Ncert Solutions Home Science Class 12 Chapter 8 Notes In Hindi PDF

WhatsApp Group (Join Now) Join Now
Telegram Group (Join Now) Join Now

Home Science Class 12 Chapter 8 Notes In Hindi PDF, Ncert Solutions Home Science Class 12 Chapter 8 Notes In Hindi PDF, Home Science Class 12 Chapter 8 Notes In Hindi

Home Science Class 12 Chapter 8 Notes In Hindi PDF

Class12th 
Chapter Nameखाद्य स्वच्छता | Food Hygiene
Chapter number08
Book NCERT
SubjectHome Science
Medium Hindi
Study MaterialsImportant questions answers
Download PDFHome Science Class 12 Chapter 8 Notes In Hindi PDF

खाद्य स्वच्छता | Food Hygiene

प्रस्तुत अध्याय में भोजन की स्वच्छता के नियमों और उसके महत्त्व के बारे में अध्ययन किया गया है। हम जानते हैं कि जीव-जगत और मानवीय जीवन के लिए भोजन एक अनिवार्य तत्व । भोजन करने से ही जीव जन्तु और मनुष्य जीवित रहते हैं। स्वच्छ भोजन मानवीय जीवन के लिए बहुत आवश्यक है। स्वच्छ भोजन करने से मनुष्य का स्वास्थ्य अच्छा बना रहता है। 

Ncert Solutions Home Science Class 12 Chapter 8 Notes In Hindi PDF

खाद्य स्वच्छता आहार को सुरक्षित तरीके से हस्तन करने को कहते हैं, जिससे कि वह कीटाणुरहित है । आहार सन्तुलन होते हुए भी यदि संदूषित हो जाए तो बहुत हनिकारक सिद्ध होता है । रसोईघर की सफाई का अर्थ है- कीटाणु, रोगाणु व जीवाणु रहित रसोईघर । कूड़े फेंकने के लिए कूड़ादान अनिवार्य है । 

भोजन को मक्खियों से बचाना, ज्वर, गला खराब होने की दशा में व फोड़े फुन्सियों से युक्त हाथों से भोजन को न छूना । घर पर खाद्य पदार्थों का संग्रह करते समय स्वच्छता तथा भोजन पकाने वाले तथा परोसने वाले बर्तनों स्वच्छता जरूरी है। 

भोजन पकाने तथ ग्रहण करने के बाद रसोईघर तथा परोसने वाले स्थान को स्वच्छ करना । वास्तव में स्वच्छ भोजन खाने से हमारा स्वास्थ्य ठीक बना रहता है और कोई बीमारी होने की संभावना नहीं रहती है ।


अति लघु उत्तरीय प्रश्न (VERY SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


Q. 1. खाद्य स्वच्छता को परिभाषित कीजिए ।

Ans. आहार को उस सुरक्षित तरीके से हस्तन करना ताकि वह संदूषण से दूर रहे व कीटाणुरहित रहे ।

Q. 2. सुरक्षित आहार के उपभोग से आप क्या समझते हैं ?

Ans. आहार को खरीदने, संगृहीत करने में, पकाने व परोसने में स्वच्छता के नियमों का पालन करना चाहिए । परिवार की आवश्यकताओं व घर में भण्डारण हेतु उपलब्ध सुविधाओं का ध्यान रखना चाहिए । खाद्य सामग्री उतनी ही खरीदनी चाहिए जितना उसके लिए धन उपलब्ध हो ।

Q.3. खाद्य स्वच्छता को प्रभावित करने वाले कारक बताइए ।

Ans. (1) रसोईघर की सफाई

(2) भोजन के हस्तन में स्वच्छता

(3) व्यक्तिगत स्वच्छता

(4) रसोईघर में स्वच्छता

Q. 4. अमीया उत्पादित पेचिश को फैलाने वाले परजीवी का नाम लिखिए । 

Ans. एण्टीअमीबाटिस्टलिटिका नामक परजीवी से अमीबा उत्पादित पेचिश फैलती है। 

Q.5. रसोईघर में स्वच्छता में क्या तात्पर्य है ?

Ans. रसोईघर सदा प्रकाशमय व हवादार, दरवाजे, खिड़कियों में जाली, सरलता से साफ होने वाली स्लेब व फर्श तथा संग्रहण का उचित स्थान देना चाहिए ।

Q.6. आहार हस्तन में स्वच्छता से क्या समझते हैं ?

Ans. परिवार को भोजन देते समय उसमें कोई कीटाणु व रोगाणु प्रवेश न कर सकें अथवा अनुचित ढंग से न पकाया हो तथा सावधानी से रखा गया हो, आहार हस्तन में स्वच्छता कहलाती है।

Q.7. व्यक्तिगत स्वच्छता का खाद्य स्वच्छता से क्या सम्बन्ध है ?

