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Ncert Class 12 Hindi elective important questions

Class12th 
Chapter Important Model Question Paper
Book NCERT
SubjectEnglish Elective
Medium Hindi

class 12 hindi elective passage questions and answers

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Q. 1. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़ें तथा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दें- 

मनुष्य की जड़ें उसकी मनोवृत्तियाँ हैं। हिम्मत, लगन, परिश्रम से भरा हुआ व्यक्ति जीवन-संग्राम में आने वाले तुफानों का डटकर मुकावला करता है, जबकि दुर्वल मन वाला व्यक्ति तनिक सी कठिनाई से ही भयभीत हो उठता है और तुफान की आशंका से ही धराशायी हो जाता है। हमें शरीर को मजबूत बनाने के साथ-साथ मन को भी मतबूत बनाना चाहिए और उन्हें सींचने में दत्त-चित्त रहना चाहिए क्योंकि शरीर बल से अधिक मूल्यवान मनोवल है।

प्रश्न :

(i) मनुष्य की जड़ें क्या हैं?

(ii) लेखक ने किस बल को अधिक मूल्यवान बताया है?

(iii) कौन शीघ्र भयभीत हो जाता है?

(iv) जीवन-संग्राम का मुकाबला डटकर कौन कर सकता है?

(v) उपर्युक्त गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक दें। 

Ans. 

(i) मनुष्य की जड़ें उसकी मनोवृत्तियाँ हैं।

(ii) लेखक ने हिम्मत, लगन, परिश्रम तथा मन के बल को अधिक मूल्यवान बताया है।

(iii) दुर्वल मन वाला व्यक्ति शीघ्र भयभीत हो जाता है।

(iv) जीवन संग्राम का मुकाबला डटकर वही व्यक्ति कर सकता है जिसका जीवन हिम्मत, लगन और परिश्रम से भरा हुआ होता है। 

(v) शीर्षक: ‘जीवन संग्राम की सफलता का मंत्र’

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Q. 2. निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखें |

जब भी भूख से लड़ने, कोई खड़ा हो जाता है सुंदर दीखने लगता है। झपटता बाज, फन उठाए साँप, दो पैरों पर खड़ी काँटों से नन्हीं पत्तियाँ खाती बकरी, दबे पाँव झाँड़ियों में चलता चीता, डाल पर उलटा लटका फल कुतरता तोता, या इन सबकी जगह आदमी होता। जब भी, भूख से लड़ने, कोई खड़ा हो जाता है। सुंदर दिखने लगता है।

प्रश्न : 

(i) प्रस्तुत कविता से क्या प्रेरणा मिलती है ?

(ii) झपटते बाज और फन उठाए साँप में कवि को सौंदर्य क्यों नजर आता है?

(iii) आदमी कवि को सुंदर कब दिखता है? 

(iv) कवि ने विभिन्न पशु पक्षियों को किन मुद्राओं में दिखाया है?

(v) प्रस्तुत पद्यांश का उपयुक्त शीर्षक दीजिए।

Ans. (i) इस पद्यांश से सभी व्यक्तियों और जीव-जन्तुओं द्वारा भूख से लड़ने की प्रेरणा मिलती है। साथ ही भूख को मिटाने के लिए परिश्रम करने की भी प्रेरणा मिलती है।

(ii) झपटते बाज ओर फन उठाये साँप में कवि को सौंदर्य इसलिए नजर आता है क्योंकि यह दृश्य कवि को देखने में सुन्दर लगता है। साथ ही इस दृश्य में भूख मिटाने के लिए जीव-जन्तुओं के परिश्रम का दृश्य भी कवि को सुन्दर लगता है।

(iii) भूख से लड़ने के लिए जब आदमी खड़ा हो जाता है तो कवि को यह दृश्य सुन्दर लगता है।

(iv) कवि ने विभिन्न पशु-पक्षियों को भूख मिटाने के लिए प्रयत्नशील होने की मुद्राओं में दिखाया है। जैसे-झपटता बाज, फन उठाए हुए साँप दो पैरों पर खड़ी होकर नन्हीं पत्तियों को खाती बकरी, झाड़ियों में चलता हुआ चीता तथा डाल पर बैठा तोता इत्यादि मुद्राओं को कवि ने इस कविता में दिखाया है।

(v) शीर्षक: ‘भूख को मिटाने का संघर्ष’

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Q. 3. निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर निबंध लिखें :

(क) मानव जीवन का उद्देश्य

(ख) महान साहित्यकार : मुंशी प्रेमचंद

(ग) कम्प्यूटर शिक्षा : एक परिचय 

(घ) भारतीय संस्कृति

Ans. (क)


