NCERT Class 12 Hindi Unseen Passages अपठित काव्यांश

WhatsApp Group (Join Now) Join Now
Telegram Group (Join Now) Join Now

क्या आप CBSE & NCERT Class 12 Hindi Unseen Passages अपठित काव्यांश का समाधान खोज रहे हैं? ताकि अपने class 12 Hindi के परीक्षा में काफी अच्छे अंक प्राप्त कर सकें | तो यह वेबसाइट आपके लिए है | यहां पर आपको class 12 की तैयारी के लिए अति आवश्यक समाधान उपलब्ध कराया जाता है |

तो छात्रों, इस लेख को पढ़ने के बाद, आपको इस अध्याय से परीक्षा में बहुत अधिक अंक प्राप्त होंगे, क्योंकि इसमें सभी परीक्षाओं से संबंधित प्रश्नों का वर्णन किया गया है, इसलिए इसे पूरा अवश्य पढ़ें।

मैं खुद 12वीं का टॉपर रहा हूं और मुझे पता है कि 12वीं की परीक्षा में किस तरह के प्रश्न पूछे जाते हैं। वर्तमान में, मैं एक शिक्षक की भूमिका भी निभा रहा हूँ, और अपने छात्रों को कक्षा 12वीं की महत्वपूर्ण जानकारी और विषयों का अभ्यास भी कराता हूँ। मैंने यह लेख 5 वर्षों से अधिक के अपने अनुभव के साथ लिखा है। इस पोस्ट की मदद से आप परीक्षा में इस अध्याय से भूगोल में बहुत अच्छे अंक प्राप्त कर सकेंगे।

Table of Contents

NCERT Class 12 Hindi Unseen Passages अपठित काव्यांश

कक्षा | Class12th 
अध्याय का नाम | Chapter Nameअपठित काव्यांश | Unseen Passages
किताब | Bookहिंदी व्याकरण | HINDI GRAMMAR
बोर्ड | Boardसभी हिंदी बोर्ड
किताब | Book एनसीईआरटी | NCERT
विषय | Subjectहिंदी | HINDI
अध्ययन सामग्री | Study Materialsगद्यांश | Passages


NCERT Class 12 Hindi Unseen Passages अपठित काव्यांश


जिसका पहले से अध्ययन न किया गया हो, उसे अपठित कहते हैं। परीक्षा में इसी तरह का काव्यांश देकर उसपर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं। उसे हल करते समय निम्नलिखित बिंदुओं का ध्यान रखना आवश्यक है- 

1. सबसे पहले काव्यांश को दो से तीन बार ध्यानपूर्वक पढ़ना चाहिए। इस प्रक्रिया से काव्यांश का मूल भाव समझ में आ जाएगा। 

2. फिर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर काव्यांश में रेखांकित करने चाहिए।

3. अब उन प्रश्नों का उत्तर सरल व सहज भाषा में देना चाहिए। 

4. प्रश्नों के उत्तर सिर्फ काव्यांश पर ही आधारित होने चाहिए।

5. प्रश्नों के उत्तर सीधे, संक्षिप्त व सटीक होने चाहिए।


महत्त्वपूर्ण अपठित काव्यांश बोध | NCERT Class 12 Hindi Unseen Passages अपठित काव्यांश

ezgif.com gif maker 68

1. निम्नलिखित काव्यांशों को ध्यान से पढ़िए और तत्संबंधी प्रश्नों के उत्तर दीजिए- 

मैंने देखा-

एक बड़ा बरगद का पेड़ खड़ा है

उसके नीचे

कुछ छोटे-छोटे पौधे बड़े सुशील विनम्र

देखकर मुझको यो बोले-

हम भी कितने खुशकिस्मत हैं जो खतरों का नहीं सामना करते।

आसमान से पानी बरसे, आगी बरसे

आँधी गरजे हमको कोई फिक्र नहीं है

एक बड़े की वरद छत्र-छाया के नीचे हम अपने दिन बिता रहे हैं।

बड़े सुखी हैं।

मैने देखा-

एक बड़ा बरगद का पेड़ खड़ा है उसके नीचे कुछ छोटे-छोटे पौधे असंतुष्ट और रुष्ट

देखकर मुझको यो बोले- हम भी कितने बदकिस्मत हैं

जो खतरों का नहीं सामना करते ये कैसे ऊपर बढ़ सकते हैं।

इसी बड़े की छाया ने ही

हमको दीना बना रखा

हम बड़े दुखी हैं।

प्रश्न 

(क) इस कविता में बरगद तथा छोटे पौधे किसके प्रतीक है ? 

(ख) पहले अंश में पौधे अपने-आपको खुशकिस्मत क्यों समझते हैं ? 

(ग) दूसरे अंश में पौधे असंतुष्ट और रुष्ट क्यों हैं ?

(घ) पौधे स्वयं को बदकिस्मत क्यों समझते हैं ?

(ङ) विकास के लिए क्या आवश्यक है ?

(च) इस पद्यांश का शीर्षक लिखिए। 

(छ) इसका सार लिखिए ।

उत्तर- 

(क) इस कविता में ‘बरगद’ माता-पिता या अभिभावकों का तथा ‘छोटे पौधे’ नई नन्हीं पीढ़ी के प्रतीक है। 

(ख) पौधे अपने-आपको खुशकिस्मत इसलिए समझते हैं क्योंकि बरगद उन्हें सब मुसीबतों से बचा लेता है। उसके होते हुए वे सुरक्षित अनुभव करते हैं। 

(ग) दूसरे अंश में पौधे असंतुष्ट और रुष्ट इसलिए हैं क्योंकि वे बरगद को अपने बाघक मानते हैं।

(घ) पौधे स्वयं को बदकिस्मत इसलिए मानते हैं क्योंकि उन्हें आने वाले संकटों को स्वयं झेलने का अवसर नहीं मिल पाया। इसलिए उनका विकास भी नहीं हो पाया। 

(च) विकास करने के लिए आवश्यक है कि मनुष्य अपनी चुनीतियों से स्वयं निपटे। वह अपने खतरे खुद उठाए।

(छ) नन्हें पौधों की पीढ़ियाँ । 

(ज) पहले की पीढ़ियाँ ऐसी थीं जो अपने बड़े-बुजुर्गों को धन्यवाद देती थीं। वे उन्हें अपना संरक्षक तथा हितैषी मानती थीं। आज की नई पीढ़ी उन्हें अपने विकास में बाधक मानती है। यह दुर्भाग्य है।


2. NCERT Class 12 Hindi Unseen Passages अपठित काव्यांश


जब भी

भूख से लड़ने कोई खड़ा हो जाता है

सुंदर दीखने लगता है।

झपटता बाज,

फन उठाए साँप

दो पैरों पर खड़ी

कोटो से ही पिक दबे पाँव झाड़ियों में चलता चीता,

डाल पर उलटा लटक

फल कुतरता तोता या इन सब की जगह

आदमी होता। जब भी

भूख से लड़ने कोई खड़ा हो जाता है

सुंदर दीखने लगता है।

प्रश्न 

(क) इस कविता से क्या प्रेरणा मिलती है ? 