Ans. अपने आपको स्वच्छ रखने के लिए भोजन परोसते व पकाते समय स्वच्छता आवश्यक है; जैसे भोजन को छूने से पूर्व व पश्चात् हाथों को अच्छी तरह साबुन से धो लेना चाहिए; अपने बालों को अच्छी तरह बाँधकर रखना चाहिए । 

Q. 8. रसोईघर में सुरक्षा से क्या समझते हैं ?

Ans. सुरक्षा के कुछ नियमों का पालन करके हम इसे दुर्घटनाओं से सुरक्षित रख सकते हैं; जैसे कुकर व भगोने के हैण्डल हमेशा एक तरफ को रखने चाहिए जिससे यह अटक कर गिर नसकेँ । विभिन्न उपकरणों, डिटरजेंट तथा ईंधनों का सही प्रयोग, रसोईघर में सुरक्षा कहलाता है।

Q.9. भोजन परोसने में स्वच्छता किस प्रकार रखेंगे?

Ans. भोजन परोसने के लिए स्वच्छ बर्तनों तथा स्वच्छ स्थान का प्रयोग करना चाहिए। सफाई से परोसा गया भोजन सुरक्षित होने के साथ-साथ आकर्षक भी होता है। भोजन को हमेशा ढककर रखना चाहिए ।

Q. 10. घर पर खाद्य पदार्थों के संग्रह करते समय क्या स्वच्छता रखिएगा ? 

Ans. खाद्य पदार्थों को साफ करके ढक्कनदार टंकियों या डिब्बों में रखना चाहिए तथा समय-समय पर धूप लगाते रहना चाहिए। चूहों, तिलचट्टों, झींगुर आदि को घर में पनपने नहीं देना चाहिए तथा इन्हें नष्ट करते रहना चाहिए ।


लघु उत्तरीय प्रश्न (SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


Q. 1. सलाद के लिए प्रयुक्त सब्जियाँ रोग फैलाने वाले जीवाणु व कीटनाशक रासायनिक पदार्थों से दूषित होती हैं। किन्हीं दो उपायों का सुझाव दें जिनसे वे खाने हेतु सुरक्षित हो सकें। 

Ans. (क) नों से मुक्त होने हेतु सब्जियों को रगड़ कर पानी में धोएँ जिससे कि इनमें से कीटनाशक रसायन निकल जायें।

(ख) रोग फैलाने वाले जीवाणुओं से मुक्त करने हेतु पोटेशियम परमैग्नेट के घोल में धोना चाहिए ।

Q. 2. व्यक्तिगत स्वच्छता के उन चार पहलुओं का नाम लें जिनकी ओर एक भोजन तैयार करने वाले को सदैव ध्यान देना चाहिए । 

Ans. (1) एक भोजन तैयार करने वाले को शारीरिक रूप से स्वस्थ होना चाहिए अर्थात्

(2) उसके हाथ पूर्णतया साफ होने चाहिए ।

(3) नाखून कटे होने चाहिए क्योंकि ये रोगों के संक्रमण का कारक है । 

(4) भोजन तैयार करने वाले के बाल साफ तथा वैधे होने चाहिए ।

Q.3. रसोईयर को स्वच्छ रखने के बार उपाय लिखिए।

Ans. (1) रसोईघर सदा प्रकाशमय व हवादार होना चाहिए जिससे दुर्गन्ध नहीं आये तथा कोने में रहने वाले कीड़े-मकोड़े भी पैदा नहीं हो ।

(2) रसोईघर के दरवाजे व खिड़कियों में जाती लगी होनी चाहिए कि अन्दर आ सकें

(3) रसोईघर के स्लैब व जमीन सरलता से साफ होने वाला होने चाहिए। भोजन के टुकड़ों को साथ-साथ फेंक देना चाहिए। इससे तिलचट्टे व चूहे दूर रहते हैं। 

(4) भोजन पकाने के बर्तन साफ करने के लिए भरपूर ठंडा व गर्म पानी उपलब्ध होना चाहिए । 

Q. 4. एक रसोईयर की स्वच्छता के चार नियम समझाइए । Or, भोजन को स्वच्छ रखने के लिए खाना बनाने वालों को कौन-सी चार सावधानियों बरतनी चाहिए ?

Ans. (i) भोजन को छूने से पूर्व व पश्चात् हाथों को अच्छी तरह साबुन से धो लेना चाहिए। नाखून काट कर रखना अच्छी आदत है । शौचालय जाने के पश्चात् हाय अवश्य धोने चाहिए।

(ii) अपने बालों को अच्छी तरह बाँध कर रखना चाहिए ताकि ये भोजन में न गिरें । खाना खाते समय यदि उसमें बाल आ जाये तो बहुत बुरा लगता है। गृहविज्ञान प्रयोगशाला में कार्य करते समय सिर पर रूमाल सा स्कार्फ बाँधना चाहिए ।

(iii) भोजन पकाने वाले को भोजन चाटना नहीं चाहिए। कलछुली से भोजन का स्वाद देखकर फिर उसी को भोजन में डाल देना बुरी आदत है । 

