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Home Science Class 12 Chapter 9 Notes In Hindi PDF

Class12th 
Chapter Nameआहारीय मिलावट | Food Adulteration
Chapter number09
Book NCERT
SubjectHome Science
Medium Hindi
Study MaterialsImportant questions answers
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आहारीय मिलावट | Food Adulteration

प्रस्तुत अध्याय में भोजन में होने वाले मिलावट के बारे में विवेचन किया गया है कि मिलावटी भोजन शरीर के लिए हानिकारक होता है। इसलिए आहारीय मिलावट के प्रति सुरक्षात्मक उपाय करना आवश्यक है। मिलावट वाले भोजन को करने से शरीर में विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ होने की संभावना रहती है। साथ ही शरीर में ऊर्जा की कमी भी हो जाती है। इसलिए मिलावट वाले भोजन का उपयोग नहीं करना चाहिए ।

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खाद्य पदार्थ मिलावटी तब समझा जाना चाहिए जब उसमें सस्ते घटिया और हानिकारक तत्व मिले हों। इसे तव मिलावटी समझा जाना चाहिए जब उसमें से उपयोगी तत्व निकाल लिये गये हों। इस पर नियंत्रण पाने के लिए एक कानून Prevention of Food Adulteration Act (PFA) बनाया गया जो 1955 में लागू कर दिया गया । यदि खाद्य पदार्थ में कुछ इस प्रकार के पदार्थ मिला दिये गये हों जो उसके रूप, गुण तथा प्रकृति को हानि पहुंचाए तो मिलावटी समझा जाता है।

खाद्य पदार्थ को मिलावटी समझा जाता है यदि उस पदार्थ को अस्वच्छ तथा हानिकारक वातावरण में बनाया, पैक किया अथवा संगृहित किया गया हो जिसके कारण वह दूषित अथवा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो जाए। व्यक्तिगत, सामाजिक तथा सरकारी स्तर पर आहारीय मिलावट से सुरक्षा आवश्यक है। ऐसा होने से मानवीय जीवन पर अनुकूल प्रभाव पड़ सकता है, मानवीय जीवन स्वस्थ रह सकता है ।


अति लघु उत्तरीय प्रश्न (VERY SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


Q. 1. दो मिलावटी पदार्थों के नाम दें जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सिद्ध होंगे। 

Ans. दालों व मिठाइयों में केसरी दाल, व पौला रंग तथा हल्दी में मिलाया जाता है। यह पदार्थ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है तथा इनसे लेथाइरिज्म रोग फैलता है। इस रोग का सभी अंगों पर बुरा प्रभाव पड़ता है और येंगे भारी हो जाती है।

Q. 2. केसरी दाल के सेवन से होने वाले स्वास्थ्य पर दो दुष्परिणाम दीजिये । 

Ans. कैसी दाल, अरहर या चना दाल में मिलाई जाती है। उससे टाँगों का पक्षाघात या लैपाइरिज्म रोग होता है। पाचन संस्थान, यकृत व गुर्दे के विकार भी इन्हीं पदार्थों के कारण होते हैं ।

Q.3. मसालों में मिलाई जाने वाली दो आम मिलावटों के नाम बताइए ।

Ans. पिसी हुई सूखी पास या तिनके तथा घोड़े की लीद (मल) ।

Q.4. डिब्बाबंद अन्नानास को पी एफ ए किन चार परिस्थितियों में मिलावटी घोषित कर सकता है ? 

Ans. डिब्बाबंद अन्नानास में मिलावट (Adulteration in tinned pineapple) –

1. मीठा रस की जगह संक्रीन (Saccharine) |

2. बासी व सड़ा-गला अन्नानास ।

3. घटिया किस्म का रंग व (Flovour) सुगंध ।

4. पुराना निर्माण, पैकिंग या संग्रह ।

Q.5. आहारीय मिलावट की परिभाषा लिखिए ।

Ans. खाद्य पदार्थ में कोई मिलता-जुलता पदार्थ मिलाने अथवा उसमें से कोई तत्व निकालने या उसमें कोई हानिकारक तत्व मिलाने से खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता में परिवर्तन को मिलावट कहा जा सकता है।

Q.6. आजीमोन के बीज मनुष्य के स्वास्थ्य पर क्या कुप्रभाव डालते हैं ?

Ans. आजमोन के बीज से टोगों और पैरों में सूजन आ जाती है। हाथों और चेहरे पर भी जल जमाव के कारण सूजन आ जाती है। रोगी का यकृत बढ़ जाता है ।

Q.7. दूध में मिलावट करने के लिए प्रयोग में लाए जाने वाले दो पदार्थों के नाम लिखिए । Or, ऐसे दो खाद्य पदार्थों के नाम दें जिससे दूध में मिलावट की जाती है ।

Ans. अतिरिक्त जल तथा स्टार्च ।

Q.8. गुड़ में किन दो पदार्थों की मिलावट की जाती है ?

Ans. मेटानिल पीला रंग, दूषित गन्ने का रस, भिन्डी क्यूसिलेस (लसलसा पदार्थ )|

Q. 9. मिलावटी पदार्थ किसे कहते हैं ?

Ans. मिलावटी पदार्थ के होते हैं जो सस्ते, आकार-प्रकार अच्छी तरह मिलाये जा सकें तथा आसानी से पहचाने न जा सकें । 

Q. 10. अरहर दाल में मिलाई गई

Ans. केसरी दाल का स्वास्थ्य पर एक कुप्रभाव लिखिए। दिमागी आघात, लैथाइरिज्म (टाँगों का मुडना या टोंगों में लकवापन ) ।

Q. 11. दूध में मांड की उपस्थिति किसकी सहायता से जाँची जाती है ?

Ans. दूध में मांड की उपस्थिति “आयोडीन टेस्ट” की सहायता से जाँची जाती है। दूध में कुछ बूंदें अगर आयोडीन की डाली जायें, तो गहरा नीला या बैंगनी रंग आना माँड़ का सूचक है।

