VVI Class 12 Sociology Chapter 7 Notes In Hindi परियोजना कार्य के लिए सुझाव

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VVI Class 12 Sociology Chapter 7 Notes In Hindi परियोजना कार्य के लिए सुझाव

Class12th 
Chapter Nameपरियोजना कार्य के लिए सुझाव
Chapter numberChapter 7
Book NCERT
SubjectSociology
Medium Hindi
Study MaterialsNotes & Questions answer
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परियोजना कार्य के लिए सुझाव


सामान्य रूप से किसी भी योजना की कार्य-प्रणाली को प्रोजेक्ट कहा जाता है। जीवन के विभिन्न विषय के अन्तर्गत प्रोजेक्ट के अनुसार कार्य करने से मनुष्य अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल होता है। हम जानते हैं कि व्यक्तियों के समूह को समाज कहा जाता है। 

समाज की सभी क्रियाओं का अध्ययन जिस शास्त्र में किया जाता है उसे समाजशास्त्र कहते हैं। समाजशास्त्र की सभी विषय-वस्तु से संबंधित क्रियाओं को करने के लिए एक परियोजना (प्रोजेक्ट) अवश्य बनाया जाता है। विषय-वस्तु से संबंधित योजना बनायी जाती है। 

इसी योजना को आधार बनाकर कार्य-प्रणाली निर्धारित की जाती है। इसी कार्य प्रणाली के अनुसार योजना को कार्य रूप दिया जाता है। इसी परियोजना के आधार पर विषय-वस्तु से संबंधित उद्देश्यों और लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रयत्न किया जाता है। 

क्रमबद्ध और व्यवस्थित रूप से परियोजना कार्य पूरा करके विषय-वस्तु से संबंधित बातों का विश्लेषण किया जाता है। अन्त में परियोजना के अनुसार कार्य करके विषय-वस्तु के संबंध में सभी निष्कर्ष प्राप्त किए जाते हैं।

समाजशास्त्र के अन्तर्गत परियोजना कार्य के लिए कुछ सुझाव दिए जा सकते हैं। इस संबंध में यह ध्यान रखा जाता है कि सामाजिक क्रियाओं की विषय-वस्तु के लिए परियोजना कार्य निश्चित करने के लिए अनुसंधान और प्रेक्षण कार्य किया जाता है। 

VVI Class 12 Sociology Chapter 7 Notes In Hindi परियोजना कार्य के लिए सुझाव

प्रत्येक अनुसंधान प्रश्न यानि शोष विषय पर कार्य करने के लिए एक उपयुक्त अनुसंधान पद्धति की आवश्यकता होती है। एक प्रश्न का उत्तर अक्सर एक से अधिक पद्धतियों से दिया जा सकता है, लेकिन यह आवश्यक नहीं है कि एक अनुसंधान पद्धति सभी प्रश्नों के लिए उपयुक्त हो। 

दूसरे शब्दों में अधिकांश शोध प्रश्नों के लिए शोधकर्त्ता के पास संभावित पद्धतियों को चुनने की स्वतंत्रता होती है। लेकिन यह चुनाव आमतौर पर सीमित होता है। शोध प्रश्न का सावधानीपूर्वक निर्धारण करने के बाद शोधकर्ता का सबसे पहला काम उपयुक्त शोध प्रणाली का चयन करना होता है। 

यह चयन तकनीकी कलीटियों (यानी प्रश्न और पद्धति के बीच कितनी संगतता है) के अनुसार ही नहीं, बल्कि व्यावहारिकता को भी ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए। व्यावहारिकता में अनेक बातें शामिल हो सकती हैं जैसे- अनुसंधान के लिए उपलब्ध समय की मात्रा, लोगों एवं सामग्री दोनों के रूप में उपलब्ध संसाधन व परिस्थितियाँ जिनमें शोध किया जाना है, इत्यादि ।

