NCERT Class 12 Psychology Chapter 1 Notes In Hindi मनोवैज्ञानिक गुणों में विभिन्नताएँ Easy Pdf

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NCERT Class 12 Psychology Chapter 1 Notes In Hindi मनोवैज्ञानिक गुणों में विभिन्नताएँ

Class12th 
Chapter Nameमनोवैज्ञानिक गुणों में विभिन्नताएँ
Chapter numberChapter 1
Book NCERT
SubjectPsychology
Medium Hindi
Study MaterialsVery important question to answer
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पाठ-परिचय


मनोवैज्ञानिकों की दृष्टि में व्यक्तिगत भिन्नता का अर्थ है व्यक्तियों की विशिष्ट विशेषताएँ परस्पर व्यवहार तथा वार्तालाप में पाये जाने वाले अन्तर तथा विशेषकों ने पानी जाने वाली भिन्नता। व्यक्तिगत भिन्नताओं के कारण ही व्यक्ति को पहचान तथा प्रतिष्ठा उपलब्ध होती है। 

किसी भी व्यक्ति के गुण बहुविमात्मक या बहुपक्षीय होते हैं। मनोवैज्ञानिक व्यक्ति के गुणों में भिन्नता समझने के लिए बुद्धि, अभिक्षमता, अभिरुवि, साक्षात्कार, आत्मप्रतिवेदन आदि की मदद लेते हैं। सामान्यतः वे संज्ञानात्मक, सांवेगिक, सामाजिक आदि से जुड़े व्यवहार या निष्पादन को परख करते हैं।

 मानव जीवन में व्यक्तिगत भिन्नताएँ एक आवश्यक चनत्कार मानी जाती है। ये भिन्नताएँ तभी सुगंधित माने जाते हैं जब व्यक्ति उच्च कोटि की बुद्धि का प्रयोग करना जानता है। 

बुद्धि (Intelligence) का आशय पर्यावरण को समझने, सविवेक चिंतन करने तथा किसी चुनौती के सामने होने पर उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी ढंग से उपयोग करने की व्यापक क्षमता से है। व्यक्तियों की पारस्परिक भिन्नता जानने में बुद्धि एक मुख्य निर्मित है। किसी व्यक्ति को बुद्धि जानने से यह भी ज्ञात होता है कि वह अपने पर्यावरण के अनुरूप अपने व्यवहार को किस प्रकार अनुकूलित करता है। 

इस बुद्धि के भी तीन अलग-अलग घटक होते हैं जो अलग-अलग कार्य करते हैं। पहला घटक ज्ञानार्जन से संबंधित होता है जिसके द्वारा व्यक्ति अधिगम करता है तथा विभिन्न कार्यो को करने की विधि का ज्ञान प्राप्त करता है। दूसरा घटक अधिक या एक उच्च स्तरीय घटक होता है जिसके द्वारा व्यक्ति योजनाएँ बनाता है कि उसको क्या करना है और कैसे करता है।

1912 ई. में एक जर्मन मनोवैज्ञानिक विलियम स्टर्न (William Stem) ने बुद्धि लब्धि (intelligence quotient, IQ) का संप्रत्यय विकसित किया। किसी व्यक्ति की मानसिक आयु को उसकी कालानुक्रमिक आयु से भाग देने के बाद उसको 100 से गुणा करने से उसको बुद्धि लब्धि प्राप्त हो जाती है।

बुद्धि लब्धि = मानसिक आयु ÷ कालानुक्रमिक आयु x100

ऑक्सफोर्ड शब्दकोश ने बुद्धि को प्रत्यक्षण करने (perceiving), सीखने (learning), समझने (understanding) और जानने (knowing) की योग्यता के रूप में परिभाषित किया है। मानसिक मंदन के विभिन्न वर्ग इस प्रकार होते हैं-निम्न मंदन (mild retardation) (बुद्धि लब्धि 55 से 69 के बीच), सामान्य मंदन (moderate retardation) (बुद्धि लब्धि ) से 54 के बीच), तीव्र मंदन (severe retardation) (बुद्धि लब्धि 25 से 39 के बीच) तथा अतिगंभीर मंदन (profound retardation) (बुद्धि लब्धि 25 से कम)। निम्न मंदन वाले व्यक्तियों का विकास यद्यपि अपने समान आयु वाले व्यक्तियों की अपेक्षा धीमा होता है।

संस्कृति बौद्धिक विकास के लिए एक संदर्भ प्रदान करती है। पश्चिमी संस्कृति विश्लेषण, निष्पादन, गति और उपलब्धि प्रवणता जैसे कौशलों पर आधारित ‘तकनीकी बुद्धि’ को बढ़ावा देती है। 

इसके विपरीत, गैर-पश्चिमी संस्कृतियों आत्म-परावर्तन, सामाजिक और सांवेगिक सक्षमता को बुद्धिमत्तापूर्ण व्यवहार के लक्षणों के रूप में महत्त्व देती हैं। भारतीय संस्कृति ‘समाकलित बुद्धि’  को बढ़ावा देती है जो दूसरे लोगों तथा व्यापक सामाजिक संसार से व्यक्ति के संबंधों को महत्त्व देती है।

एक व्यक्ति की बुद्धि को उसे प्रतिक्रिया के काल के आधार पर भी जाना जा सकता है। बौद्धिक योग्यता में दो तरह की भिन्नतायें होती हैं—प्रतिभाशीलता एवं मानसिक मंदन। 

एक व्यक्ति जीवन के भौतिक एवं सौन्दर्यपरक दोनों ही पक्षों में प्रतिभाशाली हो सकता है। प्रतिभाशाली व्यक्तियों में सामाजिक एवं भावात्मक समस्यायें अधिक पायी जाती हैं। उचित प्रशिक्षण से सामान्य मंदन के व्यक्ति आत्म-सहाय का कौशल सीख सकते हैं। गंभीर मंदता वाले व्यक्ति की वाचिक

अभिव्यक्ति एक सामान्य मंदन के व्यक्ति से कम होती है। व्यक्ति के दैनिक जीवन के कार्य-कलापों को करने की अक्षमता के आधार पर मानसिक मंदता का निर्धारण किया जाता है। सारांशतः व्यक्तियों में उत्पन्न भिन्नताएँ पर्यावरण, रहन-सहन, व्यवहार, प्रतिष्ठा आदि से प्रभावित होती है जो अनुभव और ज्ञान पर आधारित होती है।

CLASS 12 NCERT SOLUTION IN ENGLISHCLASS12 NCERT SOLUTION IN HINDI
Historyइतिहास
Geography भूगोल
Political science राजनीति विज्ञान
English SubjectResult
Hindi SubjectHistory answer keys