मानव जीवन का उद्देश्य 


मानव जीवन का अर्थ होता है मनुष्य का जीवन तथा उद्देश्य का अर्थ होता है मकसद। मानव जीवन का उद्देश्य अपने जीवन में सफलता प्राप्त करना और समाज के लोगों के प्रति और देश के प्रति सेवा-भावना रखना है। प्रत्येक मानव का अपने जीवन का स्वयं का उद्देश्य होता है। 

इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिये बह प्रयत्नशील रहता है और सदा संघर्ष करते रहता है। प्रयत्नशीलता और संघर्ष करते रहने से एक समय ऐसा आता है जब मानव अपने जीवन में सफलता की सीढ़ी पर चढ़ जाता है। ऐसा मानव अपने जीवन के उद्देश्य को प्राप्त कर लेता है। कोई मनुष्य शिक्षित होकर डॉक्टर-इंजीनियर, वकील, जज, वैज्ञानिक और शिक्षक बनने का उद्देश्य रखता है। उसके जीवन का उद्देश्य लोगों की सेवा भी करना है। 

साथ ही, देशभक्ति और देश के प्रति प्रेम और बलिदान भी करना है। मानव जीवन का उद्देश्य देश के प्रति देशभक्ति की भावना रखते हुए एक अच्छे नागरिक का कर्तव्य भी निभाना है। वास्तव में मानव जीवन का उद्देश्य सत्यता, परोपकारिता और मानवता के साथ अपने जीवन के हर काम को करना है। मनुष्य

के जीवन का उद्देश्य, जीवन में सफल होकर परिवार, पास-पड़ोस, समाज एवं राष्ट्र का कल्याण करना है।

महान साहित्यकार : मुंशी प्रेमचन्द कथा-सम्राट मुंशी प्रेमचन्द हिन्दी के उन अग्रपांक्तिय कथाकारों में से हैं

जिन्होंने कहानी और उपन्यास के शैशव काल में ही उसमें एक अप्रतिम गाम्भीर्य जन-चेतना और समाज-चेतना भर दी थी, कि आज भी वह उससे आगे बहुत कम बढ़ सका है। 

कल्पनाओं से भरे ऐय्यारी और जासूसी-तिलस्मी उपन्यासों की प्रधानता के बीच पहली बार प्रेमचन्द जी ने ही समाज में व्याप्त असहनीय कुंठा, नैराश्य एवं समग्रतः उस जन-हाहाकार को कथात्मक अभिव्यक्ति दी और एक-युग को युग की सारी प्रवृत्तियों और तमाम मनोवृत्तियों, मान्यताओं के साथ परिवर्तित कर डाला। 

उन्होंने कथा को नया नामकरण, नया संस्कार और नया धरातल ही नहीं दिया, उसे एक नयी चिन्तनधारा, एक नयी चेतना-भूमि और नयी सामाजिकता भी दी। प्रेमचन्द जी ने कया, उपन्यास, नाटक, समीक्षा, निबंध आदि सब लिखे, लेकिन कविता की ओर वे कभी उन्मुख नहीं हुए। 

ऐसा प्रतीत होता है कि कविता के ऊपर उनका भरोसा नहीं रहा। कारण कि वे जो कहना चाहते थे वह कविता मैं कह नहीं पाते थे। इस तरह की विवशता हो सकती है, इसलिए अपनी मानसिकता को जोड़ नहीं पाते थे।

मुंशी प्रेमचन्द का जन्म 31 जुलाई, 1880 है, में काशी के निकटवर्ती लमही ग्राम में हुआ था। उनका बचपन का नाम धनपत्तराय था। उर्दू में नवाबराय के नाम से वे लिखते थे। उनके पिता का नाम अजायब राय था और पत्नी का नाम शिवरानी था। 

इनकी प्रारंभिक शिक्षा घर पर हुई। बाद में क्वींस कॉलेज से इन्होंने मैट्रिक पास किया। बचपन में ही माँ और पिता के साये से वंचित हो गये। इस कारण रोजी-रोटी की चिंता ने उन्हें विवश कर दिया। तदपुरान्त ये मास्टर की नौकरी में चले गये। 

