VVI Class 12 Sociology Chapter 2 Notes In Hindi भारतीय समाज की जनसांख्यिकीय संरचना

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VVI Class 12 Sociology Chapter 2 Notes In Hindi भारतीय समाज की जनसांख्यिकीय संरचना


Class12th 
Chapter Nameभारतीय समाज की जनसांख्यिकीय संरचना
Chapter numberChapter 2
Book NCERT
SubjectSociology
Medium Hindi
Study MaterialsNotes & Questions answer
Download PDFSociology class 12 chapter 2 pdf

भारतीय समाज की जनसांख्यिकीय संरचना


भारतीय समाज एक प्राचीन समाज है। इस समाज की जनसंख्या पहले तो कम थी, लेकिन समय की रफ्तार के साथ-साथ इसकी जनसंख्या में भी वृद्धि हुई है। भारतीय समाज की जनसंख्या की संरचना दिनों-दिन विकराल रूप लेती जा रही है, जो समाज के लिए एक वृहत समस्या बन चुकी है। 

भारतीय समाज की जनसंख्या की जानकारी जनसांख्यिकीय विधि द्वारा की जाती है। इस विधि में सांख्यिकीय अनुसंधान के द्वारा प्रतिदर्श वर्ष पर जनसंख्या की गणना की जाती है। इस सांख्यिकीय गणना के आधार पर जनसंख्या में होनेवाली वृद्धि का अनुमान लगाया जाता है। 

साथ ही जनसंख्या वृद्धि दर, जन्म दर और मृत्यु दर का आकलन किया जाता है। इसके माध्यम से देश में कितनी जनसंख्या है, इसका आँकड़ा प्रस्तुत किया जाता है। भारत में सबसे पहले 1901 में जनसंख्या की गणना की गयी थी। 

VVI Class 12 Sociology Chapter 2 Notes In Hindi भारतीय समाज की जनसांख्यिकीय संरचना
भारतीय समाज की जनसांख्यिकीय संरचना

इसके बाद प्रतिदर्श वर्ष पर जनसंख्या में होनेवाली वृद्धि का आकलन किया जाता रहा है। अभी 2001 में जनसंख्या का आकलन किया गया था जिसके अनुसार भारत में आबादी बढ़कर एक अरब से अधिक हो चुकी है। 

चीन के बाद जनसंख्या के दृष्टिकोण से विश्व में भारत का द्वितीय स्थान है। बढ़ती हुई जनसंख्या विस्फोटक बन चुकी है, जो हमारे देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक विकट समस्या का रूप ले चुकी है। इस समस्या का समाधान करने के लिए सरकार ने परिवार नियोजन और परिवार कल्याण कार्यक्रम लागू किया है।

जनसांख्यिकी जनसंख्या का सुव्यवस्थित अध्ययन है। इसका अर्थ है – लोगों का वर्णन । इस विषय के अंतर्गत जनसंख्या से संबंधित अनेक प्रवृत्तियों तथा प्रक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है। जनसंख्या कई प्रकार की होती है, जैसे-आकारिक जनसांख्यिकी जिसमें अधिकतर जनसंख्या की मात्रा का अध्ययन किया जाता है। 

दूसरा प्रकार सामाजिक जनसांख्यिकी है जिसमें आबादियों के सामाजिक, आर्थिक या राजनीतिक पक्षों पर विचार किया जाता है। जनसांख्यिकी का अध्ययन समाजशास्त्र की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में, यूरोप में दो विभिन्न प्रक्रियाएँ लगभग साथ-साथ घटित हुई। 

एक, राजनीतिक संगठन के रूप में राष्ट्र राज्यों की स्थापना और दूसरी, आँकड़ों से सम्बन्धित आधुनिक विज्ञान सांख्यिकी की शुरुआत । इन राज्यों ने पुलिस व कानून व्यवस्था, कृषि तथा उद्योग संबंधी नीतियों इत्यादि में दिलचस्पी लेना शुरू कर दिया था।



1790 में अमेरिकी जनगणना सबसे आधुनिक किस्म की जनगणना थी। इस पद्धति को यूरोप में भी 19वीं शताब्दी के प्रारंभिक वर्षों में अपना लिया गया। भारत में जनगणना का कार्य भारत की अंग्रेजी सरकार ने सर्वप्रथम 1867-72 के बीच प्रारम्भ किया 1951 से अब तक छह दसवर्षीय जनगणनाएँ हो चुकी हैं। चीन में अत्यधिक जनसंख्या होने के कारण वहाँ नियमित रूप से जनगणना नहीं की जाती।

जनसांख्यिकीय आँकड़े, आर्थिक विकास व सामान्य जनकल्याण संबंधी नीति बनाने में काफी महत्त्वपूर्ण होते हैं। दुर्खीम का कहना था कि आत्महत्या की दर को सामाजिक कारणों द्वारा स्पष्ट करना बहुत जरूरी है। आकारिक जनसंख्या प्रमुख रूप से जनसंख्या परिवर्तन के संघटकों के विश्लेषण तथा मापन से संबंध रखती है। इसके अंतर्गत मात्रात्मक विश्लेषण पर विशेष रूप से ध्यान दिया जाता है, जबकि जनसंख्या अध्ययन के अंतर्गत जनसंख्या की संरचनाओं और परिवर्तनों के व्यापक कारणों का पता लगाया जाता है।

माल्थस का जनसंख्या वृद्धि का सिद्धांत-जनसांख्यिकी के प्रसिद्ध सिद्धान्तों में एक सिद्धान्त अंग्रेज राजनीतिक अर्थशास्त्री थॉमस रॉबर्ट माल्थस (1766-1834) के नाम से जुड़ा है। उनका कहना था कि मनुष्यों की जनसंख्या उस दर की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ती है, जिस दर पर मनुष्य के भरण-पोषण के साधन (जैसे-कपड़ा, भोजन, कृषि उत्पाद) बढ़ सकते हैं। 

इसलिए मनुष्य ही गरीबी की हालत में रहा है, क्योंकि कृषि उत्पाद जनसंख्या उत्पाद से कहीं कम है। इसलिए समृद्धि को बढ़ाने का एक ही तरीका है कि जनसंख्या की वृद्धि को नियंत्रित किया जाए। माल्थस का विश्वास था कि अकालों और बीमारियों के रूप में जनसंख्या वृद्धि को रोकने के प्राकृतिक निरोध अनिवार्य होते हैं, क्योंकि वे इस प्रकार के असंतुलन को रोकने में समर्थ होते हैं।

माल्थस के सिद्धान्त को बीसवीं शताब्दी के शुरू में झूठा साबित कर दिया गया, क्योंकि जनसंख्या की तीव्र वृद्धि के बावजूद खाद्य उत्पादन व जीवन स्तर लगातार उन्नत होते गए। जनसांख्यिकीय संक्रमण का सिद्धान्त-इसका तात्पर्य है कि जनसंख्या वृद्धि आर्थिक विकास के समग्र स्तरों से जुड़ी होती है एवं प्रत्येक समाज विकास से संबंधित जनसंख्या वृद्धि के एक निश्चित स्वरूप का अनुसरण करता है। 

जनसंख्या वृद्धि इसलिए होती है, क्योंकि मृत्यु-दरें, रोग नियन्त्रण, जनस्वास्थ्य द्वारा तेजी से नीचे ला दी जाती है। भारत में जनसांख्यिकीय संक्रमण अभी तक पूरा नहीं हुआ है- क्योंकि यहाँ मृत्यु दर कम कर दी गई है, पर जन्म-दर उसी अनुपात में नहीं घटाई जा सकी है। जन्म दर प्रति एक हजार की जनसंख्या के पीछे जीवित उत्पन्न हुए बच्चों की संख्या होती है। 

इसी प्रकार मृत्यु-दर भी एक ऐसा आँकड़ा है जो किसी एक क्षेत्र विशेष में एक निर्धारित अवधि के दौरान हुई मृत्यु की संख्या के रूप में अभिव्यक्त किया जाता है। प्रजनन दर का अर्थ है- बच्चे पैदा कर सकने की आयु वाली प्रति 1000 स्त्रियों की इकाई के पीछे जीवित जन्मे बच्चों की संख्या। 

सकल प्रजनन दर से तात्पर्य है-जीवित जन्म लेने वाले बच्चों की कुल संख्या जिन्हें कोई एक स्त्री जन्म देती है, यदि बच्चे पैदा करने के सम्पूर्ण आयु वर्ग में जीवित रहती और इस आयु वर्ग के प्रत्येक हिस्से में औसत उतने ही बच्चे चाहिए। 

स्त्री-पुरुष अनुपात यह बताता है कि किस क्षेत्र विशेष में एक निश्चित अवधि के दौरान प्रति 1000 पुरुषों के पीछे स्त्रियों की संख्या क्या है। अधिकांश समाजों में स्त्रियाँ पुरुषों की तुलना में अधिक वर्षों तक जीवित रहती हैं। चीन, दक्षिणी कोरिया, भारत में स्त्री-पुरुष अनुपात घटता जा रहा है। पराश्रितता अनुपात जनसंख्या के पराश्रित और कार्यशील हिस्सों को मापने का साधन है। पराश्रित वर्ग में ऐसे बुजुर्ग लोग होते हैं जो बुढ़ापे के कारण काम नहीं कर सकते और ऐसे

बच्चे भी आते हैं जो इतने छोटे हैं कि काम नहीं कर सकते। भारत विश्व में चीन के बाद दूसरा सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश है। भारत में आए अकाल मृत्यु दर की वृद्धि के कारण थे। परन्तु अब कृषि की उत्पादकता में वृद्धि, संचार के साधनों में सुधार के कारण अकाल पर काबू पा लिया गया है। 

अधिकांश भारतीय युवावस्था में है और भारत की आयु का औसत अनेक देशों की तुलना में कम है। जिस प्रकार विभिन्न प्रदेशों में प्रजनन दर अलग-अलग होती हैं, उसी प्रकार आयु-सरचना भी अलग-अलग होती है।

भारत में गिरता स्त्री-पुरुष अनुपात समाजशास्त्रियों ने भारत में स्त्री-पुरुष अनुपात में गिरावट आने के कई कारण बताए हैं। स्वास्थ्य संबंधी कारण जो स्त्रियों को अत्यधिक प्रभावित करता है। 


CLASS 12 NCERT SOLUTION IN ENGLISHCLASS12 NCERT SOLUTION IN HINDI
Historyइतिहास
Geography भूगोल
Political science राजनीति विज्ञान
English SubjectResult
Hindi SubjectHistory answer keys