सामाजिक अनुसंधान-कार्य और शोध कार्य के लिए विभिन्न प्रणालियों का उपयोग किया जाता है, जैसे-सर्वेक्षण प्रणाली, साक्षात्कार प्रणाली तथा प्रेक्षण प्रणाली। आजकल छोटी-शोध परियोजनाओं के लिए संभावित प्रकरण और विषय के संबंध में विभिन्न बातों का अध्ययन कार्य किया जा सकता है, जैसे- सार्वजनिक परिवहन, संचार माध्यम, घर और परिवार में काम आने वाले घरेलू उपकरण, सार्वजनिक स्थान का उपयोग तथा विभिन्न आयु वर्गों की बदलती हुई आकांक्षाएँ इत्यादि। 

इस प्रकार घरेलू उपयोग में आने वाली विभिन्न वस्तुओं के बारे में परियोजना कार्य बनाने के लिए उनका अध्ययन करना आवश्यक है। लोग टेलीविजन, मोटर साइकिल, कम्प्यूटर, इन्टरनेट, सूचनातंत्र और फर्नीचर इत्यादि का उपयोग करते हैं। कुछ लोग अपने दैनिक जीवन के कार्य को डायरी के रूप में लिखित रूप में रखते हैं। इसी प्रकार कुछ लोग आत्म-कथा की रचना भी करते हैं। सामाजिक जीवन के सभी कार्यों को व्यवस्थित रूप से रखने के लिए परियोजना कार्य बनाना बहुत लाभदायक होता है।

CLASS 12 NCERT SOLUTION IN ENGLISHCLASS12 NCERT SOLUTION IN HINDI
Historyइतिहास
Geography भूगोल
Political science राजनीति विज्ञान
English SubjectResult
Hindi SubjectHistory answer keys

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (VERY SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


1. प्रोजेक्ट की परिभाषा लिखिए ।

Ans. बेलार्ड (Ballard) के अनुसार, “प्रोजेक्ट वास्तविक जीवन का एक भाग है जिसका प्रयोग विद्यालय में किया जाता है।” (A projects is a bit of real life that has been imparted into school)

2. प्रोजेक्ट कार्य से क्या आशय है ?

Ans. शाब्दिक दृष्टि से प्रोजेक्ट कार्य दो शब्दों प्रोजेक्ट + कार्य से मिलकर बना है, प्रोजेक्ट का अर्थ योजना से और कार्य का अभिप्राय कार्यप्रणाली या विधि से है। इस प्रकार प्रोजेक्ट कार्य है ? का अभिप्राय योजना की कार्यप्रणाली से है। 

3. प्रोजेक्ट कार्य का लक्ष्य क्या होता

Ans. प्रोजेक्ट कार्य का लक्ष्य उपयोगितावादी या रचनात्मक होता है। प्रोजेक्ट कार्य से जो ज्ञान प्राप्त किया जाता है वह उपयोगी और व्यावहारिक होता है । संभवतः इसी बात को दृष्टिगत रखते हुए आई. बी. वर्मा ने लिखा है “ज्ञान उपयोगी और व्यावहारिक होना चाहिए।” प्रोजेक्ट कार्य इस उपयोगिता को सुनिश्चित करता है क्योंकि यह बनावटी नहीं होता वरनु स्वाभाविक परस्थितियों के अन्तर्गत क्रियान्वित किया जाता है। यह अच्छे परिणाम देता है इसमें बर्बादी कम से कम होती है। यह बालकों को पूर्ण संतुष्टि व उपयोगी परीक्षण देता है।

4. प्रोजेक्ट कार्य के आयोजन के तीन चरण लिखिए। 

Ans. 

(i) समस्या का चुनाव।

(ii) प्रोजेक्ट बनाने वाले की रुचि का विषय चुनना । (iii) विषय का साधन सीमा के अंतर्गत होना।

(iv) समस्या की उपयोगिता के बारे में निश्चित होना। 

5. प्रोजेक्ट कार्य कब सफल हो सकता है ?

