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Home Science Class 12 Chapter 3 Notes In Hindi PDF

Class12th 
Chapter Nameअसमर्थ बच्चों की विशेष आवश्यकताएँ |  Special Needs of Handicapped Children
Chapter number03
Book NCERT
SubjectHome Science
Medium Hindi
Study MaterialsImportant questions answers
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असमर्थ बच्चों की विशेष आवश्यकताएँ |  Special Needs of Handicapped Children

प्रस्तुत अध्याय में असमर्थ बच्चों की विशेष आवश्यकताओं के बारे में जानकारी की बातें प्रस्तुत की गयी है। असमर्थ बच्चों के अन्तर्गत नेत्रहीन बालक बधिर बालक तथा विकलांग बालक इत्यादि आते हैं। प्रत्येक बच्चा दूसरे बच्चे से शारीरिक, मानसिक, सामाजिक व संवेदात्मक दृष्टि से भिन्न होता है । शारीरिक न्यूनता के विभिन्न प्रकार अपंगता, दृष्टिक्षति, श्रवणशक्ति में क्षति तथा दोषमुक्त प्राणी है । 

मानसिक न्यूनता तीन प्रकार की होती है। मध्यम-साधारण तथा सी-न्यूनता प्रसित बच्चों की विशेष आवश्यकताएँ होती हैं, जैसे-अधिक उद्दीपन, अधिक देखभाल, विशेष सहयोग, उचित उपकरण, विशेष शिक्षा, समाजीकरण इत्यादि । असमर्थ बच्चा वह है जिसका शारीरिक, मानसिक, भावात्मक तथा सामाजिक क्षमताएँ सामान्य या औसत से हटकर है तथा जिसे पूर्ण क्षमताएँ विकसित करने के लिए किसी खास शिक्षा प्रणाली की आवश्यकता पड़ती है । 

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आँख के रोग के विभिन्न कारण हैं, जैसे- जन्मजात अंधापन, उपार्जित अंधापन, पोषण की कभी से अंधापन होना तथा विल वित चिकित्सा के कारण अंधापन हो सकता है। इसी प्रकार बहरापन के विभिन्न कारण हो सकते हैं, जैसे प्रवाहक बहरापन, संवेदी तंत्रिका बहरापन तथा उपार्जित बहरापन इत्यादि । विकलांगता विभिन्न कारणों से होती है, जैसे जन्मजात विकलांगता तथा उपार्जित ऑर्थोपेडिक दोष इत्यादि । विकलांग बच्चों को उनका आयु के अनुसार कार्यकारी रूप से प्रतिरक्षण और प्रोत्साहन देना चाहिए जिससे वे अपने जीवन में सफलता प्राप्त कर सकें।


अति लघु उत्तरीय प्रश्न (VERY SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


Q.1. असमर्थ बच्चा कौन होता है ? दो उदाहरण दें।

Ans. मनोवैज्ञानिकों के अनुसार “असमर्थ बच्चा वह है जिसकी शारीरिक, मानसिक भावनात्मक तथा सामाजिक क्षमताएँ सामान्य या औसत से हटकर है तथा जिसे अपनी पूर्णक्षमताएँ विकसित करने के लिए कोई एक खास प्रणाली की जरूरत पड़ती है जैसे अंधा या मूंगा व बच्चा ।

Q. 2. बच्चों के शारीरिक विकलांगता के दो कारण दें।

Ans. बच्चों में विकलांगता के कई कारण हो सकते हैं। उनमें से दो निम्नलिखित है-

(क) वंशानुगत क्रम से विकलांगता आती है।

(ख) जन्म के समय या बाद में चोट लगने से ।

Q. 3. बच्चे को असमर्थ कब समझना चाहिए ?

Ans. बच्चे को असमर्थ तब समझना चाहिए जब से उपयोग नहीं कर सकता जैसे-अंधा, गंगा या बहरा

(क) बच्चा अपनी इन्द्रियों का पूर्ण

(ख) जिस समाज में बच्चा रहता हो उसके साथ एकीकरण नहीं कर सकता तब उसमें व्यावहारिक समस्याएँ उत्पन्न हो जाती है।

Q.4. दृष्टि दोष के दो कारण दें

Ans. (क) दृष्टि दोष जन्मजात हो सकता है।

(ख) दुर्घटना के कारण भी दृष्टि खो जाती है।

Q.5. बहरेपन के दो प्रमुख कारण क्या है ?

