Ncert Solutions Home Science Class 12 Chapter 6 Notes In Hindi PDF

WhatsApp Group (Join Now) Join Now
Telegram Group (Join Now) Join Now

Home Science Class 12 Chapter 6 Notes In Hindi PDF, Ncert Solutions Home Science Class 12 Chapter 6 Notes In Hindi PDF, Home Science Class 12 Chapter 6 Notes

Home Science Class 12 Chapter 6 Notes In Hindi PDF

Class12th 
Chapter Nameपरिवार के लिए आहार आयोजन और विशेष अवसरों के लिए इसमें परिवर्तन | Planning Meals for family and its modification for special condition
Chapter number06
Book NCERT
SubjectHome Science
Medium Hindi
Study MaterialsImportant questions answers
Download PDFHome Science Class 12 Chapter 6 Notes In Hindi PDF

परिवार के लिए आहार आयोजन और विशेष अवसरों के लिए इसमें परिवर्तन | Planning Meals for family and its modification for special condition

प्रस्तुत अध्याय में एक परिवार के लिए आहार आयोजन की व्यवस्था के बारे में विचार प्रस्तुत किया गया है। साथ ही, आहार-आयोजन में होने वाले सामाजिक परिवर्तन का भी विवेचन किया -गया है। कुछ विशेष अवसरों के लिए आहार आयोजन के परिवर्तन को स्पष्ट किया गया है। 

एक शहरी परिवार में प्रायः दिन के चार बार भोजन करने का प्रचलन है, जैसे-नाश्ता, दोपहर का भोजन, शाम की चाय, रात्रि का भोजन । शारीरिक व्यवस्था में थोड़ा-सा भी अन्तर आने से आहार में परिवर्तन लाना आवश्यक है। 

Ncert Solutions Home Science Class 12 Chapter 6 Notes In Hindi PDF

विशेष अवसरों पर बढ़िया भोजन बनाया जाता है। जिससे काफी समय, सामग्री व साधन लगते हैं। मात्रा में परिवर्तन का अर्थ है आहार के पौष्टिक तत्व व कैलोरी की मात्रा को कम करना या बढ़ाना । तरल, कुछ ठोस, नर्म व हल्के आहार – गुणवत्ता, परिवर्तन के अनुसार आहार के ये तीन प्रकार हैं।

परिवार के आहार को कई स्थितियों में बदलना भी पड़ता है, जैसे-गर्भावस्था, स्तनपानवस्था, अतिसार व ज्वर की अवस्था । गर्भावती तथा स्तन पान कराने वाली महिलाओं को प्रोटीन, कैलोरी, लोहे, विटामिन व खनिज लवणों की आवश्यकता अधिक होती है। 

शैशव, बाल्यकाल व प्रौढ़ावस्था में आहार की आवश्यकता विकास की दर के अनुपात में बढ़ती है परिवार में भिन्नता लाने से सभी पौष्टिक तत्वों की प्राप्ति हो जाती है। पौष्टिक तत्वों की प्राप्ति से मनुष्य का शरीर स्वस्थ बना रहता है ।


अति लघु उत्तरीय प्रश्न (VERY SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


Q. 1. ज्वर किसे कहते हैं ?

Ans. जब किसी व्यक्ति में शरीर द्वारा उत्पादित और निष्कासित ताप में संतुलन नहीं रहता और सामान्य से अधिक ताप की स्थिति हो जाती है तो ऐसी स्थिति को ज्वर कहते हैं ।

Q. 2. ज्वर की स्थिति में आहार-आयोजन किस प्रकार करेंगे ?

Ans. ज्वर की स्थिति में आहार ऐसा होना चाहिए जो आसानी से पचाया जा सके तथा वह आसानी से अवशोषित हो सके । ज्वर की अवधि तथा प्रकार को देखते हुए रोगी का आहार तरल या कोमल होना चाहिए । 

Q. 3. गर्भवती महिला की आहार तालिका बनाते समय किन्हीं दो बातों का महत्त्व बताइए ।

Ans. (i) आहार पौष्टिक तथा संतुलित होना चाहिए। (ii) आहार में विभिन्नता तथा प्रत्येक पौष्टिक तत्व की अतिरिक्त मात्रा में आवश्यकता की पूर्ति करना ।

Q. 4. पूरक आहार का क्या अर्थ है ?

Ans. स्तन्यमोचन की प्रक्रिया के अनुसार माता के दूध या ऊपरी दूध के अतिरिक्त जो भी भोज्य-पदार्थ शिशु को खिलाया जाता है वह पूरक आहार कहलाता है ।

Q.5. शिशु का विकास किन बातों पर निर्भर करता है ? 