Ans. किसी प्रोजेक्ट कार्य की योजना, संगठन तथा संचालन किसी व्यापार को चलाने के ‘समान है, जिसमें तकनीकी ज्ञान एवं कार्यकुशलता की आवश्यकता होती है।

6. प्रोजेक्ट कार्य के गुण लिखिए । 

Ans 

(1) वैज्ञानिक संतुष्ट

(ii) आत्मविश्वास का अवसर । 

(iii) विकास का समान अवसर । 

(iv) व्यावहारिकता।

(v) सामाजिक भावना का विकास।

7. नियोजन किसे कहते हैं ?

Ans. नियोजन किसी निश्चित लक्ष्य की प्राप्ति के लिए साधनों की वह व्यवस्था है, जिसके आधार पर एक निश्चित अवधि में समाज द्वारा मान्यता प्राप्त लक्ष्यों की प्राप्ति की जा सके। 


लघु उत्तरीय प्रश्न (SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS)


1. प्रोजेक्ट कार्य की आवश्यकता क्यों पड़ती है ? 

Ans. प्रयोजनवादी विचारधारा के समर्थक श्री किलपैट्रिक (W.H. Kilpatrik) को प्रोजेक्ट विधि या प्रोजेक्ट कार्य का जन्मदाता माना जाता है। उन्होंने प्रोजेक्ट कार्य की आवश्यकता को प्रकट करते हुए लिखा है, “आधुनिक समय में विद्यालय और समाज तीव्र एवं विस्तृत तौर पर एक-दूसरे से पृथक हो गए हैं। 

विचार तथा कार्य दो क्षेत्रों में स्थान, समय और भेद में असंबंधित हो गए हैं। विद्यालय में जो कुछ अध्ययन किया जाता है और संसार में जो कुछ हो रहा है, इन दोनों में बहुत ही कम संबंध पाया जाता है। 

विद्यालय में बालकों को प्रौढ़ों के साथ सामाजिक क्रियाओं में भाग लेने का कोई अवसर प्राप्त नहीं हो पाता है, इसलिए हम चाहते हैं कि शिक्षा वास्तविक जीवन की गहराई में प्रवेश करे, केवल सामाजिक जीवन में ही नहीं, वरन् उस उत्तम जीवन की जिसकी हम आकांक्षा करते हैं।” 

इसका आशय है कि स्कूलों में छात्र/छात्राओं को घिसे-पिटे तरीके से ज्ञान नहीं दिया जाना चाहिए वरन् उन्हें रुचियों, प्रवृत्तियों एवं आवश्यकताओं के अनुसार योजना कार्य (Project Work) में लगा कर ज्ञान देना चाहिए ताकि शिक्षा में सामाजिक दृष्टिकोण की उपेक्षा न हो सके।



2. प्रोजेक्ट की परिभाषा लिखिए । 

Ans. प्रोजेक्ट का अर्थ एवं परिभाषा (Meaning and definition of project) : (i) स्टीवेन्सन (Prof. Stevenson): “प्रोजेक्ट एक समस्यामूलक कार्य है जो अपनी स्वाभाविक परिस्थितियों में पूर्णता को प्राप्त करता है।” (A project is a problematic act

carried to completion in its natural setting.) 

(ii) किलपैट्रिक (Kilpatrick) : “प्रोजेक्ट वह सहृदय उद्देश्यपूर्ण कार्य है जो पूर्ण संलग्नता से सामाजिक वातावरण में किया जाता है।” (A project is whole-hearted purposeful activity proceeding in a social environment.)