(ख) झपटते बाज और फन उठाए साँप में कवि को सौंदर्य क्यों राजा आता है ?

(ग) आदमी कब सुंदर दीखता है ?

(घ) कवि ने विभिन्न पशु-पक्षियों को किन मुद्राओं में दिखाया है और क्यों

(ङ) इसका शीर्षक लिखें। 

(च) इसका सार लिखें।

उत्तर—

(क) इस कविता से भूख शांत करने के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा मिलती है।

(ख) झपटते बाज और फन उठाए साँप में कवि को इसलिए सौंदर्य नजर आता है क्योंकि दोनों पेट भरने के लिए ऐसा कर रहे हैं। 

(ग) कवि कहता है कि आदमी तभी सुंदर दीखता है, जबकि वह भी रोजी-रोटी के लिए संघर्ष करता है।

(घ) कवि ने विभिन्न पशु-पक्षियों को संघर्ष की मुद्रा में दिखाया है। ऐसा दिखाकर वह प्रेरणा देना चाहता है कि रोटी के लिए घोर परिश्रम करो।

(च) भूख और संघर्ष।

(छ) भूख से लड़ने वाला प्राणी सुंदर लगता है, चाहे वह झपटता बाज हो, फन उठाए साँप हो, काँटों से पत्तियाँ खाती बकरी हों, दबे पाँव आता चीता हो, उलटा लटकता तोता हो या संघर्ष करता हुआ आदमी हो।


3. NCERT Class 12 Hindi Unseen Passages अपठित काव्यांश


शांति नहीं तब तक, जब तक

सुख भाग न सवका सम हो।,

नहीं किसी को बहुत अधिक हो ।

नहीं किसी को कम हो ।

स्वत्व माँगने से न मिले, संघात पाप हो जाएँ।

बोलो धर्मराज, शोषित वे

जियें या कि मिट जाएँ ?

न्यायोचित अधिकार माँगने

से न मिले, तो लड़ के । तेजस्वी छीनते समर को,

जीत, या कि खुद मर के ।

किसने कहा, पाप है समुचित

स्वत्व-प्राप्ति-हित लड़ना ? उठा न्याय का खड्ग समर में

अभय मारना मरना ?

प्रश्न 

(क) शांति के लिए क्या आवश्यक है ?

(ख) कौन-सा युद्ध निष्पाप है ?

(ग) धर्मराज से पूछा गया प्रश्न हिंदी गद्य में लिखें।

(घ) तेजस्वी लोगों की क्या पहचान है ?

(ङ) इसका शीर्षक लिखें। 

(घ) इसका सारांश लिखें।

उत्तर- 

(क) शांति के लिए आवश्यक है-सुख के साधनों की समानता । 

(ख) जो मुद्ध न्यायपूर्ण अधिकारों को पाने के लिए किया जाता है, यह निष्पाप होता है।

(ग) हे धर्मराज, अगर अपने अधिकार माँगने से न मिले और उन्हें पाने के लिए संघर्ष किया जाए तो उसे पाप कहा जाए। ऐसी स्थिति में शोषित लोग कहाँ जाएँ ? वे जीवित कैसे रहें ? क्या वे मर जाएँ ?

(घ) तेजस्वी लोगों की पहचान यह है कि वे अपने अधिकारों को पाने के लिए संघर्ष करते हैं। वे या तो अपने हक छीनकर ले लेते हैं या लड़ते-लड़ते मर जाते हैं। 

(ङ) न्यायोचित संघर्ष उचित है।

(च) जब तक सुख के साधनों का बँटवारा बराबर नहीं होगा तब तक अशांति बनी रहेगी। अगर माँगने से भी अधिकार न मिलें तो अपने न्यायोचित अधिकारों के लिए संघर्ष करना पाप नहीं है। तेजस्वी वीर अपने अधिकारों को संघर्ष और बलिदान देकर प्राप्त कर लेते हैं। न्याय के लिए तलवार उठाना गलत नहीं है।

class 12th NotesMCQ
HistoryPolitical Science
EnglishHindi

4. NCERT Class 12 Hindi Unseen Passages अपठित काव्यांश


आदर्शों से आदर्श भिड़े, प्रज्ञा प्रज्ञा पर टूट रही।

प्रतिमा प्रतिमा से लड़ती है, धरती की किस्मत फूट रही ।

आवर्ती का है विषम जाल, निरुपाय बुद्धि चकराती है,

विज्ञान-पान पर चढ़ी हुई सभ्यता डूबने जाती है।

जब-जब मस्तिष्क जयी होता, संसार ज्ञान से चलता है,

शीतलता की है राह हृदय, तू यह संवाद सुनाता चल

प्रश्न 

(क) धरती की किस्मत फूटने का कारण स्पष्ट कीजिए । 

(ख) सभ्यता के डूबने का अर्थ एवं कारण स्पष्ट कीजिए।

(ग) मन को शांति कैसे मिलती है ?

(घ) मस्तिष्क जयी होने का क्या अर्थ है ? उसका क्या दुष्परिणाम होता है? 

(ङ) इसका शीर्षक लिखिए।

(च) इसका एक-तिहाई शब्दों में सारांश लिखिए। 

उत्तर- 

(क) आदशों से आदर्श टकरा रहे हैं, विचारों से विचार टकरा रहे हैं। इस आपसी टकराहट के कारण घरती की किस्मत फूट रही है। 

(ख) वैचारिक प्रगति के कारण सभ्यता डूवने जा रही है। आशय यह है कि आज संसार में विचारधाराओं और धर्मों की टक्कर के कारण पूरी मानव-जाति का संहार होने का खतरा मँडराने लगा है।

(ग) हृदय अर्थात भावनाओं के विकास से मन को शांति मिलती है।

(घ) ‘मस्तिष्क जयी’ होने का अर्थ है— कोमल भावनाओं की बजाय तर्क और बुद्धि से जीवन जीना। इसका दुष्परिणाम यह होता है कि तर्क से आपसी संघर्ष और अलगाव बढ़ते हैं। 

