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Class12th 
Chapter Nameअपने तथा परिवार के पोषण | NUTRITION FOR SELF AND FAMILY
Chapter number05
Book NCERT
SubjectHome Science
Medium Hindi
Study MaterialsImportant questions answers
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अपने तथा परिवार के पोषण | NUTRITION FOR SELF AND FAMILY


प्रस्तुत अध्याय में मनुष्य ( के लिए भोजन की आवश्यकता के बारे में जानकारी प्रस्तुत की गयी है । इस संबंध में एक व्यक्ति के लिए आहार आयोजन की मात्रा, इसके महत्व सिद्धांत तथा आहार को आयोजन को प्रभावित करने वाले कारकों का विशेष रूप से विचार किया गया है।

भोजन को प्रतिदिन सुचारू रूप से पौष्टिकता को सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए प्रस्तुत करने को आहार-आयोजन कहते हैं। एक परिवार के मुख्य भोजन हैं-नाश्ता, दोपहर का भोजन, शाम की चाय व रात का भोजन । आहार-आयोजन की उपयोगिता पौष्टिक आवश्यकताएँ, व्यक्तिगत पंसद व नापसंद, सुसज्जित भोजन परोसना । 

Ncert Solutions Home Science Class 12 Chapter 5 Notes In Hindi PDF

आहार-आयोजन को प्रभावित करने वाले कारक- (i) शारीरिक जैसे (आयु-लिंग, व्यवसाय व क्रियाशीलता), जलवायु, व्यक्तिगत, उपलब्ध संसाधन का संरक्षण, आहार का स्वरूप, पर्याप्तता, उपलब्ध संसाधन का संरक्षण, क्षुधा संतुष्टि, सामाजिक, सांस्कृतिक व धार्मिक तथ्य हैं।

सन्तुलित आहार विभिन्न खाद्य-पदार्थों के मिश्रण से बना वह आहार है जिसमें सभी पौष्टिक तत्व (प्रोटीन, कार्बोज, वसा, विटामिन, खनिज लवण एवं जल) शारीरिक आवश्यकताओं के अनुसार उचित मात्रा व अनुपात में हों। परिवार के सभी सदस्यों का सर्वोत्तम स्वास्थ्य तथा इस लक्ष्य की पूर्ति केवल सुनियोजित भोजन द्वारा ही की जा सकती है। इसलिए आहार आयोजन के संबंध में सतर्क रहना चाहिए। आहार आयोजन की व्यवस्था सही रहने से मनुष्य का स्वास्थ्य बना रहता है और शरीर में शक्ति रहती है।


अति लघु उत्तरीय प्रश्न (VERY SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


Q. 1. आहार-आयोजन में लचीलेपन का क्या अर्थ है ?

Ans. आपने परिवार के लिए बढ़िया तथा बहुत से व्यंजन बनाने का आयोजन किया है परन्तु परिवार को कोई सदस्य अचानक बीमार हो जाता है। इस भोजन में ऐसे सदस्य की जरूरत को नूरा करने का स्थान भी होना चाहिए। अतः परिवार के सभी सदस्यों के लिए संतोषजनक, रुचिकर वं परिवर्तनशील भोजन हो लचीलेपन का कारण है

Q. 2. ऐसे दो सस्ते प्रोटीनयुक्त पदार्थों के नाम दें जिन्हें एक शाकाहारी अपने आहार में सम्मिलित कर सकता है।

Ans. (क) सोयाबीन की बड़ी-इसमें सबसे अधिक प्रोटीन होता है। यह पूर्णतया शाकाहारी है।

(ख) दालें, हरी फलियों व मटर में भी प्रोटीन अधिक मात्रा में मिलता है। यह भी पूर्णतया सहकारी भोजन है ।

Q. 3. आहार विनियम सूची का क्या अर्थ है ?

Ans. ऐसी सूची जिसमें प्रत्येक वर्ग या खाद्य-समूह के एक समान पोषक मूल्य वाले खाद्य पदार्थों को सूचीबद्ध किया गया है।

Q. 4. आहार – आयोजन के दो लाभ बताइए ।

Ans. (1) इससे परिवार के सदस्यों की पोषण आवश्यकता पूर्ण हो जाती है। (2) आहारीय बजट के अनुरूप मितव्ययिता बनी रहती है तथा आहार व्यर्थ नहीं जाता है।

Q. 5. आहार की पर्याप्तता से क्या तात्पर्य है ?

Ans. आहार के आयोजन में इस बात पर विशेष ध्यान कि सभी पौष्टिक तत्त्व उचित मात्रा उपलब्ध हों तथा परिवार के सभी सदस्यों को मिले, आहार की पर्याप्तता कहलाती है।

