण कपड़ा गन्दा हो जाता है। कपड़ा बहुत अधिक मैला होने पर अच्छी तरह साफ नहीं होता, उसका रंग खराब हो जाता है तथा उसे रगढ़-रगड़ कर धोने पर उस कपड़े की संरचना भी खराब हो जाती है। 

इसके अतिरिक्त बहुत अधिक मैले कपड़े को धोने पर साबुन, श्रम तथा समय सभी अधिक लगते हैं। अतः कपड़ों को बहुत अधिक मैला नहीं करना चाहिए तथा कम मैलों को ही धो कर साफ कर देना चाहिए । 

5. धोने के साबुन, पाउडर आदि का प्रयोग करना—सदैव कपड़ों की प्रकृति के अनुरूप ही उन्हें धोने के लिए उपयुक्त सामग्री का प्रयोग करना चाहिए क्योंकि साबुन में क्षार होता है,

जो कि कपड़ों के तन्तुओं पर प्रभाव डालता है। रेशमी तथा ऊनी कपड़ों के लिए बहुत हल्का साबुन, जैसे लक्स फ्लेक्स, जैटील, रीठे आदि का प्रयोग उचित रहता है। सूती कपड़ों के लिए तेज साबुन जैसे कपड़े धोने का देसी साबुन, या पाउडर का प्रयोग करने से ही साफ होते हैं तथा इनके तन्तुओं को क्षति नहीं पहुंचती है। यदि ऊनी अथवा रेशमी कपड़ों को देशी साबुन या तेज पाउडर से धोया जाएगा तो इनके तन्तु कमजोर पड़ जाते हैं और यह शीघ्र नष्ट हो जाते हैं । 

6. विभिन्न कपड़ों को धोने की उचित विधि का प्रयोग करना— सूती, रेशमी तथा ऊनी वस्त्रों को धोने की अलग-अलग विधि होती है तथा इन्हीं विधियों के प्रयोग से कपड़ों की सुन्दरता तथा मजबूती को बनाए रखा जा सकता है उदाहरण के लिए रेशमी तथा ऊनी वस्त्रों पर बुरा का प्रयोग नहीं करना चाहिए तथा इन्हें रगड़-रगड़ कर नहीं धोना चाहिए । इसके विपरीत सूती कपड़ों को धोते समय ब्रश की सहायता से ही साफ किया जाता है ।

किसी भी प्रकार के कपड़े को धोने से पूर्व बहुत अधिक समय तक पानी में भिगोना नहीं चाहिए तथा उन्हें कपड़े धोने के डण्डे से पीटना नहीं चाहिए। कपड़ों पर से मैल हटाने के लिए बुश का प्रयोग उचित है। इससे न तो कपड़ा फटता है और मैल भी अच्छी तरह निकल जाती है।

ऊनी कपड़ों को धोने से पूर्व उनका खाका बनाना आवश्यक है तथा धोने के पश्चात् उसी खाके पर रखकर सुखाना चाहिए अन्यथा उनके आकार बिगड़ने का भय रहता है। इसका कारण है कि ऊनी कपड़े पानी सोख लेते हैं। अतः जिस आकार में सुखाए जाएँ वही आकार बना लेते । इन कपड़ों को भूल कर लटकाकर नहीं सुखाना चाहिए ।

7. विभिन्न कपड़ों को प्रेस करने की उचित विधि का प्रयोग करना — विभिन्न प्रकार के कपड़ों को प्रेस करने के लिए उचित विधि का ही प्रयोग करना चाहिए क्योंकि गलत विधि के प्रयोग से कपड़ों का आकार बिगड़ जाता है और उनका जीवनकाल भी कम हो जाता है।

 कृत्रिम तन्तुओं से बने कपड़ों को यदि उचित विधि द्वारा धोया तथा सुखाया जाए तो इन्हें पेस करने की आवश्यकता नहीं पड़ती है । यदि इन पर प्रेस करनी भी हो तो बहुत हल्की गर्म प्रेस करना चाहिए क्योंकि अधिक ताप से इन कपड़ों के तन्तु पिघल जाते हैं और कमजोर पड़ जाते हैं। ऊनी तथा गरम कपड़ों पर कोई पतला मलमल का कपड़ा रखकर प्रेस करना चाहिए जिससे उनके तन्तु खराब न हों। ऊनी कपड़ों पर तेज गर्म प्रेस भी नहीं करनी चाहिए क्योंकि इससे ऊन का तन्तु कमजोर हो जाता है। 