(iv) गन्दे चप्पल, जूते, पैर व कपड़े लेकर रसोई घर में घूमना नहीं चाहिए। इनके साथ सहस्रों कृमि भोजन में प्रवेश पा सकते हैं तथा उसे अस्वच्छ बना सकते हैं। पुराने समय में गृहिणियाँ रसोईघर में पहनने के लिए अलग वस्त्र रखती थीं। भोजन पकाने से पहले नहाना अच्छी आदत है ।

Q. 5. खाना बनाने वाली ऐसी कौन-सी चार बातों का पालन करेंगे जिन्हें करने से बीमारी फैलने की रोकथाम में सहायता मिलती है ?

Ans. भोजन पकाने में स्वच्छता (Cleanliness in cooking)-भोजन पकाते समय स्वच्छता का सबसे अधिक ध्यान रखना चाहिए ।

(i) भोजन पकाने से पहले हाथों को स्वच्छ पानी और साबुन से धोना चाहिए; विशेषतः शौचादि जाने, धूल वाले डिब्बों, बर्तनों आदि को पकड़ने, नाक साफ करने, बालों या शरीर के -अन्य अंगों में खुजली करने के बाद अवश्य धोने चाहिए ।

(ii) भोजन पकाने तथा परोसने वाले बर्तनों को राख से, साबुन के घोल से या विम से साफ करना चाहिए। बर्तनों को कभी भी मिट्टी से साफ नहीं करना चाहिए; क्योंकि मिट्टी में रोगाणु होते हैं ।

(iii) कभी-कभी प्रयोग आने वाले उपकरण, जैसे कद्दूकस छलनी आदि का प्रयोग करके उसी समय साफ कर देने चाहिए अन्यथा इनके रोगाणु अपना घर बना लेते हैं।

(iv) परोसने वाले बर्तनों को ऐसे पकड़ना चाहिए कि भोजन से सम्पर्क में आने वाली सतह पर हाथ न लगे ।

(v) दाल, चावल, सब्जियों तथा फल आदि धोने के लिए केवल स्वच्छ जल का प्रयोग ही करना चाहिए । गन्दे पानी से धोने से संभव है कि हम इन्हें और दूषित कर दें।

(vi) पकाने के लिए भी सदैव स्वच्छ जल का प्रयोग ही करना चाहिए ।

(vii) झाडून आदि प्रतिदिन साबुन से धोने चाहिए ।

(viii) सब्जियाँ धोकर पकाएँ, भोजन को ढँककर रखना चाहिए जिससे मक्खी-मच्छरों से सुरक्षित रहे ।

Q6 एक रसोईया कौन-सी चार अस्वच्छ आदतों के कारण परिवार में बीमारी फैला सकता है ?

Ans. भोजन पकाने वाले व्यक्तियों की स्वच्छता (Personal hygiene while cooking food) भोजन पकाने वाले व्यक्तियों को नहा-धोकर साफ कपड़े ही पहन कर रसोई में घुसना चाहिए। 

यदि संभव हो तो भोजन पकाने वाले व्यक्तियों को साफ ऐन तथा साफ कपड़ा सिर पर बांधना चाहिए जिससे उनके बाल भोजन में न गिरें। इसके अतिरिक्त उनका स्वास्थ्य भी अच्छा होना चाहिए । रोगों से ग्रस्त व्यक्ति को रसोई में घुसने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। क्योंकि पेचिश, खाँसी-जुकाम आदि रोग दूषित भोजन द्वारा फैलते हैं । जहाँ भोजन पक रहा है। 

या रखा हो उस जगह पर थूकना, खाँसना अथवा छींकना नहीं चाहिए । घर पर भोजन पकाने के लिए यदि नौकर रखा जाए तो उसके स्वास्थ्य की पूरी जानकारी लेनी चाहिए । यह पता लगान चाहिए कि नौकर को कोई संक्रामक रोग तो नहीं है। 

इसी प्रकार प्रायः गृहिणियाँ बर्तन साफ करने के लिए थाइयाँ अथवा नौकर रखती हैं तथा उनकी स्वच्छता पर बिल्कुल ध्यान नहीं देती हैं उनका विचार होता है कि वह केवल बर्तनों की सफाई करेंगे और खाद्य पदार्थों को नहीं छ अतः उनकी स्वच्छता एवं निरोगता इतनी महत्वपूर्ण नहीं है। यह धारणा एकदम गलत है क्योंकि इनकी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी भोजन पकाने तथा परोसने वाले की स्वच्छता महत्वपूर्ण हैं।

Q.7. खाद्यों में सफाई से निबटने के नियम बताए ।

Ans, खाद्यों को साफ रखना बहुत ही आवश्यक है-

(क) भोजन पकाने से पूर्व भोजन स्वच्छ करें—पानी से धोयें, साफ टोकरियों में रखें। साफ दुकानों से खरीदें । 

(ख) भोजन पकाते समय स्वच्छता बरतें – कीटाणुनाशक साबुन से हाथ धोकर ही भोजन को छुएँ हाथों में घाव होने पर खाना न पकायें या फिर हाथों के दस्ताने पहन कर खाना बनायें। भोजन पकाते समय खाँसना, छींकना नहीं चाहिए। सिर या शरीर को खुजलाना आदि नहीं चाहिए। जूठी उंगलियाँ या हाथ भोजन में न डालें। 