Q. 6. आहार-आयोजन का अर्थ स्पष्ट करें।

Ans. सीमित साधनों के प्रयोग द्वारा समुचित पोषण की प्राप्ति के लिए पहले से किया गया नियोजन, आहार-आयोजन कहलाता है ।।

Q.7. आहार में परिवर्तन लाने का अर्थ बताइए ।

Ans. शारीरिक अवस्था तथा आवश्यकता के अनुसार आहार में परिवर्तन करना पड़ता है । शारीरिक परिवर्तन तथा विकास की अवस्थाओं में आहार की संरचना में परिवर्तन किया जाता है। जैसे- किशोरी, गर्भवती महिला, धात्री माता तथा रुग्ण अवस्था में परिवर्तित आहार |

Q.8. आहार-आयोजन में सन्तुलित आहार तालिकाओं का क्या महत्त्व है ?

Ans. आहार तालिका के पश्चात् गृहिणी को यह ज्ञात करना होता है कि वह अपने परियार के सदस्यों के उचित स्वास्थ्य हेतु विभिन्न खाद्य पदार्थ कितनी मात्रा में ले ।

Q.9. क्षुधा संतुष्टि से क्या अभिप्राय है ?

Ans. आहार द्वारा प्राप्त संतुष्टि जिससे काफी समय तक भूख नहीं सताती : जैसे वसायुक्त भोजन, हलवा-पुरी से अधिक समय तक संतुष्टि मिलती है जबकि मिठाइयाँ तथा चाकलेट संतुष्टि अधिक समय तक नहीं देते

Q. 10. रतौंधी किस तत्व की कमी से होती है ?

Ans. रतौंधी वियमिन A की कमी से होती है

Q. 11. सबसे सुपाच्य प्रोटीन किस खाद्य पदार्थ से प्राप्त होता है ?

Ans. सबसे सुपाच्य प्रोटीन, दूध से प्राप्त होता है ।


लघु उत्तरीय प्रश्न (SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


Q. 1. एक परिवार में दो प्रौढ़ व दो बच्चे हैं। इस परिवार के आहार का आयोजन करते समय कौन से चार कारक प्रभावी होते हैं ? 

Ans. परिवार के आहार का आयोजन करते समय प्रभावी कारक-

(i) आयु (Age)—– बच्चों की शारीरिक बढ़ोत्तरी के लिए अधिक प्रोटीन, विटामिन और खनिज लवण युक्त आहार को आवश्यकता होती है तथा शारीरिक कार्य करने वाले प्रौदों को ऊर्जा प्राप्ति के लिए अधिक कैलोरी की आवश्यकता होती है।

(ii) ऋतु (Season) सभी खाद्य पदार्थ पूरे वर्ष एक समान उपलब्ध नहीं होते हैं। जब कोई खाद्य-पदार्थ मौसम में अधिक उपलब्ध होता है तो उसे गृहिणी आहार के रूप में अधिक सम्मिलित करती है तथा बेमौसम में जब वह कम उपलब्ध होता है तो उसे आहार में कभी-कभी सम्मिलित किया जाता है।

(iii) खाद्य पदार्थ का मूल्य (Cost) – यदि गृहिणी के पास खाद्य पदार्थों पर व्यय करने के लिए धन अधिक हो तो परिवार के आहार में महँगे खाद्य पदार्थों का चयन कर सकती है। इसके विपरीत यदि उपलब्ध धन कम हो तो सस्ते खाद्य पदार्थों का चयन करना पड़ता है।

(iv) खाद्य-पदार्थों की उपलब्धि परिवार के आकार पर खाद्य पदार्थों की उपलब्धि का प्रभाव भी पड़ता है। यदि खाद्य-पदार्थ उपलब्ध होंगे तो उन्हें आहार में सम्मिलित किया जा सकता है।

Q. 2. आहार – आयोजन का महत्त्व समझाइए ।

Ans. परिवार के सभी लोगों के उत्तम स्वास्थ्य के लिए पोषण की आवश्यकता रहती है। इसके लिए गृहिणी भोजन की योजना बनाती है । गृहिणी की पोषण आयोजन पर परिवार के सदस्यों का स्वस्थ होना, रोगमुक्त रहना, सुदृढ़ रहना निर्भर करेगा। भोजन ऐसा हो