उर्दू पढ़ने-लिखने के कारण उर्दू-साहित्य में उनकी काफी दिलचस्पी थी। इसी क्रम में मौलाना शर, पं. रतननाथ सदर, मिर्जा रुसवा एवं मौलवी मुहम्मद अली आदि का उनपर अत्यधिक प्रभाव पड़ा। आज भी प्रेमचन्द जबकि हिन्दी कथा-साहित्य की यात्रा बड़ी लम्बी हो गयी है, दूर से उच्च शिखर पर विराजमान दिखाई पड़ते हैं। ‘पूस की रात’, ‘कफन’, ‘ईदगाह’, ‘बड़े घर की बेटी’, ‘पंच परमेश्वर’, ‘काकी’ आदि इनकी कहानियाँ तथा ‘रंगभूमि’, ‘कर्मभूमि’, ‘प्रेमाश्रम’, ‘सेवासदन’, ‘गोदान’ आदि इनके उपन्यास हिन्दी कथा-साहित्य की अमर निधि हैं और प्रेमचन्द हिन्दी साहित्य के अमर कथाकार हैं। 

(ख) स्वयं खुद करे।

(ग) स्वयं खुद करे। 

(घ)


भारतीय संस्कृति


भारतीय संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन संस्कृति है जो लगभग 5,000 हजार वर्ष पुरानी है। विश्व की पहली और महान संस्कृति के रूप में भारतीय संस्कृति को माना जाता है। ‘विविधता में एकता’ का कथन यहाँ पर आम है अर्थात् भारत एक विविधतापूर्ण देश है जहाँ विभिन्न धर्मों के लोग अपनी संस्कृति और परंपरा के साथ शांतिपूर्ण तरीके से एक साथ रहते हैं। विभिन्न धर्मों के लोगों की अपनी भाषा, खाने की आदत, रीति-रिवाज आदि अलग हैं फिर भी वो एकता के साथ रहते हैं।

पूरे विश्व भर में भारतीय संस्कृति बहुत प्रसिद्ध है। विश्व के बहुत रोचक और प्राचीन संस्कृति के रूप में इसको देखा जाता है। अलग-अलग धर्मो,

(ख) परम्पराओं, भोजन, वस्त्र आदि से संबंधित लोग यहीं रखते है। विभिन्न संस्कृति और परम्परा के रह रहे लोग यहाँ सामाजिक रूप से स्वतंत्र है इसी वजह से भी की विविधता में एकता के मजबूत संबंधों का यहीं अस्तित्व है।



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Q. 4. अपने विद्यालय के प्रधानाचार्य को पत्र लिखें, जिसमें अपने विद्यालय की खेल संबंधी कठिनाइयों से उन्हें परिचित कराते हुए दूर करने के उपाय का वर्णन हो।

Ans

सेवा में,

प्राचार्य महोदय

राजकीय उच्च विद्यालय, जामताड़ा

श्रीमानू जी,

सविनय निवेदन है कि अपने विद्यालय में खेल संबंधी कठिनाइयों वर्तमान है। फ्रीड़ा स्थल की हालत बुरी है जिससे किसी भी खेल की समुचित तैयारी नहीं हो पाती है। मैदान के कई स्थानों पर छिद्र हो गये हैं जिससे छात्रों को विभिन्न प्रकार के खेलों के खेलने में कठिनाई होती है। साथ ही इस वर्ष खेल का गया सामान खरीदा नहीं गया है। अतः विभिन्न खेलों का अभ्यास 10 दिनों से बंद है।

आपसे सादर निवेदन है कि शीघ्र ही मैदान की समुचित व्यवस्था कराने और खेल के सामान को उपलब्ध करायें। खेल संबंधी कठिनाई को दूर करने की कृपा करे।

आपका आज्ञाकारी शिष्य

चन्दन

कसा-XII-ए, अनुक्रमांक-5

दिनांक 10 गई 2020

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Q.5. ‘शहर में बढ़ती नारी हिंसा की घटनाओं’ पर एक आलेख लिखें। 

Ans. आलेख- शहर में बढ़ती नारी हिंसा की घटना आज-कल बढ़ती हुई नारी हिंसा की घटनाएँ अधिक हो रही हैं। यह नारी की अस्तित्व पर एक खतरा बन चुका है। आज-कल नारी के प्रति विभिन्न हिंसा की घटनाएँ हो रही हैं। जैसे-नारी का अपहरण, उनपर अत्याचार का होना, यौन शोसन की घटनाएँ और नारियों के कत्ल की घटनाएँ अधिक हो रही है, जो बिनता का विषय है।

अतः बढ़ती हुई नारी हिंसा की पटनाओं पर रोक लगाने की आवश्यकता है। इसके लिए कानून व्यवस्था दुरूस्त करना चाहिए। नारियों के प्रति अत्याचार नहीं होने चाहिए। इसके लिए समाज में आवाज उठाना चाहिए।