(ग) भोजन को संग्रह करते समय स्वच्छता बरतें—पकाने के बाद भोजन को मक्ख व मच्छर से बचाने के लिए ढँक कर रखें। रसोईघर को साफ-सुथरा रखें, जालियाँ लगाकर मक्खी व मच्छर से सुरक्षित रखें ।

(घ) भोजन परोसते समय स्वच्छता बरतें भोजन साफ बर्तनों में साफ हाथों से साफ जगह पर परोसें। भोजन ग्रहण करने वाले व्यक्तियों की स्वच्छता का ध्यान रखें। कीटाणुनाशक साबुन से हाथ धोये बिना किसी भी व्यक्ति को भोजन खाने न दें। इन नियमों के पालन करने से भोजन दूषित होने से बच सकता है ।

Q.8. दूषित भोजन में विद्यमान जीवाणुओं द्वारा होने वाले चार रोगों के नाम लिखिए। दूषित भोजन में विद्यमान जीवाणुओं द्वारा होने वाले रोगों के नाम लिखिए ।

Ans. दूषित भोजन में विद्यमान जीवाणुओं द्वारा पाचन संस्थान के निम्न रोग फैलते हैं- 

(क) पेचिश (घ) पीलिया या जॉन्डिस (ख) हैजा (ग) अतिसार


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (LONG ANSWER TYPE QUESTIONS).


Q. 1. भोजन को पकाते तथा परोसते समय स्वच्छता के किन नियमों का पालन करना चाहिए ?

Ans. खाद्य स्वच्छता के नियम (Rules of food hygiene ) – संदूषण केवल घर ही में नहीं अपितु खेतों में जहाँ पर खाद्य-पदार्थ उगते हैं, संग्रहालयों अथवा गोदामों में जहाँ पर खाद्य- पदार्थ संग्रह किये जाते हैं, दुकानों, भोजनालयों आदि में भी होता है । अतः इन सभी जगहों पर भी खाद्य स्वच्छता का अत्यधिक महत्त्व है। भारत में सभी स्थानों पर स्वच्छता का स्तर बहुत हो शोचनीय है-

(i) खेतों में उत्पादन के समय स्वच्छता (Cleanliness in the field )- खेतों में फसल तैयार होने के समय से उसे बाजार में बेचने के समय तक स्वच्छता का ध्यान रखना आवश्यक है । सब्जियाँ मुख्यतः जड़ वाली सब्जियाँ, जैसे आलू, गाजर, मूली आदि को बाजार भेजने से पहले धोना हो तो केवल साफ पानी से धोना चाहिए । कई बार किसान इन सब्जियों से मिट्टी हटाने के लिए अस्वच्छ पानी का प्रयोग कर लेते हैं तथा इन्हें शुरू में दूषित कर देते हैं और कई व्यक्तियों के स्वास्थ्य को खतरे में डाल देते हैं।

(ii) संग्रहालयों अथवा गोदामों में स्वच्छता (Cleanliness of Stores and Godowns)—– जिन गोदामों में गेहूँ आदि अनाज थोक बिक्री के लिए रखे गये हैं वहाँ तो उनको सोलन से चूहों, झींगुर और घुन से बचाने के लिए इस विषय में पूर्ण सावधानी अपेक्षित है। यह सभी कृमि अनाज को नष्ट ही नहीं करते बल्कि उन्हें संदूषित भी करते हैं। सीलन में उनके अणु-जीवन पनपते हैं । 

चूहे, झींगुर आदि उसमें लार, मल-मूत्र और पैरों में चिपके हानिकारक जीवाणुओं द्वारा उन्हें संदूषित करते हैं। घुन लगने से अनाजों के पोषक मूल्य भी समाप्त हो जाते हैं। गोदामों और भण्डार गृहों में सफाई का ध्यान रखना भी आवश्यक है। उनमें प्रकाश और के आवागमन की व्यवस्था भी होनी चाहिए। चूहों के आने के लिए सभी रास्ते बन्द होने वायु चाहिए। खाद्यान्नों को बड़ी-बड़ी टंकियों में (Silo), प्लास्टिक की चादर से बैंक कर रखना चाहिए । यदि किसी कारणवश कुछ खाद्यान्न खराब हो जाएँ तो उन्हें अलग कर देना चाहिए और बाजार में नहीं भेजना चाहिए अन्यथा यह मनुष्य में कई प्रकार के रोग उत्पन्न कर देते हैं। 

(iii) बाजार में दुकानों की स्वच्छता- दुकानों की स्वच्छता भी घर की स्वच्छता जितनी ही आवश्यक हैं, क्योंकि खाद्य पदार्थ काफी समय के लिए दुकानों में संगृहीत रहते हैं तथा यहाँ पर इनके दूषित होने की अधिक सम्भावना होती है। सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के भोजन निरीक्षकों (Food inspectors) को समय-समय पर 