Q. 12. बूरा में किस चीज की मिलावट होती है ? 

Ans. बूरा में कपड़े धोने वाले सोडे की मिलावट होती है।

Q. 13. मिलावट की परिभाषा लिखें। Or मिलावट का अर्थ दो उदाहरण देकर समझाएँ ।

Ans. मिलावट एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके होने पर खाद्य पदार्थ के गुण, पोषकता अथवा प्रकृति में परिवर्तन आ जाता है। मिलावट के कारण ही कोई भी पदार्थ स्वास्थ्य के लिए अहितकर हो सकता है । मिलावट का अर्थ केवल कोई घटिया पदार्थ मिलाना ही नहीं बल्कि किसी पदार्थ में से पोषक तत्व निकालना भी है; जैसे

(क) दूध में पानी मिलाना, या उसमें से क्रीम निकालना दोनों ही मिलावट के उदाहरण हैं। 

(ख) घुन लगा अनाज भी मिलावट का उदाहरण है

Q. 14. कौन से दो खाद्य पदार्थों में केसरी दाल की मिलावट हो सकती है ? स्वास्थ्य पर इसके कुप्रभावों की व्याख्या करें।

Ans. कैसरी दाल, अरहर या चना की दाल में मिलाई जाती है। इसके सेवन से लेथाइरिज्म नाम का रोग हो जाता है जिससे रोगी के घुटनों के जोड़ो में और टाँगों के जोड़ों में सख्ती आ जाती है और टाँगों का निचला हिस्सा काम करना बंद कर देता है। लकवा (Paralyses) रोग हो जाता है।

Q. 15. निम्नलिखित प्रयुक्त अक्षर P.F.A. किसका सूचक है ? 

Ans. उपर्युक्त अक्षर P.FA का सम्पूर्ण रूप है (Prevention of Food Adulteration Act) खाद्य अपमिश्रण रोकथाम अधिनियम ।

Q. 16. दूध में किन दो चीजों की मुख्यतः मिलावट की जाती है ?)

Ans. दूध में प्रायः पानी या माँड की मिलावट की जाती है ।

Q. 17. खाद्यों में लौह रेतन की मिलावट ज्ञात करने के लिए किसका प्रयोग किया जाता है? 

Ans. खाद्यों में लौह रेतन की मिलावट ज्ञात करने के लिए चुम्बक का प्रयोग किया जाता चुम्बक में लोहे का चूरा चिपक जाता है।

Q. 18. दालों में पाई जाने वाली चार मिलावटों के नाम लिखिये ।

Ans. दालों में पाई जाने वाली चार मिलावटें निम्नलिखित है-

(क) केसरी दाल ।

(ख) कंकड़ पत्थर, मिट्टी आदि ।

(ग) मेटानिल पीला रंग । 

(घ) घुन लगी दाल ।

Q. 19. केसरी दाल व आजमोन तेल की मिलावट किन-किन खाद्य पदार्थों में की जाती है। 

Ans. केसरी दाल की मिलावट अरहर व चना की दाल में की जाती है। आर्जीमोन तेल की मिलवाट सरसो के तेल में की जाती है । 

Q. 20. तीन मानक प्रमाण चिह्नों के नाम बताइए ।

Ans. एगमार्क, F.P.O तथा I.S.I

Q. 21. गुड़ में मिलावट करने के लिए कौन-से रासायनिक पदार्थ का प्रयोग होता है ?

Ans. गुड़ में मैटानिल येलो (पीले रंग की मिलावट की जाती है। मैटानिल पीला रंग एक कैंसर उत्पन्न करने वाला कारक है। इसके द्वारा गले, अमाशय तथा आँतों का कैंसर होने का भय होता है, यदि वह अत्यधिक मात्रा में लिया जाए ।


लघु उत्तरीय प्रश्न (SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


Q. 1. खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए छः सुझाव दीजिए ।

Ans. (1) विश्वसनीय दुकानों से ही सामान खरीदें ।

(2) विश्वसनीय तथा उच्च स्तर की सामग्री खरीदें क्योंकि उसकी गुणवत्ता अधिक होती है। एगमार्क, E.P.O तथा IS.I चिह्नित वस्तुएँ खरीदें ।

(3) खुले खाद्य पदार्थ न खरीदें; सीलबन्द पैकेट व डिब्बे में ही लें ।

(4) खरीदने से पहले लेबल व प्रमाण चिह्न अवश्य पढ़ लें; जैसे खाद्य पदार्थ का नाम, सामग्री, बनाने तथा खराब होने की तिथि, उत्पादक का नाम, स्थान और पता, कुल भार, स्थानीय कर रहित कीमत, संग्रहण तथा इस्तेमाल सम्बन्धी जानकारी, गुणवत्ता के लिए प्रमाण चिह्न है।

(5) गुणवता के लिए सचेत रहे और ध्यान रखें कि आप मिलावट के कारण ठगे न जा सकें। 

(6) स्वास्थ्य चिकित्सा प्रयोग से मिलावटी पदार्थों का निरीक्षण व परीक्षण कराएँ ।

Q.2. मिलावट क्यों की जाती है ?

Ans. 1. व्यापारियों का अधिक लाभ कमाने का उद्देश्य ।

2. लगातार कीमतें बढ़ने तथा वस्तु विशेष की कमी के कारण । 

3. मिलावट करने के लिए आधुनिक तकनीक की आसानी से उपलब्धि

4. आहार को स्वच्छ व साफ रखने के लिए वातावरण की कमी ।

5. उपभोक्ता बनावट की विविधता, रंग और महक आदि का पसन्द किया जाना ।

6. उपभोक्ताओं से लापरवाही, अज्ञानता, विरक्ति, संगठन की कमी होना और कार्यवाही न करना । 

7. आहार संरक्षण के लिए उचित कदम उठाने तथा आहार सम्बन्धी नियमों का पालन करने की अपर्याप्त सुविधाएँ। 

Q.3. मसाले खरीदते समय आप किस पर अधिक विश्वास करेंगे-विज्ञापन पर अथवा लेबल पर ? अपने उत्तर में दो कारण भी लिखिए । 