Ans. शिशु का विकास अनुवाशिक विशेषताएँ तथा उसको दिए गए आहार की एवं भवता तथा माँ और शिशु के बीच संतोषजनक वांछनीय सम्बन्ध पर निर्भर करता है। 

Q.6. माता को आहार का आयोजन करते समय किन दो बातों का ध्यान रखना चाहिए ? 

Ans

1. शिशु को वृद्धि और विकास सामान्य रूप से हो, इसके लिए माता का आहार आयोजित और पौष्टिक होना चाहिए ।

2. तरल पदार्थ पर्याप्त मात्रा में हों जिससे दूध के निर्माण में कठिनाई न हो। 

Q.7. अतिसार से ग्रस्त रोगी के लिए आहार आयोजन किस प्रकार करेंगे ?

Ans. रोगी के शरीर की जल की आपूर्ति के लिए अतिसार के रोगी को तरल आहार देना चाहिए । आहार पचने में हल्का होना चाहिए जिससे वह आंतों पर अधिक जोर न डाले ।

Q.8 & स्तन्यमोचन का क्या अभिप्राय है ?

Ans. शिशु को माता के दूध या ऊपरी दूध के साथ तरल से धीरे-धीरे परिवर्तन करके अठोस, फिर ठोस आहार देना स्तन्यमोचन कहलाता है ।

Q. 9. स्तनपान के चार लाभ लिखिए ।

Ans. 1. माठा के दूध में लैक्टोएल्ब्युमिन नामक प्रोटीन होता है जो कैसीन की अपेक्षा अधिक सुपाच्य होता है।

2. माता के दूध में बाह्य कीटाणुओं के प्रवेश के अवसर नहीं होते ।

3. क्लोस्ट्रम (प्रारम्भिक अवस्था में स्तनों से निकला दूध) में ऐन्टीबॉडी होता है जो प्रतिरक्षा उत्पन्न करता है।

4. माता का दूध सामान्य तापक्रम पर होता है न गर्म न ठण्डा । 

Q. 10. आहारीय व्यवस्था से आप क्या समझते हैं ?

Ans. आहार का आयोजन करना, खरीदना, तैयार करना तथा परिवार के सदस्यों को परोसना आहारीय व्यवस्था कहलाता है। इसमें परिवार के सदस्यों की पोषण आवश्यकताओं तथा परिवार की आय को ध्यान में रखा जाता है।

Q. 11. एक गर्भवती स्त्री अपनी मितली की परेशानी से जूझने के लिए कौन-से चार उपाय कर सकती है ? 

Ans. मिठलों को परेशानी से जूझने के लिए गर्भवती महिला निम्न उपाय कर सकती है- (i) सुबह सोकर उठने पर उसे अधिक कार्बोहाइड्रेट वाले आहार, जैसे मिष्ठान, बिस्कुट, टोस्ट आदि लेनी चाहिए। (i) उसे अधिक वसा वाले तले हुए आहार कम लेनी चाहिए। (iii) तेज चाय अथवा कॉफी नहीं लेनी चाहिए। (iv) भारी व अधिक मिर्च-मसाले वाले भोजन नहीं लेनी चाहिए।

Q. 12. आहार में परिवर्तन लाने का अर्थ बताओ ।

Ans. आहार में परिवर्तन लाकर विशेष अवस्थाओं (रुग्णावस्था, गर्भावस्था) की बदलती हुई पौष्टिक मांगों की पूर्ति करना, जिससे परिवार की सभी पौष्टिक आवश्यकताओं को सरलता पूरा किया जा सके।

Q. 13 परिभाषित करें दूध छुड़ाना । 

Ans. दूध छुड़ाना या स्तन्यमोचन का अर्थ शिशु के तरल आहार में परिवर्तन लाकर उसको अर्थठोस व ठोस आहार पर लाने से है।

Q. 14. परिभाषित करें-कोमल आहार ।

Ans. ऐसा आहार जो चबाने व पचाने में तरल हो, कोमल आहार कहलाता है। इसमें रेशा न के बराबर होता है और यदि होता भी है तो उसे पकाकर कोमल या मुलायम कर दिया जाता है।