(ङ) बीद्धिक प्रगति की हानियाँ

(च) आज हर मनुष्य अपने-अपने विचार, सिद्धांत, आदर्श और आस्था पर दृढ़ है। वैचारिक संघर्ष से विज्ञान की उन्नति तो खूब हो रही है, लेकिन आपसी संघर्ष भी बहुत बढ़ गए हैं। अब तो युद्धों के कारण सर्वनाश का खतरा मँडराने लगा है। आज अगर शांति लानी है तो हमें कोमल भावनाओं को महत्त्व देना होगा। वस्तुतः कोमलता और नम्रता से ही शांति स्थापित हो सकता है।


5. NCERT Class 12 Hindi Unseen Passages अपठित काव्यांश


यह समर तो और भी अपवाद है 

चाहता कोई नहीं इसको, मगर 

जूझना पड़ता सभी को, शत्रु जब 

आ गया हो द्वार पर ललकारता । 

छीनता हो स्वत्व कोई और तू 

त्याग तप से काम ले, यह पाप है। 

पुण्य है विच्छिन्न कर देना उसे 

बढ़ रहा तेरी तरफ जो साथ से।

युद्ध को तुम निंद्य कहते हो मगर

अलका पार जब तलक हैं उठ रहीं चिंगारियाँ

भिन्न स्वार्थी के मुलिश संघर्ष की,

युद्ध तब तक विश्व में अनिवार्य है। 

और जो अनिवार्य है, उसके लिए

खिन्न या परितप्त होना व्यर्थ है। 

तू नहीं लड़ता, न लड़ता, आग यह

फूटती निश्चय किसी भी ब्याज से ।

प्रश्न – 

(क) कवि ने किसे पाप कहा है ?

(ख) युद्ध कब तक जारी रहेगा ? 

(ग) युद्ध के लिए पछतावा न करने की बात क्यों कही गई है ?

(घ) किस चीज को कोई नहीं चाहता ?

(ङ) इसका शीर्षक लिखिए । 

(च) इसका एक तिहाई शब्दों में सारांश लिखिए।

उत्तर- 

(क) अधिकार को छिनता देखकर भी त्याग तप की नीति पर चलना पाप है 

(ख) जब तक लोगों के स्वार्थ टकराते रहेंगे, युद्ध जारी रहेगा।

(ग) जब युद्ध होना अनिवार्य है, उसे टाला नहीं जा सकता, तो उसके लिए पछतावा करना चाहिए।

(घ) युद्ध करना कोई नहीं चाहता। 

() युद्ध एक आवश्यक गजबूरी ।

(च) युद्ध करना कोई नहीं चाहता। परंतु जब यह सिर पर आ पड़े तो लड़ना ही पड़ है। अधिकारों को छिनता देखकर युद्ध न करना पाप है। अन्यायी के हाथ काट देना पुण्य है। जब त स्वार्थ प्रबल रहेंगे, युद्ध होते ही रहेंगे। इसलिए युद्ध की इस मजबूरी के लिए पछताना नहीं चाहि


6. NCERT Class 12 Hindi Unseen Passages अपठित काव्यांश


यह देखिए, अरविंद से शिशुवृंद कैसे सो रहे 

हैं नेत्र माता के इन्हें लख तृप्त कैसे हो रहे ! 

क्यों खेलना, सोना, रुदन करना, बिहँसना आदि सब, देता अपरिमित हर्ष उसको देखती वह इन्हें जब ? 

वह प्रेम है, वह प्रेम है, वह प्रेम है, वह प्रेम है,

है अचल जिसकी मूर्ति, हाँ-हाँ, अटल जिसका नेम है । 

प्रश्न 

(क) शिशुओं की तुलना किससे की गई है और क्यों ?

(ख) ‘वह प्रेम है …..’ ‘कथन को बार-बार क्यों दुहराया गया है ? 

(ग) सोते समय बच्चे को देखकर माँ की आँखों में कौन-सा भाव दिखाई पड़ है ?

(घ) माँ को असीम आनंद कब प्राप्त होता है ? 

() संतान के प्रति माता-पिता के प्रेम को क्या कहते हैं ?

उत्तर—

(क) शिशुओं की तुलना अरविंद अर्थात् कमल से की गई है। शिशु स्वभाव से कोमल तथा निर्मल होते हैं। इस कारण इनकी तुलना अरविंद से की गई है।

(ख) प्रेम के महत्त्व पर बल देने के लिए यह कथन बार-बार दोहराया गया है। 

(ग) सोते बच्चे को देखकर माँ की आँखों में तृप्ति का भाव दिखाई देता है। 

(घ) बच्चे को सोता, हँसता, खेलता, रोता देखकर माँ के मन में असीम आनंद की अनुभूति होती है।

(ङ) वात्सल्य ।


7. NCERT Class 12 Hindi Unseen Passages अपठित काव्यांश


है अगम चेतना की घाटी, कमजोर पड़ा मानव का मन,

ममता की शीतल छाया में, होता कटुता का स्वयं शमन !

ज्वालाएं जब घुल जाती हैं, खुल-खुल जाते हैं मुद्दे नयन, 

होकर निर्मलता में प्रशांत, बहता प्राणों का क्षुब्ध पवन ।

संकट में यदि मुसका न सका, भय से कातर हो मत रोओ !

यदि फूल नहीं वो सकते हो, काँटे कम से कम मत बोओ !

प्रश्न (क) फूल या काँटे बोने का भाव क्या है ?

(ख) मानव मन की कड़वाहट कैसे दूर हो सकती है ?

(ग) ज्वालाएँ किसका प्रतीक हैं ?

(घ) उत्तेजित मन कब शांत हो जाता है ?

(ङ) कवि कठिनाई के क्षणों में क्या करने या न करने का परामर्श दे रहा है ? 

उत्तर- (क) फूल बोने का अर्थ है-सुख देने वाले भले काम करना । काँटे बोने का आशय है-दुखदायी काम करना ।

(ख) ममता की शीतल छाया में रहकर मान-मन की कड़वाहट दूर हो जाती है।

(ग) ज्यालाएँ सांसारिक कष्टों की प्रतीक है।

(घ) उत्तेजित मन ममता की शीतल छाया में निर्मल होने पर शांत । 

(ङ) कवि कठिनाई के क्षणों में फूल बोने अर्थात् सुख देने वाले कर्म करने की प्रेरणा दे हो जाता है। रहा है। वह भयभीत न होने तथा दुखदायी कार्य न करने की भी प्रेरणा दे रहा है।


8. NCERT Class 12 Hindi Unseen Passages अपठित काव्यांश


थका-हारा सोचता मन सोचता मन।

उलझती ही जा रही है एक उलझन। 

अँधेरे में अँधेरे से कब तलक लड़ते रहें

सामने जो दिख रहा है, वह सच्चाई भी कहें।

भीड़ अंधों की खड़ी खुश रेवड़ी खाती

अँधेरे के इशारों पर नाचती गाती। 

थका हारा सोचता मन सोचता मन।

भूखी प्यासी कानाफूसी दे उठी दस्तक

अंधा बन जा झुका दे तम-द्वार पर मस्तक । 

रेवाड़ी की चोट में रेवड़ी बन जा

तू तिमिर के दरबार में दरवान सा तन जा।

थका हारा, उठा गर्दन – जूझता मन

दूर उलझन ! दूर उलझन ! दूर उलझन !