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Or, ‘आधुनिक युग की तनावपूर्ण जीवन-शैली’ पर एक संक्षिप्त संपादकीय लिखें।

Ans. सम्पादकीय-‘आधुनिक युग की तनावपूर्ण जीवन-शैली’ वर्तमान युग की तनावपूर्ण जीवन शैली के संबंध में समाचार पत्र का सम्पादक चिंतित है। इसी चिंतन के सिलसिले में सम्पादक अपनी सम्पादकीय लिखता है और यह बताता है कि आज कल हमारे बीच भाग-दौड़ भरी तनावपूर्ण जीवन शैली का वातावरण बना हुआ है। मानो आजकल मनुष्य का जीवन शांतिमय जीवन नहीं है बल्कि एक उफनता हुआ दूध की तरह हो चुका है। 

मानो मनुष्य का जीवन एक उफनता हुआ दूध है। वर्तमान समय में मनुष्य भाग दौड़ का जीवन बिता रहा है। भाग दौड़ का जीवन होने से मनुष्य के जीवन की शांति समाप्त होती जा रही है। जीवन का सही उद्देश्य विलुप्पा होता जा रहा है। प्रत्येक मनुष्य अपने ही जीवनधारा में उलझा हुआ है। दूसरों की चिंता करने के लिए उसके पास समय नहीं है। 

आजकल मनुष्य स्वार्थी होता जा रहा है। यह जीवन की दौड़ में बहुत आगे निकलना चाढता है। ऐसी हालत में स्वस्थ समाज और राष्ट्र की कल्पना करना कठिन है। अतः इस भाग दौड़ के जीवन में भी दूसरों की भलाई और कल्याण पर भी ध्यान देना चाहिए। 

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Q. 6. ‘इंटरनेट की दुनिया’ पर एक फीचर लिखें। 

Ans. इंटरनेट सर्वाधिक गति से विकसित होने वाला अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का कम्प्यूटर आधारित सूचना नेटवर्क है। लगभग 4 करोड़ कम्प्यूटर इंटरनेट से जुड़े हुए हैं और प्रतिवर्ष इंटरनेट के नए सदस्यों का संख्या 1 करोड़ 60 लाख की दर से बढ़ती जा रही हैटर इंटरनेट का संचालन व प्रबंधन 1157 की इंटरनेट की संस्था करती है। 

वस्तुतः इसका उद्भव अपनेिट की संकल्पना से 1969 और अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने इसकी शुरुआत उच्च शोध परियोजना एजेन्सी के नेटवर्क के रूप में शोध परियोजना से संबंध वैज्ञानिकों के बीच प्रत्यक्ष संचार की सुविधा उपलब्य कराने के उद्देश्य से की थी। किन्तु आज इंटरनेट के माध्यम से पूरा विश्व सिमटकर एक गाँव का रूप लेने जा रहा है।

मुम्वई स्थित 14 अगस्त, 1945 विदेश संचार निगम लिमिटेड के गेटवे ऑफ पैकेट स्विचिंग सिस्टम के जरिये निकनेट को इंटरनेट से सम्बद्ध कर दिया गया है जिसके कारण आज हम बड़ी द्रुत गति से संसार के किसी कोने से सूचना आदान-प्रदान कर सकते हैं तथा बटन दबाते ही कम्प्यूटर के पर्दे पर अपनी मनचाही सूचना या आँकड़े प्राप्त कर सकते हैं। 

प्रथम चरण में मुम्बई, दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई को जोड़ा गया तथा दूसरे चरण में पूणे एवं बंगलौर को इस तंत्र से जोड़ने की योजना बनाया गया है। धीरे-धीरे अन्य नगर संगठन इससे जुड़ते जा रहे हैं।

इंटरनेट पर दुनिया के किसी भी कोने में रहनेवाले अपने मित्र से बातचीत की जा सकती है, इस पर हम इलेक्ट्रॉनिक अखबार पढ़ सकते हैं। विभिन्न दुकानों में बिकने वाली वस्तुओं को देख सकते हैं ऑर्डर दे सकते हैं। मंडियों शेयर बाजारों पर नजर रख सकते हैं। अपने उत्पादकों का विक्रय कर सकते है। 

अपने उत्पादन और सेवाओं का विज्ञापन कर सकते हैं। पुस्तकालयों से जरूरी सूचना पा सकते हैं और अपना मत दुनिया के सामने रख सकते हैं। 

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Or, जनसंचार के प्रमुख कार्यों को रेखांकित करें। 