(i) खाद्य-पदार्थ सम्बन्धी दुकानों विशेषकर शीघ्र नष्ट होने वाले खाद्य-पदार्थ, जैसे मांस, मछली, अण्डा, फल, सब्जियाँ; 

(ii) खाद्य पदार्थ सम्बन्धी कारखाने, जैसे बिस्कुट, डबल रोटी आदि; 

(iii) गौशाला अथवा दूध की डोरियों का निरीक्षण करते रहना चाहिए। इन सभी स्थानों पर बहुत सफाई रखनी चाहिए, खाद्य पदार्थों को मक्खियों आदि से बचाने के लिए जाली वाली बन्द अलमारियों में रखना चाहिए, और चूहे तथा अन्य कृन्तक प्राणियों से बचाने के लिए चूहेदानियों का, दवाइयों का प्रयोग करना चाहिए।

(iv) घर में खाद्य भण्डारों की स्वच्छता- घर पर भी यदि वर्ष भर के लिए गेहूँ आदि अनाज संग्रह किये जाते हैं तो गृहिणी को भी उनकी सुरक्षा हेतु उपयुक्त उपाय व सावधानी बरतनी चाहिए। अनाज को सुखाकर ढक्कनदार टकियों (Silo) कनस्तरों में इस प्रकार बन्द करके रखना चाहिए कि चूहे और झींगुर भी प्रवेश न कर पायें। घुन से बचाने के लिए बहुत-सी गृहिणियाँ गेहूँ में नमक के ढेले, लाल मिर्च, नीम की सुखाई हुई पत्ती आदि मिला देती है। समय-समय पर धूप भी लगवाते रहना चाहिए ।

घर में संग्रहीकरण हेतु एक भण्डारगृह का होना आवश्यक है। इसमें नमी नहीं होनी चाहिए अन्यथा वस्तुएँ खराब हो जायेंगी। दीवारों पर यदाकदा सफेदी कराते रहना चाहिए । 

भण्डारगृह में वायु तथा धूप आने का उचित प्रबन्ध होना चाहिए। फर्श पक्का होना चाहिए । कच्चे फर्श पर ईंटें या लकड़ी के तख्ते रखकर उस पर डिब्बे, कनस्तर आदि रखने चाहिए। उसमें अलमारियाँ, एक मेज, तराजू तथा एक हिसाब लिखने की पुस्तिका भी होनी चाहिए। 

दाल के लिए ऐसे डिब्बे हों जिसमें वायु प्रवेश न कर सके। आर्ट के लिए कनस्तर तथा गेहूं के लिए टंकी होनी चाहिए। डिब्बों, कनस्तरों व टॉकयों पर पेण्ट कर देना चाहिए। डिब्बों, कनस्तरों व टकियों पर उसमें रखी वस्तु के नाम का लेबल लगाना चाहिए ताकि उन्हें निकालने में सुविधा रहे ।

(v) रसोईघर की स्वच्छता (Cleanliness of kitchen ) रसोईघर अथवा खाना पकाने के स्थान को हमेशा साफ रखना चाहिए । यदि फर्श या स्लैब (Slab) पर कुछ गिर जाये तो उसे उसी समय साफ कर देना चाहिए । हर हफ्ते रसोईघर की अलमारियों, जालियों को साफ करना चाहिए जिससे कीड़े पैदा न हो। टाइलों आदि को भी धोकर साफ रखना चाहिए ।

यदि रसोईघर गन्दा होगा तो उसकी दीवारों पर धूल, मिट्टी तथा जाले व छिपकलियाँ होंगी। चूहे गूंथे आटे व अन्य खाद्य पदार्थ का भोग करेंगे। मक्खियाँ भी खाद्यों का स्वाद चखने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगी । इसलिए रसोईघर साफ रखें । कमरा झाड़ू-पोंछ कर साफ करें। जालें निकाल दें, खाद्य-पदार्थ ढके हुए हों, चूहों के अन्दर जाने के रास्ते बन्द हो ।

यदि रसोईगृह में सब्जी के छिलके, अनाज के दाने और अन्य कूड़ा इधर-उधर न डालकर एक बर्तन में एकत्रित किया जाता है तो उससे रसोईगृह में सफाई रहती है । मक्खियाँ कूड़े पर नहीं बैठ पातीं और उससे चूहे भी नहीं आकर्षित होते हैं । 

रसोईघर की सफाई के साथ कूड़ेदान को भी सफाई होनी चाहिए । घर के बाहर सार्वजनिक कूड़ेदानों में रसोईघर के कड़े को डालकर उसको धोकर रसोईघर में रखना चाहिए। कम-से-कम सप्ताह में दो बार कूड़ेदान में डी० डी. टी पाउडर छिड़क देना चाहिए ।

रसोईघर में गन्दे पानी के निकास के लिए उचित प्रबन्ध आवश्यक है अन्यथा सीलन हो जाएगी जो रोगाणुओं के पनपने में बहुत सहायक होती है