पाठ्य पुस्तक के समीक्षात्मक प्रश्न और उनके उत्तर 


Q. 1. किस प्रकार मनोवैज्ञानिक बुद्धि का लक्षण वर्णन और उसे परिभाषित करते हैं ?

Ans. विचलनशीलता अथवा विभिन्नता एक प्राकृतिक तथ्य है। मनोवैज्ञानिकों के लिए व्यक्तिगत भिन्नता का अर्थ है व्यक्तियों की विशेषताओं तथा व्यवहार के फलस्वरूपों में पाई जाने वाली विशिष्टता या विचलनशीलता। मनोवैज्ञानिक गुण जटिल, बहुविभात्मक या बहुपक्षीय होते हैं। व्यक्ति के पूर्ण मूल्यांकन के लिए संज्ञानात्मक, सांवेगिक, सामाजिक आदि क्षेत्रों में किये जाने वाले व्यवहार का अध्ययन करना होता है।

बुद्धि का आशय पर्यावरण को समझने, सविवेक चिंतन करने तथा किसी चुनौती के सामने होने पर उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी ढंग से उपयोग करने की व्यापक क्षमता से है। बिने नामक मनोवैज्ञानिक ने बुद्धि को योग्यताओं का एक समुच्चय माना है। 

उसने बुद्धि के एक-कारक सिद्धान्त का प्रतिपादन किया। 1972 ई. में चार्ल्स स्पीयरमैन ने बुद्धि का द्विकारक सिद्धान्त को प्रस्तावित किया। स्पीयरमैन के सिद्धांत के बाद लुईस थर्स्टन (Leuis Thurstone ) ने प्राथमिक मानसिक योग्यताओं का सिद्धांत (theory of primary mental abilities) प्रस्तुत किया। इसमें कहा गया कि बुद्धि के अंतर्गत सात प्राथमिक मानसिक योग्यताएँ होती हैं जो एक दूसरे से अपेक्षाकृत आत्मतंत्र होकर कार्य करती हैं। 

Q.2. किस सीमा तक हमारी बुद्धि आनुवंशिकता (प्रकृति) और पर्यावरण (पोषण) का परिणाम है ? विवेचना कीजिए।

Ans. बुद्धि पर आनुवंशिकता और पर्यावरण का गहरा प्रभाव दिखाई देता है। पर्यावरणीय वंचन बुद्धि के विकास को घटा देता है जबकि प्रचुर एवं समृद्ध पोषण, अच्छी पारिवारिक पृष्ठभूमि तथा गुणवत्ता युक्त शिक्षा-दीक्षा बुद्धि में वृद्धि कर देता है। बच्चों की आयु बढ़ने पर पालन-पोषण का प्रभाव अधिक होता जाता है।

सामान्यतया सभी मनोवैज्ञानिकों की इस तथ्य पर सहमति है कि बुद्धि आनुवंशिकता (प्रकृति) तथा पर्यावरण (पोषण) की जटिल अंतः क्रिया का परिणाम होती है। 

आनुवंशिकता द्वारा किसी व्यक्ति की बुद्धि का विकास उस परिसीमन के अंतर्गत पर्यावरण में उपलभ्य अवलंबों और अवसरों द्वारा निर्धारित होता है। उदाहरणार्थं जुड़वाँ अथवा दत्तक बच्चों के व्यवहार में पर्यावरण के प्रभाव को समझा जा सकता है।

अलग-अलग पर्यावरण में पाले गए समरूप जुड़वाँ बच्चों की बुद्धि में 0.72 सहसंबंध है, साथ-साथ पाले गए भ्रातृ जुड़वाँ बच्चों की बुद्धि में लगभग 0.60 सहसंबंध, साथ-साथ पाले गए भाई-बहनों को बुद्धि में 0.50 सहसंबंध तथा अलग-अलग पाले गए सहोदरों की बुद्धि में 0.25 सहसंबंध पाया गया है। 

इस संबंध में अन्य प्रमाण दत्तक बच्चों के उन अध्ययन से प्राप्त हुए हैं जिनमें यह पाया गया है कि बच्चों की बुद्धि गोद लेने वाले माता-पिता की अपेक्षा जन्म देने वाले माता-पिता के अधिक समान होती है।

Q. 3. गार्डनर के द्वारा पहचान की गई बहुबुद्धि की संक्षेप में व्याख्या करें। 

Ans. प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक गार्डनर ने अलग-अलग व्यक्तियों के बुद्धि परीक्षण किया और तीन भिन्न-भिन्न स्थितियों का समर्थन किया- 

(क) बुद्धि कोई एक तत्त्व नहीं है बल्कि कई भिन्न-भिन्न प्रकार की बुद्धियों का अस्तित्व होता है।

(ख) प्रत्येक बुद्धि एक-दूसरे से आत्मतंत्र रहकर कार्य करती है। अर्थात् बुद्धि एकल योग्यता नहीं है।

(ग) विभिन्न प्रकार की बुद्धियों आपस में अंत किया करती है। अर्थात् किसी समस्या का समाधान खोजने के लिए भिन्न-भिन्न प्रकार की बुद्धियाँ आपस में अंतःक्रिया करते हुए साथ-साथ कार्य करती हैं। 

Q.4. किस प्रकार त्रिचापीय सिद्धांत बुद्धि को समझने में हमारी सहायता करता है? 

Ans. स्टर्नवर्ग का त्रिचापीय सिद्धांत बुद्धि को समझने के लिए सूचना प्रक्रमण उपागम के अंतर्गत आने वाले सिद्धांतों का एक प्रतिनिधि सिद्धांत है।

त्रिचापीय सिद्धान्त के तत्व

(i) पटकीय बुद्धि

(a) ज्ञानार्जन

(b) अधि घटक

(C) निष्पादन

(ii)आनुभविक बुद्धि

(iii) सादर्भिक बुद्धि

(a) घटकीय बुद्धि- इस श्रेणी की बुद्धि व्यवहारों में अन्तर्निहित संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं की वर्णन बुद्धिमतापूर्ण तरीका से करता है। इसके द्वारा व्यक्ति किसी समस्या का समाधान करने के लिए प्राप्त सूचनाओं का विश्लेषण करता है।

(b) आनुभविक बुद्धिबुद्धि से अनुभव और अनुभव से बुद्धि का प्राप्त होना आत्माभाविक है। पूर्व अर्जित ज्ञान के द्वारा समस्याओं का समाधान कर पाना इस बुद्धि की विशिष्टता है। 

(c) सांदर्भिक बुद्धि-संस्कृति एवं पर्यावरण के आधार पर व्यावसायिक समझ से काम निपटाने की युक्ति सांदर्भिक बुद्धि मानी जाती है। पर्यावरण के प्रति शीघ्र अनुकूलन इस बुद्धि की विशेषता है। अतः स्टर्नवर्ग का त्रिचापीय सिद्धांत पर्यावरण और पूर्व अर्जित ज्ञान के द्वारा प्राप्त होने वाली सफलता के आधार पर बुद्धि को समझने या परखने में हमारी सहायता करता है। 