बाल स्त्री अनुपात में गिरावट समग्र अनुपातों के बदले अधिक तेजी से आई है। इसके कारण है, जैसे-शिशु अवस्था में बच्चियों की देखभाल में घोर उपेक्षा, बालिकाओं की गर्म में हत्या, अल्ट्रासाउंड जिसके द्वारा गर्भ लिंग का पता लगाया जा सकता है। 

सरकार ने कठोर कानून बनाकर इस पद्धति पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह कानून 1999 से लागू है और इसे 2003 से अधिक प्रबल बना दिया गया है। भारत की अधिकांश जनता हमेशा ही गाँवों में रहती है। भारत में आज गाँवों के लोग खेती में दिलचस्पी नहीं लेते। 

वे परिवहन सेवा, व्यवसाय या शिल्पनिर्माण जैसे व्यवसायों की अधिक प्राधानता दे रहे हैं। गाँवों के लोग नगर में रहने वालों लोगों की सुख-सुविधाओं से परिचित हो जाते हैं व उनमें भी उन सुविधाओं का उपभोग करने की लालसा उत्पन्न हो जाती है। जहाँ नगरीकरण की प्रक्रिया तेजी से चल रही है, वहीं शहर भी तेजी से फैलते जा रहे हैं। ये महानगर ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। 

आपातकाल के अधिक आने के कारण राष्ट्रीय परिवार नियोजन का नाम बदलकर उसे राष्ट्रीय परिवार कल्याण कार्यक्रम कहा जाने लगा। भारत का राष्ट्रीय परिवार कल्याण कार्यक्रम हमें यह शिक्षा देता है कि हालाँकि राज्य जनसांख्यिकीय परिवर्तन के उद्देश्य से उपयुक्त परिस्थितियाँ बनाने के लिए बहुत कुछ कर सकता है, फिर भी अधिकांश जनसांख्यिकी परिवर्तनशील दरों में आर्थिक, सामाजिक व सांस्कृतिक पक्ष ही महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


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1. जनसांख्यिकीय संक्रमण के सिद्धान्त के बुनियादी तर्क को स्पष्ट कीजिए । संक्रमण अवधि ‘जनसंख्या विस्फोट’ के साथ क्यों जुड़ी है ? 

Ans. जनसांख्यिकीय संक्रमण के सिद्धान्त से तात्पर्य यह है कि जनसंख्या वृद्धि आर्थिक विकास के समग्र स्तरों से जुड़ी होती है एवं प्रत्येक समाज विकास से संबंधित जनसंख्या वृद्धि के एक निश्चित स्वरूप का अनुसरण करता है। इस सिद्धान्त के अनुसार जनसंख्या वृद्धि के तीन चरण होते हैं-

1. समाज में जनसंख्या वृद्धि का कम होना-समाज में वृद्धि दरें इसलिए कम होती हैं, क्योंकि मृत्यु-दर और जन्म-दर दोनों ही बहुत ऊँची होती हैं। अतः दोनों के बीच का अंतर नीचा रहता है। 

2. जनसंख्या विस्फोट अर्थात् जनसंख्या में वृद्धि – इसका प्रमुख कारण है-मृत्यु-दर तथा जनस्वास्थ्य रोग-नियन्त्रण की गिनती में तेजी से गिरावट। मृत्यु दर की कमी के कारण जनसंख्या एक उचित अनुपात में बढ़ती चली जाती है। 

2. माल्थस का यह विश्वास क्यों था कि अकाल और महामारी जैसी विनाशकारी घटनाएँ, जो बड़े पैमाने पर मृत्यु का कारण बनती है, अपरिहार्य हैं ?

Ans. थॉमस रॉबर्ट माल्थस, एक अंग्रेज राजनीतिक अर्थशास्त्री ने जनसंख्या वृद्धि का सिद्धान्त दिया। उनका मत था कि जनसंख्या की वृद्धि के साथ-साथ भरण-पोषण के साधनों का विकास भी उचित अनुपात में किया जाना चाहिए। 

उनका विश्वास था कि अकाल व बीमारियाँ, जैसे- प्लेग, बुखार, डेंगू इत्यादि जनसंख्या वृद्धि को रोकने में उचित भूमिका निभाते हैं। इन प्राकृतिक कारणों के द्वारा जनसंख्या वृद्धि को काफी हद तक कम किया जाता है। 

बढ़ती जनसंख्या व खाद्य आपूर्ति के बीच के असंतुलन को रोकने में प्राकृतिक कारण काफी उपयोगी होते हैं। उनका विश्वास था कि प्राकृतिक आपदाओं के कारण लोगों की बड़े अनुपात में मृत्यु के साथ-साथ जनसंख्या की वृद्धि दर में भी कमी आती है।

3. मृत्यु-दर और जन्म-दर का क्या अर्थ है ? कारण स्पष्ट कीजिए कि जन्म-दर में गिरावट अपेक्षाकृत धीमी गति से क्यों आती है, जबकि मृत्यु दर बहुत तेजी से गिरती है। 

Ans. जन्म-दर- किसी एक विशेष क्षेत्र, जैसे-राज्य, जिला या एक पूरे देश में, एक निर्धारित अवधि के दौरान जीवित उत्पन्न हुए बच्चों की कुल संख्या को उस क्षेत्र में हज़ार की इकाइयों में अभिव्यक्त कुल जनसंख्या से भाग दिया जाता है। अर्थात् जन्म-दर प्रति एक हजार की जनसंख्या के पीछे जीवित उत्पन्न हुए बच्चों की संख्या होती है।

मृत्यु-दर- यह एक ऐसा आँकड़ा है जो किसी एक विशेष क्षेत्र में निर्धारित अवधि के दौरान हुई मृत्यु की संख्या के रूप में अभिव्यक्त किया जाता है।

जन्म दर में गिरावट अर्थात् जनसंख्या वृद्धि भारत में काफी तेजी से हो रही है। इसका प्रमुख कारण लोगों में निरक्षरता, लोगों को जनसंख्या पर नियन्त्रण पाने के उपायों के बारे में पूरा ज्ञान न होना। 

4. भारत में कौन-कौन से राज्य जनसंख्या संवृद्धि के प्रतिस्थापन स्तरों को प्राप्त कर चुके हैं अथवा प्राप्ति के बहुत नजदीक हैं ? कौन-से राज्यों में अभी भी जनसंख्या संवृद्धि की दरें बहुत ऊँची हैं ? आपकी राय में इन क्षेत्रीय अंतरों के क्या कारण हो सकते हैं ? 

Ans. भारत में कई राज्यों में जनसंख्या वृद्धि में काफी कमी आई है; जैसे- केरल, तमिलनाडु, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक इत्यादि। इसके विपरीत कुछ राज्य ऐसे भी हैं जहाँ जनसंख्या में प्रत्येक वर्ष वृद्धि होती है; जैसे—उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान व मध्य प्रदेश इत्यादि । 

अर्थात् जहाँ कुछ राज्य जनसंख्या वृद्धि की दर में कमी लाते हैं तो दूसरे राज्यों में जनसंख्या वृद्धि की दर में तेजी आ जाती है। इस प्रकार भारत में जनसंख्या की स्थिति बीच में ही बनी हुई है।

5. जनसंख्या की आयु-संरचना का क्या अर्थ है ? आर्थिक विकास और संवृद्धि के लिए उसकी क्या प्रासंगिकता है ?

Ans. आयु-संरचना इसका अर्थ है कि किसी देश में युवा व्यक्तियों की संख्या कितनी अधिक है ताकि वह देश के आर्थिक विकास और संवृद्धि में योगदान दे सके। जनसंख्या की आयु-संरचना आर्थिक विकास और संवृद्धि में काफी योग दे सकती है। 

क्योंकि भारत के पास युवाओं के रूप में काफी बड़ा और बढ़ता हुआ श्रमिक बल है जो संदृद्धि व समृद्धि की दृष्टि से लाभ प्रदान कर सकता है। आयु की दृष्टि से कार्यशील जनसंख्या 15 से 64 वर्ष तक की आयु की होती है। कार्यशील वर्ग अपने मरण-पोषण के साथ आयु से बाहर के वर्ग को भी सहारा देता है जो पराश्रित होते हैं। 

6. स्त्री-पुरुष अनुपात क्या है ? इसका अर्थ बताइए। एक गिरते हुए स्त्री-पुरुष अनुपात के क्या निहितार्थ हैं ? क्या आप यह महसूस करते हैं कि माता-पिता आज भी बेटियों की बजाय बेटों को अधिक पसंद करते हैं ? आपकी राय में इस पसंद के क्या-क्या कारण हो सकते हैं ?

Ans. स्त्री-पुरुष अनुपात- इसका अर्थ है- प्रति 1,000 पुरुषों के पीछे स्त्रियों की संख्या। भारत में स्त्री-पुरुष अनुपात पिछली एक शताब्दी से गिरता जा रहा है। पिछले चार दशकों में। यह स्थिति काफी चिंताजनक बन गई है। जहाँ 1961 में स्त्री-पुरुष अनुपात 941 था, वहीं अब यह घटते हुए 927 के स्तर पर आ गया है। 

समाजशास्त्रियों के भारत में गिरते हुए-स्त्री-पुरुष अनुपात के कई कारण बताए हैं। इन कारणों में स्वास्थ्य संबंधी कारक सबसे प्रमुख है। यह कारक स्त्रियों को सबसे अधिक प्रभावित करता है, क्योंकि स्त्रियों के बार-बार गर्भधारण करने पर उन्हें कई बीमारियों को झेलना पड़ता है। 

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (VERY SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


1. माल्थस कौन था ? वह क्यों प्रसिद्ध था ? 

Ans. माल्थस (थॉमस रॉबर्ट माल्थस) एक प्रसिद्ध अंग्रेज राजनीतिक अर्थशास्त्री थे। उनके जनसांख्यिकी के प्रसिद्ध सिद्धांतों के कारण उन्हें जाना जाता है। 

2. माल्थस का जनसंख्या वृद्धि का सिद्धान्त किस निबंध में स्पष्ट किया गया है ?

Ans. माल्थस का जनसंख्या वृद्धि का सिद्धांत उनके जनसंख्या विषयक निबंध ‘एस्से ऑन पोपुलेशन’ (1788) में स्पष्ट किया गया है।

3. देश में समृद्धि को बढ़ाने के दो तरीके बताइए । 

Ans. 