Ans. बहरेपन या सुनाई न देना इसमें श्रवण शक्ति में कुछ विकार होता है।

(क) बहरापन जन्मजात हो सकता है ।

(ख) यदि किसी शिशु को कोई संक्रमण हो जाये जैसे खसरा, बढ़ीमाता, संक्रामक तब भी बहरापन हो सकता है।

Q. 6. बहरे बच्चों की शिक्षा-संबंधी आवश्यकताएँ किन दो प्रमुख माध्यमों की सहायता से पूरी की जा सकती हैं ?

Ans. (क) बहरे बच्चों को “मौखिक तरीके तथा हॉट स्फुरण” माध्यम से शिक्षित किया जाता है। इसे Oral Method या Lip reading भी कहते हैं। इसमें सीखने तथा सिखाने वाले

दोनों को ही बहुत धैर्य व संयम की आवश्यकता होती है।

(ख) सांकेतिक भाषा (Sign Language) का इस्तेमाल करके उंगलियों के हाव-भाव से सम्पर्क स्थापित करते हैं।

Q.7. अपंग या अपाहिज बालकों की दो प्रमुख कौन-कौन सी समस्याएँ हैं जिनका उन्हें सामना करना पड़ता है ?

Ans. अपाहिज-लूले, लंगड़े व अंधे बालक अपाहिज बालक कहे जाते हैं। इनकी माँसपेशियाँ व हड्डियाँ दोषपूर्ण होती है। इन बच्चों की मुख्य समस्या है कि ये बालक स्वस्थ बालकों के मजाक का केन्द्र होते हैं। इसलिए इनमें हीनता की भावना, चिन्ता और कुंठा जैसे लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं। ये बालक भावनात्मक रूप से भी अपने आप को असुरक्षित महसूस करते हैं।

Q. 8. नेत्रहीन बच्चों को पढ़ाने के लिए कौन-कौन से दो उपकरण उपलब्ध हैं, उदारहण दें । 

Ans. पूर्ण अंधे व नेत्रहीन बच्चों को बढ़ाने के लिए विशेष यंत्रों की आवश्यकता होती है।

(क) ब्रेल लिपि – अंधे बच्चों को पढ़ाने के लिए ब्रेल लिपि का सहारा लिया जाता है। इस लिपि द्वारा बच्चे वर्ण, अंक तथा अक्षर लिखना व पढ़ना सीख जाते हैं। टाईपराइटर की तर ब्रेल-छः फन्नी उपकरण है 1

(ख) रिकार्डेड टेप्स इन टेप्स पर अध्याय टेप किये जाते हैं और इस टेप ध्वनि को सुनकर सीखा जाता है । श्रवणशक्ति के माध्यम से ये बालक जानकारी हासिल करते हैं। आजकल सबसे आधुनिक उपकरण कम्प्यूटर है जिसमें नेत्रहीन व्यक्तियों के लिए विशेष प्रावधान उपलब्ध होता है।

Q. 9. मानसिक न्यूनता के प्रकार कौन-कौन से हैं?

Ans. (i) मध्यम मानसिक न्यूनता,

(ii) साधारण मानसिक न्यूनता,

(iii) गहन एवं तीव्र मानसिक न्यूनता ।

Q. 10. जन्मपूर्व अपवादात्मकता क्या है ?

Ans. कई बार बच्चा जन्म से पहले गर्भावस्था में ही शारीरिक रूप से असमर्थ हो जाता है । उसे जन्मपूर्व अपवादात्मकता कहते हैं ।

Q. 11. समाजीकरण किसे कहते हैं ?

Ans. समाज के अन्य सामान्य व्यक्तियों की तरह रहना तथा समाज द्वारा स्वीकृत व्यवहार तथा अपनी संस्कृति के बारे में सहजता से चलना समाजीकरण कहलाता है ।

Q. 12. अपवादात्मक का क्या अर्थ है ?

Ans. अपवादात्मक– सामान्य से हटकर । अतः इसमें पिछड़े हुए और प्रतिभाशाली दोनों प्रकार के बच्चों को समाविष्ट करते हैं।

Q. 13. अनुवांशिक अपवादात्मकता का क्या अर्थ है ?

Ans. कई बच्चे माता-पिता से प्राप्त अनुवांशिकता के कारण भी शारीरिक अथवा मानसिक रूप से विकलांग हो जाते हैं; यदि माता-पिता के वंश सूत्रों में उपस्थित जीन्स में खराबी हो तो बच्चा अन्धा या बहरा या गूंगा भी हो सकता है ।

Q. 14. अपवादात्मक बच्चा किसे कहते हैं ?

Ans. जब कोई बच्चा विकास एवं वृद्धि के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं संवेगात्मक मानकों की सीमा से ऊपर या नीचे होता है तब उसे अपवादात्मक बच्चा कहते हैं ।