Ans. मात्र केवल आकर्षक विज्ञापन मसालों की गुणवत्ता, शुद्धता तथा स्तर की गारण्टी नहीं । हम उसका लेवल देखेंगे कि उस पर E.P.O का मानक चिह्न लगा है या नहीं। यह किसी प्रसिद्ध तथा उच्च स्तरीय कम्पनी का उत्पाद है या नहीं। यह स्वास्थ्य के लिए किसी हानिकारक मिलावट से युक्त तो नहीं है।

Q. 4. मिलावट क्या है ?

Ans. मिलावट की परिभाषा “मिलावट एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा खाद्य पदार्थों की प्रकृति, गुणवत्ता तथा पौष्टिकता में बदलाव (Change) आ जाता है। यह बदलाव खाद्य पदार्थों में किसी अन्य मिलती-जुलती चीज मिलाने या उसमें से कोई तत्व निकालने के कारण आता है।” उदाहरण के लिए दूध से क्रीम निकालना या उसमें पानी मिला देना मिलावट कहलाता है। यह मिलावट खाद्य पदार्थ उपजाते समय, फसल काटते समय, तैयार करते समय, संगृहीत करते समय एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाते समय तथा विवरण करते समय की हो जाती है। 

Q.5. खाद्य पदार्थों में मिलावट करने के दुष्परिणाम क्या हैं ? 

Ans. आज के महँगाई के युग में मिलावट करना एक साधारण सी बात बन गयी है । व्यापारी वर्ग अपने थोड़े से लाभ के लिए कितने ही मनुष्यों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करता है। खाद्य पदार्थों में मिलावट करना एक सामाजिक एवं अनैतिक कार्य है जिसके कारण कई बार मनुष्यों को अपनी जान तक से हाथ धोना पड़ जाता है ।

खाद्य पदार्थों में मिलावट होने के कारण उपभोक्ता पर निम्न कुप्रभाव पड़ते हैं- 

1. खाद्य पदार्थ के क्रय के लिए उपभोक्ता को अधिक मूल्य देना पड़ता है क्योंकि शुद्ध खाद्य पदार्थ में उससे मिलते-जुलते सस्ते पदार्थ मिलाए जाते हैं। 

2. उपभोक्ता जब मिलावटी खाद्य खरीदता है तो मिलावट के कारण उस खाद्य पदार्थ की पौष्टिकता भी कम हो जाती है, उदाहरण के लिए दूध में पानी मिलाने से उस मिलावटी दूध की मात्रा तो बढ़ जाती है लेकिन उसकी पौष्टिकता कम हो जाती है। 

3. कई बार मिलावट किये जाने वाले पदार्थ के संदूषित होने के कारण खाद्य पदार्थ भी विषाक्त हो जाता है; जैसे शराब में विषैली स्पिरिट या वार्निश मिलाने से वह शराब विषाक्त हो जाती है और मृत्यु का कारण बनती है।

Q.6. आजिमोन की मिलावट आमतौर पर किन दो खाद्य पदार्थों में पाई जाती है ? इसकी जाँच कैसे करेंगे ? स्वास्थ्य पर इसके संभावित कुप्रभाव बताइये । 

Ans. अर्जीमोन (Argemone Oil ) – आर्जीमोन के बीज सरसों के बीज की तरह दिखते हैं। अतः इसका तेल सरसो के तेल तथा बादाम तेल में मिलाया जाता है। परखनली में सरसो के तेल में नाइट्रिक अम्ल मिलाइये। यदि उसका रंग लाल हो जाये तो उसमें आजमोन तेल की मिलावट है। 

इसके लगातार प्रयोग से शरीर में फफोले पड़ जाते हैं और उनके फटने से पानी रिसता है। आंत्रशोथ भी इसका प्राथमिक लक्षण है। नियमति रूप में बुखार आता है तथा नब्ज धीमी पड़ जाती है। हाथ-पैरों में सूजन आ जाती है तथा शरीर के खुले अंगों पर दाग पड़ जाते हैं। 

रोग नियंत्रण न कर पाने की स्थिति में ग्लयिकोमा नामक नेत्र विकार हो जाता है जिसके कारण नेत्रों की ज्योति पूर्णतः भी जा सकती है। कैंसर होने की तथा यकृत बढ़ने की संभावना रहती पर है। कई बाद हृदय धड़कन रुक जाने के कारण मृत्यु भी हो जाती है

आर्जिमोन तेल सरसों के अधिकतर सस्ते आर्जीमान के बीजों से निकाले तेल से मिलावट की जाती है। इससे तिलली बड़ी, आशिक व पूर्ण अंधापन हो सकता है। हृदय के रोग भी संभावित है । परखनली में सरसों के तेल में नाइट्रिक अम्ल मिलाइये। यदि उसका रंग लाल हो जाये तो उसमें आजमोन तेल की मिलावट है।

Q.7. निम्न खाद्यों में प्रत्येक में किस वस्तु को मिलावट की जाती है-( 1 ) दूध (1) सरसों का तेल ? इन मिलावटों को पहचानने के लिए एक-एक परीक्षण भी लिखें। 

Ans. दूध में अतिरिक्त जल, विभिन्न प्रकार के स्टार्च जैसे अरारोट, मैदा व सिंघाड़े का आय मिलाए जाते हैं।

“दूध में अतिरिक्त पानी की मिलावट लैक्टोमीटर द्वारा जाँची जाती है । दूध में स्टार्च की मिलावट का परीक्षण आयोडीन के घोल के द्वारा किया जाता है जिससे गहरे नीले जामुनी रंग का घोल उत्पन्न होता है ।

सरसो के तेल में आर्जीमोन तेल की मिलावट की जाती है जो आजमोन मैक्सीकाना नामक कंटीली झाड़ी के बीजों से निकाला जाता है।

इसकी मिलवाट की जांच के लिए परखनली में सरसो का तेल लेकर गर्म करें ताकि वह पारदर्शक हो जाए । तब इसमें सान्द्र नाइट्रिक अम्ल की कुछ बूंदें डालें। यदि गहरा भूरा या लाल रंग आ जाए तो सरसो का तेल मिलावट युक्त है। 