(i) जो देखने में आकर्षक, सुगन्धित व स्वाद में अच्छा हो । 

(ii) समय, श्रम और ईंधन किफायत से उपयोग में लाया गया हो ।

(iii) भोजन पर खर्च बजट के अनुसार हो ।

(iv) भोजन में एकरसता न हो।

(v) भोजन बनाने से पहले योजना बना लें। यदि खाना पड़ा है तो उसका उपयोग करें।

Q. 3. आहार – आयोजन के चार सिद्धान्तों की सूची बनाइए ।

Ans. आहार आयोजन के चार सिद्धान्त निम्नलिखित हैं-

(1) पौष्टिक आवश्यकताओं का ज्ञान—संतुलित आहार की प्राप्ति तब तक संभव नहीं है अब तक विभिन्न आयु वर्ग को उनके श्रम तथा लिंग के अनुसार पौष्टिक आवश्यकताओं का ज्ञान न हो । आहार को पौष्टिक बनाने का सबसे आसान तरीका यह है कि गृडिणी प्रत्येक खाद्य वर्ग में से कोई न कोई खाद्य पदार्थ को प्रतिदिन भोजन में शामिल करे ।

(2) भिन्नता – विविधता का ध्यान रखने से आहार आयोजन सफलतापूर्वक किया जा सकता है। जैसे-एक खाद्य-पदार्थ का बार बार प्रयोग, एक ही विधि द्वारा पकाये गये पदार्थ एक ही रंग के खाद्य पदार्थ आवांछनीय है

(3) खाद्य-पदार्थों की उपलब्धि तथा मौसम का ध्यान रखना चाहिए जिससे धन की बचत होती है और पौष्टिकता उत्तम होती है।

(4) साधनों की मितव्ययिता — धन, श्रम, समय की बचत का विशेष ध्यान रखना चाहिए विशेषकर खरीदते समय, पकाते समय, परोसते समय ।

Q. 4. दो उदाहरण देकर बताइए कि आहार-आयोजन द्वारा किस प्रकार समय एवं श्रम की बचत होती है ?

Ans. (1) पहले से आयोजित आहार से एक ही बार में खरीदारी व्यवस्थित रूप से हो सकती है व ऊर्जा की बचत होती है। 

(2) आहार-आयोजन द्वारा गृहिणी खाना पकाने से पहले आहार से सम्बन्धित सभी योजना पहले ही बना लेती है, जिससे पकाते समय उसे विभिन्न विकल्पों के बारे में विचार नहीं करना पड़ता है

Q. 5. अधिक कैलोरी की आवश्यकता किसे होती है और क्यों ? 

Ans. शारीरिक श्रम में जुटे तथा सक्रिय जीवन व्यतीत करने वाले व्यक्ति को अधिक कैलोरी की आवश्यकता होती है; जैसे-मजदूर (श्रमिक), रिक्शा या ठेला चलाने वाले तथा घरेलू कार्य करने वाली गृहिणी । यह इसलिए क्योंकि श्रम करते समय उनके शरीर की अधिक कैलोरी खर्च हो जाती है। इसलिए उन्हें कैलोरी या ऊर्जा संतुलन के लिए अधिक कैलोरी की आवश्यकता होती है।

Q.6. परिवार की संरचना का आहार आयोजन पर क्या प्रभाव पड़ता है ? 

Ans. परिवार की संरचना-परिवार में बच्चे, युवा, बूढ़े कितने हैं; गर्भवती महिला या रोगी हैं तो आहार व्यवस्था बदल जाती है। जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते जाते हैं उनकी आहारीय आवश्यकताएँ भी बदल जाती हैं। परिवार में शिशु या धात्री माता का होना भी आहार-व्यवस्त को प्रभावित करता है । 

Q.7. जलवायु संबंधी कारक का आहार आयोजन पर क्या प्रभाव पड़ता है ?

Ans. भोजन खाने पर जलवायु का भी बहुत प्रभाव होता है। ग्रीष्म ऋतु में भूख कम लगती है। इस मौसम में तरल पदार्थ अधिक पीये जाते हैं। पहाड़ों पर जाकर भूख ज्यादा लगती है। शीत ऋतु में हर व्यक्ति ऊर्जायुक्त भोजन अधिक खाता है। इससे शरीर का तापमान व्यवस्थित रहता है।

Q.8. आहार-आयोजन की आवश्यकता के चार कारण लिखिए। Or, परिवार के लिए आहार की योजना बनाने के चार कारण बताइए ।

Ans. 