चल खड़ा हो पैर में यदि लग गई ठोकर खड़ा हो संघर्ष में फिर रोशनी होकर

मृत्यु भी वरदान है संघर्ष में प्यारे

सत्य के संघर्ष में क्यों रोशनी हारे। 

देखते ही देखते तम तोड़ता है दम

और सूरज की तरह हम ठोंकते हैं खम।

प्रश्न 

(क) थके-हारे मन की उलझन क्या थी ? 

(ख) अँधेरे में अंघों की भीड़ खुश क्यों थी ?

(ग) भूख-प्यास की विवशता का क्या परामर्श था ?

(घ) जूझारू मन ने सुझाव क्यों नहीं माना ? 

(ङ) संघर्ष में विजय किसे मिलती है ?

उत्तर—

(क) थके-हारे मन की उलझन यह थी कि संघर्ष की निराशा को झेलते रहें या आगे घुटने टेककर सुख लूटें ।

(ख) अँधेरे में अंघों की भीड़ रेवड़ी अर्थात् स्वार्थ भोग करके खुश थी।

(ग) भूख-प्यास की विवशता का परामर्श था कि तू भी तम के दरबार में माथा झु सुख लूट। 

(घ) जुझारू मन ने पराजय का सुझाव इसलिए नहीं माना क्योंकि उसे संघर्ष पथ में व का बोध हो गया। 

(ङ) संघर्ष में विजय उसी को मिलती है जो सूरज या रोशनी की तरह डटकर खड़ जाता है।


9. NCERT Class 12 Hindi Unseen Passages अपठित काव्यांश


हँस उठते पल में आई नयन,

घुल जाता होठों में विषाद,

लुट जाता चिर-संचित विराग,

ऑंखें देती सर्वस्व वार। 

प्रश्न 

(क) नायिका के नयन आर्द्र क्यों हैं ?

(ख) नायिका के आर्द्र नेत्र किस कारण से हँस उठते ? (ग) नायिका का चिर-संचित विराग किस प्रकार लुट जाता ?

(घ) नायिका किसपर सब कुछ न्योछावर करने को प्रस्तुत है ? 

उत्तर- 

(क) नायिका के नयन अपने प्रिय से वियोग के कारण आर्द्र हैं। 

(ख) नायिका के आर्द्र नेत्र उसके प्रिय के आने पर हँस उने।

(ग) प्रिय के दर्शन से नायिका का चिर-संचित विराग लुट ता ।

(घ) नायिका अपने प्रिय पर सब कुछ न्योछावर करने को प्रसूत है। 


10. NCERT Class 12 Hindi Unseen Passages अपठित काव्यांश


जान पड़ता नेत्र देख बड़े-बड़े हीरकों में गोल नीलम हैं जड़े।

स्वर्ग का यह सुमन घरती पर खिला नाम इसका उचित ही है उनिला

प्रश्न 

(क) इन पंक्तियों में कवि ने किसे सौंदर्य का वर्णन किया है ?

(ख) कवि को नायिका के नेत्र कैसे जान पड़ते हैं ? 

(ग) कवि ने नायिका को ‘स्वर्ग का सुमन’ क्यों कहा है ?

(घ) इन पंक्तियों में किस अलंकार का प्रयोग किया गया है ? 

उत्तर- 

(क) इनमें उर्मिला के सौंदर्य का वर्णन है।

(ख) कवि को नायिका के नेत्र जैसे जान पड़ते हैं मानो रीरकों में गोल नीलम जड़े है ।

(ग) नायिका के अति उज्ज्वल सौंदर्य के कारण कवि ने नाविको स्वर्ग का सुमन कहा ।

(घ) ‘जान पड़ता जड़े में उत्प्रेक्षा अलंकार है।


11. NCERT Class 12 Hindi Unseen Passages अपठित काव्यांश


के मुझ पर त्रैलोक्य भले ही के

जो कोई जो कह सके, कहे, क्यों चूके ?

छीने न मातृपद किंतु भरत का मुझसे,

हे राम, दुहाई करें और क्या तुझसे ? 

कहते आते थे यही अभी नरदेही, 

‘माता न कुमाता, पुत्र- कुपुत्र भले ही।’

अब कहें सभी यह हाय। 

विरुद्ध विधाता, है पुत्र पुत्र ही, रहे कुमाता नाता।’

परमार्थ न देखा, पूर्ण स्वार्थ ही सापा, 

इस कारण ही तो हाय आज यह वाघा ।

युग-युग तक चलती रहे कठोर कहानी, 

“रघुकुल में भी थी एक अभागिन रानी’

निज जन्म-जन्म में सुने जीव यह मेरा

‘धिक्कार। उसे था महा स्वार्थ ने घेरा।’

प्रश्न 

(क) इस काव्यांश का वक्ता कौन है ?

(ख) वक्ता अपने पर थूकने की बात क्यों कर रहा है ? 

(ग) लोगों में माता-पुत्र के बारे में कौन-सी उक्ति प्रचलित है ?

(घ) ‘बस मैंने इसका बाह्य मात्र ही देखा’ में किसकी बात हो रही है ?

(ङ) इसका शीर्षक लिखिए ।

(च) इसका एक तिहाई शब्दों में सारांश लिखिए ।

(छ) रघुकुल की अभागिन रानी कौन थी ? उसने कौन-सा महास्वार्थ दिखलाया ?

