Ncert Solutions Home Science Class 12 Chapter 18 Notes In Hindi PDF

WhatsApp Group (Join Now) Join Now
Telegram Group (Join Now) Join Now

Home Science Class 12 Chapter 18 Notes In Hindi PDF, Ncert Solutions Home Science Class 12 Chapter 18 Notes In Hindi PDF, Home Science Class 12 Chapter 18 Notes In Hindi PDF

Home Science Class 12 Chapter 18 Notes In Hindi PDF

Class12th 
Chapter Nameगृह विज्ञान और उसकी प्रयोगार्हर्ता | Home Science and Its Application
Chapter number18
Book NCERT
SubjectHome Science
Medium Hindi
Study MaterialsImportant questions answers
Download PDFHome Science Class 12 Chapter 18 Notes In Hindi PDF

गृह विज्ञान और उसकी प्रयोगार्हर्ता | Home Science and Its Application

प्रस्तुत अध्याय में गृह विज्ञान तथा उसकी उपयोगिता के बारे में विवेचन किया गया । गृह विज्ञान के विद्यार्थी आहार, वस्त्र, घर, शिक्षा, और चिकित्सा आदि सभी की देख-रेख परिवार के सदस्यों के अनुसार करने में सक्षम होते हैं। गृह विज्ञान द्वारा सिखाए गए कुछ साधनों द्वारा परिवार की आय बढ़ाने के तरीके ढूंढ सकती है; 

Home Science Class 12 Chapter 18 Notes In Hindi PDF

जैसे ट्यूशन द्वारा, बच्चों की देखभाल आहार सामाग्री को बेचकर, रंगोली, पुष्प सज्जा और धातु की सफाई आदि की कला का प्रयोग करना, हस्तशिल्प की वस्तुओं को बेचकर स्कूल के पश्चात् जो छात्राएँ गृह विज्ञान को व्यवसाय के रूप में अपनाना चाहती हैं उनको अपनी कला को और बढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है । 

विभिन्न व्यवसायों का प्रशिक्षण देने वाली गृह विज्ञान की संस्थाएँ हैं, जैसे-गृह विज्ञान कॉलेज, सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स कराने वाली संस्थाएँ, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, जैसे- पॉलटेकनिक, सुदूर (विस्तार) शिक्षा संस्थान ।


अति लघु उत्तरीय प्रश्न (VERY SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


Q. 1. गृह विज्ञान सम्बन्धित क्षेत्रों को अपना कैरियर बनाने के लिए प्रशिक्षण प्राप्त कैसे किया जा सकता है ?

Ans. गृह विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में स्नातक अथवा स्नातकोत्तर डिग्री के साथ शिक्षा स्नातक की डिग्री लेने के पश्चात् उच्च स्तर व उच्च माध्यमिक क्षेत्रों में अध्ययन का कार्य कर सकते हैं।

Q.2. गृह विज्ञान में शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात् विभिन्न सामुदायिक व समाज कल्याण कार्यक्रमों में किस प्रकार मदद कर सकते हैं ?

Ans. 1. समेकित बाल विकास सेवाएँ (Intepralted Child Development Ser vices) 2. प्रारम्भिक बाल्यावस्था शिक्षा (Early Children Education) कार्यक्रम के अन्तर्गत ।

Q. 3. गृह विज्ञान शिक्षा का क्या महत्त्व है ?

Ans. गृह विज्ञान का अध्ययन जीविका उपार्जन के लिए अनेक व्यवसाय एवं रोजगार प्रदान करता है।

Q.4. गृह विज्ञान शिक्षा स्वास्थ्य शिक्षा से किस प्रकार सम्बन्धित है ?

Ans. गृह विज्ञान शिक्षण में स्वास्थ्य विज्ञान की शिक्षा द्वारा सामान्य बीमारियों के कारण, लक्षण, संक्रामक काल, रोकथाम व उपचार का ज्ञान प्राप्त करके व्यक्ति परिवार के सदस्यों को सामान्य रोगों से बचाता है।

Q. 5. गृह विज्ञान के शिक्षण द्वारा प्राप्त कौशल का प्रयोग स्वरोजगार के लिए किस प्रकार करेंगे ?

Ans. 1. घर, ऑफिस, होटल में सजावट सम्बन्धी (Interior Decorator) 2. कपड़ा मिलों में (Textile Mills) में विभिन्न स्तर व प्रकार की नौकरी, जैसे- डिजाइन, रंगाई इत्यादि ।

Q.6. गृह विज्ञान शिक्षा के क्या लाभ हैं ?