Q. 15. शारीरिक न्यूनता के प्रकार कौन-कौन से हैं ? 

Ans. अपगंता, दृष्टिक्षति, श्रवण शक्ति में क्षति, हकलाना या दोषयुक्त वाणी आदि शारीरिक न्यूनता के प्रकार हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न (SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)

Q. 1. बच्चों की विशेष आवश्यकताएँ कौन-कौन हैं ?

Ans. – (1) शारीरिक आवश्यकताएँ ।

(2) भावात्मक तथा सामाजिक आवश्यकताएँ ।

(3) प्रेम करने तथा पाने की आवश्यकता ।

(4) शैक्षिक आवश्यकताएँ ।

(5) मौखिक तरीके तथा होंठ स्फुरण ।

(6) सांकेतिक भाषा ।

(7) स्वावलम्बन की आवश्यकता ।

Q. 2. साधारण मानसिक न्यूनता से क्या तात्पर्य है ?

Ans. साधारण मानसिक न्यूनता—इन बच्चों का बौद्धिक स्तर मध्यम मानसिक न्यूनता प्रस्त बच्चों से कम होता है। ये बच्चे शारीरिक क्रियात्मक, संवेगात्मक व भाषा विकास में सामान्य बुद्धि वाले बच्चों से बहुत पिछड़े हुए होते हैं।

Q. 3. बहरेपन के क्या कारण हैं ?

Ans. (1) प्रवाहक बहरापन, जैसे कान में मैल जमा होने से, कान में कुछ गिरने से या बाहरी कान में सूजन !

(2) संवेदी तांत्रकीय बहरापन, जैसे श्रवण नाड़ी तथा दिमाग के तन्तुओं में खराबी के कारण, उपार्जित बहरापन, जन्मजात बहरापन । 

(3) प्रवाहक तथा उपार्जित बहरेपन मिले-जुले कारणों के कारण ।

Q.4. कृत्रिम / लुप्त अंग के लक्षण लिखें ।

Ans. (i) छोटे बच्चों में शारीरिक दोष हीन भावना जागृत करते हैं।

(ii) अपूर्णता की भावना ।

(iii) एकाकीपन-वे अपने आपको सामाजिक वातावरण से पृथक् रखते हैं ।

(iv) अपनी महत्त्वाकांक्षाओं तथा कार्यकुशलता में सामंजस्य न बना पाते हैं ।

विशिष्ट बालकों के प्रकार (Type of Special Children ) : 

(i) शारीरिक अक्षमता से युक्त बालक (Physically Handicapped Children)

(ii) अपराधी बालक (Delinquent Children) 

(iii) समाज विरोधी व्यवहार (Anti-Social behaviour)

(iv) पिछड़े या मंदबुद्धि बालक (Slow Learners)

(v) प्रतिभाशाली बालक (Gifted Child)

(vi) समस्यात्मक बालक (Problem Child )

(vii) संवेगात्मक कुसमायोजित बालक (Emotionally Maladjusted Child )

इनमें से अधिकत्तर बालक सामाजिक रूप से अवांछनीय बन जाते हैं जिन्हें समाज के साथ समायोजन करने में कठिनाई आती है। इस प्रकार के बालकों में से प्रमुख हैं-दोषपूर्ण अंगवाले बालक ।

Q.5. मानसिक न्यूनता कितने प्रकार की होती है ? नाम लिखें ।

Ans. मानसिक न्यूनता नौ प्रकार की होती है-

(i) गहन मानसिक न्यूनता (Idiots), (ii) मंद मानसिक न्यूनता (Imbecile), (iii) मूर्ख बुद्धि (Moron), (iv) हीन बुद्धि की सीमा रेखा (Border Line Defective),

(v) सामान्य से नीचा (Low Average), (vi) सामान्य (Average), (vii) सामान्य से ऊपर (Above Average), (viii) उत्कृष्ट (Superior), (ix) अत्युत्कृष्ट (Very Superior)।

Q. 6. मध्यम मानसिक न्यूनता से क्या समझते है ? 

Ans. मध्यम मानसिक न्यूनता – इसके अंतर्गत मन्द बुद्धि (Morons) का अध्ययन करते हैं। ये बच्चे सामान्य बच्चों की अपेक्षा छोटे व हल्के होते हैं। इन बच्चों का क्रियात्मक विकास अन्य बच्चों की अपेक्षा धीमी गति से होता है । सामान्य बच्चों की अपेक्षा भाषा विकास भी धीमी गति से होता है ।

Q. 7. गहन एवं तीव्र मानसिक न्यूनता से क्या समझते हैं ?

Ans. गहन एवं तीव्र मानसिक न्यूनता ग्रस्त बच्चे स्थायी रूप से दूसरों की देख-रेख के अधीन होते हैं। प्रायः ये कोई भी कार्य स्वयं बिना किसी की सहायता से नहीं कर सकते । 

Q.8. विकलांग बच्चों की विशेष आवश्यकताएँ कौन-सी हैं ?