(i) जनसंख्या की वृद्धि को नियंत्रित करके।

(ii) भरण-पोषण के संसाधनों में वृद्धि करके । 

4. थॉमस रॉबर्ट माल्थस के जन्म व मृत्यु के बारे में बताइए ।

Ans. थॉमस रॉबर्ट माल्थस का जन्म 1766 में व मृत्यु 1834 में हुई थी। 

5. माल्थस के अनुसार जनसंख्या वृद्धि किस प्रकार नियंत्रित की जा सकती है ? 

Ans. माल्थस के अनुसार कृत्रिम निरोधों द्वारा जैसे कि बड़ी उम्र में विवाह करके या यौन संयम रखकर अथवा ब्रह्मचर्य का पालन करके सीमित संख्या में बच्चे पैदा करके जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित किया जा सकता है।

माल्यस के अनुसार अकालों व बीमारियों के कारण जनसंख्या वृद्धि को रोका जा सकता है, क्योंकि इन अकालों से होने वाली लोगों की मृत्यु के द्वारा खाद्य आपूर्ति व जनसंख्या में संतुलन कायम किया जा सकता है। 

6. जनसांख्यिकीय संक्रमण के सिद्धान्त से क्या तात्पर्य है ?

Ans. इसका तात्पर्य है कि जनसंख्या वृद्धि आर्थिक विकास के समग्र स्तरों से जुड़ी होती है एवं प्रत्येक समाज विकास से संबंधित जनसंख्या वृद्धि के एक निश्चित स्वरूप का अनुसरण करता है। 

7. जनसंख्या वृद्धि के तीन बुनियादी चरण बताइए। 

Ans. 

(i) समाज में जनसंख्या वृद्धि का कम होना, 

(ii) विकसित समाज में जनसंख्या वृद्धि दर में गिरावट, (iii) समाज का पिछड़ी अवस्था से उन्नत अवस्था में आना। 

8. संक्रमण अवधि का प्रारम्भ किन वर्षों में और कहाँ-कहाँ पर हुआ ? 

Ans. संक्रमण पश्चिमी यूरोप में 19वीं शताब्दी के अंतिम वर्षों और 20वीं शताब्दी के प्रारम्भिक वर्षों में प्रारम्भ हुआ। कम विकसित देशों, जो गिरती हुई दरों के अनुसार अपने यहाँ जन्म दर घटाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, में भी इसी अवधि में अपनाया गया है।

9. जनसांख्यिकीय संकल्पनाओं को कैसे अभिव्यक्त किया जाता है ?

Ans. जनसांख्यिकीय संकल्पनाओं को दरों या अनुपातों में अभिव्यक्त किया जाता है। 

10. जन्म दर से क्या अभिप्राय है ?

Ans. किसी एक विशेष क्षेत्र में एक निर्धारित अवधि के दौरान जीवित जन्मे बच्चों की कुल संख्या को उस क्षेत्र में हजार की इकाइयों में अभिव्यक्त कुल जनसंख्या से भाग देने पर जन्म दर प्राप्त की जाती है। अर्थात् जन्म दर प्रति एक हजार की जनसंख्या के पीछे जीवित उत्पन्न हुए बच्चों की संख्या होती है। 

11. जन्म व मृत्यु के आँकड़ों की सूचना किस अधिकारी को दी जाती है ?

Ans. इसकी जानकारी कानूनन उपयुक्त प्राधिकारी को देनी होती है। इन उपयुक्त प्राधिकारियों में गाँवों के मामले में पुलिस थाना या प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र होते हैं और कस्बों और शहरों में संबंधित नगर निगम के कार्यालय इन आँकड़ों की सूचना एकत्रित करते हैं।

12. प्राकृतिक वृद्धि दर या जनसंख्या दर से क्या तात्पर्य है ? 

Ans. यह जन्म-दर व मृत्यु-दर के बीच के अन्तर को बताती है। अर्थात् जब यह अंतर शून्य होता है तब यह कहा जा सकता है कि जनसंख्या स्थिर हो गई है या ‘प्रतिस्थापन स्तर पर पहुँच गई है।

13. प्रजनन दर का क्या अर्थ है ?

Ans. बच्चे पैदा कर सकने की आयु वाली प्रति 1000 स्त्रियों की इकाई के पीछे जीवित जन्मे बच्चों की संख्या प्रजनन दर कहलाती है।

14. सकल प्रजनन दर से क्या तात्पर्य है ?

Ans. सकल प्रजनन दर स्त्रियों के एक विशेष वर्ग द्वारा उनकी प्रजनन आयु की अवधि के अंत तक पैदा किए गए बच्चों की औसत संख्या के बराबर होती है। 

15. शिशु मृत्यु दर से क्या अर्थ है ?

Ans. शिशु मृत्यु-दर उन बच्चों की मृत्यु की संख्या दर्शाती है जो जीवित पैदा हुए बच्चों में से एक वर्ष की आयु के होते हैं व मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं। 

16. शिशु और मातृ मृत्यु दर में तेजी से आई कमी के दो कारण लिखिए। 

Ans. (i) चिकित्सा सुविधाओं में वृद्धि व उच्च तकनीकों का प्रयोग करना। (ii) शिक्षा, जागरूकता व समृद्धि स्तरों में वृद्धि। 

17. एक औसत व्यक्ति की जीवन अवधि का अनुमान किस प्रकार लगाया जाता है ? 

Ans. औसत व्यक्ति की जीवन अवधि का अनुमान क्षेत्र विशेष में एक निश्चित अवधि के दौरान आयु- विशेष मृत्यु दर संबंधी आँकड़ों द्वारा लगाया जाता है।

18. स्त्री-पुरुष अनुपात क्या है

Ans. किसी विशेष क्षेत्र में एक निश्चित अवधि के दौरान प्रति 1,000 पुरुषों के पीछे स्त्रियों की संख्या स्त्री-पुरुष अनुपात को दर्शाती है। 

19. किन-किन देशों में स्त्री-पुरुष अनुपात घटता जा रहा है ? इसके दो कारण बताइए ।

Ans. चीन, दक्षिण कोरिया व भारत जैसे देशों में स्त्री-पुरुष अनुपात घटता जा रहा है। इसके कई कारण हैं, जिसमें से दो प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं- (i) पुरुषों को स्त्रियों की तुलना में अधिक महत्त्व देना, (ii) बेटों की अपेक्षा बालिका शिशुओं की अधिक उपेक्षा करना। 

20. जनसंख्या की आयु-संरचना से क्या तात्पर्य है ?

Ans. कुल जनसंख्या के संदर्भ में विभिन्न आयु वर्गों के व्यक्तियों का अनुपात जनसंख्या की आयु- संरचना कहलाती है।

21. आयु-संरचना को प्रभावित करने वाले कारक बताइए । 

Ans. आयु-संरचना को प्रभावित करने वाले निम्नलिखित कारक हैं-

(i) प्रारम्भ में निम्न स्तर की चिकित्सा सुविधाओं व रोगों के प्रकोप के कारण जीवन अवधि कम थी व लोग जल्दी व कम उम्र में ही मृत्यु का शिकार हो जाते थे। 

(ii) शिशुओं तथा प्रसूताओं की मृत्यु की ऊँची दरें आयु संरचना को प्रभावित करती हैं।

22. पराश्रित वर्ग कौन से वर्ग हैं ? इनमें किन-किनको शामिल किया जाता है ?

Ans. ऐसे बुजुर्ग व्यक्ति जो अपने बुढ़ापे के कारण काम नहीं कर सकते व ऐसे बच्चे जो अपनी कम उम्र के कारण काम करने में सक्षम नहीं हैं, पराश्रित वर्ग में आते हैं। 

23. जनसंख्या क्षेत्र में भारत की स्थिति बताइए। सन् 2001 में भारत की आबादी कितनी थी ?

Ans. भारत विश्व में चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ी जनसंख्या वाला देश है। 2001 की जनगणना के अनुसार इसकी कुल आबादी 103 करोड़ है। 

24. 1918-19 के दौरान भारत में आयी जनसंख्या वृद्धि दर में कमी का प्रमुख कारण क्या था ? 

Ans. 1918-19 के दौरान इंफ्लुएंजा महामारी का प्रकोप था। इस महामारी के कारण 1.25 करोड़ लोगों को यानि देश की कुल जनसंख्या के 5% अंश को अपनी जीवन से हाथ धोना पड़ा।

25. 1921 के बाद मृत्यु दर में गिरावट आने का प्रमुख कारण क्या था ? 

Ans. 1921 के बाद मृत्यु दर में गिरावट आने के निम्नलिखित कारण थे-

(i) अकालों व महामारियों पर नियन्त्रण । 

(ii) स्वास्थ्य सुविधाओं व तकनीकों में विकास। 

26. ‘पैंडेमिक’ व ‘एपिडेमिक’ शब्द का अर्थ स्पष्ट कीजिए।

Ans. पैंडेमिक – यह शब्द एक ऐसी महामारी के लिए प्रयोग होता है जो बहुत व्यापक भौगोलिक क्षेत्र को प्रभावित करती है। एपिडेमिक – इस शब्द का प्रयोग एक सीमित क्षेत्र में फैली महामारी के लिए किया

जाता है। 

27. कुछ क्षेत्रों में व्यापक रूप से अकाल पड़ने के कारण बताइए ।

Ans. अकाल पड़ने के कई कारण होते थे- (i) वर्षा की कमी के कारण खेती पर निर्भर इलाकों में उपज कम होना।

(ii) परिवहन, संचार के साधनों की समुचित व्यवस्था न होना। 

(iii) राज्य सरकार की तरफ से इस दिशा में प्रयास न करने के कारण भी अकाल पढा। 

28. सरकार द्वारा भुखमरी की समस्या के समाधान के लिए कौन-सा कानून बनाया गया है ?

Ans. सरकार द्वारा ‘राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम’ नामक कानून भूख और मुखमरी की समस्या के समाधान के लिए बनाया गया है। 

29. भारत में कम जनसंख्या व अधिक जनसंख्या वाले राज्यों के नाम बताइए। 

Ans. कम जनसंख्या वाले राज्य केरल, तमिलनाडु, हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक इत्यादि । अधिक जनसंख्या वाले राज्य-उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार व मध्य प्रदेश इत्यादि ।

30. केरल व उत्तर प्रदेश में आयु-संरचना की स्थिति को दर्शाइए ।

Ans. केरल जैसे राज्यों में आयु-संरचना विकसित देशों के बराबर है, जबकि उत्तर प्रदेश में छोटे वर्गों में जनसंख्या काफी अधिक है व वृद्धजनों का अनुपात काफी कम है। इन राज्यों में युवा अनुपात काफी कम है जिससे यहाँ आयु संरचना काफी कम है। 

31. वर्ष 2020 में अमेरिका, पश्चिमी यूरोप व जापान में औसत उम्र कितनी होगी? 