(क) परिवार के सदस्यों को आवश्यकतानुसार पोषक तत्व प्रदान करना । 

(ख) बाहरी खान-पान पर व्यर्थ खर्च रोक कर वित्तीय स्थिति में सुधार करना ।

(ग) परिवार के सदस्यों की रुचि तथा अरुचि को ध्यान में रखकर भोजन बनाना तथा परोसना ।

(घ) बाजार से दूषित आहारीय पदार्थों को खाकर खाद्य विषाक्तता जैसी स्थिति को रोकता। 

Q.9. आहार-आयोजन को प्रभावति करने वाले चार कारकों की सूची बनाइए। किसी एक के प्रभाव को विस्तार से लिखिए ।

Ans. आहार आयोजन को प्रभावित करने वाले चार कारक निम्नलिखित हैं-

(1) सभी आवश्यक तत्त्वों का होना ।

(2) परिवार की पौष्टिक आवश्यकताओं का ध्यान रखना ।

(3) सभी खाद्य-यों का इस्तेमाल करना । 

(4) भोजन यथासम्भव कम दामों में तैयार हो (Economise on the contact food) गृहिणी को अपनी आय को ध्यान में रखना चाहिए योजना ऐसी न हो कि माद की आय दस दिन में व्यय कर दी जाए। गृहिणी को उपलब्ध आमदनी से भोजन अधिकतम मात्रा में उपलब्ध करने का प्रयत्न करना चाहिए। आहार में शरीर के लिए आवश्यक भौम्य तत्व विद्यमान हो इसके लिए गृहिणी को निम्न बातों का ज्ञान होना चाहिए

(अ) बाजार में विभिन्न खाद्य-पदार्थों का मूल्य

(ब) बढ़िया भोजन सस्ते दामों पर मिलने का उपयुक्त स्थान एवं समयः ।

(स) विभिन्न भोज्य पदार्थों की सफाई एवं सुरक्षा सम्बन्धी बातें जिससे भोजन के पौष्टि तत्व नष्ट न हो।

(२) विटामिन भोज्य पदार्थों के गुण जिनसे महंगी वस्तुओं के स्थान पर समान गुण सस्ती भोग्य वस्तुएँ आहार में सम्मिलित की जा सके। 

(फ) सस्ती भोग्य वस्तुओं को विभिन्न विधियों से तैयार करना जिससे ये स्वादिष्ट आकर्षक बन सकें ।

कम दामों में भोजन तैयार करने का यह अर्थ कदापि नहीं कि परिवार के लिए प या अपोषक सस्ते आहार का प्रबन्ध कर दिया जाए। कम दाम में भी अधिकतम पोषण के गुण प्राप्त करना हो उचित है ।

Q. 10. आहार आयोजन मौसम एवं अवसर से किस प्रकार प्रभावित होता है ? प्रत्येक दो-दो उदाहरण की सहायता से बताइए ।

Ans. खाद्य-पदार्थों की उपलब्धि तथा मौसम का ध्यान रखना अनेक खाद्य-पदार्थों अपना मौसम होता है तथा उनका उसी समय आहार आयोजन में समावेश किया जाना चाहिए मौसमी खाद्य पदार्थों के प्रयोग से धन की भी बचत होती है तथा इनकी पौष्टिकता भी उन होती है।

खाद्य पदार्थों की उपलब्धि कम होने का मुख्य कारण यातायात के पर्याप्त साधनों की कम भी है, हालांकि हमारे देश को पैदावार किसी-किसी स्थान पर बहुत अच्छी है परन्तु यातायात क

सुविधा तथा संग्रह के तरीकों की कमी के कारण वह पूरे देश में वितरित नहीं किये जा पाते। अवसर-आहार-आयोजन करते समय अवसर-विशेष का ध्यान रखना आवश्यक है. उदाहरण के लिए पर्व पर उससे जुड़ी हुई मिठाई बनाना, जैसे ईद पर सेवई, क्रिसमस पर तथा पोंगल में पोंगल (खिचड़ी की तरह का व्यंजन) बनाना वांछनीय है। इसी प्राकर अव के अनुरूप की आहार का आयोजन किया जाना चाहिए अन्यथा खाने वालों में संतुष्टिका रहेगा। उदाहरण के लिए बच्चे के जन्मदिन के अवसर पर बच्चों को पसन्द आने वाली कम मिर्च-मसाले वाले व्यंजनों का आयोजन किया जाना चाहिए, जैसे- चाऊमीन, पैटील, बिस्कुट कुकी, पेस्ट्री, फ्रुट चाट आदि ।