उत्तर- 

(क) इस काव्यांश की वक्त्री है कैकेयी।

(ख) कैकेयी ने राम को मिलने वाला राज्य भरत को दिला दिया था और राम को चौदह वर्ष का वनवास दिलवा दिया था। उस अपराध के कारण वह अपने पर थूकने की बात कह रही है। 

(ग) लोगों में माता-पुत्र के बारे में यही उक्ति प्रचलित है— पुत्र – कुपुत्र भले ही हो जाए, किंतु माता कभी कुमाता नहीं होती।

(घ) इसमें भरत की चारित्रिक दृढ़ता और उदारता की बात हो रही है।

(ङ) कैकेयी का पछतावा ।

(च) कैकेयी राम के सामने पछतावा प्रकट करती है। वह अपने पर हर कलंक सहने को तैयार है, किंतु वह भरत की बेरुखी नहीं सहन कर सकती। उसने भरत के चरित्र को ठीक से जाना नहीं था। उसे नहीं पता था कि उसका बेटा भरत इतना न्यायी, उदार, सच्चा और भ्रातृ-स्नेही होगा। वह पछतावा प्रकट करती हुई कहती है कि मैंने जो स्वार्थ प्रकट किया है, इसके लिए मुझे दुनिया सदा धिक्कारती रहे।

(छ) रघुकुल की अभागी रानी थी— कैकेयी। उसने अपने पुत्र के लिए राज्य तथा राम के लिए चौदह वर्षों का वनवास माँगकर महास्वार्थ का परिचय दिया था। 


12. NCERT Class 12 Hindi Unseen Passages अपठित काव्यांश


जिस-जिससे पथ पर स्नेह मिला उस-उस राही को धन्यवाद ।

जीवन अस्थिर, अनजाने ही हो जाता पथ पर मेल कहीं सीमित पग-डग,

लंबी मंजिल तय कर लेना कुछ खेल नहीं दाएँ-बाएँ

सुख-दुख चलते सम्मुख चलता पथ का प्रमाद जिस-जिससे

पथ पर स्नेह मिला उस-उस राही को धन्यवाद ।

जो साथ न मेरा दे पाए उनसे कब सूनी हुई डगर

मैं भी न चलूँ यदि तो भी क्या राही मर,

लेकिन राह अमर इस पथ पर वे ही चलते हैं

जो चलने का पा गए स्वाद जिन – जिससे पथ

पर स्नेह मिला उस-उस राही को धन्यवाद ।

प्रश्न 

(क) कवि के अनुसार जीवन कैसा है ?

(ख) जीवन रूपी यात्रा में कैसे-कैसे अनुभव आते हैं ? 

(ग) मंजिल तय करना खेल नहीं है क्यों ?

(घ) जीवन रूपी डगर पर कौन चलते

हैं ? (ङ) इसका शीर्षक लीखिए ।

(च) इसका एक-तिहाई शब्दों में सारांश लिखिए ।

(छ) कवि किसको धन्यवाद करता है और क्यों ? 

(ज) राह को अमर क्यों कहा गया है ?

उत्तर—

(क) कवि के अनुसार जीवन नश्वर है, चंचल है, क्षणभंगुर है। 

(ख) जीवन रूपी यात्रा में सुख-दुख और प्रमाद के अवसर आते रहते हैं। 

(ग) मंजिल पाने के लिए सुख-दुख, प्रमाद आदि को झेलना पड़ता है। इसकी राह वा लंबी होती है और चलने वाले के कदम बहुत छोटे होते हैं। इसलिए उसे पा लेना बहुत काम है।

(घ) जिनको चलने में आनंद मिलता है, वही इस डगर पर चलते हैं।

(ङ) जीवन रूपी यात्रा ।

(च) जीवन रूपी यात्रा में जिस-जिस साथी से स्नेह मिला, कवि उसे धन्यवाद देता है। इ नश्वर जीवन में अनजाने में ही किसी से मेल हो जाता है। जीवन की मंजिल बहुत दूर है अ यात्री के कदम बहुत छोटे हैं। रास्ते में सुख-दुख और प्रमाद रूपी बाधाएँ भी आती रहती है इसलिए मंजिल को पा लेना आसान नहीं है।

यात्री नश्वर है लेकिन राह अमर है। राह चलती ही रहती है। जो लोग चलने का रस पा गा वे ही चल पाते हैं। कवि उन साथियों को धन्यवाद देता है जिन्होंने उसे समय-समय पर स्ने दिया।

(छ) कवि उन-उन साथियों को धन्यवाद देता है जिन्होंने जीवन रूपी यात्रा में कवि स्नेह दिया। उनका स्नेह पाकर कवि का जीवन-पथ सरल तथा सुहाना हो गया। (ज) राह अमर है, अर्थात जीवन अनंत है। यह कभी समाप्त नहीं होता।


13. NCERT Class 12 Hindi Unseen Passages अपठित काव्यांश


मस्त योगी हैं कि हम सुख देखकर सबका सुखी हैं, कुछ अजब मन है कि हम दुख देखकर सबका दुख हैं, तुम हमारी चोटियों की बर्फ को यों मत कुरेदों, दहकता लावा हृदय में है कि हम ज्वालामुखी हैं । लास्य भी हमने किए हैं और तांडव भी किए हैं, वंश मीरा और शिव के, विष पिया है ओ’ जिए हैं, दूध माँ का, या कि चंदन या कि केसर को समझ लो, यह हमारे देश की रज है, कि हम इसके लिए हैं।

प्रश्न 

(क) इस कविता में किस देश के निवासियों की बात की गई है ? कारण दीजिए 

(ख) लास्य और तांडव से आप क्या समझते हैं ? 

(ग) इस कविता में भारतीयों की किस विशेषता को उजागर किया गया है।

(घ) इस कविता का मूल भाव क्या है ? 

(ङ) इसका शीर्षक लिखिए।

(च) इसका एक तिहाई शब्दों में सारांश लिखिए।

उत्तर—

(क) इस कविता में भारत के निवासियों की बात की गई है। मीरा, शिव, लास और तांडव यहीं की संस्कृति से संबंधित हैं।

(ख) पार्वती के आनंददायक नृत्य को ‘लास्य’ तथा शिव के ध्वंसकारी नृत्य को कहते हैं।

(ग) इस कविता में भारतीयों की उदारता, मस्ती, जोश तथा विध्वंसकारी शक्ति का वर्ण किया गया है। 

(घ) इस कविता का मूल भाव यह है कि भारतीय उदार जरूर हैं, किंतु वे शत्रु को नाकों चबवा देते हैं।

(ङ) भारत के सपूत। 

(च) भारत में आध्यात्मिक, करुणावान तथा मस्त लोग रहते हैं। वे दूसरों के कष्टों पर करुणा करते हैं। परंतु उन्हें शत्रु का विनाश करना भी आता है। वे सच्चे देशभक्त है। अवसर आने पर वे देश हित बलिदान करने को तैयार रहते हैं। जब तक साथ एक भी दम हो, हो अवशिष्ट एक भी धड़कन


14. NCERT Class 12 Hindi Unseen Passages अपठित काव्यांश


रखो आत्म गौरव से ऊँची, पलकें, ऊँचा सिर, ऊँचा मन । एक बूँद भी रक्त शेष हो, जब तक तन में है शत्रुंजय |

दीन वचन मुख से न उचारो, मानो नहीं मृत्यु का भी भय । निर्भय स्वागत करो मृत्यु का, मृत्यु एक है विश्राम स्थल ।

जीव जहाँ से फिर चलता है, धारण कर नव जीवन-संबल । मृत्यु एक सरिता है, जिसमें श्रम से कातर जीव नहाकर ।

फिर नूतन धारण करता है, काया रूपी वस्त्र बहाकर ।

प्रश्न 

(क) कवि मृत्यु का स्वागत करने के लिए क्यों कहता है ?