Ans. वर्ष 2020 में अमेरिका में औसत आयु 37 वर्ष, यूरोप में 45 वर्ष व जापान में 48 वर्ष होगी।

32. पराश्रितता अनुपात से क्या तात्पर्य है ?

Ans. समाज के न कमाने वाले आयु-वर्ग व कमाने वाले आयु वर्ग के बीच में अंतर को ‘पराश्रितता अनुपात’ कहते हैं।

33. सोनोग्राम अथवा अल्ट्रासाउंड तकनीक का प्रयोग किसके लिए किया जाता है ? इस तकनीक का दुरुपयोग न करने के लिए सरकार ने कौन-कौन से कानून बनाए हैं ? 

Ans. सोनोग्राम तकनीक का प्रयोग भ्रूण के जननिक व अन्य विकारों का पता लगाने के लिए किया गया है। परन्तु अब इसका प्रयोग भ्रूण लिंग का पता लगाने व बालिका भ्रूण को गर्भ में ही नष्ट कर देने के लिए किया जाता है। 

सरकार ने इस पद्धति पर प्रतिबंध लगा दिया है। प्रसवपूर्व नैदानिक प्रविधियाँ अधिनियम नामक कानून 1999 से लागू किया गया है। यह कानून भ्रूण की हत्या करने वाले व करवाने वाले के लिए बनाया गया है।

34. साक्षरता के क्षेत्र में अग्रसर दो राज्यों के नाम बताइए।

Ans.

(i) केरल,

(ii) तमिलनाडु 

35. निरक्षरता के क्षेत्र में दो राज्यों के नाम बताइए ।

Ans. (i) बिहार, (ii) उत्तर प्रदेश।

36. ग्रामीण लोगों द्वारा गाँवों से शहरों की ओर आकर्षित होने के दो कारण बताइए। 

Ans. (i) ग्रामीण लोग परिवहन सेवा, व्यवसाय या शिल्प निर्माण जैसे खेती से अलग ग्रामीण व्यवसायों को अधिक धन आपूर्ति के लिए अपनाते जा रहे हैं। 

(ii) संचार साधनों द्वारा नगरीय क्षेत्रों की सुख-सुविधाओं से परिचित हो जाने के कारण भी गाँव के लोग शहरों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। 


लघु उत्तरीय प्रश्न (SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


1. जनसांख्यिकी का क्या अर्थ है ? इसके अन्तर्गत किन-किन प्रवृत्तियों व प्रक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है ? 

Ans. जनसांख्यिकी से हमारा अभिप्राय जनसंख्या का सुव्यवस्थित अध्ययन है। इसे जनांकिकी के नाम से भी जाना जाता है। यह यूनानी भाषा के दो शब्दों ‘डेमोस’ यानि जन व ‘ग्राफीन’ यानि लोगों का वर्णन, शब्दों से मिलकर बना है। 

जनांकिकी के अंतर्गत किसी एक देश, राज्य की जनसंख्या से संबंधित अनेक प्रवृत्तियों व प्रक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है। इन प्रक्रियाओं में जनसंख्या के आकार में परिवर्तन, जन्म, जनसंख्या की संरचना और गठन, मृत्यु व जनसंख्या में विभिन्न आयु वर्ग के लोगों का अनुपात इत्यादि आते हैं। 

अर्थात् जनसांख्यिकी देश की जनसंख्या में आए प्रत्येक बदलाव व व्यौरों का अध्ययन करती है। यह समाजशास्त्र की दृष्टि से अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। 

2. जनसांख्यिकी कितने प्रकार की होती है व इनके क्या-क्या कार्य हैं ? 

Ans. जनसांख्यिकी अर्थात् जनसंख्या का सुव्यवस्थित अध्ययन। यह दो प्रकार की होती है-

(i) आकारिक जनसांख्यिकी, 

(ii) सामाजिक जनसांख्यिकी ।

(i) आकारिक जनसांख्यिकी-इन जनसांख्यिकी में आकार यानि जनसंख्या की मात्रा का अध्ययन किया जाता है। जनसंख्या की अधिकता व कमी, उसमें आए उचित बदलाव का अनुपात, जनसंख्या की गणना आदि आकारिक जनसांख्यिकी के अन्तर्गत आते हैं। 

(ii) सामाजिक जनसांख्यिकी इस जनसांख्यिकी में आबादियों के सामाजिक आर्थिक व राजनीतिक पक्ष पर विचार किया जाता है। सभी जनसांख्यिकी अध्ययन गणना या गिनती की प्रक्रियाओं पर आधारित होते हैं।

3. ‘“समाजशास्त्र की स्थापना का श्रेय जनसांख्यिकी को जाता है।” इस कथन की। व्याख्या कीजिए। 

Ans. समाजशास्त्र की दृष्टि से जनसांख्यिकी का अध्ययन करना अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। समाजशास्त्र के उद्भव व एक अलग अकादमिक विषय के रूप में इसकी स्थापना का श्रेय जनसांख्यिकी को ही जाता है। 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में दो विभिन्न प्रक्रियाएँ यूरोप में एक साथ घटित हुई। इन प्रक्रियाओं में प्रमुख था- 

(i) राजनीतिक संगठन के प्रमुख रूप में राष्ट्र राज्यों की स्थापना । 

(ii) आँकड़ों से संबंधित आधुनिक विज्ञान सांख्यिकी की शुरुआत इन राज्यों ने बाद में अपने कार्यों का विस्तार करना शुरू कर दिया। इन राज्यों के द्वारा कई क्षेत्रों में अलग-अलग कार्यों का विस्तार, जो लोगों के लिए आवश्यक थे, किए गए। उदाहरणतया जनस्वास्थ्य प्रबंध के प्रारम्भिक रूपों का विकास, पुलिस व कानून व्यवस्था का विकास, कृषि व उद्योग संबंधी आर्थिक नीतियों, शहरों की शासन व्यवस्था में दिलचस्पी इत्यादि ।

4. जनसंख्या और अर्थव्यवस्था के विभिन्न पक्षों से सम्बन्धित मात्रात्मक तथ्यों को सुव्यवस्थित रूप से इकट्ठा करने की प्रथा कब शुरू हुई ? सर्वप्रथम किन-किन देशों ने इसे अपनाया ? Or, जनसंख्या की गणना के आँकड़े इकट्ठे करने का विचार सर्वप्रथम किस देश में किया गया ? स्पष्ट कीजिए।

Ans. जनसंख्या की गणना के आँकड़े इकट्ठे करने की प्रथा काफी पुरानी है। परन्तु लोगों, समाज व समाजशास्त्र द्वारा इसे सबसे अधिक प्राथमिकता 18वीं शताब्दी में दी गई। 18वीं शताब्दी के अंतिम वर्षों में ही अस्तित्व सामने आया। 

1790 में अमेरिका में हुई जनगणना विश्व में हुई सबसे पहली आधुनिक किस्म की जनगणना थी। इसके उपरांत यूरोपीय देशों ने भी 19वीं शताब्दी के प्रारम्भिक वर्षों में इसे अपना लिया। अंग्रेजी सरकार ने 1867-72 के बीच में भारत में भी जनगणना का कार्य आरम्भ किया, तब से 1881 से हर दस साल बाद दस वर्षीय जनगणना की जाती है। 

1947 के बाद से भारत के द्वारा भी इस पद्धति को चालू रखा गया। सन् 1951 से अब तक छह दसवर्षीय जनगणनाएँ हो चुकी हैं। आज भारत इतना विकसित हो चुका है। कि भारत में होने वाली जनगणना विश्व में होने वाली सबसे बड़ी जनगणना है।

5. जनसांख्यिकीय आँकड़े क्यों महत्त्वपूर्ण हैं ? इन जनसांख्यिकीय आँकड़ों के आधार पर एमिल दुखम के कथन की व्याख्या कीजिए।

Ans. जनसांख्यिकीय आँकड़े विकास और सामान्य जन कल्याण संबंधी नीतियाँ बनाने और कार्यान्वित करने के लिए महत्त्वपूर्ण होते हैं। 

परन्तु जब सामाजिक आँकड़ों को प्रथम बार प्रस्तुत किया गया तो समाजशास्त्रियों ने इसे एक नए विषय के आधार पर प्रस्तुत किया। लाखों लोगों के बहुत बड़े समुदाय के बारे में इकट्ठे किए गए विशाल आँकड़ों ने सामाजिक प्रघटना के अस्तित्व के लिए एक मजबूत एवं ठोस तर्क प्रस्तुत किया। 

एमिल दुखम का प्रख्यात अध्ययन जिसमें उन्होंने विभिन्न देशों में आत्महत्या की दरों में पाए जाने वाले अंतरों को स्पष्ट किया है। दुर्खीम का विश्वास था कि आत्महत्या की दर का सामाजिक कारणों के द्वारा स्पष्ट करना जरूरी है। भले ही आत्महत्या करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की स्थितियाँ व कारण अलग-अलग हो सकते हैं।

6. जनसांख्यिकी के दो प्रकार-आकारिक जनसांख्यिकी व जनसंख्या अध्ययन के व्यापक क्षेत्र के बीच में अंतर किए जाने को स्पष्ट कीजिए। सामाजिक जनसांख्यिकीविदों के मत के बारे में बताइए । 

Ans. आकारिक जनसांख्यिकी और जनसंख्या अध्ययन के व्यापक क्षेत्र के बीच में कभी-कभी अंतर किया जाता है। आकारिक जनसांख्यिकी प्रमुख रूप से जनसंख्या परिवर्तन के संघटकों के विश्लेषण तथा मापन से संबंध रखती है। 

इस आकार में जनसांख्यिकी के अन्तर्गत मात्रात्मक विश्लेषण पर विशेष रूप से ध्यान दिया जाता है। जनसंख्या की वृद्धि और उसके गठन में होने वाले परिवर्तनों का पूर्वानुमान लगाने के लिए अत्यन्त विकसित गणितीय विधि अपनाई जाती है। जनसंख्या अध्ययन या सामाजिक जनसांख्यिकी के अंतर्गत की संरचनाओं और परिवर्तनों के व्यापक कारणों व परिणामों का पता लगाया जाता है।

7. माल्थस के जनसंख्या वृद्धि के सिद्धान्त को स्पष्ट कीजिए। 

Ans. माल्थस के अनुसार किसी एक देश, राज्य या क्षेत्र में जनसंख्या- दर में वृद्धि उस दर पर होती है जिस पर मनुष्य के भरण-पोषण के साधन बढ़ सकते हैं। कृषि उत्पादन में कमी होने एवं जनसंख्या में वृद्धि होने के कारण मनुष्य को हमेशा ही गरीबी की हालत से गुजरना पड़ता है। 

उसका मत था कि कृषि उत्पादन की वृद्धि हमेशा जनसंख्या की वृद्धि से पीछे रहती है। जहाँ जनसंख्या का विस्तार ज्यामितीय अनुपात में होता है, वहाँ कृषि उत्पादन में वृद्धि भी गणितीय व समांतर रूप से होती है। उनके अनुसार, समृद्धि को बढ़ाने का एक ही तरीका है। 

8. “थॉमस का सिद्धान्त एक लम्बे समय तक प्रभावशाली रहा, परन्तु कुछ विद्वानों ने इनका विरोध भी किया।” इन विद्वानों के अनुसार वृद्धि के क्या-क्या कारण हो सकते हैं ? 