Ans. समाचार को लोगों तक पहुँचाना ही जनसंबार है। इसके कई माध्यम है। जैसे-रेडियो, टी.वी., समाचार पत्र, इंटरनेट तथा पत्र-पत्रिकाएँ इत्यादि जनसंचार के प्रमुख सायन है। इसका प्रमुख कार्य लोगों तक खबर को पहुँचाना है। 

समाचार पत्र पत्रिकाएँ जनसंचार का प्रिंट माध्यम होता है। इसके द्वारा लोग देश-विदेश का समाचार प्राप्त करते हैं। टेलीविजन के द्वारा भी देश-विदेश में क्या हो रहा है इसकी जानकारी मिलती है। इसी तरह रेडियो के द्वारा मी देश-विदेश की खबरों की जानकारी भी प्राप्त होती है। 

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Q. 7. सप्रसंग व्याख्या करें :

बहुत दिनान की अवधि आसपास परे, खरे अरवरनि भरे हैं उठि जान को।

कहि-कहि आवन छबीले मनभावन को गहि-गहि राखति है दै-दै सनमान को 

Ans. प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियाँ कवि श्रेष्ठ धनानंद द्वारा रचित प्रचम कवित्त की हैं। इसमें कवि ने अपनी प्रेयसी सुजान से दर्शनों की अभिलाषा को प्रकट करते हुए कहा है कि तुम्हारे दर्शनों के लिए मेरे प्राण अब तक रुके हुए हैं। मेरा अंतिम समय आ पहुँचा है, अब तो मुझे दर्शन दे दो।

व्याख्या-बहुत दिनों की अवधि बीत गयी अर्थात् बहुत समय बीत गया। अव तो जान पर बन आई है। मेरी प्रियतमा ने बार-बार आने के लिए कहा। मन को लुभाने वाली, छैल, छबीली प्रिय ने आने को कहा परन्तु अभी तक नहीं आई मुझे उसके दर्शन नहीं हुए। मैं उसकी राह ही देखता रहा परंतु परंतु वो नहीं आई। कवि कहता है कि अब तो आ जा और मेरा सम्मान रख ले मेरी संसार में बदनामी न हो, अत: आकर दर्शन दे जा।

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Q. 8. निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर दें: 

(क) ‘ठग-ठाकुरों’ से कवि का संकेत किसकी ओर है? 

(ख) ‘गीत’ और ‘मोती’ की सार्थकता किससे जुड़ी है ? 

(ग) कवि ने ‘चाहत चलन ये संदेसो ले सुजान को’ क्यों कहा है?

(घ) राम के वन-गमन के बाद उसकी वस्तुओं को देखकर माँ कौशल्या कैसा अनुभव करती है ? 

Ans. 

(क) ‘ठग-ठाकुरों’ से कवि का संकेत उन लोगों को ओर है; जिन्होंने जन सामान्य के जीवन-संबल को लूटने का काम किया है।

(ख) (i) ‘गीत’ की सार्थकता जन अर्थात् मनुष्य से जुड़ी हैं।

(ii) कोई भी गीत तभी सार्थक है, जब उसे लोग गाएँ। (iii) ‘मोती’ की सार्थकता पनडुब्बा अर्थात् गोताखोर के निकालने से जुड़ी है।

(iv) मोती जब तक समुद्र के अंदर पड़ा हुआ है, तब तक उसकी कोई महत्ता नहीं है।

(v) जब मोती को गोताखोर समुद्र से निकालकर बाहर ला देता है, तभी बह उपयोग में लाया जाता है। (vi) इस प्रकार मोती तभी सार्थक होता है, जब उसे गोताखोर समुद्र से निकाल लाता है।

(ग) कवि ने ‘घाहत चलन से संदेसो ले सुजान को’ पद में अपनी प्रियतमा को बुलाने के लिए, उससे मिलने के लिए कहा है कि अब तो मेरी बाट जोहते-जोहते मेरा प्राण भी चलने की तैयारी कर रहे हैं, अब तो आ जा, एक बार दरस दिखा जा। व्यक्ति की अंतिम समय की इच्छा तो पूरी कर देनी चाहिए। अतः अब तो हे मेरी सुजान ! मुझे वरसन दे जा। इस पद के द्वारा कवि की विरह-वेदना स्पष्ट झलकती है।

(घ) राम के वनगमन के बाद उनकी वस्तुओं को देखकर भी, कौशल्या अपना मातृत्व का अनुभव महसूस करती है। इन वस्तुओं में माता कौशल्या के दिल में पुत्र के प्रति प्रेम का अनुभव करती है। 