Q. 15. स्तनपान काल में माता को किस तत्व की अतिरिक्त आवश्यकता होती है ?

Ans. स्तनपान काल में माता को अत्यधिक कैल्शियम की आवश्यकता होती है ताकि वह उचित प्रकार से दूध का निर्माण कर सके ।

Q. 16. एक किशोरी के लिए लोहे की निर्धारित मात्रा कितनी है ?

Ans. एक किशोरी के लिए लोहे की निर्धारित मात्रा 30 Mg होती है क्योंकि किशोरावस्था में रक्त की मात्रा बढ़ती है अतः लोहे की मात्रा बढ़ा दी जाती है

Q. 17. एक घात्री को अधिक थायमिन की आवश्यकता क्यों होती है ? दो कारण बताइए। 

Ans. (i) धात्री बच्चे को स्तनपान कराने वाली महिला को कहते हैं। शिशु में थाइमिन की कमी तथा उससे होने वाले बेरी-बेरी (Beri-Beri) रोग को दूर करने के लिए थाइमिन आवश्यक होता है

(ii) थाइमिन दुग्ध स्राव (दूध की उत्पत्ति) को भी प्रभावति करता है।

Q. 18. अतिपोषण से क्या समझते हैं ?

Ans. अत्यधिक आहार ग्रहण करने की पोषण की वह अवस्था है जिसमें मोटापा हो जाता है, उच्च रक्तचाप, पथरी तथा हृदय सम्बन्धी अन्य रोग हो जाते हैं, अतिपोषण कहलाती है। यहाँ तक कि आयोडीन व लौह तत्त्व अधिक मात्रा में लेने से ऐक्सोपथैलमिया तथा हाइपरसाईथिमिया हो जाता है।

अतिपोषण के कारण निम्नलिखित हैं-

(i) अधिक भोजन ग्रहण करना

(ii) आर्थिक स्तर एवं

(iii) खाने की त्रुटिपूर्ण आदतों का होना ।

Q. 19. पोषणहीनताजन्य अरक्तता (Nutritional Anaemia) को रोकने में गर्भवती स्त्री के आहार में कौन-कौन से तत्व सम्मिलित किये जाने चाहिए ?

Ans. पोषणहीनताजन्य अरक्तता को रोकने के लिए गर्भवती स्त्री के आहार में लोहा व फोलिक अम्ल सम्मिलित किया जाना चाहिए। B2 सायनोकोबालमीन भी शामिल किया जा सकता है ।

Q. 20. रतौंधी किस तत्व की कमी से होती है ?

Ans. रतौंधी आहार में विटामिन ‘ए’ की कमी से होती है।

Q. 21. सबसे सुपाच्य प्रोटीन कहाँ से मिलता है ?

Ans. सबसे सुपाच्य प्रोटीन (लैक्टाल्ब्यूमिन) दूध से मिलता है

Q. 22 एक गर्भवती महिला में तीसरी और अन्तिम तिमाही में प्रोटीन की मात्रा कितनी चाहिए ?

होनी Ans. अन्तिम तिमाही में गर्भवती महिला के आहार में कम से कम 75 gm प्रोटीन (50gm + 25gm) होनी चाहिए ।


लघु उत्तरीय प्रश्न (SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


Q. 1.निम्न मीनू में डायरिया से ग्रस्त व्यक्ति के लिए तीन परिवर्तनों का सुझाव कारण सहित प्रस्तुत कीजिए ।

Ans. डायरिया से ग्रस्त एक व्यक्ति का पाचन तथा अवशोषण खराब होता है। यह निर्जलीकरण की अवस्था से पीड़ित है । उसमें खनिज व जल की कमी को पूर्ण करने के लिए आहार में निम्न परिवर्तन करने चाहिए :

(1) फ्राई दाल के स्थान पर उसे वसारहित दाल का पानी दें।

(2) फ्राई चावल के स्थान प उबले चावल अथवा खिचड़ी दी जानी चाहिए ।

(3) मीनू में से सलाद को पूर्णतया हटा देना चाहिए तथा इसके स्थान पर ही सब्जियों का सूप देना चाहिए।

Q. 2. एक किशोर बालिका सुबह के नाश्ते में दूध व आलू के कटलेट (टिक्की) ले रही है। उसकी पौष्टिक आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए उसके इस आहार में परिवर्तन के तीन सुझाव कारण सहित प्रस्तुत कीजिए । 