Ans. यह सही है कि थॉमस का विचार पूरी तरह से तर्कपूर्ण नहीं था। कई विद्वानों ने इनकी आलोचना भी की थी। उनके सिद्धान्त का सबसे प्रभावकारी खंडन यूरोपीय देशों के ऐतिहासिक अनुभव द्वारा प्रस्तुत किया गया। 

कई विचारकों का मत था कि आर्थिक संवृद्धि जनसंख्या वृद्धि से अधिक हो सकती है। उन्नीसवीं शताब्दी के अन्त में व बीसवीं शताब्दी की शुरुआत तक जनसंख्या वृद्धि का स्वरूप बदल गया। 

जनसंख्या वृद्धि में नाटकीय ढंग से परिवर्तन आए। महामारियों के प्रकोप पर नियन्त्रण किया गया, जन्म दरें घटा दी गई व जनसंख्या की तीव्र वृद्धि के बावजूद, खाद्य उत्पादन व जीवन स्तर लगातार उन्नत होते गए।

9. जनसांखिकीय संक्रमण के सिद्धान्त से क्या सात्पर्य है ? जनसंख्या वृद्धि के विभिन्न चरणों का उल्लेख कीजिए ।

Ans. जनसांख्यिकीय संक्रमण का सिद्धान्त- इसका अर्थ है- जनसंख्या वृद्धि आर्थिक विकास से जुड़ी होती है व प्रत्येक समाज विकास से संबंधित जनसंख्या वृद्धि के एक निश्चित स्वरूप का अनुसरण करता है।

जनसंख्या वृद्धि के कई बुनियादी चरण होते हैं, जैसे समाज में जनसंख्या वृद्धि का कम होना, क्योंकि समाज अल्पविकसित व तकनीकी दृष्टि से पिछड़ा होता है। समाज के उन क्षेत्रों में जहाँ संचार के सायन, नई तकनीके, शिक्षा आदि उपलब्ध नहीं हो पाते, उन क्षेत्रों में जनसंख्या में वृद्धि काफी कम होती है। 

10. अधिकांश जनसांख्यिकीय संकल्पनाओं को किन रूपों में अभिव्यक्त किया जाता है ? इन संकल्पनाओं को वर्णित कीजिए। जन्म व मृत्यु संबंधी आँकड़ों के ब्यौरों की सूचना किन्हें देनी होती है ? 

Ans. अधिकांश जनसांख्यिकीय संकल्पनाओं को दरों या अनुपातों में व्यक्त किया जाता है। इनमें दो संख्याएँ शामिल होती हैं। इन संख्याओं में से एक खास आँकड़ा होता है। इन आँकड़ों की गणना एक विशिष्ट भौगोलिक प्रशासनिक इकाई के लिए की जाती है। 

दूसरी संख्या का प्रयोग मानक के रूप में तुलना के लिए किया जाता है। उदाहरण के लिए, जन्म-दर प्रति 1000 की जनसंख्या के पीछे जीवित उत्पन्न हुए बच्चों की संख्या होती है। इसी प्रकार मृत्यु-दर भी एक ऐसा आँकड़ा है जो किसी क्षेत्र में निर्धारित अवधि के दौरान हुई मृत्यु की संख्या को दर्शाता है।

11. जनसंख्या संवृद्धि दर से क्या तात्पर्य है, ‘प्रतिस्थापन स्तर’ क्या है व उन राज्यों के नाम बताइए जहाँ प्रजनन शक्ति स्तर प्रतिस्थापन दर से नीचा है।

Ans. जनसंख्या संवृद्धि दर-जन्म-दर व मृत्यु-दर के बीच के अंतर को प्राकृतिक वृद्धि दर या जनसंख्या संवृद्धि दर कहते हैं।

प्रतिस्थापन स्तर—जब जन्म-दर व मृत्यु-दर के बीच का अन्तर शून्य समान हो जाता तो यह कह सकते हैं कि जनसंख्या ‘स्थिर’ हो गई है या वह ‘प्रतिस्थापन स्तर पर पहुँच गई है। 

प्रतिस्थापन स्तर वह स्तर है जब जितने बूढ़े व्यक्तियों की मृत्यु होती है तो उनका स्थान लेने के लिए उतने ही नए बच्चे जन्म लेते हैं। कुछ समाजों में प्रजनन शक्ति स्तर प्रतिस्थापन दर से नीचा रहता है।

12. शिशु मृत्यु- दर से क्या तात्पर्य है ? मातृ मृत्यु दर का वर्णन करते हुए बताइए कि शिशु व मातृ मृत्यु की दरें कहीं सर्वाधिक पाई जाती हैं व क्यों ? 

Ans. शिशु मृत्यु-दर-जीवित पैदा हुए 1000 बच्चों में से एक वर्ष की आयु से कम बच्चों की मृत्यु शिशु मृत्यु दर कहलाती है। मातृ मृत्यु-दर उ उन स्त्रियों की संख्या का सूचक है जो जीवित प्रसूति के 1000 मामलों में अपने बच्चों को जन्म देते समय मृत्यु को प्राप्त हो जाती है ।

पिछड़े व गरीब इलाके व तकनीकी रूप से अविकसित क्षेत्रो में शिशु व मातृ मृत्यु दरें ऊँची रहती हैं। इसका प्रमुख कारण है- चिकित्सा सुविधाओं में कमी। इसके अनेक कारण हो सकते हैं जो निम्नलिखित हैं- गर्भ

(i) इन क्षेत्रों में अधिकतर जनसंख्या निरक्षर होती है जिससे उन्हें उचित समय पर, में शिशु की देखभाल व गर्भवती महिला की उचित देखभाल की जानकारी नहीं होती।

(ii) इन इलाकों में जागरूकता व संवृद्धि के स्तरों में भी काफी कमी होती है।

(iii) शिशु व मातृ मृत्यु दर में वृद्धि सबसे प्रमुख कारण इन इलाकों में चिकित्सा सुविधाओं का अभाव है। उच्च प्रशिक्षित डॉक्टर व उच्च तकनीकों कमी कमी से यहाँ मृत्यु दर अधिक है। 

(iv) महिलाओं के बार-बार गर्भ धारण करने से महिलाएँ कई बीमारियों की शिकार बन जाती हैं और जब यह बीमारियाँ घातक रूप ले लेती हैं तो यह माँ व शिशु दोनों की मौत का कारण बन जाती हैं।

13. स्त्री-पुरुष अनुपात का अर्थ स्पष्ट कीजिए । स्त्रियों की संख्या का अनुपात पुरुषों की संख्या के अनुपात से अधिक क्यों रहता है ? उन देशों के नाम बताइए जहाँ स्त्री-पुरुष अनुपात घटता जा रहा है। 

Ans. स्त्री-पुरुष अनुपात – निश्चित अवधि के दौरान प्रति हजार पुरुषों के पीछे स्त्रियों की संख्या पुरुषों की संख्या से अधिक होती है। चाहे मादा बच्चों की तुलना में नर बच्चे अधिक पैदा होते हैं, परन्तु फिर भी स्त्री-पुरुष अनुपात में अन्तर के दो कारण हो सकते हैं-

(i) शैशवावस्था में रोग प्रतिरोधक क्षमता बालिका शिशुओं में बालक शिशुओं की अपेक्षा अधिक होती है जिससे बालक शिशुओं की मृत्यु के कारण बढ़ जाते हैं।

(ii) जीवन चक्र में भी स्त्रियों पुरुषों की अपेक्षा अधिक समय तक जीवित रहती हैं। जिससे उनके अनुपात में अन्तर आ जाता है। यही कारण है बूढ़ी स्त्रियों की संख्या बूढ़े पुरुषों की संख्या से अधिक होती है। यह पाया जाता है कि 1000 पुरुषों के पीछे स्त्रियों की संख्या 1000 के आसपास होती है, परन्तु चीन, दक्षिण कोरिया व भारत जैसे देशों में स्त्री- पुरुष अनुपात कम पाया जाता है।

14. 1921 के उपरान्त मृत्यु दर में गिरावट आने के दो प्रमुख कारण बताइए। ऐसी महामारियों के नाम बताइए जिसके कारण जनसंख्या के एक बड़े भाग को मृत्यु से हाथ धोना पड़ा। 

Ans. 1921 से पहले जन्म दरें व मृत्यु दरें काफी ऊँची थीं, परन्तु 1921 के बाद मृत्यु-दर में अचानक गिरावट आई। इसके दो प्रमुख कारण थे- 

(i) अकाल व भुखमरी, जिसके कारण एक बड़ी मात्रा में लोगों की मृत्यु हो जाती थी, पर नियन्त्रण पा लिया गया। लोगों को उचित मात्रा में भरण-पोषण के साधन उपलब्ध करवाए गए। 

(ii) ज्वर, प्लेग, चेचक व हैजा इत्यादि महामारियों जिनके कारण कई लाखो लोगों की मृत्यु हो जाती थी, पर भी नियंत्रण पा लिया गया। लोगों को उचित चिकित्सा सुविधाएँ प्रदान की गई व इन महामारियों से लड़ने के उचित उपाय भी बताए गए। परन्तु इन सबके कारण भी कई महामारियों ने कई क्षेत्रों, राज्यों में तबाही मचाई।

15. मृत्यु की दरों में वृद्धि का मुख्य कारण अकालों को माना गया है। इन अकालों के बार-बार पड़ने के क्या कारण थे ? 