सूती कपड़ों पर गर्म प्रेस किया जाता है क्योंकि यह काफी ताप का सहन करने की क्षमता रखते हैं। चाहे कपड़ा कैसा भी हो, प्रत्येक को उसकी बुनाई के अनुरूप प्रेस करना चाहिए । प्रेस को कपड़े पर किसी भी दिशा में रगड़ने से कपड़े का आकार खराब हो जाता है। प्रत्येक वस्त्र के कपड़े के अनुरूप ही उचित ताप का प्रयोग करने से वस्त्रों को सौन्दर्य दुगना हो जाता है तथा उनकी मजबूती बनी रहती है ।

8. कपड़ों को उचित ढंग से संग्रह करना- कपड़ों की सुन्दरता को बनाये रखने तथा उनकी जीवन अवधि बढ़ाने के लिए उनका उचित संग्रह करना आवश्यक है। चाहे कपड़ों को कितने ही अच्छे साबुन से धोया जाए तो उन पर की गयी सारी मेहनत बेकार हो जाती है। वस्त्र प्रतिदिन तो धो कर पहने नहीं जाते हैं। वस्त्रों को प्रायः सप्ताह में एक बार या दो बार धोकर, प्रेस करके संग्रह किया जाता है। इन्हें कपड़ों वाली अलमारी में या बक्स में तह करके रखा जाता है। 

कपड़ों के उचित संग्रह के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना आवश्यक है- 

(1) वस्त्रों को रखने से पहले देख लेना चाहिए कि उनमें नमी बिल्कुल न हो क्योंकि नमी से वस्त्रों में दुर्गन्ध उत्पन्न हो जाती है और कीड़े लगने का भय भी रहता है।

(2) पहनने के पश्चात् यदि वस्त्रों को बिना धुले रखना हो तो उनका पसीना आदि का गीलापन सुखाकर तथा ब्रुश से मिट्टी झाड़कर रखने चाहिए। विशेषतः ऊनी एवं गर्म कपड़ों को झाड़ कर, ब्रुश से साफ करके, धूप में सुखा कर ही रखना चाहिए ।

(3) सूती कपड़ों को रखने के लिए छोटे कपड़े, जैसे-रूमाल, मोजे, बनियान आदि अलग करके अलग रखने चाहिए जिससे आवश्यकता पड़ने पर वह आसानी से मिल जाए। साड़ियाँ, पैंट, कोट आदि को हैंगर में टाँग कर अलमारी में लटकाना चाहिए। इन्हें तह करके रखने से इनकी प्रेस खराब हो जाता है और तह के निशान पड़ जाते हैं, जो कपड़े पहनने पर अच्छे नहीं लगते हैं । 

(4) ऊनी कपड़ों की आवश्यकता केवल सर्दियों में पड़ती है और इन्हें गर्मियों में सम्भाल कर रखना पड़ता है। गर्मियों में संग्रह करने के लिए ऊनी कपड़ों को सदैव धो कर या ड्राइक्लीन (Dryclean) करवा कर ही रखना चाहिए। गन्दे कपड़ों में कोड़े लगने का अधिक भय होता । एक-एक कपड़े को अखबार के कागज में लपेट कर रखने से ऊनी तथा गर्म कपड़े अच्छे रहते हैं। क्योंकि अखबार में प्रयोग की गई स्याही कीड़ों को पनपने से रोकती है। बक्से में नीम के पत्ते या फिनाइल की गोलियाँ डालने से ऊनी वस्त्र काफी समय तक सुरक्षित रखे जा सकते हैं। 

(5) सभी प्रकार के वस्त्रों चाहे वह सूती हो, ऊनी हो अथवा कृत्रिम तन्तुओं के बने हों अलमारी या बक्से में रखने से पूर्व उनके बटन, जिप आदि बन्द करने चाहिए अन्यथा इनके खराब होने का भय रहता है।

(6) अलमारी अथवा बक्सों में रखे वस्त्रों का समय-समय पर निरीक्षण करना चाहिए तथा धूप लगवाते रहना चाहिए । 