Q. 8. FPO क्या है ? इसे कहाँ देखा जा सकता है ?

Ans. Fruit Product Order फल-सब्जियों से बने पदार्थ सम्बन्धी यह आदेश 1946 में भारतीय सरकार द्वारा भारतीय रक्षा कानून के अन्तर्गत बनाया गया। FPO द्वारा फल व सब्जियों की गुणवत्ता का न्यूनतम स्तर आवश्यक रखने का प्रावधान है। 

इसके अन्तर्गत औद्योगिक इकाइयों में स्वच्छता का वातावरण होना चाहिए । कारखाने में तैयार पदार्थों की उचित पैकिंग, मार्का व लेबल होना चाहिए। FPO मार्क वाले पदार्थ है: जैम, जैली, मामलेड, कैचअप, स्क्वैश, अचार, चटनी, चाशनी, सीरप इत्यादि ।

Q.9. मिलावटी मसालों की खरीद से बचने के उपाय लिखिए। 

Ans. मिलावटी मसालों की खरीद से बचने के उपाय निम्नलिखित हैं-

(1) या तो साबुत मसाले खरीदकर, साफ करके घर में स्वयं पीसना चाहिए ।

(2) यदि पिसे मसाले ही खरीदने हों तो किसी अच्छी कंपनी द्वारा निर्मित ‘एगमार्क’ छाप मसाले खरीदने चाहिए । इन मानक चिह्न से

(क) क्वालिटी स्तर विश्वसनीय होते हैं। 

(ख) इनके निर्माण में खाद्य शुद्धता के नियम लागू किये जाते हैं। 

(ग) ये किसी लाइसेन्स युक्त कम्पनी अथवा फैक्टरी द्वारा बनाये जाते हैं। 

(घ) इनमें प्रयुक्त घटक तथा उनकी मात्रा प्रमाण-पत्र के अनुरूप होते हैं ।

Q.10. किन-किन खाद्यों में सामान्यतया पीले मैटानिल रंग की मिलवाट की जाती है ? स्वास्थ्य पर इसका दुष्परिणाम लिखिए ।

Ans. (1) बेसन की मिठाइयाँ (2) गुड़ ।

आंतों मैटानिल पीला रंग एक कैंसर उत्पन्न करने वाला कारक है। इसके द्वारा गले, आमाशय तथा का कैंसर होने का भय होता है, यदि यह अत्यधिक मात्रा में लिया जाए

Q.11.LS.I. से क्या समझते हैं ? ऐसे दो खाद्य पदार्थों के नाम लिखिए जिन पर यह चिह पाया जाता है ।

Ans. बी. आई. एस. (Bureau of Indian Standard) 1.S.I. चि द्वारा पदार्थों की शुद्धता की गारन्टी देता है। भारतीय मानक संस्थान द्वारा निम्न विश्वास दिये जाते है-

उपभोक्ताओं को पदार्थ की गुणवत्ता, सुरक्षा तथा स्थिरता का आश्वासन बहुत-से विभिन्न प्रकार के उपभोक्ता पदार्थों पर 1.S.I मार्क लगाया जाता है। 

कुछ भी खरीदने से पूर्व आप सामान की गुणवत्ता के आश्वासन के लिए यह मार्क अवश्य देख लें । एयर कंडीशनर, बाल आहार, बिस्कुट, छत के पंखे, L.PRG पर यह चिह अंकित होता है ।

Q. 14. एगमार्क क्या है और इसे कहाँ देखा जा सकता है ?

Ans. एगमार्क से कृषि उत्पाद की गुणवत्ता तथा शुद्धता आँकी जाती है। एगमार्क का अर्थ है कृषि विक्रय । उत्पाद की गुणवत्ता को उसके आकार, किस्म, उत्पादन, भार, रंग, नमी, वसा की मात्रा तथा दूसरे रासायनिक और भौतिक लक्षणों द्वारा आँका जाता है। 

एगमार्क वाले उत्पाद फुटकर दुकानों, सुपर बाजार व डिपार्टमेंटल स्टोर्स से खरीदे जा सकते हैं। कुछ एगमार्क उत्पाद इस प्रकार है-चावल, गेहूँ, दास, नारियल तेल, मूंगफली तेल, सरसो का तेल, शुद्ध घी, मक्खन, शहद, मसाले ।

Q. 15. गुड़ में किस पदार्थ की मिलावट की जाती है, आप इसकी जाँच किस प्रकार करेंगे 

Ans. गुड़ का रंगने की लिए वर्जित मटालिन येलो (पीला रंग) की मिलावट की जाती है। इसमें मिट्टी, रेत व तिनके आदि भी होते हैं।

जाँच परीक्षण-

(क) पानी में गुड़ को घोलिये, मिट्टी नीचे बैठ जायेगी और जिनके ऊपर तैरेंगे ।

(ख) गुड़ को पानी में घोलिये उसमें 5ml अल्कोहल और कुछ बूँदें हाइड्रोक्लोरिक अम्ल को डालें। यदि गुलाबी रंग आता है तो स्पष्ट है कि गुह में मेटानिल पोले रंग की मिलावट है

Q. 16. दूध में स्टार्च की मिलावट की जाँच के लिए परीक्षण लिखिए । 

Ans. प्रायः दूध में पानी और माँड को मिलावट की जाती है।

(क) पानी की मिलावट को जाँचने का तरीका- लैक्टोमीटर की सहायता ली जाती है। लेक्टोमीटर का माप 26 से कम नहीं होना चाहिए ।

(ख) माँड की मिलावट जाँचने का तरीका- माँड की मिलावट को जाँचने के लिए एक परखनली में दूध डालकर उसमें आयोडीन या टिचर आयोडीन की कुछ बूंद डालें। यदि नीला या बैंगनी रंग हो जाये तो समर्थों कि दूध में माँड की मिलावट है।

Q. 17. दाल चुनते समय आपको लगा कि सभी दालों का आकार एक-सा नहीं है। ऐसा क्यों होता है तथा आप इसकी पुष्टि कैसे करेंगे ? स्वास्थ्य पर इसका क्या बुरा प्रभाव पड़ सकता है ?