Ans. गृह विज्ञान विषय में आहार व पोषण, स्वास्थ्य, सफाई, शिशु कल्याण आदि का

वैज्ञानिक ज्ञान दिया जाता है जिससे वह व्यक्ति प्रतिदिन के प्रत्येक कार्य को मनोवैज्ञानिक रूप से कर सकते हैं।

Q. 7. बाल विकास का अध्ययन करके तुम्हें स्वरोजगार के कौन से चार अवसर प्राप्त हो सकते हैं ?

Ans. बाल विकास का अध्ययन करके हम निम्न स्वरोजगार अपना सकते हैं-(क) क्रेच या डे केयर खोलकर (ख) नर्सरी स्कूल या खेल-कूद मनोरंजन का केंद्र खोल कर (ग) परामर्श संबंधी संस्थाए खोलकर (घ) ट्यूशन पढ़ाकर ।


लघु उत्तरीय प्रश्न (SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


Q. 1. गृह विज्ञान शिक्षण से आपको पारिवारिक आय की वृद्धि में कैसे सहायता मिल सकती है ? चार सुझाव दें।

Ans. गृह विज्ञान द्वारा सीखे गए कौशल का प्रयोग करके व्यक्ति अपनी वास्तविक आय में वृद्धि करके पारिवारिक आय में बढ़ोतरी कर सकता है- 

1. खाद्य-पदार्थों का संरक्षण करके—जब मौसम में खाद्य-पदार्थ फसल के समय सस्ते होते हैं उस समय वर्षभर के लिए अनाज खरीदकर रख सकते हैं तथा वर्ष भर अनाज को सुरक्षित रखने के लिए संग्रहीकरण आवश्यक है। 

2. खाद्य पदार्थों का परिरक्षण करके घर पर जैम, जैली, मुरब्बे, सॉस शरबत, आदि बनाकर सभी खाद्य पदार्थों पर होने वाले व्यय को कम किया जा सकता है । आचार

3. घर पर सब्जी उगाना- घर के अन्दर-बाहर खाली स्थानों पर सब्जी उगाई जा सकती है या फिर बड़ी पेटियों, गमलों आदि में भी हम प्रतिदिन प्रयोग में आने वाले कुछ सब्जियां उगाकर इन पर होने वाले व्यय को कम कर सकते हैं।

4. घर पर तैयार किए गए वस्त्र बाजार से मिलने वाले वस्त्रों से अधिक मजबूत व आकर्षक होते हैं तथा इनसे धन की बचत होती है।

Q.2. गृह विज्ञान के शिक्षण के पश्चात् आपको स्वरोजगार के कौन-से चार अवसर प्राप्त हो सकते हैं ? सूची बनाइए ।

Ans. गृह विज्ञान के प्रशिक्षण प्राप्त विद्यार्थी, गृह विज्ञान द्वारा अर्जित ज्ञान और कौशल से स्वरोजगार (self employment) भी कर सकते हैं, जैसे डे केयर सेंटर्स (Day Care Centres) खोल सकते हैं, बुटीक्स (Boutiques) खोल सकते हैं, सम्बन्धों को मधुर बनाए रखने के लिए परामर्शदात्री संस्थाएँ (Consultancy Services) खोल सकते हैं, श्रम बचाने वाले साधन (Labour Saving Services) में प्रयुक्त होने वाले विभिन्न उपकरण बना सकते हैं।

स्वरोजगार के लिए यदि आर्थिक अभाव हो तो वो भारत सरकार द्वारा चल रही अनेक योजनाओं जैसे ट्राइसेम (Trysem), टैंको तथा अन्य वित्तीय संस्थाओं से ऋण लेकर रोजगार शुरू कर सकते हैं। 

Q. 3. गृह विज्ञान की है शिक्षा स्वरोजगार में सहायक होने के लिए चार सुझाव दीजिए।

Ans. गृह विज्ञान शिक्षण द्वारा प्राप्त कौशल का प्रयोग गृह व लघु उद्योगों में किया जा सकता और पारिवारिक आय में बढ़ोतरी की जा सकती है। उच्चतम स्तर तक गृह विज्ञान शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात् कोई भी स्वरोजगार अपनाया।

जा सकता है। ऐसे अनेक गृह उद्योग हैं, जैसे घर पर खाद्य पदार्थ परिरक्षित करके बचत, घर पर कपड़े सिलना, कढ़ाई करना, स्वेटर, बुनना, पुस्तकों की जिल्द बाँधना, कागज के फूल- 1-पत्ती बनाना, कपड़ों पर विभिन्न विधियों द्वारा रंगाई करना, जैसे-बुटिक, बन्धेज आदि ।

Q.4. गृह विज्ञान में सीखी गई ऐसी चार कलाएँ बताइए जिन्हें प्रयोग करके आप अपनी पारिवारिक आय को बढ़ा सकती हैं ?