(7) जरी के कपड़े, जैसे साड़ियाँ आदि भी बहुत सावधानी से संग्रह करना चाहिए क्योंकि ढंग से न रखने पर इनकी जरी काली पड़ जाती है। इनमें फिनाइल आदि नहीं डालनी चाहिए क्योंकि इससे जरी काली हो जाती है। इन कपड़ों को भी समय-समय पर धूप लगवाते रहना चाहिए जिससे इनमें नमी न रहे और कीड़ों को पनपने का अवसर प्राप्त न हो।

(8) गन्दे कपड़ों को साफ धुले कपड़ों के साथ नहीं रखना चाहिए क्योंकि गन्दे कपड़ों की गन्दगी, दुर्गन्ध, धब्बों आदि साफ कपड़ों पर भी प्रभाव पड़ता है। यदि कपड़ों की देखभाल एवं संग्रह उपर्युक्त बातों को ध्यान में रख कर किया जाए तो कपड़ों की जीवनावधि बढ़ जाती है तथा वे आकर्षित स्थिति में रहते हैं ।

Q.5. घर पर ऊनी स्वेटर धोने के चरणों का संक्षेप में उल्लेख करें तथा कपड़े को धोते समय ली जाने वाली कुछ विशेष सावधानियों की सूची बनाइए ।

Ans. बुने हुए अपने स्वेटर को धोने के लिए किसी कोमल द्रव्य अपमार्जक (डिटरजेन्ट) का प्रयोग किया जाएगा। रीठे के छिलके के चूरे का प्रयोग भी किया जा सकता है। इसे छाया में सुखाया जायेगा ताकि उसका रंग न उड़ जाए। उसे हैंगर में डालकर नहीं सुखायेंगे ताकि वह लटके नहीं हैं ।

कनी वस्व क्योंकि हाथों के द्वारा चुने जाते हैं इसलिए इनकी बुनावट कुछ ढोली-डाली होती. है अर्थात् उनमें छिद्र होते हैं जिसके परिणामस्वरूप धूल के कण आसानी से इनके अन्दर प्रवेश कर जाते हैं । अतः ऊनी वस्त्रों को सदैव धोने पूर्व फटकार लेना चाहिए जिससे उनके अन्दर उपस्थित समस्त धूल बाहर निकल जाये । ऊनी वस्त्रों को धोने से पूर्व किसी मेज अथवा जमीन पर रखकर उसका रेखाचित्र किसी कागज पर पेंसिल की सहायता से खींच लेना चाहिए । 

वस्त्र को धोने के पश्चात् वस्त्र को पुनः उसी कागज पर विछाकार उसी रेखाचित्र के बराबर करके में भिगोना चाहिए। ज्यादा देर पानी में पड़ा रहने से ऊन के तन्तु कमजोर पड़ जाते हैं। ऊनी समतल स्थान पर छाया में ही सुखाना चाहिए। ऊनी वस्त्र को केवल 5 मिनट तक गुनगुने पानी चाहिए तथा इस्त्री (प्रेस) सदैव वस्त्र में उल्टी तरफ से करना चाहिए । 

वस्त्र अत्यधिक ताप को ग्रहण नहीं कर पाते हैं। इस्त्री (प्रेस) करते समय सामान्य ताप रखना विभिन्न अवसरों के लिए उपयुक्त कपड़ों का चुनाव-प्राचीन काल में प्रमुख रूप में दोन प्रकार के वस्त्र पाये जाते थे, जैसे सती रेशमी तथा ऊनी । इस कारण वस्त्रों का चुनाव करने में कोई कठिनाई नहीं होती थी। आजकल बाजार में अनेक प्रकार के वस्त्र पाये जाते हैं, जैसे-डेकरोन, नायलोन, ओरलोन रेयन आदि। 

इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रकार की परिसज्जाओं के द्वारा भी वस्त्रों के रूप में परिवर्तन करके उन्हें बाजारों में बेचा जाता है जिसके कारण कोई भी व्यक्ति इतने प्रकार के कपड़ों में से उपयुक्त वस्त्रों का चुनाव मुश्किल से ही कर पाता है । वस्त्रों का चुनाव निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखकर किया जा सकता है-

(1) खरीदा जाने वाले वस्त्र मजबूत तथा टिकाऊ होना चाहिए जिससे वह अधिक दिनों तक चल सके ।

(2) जिस मौसम में पहनने के लिए वस्त्र खरीदना हो वह उस मौसम के अनुकूल होना चाहिए। 

(3) वस्त्र देखने में आकर्षक तथा सुन्दर होने चाहिए जिससे पहनने वाला भी सुन्दर लगे। 