Ans. केसरी दाल की उपस्थिति ही मिलावट का कारण है। केसरी दाल का आकार अरहर की दाल की अपेक्षा कुछ तिकोना तथा रंग मटमैला होता है। कसरी दाल में कई विषैले तत्त्व होते हैं परन्तु इनमें से एक मुख्य विषैला तत्त्व है-अमीनो अम्ल बीटा एन ऑक्साइल अमीनो एलनिन अर्थात् BOAA (Beta N OxyImino Alanine)। केसरी दाल के अधिक प्रयोग से लेथाइरिज्म नामक रोग हो जाता है। 

यह रोग 5-45 वर्ष के लड़कों तथा आदमियों को अधिक प्रभावित करता है । इस रोग में रोगों के घुटनों और एड़ियों में दर्द रहने लगता है तथा इन लक्षणों के दिखाई देने के पश्चात् 10-30 दिन के अन्दर यँगों का निचला हिस्सा काम करना बंद कर देता है और लकवा हो जाता है। 

धीरे-धीरे घुटने इतने मुड़ जाते हैं और सख्त हो जाते हैं कि रोगी केवल जमीन पर बैठकर चलता है यदि व्यक्ति के आहार का 40% भाग केसरी दाल का हो तो उसे दो से चार माह में लेथाइरिज्म रोग हो जाता है। 

Q. 18. खाद्य पदार्थों में मिलावट से बचने के लिए किए जाने वाले कुछ रक्षा उपायों का उल्लेख उचित कारणों सहित लिखिए । 

Ans. खाद्य पदार्थों में मिलावट से सुरक्षा (Safety Against Food Adulteration ) – रोजमर्रा के आहार में मिलावट तेजी से बढ़ रही है। खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ने के कारण व्यापारी अपना मुनाफा बढ़ाने के लिए इस तरह के कुचक्र चलाते हैं। आप निम्नलिखित उपायों से अपने आपको मिलावट से बचा सकती हैं-

(क) विश्वसनीय दुकानों से ही सामान खरीदें। ऐसी दुकानें जहाँ बिक्री अधिक होती है। व उनकी विश्वसनीयता पर भरोसा है तो सामान अच्छा मिलेगा ।

(ख) विश्वसनीय व उच्च स्तर की सामग्री खरीदें क्योंकि उसकी गुणवत्ता अधिक होती. है। सही माकां वाली सामग्री से पूरी कीमत वसूल हो जाती है। जैसे-I.S.I., F.P.O. Agmark,

Q. 19. मिलावट के दुष्परिणामों से बचने के उपाय बताइए । 

Ans. मिलावट के दुष्परिणामों से बचने के उपाय- अतः उपभोक्ता को चाहिए कि उन खाद्य पदार्थों को ही खरीदे जिन पर आई एस आई (I.S.I) एफ, पी. ओ. (FPO) या ऐगमार्क (Ag’Mark) की मोहर लगी हो । 

खाद्य पदार्थ हमेशा मान्यता प्राप्त दुकान से ही खरीदने चाहिए। कई बार गलत स्थानों से सस्ती चीजें खरीदने से पैसा तो जाता है पर लेने के देने पड़ जाते हैं। जहाँ तक हो सके गृहिणी को प्राकृतिक रूप से होने वाले रंगों का प्रयोग करना चाहिए, जैसे फल, सब्जियों तथा मसालों से प्राप्त होने वाले रंग । 

यदि किसी कारणवश कृत्रिम रंगों का प्रयोग करना पट भी जाए तो थोड़ी मात्रा में ही प्रयोग में लाने चाहिए। इसके अतिरिक्त कुछ एक साधारण परीक्षण करके खाद्य पदार्थों में की गई मिलावट का आसानी से पता लगाया जा सकता है। यह परीक्षण खाद्य प्रयोगशाला में रासायनिक विश्लेषणों द्वारा किये जा सकते हैं। कुछ परीक्षण ऐसे भी है। जो घर पर भी किये जा सकते हैं।

Q.20. कौन-से दो खाद्य पदार्थों में मेटानिल येलो की मिलावट हो सकती है ? स्वास्थ्य पर इसके चार कुप्रभाव लिखिए। इसको जाँचने के लिए एक टेस्ट (प्रयोग) भी लिखिए। “Or, मेटानिल येलो की मिलावट आमतौर से किन दो खाद्य पदार्थों में पाई जाती है ? इसकी जांच करने की विधि बताइए तथा स्वास्थ्य पर इसके सम्भव कुप्रभाव भी बताइए ।

Ans. मेटानिल येलो (Metanil Yellow) मेटानिल येलो एक ऐसा खनिज रंग है । “जिसके प्रयोग की अनुमति नहीं दी जाती । इसका प्रयोग खाद्य पदार्थों में अन्य खनिज रंगों के अलावा बहुतायत से होता है। इसका प्रयोग दालों, मसालों, मिठाइयों (जलेबी, लड्डू, कराची हलवा तथा बोतल बन्द पेय में बहुत होता है। 

मेटनिल येलो जननांग पर असर करता है तथा इसके कारण बांझपन भी हो सकता है। इसके अधिक उपयोग से कैंसर हो जाता है। अस्थियों, नेत्रों, चर्म, फेफड़ों के लिए भी यह हानिकारक है। मानसिक अवरुद्धता रक्तहीनता तथा शरीर और रक्त में धातु या सोसा तत्त्व की अधिकता हो जाती है ।

(1) बेसन की मिठाइयाँ (2) गुड़ । मेटानिल पीला रंग कैंसर उत्पन्न करने वाला एक क्षारक है। इसके द्वारा गले, अमाशय तथा आँतों का कैंसर होने का भय होता है, यदि यह अत्यधिक मात्रा में लिया जाए। गुड़ में मेटानिल येलो (पीले रंग) की मिलावट हो जाती है यह एक हानिकारक क्षारक है।