Ans. किशोर बालिका द्वारा लिए जा रहे नाश्ते से उसकी पौष्टिक आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं होती

नाश्ते में किये जाने वाले परिवर्तन के तीन सुझाव

(i) आलू के कटलेट को डबलरोटी पर मक्खन लगाकर सैंडविच बना कर खायें । 

(ii) कोई मौसमी फल लेना चाहिए ।

(iii) गर्मी के मौसम में दूध के स्थान पर पुदीने वाली छाछ का सेवन करना चाहिए ।

Q. 4. ज्वर से ग्रस्त रोगी का आहार आयोजन करते समय किन चार मुख्य बातों का ध्यान रखेंगे ?

Ans. ज्वर की स्थिति में भोजन परोसते समय ध्यान देने योग्य बातें-

(1) आहार पाचनशील होना चाहिए ।

(2) तला हुआ तथा अधिक मसालेयुक्त आहार से परहेज रखना चाहिए ।

(3) समान अन्तरालों पर थोड़ा-थोड़ा भोजन परोसें ।

(4) भोजन ऐसा परोसना चाहिए जिसे रोगी बिस्तर में बैठकर आराम से खा सकेँ ।

(5) आकर्षक रूप से परोसा गया भोजन भूख बढ़ाता है।

(6) रोगी को ताजा पका भोजन ही परोसना चाहिए ।

(7) जब रोगी भोजन समाप्त कर चुका हो तो बर्तन वहाँ से उठा लेना चाहिए ।

(8) ज्वरपीड़ित रोगी के लिए पीने का पानी सरलता से उपलब्ध होना चाहिए ।

Q.5. अतिसार (दस्त ) से पीड़ित रोगी के लिए आहार को आयोजित करते समय किन चार बातों का ध्यान रखना चाहिए

Ans. अतिसार (दस्त) से पीड़ित रोगी के लिए आहार आयोजन में ध्यान रखने योग्य बातें-

(i) निर्जलीकरण की अवस्था उत्पन्न न होने दें ताकि शरीर में जल व लवण की कमी न हो।

(ii) रोगी को ठोस आहार न दें, मिर्च-मसालों का प्रयोग न करें

(iii) रोगी को ओ. आर. एस. (ओरल रिहाइड्रेशन घोल) पिलायें ।

(iv) रोगी को तरल आहार अथवा अर्द्ध ठोस व कोमल आहार ही दें, जैसे-चाय, लस्सी, चावल का पानी अथवा दाल का पानी इत्यादि ।

Q. 6. आज दोपहर के भोजन में निम्न खाद्यों का आयोजन किया गया है, परांठा, मसालेदार आलू, पालक, दाल फ्राई, दही भल्ले, टमाटर-प्याज का सलाद ।

Or, एक तीन वर्ष के बच्चे को आप क्या, क्यों, और कैसे परोसेंगे ? 

Ans. एक तीन वर्ष का बच्चा मसालेदार सब्जियों का आनन्द नहीं ले सकता। इसके अतिरिक्त वह भारी व कठोर भोजन पचाने में समर्थ नहीं है। उपरोक्त मौनू में से भोजन विशेष रूप में बच्चे को परोसे जा सकते हैं-

(i) पराठा छोटे-छोटे टुकड़ों के रूप में ।

(ii) मसालेदार पालक व आलू में से केवल आलू को मथकर दिया जाएगा।

(iii) दाल फ्राई (घुटी) हुई अवस्था में। 

(iv) दही भल्ले मसालेरहित तथा छोटे-छोटे टुकड़ों के रूप में ।

बच्चे को सभी पोषण तत्व सन्तुलित अवस्था में प्रदान करने के लिए उपरोक्त खाद्य पदार्थ ऊपर लिखी अवस्था में परोस जायेंगे। सलाद जैसे कठोर व रेशेदार पदार्थ नहीं दिये जायेगें क्योंकि बच्चा उन्हें पचा तथा अवशोषित नहीं कर सकता ।

Q.7. परिवार के लिए निम्न आहार की व्यवस्था है-मूँग दाल, दही-बड़ा, आलू-पालक, चपाती । उपरोक्त आहार में एक अतिसार से पीड़ित व्यक्ति के लिए आप क्या परिवर्तन लायेंगी ताकि ये आहार उस रोगी के लिए उपयुक्त हो ? परिवर्तन लाने के कारण भी स्पष्ट करें । 