Q. 11. “आहार – आयोजन द्वारा पौष्टिक (सन्तुलित) भोजन का बजट के अनुरू प्रबन्ध किया जा सकता है।” समझाइए ।

Ans. परिवार के बजट के अनुरूप सन्तुलित एवं रुचिकर भोजन की प्राप्ति केवल उचित आहार आयोजन द्वारा ही गृहिणी अपेक्षित धनराशि में अपने परिवार के सदस्यों को श्रेष्ट भोजन प्रदान करा सकती है। इसके लिए गृहिणी सस्ते पौष्टिक खाद्य-पदार्थ, जैसे-सोयाबीन मुँगफली, सस्ते मौसमी, खाद्य-पदार्थ तथा खाद्य-पदार्थों के पौष्टिक मान बढ़ाने की विधियों, जैन अंकुरों, खमीरीकरण एवं खाद्य-पदार्थों को मिला-जुलाकर प्रयोग में लाती है 

(1) एक साथ थोक में सामान खरीदने से धन की बचत की जा सकती है। (2) मौसमी फल व सब्जियों का प्रयोग किया जाना चाहिए ।

(3) खाद्य संरक्षण द्वारा खाद्य पदार्थों का उनके मौसम न होने पर भी स्वाद लिया सकता है।

Q. 12. आहार आयोजन द्वारा समय, ऊर्जा व ईंधन की बचत किस प्रकार की जा सकती है ?

Ans. समय, ऊर्जा व ईंधन की बचत पहले से आयोजित आहार से एक ही बार में खरीदारी व्यवस्थित रूप से हो सकती है तथा समय एवं ऊर्जा की बचत हो जाती है । खरीदारी एक ही बार बड़ी मात्रा में करने से धन भी कम खर्च होता है। 

भोजन पकाने के सही तरीके अपनाने से ईंधन की बचत होती है। प्रेशर कुकर का अधिक से अधिक प्रयोग करना चाहिए । एक समय में एक से अधिक पदार्थ बनाने के लिए कुक्कर के कन्टेमेंटों का उपयोग कीजिए । इससे ईंधन की बचत हो सकती है जो अत्यधिक सीमित स्रोत है।

Q. 13. प्रतिदिन के आहार में आयोडीन की आवश्यकता स्पष्ट कीजिए ।

Ans. आयोडीन एक प्रकार का खनिज लवण है जो हमारे शरीर की थॉयराइड ग्रन्थि से निकलने वाले पॉरोक्सिन हारमोन का महत्त्वपूर्ण अंग है। इसकी शरीर में 100 से 200 मि. ग्राम तक दैनिक आवश्यकता है। 

आहार में आयोडीन का होना थॉयरॉक्सिन के निर्माण के लिए बहुत आवश्यक है। अहार में इसकी कमी होने पर इस कमी को पूरा करने के लिए आयोडीन युक्त नमक का प्रयोग किया जाता है जिससे शरीर में आयोडीन की कमी ग्वायटर के रूप में न दिखने लगे। 

आयोडीन की विशेष आवश्यकता बढ़ते हुए किशोर व किशोरियों अर्थात् 15-16 वर्ष की आयु वर्ग के लड़के-लड़कियों व गर्भवती स्त्रियों को अधिक होती है। गर्भवती स्त्रियों को इसकी मात्रा बढ़ा दी जानी चाहिए ताकि गर्भ के शिशु को मानसिक विकार या क्रेटिनिज्म जैसे रोगों से बचाया जा सके ।

Q. 14. स्पष्ट कीजिए दालों का अधिक प्रयोग क्यों होता हैं। 

Ans. गैर-मांसाहारी व्यक्तियों के लिए दाल शक्ति व प्रोटीन का सस्ता व उत्तम माध्यम है। यदि दालों को मिला-जुला कर व अनाज के साथ मिलाकर ग्रहण किया जाये तो इनसे उत्तम श्रेणी का प्रोटीन मिल सकता है। दालों से हमें थायमिन, नियासिन फोलिक अम्ल, लोहा व कैल्सियम जैसे खनिज लवण भी प्राप्त होते हैं। 

साबुत छिलके वाली दालों से हमें रेशे की भी प्राप्ति होती है। खासकर छिलके वाली दालें, बिना छिलके की या धुली हुई दालों से अधिक पौष्टिक होती है।

Q. 15. परिवार की दो सांस्कृतिक भावनाओं की व्याख्या कीजिए जो आहार आयोजन को प्रभावित करती हैं ।

Ans. सामाजिक-सांस्कृतिक व धार्मिक तथ्य (Socio-Cultural and Religious Factors) आहार-आयोजन में सामाजिक रीति-रिवाजों का बहुत बड़ा हाथ है। हिन्दुओं के कई धार्मिक रिवाज जिनमें व्रत रखे जाते हैं बाद में त्योहार मनाये जाते हैं जिनमें खाना-पीना खूब चलता है। मुसलमानों में भी रमजान के महीने में व्रत रखे जाते हैं। 