(iii) बेलार्ड (Ballard) : “प्रोजेक्ट वास्तविक जीवन का एक भाग है जिसका प्रयोग विद्यालय में किया जाता है।” (A project is a bit of real life that has been imparted into school.) उपर्युक्त परिभाषाओं से स्पष्ट है कि प्रोजेक्ट या योजना वास्तविक सामाजिक परिवेश में ज्ञान व नवीन अनुभव प्राप्त करने का एक समस्यामूलक कार्य है। इसका मूल उद्देश्य व्यावहारिक स्तर पर ज्ञान प्राप्त करना है।

3. प्रोजेक्ट कार्य हेतु तथ्यों का संकलन किस प्रकार करते हैं ? 

Ans. तथ्यों का संकलन (Collection of Data): तथ्यों का संकलन प्रोजेक्ट कार्य अथवा सर्वेक्षण में मुख्य कार्य है। सर्वेक्षणकर्ताओं को तथ्यों का संकलन सावधानी, लगन, तत्परता, सत्यनिष्ठा और परिश्रम से करना होता है। तथ्यों के संकलन को भी विभिन्न भागों में बाँटा जा सकता है-

(i) सूचनादाताओं से संपर्क स्थापित करना (To create rapport with the inform- ants) : सूचनादाताओं से सीधे जाकर पूछताछ नहीं की जा सकती, क्योंकि सूचनादाताओं में सर्वप्रथम सर्वेक्षण के प्रति स्पष्ट विचार एवं आस्था का निर्माण करना आवश्यक है। सूचनादाताओं की हिचक निकालने के लिए यह स्थिति लाभदायक है। अंग्रेजी में इस स्थिति को “Rapport” कहा जाता है। 

(ii) तथ्य या सूचना संकलित करना (To collect information) : इस स्तर पर सर्वेक्षणकर्ता अध्ययन यंत्रों की सहायता से सूचनादाताओं से तथ्य सूचना संकलित करता है।

सर्वेक्षणकर्ता को सूचनादाताओं से प्राथमिक तथ्यों को संकलित करने के अतिरिक्त संबंधित करना 

(iii) क्षेत्र कार्यकर्ताओं की निगरानी (Supervision over the field workers) : चाहिए। समय-समय पर सूचना संकलित करने वाले प्रगणकों या सर्वेक्षणकर्ताओं (Investigators) क उच्च अधिकारियों द्वारा देख-रेख होती रहनी चाहिए, जिससे क्षेत्र कार्यकर्ता भावनात्मक एवं अन्य प्रभावों से बचे रहें। यथार्थ सूचनाओं के संकलन में यह कदम महत्वपूर्ण है। प्रकाशित रिकार्ड, पुस्तक, पत्र, डायरी आदि के माध्यम से द्वितीयक तथ्यों को भी संकलित क

4. प्रोजेक्ट कार्य के गुण-दोष लिखिए। 

Ans. प्रोजेक्ट कार्य के गुण (Merits of Project Work) : 

(i) मनोवैज्ञानिक संतुष्टि प्राप्त होती है बालकों को मनोवैज्ञानिक संतुष्टि प्राप्त होती है क्योंकि इसके द्वारा ज्ञान की प्राप्ति आतंक द्वारा न होकर उनकी स्वाभाविक प्रवृत्तियों के अनुसार होती है। 

(ii) आत्म-विकास का अवसर प्राप्त होता है : इसमें बच्चे स्वयं क्रियाशील होते हैं, स्वयं सोचते -विचारते हैं और आवश्यकतानुसार अध्यापकों या निर्देशकों से निर्देश लेते हैं। इस प्रकार यह कार्य बच्चों को आत्मनिर्भर बनाता है और उनमें आत्म-विश्वास जागृत करता है।

(iii) विकास का समान अवसर प्राप्त होता है: प्राजेक्ट कार्य तीव्र, साधारण एवं मद बुद्धि सभी बालकों को विकास के समान अवसर प्रदान करता है।

(iv) सामाजिक भावना का विकास : प्रोजेक्ट कार्य सहयोग पर आधारित होता है, परिणामस्वरूप बच्चों में सामाजिक भावना का विकास होता रहता है। 