तथा इससे कैन्सर का भयानक रोग हो सकता है। गुड़ में इसकी उपस्थिति की जाँच करने के लिए हम गुड़ को पानी में घोलकर उसमें हाइड्रोक्लोरिक अम्ल डालेंगे। यदि गुलाबी रंग आ जाता है तो गुड़ में मेटानिल येलो को मिलावट है।


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (LONG ANSWER TYPE QUESTIONS)


Q. 1.आहारीय मिलावट रोकने से सम्बन्धित अधिनियम क्या है ?

Ans. आहारीय मिलावट रोकने से सम्बन्धित अधिनियम (P.F.A. Prevention of food adulteration)-

1954 को धारा 2 में मिलावट की परिभाषाएँ दी गई हैं जिनका उल्लेख नीचे किया गया है-उस स्थिति में आहारीय पदार्थ मिलावट युक्त समझा जाएगा । 

1. यदि उसकी प्रकृति (Nature), तत्त्व (Substance ) या न हो जैसी की होनी चाहिए । 

2. यदि उसमें या उसे बनाने गुणवत्ता (quality) वैसी की प्रक्रिया (Proccesing) में कोई विषैली (Injurious) वस्तु आ जाए । 

3. यदि उसमें कोई न्यून स्तर का ( Inferior ) या सस्ता (Cheap) तत्त्व डाला गया हो। 

4. यदि उसमें से कोई तत्त्व (Constituent) आशिक (Partially) या पूर्ण (Wholly) रूप से निकाल लिया हो । 

5. यदि वस्तु का निर्माण (Preparation), पैकिंग (Packing) का संग्रह (Srorage) अस्वच्छ या अस्वास्थ्यकर वातावरण ( insanitary conditions) में किया गया हो। 

6. यदि वह कीड़ों (insect infested) द्वारा खाया हुआ हो ।

7. यदि वह खाद्य पदार्थ रोगी पशु (Diseased animal) से लिया गया हो।

8. यदि उस खाद्य पदार्थ में कोई विषैली सामग्री (Poisonous ingredient) या कोई ऐसी चीज हो जो स्वास्थ्य पर कुप्रभाव डाले ।

9. यदि खाद्य पदार्थ ऐसे पात्र (Container) में रखा गया हो जो उसे विषैला या स्वास्थ्य रंतु हानिकारक बना दे। 

10. यदि उस खाद्य पदार्थ में वर्जित रंग (unpermitted colours) या निर्धारित मात्रा से अधिक रंग डाले गए हो ।

11. यदि उस खाद्य पदार्थ चर्जित परीक्षक (Prohibited preservative ) या निर्धारित मात्रा में परिरक्षण डाले गये हो।

12. यदि उस खाद्य पदार्थ का स्तर, निर्धारित स्तर (Prescribed Standard) को सष्ट करे पी. एफ. ए. (PEA) के अनुसार यदि खाद्य पदार्थ में उपर्युक्त कोई एक या उसमें अधिक अवगुण पाए जाते हैं तो यह खाद्य पदार्थ मिलावटी समझा जाएगा। यह अधिनियम 1 जून, 1955 को प्रभावी हुआ था। इसके नियमों को 1968 में और संशोधित किया गया है आहारीय स्तर केन्द्रीय समिति (C.G.R.S) के आदेशानुसार सभी श्रेणियों और वर्गों का आहारीय सामग्रियों को न्यूनतम स्तर निर्धारण का कार्य समय-समय पर संशोधित होता रहता है।

Q. 3. की कुचालों का सामना उपभोक्ता को किस प्रकार करना पड़ता है ? वर्णन कीजिए ।

ANS. खाद्य विक्रेताओं के दुराचरण (Malpractices of Food Dealers) – जब सम्भरण से माँग ज्यादा होती है तो विक्रेता दुराचरण पर उतारू हो जाते हैं। इससे उपभोक्ता की आर्थिक स्थिति और स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। ग्राहक को इस तरह ठगा जाता है-

1. मिलावट से (Adulteration)।

2. दोषपूर्ण बाट और माप से (Defective Weights & Measures) ।

3. अपूर्ण लेबिलों से (Inadequate Labelling) | 

4. झूठे विज्ञापनों से (False Advertisements)

उपभोक्ता की कोशिश यही होती है कि वह अपने पैसे से ज्यादा, अच्छा और बढ़िया माल खरीद सके। अपने पैसे की ठीक कीमत पाने की दृष्टि से उपभोक्ता को विभिन्न बाजारों में प्रचलित स दरों की जानकारी होनी चाहिए ।

इसका सबसे अच्छा तरीका यह है कि नगरों में प्राप्त अनेक सरकारी भण्डारों (Stores) का लाभ उठाएँ । सामान खरीदने के लिए किस सहकारी स्टोर को चुना जाए, यह इस शर्त पर निर्भर है कि वहाँ ग्राहकों को क्या सुविधाएँ दी जाती हैं-जैसे कि मूल्य प्रदर्शन, विनम्रता, घर पर माल पहुँचाने की सुविधा और उधार की सुविधा आदि । 

दोषपूर्ण बाट और मापक (Defective Weight and Measures) – अप्रैल, 1956 में भारतीय संसद ने एक प्रस्ताव मंजूर किया जिसके अन्तर्गत दशमलव प्रणाली तथा सब जगह एक जैसी नाप, बाट आदि मीट्रिक प्रणाली में चलाये गये। 1956 के अन्त तक बाट और नाप स्तर विधयेक (Bill) पास कर दिया गया ।

अब बाटों और मापों के द्वारा उपभोक्ता को धोखा नहीं दिया जा सकता । ग्राहक की मदद के लिए निम्न उपाय भी आवश्यक हैं-

1. जब कभी आवश्यक हो और भी नये ढंग का माप या तोलने के बाट निर्धारित किये जा सकौ । इन्हें आई. एस. आई. परिभाषित करेगा और उनके प्रयोग को कानूनन मनवाया जा सकेगा । 

2. माप और बाटों का निरीक्षण समय-समय पर किया जाता रहेगा; क्योंकि व्यापारी कम तौलने के नये तरीके निकाल लेंगे। जैसे कि मांस को कागज के साथ तोल देना, मिठाइयों के साथ डिब्बे को भी तोल देना, मुर्गी में कोई धातु का टुकड़ा छिपाकर तोल देना, फलों और सब्जियों का साथ अधिक मात्रा में पत्तियाँ, डंठल आदि भिड़ा देते हैं तथा तौलते समय शून्य चिह्न को नहीं दिखाते।