बढ़ते बच्चों के द्वारा व्रत रखने से ये उनके विकास के मार्ग में बाधक बनते हैं। हम व्रत के दिनों में आहार-आयोजन में परिवर्तन लाकर ऐसे व्यंजन बना सकते हैं जिनसे पूर्ण पौष्टिकता प्राप्त हो। मांसाहरी भोजन आमतौर पर धार्मिक अवसरों पर नहीं खाया जाता। मांसाहारी भोजन में प्रोटीन प्रचुर मात्रा में होता है । 

शाकाहारी भोजन में दूध, सोयाबीन दलहन व दालें अवश्य होनी चाहिए ताकि प्रोटीन की मात्रा पूरी मिले, खासतौर पर बढ़ते बच्चों, गर्भवती महिलाओं व स्तनपान कराने वाली स्त्रियों को ।

Q. 16. आहार – आयोजन के विभिन्न लाभ लिखिए । 

Ans. आहार आयोजन से निम्नलिखित लाभ हैं-

(1) इससे परिवार के प्रत्येक सदस्य की पौष्टिक आवश्यकताएँ पूरी की जा सकती हैं। 

(2) पहले से आयोजन करने में सुदंर व्यंजन परोसे जा सकते हैं ।

(3) व्यक्तिगत पसन्द को ध्यान में रखकर पौष्टिकता से समझौता किए बिना भोजन का आयोजन किया जा सकता है ।

(4) उचित आहार आयोजन से धन, समय, शक्ति व ईंधन की बचत होती है, (5) विभिन्न आहारों के संयोजन से भोजन की पौष्टिकता बढ़ायी जा सकती है।

(6) बचे-खुचे भोजन का उचित उपयोग किया जा सकता है।


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (LONG ANSWER TYPE QUESTIONS)


Q. 1. आहार योजना, आयु एवं व्यवसाय से प्रभावित होती है। इस तथ्य के पक्ष में दो-दो उदाहरण प्रस्तुत कीजिए ।

Ans. (1) आयु—आहार की रचना, आश्रितों व मात्रा पर आयु का बहुत प्रभाव पड़ता है। शिशु का आहार क्या होता है ? ये केवल माता के दूध या दूध पर आश्रित रहते हैं। जैसे-जैसे वे बड़े होते हैं उनका आहार थोड़ा ठोस, जैसे-सूजी की खीर, कस्टर्ड खिचड़ी हो जाता है। इस प्रकार आयु के साथ बढ़ते बच्चों का आहार भी भिन्न होता जाता है। 

आहार की पौष्टिकता एवं मात्रा भी विकास तथा क्रियाशीलता के अनुरूप होती है । किशोरों का आहार स्कूल जाने से पूर्व व स्कूली बच्चों से अधिक होता है।

(ii) व्यवहार एवं क्रियाशीलता—ये दोनों कारक भोजन को बहुत प्रभावित करते हैं प्रत्येक व्यक्ति की आहार आवश्यकताएँ उसके मौलिक चयापचय दर के अनुरूप होती हैं। आपने स्वास्थ्य एवं जीव विज्ञान में मौलिक चयापचय दर (Basal Metabolic Rate) के बारे में पढ़ा है। विभिन्न कार्यों के लिए कैलोरी की आवश्यकताएँ भी भिन्न होती हैं। मजदूरों को दफ्तर के कर्मचारियों से अधिक कैलोरी की आवश्यकता होती है ।

(क) हल्का श्रम- जो व्यक्ति बैठकर हल्का श्रम करते हैं, उन्हें 70 कैलोरीज प्रति घंटा BMR की दर से अधिक आवश्यकता होती है। जिन गृहिणियों के पास काम को कम या हल्का करने के उपकरण है, उन्हें भी कम कैलोरीज की आवश्यकता होती है। जिनके पास काम करने के लिए नौकर हैं, उन्हें भी कम कैलोरीज चाहिए ।

(ख) मध्यम श्रम—जो व्यक्ति मध्यम श्रेणी का श्रम करते हैं, उन्हें अपनी BMR की दर से केवल 100-200 कैलोरीज अधिक की आवश्यकता होती है। व्यापारी, अध्यापक, गृहिणियाँ व छात्र अधिकतर इस श्रेणी में आते हैं।