Ans. अकालों के कारण मृत्यु की दरों में हर वर्ष वृद्धि होना स्वाभाविक था। इन अकाल के बार-बार पड़ने के कई कारण थे जो निम्नलिखित हैं-

(i) वर्षा की कमी के कारण खेती की उपज कम होती थी जिसके कारण खेती पर निर्भर करने वाले परिवारों को थोर गरीबी व कुपोषण की हालत में जीवन व्यतीत करना पड़ता था। अधिक समय तक पीष्टिक भोजन उपलब्ध न होने के कारण अनेक परिवारों को जान तक से हाथ धोना पड़ता था। 

(i) परिवर्तन व संचार के साधनों की उचित व्यवस्था न होने के कारण राज्य की ओर से अकाल पीड़ित क्षेत्रों में पर्याप्त उपाय न किए जा सके जिसके कारण उचित समय पर सुरक्षा सुविधाएँ प्राप्त न हो सकी व मृत्यु दरों में वृद्धि हुई।

16. क्या बढ़ती हुई आयु संरचना भारत को ‘जनसांख्यिकीय लाभांश’ प्रदान कर रही है ? अपने तर्क के पक्ष में उत्तर दीजिए।

Ans. भारत इस समय विश्व भर में सबसे अधिक युवा देशों में से एक है। भारत की जनसांख्यिकी को लाभांश ईसी आयु संरचना से मिल रहा है। वर्ष 2020 तक भारत आयु संरचना में कई देशों से आगे होगा जिससे भारत के पास काफी बड़ा और बढ़ता हुआ श्रमिक बल होगा जो संवृद्धि तथा समृद्धि की दृष्टि से लाभकारी होगा। 

किसी भी देश में अत्यधिक श्रमिकों की संख्या जनसांख्यिकीय लाभांश प्रदान करने में सहायक होती है। जनसांख्यकीय लाभ काम न करने वाले पराश्रित लोग व कमाने वाले लोगों के अनुपात में वृद्धि के फलस्वरूप होता है। कार्यशील युवा वर्ग अपने साथ अपने आयु वर्ग के बाहर वृद्धों व बच्चों का भरण-पोषण करता है।

17. भारत में गिरते हुए स्त्री-पुरुष अनुपात का उल्लेख कीजिए। जनसांख्यिकीविदों और समाजशास्त्रियों ने भारत में स्त्री-पुरुष अनुपात में गिरावट आने के क्या कारण बताए हैं ? 

Ans. स्त्री-पुरुष अनुपात जनसंख्या में लैंगिक या लिंग संतुलन का एक महत्त्वपूर्ण सूचक है। पिछली कुछ शताब्दियों से स्त्री-पुरुष अनुपात स्त्रियों के पक्ष में रहा है। पहले प्रति 1000 पुरुषों के पीछे 1000 से ऊपर महिलाएं थीं, परन्तु पिछली एक शताब्दी से यह अनुपात गिर कर 1000 पुरुषों के पीछे सिर्फ 833 महिलाओं का ही रह गया है। 

स्त्री-पुरुष अनुपात में गिरावट आने का कारण सामाजिक कार्यकर्ताओं, नीति-निर्माताओं ने बाल स्त्री-पुरुष में गिरावट आने को बताया है। पंजाब में बाल स्त्री-पुरुष अनुपात अविश्वसनीय रूप से 793 है। कुछ राज्यों व क्षेत्रों में तो बाल स्त्री-पुरुष अनुपात 1000 पुरुष के पीछे 900 स्त्रियों से भी नीचे है।

उत्तरांचल, राजस्थान, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में सर्वेक्षण के बाद स्त्री-पुरुष अनुपात 925 से भी नीचे पाया गया है। सिक्किम में यह अनुपात 986 से भी अधिक पाया गया है। जनसांख्यिकी-विदों व सामाजशास्त्रियों ने भारत में स्त्री-पुरुष अनुपात में गिरावट आने के कई कारण बताए हैं जो निम्नलिखित हैं-

(i) स्वास्थ्य संबंधी कारकों का पुरुषों की बजाय स्त्रियों को अधिक प्रभावित करना । अत्यधिक भयंकर बीमारियों से स्त्रियों की मृत्य में वृद्धि होना। 

(ii) स्त्रियों का बार-बार गर्भधारण जिससे उनमें कई बीमारियों का उत्पन्न होना। 

(iii) बालिका शिशुओं यानी बच्चियों के प्रति भेदभावपूर्ण व्यवहार। लड़कों को लड़कियों की अपेक्षा अत्यधिक सराहना । इसके अलावा ऐसे अनेक कारण हैं जिसके द्वारा स्त्री-पुरुष अनुपात में कमी आई है। 

18. बाल-स्त्री-पुरुष अनुपात क्या है ? बाल स्त्री-पुरुष अनुपात में गिरावट आने के कारण बताइए। कुछ ऐसे समृद्ध क्षेत्रों के नाम बताइए जो बाल-स्त्री-पुरुष अनुपात में पीछे हैं।

Ans. बाल-स्त्री-पुरुष अनुपात — बाल स्त्री-पुरुष अनुपात प्रति 1000 बाल पुरुषों के पीछे बालिकाओं की संख्या है।

बाल-स्त्री-पुरुष अनुपात में गिरावट आने के कई कारण हैं जिनमें से कुछ निम्नलिखित हैं-

(i) बालिका शिशुओं यानि बच्चियों के प्रति भेदभाव पूर्ण व्यवहार। 

(ii) शैशवावस्था में बच्चियों की देखभाल की घोर उपेक्षा। उनकी इच्छापूर्ति में कमी व उनको लड़कों की अपेक्षा या बेटों की अपेक्षा कम महत्त्व देना जिससे उनकी मृत्यु दरों में अधिकता होना।

(iii) लिंग-विशेष के गर्भपात जिसमें शिशु को भ्रूण में ही मार दिया जाता है। इसका पता अल्ट्रासाउंड नामक तकनीक से लगाया जाता है। गर्भ में शिशु के लिंग का पता लगाकर उसे गर्भ में ही नष्ट कर दिया जाता है।

(iv) बालिका शिशुओं की हत्या व धार्मिक व सांस्कृतिक अंधविश्वासों के कारण शैशवावस्था में ही बच्चियों की हत्या कर देना।

19. किसी एक देश में साक्षरता संपन्नता का महत्त्वपूर्ण साधन है, कैसे ? Or, “साक्षरता एक देश की जरूरत है” टिप्पणी करें।

Ans. साक्षरता शक्ति संपन्न होने का महत्त्वपूर्ण साधन है, यह तर्क बिल्कुल उचित है। अधिक साक्षर जनसंख्या आजीविका के विकल्पों के बारे में अधिक दिल्चस्पी लेती है। साक्षर व्यक्ति आजीविका कमाने के विभिन्न स्रोतों में अपनी जागरूकता बढ़ाएगा। 

शिक्षित होने के लिए साक्षर होना अति आवश्यक है। साक्षर लोग जितने अधिक जागरूक होंगे, उतने ही अधिक ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में भाग ले सकेंगे। 

साक्षरता से स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी आती है व समुदाय के सदस्यों की सांस्कृतिक और आर्थिक कल्याण कार्यों में सहभागिता भी बढ़ती है। भारतीय जनसंख्या का 2/3 भाग साक्षर है, जबकि स्वतंत्रता प्राप्ति से पूर्व यह स्थिति नहीं थी।

20. ग्रामीण-नागरिक विभिन्नताओं के बारे में बताइए। ग्रामीण क्षेत्रों व कस्बों की जनसंख्या का नगरों व शहरों की ओर झुकाव के कारण बताइए ।

Or. “ग्रामीण लोग शहरों की तरफ आकर्षित हो रहे हैं।” आपके विचार से इसके क्या कारण हो सकते हैं ? 

Or, “ग्रामीण क्षेत्र शहरों की ओर खिसकते जा रहे हैं।” क्या आप इस बात से सहमत हैं ? 

Ans. गाँवों व नगरों में रहने वाले लोगों की जनसंख्या में अन्तर व वहां पाई जाने वाली सुख-सुविधाओं में अन्तर ही ग्रामीण-नगरीय विभिन्नताएँ कहलाती है। भारत की जनसंख्या का 72% भाग आज भी गाँवों में ही बसा हुआ है और शेष 28% भाग कस्बों में। 

नगरीय जनसंख्या में पिछली एक शताब्दी में ढाई गुनी वृद्धि हुई है। भारत में कृषि का स्वरूप काफी उच्च है व इसे काफी प्राथमिकता दी जाती है। कृषि भारत के आर्थिक उत्पादन में सबसे अधिक योगदान देती थी, परन्तु अब सकल घरेलू उत्पादन में कृषि का योगदान एक-चौथाई रह गया है। 

इसका कारण ग्रामीण क्षेत्रों का कृषि कार्यों में दिलचस्पी न सेना है। ग्रामीण क्षेत्र अब गाँवों की बजाय नगरों की ओर आकर्षित हो रहे हैं जिससे कृषि का आर्थिक मूल्य घट गया है। इसके कई कारण हैं- 

(i) ग्रामीण लोगों का परिवहन सेवा, व्यवसाय व शिल्प निर्माण जैसे खेती से अलग व्यवसायों को अपनाना। 

(ii) रेडियो, टेलीविजनों द्वारा गाँव के लोगों का शहरों की सुख-सुविधाओं की ओर लालच जिससे उनकी कृषि में दिलचस्पी कम होना। 

(iii) जनसंक्रमण व जनसंचार के कारण ग्रामीण व नगरीय इलाकों की बीच की दूरी का कम होना। 

(iv) गाँवों में तालाबों, वन प्रदेशों जैसे संसाधनों की कमी के कारण। अतः यह तर्क उचित है कि कस्बे व शहर ग्रामीण जनता व क्षेत्रों को चुम्बक की भाँति अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं व ग्रामीण लोग अधिक पन लालच व पर्याप्त काम के लिए नगरों की ओर बढ़ रहे हैं। 

21. भारत की जनसंख्या नीति के बारे में समझाइए। राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम के उद्देश्य बताइए ।

Ans. जनसंख्या की गतिशीलता एक महत्त्वपूर्ण विषय है। किसी देश की जनसंख्या वहाँ की विकास की संभावनाओं को प्रभावित करती है। 

भारत पिछले पचास वर्षों से अधिक समय से एक अधिकारिक जनसंख्या नीति का पालन कर रहा है। भारत ही विश्व में एक ऐसा पहला देश था जिसने 1952 में अपनी जनसंख्या नीति की घोषणा कर दी थी।

किसी देश की जनसंख्या वहाँ की जनता के स्वास्थ्य और कल्याण को निर्धारित करती है। अत्यधिक जनसंख्या वाले देशों में लोगों के स्वास्थ्य के लिए चिकित्सा सुविधाएँ व भोजन इत्यादि उपलब्ध करवाने की गंभीर समस्याएँ बनी रहती हैं, जबकि कम जनसंख्या वाले देशों को इन समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता। हमारी जनसंख्या नीति ने राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम के रूप में एक ठोस रूप धारण किया। इस कार्यक्रम के कुछ उद्देश्य थे जो अभी तक समान है। ये उद्देश्य हैं- 

(i) जनसंख्या संवृद्धि की दर और स्वरूप को प्रभावित करके सामाजिक दृष्टि से वांछनीय दिशा की ओर जाने का प्रयत्न करना।

(ii) जन्म नियन्त्रण के कई उपायों के माध्यमों से जनसंख्या संवृद्धि की दर को कम करना ।। 

(iii) जनसंख्या के स्तरों में सुधार लाना व जनसंख्या तथा स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों के बारे में जानकारी देना। अतः कहा जा सकता है कि भारत ने पिछले 50 वर्षों में अनेक उपलब्धियाँ हासिल की हैं।

22. बंध्याकरण का क्या अर्थ है ? परिवार नियोजन कार्यक्रम पर इसका क्या प्रभाव पड़ा ?