Q.5. “प्रत्येक बौद्धिक क्रिया तीन तंत्रिकीय तंत्रों के आत्मतंत्र प्रकार्यों को सम्मिलित करती है।” पास मॉडल के संदर्भ में उक्त कथन की व्याख्या कीजिए।

Ans. काम किसी भी श्रेणी का हो, कर्त्ता सुपरिणाम चाहता है। प्रत्येक बौद्धिक क्रिया से अच्छे परिणाम की आशा तभी की जा सकती है जब उसे सोच-समझकर योजनाबद्ध तरीके से पूरा किया जाए। 

प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक जे. जे. दास, जैक नागालीये तथा किर्बी ने बौद्धिक क्रियाओं से सम्बन्धित एक मॉडल PASS (Planning, Attention, Simultaneous and Succes-sive) के नाम से प्रस्तावित किया जो बहुत ही सार्थक सिद्ध हुआ। 

PASS नामक मॉडल के अनुसार बौद्धिक क्रियाएँ अन्योन्याश्रित तीन तंत्रिकीय तंत्रों की क्रिया द्वारा सम्पादित होती है। इन तीन तंत्रों को मस्तिष्क की तीन प्रकार्यात्मक इकाई माना जाता है-

(i) भाव प्रबोधन अवधान 

(ii) कूट संकेतन या प्रक्रमण

(iii) योजना निर्माण

(i) भाव प्रबोधन अवधान – किसी घटना या समस्या का भाव उत्पन्न होते ही कोई व्यक्ति उस समस्या या घटना के प्रति सतर्क हो जाता है। भाव प्रबोधन की दशा किसी भी व्यवहार के मूल में होती है। किसी उदीपक से आकर्षित होने से कोई भी व्यक्ति सही सूचना की खोज में लग जाता है। गोद का बच्चा जोर-जोर से रोने लगे, तो माँ उसके रोने का कारण तथा चुप कराने का उपाय जानना चाहती है। बच्चे का रोना उसे कुछ सोचने या करने को प्रेरित करने लगा। अतः भाव प्रबोधन ध्यान को प्रासंगिक विषय-वस्तुओं को पढ़ने, दोहराने, सीखने, समझने के लिए प्रेरित करता है।

(ii) सहकालिक तथा अनुक्रमिक प्रक्रमण – विभिन्न संप्रत्ययों को समझने के लिए पारस्परिक संबंधों का प्रत्यक्षण करते हुए उनको एक सार्थक प्रतिरूप में समाकलित करते समय सहकालिक प्रक्रमण होता है।

उनके आनुक्रमिक प्रक्रमण उस समय होता है जब सूचनाओं की एक के बाद एक क्रम से याद खना होता है ताकि एक सूचना का पुनःस्मरण ही अपने बाद वाली सूचना का पुनःस्मरण करा देता है। गिनती सीखना, वर्णमाला सीखना, गुणन सारणियों को सीखना आदि आनुक्रमिक प्रक्रमण के उदाहरण है।

(iii) योजना योजना बुद्धि का एक आवश्यक अभिलक्षण है। योजना के कारण हम क्रियाओं के समस्त संभावित विकल्पों के बारे में सोचने लगते हैं, लक्ष्य की प्राप्ति हेतु योजना को कार्यान्वित करते हैं तथा कार्यान्वयन से उत्पन्न परिणामों की प्रभाविता का मूल्यांकन करते हैं।

आपको इसकी योजना बनाते हुए लक्ष्य निर्धारित करना होता है। उपर्युक्त तीनों पास (PASS) प्रक्रियाएँ औपचारिक रूप से (पढ़ने, लिखने तथा प्रयोग करने) अथवा पर्यावरण से अनौपचारिक रूप से संकलित ज्ञान के भंडार पर कार्य करती हैं। यह मॉडल बुद्धि के सूचना प्रक्रमण उपागम का प्रतिनिधित्व करता है। 

Q.6. क्या बुद्धि के संप्रत्ययीकरण में कुछ सांस्कृतिक भिन्नताएँ होती हैं ?

Ans. बुद्धि के संप्रत्ययीकरण में सांस्कृतिक मिन्नता का पाया जाना अति आत्मामाविक स्थिति है। व्यक्ति जैसी संस्कृति के साये में पलता बढ़ता है, उसका सीधा प्रभाव उसकी बुद्धि परे दृष्टिगोचर होता है।

संस्कृति और वृद्धि के सम्बन्ध में अनेक परीक्षणों से स्पष्ट हो चुका है कि संस्कृति रीति-रिवाजों, विश्वास, अभिवृत्तियों तथा कला और साहित्य में उपलब्धियों की एक सामूहिक व्यवस्था को कहते हैं। इस सांस्कृतिक प्रचालों के अनुरूप ही किसी व्यक्ति की बुद्धि के ढलने की संभावना होती है।

बुद्धि की एक प्रमुख विशेषता यह है कि यह पर्यावरण से अनुकूलित होने में व्यक्ति की सहायता करती है। व्यक्ति का सांस्कृतिक पर्यावरण बुद्धि के विकसित होने में एक संदर्भ प्रदान करता है। एक रूसी मनोवैज्ञानिक याइगॉट्स्की (Vygotsky) ने कहा कि संस्कृति एक ऐसा सामाजिक संदर्भ प्रदान करती है जिसमें व्यक्ति रहता है, विकसित होता है और अपने आस-पास

के जगत को समझता है। प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिकों ने भी बुद्धि पर संस्कृति के प्रभाव को आत्मीकारा है। स्टर्नवर्ग के सांदर्भिक अथवा व्यावहारिक बुद्धि का अर्थ यह है कि बुद्धि संस्कृति का उत्पाद होती है। 

वाइगॉट्स्की का भी विश्वास था कि व्यक्ति की तरह संस्कृति का भी अपना एक जीवन होता है, संस्कृति का भी विकास होता है और उसमें परिवर्तन होता है। इसी प्रक्रिया में संस्कृति ही यह निर्धारित करती है कि अंततः किसी व्यक्ति का बौद्धिक विकास किस प्रकार का होगा। 

वाइगॉट्स्की के अनुसार, कुछ प्रारंभिक मानसिक प्रक्रियाएँ (जैसे—रोना, माता की आवाज की ओर ध्यान देना, सूचना, चलना, दौड़ना आदि) सर्वव्यापी होती हैं, परंतु उच्च मानसिक प्रक्रियाएँ, जैसे- समस्या का समाधान करने तथा चिंतन करने आदि की शैलियाँ मुख्यतः संस्कृति का प्रतिफल होती हैं।


अति लघु उत्तरीय प्रश्न (VERY SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