Ans. (क) मूँग का दाल बिना घी तेल के तड़का लगाये, अतिसार के रोगों के लिए उपयुक्त भोज्य है

(ख) बिना बड़े डाले दही, क्योंकि तले हुए बड़े, पचाने में मुश्किल होती है। पाचन संस्थान पर दवाब न डाला जाये तो ही उसको आराम मिल सकता है । 

Q. 8. एक विद्यार्थी टिफिन में सादा पराठा व अचार लाती है। उसकी पौष्टिक आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए इस भोजन में बदलाव के तीन सुझाव कारण सहित बताइए ।

Ans. यदि विद्यार्थी टिफिन में सादा परांठा व अचार लाती है तो उसको पौष्टिक आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए भोजन में बदलाव निम्न रूप से लाया जा सकता है-

(i) आटा गूँथते समय आटे में बेसन या सोयाबीन का आटा मिलाया जा सकात है । 

(ii) पनीर भरके परांठा बनाया जा सकता है।

(iii) पुदीने व धनिया एवं आंवले या अमरूद की चटनी साथ में दी जा सकती है। 

कारण (Reasons ) –

(i) सोयाबीन व बेसन में प्रोटीन अत्यधिक मात्रा में होता है।

(ii) पनीर में प्रोटीन, कैल्शियम व विटामिन A पाए जाते हैं। 

(iii) पुदीना व धनिया में लोहा, विटामिन A व कैल्शियम होता है ।

(iv) आँवला तथा अमरूद में विटामिन C होता है।

Q. 10. एक वृद्ध, एक किशोर जिसे बुखार है, के लिए इस भोजन को उपयुक्त बनाने के उद्देश्य से इसमें तीन परिवर्तन सुझाइए अपने उत्तर का कारण लिखिए ।

Ans. 

(क) चावल तथा चावल के स्थान पर दलिया अथवा खिचड़ी का प्रयोग होगी। 

(ख) मसालेदार आलू के स्थान पर कोई सुपाच्य एवं उबली सब्जी का चयन किया जायेगा

(ग) बूंदी रायता पूर्णतया आयोजन से निकाल दिया जायेगा । ज्वर से ग्रस्त रोगों को कच्ची सब्जियों तथा छिलके सहित फल, पाचन संस्थान को हानि पहुँचाते हैं। तले हुए तथा मसालेयुक्त खाद्य पदार्थ नहीं देने चाहिए। सख्त एवं ठोस खाद्य-पदार्थों का सेवन रोगों को नहीं करना चाहिए । तीव्र गंध वाले खाद्य-पदार्थ रोगी के आहार में नहीं सम्मिलित करने चाहिए । 

Q. 11. एक वृद्ध व्यक्ति के लिए निम्न मीनू में तीन परिवर्तन सुझाइए। अपने सुझाव के लिए कारण भी लिखिए । चपाती, पुलाव (फ्राई किए हुए चावल सब्जी के साथ), दाल फ्राइड, बूंदी का रायता, सलाद, प्याज व टमाटर ।

Ans. मोनू में वर्णित उपरोक्त आहार उच्च कैलोरी से परिपूर्ण है तथा इसमें वसा तथा स्यचं की अधिकता है । फ्राइड (तला हुआ) होने के कारण यह वृद्ध व्यक्ति के कमजोर पाचन संस्थान में आसानी से नहीं पचता । बृद्ध व्यक्ति के आहार में निम्न परिवर्तन किये जा सकते हैं- 

(1) यदि व्यक्ति चावल भोजी है जो फ्राइड चावल व सब्जी के स्थान पर उबले हुए चावल तथा कम घी की सब्जी दी जानी चाहिए ।

(2) कम घी वालो, भली-भाँति पकाई गई दाल, फ्राइड दाल के स्थान पर दी जानी चाहिए।

(3) चपाती ताजी पकाई हुई तथा मुलायम होनी चाहिए (4) प्याज और टमाटर के स्थान पर खीरा, बन्दगोभी तथा बारीक टमाटर दिया जाना चाहिए क्योंकि वृद्ध व्यक्ति के दाँत कमजोर होते हैं या नहीं होते ।