(v) चरित्र का विकास : यह कार्य बालकों को दुख-दर्द में एक-दूसरे के अधिक करीब ले आता है, परिणामस्वरूप धीरे-धीरे बालकों में ‘सत्यं शिवम् सुन्दरम्’ की भावना की अनुभूति होने लगती है। वस्तुतः यह भी मानवमात्रा के कल्याण का लक्ष्य है और चरित्र के विकास की उच्चतम स्थिति है।

प्रोजेक्ट कार्य के दोष (Demerits of Project work) : (i) अधिक धन की आवश्यकता, 

(ii) उचित प्रोजेक्ट को ढूँढने में असुविधा, 

(iii) पठन-विधि का अव्यवस्थित होना, 

(iv) सभी प्रकार की ज्ञान-प्राप्ति का अभाव, 

(v) क्रमबद्ध अध्ययन का अभाव, 

(vi) विद्यालय में विद्यमान वातावरण से अनुकूल करने में कठिनाई । 


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (LONG ANSWER TYPE QUESTIONS)


1. प्रोजेक्ट कार्य से क्या आशय है ? प्रोजेक्ट कार्य के आयोजन के चरण लिखिए।

Ans. प्रोजेक्ट कार्य / योजना कार्य का अर्थ (Meaning of project work) : शाब्दिक दृष्टि से प्रोजेक्ट कार्य दो शब्दों प्रोजेक्ट+कार्य से मिलकर बना है। प्रोजेक्ट का अर्थ योजना से और कार्य का आशय कार्यप्रणाली या विधि से इस प्रकार प्रोजेक्ट कार्य का अभिप्राय योजना की कार्यप्रणाली से है। वास्तव में प्रोजेक्ट कार्य की धारणा केवल शाब्दिक अर्थ से स्पष्ट नहीं हो सकती।

समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से प्रोजेक्ट कार्य की धारणा पर्याप्त और व्यापक है। प्रोजेक्ट कार्य में किसी वास्तविक सामाजिक समस्या के बारे में क्षेत्र में जाकर वैज्ञानिक पद्धति के विभिन्न स्तरों का पालन करते हुए तथ्यों को एकत्रित करना होता है, तथ्यों को एकत्रित करने में क्रमबद्ध रूप से निरीक्षण, वर्गीकरण, परीक्षण, तुलना, निष्कर्षीकरण आदि के कठिन स्तरों से गुजरना होता है। 

सामान्य रूप से प्रोजेक्ट कार्य के लिए सामाजिक सर्वेक्षण विधि का अनुसरण किया जाता है। सामाजिक सर्वेक्षण (Social Survey) सामाजिक विज्ञानों की एक महत्त्वपूर्ण अध्ययन पद्धति है। यह सामाजिक समस्याओं के अध्ययन व समाधान का एक वैज्ञानिक साधन है।

प्रोजेक्ट कार्य / सामाजिक सर्वेक्षण का आयोजन व संचालन (Planning and Execu tion of Project) : प्रोजेक्ट कार्य अथवा सामाजिक सर्वेक्षण के आयोजन व संचालन की संपूर्ण प्रक्रिया में अनेक स्तरों से गुजरना होता है : 

(A) प्रोजेक्ट कार्य/सामाजिक सर्वेक्षण का आयोजन, (B) तथ्यों / सामग्री का संकलन, 

(C) तथ्यों का विश्लेषण व निर्वाचन, 

(D) तथ्यों का प्रदर्शन ।

सर्वेक्षण अथवा प्रोजेक्ट कार्य का आयोजन (Planning the survey) : प्रोजेक्ट कार्य या सर्वेक्षण के आयोजन को निम्नलिखित चरणों में विभाजित किया जा सकता है: 

(a) समस्या का चयन (Selection of the Problem): किसी भी सर्वेक्षण के आयोजन में समस्या का चयन या चुनाव करते समय निम्न बातों पर ध्यान दिया जाना चाहिए:

(i) सर्वेक्षणकर्ता की रुचि का विषय चयनित किया जाए, जिससे वह अधिक लगन व परिश्रम से कार्य कर सके। 

(ii) सर्वेक्षण के संबंध में थोड़ा-बहुत पूर्व ज्ञान वाला विषय सर्वेक्षण को निश्चित ढंग से रूप से आयोजित करने में सहायक प्रमाणित होता है।

(iii) विषय का साधन सीमा के अंतर्गत होना भी आवश्यक है जिससे यथार्थ सर्वेक्षण संभव हो सके।

(iv) विषय या समस्या का चयन करते हुए उसकी उपयोगिता के विषय में भी निश्चित

होना आवश्यक है ताकि वांछित सामाजिक उद्देश्य की पूर्ति हो सके। 

(b) उद्देश्य निश्चित करना ( Determination of Purpose or Object) : आयोजन

में दूसरा चरण उद्देश्य का निर्धारण है। उद्देश्य का निर्धारण हो जाने पर सर्वेक्षण की प्ररचना (Design of Survey) बनाने में सरलता रहती है। वास्तव में उद्देश्य के निश्चित हो जाने पर अध्ययन- उपकरणों, पद्धतियों आदि के विषय में सफलतापूर्वक निर्णय लिया जा सकता है।

(c) सर्वेक्षण का संगठन (Organisation of Survey): समस्या और उद्देश्य के निर्धारण के पश्चात् यह भी आवश्यक है कि सर्वेक्षण योजना के लिए एक उचित संगठन हो। इस दृष्टि से प्रायः एक सर्वेक्षण समिति का आयोजन किया जाता है। इस समिति में सर्वेक्षण निर्देशक (Survey Director), प्रमुख सर्वेक्षक (Chief Investigator) आदि प्रतिनिधि होते हैं। वास्तव में, इस संगठन का उद्देश्य क्षेत्र कार्य में सुगमता, एकरूपता एवं सामाजिक सुधारों से संबंधित क्रियाओं को अधिक संभव बनाना है।

2.प्रोजेक्ट कार्य में तथ्यों का विश्लेषण, निर्वाचन एवं प्रदर्शन की विधि लिखिए।

Ans. तथ्यों का विश्लेषण एवं निबंधन (Analysis and Interpretation of Data) : तिच्या या सामग्री के विश्लेषण व निर्वचन के निम्नलिखित चरण हैं : (a) तथ्यों की सार्थकता की जाँच (Weighting the Data) : इनमें कुछ कसौटियों के

आधार पर तथ्यों की सार्थकता की जाँच की जाती है। (b) तथ्यों का संपादन (Editing of Data) : संपादन कार्य के अंतर्गत निम्नलिखित कार्यों का समावेश रहता है :

(i) तथ्यों को व्यवस्थित रूप में सजाना जिससे यह पता चल सके कि किन स्रोतों से अभी सूचना प्राप्त करनी शेष है।

(ii) उत्तरों की जाँच करना : इसमें उत्तर भरने एवं अन्य भूलों का पता लगाया जाता है। 

(iii) अनावश्यक तथ्यों को हटाने का कार्य : इसके द्वारा अवांछित तथ्यों को हटा दिया यता है। ” 

(iv) कोड नम्बर का डालना (Codification) : समय की बचत करने के लिए एक जैसे तथ्यों को किसी संख्या द्वारा व्यक्त कर दिया जाता है, ताकि वर्गीकरण में सुविधा हो।

(c) तथ्यों का वर्गीकरण व सारणीयन (Classification and Tabulation of Data): 

संपादन कार्य के पश्चात् तथ्यों को समानताओं व विभिन्नताओं के आधार पर विभिन्न वर्गों या समूहों में बाँट दिया जाता है और इस प्रकार संपूर्ण संकलित सामग्री को संक्षिप्त रूप प्रदान कर दिया जाता है। इस वर्गीकृत सामग्री को अधिक समझने योग्य बनाने के लिए सारणीयन (Tabulation) किया जाता है।