3. गैर स्तर के बाटों से तौलने की आदत तथा कुछ चीजों को गिनकर बेचने के तरीक को धृतोत्साहित करना चाहिए । कुछ स्थानों पर सन्तरों, केला आदि फल, अण्डे तथा अन्य चीजें बजाए से बोलने के गिनती से बेची जाती हैं। तरल पदार्थों को सदा तरल मापकों से नापना चाहिए ।

4. पैकिंग के डिब्बे आदि के आकार में थोड़ा-बहुत परिवर्तन करके उपभोक्ता को बहका दिया जाता है । उसकी शक्ल और आकार भी धोखा दे सकते हैं-यदि उसकी तह में कुछ झूठी सतह लगा रखी हो, या काँच मोटा हो या बोतलों की गर्दनें कुछ लम्बी हों आदि । 

5. बैंकिंग किये गये उत्पादनों को निर्धारित आकार में ही बेचा जाना चाहिए । इस पर लेबिल भी ठीक लगे हों ताकि उपभोक्ता जान सके कि वह क्या खरीद रहा है। 

6. ग्राहकों को, खरीदते समय तौल पर नजर रखने की आदत को बढ़ावा देना चाहिए । कम कोशिका नाप और बाट विभाग को देनी चाहिए।

सही लेबिल न लगाना (Inadequate Labelling)- डिब्बाबन्द भोज्य पदार्थों, औषधियों शृंगार सामग्री पर स्पष्ट लेबिल होने चाहिए जिसमें उसकी संख्या, तौल, वजन आदि का पूर्ण विवरण ऑकितु हो । बहुत-से लोग केवल पैकिंग पर ही यकीन कर लेते हैं और उसे सही वजन का मान लेते हैं।

फिर भी सहाँ लेबिल लगाना, विशेषकर भोज्य पदार्थों के मामलों में केवल, नाप-तौल पदार्थ का नाम या बोतल व टिन के बारे में सूचना मात्र नहीं है । 

लेबिल की परिभाषा है- “लिखित मुद्रित, छिद्रित, स्टेसिल की गई खोदकर लिखी गई अथवा मोहर लगी हुई सामग्री किसी भी डिब्ब या बैंकिग के ऊपर प्रदर्शित करना ही लेबिल है।” भोज्य पदार्थ निर्माता सभी उद्योग प्रत्येक पंकि पर लेबिल लगाते हैं । इससे उपभोक्ता को उस भोज्य पदार्थ के बारे में स्पष्ट शब्दों में जानकारी दी जाती है जो उस डिब्बे पैकेज में बन्द है।

Q. 4. मिलावट की परिभाषा लिखिए। कौन-से दो खाद्य पदार्थों में केसरी दाल की मिलावट हो सकती है ? स्वास्थ्य पर इसके कुप्रभावों की व्याख्या कीजिए तथा बताइए कि खाद्यों में इसकी उपस्थिति का पता कैसे लगाइएगा ।

Ans. मिलावट (Food Adulteration) की परिभाषा – ” मिलावट एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा खाद्य पदार्थों की प्रकृति, गुणवत्ता तथा पौष्टिकता में बदलाव (Change) आ जाता है । यह बदलाव खाद्य पदार्थों में किसी अन्य मिलती-जुलती चीज मिलाने या उसमें से कोई तत्व निकालने के कारण आता है।” 

उदाहरण के लिए दूध से क्रीम निकालना या उसमें पानी मिला देना मिलावट कहलाता है। यह मिलावट खाद्य पदार्थ उपजाते समय, फसल काटते समय, तैयार करते समय, संग्रहीत करते समय, एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाते समय तथा वितरण करते समय की या हो जाती है ।

केसरी दाल की उपस्थिति मिलावट का कारण है। केसरी दाल का आकार अरहर की दाल की अपेक्षा कुछ तिकोना तथा रंग मटमैला होता है ।

कसरी दाल में कई विषैले तत्त्व होते हैं परन्तु इनमें से एक मुख्य विषैला तत्त्व है-अमीनो अम्ल बीटा एन ऑक्साइल अमीनो एलनिन अर्थात् BOAA (Beta N Oxyl Amino Alanine)।

केसरी दाल के अधिक प्रयोग से लैथाइरिज्म नामक रोग हो जाता है। यह रोग 5-45 वर्ष के लड़कों तथा आदमियों को अधिक प्रभावित करता है। इस रोग में रोगी के घुटनों के जोड़ों और रोगों के जोड़ों में सख्ती आ जाती है। इसके बाद घुटनों और एड़ियों में दर्द रहने लगता है तथा इन लक्षणों के दिखाई देने के पश्चात् 10-30 दिन के अन्दर टाँगों का निचला हिस्सा काम करना बंद कर देता है और लकवा हो जाता है। 

धीरे-धीरे घुटने इतने मुड़ जाते हैं और सख्त हो जाते हैं कि रोगी केवल जमीन पर बैठकर चलता है। यदि व्यक्ति के आहार का 40% भाग केसरी दाल का हो तो उसे दो से चार माह में यह रोग हो जाता है। दाल को

एक खाद्य रंग मेटानिल येलो की अधिकता से रंगा गया है इसकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए परखनली में या चाइना डिश में कुछ अरहर की दाल के दाने लें तथा उसमें मन्द (तनु) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल डालें। यदि संतरी अथवा लाल रंग आता है तो मेटानिल येलो की उपस्थिति सुनिश्चित है ।

Q.5. खाद्यों में मिलावट सम्बन्धी विधेयक उपभोक्ताओं की रक्षा कैसे करता है, समझाइये |

Ans. (क) खाद्यों में मिलावट संबंधी विधेयक इस प्रकार उपभोक्ता की रक्षा करता है कि इस अधिनियम PFA 1954 के अनुसार खाद्य पदार्थ में मिलावट की परिभाषा विस्तृत रूप से दी है। 