(ग) कठोर श्रम-मजदूर, किसान व खिलाड़ी कठोर श्रम करते हैं। इनके भोजन की मात्रा एवं कलौरी की आवश्यकता सबसे अधिक होती हैं। जिन व्यक्तियों का शरीर आकार में बड़ा होता है उन्हें मध्यम व छोटे आकार वाले व्यक्तियों से अधिक कैलोरी की आवश्यकता होती है।

Q. 2. आहार-आयोजन के सिद्धान्तों को उदाहरणों की सहायता से समझाइए(i) परिवार की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखना । 

Ans. आहार-आयोजन के सिद्धान्त family ) — उचित आहार आयोजन के द्वारा पारिवारिक आर्थिक स्थिति के अनुसार श्रेष्ठ आहार उपलब्ध कराया जाना सम्भव है। अतः आहार आयोजन करने से पूर्व परिवार की आर्थिक स्थिति को भी ध्यान में रखा जाता है क्योंकि कम खर्च में भी वह सभी पौष्टिक तत्त्व प्राप्त किये जा सकते हैं जो कि महंगे खाद्य पदार्थों से प्राप्त होते हैं, जैसे अंडे से प्रोटीन प्राप्त होता है। 

इसकी तुलना में सोयाबीन से भी उत्तम श्रेणी का प्रोटीन प्राप्त होता है। इसी प्रकार से महँगे मछली के तेल की तुलना में मौसमी फल (जैसे पपीता, आम ) या सब्जी (जैसे गाजर) विटामिन A के अच्छे और सस्ते स्रोत हैं।

(ii) समय तथा श्रम की मितव्ययिता का ध्यान रखना (Saving time and loabour ) आहार-आयोजन करते समय इस बात का भी ध्यान रखा जाता है कि समय और श्रम दोनों ही व्यर्थ न जाएँ और सही समय पर पौष्टिक भोजन तैयार मिले, जैसे सुबह का नाश्ता – एक परिवार जिसमें पति-पत्नी को ऑफिस जाना हो तथा बच्चों को स्कूल जाना हो तो ऐसे में जल्दी-जल्दी नाश्ता भी बनेगा और दोपहर का लंच भी पैक होगा। 

ऐसी अवस्था में इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि जो भी आहार आयोजित किया जाए वह जल्दी बने तथा उसे ऑफिस एवं स्कूल ले जाने के लिए कठिनाई न हो। समय तथा श्रम की बचत करने के लिए अनेक उपकरणों, जैसे- प्रेशर कुकर, मिक्सर ग्राइंडर, फ्रिज इत्यादि का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

(iii) उत्सवों का ध्यान रखना (Celebrations ) आहार – आयोजन करते समय विभिन्न उत्सवों का भी ध्यान करना चाहिए। इसके अतिरिक्त यदि कोई जन्मदिन पार्टी हो या कोई पर्व व त्यौहार हो तो उसके अनुसार ही आहार का आयोजन करना चाहिए ।

(iv) सामाजिक तथा धार्मिक मान्यताओं का ध्यान रखना (Social & Religious Sanctions ) — किसी विशेष अवसर पर आहार आयोजित करते समय इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि जिस व्यक्ति के लिए आहार नियोजन किया जा सकता है, उसकी सामाजिक तथा धार्मिक मान्यताएँ क्या हैं, जैसे कुछ व्यक्ति प्याज नहीं खाते, कुछ लहसुन नहीं खाते, अंडा, मांस, मछली इत्यादि नहीं खाते ।

(v) आहार पकाते समय पौष्टिक तत्त्वों को नष्ट न होने देना (Protecting the nutrients while cooking )- आहार आयोजन करते समय आहार बनाने की विधि की ओर भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। आहार ऐसी विधि से बनाया जाना चाहिए जिससे आहार के पौष्टिक तत्त्व कम-से-कम नष्ट हो और वह पाचनशील हो ।

(vi) आहार द्वारा क्षुधा संतुष्टि हो (Providing Satisfy ) आहार – आयोजन करते समय इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि जो भी कुछ खाएँ उससे पेट भरने की संतुष्टि हो । उदाहरण के लिए यदि शरीर को कार्बोज की आवश्यकता हो तो टाफी खाई जा सकती है । पर टॉफी खाने से पेट भरने की संतुष्टि नहीं होती है। इसकी तुलना में यदि आलू (उबालकर, भुनकर अथवा चाट बनाकर खाया जाए तो कार्बोज की आवश्यकता भी पूरी होती है और पेट भी भरता है।