Ans. बंध्याकरण- इसका अर्थ एक ऐसी चिकित्सा पद्धति से है जिसके द्वारा गर्भाधान व शिशुजन्म को रोका जा सकता है। इसके अन्तर्गत पुरुषों में नसबंदी व स्त्रियों में नलबन्दी शल्य चिकित्सा पद्धतियाँ प्रयोग में लाई जाती हैं (1975-76) में ‘परिवार नियोजन कार्यक्रम’ को इस बंध्याकरण पद्धति से काफी गहरा धक्का लगा। 

सरकार ने जोर-जबरदस्ती से बंध्याकरण का कार्यक्रम लागू करके जनसंख्या की संवृद्धि दर को नीचे लाने का प्रयत्न किया गरीब व शक्तिहीन लोगों का जोर-जबरदस्ती बंध्याकरण किया गया।

सरकारी कर्मचारियों व अध्यापकों को भी कहा गया कि वे लोगों को बंध्याकरण के लिए प्रेरित करें व उन्हें शिविरों में लाएँ। जनता ने इस कार्यक्रम का विरोध किया। आपातकाल के बाद निर्वाचित सरकार ने इसे छोड़ दिया व ‘परिवार नियोजन कार्यक्रम’ का नाम बदलकर ‘राष्ट्रीय परिवार कल्याण कार्यक्रम’ रखा गया व बंध्याकरण के दबावी तरीकों को छोड़ दिया गया।


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (LONG ANSWER TYPE QUESTIONS)


1. जनसांख्यिकी से आप क्या समझते ह ? इसके प्रकार व कार्यों का उल्लेख कीजिए। 

Ans. जनसांख्यिकी का अर्थ है- जनसंख्या का सुव्यवस्थित अध्ययन। किसी देश की जनसंख्या के आँकड़े, स्त्री-पुरुष अनुपात इत्यादि कारकों का अध्ययन ही जनसांख्यिकी कहलाती है। इसे जनांकिकी के नाम से भी जाना जाता है। यह शब्द यूनानी भाषा के दो शब्दों से मिलकर बना है। 

जनांकिकी में प्रवृत्तियों व प्रक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है। इसके अंतर्गत किसी देश की जनसंख्या से सम्बन्धित प्रक्रियाओं का अध्ययन होता है। इन प्रक्रियाओं में उन देश में जन्म लेने वाले बच्चों, मृत्यु व जनसंख्या में विभिन्न आयु वर्ग के लोगों का अनुपात इत्यादि आते हैं। 

जनसंख्या की संरचना और गठन, आकार में परिवर्तन आदि अनुपात भी इन प्रक्रियाओं में आते हैं। यह समाज व समाजशास्त्र दोनों की दृष्टि से अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। अर्थात् यह भी कहा जा सकता है कि जनसांख्यिकी देश की जनसंख्या में आए प्रत्येक बदलाव के व्यीरों का अध्ययन करती है। समाजशास्त्र के उद्भव और एक अलग अकादमिक विषय के रूप में इसकी स्थापना का श्रेय बहुत कुछ जनसांख्यिकी को जाता है। जनसांख्यिकी वस्तुतः दो प्रकार की होती है-

(i) आकारिक जनसांख्यिकी, 

(ii) सामाजिक जनसांख्यिकी,

(i) आकारिक जनसांख्यिकी – इसमें जनसंख्या की मात्रा यानि आकार का वर्णन किया जाता है। इसके अन्तर्गत जनसंख्या की अधिकता, उसमें कमी व उसमें आए उचित बदलाव का अनुपात, जनसंख्या की गणना इत्यादि कार्य आते हैं।

(ii) सामाजिक जनसांख्यिकी इसमें आबादियों के सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक पक्षों पर विचार किया जाता है। अतः सभी प्रकार के जनसांख्यिकीय अध्ययन गणना या गिनती की प्रक्रियाओं पर आधारित होते हैं, जैसे कि जनगणना या सर्वेक्षण, जिनके अन्तर्गत एक निर्धारित प्रदेश के भीतर रहने वाले लोगों के बारे में सुव्यवस्थित रीति से आँकड़े इकट्ठे किए जाते हैं।

2. 18वीं शताब्दी में यूरोप में विभिन्न प्रक्रियाएँ घटित हुईं। इसमें स्थापित हुए राज्यों व राष्ट्रों की उपलब्धियों के बारे में बताइए । 18वीं शताब्दी के अन्तिम वर्षों में जनसांख्यिकी आँकड़े इकट्ठे करने के अस्तित्व के बारे में बताइए। इन जनगणनाओं को किन-किन देशों ने शुरू किया ?

Ans. 18वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में, यूरोप में दो विभिन्न प्रक्रियाएँ एक साथ घटित हुई-

(i) राजनीतिक संगठन के रूप में राष्ट्र राज्यों की स्थापना । 

(ii) आँकड़ों से संबंधित आधुनिक विज्ञान सांख्यिकी की शुरुआत। इन प्रक्रियाओं में संगठित राष्ट्र राज्यों ने अपनी उपलब्धियों का विस्तार किया। इन राज्यों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में लोगों के आवश्यक कार्यों का विस्तार किया गया। 

उनमें से कुछ विस्तार व उन राष्ट्र राज्यों द्वारा प्राप्त उपलब्धियों इस प्रकार हैं-

(i) कृषि व उद्योग संबंधी आर्थिक नीतियों में दिलचस्पी लेना व उनका विस्तार करना। 

(ii) शहरों की शासन व्यवस्था में सुधार। 

(iii) जनस्वास्थ्य प्रबंध व लोगों को चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध करवाने के रूपों का विकास।

(iv) पुलिस व कानून व्यवस्था का विकास। राष्ट्र-राज्यों द्वारा इन सब कार्यों का विकास समाज व समाज की जनता के हित के लिए किया गया था। 

4. थॉमस रॉबर्ट माल्थस कौन था ? उनके जनसंख्या वृद्धि के सिद्धान्त के बारे में बताइए । अन्य विचारकों द्वारा इस सिद्धान्त की आलोचना किए जाने के क्या कारण थे। 

Ans. थॉमस रॉबर्ट माल्थस एक अंग्रेज राजनीतिक अर्थशास्त्री थे। कैम्ब्रिज में शिक्षा प्राप्त की व इसाई पादरी बनने का प्रशिक्षण प्राप्त किया। कुछ समय पश्चात् उन्हें लंदन में हैलीबरी में स्थित ईस्ट इंडिया कम्पनी कॉलेज में इतिहास व राजनीतिक अर्थशास्त्र के प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किया गया। 

उनका सिद्धान्त प्रसिद्ध सिद्धान्तों में से एक माना जाता था। उनके अनुसार मनुष्यों की जनसंख्या उस दर की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ती है जिस दर पर मनुष्यों ‘के भरण-पोषण के साधन, यानि भोजन, कपड़ा इत्यादि बढ़ सकते हैं। कृषि उत्पादन की वृद्धि की दर जनसंख्या वृद्धि की दर से नीचे रहने के कारण ही मनुष्य हमेशा गरीबी के हालत में जीता आया है। 

जनसंख्या की वृद्धि की दर भरण-पोषण के संसाधनों के उत्पादन में होने वाली वृद्धि की दर से आगे रहती है। अतः समृद्धि केवल जनसंख्या नियंत्रित करके ही बढ़ाई जा सकती है। माल्थस के विचार से अकालों व बीमारियों के प्रकोप से किसी भी देश की जनसंख्या का स्तर अचानक गिरता है। अतः अकाल व बीमारियाँ खाद्य आपूर्ति व जनसंख्या के बीच उचित अनुपात बनाए रखते हैं।

5. भारत की जनसंख्या का आकार और संवृद्धि का वर्णन कीजिए। विश्व में फैली महामारियों का वर्णन व कारण बताइए ।

Ans.2001 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या 103 करोड़ है। चीन के पश्चात् सर्वाधिक जनसंख्या में भारत का स्थान है। भारत की जनसंख्या संवृद्धि दर हमेशा नीची ही रही है। 1911 से 1921 के बीच संवृद्धि की दर नकारात्मक यानी -0.03% रही। इस संवृद्धि दर के कम होने का कारण इंफ्लुएंजा महामारी का तांडव था, जिसने अपना प्रकोप 1918-19 की चीच दिखाया। 

लगभग 1.25 करोड़ लोगों की मृत्यु इस महामारी से हुई। ब्रिटिश राज से स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद जनसंख्या बढ़ोत्तरी महसूस की गई। 1931 से पूर्व भारत में मृत्यु दरें व जन्म दरें दोनों ही ऊँची रहीं। 1921 के पूर्व मृत्यु दरों में बढ़ोत्तरी होने का कारण महामारियाँ, अकाल इत्यादि थे। 

6. “भारत में अकाल पड़ना एक गम्भीर समस्या है।” क्या आप इस बात से सहमत हैं ?’ अपने तर्क के पक्ष में उत्तर दीजिए। भारत में उन राज्यों के नाम बताइए जिसमें जन्म-दर अधिक है व कम है। इसके क्या-क्या कारण हो सकते हैं ?