वास्तव में, संख्यात्मक तालिकाओं (Tables) के रूप में संक्षिप्त करना ही सारणीयन है।

(d) तथ्यों का विश्लेषण व सामान्यीकरण (Analysis and Generalisation of Data) : विभिन्न तथ्यों की तुलना और उनमें पाये जाने वाले परस्पर संबंधों के आधार पर कुछ सामान्य निष्कर्षो को निकाला जाता है। सामान्य निष्कर्षो को निकालना ही सामान्यीकरण कहलाता है।

तथ्यों का प्रदर्शन (Presentation of Data) : तथ्यों के प्रदर्शन को भी दो भागों में विभाजित किया जा सकता है : (af तथ्यों का चित्रमय प्रदर्शन (Diagrammatic Representation of Data) तथ्यों को बोधगम्य व सुगम रूप से प्रकट करने के लिए तथ्यों को चित्रों द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। वास्तव में चित्रमय प्रदर्शन थोड़े ही समय में प्रमुख बातों को दर्शाने की एक कला है। 

(b) रिपोर्ट का निर्माण व प्रकाशन (Preparation and Publication of Report) : सर्वेक्षण की संपूर्ण प्रक्रिया में रिपोर्ट का निर्माण करना और उसे प्रकाशित करना अंतिम चरण है। रिपोर्ट को तैयार करते समय निम्नलिखित बातों को ध्यान रखा जाना चाहिए:

(i) भाषा व विचारों की सरलता, 

(ii) तार्किक क्रम में तथ्यों का प्रस्तुतीकरण, 

(iii) तथ्यों की पुनरावृत्ति न हो, 

(iv) तकनीकी शब्दों की स्पष्ट व सरल परिभाषाएँ, 

(v) आवश्यक शीर्षकों द उपशीर्षकों का प्रयोग, 

(vi) पाद-टिप्पणियाँ, 

(vii) तालिकाएँ, चित्र आदि संबंधित सामग्री के पास होनी चाहिए। निर्माण के पश्चात रिपोर्ट को प्रकाशित कर दिया जाता है।


FAQs


Q. प्रोजेक्ट कार्य के दो गुण बताएँ ।

Ans. (i) मनोवैज्ञानिक संतुष्टि तथा  (ii) सामाजिक भावना का विकास।

Q. प्रोजेक्ट कार्य के विभिन्न चरणों के नाम बताएँ । 

Ans. 
(i) प्रोजेक्ट कार्य / सर्वेक्षण का आयोजन।
(ii) तथ्यों / सामग्री का संकलन । 
(iii) तथ्यों का विश्लेषण तथा वर्गीकरण ।

NOTES & QUESTIONS ANSWER


  1. Introducing Indian Society
  2. The Demographic Structure of the Indian Society
  3. Social Institutions: Continuity and Change
  4. The Market as a Social Institution
  5. Patterns of Social Inequality and Exclusion
  6. The Challenges of Cultural Diversity
  7. suggestions for projects work
  1. Structural Change
  2. Cultural Change
  3. The Story of Indian Democracy
  4. Change and Development in Rural Society
  5. Change and Development in Industrial Society
  6. Globalisation and Social Change
  7. Mass Media and Communications
  8. Social Movements

MCQS IN ENGLISH


  1. Introducing Indian Society
  2. The Demographic Structure of the Indian Society
  3. Social Institutions: Continuity and Change
  4. The Market as a Social Institution
  5. Patterns of Social Inequality and Exclusion
  6. The Challenges of Cultural Diversity
  1. Structural Change
  2. Cultural Change
  3. The Story of Indian Democracy
  4. Change and Development in Rural Society
  5. Change and Development in Industrial Society
  6. Globalisation and Social Change
  7. Mass Media and Communications
  8. Social Movements

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