Ans. (i) क्रियात्मक, प्रतिबोधक, ज्ञानात्मक तथा सम्पर्क स्थापित करने को शक्ति को बढ़ाना और प्रशिक्षण देना ।

(ii) अध्यापकों को चाहिए कि ऐसे बच्चों को कमियों व योग्यताएँ पहचानें ।

(iii) दैनिक समस्याओं को सुलझाने में सहायता करें ।।

(iv) शिक्षा पद्धति विकसित करने की आवश्यकता है ।

(v) उनको ऐसे प्रशिक्षण दें जो उनकी आयु के अनुसार हों, कार्यकारी हो और सामुदायिक हों।

(vi) ऐसे बच्चों को स्वतंत्र व स्वाबलम्बी बनाने के लिए विशेष ध्यान की आवश्यकता है।

Q. 9. नेत्रहीन बच्चों की विशेष आवश्यकताएँ कौन-कौन सी हैं ?

(1) शारीरिक आवश्यकताएँ

(2) प्रेम की आवश्यकता स्वतंत्रता की आवश्यकता ।

(3) भावात्मक तथा सामाजिक सुरक्षा की आवश्यकता 

Q. 10. अन्धेपन के कौन-कौन से कारक हैं ?

Ans. (1) जन्मजात अन्धता ।

(2) उपार्जित अन्धता |

(3) पोषण की कमी से अन्धता ।

((4) विलम्बित चिकित्सा ।

Q. 11. बच्चे में अन्धेपन के क्या लक्षण होते हैं

Ans. (1) आशिक रूप से अन्धे बच्चों के कार्यों/गति में फूहड़पन महापन व सावधानी होती है। 

(2) बच्चा सिरदर्द, आँखों के आगे धुंधलापन आने की शिकायत करता है।

(3) आँखों में लाली, पानी, सूजन, खुजलाहट आने की शिकायत करता है।

Q.12. एक ऐसे बालक की चार विशेष आवश्यकताएँ लिखिए जिसकी आधी टाँग हुई है। आप विद्यालय में उसकी सहायता कैसे कर सकते हैं ?

Ans. शैक्षिक आवश्यकताएँ— बच्चे की शिक्षा में ऐसे कार्य सम्मिलित होने चाहिए जिसमें कुछ कर दिखाने का प्रयोजन हो, जैसे-लिखना, खेलना, बुनना, नाचना तथा चित्रकारी करना इत्यादि । कमजोर व लुप्तांगों वाला बच्चा एक जगह से दूसरी जगह कैसे जा सकता है ? 

बैसाखी, (Creches), पहिये वाली कुर्सी या व्हील चेयर (Wheel Chair) के सहारे व घूम-फिर सकता है। 

(1) उसका बैग उठाकर उसे सीढ़ियाँ चढ़ने में सहायता की जा सकती है ।

(2) उसे कक्षा के कमरे में अगली पंक्ति में सीट देकर बिठाया जा सकता है

(3) उसकी स्कूल बस में चढ़ने या उतरने में सहायता की जा सकती है ।

(4) उसका यस्ता किसी अन्य व्यक्ति या बच्चे द्वारा उठाया जा सकता है।

Q. 13. न्यूनता ग्रसित बच्चों की विशेष आवश्यकताएँ कौन-कौन सी हैं ?

Ans. (i) अधिक उद्दीपन की आवश्यकता (Need for greater stimulation)

(ii) अधिक देखभाल की आवश्यकता (Need for greater care) 

(iii) विशेष सहयोग की आवश्यकता (Need for special assistance)

(iv) उचित उपकरणों की आवश्यकता (Need for apporpriate equipment) 

(v) विशेष शिक्षा की आवश्यकता (Need for special education)

(vi) समाजीकरण की आवश्यकता (Need for socialisation)

Q.14. सामाजिक रूप से पिछड़े हुए बच्चों के चार विशेष गुण लिखिए तथा बताइए कि स्कूल इनकी मूल आवश्यकताओं की पूर्ति में क्या योगदान दे सकता है ?