(ख) इस कविता में किस प्रकार का जीवन जीने की प्रेरणा दी गई है ? 

(ग) मृत्यु को सरिता क्यों कहा गया है ?

(घ) ‘शत्रुंजय’ का क्या अर्थ है ? 

(ङ) इसका शीर्षक लिखिए।

(च) इसका एक-तिहाई शब्दों में सारांश लिखिए।

उत्तर- 

(क) कवि आत्मगौरव की रक्षा करने के लिए मृत्यु का स्वागत करने को कहता है। 

(ख) इस कविता में निर्भय होकर आत्मगौरव का जीवन जीने की प्रेरणा दी गई है। 

(ग) मृत्यु को सरिता इसलिए कहा है क्योंकि वह जीवन को नया रूप प्रदान करती है। मनुष्य लंबा समय जीने के बाद मृत्यु रूपी सरिता में नहाकर फिर से तरोताजा हो जाता है, अर्थात् बच्चे के रूप में जन्म लेकर नया जीवन धारण कर लेता है।

(घ) शाजय का अर्थ शत्रुओं पर विजय पाने वाला। 

(ङ) निर्भय होकर जियो।

(च) मनुष्य में जब तक जीवन है, उसे आत्मगौरव से जीना चाहिए। उसे न तो कभी दीनता अपनानी चाहिए, न मृत्यु से डरना चाहिए। उसे मृत्यु को एक विश्राम स्थल यारतरोताजा करने वाली सरिता के समान मानना चाहिए।

15. NCERT Class 12 Hindi Unseen Passages अपठित काव्यांश


मृदु मिट्टी के हैं बने हुए,

मधु-घट फूटा ही करते हैं,

लघु जीवन लेकर आए हैं,

प्याले टूटा ही करते हैं,

फिर भी मदिरालय के अंदर मधु के घट हैं, मधु प्याले हैं,

जो मादकता के मारे हैं, दे मधु लूटा ही करते हैं,

वह कच्चा पीने वाला है, जिसकी ममता घट प्यालों पर,

जो सच्चे मधु से जला हुआ

कब रोता है. चिल्लाता है जो बीत गई सो बात गई।

प्रश्न – 

(क) मृदु मिट्टी के हैं बने हुए के दो अर्थ बताइए।.

(ख) ‘लघु जीवन’ किस-किसका होता है ? 

(ग) ‘मादकता के मारे’ का यहाँ क्या आशय है ?

(घ) ‘कच्चा पीने वाला’ तथा ‘सच्चे मधु से जला हुआ’ का तात्पर्य स्पष्ट कीजिए

(ङ) इस काव्यांश का शीर्षक दीजिए। (च) इस काव्यांश का मुख्य भाव/सार लिखिए ।

उत्तर—

(क) इसका एक अर्थ है- कोमल मिट्टी से बने हुए प्याले अकसर टूट जाया करते हैं इसका दूसरा अर्थ है— नश्वर देह वाला मनुष्य एक न एक दिन मर जाता है।

(ख) ‘लघु जीवन’ प्यालों तथा मानव शरीर का होता है।

(ग) ‘मादकता के मारे’ का तात्पर्य है—प्रेम चाहने वाले, आनंद चाहने वाले।

(घ) ‘कच्चा पीने वाला’ का अर्थ है-जीवन की समझ न रखने वाला । ‘सच्चे मधु से जला हुआ’ का तात्पर्य है-प्रेमी की सच्ची भावना से ओत-प्रोत मनुष्य 

(ङ) जो बीत गई सो बात गई।

(च) जैसे मिट्टी के प्याले नश्वर हैं, वैसे ही मानव-शरीर नश्वर है। सच्चे प्रेमी मानव शरी पर नहीं ‘प्रेम’ पर ममता रखते हैं। वे एक मनुष्य के मरने पर दूसरे से प्रेम करना नहीं छोड़ते मनुष्य को चाहिए कि वह बीते हुए दुख को भूलकर आगे के जीवन को प्रेममय बनाए ।


16. NCERT Class 12 Hindi Unseen Passages अपठित काव्यांश


ब्रह्मा से कुछ लिखा भाग्य में

मनुज नहीं लाया है, अपना सुख उसने अपने

भुजबल से पाया है।

प्रकृति नहीं डर कर झुकती है। कभी भाग्य के बल से, सदा हारती वह मनुष्य के

उद्यम से, श्रमजल से ।

ब्रह्मा का अभिलेख पढ़ा-

करते निरुद्यमी प्राणी,

थोते वीर कु-अंक भाल के

ब्रह्मा भ्रुवों से पानी ।

भाग्यवाद आवरण पाप का

और शस्त्र शोषण का,

जिससे रखता दबा एक जन

भाग दूसरे जन का।

प्रश्न 

(क) प्रकृति मनुष्य के आगे कब झुकती है ? 

(ख) भाग्य – लेख कैसे लोग पढ़ते हैं ?

(ग) भाग्यवाद को ‘पाप का आवरण’ और ‘शोषण का शस्त्र’ क्यों कहा गया है

(घ) इस काव्यांश से आपको क्या प्रेरणा मिलती है ? (ङ) ‘भाल के कु-अंक’ से कवि का क्या तात्पर्य है ?