Q. 1. मनोविज्ञान की दृष्टि में प्रत्येक व्यक्ति अद्वितीय क्यों माना जाता है ?

Ans. प्रत्येक व्यक्ति विभिन्न विशेषकों के विशिष्ट सम्मिश्रण को अभिव्यक्त करता है। 

Q. 2. व्यक्तिगत भिन्नता का क्या अर्थ दिया जा सकता है ? 

Ans. व्यक्तियों की विशेषताओं तथा व्यवहार के फलस्वरूपों में पाया जाने वाला वैशिष्ट और विचलनशीलता के रूप में भिन्नता व्यक्त किया जाता है।

Q. 3. स्थितिवादी मनुष्य के व्यवहार को किन कारकों का परिणाम मानते हैं ? 

Ans. स्थितिवादी परिप्रेक्ष्य मनुष्य के व्यवहार को बाह्य तथा आंतरिक कारकों की अंतःक्रिया का परिणाम मानता है।

Q.4. मनोवैज्ञानिक गुणों का मूल्यांकन करने की रीति के विभिन्न चरणों को क्रमानुसार लिखें।

Ans. गुणों का मूल्यांकन पूर्व कथन उपस्थित करना संज्ञानात्मक व्यवहार का अध्ययन → सांवेगिक प्रवृत्ति की परीक्षा व्यवहार का निरीक्षण अभिरुचि → अभिक्षमता → व्यक्तित्व की परख । 

Q.5. बुद्धि की परख प्राप्त होने से क्या ज्ञात होता है ? 

Ans. कोई व्यक्ति अपने पर्यावरण के अनुरूप अपने व्यवहार को किस प्रकार अनुकूलित कर सकता है।

Q. 6. ऑक्सफोर्ड शब्दकोश में बुद्धि को किस रूप में देखा गया है ?

Ans. व्यक्तियों की पारस्परिक भिन्नता जानने में बुद्धि एक मुख्य निर्मिति है। किसी व्यक्ति की बुद्धि जानने से यह भी ज्ञात होता है कि वह अपने पर्यावरण के अनुरूप अपने व्यवहार को किस प्रकार अनुकूलित करता है। 

Q. 7. सूचना प्रक्रमण उपागम में किसका वर्णन किया जाता है ?

Ans. बौद्धिक तर्कना तथा समस्या समाधान में व्यक्तियों द्वारा उपयोग की जानेवाली प्रक्रियाओं का। 

Q.8. बुद्धि लब्धि का मूल सूत्र क्या है?

Ans. बुद्धि लब्धि = मानसिक आयु ÷तैथिक आयु x 100 

Q. 9. बुद्धि के तीन पर्यायवाची शब्द लिखिए ।

Ans. क्षमता, तीक्ष्णता, चातुर्य विभेदन, प्रतिभा, अभिक्षमता आदि बुद्धि के पर्यायवाची शब्द हैं। 

Q. 10. भारतीय परिप्रेक्ष्य में बुद्धि को इंगित करने वाले कुछ शब्द बतलाइए । 

Ans. भारतीय परिप्रेक्ष्य में बुद्धि के द्योतक शब्द प्रतिभा, मेघा, चातुर्य, धी, प्रज्ञा आदि हैं। 

Q.11. स्टर्नवर्ग के अनुसार बुद्धि का फलस्वरूप कैसा है ?

Ans. स्टर्नबर्ग के अनुसार, वातावरण के संदर्भ में अनुकूलन स्थापित करने, वातावरण को अनुसार ढालने तथा चयन करने की क्षमता को बुद्धि कहते हैं। 

Q. 12. स्टर्नवर्ग के अनुसार बुद्धि के कौन-कौन से उप-सिद्धांत हैं?

Ans. स्टर्नबर्ग के अनुसार बुद्धि के तीन उप-सिद्धांत हैं—

(क) कंपोनेन्टल, (ख) अनुभवपरक एवं (ग) प्रासंगिक (संदर्भात्मक) उप-सिद्धांत। 

Q. 13. मानसिक परीक्षण शब्द को प्रस्तुत करने का क्षेय किसे है ? 

Ans. जे. एम. केटेल को ।

Q.14. बुद्धि परीक्षणों के लिए सर्वप्रथम प्रयास किसने किया ?

Ans. अल्फ्रेड बिने ने।

Q. 15. बुद्धि किसे कहते हैं ?

Ans. व्यक्ति की उद्देश्यपूर्ण क्रिया करने, तार्किक चिन्तन करने तथा पर्यावरण के सा प्रभावशाली ढंग से समायोजन करने की व्यापक क्षमता को बुद्धि कहते हैं।

Q. 16. अल्फ्रेड बिने के अनुसार मानसिक प्रक्रिया के कौन-कौन से प्रमुख तत्त्व हैं ?

Ans. अल्फ्रेड दिने के अनुसार स्मृति, कल्पना बोध तथा निर्णय बुद्धि के केन्द्रीय तत्त्व है 


लघु उत्तरीय प्रश्न | SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS


Q. 1. अनुभवपरक बुद्धि से आप क्या समझते हैं ? 

Ans. अनुभवपरक बुद्धि मनुष्य के आन्तरिक मानसिक एवं बाहरी मानसिक जगत के बीच संबंधों पर आधारित सिद्धांत है। यह पक्ष बुद्धि का एक व्यक्ति के अनुभव पर पड़ने वाले प्रमुख तथा मनुष्य एवं वातावरण के बीच अंतःक्रिया का बुद्धि पर पड़ने वाले प्रभाव से संबंधित है। यह दृष्टिकोण बुद्धि की अवधारणा में मौलिकता का समावेश करता है। 

ऐसा संभव है कि मौलिकता अथवा अन्य कोई आधार या सृजनात्मक रूप से बुद्धिमान व्यक्ति बुद्धि परीक्षणों पर विशेष रूप से अच्छा निष्पादन नहीं कर सके, परन्तु वह विभिन्न अनुभवों को मौलिक तरीकों से जोड़ पाने में सक्षम हो सकता है। 

अनुभवपरक बुद्धि का दूसरा पक्ष है आत्मतः चालक की योग्यता। जैसे- पढ़ना आत्मतः चालक का एक उदाहरण है जो अधिकांशतः बिना चेतन-विचार के किया जाता है। संगीत इस प्रकार के क्रियाकलाप का एक दूसरा उदाहरण है।

Q. 2. सांवेगिक बुद्धि को स्पष्ट करें। 

Ans. सैलावे एवं मेयर ने 1990 ई. में सर्वप्रथम सांवेगिक बुद्धि को औपचारिक रूप से परिभाषित किया जिसमें संज्ञान एवं भाव के जोड़ने पर बल दिया गया है। 

सांवेगिक बुद्धि को सामान्यतया एक प्रकार की सामाजिक बुद्धि के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसमें स्वयं एवं दूसरों की अनुभूतियों एवं भावों को देखने-समझने, उनमें विभेदन करने एवं अपनी सोच तथा क्रिया को दिशा प्रदान करने के लिए इन सूचनाओं को उपयोग में लाने की योग्यता समाहित है। 

संक्षिप्त में, इसमें निम्नलिखित चार आयाम सम्मिलित हैं- (i) मनोभावों का प्रत्यक्षण, मूल्यांकन एवं अभिव्यक्ति। (ii) संज्ञानात्मक क्रियाओं को मनोभावों द्वारा प्रोत्साहित करना। (ii) भावात्मक सूचनाओं को समझना तथा विश्लेषण करना तथा भावात्मक ज्ञान का उपयोग। (iv) मनोभावों का निर्णयन। 

Q.3. व्यावहारिक बुद्धि से आप क्या समझते हैं ? 