Q. 12. एक किशोरी की पोषण संबंधी चार आवश्यकताएँ बताओ ।

Ans. किशोरावस्था वृद्धि स्फुरण’ (Growth Spurt) का काल है। इसमें बहुत तीव्र गति से शरीर में वृद्धि होती है। अस्थियाँ लम्बी और ठोस होती हैं। रक्त के परिमाण में भी बदलाव आता है । इसलिए चार तत्वों की अधिकता की आवश्यकता पड़ती है । अतः इन्हें बढ़ा दिया जाना चाहिए। यह चार तत्व निम्नलिखित है-

(i) कैलोरी – कैलोरी की मात्रा चयापचय दर बढ़ने के कारण बढ़ा दी जाती है ।

(ii) प्रोटीन शारीरिक वृद्धि हेतु प्रोटीन की आवश्यकता बढ़ जाती है । 

(iii) कैल्शियम- अस्थियों की मजबूती के लिए कैल्शियम की मात्रा बढ़ा देनी चाहिए।

(iv) लोहा-रक्त परिमाण में वृद्धि के कारण लोहे की मात्रा को बढ़ा देना चाहिए ।

Q. 13. स्तन्यमोचन को संक्षिप्त में समझाइए ।

Ans. स्तन्यमोचन अर्थात् माँ का दूध छुड़ाना । इसमें बच्चे के तरल दूध के आहार में अत्यन्त क्रमिक नियमानुसार परिवर्तन लाकर बच्चे को अर्द्ध ठोस आहार पर लाया जाता है ताकि बच्चा कुपोषण से पीड़ित न हो, बच्चे की आहारीय आवश्यकताएँ जो आयु के साथ बढ़ती न हो, बच्चे की आहारीय आवश्यकताएँ जो आयु के साथ बढ़ती जाती है। उनको पूरा किया जा सके जिससे कि बच्चा आत्मनिर्भर बने व माता पर आश्रित न रहे । 

Q. 14. कोलेस्ट्रॉम किसे कहते हैं? इसका क्या महत्व है ?

Ans. माता का प्रसव के बाद आरम्भिक दूध जो गाढ़े पीले रंग का होता है, वो कोलेस्ट्रॉम कहलाता है । इसका महत्त्व यह है कि इससे कोलेस्ट्रॉम में वो प्रतिरक्षी पाये जाते हैं जो जन्म के पश्चात् शिशु की तीन महीने तक संक्रामक रोगों से रक्षा करते हैं। इसमें विटामिन A भी अतिरिक्त मात्रा में पाया जाता है जो शिशु के यकृत में संचित किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त कुछ ऐसे

तत्व पाये जाते हैं जो शिशु के पाचक रसों को उत्तेजित करते हैं। 

Q. 15. एक धात्री को अधिक थायमीन की आवश्यकता क्यों होती है ?

Ans. एक धात्री या दूध पिलाने वाली माँ को अपने शरीर में एक अतिरिक्त कार्य और करना पड़ता है, वो है बच्चे के लिए दूध उत्पादन । इस अतिरिक्त कार्य के लिए अतिरिक्त ऊर्जा चाहिए ।

ये ऊर्जा आहार में कार्बोज बढ़ाकर न कि वसायुक्त पदार्थों को बढ़ाकर पूरी की जाती है। अधिक कार्बोज के चयापचय हेतु थायमीन की आवश्यकता धात्री अवस्था में बढ़ा दी जाती है जिससे कार्बोज का सम्पूर्ण चयापचय हो सके । 

Q.16. एक गर्भवती महिला को साधारण महिला की अपेक्षा अधिक प्रोटीन की क्यों आवश्यकता होती है; दो कारण बताइए । 

Ans. गर्भावस्था एक स्त्री-निर्माणक दशा है। इसमें उसके गर्भस्थ शिशु का विकास होता है। उसको अतिरिक्त प्रोटीन की आवश्यकता निम्नलिखित कारणों के लिए होती है-

(क) शिशु के सम्पूर्ण विकास हेतु

(ख) माता के अपने शरीर में निर्माण हेतु, स्तनों के विकास हेतु, गर्भावस्था में वृद्धि हेतु, गर्भनाल की वृद्धि हेतु गर्भावस्था में प्रोटीन की आवश्यकता बढ़ जाती है। 