Q. 3. आहार आयोजन से धन, समय, उर्जा व ईंधन की बचत होती है, कैसे ? 

Ans. आहार-आयोजन का अर्थ है सीमित साधनों से पौष्टिक व संतुलित आहार की व्यवस्था करना । कोई भी कार्य जब योजना बनाकर सोच-समझकर किया जाता है तो उससे सदैव ही साधनों की बचत होती है ।

धन की बचत — यदि कोई गृहिणी पहले आहार योजना बनाकर भोजन बनाती है तो वह ऐसी जगह से खाद्य सामग्री खरीदती है जहाँ पर चीजें सस्ती मिलती हैं। इस तरह आसानी से धन की बचत कर लेती है। 

यदि पूर्व योजना बनाकर काम किया जायेगा तो दही की जरूरत होने पर गृहिणी 20/ रु० kg सुधा डेयरी का दूध लाकर दही जमायेगी जबकि अगर पूर्व योजना के अनुसार कार्य नहीं करेगी तो उतने ही पैसों में बाजार का उससे आधा दही मिलेगा । अतः आहार आयोजन से ही धन की बचत की जा सकती है।

समय, ऊर्जा ईंधन की बचत — पहले सोच लेने से इकट्ठा सामान खरीदा जा सकता है । एकत्रित करके पकाया जा सकता है जिससे समय, श्रम व ऊर्जा की बचत हो सकती है। 

यदि पूर्व योजना के अनुसार कार्य करें तो प्रेशर कुकर में एक ही समय में दो-तीन चीजें पका सकते हैं और समय, श्रम व ईंधन की बचत कर सकते हैं। पूर्व नियोजन से छोटी गैस पर गैस को मन्द करके कम ईंधन व उर्जा से स्वादिष्ट भोजन पका सकते हैं।

Q. 4. आहार – आयोजन को प्रभावित करने वाले कौन-कौन से कारक हैं स्पष्ट कीजिए ? 

Ans. एक परिवार की आहार योजना कई कारकों से प्रभावित होती है-

(क) परिवार के मानवीय व भौतिक साधन

(ख) परिवार का आकार

(घ) खाद्य पदार्थों की सुलभता

(ग) परिवार की संरचना

(ङ) मौसम

(च) अवसर व अनुभव

(क) परिवार के मानवीय व भौतिक साधन- इनमें सबसे प्रमुख है खाद्य बजट पर प्रस्तावित खर्चा । परिवार का आर्थिक स्तर यह निर्धारित करता है कि किन खाद्य-पदार्थों को विभिन्न पोषक तत्वों की प्राप्ति हेतु चुना जाये । कितना समय गृहिणी को भोजन पकाने के लिए मिलता है । यह कारण भी आहार-आयोजन पर प्रभाव डालता है। शक्ति, कौशल व गृहिणी का पोषण-सम्बन्धी ज्ञान ऐसे मानवीय साधन हैं। जो आहार योजना पर अत्यन्त प्रभाव डालते हैं। जिन्हें बनाने में बहुत अधिक समय न लगे और क्षुधा संतुष्ट करने की क्षमता रखता हो। 

(ख) परिवार का आकार बड़े परिवार में वे भोजन आहार में सम्मिलित किये जाते हैं छोटे परिवार में आहार योजना इससे भिन्न होती है ।

(ग) परिवार की संरचना-आहार-आयोजन परिवार की संरचना पर भी पूर्णतया आधारित है । जिस परिवार में केवल वयस्क है उस परिवार की आहार योजना इस परिवार से जिसमें छोटे बच्चे अधिक है, बिल्कुल भिन्न होगी ।

(घ) खाद्य-पदार्थों की उपलब्धि यह भी आहार-आयोजन को प्रभावित करती है अगर खाद्य पदार्थ पर पर उपलब्ध हों या बाजार से घर पर उपलब्ध कराये जा सकते हों, उन्हीं को आहार योजना में सम्मिलित किया जा सकता है। 

(ङ) मौसम — मौसम के अनुकूल हो खाद्य-पदार्थ आहार योजना में सम्मिलित किये जाते हैं जैसे गर्मियों में मिष्ठान हेतु ठंडी-ठंडी आइसक्रीम को शामिल किया जायेगा जबकि सर्दियों में गर्म-गर्म खीर या गुलाब जामुन । 

(च) अवसर व अनुभव – यह भी आहार योजना में सम्मिलित किये जाने वाले खाद्य पदार्थों के चुनाव को प्रभावित करता है। किस प्रकार के खाद्य-पदार्थ चुने जाएँ इस बात का अनुमान मौके को देखकर ही लगाया जाता है।


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