Ans. सामाजिक एवं शारीरिक रूप से पिछड़े बच्चों में (i) अन्धापन, (ii) बहरापान, (iii) गूंगापन, (iv) शारीरिक रूप से विकलांग तथा अति निर्धन परिवारों के अनाथ बच्चे हैं। 

स्कूल में शिक्षकों व साथी छात्रों से सहयोग-

(i) कक्षा में सामंजस्य स्थापित करने में सहयोग |

(ii) संवेगात्मक सुरक्षा प्रदान करना ।

(iii) उस पर तरस न खाकर उसका मनोबल बढ़ाना ।

(iv) उनकी अपंगता को देखते हुए खेलकूद व दूसरे कामों में उनकी सहायता करना ।

Q. 15. कृत्रिम/लुप्त अंग वाले बच्चों की विशेष आवश्यकताएँ कौन-कौन हैं ? 

Ans. (1) प्राकृतिक चिकित्सा, (ii) सामाजिक और भावात्मक आवश्यकता (iii) शारीरिक आवश्यकता (iv) शैक्षिक आवश्यकताएँ ।

Q. 16. विकलांग बालकों के लिए विशेष सेवाओं का वर्णन कीजिए।

Ans. विकलांग बालकों को कुछ विशेष सेवाएँ उपलब्ध कराई जानी चाहिए जो उनकी व्यक्तिगत आवश्यकताओं से जुड़ी हो जैसे-

(i) हड्डियों के शल्यचिकित्सक (Orthopaedi surgeon) और स्नायु तंत्र चिकित्साक (Neurologist) जैसे विशेषज्ञों द्वारा बालकों का जितना जल्दी हो सके निरीक्षण करवाना ।

(ii) शल्य (Surgical) चिकित्सा और आनुषंगिक (Ancillary) सेवाएँ, जैसे शारीरिक चिकित्सा (Physiotherapy) और व्यावसायिक चिकित्सा (Occupational Therapy) उपलब्ध कराना । 

(iii) मनोवैज्ञानिक (Psychological) निरीक्षण और आवश्यकतानुसार मानसिक सेवा उपलब्ध कराना |

(iv) कृत्रिम अंग लगाना । (v) प्रारंभिक वर्षों से ही उचित शिक्षा और व्यवसायपूर्व प्रशिक्षण दिलाना ।

(vi) उनके खाने, यस्व आवास आदि के लिए आर्थिक सहायता और शिक्षा आदि के उपकरणों के लिए अनुदान उपलब्ध कराना । (vii) समुचित मनोरंजन का प्रबंध करना ।

Q. 17. विभिन्न प्रकार की असमर्थता/ विकलांगता बताइए ।

Ans. विकलांगता शारीरिक, वाणी दोष तथा तंत्रिकीय दोष संबंधी होती है- 

(i) अपंगता, (ii) दृष्टि क्षति, (iii) श्रवणशक्ति में क्षति, (iv) हकलाने या दोषयुक्त वाणी वाले बालक, (v) मानसिक न्यूनता । 

Q. 18. असमर्थ बच्चे की परिभाषा लिखें।

Ans. बेकर के अनुसार, “असमर्थ बच्चा वह बच्चा है जिसकी शारीरिक, मानसिक, भावात्मक तथा सामाजिक क्षमताएँ सामान्य औसत से हटकर है तथा जिसे अपनी पूर्ण क्षमताएँ विकसित करने के लिए किसी खास शिक्षा प्रणाली को आवश्यकता पड़ती है ।

Q. 19. विशिष्ट बालकों के प्रकार लिखिए ।

Ans. विशिष्ट बालकों के प्रकार (Types of Exceptional Children ) – बालकों की विशिष्टताएँ मुख्यतः निम्न क्षेत्रों से संबंधित होती हैं-

1. शारीरिक अक्षमता से युक्त बालक (Physically Handicapped Children )– नेत्रहीन बालक, बधिर बालक, विकलांग बालक ।

II. सामाजिक रूप से अक्षम (Socially Handicapped Children) 1. मन्द बुद्धि बालक (Mentally Retarded Children) 2. प्रतिभाशाली बालक (Talented or Gifted Children) ।

3. भाषा दोष वाले बालक (Children with Language Disorder) ।  समस्यात्मक बालक (Problem Chidren) |

4. 5. संवेगात्मक कुसमायोजिम बालक (Emotionally Maladjusted Children ) |

6. पिछड़े बालक (Backward Children)।

7.समाज विरोधी बालक (Antisocial Behaviour)।

8. अपराधी बालक (Delinquent Children)।


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (LONG ANSWER TYPE QUESTIONS)


Q. 1. एक सामान्य विद्यालय में क्या विशेष सुविधाएँ होनी चाहिए जिससे अपंग बच्चे भी शिक्षा प्राप्त कर सकें ? ऐसा करने से क्या लाभ होंगे ?