उत्तर- 

(क) प्रकृति मनुष्य के आगे तब झुकती है, जब वह पसीना बहाकर परिश्रम करता है। 

(ख) श्रम से बचने वाले कामचोर लोग भाग्य का लेख पढ़ा करते हैं।

(ग) भाग्यवाद को ‘पाप का आवरण’ और ‘शोषण का शस्त्र’ इसलिए कहा गया है क्यों इसी के तल पर एक साधन-संपन्न प्राणी दूसरे का हिस्सा मार लेता है। प्रायः धनी लोग गरी का धन चूस लेते हैं और अपनी अमीरी तथा गरीबों की गरीबी को भाग्य का खेल मानते।।

(घ) इस काव्यांश से हमें भाग्य के भरोसे न बैठकर परिश्रम करने की प्रेरणा मिलती। 

(ङ) “भाल के कु-अंक’ से कवि का आशय है-चुरी कस्मत। माथे पर लिखी बुरी रेखाओं है। का आशय है-भाग्य खराब होना । 


17. NCERT Class 12 Hindi Unseen Passages अपठित काव्यांश


आज फिर से

धृतराष्ट्र के अंधे सपनों में पले

उसके सी-सी बिगडेल बेटे

शकुनि की शह पर

चप्पे-चप्पे में फैल गए हैं

नगर नहीं, गाँव नहीं संसद भवन तक पैठ गए हैं

कोई भी सरेआम भीष्म की दाढ़ी नोचता है पर मेरे देश का नियंता

कुछ नहीं सोचता है। यह है मेरे देश की वोटिल राजनीति

जिसके मवाद में हजारों दुःशासन बिलबिलाते हैं

कितने ही जयद्रथ कितने दुर्योधन

कितने ही शकुनि

टेढ़ी चाल के ठहाके लगाते हैं

पर बेचारे भीष्म कुछ नहीं कर पाते हैं। 

प्रश्न 

(क) धृतराष्ट्र के अंधे सपनों में पले बिगड़ैल बेटे किस ओर संकेत कर रहे हैं ?

(ख) शकुनि की शह पर संसद भवन में पैठने का प्रतीकार्थ स्पष्ट कीजिए । 

(ग) इसमें भीष्म किसका प्रतीक है?

(घ) कवि ने समाज की दुर्दशा का दोषी किसे माना है ? 

(ङ) इसका शीर्षक लिखिए ।

(च) इसका एक तिहाई शब्दों में सारांश लिखिए।

उत्तर- 

(क) ‘धृतराष्ट्र के अंधे सपनों में पले बिगड़ैल बेटे’ महाभारत में दुर्योधन आदि कौरवों की ओर तथा आजकल की राजनीति में छाए दुष्ट नेताओं की ओर संकेत करते हैं।

(ख) इसमें विदेशी षड्यंत्रकारियों के इशारे पर भारतीय संसद पर हमला करने वाले पाकिस्तानी आतंकवादियों की ओर संकेत किया गया है।

(ग) भीष्म लाचार सत्ताधारी नेताओं का प्रतीक है। 

(घ) कवि ने वोट की राजनीति को समाज की दुर्दशा के लिए दोषी माना

((ङ)) देश की कुटिल राजनीति ।

(च) आज फिर से विदेशी षड्यंत्रकारियों तथा बिगडेल राजनीतिज्ञों का बोलबाला है। विदेशी आतंकवादी भारत की संसद तक घुस आए हैं। वोट की राजनीति के कारण आज दुष्टों का दबदबा है। नीतिवान राजनेता चाहकर भी दुष्टों का कुछ नहीं बिगाड़ पाते।


18. NCERT Class 12 Hindi Unseen Passages अपठित काव्यांश


मैं फिर जन्म लूँगा

फिर मैं इसी जगह आऊँगा

उचटती निगाहों की भीड़ में

अभावों के बीच

लोगों को क्षत-विक्षत पीठ सहलाऊँगा।

इस समय में

इस अनगिनत अचीन्ही आवाजों में

कैसा दर्द है !

कोई नहीं सुनता

पर इन आवाजों को और इन कराहों को

दुनिया सुने, मैं यह चाहूँगा । मेरी तो आदत है

रोशनी जहाँ भी हो

उसे खोज लाऊँगा

कातरता चुप्पी या चीखें

या हारे हुओं की स्त्रीज

जहाँ भी मिलेगी

उन्हे प्यार के सितार पर बजाऊँगा ।

चाहे इस प्रार्थना सभा में

तुम सब मुझ पर गोलियाँ चलाओ ।

मैं मर जाऊँगा लेकिन मैं कल फिर जन्म लूँगा

कल फिर आऊँगा ।

प्रश्न 

(क) किस पर प्रार्थना सभा में गोलियाँ चलाई गई ? 

(ख) वक्ता फिर से क्यों जन्म लेना चाहता है ?

(ग) रोशनी खोज लाने का क्या आशय है ?

(घ) कातरता, खीज और चुप्पी को प्यार के सितार पर बजाने का क्या आश है ? 

(ङ) इसका शीर्षक लिखिए।

(च) इसका एक तिहाई शब्दों में सारांश लिखिए।

उत्तर- 

(क) महात्मा गाँधी पर प्रार्थना सभा में गोलियाँ चलाई गई। 

(ख) गाँधीजी दुखियों, पीड़ितों और बेचारों की आवाज को उठाने के लिए फिर से ज लेना चाहते हैं।

(ग) रोशनी खोज लाने का आशय है—-आशा और उत्साह का वातावरण बनना । 

(घ) इसका आशय है— कायरता, खीज और चुप्पी साधने वाले शोषित जनों को प्यार देन उनका उत्साह बढ़ाना। उन्हें संघर्ष के लिए तैयार करना ।

(ङ) गाँधी जी का संकल्प।

(घ) गाँधी जी इस अभावग्रस्त दुनिया में फिर से जन्म लेना चाहते हैं। वे पायलों और शोपितों के अनजाने दर्द को सबके सामने रखना चाहते हैं। वे निराशा में से आशा जग जानते हैं। वे संकल्प करते हैं कि वे दुखियों को प्यार देकर उन्हें संघर्ष के लिए तैयार करेंगे ये गोलियाँ झेलकर भी संघर्ष करते रहेंगे।


19. NCERT Class 12 Hindi Unseen Passages अपठित काव्यांश


खूब गए

दूधिया निगाहों में

फटी बिवाइयों वाले खुरदरे पैर धँस गए

कुसुम गए कुसुम कोमल मन में

गुट्ठल घट्टों वाले कुलिश कठोर पैर

दे रहे थे गति

रबड़ विहीन ढूंढ पैडलों को चला रहे थे

एक नहीं, दो नहीं, तीन-तीन चक्र

कर रहे थे मात्र त्रिविक्रम वामन के पुराने पैरों को नाप रहे थे धरती का अनहद फासला

घंटों के हिसाब से ढोए जा रहे थे।

देर तक टकराए

उस दिन इन आँखों से वे पैर भूल नहीं पाऊंगी फटी बिवाइयाँ

खूब गई दूधिया निगाहों में

बैंस गई

कुसुम कोमल मन में ।

(i) रिक्शा चालक के पैरों में बिवाइयों और गाँठों से भरे पट्टे क्यों पड़ गये थे ? 

उत्तर- रबड़हीन कठोर पैडलों को लगातार चलाते चलाते रिक्शा के पैरों में बिवाइयाँ घट्टे पड़ गए थे।

(ii) कवि ने रिक्शा चालक के पैरों की तुलना किसके पैरों से की है ?