Ans. गृह विज्ञान की छात्रा के नाते तथा इस विषय को 12वीं कक्षा तक पढ़ लेने से मेरे में निम्नलिखित क्षमताएँ आ गई हैं जिससे परिवार की आय बढ़ सकती है। 

1. मैं अपने परिवार के सदस्यों की पोषण आवश्यकताओं को समझ सकती हूँ । उसके अनुरूप मैं भोजन तैयार कर परोस सकती हूँ ।

2. मैं आहारीय पदार्थों को संरक्षित करके उन्हें नष्ट होने से बचा सकती हूँ ।

3. मैं स्वयं को तथा परिवार के सदस्यों को रोगों के संक्रमण से बचा सकती हूँ । 4. मुझे उपभोक्ता के रूप में अपने कर्त्तव्यों व अधिकारों का ज्ञान हो गया है। इसलिए मैं धोखे में नहीं आ सकती । 

Q.5. गृह विज्ञान के अध्ययन के दौरान पाक कला की जो क्षमता आपने अर्जित की है उससे स्वरोजगार के कौन-से चार अवसर आपको उपलब्ध हो सकते हैं ?

Ans. गृह विज्ञान की उच्च शिक्षा को यदि प्राप्त कर ली जाए तो कई अन्य स्वरोजगार खोले

जा सकते हैं जिनमें से प्रमुख है-संरक्षण संबंधी व्यवसाय-जैम, जैली, अचार, मुरब्बे आदि बनाना तथा उनकी डिब्बाबंदी करके बेचना। इसके अलावा पापड़, बड़ियाँ आदि बनाकर तथा पैक करके बेचना । प्रशिक्षण कक्षाएँ खोलने तथा उन्हें कुशलता से चलाने में मदद होती है। जैसे-

1. कुकरी क्लासेज (Cookery Classes) ।

2. संरक्षण तथा डिब्बाबंदी (Preservation Cooking) | इसी प्रकार बेकरी खोलना, बना हुआ माल बेचना, चलते-फिरते जलपान गृह तथा कक्षाएं चलाना इत्यादि ।

Q.6. गृह विज्ञान की शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात् आपको रोजगार के कौन-से चार अवसर मिल सकते हैं ?

Ans. ऐसे अनेक रोजगार है जो गृह विज्ञान की शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात् मिल सकते है 

(i) जैम, जैली, अचार, मुरब्बे आदि बनाने वाले कारखानों में प्रोडक्शन सहायक, प्रोडक सुपरवाइजर आदि । 

(ii) बेकरी व कानफैक्शनरी (Bakkery and Confectionery) मे सुपरवाइजर प्रोडक्शन सहायक आदि । 

(iii) तैयार वस्त्रों के कारखानों में (Ready made Garment Factory) में विभिन्न पदों में नौकरी । 

(iv) कपड़ा मिलों (Textile Mills) विभिन्न स्तर व प्रकार की नौकरी जैसे- डिजाइन, रंगाई, बुनाई व छपाई आदि ।


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (LONG ANSWER TYPE QUESTIONS)


Q. 1. गृह विज्ञान का स्वरोजगार के लिए उपयोग लिखिए ।

Ans. गृह विज्ञान की शिक्षण सामाग्री इस प्रकार तय की गई है कि किसी सरकारी अथवा गैर-सरकारी संस्थान में उपयुक्त कार्य न प्राप्त होने की स्थिति में बालिका स्वयं अपने रोजगार का चयन करके उसे अपनी आवश्यकताओं तथा उपलब्ध साधनों के अनुसार उसका विकास कर सकती है । जिन विभिन्न कौशलों का विकास करके वह स्वरोजगार खोल सकती है उनका संक्षे में वर्णन यहाँ किया जा सकता है।

1. प्रिंटिंग—इस विषय में सिखाए गए सिद्धांतों, नियम तथा विधियों का यदि दैनिक जीवन में प्रयोग किया जाए तो प्रिंटिंग के किसी भी भाग विशेष का स्वरोजगार खोला तथा चलाया जा सकता है । इसमें निम्नलिखित में से किसी एक या अधिक को शामिल किया जा सकता है- 