Ans. एक सामान्य विद्यालय में निम्न सुविधाएँ उपलब्ध कराकर अपंग बच्चे को शिक्षा प्राप्त करने की सुविधा दी जा सकती है- 

(क) विद्यालय में उनके स्वतंत्र रूप से घूमने-फिरने के लिए प्रबन्ध होना चाहिए । बैसाखी व पहिये वाली कुर्सी के सहारे वह विद्यालय में घूम सकता है। कक्षाएँ नीचे की मंजिल में ही होनी चाहिए ताकि अपंग बच्चे उनमें पहुँच सकें और उन्हें बार-बार चढ़ना-उतरना न पड़े

(ख) अपंग बच्चों की शिक्षा में ऐसे कार्य शामिल किए जाने चाहिए जिनमें कुछ कर दिखाने की भावना हो, जैसे लेख लिखना, बुनना, चित्रकारी, मिट्टी के खिलौने बनाना आदि-आदि ताकि वे योग्यताएँ सीखकर आत्मनिर्भर बन सकें और उनमें आत्मविश्वास व आत्मनिर्भरता की भावना विकसित हो सकेँ ।

(ग) विद्यालय के बाहरी क्रियाकलापों में ऐसा प्रबन्ध हो कि वे भी हिस्सा ले सकें ।

(घ) अन्य साथियों को इस प्रकार की शिक्षा दी जानी चाहिए कि वे उनके सहायक बने न कि उन्हें चिढ़ाकर हीन भावना से ग्रसित करें। 

(ढ) चिकित्सा की उचित व्यवस्था हो ताकि अवसर पड़ने पर आसानी से चिकित्सा सहायता दी जा सकेँ ।

(च) यातायात की सुविधा हो ताकि आसानी से स्कूल आ जा सकें। यातायात में ड्राईवर व कण्डक्टर दोनों को निर्देश हो कि उनके चढ़ते-उतरते समय आसानी से चढ़ाए उतारें ताकि कहाँ दुबार दुर्घटना के शिकार न हो जायें ।

(छ) निःशुल्क शिक्षा दी जाये ताकि वे आसानी से प्रशिक्षण प्राप्त करके आत्मनिर्भर बन सके।

Q. 2. आपके विद्यालय में पढ़ने वाले अन्ये बालक की मानसिक व शारीरिक आवश्यकताएँ कौन-कौन सी हैं ? समंजन में विद्यालय इसकी किस प्रकार सहायता कर सकता है ?

Or, एक अंधे बच्चे की विशेष आवश्यकताएँ कौन-कौन सी हैं ? ऐसे सुझाव दें जो उसकी शिक्षा व निजी जीवन में जरूरी अनुरूपता लाने में सहायक हो ।

Ans. अन्चे बच्चे की विशेषताएँ (Special Needs of a Blind Child) अन्धे बच्चे को आत्मनिर्भर बनाने के लिए, उन्हें स्वावलम्बी और आर्थिक रूप से योग्य बनाने के लिए उन्हें हर प्रकार से सहायता देना अति आवश्यक है। संतोषजनक परिणाम पाने के लिए उनकी शारीरिक, सामाजिक तथा भावात्मक आवश्यकताओं की तरफ भी विशेष ध्यान देना चाहिए।

शारीरिक आवश्यकताएँ (Physical Needs ) अन्धे बच्चे के माता-पिता को उसके खाने-पीने तथा कपड़ों की तरफ विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्हें अपने दैनिक कार्य, जैसे-शौच, स्नान, कपड़े पहनना, खाना खाने आदि की शिक्षा देनी चाहिए। उन्हें सावधानी से घर में बिना वस्तुएँ गिराये तथा अपने को क्षति पहुँचाये बिना घूमने में विशेष सहायता करनी चाहिए । ऐसे बच्चों को प्रारम्भिक वर्षों से ही घूमने का प्रशिक्षण देना चाहिए। इन्हें अपने आप से और वातावरण

से भली-भाँति परिचित करवाना चाहिए। शारीरिक दुर्बलता के कारण ये बच्चे जल्दी ही रोगग्रस्त हो जाते हैं । अतः इन्हें डॉक्टर के पास ले जाना माता-पिता के लिए बहुत आवश्यक है । प्रेम की आवश्यकता (Need for Love ) – प्रत्येक बच्चे को प्रेम तथा सुरक्षा की भावना

की जरूरत होती है । ये भावनाएँ उसमें दूसरों के साथ सम्बन्ध स्थापित करने का आत्मविश्वास पैदा करती हैं। अन्धे बच्चे का समाज उसके माता-पिता ही होते हैं। माता-पिता का अपने बच्चे की असमर्थता को स्वीकारना बच्चे की समस्याएँ सुलझाने में मदद करता है और उसमें विश्वास का संचार करता है । प्रेम करना तथा प्रेम पाने की भावना विकलांग बच्चों में दृढ़ता उसे विकास के मार्ग पर तेजी से अग्रसर करती है I

भावनाएँ— प्रत्येक मनुष्य में भावनाएँ सहज रूप से विद्यमान होती हैं। क्या आप कुछ भावनाओं के नाम बता सकते हैं ?