Q. 17. अर्द्धतरल आहार क्या है और किन परिस्थितियों में दिया जाता है ?

Ans. जो आहार दिखने में आधा तरल और आधा ठोस हो उसे अर्द्धतरल आहार कहते हैं। यह पूर्णत: तरल आहार से अधिक पौष्टिक होता है। यह रेशे रहित व मिर्च-मसाले रहित होता है जैसे खिचड़ी, दलिया व कस्टर्ड आदि। जब कोई रोगी तेज बुखार या दाँत के दर्द से परेशान हो, तब या जब खाना चबाने व निगलने में मुश्किल आ रही हो, तब यह भोजन दिया जाता है इसके अतिरिक्त 4-5 महीने के बच्चे को वह ऊपरी आहार के रूप में दिया जाता है।

Q. 18. निम्न मीनू में डायरिया (अतिसार) से ग्रस्त व्यक्ति के लिए तीन परिवर्तनों का सुझाव कारण सहित प्रस्तुत करें-चपाती, फ्राईड चावल, रायता, दाल फ्राईड, खीर, टमाटर व सलाद ।

Ans. अतिसार के रोगी को सादा उबला चावल व सादा दही, बिना तड़का लगाने वाल देनी चाहिए। फ्राइड चावल, रायता व सलाद नहीं देनी चाहिए क्योंकि इनमें वसा व रेशा होता है परेशानी पैदा करते हैं और अतिसार की स्थिति को और भी गम्भीर बना देते हैं।

Q. 19. एक गर्भवती महिला को आवश्यकतानुसार आहार लेने के लिए तीन खाद्य के नाम लिखिए । प्रत्येक खाद्य वर्ग में से दो मुख्य खाद्य पदार्थों की सूची बनाइये ।

(क) ऊर्जा देने वाले खाद्य वर्ग

(ख) निर्माण एवं टूट-फूट की मरम्मत वाला खाद्य पदार्थ वर्ग

(ग) रोगों से बचाव व शरीर को सुचारू रूप से चलाने वाला खाद्य-पदार्थ-वर्ग । 

Ans. (क) ऊर्जा देने वाले पदार्थ हैं कार्बोज व वसा, अतः अनाज व घी आदि से कर प्राप्त की जा सकती है।

(ख) दूध व दूध से बने पदार्थों द्वारा लोहे और विटामिन C को छोड़कर प्रोटीन खनिज लवण, C.P, विटामिन A आदि प्राप्त किए जा सकते हैं ।

(ग) गहरी पौलो हरी पत्तेदार सब्जियों व फल लोहे और अन्य विटामिनों की प्राप्ति के लिए उत्तम साधन है।

Q. 20. पोषण की आपूर्ति से गर्भावस्था में उत्पन्न तीन समस्याओं का उल्लेख कीजिए। 

Ans. गर्भावस्था में माता का आहार पूर्णतया पौष्टिक होना चाहिए। यदि गर्भावस्था में माता का आहार पौष्टिक नहीं होगा तो वह उन सभी समस्याओं से पीड़ित हो जायेगी जो कुपोषण से उत्पन्न होती है।

(क) यदि माता के आहार में लौह तत्व की कमी होगी तो वह अनीमिया या अरक्तता से पीड़ित हो जायेगी, उसके रक्त में हीमोग्लोबिन का मात्रा कम हो जायेगी क्योंकि गर्भावस्था में माता के रक्त में 25% बढ़ोतरी होती है ।

(ख) कैल्शियम प्रचुरता से होना आवश्यक है अन्यथा गर्भ के विकास हेतु हड्डियों में कैल्शियम घुल-घुलकर गर्म का विकास करेगा और गर्भवती स्त्री ‘अस्थिमृदुता’ या ‘ऑस्टोमलेसिया’ नामक रोग से ग्रसित हो जायेगी । 

(ग) आयोडीन की कमी होने से गर्भवती माता ‘ग्वायटर’ रोग से पीड़ित हो जायेगी। गर्भावस्था में आयोडीन मात्रा बढ़ा देनी चाहिए। गर्भावस्था में चयापचय दर बढ़ जाती है। ग्वायर रोग से पीड़ित होने पर गर्भ पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा और जन्म लेने के बाद बच्चा बौनेपन

व मानसिक विकार ‘क्रेटिनिज्म’ से पैदा होगा ।

माता का आहार गर्भावस्था में पूर्णतया पौष्टिक व संतुलित होना जरूरी है ताकि गर्भवती स्त्री निरोग रहे और उसका गर्भ भी पूर्ण विकास प्राप्त कर ले ।