अगर खाद्य पदार्थ न्यून स्तर का है, प्रमाणित नहीं है और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। तो उपभोक्ता की शिकायत पर विक्रेता को सजा या दंड हो सकता है, जिस कारण से मिलावट पर रोक लगती है ।

(ख) PFA की धारा x में खाद्य निरीक्षक के अधिकारों का उल्लेख किया गया है। यह खाद्य निरीक्षक नमूना मिलावटी पाने पर उस वस्तु की बिक्री पर रोक या प्रतिबन्ध लगा सकते हैं, खाद्य पदार्थ जब्त कर सकते हैं। इस प्रकार ऐसी मिलावटी वस्तुओं की बिक्री रोक कर उपभोक्ता के हितों की रक्षा की जाती है

(ग) इस अधिनियम के अन्तर्गत खाद्य पदार्थों के निर्धारित मानक दिये गये हैं। यदि कोई श्री खाद्य पदार्थ निर्धारित मानक से कम पाया जाता है तो वह मिलावटी समझा जाता है अतः इन मानकों के पालन करने से सही मानक वालो वस्तु ही बेची जा सकती है और उपभोक्ता के की रक्षा की जाती है।

(घ) झूठे मार्का वाले पदार्थों की परिभाषा देकर उपभोक्ता को सही व उचित वस्तु बेची आए इसको बाध्य करके उपभोक्ता की सहायता करता है। झूठा माका वह होता है जो किसी अन्य खाद्य-पदार्थ के नाम से बेची जाये या अन्य खाद्य पदार्थ की नकल हो। यदि लेवल पर विस्तृत जानकारी आदि नहीं हो। अतः उचित लेबल लगी बस्तुएँ बेचने के लिए उद्योगपतियों व विक्रेता को विवश करता है और उपभोक्ता की सहायता करता है।

Q:6. खाद्य पदार्थों में मिलावट का उपभोक्ता के स्वास्थ्य पर क्या दुष्प्रभाव पड़ता है ? 

Ans. खाद्य पदार्थों में मिलावट का उपभोक्ता के स्वास्थ्य पर बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ता है। मिलावट एक ऐसी गन्दी प्रक्रिया है जो उपभोक्ता के स्वास्थ्य पर प्रभाव डालने से लेकर उसके जीवन तक का अन्त कर देती है। व्यापारी वर्ग थोड़ा सा मुनाफा कमाने के चक्कर में करोडों लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करता है । खाद्य पदार्थों में मिलावट करना एक अनैतिक कार्य है जिससे कई बार मनुष्यों को जान तक से हाथ धोना पड़ता है । 

(क) खाद्य पदार्थों में मिलावट से उपभोक्ता को ऊँचा मूल्य देकर भी बढ़िया किस्म व गुणवत्ता की वस्तु उपलब्ध नहीं होती ।

(ख) जब मिलावट की जाती है तो खाद्य पदार्थ की पौष्टिकता में कमी आ जाती है । दूध में पानी मिलाने से या क्रीम निकालने से प्रोटीन व कर्जा की मात्रा में कमी हो जाती है और उसको ग्रहण करने वाले छोटे बच्चे कुपोषण के शिकार हो जाते हैं ।

(ग) पदार्थ जब संदूषित हो जाये तो वह कई संक्रामक रोगों का कारण बनता है। लोग संक्रामक रोग से पीड़ित हो जाते हैं और उनके स्वास्थ्य में गिरावट आ जाती है। दूध में जो संदूषित पानी मिलाया जाता है वह पाचन संस्थान संबन्धी सभी रोगों का प्रमुख कारण है ।

(घ) यदि मिलावट किया जाने वाला पदार्थ विषाक्त हो तो खाद्य पदार्थ ग्रहण करने वाले की मृत्यु तक हो जाती है, जैसे शराब में विषैली स्प्रिंट या वॉरनिश मिलाने से मृत्यु हो जाती है। कसरी दाल के प्रयोग से लैथाइरिज्म रोग हो जाता है जिसमें व्यक्ति की टाँगें काम करना

-बंद कर देती हैं व्यक्ति अपाहिज हो जाता है । 

वर्जित विषैले रंग जैसे मेटानिल येलो, रेड क्रोमेट काईट ग्रीन, सभी प्रमुख अंगों पर प्रभाव डालते हैं जैसे-लीवर, फेफड़े आदि । व्यक्ति रक्तहीनता और मानसिक व शारीरिक दुर्बलता का शिकार हो जाता है। यहाँ तक कि कैंसर की भी संभावना हो जाती है। 

सरसो के तेल में आर्जीमन के तेल की मिलावट होने से ड्राप्सी नामक बीमारी हो जाती है। इसमें यकृत और हृदय बढ़ जाता है और कई बार मृत्यु भी हो जाती है। अतः मिलावट से हमें कई प्रकार के दुष्परिणामों का सामना करना पड़ता है

Q. 7. दाल चुनते समय तुम्हें लगा कि सभी दानों का आकार एक सा नहीं है, ऐसा क्यों होता है तथा आप इसकी पुष्टि कैसे करेंगे ? स्वास्थ्य पर इसका क्या बुरा प्रभाव पड़ सकता है ? 

Ans. इस दाल में केसरी दाल की मिलावट है जिसका रंग मटमैला और आकार तिकोना है। 100 ग्राम दाल लेकर उसमें से केसरी दाल चुन लें जो आकार से कुछ तिकोनी और मेटमैली होती हैं । अगर यह चुनी हुईं केसरी दाल 1 ग्राम से अधिक है तो दाल में मिलावट है। 

5-45 वर्ष तक की आयु के लड़के और पुरुष अधिक प्रभावित होते हैं। इस रोग से घुटनों के केसरी दाल के सेवन से लेथाइरिज्म (Lethyrism) नामक रोग हो जाता है । इस रोग से जोड़ों में ऐंठन आ जाती है और धीरे-धीरे पैर काम करना बन्द कर देते हैं। व्यक्ति चलने फिरने में असमर्थ हो जाता है ।


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