यदि रसोईघर में नीचे बैठकर भोजन बनाया जाता है तो पैरों की मिट्टी भोजन में कुछ अंश में पहुँच सकती है इसलिए चप्पल, जूते आदि लेकर रसोई में न जाएँ ।

(vi) बर्तनों की स्वच्छता (Cleanliness of utensils ) वर्तन राख, साबुन या विम से साफ करने चाहिए । भोजन को स्वच्छ बर्तनों में तथा स्वच्छ जगह पर परोसना चाहिए । प्रायः देखने में आया है कि लोग मिट्टी से बर्तन साफ करते हैं, ऐसा कभी नहीं करना चाहिए; क्योंकि मिट्टी में सबसे अधिक तथा हानिकारक जीवाणु पाए जाते हैं ।

छूत के रोगी के जूठे व छुए बर्तनों को उबलते पानी में विसंक्रमित करना चाहिए । चाकू छुरी कद्दूकस छलनी आदि प्रायः प्रयोग के बाद बिना साफ किये ही उठाकर रखते हैं। परिणाम यह होता है कि वे इतने गन्दे हो जाते हैं कि उनका रूप-रंग तो बदलता है परन्तु जमी हुई गन्दगी में जीवाणु छुपे रहते हैं। झाड़न और ब्रश आदि साफ रखना चाहिए नहीं तो जीवाणु पनप जाएँगे। बर्तनों की धुलाई नल के बहते पानी में करनी चाहिए ।

(vii) भोजन पकाने में स्वच्छता ( Cleanliness in cooking ) – भोजन पकाते समय स्वच्छता का सबसे अधिक ध्यान रखना चाहिए- 

(i) भोजन पकाने से पहले हाथों को स्वच्छ पानी और साबुन से धोना चाहिए विशेषतः शौचादि जाने, धूल वाले डिब्बों, बर्तनों आदि को पकड़ने, नाक साफ करने, बालों या शरीर के अन्य अंगों में खुजली करने के बाद अवश्य धोने चाहिए। 

(ii) भोजन पकाने तथा परोसने वाले बर्तनों को राख से, साबुन के घोल से या विम से साफ करना चाहिए । बर्तनों को कभी भी मिट्टी से साफ नहीं करना चाहिए क्योंकि मिट्टी में रोगाणु होते हैं । 

(iii) कभी-कभी प्रयोग आने वाले उपकरण जैसे कद्दूकस छलनी आदि का प्रयोग करके उसी समय साफ कर देनी चाहिए अन्यथा इनमें रोगाणु अपना घर बना लेते हैं। 

(iv) परोसने वाले बर्तनों को ऐसे पकड़ना चाहिए कि भोजन से सम्पर्क में आने वाली सतह पर हाथ न लगे। 

(v) दाल, चावल, सब्जियों तथा फल आदि धोने के लिए केवल स्वच्छ जल का ही प्रयोग करना चाहिए । गन्दे पानी से धोने से सम्भव है कि हम इन्हें और दूषित कर दें। 

(vi) पकाने के लिए भी सदैव स्वच्छ जल का ही प्रयोग करना चाहिए। 

(vii) झाड़न आदि प्रतिदिन साबुन से धोने चाहिए ।

(viii) सब्जियाँ धोकर पकाएँ, भोजन को ढंककर रखना चाहिए जिससे मक्खी-मच्छरों से सुरक्षित रहें ।

(viii) भोजन परोसने में स्वच्छता-भोजन परोसने के लिए स्वच्छ बर्तनों तथा स्वच्छ स्थान का प्रयोग करना चाहिए । सफाई से परोसा गया भोजन सुरक्षित होने के साथ-साथ आकर्षक भी होता है। भोजन को हमेशा ढककर रखना चाहिए ।

(ix) भोजन खाते समय स्वच्छता- भोजन खाने से पूर्व हमेशा साबुन तथा पानी से हाथ धोने चाहिए । नोटों तथा सिक्कों को छूकर अधिकांश लोग बिना किसी हिचकिचाहट के खाना खाते हैं; क्योंकि उन्हें इस बात का ज्ञान नहीं होता है कि उनमें असंख्य रोगाणु होते हैं। भोजन I 

Q. 2. आहार व जल के संदूषण के क्या कारण हैं ? 

Ans. यह तो हम सभी जानते हैं कि उत्तम स्वास्थ्य के लिए आहार का संतुलित होना बहुत हो आवश्यक है; क्योंकि इसमें पाये जाने वाले तत्व हमें कार्य करने के लिए शक्ति प्रदान करते हैं तथा हमें रोग से बचने के लिए क्षमता भी देते हैं । 

परन्तु यदि आहार अस्वच्छ वातावरण में पकाया, रखा व खाया जाए तो हानिकारक सिद्ध हो सकता है क्योंकि बीमारियों के जीवाणु आहार

में प्रवेश कर जाएँगे और हम उसका शिकार हो जाएँगे । उत्तम स्वास्थ्य के लिए आहार के साथ-साथ स्वच्छ जल भी आवश्यक है। आहार व जल के संदूषण के कारण आहार के संचित व अस्वच्छ होने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं-