(4) जो वस्त्र खरीदा जाये वह प्रचलित फैशन के अनुरूप होना चाहिए ।

(5) वस्त्र ऐसा हो जिससे आसानी से धोया तथा इस्त्री किया जा सके । 

(6) वस्त्र जिस मूल्य पर खरीदा जा रहा है वह उचित है अथवा नहीं

(7) जो वस्त्र खरीदा जा रहा है उसको काटने तथा सिलने में कोई परेशानी न हो ।

(8) खरीदा जाने वाला वस्त्र धोने के पश्चात् किस रूप में रहेगा अर्थात् वह सिकुड़ेगा अथवा धुलने के पश्चात् खराब तो नहीं होगा । 

(9) वस्त्र ऐसे हों जिन्हें पहनने में असुविधा या परेशानी न हो।

(10) वस्त्रों का चुनाव करते समस रंग का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए । रंगों प्रयोग समयानुसार किया जाये तो वह देखने में अति सुन्दर तथा आकर्षक प्रतीत होता है I जैसे- तीज-त्यौहार, शादी व पार्टी में जाते समय चमकीले जरीदार तथा गहरे रंग के वस्त्रों का प्रयोग उचित लगता है। ऋतु का भी ध्यान रखना चाहिए । गर्मी के मौसम में सफेद या हल्क रंगों का प्रयोग किया जाना चाहिए। सर्दियों में गहरे रंगों का प्रयोग किया जाता है। छोटे-छोटे बच्चों को गहरे तथा चमकदार रंग अधिक प्रिय होते हैं। काले रंग के व्यक्ति को गहरे रंग का प्रयोग नहीं करना चाहिए ।  प्रौढ़ व्यक्तियों को सदैव हल्के रंग का प्रयोग करना चाहिए ।

वस्त्रों को धोते समय ध्यान देने योग्य बातें—

(1) वस्त्रों को धोने से पहले सभी कपड़ों की जेबें देख लेनी चाहिए ताकि उनमें कोई वस्तु न रह जाये ।

(2) वस्त्रों को अलग-अलग बाँट लेना चाहिए अर्थात् रंगीन तथा सफेद वस्त्रों को अलग-अलग कर देना चाहिए ।

(3) यदि कोई कपड़ा फटा हुआ है तो उसे सीकर धोना चाहिए नहीं तो वह धोने से अधिक फट सकता है।

(4) वस्त्रों को सीधा करके धोना चाहिए ।

(5) कपड़ों को धोने के पश्चात् खुले स्थान पर व स्वच्छ धूपदार स्थान पर सुखाना चाहिए।

(6) यदि कपड़े पर किसी प्रकार का धब्बा लगा हो तो उसे धोने से पूर्व छुड़ा देना चाहिए। 

(7) हर तन्तु को धोने की विधि अलग होती है। जैसे रेशमी कपड़ों पर ब्रुश का प्रयोग नहीं करना चाहिए तथा ऊनी व सूती कपड़ों को ब्रुश की सहायता से साफ किया जा सकता है। 

(8) मैले वस्त्रों का संग्रह नहीं करना चाहिए क्योंकि मैल के कारण वस्त्र गल जाते हैं तथा । उन्हें कीटाणु खा जाते हैं ।

(9) अधिक धूप तथा प्रकाश में पड़े रहने से वस्त्रों के रंग खराब हो जाते हैं इसलिए ऐसे कपड़ों को अधिक समय तक धूप तथा प्रकाश में नहीं रखना चाहिए । उपयुक्त साबुन का प्रयोग — वस्त्रों को स्वच्छ करने के लिए साबुन का प्रयोग किया जाता है । साबुन के माध्यम से वस्त्रों पर लगी गन्दगी व चिकनाई आदि अन्य वस्तुओं के धब्बों को धोकर साफ कर सकते हैं । 

साबुन में क्षार होता है जो कि कपड़ों के तन्तुओं पर प्रभाव डालता है । ऊनी तथा रेशमी कपड़ों के लिए बहुत हल्का साबुन, जैसे-सर्फ, लक्स आदि का प्रयोग करना चाहिए । अधिक क्षार वाले साबुन का प्रयोग करने से तन्तु कमजोर पड़ जाते हैं ।

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