Ans. व्यावहारिक बुद्धि का आशय उस तरह की सोच से है जिसका उपयोग लोग दैनिक समस्याओं का समाधान करने के लिए करते हैं, चाहे वह घर हो, एक सामाजिक परिवेश हो या काम करने का स्थान हो। इसे कार्यरत मानस या व्यापक पैमाने पर की जाने वाली दैनिक जीवन की उद्देश्यपूर्ण क्रिया में निहित चिंतन के रूप में देखा जाता है। 

यह दैनिक जीवन के सामान्य गतिविधियों से संबंधित लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक है। व्यावसायिक परिवेश में यह ऐसी जानकारियों को सीखने और बाद में उनको उपयोग में लाने से संबंधित है जो कर्मचारियों को कभी भी सिखायी पढ़ायी नहीं जाती और न ही कभी उन्हें बोलकर बताया जाता है। 

परन्तु सफलता के लिए ऐसी जानकारियाँ जरूरी होती हैं। अनकहा ज्ञान, प्रविधि विषयक ज्ञान कही जाने वाली यह बुद्धि कर्मचारियों को अपने व्यवसाय को विकसित तथा अनकही अपेक्षाओं को पूरा करने में सक्षम बनाती है। 

अनकहे ज्ञान की निम्नलिखित तीन विशेषताएँ हैं— 

(i) अनकहा ज्ञान के फलस्वरूप ज्ञान विधिपरक होता है एवं क्रिया से घनिष्ठ रूप से संबंधित होता है। यह किसी विषय के बारे में जानने के बदले कोई काम करने की जानकारी से सम्बन्धित है। 

(ii) अनकहा ज्ञान अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मददगार होता है। 

(iii) अनकहा ज्ञान दूसरों से प्रत्यक्ष मदद के बिना स्वयं के प्रयासों से अर्जित किया जाता है।

Q.6. बुद्धि और संस्कृति के संबंधों का उल्लेख करें ।

Ans. बौद्धिक प्रक्रियाओं तथा कौशलों का निर्धारण उस सामाजिक सांस्कृतिक परिवेश से होता है जिसमें एक व्यक्ति पलता-बढ़ता है। 

चूँकि अपने सामाजिक सांस्कृतिक वातावरण के साथ अनुकूलन बुद्धि का एक प्रतीक माना जाता है अतः यह मानना युक्तिसंगत है कि विभिन्न संस्कृतियों में बुद्धि अलग-अलग व्यवहारों के द्वारा परिभाषित होती है, क्योंकि किसी समाज विशेष में किसी व्यवहार को लाभप्रद, अर्थपूर्ण तथा मूल्यवान माना जाता है; इसमें फर्क देखने को मिलता है। 

जैसे कुछ जगहों पर वकील बनने के लिए आवश्यक कौशलों की तुलना में अच्छा किसान बनने के लिए आवश्यक कौशलों का अधिक महत्त्व होता है। अतः बुद्धि को सांस्कृतिक शैली के रूप में देखा जाता है। 

बुद्धि किन तत्त्वों से मिलकर बनती है, इस विषय पर विभिन्न सांस्कृतिक समूहों में अंतर पाया जाता है। ऐसी अवधारणा लोगों के अनुभवों पर निर्भर करती है जो कि समूह के बहुसंख्यक व्यक्तियों में सम्पन्न रूप से पायी जाती है। लिखित या मौखिक रूप से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी

में पहुँचाई जाती है और हमारी चेतन इच्छा के बिना भी हममें से प्रत्येक पर थोप दी जाती है। 

Q.7. बुद्धिलब्धि से आप क्या समझते हैं ?

Ans. बुद्धिलब्धि स्टर्न (Stern) नामक मनोवैज्ञानिक द्वारा प्रतिपादित एक महत्त्वपूर्ण संप्रत्यय है जिसके द्वारा व्यक्ति की बौद्धिक क्षमताओं (intellectual capacities) की अभिव्यक्ति होती है। बुद्धिलब्धि मानसिक आयु तथा तैथिक आयु (chronological age) का ऐसा अनुपात (ratio) है जो 100 से गुणा कर प्राप्त किया जाता है। अतः इसे ज्ञात करने का सूत्र इस प्रकार है-

बुद्धिलब्धि- मानसिक आयु÷  तैथिक आयु x 100

यदि कोई व्यक्ति किसी आयु विशेष के लिए निर्धारित कार्य को कर देता है या समस्या का समाधान कर देता है तो वही आयु उसकी मानसिक आयु हो जाती है। जब मानसिक आयु तथा तैथिक आयु लगभग बराबर होती हैं तब व्यक्ति की बुद्धि लब्धि 100 के आसपास होती है और उसे औसत बुद्धि का व्यक्ति समझा जाता है। यदि मानसिक आयु तैथिक आयु से बहुत अधिक लचीली होती है तो व्यक्ति को तीव्र बुद्धि का तथा जब बहुत कम होती है तब उसे निम्न बुद्धि का समझा जाता है।

Q.8. मानसिक आयु से आप क्या समझते हैं ? 

Ans. प्रत्येक आयु के लिए कुछ निर्धारित कार्य होते हैं या कुछ समस्याएँ होती हैं। जो व्यक्ति जिस आयु के लिए तैयार की गई समस्याओं का समाधान कर देता है, उसकी वही मानसिक आयु हो जाती है। 

जैसे—मान लिया जाए कि एक पाँच साल का बच्चा सात साल के बच्चे के लिए तैयार की गई समस्याओं का समाधान सही-सही ढंग से कर देता है, तो उसकी मानसिक आयु सात साल की होगी हालाँकि उसकी तैथिक आयु (chronological age) पाँच साल की है। 

उसी तरह यदि कोई बच्चा आठ साल का है, परंतु वह पाँच साल के लिए तैयार की गई समस्याओं का ही समाधान कर पाता है और उससे ऊपर की आयु के लिए बनी समस्याओं का नहीं तो उस बच्चे की मानसिक आयु पाँच साल की होगी हालाँकि उसकी तैथिक आयु आठ साल की है। 

Q.9. शाब्दिक बुद्धि परीक्षण क्या है ?