(1) मल-मूत्र, कूड़ा-करकट व गन्दे जल के निस्तारण की सन्तोषजनक व्यवस्था हो 

(2) व्यक्तिगत रहन-सहन में स्वच्छता का अभाव । 

(i) मल-मूत्र, कूड़ा-करकट व गन्दे जल के निस्तारण की सन्तोषजनक व्यवस्था न होना- हमारे देश में मल-मूत्र के गृह से निकासी संवाहन एवं निस्तारण की समस्या अभी तक गम्भीर रूप धारण किए हुए है। बहुत बड़े शहरों को छोड़कर प्रायः समस्त भारत में स्वास्थ्य की दृष्टि से इस समस्या का उचित समाधान अभी नहीं हो पाया है। मल-मूत्र संवाहन की सुव्यवस्था के अभाव में बहुत से रोग, जैसे- हैजा, टायफाइड, पेचिश असंख्य लोगों की मृत्यु का कारण बनते हैं। इन बीमारियों से ग्रस्त रोगियों के मल-मूत्र व वमन से मक्खियों द्वारा भोजन दूषित हो जाता है या दूषित भूमि से बायु द्वारा रोग के कीटाणु भीजन और स्वस्थ व्यक्तियों में प्रवेश पा लेते हैं और उनमें रोग उत्पन्न करते हैं। 

मल के विकास में शौचालयों का महत्वपूर्ण स्थान है। हमारे अधिकांश गाँवों में दो शौचालयों की कोई व्यवस्था ही नहीं होती निवासी घरों के आस-पास की खुली भूमि में, गली मुहल्स में, नदी-तालाब आदि के समीप शौच करते हैं। छोटे शहरों के घरों में शौचालयों की व्यवस्था तो होती है किन्तु यह सीमित होने के कारण समस्त परिवार के लिए अपर्याप्त व असन्तोषजनक होती है। यज्य जल जिसमें मल-मूत्र, मुदसालों और गौशालाओं से प्राप्त द्रवीय मिश्रण, मकान और कारखानों से प्राप्त पानी भी सम्मिलित है, गन्दा पानी कहलाता है। 

नगरों में इसके निस्तारण की कोई विधिवत् व्यवस्था नहीं है। शहरों में गृह से निकलता हुआ पानी, जैसे-शौचालय का, रसोई के बर्तन मांजने का, कपड़े धोने व स्थान आदि का, खुली नदियों में बहता है। 

घरों के अन्दर तथा बाहर की नालियों में कुछ लोग बच्चों को शौच भी कराते हैं। जहाँ नालियों की व्यवस्था पायी जाती है यहाँ प्रायः देखा जाता है कि ये ठीक ढंग से नहीं बनायी गयी है। उनमें ढाल काफी नहीं होता जिसके कारण पानी तेजी से नहीं वह पाता और ठोस पदार्थ नीचे बैठते जाते हैं। इसमें मक्खी-मच्छर उत्पन्न हो जाते हैं तथा दुर्गन्ध फैलते हैं।

गाँव में गन्दा पानी कच्ची नालियों द्वारा बहकर किसी तालाब, बाग, खेत या कभी-कभी ऐसे ही खाली स्थानों में छोड़ देते हैं। भूमि द्वारा गन्दे पानी सोखे जाने से पीने के पानी के प्रदूषण की सम्भावना रहती है। कच्ची नालियों में वनस्पति उग जाती है जो गन्दे पानी के बहाव में रुकावट डालता है। 

यदि गन्दा पानी किसी गड्ढे में जाकर जमा होता है तो मच्छर और मक्खियाँ प्रवर मात्रा में बढ़ जाते हैं। इन तालाबों में यहाँ के निवासी नहाते हैं, गन्दे कपड़े धोते हैं, गाय-भैंस को पानी पिलाते हैं और नहलाते हैं। इस प्रकार रोगों के संक्रमण सहज ही फैल जाते हैं।

(ii) व्यक्तिगत स्वच्छता का अभाव- मनुष्य अपनी गन्दी आदतों के कारण तथा अस्वच्छ रहने के कारण, अपने भोजन को स्वयं दूषित बना देता है। भोजन का अधिकांश प्रदूषण गन्दे हाथों के कारण होता है। 

पुराने जमाने से चले आ रहे कुछ रीति-रिवाज आज की विज्ञान की दुनिया में भी बहुत ही उपयुक्त सिद्ध होते हैं, जैसे रसोईघर में जूते न ले जाना, भोजन करने से पहले व बाद में हाथ धोना व कुल्ला करना, गिने-चुने व्यक्तियों का भोजन को छूना आदि। परन्तु आज के आधुनिक युग में इन बातों की कोई भी परवाह नहीं करता । 

यहाँ तक कि यदि कोई व्यक्ति इन बातों को अपनाता है तो उसे रूढ़िवादी या खूसट कहा जाता है। बहुत-से लोग भोजन तैयार करते समय बाल खुले रखते हैं जिससे वह रोटी, चपाती, सब्जी आदि तैयार करते समय उनमें गिर जाते है वह उन्हें दूषित बना देते हैं। 