Q. 21. ऊपरी आहार की आवश्यकता का वर्णन कीजिए ?

Ans. माता के दूध या ऊपर से पिलाने वाले दूध को छुड़ाकर जो अर्द्धठोस व ठोस पदार्थ शिशु के आहार के रूप में सम्मिलित किए जाते हैं उन्हें ऊपरी आहार तीन महीने के बाद शुरू किया जाता है ताकि

(क) बच्चे की आहारीय आवश्यकताएँ माता के दूध से पूरी नहीं हो सकी पूरी की जा सकती है।

(ख) ऊपरी आहार कुपोषण से बचने के लिए बच्चे को बहुत आवश्यक है, क्योंकि केवल दूध तीन महीने से बड़े बच्चे का पूर्ण विकास नहीं कर पाता । माता का दूध इतना नहीं होता कि बच्चा तृप्त हो सके ।

(ग) ऊपरी आहार छ: महीने के बच्चे के लिए अत्यन्त आवश्यक है, क्योंकि इसके बाद

(घ) ऊपरी आहार आत्मनिर्भरता लाने के लिए भी बच्चे को देना आवश्यक है, क्योंकि इससे बच्चा केवल माता पर ही आधारित नहीं रहता ।

Q. 22 एक गर्भवती स्त्री को दूसरी और तीसरी तिमाही में 300 K कैलोरी की अधिक आवश्यकता होती है। दो कारण बताइये ?

Ans. गर्भावस्था की दूसरी और तीसरी में 300 K Cal की अधिक आवश्यकता होती है। क्योंकि भ्रूण का विकास अत्यन्त तीव्र गति से होने लगता है। माता के शारीरिक अंगों की क्रियाएँ बढ़ती जाती हैं और उसके शरीर में भी काफी परिवर्तन होते हैं, जैसे-गर्भाशय बढ़ता है, गर्भनाल बढ़ता है, स्तनों में वृद्धि होती है आदि। इसलिए माता के स्वयं के शरीर निर्माण हेतु व गर्भ के उचित विकास हेतु माता के शरीर को कैलोरी की आवश्यकता बढ़ जाती है । कोई भी अतिरिक्त कार्य करने के लिए ऊर्जा की अतिरिक्त मात्रा चाहिए।


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (LONG ANSWER TYPE QUESTIONS)


Q. 1. आहार परिवर्तन से आप क्या समझते हैं ? पाँच सदस्यों के परिवार के लिए रात्रि के भोजन की तालिका बनाइए तथा वृद्ध दादी के लिए इस भोजन में दो परिवर्तन सुझाइए ।

Ans. आहार परिवर्तन— शारीरिक अवस्था की आवश्यकता के अनुसार आहार में आवश्यक परिवर्तन करना पड़ता है। शारीरिक परिवर्तन तथा विकास की अवस्थाओं में आहार की संरचना में परिवर्तन किया जाता है। जैसे-किशोरी, गर्भवती महिला, धात्री माता तथा रुग्ण अवस्था में परिवर्तित आहार । 

आहार परिवर्तन— चपाती, पुलाव (फ्राई किए हुए चावल सब्जी के साथ) दाल फ्राइड, बूंदी का रायता, सलाद, प्याज व टमाटर । मीनू में वर्णित उपरोक्त आहार उच्च कैलोरी से परिपूर्ण हैं तथा इसमें व स्टार्च की

अधिकता है । फ्राईड (तला हुआ) होने के कारण यह वृद्ध व्यक्ति के कमजोर पाचन संस्थान में आसानी से नहीं पचता । वृद्ध व्यक्ति के आहार में निम्नलिखित परिवर्तन किये जा सकते हैं-

(1) यदि व्यक्ति चावल भोजी है तो फ्राईड चावल व सब्जी के स्थान पर उबले हुए चावल तथा कम घी की सब्जी दी जानी चाहिए ।

(2) कम घी वाली, भली-भाँति पकाई गई दाल, फ्राइड दाल के स्थान पर दी जानी चाहिए ।

(3) चपाती ताजी पकाई हुई तथा मुलायम होनी चाहिए ।

(4) प्याज और टमाटर के स्थान पर खीर, बन्दगोभी तथा बारीक टमाटर दिया जान चाहिए क्योंकि वृद्ध व्यक्ति के दाँत कमजोर होते हैं।

NCERT Solutions for Class 12 Commerce Stream


Leave a Comment