Ans. शाब्दिक बुद्धिपरीक्षण वैसे बुद्धि-परीक्षण को कहा जाता है जिसके एकांश ( items) की अभिव्यक्ति भाषा (language) के रूप में होती है। दूसरे शब्दों में, इसके एकांश शब्दों या वाक्यों स के रूप में लिखे होते हैं। इसके निर्देश (instructions) भी लिखित होते हैं। 

परीक्षार्थी (testee) इन एकांशों को पढ़-पढ़कर जवाब देता है तथा दिए गए उत्तरों के आधार पर उसकी बुद्धि की जाँच की व जाती है। बिने-साइमन बुद्धि-परीक्षण एक प्रमुख शाब्दिक बुद्धि-परीक्षण है। भाषा के कारण आत्मभावतः ऐसे परीक्षणों का उपयोग केवल पढ़े-लिखे व्यक्तियों की बुद्धि मापने में ही किया जाता है। 

Q. 10. अशाब्दिक बुद्धि-परीक्षण से आप क्या समझते हैं?

Ans. अशाब्दिक बुद्धि-परीक्षण से तात्पर्य ऐसे बुद्धि परीक्षण से होता है जिसके एकांश में भाषा का प्रयोग नहीं होता है, बल्कि समस्या को चित्र (figure) आदि के माध्यम से उपस्थित किया जाता है। ऐसे परीक्षण के मानक निर्देश (standard instruction) में भाषा का प्रयोग होता है; 

क्योंकि वह लिखित होता है। रेभेन प्रोग्रेसिव मैट्रिसेज (Raven’s Progressive Matrices), अशाब्दिक बुद्धि-परीक्षण का एक अच्छा उदाहरण है। चूंकि इसके एकांशों में भाषा का प्रयोग नहीं होता है, अतः इसके द्वारा कम पढ़े-लिखे व्यक्तियों या अनपढ़ की भी बुद्धि की माप आसानी से कर ली जाती है।


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (LONG ANSWER TYPE QUESTIONS)


Q. 1. बुद्धि की परिभाषा दें। बुद्धि की माप कैसे की जाती है ? Or, बुद्धि क्या है ? विभिन्न बुद्धि-परीक्षणों का वर्णन कीजिए।

Ans. बुद्धि की परिभाषा — बुद्धि की परिभाषा के बारे में मनोवैज्ञानिकों में एक मत नहीं है। कुछ मनोवैज्ञानिकों ने बुद्धि को वातावरण के साथ समायोजन करने की क्षमता कहा है, कुछ मनोवैज्ञानिकों ने इसे सीखने की क्षमता कहा तो कुछ मनोवैज्ञानिकों ने अमूर्त चिंतन (abstract reasoning) करने की क्षमता कहा है। 

लेकिन, बुद्धि को परिभाषित करने से इस तरह के दृष्टिकोण को अधिक मान्यता नहीं मिल पाई, क्योंकि ये तीनों दृष्टिकोण अधूरे एवं आंशिक थे। इस दोष को दूर करने के विचार से वैश्लर (Wechsler) ने बुद्धि की एक ऐसी परिभाषा दी है। जिसमें उपर्युक्त तीनों दृष्टिकोणों का समावेश भी हो जाता है तथा बुद्धि की एक विस्तृत (comprehensive) व्याख्या भी हो जाती है। 

वैश्लर की परिभाषा इस प्रकार है-“व्यक्ति द्वारा (केसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए कार्य करने, तर्कपूर्ण चिंतन करने तथा अपने को वातावरण में उचित एवं प्रभावपूर्ण ढंग से समायोजित करने की सम्पूर्ण या सार्वभौम क्षमता ही बुद्धि है।” Intelligence is the aggregate or global capacity of the individual to act pur- posefully, to think rationally and to deal effectively with his environment.)

(i) बुद्धि व्यक्ति की सार्वभौम क्षमता है (Intelligence is the global capacity of the individual) बुद्धि व्यक्ति की वह क्षमता है जिसके माध्यम से तरह-तरह की मानसिक प्रक्रियाएँ की जाती हैं। इसलिए इसे कोई एक क्षमता न मानकर सार्वभीम क्षमता अर्थात् सामान्य मानसिक क्षमता माना गया है। 

(ii) बुद्धि द्वारा उद्देश्यपूर्ण क्रियाएँ की जाती हैं (Intelligence involves purposeful actions) — बुद्धि व्यक्ति को उद्देश्यपूर्ण क्रियाएँ करने में मदद करती है। शायद यही कारण है कि बुद्धिमान व्यक्ति अधिकतर उद्देश्यपूर्ण क्रियाएँ करता है, परंतु कम बुद्धिवाले व्यक्ति की अधिकतर क्रियाएँ निरर्थक एवं उद्देश्यहीन होती हैं। 

(iii) बुद्धि द्वारा तर्कपूर्ण चिंतन होता है (Intelligence involves logical thinking)- बुद्धिमान व्यक्ति अधिक चिंतनशील होता है। वह किसी समस्या का तर्कपूर्ण चिंतन करता है, अर्थात् उसका समाधान तर्क-वितर्क करके करता है। अतः, उसकी क्रियाएँ युक्तिसंगत होती हैं। 

(iv) बुद्धि प्रभावपूर्ण ढंग से समायोजन में मदद करती है (Intelligence helps in effective adjustment ) — बुद्धि व्यक्ति को विभिन्न तरह के वातावरण में उत्तम समायोजन स्थापित करने में मदद करती है। बुद्धिमान व्यक्ति वातावरण में प्रभावपूर्ण ढंग से समायोजन कर लेते हैं। 

Q.2. बुद्धि परीक्षण की प्रमुख उपयोगिताओं का वर्णन करें। 

Ans. बुद्धि परीक्षण द्वारा व्यक्ति की बुद्धि की माप की जाती है। आधुनिक युग में बुद्धि परीक्षण का प्रयोग कई क्षेत्रों में होता है। फलस्वरूप, इसकी उपयोगिता काफी अधिक ही कुछ प्रमुख उपयोगिताओं का वर्णन निम्नांकित है- 

(i) शिक्षा में उपयोग (Use in education)- बुद्धि-परीक्षण की उपयोगिता स्कूल में काफी है। ऐस अधिक है। इस परीक्षण का उपयोग कर शिक्षक यह पता लगा लेते हैं कि वर्ग में कितने मंद बुद्धि के छात्र हैं, कितने तेज बुद्धि के छात्र हैं, तथा कितने औसत बुद्धि ( average intelligence) के छात्र हैं इस तरह की जानकारी से शिक्षक कम बुद्धि या मंद बुद्धि के छात्रों को अलग से शिक्षा दे सकने तथा उनके लिए अलग पाठ्यक्रम ( syllabus) तैयार कर सकने में समर्थ हो पाते हैं। 