प्रेम, घृणा, ईर्ष्या, डर और प्रसन्नता की भावनाओं से आप परिचित हैं। छोटे बच्चों को भावनाएँ उनके वश में नहीं होतीं । परन्तु जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है। अपनी भावनाओं को वश में करने लगता है। डर व भय से उसकी आंतों में शिथिलता आती है। असन्तुलित भावना

वाले बच्चों में आशिक रूप से मूत्राशय पर वश नहीं रहता जिसके कारण उनका मूत्र निकल जाता है। दुःख की भावना से भूख में कमी आती है और सेहत खराब होती है। बच्चे जब भावनाओं पर वश नहीं रख सकते तो उनके शरीर में ऐंठन व मुँह से झाग आने लगती है।

भावात्मक तथा सामाजिक सुरक्षा की आवश्यकता (Need for Emotional and Social Security ) माता-पिता तथा बहन-भाइयों को चाहिए कि विकलांग बच्चे जब भयभीत और तनावग्रस्त हों तो वे उन्हें अपना पूर्ण स्नेह व लाड़-प्यार दें। लगातार स्नेह व सौहार्दपूर्ण वातावरण में बच्चे अपने आपको तनावमुक्त कर सकेंगे और अपनी भावनाओं का वशीकरण भी कर सकेंगे । फलतः वे अपने सामाजिक वातावरण में सरलता से समावेश कर सकेंगे। सामाजिक वातावरण असमर्थ बच्चों के विकास के लिए अति अनिवार्य है।

स्वतंत्रता की आवश्यकता (Need for Independence ) — माता-पिता को विकलांग बच्चे को अपने वातावरण का भली-भाँति अन्वेषण करने में मदद करनी चाहिए ताकि वह अपनी दैनिक गतिविधियों को स्वतंत्रतापूर्वक पूरा कर सके। शुरू में उसे बाल बनाने, बटन बंद करने तथा जूतों के फीते बांधने में कठिनाई हो सकती है परन्तु निरन्तर उसका उत्साह बढ़ाने से उसमें आत्मविश्वास जागृत होगा। बच्चे के आत्मविश्वास को समय-समय पर व्यावसायिक सलाह देकर बढ़ाया जा सकता है। इससे उसमें आत्मनिर्भरता की बढ़ोत्तरी होगी। क्या आपने किसी नेत्रहीन व्यक्ति को ‘सफेद छड़ी’ लेकर चलते देखा है ? ऐसी छड़ी में घंटी भी लगाई जा सकती है।

शैक्षिक आवश्यकता (Education Needs ) — कम दृष्टि, आशिक रूप से दृष्टिहीन तथा पूर्णांध बच्चों को शिक्षित किया जा सकता है। बड़े अक्षरों वाली पुस्तकें तथा भली प्रकार से प्रकाशमय मेजों से दृष्टि-दोष वाले बच्चों को काफी सहायता मिल सती है। काले के स्थान पर हरे या सलेटी रंग पटल, चमकरहित कागज (unglazed paper) तथा हल्की काली पेन्सिल से बच्चे की दृष्टि में काफी सुधार होगा। विकलांग बच्चे विशेष उपकरणों तथा विशेष शिक्षकों की मदद से जल्दी सीख सकते हैं।

Q.3. कृत्रिम / लुप्त अंग बच्चों की विशेष आवश्यकताएं क्या है ? 

Ans. कृत्रिम / लुप्त अंग बच्चों की विशेष आवश्यकताएं- इन बच्चों की अंधे या बहरे बच्चों से अधिक आवश्यकताएँ होती हैं।

शारीरिक आवश्यकताएँ अपने दैनिक कार्यक्रमों को भलीभांति पूरा करने की आवश्यकता सबसे महत्त्वपूर्ण है । अभिभावकों को चाहिए कि दैनिक कार्य करने में बच्चे की सहायता करें परन्तु उसे कार्य स्वयं करने दें। अधिकतर माता-पिता बच्चे की विकलांगता के लिए स्वयं को दोषी मानते हैं और उस पर जरूरत से ज्यादा अनुग्रह रखते हैं। जैसे-जैसे समय अधिक बीतता है बच्चा स्वतंत्र या स्वावलम्बी होने की बजाय सहायता माँगने और लेने लगता है। 