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Q. 9. निम्नलिखित में से किन्हीं दो का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट करें। 

(क) सिंधुतर यो बनरा तुम पे धनुरेख गईन तरी। बाँधौई बॉधत सो न बन्यों उन बारिधि बाँधिकै बाट करी। श्री रघुनाथ-प्रताप की बात तुम्हें इसकंठ न जानि परि। तेलनि तूलनि पूँछी जरी न जरी, जरी लंक जराइ जरी ।।

(ख) तुमने कभी देखा है खाली कटोरों में वसंत का उतरना। यह शहर इसी तरह खुलता है, इसी तरह भरता है और खाली येता है यह शहर इसी तरह रोज-रोज एक अनंत शव ले जाते हैं कथे अधेरी गली से चमकती हुई गंगा की तरफ।

(ग) हो इसी कर्म पर वज्रपात, यदि धर्म, रहे नत सदा माथ, इसी पच पर मेरे कार्य सकल, हों अष्ट शीत के से शतदल। 

(घ) पिय सौ कहेतु संदेसरा, ये भँवरा ये काम। सौ घनि विरहें जरि गई, तेहिक धुआँ हम लाग।  

Ans. (क) काव्य-सौंदर्य प्रस्तुत पंक्तियाँ अंगद शीर्षक कविता से ली गयी हैं। यहाँ कवि ने श्री रामचन्द्र की महिमा का वर्णन किया है। मनदोदरी द्वारा अपने पति रावण को समझाते हुए राम की महिमा यहाँ पर प्रस्तुत की गयी है।

प्रस्तुत पंक्तियों का काव्य सौन्दर्य इस प्रकार प्रस्तुत किया गया है: सिंधु तर यो उनको बनरा में उदात्त अलंकार का प्रयोग किया गया है। समुद्र तरने से रामदूत हनुमान के उदात्त भाव का वर्णन प्रस्तुत किया गया है। तेलनि तूलानि में अनुप्रास अलंकार की सुंदरता देखने योग्य है। बँधोई बाधत सो न बन्धों में अतिशयोक्ति अलंकार का प्रयोग हुआ है। भाषा सरस तथा सरल है।

(ख) काव्य-सौंदर्य-प्रस्तुत पंक्तियों में काव्य सौन्दर्य यह है कि इसमें कवि ने खाली कटोरों में वसन्त को उतरने की दृश्य को प्रस्तुत किया है। कवि ने यह भी कहा है कि शहर इसी तरह खुलता है और झरता और खाली होता है। साथ ही इसी तरह प्रतिदिन एक अन्तन शव लोग ले जाते हैं, अन्धेरी गली से पीठ पर चमकती हुई गंगा के तरफ।

(ग) काव्य-सौंदर्य-प्रस्तुत पंक्तियों का काव्य सौन्दर्य यह है कि यहाँ पर कवि ने यह बताया है कि कर्म पर वज्रपात होता है यदि धर्म सदा साथ रहता है तो सारे कार्य सफल हो जाते हैं। मानव भ्रष्टशील की तरह शतदल हो जाते हैं। 

(घ) स्वयं खुद करे।

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Q. 10. सप्रसंग व्याख्या करें:

सहसा ही उसके मन में यह विचार काँध गया- मैं उपहार तो नहीं दे दे सकता, पर मैं माता मरियम को अभ्यर्थना कर सकता हूँ। अपने करतब दिखाकर उनकी यही कुछ है, जो मैं भेंट कर सकता हूँ।

Ans. प्रस्तुत पंक्तियाँ गद्यांश से अनुक्षेदित है। इसमें लेखक ने यह कहा है कि उसके मन में यह विचार आया कि मैं उसे उपहार नहीं दे सकता लेकिन माता मरियम को अपने करतब दिखा कर उनकी अभ्यर्थना दिखा सकता हूँ, यही कुछ है जो मैं भेंट कर सकता हूँ या दे सकता हूँ।

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Q. 11. निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर देंः 

(क) बड़ी बहुरिया का संवाद हरगोबिन क्यों नहीं सुना सका?

(ख) पसोवा की प्रसिद्धि का कारण क्या था और लेखक वहाँ क्यों जाना चाहता था ?

(ग) लोमड़ी स्वेच्छा से शेर के मुँह में क्यों चली जा रही थी ? 

(घ) विस्थापन से पूर्व अमझर गाँव कैसा था ? 

(ङ) साहित्य के पांचजन्य से लेखक का क्या तात्पर्य है ? 