(ii) बाल-निर्देशन में उपयोग (Uses in child guidance) बुद्धि परीक्षण का उपयोग बाल निर्देशन में भी काफी होता है। बुद्धि-परीक्षण द्वारा बच्चों की बुद्धि माप ली जाती है और तदनुरूप उन्हें मार्ग निर्देशित किया जाता है। अक्सर यह देखा गया है कि कम बुद्धि के बालक अपनी नासमझी के कारण समाजविरोधी कार्य कर बैठते हैं और बदनाम होकर पथभ्रष्ट हो जाते हैं। 

(iii) मानसिक दुर्बलता की पहचान करने में उपयोग (Use in recognition of mental deficiency) मानसिक रूप से दुर्बल व्यक्ति की पहचान एक चुनौतीपूर्ण कार्य है; क्योंकि मानसिक रूप से दुर्बल बच्चे या व्यक्ति समाज या राष्ट्र पर बोझ होते हैं। 

(iv) व्यावसायिक निर्देशन तथा व्यवसायिक चयन में उपयोग (Use in vocational guidance and vocational selection)—–बुद्धि-परीक्षण द्वारा बुद्धि के अनुकूल व्यवसाय में जाने का निर्देशन देने को व्यावसायिक निर्देशन कहा जाता है। 

Q.3. बुद्धि के शाब्दिक परीक्षणों के गुणों तथा सीमाओं का वर्णन कीजिए ।

Ans. बुद्धि एक सामान्य मानसिक क्षमता (general mental ability) होती है जिसके माध्यम से व्यक्ति कोई उद्देश्यपूर्ण कार्य करता है, तर्कपूर्ण चिंतन करता है तथा वातावरण के साथ उचित समायोजन करता है। 

बुद्धि को मापने के लिए मनोविज्ञानियों ने कई तरह के परीक्षणों का निर्माण किया है जिनमें शाब्दिक बुद्धि परीक्षण (verbal intelligence test) एक प्रधान परीक्षण है। शाब्दिक बुद्धि परीक्षण से तात्पर्य वैसे परीक्षण से होता है जिनके निर्देश (instruction) तथा एकांश ( items) को लिखित भाषा में व्यक्त किया जाता है। 

दूसरे शब्दों में, शाब्दिक बुद्धि-परीक्षण वैसा परीक्षण होता है जिसके एकांश शब्दों या वाक्यों में लिखे होते हैं। इतना ही नहीं, ऐसे परीक्षण को मानक निर्देश (standard instruction) भी शब्दों या वाक्यों में लिखे होते हैं। शाब्दिक बुद्धि-

परीक्षण दो प्रकार के होते हैं-

(क) वैयक्तिक शाब्दिक बुद्धि-परीक्षण (individual verbal intelligence test) 

(ख) सामूहिक शाब्दिक बुद्धि-परीक्षण (group verbal intelligence test) 

इन दोनों तरह के शाब्दिक बुद्धि-परीक्षणों के फलस्वरूप तथा उनके गुण एवं दोषों का वर्णन इस प्रकार है— 

(क) वैयक्तिक शाब्दिक बुद्धि-परीक्षण (Individual verbal intelligence tests)— वैयक्तिक शाब्दिक बुद्धि-परीक्षण वैसे परीक्षण को कहा जाता है जिसका क्रियान्वयन (adminis- tration) एक समय में एक ही व्यक्ति पर किया जा सकता है। सबसे पहला वैयक्तिक शाब्दिक बुद्धि-परीक्षण बिने-साइमन बुद्धि-परीक्षण ( Binet-Simon intelligence test) है जिसका निर्माण विने (Binet) जो एक मनोवैज्ञानिक थे तथा साइमन (Simon) जो एक मेडिकल डॉक्टर थे, ने मिलकर फ्रेंच भाषा में 1905 में किया था। 

(ख) सामूहिक शाब्दिक बुद्धि-परीक्षण (Group verbal intelligence test)—– सामूहिक शाब्दिक परीक्षण से तात्पर्य वैसे बुद्धि-परीक्षण होता है जिनके मानक निर्देशन तथा एकांश लिखित भाषा में व्यक्त होते हैं तथा जिनका क्रियान्वयन एक समय में एक से अधिक व्यक्तियों पर किया जा सकता है।  

Q.4. बुद्धि परीक्षण के विभिन्न प्रकारों का वर्णन करें। 

Ans, मनोवैज्ञानिकों ने बहुत तरह के बुद्धि परीक्षणों का निर्माण किया है। इन बुद्धि परीक्षणों का मुख्य उद्देश्य बुद्धि का मापन करना तथा उसके फलस्वरूप पर प्रकाश डालना है। यदि इन सभी  परीक्षणों का एक सामान्य वर्गीकरण किया जाए तो हम इस निष्कर्ष पर पहुँचेंगे कि उन्हें निम्नांकित चार प्रमुख श्रेणियों में बाँटा जा सकता है- 

(a) शाब्दिक बुद्धि परीक्षण, 

(b) अशाब्दिक बुद्धि परीक्षण, 

(c) क्रियात्मक बुद्धि परीक्षण और

(d) अभाषायी बुद्धि परीक्षण ।

इन चारों के फलस्वरूप तथा उनके गुण-दोषों का वर्णन निम्नांकित है—

(a) शाब्दिक बुद्धि परीक्षण-शाब्दिक बुद्धि परीक्षण वैसे बुद्धि परीक्षण को कहा जाता है जिसके एकांश ( items) शब्दों या वाक्यों के रूप में लिखित होते हैं। परीक्षार्थी उन्हें पढ़कर समझता है तथा उत्तर देता जाता है। दिए गए उत्तरों के आधार पर उसकी बुद्धि की माप की जाती है। 

शाब्दिक बुद्धि परीक्षण के दो प्रकार होते हैं—

(i) वैयक्तिक शाब्दिक बुद्धि परीक्षण (Individual verbal intelligence test)- जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, वैयक्तिक शाब्दिक बुद्धि परीक्षण वैसे परीक्षण को कहा जाता है। जिसका क्रियान्वयन एक समय में एक ही पढ़े-लिखे व्यक्ति पर किया जा सकता है। इसके एकांश शाब्दिक होते हैं। 

(ii) सामूहिक शाब्दिक बुद्धि परीक्षण (Group verbal intelligence test)— सामूहिक शाब्दिक बुद्धि परीक्षण वैसे परीक्षण को कहा जाता है जिसके एकांश (items) शाब्दिक (verbal) होते हैं जिन्हें एक समय में एक से अधिक व्यक्तियों पर क्रियान्वयन किया जा सकता है। 