Ans. यह बात उचित है कि भारत अकाल जैसी गंभीर समस्या से हमेशा पीड़ित रहा है। अकाल मृत्यु दर में वृद्धि के प्रमुख एवं पुनरावर्त्तक स्रोत थे। 

अकालों के बार-बार पड़ने से भारत की जनसंख्या का काफी बड़ा भाग मौत के मुंह में चला गया था। इन अकालों के प्रमुख कारण परिवहन व संचार साधनों की समुचित व्यवस्था न होना व अकालों के कारण फसल नष्ट हो. जाना इत्यादि थे। 

उन स्थानों पर, जहाँ जनसंख्या का एक बड़ा भाग कृषि पर निर्भर करता था, अकालों के कारण खेती की उपज कम होने से लोग गरीबी व कुपोषण की हालत में जीवन व्यतीत करने पर मजबूर हो जाते थे। 

परन्तु विद्वानों के मतानुसार अकालों का कारण अनाज उत्पादन में गिरावट आना नहीं बल्कि ‘हकदारी की पूर्ति का अभाव’ है। इसके अनुसार अकालों का कारण लोगों के पास भोजन खरीदने के लिए धन का अभाव है।

7. भारत में स्त्री-पुरुष अनुपात के बारे में समझाएँ। स्त्रियों की मृत्यु दरों में वृद्धि होने के कारण बताइए । बालिकाओं का लड़कों की अपेक्षा कम दर्जा क्यों दिया जाता है ? कारण बताइए ।

Ans. भारत में स्त्री-पुरुष अनुपात में हमेशा कुछ अन्तर पाया गया है। स्त्री-पुरुष अनुपात भारत की जनसंख्या में लैंगिक या लिंग संतुलन का एक महत्त्वपूर्ण सूचक है। 

ऐतिहासिक दृष्टि से स्त्री-पुरुष अनुपात स्त्रियों के पक्ष में ही रहा है। प्राचीन समय में स्त्रियों की संख्या पुरुषों की संख्या से अधिक थी। यानि प्रति 1000 पुरुषों के पीछे स्त्रियों की संख्या का ऑकड़ा 1000 से ऊपर ही रहता था। इसका कारण प्राचीन समय में स्त्रियों का सम्मान करना व उन्हें ऊँचा दर्जा देना ही था।

भारत में गिरता स्त्री-पुरुष अनुपात भारत में कुछ समय से कुछ राज्यों में स्त्री-पुरुष अनुपात में कमी आई है। जहाँ स्त्रियों की संख्या 1000 पुरुषों के पीछे 1000 से भी ऊपर थी, वहीं अब इनकी संख्या घटकर 933 हो गई है। अब स्त्री-पुरुष अनुपात में स्त्रियों की संख्या का आँकड़ा इससे भी कम यानी 927 पर आ गया है। 

परन्तु जनसंख्यिकीविदों, नीति-निर्माताओं व सामाजिक कार्यकताओं के अनुसार स्त्री-पुरुष अनुपात में कमी की बजाय बाल-स्त्री-पुरुष अनुपात में अधिक गिरावट आई है। उनके अनुसार कई राज्यों में बाल-स्त्री-पुरुष अनुपात *1000 पुरुषों के पीछे 900 स्त्रियों से भी कम है।

पंजाब, हरियाणा, चण्डीगढ़, दिल्ली, गुजरात, हिमाचल प्रदेश इत्यादि ऐसे राज्य हैं। जहाँ बाल-स्त्री-पुरुष अनुपात में कमी पाई जाती है। 

पंजाब राज्य में बाल-स्त्री-पुरुष अनुपात अविश्वसनीय रूप से काफी कम है। यहाँ बाल स्त्री-पुरुष अनुपात 793 से भी कम है। इन राज्यों में बाल-स्त्री-पुरुष अनुपात में एकाएक गिरावट आई है। इसके विपरीत केरल जैसे राज्यों में जहाँ स्त्री-पुरुष अनुपात 963 के आस-पास है वहीं सिक्किम में यह 986 के आस-पास है जो काफी ऊँचा स्तर है।

8. वर्ष 2010 के लिए राष्ट्रीय सामाजिक जनसांख्यिकी के लक्ष्यों का उल्लेख कीजिए।

Ans. वर्ष 2010 के लिए राष्ट्रीय सामाजिक जनसांख्यिकी के अनेक लक्ष्य हैं जो इस प्रकार हैं-

(i) शिशु मृत्यु-दर को प्रति जीवित शिशु जन्म के पीछे 30 के स्तर से नीचे लाया जाए।

(ii) 14 वर्ष तक की आयु के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा दी जाए व शिक्षा अनिवार्य की

(iii) जन्म, मृत्यु, विवाह और गर्भावस्था के सभी 100 प्रतिशत मामलों का पंजीकरण कराया जाए।

(vii) बुनियादी प्रजननात्मक और बाल स्वास्थ्य सेवाओं, आपूर्ति और आधारभूत सुविधाओं के ढाँचे जो अब तक पूरी न की गई की जरूरतों पर ध्यान दिया जाए।

(iv) मातृ-मृत्यु-दर को 1,00,000 जीवित शिशु जन्म के पीछे 100 के स्तर से नीचे लाया। 

(v) कुल प्रजनन दर के प्रतिस्थापन स्तरों को प्राप्त करने के लिए छोटे परिवार के मानक को बढ़ावा दिया जाए। 

(vi) संचारी रोगों का निवारण और नियंत्रण किया जाए।

(viii) टीके से रोकी जाने वाली सभी बीमारियों के विरुद्ध सभी बच्चों को रोगों से मुक्ति व्यानि प्रतिरक्षा प्रदान की जाए।

(ix) बालिकाओं का विवाह 18 वर्ष या 20 वर्ष की उम्र के बाद करवाया जाए।

(x) एड्स नामक रोग के प्रसार को नियंत्रित किया जाए और प्रजनन अवयवों के संक्रमण और यौन क्रियाओं से संक्रमित रोगों से बचाव के प्रबंध तथा राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन के बीच अधिक समन्वय स्थापित किया जाए। 

9. ग्रामीण – नगरीय विभिन्नताओं के बारे में बताइए। ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों का नगरों की तरफ झुकाव के कारण बताइए ।

Ans. ग्रामीण-नगरी विभिन्नताओं में अन्तर से अभिप्राय वहाँ के लोगों के रहन सहन, बोलचाल, सुख-सुविधाओं इत्यादि से हैं। प्रायः भारत में यह देखा गया है कि इन क्षेत्रों के लोगों के विचारों में भी विभिन्नताएँ पाई जाती हैं। भारत की अधिकांश जनता ग्रामीण क्षेत्रों में ही है। 

वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार भारत की 72% जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में ही वास करती है। परन्तु इसके साथ-साथ अब नगरीय जनसंख्या का हिस्सा बराबर बढ़ता जा रहा है। कृषि आधारित ग्रामीण शैली का आर्थिक और सामाजिक महत्त्व उद्योग आधारित नगरीय जीवन शैली की अपेक्षा घटता जा रहा है। 

हमारी अधिकांश जनता ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और अपनी आजीविका कृषि से ही चलाती है। परन्तु उनके द्वारा किए गए उत्पादन की आर्थिक मूल्य अपेक्षाकृत घटता जा रहा है। 

एक समय में कृषि देश के समग्र आर्थिक उत्पादन में सबसे अधिक योगदान देती थी, परन्तु आज सकल घरेलू उत्पादन में इसका योगदान केवल एक चौथाई रह गया है। 


FAQs


Q. ‘मैट्रोपोलिस” क्या है ? भारत में कुल कितने कस्बे और शहर हैं ?

Ans. बड़े-बड़े शहर जिनमें सुख-सुविधाओं की पूरी व्यवस्था होती है, मैट्रोपोलिस कहलाते हैं। यह महानगर ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ छोटे कस्बों को भी अपनी ओर आकर्षित करते हैं। भारत में कुल मिलाकर 5,162 कस्बे और शहर हैं।

Q. भारतीय जनसंख्या नीति द्वारा चलाए गए कार्यक्रम के बारे में बताइए व इसका उद्देश्य भी बताइए । 

Ans. राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम जनसंख्या नीति द्वारा निर्धारित किए गए हैं।
इसका प्रमुख उद्देश्य जनसंख्या संवृद्धि की दर और स्वरूप को प्रभावित करके सामाजिक दृष्टि से वांछनीय दिशा की ओर ले जाने का प्रयास करना है।

Q. राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम के प्रारम्भ में महत्त्वपूर्ण उद्देश्य क्या थे ? Or, भारतीय जनसंख्या नीति के प्रारंभ में क्या उद्देश्य थे ? Or, भारतीय जनसंख्या नीति के तीन उद्देश्यों को स्पष्ट कीजिए।

Ans. जनसंख्या नीति के तीन प्रमुख उद्देश्य थे-
(i) जन्म नियन्त्रण के विभिन्न उपायों के माध्यमों से जनसंख्या संवृद्धि की दर को धीमा करना, 
(ii) जन स्वास्थ्य में सुधार लाना, 
(iii) जनसंख्या व जन स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों के बारे में लोगों में जागरूकता पैदा करना। 

Q. बंध्याकरण कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य बताइए । Or, बंध्याकरण का अर्थ स्पष्ट कीजिए ।

Ans. बंध्याकरण का अर्थ एक ऐसी चिकित्सा पद्धति से है जिसके द्वारा गर्भाधान और शिशु जन्म को रोका जा सकता है। इसमें पुरुषों के लिए नसबंदी व महिलाओं के लिए नलबंदी जैसी शल्य पद्धतियों को अपनाया जाता है।

NOTES & QUESTIONS ANSWER


  1. Introducing Indian Society
  2. The Demographic Structure of the Indian Society
  3. Social Institutions: Continuity and Change
  4. The Market as a Social Institution
  5. Patterns of Social Inequality and Exclusion
  6. The Challenges of Cultural Diversity
  7. suggestions for projects work
  1. Structural Change
  2. Cultural Change
  3. The Story of Indian Democracy
  4. Change and Development in Rural Society
  5. Change and Development in Industrial Society
  6. Globalisation and Social Change
  7. Mass Media and Communications
  8. Social Movements

MCQS IN ENGLISH


  1. Introducing Indian Society
  2. The Demographic Structure of the Indian Society
  3. Social Institutions: Continuity and Change
  4. The Market as a Social Institution
  5. Patterns of Social Inequality and Exclusion
  6. The Challenges of Cultural Diversity
  1. Structural Change
  2. Cultural Change
  3. The Story of Indian Democracy
  4. Change and Development in Rural Society
  5. Change and Development in Industrial Society
  6. Globalisation and Social Change
  7. Mass Media and Communications
  8. Social Movements

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