कुछ लोग बड़े-बड़े नाखून रखते हैं तथा उनमें मैल भरी होती है। जिनमें विभिन्न प्रकार के रोगाणु पनपते रहते हैं। कुछ लोग बिना हाथ धोए ही खाना खाने बैठ जाते हैं ऐसे व्यक्ति के शरीर में गन्दे हाथों से किये गये भोजन द्वारा अनेक रोगाणु पहुँच जाते हैं। खांसी व छींक भी रोगाणु फैलाते हैं । खाना बनाते समय खाँसी व छाँक के लिए मुँह पर या हाथ में रूमाल रखना चाहिए । 

इसलिए भोजन की स्वच्छता के लिए हर समय पूरा ध्यान रखा जाए चाहे व खरीदते समय हो, पकाते समय हो या खाते समय हो । खाद्य-पदार्थ न सिर्फ घर पर ही संदूषित हो जाते हैं बल्कि उन स्थानों पर भी जहाँ पर बहू उगाए जाते हैं, संग्रह किए जाते हैं, पकाए तथा खाए जाते हैं, जैसे-खेत, संग्रहालय, गोदाम, गौशालाएँ, भोजनालय, दुकान और होटल । इन सभी स्थानों पर स्वच्छता का स्तर बहुत ही शोचनीय है । अतः इनके लिए खा स्वच्छता सम्बन्धी नियमों का पालन करना बहुत ही आवश्यक है । 

Q.3. आहार हस्तन (Food Handling) करते समय ध्यान देने योग्य सभी बातों का उल्लेख करें।

Or, रसोईघर में कार्य करते समय आप स्वच्छता के किन छः नियमों का पालन करेंगे? 

Ans. (क) भोजन को छूने से पहले कीटाणुनाशक साबुन से हाथ धोकर हाथ लगायें 1

(ख) खुले बालों से रसोईघर में प्रवेश न करें 

(ग) भोजन को जूठा न करें, अंगुलियाँ न चाटें ।

(घ) भोजन ढँक कर रखें ।

(ङ) यदि हाथों में घाव हो तो भोजन को न छुएँ।

(च) भोजन के सम्मुख खाँसें व छींके नहीं ।

(छ) बासी व सड़ा हुआ भोजन न करें भोजन को साफ व स्वच्छ बर्तनों में पकाएँ । 

(झ) भोजन को स्वच्छ जल से धोकर फिर पकाएँ ।

(ञ) रोगी को रसोईघर में न घुसने दें

(ट) बाहर पहनने वाले जूते लेकर रसोईघर में न जाएँ ।

Q. 4. दूषित भोजन और जल से होनेवाली किन्हीं दो बीमारियों के नाम लिखें व उनके लक्षण और रोकथाम के बारे में लिखिए ।

Ans. दूषित भोजन से होने वाले रोगों में अतिसार और हैजा प्रमुख रोग हैं। अतिसार – इस रोग में पतले-पतले दस्त आने लगते हैं; व्यक्तिगत अस्वच्छता व खाने-पीने की गन्दगी से रोग के कीटाणु शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और शरीर को रोगी बना देते हैं।

लक्षण-पतले-पतले दस्त आते हैं। पेट में दर्द रहता है। दस्तों की अधिकता से निर्जलीकरण की स्थिति बन जाती है। समय पर यदि जीवन रक्षक घोल न दिया जाए या डाक्टरी सहायता न दी जाए तो रोगी की मृत्यु भी हो सकती है। रोकथाम के नियम :

(क) स्वच्छता सम्बन्धी सभी नियमों का पालन बहुत ही जरूरी है।

(ख) स्वच्छ जल का प्रयोग करें ।

(ग) मक्खियों व मच्छरों से भोजन को बचाएँ ।

(घ) पक्के शौचालय बनवाएँ; खुली जगह पर मल-मूत्र न त्यागें जिससे उन पर मक्खियाँ न बैठ सकें ।

हैजा — यह रोग ‘वित्रियोकोम कौलरी’ नामक जीवाणु से फैलता है। दूषित भोजन व जल को ग्रहण करने से यह रोग फैलता है। इसका संक्रमण काल 5 दिन है। 

लक्षण – इस रोग में पतले चावल के माँड़ जैसे दस्त आते हैं। इस रोग में उल्टियाँ लगने से जल व इलेक्ट्रोलाइट की कमी हो जाती है। रोगी को अकड़न व प्यास महसूस होती है। पेशाब रुक जाता है जिससे रोगी के शरीर में विषाक्तता अधिक हो जाती है। निर्जलीकरण रोकने के लिए प्रचुर मात्रा में जल और जीवन रक्षक घोल व एक चम्मच चीनी पिलाया जाना चाहिए । रोगी को थोड़े-थोड़े समय बाद एक लिटर पानी में चुटकी भर नमक डालकर पिलाते रहना चाहिए। रोकथाम के उपाय अतिसार की तरह ही है।

NCERT Solutions for Class 12 Commerce Stream


Leave a Comment