Ans. (क)  स्वयं खुद करे।

  • (ख) पसोबा एक बड़ा जैन तीर्य है। वहाँ प्राचीन काल से प्रतिवर्ष जैनियों का एक बड़ा मेला लगता है, जिसमें दूर-दूर से हजारों जैन यात्री आकर सम्मिलित होते हैं।
  • यह कहा जाता है कि इसी स्थान पर एक छोटी-सी पहाड़ी थी, जिसकी गुफा में बुद्धदेव व्यायाम करते थे। वहाँ एक विषधर सर्प भी रहता था।
  • इसी के निकट एक स्तूप भी था, जिसमें बुद्ध के थोड़े से केश और नखखंड रखे गये थे। 
  • लेखक वहाँ कुछ नई चीज को खोज में जाना चाहता था क्योंकि लेखक के जीवन का उद्देश्य प्रयाग के संग्रहालय के लिए आवश्यक सामग्री एकत्रित करना था। 

(ग) लोमड़ी स्वेच्छा से शेर के मुँह में इसलिए चली जा रही थी, क्योंकि उसके कथनानुसार शेर के मुँह के अंदर रोजगार का दफ्तर है। वहाँ वह प्रार्थना-पत्र देगी और नौकरी प्राप्त करेगी।

(घ) स्वयं खुद करे।

(ङ) साहित्य के पांचजन्य का तात्पर्य श्री कृष्ण के शंख से है।

  • 1. ‘पांचजन्य’ श्रीकृष्ण के शंख का नाम है। 
  • 2. श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र में युद्ध के मैदान में यह शंख सेना को तैयार हो के लिए बजाया था।
  • 3. साहित्य के ‘पांचजन्य’ का अभिप्राय कवियों के लिए है कि वे अपने लेखन कार्य में जुट जायें और अपने इस लेखन-कार्य से समाज में आमूल-चूल परिवर्तन ला दें।
  • 4. साहित्य का ‘पांचजन्य’ मनुष्य को सदैव कार्यरत रहने की प्रेरणा देता है। जीवन में गति बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
  • 5. ‘आगे बढ़ो रुको नहीं’ की प्रेरणा यही साहित्य का पांचजन्य देता है।

Q. 12. कवि विद्यापति अथवा लेखिका ममता कालिया का साहित्यिक परिचय दें।

Ans. 

ममता कालिया प्राध्यापिका ममता कालिया साहित्य और प्रशासन दोनों क्षेत्रों में अपनी कुशलता का परिचय दे चुकी हैं।

जीवन-परिचय-ममता कालिया का जन्म मथुरा, उत्तर प्रदेश में हुआ है। उनकी शिक्षा के कई पड़ाव रहे, जैसे-नागपुर, पुणे, इंदौर, मुम्बई आदि। दिल्ली विश्वविद्यालय से उन्होंने अंग्रेजी विषय से एम.ए. किया। एम.ए. करने के बाद सन् 1963-1965 ई. तक दौलत राम कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय में अंग्रेजी की प्राध्यापिका रहीं। 

1966 से 1970 ई. तक एन.एन.डी.टी. महिला विश्वविद्यालय, मुम्बई में अध्यापन कार्य किया फिर 1973 से 2001 ई. तक महिला सेवा सदन डिग्री कॉलेज, इलाहाबाद में प्रधानाचार्य रहीं। 2003 से 2006 ई. तक भारतीय भाषा परिषद् कोलकाता की निदेशक रहीं। वर्तमान में दिल्ली में रहकर स्वतंत्र लेखन कर रही हैं। रचनाएँ उनकी प्रकाशित कृतियों में।

उपन्यास-बेघर, नरक दर नरक, एक पत्नी के नोट्स, प्रेम कहानी, लड़कियाँ, दौड़ आदि हैं। कहानियाँ इनके 12 कहानी संग्रह प्रकाशित हैं, जो ‘सम्पूर्ण कहानियाँ’ नाम से दो खंडों में प्रकाशित हैं। दो नए कहानी संग्रह-पच्चीस साल की लड़की, थिएटर रोड के कौवे भी प्रकाशित हुए हैं।

कथा-साहित्य में उल्लेखनीय योगदान के लिए उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान से ‘साहित्य-भूषण’ 2004 ई. में तथा वहीं से कहानी सम्मान 1989 ई. में प्राप्त हुआ। उनके समग्र साहित्य पर अभिनव भारती कोलकाता ने ‘रचना पुरस्कार’ भी दिया। 