2. क्रेच (Creche ) — गृह विज्ञान द्वारा क्रेच खोलने की विधि, उसके लिए आवश्यक साज-सामान तथा चलाए जाने वाले कार्यक्रमों के विषय में बताया जाता है । अतः क्रेच खोलना उनके लिए कठिन नहीं है, जिन्होंने गृह विज्ञान प्रशिक्षा प्राप्त किया है। इस दिशा में स्वरोजगार के साथ बच्चों का भविष्य है, क्योंकि महिलाओं की उन्नति तथा धनोपार्जन की ओर बढ़ते कदमों ने उनके समक्ष छोटे बच्चों की समस्या खड़ी कर दी है। जिसका यही सरलतम उपाय है। 

3. साबुन तथा डिटर्जेंट का निर्माण- इस कौशल को यदि व्यवस्थित तथा बुद्धिपूर्ण ढंग से प्रयोग किया जाए तथा महिलाओं की एक मण्डली सी बन जाए तो एक कॉलोनी की महिलाएं संगठित रूप से कार्य करके धनोपार्जन कर सकती हैं। गृह-विज्ञान की उच्च शिक्षा भी यदि प्राप्त की जाए तो कई अन्य स्वरोजगार खोले जा सकते हैं, जिनमें से प्रमुख हैं-

1. संरक्षा संबंधी व्यवसाय- जैम, जैली, अचार, मुरब्बे बनाना तथा उनकी डिब्बाबंदी करके बेचना । इसके अलावा पापड़, बड़ियाँ आदि बनाकर तथा पैक करके बेचना ।

2. वस्त्र – सिलाई (बुटीक) – आधुनिकतम वस्त्रों की डिजाइनिंग के बारे में ज्ञान होने से यह आजकल चलने वाला स्वरोजगारों में से सर्वोत्तम समझा जाने वाला रोजगार है। गृह-शिक्षण इसमें महत्त्वपूर्ण योगदान देता है ।

3. डाईंग तथा ड्राइक्लीनिंग-गृह-विज्ञान की शिक्षा इस विषय की जानकारी देती है तथा इसके साथ ही अत्यधिक लाभकारी रोजगार के अवसर प्रदान कराती है।

4 प्रशिक्षण कक्षाएँ चलाना-गृह-विज्ञान के उपविषयों का पर्याप्त ज्ञान निम्नलिखित प्रशिक्षण कक्षाएँ खोलने तथा उन्हें कुशलता से चलाने में मदद करता है । जैसे-

1. कुकरी क्लासिस (Cookery Classes) ।

2. स्टिचिंग क्लासिस (Stiching Classes)

Q.2 दैनिक जीवन में गृह विज्ञान का प्रयोग विस्तारपूर्वक लिखिए ।

Ans. पोषण विज्ञान- साधारणतया भोजन द्वारा पेट भरना ही ‘रसोई’ का कार्य समझा जाता है। पोषण विज्ञान कई मिथ्याधारणाओं को दूर करके इस बात की जानकारी देता है कि पौष्टिक हत्य क्या है ? कितने हैं ? तथा उनका क्या महत्त्व है ? कम कीमत तथा अन्य साधनों के प्रयोग से किस प्रकार संतुलित आहार की प्राप्ति की जा सकती है। विभिन्न बीमारियों, उनके लक्षण तथा रोकथाम की जानकारी भी गृह विज्ञान के अभिन्न अंग है। आहार आयोजन के की जानकारी द्वारा विभिन्न आयु वर्ग के रोगियों तथा स्त्री की विशेष स्थितियों के लिए आहार का निर्धारण करना अति सरल हो जाता है ।

गृह व्यवस्था — गृह को व्यवस्था हर उस व्यवस्था के समान जटिल है जिसे किसी भी बड़ी कम्पनी या संस्था करती है। अतः उतने ही विवेक तथा धैर्य की आवश्यकता गृह-व्यवस्थापिका को भी पड़ती है। गृह की व्यवस्था को जिन मुख्य वर्गों में पढ़ा जाता है। वे हैं-

1. घन व्यवस्था — आय संपूर्ति की आवश्यकता और साधन, बचत, विनियोग । 

2. उपभोक्ता शिक्षा मिलावट तथा इससे संबंधित नियम, उपभोक्ता के कर्तव्य तथा अधिकार, उपभोक्ता संरक्षण आदि ।

3. उपलब्ध साधन तथा उनकी व्यवस्था ।

4. कार्य-व्यवस्था, सरलीकरण आदि ।

उपरोक्त विषय किसी गृह निर्माता के लिए महत्त्व रखते हैं तथा इसका विस्तृत विवरण हम सभी को ज्ञात है।