उत्तर— कवि ने रिक्शा चालक के पैरों की तुलना ‘भगवान विष्णु’ के उस वामन अवतार से की है जिसने तीन पगों में पूरी धरती नाप ली थी। 

(iii) कवि ने अपने मन और दृष्टि के लिए किन उपमानों का प्रयोग किया है और क्यों ?

उत्तर – कवि ने अपने के लिए ‘कुसुम’ तथा दृष्टि के लिए ‘दूध’ उपमान का प्रयोग किया है । कवि अपने मन को कुसुम के समान कोमल तथा दृष्टि को दूध के समान पवित्र मानता है। 

(iv) ‘घंटों के हिसाब से ढोए जा रहे थे’ से कवि किस कटु सत्य की ओर संकेत । 

उत्तर- रिक्शा चालक दूरी के हिसाब से नहीं, बल्कि घंटों के हिसाब से रिक्शा चला रहे करता है ? थे, अर्थात् अपना शोषण करवा रहे थे। मालिक या सवारियाँ उन्हें घंटों के हिसाब से पैसे देते थे, जिसमें रिक्शा चालक को हानि होती थी।

(v) कवि को क्यों लगता है कि वह रिक्शा चालक के बिवाई-पड़े पैरों को भूल नहीं पाएगा। 

उत्तर—कवि रिक्शा चालक की दुर्दशा और शोषण को बहुत गहराई तक अनुभव करता है। इसलिए वह उसे कभी भूल नहीं पाता। 


20. NCERT Class 12 Hindi Unseen Passages अपठित काव्यांश


कहो, तुम्हारी जन्मभूमि का है कितना विस्तार ?

भिन्न-भिन्न यदि देश हमारे तो किसका संसार ?

धरती को हम काटें-छाँटें, तो उस अंबर को भी चोटें

एक अनल है, एक सलिल है, एक अनिल संचार,

कहो, तुम्हारी जन्मभूमि का है कितना विस्तार ?

एक भूमि है, एक व्योम है,

एक सूर्य है, एक सोम है,

एक प्रकृति है, एक पुरुष है, अगणित रूपाकार,

कहो, तुम्हारी जन्मभूमि का है कितना विस्तार ? 

(i) भिन्न देशों में घरती का विभाजन करने वाले के लिए किसका विभाजन असंभव । 

उत्तर—भिन्न देशों में धरती का विभाजन करनेवाले के लिए हवा, गगन व आग विभाजन संभव नहीं है। 

(ii) देशों की भिन्नता हो महत्त्व न देने के लिए क्या तर्क दिए गए हैं ?

उत्तर— देशों की भिन्नता को महत्त्व न देने के लिए कहा गया है क्योंकि इस धरती पर प हवा, सूर्य, चाँद, व आकाश आदि एक हैं। 

(iii) ‘अनल’ और ‘अनिल’ शब्दों के अर्थ में क्या अंतर है ?

उत्तर- ‘अनल’ का अर्थ है-आग तथा ‘अनिल’ का अर्थ है-हवा ।

(iv) कवि के मत में जन्मभूमि का विस्तार कितना है ? 

उत्तर — कवि के मत में जन्मभूमि का विस्तार सारी धरती पर है।

(v) एक प्रकृति है, एक पुरुष है, अगणित रूपाकार’-कथन का भाव स्पष्ट कीजिये 

उत्तर—इस कथन का आशय है कि धरती पर एक ही प्रकृति है, एक ही पुरुष है, पं उसके रूप भिन्न-भिन्न हैं।

21. NCERT Class 12 Hindi Unseen Passages अपठित काव्यांश


हवा हूँ, हवा मैं बसंती हवा

सुनो बात मेरी अनोखी हवा हूँ बड़ी बावली है, बड़ी मस्तमौला ।

नहीं कुछ फिकर है, बड़ी ही निडर हूँ। 

जिधर चाहती हूँ उधर घूमती हूँ, मुसाफिर अजब हूँ । 

न घर-बार मेरा, न उद्देश्य मेरा, न इच्छा किसी की, न आशा किसी की, न प्रेमी न दुश्मन, जिघर चाहती हूँ, उधर घूमती हूँ ।

हवा हूँ, हवा मैं बसन्ती हवा हूँ 

(i) इस कविता का शीर्षक लिखिए।

उत्तर- बसंती हवा ।

(ii) कवि ने अनोखी हवा किसे कहा है ?

उत्तर— कवि ने बसंती हवा को अनोखी हवा कहा है । 

(iii) यह हवा अनोखी क्यों है ?

उत्तर- कवि ने बसंती हवा को अनोखी इसलिए कहा है क्योंकि वह बहुत बड़ी पगली और रहने वाली है। वह बिना किसी चिंता के निडरतापूर्वक इधर-उधर मनचाहे ढंग से घूमती रहती

(iv) ‘मुसाफिर अजब हूँ’ से क्या अभिप्राय है ? 

उत्तर—बसंती हवा एक मुसाफिर के समान इधर-उधर भटकती रहती है। उसे किसी की कोई आशा या इच्छा नहीं है। उसका निश्चित घर भी नहीं है। उसका न कोई प्रिय न ही कोई शत्रु है। यह अकारण ही इधर-उधर घूमती रहती है।

(v) इस कविता में प्रकृति के किस रूप का वर्णन किया गया है ? 

उत्तर- इस कविता में कवि ने प्रकृति के उन्मुक्त रूप का वर्णन किया है। हवा विश्व जंगन में मुक्त रूप से विचरण करती रहती है।



class12.in

FAQs


प्रश्न 1. ऊपर दिए गए काव्यांश 12th परीक्षा के लिए काफी हैं?

उत्तर- हां, ऊपर दिए गए काव्यांश आपके 12th परीक्षा के लिए काफी हैं | इनमें से कई काव्यांश पीछे कुछ सालों में पूछे जा चुके हैं | तो इनका अवश्य अनुसरण करें |

प्रश्न 2. ‘ऊपर दिए गए काव्यांश पिछले कई 12th परीक्षा में आ चुके हैं या नहीं?

उत्तर- ऊपर दिए गए काव्यांश कक्षा बारहवीं के विषय HINDI के लिए काफी महत्वपूर्ण है और ये काफी बार पूछे जा चुके हैं |

प्रश्न 3.अपठित काव्यांश क्या होता है?

अपठित काव्यांश जो हमारी पुस्तक में मौजूद नहीं हैं। यह उस प्रश्न पत्र पर दिया जाता है जिसे हमने पढ़ा नहीं है और हमें उन प्रश्नों का उत्तर गद्यांश के संदर्भ में देना होता है। इसलिए, उन्हें अपठित काव्यांश कहा जाता है।

Leave a Comment