इसके अतिरिक्त उन्हें सरस्वती प्रेस तथा साप्ताहिक हिन्दुस्तान का ‘श्रेष्ठ कहानी पुरस्कार’ भी प्राप्त है।

भाषा शिल्प की विशेषताएँ-ममता कलिया शब्दों की पारखी हैं। उनका भाषा-ज्ञान अत्यंत उच्च कोटि का है। साधारण शब्दों में भी अपने प्रत्येक वाक्य से जादुई प्रभाव उत्पन्न कर देती हैं। 

विषय के अनुसार सहज भावाभिव्यक्ति उनकी खासियत है। व्यंग्य की सटीकता एवं सजीवता से भाषा में एक अनोखा प्रभाव उत्पन्न हो जाता है। अभिव्यक्ति की सरलता एवं सुबोधता उसे विशेष रूप से मर्मस्पर्शी बना देती है।

युवा मन की संवेदना, भावना और विचार की उथल-पुथल का सही चित्रण करते हुए प्रथम आकर्षण और परिस्थितियों से उत्पन्न अवरोधों को झेलने हेतु मजदूरी प्रदान करना पाठ का उद्देश्यपूर्ण आधार है।

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Q. 13. निम्नलिखित में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर दें: 

(क) जगधर के मन में किस तरह का ईर्ष्या भाव जगा और क्यों ?

(ख) रूप सिंह पहाड़ पर चढ़ना सीखने के बावजूद भूप सिंह के सामने बौना क्यों पड़ गया था ?

(ग) गरमी और लू से बचने के उपायों का विवरण दीजिए। क्या आप इन उपायों से परिचित हैं ?

(घ) धरती का वातावरण गरम क्यों हो रहा है ? इसमें यूरोप और अमेरिका की भूमिका क्या है.? 

Ans.

(क) भैरों से ईष्यां-जगघर को पता चल जाता है कि सूरदास के रुपए भैरों ने चुराए हैं। वह उसे रुपए वापस लौटाने को कहता है लेकिन उसके पीछे ईर्ष्या का भाव है। वह भैरों को रुपए मिल जाने के कारण परेशान है।

रुपयों का लोभ जगघर को भी रुपयों का लोभ है। वह चाहता था कि मेरो उसे उधे दे दो। रुपये अगर ऐसा होता है तो शायद वह भैरों को कुछ न कहता।

(ख) स्वयं खुद करे।

(ग) स्वयं खुद करे।

(घ) वातावरण गरम होने का कारण हमने अपनी सभ्यता के विकास के लिए विभिन्न प्रयास किए। इन प्रयासों में हमने प्रकृति के साथ खिलवाड़ किया। पेड़ों की अंधाधुंध कटाई की, जिससे वातावरण में परिवर्तन आया। अपने विकास के लिए हमने नए-नए उद्योग-धंधे स्थापित किए। 

इन उद्योगों से अनेक हानिकारक गैसें वातावरण में फैली, जिससे वातावरण बेहद गर्म हो गया। कार्बन डाइऑक्साइड तथा अन्य गैसों के वातावरण में फैलने से पृथ्वी का तापमान बढ़ गया। यूरोप और अमेरिका की भूमिका उद्योगों का सबसे अधिक विकास

यूरोप और अमेरिका में हुआ। इन देशों में नित नए प्रयोगों से अनेक हानिकारक गैसें वातावरण में फैलाई, जिससे पर्यावरण विगड़ा है। इससे पूरी दुनिया प्रभावित हुई है। ये देश इन्हें रोकने को भी तैयार नहीं हैं। वे नहीं मानते कि धरती के वातावरण के गरम होने से काफी गड़बड़ी हो रही है। इस प्रकार धरती का वातावरण गरम होने में यूरोप और अमेरिका की प्रमुख भूमिका है। 

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Q. 14. तो हम सौ लाख बार बनायेंगे’ इस कथन के संदर्भ में सूरदास के चरित्र का विवेचन कीजिए।

Ans. कर्मशील व्यक्तित्व-सूरदास एक कर्मशील व्यक्तित्व का स्वामी है। उसे अपने कर्म के आधार पर सारी विपदाओं का सामना कर लेने का पूर्ण विश्वास है।

हार न मानने वाला-सूरदास परिस्थितियों से जूझने वाला व्यक्ति है। वह विकट परिस्थितियों से हार मानने वालों में से नहीं है।

सहनशीलता-यह कथन सूरदास के व्यक्तित्व में सहनशीलता को भी – दर्शाता है। वह मुश्किलों का सामना बार-बार करने की बात कहता है। महीप की चुप्पी और पीड़ा के कारणों पर विचार कीजिए।



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