Q.5. बुद्धिलब्धि क्या है ? इसकी माप कैसे की जाती है ? विवेचना करें।

Ans. बेल्स (Wells, 1936) के अनुसार, “बुद्धि का तात्पर्य नई परिस्थितियों में बेहतर क्रिया हेतु अपने व्यवहार प्रतिरूप के पुनर्संगठन से है।” स्टर्न (Stern, 1914) के अनुसार, “नई आवश्यकताओं में चेतन रूप से अपने चिंतन को अभियोजित करने की सामान्य योग्यता ही बुद्धि है।” पिण्टर (Pinter, 1914) ने भी अभियोजन की योग्यता को ही बुद्धि माना है। 

उनके अनुसार, “जीवन में नई परिस्थितयों में अपने-आपको समुचित रूप से अभियोजित करने की योग्यता को बुद्धि कहते हैं।” मन (Munn, 1955) ने भी इस विचार का समर्थन किया है और कहा है कि, गतिशील अभियोजन की क्षमता ही चुद्धि है।” 

कॉलविन (Colvin) ने भी इस बात पर बल दिया है कि बुद्धि का तात्पर्य अभियोजन से है। उनके शब्दों में, “बुद्धि व्यक्ति की नई परिस्थितियों में अभियोजित होने में सहायता करती है।”

बुद्धि का मापन (Measurement of intelligence)– बुद्धि मापन गाल्टन ( Galton )

के वैयक्तिक भिन्नता सिद्धांत (Theory of individual difference) के परिवेश में शुरू हुआ।

गाल्टन, एविंग्हॉस (Ebbinghaus) आदि ने बुद्धि को मापने का प्रयास किया। परंतु इस दिशा में वैज्ञानिक ढंग से बिने (Binet, 1905) का प्रयास सफल हुआ। 

उन्होंने साइमन (Simon) की सहायता से फ्रांस के बच्चों की बुद्धि की जाँच करने के लिए एक बुद्धि परीक्षण (intelligence) test) का निर्माण किया जिसे बिने-साइमन परीक्षण (Binet Simon Test) कहा गया है। 

इस परीक्षण का निर्माण 3 से 15 साल के बच्चों की बुद्धि मापने के लिए किया जाता है। इसमें 30 समस्याएँ थीं, जिन्हें अधिक सरलता से अधिक कठिन के क्रम में सजाया गया था। इसमें अनेक प्रकार की समस्या थी। कुछ समस्याओं में वाक्यों को दुहराना था और कुछ में वाक्यों के अर्थ को बताना था। 

इसी तरह समस्याओं को खाली जगहों में भरना और कुछ में अमूर्त चिंतन को जाँचना था। इस प्रकार, विने का परीक्षण वास्तव में शाब्दिक परीक्षण था। यह भी ध्यान रखना चाहिए कि बिने ने सामान्य बुद्धि की अभिधारणा के आधार पर परीक्षण या मापक का निर्माण किया। बिने-साइमन परीक्षण में कमी महसूस की गयी। 

Q. 6. प्रतिभाशालिता क्या है ? प्रतिभाशाली बच्चों की पहचान कैसे करेंगे ? 

Ans. अंग्रेजी के ‘Gifted’ शब्द का हिन्दी अनुवाद प्रतिभाशाली शब्द है जिसका तात्पर्य है एक ऐसा व्यक्ति जो उपहार या उपहारों (gifts) विशेष रूप से असाधारण योग्यता या बुद्धि से सम्पन्न है। प्रतिभाशाली व्यक्तियों पर अध्ययन का प्रारंभ लेविस टरमन के 1925 के कार्य से हुआ जिसमें उन्होंने उच्च योग्यता वाले व्यक्तियों की पहचान करने के लिए बुद्धि-परीक्षण का निर्माण किया। 

अतः प्रतिभाशालिता को उच्च सामान्य बुद्धि कहा गया जो बुद्धि-परीक्षणों पर उच्च प्राप्तांक से व्यक्त होती है। यद्यपि हाल के वर्षों में प्रतिभाशालिता को नैतिक, दैहिक, भावनात्मक, सामाजिक, बौद्धिक मानवजाति के सौन्दर्यपूर्ण जीवन सहित किसी भी तरह के सार्थक प्रयास की धारा में श्रेष्ठ योग्यता के रूप में परिभाषित किया जाता है।

सभी सांस्कृतिक समूहों तथा आर्थिक स्तरों के बच्चों एवं युवाओं में मानवीय प्रयास के सभी क्षेत्रों में उत्कृष्ट योग्यता पायी जाती है। इस परिभाषा से निम्नलिखित तथ्य स्पष्ट होते हैं- 

(i) प्रतिभाशाली व्यक्ति, उसी सामाजिक- सांस्कृतिक परिवेश में रहने वाले साथी समूह की तुलना में निष्पादन के उच्च स्तर का प्रदर्शन करते हैं। 

(ii) प्रतिभाशालिता किसी बुद्धि-परीक्षण पर निष्पादन तक ही सीमित नहीं होती अपितु यह सामान्य योग्यताओं, विशिष्ट क्षमताओं, आत्म-संप्रत्यय एवं अभिप्रेरणा का योग है जो प्रतिभाशाली व्यक्ति को सीखने, उपलब्धि प्राप्त करने एवं उत्कृष्टता के लिए प्रयास करने के लिए प्रवृत्त करती है।

(iii) यह विद्यालय से संबंधित गतिविधियों तक सीमित नहीं है वरन् खेलकूद एवं नेतृत्व जैसे क्षेत्र भी इसमें सम्मिलित हैं।

(iv) केवल संज्ञानात्मक योग्यताओं से सम्पन्न होना ही प्रतिभाशाली होना है। कई योजनाओं के फलस्वरूप, उसकी दिशा एवं गति अंशतः संज्ञानात्मक कारकों पर निर्भर है, परन्तु यह व्यक्ति एवं अभिप्रेरण से प्रबल रूप से प्रभावित होती है तथा इसमें नैतिक आयाम सहित प्रबल सामाजिक तत्त्व एवं एक महत्त्वपूर्ण संप्रेषण का पक्ष भी निहित है।


FAQs

Q. बुद्धि के द्विकारक सिद्धान्त का प्रतिपादन किसने किया ?

Ans. चार्ल्स स्पियरमैन ने

Q बुद्धि के त्रितत्वीय सिद्धान्त का प्रतिपादन किसने किया ? 

Ans. बुद्धि के त्रितत्वीय सिद्धान्त का प्रतिपादन राबर्ट जे. स्टर्नवर्ग ने किया।

Q. अनुभवपरक सिद्धान्त क्या है ? 

Ans. अनुभवपरक सिद्धान्त व्यक्ति के आन्तरिक मानसिक जगत एवं बाह्य जगत संबंधों पर केन्द्रित सिद्धान्त है।

Q.संस्कृति और बुद्धि में कैसा संबंध है ?

Ans.संस्कृति और बुद्धि में घनिष्ठ संबंध होता है। यही कारण है कि विभिन्न संस्कृतिय में बुद्धि की अवधारणा अलग-अलग होती है।


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