बाल विकास- बाल विकास द्वारा ही बालकों की मनोवैज्ञानिक तथा शारीरिक आवश्यकता का पूर्ण ज्ञान हो पाया है। इस ज्ञान ने बालक के संपूर्ण विकास में अनेकों प्रकार से मदद की है। यह उपविषय किशोरी को विभिन्न आवश्यकताओं तथा व्यवहार का विस्तृत ब्योरा देता है। जिससे उनकी समस्याओं के निवारण के उपायों का ज्ञान हो पाता है। यही नहीं उनके मूलभूत कारणों को जानकर, उन्हें समाप्त भी किया जा सकता है ।

वस्त्र विज्ञान-वस्त्रों की रचना, देखभाल के उपयुक्त तरीकों का ज्ञान प्राप्त होने से गृहिणी इस विषय का पूरा-पूरा फायदा उठा सकती है। यह उपविषय वस्त्र के निर्माण से ले उनकी साफ-सफाई तथा संरक्षण की पूर्ण जानकारी देती है।

Q.3. पारिवारिक आय बढ़ने के लिए गृह विज्ञान में सीखे कौशल का उपयोग बताइए।

Ans. पारिवारिक आय की संपूर्ति के लिए इस विषय में सीखे कौशल की उपयोगिता : मात्र धन-संपन्नता से ही घर को सुन्दर तथा आकर्षक नहीं बनाया जा सकता है, बल्कि कलापूर्ण सामान तथा स्वयं को कुशलता द्वारा घर पूर्ण सुसज्जित किया जा सकता है। इस विषय में गृह व्यवस्था से संबंधित विभिन्न प्रकार के कार्यों को सिखाया तथा अभ्यास कराया जाता है, 

जिससे उन्हें गृह कार्यों के करने की सर्वोत्तम विधियाँ सिखाता है तथा धन, श्रम और समय के बचाव के लिए नये-नये प्रयोगों का ज्ञान देता है। वैज्ञानिक तथा तकनीको विकास के कारण उपलब्ध हुए नए-नए उपकरणों का प्रयोग करने का उचित तरीका तथा लाभ के बारे में ज्ञान भी दिया जाता है ।

संतुलित भोजन की योजना बनाने, उसे तैयार करने तथा परोसने के अनुभव दिए जाने के कारण विभिन्न साधनों के समुचित प्रयोग द्वारा संतुलित आहार की प्राप्ति की जा सकती है। इसी प्रकार परिवार के सदस्यों के लिए वस्त्र योजना बनाना, उपयुक्त कपड़ा खरीदना आदि सिखाया जाता है। इन सभी कौशलों के कारण अप्रत्यक्ष वास्तविक आय बढ़ जाती है, जो कुल पारिवारिक आय का एक मुख्य भाग है। धन का उपयोग तथा व्यवस्थापन गृह विज्ञान का महत्व विषद है, जिसके कारण धन की एक सीमा तक बचत की जा सकती है । 

संक्षेप में यह गृह विज्ञान के उद्देश्य हैं तथा वे इसी प्रकार तय किए गए हैं, जो बालिकाओं की छिपी हुई कुशलताओं का विकास करने में पूर्ण सहयोग करते हैं तथा प्रत्यक्ष अथवा अप्रयक्ष रूप में पारिवारिक आय

की संपत्ति होती है। 

Q.4. गृह विज्ञान शिक्षा द्वारा प्राप्त कौशल का प्रयोग किन तीन रोजगारों के लिए कर सकते हैं ?

Ans. गृह विज्ञान शिक्षा द्वारा प्राप्त कला या कौशल हम खाद्यों को संरक्षित कर उन्हें बेचने में कर सकते हैं।

(क) घर पर कैटरिंग या पाक कला की कक्षाएं (कुकिंग क्लासेज) चला सकते हैं। विज्ञान में सीखे गये सिलाई के कौशल को हम रंगाई-छपाई की कला को अपनाकर रोजगार के रूप में ले सकते हैं।

(ख) बाल विकास के अध्ययन से बच्चों की आवश्यकताओं और उनकी उचित देखभाल के बारे में जो जानकारी मिलती है उससे खाली समय में डे-केयर केन्द्र खोलकर धन कमा सकते हैं।

(ग) गृह-व्यवस्था में सीखी गई रंगोली और पुष्प सज्जा को भी सामयिक रोजगार के रूप में अपना कर धन कमाया जा सकता है । उपरोक्त प्रकार से हम रोजगार के लिए इन कौशल का उपयोग कर सकते हैं ।

NCERT Solutions for Class 12 Commerce Stream


Leave a Comment