कृत्रिम अंग विज्ञान की देन हैं। इनसे शारीरिक दोषों की पूर्ति होती है। व्यक्ति सामान्य दिखने लगता है और सामान्य रूप से कार्य कर सकता है।

प्राकृतिक चिकित्सा (Physiotherapy) के माध्यम से विकलांग बच्चों को अपने शरीर का पूर्ण रूप से इस्तेमाल करने में सहायता दी जाती है। कृत्रिम जूते तथा अंगों से काम करने का सुचारू रूप से प्रशिक्षण देने के अच्छे नतीजे सामने आये हैं।

सामाजिक और भावात्मक आवश्यकताएं-क्रीड़ा सामाजीकरण का एक आवश्यक अंग है । विकलांग बच्चे अधिकतर अपने आपको ऐसे सामूहिक कार्यक्रमों से अलग पाते हैं। ऐसा भेदभाव से बच्चों के सामाजीकरण पर कुप्रभाव पड़ता है। इससे बच्चा निराश और खिन्न रहने। 

लगता है तथा स्वयं को उपेक्षित महसूस करता है। सामाजिक भेदभाव व लांछन, बच्चे के सामूहिक व्यवहार में विघ्न उत्पन्न करते हैं। माता-पिता तथा मित्रों की दयादृष्टि के कारण बच्चे का आत्मसम्मान क्षीण हो जाता है। सामाजिक मत जैसे “विकलांग मस्तिष्क, विकलांग शरीर की

देन हैं” बच्चे के स्वरूप को चोट पहुँचाते हैं। ऐसे बच्चे अधिकतर उ जिद्दी स्वभाव के होते हैं। स्वतंत्र तथा स्वावलम्बी बनाने के लिए विकलांग बच्चों को स्नेह, सौहाई तथा उचित प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है ।

शैक्षिक आवश्यकताएँ—बच्चे की शिक्षा में ऐसे कार्य सम्मिलित होने चाहिए जिसमे कु कर दिखाने का प्रयोजन हो, जैसे-लिखना, खेलना, बुनना, नाचना तथा चित्रकारी करना इत्यादि। कमजोर व लुप्तांगों वाला बच्चा एक जगह से दूसरी जगह कैसे जा सकता है ? बैसाखी (Creches), पहिये वाली कुर्सी या व्हील चेयर (Wheel Chair) के साहरे वह घूम-फिर सकता है ।

Q.4. पोलियो के तीन विशिष्ट लक्षणों का वर्णन कीजिए। ऐसे रोगियों की देखभाल करते समय ली जाने वाली तीन सावधानियाँ भी लिखें । 

Ans. पोलियो – यह रोग प्रायः 1-2 वर्ष के बच्चों में अधिक होता है। यह रोग विषाणुओं के संक्रमण के कारण होता है । लक्षण— (i) पोलियो का आरम्भ बच्चे को तेज बुखार चढ़ने के साथ होता है ।

(ii) इस रोग के विषाणु बच्चे के तंत्रिका तन्त्र को प्रभावित करते हैं जिससे प्रभावी अंग लगभग बेकार हो जाता है और सूखने लगता है ।

उपचार व रोकथाम— (i) बच्चे को ठीक समय पर तथा सही अन्तराल पर पोलियो की प्रतिरोधक दवाई बूंदों के रूप में अवश्य देनी चाहिए !

(ii) भारत सरकार पोलियो जैसी शारीरिक असमर्थता पैदा करने वाली बीमारी से बच्चों को बचाने के लिए पोलियो पल्स (Polio Pulse) कार्यक्रम द्वारा प्रत्येक छोटे बच्चे को पोलियों को दवा निःशुल्क देती है।

Q.5. पोलियो से ग्रस्त बच्चे की विद्यालय में अनुकूल परिस्थितियों के लिए आप किस प्रकार सहायता करेंगी ?

Ans. बच्चा अपने बाल्यकाल (बचपन) में मौखिक पोलियो ड्राप्स नहीं ले पाया । परिणामस्वरूप वह पोलियो ग्रस्त हो गया । वह विकलांग हो गया। ऐसे बच्चे को विद्यालय में अनुकूलित करने के लिए उसकी

निम्न प्रकार से सहायता की जा सकती है- 

(i) उसका बैग उठाकर उसे सीढ़ियाँ चढ़ने में सहायता की जा सकती है।

(ii) उसे कक्षा के कमरे में अगली पंक्ति में सीट देकर बिठाया जा सकता है। 

(iii) उसकी स्कूल बस में चढ़ने या उतरने में सहायता की जा सकती है,

(iv) उसका बस्ता किसी अन्य व्यक्ति या बच्चे द्वारा उठाया जा सकता है।

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